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असद को लगी 2 गोली, एक दिल चीर बाहर निकल गई-दूसरी गले में फँसी, गुलाम 1 ही गोली में हो गया ढेर: जिंदा पकड़ना चाहती थी UP एसटीएफ

माफिया अतीक अहमद के बेटे असद का एनकाउंटर होने के बाद इस मामले में दर्ज एफआईआर से खुलासा हुआ है कि यूपी एसटीएफ पहले असद और गुलाम को जिंदा पकड़ना चाहती थी। इंडिया टुडे द्वारा एक्सेस की एफआईआर में बताया गया है कि पुलिस जब दोनों आरोपितों को पकड़ने झाँसी गई तो वहाँ दोनों ने पुलिस पर गोलियाँ चलाईं। इसी के बाद जवाबी कार्रवाई में पुलिस को असद-गुलाम का एनकाउंटर करना पड़ा।

एफआईआर में बताया गया कि पुलिस को सूचना थी कि असद सफेद कुर्ते पजामे और गुलाम जींस टी-शर्ट में एक बिन लाइसेंसी नंबर वाली बाइक पर जा रहे हैं। जब पुलिस ने उन्हें पकड़ने के लिए उनका पीछा किया तो वो रुकने के बजाय भागने लगे। पुलिस ने उन्हें जिंदा पकड़ने का बहुत प्रयास किया। तभी उनकी गाड़ी बबूल के पेड़ के आगे फिसली और असद-गुलाम ने पुलिस को गाली देकर डराना धमकाना शुरू किया। पुलिस ने भी जवाबी कार्रवाई की। थोड़ी देर बाद गोली चलनी बंद हो गई। पुलिस ने जाकर देखा तो दोनों चोटिल थे। पुलिस उन्हें अस्पताल लेकर गई जहाँ उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।

जानकारी के मुताबिक झाँसी में हुए एनकाउंटर के बाद असद और गुलाम का पोस्टमार्टम 9 बजे शुरू होकर रात के करीब 2:30 बजे तक हुआ। इस दौरान वहाँ 3 डॉक्टरों का पैनल था। पोस्टमार्टम में सामने आया असद को 2 गोलियाँ लगीं। एक गोली पीछे से पीठ में लगी जो दिल और सीने को चीरकर बाहर निकल गई जबकि दूसरी गोली सीने में लगी और गले में जाकर फँस गई। रिपोर्ट्स की मानें तो असद को जहाँ दो गोलियाँ लगीं, वहीं शूटर गुलाम को एक ही गोली लगी थी जो पीठ में लगकर दिल और सीने को चीरते हुए निकली और उसकी मौत हो गई।

शवों का पोस्टरमार्टम होने के बाद भी असद और गुलाम का शव देर रात तक पोस्टमार्टम हाउस में पड़ा रहा। न असद के परिवार में से कोई उसका शरीर लेने आया और न ही गुलाम के परिवार से कोई उसका शव लेने आया। बताया जा रहा है कि गुलाम के खिलाफ हुई कार्रवाई से उसके अपने परिजन भी संतुष्ट हैं उन्होंने कहा है कि पुलिस ने गुलाम के साथ सही किया।

‘@# काफिर… काट डालेंगे’: जानिए ओडिशा में हनुमान भक्तों पर कैसे हुआ हमला, ‘जय श्री राम’ के नारे सुन टूट पड़ी थी कट्टरपंथी मुस्लिम भीड़

ओडिशा के संबलपुर में बुधवार (12 अप्रैल 2023) को हनुमान जयंती समन्वय समिति और बजरंग दल ने मोटरसाइकिल रैली निकाली थी। रैली जब धनुपाली इलाके की एक मस्जिद के पास पहुँची तो इस पर पथराव शुरू हो गया। इसके बाद इलाके में हिंसा भड़क उठी थी। घटना को लेकर दर्ज एफआईआर से खुलासा हुआ है कि मुस्लिम भीड़ ने भड़काऊ नारे लगाते हुए रैली में शामिल हिंदुओं पर हमला किया था।

बरेईपाली थाने के प्रभारी निरीक्षक (IIC) धीरेंद्र कुमार स्वैन द्वारा दर्ज कराई गई FIR के अनुसार रैली में लगभग 1,000 मोटरसाइकिल सवार शामिल थे। बाइक रैली बुधवार शाम 5 बजे गोविंदटोला से गोलबाजार इलाके के लिए रवाना हुई। शाम छह बजे के करीब रैली मोतीझरण चौक के पास पहुँची। धीरेंद्र कुमार भी मोतीझरण चौक पर ही तैनात थे।

एफआईआर के अनुसार जुलूस में शामिल आधे लोग मोतीझारन चौक पार कर गए, जबकि रैली में शामिल अन्य लोग कुछ समय के लिए वहीं रुक गए। रैली में शामिल लोग ‘जय श्री राम’ और ‘जय बजरंग बली’ के नारे लगा रहे थे। तभी लगभग 200 मुस्लिमों ने जुलूस पर हमला कर दिया। उन्होंने रैली में शामिल लोगों को अपशब्द कहते हुए उन्हें तुरंत जगह खाली करने की धमकी दी।

देखते ही देखते जुलूस पर पथराव होने लगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस्लामवादियों ने जान से मारने के इरादे से रैली के सदस्यों पर लोहे की रोड, लाठियों और तलवारों से हमला किया। हमलावर भीड़ रैली में शामिल लोगों को गालियाँ दे रही थी। एफआईआर के अनुसार हमले के दौरान मुस्लिम भीड़ लगातार ‘साले काफिर लोग’, ‘साले लोगों को काट देंगे, ‘सालों को इंडिया वापस नहीं जाने देंगे’ चिल्ला रही थी।

प्राथमिकी में 15 ज्ञात और 150 से 160 अज्ञात हमलावरों को नामजद किया गया है। ऑपइंडिया के पास भी एफआईआर की कॉपी उपलब्ध है। पुलिस की तरफ से दी गई जानकारी के अनुसार संबलपुर जिले में इंटरनेट सुविधाएँ बंद कर दी गई हैं। सरकार ने एहितियातन अगले 48 घंटों के लिए जिले में व्हाट्सएप, फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और स्नैपचैट पर रोक लगा दी है।

दूसरी तरफ हनुमान जयंती समन्वय समिति की तरफ से शुक्रवार (14 अप्रैल 2023) की शाम तक संबलपुर बंद का आह्वान किया गया है। समिति ने पुलिस पर खुफिया विफलता का आरोप लगाया है। पुलिस का कहना है कि इस बात का पता लगाया जा रहा है कि पथराव अचानक किया गया या इसके पिछे कोई सुनियोजित साजिश थी। संबलपुर के एसपी बी गंगाधर ने कहा है कि हम घटना के दिन की तस्वीरें और वीडियो इकट्ठा कर रहे हैं। इसकी सघनता से जाँच की जाएगी।

बता दें कि रैली पर पथराव के दौरान महिला पुलिसकर्मी समेत 10 जवानों को चोट आई थी। उनका उपचार किया जा रहा है। मिली जानकारी के अनुसार अब तक 40 लोगों को पकड़कर पूछताछ की जा रही है। संबलपुर में अब भी तनाव की स्थिति है।

PM नेहरू का सारा समय और ध्यान मुसलमानों के संरक्षण के लिए समर्पित: कॉन्ग्रेस है SC/ST विरोधी, भीमराव आंबेडकर ने बता दिया था भाषण में

डॉ. भीमराव आंबेडकर समय से आगे की सोच रखने वाले जननायक थे। उन्होंने तब संविधान में उन चीजों को शामिल किया था, जो आज तक कई देश नहीं कर पाए हैं। पहली कैबिनेट का हिस्सा होने के बावजूद, कॉन्ग्रेस के अधिकांश नेताओं के साथ बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर के संबंध अपेक्षाकृत मजबूत आधार पर टिके थे लेकिन इसके विपरीत, भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के साथ उनके संबंधों के बारे में बहुत कम जानकारी ही सामने आई है।

जातिगत आरक्षण, हिंदू कोड बिल और विदेश नीति पर उनके विचारों के संबंध में, उनके निष्पादन के बारे में दोनों के काफी विपरीत विचार थे लेकिन डॉ. भीमराव आंबेडकर की समाज सुधारक वाली छवि कॉन्ग्रेस के लिए चिंता का कारण थी शायद यही वजह थी कि पार्टी ने उन्हें संविधान सभा से दूर रखने की योजना बनाई। नेहरू ने डॉ. आंबेडकर को किनारे करने में कोई कसर नहीं छोड़ी, ताकि वह मेनस्ट्रीम पॉलिटिक्स में न आ सकें, इसके लिए दीवारें खड़ी की गईं।

27 सितंबर 1951 को कॉन्ग्रेस नेतृत्व और विशेषकर जवाहर लाल नेहरू द्वारा कैबिनेट से त्यागपत्र देने के लिए डॉ. भीमराव आंबेडकर को विवश किया गया। संसद में आंबेडकर ने त्यागपत्र के साथ जो भाषण दिया, वह कॉन्ग्रेस के एससी/एसटी विरोधी असली चेहरे को उजागर करता है।

डॉ. आंबेडकर ने सितंबर 1951 में कैबिनेट से इस्तीफा देते हुए भाषण में विस्तार से अपनी उन-उन पीड़ा को बयाँ किया, जो-जो उन्होंने नेहरू के हाथों झेली। आंबेडकर राइटिंग, वॉल्यूम- 14 भाग 2, पृष्ठ 1317-1327 में उनका भाषण संकलित किया गया है। अपने त्यागपत्र भाषण में डॉ. आंबेडकर ने कहा:

“जब प्रधानमंत्री नेहरू ने मुझे प्रस्ताव दिया तो मैंने उन्हें स्पष्ट बता दिया था कि अपनी शिक्षा और अनुभव के आधार पर एक वकील होने के साथ मैं किसी भी प्रशासनिक विभाग को चलाने में सक्षम हूँ। प्रधानमंत्री सहमत हो गए और उन्होंने कहा कि वह मुझे अलग से योजना का भी दायित्व देंगे। दुर्भाग्य से योजना विभाग बहुत देरी से मिला, जिस दिन मिला मैं तब तक बाहर आ चुका था। मेरे कार्यकाल के दौरान कई बार एक मंत्री से दूसरे मंत्री को मंत्रालय दिए गए, मुझे लगता है कि उन मंत्रालयों में से भी कोई मुझे दिया जा सकता था लेकिन मुझे हमेशा इस दौड़ से बाहर रखा गया। मुझे यह समझने में भी कठिनाई होती थी कि मंत्रियों के बीच काम का बँटवारा करने के लिए प्रधानमंत्री जिस नीति का पालन करते हैं, उसके पैमाने की क्षमता क्या है? क्या यह विश्वास है? क्या यह मित्रता है? या क्या यह लचरता है? मुझे कभी भी कैबिनेट की प्रमुख समितियाँ जैसे विदेश मामलों की समिति या रक्षा समिति का सदस्य नहीं चुना गया। जब प्रधानमंत्री नेहरू इंग्लैंड गए तो मुझे कैबिनेट ने इसका सदस्य चुना लेकिन जब वह वापस आए तो कैबिनेट समिति के पुनर्गठन में भी उन्होंने मुझे बाहर ही रखा। मेरे विरोध दर्ज करने के बाद मेरा नाम जोड़ा गया।”

एक और चीज जिसने डॉ. आंबेडकर को इस्तीफे के लिए बाध्य किया, वो था हिंदू कोड बिल के साथ सरकार का बर्ताव। यह विधेयक 1947 में सदन में पेश किया गया था लेकिन बिना किसी चर्चा के जमींदोज हो गया। उनका मानना था कि यह इस देश की विधायिका का किया सबसे बड़ा सामाजिक सुधार होता। बाबा साहब ने कहा था कि प्रधानमंत्री के आश्वासन के बावजूद ये बिल संसद में गिरा दिया गया। अपने भाषण के अंत में उन्होंने कहा, “अगर मुझे यह नहीं लगता कि प्रधानमंत्री के वादे और काम के बीच अंतर होना चाहिए, तो निश्चित ही गलती मेरी नहीं है।”

डॉ. आंबेडकर का नेहरू सरकार के प्रति असंतुष्ट होने का एक और मुख्य कारण था, पिछड़े वर्गों और अनुसूचित जातियों से जुड़ा भेदभावपूर्ण व्यवहार। डॉ. आंबेडकर अपने भाषण में आगे कहते हैं:

“मुझे इस बात का बहुत दुःख है कि संविधान में इन जातियों की सुरक्षा के लिए कुछ विशेष तय नहीं किया गया। यह तो राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त एक आयोग की संस्तुति के आधार पर सरकार को करना पड़ा। इसका संविधान पारित करते हुए हमें एक वर्ष हो गया था लेकिन सरकार ने आयोग के गठन तक के विषय में नहीं सोचा। आज अनुसूचित जाति की स्थिति क्या है? जहाँ तक मैंने देखा है, वैसी ही है जैसी पहले थी। वही चला आ रहा उत्पीड़न, वही पुराने अत्याचार, वही पुराना भेदभाव जो पहले दिखाई पड़ता था। सब कुछ वही, बल्कि और बदतर हालात वाली स्थिति। बल्कि यदि तुलना करें तो इनसे ज्यादा सरकार मुसलमानों के प्रति संवेदना दिखा रही है। प्रधानमंत्री का सारा समय और ध्यान मुसलमानों के संरक्षण के लिए समर्पित है। क्या अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और भारतीय ईसाइयों को सुरक्षा की जरूरत नहीं है। नेहरू जी ने इन समुदायों के लिए क्या चिंता दिखाई है? जहाँ तक मुझे मालूम पड़ता है कुछ भी नहीं। जबकि असली बात यह है कि ये वो समुदाय हैं, जिन पर मुसलमानों से भी ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है।”

बाबा साहब अपने भाषण में नेहरू की मुस्लिम तुष्टिकरण वाली नीतियों की बखिया उखेड़ रहे थे। डॉ. आंबेडकर की चिंता शोषितों, वंचितों और समाज के सबसे नीचे पायदान पर खड़े लोगों के लिए थी लेकिन इसके उलट नेहरू की नीतियाँ मुस्लिम तुष्टिकरण को बढ़ावा दे रही थीं।ऐसे कई मौके आए जब नेहरू ने डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के राजनीति सफर पर न केवल अड़चने पैदा कीं बल्कि कई बार उन्हें चुनाव हराने में भी बड़ा रोल निभाया, जिसमें वो कामयाब भी हुए।

डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने 14 सितंबर 1956 को तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को एक पत्र लिखा, जिसमें उन्होंने अपनी पुस्तक ‘बुद्ध और उनके धम्म’ के प्रकाशन के लिए मदद माँगी। इस पर नेहरू ने डॉ. आंबेडकर के पत्र का जवाब दिया और ‘बुद्ध और उनके धम्म’ पुस्तक की 500 प्रतियाँ खरीदने में असमर्थता व्यक्त की। जब 296 लोगों को शुरुआती संविधान सभा में भेजा गया था तो उसमें आंबेडकर का नाम शामिल नहीं था, उस समय के बॉम्बे के मुख्यमंत्री बीजी खेर ने ये सुनिश्चित किया था कि आंबेडकर 296 सदस्यीय निकाय के लिए नहीं चुने जाएँगे।

ऐसी कई घटनाएँ हैं जो साबित करती हैं कि कॉन्ग्रेस और उसके नेता खासकर नेहरू कभी डॉ. आंबेडकर को मेनस्ट्रीम पॉलिटिक्स में नहीं आने देना चाहते थे। इन तमाम झंझावतों को दूर कर बाबा साहेब ने उस दौर में वो मुकाम हासिल किया, जो किसी दलित नेता के लिए बहुत मुश्किल था। डॉ. आंबेडकर का लक्ष्य था- ‘सामाजिक असमानता दूर करके शोषित, वंचितों के मानवाधिकार की प्रतिष्ठा करना।’

डॉ. आंबेडकर ने गहन-गंभीर आवाज में सावधान किया था, “26 जनवरी 1950 को हम परस्पर विरोधी जीवन में प्रवेश कर रहे हैं। हमारे राजनीतिक क्षेत्र में समानता रहेगी किंतु सामाजिक और आर्थिक क्षेत्र में असमानता रहेगी। जल्द से जल्द हमें इस परस्पर विरोध को दूर करना होगा। नहीं तो जो असमानता के शिकार होंगे, वे इस राजनीतिक गणतंत्र के ढाँचे के लिए मुश्किलें पैदा करेंगे।”

इस्लाम और डॉ. आंबेडकर के विचार

इस्लाम पर डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचार क्या थे? काफी चर्चित पुस्तक ‘डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर राइटिंग्स एंड स्पीचेज, वॉल्यूम 8’ के पृष्ठ 64-65 से हम इसे समझ सकते हैं। यहाँ जिस भाषण का जिक्र है, उसमें बाबा साहब कहते हैं- इसमें कोई संदेह नहीं है कि भारत में मुस्लिम आक्रांता हिंदुओं के खिलाफ घृणा का राग गाते हुए आए थे। उन्होंने न केवल घृणा ही फैलाई बल्कि वापस जाते हुए हिंदू मंदिर भी जलाए। उनकी नजर में यह एक नेक काम था और उनके लिए तो इसका परिणाम भी नकारात्मक नहीं था। उन्होंने एक सकारात्मक कार्य किया, जिसे उन्होंने इस्लाम के बीज बोने का नाम दिया। इस पौधे का विकास बखूबी हुआ, यह केवल रोपा गया पौधा नहीं था बल्कि यह एक बड़ा विशाल पेड़ बन गया था।

डॉ. आंबेडकर ने मुस्लिम आक्रांताओं द्वारा तोड़े गए मंदिरों पर कई बार खुलकर अपने विचार रखे हैं।

बाहर आते ही काजल हिंदुस्तानी ने भरी हुँकार, कहा- मैं डरती नहीं, लैंड/लव जिहाद से लड़ती रहूँगी: इस्लामी कट्टरपंथियों ने लगाए थे ‘सर तन से जुदा’ के नारे

जेल से बाहर आने के बाद हिंदुवादी कार्यकर्ता काजल सिंघला उर्फ काजल हिंदुस्तानी ने दोहराया है कि वे लैंड जिहाद, लव जिहाद और जबरन धर्मांतरण के खिलाफ आवाज उठती रहेंगी। गुजरात के ऊना में रामनवमी पर घृणास्पद भाषण देने के आरोप में उन्हें गिरफ्तार किया गया था। गुरुवार (13 अप्रैल 2023) को उन्हें अदालत ने जमानत दी थी। इसके बाद उन्हें जूनागढ़ जेल से रिहा कर दिया गया। बाहर आने के बाद मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने इस्लामी कट्टरपंथ के खिलाफ अपना संकल्प दोहराया।

जेल से बाहर आने के बाद काजल हिंदुस्तानी का समर्थकों ने फूल बरसाकर स्वागत किया। इस दौरान जय श्री राम के नारे भी लगाए गए। पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए काजल ने कहा कि मैं आज भी अपनी बात पर कायम हूँ। मैंने कुछ भी गलत नहीं कहा, मैं कभी कानून के खिलाफ नहीं गई, इसलिए मैं नहीं डरती। मुझे अपनी न्याय व्यवस्था पर भरोसा है। मुझे न्याय मिला और इसलिए मैं यहाँ आप सबके सामने हूँ।

काजल हिंदुस्तानी ने कहा, “अपने धर्म के लिए अनेक कार्यकर्ता काम कर रहे हैं। जब दूसरे पक्ष के लोग ऐसे काम (धर्म पर आघात) करते हैं तो हमारा भी कर्तव्य है कि हम अपने विश्वास की रक्षा करें। इसलिए मैं अपने स्तर पर लैंड जिहाद, लव जिहाद और जबरन धर्मांतरण के खिलाफ आवाज उठाती रही हूँ। मैं घर पर बैठने वाली नहीं हूँ। आगे भी काम जारी रहेगा।”

काजल हिंदुस्तानी को कड़ी पुलिस सुरक्षा के बीच उनके आवास तक ले जाया गया। उनके काफिले में पुलिस की दो गाड़ियाँ शामिल रहीं। घर जाने के रास्ते पर लोगों ने उनका स्वागत किया और उन पर फूल और मालाएँ बरसाईं। काजल ने ट्विटर पर भी अपने समर्थकों को धन्यवाद दिया। उन्होंने लिखा कि अब मैं पहले से अधिक सशक्त हूँ। आपके समर्थन से हमारा मनोबल बढ़ता है। ट्विटर पर भी काजल ने लैंड जिहाद, लव जिहाद और धर्मांतरण के विरुद्ध संघर्ष जारी रखने की बात कही है।

गौरतलब है कि 30 मार्च 2023 को रामनवमी के अवसर पर गुजरात के गिर सोमनाथ जिले के ऊना में शोभायात्रा निकाली गई थी। शोभायात्रा के बाद एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था, जिसे काजल हिंदुस्तानी ने भी संबोधित किया था। उन्होंने अपने भाषण के दौरान लव जिहाद और लैंड जिहाद सहित कई मुद्दों को उठाया था। स्थानीय मुस्लिमों ने उनके इस भाषण को विवादास्पद बताते हुए विरोध प्रदर्शन किया था। कई जगहों पर पथराव और हिंसक घटनाओं की खबरें सामने आई थी। शहर दो दिनों तक ठप रहा था। इस दौरान उनके खिलाफ ‘सर तन से जुदा’ के नारे भी लगाए गए थे। मुस्लिमों की शिकायत पर उन्हें ऊना पुलिस ने 9 अप्रैल 2023 को गिरफ्तार किया था।

भगोड़े कारोबारी करें हवाले, भारत विरोधी तत्वों पर लें एक्शन: ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक से बोले PM मोदी, भारतीय उच्चायोग पर हमले का मुद्दा उठा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिटेन के अपने समकक्ष ऋषि सुनक से टेलीफोन पर बात की है। गुरुवार (13 अप्रैल 2023) को यह बातचीत हुई। इस दौरान विजय माल्या और नीरव मोदी जैसे भगोड़े कारोबारियों के प्रत्यर्पण से लेकर खालिस्तानियों की हालिया हिंसा तक पर चर्चा हुई। पीएम मोदी ने भगोड़े कारोबारियों के प्रत्यर्पण की प्रक्रिया में तेजी लाने को कहा। साथ ही कहा कि भारत विरोधी तत्वों पर ब्रिटेन को कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। इस दौरान सुनक ने भारतीय दूतावासों की सुरक्षा को लेकर आश्वस्त किया।

रिपोर्टों के मुताबिक दोनों देशों के प्रधानमंत्री के बीच कई द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा हुई। दोनों देशों के बीच व्यापार और अन्य आर्थिक मुद्दों पर हुए करार के प्रगति की समीक्षा की गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूके सरकार से भारत विरोधी तत्वों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने और भारतीय डिप्लोमेटिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने को कहा। बता दें कि इसी पहले 12 अप्रैल 2023 को दोनों देशों के बीच गृह मंत्रालय स्तर पर बातचीत हुई थी। उस दौरान भी खालिस्तान समर्थकों और भारत विरोधी तत्वों पर नकेल कसने को लेकर चर्चा हुई थी।

विदेश मंत्रालय की तरफ से दी गई जानकारी के मुताबिक ब्रिटिश पीएम सुनक ने कहा है कि भारतीय उच्चायोग पर हमला किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं होगा। उन्होंने इंडियन हाई कमीशन और भारतीय अधिकारियों की सुरक्षा का आश्वासन भी दिया। सुनक ने हमले के बाद भारतीय उच्चायोग की सुरक्षा के लिए उठाए गए कदमों की भी जानकारी दी।

टेलीफोन पर बातचीत करते हुए पीएम मोदी ने ऋषि सुनक से ब्रिटेन में छिपे भगोड़े भारतीय कारोबारियों के वापसी के लिए वापसी की प्रक्रिया में तेजी लाने को भी कहा। उम्मीद जताई कि ब्रिटिश सरकार नीरव मोदी और विजय माल्या जैसे डिफॉल्टर कारोबारियों को भारत को सौंपने में मदद करेगी।

प्रधानमंत्री मोदी ने इंग्लैंड के पीएम को जी20 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए आमंत्रित भी किया। G20 शिखर सम्मेलन सितंबर 2023 में आयोजित होना है। पीएम सुनक ने भारत की अध्यक्षता में जी20 में हुई प्रगति और भारत की तरफ से उठाए गए कदमों की सराहना की। उन्होंने भारत को अपने समर्थन की प्रतिबद्धता को दोहराया। बता दें भारत 1 दिसंबर 2022 से 30 नवंबर 2023 तक G20 की अध्यक्षता कर रहा है।

जी-20 का गठन वर्ष 1999 में हुआ था। इसको ग्रुप ऑफ ट्वेंटी भी कहा जाता है। शुरुआत में यह वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंकों के गवर्नरों का संगठन हुआ करता था। 2008 में आई वैश्विक मंदी के बाद इसे शीर्ष नेताओं के संगठन में बदल दिया गया। जी-20 शिखर सम्मेलन हर साल आयोजित होता है और सम्मेलन में शामिल नेता वैश्विक अर्थव्यवस्था को बढ़ाने पर चर्चा करते हैं।

पाकिस्तान के पूर्व PM इमरान का बीवी बुशरा के साथ रिश्ता ‘अवैध’: निकाह कराने वाले मौलवी सईद का दावा- इद्दत की शर्ते पूरी नहीं हुईं

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान (Imran Khan) का बुशरा बीबी (Bushra Bibi) से निकाह जायज नहीं है। मौलवी मुफ्ती सईद का कहना है कि यह निकाह इस्लामी शरिया कानून के मुताबिक नहीं हुआ था। इसी मौलवी ने दोनों का निकाह करवाया था। इस्लामाबाद की अदालत में मोहम्मद हनीफ की याचिका पर सुनवाई के दौरान मौलवी ने यह बात कही।

मौलवी ने खुलासा किया कि बुशरा बीबी ने निकाह इद्दत के दौरान की गई थी। मुस्लिम महिलाएँ शौहर की मौत अथवा तलाक के बाद दूसरा निकाह इद्दत का समय पूरा करने के बाद ही कर सकती हैं। इस दौरान उन्हें दूसरे पुरुष से निकाह की इस्लाम इजाजत नहीं देता।

इद्दत का समय परिस्थितियों के आधार पर अलग-अलग हो सकता है। अमूमन यह करीब 89 दिन का होता है। बुशरा बीबी ने नवंबर 2017 में तलाक लिया था। इमरान खान के साथ उनका निकाह 1 जनवरी 2018 को हुआ था। यानी तलाक और निकाह के बीच 89 दिन का गैप नहीं रखा गया था।

रिपोर्टों के अनुसार मौलवी ने बताया कि उसे 2018 में लाहौर के रक्षा आवास प्राधिकरण में निकाह के लिए ले जाया गया था। खुद को बुशरा बीबी की बहन बताने वाली एक महिला की सहमति के बाद उसने निकाह करवाया था। मौलवी सईद के अनुसार इस महिला ने उनसे कहा था कि शरीयत के हिसाब से निकाह के लिए सभी शर्तें पूरी की गई हैं।

1 जनवरी 2018 को लाहौर में हुए इस निकाह के गवाह इमरान खान के दोस्त जुल्फी बुखारी और उनकी तहीरक-ए-इंसाफ पार्टी के पूर्व नेता अवन चौधरी थे। मौलवी ने अदालत को यह भी बताया कि इमरान खान ने फरवरी 2018 में उनसे दोबारा संपर्क किया। फिर से निकाह कराने को कहा, क्योंकि उनका मानना था कि पहली बार निकाह शरिया कानून के अनुसार नहीं था। दूसरी बार जब मौलवी से संपर्क किया गया था, तब तक इद्दत का समय पूरा हो चुका था।

मुफ्ती ने अदालत को यह भी बताया कि निकाह के समय इमरान खान और बुशरा बीबी दोनों ही इद्दत का समय पूरा नहीं होने के बारे में जानते थे। लेकिन इमरान खान का मानना था कि इस निकाह से उन्हें प्रधानमंत्री बनने में मदद मिलेगी। कथित तौर पर ऐसा मुस्तकबिल किया गया था कि बुशरा बीवी से निकाह के बाद क्रिकेटर से नेता बने इमरान खान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बन जाएँगे।

फूफेरी बहन से तय था असद का निकाह, इसी साल मेरठ में होना थाः गुड्डू मुस्लिम को गले लगाने वाला अखलाक ही था होने वाला ससुर

माफिया अतीक अहमद के बेटे असद का निकाह तय था। अपनी फूफेरी से उसका निकाह इसी साल मेरठ में होना था। उसके एनकाउंटर के बाद यह जानकारी सामने आई है। असद और उसके गुर्गे मोहम्मद गुलाम को गुरुवार (13 अप्रैल 2023) को यूपी एसटीएफ ने झाँसी में ढेर किया था। दोनों उमेश पाल की हत्या के बाद से फरार थे।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार असद का निकाह अतीक की बहन आयशा नूरी और डॉक्टर अखलाक अहमद की बेटी से तय था। बताया जाता है कि इसकी तैयारियाँ भी चल रही थी। लेकिन उमेश पाल की हत्या के बाद से दोनों परिवार के लिए हालात पूरी तरह बदल गए थे।

उमेश पाल की हत्या का जो वीडियो सामने आया था, उसमें असद भी हमला करते दिखा था। फरारी के बाद वह मेरठ भी गया था। यूपी पुलिस के अनुसार वह पुलिस काफिले पर हमला कर अतीक को छुड़ाने का प्लान बना रहा था। उसका होने वाला ससुर अखलाक भी इस समय जेल में बंद है। उसे एक वीडियो वायरल होने के बाद गिरफ्तार किया गया था। इस वीडियो में वह मेरठ के अपने घर में गुड्डू मुस्लिम को गले लगाता दिखा था। इस मामले के सामने आने के बाद से अखलाक की बीवी आयशा भी फरार है

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार उमेश पाल हत्याकांड में पुलिस ने अतीक अहमद समेत 18 लोगों पर एफआईआर दर्ज किया है। इनमें ज्यादातर लोग अतीक के परिवार वाले हैं। आरोपितों में अतीक के अलावा उसकी पत्नी शाइस्ता परवीन, भाई अशरफ अहमद, असद के अलावा अन्य चार बेटे, बहन आयशा, बहनोई डॉ. अखलाक, गुड्डू मुस्लिम, शदाकत, अरमान, विजय चौधरी उर्फ उस्मान, मोहम्मद गुलाम, अरबाज, साबिर, कैस अहमद, राकेश, अरशद कटरा, नियाज, इकबाल अहमद, शाहरुख समेत कुछ अज्ञात लोग शामिल हैं।

उमेश पाल की हत्या में शामिल 4 आरोपितों को अब तक एनकाउंटर में मार गिराया गया है। इनमें अतीक का तीसरा बेटा असद, शूटर उस्मान, अरबाज और मोहम्मद गुलाम शामिल हैं। इसके अलावा अतीक के परिवार की मदद करने वाले 3 आरोपितों और करीबियों के घर पर बुलडोजर भी चल चुका है। बुल्डोजर की कार्रवाई एनकाउंटर में ढेर हुए मोहम्मद गुलाम के घर पर भी हुई थी।

‘मुझे हथियार की कमी नहीं… पाकिस्तान ड्रोन से भेज देता है’ : अतीक अहमद के ISI और लश्कर से संबंध, UP पुलिस की चार्जशीट में खुलासा

उमेश पाल मर्डर केस में उत्तर पुलिस द्वारा दायर की गई चार्जशीट में माफिया अतीक अहमद को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। इस चार्जशीट में अतीक के बयान के हवाले से कहा गया है कि उसके पाकिस्तान में बैठे आतंकी संगठनों से संपर्क थे।

चार्जशीट में अतीक के हवाले से कहा गया, “मेरे पास हथियारों की कमी नहीं है क्योंकि मेरे पाकिस्तान की आईएसआई और आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से सीधा कनेक्शन है। वे हमें पंजाब बॉर्डर पर ड्रोन के जरिए हथियार पहुँचाते हैं और लोकल कनेक्शन उन्हें उठा लेते हैं। जम्मू-कश्मीर के आतंकी भी ऐसे ही हथियारों का जखीरा लेते हैं। अगर आप मुझे अपने साथ वहाँ लेकर चलोगे तो मैं घटना में प्रयोग हथियार व बारूद बरामद करने में आपकी मदद कर सकता हूँ।”

चार्जशीट के अनुसार, पूछताछ में अशरफ अहमद ने भी कहा कि हथियार और कारतूस जिस जगह पर रखे हैं, इसका पता वह जेल में बैठकर नहीं दे सकते। उसे केवल कुछ ठिकानों की ही जानकारी है। ये ठिकाने खेतों में बने फार्म हाउस जैसे हैं इसलिए वहाँ जाकर ही बताया जा सकता है कि हथियार कहाँ है।

बता दें कि अतीक के आतंकी संगठनों से कनेक्शन का खुलासा मीडिया में असद अहमद के एनकाउंटर के बाद हुआ है। यूपी पुलिस की एसटीएफ ने झाँसी में अतीक के बेटे का एनकाउंटर किया। उसके साथ शूटर गुलाम भी ढेर हुआ। इन दोनों ने प्रयागराज में उमेश पाल पर गोली चलाई थी। दोनों के ऊपर 5-5 लाख रुपए का ईनाम था। इनके एनकाउंटर के बाद अतीक के आंतकी संगठन का खुलासा हुआ। घटना से एक दिन पहले प्रयागराज कोर्ट ने अतीक और उसके भाई को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा था।

‘पाकिस्तान में रहना जेल में रहने जैसा’: न्यूजीलैंड के पूर्व क्रिकेटर ने बताया कमेंट्री के बाद ‘बाबर आजम फैंस’ का खौफ, कहा- कई दिनों तक भूखा रहा, मेंटली टॉर्चर किया

न्यूजीलैंड के पूर्व क्रिकेटर व वर्तमान में कमेंटेटर साइमन डुल ने पाकिस्तान में अपने साथ हुए दुर्व्यवहार का अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि ये घटना ठीक तब की है जब उन्होंने ऑन एयर पाकिस्तानी कप्तान बाबर आजम की स्ट्राइक रेट की आलोचना की और उसके बाद उनकी कमेंटेटर व पूर्व पाकिस्तानी क्रिकेटर आमिर सोहेल के साथ बहस हुई।

डुल ने बताया कि किस तरह उन्हें बाबर आजम के फैन्स के कारण कैद रहना पड़ा। अपने इतने बुरे अनुभव पर उन्होंने कहा, “पाकिस्तान में रहना जेल में रहने जैसा है।”

उन्होंने कहा, “मुझे बाहर जाने की अनुमति नहीं थी क्योंकि बाबर आजम के फैन मेरा इंतजार कर रहे थे। मैं कई दिनों तक वहाँ भूखा रहा। मैं वहाँ मानसिक तौर पर प्रताड़ित किया जाता था। ईश्वर का शुक्र है कि मैं किसी तरह पाकिस्तान से भागने में सफल हुआ।”

बता दें कि डुल ने तीखा कमेंट बाबर आजम पर पीएसएल के दौरान किया था। उन्होंने कहा था कि खिलाड़ी को टीम को पहले रखना चाहिए और इसके बाद अपने पर्सनल माइलस्टोन के बारे में सोचना चाहिए।

मालूम हो कि साइमन डुल फिलहाल आईपीएल में कमेंटेटर के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने आजम की तरह विराट कोहली की स्ट्राइक रेट पर भी सवाल खड़े किए थे। उन्होंने लखनऊ के खिलाफ खेले गए आरसीबी मैच के दौरान कहा था कोहली केवल अपने लिए खेल रहे थे। उनको अपनी हाफ सेंचुरी की चिंता थी टीम के स्कोर की नहीं।

PCB में चल रहा बाबर आजम पर विचार

बाबर आजम की बात करें तो उन्हें अफगानिस्तान के खिलाफ चल रहे टी20 सीरीज से आराम दिया गया था जो सीरीज पाकिस्तान 1-2 से हार गई थी। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष नजम सेठी ने भी उन्हें लेकर सोशल मीडिया पर कहा था कि शाहिद अफरीदी के नेतृत्व में पैनल बाबर आजम को रिप्लेस करने की सोच रहा है।

उन्होंने बताया अंतिम निर्णय पैनल का होगा। सेठी के मुताबिक महीनों से पाकिस्तान में इस बात पर चर्चा चल रही है कि बाबर आजम को कप्तान बरकरार रखने या हटाने के क्या फायदे-नुकसान हैं। हालाँकि पीसीबी चीफ नजम सेठी ने एक साक्षात्कार में ये भी कहा था कि बाबर आजम तब तक पाकिस्तान क्रिकेट टीम के कप्तान बने रहेंगे, जब तक वो मैच जिताते रहेंगे।

काजल हिंदुस्तानी को मिली जमानत: रामनवमी संबोधन पर इस्लामी कट्टरपंथियों ने काटा था बवाल, लगाए थे ‘सर तन से जुदा’ के नारे

हिंदुवादी कार्यकर्ता काजल सिंघला उर्फ काजल हिंदुस्तानी को ऊना भाषण मामले में जमानत मिल गई है। काजल ने गुजरात के ऊना में रामनवमी के अवसर पर कथित रूप से घृणास्पद भाषण दिया था। इसके बाद मुस्लिमों ने उनके खिलाफ शिकायत दी थी। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार काजल को 50,000 रुपए के मुचलके पर जमानत दी गई है। काजल 5 दिनों के बाद जूनागढ़ जेल से रिहा होने वाली हैं।

गुजरात की ऊना पुलिस ने 9 अप्रैल 2023 को काजल हिंदुस्तानी को गिरफ्तार किया था। इसके बाद उनकी पेशी मजिस्ट्रेट के सामने की गई। मजिस्ट्रेट ने उन्हें जूनागढ़ जेल भेज दिया था। इसके पहले 30 मार्च को रामनवमी के अवसर पर गुजरात के गिर सोमनाथ जिले के उना में शोभायात्रा निकाली गई थी। इस शोभायात्रा के बाद एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था, जिसमें काजल ने भी भाषण दिया था।

काजल ने अपने भाषण के दौरान लव जिहाद और लैंड जिहाद सहित कई मुद्दों को उठाया था। स्थानीय मुस्लिमों ने उनके इस भाषण को विवादास्पद बताते हुए विरोध प्रदर्शन किया था। कई जगहों पर पथराव और हिंसक घटनाओं की खबरें सामने आई थी। शहर दो दिनों तक ठप रहा था। इस दौरान उनके ‘सर तन से जुदा’ के नारे भी लगाए गए थे।

बता दें कि काजल पर भाषण के दौरान हिंदू पुरुषों को मुस्लिम महिलाओं का धर्मांतरण करने के लिए उकसाने का आरोप लगाया गया है, जबकि ऐसा उन्होंने नहीं कहा था। उन्होंने कहा था कि यदि मुस्लिम महिलाएँ कट्टर इस्लामी प्रथाओं से बचना चाहती हैं तो उन्हें अपनी इच्छा से हिंदू पुरुषों से शादी करनी चाहिए। उन्होंने किसी भी तरह से हिंदू पुरुषों को मुस्लिम महिलाओं का धर्मांतरण करने के लिए नहीं कहा। काजल के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 295ए, 153ए और 505 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी।