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नीतीश कुमार देख रहे दिल्ली का ख्वाब, आंबेडकर जयंती पर ‘खंडित भारत’ दिखा रही जदयू: बोली BJP- PFI और टुकड़े-टुकड़े गैंग का असर

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी है, जनता दल यूनाइटेड (JDU)। डॉक्टर भीमराव आंबेडकर की जयंती पर शुक्रवार (14 अप्रैल 2023) को जदयू ने एक ट्वीट किया। इस ट्वीट में भारत का अधूरा मैप दिखाया गया था। विरोध होने के बाद पार्टी ने यह ट्वीट डिलीट कर दिया है। बीजेपी का आरोप है कि ऐसा प्रतिबंधित इस्लामी संगठन पीएफआई के आकाओं को खुश करने के लिए किया गया था।

जदयू ने ‘खंडित भारत’ वाला ट्वीट ऐसे समय में किया है, जब नीतीश कुमार का ‘दिल्ली ख्वाब’ फिर से हिलोरे मारने लगा है। बिहार में रामनवमी शोभा यात्राओं पर हुए हमले के बीच वे एक ऐसी इफ्तार पार्टी में शामिल हुए थे, जिसके पीछे लालकिला दिखाया गया था। इसके जरिए राजनीतिक संदेश देने के बाद उन्होंने दिल्ली आकर काॅन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गाँधी और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से मुलाकात की। इन मुलाकातों के बाद उन्होंने 2024 के आम चुनावों से पहले बीजेपी के खिलाफ विपक्ष को एकजुट करने की बात कही। हालाँकि भविष्य में आकार लेने वाले ऐसे किसी गठबंधन का चेहरा कौन होगा, इस पर उन्होंने चुप्पी साध रखी है। लेकिन जानकार बताते हैं कि प्रधानमंत्री पद की उम्मीदवारी की आकांक्षा में ही नीतीश कुमार ने पिछले साल बिहार में बीजेपी के साथ गठबंधन तोड़ा था।

अब आंबेडकर जयंती पर किए गए ट्वीट में भारत का गलत नक्शा दिखाकर पार्टी विवादों में है। यह ट्वीट जनता दल यूनाइटेड के आधिकारिक अकाउंट से किया गया था। ट्वीट में कहा गया था, “समाज के हर पीड़ित और वंचित वर्ग के लिए न्याय और समानता की लंबी लड़ाई लड़ने वाले भारत रत्न बाबा साहेब डाॅक्टर भीमराव आंबेडकर की जयंती पर उन्हें कोटि कोटि नमन।” इसके साथ एक पोस्टर भी शेयर किया गया था। इस पोस्टर में भारत का नक्शा, संसद, आंबेडकर और नीतीश कुमार की तस्वीर दिखाई गई थी। लेकिन भारत का नक्शा अधूरा लगाया गया था। जम्मू-कश्मीर के आधे हिस्से को गायब कर दिया गया था।

इस ट्वीट को लेकर बीजेपी ने बिहार की सत्ताधारी पार्टी जदयू को घेरा है। बिहार बीजेपी ने ट्वीट कर कहा है, “बाबा साहेब की जयंती पर ही जनता दल यूनाइटेड के जमूरों ने खंडित भारत दिखाकर संविधान को तार-तार किया है। अपने पीएफआई के आकाओं और नए-नवेले दोस्तों को खुश करने के लिए आखिरकार इतना तो इन्हें करना ही पड़ेगा। लेकिन कान खोलकर सुन लो, जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग था, है और हमेशा रहेगा।”

वहीं, बिहार भाजपा के सोशल मीडिया प्रभारी मनन कृष्ण ने सिलसिलेवार ट्वीट कर सीएम नीतीश कुमार व जदयू अध्यक्ष ललन सिंह को घेरा है। एक ट्वीट में उन्होंने कहा है, “भारत के खंडित नक्शे का प्रयोग दिखलाता है कि पीएफआई और टुकड़े-टुकड़े गैंग के समर्थक इस पार्टी पर किस कदर हावी हो चुके हैं। बाबा साहब की जयंती के दिन किया गया यह अभद्र आचरण न केवल उनके समर्थकों बल्कि देश के हर एक नागरिक का अपमान है। देखना है कि बिहार पुलिस इस पर क्या कारवाई करती है।”

18000 गायों की झुलसकर मौत, ₹3 अरब का नुकसान: अमेरिका के सबसे बड़े डेयरी फार्म में भीषण हादसा, जिंदा बचीं सिर्फ 10% गायें

अमेरिका के टेक्सास में एक डेयरी फार्म में हुए विस्फोट में 18000 से अधिक गायों की मौत हो गई। विस्फोट के बाद आसपास के इलाकों में आग फैल गई। आग लगने का कारण अब तक पता नहीं चल सका है। घटना सोमवार (10 अप्रैल 2023) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, विस्फोट अमेरिका के टेक्सास प्रांत के डिमिट में साउथ फोर्क डेयरी फार्म में हुआ। विस्फोट और उससे लगी आग इतनी भयानक थी कि घटना स्थल पर घण्टों तक धुँए का गुबार दिखता रहा। घटना के समय गायों को दूध निकालने के लिए बाड़े पर खड़ा किया गया था। इसी दौरान यह हादसा हो गया। फायरब्रिगेड ने मौके पर पहुँचकर आग बुझाने की कोशिश की।

हालाँकि आग बुझाने में कई घण्टों का वक्त लग गया। आग बुझने पर पता चला कि डेयरी फार्म की 18000 से अधिक गायों की मौत हो गई। अब डेयरी फार्म में महज 10 प्रतिशत गायें ही बची हैं। यह डेयरी फार्म टेक्सास के सबसे बड़े दुग्ध उत्पादक फार्म में से एक था। आग लगने के बाद पूरा डेयरी फार्म जलकर तबाह हो चुका है। डेयरी फार्म की गाय की कीमत औसतन 2000 डॉलर यानी करीब 163000 रुपए थी। इस हादसे में फार्म के मालिक को करीब 3 अरब रुपए के नुकसान की आशंका जताई जा रही है।

डेयरी फार्म में आग लगने से एक व्यक्ति भी बुरी तरह झुलस गया। समय रहते फायर ब्रिगेड की टीम ने उसे बाहर निकाल लिया। अन्यथा उसकी भी मौत हो सकती थी। घायल व्यक्ति को इलाज के लिए हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। फिलहाल उसकी हालत खतरे से बाहर है। इस घटना की फोटो, वीडियो भी सामने आई है।

घटना पर, अमेरिका के सबसे पुराने पशु संरक्षण संगठनों में से एक एनिमल वेलफेयर इंस्टीट्यूट (AWI) ने चिंता जताई है। AWI ने कहा है कि अमेरिका के खलिहानों में आग लगने से हर साल सैकड़ों-हजारों पशु मारे जाते हैं। इसके बाद भी अमेरिका के कुछ राज्यों में ही पशुओं के लिए ऐसी इमारतें बनाई गईं हैं जो आग लगने से तबाह न हों। AWI ने यह भी कहा है कि जानवरों को आग से बचाने के लिए कुछ राज्‍यों में किसी प्रकार का कोई कानून नहीं है। इसके लिए कानून बनाया जाना चाहिए। कहा जा रहा है कि अमेरिका में बीते एक दशक में आग लगने से 65 लाख से अधिक पशु-पक्षियों की मौत हुई है।

‘हम 90 साल बाद मिलेंगे, प्लीज दोबारा जन्म मत लीजिएगा…’: पढ़िए सतीश कौशिक की बेटी वंशिका का वह लेटर जिसे सुन सबकी आँखों में आए आँसू

बॉलीवुड अभिनेता अनुपम खेर (Anupam Kher) ने गुरुवार (13 अप्रैल 2023) को अपने सबसे खास दोस्त दिवंगत सतीश कौशिक का 67वाँ जन्मदिन (Satish Kaushik Birthday) मनाया। डायरेक्टर-प्रोड्यूसर सतीश कौशिक के जन्मदिन की शाम ऑडिटोरियम में उनके दोस्त, उनके चाहने वाले और उनके साथ काम करने वाले लोग पहुँचे। इसमें अनिल कपूर, रानी मुखर्जी, सोनाली बेंद्रे, नीना गुप्ता, जॉनी लीवर, उदित नारायण, सुभाष घई जैसे कई बड़े नाम थे, जो चार घंटे चले इस इवेंट के आखिरी पल तक वहाँ मौजूद रहे।

इस दौरान सतीश कौशिक की बेटी वंशिका ने स्टेज से अपने पापा को लिखा एक इमोशनल लेटर सबके सामने पढ़ा, जिसे सुनने के बाद कोई भी अपने आँसू नहीं रोक पाया। वंशिका के साथ स्टेज पर अनुपम खेर भी मौजूद थे। अभिनेता ने अपने इंस्टाग्राम और ट्विटर अकाउंट पर वंशिका का लेटर पढ़ते हुए वीडियो भी शेयर किया है।

नीचे आप वंशिका का यह लेटर हूबहू उनके शब्दों में पढ़ सकते हैं;

हैलो पापा, मुझे पता है कि आप नहीं हैं लेकिन मैं आपको यह बताना चाहती हूँ कि मैं आपके लिए हमेशा रहूँगी। आपके सारे दोस्तों ने मुझे स्ट्रॉन्ग रहना सिखाया है। लेकिन मैं आपके बिना नहीं रह सकती। आपकी बहुत याद आती है। अगर मुझे पता होता कि ये होने वाला है, तो मैं आपके साथ ज्यादा से ज्यादा वक्त बिताने के लिए स्कूल नहीं जाती। काश मैं आपको एक बार गले लगा पाती, लेकिन अब आप कहीं चले गए हैं। आप हमेशा दिल में रहेंगे। काश जैसे फिल्मों में दिखाते हैं, वैसा कोई जादू हो जाता और आप जिंदा हो जाते। मुझे नहीं पता कि अब जब माँ मुझे होमवर्क नहीं करने पर डाँटेंगी, तो मैं क्या करूँगी। अब स्कूल जाने का भी मन नहीं करता है कि जो दोस्त मेरा मजाक उड़ाते हैं, उन्हें कैसे जवाब दूँगी। हर वक्त आपकी याद आती है। मैंने आपके लिए पूजा भी की है, क्योंकि मैं चाहती हूँ कि आप स्वर्ग में जाएँ और खुश रहें। वहाँ बड़े से बंगले में रहें और फरारी, बड़ी गाड़ियाँ चलाएँ। टेस्टी खाना खाएँ। कोई नहीं, हम 90 साल बाद मिलेंगे। प्लीज दोबारा जन्म मत लीजिएगा, हम वहीं मिलेंगे। प्लीज मुझे याद रखिएगा। मैं आपको हमेशा याद रखूँगी पापा। जब भी आँखें बंद करती हूँ और अपने दिल को छूती हूँ, तो आप नजर आते हैं। मुझे सही दिशा दें, ताकि मैं आगे बढ़ सकूँ। आप मेरी जिंदगी में हमेशा रहेंगे। आई लव यू… मुझे दुनिया के सबसे बेस्ट पापा मिले थे।

सोशल मीडिया पर भी वंशिका के इस लेटर ने सबको इमोशनल कर दिया है। आरती नागपाल ने लिखा, “कल आपने (अनुपम खेर) वंशिका के दिल के साथ न जाने कितने दिल जीते हैं। प्रभु आपको हिम्मत दें, लंबी उम्र दें और अच्छी सेहत दें, ताकि आप दुनिया को स्वयं के उदाहरण से निःस्वार्थ प्रेम करना सिखा सकें।”

बता दें कि बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता और डायरेक्टर सतीश कौशिक का दिल का दौरा पड़ने से 8 मार्च 2023 की देर रात 66 वर्ष में निधन हो गया। मौत से पहले उन्होंने बेचैनी की शिकायत की थी, जिसके बाद उन्हें गुरुग्राम के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था, लेकिन बचाया नहीं जा सका।

‘कुत्ते ने फाड़ दिया CM का पोस्टर, तुरंत कार्रवाई हो’ : आंध्र प्रदेश में TDP नेता की अजीबोगरीब शिकायत, कहा- कुत्ते की वजह से 6 करोड़ लोगों की भावना आहत हुई

आंध्र प्रदेश से एक अजीबोगरीब घटना सामने आई है। यहाँ मुख्यमंत्री वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी (Jagan Mohan Reddy) का पोस्टर फाड़ने के आरोप में एक कुत्ते के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई है। यह मामला विजयवाड़ा पुलिस स्टेशन का है। सोशल मीडिया पर इसका वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में कुत्ता एक घर के बाहर दीवार पर चिपकाए गए रेड्डी के पोस्टर को हटाते हुए दिखाई दे रहा है।

दरअसल, विपक्षी पार्टी तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) की एक महिला नेता दसारी उदयश्री ने कुत्ते के खिलाफ यह शिकायत कटाक्ष के तौर पर कराई। उदयश्री ने कुत्ते की गिरफ्तारी की माँग करते हुए कहा कि पोस्टर फाड़ना CM का अपमान है। वह वीडियो से बेहद दुखी हैं। पुलिस को कुत्ते के खिलाफ तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए। इसके अलावा जिन लोगों ने कुत्ते को उकसाया और वीडियो वायरल किया उनके खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए।

उदयश्री ने स्थानीय मीडिया को बताया, “इस कुत्ते ने रेड्डी का पोस्टर फाड़कर आंध्र प्रदेश के 6 करोड़ लोगों की भावनाओं को आहत किया है। हम 151 विधानसभा सीटें जीतने वाले अपने मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी का बहुत सम्मान करते हैं। हमने पुलिस से कुत्ते और उसे पोस्टर फाड़ने के लिए उकसाने वाले लोगों को गिरफ्तार करने का अनुरोध किया है। इन्होंने हमारे मुख्यमंत्री का अपमान किया है।”

वायरल पोस्ट पर सोशल मीडिया यूजर्स जमकर मजे ले रहे हैं। एक यूजर ने मजे लेते हुए कहा, “हाँ, हमेशा की तरह हमारे नेता वास्तव में महत्वपूर्ण मुद्दों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।”

वहीं पटेल नाम के एक अन्य यूजर ने तंज कसते हुए कहा, “अच्छा काम। इस मामले की उच्च स्तरीय जाँच की जरूरत है। जाँच की जाए कि क्या कुत्ते ने सिर्फ पोस्टर ही फाड़ा या फिर उस पर पेशाब भी कर दिया। क्या कुत्ते का टीडीपी या अन्य विपक्षी दलों से कोई संबंध है? उसने ऐसा पहली बार किया है या पेशेवर अपराधी है। मुझे यकीन है कि आंध्र प्रदेश पुलिस सभी सवालों के जवाब ढूँढ लेगी।”

बता दें कि कुत्ते ने जगन मोहन रेड्डी की फोटो वाले जिस पोस्टर को फाड़ा है, उसे सत्तारूढ़ वाईएसआर काॅन्ग्रेस पार्टी (YSRCP) द्वारा आयोजित राज्यव्यापी सर्वेक्षण ‘जगन्नाथ माँ भविष्यथु’ (जगन अन्ना हमारा भविष्य) के दौरान एक घर की दीवार पर चिपकाया गया था। कई टीडीपी समर्थकों ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट से यह वीडियो शेयर किया है।

‘UP एसटीएफ ने गलत नहीं किया, हम नहीं लेंगे लाश’: असद के साथ ढेर हुए गुलाम की अम्मी का Video, कहा- मुँह भी नहीं देखना चाहती

उत्तर प्रदेश के झाँसी में गुरुवार (13 अप्रैल 2023) को माफिया अतीक अहमद के बेटे असद अहमद और शूटर गुलाम का एनकाउंटर हुआ था। तीन डॉक्टरों के पैनल ने दोनों की शव का पोस्टमॉर्टम किया है। गुलाम की अम्मी खुशनुदा और उसके भाई राहिल ने बॉडी लेने से मना कर दिया है।

प्रयागराज में न्यूज एजेंसी एएनआई से बात करते हुए शूटर गुलाम की अम्मी खुशनुदा ने कहा कि यूपी एसटीएफ ने गलत नहीं किया। उन्होंने कहा कि गलत काम का नतीजा गलत ही होता है। उसने जो किया उसका नतीजा पूरा परिवार भुगत रहा है। खुशनुदा ने कहा, “मैं उसकी लाश नहीं लूँगी। उसकी पत्नी चाहे तो लाश ले सकती है। उसका हक है, मैं उसको मना नहीं कर सकती। मैं अपनी जिम्मेदारी लेती हूँ कि हम लाश नहीं लेंगे।” गुलाम की माँ ने कहा कि वह उसका मुँह तक नहीं देखना चाहती हैं।

गुलाम के भाई राहिल ने भी एनकाउंटर को जायज ठहराया है। राहिल ने कहा कि गुलाम ने बहुत जघन्य कार्य किया था। इसका हम समर्थन नहीं करते। गुलाम के बड़े भाई ने कहा कि मेरी माँ और हमारे परिवार ने फैसला किया है कि हम गुलाम के जनाजे में भी शिरकत नहीं करेंगे।

बता दें इसके पहले गुलाम के मकान और दुकान पर प्रयागराज विकास प्राधिकरण ने बुलडोजर कार्रवाई की थी। उस दौरान भी गुलाम के भाई ने मीडिया से कहा था कि उसने बहुत गलत किया है। यूपी पुलिस यदि उसका एनकाउंटर करती है तो हम न तो उसका चेहरा देखेंगे न ही उसकी लाश लेंगे

असद को लगी 2 गोली, एक दिल चीर बाहर निकल गई-दूसरी गले में फँसी, गुलाम 1 ही गोली में हो गया ढेर: जिंदा पकड़ना चाहती थी UP एसटीएफ

माफिया अतीक अहमद के बेटे असद का एनकाउंटर होने के बाद इस मामले में दर्ज एफआईआर से खुलासा हुआ है कि यूपी एसटीएफ पहले असद और गुलाम को जिंदा पकड़ना चाहती थी। इंडिया टुडे द्वारा एक्सेस की एफआईआर में बताया गया है कि पुलिस जब दोनों आरोपितों को पकड़ने झाँसी गई तो वहाँ दोनों ने पुलिस पर गोलियाँ चलाईं। इसी के बाद जवाबी कार्रवाई में पुलिस को असद-गुलाम का एनकाउंटर करना पड़ा।

एफआईआर में बताया गया कि पुलिस को सूचना थी कि असद सफेद कुर्ते पजामे और गुलाम जींस टी-शर्ट में एक बिन लाइसेंसी नंबर वाली बाइक पर जा रहे हैं। जब पुलिस ने उन्हें पकड़ने के लिए उनका पीछा किया तो वो रुकने के बजाय भागने लगे। पुलिस ने उन्हें जिंदा पकड़ने का बहुत प्रयास किया। तभी उनकी गाड़ी बबूल के पेड़ के आगे फिसली और असद-गुलाम ने पुलिस को गाली देकर डराना धमकाना शुरू किया। पुलिस ने भी जवाबी कार्रवाई की। थोड़ी देर बाद गोली चलनी बंद हो गई। पुलिस ने जाकर देखा तो दोनों चोटिल थे। पुलिस उन्हें अस्पताल लेकर गई जहाँ उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।

जानकारी के मुताबिक झाँसी में हुए एनकाउंटर के बाद असद और गुलाम का पोस्टमार्टम 9 बजे शुरू होकर रात के करीब 2:30 बजे तक हुआ। इस दौरान वहाँ 3 डॉक्टरों का पैनल था। पोस्टमार्टम में सामने आया असद को 2 गोलियाँ लगीं। एक गोली पीछे से पीठ में लगी जो दिल और सीने को चीरकर बाहर निकल गई जबकि दूसरी गोली सीने में लगी और गले में जाकर फँस गई। रिपोर्ट्स की मानें तो असद को जहाँ दो गोलियाँ लगीं, वहीं शूटर गुलाम को एक ही गोली लगी थी जो पीठ में लगकर दिल और सीने को चीरते हुए निकली और उसकी मौत हो गई।

शवों का पोस्टरमार्टम होने के बाद भी असद और गुलाम का शव देर रात तक पोस्टमार्टम हाउस में पड़ा रहा। न असद के परिवार में से कोई उसका शरीर लेने आया और न ही गुलाम के परिवार से कोई उसका शव लेने आया। बताया जा रहा है कि गुलाम के खिलाफ हुई कार्रवाई से उसके अपने परिजन भी संतुष्ट हैं उन्होंने कहा है कि पुलिस ने गुलाम के साथ सही किया।

‘@# काफिर… काट डालेंगे’: जानिए ओडिशा में हनुमान भक्तों पर कैसे हुआ हमला, ‘जय श्री राम’ के नारे सुन टूट पड़ी थी कट्टरपंथी मुस्लिम भीड़

ओडिशा के संबलपुर में बुधवार (12 अप्रैल 2023) को हनुमान जयंती समन्वय समिति और बजरंग दल ने मोटरसाइकिल रैली निकाली थी। रैली जब धनुपाली इलाके की एक मस्जिद के पास पहुँची तो इस पर पथराव शुरू हो गया। इसके बाद इलाके में हिंसा भड़क उठी थी। घटना को लेकर दर्ज एफआईआर से खुलासा हुआ है कि मुस्लिम भीड़ ने भड़काऊ नारे लगाते हुए रैली में शामिल हिंदुओं पर हमला किया था।

बरेईपाली थाने के प्रभारी निरीक्षक (IIC) धीरेंद्र कुमार स्वैन द्वारा दर्ज कराई गई FIR के अनुसार रैली में लगभग 1,000 मोटरसाइकिल सवार शामिल थे। बाइक रैली बुधवार शाम 5 बजे गोविंदटोला से गोलबाजार इलाके के लिए रवाना हुई। शाम छह बजे के करीब रैली मोतीझरण चौक के पास पहुँची। धीरेंद्र कुमार भी मोतीझरण चौक पर ही तैनात थे।

एफआईआर के अनुसार जुलूस में शामिल आधे लोग मोतीझारन चौक पार कर गए, जबकि रैली में शामिल अन्य लोग कुछ समय के लिए वहीं रुक गए। रैली में शामिल लोग ‘जय श्री राम’ और ‘जय बजरंग बली’ के नारे लगा रहे थे। तभी लगभग 200 मुस्लिमों ने जुलूस पर हमला कर दिया। उन्होंने रैली में शामिल लोगों को अपशब्द कहते हुए उन्हें तुरंत जगह खाली करने की धमकी दी।

देखते ही देखते जुलूस पर पथराव होने लगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस्लामवादियों ने जान से मारने के इरादे से रैली के सदस्यों पर लोहे की रोड, लाठियों और तलवारों से हमला किया। हमलावर भीड़ रैली में शामिल लोगों को गालियाँ दे रही थी। एफआईआर के अनुसार हमले के दौरान मुस्लिम भीड़ लगातार ‘साले काफिर लोग’, ‘साले लोगों को काट देंगे, ‘सालों को इंडिया वापस नहीं जाने देंगे’ चिल्ला रही थी।

प्राथमिकी में 15 ज्ञात और 150 से 160 अज्ञात हमलावरों को नामजद किया गया है। ऑपइंडिया के पास भी एफआईआर की कॉपी उपलब्ध है। पुलिस की तरफ से दी गई जानकारी के अनुसार संबलपुर जिले में इंटरनेट सुविधाएँ बंद कर दी गई हैं। सरकार ने एहितियातन अगले 48 घंटों के लिए जिले में व्हाट्सएप, फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और स्नैपचैट पर रोक लगा दी है।

दूसरी तरफ हनुमान जयंती समन्वय समिति की तरफ से शुक्रवार (14 अप्रैल 2023) की शाम तक संबलपुर बंद का आह्वान किया गया है। समिति ने पुलिस पर खुफिया विफलता का आरोप लगाया है। पुलिस का कहना है कि इस बात का पता लगाया जा रहा है कि पथराव अचानक किया गया या इसके पिछे कोई सुनियोजित साजिश थी। संबलपुर के एसपी बी गंगाधर ने कहा है कि हम घटना के दिन की तस्वीरें और वीडियो इकट्ठा कर रहे हैं। इसकी सघनता से जाँच की जाएगी।

बता दें कि रैली पर पथराव के दौरान महिला पुलिसकर्मी समेत 10 जवानों को चोट आई थी। उनका उपचार किया जा रहा है। मिली जानकारी के अनुसार अब तक 40 लोगों को पकड़कर पूछताछ की जा रही है। संबलपुर में अब भी तनाव की स्थिति है।

PM नेहरू का सारा समय और ध्यान मुसलमानों के संरक्षण के लिए समर्पित: कॉन्ग्रेस है SC/ST विरोधी, भीमराव आंबेडकर ने बता दिया था भाषण में

डॉ. भीमराव आंबेडकर समय से आगे की सोच रखने वाले जननायक थे। उन्होंने तब संविधान में उन चीजों को शामिल किया था, जो आज तक कई देश नहीं कर पाए हैं। पहली कैबिनेट का हिस्सा होने के बावजूद, कॉन्ग्रेस के अधिकांश नेताओं के साथ बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर के संबंध अपेक्षाकृत मजबूत आधार पर टिके थे लेकिन इसके विपरीत, भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के साथ उनके संबंधों के बारे में बहुत कम जानकारी ही सामने आई है।

जातिगत आरक्षण, हिंदू कोड बिल और विदेश नीति पर उनके विचारों के संबंध में, उनके निष्पादन के बारे में दोनों के काफी विपरीत विचार थे लेकिन डॉ. भीमराव आंबेडकर की समाज सुधारक वाली छवि कॉन्ग्रेस के लिए चिंता का कारण थी शायद यही वजह थी कि पार्टी ने उन्हें संविधान सभा से दूर रखने की योजना बनाई। नेहरू ने डॉ. आंबेडकर को किनारे करने में कोई कसर नहीं छोड़ी, ताकि वह मेनस्ट्रीम पॉलिटिक्स में न आ सकें, इसके लिए दीवारें खड़ी की गईं।

27 सितंबर 1951 को कॉन्ग्रेस नेतृत्व और विशेषकर जवाहर लाल नेहरू द्वारा कैबिनेट से त्यागपत्र देने के लिए डॉ. भीमराव आंबेडकर को विवश किया गया। संसद में आंबेडकर ने त्यागपत्र के साथ जो भाषण दिया, वह कॉन्ग्रेस के एससी/एसटी विरोधी असली चेहरे को उजागर करता है।

डॉ. आंबेडकर ने सितंबर 1951 में कैबिनेट से इस्तीफा देते हुए भाषण में विस्तार से अपनी उन-उन पीड़ा को बयाँ किया, जो-जो उन्होंने नेहरू के हाथों झेली। आंबेडकर राइटिंग, वॉल्यूम- 14 भाग 2, पृष्ठ 1317-1327 में उनका भाषण संकलित किया गया है। अपने त्यागपत्र भाषण में डॉ. आंबेडकर ने कहा:

“जब प्रधानमंत्री नेहरू ने मुझे प्रस्ताव दिया तो मैंने उन्हें स्पष्ट बता दिया था कि अपनी शिक्षा और अनुभव के आधार पर एक वकील होने के साथ मैं किसी भी प्रशासनिक विभाग को चलाने में सक्षम हूँ। प्रधानमंत्री सहमत हो गए और उन्होंने कहा कि वह मुझे अलग से योजना का भी दायित्व देंगे। दुर्भाग्य से योजना विभाग बहुत देरी से मिला, जिस दिन मिला मैं तब तक बाहर आ चुका था। मेरे कार्यकाल के दौरान कई बार एक मंत्री से दूसरे मंत्री को मंत्रालय दिए गए, मुझे लगता है कि उन मंत्रालयों में से भी कोई मुझे दिया जा सकता था लेकिन मुझे हमेशा इस दौड़ से बाहर रखा गया। मुझे यह समझने में भी कठिनाई होती थी कि मंत्रियों के बीच काम का बँटवारा करने के लिए प्रधानमंत्री जिस नीति का पालन करते हैं, उसके पैमाने की क्षमता क्या है? क्या यह विश्वास है? क्या यह मित्रता है? या क्या यह लचरता है? मुझे कभी भी कैबिनेट की प्रमुख समितियाँ जैसे विदेश मामलों की समिति या रक्षा समिति का सदस्य नहीं चुना गया। जब प्रधानमंत्री नेहरू इंग्लैंड गए तो मुझे कैबिनेट ने इसका सदस्य चुना लेकिन जब वह वापस आए तो कैबिनेट समिति के पुनर्गठन में भी उन्होंने मुझे बाहर ही रखा। मेरे विरोध दर्ज करने के बाद मेरा नाम जोड़ा गया।”

एक और चीज जिसने डॉ. आंबेडकर को इस्तीफे के लिए बाध्य किया, वो था हिंदू कोड बिल के साथ सरकार का बर्ताव। यह विधेयक 1947 में सदन में पेश किया गया था लेकिन बिना किसी चर्चा के जमींदोज हो गया। उनका मानना था कि यह इस देश की विधायिका का किया सबसे बड़ा सामाजिक सुधार होता। बाबा साहब ने कहा था कि प्रधानमंत्री के आश्वासन के बावजूद ये बिल संसद में गिरा दिया गया। अपने भाषण के अंत में उन्होंने कहा, “अगर मुझे यह नहीं लगता कि प्रधानमंत्री के वादे और काम के बीच अंतर होना चाहिए, तो निश्चित ही गलती मेरी नहीं है।”

डॉ. आंबेडकर का नेहरू सरकार के प्रति असंतुष्ट होने का एक और मुख्य कारण था, पिछड़े वर्गों और अनुसूचित जातियों से जुड़ा भेदभावपूर्ण व्यवहार। डॉ. आंबेडकर अपने भाषण में आगे कहते हैं:

“मुझे इस बात का बहुत दुःख है कि संविधान में इन जातियों की सुरक्षा के लिए कुछ विशेष तय नहीं किया गया। यह तो राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त एक आयोग की संस्तुति के आधार पर सरकार को करना पड़ा। इसका संविधान पारित करते हुए हमें एक वर्ष हो गया था लेकिन सरकार ने आयोग के गठन तक के विषय में नहीं सोचा। आज अनुसूचित जाति की स्थिति क्या है? जहाँ तक मैंने देखा है, वैसी ही है जैसी पहले थी। वही चला आ रहा उत्पीड़न, वही पुराने अत्याचार, वही पुराना भेदभाव जो पहले दिखाई पड़ता था। सब कुछ वही, बल्कि और बदतर हालात वाली स्थिति। बल्कि यदि तुलना करें तो इनसे ज्यादा सरकार मुसलमानों के प्रति संवेदना दिखा रही है। प्रधानमंत्री का सारा समय और ध्यान मुसलमानों के संरक्षण के लिए समर्पित है। क्या अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और भारतीय ईसाइयों को सुरक्षा की जरूरत नहीं है। नेहरू जी ने इन समुदायों के लिए क्या चिंता दिखाई है? जहाँ तक मुझे मालूम पड़ता है कुछ भी नहीं। जबकि असली बात यह है कि ये वो समुदाय हैं, जिन पर मुसलमानों से भी ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है।”

बाबा साहब अपने भाषण में नेहरू की मुस्लिम तुष्टिकरण वाली नीतियों की बखिया उखेड़ रहे थे। डॉ. आंबेडकर की चिंता शोषितों, वंचितों और समाज के सबसे नीचे पायदान पर खड़े लोगों के लिए थी लेकिन इसके उलट नेहरू की नीतियाँ मुस्लिम तुष्टिकरण को बढ़ावा दे रही थीं।ऐसे कई मौके आए जब नेहरू ने डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के राजनीति सफर पर न केवल अड़चने पैदा कीं बल्कि कई बार उन्हें चुनाव हराने में भी बड़ा रोल निभाया, जिसमें वो कामयाब भी हुए।

डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने 14 सितंबर 1956 को तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को एक पत्र लिखा, जिसमें उन्होंने अपनी पुस्तक ‘बुद्ध और उनके धम्म’ के प्रकाशन के लिए मदद माँगी। इस पर नेहरू ने डॉ. आंबेडकर के पत्र का जवाब दिया और ‘बुद्ध और उनके धम्म’ पुस्तक की 500 प्रतियाँ खरीदने में असमर्थता व्यक्त की। जब 296 लोगों को शुरुआती संविधान सभा में भेजा गया था तो उसमें आंबेडकर का नाम शामिल नहीं था, उस समय के बॉम्बे के मुख्यमंत्री बीजी खेर ने ये सुनिश्चित किया था कि आंबेडकर 296 सदस्यीय निकाय के लिए नहीं चुने जाएँगे।

ऐसी कई घटनाएँ हैं जो साबित करती हैं कि कॉन्ग्रेस और उसके नेता खासकर नेहरू कभी डॉ. आंबेडकर को मेनस्ट्रीम पॉलिटिक्स में नहीं आने देना चाहते थे। इन तमाम झंझावतों को दूर कर बाबा साहेब ने उस दौर में वो मुकाम हासिल किया, जो किसी दलित नेता के लिए बहुत मुश्किल था। डॉ. आंबेडकर का लक्ष्य था- ‘सामाजिक असमानता दूर करके शोषित, वंचितों के मानवाधिकार की प्रतिष्ठा करना।’

डॉ. आंबेडकर ने गहन-गंभीर आवाज में सावधान किया था, “26 जनवरी 1950 को हम परस्पर विरोधी जीवन में प्रवेश कर रहे हैं। हमारे राजनीतिक क्षेत्र में समानता रहेगी किंतु सामाजिक और आर्थिक क्षेत्र में असमानता रहेगी। जल्द से जल्द हमें इस परस्पर विरोध को दूर करना होगा। नहीं तो जो असमानता के शिकार होंगे, वे इस राजनीतिक गणतंत्र के ढाँचे के लिए मुश्किलें पैदा करेंगे।”

इस्लाम और डॉ. आंबेडकर के विचार

इस्लाम पर डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचार क्या थे? काफी चर्चित पुस्तक ‘डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर राइटिंग्स एंड स्पीचेज, वॉल्यूम 8’ के पृष्ठ 64-65 से हम इसे समझ सकते हैं। यहाँ जिस भाषण का जिक्र है, उसमें बाबा साहब कहते हैं- इसमें कोई संदेह नहीं है कि भारत में मुस्लिम आक्रांता हिंदुओं के खिलाफ घृणा का राग गाते हुए आए थे। उन्होंने न केवल घृणा ही फैलाई बल्कि वापस जाते हुए हिंदू मंदिर भी जलाए। उनकी नजर में यह एक नेक काम था और उनके लिए तो इसका परिणाम भी नकारात्मक नहीं था। उन्होंने एक सकारात्मक कार्य किया, जिसे उन्होंने इस्लाम के बीज बोने का नाम दिया। इस पौधे का विकास बखूबी हुआ, यह केवल रोपा गया पौधा नहीं था बल्कि यह एक बड़ा विशाल पेड़ बन गया था।

डॉ. आंबेडकर ने मुस्लिम आक्रांताओं द्वारा तोड़े गए मंदिरों पर कई बार खुलकर अपने विचार रखे हैं।

बाहर आते ही काजल हिंदुस्तानी ने भरी हुँकार, कहा- मैं डरती नहीं, लैंड/लव जिहाद से लड़ती रहूँगी: इस्लामी कट्टरपंथियों ने लगाए थे ‘सर तन से जुदा’ के नारे

जेल से बाहर आने के बाद हिंदुवादी कार्यकर्ता काजल सिंघला उर्फ काजल हिंदुस्तानी ने दोहराया है कि वे लैंड जिहाद, लव जिहाद और जबरन धर्मांतरण के खिलाफ आवाज उठती रहेंगी। गुजरात के ऊना में रामनवमी पर घृणास्पद भाषण देने के आरोप में उन्हें गिरफ्तार किया गया था। गुरुवार (13 अप्रैल 2023) को उन्हें अदालत ने जमानत दी थी। इसके बाद उन्हें जूनागढ़ जेल से रिहा कर दिया गया। बाहर आने के बाद मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने इस्लामी कट्टरपंथ के खिलाफ अपना संकल्प दोहराया।

जेल से बाहर आने के बाद काजल हिंदुस्तानी का समर्थकों ने फूल बरसाकर स्वागत किया। इस दौरान जय श्री राम के नारे भी लगाए गए। पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए काजल ने कहा कि मैं आज भी अपनी बात पर कायम हूँ। मैंने कुछ भी गलत नहीं कहा, मैं कभी कानून के खिलाफ नहीं गई, इसलिए मैं नहीं डरती। मुझे अपनी न्याय व्यवस्था पर भरोसा है। मुझे न्याय मिला और इसलिए मैं यहाँ आप सबके सामने हूँ।

काजल हिंदुस्तानी ने कहा, “अपने धर्म के लिए अनेक कार्यकर्ता काम कर रहे हैं। जब दूसरे पक्ष के लोग ऐसे काम (धर्म पर आघात) करते हैं तो हमारा भी कर्तव्य है कि हम अपने विश्वास की रक्षा करें। इसलिए मैं अपने स्तर पर लैंड जिहाद, लव जिहाद और जबरन धर्मांतरण के खिलाफ आवाज उठाती रही हूँ। मैं घर पर बैठने वाली नहीं हूँ। आगे भी काम जारी रहेगा।”

काजल हिंदुस्तानी को कड़ी पुलिस सुरक्षा के बीच उनके आवास तक ले जाया गया। उनके काफिले में पुलिस की दो गाड़ियाँ शामिल रहीं। घर जाने के रास्ते पर लोगों ने उनका स्वागत किया और उन पर फूल और मालाएँ बरसाईं। काजल ने ट्विटर पर भी अपने समर्थकों को धन्यवाद दिया। उन्होंने लिखा कि अब मैं पहले से अधिक सशक्त हूँ। आपके समर्थन से हमारा मनोबल बढ़ता है। ट्विटर पर भी काजल ने लैंड जिहाद, लव जिहाद और धर्मांतरण के विरुद्ध संघर्ष जारी रखने की बात कही है।

गौरतलब है कि 30 मार्च 2023 को रामनवमी के अवसर पर गुजरात के गिर सोमनाथ जिले के ऊना में शोभायात्रा निकाली गई थी। शोभायात्रा के बाद एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था, जिसे काजल हिंदुस्तानी ने भी संबोधित किया था। उन्होंने अपने भाषण के दौरान लव जिहाद और लैंड जिहाद सहित कई मुद्दों को उठाया था। स्थानीय मुस्लिमों ने उनके इस भाषण को विवादास्पद बताते हुए विरोध प्रदर्शन किया था। कई जगहों पर पथराव और हिंसक घटनाओं की खबरें सामने आई थी। शहर दो दिनों तक ठप रहा था। इस दौरान उनके खिलाफ ‘सर तन से जुदा’ के नारे भी लगाए गए थे। मुस्लिमों की शिकायत पर उन्हें ऊना पुलिस ने 9 अप्रैल 2023 को गिरफ्तार किया था।

भगोड़े कारोबारी करें हवाले, भारत विरोधी तत्वों पर लें एक्शन: ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक से बोले PM मोदी, भारतीय उच्चायोग पर हमले का मुद्दा उठा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिटेन के अपने समकक्ष ऋषि सुनक से टेलीफोन पर बात की है। गुरुवार (13 अप्रैल 2023) को यह बातचीत हुई। इस दौरान विजय माल्या और नीरव मोदी जैसे भगोड़े कारोबारियों के प्रत्यर्पण से लेकर खालिस्तानियों की हालिया हिंसा तक पर चर्चा हुई। पीएम मोदी ने भगोड़े कारोबारियों के प्रत्यर्पण की प्रक्रिया में तेजी लाने को कहा। साथ ही कहा कि भारत विरोधी तत्वों पर ब्रिटेन को कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। इस दौरान सुनक ने भारतीय दूतावासों की सुरक्षा को लेकर आश्वस्त किया।

रिपोर्टों के मुताबिक दोनों देशों के प्रधानमंत्री के बीच कई द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा हुई। दोनों देशों के बीच व्यापार और अन्य आर्थिक मुद्दों पर हुए करार के प्रगति की समीक्षा की गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूके सरकार से भारत विरोधी तत्वों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने और भारतीय डिप्लोमेटिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने को कहा। बता दें कि इसी पहले 12 अप्रैल 2023 को दोनों देशों के बीच गृह मंत्रालय स्तर पर बातचीत हुई थी। उस दौरान भी खालिस्तान समर्थकों और भारत विरोधी तत्वों पर नकेल कसने को लेकर चर्चा हुई थी।

विदेश मंत्रालय की तरफ से दी गई जानकारी के मुताबिक ब्रिटिश पीएम सुनक ने कहा है कि भारतीय उच्चायोग पर हमला किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं होगा। उन्होंने इंडियन हाई कमीशन और भारतीय अधिकारियों की सुरक्षा का आश्वासन भी दिया। सुनक ने हमले के बाद भारतीय उच्चायोग की सुरक्षा के लिए उठाए गए कदमों की भी जानकारी दी।

टेलीफोन पर बातचीत करते हुए पीएम मोदी ने ऋषि सुनक से ब्रिटेन में छिपे भगोड़े भारतीय कारोबारियों के वापसी के लिए वापसी की प्रक्रिया में तेजी लाने को भी कहा। उम्मीद जताई कि ब्रिटिश सरकार नीरव मोदी और विजय माल्या जैसे डिफॉल्टर कारोबारियों को भारत को सौंपने में मदद करेगी।

प्रधानमंत्री मोदी ने इंग्लैंड के पीएम को जी20 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए आमंत्रित भी किया। G20 शिखर सम्मेलन सितंबर 2023 में आयोजित होना है। पीएम सुनक ने भारत की अध्यक्षता में जी20 में हुई प्रगति और भारत की तरफ से उठाए गए कदमों की सराहना की। उन्होंने भारत को अपने समर्थन की प्रतिबद्धता को दोहराया। बता दें भारत 1 दिसंबर 2022 से 30 नवंबर 2023 तक G20 की अध्यक्षता कर रहा है।

जी-20 का गठन वर्ष 1999 में हुआ था। इसको ग्रुप ऑफ ट्वेंटी भी कहा जाता है। शुरुआत में यह वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंकों के गवर्नरों का संगठन हुआ करता था। 2008 में आई वैश्विक मंदी के बाद इसे शीर्ष नेताओं के संगठन में बदल दिया गया। जी-20 शिखर सम्मेलन हर साल आयोजित होता है और सम्मेलन में शामिल नेता वैश्विक अर्थव्यवस्था को बढ़ाने पर चर्चा करते हैं।