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अतीक अहमद और अशरफ की हत्या पर एक्टिव हुआ JNU का ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’: CM योगी की सरकार का पुतला दहन, ‘इस्लामोफोबिया’ का रोना

माफिया अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की प्रयागराज में हुई हत्या के बाद वामपंथी गैंग एक्टिव हो गया है। इस मामले को जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) में जोर-शोर से उठाने की तैयारी भी शुरू हो चुकी है। वामपंथी छात्रों के समुह AISA (आईसा) ने तो इसके लिए सम्मेलन की जगह और तारीख़ भी तय कर लिया है। यह जमावड़ा 16 अप्रैल 2023 (रविवार) को शाम 5 बजे साबरमती ढाबा पर लगाने का ऐलान किया गया था।

अपनी नोटिस को AISA ने अपने आधिकारिक फेसबुक पेज पर 16 अप्रैल को शेयर किया है। इस नोटिस की हेडलाइन में कहा गया है, “अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की न्यायिक सीमा से बाहर जाते हुए मीडिया की मौजूदगी मौजूदगी में राज्य प्रायोजित हत्या।” इस हेडलाइन के बाद वामपंथियों ने अपना वही पुराना रोना रोया है। आगे उन्होंने लिखा कि अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ को पुलिस की मौजूदगी में कुछ लोगों ने ‘जय श्री राम’ का नारा लगाते हुए मार डाला।

पुलिस की शूटरों से मिलीभगत बताते हुए इस पोस्टर में उत्तर प्रदेश की राजनीति को हिंदुत्व वाली और इस्लामोफ़ोबिक लिखा गया है। पोस्टर के अंत में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उत्तर प्रदेश में चल रही भाजपा सरकार और UP पुलिस का पुतला जलाने की घोषणा की गई है। वामपंथी छात्रों ने योगी सरकार में कानून-व्यवस्था को पूरी तरह से ध्वस्त बताया है। इस कार्यक्रम के लिए सभी को 16 अप्रैल की शाम को 5 बजे साबरमती ढाबे पर जमा होने के लिए कहा गया है। पोस्टर के अंत में #NoToIslamophobia लिखा गया है।

गौरतलब है कि उमेश पाल हत्याकांड में पूछताछ के लिए साबरमती और बरेली जेलों से लाए गए अतीक अहमद और अशरफ की 15 अप्रैल 2023 को प्रयागराज के मेडिकल कॉलेज में हत्या कर दी गई थी। इस हत्याकांड में अभी तक लवलेश तिवारी, सनी सिंह और अरुण मौर्य का नाम आया है। तीनों को हिरासत में ले कर पुलिस पूछताछ कर रही है।

‘अराजकता देख स्तब्ध हूँ’: बंगाल में बैठ CM ममता बनर्जी को सता रही UP की याद, रामनवमी हिंसा पर हाईकोर्ट ने लगाई थी फटकार

उत्तर प्रदेश में अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ अहमद की हत्या के अब लगातार कुछ लोग प्रदेश की कानून व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं। इसी क्रम में बंगाल मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का भी बयान सामने आया है। उनका कहना है कि यूपी में कानून व्यवस्था चरमरा गई है।

ममता बनर्जी ने कहा, “मैं उत्तर प्रदेश में अराजकता और चरमराई कानून व्यवस्था देख स्तब्ध हूँ। यह शर्मनाक है कि अब पुलिस और मीडिया की मौजूदगी से बेफिक्र होकर कानून अपने हाथ में ले रहे हैं। इस तरह के कृत्यों का हमारे संवैधानिक लोकतंत्र में कोई स्थान नहीं है।”

ममता बनर्जी के इस बयान के बाद लोग उन्हें चंद दिनों पहले बंगाल प्रदेश में हुई हिंसा की याद दिला रहे हैं। उन्हें वीडियो और खबरों के जरिए याद दिलाया जा रहा है कि कैसे बंगाल चुनाव के बाद और हिंदू त्योहारों पर प्रदेश में हिंसा भड़कती है और हिंदू निशाना बनाए जाते हैं।

बंगाल हिंसा पर हाईकोर्ट

बता दें कि ममता बनर्जी का ये बयान ऐसे समय में चर्चा में आया जब पिछले दिनों रामवमी में बंगाल प्रदेश में जमकर हिंसा भड़की और सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने भी माना था कि इस तरह भारी मात्रा में पत्थरों को 10-15 मिनट में इकट्ठा नहीं किया जा सकता।

हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश टीएस शिवगनानम और न्यायाधीश हिरणमय भट्टाचार्य की खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए कहा था कि हिंसा के लिए पहले से प्लानिंग की गई थी। लेकिन इसे रोका नहीं जा सका। जाहिर है कि यह खुफिया तंत्र की विफलता के कारण हुआ।

कोर्ट ने यह भी कहा है कि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को पेलेट गन और आँसू गैस का इस्तेमाल करना पड़ा। इसको देखकर ऐसा लगता है कि मामला गंभीर था। हिंसा में तलवारें, बोतलें, टूटे शीशे और तेजाब का इस्तेमाल किया गया और इंटरनेट पर प्रतिबंध लगा दिया गया। इससे पता चलता है कि हिंसा और बड़े पैमाने पर हुई।

फैक्ट फाइंडिंग कमेटी की जाँच

उल्लेखनीय है कि बंगाल में हुई हिंसा पर मानवाधिकार संगठन के 6 सदस्यीय टीम के अध्यक्ष पटना हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश नरसिम्हा रेड्डी ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि बंगाल में रामनवमी पर हुई हिंसा सुनियोजित थी। इसके लिए जानबूझकर उकसाया गया और दंगे भड़काए गए थे। पूर्व जज ने रेड्डी ने 9 अप्रैल 2023 को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा था रिशड़ा और शिबपुर हिंसा मामलों की NIA जाँच यह जानने के लिए जरूरी है कि क्या ये दंगे सुनियोजित तरीके से अंजाम किए गए थे। स्पष्ट बिंदु हैं कि दोनों मामलों में घटना के लिए पुलिस जिम्मेदार है।

ओडिशा में हनुमान जयंती शोभायात्रा में फिर पत्थरबाजी, आगजनी के बाद लगा कर्फ्यू, 1 की मौत: पुलिस का खुलासा – हिंसा के लिए पहले से रची गई थी साजिश

ओडिशा के संबलपुर में हनुमान जयंती शोभायात्रा पर फिर पथराव हुआ है। शुक्रवार (14 अप्रैल, 2023) को हुई हिंसा में एक व्यक्ति की मौत हो गई। हालाँकि प्रशासन इस हत्या में सांप्रदायिक एंगल की बात नकार रहा है। वहीं, शनिवार को कई दुकानों और घरों में आग लगने की घटना सामने आई। इससे पहले बुधवार (12 अप्रैल, 2023) को भी शोभायात्रा के दौरान हिंसा हुई थी। इसको लेकर पुलिस ने कहा है कि हिंसा के लिए पहले से प्लानिंग की गई थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, संबलपुर में हो रही सांप्रदायिक हिंसा के बीच शुक्रवार (14 अप्रैल, 2023) को भगवान हनुमान की शोभायात्रा निकाली जा रही थी। इस शोभायात्रा के दौरान एक बार फिर पत्थरबाजी हुई। इसके बाद हिंसा शुरू हो गई। घटना को लेकर डीआईजी बृजेश कुमार राय ने कहा है कि शुक्रवार रात को संबलपुर में कई दुकानों में आग लगा दी गई। भयंकर तोड़फोड़ की घटनाएँ भी हुईं हैं। इस हिंसा के बाद इलाके में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन ने जिले में धारा 144 लागू कर दी है। साथ ही इंटरनेट सेवा भी बंद कर दी गई है।

शोभायात्रा से लौट रहे व्यक्ति की हत्या

संबलपुर में हनुमान जंयती की शोभायात्रा से लौट रहे एक व्यक्ति की हत्या कर दी गई। मृतक की पहचान चंद्र मिर्धा के रूप में हुई। इस हत्या को लेकर प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि करीब 14-15 लोगों ने युवक पर हमला किया था। हमलावरों के हाथ में तलवार और हॉकी स्टिक थी। चंद्र मिर्धा बाइक पर था। पहले ईंट से हमला किया गया। इससे वह बाइक से गिर गया। इसके बाद उस पर तलवार से हमलावर ने उसकी हत्या कर दी गई। हालाँकि, पुलिस इस हत्या को सांप्रदायिक हिंसा का मानने से इनकार कर रही है।

हिंसा के लिए की गई थी प्लानिंग

संबलपुर में बुधवार (12 अप्रैल, 2023) को हुई हिंसा को लेकर एसपी बी गंगाधर ने कहा है कि शुरुआती जाँच में सामने आया है कि हिंसा के लिए पहले से तैयारी की गई थी। इसके लिए कुछ लोगों ने अपने घरों पर पत्थर व अन्य सामान इकट्ठा किया था। पुलिस ने कई घरों में तलाशी ली है। इस दौरान हिंसा फैलाने के उद्देश्य से रखे गए सामान जब्त किए गए हैं। अगर आरोपितों के घर गैर-कानूनी रूप से बनाए गए हैं तो इन पर कार्रवाई होगी। घर पर बुलडोजर चलाया जाएगा। पथराव में शामिल 100 आरोपितों की पहचान हुई है।

इसमें से 26 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। वहीं, 14 अप्रैल को हुई हिंसा के मामले में 53 लोग गिरफ्तार किए जा चुके हैं। इस तरह हनुमान जयंती शोभायात्रा के दौरान हुई हिंसा में कुल मिलाकर अब तक 79 लोग गिरफ्तार किए गए हैं।

अतीक अहमद को माफिया कहे जाने से खफा अखिलेश यादव के चाचा, लोकतंत्र ख़त्म होने का रोया रोना: बोले – हत्या की साजिश थी, इसीलिए बाँधा हाथ

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में 15 अप्रैल, 2023 (शनिवार) को 3 शूटरों ने पुलिस कस्टडी में माफिया अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की हत्या कर दी। इस मामले ने अब राजनैतिक रंग ले लिया है। जहाँ ओवैसी ने इस बहाने योगी सरकार को निशाने पर लिया है तो वहीं समाजवादी पार्टी ने खुल कर अतीक अहमद का महिमामंडन किया है। 16 अप्रैल, 2023 को अपने एक बयान में सपा के वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव ने अतीक अहमद की मौत की वजह मीडिया ट्रायल तक बता डाला है।

समाचार एजेंसी ANI से बात करते हुए समाजवादी पार्टी के नेता रामगोपाल यादव ने अतीक अहमद की हत्या की मुख्य वजह मीडिया ट्रायल बताया है। उन्होंने कहा कि मीडिया ने अतीक को एक गैंगस्टर के तौर पर बदनाम किया वर्ना अतीक अहमद उनकी सपा और निर्दलीय भी लोकसभा व विधानसभा के चुनाव जीत चुका है। उन्होंने योगी सरकार द्वारा अतीक को मिट्टी में मिला देने के बयान को उनके अधिकारियों द्वारा हरी झंडी मिलने जैसा बताया। रामगोपाल के अनुसार सुप्रीम कोर्ट द्वारा माफिया को सुरक्षा न मिलने पर UP पुलिस के ऑफिसर्स का मन बढ़ गया था।

अतीक को महिमामंडित करते हुए रामगोपाल यादव ने आगे कहा कि उस पर भले ही कई केस दर्ज रहे हों पर सज़ा केवल एक मामले में हुई थी। तमाम केस दर्ज होना रामगोपाल ने आपसी रंजिश की एक सामान्य बात बताया। बमबाजी वाली घटना पर भी रामगोपाल यादव ने अतीक को कवर देते हुए कहा कि ऐसे कांड कई बड़े-बड़े अधिकारी भी करवा चुके हैं। अतीक के दोनों हाथों को बाँधने पर भी सवाल खड़े करते हुए रामगोपाल यादव ने बताया कि ऐसा उसकी हत्या की साजिश के तहत किया गया था। देश में लोकतंत्र खत्म होने की बात कहते हुए रामगोपाल यादव ने अब इसे राजतंत्र की तरफ बढ़ते हुए बताया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, रामगोपाल यादव ने अतीक अहमद के बाकी बचे बेटों की भी हत्या की आशंका जताई। समाजवादी पार्टी के मीडिया सेल ने अदालत से अतीक अहमद की हत्या का संज्ञान लेने और कार्रवाई की माँग की है। सपा का आरोप है कि नेताओं और अधिकारियों के तमाम राज खुलने के डर से अतीक अहमद की हत्या करवाई गई है।

इन सभी के अलावा सपा के अनुराग भदौरया ने देश न्यायपालिका से चलने और रविदास मेहरोत्रा ने उत्तर प्रदेश में जंगलराज कायम होने जैसे बयान दिए। सपा सांसद शफीकुर्रहमान बर्क ने कहा, “अदालत अगर फाँसी भी दे देती तो हमें कोई एतराज नहीं था। ये जुल्म और हत्या है। उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था नाम की चीज नहीं है।”

शफीकुर्रहमा का दावा है कि अतीक अहमद के मुद्दे पर पूरा विपक्ष एकजुट है। हालाँकि उन्होंने बताया कि उनकी अखिलेश यादव से अतीक अहमद के मुद्दे पर कोई बात नहीं हुई है।

‘गाड़ी से उतरने से पहले अतीक अहमद ने किसको किया इशारा’ : हत्या से चंद सेकेंड पहले की Video, नेटीजन्स पूछ रहे सवाल

माफिया डॉन अतीक अहमद की एक आखिरी वीडियो सामने आई है। ये वीडियो हत्या से ठीक पहले की है। इस वीडियो में दिखाई पड़ रहा है कि किस तरह से अतीक ने गाड़ी से उतरते समय एक ही जगह कुछ देर देखा और उसके बाद गाड़ी से उतरा और थोड़ी देर बाद साइड से आकर उसे गोली मार दी गई।

अब यही वीडियो को सोशल मीडिाय पर तेजी से शेयर किया जा रहा है। सवाल खड़ा हो रहा रहै कि अतीक किसकी ओर देख रहा था। पाञ्चजन्य पत्रकार हितेश शंकर ने इस वीडियो को शेयर करते हुए कहा, “इस वीडियो को गौर से देखिए! गाड़ी से उतरते समय अतीक अहमद थोड़ी देर के लिए रुकता है, दूसरी तरफ देखता है और कुछ इशारा करता है! आखिर अतीक अहमद किसकी तरफ देखता है, और क्या इशारा करता है?”

यूजर्स ने कहा, “जैसे ही अतीक अहमद वाहन से बाहर निकला उसने थोड़ा रुक कर बाई ओर देखा और किसी को आगे आने का इशारा किया।”

अब इन सवालों का जवाब क्या है ये तो पुलिस जाँच के बाद ही सामने आएगा। लेकिन इस बीच कुछ यूजर्स ऐसी भी बात कर रहे हैं अतीक अहमद पुलिस को कुछ खुलासे करने लगा था जिससे कई लोग फँसते, इसलिए उन्होंने अतीक को मरवा दिया।

यूजर ने लिखा, “टीवी पर कुछ चैनल ये थ्योरी भी चला रहे हैं कि अतीक अहमद ने कुछ इशारा किया था और उसके कुछ पलों बाद ही गोली चली यानि कि खुद ने ही खुद पर गोली चलवाई ये जाँच में पता चलेगा कि इसका क्या कनेक्शन है सुना है एक पूर्व सांसद का नाम लेने वाला था और कई राज खोलने से कई लोग फसते इसलिए ये हुआ है।”

सोशल मीडिया पर अतीक की वीडियो देखने के बाद लोग लगातार माँग कर रहे हैं कि इस एंगल से भी जाँच होनी चाहिए कि अतीक ने आखिर सच में इशारा किया था या केवल वीडियो में ऐसा नजर आ रहा है।

’19 साल का लड़का देश के लिए खतरा कैसे?’: अतीक अहमद के बेटे के एनकाउंटर पर भड़के कपिल सिब्बल तो लोगों ने याद दिलाई कसाब की उम्र

पूर्व कॉन्ग्रेस नेता और वकील कपिल सिब्बल ने अतीक अहमद के बेटे असद के एनकाउंटर पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सिब्बल ने कहा है कि 19 साल का लड़का देश की सुरक्षा में खतरा कैसे हो सकता है? यही नहीं, कपिल सिब्बल ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप करने की भी अपील की। उनके इस बयान के बाद नेटिजेन्स उन्हें लताड़ लगाते दिखाई दे रहे हैं।

असद अहमद के एनकाउंटर को लेकर कपिल सिब्बल ने कहा है कि आखिर 19 साल का लड़का देश के लिए खतरा कैसे बन सकता है? सिब्बल ने आगे कहा कि अगर वो सच में खतरा था तो उसके पैर में गोली मारकर उसे पकड़ा जा सकता था और आगे की कार्रवाई की जा सकती थी। लेकिन उसे मारने की क्या जरूरत थी।

उन्होंने आगे कहा है एनकाउंटर दिखाता है कि पूरे कानूनी ढांचे में ही दिक्कत आ गई है। केवल एनकाउंटर ही नहीं, पूरी प्रक्रिया को फिर से देखने की जरूरत है। सुप्रीम को इस मामले में स्वत: संज्ञान लेना चाहिए। अगर ऐसा नहीं होता है तो यह सब ऐसे ही चलता रहेगा। सिब्बल ने आगे है कि उन्हें उम्मीद है सुप्रीम कोर्ट इन एनकाउंटर को देखते हुए कोई बड़ा संदेश देगा। देश में किसे गिरफ्तार किया जाना चाहिए और उसे कितने समय तक जेल में रहना चाहिए। इसको लेकर कानून की पूरी प्रक्रिया को सुप्रीम कोर्ट द्वारा सख्ती से तय किया जाना चाहिए।

कपिल सिब्बल के इस बयान के बाद से सोशल मीडिया पर लोग उन्हें फटकार लगाते हुए नजर आ रहे हैं। विक्रम गौड़ नामक यूजर ने कहा है, “कपिल सिब्बल जी, 2008 में अजमल कसाब 20-21 साल का था। आपके हिसाब से वह एक खतरा नहीं था?”

शिवम त्यागी नामक यूजर ने लिखा है, “कपिल सिब्बल साब पूछ रहे हैं कि क्या 19 साल का लड़का, असद अहमद, देश की सुरक्षा के लिए खतरा हो सकता है? लगता है कपिल सिब्बल पिछले 55 दिन से सो रहे थे इसलिए उन्हें पता नहीं चला कि इसी 19 साल के लड़के ने दिन-दिहाड़े ताबड़तोड़ गोलियाँ मार कर एक गवाह और दो पुलिसकर्मियों की हत्या कर दी थी। पता नहीं यह वकालत क्या और कैसे करते होंगे?”

चौधरी साब नामक ट्विटर यूजर ने ट्वीट कर कहा, “इन्हीं कपिल सिब्बल ने आतंकी याकूब मेमन की फाँसी रुकवाने के लिए आधी रात को सुप्रीम कोर्ट खुलवा दिया था, इनसे देशभक्ति की आशा करना, अंधों के शहर में चश्मे बेचने की तरह है।”

एक अन्य यूजर ने ट्वीट करते हुए यह बताने की कोशिश की कि एनकाउंटर से कपिल सिब्बल का नुकसान हो गया है। इसलिए वह इस तरह की भाषा बोल रहे हैं। उसने लिखा, “अगर केस सुप्रीम कोर्ट में आता तो वकालत करने तो मिलती यही ना। यही दर्द हो रहा है कपिल सिब्बल जी को। कपिल सिब्बल जी का काफी नुकसान हो गया।”

काशी के पंडित नामक यूजर ने लिखा, “कपिल सिब्बल को लगता है केवल 52 साल का लड़का ही देश के लिए खतरा है।”

एक अन्य यूजर ने लिखा, “कपिल सिब्बल का बेटा थोड़ी मरा था वैसे भी कपिल सिब्बल तो कसाब को भी बचाना चाहता था।”

एक यूजर ने ट्वीट कर लिखा, “कपिल सिब्बल का कहना है कि 19 साल का असद देश और समाज के लिए खतरा कैसे हो सकता है? इसका जबाव ये है कि खतरा तो देश के लिए कपिल सिब्बल और कपिल सिब्बल जैसे लोग भी हैं।”

तुम्हारा आनंद नामक यूजर ने ट्वीट कर लिखा, “कपिल सिब्बल के लिए तो श्रीराम भी काल्पनिक थे और इस्लाम को मानने वाले शान्तिदूत दूध के धुले हैं। अतीक अहमद ने खुद अपने बयान में पाकिस्तान के साथ साठ गाँठ होने की बात स्वीकार की थी कपिल सिब्बल जी। हमें योगी आदित्यनाथ जी पर पूरा भरोसा है।”

एक यूजर ने फटकार लगाते हुए लिखा, “जब कोई अपना मरेगा तो पता चलेगा कपिल सिब्बल को। ये बात उमेश की विधवा पत्नी और बूढ़ी माँ से पूछो कि उसने उनके घर के सामने उनके बेटे को गोलियों से छलनी कर दिया।”

AMU के पार्क में मॉर्निंग वॉक कर रहा था सफ़दर अली, कुत्तों ने मार डाला: हाथ-पैर-पेट सब जगह नोचा, 10-12 की संख्या में थे

देश भर में कुत्तों के हमले की घटनाएँ बढ़ती जा रहीं हैं। ऐसा ही एक मामला उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से सामने आया है। जहाँ पार्क में घूम रहे एक व्यक्ति को कुत्तों ने नोंच-नोंचकर मार डाला। मृतक की पहचान सफदर अली के रूप में हुई। घटना रविवार (16 अप्रैल, 2023) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सफदर अली नामक व्यक्ति सुबह करीब 6:30 बजे यूनिवर्सिटी के पार्क में मॉर्निंग वॉक करने आया था। जहाँ कुत्तों के एक झुंड ने उस पर हमला कर दिया। हमले के बाद वह गिर गया। इसके बाद कुत्तों ने उसके हाथ, पैर और पेट व अन्य अंगों को नोंचकर घायल कर दिया। इससे उसकी मौत हो गई। घटना का वीडियो भी सामने आया है। वीडियो में सफदर अली सफेद कपड़े में टहलते हुए दिखाई दे रहा है। कुत्ते चारों ओर से उसे घेर कर नोच रहे हैं। वहीं, सफदर अली खुद को बचाने के लिए हाथ पैर हिलाता दिखाई दे रहा है।

बताया जा रहा है कि सफदर अली स्थानीय सिविल लाइन थाना क्षेत्र का निवासी है। वह रोज की तरह पार्क में घूमने आया था। इसी दौरान कुत्तों के हमले से यह घटना हो गई। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के गार्ड ने उसके शव को देखकर पुलिस को सूचना दी थी। इसके बाद पुलिस ने मौके पर पहुँचकर जाँच शुरू की। जाँच के दौरान आसपास के CCTV खँगालने के बाद मामले की सच्चाई सामने आई। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है।

इस घटना पर अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के प्रॉक्टर मोहम्मद वसीम अली का कहना है कैंपस में एक शव पड़ा दिखाई दिया था। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई थी। यूनिवर्सिटी में लगे सीसीटीवी के फुटेज पुलिस को सौंपे गए हैं। वहीं, सिटी एसपी कुलदीप गुनावत का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज के अनुसार कुत्ते के हमले से मौत हुई है। 10-12 कुत्तों ने हमला किया है। हालाँकि इसके बाद भी मौत के कारण जानने के लिए शव का पोस्टमार्टम किया जा रहा है। शेष आवश्यक कार्रवाई भी की जा रही है।

‘मेन बात है कि गुड्डू मुस्लिम…’ – मरने से पहले अतीक के भाई अशरफ की अधूरी लाइन को पूरी कर रही जनता… ‘हम भी पेले गए थे तुम भी पेले जाओगे’

उमेश पाल हत्याकांड के बाद से फरार गुड्डू मुस्लिम लगातार मीडिया चर्चा में है। कल जब अतीक और अशरफ पर हमलावरों ने प्रयागराज में गोली चलाई उस समय अशरफ अपने गुर्गे गुड्डू मुस्लिम की ही बात कर रहा था।

वीडियो यदि देखें तो उसमें अशरफ आखिरी वाक्य कहता है, “मेन बात है कि गुड्डू मुस्लिम…” इसके बाद गोली चल जाती है। अब यही वीडियो शेयर करके लोग सोशल मीडिया पर पूछ रहे हैं कि आखिर अशरफ कहना क्या चाहता था। वहीं कुछ इसका अंदाजा लगा रहे कि कहना क्या होगा।

अशरफ की वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए कई नेटिजन्स मजे भी ले रहे हैं। कोई कह रहा है अशरफ कहना चाहता था, ” (गुड्डू मुस्लिम) हम भी पेले गए थे तुम भी पेले जाओगे।”

वेलकम फिल्म का क्लिप शेयर करके कहा जा रहा है, “ये राज भी उसी (अशरफ) के साथ चला गया।”

एक मनमोहन भारती कहते हैं, “आखिर कहना क्या चाहते थे अतीक जी। कम से कम बात तो पूरी होने देते। निबटाने की ऐसी भी क्या जल्दी थी भाई।”

एक यूजर आगे लिखती है कि शायद अशरफ कह रहा था… ‘उसी (गुड्डू मुस्लिम) ने सब किया था, हम तो विधायक थे, मासूम हैं हम।’

गौरतलब है कि 15 अप्रैल 2023 को प्रयागराज मेडिकल कॉलेज में मेडिकल के लिए गए अतीक और उसके भाई अशरफ की तीन लोगों ने गोलियाँ मारकर हत्या कर दी। इन तीनों पर पहले से कई केसों में FIR दर्ज है। पुलिस इनसे आगे पूछताछ कर रही है। इनकी पहचान लवलेश तिवारी, सनी सिंह और अरुण के तौर पर हुई है। लवलेश के पिता ने उसे नशेड़ी कहा है। सनी सिंह के परिजनों ने कहा है कि उनका सनी से कोई मतलब नहीं है। वहीं अरुण के घर वालों ने भी कहा है कि उन्हें इस बारे में जानकारी नहीं है

अतीक अहमद के तीनों हत्यारों पर पहले से कई केस: किसी पर कॉन्स्टेबल की हत्या का आरोप तो किसी पर 17 FIR: परिजनों ने कहा – हमारा इनसे कोई रिश्ता नहीं

प्रयागराज में हुई अतीक अहमद और अशरफ की हत्या के बाद तीनों शूटरों के परिवार वालों के बयान सामने आ गए हैं। बांदा के रहने वाले लवलेश तिवारी के घर वालों ने काफी पहले से ही उनसे नाता तोड़ लेने की बात कही है। उन्होंने लवलेश को नशेड़ी बताया है। दूसरे शूटर हमीरपुर के सनी सिंह के परिजनों ने भी उनसे कोई रिश्ता न होने की जानकारी दी है। तीसरे शूटर अरुण के घर वालों ने भी मामले में किसी जानकारी होने से इनकार किया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बांदा जिले के लवलेश तिवारी के पिता ने अपने बेटे को नशे का आदी बताया है। उन्होंने कहा कि एक लम्बे समय से उनका अपने बेटे से कोई वास्ता नहीं है। लवलेश पर एक लड़की को थप्पड़ मारने का भी केस चल रहा है। लवलेश के पिता यज्ञ तिवारी ने पुलिस की जाँच में पूरा सहयोग करने का भरोसा दिया है। लवलेश की माँ ने अपने बेटे को बजरंग बली का भक्त और दूसरों का मददगार बताया है। भाजपा विधायक शलभ मणि त्रिपाठी ने भी मीडिया से लवलेश के पिता को बेवजह तंग न करने की अपील की है।

दूसरा शूटर अरुण मौर्य मूल रूप से कासगंज के बघेला पुख्ता का का रहने वाला है। बताया जा रहा है कि पूर्व में उस पर एक GRP कॉन्स्टेबल की हत्या का आरोप है। अरुण के घर में एक बूढ़ी माँ है जिसे घटना के बारे में कुछ भी नहीं पता। घर के रूप में महज एक झोपडी है जिस पर छत भी नहीं है। फ़िलहाल पुलिस अरुण से पूछताछ कर रही है।

अतीक अहमद और अशरफ की हत्या केस में तीसरे शूटर का नाम सनी सिंह है। सनी सिंह हिस्ट्रीशीटर बताया जा रहा है, जिस पर पहले से ही 17 केस दर्ज हैं। वह हमीरपुर जिले के कुरारा का रहने वाला है। सनी का नोएडा क्षेत्र के बड़े माफिया सुंदर भाटी से भी पुराना रिश्ता बताया जा रहा है। सनी के भाई और पिता की मौत हो चुकी है और माँ मायके में रहती है। सनी अपराध की दुनिया में 10 साल से एक्टिव बताया जा रहा है। फ़िलहाल पुलिस उसके बाकी नेटवर्क को खंगाल रही है।

सनी सिंह की क्राइम हिस्ट्री:

मरने से पहले अतीक अहमद के भाई ने लिया जिसका नाम, गिरफ्तार हो गया वो गुड्डू मुस्लिम? महाराष्ट्र पुलिस ने बताई पूरी बात

यूपी पुलिस की STF ने बमबाज गुड्डू मुस्लिम को गिरफ्तार कर लिया है। मीडिया रिपोर्ट में ऐसी खबरें आई थीं। शुरू में हमने भी उसी आधार पर खबर बनाई। महाराष्ट्र की पुलिस ने इस मामले को लेकर जो कंफ्यूजन था, उसे दूर कर दिया है। गुड्डू मुस्लिम को महाराष्ट्र के नासिक से गिरफ्तार नहीं किया गया है, यह खबर स्थानीय पुलिस ने दी है।

मीडिया रिपोर्ट में बताया जा रहा था कि गुड्डू मुस्लिम की तलाश में उत्तर प्रदेश की एसटीएफ महाराष्ट्र के नासिक गई है। रिपोर्ट के अनुसार यूपी पुलिस को गुड्डू मुस्लिम के नासिक में छिपे होने की जानकारी मिली थी। वहाँ पहुँच कर यूपी एसटीएफ ने गुड्डू मुस्लिम को गिरफ्तार भी कर लिया, मीडिया ने यह चला भी दिया था।

अब महाराष्ट्र की पुलिस ने इस मामले को लेकर स्थिति स्पष्ट की है। स्थानीय पुलिस के अनुसार जिस शख्स को लेकर मीडिया रिपोर्ट में दावा किया जा रहा था, वो एक होटल में वेटर है गुड्डू मुस्लिम नहीं। होटल में किससे पूछताछ किया गया, इस सवाल पर नासिक पुलिस ने बताया कि वह गुड्डू मुस्लिम नहीं है, होटल में सिर्फ एक वेटर है।

बता दें कि उमेश पाल हत्याकांड के बाद सामने आए सीसीटीवी वीडियो में बमबाज गुड्डू मुस्लिम का चेहरा भी दिखा था। ये भी जानने वाली बात है कि जब अतीक अहमद और उसके भाई की हत्या हुई, उससे ठीक पहले उसका भाई अशरफ गुड्डू मुस्लिम का ही नाम ले रहा था। बात पूरी करने से पहले ही दोनों भाइयों की हत्या कर दी गई।

गुड्डू मुस्लिम पर 5 लाख रुपए का इनाम घोषित है। वो इस पूरे मामले को सुलझाने में पुलिस के सामने एक अहम कड़ी शामिल हो सकता है। उधर अब सामने आया है कि शौहर और देवर के जनाजे और उन्हें दफ़न किए जाने के बाद बीवी शाइस्ता परवीन भी पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण करेगी। इस मामले में वो भी आरोपित है। फॉरेंसिक टीम ने सैम्पल ले लिए हैं और अतीक-अशरफ के लिए कब्र भी खोद दी गई है। सीएम योगी ने अधिकारियों को हर दो घंटे में रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस प्रकरण के अलावा अपने सभी कार्यक्रम रद्द कर दिए हैं। गुड्डू मुस्लिम के बारे में बता दें कि वो पुराना हिस्ट्रीशीटर है। वो गोली नहीं, बल्कि बम मार कर हत्या करता था। लखनऊ के नाका इलाके में भी उसने बम मार कर एक हत्याकांड को अंजाम दिया था, जिसके बाद वो जेल भी गया था। लखनऊ के पीटर गोम्स हत्याकांड में भी उसका नाम सामने आया था। उत्तर प्रदेश के कई माफियाओं के साथ उसके संबंध रहे हैं।

गुड्डू मुस्लिम की तलाश के लिए यूपी STF की 10 टीमें लगी हुई थीं। बता दें कि लाइव कैमरे के सामने जैसे ही अशरफ ने कहा था, ‘मेन बात ये है कि गुड्डू मुस्लिम…’ तभी उसके बगल में खड़े अतीक अहमद को हमलावरों ने सिर से सटाकर गोली मार दी। फिर अशरफ की भी हत्या हो गई। इलाहाबाद का गुड्डू मुस्लिम लखनऊ में बाहुबलियों अभय सिंह और धनंजय सिंह के संपर्क में आकर बड़ा अपराधी बना था। हालाँकि, इससे पहले से वो अपराध करता रहा था। वो श्रीप्रकाश शुक्ल और ISI के भी संपर्क में रहा है।