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‘धर्मांतरण करने वालों को न मिले आरक्षण’: छत्तीसगढ़ में जनजातीय समाज ने बुलाई महारैली, कहा – अपनी संस्कृति छोड़ने वालों को बाहर किया जाए

छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण का शिकार हो रहे जनजातीय समाज के लोगों को बचाने के लिए ‘जनजाति सुरक्षा मंच’ रविवार (16 अप्रैल, 2023) को रायपुर में बड़ा आंदोलन करने जा रहा है। इस आंदोलन के तहत ‘जनजाति सुरक्षा मंच’ धर्मांतरण करने वाले जनजातियों को आरक्षण न देने की माँग करेगा।

दरअसल, धर्मांतरण के लिए जनजातीय वर्ग ईसाई मिशनरियों और इस्लामिक मौलवियों के निशाने पर रहा है। खासतौर से छत्तीसगढ़ के कई जनजातीय बाहुल्य इलाके अब धर्मांतरण का शिकार हो चुके हैं। लेकिन धर्मांतरण इस्लाम या ईसाइयत अपनाने के बाद भी लोग खुद को जनजातीय बताते हुए आरक्षण समेत अन्य लाभ प्राप्त करते रहे हैं। इसको लेकर ही अब जनजातीय सुरक्षा मंच आंदोलन कर रहा है।

‘जनजातीय सुरक्षा मंच’ का दावा है कि रविवार (16 अप्रैल, 2023) को राजधानी रायपुर में होने वाली इस महारैली में हजारों जनजातीय शामिल होंगे। इस महारैली के माध्यम से जनजातीय वर्ग धर्मांतरित हो चुके जनजातियों को डी-लिस्ट करने की माँग करेगा। इसका अर्थ यह है कि जिन लोगों ने अपने धर्म और संस्कृति को छोड़कर दूसरे धर्म को अपना लिया है, उन्हें जनजातीय श्रेणी से बाहर किया जाए। यही नहीं, जनजातीय सुरक्षा मंच इसके लिए संविधान संशोधन की भी माँग कर रहा है।

इस आंदोलन को लेकर राष्ट्रीय सुरक्षा मंच से जुड़े गणेश राम भगत का कहना है कि छत्तीसगढ़ में बड़ी संख्या में धर्मांतरण हुआ है। धर्मांतरण करने के बाद भी लोग अवैध रूप से जनजातियों के हिस्से की सुविधाओं का लाभ उठा रहे हैं। इसमें आरक्षण जैसी सुविधा भी शामिल है। जनजातीय वर्ग चाहता है कि छत्तीसगढ़ के साथ-साथ देश के करोड़ों जनजातियों के साथ हो रहे इस अन्याय को रोका जाए और धर्मांतरण करने वालों को डी-लिस्ट किया जाए।

जनजाति सुरक्षा मंच का तर्क है कि जनजातियों को आरक्षण उनके सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए दिया गया था लेकिन जब कोई धर्मांतरण कर लेता है तो वह जनजातियों की संस्कृति को छोड़ देता है और जनजातीय नहीं रह जाता। ऐसे में धर्मांतरित लोगों को आरक्षण देने का कोई मतलब नहीं है।

छत्तीसगढ़ की सत्ता बदल सकता है धर्मांतरण का मुद्दा

साल के अंत में छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव होने हैं। चुनाव से पहले धर्मांतरण को लेकर भाजपा भूपेश बघेल सरकार को घेरने में जुटी हुई है। बीजेपी के प्रदेश महामंत्री केदार कश्यप ने कहा है कि वह डी-लिस्टिंग के पक्ष में हैं। वहीं, भाजपा के अनुसूचित जनजाति मोर्चा के प्रदेशाध्यक्ष विकास मकराम ने आरोप लगाया कि धर्मांतरण रोकने के लिए राज्य सरकार नियमों का कड़ाई से पालन नहीं कर रही है

‘आप मस्जिद के 100 मीटर के दायरे में खड़े नहीं हो सकते’: मुस्लिम बहुल इलाके में पत्रकार और कैमरामैन से धक्कामुक्की, अतीक अहमद के बेटे के एनकाउंटर से भड़के

भारत का दुर्भाग्य ये है कि यहाँ कई ‘मुस्लिम एरिया’ बन गए हैं। यहाँ तक कि एक बड़े राज्य की मुख्यमंत्री तक हिन्दुओं को सलाह देती हैं कि वो ‘मुस्लिमों के इलाके’ में अपने पर्व-त्योहार न मनाएँ। परिणाम ये होता है कि रामनवमी पर जगह-जगह श्रद्धालुओं पर हमले किए जाते हैं। अब तो आलम ये है कि ‘मुस्लिम एरिया’ में पत्रकारों को कुछ कवर करने या लोगों की राय तक लेने के लिए पहले अनुमति लेनी होगी। एक ताज़ा वायरल वीडियो तो कुछ इसी ओर इशारा कर रही है।

“आप अपने घर ले जाओ इस कैमरे को” से लेकर ‘तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई बोलने की’ तक, एक पत्रकार को मुस्लिमों की भीड़ में कुछ इस तरह के सवालों का सामना करना पड़ा। उसका गुनाह ये था कि वो मुस्लिमों का पक्ष लेने गया था एक घटना को लेकर। एक पूछता है, “आज ही का दिन मिला था तुझे, ये बता?”। यानी, शुक्रवार (उनके लिए जुमा) के दिन उनसे कोई सवाल नहीं किया जा सकता। एक ने धमकाया, “आप मेरे घर के सामने खड़े हैं, आप यहाँ से जाइए।”

आइए, अब इस पूरे प्रकरण को शुरू से समझते हैं। 24 फरवरी, 2023 को गुंडों ने उमेश पाल के घर में घुस कर उनकी हत्या कर दी। सीसीटीवी में शूटरों के चेहरे सामने आ गए। हत्या न सिर्फ उमेश पाल, बल्कि यूपी पुलिस द्वारा उन्हें दिए गए दो अंगरक्षकों की भी कर दी गई। उमेश पाल, 2005 में हुई विधायक राजू पाल हत्याकांड के गवाह थे। दोनों ही घटनाओं से जिसका नाम जुड़ा, वो था प्रयागराज में कभी खौफ का दूसरा नाम रहा माफिया अतीक अहमद।

गुरुवार (13 अप्रैल, 2023) को यूपी पुलिस से एनकाउंटर में अतीक अहमद का बेटा असद और उसका साथी गुलाम ढेर हो गया। दोनों के मारे जाने के बाद असदुद्दीन ओवैसी ने इसकी निंदा की और कहा कि एनकाउंटर की घटनाओं से लोगों का देश के संविधान में भरोसा कम होता है। ‘खबर इंडिया’ में कार्यरत पत्रकार केशव मालान भी असदुद्दीन ओवैसी के इसी बयान पर मुस्लिमों की प्रतिक्रिया लेने के लिए गाजियाबाद के खोड़ा कॉलोनी पहुँचे थे।

वीडियो में देखा जा सकता है कि यहाँ पर कुछ मुस्लिम इकट्ठे होकर उन्हें जाने को कहने लगे, उन पर चिल्लाने लगे। नूरानी मस्जिद के पास स्थित गली में लोगों ने असद अंसारी के एनकाउंटर का विरोध किया और ओवैसी के बयान का समर्थन किया। मुस्लिम युवकों ने कहा कि कानून उन्हें सज़ा देगा, न कि पुलिस। उमेश पाल की हत्या के लिए एक ने तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार को दोषी ठहरा दिया। अधिकतर मुस्लिम युवक इसे एकतरफा कार्रवाई बताते हुए ये पूछते नजर आए कि फिर कोर्ट-जज किसलिए हैं?

एक ने तो ‘हिन्दू राष्ट्र’ की बात करते हुए ये कह डाला कि यहाँ गुनहगार छोड़ दिए जाएँगे और निर्दोषों का एनकाउंटर होगा। एक ने तो गोरक्षक मोनू मानेसर को गिरफ्तार किए जाने की माँग कर डाली और दूसरी घटनाओं का जिक्र करने लगे। इसी बीच एक टोपी वाला मुस्लिम युवक भड़क गया और कहने लगा हमलोगों को असद से या किसी से कोई मतलब नहीं है। इसके बाद उनका हाथ पकड़ कर और उन्हें धक्का दिया जाने लगा।

एक बच्चे ने भी केशव मालान को ‘चुपचाप चला जा’ कह दिया, जो वीडियो में देखा जा सकता है। कुछ मुस्लिम माइक झटकते हुए नजर आए। एक ने कह डाला, “सबसे बड़ा माफिया योगी है, उस पर 150 केस दर्ज हैं।” अधिकतर मुस्लिम इस पर ये कह कर कुछ बोलने से बचते हुए नजर आए कि नमाज का वक्त हो गया है। “आप मस्जिद के 100 मीटर के दायरे में खड़े नहीं हो सकते’ – वीडियो में एक कट्टर मुस्लिम युवक का ये बयान सोशल मीडिया पर खासा वायरल हो रहा है।

हमने इस पूरे मामले के सामने आने के बाद ‘खबर इंडिया’ के पत्रकार केशव मालान से बातचीत की। उन्होंने बताया कि उस इलाके में मात्र 300 मीटर के क्षेत्र में उन्हें 3 बड़ी मस्जिदें दिख गईं। उन्होंने बताया कि ओवैसी ने असद अहमद के एनकाउंटर पर कहा कि मजहब देख कर ऐसा किया जा रहा है, तो उन्हें लगा कि इस पर मुस्लिमों की प्रतिक्रिया लेनी ज़रूरी है। उन्होंने कहा कि मुस्लिमों का पब्लिक ओपिनियन आना ज़रूरी है, क्योंकि ओवैसी जैसे नेता बरगला रहे हों – ये भी हो सकता है।

इसी सोच के साथ वो मस्जिद के पास पहुँचे थे। उन्होंने बताया कि वहाँ पहुँचते ही माहौल ही अलग लगा, गरम था, इसका अंदाजा नहीं लगाया जा सकता। उन्होंने अपने और कैमरामैन मोहित सिंह के साथ धक्कामुक्की की भी पुष्टि की। उन्होंने कहा कि कैमरे की वजह से कम बदतमीजी की है, वरना हमारे साथ कुछ भी हो सकता था। केशव मालान ने बताया कि कवरेज के बाद लौटने पर उनके चैनल वालों ने भी कहा कि संभल कर रहिए, इतना रिस्क लेने की ज़रूरत ही नहीं है।

हालाँकि, केशव का मानना है कि इसमें रिस्क जैसी कोई बात ही नहीं है क्योंकि दिल्ली में भी कई बार रिपोर्टिंग करते समय डर लगता है और राजस्थान में भी इस तरह का डर लगा। हालाँकि, उत्तर प्रदेश के संबंध में उनका मानना है कि यहाँ मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में रिपोर्टिंग के लिए जाते हुए उन्हें डर नहीं लगता। इसका श्रेय वो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार को देते हैं। केशव मालान कहते हैं कि उनके अंतर्गत कानून का राज है और कुछ हुआ भी तो न्याय मिलेगा, इसका भरोसा रहता है।

उन्होंने बताया कि यूपी में मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में भी वो बेख़ौफ़ होकर आसानी से रिपोर्टिंग करते हैं। उन्होंने कहा कि गाजियाबाद के खोड़ा कॉलोनी में उनसे जो बातें कही गईं, वो एक तरह से उन्हें धमकी ही थी। केशव ने बताया कि उन्होंने उस मोहल्ले में जिन भी मुस्लिमों से बातचीत की, उनमें से अधिकतर यही कह रहे थे कि असद अहमद को सताया गया है। उमेश पाल की हत्या की सीसीटीवी फुटेज में असद दिखा था, इस तथ्य को भी वो नकार रहे थे।

वहीं हमने इस पूरे प्रकरण के दौरान कैमरामैन रहे मोहित सिंह से भी बातचीत की। उन्होंने बताया कि उन्हें लगातार कैमरा ऑफ करने को कहा जा रहा था, ऐसे में उन्होंने कैमरे को फ्लिप कर दिया लेकिन ऑफ नहीं किया। उन्होंने जानकारी दी कि उन्हें भी हाथ मारा जा रहा था। जैसे ही अतीक अहमद का नाम लिया गया, लोग भड़क जा रहे थे। बकौल मोहित, अंदर से ये डर था कि आखिर यहाँ से निकलेंगे कैसे। उन्होंने कहा कि मुस्लिमों के पास वहाँ अच्छा-खासा संख्याबल था।

इस प्रकरण से स्पष्ट है कि पत्रकारों को सीधा सन्देश दिया जा रहा है कि ये जो तथाकथित ‘मुस्लिम इलाके’ हैं, वहाँ ये रिपोर्टिंग न करें। मस्जिद के आसपास के इलाके में ‘शरीयत’ के हिसाब से कानून चलेगा? हमने तो सुना था कि सड़क या अन्य सार्वजनिक संपत्तियाँ सरकार की होती हैं, कोई इन पर दावेदारी नहीं कर सकता। क्या देश में कई छोटे-छोटे पाकिस्तान बन गए हैं? अगर ऐसा है तो ये निश्चित ही खतरे की घंटी है। अगर हिन्दू इसी तरह ‘हिन्दू इलाके’ की बात करने लगे तो क्या होगा?

‘मैंने PM मोदी को दिए ₹1000 करोड़’: समन से भड़के केजरीवाल ने कहा – ED-CBI पर केस कर दूँगा, मुझे पता चल गया था मेरा नंबर आ चुका है

दिल्ली शराब घोटाला मामले में सीबीआई के समन के बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। शनिवार (15 अप्रैल 2023) को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सीएम केजरीवाल ने कहा कि कोई शराब घोटाला नहीं हुआ है। सीबीआई और ईडी को कुछ भी नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि यदि केजरीवाल भ्रष्टाचारी हैं तो इस दुनिया में अब कोई भी ईमानदार नहीं बचा। उन्होंने धमकाया कि वो ED और CBI पर केस कर देंगे।

दिल्ली के सीएम ने कहा, “मुझे सीबीआई ने बुलाया है, मैं जरूर जाऊँगा। अगर भाजपा वालों ने CBI को मुझे गिरफ्तार करने का आदेश दिया है तो फिर वो मुझे जरूर गिरफ्तार करेंगे।” अरविंद केजरीवाल ने कहा कि ईडी और सीबीआई ने कोर्ट में झूठे बयान दिए हैं। शराब घोटाला केस कुछ नहीं है। झूठ की बुनियाद पर केस बनाए गए हैं। एजेंसियों के पास एक रुपए के घोटाले का भी सबूत नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि एजेंसियों ने मारपीट कर के और गवाहों को डरा-धमका कर केजरीवाल और सिसोदिया का नाम कबूल कराया है।

सीबीआई का समन मिलने से बौखलाए अरविंद केजरीवाल ने एजेंसियों पर तंज करते हुए कहा, “मैं प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोलता हूँ कि मैंने 17 सितंबर की शाम 7 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 1 हजार करोड़ रुपए दिए थे। अगर सिर्फ आरोप लगाने मात्र से कार्रवाई हो सकती है तो कर लो गिरफ्तार नरेंद्र मोदी को। कार्रवाई के लिए सबूत तो चाहिए ना। या ऐसे ही कार्रवाई हो जाएगी?”

आप संयोजक केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली सरकार द्वारा लाई जा रही नई शराब नीति एक अच्छी नीति थी जिससे शराब के कारोबार से सारा भष्टाचार खत्म हो जाता। केजरीवाल ने कहा कि ईडी और सीबीआई का कहना है कि 100 करोड़ की रिश्वत ली गई लेकिन 400 बार रेड के बावजूद एजेंसियों को पैसे नहीं मिले। उन्होंने कहा कि जिस दिन मैंने दिल्ली विधानसभा में भष्टाचार पर बात की थी मुझे पता चल गया था कि अब मेरा नंबर आ चुका है।

जिस बिहार में दारू बैन, वहाँ ज़हरीली शराब से 16 की मौत: 4 दर्जन लोग बीमार, प्रशासन बोला – ये सब डायरिया से मर रहे

बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के मोतिहारी में 24 घण्टों के भीतर 16 लोगों की मौत हो गई। वहीं 4 दर्जन से अधिक लोग अब भी बीमार बताए जा रहे हैं। कहा जा रहा है कि जहरीली शराब ही इन मौतों का कारण है। लेकिन प्रशासन मौत का कारण डायरिया बता रहा है। वहीं इस दुर्घटना को लेकर बीजेपी सीएम नीतीश कुमार पर हमलावर है।

मीडिया रिेपोर्ट्स के अनुसार, मोतिहारी के आसपास के कई गाँवों में संदिग्ध परिस्थितियों में लोगों की मौत हुई है। पहली मौत लक्ष्मीपुर के रामेश्वर राम उर्फ जटा राम की हुई। बीमार होने के बाद उसे एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। यहीं उसकी मौत हो गई। इसके बाद, इसी गाँव के ध्रुव पासवान, अशोक पासवान और छोटू पासवान की मौत हो गई। इन सभी इलाज के लिए हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था।

इसी तरह पहाड़पुर थाना क्षेत्र के मुशहर टोली में गुटन मांझी और टुनटुन सिंह नामक व्यक्ति की मौत हुई है। सुगौली थाना क्षेत्र अंतर्गत इन्द्राशन महतो, सुदीश राम, चुलाही पासवान, गोविंद ठाकुर और गणेश राम की मौत हुई है। हरसिद्धि थाना क्षेत्र में मुशहर टोली में भी तीन अन्य लोगों की मौत की खबर सामने आई है। वहीं मठ लोहियार में 4 घण्टे के भीतर ही पिता-पुत्र की मौत हुई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि पहले नवल दास की मौत हुई फिर उसके बेटे परमेंद्र दास भी काल के गाल में समा गया। अब नवल की बहू की स्थिति भी नाजुक बनी हुई है, उसे हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है। इलाज कर रहे डॉक्टर का कहना है कि उसे डायरिया हुआ है।

वहीं, मठ लोहियारग गाँव के दिलीप का कहना है कि नवल दास शराब की तस्करी करता था। 15 दिन पहले ही वह जेल से छूटा था। इसलिए लोगों शक है कि इन लोगों ने शराब पी होगी। यही शराब मौत का कारण बनी। शराब पीने वाले लोगों में से विनोद पासवान का कहना है, “जाटा राम ने सभी लोगों को गेहूँ कटाई के लिए बुलाया था। कटाई के बाद सब ने एक साथ शराब पी। फिर वहाँ से घर आ गए। रात में सभी लोगों की तबियत बिगड़ने लगी। कई लोगों की मौत भी हुई है।

जहरीली शराब से मौत की आशंका जता रही पुलिस…

मोतिहारी में एक के बाद हुई 16 लोगों की मौत के बाद प्रशासन सक्रिय हो गया है। घटना को लेकर डीएम सौरभ जोरवाल और एसपी कांतेश मिश्रा का कहना है कि जाँच में सामने आया है कि मौत डायरिया और फूड पॉइजनिंग की वजह से हुई है। वहीं, पुलिस मुख्यालय का कहना है संदेहास्पद स्थिति में कुछ लोगों की मौत हुई है। इसकी जाँच के लिए पटना से मद्य निषेद्य इकाई की टीम भेजी गई है। इस टीम के साथ ही सबूत जुटाने के लिए फोरेंसिक लैब की टीम को भी साथ में भेजा गया है। फिलहाल पुलिस मुख्यालय इन मौतों का जहरीली शराब को मानकर चल रहा है। हालाँकि अब तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

इन मौतों को लेकर भाजपा नेता और बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष विजय कुमार सिन्हा ने नीतीश कुमार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा है कि सरकार के पाप का कारनामा एक बार फिर उजागर हुआ। छपरा में जहरीली शराब से सैकड़ों लोगों की मौत के बाद अब मोतिहारी में भी कई लोगों की मौत हुई है। जहरीली शराब से हुई मौत को दबाने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। पहले जो सोशल मीडिया के लोग जानकारी सामने लाते थे। वह अब डर के कारण सामने नहीं ला रहे हैं। प्रशासन जहरीली शराब से कुछ कमाई कर लेता है। लेकिन किसी पर कार्रवाई नहीं होती।

उन्होंने आगे कहा है कि नितीश कुमार ने सदन में जहरीली शराब से मारे गए व्यक्ति की विधवा और अनाथ बच्चे को मुआवजा न देने का ऐलान किया था। लेकिन अब उन्हें जहरीली शराब जिले में कैसे पहुँची और इनसे हुई मौतों को लेकर जवाब देना होगा। इन सबके लिए जो जिम्मेदार हैं उन पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं होती? उनकी संपत्ति जब्त क्यों नहीं की जा रही? बिहार की सत्ता में बैठे हुए लोगों के परिवार वाले अवैध शराब के धंधे में लगे हुए हैं। इसकी जाँच होनी चाहिए।

बदजुबानी का रहा है इतिहास… ‘देश के विनाश’ से लेकर इंदिरा गाँधी के हत्यारों के गुणगान तक, वो मौके जब सत्यपाल मलिक ने दिए भड़काऊ बयान

अपने बयानों की वजह से सुर्ख़ियों में रहने वाले मेघालय के पूर्व गवर्नर सत्यपाल मलिक ने विवादास्पद बयान दिया है। प्रेपगेंडा पोर्टल द वायर के लिए करण थापर को दिए इंटरव्यू में सत्यपाल मलिक ने कहा कि फरवरी 2019 में पुलवमा में हुआ आतंकी हमला गृहमंत्रालय की लापरवाही का नतीजा था। मलिक ने दावा किया कि सीआरपीएफ ने अपने जवानों के लिए एयरक्राफ्ट की माँग की थी। गृहमंत्रालय ने इसकी मंजूरी नहीं दी। साथ ही जिस रास्ते से होकर जवानों का काफिला गुजरने वाला था वहाँ अच्छे से जाँच नहीं की गई। गृह मंत्रालय पहले ही इन आरोपों से इनकार कर चुकी है।

अपने इंटरव्यू में सत्यपाल मलिक ने यह भी दावा किया कि पीएम मोदी को जम्मू-कश्मीर के बारे में जानकारी नहीं है। पीएम को भ्रष्टाचार से भी बहुत नफरत नहीं है। इसी इंटरव्यू के दौरान सत्यपाल मलिक अपने एक विवादास्पद बयान से पलट भी गए। पिछले साल हरियाणा की एक सभा में मलिक ने दावा किया था कि पीएम से मुलाकात के दौरान उन्होंने किसानों की मौत का मुद्दा उठाया था और पीएम से उनका झगड़ा हो गया था। इसके बाद उन्होंने मुझे अमित शाह से मिलने के लिए कहा था।

जब वे अमित शाह से मिले तो शाह ने उनसे कहा, “सत्यपाल, उन्हें कुछ लोगों ने गुमराह कर दिया है। आप इसकी चिंता न करें। आप मिलते रहें। एक दिन उन्हें समझ आ जाएगा।” सत्यपाल मलिक ने इंटरव्यू के दौरान स्वीकार किया कि ऐसा कुछ वास्तव में नहीं हुआ था बल्कि सब उनके दिमाग की उपज थी। उस दौरान मलिक के इस बयान को लेकर विपक्ष ने पीएम को घेरने की खूब कोशिश की थी।

सितंबर 2022 में बोले किसानों और सरकार के बीच लड़ाई होगी

जम्मू-कश्मीर से ट्रांसफर किए जाने के बाद से ही सत्यपाल मलिक भाजपा के खिलाफ बयान दे रहे हैं। सितंबर 2022 में सत्यपाल मलिक ने प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए किसानों को भड़काने का काम किया था। उन्होंने कहा था कि यदि सरकार किसानों की एमएसपी की बात नहीं मानती है तो किसान और सरकार के बीच बड़ी लड़ाई होगी। मैं उस लड़ाई में राज्यपाल के पद से इस्तीफा देकर कूद पड़ूँगा। उन्होंने कहा था कि इस बार जबरदस्त लड़ाई होगी। देश के किसान को आप पराजित नहीं कर सकते। किसानों को डरा नहीं सकते।

जून 2022 में किसानों को अंबानी-अडानी के खिलाफ भड़काया

12 जून, 2022 को जयपुर में राष्ट्रीय जाट संसद को संबोधित करते हुए सत्यपाल मलिक ने किसानों को भड़काते हुए कहा था कि अडानी ने किसानों की फसल सस्ते दाम पर खरीदने और महँगे दामों पर बेचने के लिए पानीपत में बड़ा गोदाम बनाया है। अडानी का ऐसा गोदाम उखाड़ फेंको। डरने की जरूरत नहीं है, मैं आपके साथ जेल चलूँगा। अडानी और अंबानी मालदार कैसे हो गए हैं, जब तक इन लोगों पर हमला नहीं होगा, तब तक ये लोग रुकेंगे नहीं।”

मई 2022 में बोले देश विनाश की ओर जा रहा

8 मई 2022 को उत्तर प्रदेश के मुजफ्फर नगर में सत्यपाल मलिक ने किसानों को दोबारा आंदोलन के लिए भड़काने की कोशिश की। इस दौरान उन्होंने कहा कि किसानों का आंदोलन खत्म कराने को लेकर जो वादे किए गए हैं सरकार उन्हें पूरा नहीं कर रही है। मलिका ने कहा था, “अगर किसानों की बात नहीं सुनी गई तो मुझे डर है कि इन्हें कहीं दोबारा मैदान में न उतरना पड़े। जिन सवालों का कोई मतलब नहीं है केवल उन पर बहस हो रही है। देश विनाश की ओर जा रहा है। आज सवाल महँगाई और बेरोजगारी पर होने चाहिए, लेकिन लोगों को यह ध्यान ही नहीं रहा। पेट्रोल और डीजल का हाल कोई नहीं पूछ रहा। टैक्स के बारे में कोई बात नहीं कर रहा।”

मार्च 2022 में किसानों को हिंसा के लिए उकसाया

सत्यपाल मलिक ने 12 मार्च 2022 को एक पुस्तक विमोचन कार्यक्रम के दौरान किसानों को हिंसा के लिए भड़काया था। उन्होंने कहा था कि अगर किसानों की माँगें नहीं मानी गईं तो वो उन्हें मनवाने के लिए हिंसा का रास्ता अपना सकते हैं। दिल्ली को मेरी सलाह है कि उनके साथ न भिड़े, वे खतरनाक लोग हैं। किसान जो चाहते हैं, उसे हासिल कर के रहेंगे।

मार्च 2022 में पीएम मोदी पर साधा निशाना

8 मार्च 2022 को जाट विकास संस्थान की ओर से राजस्थान के चूरू मलिक ने कहा था कि किसान आंदोलन में 700 किसान मर गए। कोई कुतिया भी मर जाती है, तो दिल्ली से प्रधानमंत्री की चिट्‌ठी जाती है। लेकिन 700 किसानों के लिए कोई शोक संदेश नहीं गया। मैं गवर्नरशिप का पीरियड खत्म होने के बाद पूरे देश में घूमूँगा। किसानों को एकत्रित करूँगा। ताकि आगे हम माँगने वाले नहीं, देने वाले बनें।

इंदिरा गाँधी और जनरल वैद्य के हत्यारों का गुणगान

नवंबर 2021 में सत्यपाल मलिका का एक वीडियो वायरल हुआ था। वीडियों में वे कह रहे थे कि यदि कृषि कानून वापस नहीं लिए गए होते तो उनका हाल इंदिरा गाँधी जैसा होता। इतना ही नहीं वीडियो में मलिक का बयान सुनकर ऐसा लग रहा था कि वे इंदिरा गाँधी और जनरल वैद्य की हत्या करने वालों का गुणगान कर रहे हैं। उन्होंने धमकी देते हुए कहा था किअगर आपको लगता है कि किसान प्रदर्शनकारी अपने आप वापस चले जाएँगे तो ये आपकी गलतफहमी है।

‘मैंने झूठ बोला था’: अमित शाह पर दिए गए बयान से पलटे पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक, अब बोले – मैं अपनी बात वापस लेता हूँ

जम्मू कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक प्रधानमंत्री मोदी को लेकर दिए अपने बयान से पलट गए हैं। मलिक ने कहा है कि उन्होंने झूठ बोला था। सत्यपाल मलिक ने यह बात वामपंथी प्रोपेगैंडा पोर्टल द वायर के साथ हुए एक इंटरव्यू में कही। इंटरव्यू शुक्रवार (14 फरवरी 2023) का सामने आया।

दरअसल, सत्यपाल मलिक ने जनवरी 2022 में कहा था कि अमित शाह ने उन्हें बताया है कि पीएम मोदी ने ‘अपना दिमाग खो दिया है’। द वायर के लिए इंटरव्यू कर रहे करण थापर ने सत्यपाल मलिक से प्रधानमंत्री को लेकर विवादास्पद बयान को लेकर बात की। इस बयान में सत्यपाल मलिक ने पीएम मोदी से मुलाकात को लेकर कहा था, “मैंने उनसे कहा कि आपके लिए तो मरे थे। आप राजा बने हुए हो उनकी वजह से। खैर, झगड़ा हो गया मेरा। उन्होंने कहा कि अमित शाह से मिलो। मैं अमित शाह से मिला, उसने कहा “सत्यपाल, इसकी अकल मार रखी है लोगों ने। तुम बेफिकर रहो, मिलते रहो ये किसी न किसी दिन समझ में आ जाए।”

इस पर सत्यपाल मलिक ने न केवल यह स्वीकार किया कि उन्होंने यह बयान दिया था बल्कि अपने ही बयान से पलट गए। उन्होंने कहा, “मैंने अमित शाह से संबंधित बयान के बारे में पूरी तरह झूठ बोला था। उन्होंने मुझसे कभी कुछ नहीं कहा। मैं इस बयान को वापस लेता हूँ। उन्होंने कभी कुछ नहीं कहा।” इसी मुद्दे को लेकर जब करण थापर ने सत्यपाल मलिक से दोबारा सवाल किया तो उन्होंने स्वीकार किया कि वह गलत थे।

गौरतलब है कि सत्यपाल मलिक ने जनवरी 2022 में हरियाणा के दादरी में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री को लेकर विवादित टिप्पणी की थी। उन्होंने दावा किया था कि प्रधानमंत्री के साथ बैठक के दौरान उन्होंने किसानों की मौत का मुद्दा उठाया था। लेकिन प्रधानमंत्री ने अहंकारपूर्ण तरीके से जवाब दिया। मलिक ने दावा किया था कि पीएम मोदी के साथ उनकी बातचीत 5 मिनट में ही बहस में बदल गई। मलिक का दावा था कि जब उन्होंने पीएम मोदी से कहा कि किसान आंदोलन में 500 से अधिक किसान मारे गए हैं। इस पर पीएम नाराज हो गए और पूछा “क्या वे मेरी वजह से मर गए?”

सत्यपाल मलिक के इस बयान के बाद विपक्ष पीएम पर हमलावर हो गया था। लेकिन अब सत्यपाल मलिक के हालिया बयान से यह स्पष्ट हो गया है कि उनके किसी भी बयान पर विश्वास नहीं किया जा सकता।

इस इंटरव्यू के दौरान सत्यपाल मलिक ने पुलवामा हमले के लिए आत्मघाती आतंकी आदिल अहमद डार को जिम्मेदार ठहराने की बजाए केंद्र सरकार की ओर से ‘लापरवाही’ को दोषी ठहराया। बता दें कि पुलवामा हमले में देश के 40 जवान बलिदान हो गए थे।

इंटरव्यू के दौरान द वायर के करण थापर और सत्यपाल मलिक दोनों ने ही कॉन्ग्रेस नेता और पूर्व सांसद राहुल गाँधी की तारीफ करते हुए कहा कि भारत जोड़ो यात्रा के बाद से राहुल की लोकप्रियता आसमान छू रही है। इस इंटरव्यू के अंत में सत्यपाल मलिक ने राष्ट्रपति द्रोपती मुर्मू के बारे में भी निराधार दावे किए। मलिक ने दावा किया कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू अपनी मर्जी से लोगों से मिल नहीं सकतीं। इसके लिए उन्हें एक सूची प्रधानमंत्री कार्यालय भेजनी पड़ती है। जहाँ से मंजूरी मिलने के बाद ही राष्ट्रपति लोगों से मिल पाती हैं।

‘भूखे रहोगे तो ईसा मसीह से मिलवाऊँगा’ : केन्या में पादरी के खिलवाड़ ने ली 4 जान, 11 लोग घर में तड़पते मिले, जंगल में मिली सामूहिक कब्रें

अफ्रीकी महाद्वीप के देश केन्या में एक चर्च के पादरी द्वारा फैलाए गए अंधविश्वास के चलते 4 लोगों की भूख से मौत हो गई है। मरने वालों में 3 पुरुष और एक महिला शामिल हैं। पादरी ने कुल 15 लोगों को लम्बे समय तक भूखे रहने पर ईसा मसीह से मिलाने का वादा किया था। पुलिस ने इसी मामले में 11 अन्य लोगों को छापेमारी के बाद एक घर से बरामद किया। भूख से उन सबकी हालत भी बेहद खराब थी। स्थिति देखते हुए उन्हें अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। मामले का खुलासा गुरुवार (13 अप्रैल 2023) को हुआ।

रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला केन्या के किलिफी काउंटी क्षेत्र का है। यहाँ के गुड न्यूज इंटरनेशनल चर्च में आस-पास के तमाम लोग जुड़ गए हैं। इस चर्च का संचालन पास्टर माकेन्ज़ी नथेन्गे द्वारा किया जाता है। कुछ समय पहले यहाँ प्रार्थना के नाम पर कई लोगों को जमा किया गया था। बताया जा रहा है कि उन सभी को पास्टर ने यीशु से मिलाने का दावा किया। पादरी की बातों में आ कर 15 लोग कुछ भी करने के लिए तैयार हो गए। इस पर माकेन्ज़ी नथेन्गे द्वारा उन्हें भूखा रहने के लिए कहा गया।

पादरी की बातों पर विश्वास कर के 15 लोगों ने खाना छोड़ दिया। वो सभी एक घर में एक साथ रहना शुरू कर दिए थे। इसमें पुरुष और महिलाएँ दोनों शामिल हैं। धीरे-धीरे भूख से उनकी तबीयत खराब होने लगी। इस बात की जानकारी जब पुलिस को हुई तो उसने घर पर दबिश दी। यहाँ पुलिस को सभी 15 लोग बेहद बुरी हालत में मिले। पुलिस ने उन सभी को अस्पताल में भर्ती करवाया जहाँ 4 लोगों को मृत घोषित कर दिया गया। इसमें 3 पुरुष और 1 महिला शामिल है।

मृतकों के पास पहचान पत्र और मोबाइल फोन न होने के चलते पुलिस को उनकी तस्दीक करने में दिक्कत पेश आ रही है। हालाँकि अस्पताल में भर्ती अन्य जीवित लोगों में से कुछ की पहचान पुलिस ने उजागर की है। इसमें एलन ओबिएरो, विक्लिफ वेमोई, मर्सी आओको, पॉल करिसा, जेन न्यांबुरा, जेन न्यांबुरा, फेलिक्स वांडेरा, डेविड अबुहाया, कोलिन्स कबाये, मोनिका मासिका और एक अन्य महिला शामिल है। एलन ओबिएरो की उम्र महज 17 साल बताई जा रही है।

पुलिस को तलाशी के दौरान आस-पास के जंगलों में सामूहिक कब्रें मिली हैं। इन कब्रों को पास्टर माकेन्ज़ी नथेन्गे के अनुयायियों की माना जा रहा है। पिछले ही माह आरोपित पादरी को 2 बच्चों की मौत के मामले में गिरफ्तार किया गया था। हालाँकि बाद में उसे जमानत मिल गई थी। इस मामले में अभी तक आरोपित पादरी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। अपनी सफाई में पादरी माकेन्ज़ी नथेन्गे ने बताया कि उसने घटनास्थल वाले चर्च को हमेशा के लिए बंद कर दिया है और पिछले काफी समय से उसका वहाँ से कोई वास्ता नहीं है। फिलहाल पुलिस मामले की जाँच कर रही है।

पड़ोस के घर में घुस मौलवी ने नाबालिग बच्ची को दबोचा, हल्ला मचने पर फरार: शिकायत के बाद देवरिया पुलिस ने गुलाम वारिस को पकड़ा

उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में एक मस्जिद के मौलवी द्वारा के नाबालिग लड़की से छेड़खानी का मामला सामने आया है। आरोपित का नाम गुलाम वारिस है जो एक मस्जिद में काम करता है। गुलाम वारिस पीड़िता को अकेला देख कर उसके घर में घुस गया था। पीड़िता ने शोर मचाया तो मौलवी फरार हो गया था जिसे बाद पुलिस ने उसे गुरुवार (13 अप्रैल 2023) को गिरफ्तार कर लिया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला देवरिया के थानाक्षेत्र महुआडीह का है। यहाँ के एक गाँव पलिया कलां में एक मस्जिद में गुलाम वारिस नाम का मौलवी रहा करता था। वह इसी मस्जिद में काम किया करता था। मूल रूप से गुलाम वारिस भुलवारिया गाँव का रहने वाला है। मस्जिद के बगल में ही 13 साल की एक नाबालिग लड़की अपने परिवार के साथ रहती है। घटना के दिन पीड़िता के परिवार वाले खेतों में काम करने गए थे। तब लड़की घर में अकेली थी जिसकी भनक मौलवी को लग गई।

शिकायत में पीड़िता ने बताया है कि घर में घुसे मौलवी ने उसे बदनीयती से दबोच लिया। इसके बाद मौलवी ने लड़की के साथ छेड़खानी शुरू कर दी। गुलाम वारिस की नीयत भाँप कर लड़की जोर-जोर से चिल्लाने लगी। आस-पास के लोग लोग जमा होने लगे तो मौलवी भाग निकला। लड़की के घर वालों ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई तो पुलिस ने केस दर्ज कर के आरोपित की तलाश शुरू कर दी। आखिरकार गुरुवार को पुलिस ने गुलाम वारिस को गिरफ्तार कर लिया। आरोपित को जेल भेज दिया गया है।

दोस्ती की ‘सौरभ’ से, निकला शाहरुख़… अब फंदे से लटकी मिली रेनू कश्यप की लाश: कहता था – मुस्लिम बनो वरना बदनाम कर दूँगा

उत्तर प्रदेश के कानपुर में पिछले 10 दिनों में छेड़खानी, ब्लैकमेलिंग और धमकी से परेशान होकर 4 लड़कियों ने आत्महत्या कर ली। इनमें से एक मामला ‘लव जिहाद’ से भी जुड़ा हुआ है। बुधवार (12 अप्रैल, 2023) को हरिबंश मोहाल शनिदेव मंदिर के पास रहने वाली रेनू कश्यप ने फाँसी लगाकर जान दे दी। मामले में पुलिस ने केस दर्ज कर आरोपित शाहरुख को गिरफ्तार कर लिया है।

रेनू के परिजनों की तरफ से दी गई जानकारी के मुताबिक, बीए की परीक्षा पास करने के बाद प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रही रेनू की दोस्ती ‘सौरभ’ नाम के लड़के से हो गई। कुछ ही दिनों बाद रेनू को पता चल गया कि उसने जिससे दोस्ती की है वह सौरभ नहीं शाहरुख है। जिसके बाद रेनू ने उससे दूरी बनानी शुरू कर दी। इससे नाराज शाहरुख ने रेनू को धमकी दी। उसने रेनू पर धर्मपरिवर्तन कर निकाह करने का दबाव बनाना शुरू कर दिया।

परिजनों की शिकायत के अनुसार शाहरुख ने धमकी दी कि यदि रेनू ने उसके साथ निकाह नहीं किया तो वह उसे मोहल्ले से लेकर सोशल मीडिया तक पर बदनाम कर देगा। इतना ही नहीं पिता और भाई को सारी बात बता देगा। धमकियों से परेशान रेनू ने शाहरुख का फोन उठाना बंद कर दिया। 12 अप्रैल 2023 को शाहरुख रेनू के घर के पास आ धमका। इससे रेनू बुरी तरह डर गई और घर में फाँसी लगाकर जान दे दी।

रेनू के फोन न उठाने पर शाहरुख ने उसकी बहन को फोन किया। तब तक उसके आत्महत्या की जानकारी पुलिस को दे दी गई थी। रेनू की छोटी बहन ने पुलिस के कहने पर उसे नजदीक के पार्क में मिलने के लिए बुलाया। वहाँ पहले से मौजूद पुलिस वालों ने शाहरुख को गिरफ्तार कर लिया। हरबंश मोहाल थाना प्रभारी विनीत चौधरी ने मीडिया को जानकारी दी है कि फिलहाल आरोपित शाहरुख के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने की धारा में FIR दर्ज की गई है। जाँच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

इसी तरह कानपुर के सचेंडी थाना इलाके में शमशाद नाम का शख्स 20 साल की एक लड़की को परेशान करता था। परिजनों ने लड़की की शादी कहीं और तय कर दी। 31 मार्च 2023 के दिन युवती की सगाई हो गई जिससे शमशाद बौखला गया। रिपोर्टों के मुताबिक 4 अप्रैल की दोपहर को शमशाद अपने दोस्तों के साथ लड़की के घर में दाखिल हो गया और हत्या की धमकी दी। उसने कहा कि यदि यह शादी हुई तो पूरे परिवार यहाँ तक की लड़का पक्ष को भी नहीं छोड़ेंगे। धमकी से सहमी लड़की ने उसी दिन फाँसी लगा कर खुदकुशी कर ली।

4 अप्रैल को ही कानपुर के साढ़ थाना क्षेत्र के कुम्हडीया बेहटा गाँव की रहने वाली बीएससी की एक छात्रा ने भी फाँसी लगा ली। उसे पास के ही गाँव का रहने वाला राहुल तंग किया करता था। राहुल ने फेसबुक से लड़की की तस्वीरें डाउनलोड की। उन्हें एडिट कर लड़की को परेशान करने लगा। घर से निकलने पर उसका पीछा किया करता था। अश्लील व भद्दे कमेंट किया करता था। आरोप है कि इससे परेशान लड़की ने अपनी जान दे दी।

‘दैनिक भास्कर’ की रिपोर्ट के मुताबिक 4 अप्रैल को ही कविता नाम की लड़की ने लड़के के छेड़खानी से तंग आकर फाँसी लगा ली। परिजनों के अनुसार, राज नाम का लड़का उसका पीछा किया करता था। वह कविता पर वीडियो कॉल का दबाव बना रहा था। कविता की सहेली के अनुसार राज ने उसे फोन कर बताया कि कविता की मदद करे वह आत्म हत्या करने जा रही है। जब तक सहेली कविता के घर पहुँचती वह फाँसी लगा चुकी थी।

कर्नाटक में आएगी भाजपा सरकार? : विधानसभा चुनाव से पहले ‘जन की बात’ ने जारी किया ओपिनियन पोल, जानें कॉन्ग्रेस के क्या होंगे हाल

कर्नाटक में 10 मई 2023 को विधानसभा चुनाव के लिए वोटिंग होगी जबकि 13 मई को वोटों की गिनती होगी। इसके पहले एशियानेट-जन की बात ने अपना ओपिनियन पोल जारी किया है। इस ओपिनियन पोल में किसी भी पार्टी को बहुमत मिलता नजर नहीं आ रहा है। हालाँकि भारतीय जनता पार्टी 98-109 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभर सकती है। 225 सीटों वाली विधानसभा में बहुमत के लिए 113 सीटों की आवश्यकता है।

एशियानेट-जन की बात ओपिनियन पोल के अनुसार कर्नाटक विधानसभा चुनाव में भाजपा और कॉन्ग्रेस के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिल सकती है। पोल के अनुसार जहाँ बीजेपी के खाते में 98-109 सीटें जाती दिख रही हैं वहीं कॉन्ग्रेस को 89-97 सीटों पर कामयाब रहने का अनुमान लगाया गया है। ओपिनियन पोल के अनुसार 25-29 सीटें जीतकर जनता दल सेक्युलर (JDS) तीसरे नंबर पर रह सकती है।

ओपिनियन पोल के अनुसार ओल्ड मैसूर क्षेत्र की 57 सीटों में से भाजपा को सिर्फ 12 सीटों पर संतोष करना पड़ सकता है। वहीं कॉन्ग्रेस को 23 और जेडीएस के खाते में 22 सीटें जा सकती हैं। कोस्टल कर्नाटका की 19 सीटों में से 16 भारतीय जनता पार्टी को मिल सकती हैं जबकि सिर्फ 3 सीटें कॉन्ग्रेस को मिलती नजर आ रही हैं। यहाँ जेडीएस और अन्य का खाता खुलना भी मुश्लिक है।

उसी तरह बेंगलुरु क्षेत्र की 32 सीटों में से 15 भाजपा को तो 14 कॉन्ग्रेस को मिलने का अनुमान है। यहाँ जेडीएस को 3 सीटें मिल सकती हैं। कर्नाटक के हैदराबाद क्षेत्र जिसे अब कल्याण कर्नाटक के नाम से जाना जाता है में कॉन्ग्रेस को 23 सीटें मिलने का अनुमान है। जबकि भाजपा को यहाँ 16 सीटें मिल सकती हैं। जेडीएस को सिर्फ 1 सीट पर संतोष करना पड़ सकता है।

कर्नाटक विधानसभा चुनाव 2018 में भी किसी एक दल को स्पष्ट बहुमत प्राप्त नहीं हो सका था। बीजेपी ने 2018 में 104 सीटें हासिल की थीं। कॉन्ग्रेस को 78 और जेडीएस को 37 सीटें प्राप्त हुई थीं। चुनाव परिणाम सामने आने के बाद कॉन्ग्रेस और जेडीएस ने मिलकर सरकार बना ली थी। 2019 में विधायकों के पार्टी बदलने की वजह से सरकार गिर गई थी और बीजेपी ने सत्ता में वापसी की थी।