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‘ट्रैफिक जाम से होती है समस्या, गंदगी का ढेर अलग’: ‘रमजान फ़ूड मेला’ के खिलाफ बेंगलुरु के लोगों का नगरपालिका को पत्र, लिखा – बदबू, धुआँ और शोर से मिले निजात

बेंगलुरु में फ्रेजर टाउन के निवासियों ने बृहत बेंगलुरु महानगर पालिका (बीबीएमपी) को पत्र लिखकर हर साल रमजान के महीने में लगने वाले ‘रमजान फूड मेला’ को तुरंत बंद करने को कहा है। बेंगलुरु सेंट्रल एमपी पीसी मोहन ने रविवार (15 अप्रैल, 2023) को इस संबंध में ट्वीट किया, ‘फ्रेजर टाउन रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन (FTRWA)’ ने बीबीएमपी और पुलिस को एक पत्र लिखा है। इसमें बेंगलुरु की मस्जिद रोड पर ‘रमजान फूड मेला’ को बंद करने का अनुरोध किया गया है।

FTRWA ने रमजान के दौरान लगने वाले ट्रैफिक जाम और कूड़े के ढेर पर चिंता व्यक्त की है।”

दरअसल, रमजान के दौरान फ्रेजर टाउन में मस्जिद रोड पर हर शाम को कबाब और बिरयानी बेचने के लिए स्टॉल लगाए जाते हैं। स्थानीय लोग इसकी वजह से लगने वाले ट्रैफिक जाम और कचरे के ढेर से बेहद परेशान हैं। बीबीएमपी को लिखे अपने पत्र में उन्होंने बताया, “रमजान फूड मेला का कोई धार्मिक महत्व नहीं है। कोई भी निवासी और मस्जिद से जुड़ा शख्स इस तरह स्टॉल लगाए जाने के पक्ष में नहीं है।”

उन्होंने आगे कहा, “हम इन स्टॉल को लगाए जाने के पक्ष में नहीं है और न ही यहाँ से कुछ भी खरीदते हैं। इसके बावजूद यहाँ के लोग, दुकान के मालिक और रमजान के दौरान इबादत करने वाले लोग बहुत परेशान हैं। हमारी गली में दुकानें बाहर से आए लोगों द्वारा खोली गई हैं और यहाँ बाहर के लोग खाने के लिए आते हैं। इससे हमारे इलाके की शांति भंग हो गई है। आपसे अनुरोध है कि आप ‘रमजान फूड मेला’ पर तत्काल रोक लगाएँ।”

द हिंदू (The Hindu) से बात करते हुए सऊद दस्तगीर (Saud Dastagir) नाम के एक स्थानीय निवासी ने कहा कि इन स्टॉल के लगने से बहुत शोर होता है और पूरे इलाके में यहाँ-वहाँ वाहन खड़े करने के कारण ट्रैफिक जाम लग जाता है। सड़क पर खाना बनाने के कारण बदबू आती है और खाना पकाने के दौरान निकलने वाले धुएँ ने हवा को प्रदूषित कर दिया है।

दावा- महिला के चेहरे पर बना था तिरंगा, सेवादार ने स्वर्ण मंदिर में घुसने से रोका: SGPC ने कहा- वह राष्ट्रीय ध्वज नहीं था

पंजाब के अमृतसर में स्वर्ण मंदिर (Golden Temple) में एक युवती के साथ बदसलूकी का वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो 17 अप्रैल 2023 का है। इसमें एक पुरुष और युवती को एक सिख व्यक्ति से भिड़ते हुए देखा जा सकता है। जब उस पुरुष ने सिख व्यक्ति से पूछा कि उसने गुड़िया को स्वर्ण मंदिर में प्रवेश करने से क्यों रोका तो वो बोला, “उसके चेहरे पर एक झंडा है।” जब लड़की ने कहा कि यह भारतीय झंडा है, तो सिख व्यक्ति ने कहा, “ये इंडिया नहीं पंजाब है।”

इस वीडियो की सोशल मीडिया पर काफी आलोचना होने के बाद शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) ने माफ़ी माँगी है। उन्होंने कहा कि बड़ी शर्म की बात है कि लोग ट्वीट कर रहे हैं। यहाँ देश-विदेश से जितने भी श्रदालु आते हैं, हम उनका आदर करते हैं। सिखों ने देश की आजादी में भी अहम भूमिका निभाई, लेकिन हर बार सिखों को ही निशाना बनाया जाता है।

समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, SGPC महासचिव गुरचरण सिंह ग्रेवाल ने कहा, “ये एक सिख तीर्थस्थल है। हर धार्मिक स्थल की अपनी मर्यादा होती है। हम सभी का स्वागत करते हैं। अगर किसी ने दुर्व्यवहार किया है, तो हम इसके लिए माफी माँगते हैं।” उन्होंने आगे कहा, “इस लड़की के चेहरे पर बना झंडा, राष्ट्रीय ध्वज नहीं था। इस झंडे में अशोक चक्र नहीं बना हुआ था, बल्कि यह किसी राजनीतिक पार्टी का झंडा हो सकता है।”

वायरल वीडियो पर एक यूजर ने लिखा, “एक नहीं कई खालिस्तानी छुपे बैठे हैं यहाँ…।”

विनीत कुमार सिंह ने शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के महासचिव गुरचरण सिंह ग्रेवाल के बयान पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए लिखा, “यह झूठ बोल रहा है। सेवादार ने कहा था कि पंजाब भारत का हिस्सा नहीं है। इस पर क्या कहना है इस आदमी का? कुछ ही दिन हुए हैं, जब अफगानिस्तान में इन पर जुल्म हो रहा था, तब इन्हें भारत याद आ रहा था। अच्छी बात है कि सिखों में इन जैसे मूर्ख कम ही हैं।”

उन्होंने इसके बाद एक और ट्वीट किया कि खालिस्तानी झंडे, जिन पर भिंडरावाले की तस्वीर लगी हुई है, उन्हें अंदर ले जाने की इजाजत है, लेकिन चेहरे पर तिरंगे का टैटू बनाने वालों को अंदर नहीं जाने दिया जाएगा। किसको बेवकूफ बना रहा है यह आदमी? असल बात है कि इनकी जहनियत सड़ चुकी है। इन सबके दिमाग में भूसा भर गया है।

आलोक प्रधान ने इस वीडियो पर सवाल उठाते हुए कहा, “2021 में स्वर्ण मंदिर परिसर के अंदर खालिस्तानी झंडे का स्वागत किया गया, क्यों? स्वर्ण मंदिर प्रशासन को स्पष्ट करना होगा कि आप लोग भारतीय हैं या खालिस्तानी?”

अभिनव खरे नाम के यूजर लिखते हैं कि ये लोग हमारी राष्ट्रीय अखंडता के लिए खतरा हैं। इनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की जरूरत है।

‘फिट है अतीक अहमद का बेटा अली, अस्पताल में नहीं’: जेल प्रशासन, रिपोर्ट में दावा – बैरक में चीखता-चिल्लाता रहा, अब्बा-चाचा की मौत की खबर सुन छोड़ा खाना-पीना

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में नैनी जेल में बंद अतीक अहमद के बेटे अली अहमद द्वारा खुद को चोट पहुँचाने की खबरें कुछ मीडिया संस्थानों ने चलाई। मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से बताया जा रहा है कि अली ने खुद का सिर दीवाल में पटक-पटक कर घायल किया है जिसे जेल स्थित अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। घटना 17 अप्रैल, 2023 (सोमवार) की है। भाई असद, अब्बा अतीक और चाचा अशरफ के मारे जाने के बाद वो लगातार रोए जा रहा था। हालाँकि, जेल प्रशासन ने इन खबरों को निराधार बताया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अली को नैनी जेल स्थित अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। डॉक्टरों की टीम द्वारा उसका इलाज करवाया जा रहा है। अली की हालत सामान्य बताई जा रही है। बताया जा रहा है कि अली ने 2 बार खुद का सिर दीवाल पर पटका है। बीच में जेल सुरक्षाकर्मियों द्वारा पहुँच कर अली को पकड़ा गया और उसे अस्पताल में भर्ती करवाया गया।

बताया यह भी जा रहा है कि लगातार 36 घंटे जागने के बाद अली को जेल प्रशासन ने कुछ दवाएँ दी थीं, जिस से उसे नींद आ गई। हालाँकि, जागने के बाद अली फिर से अपनी बैरक में चीखता-चिल्लाता रहा। हालाँकि जेल प्रशसन ने इन खबरों को निराधार बताया है। उत्तर प्रदेश के DG जेल ने अली अहमद को पूरी तरह से स्वस्थ बताते हुए मीडिया में चल रही खबरों का खंडन किया है।

अली अहमद अतीक का दूसरे नंबर का बेटा है। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि अपने अब्बा और चाचा की मौत की खबर सुन कर अली डिप्रेशन में है। उसने खाना-पीना छोड़ दिया है और उसको नींद नहीं आ रही है। अली ने जेल में रोजा रखा था। 5 करोड़ रुपए की रंगदारी माँगने के मामले में अली को जुलाई 2022 में गिरफ्तार किया गया था।

अतीक अहमद का एक अन्य बेटा उमर अहमद लखनऊ की जेल में बंद है। कहा जा रहा है कि अब्बा और चाचा की मौत की खबर सुन कर वह जेल के एक कोने में अक्सर गुमसुम हो कर लेटा रहता है। गौरतलब है कि 15 अप्रैल 2023 को अतीक और अशरफ की प्रयागराज में मेडिकल कॉलेज के पास गोली मार कर हत्या कर दी गई थी।

ज़ाकिर नाइक का फॉलोवर निकला ट्रेन में आग लगाने वाला शाहरुख़, देखते रहता था भड़काऊ वीडियो: पुलिस ने बताया – वो बेहद कट्टर, UAPA के तहत होगी कार्रवाई

केरल के कोझिकोड में हुए ट्रेन अग्नि कांड के आरोपित को लेकर पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। पुलिस ने कहा है कि आरोपित शाहरुख सैफी बेहद कट्टरपंथी है। यही नहीं, वह इस्लामी कट्टरपंथी जाकिर नाइक का फॉलोअर भी है। पुलिस ने उसके खिलाफ UAPA के तहत मामला दर्ज किया।

दरअसल, कोझिकोड ट्रेन अग्निकांड मामले की जाँच के लिए स्पेशल टीम गठित की गई है। इस टीम के प्रमुख और एडीजीपी एमआर अजीत कुमार ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा है कि जाँच में यह साफतौर पर सामने आया है कि शाहरुख ने ही ट्रेन में आग लगाई थी। इसलिए उसके खिलाफ ‘गैर कानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (UAPA)’ की धारा 16 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

उन्होंने आगे कहा है कि शाहरुख सैफी एक कट्टरपंथी व्यक्ति है। वह जाकिर नाइक और इसरा अहमद जैसे कट्टरपंथियों के वीडियो देखता था। उसने अपराध करने की ठान ली थी। इसके लिए ही वह केरल गया था। आगजनी को अंजाम देने के लिए शाहरुख ने पूरी तरह से प्लानिंग की थी। फिलहाल पुलिस इस बात की भी जाँच कर रही है कि ट्रेन में आगजनी करने के लिए उसने किसी स्थानीय व्यक्ति की सहायता ली थी या नहीं।

एडीजीपी कुमार ने आगे कहा है कि शाहरुख सैफी दिल्ली से केरल आया था। इसके अलावा वह महाराष्ट्र के रत्नागिरी भी गया था। इस बारे में पुलिस पूरी जानकारी इकट्ठा करने में जुटी हुई है। शाहरुख के चरमपंथी संगठनों से संबंध को लेकर भी जाँच की जा रही है।

बता दें कि इससे पहले पुलिस ने शाहरुख सैफी के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया था। इसके अलावा उसके खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 326A, 436, 438 तथा भारतीय रेलवे अधिनियम की धारा 151 के तहत मामला दर्ज किया था। लेकिन, अब यूएपीए के तहत मामला दर्ज होने के बाद कहा जा रहा है कि उसे आजीवन कारावास तक की सज़ा हो सकती है।

क्या है मामला

रविवार (2 अप्रैल 2023) की रात करीब 9 बजकर 45 मिनट पर अलप्पुझा-कन्नूर एग्जीक्यूटिव एक्सप्रेस ट्रेन कोझिकोड शहर को क्रॉस कर कोरापुझा रेलवे पुल पर पहुँची थी। इसी दौरान दो लोगों के बीच ट्रेन में चढ़ने को लेकर विवाद हो गया। तभी आरोपित शाहरुख सैफी ने अन्य यात्रियों पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी। इसके चलते यात्रियों ने चेन पुलिंग करते हुए ट्रेन को रोका। ट्रेन के रुकते ही आरोपित मौके से फरार हो गया।

बाद में यात्रियों ने घटना की जानकारी पुलिस को दी। इस घटना में एक बच्चे समेत 3 लोगों की मौत हो गई। वहीं 8 लोग घायल हुए थे।

कोरोना से मर गई दादी, पोते ने AI से कर दिया ‘जिंदा’: चाइना में डेड चैट, कहा- मैंने तेरे बाप को वाइन नहीं पीने को कहा था

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI की सहायता से एक शख्स ने अपनी मरी हुई दादी को ‘वर्चुअली जिंदा’ करने का कमाल कर दिखाया है। दरअसल, एक व्यक्ति ने एआई की सहायता से अपनी दादी का ‘डिजिटल अवतार’ तैयार कर उससे बात की। वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया में इसकी जमकर चर्चा हो रही।

मामला चीन के शंघाई शहर का है। वू वूलीयू नामक 24 वर्षीय लड़के की दादी की जनवरी 2023 में कोरोना से मौत हो गई थी। उसके माता-पिता के तलाक के बाद दादी ने ही उसे पाल-पोस कर बड़ा किया था। दादी की मौत के बाद उसे अक्सर उनकी याद आती थी। इसलिए उसने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से दादी का एआई कैरेक्टर या वर्चुअल वर्जन बनाने का प्लान बनाया। जल्द ही उसे इसमें कामयाबी भी मिल गई।

वू वूलीयू एक विजुअल डिजाइनर है। दादी का एआई कैरेक्टर बनाने के लिए उसने चैट जीपीटी का उपयोग किया। चूँकि चैट जीपीटी एआई मॉडल से तैयार किया गया प्लेटफार्म है। इसलिए उसने चैट जीपीटी से चैट कर दादी से बातचीत करने का तरीका सीखा। वू के पास उसकी दादी के साथ बातचीत की रिकॉर्डिंग थी। इस रिकॉर्डिंग को उसने एआई एप्लिकेशन में इंपोर्ट किया। इसके अलावा उसने एआई के जरिए दादी की पर्सनैलिटी व अन्य चीजों को प्रोग्राम किया। इसके बाद दादी की फोटो व इन सब चीजों को मिलाकर उसने दादी का एआई कैरेक्टर तैयार कर लिया।

इसके बाद उसने दादी से बातचीत की। इसके बाद बातचीत का वीडियो सोशल मीडिया साइट्स पर अपलोड कर दिया। इस वीडियो में वू दादी से कहता है, “दादी, मेरे पिता और मैं इस साल आपके साथ चंद्र नव वर्ष मनाने के लिए शहर वापस आएँगे। जब मेरे पिता ने आपको आखिरी बार फोन किया था, तब आपने उनसे क्या कहा था?’ इस पर AI दादी ने जवाब दिया, “मैंने उससे कहा था कि शराब मत पियो। अच्छे आदमी बनो और ताश मत खेलो।”

इसके बाद वू कहता है, “हाँ दादी माँ, आपको उन्हें ऐसा करने के लिए कहना चाहिए। पिताजी अब करीब 50 साल के हो गए हैं। लेकिन अब भी रोज शराब पीते हैं। उनके पास कोई बचत नहीं है। दादी, आपने लूनर न्यू ईयर मनाने के लिए क्या खरीदा है?” इस पर दादी बोलती है, “मैंने खाने के तेल की दो बोलत खरीदी हैं। यह तेल किसानों ने खुद से बनाया है। तेल की खुशबू काफी अच्छी है। एक बोतल 75 युआन की है।” इस वीडियो में सबसे बड़ी बात रही कि AI दादी के बातचीत करने का तरीका और हावभाव पूरी तरह से मनुष्यों की तरह लग रहे थे।

नीतीश कुमार, यदि सुशासन ऐसा ही होता है तो इसे भी जहरीली शराब पीकर मर जाना चाहिए

बिहार के पूर्वी चम्पारण जिले में ज़हरीली शराब से हाहाकार मचा हुआ है। अब तक 30 लोग जान गँवा चुके हैं, जबकि 6 को अपनी आँखों की रोशनी से हाथ धोना पड़ा है। इस मामले में 5 थानाध्यक्ष, 2 ASI और 9 चौकीदारों को निलंबित किया गया है। 60 तस्करों को गिरफ्तार भी किया गया है। 5 FIR दर्ज की गई है। लेकिन, इसी बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का एक चौंकाने वाला बयान सामने आया है, जो निहायत ही संवेदनहीन है।

हालाँकि, पुलिस-प्रशासन 22 मौतों की बात ही कबूल कर रहा है लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स में पूर्वी चम्पारण के अलग-अलग इलाकों में पिछले 3 दिनों में 30 मौतों की खबरें सामने आई हैं। सीएम नीतीश कुमार ने सीधा फरमान जारी कर दिया है कि अगर मृतकों के परिवार वाले कह दें कि ‘साहब, हमलोग शराबबंदी के पक्ष में हैं’, शराब पीना बुरी बात है और ‘हम दूसरों को भी प्रेरित करेंगे कि वो शराब न पिएँ’ – तभी उन्हें बिहार सरकार की तरफ से 4 लाख रुपए का मुआवजा दिया जाएगा।

बिहार की सामाजिक-आर्थिक स्थिति को भूल कर संवेदनहीन बयान दे रहे CM नीतीश कुमार

नीतीश कुमार का ये बयान दिखाता है कि बिहार की आर्थिक-समाजिक परिस्थिति से अवगत होने के बावजूद वो अपने जिद और राजनीति के लिए इस तरह की बातें कर रहे हैं। मृतकों में अधिकतर गरीब परिवार के लोग हैं। अब उन पर कमाने-खाने का संकट पैदा हो गया है, ऐसे में वो अपने लिए भोजन का इंतजाम करेंगे कि शराबबंदी के पक्ष में लोगों को प्रेरित करते फिरेंगे? मृतकों के पीछे जो छूट गए, भला उनकी क्या गलती है?

बिहार एक गरीब राज्य है। ज़हरीली शराब से जितनी भी मौतें होती हैं, उनमें अधिकतर पिछड़े और गरीब ही होते हैं। वो शिक्षित नहीं होते हैं। उन्हें अच्छे और बुरे शराब का भेद तक नहीं पता होता है। शराबबंदी के कारण ब्रांडेड शराब तो मिल नहीं रही है, ऐसे में उनके पास जो आता है वो पी लेते हैं। सरकार ये कह कर नहीं बच सकती कि हमने दारू बैन कर दिया है कि इसकी तस्करी के लिए भी आम जनता ही जिम्मेदार है।

क्या आपने कभी सुना है कि कोई नेता या कारोबारी ज़हरीली शराब से मर गया? कभी बॉलीवुड सेलेब्रिटीज की पार्टी में जहरीली दारू से मौत की खबरें आती हैं? शराब का सेवन खतरनाक है और इसमें कोई शक नहीं है कि शराब की पहली बूँद से ही व्यक्ति के शरीर को नुकसान पहुँचने लगता है। डॉक्टर भी शराब का सेवन न करने की सलाह देते हैं। लेकिन, बिहार जैसे राज्य में कलम से एक फरमान जारी कर के सब कुछ अचानक नहीं किया जा सकता।

शराबबंदी से मरने वाले और उनके परिवार पीड़ित हैं, अपराधी नहीं। अगर ज़हरीले शराब के सेवन से किसी की जान चली गई, ऐसे में उसकी विधवा को प्रताड़ित करने का क्या फायदा? उसके माता-पिता से सरकार कैसे बदला ले सकती है? उसके बच्चों के सामने कैसे शर्तें रखी जा सकती हैं? गरीब परिवार में एक व्यक्ति के मरने से कमाई बंद हो जाती है और खाने का संकट पैदा हो जाता है, ऐसे में पीड़ित परिवार के सामने शर्तें रखना कहाँ तक उचित है?

एक तो भ्रष्टाचार और नौकरशाही से पीड़ित बिहार जैसे राज्य में साधारण मुआवजे के लिए भी लोगों को सरकारी दफ्तरों की इतनी दौड़-धूप करनी पड़ती है कि पूछिए मत। गरीब तो छोड़िए, माध्यम वर्ग भी इससे अछूता नहीं है। ऐसे में एक तो घर में किसी की मौत हो जाए, ऊपर से महिलाओं-बच्चों या बुजुर्ग माता-पिता को सरकार की शर्तों को पूरा करने के लिए अतिरिक्त मेहनत करनी पड़े और उनके साथ अपराधी की तरह व्यवहार किया जाए, तो इसे जायज कैसे ठहराया जा सकता है?

शराबबंदी का कानून तो बना दिया, ज़हरीली शराब की सप्लाई रोकना सरकार का काम नहीं?

शराब और ज़हरीले शराब में अंतर है। शराबबंदी के प्रावधानों से शराब की दुकानें बंद हो गईं। लेकिन, ज़हरीली शराब की सप्लाई रोकना सरकार का काम है, आम जनता का नहीं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बड़ी चालाकी से शराब और ज़हर को एक साथ देख रहे हैं। जहाँ शराब पर प्रतिबंध नहीं है, वहाँ भी ज़हरीली शराब से मौतें होती हैं और इसकी जिम्मेदारी सरकार पर ही आती है, पुलिस-प्रशासन पर ही आती है, आम जनता पर नहीं।

ये कुछ वैसा ही है, जैसे बाजार में ज़हरीले मसले की पुड़िया बिकनी लगे और उसे खा कर लोग बीमार पड़ने लगें, उनकी मौत होनी लगे। फिर खाद्य विभाग या फिर पुलिस-प्रशासन किसलिए है? राज्य सरकार कह देगी कि हमने फलाँ कानून बना दिया है, मरने वाले और उनके परिवार खुद दोषी हैं। ऐसा कहीं नहीं चलता है। ज़हरीली शराब बाजार में कहाँ से आ रही है, कहाँ बन रही है और लोग इसे कैसे खरीद रहे हैं, कौन लोग इसे बेच रहे हैं – ये देखना पुलिस-प्रशासन का काम है।

अगर किसी गरीब के हाथ में ज़हरीली शराब पहुँच गई है तो ये पुलिस-प्रशासन की नाकामी है, आम जनता की नहीं। इसकी सज़ा मृतक के परिवार वालों को नहीं दी जा सकती। ये वही नीतीश कुमार हैं, जिन्होंने सारण में ज़हरीली शराब से हुई मौतों पर ‘जो पिएगा, वो मरेगा’ वाला बयान देते हुए एक रुपया भी मुआवजा देने से इनकार कर दिया था। अब वही नीतीश कुमार कह रहे हैं कि हमारी ये-ये शर्तें मानो, तभी मुआवजा दिया जाएगा।

याद दिला दें कि दिसंबर 2022 के मध्य में बिहार के सारण जिले में ज़हरीली शराब से 70 से भी अधिक लोगों की मौत हो गई थी। CID को इसकी जाँच सौंप दी गई थी। 2016 में बिहार में शराबबंदी का निर्णय लागू होने के बाद ये इस तरह का सबसे बड़ा हादसा था। जहाँ बिहार सरकार ने 38 मौतों का आधिकारिक आँकड़ा दिया था, विपक्षी भाजपा ने ये संख्या 100 से भी ज़्यादा होने का दावा किया था। मोतिहारी (पूर्वी चम्पारण) वाले मामले में भी यही हो रहा है।

नीतीश कुमार कहते रहे हैं कि शराबबंदी महिलाओं के हित को ध्यान में रख कर की गई है। शराब से होने वाली मौतों के कारण आज वही महिलाएँ सबसे ज़्यादा रोती-बिलखती हुई दिखती हैं, क्योंकि घर में कमाने-खाने का कोई जरिया नहीं बचता। उन्हीं महिलाओं से बिहार सरकार कहती है कि तुम फलाँ चीजें लिख कर दो, तब तुम्हें मुआवजा देंगे। ये संवेदनहीनता नहीं तो क्या है? सरकार को तो मृतकों के घर पहुँच कर उन्हें सांत्वना देनी चाहिए, मुआवजे के लिए अधिकारियों को त्वरित कार्रवाई करनी चाहिए।

गरीबों में जागरूकता ज़रूरी, मृतकों के परिवार वालों से अपराधियों वाला व्यवहार क्यों?

जब देश भर में पोलियो ने पाँव पसारा हुआ था, तब केंद्र और राज्य सरकारों ने मिल कर पहल की। पोलियो की दवा समय-समय पर बच्चों को पिलाने के लिए बड़े स्तर पर कर्मचारी लगाए गए। इसके लिए रेडियो से लेकर टीवी और अख़बार तक के माध्यम से जागरूकता अभियान चलाया गया। पोलियो की दवाओं को लेकर गरीब और अशिक्षित वर्ग में एक प्रकार का भय था, जिसे दूर करने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार और जागरूकता अभियान का सहारा लिया गया।

लोकप्रिय अभिनेता अमिताभ बच्चन को इस अभियान का ब्रांड एम्बेस्डर बनाया गया। तब जाकर कई वर्षों के कई चरणों के अभियान के बाद ये सफल हुआ। अगर सरकार सिर्फ ये कानून बना देती कि पोलियो की दवा पिलाना अनिवार्य है, तो क्या इससे समस्या हल हो जाती? पोलियो से हुई मौतों पर ये कहा जाता कि ये तुम्हारी गलती है, मृतक का परिवार अपराधी है – तो या ये अभियान इतिहास बना पाता? बिलकुल भी नहीं।

फिर बिहार की तो अधिकतर आबादी गरीबी के संकट से ग्रस्त है। उन्हें पलायन करना पड़ता है, क्योंकि राज्य में काम नहीं मिलता। स्किल डेवेलोपमेंट की कोई ट्रेनिंग मिल नहीं पाती। जो बिहार में काम करते हैं, वो कम पैसों में गुजरे को मजबूर हैं। उनमें जागरूकता का अभाव होता है, ऐसे में सरकार को शराबबंदी से पहले चाहिए था कि एक व्यापक जागरूकता अभियान चलाए। महिलाओं-बच्चों-बुजुर्गों को समझाया जाए, फिर घर-घर में लोगों को शराब के खिलाफ जागरूक किया जाए।

इसके अलावा ज़हरीली शराब के नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए एक व्यापक कार्ययोजना बनाई जाती। इसके बाद अगर शराबबंदी होती, तब कहीं ये सफल हो पाती। लेकिन, अब क्या हो रहा है? मोतिहारी शराब काण्ड में एक बीमार व्यक्ति को इलाज कराने की बजाए कार्रवाई के लिए कोट-कचहरी घुमाया जाता रहा, जिससे उसकी मौत हो गई। पुलिस कहती रही कि ये जेल जाएगा। पिटाई का भी आरोप है। ऐसी संवेदनशीन पुलिस और मुख्यमंत्री से हम कैसे अपेक्षा करें कि सही फैसले लिए जा रहे हैं।

प्रावधान इतने कड़े कर दिए गए हैं कि ज़हरीली शराब से बीमारी या मौत होने के बाद भी कोई परिवार खुले तौर पर इसे स्वीकार नहीं करता। कारण – पुलिस उन्हें परेशान करेगी और इलाज/मुआवजे की जगह कार्रवाई पर ही जोर दिया जाएगा। जब नीतीश कुमार से इस संबंध में सवाल पूछा जाता है तो वो ये कह कर इतिश्री कर लेते हैं कि शराब गलत चीज है। क्या ज़हरीली शराब पीने वाले व्यक्ति को पता होता है कि ये ज़हरीली है? ऐसा तो किसी भी खाने-पीने वाली चीजों के साथ हो सकता है। इस पर लगाम लगाने के लिए ही तो तमाम सरकारी विभाग हैं।

कुल मिला कर बात ये है कि शराबबंदी के फैसले से कुछ नहीं होगा, व्यापक जागरूकता अभियान ज़रूरी है। ज़हरीली शराब से हो रही मौतों के बाद परिवार को अपराधी बनाना बंद किया जाए। मुआवजे के लिए उन पर अतिरिक्त भार न लादा जाए। ज़हरीली शराब की तस्करी और खरीद-बेच रोकना सरकार का काम है, आम लोगों का नहीं। शराब और ज़हरीली शराब में अंतर है। मुआवजे को लेकर हर घटना के बाद सीएम अलग-अलग बयान दे रहे, जो खुद उनके कन्फ्यूजन की स्थिति की ओर इशारा करता है।

बॉलीवुड की हिरोइन UAE में गिरफ्तार, छुड़ाने के लिए परिवार को घर रखना होगा गिरवी: भाई बोला- ट्रॉफी बोलकर थमाया ड्रग्स, एयरपोर्ट पर पकड़ी गई

‘सड़क 2’ और ‘बाटला हाउस’ फिल्‍मों में काम कर चुकीं बॉलीवुड एक्‍ट्रेस क्रिसन परेरा (Chrisann Pereira) को ड्रग्स तस्करी के आरोप में संयुक्‍त अरब अमीरात में गिरफ्तार किया है। क्रिसन करीब दो हफ्तों से शारजाह सेंट्रल जेल में बंद हैं। भारतीय वाण‍िज्‍य दूतावास ने एक्‍ट्रेस की गिरफ्तारी की खबर परिवार को दे दी है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, क्रिसन के परिवार का कहना है कि इस मामले में उनकी बेटी आरोपित नहीं, बल्‍क‍ि पीड़‍ित हैं। क्रिसन के भाई केविन ने कहा, “हम पिछले 2 हफ्तों में इमोशनल टॉर्चर से गुजरे हैं। मेरी बहन निर्दोष है और उसे ड्रग्स रैकेट में फँसाया गया है।” परिवार का दावा है कि क्रिसन ने शारजाह हवाई अड्डे पर उतरने के बाद से उन से कोई कांटेक्ट नहीं किया। 72 घंटे बाद उन्हें भारतीय वाणिज्य दूतावास ने सूचित किया कि उसे गिरफ्तार कर लिया गया है और शारजाह सेंट्रल जेल में डाल दिया गया है।

एक्ट्रेस का परिवार उन्हें छुड़वाने के लिए हर संभव कोशिश कर रहा है। इस संबंध में केविन ने 7, 9 और 11 अप्रैल को ट्वीट भी किया था और भारत सरकार व मुंबई पुलिस से तत्काल मदद की गुहार लगाई। क्रिसन परेरा के परिवार के अनुसार, एक्‍ट्रेस को रवि नाम के एक शख्‍स ने बरगलाया था। उसने सबसे पहले क्रिसन की माँ प्रेमिले परेरा से संपर्क किया था। रवि ने बताया था कि वह एक इंटरनेशनल वेब सीरीज के लिए कास्‍ट‍िंग कर रहा है। इसके बाद माँ ने ही रवि को क्रिसन से मिलवाया था। कुछ मुलाकातों के बाद दुबई में वेब सीरीज के लिए ऑडिशन की बात कही गई। फिर रवि ने एक्‍ट्रेस के वहाँ आने-जाने की पूरी व्यवस्था कराई थी।

क्रिसन की माँ प्रेमिला के मुताबिक, “1 अप्रैल को दुबई के लिए फ्लाइट लेने से पहले आरोपित ने क्रिसन को मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट से 10 मिनट की दूरी पर एक कॉफी शॉप में मिलने के लिए बुलाया। उसने उसे एक ट्रॉफी सौंपी शायद यह मेंशन करते हुए कि वो ट्रॉफी ऑडिशन के लिए स्क्रिप्ट का हिस्सा है और ऑडिशन के लिए जरूरी है। इसके बाद वह ट्रॉफी अपने साथ ले गई। शारजाह एयरपोर्ट पर पहुँचने के बाद क्रिसन को वहाँ मौजूद अधिकारियों ने पकड़ लिया। ट्रॉफी से उन्हें ड्रग्‍स बरामद हुई।”

उन्होंने आगे कहा कि इसके बाद 10 अप्रैल को भारतीय वाणिज्य दूतावास ने उन्हें बताया कि पुलिस ने एक्‍ट्रेस को ड्रग्स तस्‍करी के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। रवि नाम का वह शख्‍स अब भी फरार बताया जा रहा है। क्रिसन परेरा के परिवार ने दुबई में एक वकील हायर कर लिया है।

क्रिसन के भाई केविन ने कहा, “हमने दुबई में एक वकील हायर कर लिया है। वकील की फीस 13 लाख रुपए है। हमारा परिवार क्रिसन को सुरक्ष‍ित वापस लाने के लिए घर को गिरवी रखने की तैयारी कर रहा है, क्‍योंकि इस मामले में जुर्माना 20-40 लाख रुपए के बीच हो सकता है। 13 दिन से ज्यादा हो गए हैं और हम उसके बारे में सोच-सोचकर काफी परेशान हैं। हम ठीक से सो नहीं पा रहे हैं, खा नहीं पा रहे हैं, जबकि धोखेबाज खुले घूम रहे हैं।”

कथिततौर पर क्रिसन परेरा के परिवार ने ड्रग तस्कर रवि को गिरफ्तार करने के लिए मुंबई पुलिस के पास एफआईआर दर्ज करवाने की कोशिश की, लेकिन पुलिस संयुक्त अरब अमीरात सरकार से आरोपों की कॉपी का इंतजार कर रही है।

CBI की 9.5 घंटे की पूछताछ… केजरीवाल का गायब दिखा एक दाँत! मीडिया के सामने बदले दिखे दिल्ली CM के हावभाव, ट्रेंड हुआ #DaantDikhaoKejriwal

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) ने रविवार (16 अप्रैल 2023) को शराब घोटाले में सीबीआई की 9.5 घंटे की पूछताछ के बाद मीडिया को संबोधित किया। उन्होंने मीडियाकर्मियों से कहा, “AAP ईमानदार पार्टी है। शराब घोटाले का आरोप झूठा और गंदी राजनीति से प्रेरित है।”

इस दौरान दिल्ली के सीएम ठीक से अपना मुँह भी नहीं खोल पा रहे थे। इसलिए बयान से ज्यादा लोगों ने उनके चेहरे के हाव भाव को नोटिस किया। इस बीच कुछ लोग केजरीवाल का एक दाँत गायब देखकर हैरान रह गए। इसके बाद सोशल मीडिया पर #DaantDikhaoKejriwal ट्रेंड करने लगा ।

विनोद नाम के यूजर ने ट्विटर पर केजरीवाल की दाँत वाली और बिना दाँत वाली तस्वीरें शेयर करके लिखा, “पहली फोटो सुबह की है और दूसरी शाम की है।”

प्रकाश नाम के यूजर ने अरविंद केजरीवाल के मजे लेते हुए लिखा, “आपने शायद नोटिस नहीं किया कि केजरीवाल उस तरह से अपना मुँह नहीं खोल पा रहे हैं, जितना वह आमतौर पर खोलते हैं। ऐसा लगता है कि उन्हें अपने एक दाँत की याद सता रही है, जो 2-3 दिन पहले नीतीश कुमार को बधाई देते समय दिखाई दे रहा था। यह अफवाह है कि पूछताछ के दौरान वह सीबीआई कार्यालय में खो गया।”

सोनी ने लिखा, “केजरीवाल दाँत दिखाओ न दाँत।”

अमन वर्मा अपने ट्विटर हैंडल पर दिल्ली के मुख्यमंत्री को थप्पड़ मारने वाला पुराना वीडियो शेयर करते हुए लिखते हैं, “मेरे विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक, सीबीआई ने इस सीन को तब रीक्रिएट किया, जब केजरीवाल ने उनके साथ सहयोग करने से इनकार कर दिया।”

मुन्ना ने केजरीवाल के एक दाँत के गायब होने का मजाक उड़ाते हुए लिखा, “इसमें भी मोदी जी का हाथ है।”

बता दें कि दिल्ली के शराब घोटाला मामले में सीबीआई ने अरविंद केजरीवाल को समन भेजकर उन्हें 16 अप्रैल को पूछताछ के लिए बुलाया था। इस मामले में अन्ना हजारे ने कहा है कि यदि केजरीवाल ने गलती की है तो उसे सजा होनी चाहिए। वहीं, शराब घोटाले में दिल्ली के उप मुख्यमंत्री रहे मनीष सिसोदिया की गिरफ्तारी 26 फरवरी 2023 को हुई थी। उसके बाद से उन्हें जमानत नहीं मिल पाई है। राउज एवेन्यू कोर्ट में उनकी जमानत याचिका पर अब 18 अप्रैल 2023 को सुनवाई होनी है।

पाकिस्तान में चीनी इंजीनियर ‘अल्लाह के अपमान’ में गिरफ्तार, रमजान में धीमे काम पर बोला तो हत्या करने पर उतर गई कट्टरपंथी भीड़: पहले श्रीलंकाई मैनेजर को जलाया था जिंदा

उत्तरी पाकिस्तान में चीन के एक इंजीनियर को गिरफ्तार किया गया है। उस पर अल्लाह के अपमान का आरोप है, जिसके बाद मुस्लिम भीड़ ने जम कर विरोध प्रदर्शन किया था। भीड़ उस पर हमले के लिए अंडा हो गई थी। आरोप है कि काम के दौरान ही उसने एक झगड़े में ईशनिंदा की। वो चीन की कंपनी ‘Gezhouba Group’ में कार्यरत है। वो दासु हाइड्रोपॉवर प्रोजेक्ट के काम में लगा हुआ था। उसे रविवार (16 अप्रैल, 2023) की शाम को गिरफ्तार किया गया।

इस्लामाबाद से 350 किलोमीटर दूर स्थित कैम्प से उसे गिरफ्तार किया गया। पुलिस का कहना है कि कोई गंभीर स्थिति न पैदा हो जाए, इसीलिए ये कार्रवाई की गई। ये घटना पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में स्थित कोहिस्तान गाँव की है। इस महीने की शुरुआत में इस कैम्प में शॉर्ट सर्किट के कारण आग भी लग गई थी। प्रोजेक्ट में काम कर रहे मुस्लिम मजदूरों ने इंजीनियर पर अल्लाह के अपमान का आरोप लगाया। इसके बाद सड़क काम कर दिया गया। चीनी कैम्प के बाहर भी बड़ी संख्या में मुस्लिम भीड़ जुटी हुई थी।

रमजान के दौरान काम काफी धीमा हो गया था, इसीलिए इंजीनियर ने मजदूरों को काम तेजी से करने की नसीहत दी थी। वहाँ से कुछ ही दूसरी पर काराकोरम हाइवे स्थित है, पाकिस्तान को चीन से जोड़ने वाला एकमात्र राजमार्ग। उसे जाम कर दिया गया। ये इलाका हिमालय पर पड़ता है। इस घटना के बाद वहाँ काम कर रहे अन्य चीनी नागरिकों की सुरक्षा पर भी सवाल खड़ा हो गया है। दंगे की स्थिति पैदा हो गई थी। अब स्थानीय मौलानाओं की बैठक में तय किया जाएगा कि पुलिस में मामला दर्ज कराना है या नहीं।

बता दें कि पाकिस्तान में ईशनिंदा पर मौत की सज़ा का ही प्रावधान है। इससे पहले दिसंबर 2021 में एक वीभत्स घटना सामने आई थी, जब श्रीलंका के एक फैक्ट्री मैनेजर को ज़िंदा जला दिया गया था। उस पर भी ईशनिंदा का आरोप मजदूरों ने लगाया था। पाकिस्तान में चीनी नागरिकों को लेकर भी ऐसी घटनाएँ हुई हैं। 2021 में इसी इलाके में एक बस पर हुए हमले में 12 लोग मारे गए थे, जिनमें 9 चीन के नागरिक थे। 2022 में कराची में हुए एक एक आत्मघाती बम हमले में तीन चीनी शिक्षकों और उनके ड्राइवर को मार डाला गया था।

बठिंडा आर्मी कैंप में फायरिंग करने वाले का जिसने बताया हुलिया, वही निकला हमलावर; CCTV से खुली पोल: पहले राइफल चुराई, फिर उसी से जवानों पर गोलियाँ बरसाई

पंजाब के बठिंडा आर्मी कैंप में हुई फायरिंग में एक जवान की गिरफ्तारी हुई है। पुलिस ने इस जवान की पहचान देसाई मोहन के तौर पर बताई है। एशिया की इस सबसे बड़ी छावनी में 12 अप्रैल 2023 को फायरिंग हुई थी। दिलचस्प है कि हमले के बाद फायरिंग करने वाले का हुलिया बताने वाला भी देसाई मोहन ही था।

लेकिन सीसीटीवी फुटेज की जाँच से उसकी पोल खुल गई। बठिंडा एसएसपी गुलनीत सिंह खुराना ने बताया है कि कड़ाई से पूछताछ करने पर उसने फायरिंग कर साथी जवानों की हत्या करने की बात स्वीकार ली है। इसके लिए उसने पूरी प्लानिंग की थी। पहले आर्मी स्टेशन से राइफल चोरी की। फिर उससे ही साथी जवानों पर गोलियाँ बरसाई।

न्यूज एजेंसी एएनआई ने भी सेना के दक्षिण-पश्चिमी कमान के मुख्यालय से देसाई की गिरफ्तारी की पुष्टि की है। बताया है कि वह आर्टिलरी यूनिट में तैनात था। उसने राइफल चोरी और फायरिंग में अपनी संलिप्तता कबूल की है। शुरुआती जाँच से संकेत मिलता है कि ऐसा उसने व्यक्तिगत रंजिश में किया।

कैसे शक के दायरे में आया देसाई मोहन

जाँच टीम ने मिलिट्री स्टेशन में लगे सीसीटीवी फुटेज की जाँच की। फुटेज में कोई भी व्यक्ति मिलिट्री स्टेशन के अंदर आता या बाहर जाता दिखाई नहीं दिया। इससे यह तय हो गया था कि जवानों की हत्या करने वाला मिलिट्री स्टेशन के अंदर का ही है।

पुलिस को शुरुआत से गनर नागा सुरेश और गनर देसाई मोहन पर शक था। पुलिस ने इन दोनों जवानों समेत 4 जवानों से पूछताछ की थी। इनके अलावा सेना ने करीब 1 दर्जन जवानों को बयान दर्ज कराने के लिए नोटिस जारी किया गया। पूछताछ के दौरान पुलिस का शक चश्मदीद देसाई मोहन पर गहराता गया। इसके बाद पुलिस ने उससे कड़ाई से पूछताछ की। पूछताछ में उसने साथी जवानों की हत्या की बात कबूल ली। इसके बाद सोमवार (17 अप्रैल 2023) को उसे गिरफ्तार कर लिया गया। कथित तौर पर मोहन ने कहा है कि उत्पीड़न के चलते उसने इस वारदात को अंजाम दिया।

क्या है मामला

12 अप्रैल 2023 की सुबह बठिंडा मिलिट्री स्टेशन में फायरिंग कर 4 जवानों की हत्या कर दी गई थी। सभी जवान 80 मीडियम रेजिमेंट के थे। घटना का एकमात्र चश्मदीद देसाई मोहन था। उसने दावा किया था कि सफेद कुर्ता-पजामा पहने दो नकाबपोश आए और गोलियाँ बरसाने लगे। साथ ही कुल्हाड़ी से हमले की बात भी कही थी।