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क्या गुड्डू मुस्लिम ने करवाई अतीक-अशरफ की हत्या? मीडिया रिपोर्टों में भाटी से लेकर बिश्नोई गैंग कनेक्शन तक की बातें, क्रूड बम भी बना लेता है सनी सिंह

प्रयागराज में माफिया अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की हत्या के बाद अब सुंदर भाटी गैंग भी चर्चा में है। हमला करने वाले तीन शूटरों में से एक सनी सिंह के इस गैंग से जुड़े होने की बात कही जा रही है। सनी पर पहले से ही 17 मुकदमे दर्ज हैं। कहा जा रहा है कि अतीक की हत्या में इस्तेमाल हुई पिस्टल भाटी गैंग ने ही सनी को दी थी। फ़िलहाल पुलिस इस मामले की तह तक जाने का प्रयास कर रही है। वहीं कुछ रिपोर्ट्स इस हत्याकांड में लॉरेंस बिश्नोई गैंग की भी मिलीभगत की तरफ इशारा कर रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अतीक अहमद और उसके भाई की हत्या में जिगाना पिस्टल का प्रयोग हुआ है। जिगाना पिस्टल तुर्की में बनती है। लगभग 6 लाख रुपए कीमत की यह पिस्टल भारत में बैन है। यह पिस्टल सुंदर भाटी गैंग द्वारा सनी सिंह को देने की आशंका जताई जा रही है। मूल रूप से हमीरपुर के रहने वाले सनी सिंह के सुंदर भाटी से सम्पर्क जेल में होने की बात कही जा रही है। जिगाना पिस्टल आरोपितों के पास कहाँ से आई इसका खुलासा फिलहाल अभी नहीं हो पाया है। पुलिस को अभी तक सुंदर भाटी और अतीक अहमद के बीच किसी पुरानी दुश्मनी का भी सुराग नहीं मिल पाया है। सुंदर भाटी फिलहाल सोनभद्र जेल में उम्रकैद की सजा काट रहा है।

लॉरेंस गैंग से भी कनेक्शन की आहट

वहीं कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में आशंका जताई जा रही है कि अतीक और उसके भाई अशरफ को मारने वाले हथियार लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने दिए थे। इस आशंका को बल इसलिए भी मिलता है क्योंकि इन्हीं हथियारों से सिद्धू मूसेवाला की भी हत्या हुई थी। इस मर्डर में बिश्नोई गैंग का नाम सामने आया था।

गुड्डू मुस्लिम भी करा सकता है अतीक की हत्या

एक रिपोर्ट में इस बात का भी दावा किया जा रहा है कि अतीक अहमद के बाद उसकी गैंग का मुखिया गुड्डू मुस्लिम बनना चाहता था। हालाँकि अतीक की पसदं उसका भाई अशरफ था। आशंका जताई जा रही है कि यह बात गुड्डू मुस्लिम को रास नहीं आई होगी और उसने अतीक और अशरफ की हत्या करवा दी होगी। फिलहाल इस मामले में अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। बमबाज गुड्डू उमेश पाल की हत्या में वांटेड है और उसकी तलाश STF लगातार कर रही है।

दोनों हाथों से गोलियाँ चलाता है सनी

तीनों शूटरों को अतीक और अशरफ की लोकेशन व मूवमेंट आदि की जानकारी मीडिया के माध्यम से मिल रहीं थी। सनी के करीबियों ने बताया कि हत्या के 4 दिन पहले उसने कुछ बड़ा करने की बात कही थी। तब उसने कहा था कि जल्द ही पूरे प्रदेश में लोग उसे जान जाएँगे। सनी सिंह 90 के दशक के उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े डॉन रहे और बाद में UP STF के द्वारा मारे गए श्रीप्रकाश शुक्ला का फैन है। बताया जा रहा है कि वह दोनों हाथों से गोलियाँ चला लेता है। सनी के पड़ोसियों के मुताबिक वह अक्सर साइबर कैफे जाकर बड़े अपराधियों के फोटो प्रिंट करवाकर लाता था। कक्षा 8 पास सनी क्रूड बम भी बना लेता है। साल 2021 में वह चित्रकूट जेल में बंद था। फ़िलहाल पुलिस शूटरों से जुड़े तमाम नेटवर्क को खंगाल रही है।

BBC के लिए रॉबिनहुड, CNN को दिखा राजनेता, NYT को योगी के कपड़ों से दिक्कत: माफिया अतीक अहमद के महिमामंडन में विदेशी मीडिया दिखा रहा हिन्दू घृणा

जैसा कि अब तक सभी को पता चल चुका है, प्रयागराज के सबसे बड़े माफिया रहे अतीक अहमद और उसके भाई को शनिवार (15 अप्रैल, 2023) की रात 3 बदमाशों ने मिल कर हत्या कर दी। ये हत्याकांड लाइव टीवी पर रिकॉर्ड हुआ, क्योंकि हत्या के समय अतीक अहमद और उसका भाई मीडिया से ही बात कर रहे थे। हत्यारे भी मीडियाकर्मी का वेश बना कर ही आए थे। ताबड़तोड़ गोलियाँ चलते हुए पूरे देश ने लाइव टीवी पर देखा।

अतीक अहमद की मौत के बाद प्रयागराज के लोगों ने राहत की साँस ली। पूर्वांचल के लोग भी जानते हैं कि 44 वर्षों तक अतीक अहमद के खौफ का वहाँ क्या आलम था। 2005 में उसने विधायक राजू पाल को मरवा दिया था। 5 किलोमीटर तक खदेड़ कर राजू पाल पर गोलीबारी की गई थी। जब उनके समर्थन उन्हें लेकर अस्पताल गए, अतीक अहमद ने फिर से अपने गुर्गे भेजे और उनकी हत्या करवाई। तब उनकी शादी को मात्र 9 दिन ही हुए थे।

इसी तरह, उसने 1996 में अशोक साहू नामक कारोबारी को सिर्फ इसीलिए मरवा दिया था क्योंकि उन्होंने गलती से उसके भाई अशरफ की गाड़ी को ओवरटेक किया था। अशोक साहू ने बाद में अतीक अहमद के घर जाकर माफ़ी भी माँगी, उसने आश्वासन भी दिया लेकिन 2 दिनों बाद ही मरवा दिया। इसी तरह जयश्री कुशवाहा नामक महिला के पति को उसने गायब करवा दिया। उन पर कई बार हमले किए। जयश्री के बेटे पर गोलीबारी करवाई।

जयश्री 33 वर्षों से उससे लड़ रही थीं। 1989 से ही उन्हें नहीं पता है कि उनके पति आखिर गए कहाँ। उनकी 12 बीघा जमीन अतीक अहमद ने हड़प ली थी, सो अलग। राजू पाल हत्याकांड में गवाह थे उमेश पाल, उन्हें भी अतीक अहमद ने इस साल 24 फरवरी को मरवा दिया। उसका बेटा CCTV में गोलीबारी करते हुए कैद हुआ। उमेश पाल के साथ-साथ यूपी पुलिस के जवानों संदीप निषाद और राघवेंद्र सिंह को की भी उसके गुंडों ने हत्या कर दी।

ये तो अतीक अहमद की वो करतूतें हैं, जो चर्चा में रहे। भले ही वो इलाहाबाद पश्चिम से लगातार 5 बार विधायक और फूलपुर से सांसद रहा हो, लेकिन इस तरह के माफिया चुनाव जीतने के लिए किस तरह के हथकंडों का सहारा लेते है, ये किसी से छिपा नहीं है। सीवान में शहाबुद्दीन किस तरह की क्रूरता कर के सांसद बनता था, ये हर एक बिहारी को पता है। अतीक अहमद के खौफ का आलम इसी से समझ लीजिए कि उसकी सैकड़ों करोड़ रुपयों की अवैध संपत्ति ध्वस्त या जब्त की जा चुकी है।

ये संपत्ति उसने कैसे बनाई होगी, आप ही सोच लीजिए? जयश्री कुशवाहा जैसी कितनी पीड़िताएँ होंगी, इसका अंदाज़ा लगाना मुश्किल है। मुलायम सिंह यादव की पार्टी सपा ने उत्तर प्रदेश में 2 दशकों में 12 वर्षों तक राज़ किया। जब सपा जाती थी तो बसपा को सत्ता मिलती थी। दोनों ही पार्टियों ने अपने-अपने गुंडे-बदमाश पाल रखे थे। अतीक अहमद पर मुलायम सिंह यादव की विशेष कृपा थी। अतीक के कुत्ते से मुलायम की हाथ मिलाती हुई तस्वीर आपने देखी ही होगी।

ऊपर से, उत्तर प्रदेश के पुलिस-प्रशासन में भी कई ऐसे अधिकारी थे जो अतीक अहमद की खुली मदद करते थे। जिस व्यक्ति को पुलिस-प्रशासन और सत्ता का सीधा संरक्षण हासिल हो, सोचिए उसका कोई कैसे कुछ बिगाड़ सकता है? उसके खिलाफ आवाज़ उठाने पर व्यक्ति के साथ क्या हो सकता था, कई उदाहरण हमने देख लिए। उसके खिलाफ चुनाव जीतने, गाड़ी ओवरटेक करने और अपनी जमीन देने की एक ही ‘सज़ा’ थी और वो थी मौत।

अब ज़रा अतीक अहमद और उसके भाई की हत्या पर विदेशी मीडिया का प्रोपेगंडा देखिए। सबसे पहले बात करते हैं BBC की, जिसने ब्रिटेन के लेस्टर और बर्मिंघम में हिन्दुओं के खिलाफ हुई मुस्लिम भीड़ की हिंसा पर भी जम कर प्रोपेगंडा फैलाया था। बीबीसी ने पीड़ित हिन्दुओं को ही गुंडा दिखाने का ठेका उठा लिया था। उसने ताज़ा घटना पर शीर्षक लिखा, “भारतीय माफिया डॉन से राजनेता बने व्यक्ति की बेशर्मी से हत्या।” सोचिए, एक गुंडे से इतनी सहानुभूति।

सबसे बड़ी बात कि इस लेख को लिखने वाली गीता पांडेय एक भारतीय ही हैं। इसमें अतीक अहमद का महिमामंडन करते हुए हुए मानबूत कद-काठी का व्यक्ति बताया गया है। सबसे बड़ी विडम्बना ये देखिए कि इसमें कपिल सिब्बल के बयान को प्राथमिकता दी गई है, जो लम्बे समय तक कॉन्ग्रेस के नेता रहे हैं और अब उत्तर प्रदेश में मुख्य विपक्षी पार्टी सपा के समर्थन से राज्यसभा सांसद हैं। BBC ने लिखा है कि अतीक अहमद का जन्म गरीब परिवार में हुआ था, लेकिन उसकी करतूतों के बारे में कुछ नहीं लिखा।

उत्तर प्रदेश के पूर्व DGP विक्रम सिंह के हवाले से उसे ‘रॉबिनहुड’ तक लिखा गया। कितने गरीबों को अतीक अहमद ने फायदा पहुँचाया? उसने तो खुद के लिए हजारों करोड़ रुपयों की संपत्ति बना ली। जिन्हें उसने प्रताड़ित किया, उनमें अधिकतर गरीब ही हैं। फिर वो ‘रॉबिनहुड’ कैसे? उसे प्रभावशाली लिखा गया है। लेकिन, BBC लिखता है – अतीक अहमद गरीबों की मदद करता था, ईद पर और शादी-ब्याह में पैसे देता था और गरीब महिलाओं को उनके बच्चों की शिक्षा-दीक्षा के लिए यूनिफॉर्म-किताबें खरीदने में मदद करता था।

ये वैसा ही है, जैसे दुनिया भर में हजारों की जान लेने वाले ओसामा बिन लादेन को ‘अच्छा अब्बा और अच्छा शौहर’ कह कर उसने गुनाहों को माफ़ करने की बात की जाए। भाजपा को हिन्दू राष्ट्रवादी पार्टी बताते हुए BBC ने लिखा है कि इसके सत्ता में आने के बाद से इसका प्रभाव घटने लगा। उमेश पाल की हत्या की सीसीटीवी फुटेज में अतीक अहमद का बेटा असद साफ़-साफ़ दिख रहा है, फिर भी BBC उन्हें हत्या का आरोपित ही लिखता है।

अंत में, अगर ‘इस्लामोफोबिया’ वाला प्रोपेगंडा न चलाए तो भला बीबीसी काहे का? ब्रिटेन के सरकारी मीडिया संस्थान अपने लेख में अब एक अज्ञात मुस्लिम को लेकर आता है। साथ ही उसके हवाले से लिखता है कि अतीक अहमद को इसीलिए निशाना बनाया गया क्योंकि वो मुस्लिम था। साथ ही अपील करता है कि राजनेता सब कुछ हिन्दू-मुस्लिम के चश्मे से न देखें। अजीब है ना? यही लोग तो कहते हैं कि अपराधियों का कोई मजहब नहीं होता, तो अब क्या हुआ? हिन्दू-मुस्लिम तो यही कर रहे और दूसरों को सलाह दे रहे कि मत करो।

इसी तरह अब अमेरिका के एक प्रमुख मीडिया संस्थान CNN को ले लीजिए। उसने अतीक अहमद को ‘पूर्व राजनेता’ लिख कर संबोधित किया है। साथ ही उसने हत्यारों पर ‘धार्मिक हिन्दू नारे’ लगाने का आरोप लगाया। क्या दुनिया भर में ‘अल्ला-हू-अकबर’ चिल्ला कर गला रेते जाने की घटनाओं पर भी CNN इस बेबाकी से लिखता है? एक अनाम अधिकारी के हवाले से लिख दिया गया कि शांति के लिए विरोध प्रदर्शनों को रोक दिया गया है।

साथ ही उसने उत्तर प्रदेश पुलिस के साथ एनकाउंटर में मारे गए 180 अपराधियों को ‘Suspected Criminals’ लिखा है, अर्थात जिन्हें अपराधी समझा जा रहा हो। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के बयान को इस लेख में प्राथमिकता दी गई है। आप सोचिए, अगर अमेरिका में कोई आतंकी हमला हो और आतकियों का महिमामंडन बाहर की मीडिया करने लगे तो फिर इसे वहाँ की मीडिया गलत कहेगी या नहीं? दूसरे देशों के मामलों पर उनका ये दोहरा रवैया सामने आ जाता है।

इसी तरह, न्यूयॉर्क टाइम्स (NYT) की तो पूछिए ही मत। मीडिया संस्थान कई बार भारत विरोधी लेख खुले तौर पर लिख चुका है। इसने इस घटना को ‘असाधारण’ करार दिया। आजकल मोबाइल कैमरों का जमाना है, दुनिया भर में अधिकतर घटनाएँ कैमरे में कैद हो जाती हैं। NYT इसे ‘अवैधानिक हत्या’ लिखता है और उत्तर प्रदेश सरकार को ‘धार्मिक एजेंडे’ वाला लिखता है। अमेरिका में तो राष्ट्रपति ही बाइबिल पर हाथ रख कर शपथ लेते हैं, तो क्या वहाँ के प्रेजिडेंट को मजहबी नहीं कहा जा सकता?

NYT ने भारत और हिन्दुओं के खिलाफ प्रोपेगंडा के लिए तीन-तीन लेखकों से इस लेख को लिखवाया है। यूपी पुलिस के एनकाउंटर्स को ‘Extrajudicial’ हत्याएँ लिखा गया है। योगी सरकार को ‘हिन्दू राष्ट्रवादी’ जोर देकर लिखा गया है। क्या हिन्दू होना गुनाह है या फिर राष्ट्रवादी? भारत को धार्मिक आधार पर ध्रुवीकरण वाला समाज कहा गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा भगवा कपड़े पहने जाने पर भी सवाल उठाया गया है।

वो गोरखनाथ स्थित गोरक्षधाम के महंत हैं, पीठाधीश्वर हैं, ऐसे में क्या उन्हें मठ के नियमों के हिसाब से कपड़े पहनने के लिए अमेरिका की अनुमति लेनी होगी? ‘अशोका यूनिवर्सिटी’ के प्रोफेसर से बयान लिया गया है, जो भारत विरोधियों का अड्डा रहा है। NYT ने एक तरह से अपने पूरे लेख में बिना कोई सबूत के किसी भी ऐरे-गैर का बयान लेकर कुछ भी आरोप लगा दिए हैं। क्या NYT, BBC या CNN ने पिछले 44 वर्षों में अतीक अहमद के गुनाहों पर एक भी रिपोर्ट लिखी होगी?

किसी ने घर बुलाकर किया सेक्स, किसी ने स्कूल बिल्डिंग में ही बनाए संबंध: छात्रों के यौन शोषण में US की 6 महिला टीचर गिरफ्तार, स्नैपचैट पर भेजती थी न्यूड तस्वीरें

अमेरिका के अलग-अलग हिस्सों से पिछले 2 दिनों में 6 महिला टीचरों के अपने छात्रों से यौन संबंध बनाने के मामले सामने आए हैं। इन सभी पर यौन दुराचार के तहत केस दर्ज किया गया था। अरोपित महिला टीचरों की उम्र पीड़ित छात्रों से कहीं अधिक बताई जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पहला मामला डैनविल का है। यहाँ की 38 वर्षीया एलेन शेल वुडलॉन एलीमेंट्री स्कूल में सहायक शिक्षिका के तौर पर काम करती हैं। उन पर जुलाई-अगस्त 2022 में उसी स्कूल के 16 साल के 2 अलग-अलग छात्रों के साथ कई मौकों पर सेक्स करने का आरोप है। मामला दर्ज होने के बाद एलेन शेल को छुट्टी पर भेज दिया गया था। अब गुरुवार (13 अप्रैल 2023) को एलेन को गिरफ्तार कर के गैरार्ड काउंटी डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में पेश किया गया। अमेरिकी कानून के मुताबिक महिला टीचर का अपराध थर्ड डिग्री श्रेणी में आता है।

दूसरे केस में अमेरिका के ही अरकंसास में 32 साल की टीचर हीदर हरे पर एक नाबालिग छात्र से सेक्स करने का आरोप लगा है। अमेरिकी कानून ने इसे फर्स्ट डिग्री अपराध माना है। हीदर को लगभग साढ़े 3 घंटे जेल में बिताना पड़ा। बाद में उन्हें 15 हजार डॉलर की जमानत पर छोड़ा गया। 1 अप्रैल 2023 को हीदर हरे ने स्कूल की नौकरी से इस्तीफा दे दिया था।

तीसरा केस ओक्लाहोमा से है। यहाँ वेलस्टन पब्लिक स्कूल की 26 वर्षीया शिक्षिका एमिली हैनकॉक को अप्रैल 2023 में पुलिस ने गिरफ्तार किया था। उन पर अपने एक 15 साल के नाबालिग छात्र के साथ अवैध संबंधों का आरोप है। आरोप है कि महिला टीचर ने थोड़े समय की बातचीत के बाद अपने छात्र को अपनी नंगी तस्वीरें स्नैपचैट पर भी भेजी थीं। अदालत ने कहा कि आरोपित टीचर ने अपने छात्र से स्कूल की ही बिल्डिंग में यौन संबंध बनाए थे।

इस कड़ी में चौथा मामला 36 साल की महिला टीचर क्रिस्टन गैंट से जुड़ा हुआ है। वो डेस मोइनेस स्थित आयोवा के एक कैथोलिक हाईस्कूल में इंग्लिश पढ़ाया करती थीं। उन्हें शुक्रवार (14 अप्रैल 2023) को अपने ही स्कूल के एक नाबालिग छात्र से स्कूल के अंदर और बाहर 5 अलग-अलग मौकों पर सेक्स करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। आरोप है कि महिला टीचर ने अपने छात्र को सोशल मीडिया पर सम्पर्क किया। उन्हें एक CCTV फुटेज में पीड़ित छात्र के साथ अकेले क्लासरूम में जाते भी देखा गया है जिसमें खिड़की पर कागज लगाया गया था। अरोपिता को स्कूल से निकाल दिया गया है।

पाँचवाँ मामला वर्जीनिया का है। यहाँ के जेम्स मैडिसन हाई स्कूल में पढ़ाने वाली एक 33 साल की टीचर एलीह खेरदमंद को एक छात्र के साथ कई माह तक यौन संबंध बनाने के मामले में आरोपित किया गया है। आरोपित टीचर इस स्कूल में साल 2015 से कार्यकर्त थीं। उनकी गिरफ्तारी गुरुवार (13 अप्रैल 2023) को हुई है। एलीह पर 4 अलग-अलग मामले दर्ज किए गए हैं।

छठा मामला पेंसिल्वेनिया का है। यहाँ एक स्कूल में भाला फेंक खेल की कोच पर अपने 17 साल के छात्र से यौन संबंध बनाने का आरोप लगा है। आरोपित का नाम हन्ना मार्थ है जिनकी उम्र 25 वर्ष है। उन पर आरोप है कि मई 2021 में उन्होंने अपने छात्र को अपने घर पर बुलाया था और वहीं उसके साथ सेक्स किया। पीड़ित छात्र ने बताया कि उसके हन्ना के साथ अक्टूबर 2022 में भी नाजायज संबंध बने थे। हन्ना को गुरुवार (13 अप्रैल 2023) को गिरफ्तार किया गया था। आखिरकार उन्हें 75 हजार डॉलर की जमानत पर छोड़ दिया गया।

उत्तराखंड में गंगा किनारे भी लैंड जिहाद, बोले CM धामी- 1000 मजार की हुई पहचान, हटाने का अभियान शुरू

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश को लैंड जिहाद से पूरी तरह से मुक्त करने का संकल्प लिया है। उन्होंने देवभूमि पर मजार जिहाद को सफल न होने देने का ऐलान किया है। 1 हजार स्थान चिन्हित करने की जानकारी देते हुए सीएम धामी ने माना कि गंगा नदी के आस-पास भी तमाम स्थानों पर अतिक्रमण किया गया था। ऑपइंडिया ने अपनी पिछली कई रिपोर्ट्स में धर्मनगरी, पर्यटन स्थलों और वन क्षेत्रों में हुए अतिक्रमण को सिलसिलेवार ढंग से बताया था।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी 16 अप्रैल 2023 (रविवार) को ऋषिकेश के दौरे पर थे। इस दौरान उन्होंने परमार्थ निकेतन में गंगा आरती में भी हिस्सा लिया। इस आयोजन के बाद धामी ने वहाँ मौजूद लोगों को सम्बोधित किया। उन्होंने कहा, “आस-पास और गंगा जी के तटों पर जो अनेक प्रकार का अतिक्रमण हुआ है हमने तय किया है कि उत्तराखंड के अंदर जो लैंड जिहाद के नाम पर, जो मजार जिहाद के नाम पर उसको हम किसी भी कीमत पर नहीं होने देंगे। हमने उन अतिक्रमण को हटाने का अभियान प्रारंभ कर दिया है।”

जानकारी के मुताबिक CM पुष्कर सिंह धामी ने खुद से चिन्हित किए गए ऐसे अतिक्रमण की तादाद 1 हजार बताई है। CM धामी के इस बयान का ऋषिकेश में मौजूद संतों और श्रद्धालुओं ने तालियाँ बजा कर स्वागत भी किया है। उनके बयान का 37 सेकेण्ड का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल ही हो गया है।

गौरतलब है कि ऑपइंडिया उत्तराखंड में हो रहे डेमोग्राफिक बदलाव, लैंड जिहाद, अवैध मजार और मदरसों को लेकर साल 2021 से समय-समय पर रिपोर्ट करता रहा है। इन रिपोर्ट्स में जिम कार्बेट में बनी मजारों का खुलासा और हल्द्वानी में अवैध तौर पर कब्जाई रेलवे की भूमि का भी असल सच बताना शामिल है। सीएम धामी ने 22 मई 2022 को एक बयान में पहाड़ों पर बनती अवैध मजारों पर चिंता जताई थी। इसके बाद धामी सरकार ने दिसंबर 2022 और मार्च 2023 में कार्रवाई करते हुए 41 अवैध मजारों को ध्वस्त कर दिया था। अब सरकार ने 1000 अवैध अवैध मजारों की एक बार फिर लिस्ट बनाकर बुलडोजर चलाने की कार्रवाई शुरू करने जा रही है।

सुप्रीम कोर्ट पहुँचा अतीक-अशरफ का मामला, UP में हुए 183 एनकाउंटर की जाँच की माँग: कभी माफिया से जुड़ी याचिका पर सुनवाई से अलग हो गए थे 10 जज

प्रयागराज में अतीक अहमद और अशरफ की हत्या के बाद सुप्रीम कोर्ट में उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा हुई तमाम मुठभेड़ों की जाँच की माँग की गई है। इस माँग की एक याचिका वकील विशाल तिवारी द्वारा दायर की गई है। याचिका में विशाल तिवारी ने साल 2017 से अब तक हुए 183 एनकाउंटर की स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति से जाँच की अपील की है। इस याचिका में अतीक और अशरफ की हत्या की जाँच की माँग भी शामिल है जो फिलहाल UP पुलिस कर रही है। इसी याचिका में एडवोकेट तिवारी ने UP पुलिस को ‘डेयरडेविल्स’ कहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक याचिकाकर्ता विशाल तिवारी सुप्रीम कोर्ट के वकील हैं। उन्होंने इस जनहित याचिका के माध्यम से उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा की जा रही मुठभेड़ों पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा, “उत्तर प्रदेश पुलिस अपने आपको खतरों का खिलाड़ी (डेयरडेविल्स) बनाने की कोशिश कर रही है। ये जनहित याचिका कानून के नियम के उल्लंघन और पुलिस बर्बरता के खिलाफ आर्टिकल 32 के अंतर्गत दायर की जा रही है।”

इस याचिका में विकास दुबे एनकाउंटर की जाँच की माँग है। साथ ही अतीक-अशरफ अहमद की हत्या की जाँच की माँग है। याचिका में कहा गया कि इस तरह की कार्रवाई लोकतंत्र और कानून के विधान पर खतरा हैं। एनकाउंटर की निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए वरना ऐसी हरकतों से अराजकता फैलती है और राज्य में पुलिस तंत्र की स्थापना होती है।

याचिका में विशाल तिवारी ने सुप्रीम कोर्ट से साल 2017 के बाद उत्तर प्रदेश में हुई सभी 183 मुठभेड़ों की एक स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति से जाँच कराए जाने की उम्मीद जताई है। उन्होंने इस समिति का अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट के ही किसी पूर्व न्यायाधीश को बनाने की माँग की है। याचिकाकर्ता ने अपनी PIL (जनहित याचिका) को दमन और बर्बरता के खिलाफ बताया है।

मुस्लिमों ने ही खड़े किए सवाल

विशाल तिवारी की इस जनहित याचिका को मुस्लिम समाज में शक की नजर से देखा जा रहा है। कई लोगों का कहना है कि विशाल तिवारी की यह याचिका एक साजिश भी हो सकती है कमजोर दलीलें देकर सुप्रीम कोर्ट से मामले को रफा-दफा कराने की। इस मामले पर भारत सरकार के केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड के पूर्व सदस्य और फिलहाल में ‘वालेंटियर्स अगेंस्ट हेट’ नामक संगठन से जुड़े डॉ मेराज हुसैन ने लिखा, “ये विशाल तिवारी कौन है ? कई बार ऐसा होता है कि कमजोर सा केस फाइल करके उसे रिजेक्ट करा दो कि कोई और मूव न कर पाए। ये उसी गैंग का मेंबर तो नहीं ?’

मोहम्मद सोहैल ने भी डॉ मेराज हुसैन की हाँ में हाँ मिलाई है। नसरत खान ने विशाल तिवारी को देशद्रोही बताया है। इसके अलावा इरफ़ान अहमद ने लिखा, “ये इसलिए दायर की गई है कि बयान या जवाबदारी न देना पड़े। सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन बता कर चुप रहने के लिए।” इन सभी के अलावा कई अन्य यूजर्स ने भी विशाल तिवारी की मंशा पर शंका जाहिर की।

अतीक और अशरफ पर वकील उमेश पाल की हत्या का आरोप है। गौरतलब है कि साल 2012 में जब अतीक अहमद जेल में बंद था तब UP में होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए उसने जमानत अर्जी दाखिल की थी। इस सुनवाई से 10 जजों ने खुद को अलग कर लिया था। आख़िरकार 11 वें जज ने अतीक का केस सुना था और उसे जमानत दे दी थी।

‘भाई मैं इतना नहीं चल पाऊँगी’ : शौहर मुफ्ती अनस के खींचने पर बोलीं प्रेग्नेंट सना खान, Video देख लोग मौलाना पर भड़के

बॉलीवुड की दुनिया छोड़कर इस्लाम का रुख करने वाली सना खान इस समय प्रेग्नेंट हैं। उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है जिसमें उनका मौलवी शौहर मुफ्ती अनस उनका हाथ पकड़कर तेजी में कहीं लेकर जा रहा है। वहीं सना परेशान होकर कह रही हैं कि उनसे इतनी तेज नहीं चला जाएगा।

इस वीडियो को ViralBhayani ने अपने इंस्टा पर शेयर किया है। वीडियो में सना को कहते सुना जा सकता है, “भाई मैं इतना नहीं चल पाऊँगी।”

इस वीडियो को देखने के बाद यूजर्स की अलग-अलग प्रतिक्रिया आ रही है। कुछ यूजर्स इसे ‘गैरजिम्मेदाराना व्यवहार’ बता रहे हैं तो कुछ इसे ‘केयर’ कह रहे हैं। फिल्मीकरोना नाम के यूजर ने कहा, “ये इन्हें इस तरह क्यों घसीट रहा है… वे प्रेग्नेंट हैं। बेवकूफाना रवैया।”

एक यूजर ने कहा, “अपनी प्रेग्नेंट बीवी के साथ ये कोई व्यवहार नहीं है करने वाला।” वहीं एक मुस्लिम यूजर ने इस बर्ताव का बचाव करते हुए कहा, “वो सिर्फ सना को कैमरों से बचा रहा था क्योंकि हमारी शरीयत में कहा जाता है कि शैतानी नजरें गर्भवती औरतों पर असर डालती हैं।”

बता दें कि वायरल भयानी की वीडियो पर सना खान का भी कमेंट आया है। सना ने लिखा, “ये वीडियो अभी मेरी नोटिस में आया। मुझे मालूम है कि मेरे भाई-बहनों को इस तरह देखना अजीब लग रहा होगा। दरअसल, हम लोग बाहर आने के बाद कार और ड्राइवर से संपर्क खो चुके थे। मुझे खड़े खड़े पसीने आ रहे थे। नैं असहज थीष। इसिलए वो मुझे अंदर ले जा रहे थे ताकि कुछ पानी पी पाऊँ और हवा लग सके।”

सना ने सफाई देते हुए कहा, “मैंने ही उन्हें कहा था कि जल्दी से अंदर चलें। हम लोग पैपराजियों को तंग नहीं करना चाहते थे जो हमारी फोटों खींच रहे थे। इसलिए गुजारिश है कि वीडियो देखकर कुछ और न सोचें। फिक्र दिखाने के लिए एक बार फिर से धन्यवाद।”

बता दें कि सना और मुफ्ती अनस का यह वीडियो बाबा सिद्दीकी की इफ्तार पार्टी का है। दोनों लोग इस पार्टी में शामिल होने गए थे। हालाँकि सना की वहाँ तबीयत बिगड़ गई और अनस को हड़बड़ी में उन्हें बैठाने के लिए अलग ले जाना पड़ा। वीडियो में पीछे फोटोग्राफर्स की भीड़ देखी जा सकती है।

‘गौमूत्र पियो थोड़ी अक्ल आएगी’ : उद्धव ठाकरे ने फिर उड़ाया हिंदुत्व का मजाक, RSS-BJP को कहा- ‘वे गौमूत्रधारी, हम राष्ट्रवादी’

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री व शिवसेना नेता उद्धव ठाकरे ने अपने हिंदुत्व की परिभाषा को भाजपा के हिंदुत्व की परिभाषा से अलग बताया है। उन्होंने कहा है कि उनका हिंदुत्व का अर्थ ‘राष्ट्रवाद’ से है जबकि भाजपा के हिंदुत्व का अर्थ ‘गौमूत्र’ से संबंधी है। उनका यह बयान महा विकास अघाड़ी द्वारा नागपुर में किए गए एकता और शक्ति प्रदर्शन के दौरान दिया गया।

उद्धव ठाकरे ने अपने कॉन्ग्रेस के साथ गठबंधन की बात पर सफाई देते समय गौमूत्र का मजाक उड़ाया। वह बोले, “हर बार मुझपर आरोप लगाते हैं कि मैं कॉन्ग्रेस के साथ चला गया और हिंदुत्व को छोड़ दिया, क्या कॉन्ग्रेस में हिंदू नहीं हैं? उनका (आरएसएस-भाजपा) हिंदुत्व ‘गौमूत्रधारी हिंदुत्व’ है। उन्होंने संभाजीनगर में उस जगह पर गौमूत्र छिड़का, जहाँ हमने अपनी जनसभा की थी। उन लोगों को खुद भी थोड़ा गौमूत्र पीना चाहिए ताकि उन्हें थोड़ी अक्ल आए। हमारा हिंदुत्व राष्ट्रवाद के बारे में हैं।”

उद्धव बोले, “एक तरफ बीजेपी हनुमान चालीसा पढ़ती है और दूसरी तरफ मस्जिदों में जाकर कव्वाली सुनते हैं। क्या यह उनका हिंदुत्व है। वे यूपी में जाकर हिंदुत्व की बात करते हैं? क्या ये उनका हिंदुत्व है? हमारा हिंदुत्व देश के लिए जीवन बलिदान और उनका हिंदुत्व केवल दिखावा है।”

ऐसा पहली बार नहीं है कि उद्धव ठाकरे ने गौमूत्र का मजाक बनाया हो। 5 मार्च 2023 को दिए बयान में भी उन्होंने कहा था कि गौमूत्र छिड़कने से देश को आजादी नहीं मिली। उन्होंने विवादित बयान देते हुए कहा था, “क्या हमारे देश को गौमूत्र छिड़कने से आजादी मिली थी? क्या ऐसा हुआ था कि गौमूत्र छिड़का गया और हमें आजादी मिली? ऐसा नहीं था, स्वतंत्रता सेनानियों ने बलिदान दिया था। तब कहीं जाकर हमें आजादी मिली थी।”

गौरतलब है कि हाल में उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को अयोध्या में राम मंदिर के दर्शन करने पर भी निशाना साधा था। ठाकरे ने कहा था कि राज्य में किसान ओलावृष्टि और बेमौसम बारिश से पीड़ित थे लेकिन राज्य के सीएम अयोध्या दर्शन के लिए गए थे। वहीं भाजपा को लेकर कहा था कि उन्होंने लोकतंत्र के मूल्यों की हत्या कर दी है। वह सिर्फ अडानी समूह की मदद कर रहे हैं।

‘PM मोदी दुनिया के सबसे लोकप्रिय नेता’: प्रधानमंत्री की मुरीद हुईं अमेरिका की वाणिज्य सचिव, कहा- ‘भारतीयों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता बता नहीं सकती’

अमेरिका की वाणिज्य सचिव जीना रायमोंडो (Gina Raimondo) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) की तारीफ की है। रायमोंडो ने पीएम मोदी को दुनिया का सबसे लोकप्रिय नेता बताते हुए कहा है भारत दौरे पर उन्हें पीएम मोदी के साथ डेढ़ घंटे का समय बिताने का मिला। भारतीयों के लिए पीएम मोदी बहुत अधिक प्रतिबद्ध हैं।

दरअसल, जीना रायमोंडो गत माह 7-10 मार्च तक भारत दौरे पर थीं। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से भी मुलाकात की थी। इस बीच शनिवार (15 अप्रैल, 2023) को अमेरिका स्थित इंडिया हाउस में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा है, “मुझे प्रधानमंत्री मोदी के साथ डेढ़ घंटे से अधिक समय बिताने का मौका मिला। उनसे मुलाकात अविश्वसनीय थी। वह दुनिया के सबसे लोकप्रिय नेता हैं।”

रायमोंडो ने आगे कहा है, “मोदी अविश्वसनीय और दूरदर्शी हैं। भारत के लोगों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता के स्तर को बयान नहीं किया जा सकता। वह भारत के लोगों को गरीबी से बाहर निकालने और देश को वैश्विक शक्ति के रूप में आगे बढ़ाने में उनकी इच्छा शक्ति वास्तविक है। इसको लेकर वह लगातार काम भी कर रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी के साथ मुलाकात का यह यह सबसे अच्छा हिस्सा था।”

उन्होंने आगे कहा है, “जो कोई भी पीएम मोदी को जानता है उसे यह पता होगा कि वह एक तकनीकी व्यक्ति हैं और टेक्नोलॉजी को लेकर विस्तार पूर्वक बातचीत करते है। इसलिए, जब मैंने उनसे शुक्रवार की रात 7:30 बजे उनके घर पर मुलाकात की, तब वह रेडियो एक्सेस नेटवर्क और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर बात कर रहे थे। यह बेहद हैरान करने वाला था।”

अमेरिकी वाणिज्य सचिव जीना रायमोंडो ने आगे कहा है, “मैंने उनसे कहा है कि टेक्नोलॉजी के इस दौर में भारत और अमेरिका को मिलकर इस दुनिया का नेतृत्व करने की आवश्यकता है। पूरे सप्ताह यात्रा करने के बाद, पीएम मोदी ने मुझसे कहा ठीक है। AI का मतलब सिर्फ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस नहीं बल्कि अमेरिका-इंडिया टेक्नोलॉजी सिस्टम है।”

जब अतीक अहमद ने UPA सरकार को गिरने से बचाने में की थी मदद: जेल से किया गया था रिहा, किताब में 2008 के वाकये को लेकर खुलासा

माफिया अतीक अहमद लगातार 5 बार इलाहाबाद पश्चिम से विधायक रहा है। 1989, 1991, 1993, 1996 और 2002 – वो 5 बार जीत कर लगातार 15 वर्षों तक विधायक बना रहा। पहले 3 बार उसने बतौर निर्दलीय और फिर समाजवादी पार्टी और उसके बाद ‘अपना दल’ के टिकट पर चुनाव लड़ा। 2004 के लोकसभा चुनाव में उसने फूलपुर से बतौर सपा प्रत्याशी जीत दर्ज की। इसी साल केंद्र में UPA की सरकार भी बनी।

ये तो आपको पता ही होगा कि कॉन्ग्रेस UPA गठबंधन की सबसे बड़ी पार्टी थी और डॉक्टर मनमोहन सिंह को भले ही प्रधानमंत्री बनाया गया था, सत्ता की असली बागडोर सोनिया गाँधी के हाथ में थी। अब अतीक अहमद और उसका भाई अशरफ मारा जा चुका है। उसके बेटे असद का एनकाउंटर हो चुका है। लेकिन, कभी प्रयागराज में खौफ का दूसरा नाम रहा अतीक अहमद जब सांसद बन बैठा था तब उसने UPA सरकार की मदद की थी।

2004 वो साल था, जब वामपंथी दलों ने 43 सीटें जीत कर लोकसभा में अपनी अच्छी-खासी धमक बनाई थी। लेकिन, 2008 में अमेरिका के साथ परमाणु समझौते से खफा होकर उन्होंने यूपीए से समर्थन वापस ले लिया था। ऐसे समय में मुलायम सिंह यादव की सपा ने 36 सांसदों के साथ UPA की सरकार बचाई थी। राजेश सिंह द्वारा लिखित पुस्तक ‘BAAHUBALIS OF INDIAN POLITICS: From Bullet to Ballot’ में इस संबंध में एक खुलासा है।

इसमें बताया गया है कि अतीक अहमद समेत 6 अपराधी सांसदों को तब 48 घंटे के भीतर रिहा कर दिया गया था, ताकि वो वोट देकर संप्रग की सरकार बना सकें। इनमें अतीक अहमद का नाम भी शामिल था अतीक अहमद ने जेल से निकल कर UPA सरकार के पक्ष में संसद में वोट डाला था। उस समय UPA के 228 सदस्य थे और उसे 44 सांसदों की ज़रूरत थी। सपा के अलावा रालोद और जेडीएस ने भी तब कॉन्ग्रेस का समर्थन किया था।

अतीक अहमद को 8 तो भाई अशरफ को लगीं 5 गोलियाँ… जिस प्रयागराज में पैदा किया था खौफ, वहीं की मिट्टी में दफ़न हुए दोनों: नहीं पहुँची बीवी शाइस्ता

लंबे समय तक प्रयागराज में खौफ का दूसरा नाम रहे अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ को प्रयागराज के कब्रिस्तान में ही दफना दिया गया। इससे पहले, अतीक और अशरफ की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट सामने आई थी। इस रिपोर्ट के अनुसार अतीक को 8 गोलियाँ और अशरफ को 5 गोलियाँ लगी थीं। दोनों की हत्या शनिवार (15 अप्रैल, 2023) को हुई।

अतीक और अशरफ को प्रयागराज के कसारी-मसारी कब्रिस्तान में दफनाया गया। यहीं उसके बेटे असद को भी दफनाया गया था। कब्रिस्तान के अंदर अतीक और अशरफ के करीबी रिश्तेदारों को ही जाने दिया गया था। इसमें अशरफ की दोनों बेटियाँ और अतीक के दोनों बेटों का नाम शामिल है। उमेश पाल हत्या कांड के बाद से अतीक के दोनों बेटों को राजरूपपुर स्थित बाल सुधार गृह में रखा गया है। कहा जा रहा था कि इस दौरान अतीक की फरार पत्नी शाहिस्ता सरेंडर कर सकती है। लेकिन, वह नहीं पहुँची।

अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की प्रयागराज में काल्विन हॉस्पिटल के सामने गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। हत्या के लिए 3 हमलावर मीडियाकर्मी बनकर आए थे। मीडिया से बात करते समय हमलावरों ने दोनों को गोलियों से भून दिया था। फिलहाल तीनों हमलावर पुलिस की गिरफ्त में हैं। उनसे पूछताछ की जा रही है। वहीं, रविवार (16 अप्रैल, 2023) को अतीक और अशरफ का पोस्टमॉर्टम हुआ। इस पूरे पोस्टमॉर्टम की वीडियोग्राफी कराई गई है।

इस रिपोर्ट के अनुसार, अतीक और अशरफ पर हमलावरों ने ताबड़तोड़ गोलियाँ बरसाई थीं। अतीक के शरीर में कुल 8 गोलियाँ लगीं, वहीं अशरफ को 5 गोलियाँ मारी गईं। अतीक को गोलियाँ उसके सिर, गर्दन, छाती और कमर में मारी गई थी। वहीं, अशरफ के गले, पीठ, कलाई, पेट और कमर में गोलियाँ लगीं। 3 गोलियाँ अशरफ के शरीर में मिलीं। वहीं, 2 गोलियाँ उसके शरीर को चीरते हुए पार कर गईं। पोस्टमॉर्टम के बाद दोनों के शव उनके परिजनों को सौंप दिए गए थे।