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पाकिस्तान के पूर्व PM इमरान का बीवी बुशरा के साथ रिश्ता ‘अवैध’: निकाह कराने वाले मौलवी सईद का दावा- इद्दत की शर्ते पूरी नहीं हुईं

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान (Imran Khan) का बुशरा बीबी (Bushra Bibi) से निकाह जायज नहीं है। मौलवी मुफ्ती सईद का कहना है कि यह निकाह इस्लामी शरिया कानून के मुताबिक नहीं हुआ था। इसी मौलवी ने दोनों का निकाह करवाया था। इस्लामाबाद की अदालत में मोहम्मद हनीफ की याचिका पर सुनवाई के दौरान मौलवी ने यह बात कही।

मौलवी ने खुलासा किया कि बुशरा बीबी ने निकाह इद्दत के दौरान की गई थी। मुस्लिम महिलाएँ शौहर की मौत अथवा तलाक के बाद दूसरा निकाह इद्दत का समय पूरा करने के बाद ही कर सकती हैं। इस दौरान उन्हें दूसरे पुरुष से निकाह की इस्लाम इजाजत नहीं देता।

इद्दत का समय परिस्थितियों के आधार पर अलग-अलग हो सकता है। अमूमन यह करीब 89 दिन का होता है। बुशरा बीबी ने नवंबर 2017 में तलाक लिया था। इमरान खान के साथ उनका निकाह 1 जनवरी 2018 को हुआ था। यानी तलाक और निकाह के बीच 89 दिन का गैप नहीं रखा गया था।

रिपोर्टों के अनुसार मौलवी ने बताया कि उसे 2018 में लाहौर के रक्षा आवास प्राधिकरण में निकाह के लिए ले जाया गया था। खुद को बुशरा बीबी की बहन बताने वाली एक महिला की सहमति के बाद उसने निकाह करवाया था। मौलवी सईद के अनुसार इस महिला ने उनसे कहा था कि शरीयत के हिसाब से निकाह के लिए सभी शर्तें पूरी की गई हैं।

1 जनवरी 2018 को लाहौर में हुए इस निकाह के गवाह इमरान खान के दोस्त जुल्फी बुखारी और उनकी तहीरक-ए-इंसाफ पार्टी के पूर्व नेता अवन चौधरी थे। मौलवी ने अदालत को यह भी बताया कि इमरान खान ने फरवरी 2018 में उनसे दोबारा संपर्क किया। फिर से निकाह कराने को कहा, क्योंकि उनका मानना था कि पहली बार निकाह शरिया कानून के अनुसार नहीं था। दूसरी बार जब मौलवी से संपर्क किया गया था, तब तक इद्दत का समय पूरा हो चुका था।

मुफ्ती ने अदालत को यह भी बताया कि निकाह के समय इमरान खान और बुशरा बीबी दोनों ही इद्दत का समय पूरा नहीं होने के बारे में जानते थे। लेकिन इमरान खान का मानना था कि इस निकाह से उन्हें प्रधानमंत्री बनने में मदद मिलेगी। कथित तौर पर ऐसा मुस्तकबिल किया गया था कि बुशरा बीवी से निकाह के बाद क्रिकेटर से नेता बने इमरान खान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बन जाएँगे।

फूफेरी बहन से तय था असद का निकाह, इसी साल मेरठ में होना थाः गुड्डू मुस्लिम को गले लगाने वाला अखलाक ही था होने वाला ससुर

माफिया अतीक अहमद के बेटे असद का निकाह तय था। अपनी फूफेरी से उसका निकाह इसी साल मेरठ में होना था। उसके एनकाउंटर के बाद यह जानकारी सामने आई है। असद और उसके गुर्गे मोहम्मद गुलाम को गुरुवार (13 अप्रैल 2023) को यूपी एसटीएफ ने झाँसी में ढेर किया था। दोनों उमेश पाल की हत्या के बाद से फरार थे।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार असद का निकाह अतीक की बहन आयशा नूरी और डॉक्टर अखलाक अहमद की बेटी से तय था। बताया जाता है कि इसकी तैयारियाँ भी चल रही थी। लेकिन उमेश पाल की हत्या के बाद से दोनों परिवार के लिए हालात पूरी तरह बदल गए थे।

उमेश पाल की हत्या का जो वीडियो सामने आया था, उसमें असद भी हमला करते दिखा था। फरारी के बाद वह मेरठ भी गया था। यूपी पुलिस के अनुसार वह पुलिस काफिले पर हमला कर अतीक को छुड़ाने का प्लान बना रहा था। उसका होने वाला ससुर अखलाक भी इस समय जेल में बंद है। उसे एक वीडियो वायरल होने के बाद गिरफ्तार किया गया था। इस वीडियो में वह मेरठ के अपने घर में गुड्डू मुस्लिम को गले लगाता दिखा था। इस मामले के सामने आने के बाद से अखलाक की बीवी आयशा भी फरार है

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार उमेश पाल हत्याकांड में पुलिस ने अतीक अहमद समेत 18 लोगों पर एफआईआर दर्ज किया है। इनमें ज्यादातर लोग अतीक के परिवार वाले हैं। आरोपितों में अतीक के अलावा उसकी पत्नी शाइस्ता परवीन, भाई अशरफ अहमद, असद के अलावा अन्य चार बेटे, बहन आयशा, बहनोई डॉ. अखलाक, गुड्डू मुस्लिम, शदाकत, अरमान, विजय चौधरी उर्फ उस्मान, मोहम्मद गुलाम, अरबाज, साबिर, कैस अहमद, राकेश, अरशद कटरा, नियाज, इकबाल अहमद, शाहरुख समेत कुछ अज्ञात लोग शामिल हैं।

उमेश पाल की हत्या में शामिल 4 आरोपितों को अब तक एनकाउंटर में मार गिराया गया है। इनमें अतीक का तीसरा बेटा असद, शूटर उस्मान, अरबाज और मोहम्मद गुलाम शामिल हैं। इसके अलावा अतीक के परिवार की मदद करने वाले 3 आरोपितों और करीबियों के घर पर बुलडोजर भी चल चुका है। बुल्डोजर की कार्रवाई एनकाउंटर में ढेर हुए मोहम्मद गुलाम के घर पर भी हुई थी।

‘मुझे हथियार की कमी नहीं… पाकिस्तान ड्रोन से भेज देता है’ : अतीक अहमद के ISI और लश्कर से संबंध, UP पुलिस की चार्जशीट में खुलासा

उमेश पाल मर्डर केस में उत्तर पुलिस द्वारा दायर की गई चार्जशीट में माफिया अतीक अहमद को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। इस चार्जशीट में अतीक के बयान के हवाले से कहा गया है कि उसके पाकिस्तान में बैठे आतंकी संगठनों से संपर्क थे।

चार्जशीट में अतीक के हवाले से कहा गया, “मेरे पास हथियारों की कमी नहीं है क्योंकि मेरे पाकिस्तान की आईएसआई और आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से सीधा कनेक्शन है। वे हमें पंजाब बॉर्डर पर ड्रोन के जरिए हथियार पहुँचाते हैं और लोकल कनेक्शन उन्हें उठा लेते हैं। जम्मू-कश्मीर के आतंकी भी ऐसे ही हथियारों का जखीरा लेते हैं। अगर आप मुझे अपने साथ वहाँ लेकर चलोगे तो मैं घटना में प्रयोग हथियार व बारूद बरामद करने में आपकी मदद कर सकता हूँ।”

चार्जशीट के अनुसार, पूछताछ में अशरफ अहमद ने भी कहा कि हथियार और कारतूस जिस जगह पर रखे हैं, इसका पता वह जेल में बैठकर नहीं दे सकते। उसे केवल कुछ ठिकानों की ही जानकारी है। ये ठिकाने खेतों में बने फार्म हाउस जैसे हैं इसलिए वहाँ जाकर ही बताया जा सकता है कि हथियार कहाँ है।

बता दें कि अतीक के आतंकी संगठनों से कनेक्शन का खुलासा मीडिया में असद अहमद के एनकाउंटर के बाद हुआ है। यूपी पुलिस की एसटीएफ ने झाँसी में अतीक के बेटे का एनकाउंटर किया। उसके साथ शूटर गुलाम भी ढेर हुआ। इन दोनों ने प्रयागराज में उमेश पाल पर गोली चलाई थी। दोनों के ऊपर 5-5 लाख रुपए का ईनाम था। इनके एनकाउंटर के बाद अतीक के आंतकी संगठन का खुलासा हुआ। घटना से एक दिन पहले प्रयागराज कोर्ट ने अतीक और उसके भाई को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा था।

‘पाकिस्तान में रहना जेल में रहने जैसा’: न्यूजीलैंड के पूर्व क्रिकेटर ने बताया कमेंट्री के बाद ‘बाबर आजम फैंस’ का खौफ, कहा- कई दिनों तक भूखा रहा, मेंटली टॉर्चर किया

न्यूजीलैंड के पूर्व क्रिकेटर व वर्तमान में कमेंटेटर साइमन डुल ने पाकिस्तान में अपने साथ हुए दुर्व्यवहार का अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि ये घटना ठीक तब की है जब उन्होंने ऑन एयर पाकिस्तानी कप्तान बाबर आजम की स्ट्राइक रेट की आलोचना की और उसके बाद उनकी कमेंटेटर व पूर्व पाकिस्तानी क्रिकेटर आमिर सोहेल के साथ बहस हुई।

डुल ने बताया कि किस तरह उन्हें बाबर आजम के फैन्स के कारण कैद रहना पड़ा। अपने इतने बुरे अनुभव पर उन्होंने कहा, “पाकिस्तान में रहना जेल में रहने जैसा है।”

उन्होंने कहा, “मुझे बाहर जाने की अनुमति नहीं थी क्योंकि बाबर आजम के फैन मेरा इंतजार कर रहे थे। मैं कई दिनों तक वहाँ भूखा रहा। मैं वहाँ मानसिक तौर पर प्रताड़ित किया जाता था। ईश्वर का शुक्र है कि मैं किसी तरह पाकिस्तान से भागने में सफल हुआ।”

बता दें कि डुल ने तीखा कमेंट बाबर आजम पर पीएसएल के दौरान किया था। उन्होंने कहा था कि खिलाड़ी को टीम को पहले रखना चाहिए और इसके बाद अपने पर्सनल माइलस्टोन के बारे में सोचना चाहिए।

मालूम हो कि साइमन डुल फिलहाल आईपीएल में कमेंटेटर के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने आजम की तरह विराट कोहली की स्ट्राइक रेट पर भी सवाल खड़े किए थे। उन्होंने लखनऊ के खिलाफ खेले गए आरसीबी मैच के दौरान कहा था कोहली केवल अपने लिए खेल रहे थे। उनको अपनी हाफ सेंचुरी की चिंता थी टीम के स्कोर की नहीं।

PCB में चल रहा बाबर आजम पर विचार

बाबर आजम की बात करें तो उन्हें अफगानिस्तान के खिलाफ चल रहे टी20 सीरीज से आराम दिया गया था जो सीरीज पाकिस्तान 1-2 से हार गई थी। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष नजम सेठी ने भी उन्हें लेकर सोशल मीडिया पर कहा था कि शाहिद अफरीदी के नेतृत्व में पैनल बाबर आजम को रिप्लेस करने की सोच रहा है।

उन्होंने बताया अंतिम निर्णय पैनल का होगा। सेठी के मुताबिक महीनों से पाकिस्तान में इस बात पर चर्चा चल रही है कि बाबर आजम को कप्तान बरकरार रखने या हटाने के क्या फायदे-नुकसान हैं। हालाँकि पीसीबी चीफ नजम सेठी ने एक साक्षात्कार में ये भी कहा था कि बाबर आजम तब तक पाकिस्तान क्रिकेट टीम के कप्तान बने रहेंगे, जब तक वो मैच जिताते रहेंगे।

काजल हिंदुस्तानी को मिली जमानत: रामनवमी संबोधन पर इस्लामी कट्टरपंथियों ने काटा था बवाल, लगाए थे ‘सर तन से जुदा’ के नारे

हिंदुवादी कार्यकर्ता काजल सिंघला उर्फ काजल हिंदुस्तानी को ऊना भाषण मामले में जमानत मिल गई है। काजल ने गुजरात के ऊना में रामनवमी के अवसर पर कथित रूप से घृणास्पद भाषण दिया था। इसके बाद मुस्लिमों ने उनके खिलाफ शिकायत दी थी। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार काजल को 50,000 रुपए के मुचलके पर जमानत दी गई है। काजल 5 दिनों के बाद जूनागढ़ जेल से रिहा होने वाली हैं।

गुजरात की ऊना पुलिस ने 9 अप्रैल 2023 को काजल हिंदुस्तानी को गिरफ्तार किया था। इसके बाद उनकी पेशी मजिस्ट्रेट के सामने की गई। मजिस्ट्रेट ने उन्हें जूनागढ़ जेल भेज दिया था। इसके पहले 30 मार्च को रामनवमी के अवसर पर गुजरात के गिर सोमनाथ जिले के उना में शोभायात्रा निकाली गई थी। इस शोभायात्रा के बाद एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था, जिसमें काजल ने भी भाषण दिया था।

काजल ने अपने भाषण के दौरान लव जिहाद और लैंड जिहाद सहित कई मुद्दों को उठाया था। स्थानीय मुस्लिमों ने उनके इस भाषण को विवादास्पद बताते हुए विरोध प्रदर्शन किया था। कई जगहों पर पथराव और हिंसक घटनाओं की खबरें सामने आई थी। शहर दो दिनों तक ठप रहा था। इस दौरान उनके ‘सर तन से जुदा’ के नारे भी लगाए गए थे।

बता दें कि काजल पर भाषण के दौरान हिंदू पुरुषों को मुस्लिम महिलाओं का धर्मांतरण करने के लिए उकसाने का आरोप लगाया गया है, जबकि ऐसा उन्होंने नहीं कहा था। उन्होंने कहा था कि यदि मुस्लिम महिलाएँ कट्टर इस्लामी प्रथाओं से बचना चाहती हैं तो उन्हें अपनी इच्छा से हिंदू पुरुषों से शादी करनी चाहिए। उन्होंने किसी भी तरह से हिंदू पुरुषों को मुस्लिम महिलाओं का धर्मांतरण करने के लिए नहीं कहा। काजल के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 295ए, 153ए और 505 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

बचपन से ही ‘नवाबी शौक’ वाला था अतीक अहमद का बेटा असद, खुद को कहता था ‘छोटे सांसद जी’: एनकाउंटर में UP एसटीएफ ने कर दिया ढेर

माफिया अतीक अहमद का बेटा असद अहमद गुरुवार (13 अप्रैल 2023) को यूपी एसटीएफ के साथ मुठभेड़ में झाँसी में मारा गया। उसका शूटर गुलाम भी एनकाउंटर में ढेर कर दिया गया। दोनों उमेश पाल की हत्या के बाद से फरार चल रहे थे। असद ने इंस्टाग्राम पर कई ऐसे पोस्ट शेयर किए हैं, जो उसकी दबंगई को दिखाते हैं। सितंबर 2021 में उसने एक फोटो शेयर की थी, जिसमें वह कई लोगों को कुछ कहते हुए दिखाई दे रहा है। इस फोटो के साथ उसने लिखा था, “वक्त आने पर बता देंगे तुझे ये आसमाँ, हम अभी से क्या बताएँ, क्या हमारे दिल में है।”

असद अहमद के इंस्टाग्राम पोस्ट का स्क्रीनशॉट

एक और पोस्ट में उसने लिखा था, “लोग हथियार दिखाते हैं दहशत बनाने के लिए, हमारी आँखें ही काफी हैं, तेरी धड़कन बढ़ाने के लिए भाई।”

असद अहमद के इंस्टाग्राम पोस्ट का स्क्रीनशॉट

बचपन से ही ‘नवाबी शौक’ रखने वाला अतीक अहमद का बेटा असद खुद को छोटे सांसद जी कहता था।

असद अहमद के इंस्टाग्राम पोस्ट का स्क्रीनशॉट

एक पोस्ट में असद ने लिखा था, “आदतें बुरी नहीं हैं हमारी, बस शौक नवाबों वाले हैं।”

असद अहमद के इंस्टाग्राम पोस्ट का स्क्रीनशॉट

असद ने 14 मार्च 2019 को अपने दोस्तों के साथ एक पोस्ट शेयर करते हुए यह भी लिखा था, “चलो आज फिर थोड़ा मुस्कुराया जाए, बिना माचिस के कुछ लोगों को जलाया जाए।”

असद अहमद के इंस्टाग्राम पोस्ट का स्क्रीनशॉट

इसके अलावा वह अपने अब्बा की पहुँच की सबको धौंस भी दिखाता था। उसने एक पोस्ट में यह भी लिखा था, “जेल की सलाखों में इतना दम नहीं कि हमारे हौसलों के फौलाद को रोक सकें। जिस दिन मर्जी होगी जंजीर तोड़कर खुले आसमान का मंजर देख लेंगे।” उसने अपने इंस्टाग्राम पर एआईएमआईएम (AIMIM) चीफ असदुद्दीन ओवैसी की तस्वीर भी शेयर की हुई है।

असद अहमद के इंस्टाग्राम पोस्ट का स्क्रीनशॉट

बता दें कि यूपी एसटीएफ ने उमेश पाल मर्डर केस में आरोपित असद अहमद और शूटर मोहम्मद गुलाम पर 5-5 लाख रुपए का इनाम रखा था। दोनों का एनकाउंटर करने वाली टीम को डीएसपी नवेंदु और विमल लीड कर रहे थे। दोनों के पास से विदेशी हथियार भी बरामद हुए हैं।

माफिया अतीक अहमद के बेटे के एनकाउंटर पर गमजदा हुए अखिलेश यादव और ओवैसी, एक ने ‘भाईचारा’ का राग अलापा तो दूसरे ने छेड़ा ‘मजहबी’ तान

माफ‍िया अतीक अहमद के बेटे असद और उसके गुर्गे गुलाम के एनकाउंटर पर राजनीति शुरू हो गई है। दोनों उमेश पाल की हत्या में वांछित थे। 13 अप्रैल 2023 को यूपी एसटीएफ के साथ मुठभेड़ में झाँसी में ढेर हो गए। यह बात भी सामने आई है कि दोनों पुलिस काफिले पर हमला कर अतीक को छुड़ाने का प्लान बना रहे थे। लेकिन सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने एनकाउंटर को फेक बताया है। एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भी सवाल उठाए हैं।

अखिलेश यादव ने ट्वीट कर कहा है, “झूठे एनकाउंटर करके भाजपा सरकार सच्चे मुद्दों से ध्यान भटकाना चाह रही है। भाजपाई न्यायालय में विश्वास ही नहीं करते हैं। आज के व हालिया एनकाउंटरों की भी गहन जाँच-पड़ताल हो व दोषियों को छोड़ा न जाए। सही-गलत के फैसलों का अधिकार सत्ता को नहीं होता है। भाजपा भाईचारे के खिलाफ है।”

अतीक का सपा कनेक्शन

माफिया अतीक अहमद ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत बतौर निर्दलीय 1989 में इलाहाबाद पश्चिमी सीट से विधानसभा चुनाव में जीत हासिल कर की थी। अगले 2 चुनावों में वह इसी सीट से निर्दलीय विधायक बनता रहा। इसके बाद साल 1996 में वह समाजवादी पार्टी में शामिल हो गया। सपा के टिकट पर वह चौथी बार इस सीट से विधायक बना। इसके बाद वह अपना दल में शामिल हुआ। कुछ समय बाद फिर सपा में लौट आया और 2004 में फूलपुर से सांसद बन गया।

2014 के लोकसभा चुनाव में भी अतीक अहमद को समाजवादी पार्टी ने उम्मीदवार बनाया था। उमेश पाल की हत्या के बाद विधानसभा में सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि माफियाओं को समाजवादी पार्टी आश्रय देती रही है। अपराधी और माफिया उसके द्वारा पाले गए हैं। उन्होंने पूछा था कि क्या यह सच नहीं है कि जिसके खिलाफ FIR दर्ज हैं उसे सपा ने सांसद बनाया था? सीएम ने अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा था, “आप अपराधी को पालते हैं और उसके बाद तमाशा बनाते हैं। हम इस माफिया को मिट्टी में मिला देंगे।”

ओवैसी ने कहा धर्म देखकर हो रहा एनकाउंटर

असद और गुलाम के एनकाउंटर पर हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने भी सवाल उठाए हैं। निजामाबाद में उन्होंने कहा कि एनकाउंटर के नाम पर कानून की धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं। अगर गोली से इंसाफ करने का ही सरकार ने फैसला कर लिया है तो फिर अदालतों को बंद कर दिया जाना चाहिए। पूरे मामले की मजहबी रंग देते हुए उन्होंने कहा, ” क्या जुनैद और नसीर को जिसने मारा भाजपा उसका भी एनकाउंटर करवाएगी। नहीं करवाएगी, क्योंकि वे मजहब के नाम पर एनकाउंटर करते हैं।”

उल्लेखनीय है कि 2021 के यूपी विधानसभा चुनावों से पहले सपा छोड़कर अतीक अहमद का पूरा कुनबा ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) में शामिल हो गया था। अतीक की बीवी शाइस्ता परवीन और उसका बेटा अली प्रयागराज में ओवैसी की जनसभा में भी नजर आए थे। उमेश पाल की हत्या में शाइस्ता की भी तलाश है।

₹15 अरब की टैक्स चोरी, कोर्ट में आरिफ पटेल और जफर अली दोषी करार: जानिए ब्रिटेन के सबसे बड़े फ्रॉड में से एक को कैसे दिया अंजाम

जाली कपड़ों के घोटाले के मास्टरमाइंड भारतीय मूल के आरिफ पटेल (Arif Patel) को ब्रिटेन में अब तक की सबसे बड़ी टैक्स चोरी 150 मिलियन पाउंड (15 अरब से अधिक रुपए) का दोषी ठहराया गया है। विदेशी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चेस्टर क्राउन कोर्ट में 14 सप्ताह तक चली सुनवाई के बाद मंगलवार (11 अप्रैल 2023) को पटेल को गलत बही खाता पेश करने, सरकारी राजस्व में धोखाधड़ी करने के लिए साजिश रचने, ब्रांड के नाम पर जाली कपड़ों की बिक्री करने और मनी लॉन्ड्रिंग का दोषी पाया गया।

प्रेस्टन के सॉक्स निर्माता 55 वर्षीय आरिफ पटेल पर एक आपराधिक गिरोह के साथ मिलकर कपड़ा और मोबाइल फोन के फर्जी निर्यात पर वैट भुगतान का दावा कर £97m (9 अरब से अधिक रुपए) का टैक्स चोरी करने का आरोप है। इन पैसों का इस्तेमाल उसने प्रेस्टन और लंदन में संपत्ति खरीदने के लिए किया। बताया जा रहा है कि वह बहुत पहले प्रेस्टन से भाग गया है और अभी वह दुबई में रह रहा है।

इस मामले में आरिफ के सह आरोपित दुबई के 58 वर्षीय मोहम्मद जफर अली को भी राजस्व में धोखाधड़ी करने और मनी लॉन्ड्रिंग का दोषी पाया गया है। आरिफ और अली को अगले महीने सजा सुनाई जाएगी।

आरिफ पटेल ने कैसे रचा 150 मिलियन पाउंड का फ्रॉड?

आरिफ पटेल और Faisaltex ग्रुप की कंपनियों ने 2004 में नकली कपड़ों के थोक आयात की ओर रुख किया था। अगले तीन वर्षों के दौरान नकली डिजाइनर कपड़ों वाले दर्जनों कंटेनरों को पूरे ब्रिटेन में बंदरगाहों पर रोक दिया गया था। यूके के व्यापारियों को इसकी पुष्टि तब हुई जब ग्लासगो थोक व्यापारी को होने वाली एक डिलीवरी पुलिस द्वारा रोक दी गई। इसके बाद जाँच में ब्रांड के नाम पर जाली कपड़ों की बिक्री करने का मामला सामने आया था।

इस घोटाले को Carousel Fraud के रूप में जाना जाता है, जहाँ माल वास्तविक खरीदारों को बेचा जाता है, लेकिन पूरी प्रक्रिया अपराधियों द्वारा कंट्रोल होती है। आरिफ पटेल अक्सर मोहम्मद जफर अली से मिलने के लिए दुबई जाता था। इसके अलावा वह ब्रांड के नाम पर जाली कपड़े बनाने वाले निर्माताओं के साथ डील करने के लिए चीन और तुर्की भी जाया करता था। आरिफ पटेल के बारे में कहा जाता है कि वह शानदार जीवन जीने का शौकीन था। इस पैसों का इस्तेमाल उसने प्रेस्टन में संपत्ति खरीदने के लिए किया था, जिसमें लंकाशायर सिटी की मेन शॉपिंग स्ट्रीट फिशरगेट पर कमर्शियल प्रॉपर्टीज भी शामिल हैं।

जलियाँवाला बाग नरसंहार: रवींद्रनाथ टैगोर करना चाहते थे विरोध सभा, क्यों नहीं मिला महात्मा गाँधी और कॉन्ग्रेस का साथ?

13 अप्रैल 1919 दिन बैसाखी का था। उस दिन अमृतसर के जलियाँवाला बाग में अग्रेंजों के काले कानून रौलेट एक्ट और अमृतसर के 2 नेताओं डॉ. सैफुद्दीन किचलू, डॉ. सतपाल की गिरफ्तारी का विरोध करने के लिए एक सभा हो रही थी। इस सभा में स्वतंत्रा संग्राम सेनानी भाषण देने वाले थे। शहर में उस समय कर्फ्यू लगा हुआ था, हजारों की संख्यों में लोग इकट्ठा हुए थे। जब ब्रिटिश हुकूमत ने जलियाँवाला बाग पर इतने लोगों की भीड़ देखी, तो वह परेशान हो गए। वह भारतीयों की आवाज कुचलना चाहते थे और उस दिन अंग्रेजों ने क्रूरता की सारी हदें पार कर दी।

जनरल रेजिनाल्ड एडवर्ड डायर नाम के अंग्रेज अफसर ने बिना कोई चेतावनी दिए उस सभा में मौजूद 5 हजार से अधिक लोगों पर गोलियाँ चलाने का आदेश दे दिया और देखते ही देखते सभा स्थल लाशों के ढेर में बदल गया। गोलियों का निशाना बनने वालों में जवान, महिलाएँ, बूढ़े-बच्चे सभी थे। जनरल डायर की गोलियों का शिकार वो लोग भी बने, जो केवल जलियाँवाला बाग में मेला देखने आए थे।

गोलियाँ चलते ही वहाँ अफरातफरी की स्थिति हो गई और लोग अपनी जान बचाने के लिए भागने लगे। इस दौरान फायरिंग और भगदड़ में भी सैकड़ों लोग मारे गए। जलियाँवाला बाग उस समय मकानों के पीछे रहा एक खाली मैदान था और वहाँ तक जाने या बाहर निकलने के लिए सिर्फ एक संकरा रास्ता था और चारों ओर मकान थे। भागने का कोई रास्ता नहीं था इसलिए फायरिंग के समय कुछ लोग जान बचाने के लिए मैदान में मौजूद कुएँ में कूद गए लेकिन अधिकतर लोगों के ऐसा करने से कुआँ देखते ही देखते लाशों से भर गया।

उस वक्त अमृतसर में क‌र्फ्यू लगा हुआ था इसलिए घायलों को इलाज के लिए कहीं ले जाया नहीं जा सका। लोगों ने वहीं तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया। ब्रिटिश सरकार के अनुसार जलियाँवाला बाग के इस नरसंहार में 379 लोग मारे गए थे और 1200 घायल हुए थे। लेकिन पंडित मदन मोहन मालवीय ने जलियाँवाला बाग का दौरा किया था। उन्होंने मरने वालों की संख्या 1000 से ऊपर बताई थी।

जनरल डायर के आदेश पर हजारों लोगों की जान ले ली गई। जगह-जगह ब्रिटिश शासन के खिलाफ विरोध हो रहा था… देश का खून खौल रहा था लेकिन मोतिलाल नेहरू ब्रिटिश हुकूमत की तारीफ करने में जुटे हुए थे। कॉन्ग्रेस का 34वाँ अधिवेशन अमृतसर में बुलाया गया था। पहले दिन यानी 27 दिसंबर, 1919 को मोतीलाल नेहरू अपने अध्यक्षीय भाषण में ब्रिटिश शासन की शान में कसीदे पढ़ रहे थे।

उस दौरान जॉर्ज फ्रेडेरिक (V) यूनाइटेड किंगडम के राजा और भारत के सम्राट कहे जाते थे। उनके उत्तराधिकारी प्रिंस ऑफ़ वेल्स, एडवर्ड अल्बर्ट (VIII) का 1921 में भारत दौरा प्रस्तावित था। अधिवेशन में मोतीलाल ने सर्वशक्तिमान भगवान से प्रार्थना करते हुए भारत की समृद्धि और संतोष के लिए एडवर्ड की बुद्धिमानी और नेतृत्व की सराहना की। मोतीलाल नेहरू ने ब्रिटिश शासन की उदारता और अपनी निष्ठा का भी जिक्र किया।

यानी जलियाँवाला बाग के नरसंहार के अभी 6-7 महीने भी नहीं हुए थे, मोती लाल नेहरू और कॉन्ग्रेस का अग्रेंजो के प्रति पूरी तरह हृदय परिवर्तन हो चुका था। जैसे इतनी बड़ी नरसंहार की घटना कोई मामूली घटना हो। कॉन्ग्रेस इस हत्याकांड का विरोध नहीं कर रही थी।

क्रूरता की हद लाँघने वाले जनरल डायर की ब्रिटिश पार्लियामेंट भी तारीफ कर रही थी और मोतीलाल नेहरू भी अग्रेजों का विरोध करने के बजाय उनके शान में कसीदे पढ़ रहे थे।

ब्रिटिश संसद और जनरल डायर

जिस ब्रिटिश शासन की मोतीलाल नेहरू तारीफ़ कर रहे थे वहाँ की ब्रिटिश संसद जनरल डायर का गुणगान कर रही थी। पार्लियामेंट ऑफ़ यूनाइटेड किंगडम की 19 जुलाई, 1920 को एक प्रस्ताव में कहा गया, “जनरल डायर बहुत क्षमता वाले अधिकारी हैं, उससे भी ज्यादा, उन्होंने कुशलता और मानवता के गुणों से अत्यंत प्रभावित किया हैं।” ब्रिटेन का यह नजरिया क्रूरता, फासीवाद और तानाशाही का एक उदाहरण था। इससे भी खतरनाक और शर्मनाक था लेकिन कॉन्ग्रेस ने ब्रिटिश पार्लियामेंट के इस प्रस्ताव पर कोई प्रतिक्रिया तक नहीं देना… विरोध करना तो बहुत दूर की बात है।

ब्रिटिश सरकार ने 1920 में डिसऑर्डर इन्क्वायरी कमेटी की रिपोर्ट प्रकाशित की। इस रिपोर्ट के मुताबिक नरसंहार के दिन 5000 से ज्यादा लोग वहाँ मौजूद थे। डायर के साथ 90 लोगों की फौज थी जिसमें 50 के पास राइफल्स और 40 के पास खुर्की (यानी छोटी तलवार) थी। डायर ने लिखित में बताया था कि जितनी भी गोलियाँ चलाई गई, वह कम थी। अगर उसके पास पुलिस के जवान ज्यादा होते तो जनहानि भी अधिक हुई होती। जनरल डायर यह तय करके आया था कि अगर उसके आदेश नहीं माने गए तो वह गोलियाँ चला देगा और हुआ भी यही। बिना चेतावनी के लगातार 10 मिनट तक वह गोलियाँ चलवाता रहा।

जलियाँवाला बाग में मृतकों की संख्या

एक ब्रिटिश अधिकारी जेपी थॉमसन ने एचडी क्रैक को 10 अगस्त, 1919 को पत्र लिखा, “हम इस स्थिति में नहीं हैं जिसमें हम बता सकें कि वास्तविकता में जलियाँवाला बाग में कितने लोग मारे गए। जनरल डायर ने मुझे एक दिन बताया कि यह संख्या 200 से 300 के बीच हो सकती है। उसने बताया कि उनके फ्रांस के अनुभव के आधार पर 6 राउंड शॉट से एक व्यक्ति को मारा जा सकता है। उस दिन कुल 1650 राउंड गोलियाँ चलाई गई। उसके बाद ब्रिटिश सरकार ने डायर के अनुमान के आधार पर 291 लोगों के मारे जाने की पुष्टि कर दी। इसमें 186 हिन्दू, 39 मुस्लिम, 22 सिख और 44 अज्ञात बताए गए। इस प्रकार वहाँ मरने वालों की संख्या निर्धारित की गई। (राष्ट्रीय अभिलेखागार, होम पॉलिटिकल, 23-1919)

डिसऑर्डर इन्क्वायरी कमेटी ने तो 379 लोगों की जान और इसके तीन गुना लोग घायल होने की बात कही। पंडित मदन मोहन मालवीय ने जलियाँवाला बाग का दौरा किया था। उन्होंने बताया कि मरने वालों की संख्या 1000 से ऊपर है। (राष्ट्रीय अभिलेखागार, होम पॉलिटिकल, 23-1919)

इस नरसंहार पर कॉन्ग्रेस ने एक तरह से अंग्रेजों के सामने हथियार डाल दिए थे, विरोध तो दूर। कॉन्ग्रेस ब्रिटिश हुकूत की तारीफ में जुटी हुई थी। कसीदें पढ़ रही थी। दूसरी ओर इस क्रूरतम घटना पर कवींद्र रवीन्द्रनाथ टैगोर ने ब्रिटिश सरकार की नाइटहुड उपाधि वापस लौटा दी।

नरसंहार से तीन दिन पहले 10 अप्रैल 1919 को पंजाब में किसी भी समाचार के प्रसार पर पूर्ण प्रतिबंध के साथ मार्शल लॉ लागू किया गया। नतीजा ये हुआ कि पंजाब शेष भारत से पूरी तरह कट गया। मार्शल लॉ और सेंसरशिप के कारण दुनिया को तुरंत इस जेनोसाइड का पता नहीं चल सका।

18 अप्रैल 1919 को महात्मा गाँधी ने अंग्रेजों के दमन के लिए अंग्रेजों के बजाय अपने देशवासियों को ही जिम्मेदार ठहराते हुए सत्याग्रह वापस ले लिया। इससे अंग्रेज और भी खुलेआम दमन और अपमान के लिए प्रेरित हुए। रवींद्रनाथ को नरसंहार की तत्काल जानकारी नहीं मिली। एक-दो दिन के भीतर महात्मा गाँधी द्वारा आंदोलन वापस लेने की खबर अखबार में छपी।

टैगोर ने गाँधी के नेतृत्व पर भरोसा जताया और शांतिनिकेतन से कोलकाता चले गए तथा वहाँ नरसंहार के खिलाफ एक विरोध सभा आयोजित करने की कोशिश की, लेकिन चित्तरंजन दास समेत किसी भी नेता का उन्हें समर्थन नहीं मिला। उन्होंने सीएफ एंड्रूज को गाँधी के पास यह अनुरोध करने के लिए भेजा। तब महात्मा गाँधी ने जवाब दिया कि वह सरकार को शर्मिंदा नहीं करना चाहते। इसके बाद रवींद्रनाथ टैगोर ने खुद नाइटहुड की उपाधि त्यागने का फैसला लिया और हाथ से लिखकर एक पत्र वायसराय को भेजा।

ये विरोध की अकेली आवाज थी, लेकिन उन्होंने देश के साथ-साथ बाहर के लोगों को भी अपने यादगार गीत ‘एकला चलो रे’ को सच साबित कर दिखाया।

यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि 1919 की अमृतसर कॉन्ग्रेस में रवींद्रनाथ के उस त्याग का कोई जिक्र नहीं हुआ, जबकि वायसराय काउंसिल से सीएस नायर के इस्तीफे की प्रशंसा की गई। यहाँ तक कि पट्टाभि सीतारमैया ने भी द हिस्ट्री ऑफ द इंडियन कॉन्ग्रेस में रवींद्रनाथ के इस साहसिक कृत्य का कोई जिक्र नहीं किया।

रवींद्रनाथ का त्याग अनूठा था, उनमें लोकप्रिय होने की कोई इच्छा नहीं थी। गंभीर संकट के क्षणों में वह आम लोगों के साथ खड़े हुए।

वहीं अमर बलिदानी भगत सिंह घटनास्थल से रक्तरंजित मिट्टी उठा कर अपने घर ले गए और देश को स्वाधीन कराने का संकल्प लिया। इस नरसंहार के प्रत्यक्षदर्शी ऊधम सिंह ने 21 वर्ष बाद 1940 में ब्रिटेन जाकर जनरल डायर को गोलियों से भून दिया। जो इतिहास हम सब जानते ही हैं। जलियाँवाला बाग नरसंहार के सभी बलिदानियों को शत-शत नमन।

काफिले पर हमला कर अतीक अहमद को छुड़ाने का था प्लान, UP पुलिस ने बताया- क्या थे इनपुट, कैसे ढेर हुए असद और गुलामः उमेश पाल मर्डर में अब तक 4 का एनकाउंटर

झाँसी में मार गिराए गया अतीक अहमद का बेटा असद और उसका गुर्गा गुलाम के पास से यूपी पुलिस ने अत्याधुनिक और विदेशी हथियार भी बरामद किए हैं। दोनों पुलिस काफिले पर हमला कर अतीक को छुड़ाने का प्लान बना रहे थे। इसका इनपुट मिलने के बाद पुलिस ने कार्रवाई की और एनकाउंटर में दोनों ढेर हो गए।

उत्तर प्रदेश के स्पेशल डीजी (डीजी लॉ एंड ऑर्डर) प्रशांत कुमार ने एनकाउंटर के बाद यह खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि पुलिस को इनपुट मिले थे कि पुलिस काफिले पर हमला कर अतीक को छुड़ाने का प्लान बनाया गया है। मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर एसटीएफ ने झाँसी में कुछ लोगों को रोका तो उन्‍होंने फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में दो लोग घायल हो गए, जिनकी बाद में मौत हो गई। इनकी पहचान असद और गुलाम के तौर पर हुई। दोनों उमेश पाल की हत्या में शामिल थे।

उमेश पाल मर्डर मामले में यूपी पुलिस ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए 13 अप्रैल 2023 को असद और उसके शूटर मोहम्मद गुलाम का एनकाउंटर किया है। दोनों पर 5-5 लाख का इनाम था। दी गई जानकारी के मुताबिक झाँसी में छिपे असद और गुलाम का लोकेशन प्राप्त होने के बाद पुलिस की टीम उन्हें गिरफ्तार करने पहुँची। पुलिस को आता देख असद और गुलाम ने फायरिंग कर फरार होने की कोशिश की। जवाबी कार्रवाई में ढेर हो गए।

उमेश पाल हत्याकांड

24 फरवरी 2023 को दिनदहाड़े गोलियों और बमों से हमला कर उमेश पाल की हत्या कर दी गई थी। हमलावरों ने उमेश पाल के सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों को भी गोलियों से भून दिया था। पेशे से वकील रहे उमेश पाल बसपा विधायक राजू पाल की हत्या के मुख्य गवाह थे। राजूपाल की हत्या 2005 में कर दी गई थी। राजूपाल की हत्या का आरोप अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ अहमद पर है। राजू पाल हत्या मामले के गवाह उमेश पाल को अतीक अहमद ने अगवा भी करवाया था। इस मामले में कोर्ट ने पिछले दिनों उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।

उमेश पाल हत्याकांड के आरोपित

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार उमेश पाल हत्याकांड में पुलिस ने अतीक अहमद समेत 18 लोगों पर एफआईआर दर्ज किया है। इनमें ज्यादातर लोग अतीक के परिवार वाले हैं। आरोपितों में अतीक के अलावा उसकी पत्नी शाइस्ता परवीन, भाई अशरफ अहमद, असद के अलावा अन्य चार बेटे, बहन आयशा, बहनोई डॉ. अखलाक, गुड्डू मुस्लिम, शदाकत, अरमान, विजय चौधरी उर्फ उस्मान, मोहम्मद गुलाम, अरबाज, साबिर, कैस अहमद, राकेश, अरशद कटरा, नियाज, इकबाल अहमद, शाहरुख समेत कुछ अज्ञात लोग शामिल हैं।

उमेश पाल की हत्या में शामिल 4 आरोपितों को अबत क एनकाउंटर में मार गिराया गया है। इनमें अतीक का तीसरा बेटा असद, शूटर उस्मान, अरबाज और मोहम्मद गुलाम शामिल हैं। इसके अलावा अतीक के परिवार की मदद करने वाले 3 आरोपितों और करीबियों के घर पर बुलडोजर भी चल चुका है। बुल्डोजर की कार्रवाई एनकाउंटर में ढेर हुए मोहम्मद गुलाम के घर पर भी हुई थी।

गुलाम के भाई ने कहा था लाश भी नहीं लेंगे

गुलाम के मकान और दुकान पर प्रयागराज विकास प्राधिकरण ने बुलडोजर कार्रवाई की थी। इस दौरान गुलाम के भाई ने मीडिया से कहा था कि उसने बहुत गलत किया है। यूपी पुलिस यदि उसका एनकाउंटर करती है तो हम न तो उसका चेहरा देखेंगे न ही उसकी लाश लेंगे। बता दें पुलिस को अभी अतीक अहमद की पत्नी शाइस्ता परवीन, अतीक की बहन आयशा, गुड्डू मुस्लिम समेत 6 आरोपितों की तलाश है। अतीक की पत्नी शाइस्ता भी घटना के बाद से ही फरार है।