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27 मौतों से हाहाकार, इफ्तार के मजे लेती ‘सरकार’… दारुबंदी वाले बिहार में ज़हरीली शराब के कहर से 6 अंधे भी हो गए, CM नीतीश बोले – गलत काम मत करो

बिहार के पूर्वी चम्पारण में ज़हरीली शराब से हुई मौतों को लेकर हाहाकार मचा हुआ है। उधर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार फिर से इफ्तार पार्टी में व्यंजनों का आनंद लेते दिखे। सीएम नीतीश कुमार पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम माँझी के आवास पर इफ्तार पार्टी में शामिल हुए। माँझी की पार्टी HAM भी महागठबंधन की सरकार का हिस्सा है। साथ ही बिहार के कई बड़े नेता भी इस इफ्तार पार्टी में इस्लामी टोपी और तौलिए के साथ भोजन करते दिखे।

लेकिन, बिहार के पूर्वी चम्पारण जिले में सब ठीक नहीं है। ज़हरीली शराब से अब तक 27 लोगों की मौत हो चुकी है, वहीं 6 की आँखों की रोशनी चली गई है। जिले के 5 अलग-अलग थाना क्षेत्रों में हुई घटनाओं में 2 दिन के भीतर इतनी मौतें हुई हैं। उधर सीएम नीतीश कुमार ने ये कह कर इतिश्री कर ली कि किसी को इस तरह का गलत काम नहीं किया जाता, इसके लिए समझाया जाता है। बिहार पुलिस का कहना है कि 400 जगहों पर छापेमारी कर के 60 शराब तस्करों को गिरफ्तार किया गया है।

हालाँकि, पुलिस-प्रशासन ज़हरीली शराब से 14 मौतों की बात ही स्वीकार कर रहा है। इस मामले में अब तक 2 ASI और 9 चौकीदारों को निलंबित किया गया है। जिले में अब तक 5 FIR दर्ज की गई। तुरकौलिया और रघुनाथपुर में 13, हरसिद्धि में 6, पहाड़पुर में 5 और सुगौली में 3 लोगों की जानें गई हैं। आशंका है कि मृतकों का आँकड़ा और बढ़ सकता है। विपक्षी भाजपा भी इस घटना पर राजद-जदयू गठबंधन सरकार पर हमलावर है।

पश्चिम चम्पारण से सांसद और भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ संजय जायसवाल ने मिस्र के फराओ से नीतीश कुमार की तुलना करते हुए कहा कि तब शासक की गलती से 2000 लोग मारे गए थे, आज बिहार में लोग अचानक मर रहे और कारण का पता नहीं चल पा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सीएम नीतीश ने ’पुलिस माफिया गठजोड़ाइटिस’ नामक नई बीमारी का अविष्कार किया है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष विजय कुमार सिन्हा ने हाईकोर्ट के सिटिंग जज से इस प्रकरण की जाँच कराए जाने की माँग की है।

‘अब हमें शांति मिली, जो हुआ सही हुआ’: अतीक अहमद और अशरफ की हत्या पर बोले दिवंगत संदीप निषाद के परिजन, माँ ने कहा – योगी जी को प्रणाम करती हूँ, पैर छूती हूँ

उमेश पाल हत्याकांड में अतीक अहमद के गुर्गों ने न केवल उमेश पाल बल्कि उनके दो गनर की भी जान ले ली थी। इनमें से एक गनर संदीप निषाद थे। अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की हत्या की जानकारी मिलने पर संदीप निषाद के परिवार वालों का कहना है कि असद, गुलाम, अतीक और अशरफ की मौत से उन्हें शांति मिली है।

‘आज तक’ से हुई बातचीत में संदीप निषाद के पिता संतराम निषाद का कहना है, “असद और गुलाम का एनकाउंटर हुआ। इसके बाद अतीक अहमद और अशरफ की हत्या हुई। यह बात सुनकर उन्हें शांति मिली है। उनके पास कुछ नहीं है। कमाने वाला सिर्फ बेटा था वह भी बलिदान हो गया। 6-7 परिवारों के बीच में कमाने वाला कोई नहीं है। इससे बड़ा पहाड़ कौन सा हो सकता था। लड़कों के बच्चे भी हैं उनकी भी पढ़ाई बंद हो गई है।” बलिदान हुए संदीप निषाद के पिता ने अपने परिवार के लिए नौकरी और रहने के लिए घर की भी माँग की है।

वहीं, संदीप निषाद की माँ समुंदरी का कहना है कि अतीक और अशरफ की हत्या से उन्हें तसल्ली मिली है। संदीप घर में इकलौते कमाने वाले हैं। संदीप निषाद की पारिवारिक सदस्य रमावती ने कहा है, “मुख्यमंत्री योगी का धन्यवाद। आज तक कोई भी ऐसा अधिकारी मंत्री नहीं मिला जो कहे और करके दिखाए। मैं योगी जी को प्रणाम करती हूँ। पैर छूती हूँ। मैं चाहती हूँ कि योगी जी संदीप निषाद के परिवार को गोद ले लें। इस परिवार में वही कमाने वाला था। अब कोई कमाने वाला नहीं है। कल जो घटना हुई शांति मिली।”

बलिदानी संदीप निषाद के भाई दीपचन्द्र ने कहा है, “अतीक के साथ जो हुआ है सही हुआ है। योगी जी से यही कहेंगे जो गलत किया है उसके साथ ऐसा ही होना चाहिए। योगी से अनुरोध है घर में नौकरी और यहाँ सड़क बनवा दें।”

संदीप निषाद के पारिवारिक सदस्य बृजेश ने कहा है कि जो हो रहा है अच्छा हो रहा है। जैसे के साथ तैसा होना चाहिए। अतीक और अशरफ की हत्या हुई है, अच्छा हुआ है। जो जैसे करेगा उसके साथ वैसा ही होगा। संदीप निषाद के चचेरे भाई विजय निषाद का कहना है, “इस घटना को सुनकर सब लोगों को तसल्ली मिली है। हम लोग भी यही चाहते थे कि या तो उसका एनकाउंटर हो जाए या फिर फाँसी दे दी जाए। जो जैसा किया था दूसरे के साथ उसके साथ भी वैसा ही हुआ। आज नहीं तो कल, जो गलत करेगा उसके साथ ऐसा ही होगा।”

संदीप के भाई वीरेंद्र निषाद ने कहा है, “अतीक अहमद बहुत लोगों को परेशान किया हुआ था। बहुत से परिवारों का उसने दिल दुखाया है। हमारा भाई भी मारा गया। हम लोगों के साथ भी बहुत दर्दनाक घटना घटी है। हमारी आत्मा भी रो रही है। जिसका दिल टूटता है उसे पता चलता है कि दर्द क्या होता है। अब उसके परिवार को भी पता चलेगा हम लोग कैसे रह रहे हैं। जैसी करनी वैसी भरनी।”

घर जाकर माफ़ी माँगी, फिर भी मरवा दिया… अतीक अहमद और अशरफ ने कारोबारी अशोक साहू को दी थी गाड़ी ओवरटेक करने की ‘सज़ा’, पूर्व DSP ने बताया वाकया

माफिया अतीक अहमद की 15 अप्रैल, 2023 (शनिवार) को प्रयागराज में हत्या कर दी गई। यह हत्या पुलिस कस्टडी में तब हुई जब उसे मेडिकल चेकअप के लिए अस्पताल ले जाया जा रहा था। इस हत्या के साथ अतीक का 4 दशक से अधिक पुराना आपराधिक साम्राज्य ध्वस्त हो गया। इस साम्राज्य में अतीक, उसका भाई अशरफ, उसकी बीवी शाइस्ता और उसके बेटे तक शामिल हुआ करते थे। इस नेटवर्क ने तमाम लोगों की जमीनें कब्जाईं और कई हत्याएँ करवाईं।

इन सभी के अलावा अपहरण जैसे अपराध इस गैंग के पेशे में रूटीन तौर पर शामिल थे। उन्हीं तमाम अपराधों में से एक था अशोक साहू हत्याकांड।

अशोक साहू की हत्या साल 1996 में प्रयागराज के मध्य सिविल लाइंस इलाके में हुई थी। ऑपइंडिया ने इस केस के विवेचक रहे तत्कालीन पुलिस इंस्पेक्टर धीरेन्द्र राय से बात की। उन्होंने बताया कि कैसे अतीक का न सिर्फ आपराधिक दुनिया में अच्छा दखल था बल्कि उसके भाई को बचाने के लिए पुलिस इंस्पेक्टर तक सक्रिय भागीदार बने थे।

अशरफ को नहीं पहचान पाया था अशोक

ऑपइंडिया से बात करते हुए ex DSP धीरेन्द्र राय ने बताया कि तब वो प्रयागराज में इंस्पेक्टर पद पर तैनात थे। उन्होंने बताया कि अशरफ और अशोक के बीच सिविल लाइन्स इलाके में झगड़े की शुरुआत गाड़ी की ओवरटेकिंग को ले कर शुरू हुई थी। राय के मुताबिक, तब अशोक अशरफ को नहीं पहचान पाया था, लेकिन बाद में जानकारी होने पर वो काफी डर गया था।

धीरेन्द्र राय ने हमें आगे बताया कि डर के मारे अशोक साहू अतीक के घर गया था। वहाँ उसने अतीक से माफ़ी माँगी। अतीक अहमद ने उस समय कहा कि गलती तो किए हो, लेकिन जाओ और आगे से सही रहना। इस बात पर अशोक आश्वस्त हो कर वहाँ से चला गया था।

माफ़ी माँगने पर भी मार डाला गया अशोक

पूर्व DSP धीरेन्द्र राय के अनुसार, माफ़ी माँगने के बाद भी अतीक अहमद ने 2 दिनों बाद प्रयागराज के सिविल लाइन्स में अशोक की हत्या करवा दी। यह हत्या गोली मार कर हुई थी। हत्या के बाद पुलिस ने अतीक, उसके भाई अशरफ और उसके अब्बा फिरोज को नामजद किया।

अशरफ का मददगार इंस्पेक्टर मंसूर अहमद काजी

रिटयर्ड DSP धीरेन्द्र राय के अनुसार, तब उत्तर प्रदेश के जिला चंदौली में पोस्टेड इंस्पेक्टर मंसूर अहमद काजी ने अशरफ की गैर-कानूनी ढंग से मदद की। इंस्पेक्टर काजी ने अशरफ की घटना के समय अपने थाने में अवैध तमंचे के साथ गिरफ्तारी दिखा दी थी। हालाँकि, तब इंस्पेक्टर रहे धीरेन्द्र राय ने इंस्पेक्टर काजी और अशरफ को भी अपनी जाँच रिपोर्ट में साजिशकर्ता के तौर पर दिखाया था।

अभी तक केस ही नहीं शुरू हुआ

पूर्व DSP धीरेन्द्र राय ने हमें बताया कि साल 1996 के इस मामले का ट्रायल भी अभी तक शुरू नहीं हो पाया था। उन्होंने हमें बताया कि उनकी खुद की खोजबीन में मामले की चार्जशीट MP/MLA कोर्ट में दबी पड़ी मिली। हालाँकि, उन्हें यह भी नहीं पता कि इस मामले में बाद में अशरफ और इंस्पेक्टर काजी का क्या हुआ था। खुद से तत्कालीन इंस्पेक्टर धीरेन्द्र राय ने अतीक और उसके अब्बा फ़िरोज़ अहमद की गिरफ्तारी साल 1996 में की थी।

अशोक साहू का परिवार गुमनाम

पूर्व DSP धीरेन्द्र राय हमें अशोक साहू के परिवार के बारे में अधिक जानकारी नहीं दे पाए। उन्होंने बताया कि बाद में उनका ट्रांसफर लखनऊ हो गया और साल 2015 में उन्होंने राजधानी लखनऊ से ही बतौर डिप्टी SP रिटायरमेंट लिया था।

तमिलनाडु के 45 इलाकों में RSS की भव्य रैली, कई महीनों से अनुमति नहीं दे रही थी DMK सरकार: सुप्रीम कोर्ट में जीत के बाद बड़ा शक्ति प्रदर्शन

तमिलनाडु के 45 इलाकों में ‘राष्ट्रोय स्वयंसेवक संघ (RSS)’ ने रविवार (16 अप्रैल, 2023) को भव्य रोडशो आयोजित किया। बता दें कि इससे पहले राज्य में मुख्यमंत्री MK स्टालिन की सरकार ने RSS के आयोजन पर रोक लगा दी थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद रोडशो का रास्ता साफ हुआ। सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। रोडशो के लिए रूट पहले से तय था। स्वयंसेवकों के हाथों में ड्रम और लाठियाँ भी थी, जिनका परेड में सामान्यतः इस्तेमाल किया जाता रहा है।

चेन्नई, वेल्लोर, होसुर, सालेम, चेंगलपट्टू, कांचीपुरम, तिरुवन्नामलाई, अरानी, कोयम्बटूर, मेट्टूपलायम, पल्लादम, करूर, टेंकसी, कन्याकुमारी, तिरूचुपल्ली और मदुरै – ये वो प्रमुख इलाके हैं, जहाँ RSS के मार्च का आयोजन किया गया। तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई के कोरत्तूर इलाके में भी रैली आयोजित हुई, जिसमें केंद्रीय मत्स्य पालन एवं पशुपालन राज्यमंत्री डीएल मुरुगन भी शामिल हुए। इसके बाद उन्होंने एक विशाल जनसभा को भी संबोधित किया।

बता दें कि रैली के आयोजन के लिए RSS को तमिलनाडु की DMK सरकार से लंबी लड़ाई लड़नी पड़ी। पहले मद्रास हाईकोर्ट ने और उसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में राज्य सरकार के खिलाफ और RSS के पक्ष में फैसला सुनाया। राज्य सरकार का तर्क था कि RSS की रैलियों से अस्थिरता फैलेगी और इनका प्रबंधन मुश्किल हो जाएगा। मद्रास हाईकोर्ट ने बंद परिसरों में रैली के आयोजन का सुझाव दिया, इसके बावजूद एमके स्टालिन की सरकार अड़ी रही।

हालाँकि, RSS को न्यायालय ने निर्देश दिया था कि इसकी रैलियों में बाँस के डंडों का इस्तेमाल न किया जाए। अक्टूबर 2022 से ही संगठन इसके लिए अनुरोध कर रहा था, लेकिन इसकी अनुमति नहीं दी जा रही थी। तमिलनाडु में भाजपा अब तक मुख्य विपक्षी पार्टी भी नहीं बन पाई है, ऐसे में यहाँ अपने चुनावी प्रदर्शन में सुधार के लिए पार्टी लगातार लगी हुई है। प्रदेश अध्यक्ष के अन्नामलाई के नेतृत्व में पार्टी कैडर सक्रिय है और लगातार जमीन पर काम कर रहा है।

‘अखिलेश यादव को जूते से मारेंगे, ये सपा की चाल’: अतीक के बेटे के जनाजे में शामिल महिलाओं का फूटा गुस्सा, बोलीं – योगी देते हैं राशन, वो गरीबों के मददगार

अतीक अहमद और उसके भाई की गोली मारकर हत्या कर दी गई। इससे पहले अतीक का बेटा असद भी पुलिस एनकाउंटर में मारा गया था। उसे अब दफनाया जा चुका है। लेकिन इससे पहले उसके जनाजे में आईं महिलाओं का कहना है कि योगी ने जो किया है वह सही है। उन्होंने कहा कि अगर अगर अखिलेश यादव और मायावती वोट माँगने आएँगीं तो जूते से मारकर भगा दिया जाएगा।

दरअसल, ‘द राजधर्म’ नामक यूट्यूब चैनल ने असद अहमद के जनाजे में आई महिलाओं से बातचीत की है। इस बातचीत के दौरान शबनम नामक महिला ने कहा है कि अखिलेश यादव की चाल के चलते यह सब हुआ है। अखिलेश यादव ने मिट्टी में मिलाने के लिए उकसाया था। अखिलेश यादव मुसलिमों के वोट के लिए सब बोल रहे हैं। मुस्लिम बेवकूफ नहीं है कि उनको वोट देगा। अखिलेश यादव के कारण ही असद मारा गया है। कोई और कारण नहीं है। शबनम ने आगे है कि वह बाबाजी (योगी आदित्यनाथ) को वोट देंगी। लेकिन अखिलेश यादव और बहन जी (मायावती) को वोट नहीं देंगी। उन्हें जूते से मारकर भगाएँगी।

एक अन्य व्यक्ति ने कहा है कि वह गोरखपुर मठ में गए थे, तब योगी कुछ भी नहीं थे। योगी मुस्लिमों का पहले न्याय करते हैं। अखिलेश यादव ने सीएम योगी को ताव दिला दिया। हो सकता है कि इस सबके पीछे अखिलेश यादव का हाथ हो। उन्हें लगता है कि इसमें सपा की कोई चाल है। इसकी जाँच होनी चाहिए। जाँच में दूध का दूध पानी का पानी हो जाएगा। रजिया नामक महिला ने कहा है कि योगी बहुत अच्छे हैं, वह राशन देते हैं। गरीबों की मदद करते हैं। बच्चों की पढ़ाई के लिए पैसा देते हैं। सब करते हैं। वह कहीं से गलत नहीं है, उन्हें कहीं से भी गलत साबित नहीं किया जा सकता।

एक अन्य महिला ने एनकाउंटर को लेकर कहा है कि अखिलेश यादव ने कहीं न कहीं इस सब में एक खेल खेला है। इन लोगों को इस्तेमाल किया है। इसके बाद यह सब कर दिया। अखिलेश अगर इतने ही अच्छे होते तो वह योगी जी को भड़काते ही क्यों?

अतीक अहमद और अशरफ की हत्या पर एक्टिव हुआ JNU का ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’: CM योगी की सरकार का पुतला दहन, ‘इस्लामोफोबिया’ का रोना

माफिया अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की प्रयागराज में हुई हत्या के बाद वामपंथी गैंग एक्टिव हो गया है। इस मामले को जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) में जोर-शोर से उठाने की तैयारी भी शुरू हो चुकी है। वामपंथी छात्रों के समुह AISA (आईसा) ने तो इसके लिए सम्मेलन की जगह और तारीख़ भी तय कर लिया है। यह जमावड़ा 16 अप्रैल 2023 (रविवार) को शाम 5 बजे साबरमती ढाबा पर लगाने का ऐलान किया गया था।

अपनी नोटिस को AISA ने अपने आधिकारिक फेसबुक पेज पर 16 अप्रैल को शेयर किया है। इस नोटिस की हेडलाइन में कहा गया है, “अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की न्यायिक सीमा से बाहर जाते हुए मीडिया की मौजूदगी मौजूदगी में राज्य प्रायोजित हत्या।” इस हेडलाइन के बाद वामपंथियों ने अपना वही पुराना रोना रोया है। आगे उन्होंने लिखा कि अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ को पुलिस की मौजूदगी में कुछ लोगों ने ‘जय श्री राम’ का नारा लगाते हुए मार डाला।

पुलिस की शूटरों से मिलीभगत बताते हुए इस पोस्टर में उत्तर प्रदेश की राजनीति को हिंदुत्व वाली और इस्लामोफ़ोबिक लिखा गया है। पोस्टर के अंत में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उत्तर प्रदेश में चल रही भाजपा सरकार और UP पुलिस का पुतला जलाने की घोषणा की गई है। वामपंथी छात्रों ने योगी सरकार में कानून-व्यवस्था को पूरी तरह से ध्वस्त बताया है। इस कार्यक्रम के लिए सभी को 16 अप्रैल की शाम को 5 बजे साबरमती ढाबे पर जमा होने के लिए कहा गया है। पोस्टर के अंत में #NoToIslamophobia लिखा गया है।

गौरतलब है कि उमेश पाल हत्याकांड में पूछताछ के लिए साबरमती और बरेली जेलों से लाए गए अतीक अहमद और अशरफ की 15 अप्रैल 2023 को प्रयागराज के मेडिकल कॉलेज में हत्या कर दी गई थी। इस हत्याकांड में अभी तक लवलेश तिवारी, सनी सिंह और अरुण मौर्य का नाम आया है। तीनों को हिरासत में ले कर पुलिस पूछताछ कर रही है।

‘अराजकता देख स्तब्ध हूँ’: बंगाल में बैठ CM ममता बनर्जी को सता रही UP की याद, रामनवमी हिंसा पर हाईकोर्ट ने लगाई थी फटकार

उत्तर प्रदेश में अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ अहमद की हत्या के अब लगातार कुछ लोग प्रदेश की कानून व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं। इसी क्रम में बंगाल मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का भी बयान सामने आया है। उनका कहना है कि यूपी में कानून व्यवस्था चरमरा गई है।

ममता बनर्जी ने कहा, “मैं उत्तर प्रदेश में अराजकता और चरमराई कानून व्यवस्था देख स्तब्ध हूँ। यह शर्मनाक है कि अब पुलिस और मीडिया की मौजूदगी से बेफिक्र होकर कानून अपने हाथ में ले रहे हैं। इस तरह के कृत्यों का हमारे संवैधानिक लोकतंत्र में कोई स्थान नहीं है।”

ममता बनर्जी के इस बयान के बाद लोग उन्हें चंद दिनों पहले बंगाल प्रदेश में हुई हिंसा की याद दिला रहे हैं। उन्हें वीडियो और खबरों के जरिए याद दिलाया जा रहा है कि कैसे बंगाल चुनाव के बाद और हिंदू त्योहारों पर प्रदेश में हिंसा भड़कती है और हिंदू निशाना बनाए जाते हैं।

बंगाल हिंसा पर हाईकोर्ट

बता दें कि ममता बनर्जी का ये बयान ऐसे समय में चर्चा में आया जब पिछले दिनों रामवमी में बंगाल प्रदेश में जमकर हिंसा भड़की और सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने भी माना था कि इस तरह भारी मात्रा में पत्थरों को 10-15 मिनट में इकट्ठा नहीं किया जा सकता।

हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश टीएस शिवगनानम और न्यायाधीश हिरणमय भट्टाचार्य की खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए कहा था कि हिंसा के लिए पहले से प्लानिंग की गई थी। लेकिन इसे रोका नहीं जा सका। जाहिर है कि यह खुफिया तंत्र की विफलता के कारण हुआ।

कोर्ट ने यह भी कहा है कि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को पेलेट गन और आँसू गैस का इस्तेमाल करना पड़ा। इसको देखकर ऐसा लगता है कि मामला गंभीर था। हिंसा में तलवारें, बोतलें, टूटे शीशे और तेजाब का इस्तेमाल किया गया और इंटरनेट पर प्रतिबंध लगा दिया गया। इससे पता चलता है कि हिंसा और बड़े पैमाने पर हुई।

फैक्ट फाइंडिंग कमेटी की जाँच

उल्लेखनीय है कि बंगाल में हुई हिंसा पर मानवाधिकार संगठन के 6 सदस्यीय टीम के अध्यक्ष पटना हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश नरसिम्हा रेड्डी ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि बंगाल में रामनवमी पर हुई हिंसा सुनियोजित थी। इसके लिए जानबूझकर उकसाया गया और दंगे भड़काए गए थे। पूर्व जज ने रेड्डी ने 9 अप्रैल 2023 को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा था रिशड़ा और शिबपुर हिंसा मामलों की NIA जाँच यह जानने के लिए जरूरी है कि क्या ये दंगे सुनियोजित तरीके से अंजाम किए गए थे। स्पष्ट बिंदु हैं कि दोनों मामलों में घटना के लिए पुलिस जिम्मेदार है।

ओडिशा में हनुमान जयंती शोभायात्रा में फिर पत्थरबाजी, आगजनी के बाद लगा कर्फ्यू, 1 की मौत: पुलिस का खुलासा – हिंसा के लिए पहले से रची गई थी साजिश

ओडिशा के संबलपुर में हनुमान जयंती शोभायात्रा पर फिर पथराव हुआ है। शुक्रवार (14 अप्रैल, 2023) को हुई हिंसा में एक व्यक्ति की मौत हो गई। हालाँकि प्रशासन इस हत्या में सांप्रदायिक एंगल की बात नकार रहा है। वहीं, शनिवार को कई दुकानों और घरों में आग लगने की घटना सामने आई। इससे पहले बुधवार (12 अप्रैल, 2023) को भी शोभायात्रा के दौरान हिंसा हुई थी। इसको लेकर पुलिस ने कहा है कि हिंसा के लिए पहले से प्लानिंग की गई थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, संबलपुर में हो रही सांप्रदायिक हिंसा के बीच शुक्रवार (14 अप्रैल, 2023) को भगवान हनुमान की शोभायात्रा निकाली जा रही थी। इस शोभायात्रा के दौरान एक बार फिर पत्थरबाजी हुई। इसके बाद हिंसा शुरू हो गई। घटना को लेकर डीआईजी बृजेश कुमार राय ने कहा है कि शुक्रवार रात को संबलपुर में कई दुकानों में आग लगा दी गई। भयंकर तोड़फोड़ की घटनाएँ भी हुईं हैं। इस हिंसा के बाद इलाके में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन ने जिले में धारा 144 लागू कर दी है। साथ ही इंटरनेट सेवा भी बंद कर दी गई है।

शोभायात्रा से लौट रहे व्यक्ति की हत्या

संबलपुर में हनुमान जंयती की शोभायात्रा से लौट रहे एक व्यक्ति की हत्या कर दी गई। मृतक की पहचान चंद्र मिर्धा के रूप में हुई। इस हत्या को लेकर प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि करीब 14-15 लोगों ने युवक पर हमला किया था। हमलावरों के हाथ में तलवार और हॉकी स्टिक थी। चंद्र मिर्धा बाइक पर था। पहले ईंट से हमला किया गया। इससे वह बाइक से गिर गया। इसके बाद उस पर तलवार से हमलावर ने उसकी हत्या कर दी गई। हालाँकि, पुलिस इस हत्या को सांप्रदायिक हिंसा का मानने से इनकार कर रही है।

हिंसा के लिए की गई थी प्लानिंग

संबलपुर में बुधवार (12 अप्रैल, 2023) को हुई हिंसा को लेकर एसपी बी गंगाधर ने कहा है कि शुरुआती जाँच में सामने आया है कि हिंसा के लिए पहले से तैयारी की गई थी। इसके लिए कुछ लोगों ने अपने घरों पर पत्थर व अन्य सामान इकट्ठा किया था। पुलिस ने कई घरों में तलाशी ली है। इस दौरान हिंसा फैलाने के उद्देश्य से रखे गए सामान जब्त किए गए हैं। अगर आरोपितों के घर गैर-कानूनी रूप से बनाए गए हैं तो इन पर कार्रवाई होगी। घर पर बुलडोजर चलाया जाएगा। पथराव में शामिल 100 आरोपितों की पहचान हुई है।

इसमें से 26 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। वहीं, 14 अप्रैल को हुई हिंसा के मामले में 53 लोग गिरफ्तार किए जा चुके हैं। इस तरह हनुमान जयंती शोभायात्रा के दौरान हुई हिंसा में कुल मिलाकर अब तक 79 लोग गिरफ्तार किए गए हैं।

अतीक अहमद को माफिया कहे जाने से खफा अखिलेश यादव के चाचा, लोकतंत्र ख़त्म होने का रोया रोना: बोले – हत्या की साजिश थी, इसीलिए बाँधा हाथ

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में 15 अप्रैल, 2023 (शनिवार) को 3 शूटरों ने पुलिस कस्टडी में माफिया अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की हत्या कर दी। इस मामले ने अब राजनैतिक रंग ले लिया है। जहाँ ओवैसी ने इस बहाने योगी सरकार को निशाने पर लिया है तो वहीं समाजवादी पार्टी ने खुल कर अतीक अहमद का महिमामंडन किया है। 16 अप्रैल, 2023 को अपने एक बयान में सपा के वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव ने अतीक अहमद की मौत की वजह मीडिया ट्रायल तक बता डाला है।

समाचार एजेंसी ANI से बात करते हुए समाजवादी पार्टी के नेता रामगोपाल यादव ने अतीक अहमद की हत्या की मुख्य वजह मीडिया ट्रायल बताया है। उन्होंने कहा कि मीडिया ने अतीक को एक गैंगस्टर के तौर पर बदनाम किया वर्ना अतीक अहमद उनकी सपा और निर्दलीय भी लोकसभा व विधानसभा के चुनाव जीत चुका है। उन्होंने योगी सरकार द्वारा अतीक को मिट्टी में मिला देने के बयान को उनके अधिकारियों द्वारा हरी झंडी मिलने जैसा बताया। रामगोपाल के अनुसार सुप्रीम कोर्ट द्वारा माफिया को सुरक्षा न मिलने पर UP पुलिस के ऑफिसर्स का मन बढ़ गया था।

अतीक को महिमामंडित करते हुए रामगोपाल यादव ने आगे कहा कि उस पर भले ही कई केस दर्ज रहे हों पर सज़ा केवल एक मामले में हुई थी। तमाम केस दर्ज होना रामगोपाल ने आपसी रंजिश की एक सामान्य बात बताया। बमबाजी वाली घटना पर भी रामगोपाल यादव ने अतीक को कवर देते हुए कहा कि ऐसे कांड कई बड़े-बड़े अधिकारी भी करवा चुके हैं। अतीक के दोनों हाथों को बाँधने पर भी सवाल खड़े करते हुए रामगोपाल यादव ने बताया कि ऐसा उसकी हत्या की साजिश के तहत किया गया था। देश में लोकतंत्र खत्म होने की बात कहते हुए रामगोपाल यादव ने अब इसे राजतंत्र की तरफ बढ़ते हुए बताया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, रामगोपाल यादव ने अतीक अहमद के बाकी बचे बेटों की भी हत्या की आशंका जताई। समाजवादी पार्टी के मीडिया सेल ने अदालत से अतीक अहमद की हत्या का संज्ञान लेने और कार्रवाई की माँग की है। सपा का आरोप है कि नेताओं और अधिकारियों के तमाम राज खुलने के डर से अतीक अहमद की हत्या करवाई गई है।

इन सभी के अलावा सपा के अनुराग भदौरया ने देश न्यायपालिका से चलने और रविदास मेहरोत्रा ने उत्तर प्रदेश में जंगलराज कायम होने जैसे बयान दिए। सपा सांसद शफीकुर्रहमान बर्क ने कहा, “अदालत अगर फाँसी भी दे देती तो हमें कोई एतराज नहीं था। ये जुल्म और हत्या है। उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था नाम की चीज नहीं है।”

शफीकुर्रहमा का दावा है कि अतीक अहमद के मुद्दे पर पूरा विपक्ष एकजुट है। हालाँकि उन्होंने बताया कि उनकी अखिलेश यादव से अतीक अहमद के मुद्दे पर कोई बात नहीं हुई है।

‘गाड़ी से उतरने से पहले अतीक अहमद ने किसको किया इशारा’ : हत्या से चंद सेकेंड पहले की Video, नेटीजन्स पूछ रहे सवाल

माफिया डॉन अतीक अहमद की एक आखिरी वीडियो सामने आई है। ये वीडियो हत्या से ठीक पहले की है। इस वीडियो में दिखाई पड़ रहा है कि किस तरह से अतीक ने गाड़ी से उतरते समय एक ही जगह कुछ देर देखा और उसके बाद गाड़ी से उतरा और थोड़ी देर बाद साइड से आकर उसे गोली मार दी गई।

अब यही वीडियो को सोशल मीडिाय पर तेजी से शेयर किया जा रहा है। सवाल खड़ा हो रहा रहै कि अतीक किसकी ओर देख रहा था। पाञ्चजन्य पत्रकार हितेश शंकर ने इस वीडियो को शेयर करते हुए कहा, “इस वीडियो को गौर से देखिए! गाड़ी से उतरते समय अतीक अहमद थोड़ी देर के लिए रुकता है, दूसरी तरफ देखता है और कुछ इशारा करता है! आखिर अतीक अहमद किसकी तरफ देखता है, और क्या इशारा करता है?”

यूजर्स ने कहा, “जैसे ही अतीक अहमद वाहन से बाहर निकला उसने थोड़ा रुक कर बाई ओर देखा और किसी को आगे आने का इशारा किया।”

अब इन सवालों का जवाब क्या है ये तो पुलिस जाँच के बाद ही सामने आएगा। लेकिन इस बीच कुछ यूजर्स ऐसी भी बात कर रहे हैं अतीक अहमद पुलिस को कुछ खुलासे करने लगा था जिससे कई लोग फँसते, इसलिए उन्होंने अतीक को मरवा दिया।

यूजर ने लिखा, “टीवी पर कुछ चैनल ये थ्योरी भी चला रहे हैं कि अतीक अहमद ने कुछ इशारा किया था और उसके कुछ पलों बाद ही गोली चली यानि कि खुद ने ही खुद पर गोली चलवाई ये जाँच में पता चलेगा कि इसका क्या कनेक्शन है सुना है एक पूर्व सांसद का नाम लेने वाला था और कई राज खोलने से कई लोग फसते इसलिए ये हुआ है।”

सोशल मीडिया पर अतीक की वीडियो देखने के बाद लोग लगातार माँग कर रहे हैं कि इस एंगल से भी जाँच होनी चाहिए कि अतीक ने आखिर सच में इशारा किया था या केवल वीडियो में ऐसा नजर आ रहा है।