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स्वातंत्र्यवीर गौरव दिवस… वीर सावरकर की जयंती को कुछ इस तरह मनाएगी महाराष्ट्र सरकार, बोले CM शिंदे – राष्ट्रीय विकास में उनका बहुत बड़ा योगदान

स्वतंत्रता सेनानी वीर सावरकर (Veer Savarkar) को लेकर छिड़े सियासी घमासान के बीच महाराष्ट्र सरकार ने बड़ा ऐलान किया है। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे (CM Eknath Shinde) ने कहा है कि वीर सावरकर की जयंती यानि 28 मई को ‘स्वातंत्र्यवीर गौरव दिवस’ के रूप में मनाया जाएगा। वीर सावरकर की जयंती मनाने का प्रस्ताव महाराष्ट्र के कैबिनेट मंत्री उदय सामंत ने रखा था। इस प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए सीएम शिंदे ने मंगलवार (11 अप्रैल 2023) को घोषणा की।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री कार्यालय ने ट्वीट कर कहा है, “मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने घोषणा की है कि 28 मई को स्वतंत्रता सेनानी सावरकर की जयंती को राज्य सरकार द्वारा ‘स्वातंत्र्यवीर गौरव दिवस’ के रूप में मनाया जाएगा। इस दिन स्वतंत्र वीर सावरकर के विचारों के प्रचार-प्रसार के लिए विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।”

एक अन्य ट्वीट में मुख्यमंत्री कार्यालय ने कहा है, “स्वातन्त्र्य वीर सावरकर का देश की स्वतंत्रता और राष्ट्रीय विकास में बहुत बड़ा योगदान है। उद्योग मंत्री उदय सामंत ने उनकी देशभक्ति, साहस और प्रगतिशील विचारों को आगे बढ़ाने और उसके माध्यम से उन्हें नमन करने के लिए ‘स्वातंत्र्य वीर गौरव दिवस’ मनाने की माँग की थी।”

बता दें कि इससे पहले सीएम एकनाथ शिंदे ने पूरे महाराष्ट्र में ‘सावरकर गौरव यात्रा’ निकालने की घोषणा की थी। गत 2 अप्रैल से इस यात्रा की शुरुआत भी हो चुकी है। ‘सावरकर गौरव यात्रा’ का आयोजन महाराष्ट्र की सभी 288 विधानसभा क्षेत्रों में किया जाना है।

राहुल गाँधी के बयान ने शुरू हुई सियासी खींचतान

गौरतलब है कि कॉन्ग्रेस के पूर्व सांसद राहुल राहुल गाँधी लंबे समय से वीर सावरकर को लेकर हमलावर रहे हैं। हाल ही में लोकसभा सदस्यता रद्द होने के बाद राहुल गाँधी ने कहा था कि वह सावरकर नहीं हैं। इसलिए माफी नहीं माँगेगे। इसके बाद भाजपा समेत कई सियासी दलों ने राहुल गाँधी पर तीखा हमला बोला था। कॉन्ग्रेस की मदद से महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रहे उद्धव ठाकरे ने कहा था कि वह वीर सावरकर का अपमान बर्दाश्त नहीं करेंगे।

यही नहीं, एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार ने राहुल गाँधी को ऐसे बयानों से बचने की सलाह दी थी। साथ ही उन्होंने कहा था कि देश की आजादी में वीर सावरकर के बलिदान को भुलाया नहीं जा सकता।

पोस्टर पर केवल गाँधी-गायब हुआ गाँधी परिवार, काॅन्ग्रेस की चेतावनी के बाद भी गहलोत सरकार के खिलाफ अनशन: राजस्थान में चुनाव से पहले किधर लैंड करेंगे सचिन पायलट

राजस्थान में चुनाव से पहले सत्ताधारी कॉन्ग्रेस में एक बार फिर तनाव देखने को मिल रहा है। साल 2018 में सत्ता में आने के बाद से ही मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और गुर्जर नेता सचिन पायलट के बीच खींचतान बढ़ गई थी। हालात ये हो गए कि पायलट ने उपमुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देकर अशोक गहलोत पर दबाव की राजनीति शुरू कर दी।

चुनाव नजदीक आता देख एक बार फिर सचिन पायलट एक बार फिर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं। पायलट ने भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई के नाम पर अपने प्रतिद्वंद्वी एवं सीएम अशोक गहलोत के खिलाफ अनशन करने की घोषणा कर दी। इसके लिए उन्होंने 11 अप्रैल 2023 की तरीख भी चुनी।

11 अप्रैल को प्रख्यात समाज सुधारक ज्योतिबा फुले की जयंती है। इस अनशन के खिलाफ कॉन्ग्रेस पार्टी ने सचिन पायलट को चेतावनी भी दी थी और कहा था कि उनका यह कदम पार्टी हितों के खिलाफ है। अगर उन्हें कोई दिक्कत है तो ये पार्टी को बताएँ।

राजस्थान के कॉन्ग्रेस प्रभारी सुखजिंदर रंधावा ने कहा था, “सचिन पायलट कल (मंगलवार) दिन भर का अनशन करने वाले हैं। उनका यह अनशन पार्टी हितों के खिलाफ है। पार्टी विरोधी गतिविधि है। अगर अपनी ही सरकार के साथ उनकी कोई समस्या है तो मीडिया और जनता के बजाय पार्टी के प्लेटफॉर्म पर चर्चा की जा सकती है।”

रंधावा ने आगे कहा था, “मैं 5 महीने से राजस्थान कॉन्ग्रेस का प्रभारी हूँ। लेकिन उन्होंने इस मुद्दे पर मुझसे कभी चर्चा नहीं की। मैं उनके संपर्क में हूँ और अभी भी उनसे बातचीत की अपील करता हूँ। वह निर्विवाद रूप से कॉन्ग्रेस पार्टी के एक मजबूत स्तंभ हैं।”

हालाँकि, पार्टी की चेतावनी की अनदेखी करके सचिन पायलट जयपुर के शहीद स्मारक के पास अनशन पर बैठ गए। इसमें सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही है कि अनशन के दौरान जो बैनर लगाया गया है, उसमें ना ही ना ही गाँधी परिवार के किसी व्यक्ति की तस्वीर है और ना ही पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अथवा सिंबल की। जाहिर है कि पायलट आर-पार के मूड में दिख रहे हैं।

बैनर में महात्मा गाँधी की तस्वीर के साथ लिखा गया है, ‘वसुंधरा सरकार में हुए भ्रष्टाचार के विरुद्ध अनशन’। पायलट ने मुख्यमंत्री गहलोत पर आरोप लगाया था कि वे वसुंधरा राजे के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार में हुए भ्रष्टाचार को दबा रहे हैं। वो वसुंधरा राजे को बचा रहे हैं।

दरअसल, मुख्यमंत्री बनने का सपना देख सचिन पायलट सीएम गहलोत के साल 2018 से विरोधी बन गए। उस समय पायलट प्रदेश अध्यक्ष थे। दोनों ने भाजपा की सरकार के खिलाफ जमकर प्रचार किया और अंत में पार्टी को जीत दिलाई। पार्टी की जीत होने पर सचिन पायलट ने इसका सारा श्रेय खुद लेने की कोशिश की और मुख्यमंत्री पद पर दावेदारी कर दी।

हालाँकि, बाद में दोनों के बीच मनमुटाव सार्वजनिक हो गया। उस समय पायलट के समर्थकों ने कहा कि पार्टी में 2.5-2.5 साल का फॉर्मूला तय किया गया था, लेकिन गहलोत उससे नहीं मान रहे हैं। साल 2020 में पायलट ने अपने गुट के 18 विधायकों के साथ मिलकर पार्टी से बगावत भी कर दी। इसके बाद उन्हें प्रदेश अध्यक्ष और डिप्टी सीएम के पद से बर्खास्त कर दिया।

इस दौरान सीएम गहलोत ने उन्हें निकम्मा और नकारा तक कह दिया था। सीएम गहलोत ने कहा था, “मैं जानता था कि वो (सचिन पायलट) निकम्मा है, नकारा है, कोई काम नहीं करता है। लेकिन मैं यहाँ बैंगन बेचने नहीं आया हूँ, मुख्यमंत्री बनकर आया हूँ। हम नहीं चाहते थे कि दिल्ली में लगे कि राजस्थान में कल्चर लड़ाई-झगड़ा वाला है।”

बाद में पायलट प्रियंका गाँधी से अपनी पैरवी लगवाने लगे और मामला शांत हुआ। पिछले साल भारत जोड़ो यात्रा के दौरान सचिन पायलट राहुल गाँधी के साथ नजर आए थे। इस दौरान सीएम गहलोत ने पायलट को गद्दार कह दिया था। उन्होंने कहा था कि एक गद्दार मुख्यमंत्री नहीं बन सकता।

सीएम गहलोत ने कहा था, “एक गद्दार मुख्यमंत्री नहीं हो सकता। हाईकमान सचिन पायलट को मुख्यमंत्री नहीं बना सकता। वे ऐसे आदमी हैं, जिनके पास 10 विधायक नहीं हैं। उन्होंने बगावत की। उन्होंने पार्टी को धोखा दिया। वह गद्दार हैं। गद्दार को कोई विधायक स्वीकार नहीं करेगा।”

उन्होंने आगे कहा था, “देश के इतिहास में पहली बार हुआ होगा कि एक पार्टी अध्यक्ष ने अपनी ही सरकार को गिराने की कोशिश की। इसके लिए बीजेपी की तरफ से पैसा दिया गया था। बीजेपी के दिल्ली दफ्तर से 10 करोड़ रुपए आए थे। इसका मेरे पास सबूत है। इन पैसों में से किसे कितना दिया गया, ये मुझे नहीं पता।” 

पिछले साथ पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए अशोक गहलोत का नाम आया था। इस दौरान गहलोत ने अपने किसी नजदीकी को मुख्यमंत्री पद देने की कोशिश की। जब सचिन पायलट ने बनाया और हाईकमान ने पायलट का साथ दिया, तब गहलोत ने पार्टी अध्यक्ष के प्रत्याशी पद से अपना नाम वापस लेकर सचिन पायलट के दाँव को फेल कर दिया था।

पायलट को पता है कि वे राजनीति में अशोक गहलोत से नहीं जीत सकते और उनके रहते मुख्यमंत्री भी नहीं बन सकते। अशोक गहलोत के सामने वे हर बार मात खाए हैं। ऐसे में वे अन्य विकल्प भी तलाश रहे हैं। ज्योतिर्रादित्य सिंधिया के कॉन्ग्रेस से भाजपा में आने के बाद पायलट को भी लुभाने की कोशिश हुई थी।

अब माना जा रहा है कि पायलट के रूख के कारण पार्टी हाईकमान भी नाराज है और उन्हें किसी तरह का समर्थन नहीं देगा। ऐसे में राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि पायलट चुनाव से पहले या तो भाजपा में शामिल हो सकते हैं या फिर नई पार्टी बना सकते हैं।

इसीलिए वे भ्रष्टाचार के नाम पर अनशन करके इसकी भूमिका बना रहे हैं। हालाँकि, राजनीति दाँव-पेंच का खेल और इसमें कभी सभी पक्ष विजयी हो जाते हैं तो कभी सभी पक्ष हार जाते हैं। हालाँकि, जीतकर भी हार जाते हैं और हारकर भी जीत जाते हैं। सचिन पायलट मामले में अभी तक उन्हें सिर्फ अपनी हार ही देखने को मिली है।

मनीष कश्यप मामले में बिहार-तमिलनाडु सरकार को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस, एक हफ्ते में माँगा जवाब: अब 21 अप्रैल को सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार (11 अप्रैल 2023) को बिहार के यूट्यूबर मनीष कश्यप (Manish Kashyap) की याचिका पर सुनवाई हुई। जस्टिस कृष्ण मुरारी और संजय करोल की पीठ ने सभी पक्षों को सुनने के बाद इस मामले में केंद्र, बिहार और तमिलनाडु सरकार को नोटिस जारी कर एक सप्ताह के भीतर जवाब माँगा है। अगली सुनवाई 21 अप्रैल 2023 को होगी।

मनीष कश्यप ने सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में अपने खिलाफ बिहार और तमिलनाडु में दर्ज एफआईआर को एक साथ करने की माँग की है। याचिका में कहा गया है कि उनके खिलाफ कई प्राथमिकी दर्ज की गई हैं, जिसमें बिहार में तीन और तमिलनाडु में दो प्राथमिकी शामिल हैं। साथ ही अंतरिम जमानत की माँग भी की है।

मंगलवार को सुनवाई के दौरान कश्यप की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने कहा कि वह दो राज्यों में पाँच मुकदमों का सामना कर रहे हैं। दवे ने कहा, “तमिलनाडु में दो प्राथमिकी दर्ज की गई है और बिहार में एक जमानत याचिका खारिज कर दी गई है। एक अपराध के मामले में कई कार्रवाई नहीं की जा सकती। अर्नब गोस्वामी मामले में भी ऐसा ही किया गया था।” दवे ने कहा कि कई एफआईआर दर्ज होने के कारण कश्यप को तमिलनाडु ले जाया गया है, लेकिन उन्हें वहाँ की भाषा समझ नहीं आती। वहीं तमिलनाडु राज्य की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि फर्जी खबरों के कारण कई मौतें हुईं। यह कोई छोटी बात नहीं है।

बता दें कि मनीष कश्यप पर तमिलनाडु में बिहार के मजदूरों पर हमले को लेकर फर्जी वीडियो बनाने का आरोप है। वहीं मनीष कश्यप का कहना है कि नीतीश सरकार के इशारे पर उनके खिलाफ बिहार और तमिलनाडु में झूठी FIR दर्ज कराई गई है। कश्यप ने 18 मार्च को बिहार के बेतिया में सरेंडर किया था। इसके बाद 29 मार्च को तमिलनाडु पुलिस उन्हें अपने साथ ले गई। मदुरै की एक अदालत में पेश करने के बाद उन्हें तीन दिनों की रिमांड पर भेजा गया था। रिमांड खत्म होने के बाद फिर से उनकी मदुरै जिला कोर्ट में पेशी हुई। जहाँ से उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। फिलहाल वह 19 अप्रैल 2023 तक न्यायिक हिरासत में है। उनके खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत भी मामला दर्ज किया गया है।

‘सर पर डंडा मारा, चाकुओं से गोदा, मारते-मारते ले गए मस्जिद…’: छत्तीसगढ़ में मार डाले गए भुनेश्वर के परिजनों को सुनिए, कहा- पुलिस हत्यारों को उकसा रही थी

छत्तीसगढ़ के मेतरा जिले में शनिवार (8 अप्रैल, 2023) को अब्दुल, अकबर, इस्माइल समेत 11 हमलावरों ने भुनेश्वर साहू नाम के युवक की हत्या कर दी। यहाँ के साजा विधानसभा में आने वाले गाँव बिरनपुर में दो स्कूली छात्रों के बीच साइकिल की टक्कर से इस झगड़े की शुरुआत हुई थी। हमले में तलवारों और काँच की की बोतल का इस्तेमाल हुआ था। अब साहू के परिवार वालों ने पूरी घटना का खुलासा किया है। आरोप है कि हमलावरों को पुलिस का सहयोग था और महिलाओं को भी निशाना गया था।

भिलाई टाइम्स के यूट्यूब चैनल पर भुनेश्वर के पिता और भाई का इंटरव्यू प्रकाशित हुआ है। भुनेश्वर के पिता ने एक कबाड़ी की दुकान की तरफ इशारा करते हुए बताया कि खाली समय में वहाँ 5-6 लड़के बैठ कर गपशप किया किया करते हैं। उन्होंने बताया कि कबाड़ी की दुकान पर जमा लोग हिन्दू-मुस्लिम बच्चों के झगड़े को और ज्यादा बढ़ावा देते हुए उकसाते हैं। घटना के दिन उसी दुकान के पास एक बच्चे की पिटाई हुई थी। आरोप है कि मना करने के लिए पीड़ित बच्चे की माँ जब कबाड़ी की दुकान पर गई तब उनकी भी पिटाई की गई थी।

मृतक भुनेश्वर के पिता ने आगे बताया कि घटना के दिन गाँव के ही कुछ हिन्दू समाज के लोग ज्योति विसर्जन कर के लौटे थे। उन्होंने कबाड़ी की दुकान पर जमा लोगों द्वारा महिला की पिटाई पर नाराजगी जताई और एक मीटिंग आयोजित की। घटना के विरोध में हिन्दू समाज की मीटिंग हुई थी। मृतक भुनेश्वर ट्रैक्टर चलाने का काम करता था जो हिन्दू समाज की मीटिंग में शामिल हुआ था। भुनेश्वर के पिता का आरोप है कि इसी मीटिंग में मुस्लिमों ने पत्थरबाजी शुरू कर दी। उन्होंने मुस्लिमों के साथ पुलिस वालों के भी होने का दावा किया।

भुनेश्वर के पिता ने आगे बताया कि दोनों तरफ से हुई पत्थरबाजी के दौरान हमलावरों ने भुनेश्वर को खींच लिया। हिन्दुओं की मीटिंग में सभी निहत्थे बताए जा रहे हैं जिसमें से अधिकतर बीच-बचाव में जुटे थे। भुनेश्वर की मौत की जानकारी उनके पिता को फोन पर मिली। उनका दावा है कि जब वो लाश लेने के लिए जाने लगे तो हिन्दू समाज के लोग उन्हें ही डराने लगे और जाने से रोकने लगे। अंत में खुद पीड़ित पिता और उनकी पत्नी ही अपने बच्चे को बेहोशी की हालत में घर लाए।

भुनेश्वर के पिता ने एम्बुलेंस आने में डेढ़ घंटे की देरी होने का आरोप लगाया। साथ ही उन्होंने कहा, “पुलिस वाले तो उनकी ही तरफ थे।” भुनेश्वर के भाई कृष्णा साहू ने भी खुद को हमलावर भीड़ द्वारा चोटिल बताया। उन्होंने बताया, “हिन्दू समाज को पूरा गाली दी गई। जब लड़का लोग के हाथ काटिस वतने समय पुलिस कहाँ गइलिस (जब बच्चे लोगों का हाथ काटा गया था तब पुलिस कहाँ थी)।” पुलिस को मुस्लिम पक्ष का ही सपोर्टर बताते हुए भुनेश्वर के भाई ने कहा, “पुलिस वाले ही उनको सहयोग किए। मारो इनको, ऐसा पुलिस वाले ही कहे थे।”

तेली को मारना है

मृतक के दाह संस्कार के दौरान उनके पिता ने बताया, “पहले से तैयारी थी। ‘तेली को मारना है’ जैसी बातें भी की जा रही थी।” वहीं मृतक के भाई ने किसी मस्जिद का जिक्र करते हुए बताया है कि हमलावरों ने पहले से ही ईंट-पत्थर जमा किए थे। पीड़ितों ने ये भी बताया कि भीड़ ने घेर कर डंडा मारा, चाकुओं से गोदा और फिर मारते-मारते ले गए।

‘हत्यारे मुस्लिम, घर-घर में अवैध हथियार’

एक रिपोर्ट में भाजपा सांसद विजय बघेल के हवाले से बताया गया है कि भुनेश्वर को मार कर मस्जिद के बगल फेंका गया था। भाजपा सांसद ने हमलावरों की तादाद अधिक होने और पुलिस द्वारा इसे कम दिखाने का भी आरोप लगाया है।

सांसद बघेल ने आगे कहा, “हत्या करने वाले मुस्लिम लोग हैं जो अपने घरों में दुबके पड़े हैं। घर-घर अगर छानबीन हो जिसके लिए हमने पुलिस को कहा है कि वहाँ पर मौत के औज़ार मिलेंगे। मौत का जखीरा मिलेगा। अवैध हथियार मिलेंगे। वहाँ पर अवैध रूप से ये लोग धंधा करते हैं। चोरी के सामान मिलते हैं। उस जगह पर जाने से दहशत महसूस होता है। ये लोग कौन हैं, कहाँ से आए और क्यों आए इसकी छानबीन होनी चाहिए। अगर इस पर शीघ्र कार्रवाई न हुई तो आंदोलन होगा।”

‘कड़ा भी पहनो, कटार भी चलाओ’: हिंदू लड़कियों से बोले रामभद्राचार्य, लव जिहाद पर कहा- विधर्मी गलत दृष्टि से देखें तो आँखें निकाल लो, मुकदमे का मैं देख लूँगा

तुलसी पीठाधीश्वर जगदगुरु स्वामी रामभद्राचार्य अपने बयानों को लेकर अक्सर चर्चा में रहते हैं। इस बार उन्होंने हिंदू लड़कियों को विधर्मी लोगों से सतर्क रहने और ‘लव जिहाद’ पर बड़ा बयान दिया है। सोशल मीडिया पर उनका वीडियो वायरल हो रहा है। उत्तर प्रदेश के आगरा में रामकथा सुनाने के दौरान उन्होंने मंगलवार (11 अप्रैल, 2023) को कहा, “हमारी हिंदू लड़कियों को विधर्मी लोग फँसा रहे हैं। बहनों, जो तुम्हारी ओर गलत दृष्टि से देखे, उसकी आँख निकाल लो। फिर जो मुकदमा होगा मैं देख लूँगा।”

रामभद्राचार्य ने अपनी बात को जारी रखते हुए हिंदू लड़कियों से अपनी इज्जत स्वयं बचाने और हाथ में कड़ा पहनने के साथ-साथ कटार चलाने का अभ्यास करने को भी कहा। उन्होंने आगे कहा, “हमने जातिवाद नहीं फैलाया। ये जातिवाद कुर्सी के भेड़िये नेताओं ने फैलाया है।”

जगदगुरु रामभद्राचार्य ने आरक्षण खत्म करने की माँग की और नेताओं को ललकारते हुए कहा, “मैं तुम लोगों को चुनौती देता हूँ। अगर माँ का असली दूध पिया है तो तुम जाति के आधार पर निश्चित आरक्षण समाप्त करवाओ। फिर जिसके यहाँ कहोगे, मैं रोटी खाने को तैयार हूँ।”

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रामभद्राचार्य ने रामकथा सुनाने के दौरान यह भी कहा, “ऐसा कहा जा रहा है कि ब्राह्मणों ने जातिवाद को जन्म दिया। लेकिन हमने जातिवाद को जन्म नहीं दिया। बेईमान लोगों ने केवल वोट की राजनीति के लिए देश को बाँटा। अगर हमने जातिवाद फैलाया होता तो शबरी माता के झूठे बेर राम क्यों खाते? जब रामचरितमानस राष्ट्रीय ग्रंथ बनेगी, तभी समाज का सुधार हो सकेगा।”

गौरतलब है कि बीते दिनों तुलसी पीठाधीश्वर जगदगुरु स्वामी रामभद्राचार्य ने रामकथा के दौरान राम जन्मभूमि आंदोलन और 90 के दशक की घटनाओं को याद करते हुए कहा था, “हम 1990 की घटना को नहीं भूले हैं और न कभी भूल पाएँगे। हमने किसी का अपमान नहीं किया, लेकिन हमारे धर्मग्रंथों का अपमान हुआ। हिंदुत्व का भी अपमान हुआ।” रामभद्राचार्य ने कहा था, “निहत्थे राम भक्तों पर गोलियाँ चलाई गई थी। सरयू मैया खून से लाल हो गई थीं। कोठारी बंधुओं को घर से लाकर गोली मारी गई। हमको ऐसी समरसता नहीं चाहिए। मेरे लिए कहा जा रहा कि मैं भाजपा का एजेंट हूँ’ लेकिन मैं भाजपा का एजेंट नहीं हूँ। भाजपा मेरी एजेंट हो सकती है।”

कौन हैं जगदगुरु स्वामी रामभद्राचार्य

जगदगुरु स्वामी रामभद्राचार्य का असली नाम गिरधर मिश्रा है। उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले में जन्मे स्वामी रामानन्द सम्प्रदाय के 4 जगदगुरु रामानन्दाचार्यों में से एक हैं। 1988 से वह इस पद पर हैं। बताया जाता है कि जब वह 2 महीने के थे, तभी उनकी आँखों की रोशनी चली गई थी। इसके बावजूद वह 22 भाषाओं के जानकार हैं और अब तक कुल 80 पुस्तकों व ग्रंथों की रचना कर चुके हैं।

AAP चला रही ‘डिग्री दिखाओ अभियान’, खुद के 29 MLA के पास नहीं है डिग्री: 7 विधायक 10वीं तो 12वीं पास हैं 8, चुनाव आयोग के पास सबका रिकॉर्ड

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निशाना बनाने के लिए आम आदमी पार्टी (AAP) ने ‘डिग्री दिखाओ अभियान’ शुरू किया है। दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार की नई-नवेली शिक्षा मंत्री आतिशी मार्लेना ने मीडिया के सामने 09 अप्रैल 2023 अपनी डिग्री दिखाते हुए इस अभियान की शुरुआत की। कहा गया कि हर रोज आप का एक नेता डिग्री दिखाएगा। इस बीच ऑपइंडिया ने चुनाव आयोग को दी गई जानकारी की पड़ताल करने पर पाया कि दिल्ली विधानसभा में चुनकर पहुँचे AAP विधायकों में से 29 के पास खुद डिग्री नहीं है।

दिल्ली विधानसभा में आम आदमी पार्टी के 62 विधायक हैं। चूँकि रोज एक AAP नेता द्वारा अपनी डिग्री दिखाने की बात कही गई है तो यह अभियान कम से कम 62 दिन चलना चाहिए। लेकिन दिल्ली के विधायकों का डिग्री दिखाओ अभियान सिर्फ 33 दिनों तक ही चल सकेगा, क्योंकि उनके 29 विधायकों के पास डिग्री नहीं है।

ऑपइंडिया ने दिल्ली विधानसभा चुनाव 2020 के लिए आप नेताओं द्वारा पेश किए गए हलफनामों की पड़ताल की ताकि विधायकों की उच्च शिक्षा का पता लगाया जा सके। चुनावी हलफनामे में उम्मीदवारों को अपनी उच्चतम शिक्षा का उल्लेख करना होता है।

2 विधायक 10वीं पास भी नहीं

हलफनामे के अनुसार आम आदमी पार्टी के 2 विधायक ऐसे हैं, जिन्होंने 10वीं से भी कम शिक्षा प्राप्त की है। सीलमपुर से विधायक अब्दुल रहमान ने सिर्फ 8वीं तक तालीम हासिल की है। वहीं उत्तम नगर इलाके से विधायक नरेश बालियान ने सिर्फ 9वीं तक पढ़ाई की है।

आप के 10वीं पास MLA

ऑपइंडिया की पड़ताल में पाया गया कि आप के सात विधायक 10वीं तक पढ़े हैं। इनमें राजौरी गार्डन से विधायक धनवती चंदेला, विकासपुरी से विधायक महेंद्र यादव, रिठाला से विधायक मोहिंदर गोयल, नरेला से एमएलए शरद कुमार चौहान, गोकुलपुर के सुरेंद्र कुमार, करोल बाग के एमएलए विशेष रवि और मटिया महल से विधायक शोएब इकबाल शामिल हैं।

12वीं पास विधायक

यदि AAP के 12वीं पास विधायकों की बात करें तो सूची में 08 नाम शामिल हैं। इनमें मटियाला विधायक गुलाब सिंह, बवाना विधायक जय भगवान, तिलक नगर से विधायक जरनैल सिंह, सुल्तानपुर माजरा से विधायक मुकेश अहलावत, आदर्श नगर के पवन शर्मा, आरके पुरम से विधायक प्रमिला टोकस, वजीरपुर विधायक राजेश गुप्ता और मोती नगर से विधायक शिव चरण गोयल शामिल हैं।

अन्य सर्टिफिकेट व डिप्लोमाधारी MLA

कोंडली से विधायक कुलदीप कुमार और चाँदनी चौक से विधायक प्रह्लाद सिंह साहनी ने बीच में ही कॉलेज की पढ़ाई छोड़ दी है। उनके पास भी डिग्री नहीं है। दिल्ली सरकार के पूर्व शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया के पास पत्रकारिता का डिप्लोमा है। मुंडका से विधायक धर्मपाल लाकरा ने डीजल मैकेनिक्स में सर्टिफिकेट कोर्स किया है। गिरीश सोनी ने रेफ्रिजरेशन और एयर कंडीशनिंग में नेशनल ट्रेड सर्टिफिकेट कोर्स किया है। गिरीश मादीपुर से विधायक हैं। मुस्तफाबाद विधायक हाजी यूनुस ने उर्दू और अरबी में आलिम कोर्स किया हुआ है।

इसी तरह छतरपुर से विधायक करतार सिंह तंवर ने सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा किया है। किरारी एमएलए ऋतुराज गोविंद ने होटल मैनेजमेंट में एडवांस डिप्लोमा किया है। त्रिलोकपुरी विधायक रोहित कुमार ने संगीत प्रभाकर डिग्री कोर्स कर रखा है। मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जेल में बंद शकूर बस्ती से विधायक सत्येंद्र जैन के पास इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ आर्किटेक्ट्स में एसोसिएट सदस्यता है जो बीआर्क (Bachelor of Architecture) के समकक्ष मानी जाती है।

बता दें कि पिछले दिनों गुजरात हाईकोर्ट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्नातकोत्तर (MA) की डिग्री माँगने पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejariwal) पर 25000 रुपए का जुर्माना लगा दिया था। उच्च न्यायालय ने 31 मार्च 2023 को अपने फैसले में कहा था कि पीएम मोदी का प्रमाण-पत्र दिखाने की जरूरत नहीं है। इसके साथ ही गुजरात हाई कोर्ट ने मुख्य सूचना आयोग (CIC) के उस आदेश को भी रद्द कर दिया था, जिसमें PMO के साथ-साथ गुजरात विश्वविद्यालय और दिल्ली विश्वविद्यालय के अधिकारियों को पीएम मोदी की स्नातक और स्नातकोत्तर डिग्री का डिटेल देने का निर्देश दिया गया था।

ऑपइंडिया ने यह जानकारी चुनाव आयोग को जमा कराए गए सार्वजनिक हलफनामों के आधार पर जुटाई है। यह जानकारी चुनाव आयोग की वेबसाइट पर भी उपलब्ध है।

निर्मला सीतारमण ने ‘मुस्लिमों पर हिंसा’ वाला प्रोपेगेंडा अमेरिका में किया चकनाचूर: कहा- भारत में उनकी आबादी बढ़ी, पाकिस्तान में अल्पसंख्यक खत्म कर दिए गए

केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने सोमवार (10 अप्रैल 2023) को वॉशिंगटन डीसी में स्थित अमेरिकी थिंक टैंक पीटरसन इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल इकोनॉमिक्स (PIIE) में पश्चिमी देशों को लताड़ा। उन्होंने भारत भारत में मुस्लिमों की स्थिति सहित देश को लेकर नकारात्मक ‘धारणा’ का जवाब दिया।

सीतारमण ने भारत में ‘मुस्लिमों के खिलाफ हिंसा’ को लेकर किए गए सवाल पर बहुत गंभीरता से जवाब दिया। उन्होंने कहा, “भारत दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी वाला देश है और यह आबादी 1947 से लगातार बढ़ रही है।”

इस दौरान पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों का जिक्र करते हुए सीतारमण ने कहा, “भारत को विभाजित करके पाकिस्तान का गठन किया गया। उस दौरान पाकिस्तान ने खुद को इस्लामी मुल्क घोषित किया, लेकिन यह भी घोषणा कि अल्पसंख्यकों को सुरक्षा दी जाएगी।” हालाँकि, वहाँ हर अल्पसंख्यक वर्ग को खत्म कर दिया गया। मामूली बातों पर ईशनिंदा का आरोप लगाकर अल्पसंख्यकों को मारा जा रहा है।

वित्तमंत्री ने आगे कहा, “अगर कहीं अल्‍पसंख्‍यकों की संख्‍या में गिरावट आई है तो वह पाकिस्तान है। यहाँ तक कि पाकिस्तान में मुस्लिम समुदाय के कुछ वर्गों को भी खत्म कर दिया गया। वहाँ मुहाजिर, शिया, अहमदिया के खिलाफ हिंसा हो रही है। मुख्यधारा वाली सुन्नी समुदाय द्वारा जो भी वर्ग स्वीकार नहीं किए गए, उनका खात्मा कर दिया गया। भारत में हर वर्ग के मुस्लिमों को सरकार सहायता कर रही है और उनके बच्चे शिक्षा पा रहे हैं।”

PIIE के अध्यक्ष ऐडम एस पोसेन को भारत को लेकर पश्चिम की नकारात्मक धारणाओं का जवाब देते हुए वित्त मंत्री ने कहा, “भारत में जो हो रहा है उस पर नजर डालिए, न कि उन लोगों द्वारा बनाई जा रही धारणाओं को सुनें, जो जमीन पर गए तक ही नहीं हैं और रिपोर्ट पेश कर रहे हैं।” उन्होंने कहा कि जो भी ये रिपोर्ट पेश कर रहे हैं, वे भारत आएँ और खुद देखें।

पोसेन ने सीतारमण से भारत में निवेश पर असर डालने वाली धारणाओं को लेकर भी सवाल किए। इसका जवाब देते हुए वित्त मंत्री ने कहा, “इसका जवाब उन निवेशकों के पास है, जो भारत आ रहे हैं। ये वो निवेशक हैं, जो पिछले कई सालों से भारत आ रहे हैं। कोई भी निवेशक, जो निवेश करना चाहता है, उसे मैं सिर्फ यही कहूँगी कि वो ये देखे कि भारत में क्या हो रहा है न कि उन कुछ लोगों की गलत धारणाओं पर यकीन करें जो जमीनी हकीकत से वाकिफ नहीं हैं और बस रिपोर्ट तैयार कर देते हैं।”

दरअसल, निर्मला सीतारमण विश्व व्यापार संगठन (WTO) की बैठक में भाग लेने के लिए अमेरिका में है। इस दौरान उन्होंने WTO को भी आईना दिखाया। उन्होंने कहा कि WTO को और अधिक प्रगतिशील बनना चाहिए और सभी देशों की बातों को भी सुनना चाहिए, ना कि सिर्फ अपनी बात सुनाते रहना चाहिए।

पश्चिम बंगाल में बच्चों के भोजन पर भी डाका, मिड डे मील का ₹100 करोड़ डायवर्ट: खराब उत्पादों का इस्तेमाल, केंद्र+राज्य की समीक्षा से पकड़ी गई गड़बड़ी

पश्चिम बंगाल में मिडडे मील के मामले में बड़ी गड़बड़ी की घटना सामने आई है। इसके लिए केंद्र और राज्य सरकारों ने संयुक्त समीक्षा का भी फैसला लिया है। ‘प्रधानमंत्री पोषण योजना’ के तहत स्कूली बच्चों को दोपहर का पौष्टिक भोजन दिया जाता है। अब सामने आया है कि 2022 में अप्रैल से लेकर सितंबर तक 16 करोड़ मिडडे मील्स को लेकर गड़बड़ी हुई है, जो 100 करोड़ रुपए का बैठता है। आरोप है कि इतने करोड़ की मिडडे मील्स की अतिरिक्त रिपोर्टिंग की गई, जो फर्जी है।

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने इसके लिए ‘जॉइंट रिव्यू कमीशन (JRC)’ का गठन किया है। जनवरी 2023 में इसका गठन किया गया है। ये भी आरोप है कि इस योजना के लिए जो फंड्स जारी किए गए, उन्हें कही और भेज दिया गया। इन फंड्स से अग्निकांड के पीड़ितों को मुआवजा दिया गया। साथ ही अनाज के एलोकेशन में भी गड़बड़ी हुई है। चावल दाल और सब्जी की मात्रा में भी 70% कम खरीद की गई। साथ ही नमक-मिर्च इत्यादि के एक्सपायर्ड उत्पात भी प्रयोग में लाए जाने का मामला सामने आया है।

‘द इंडियन एक्सप्रेस’ में प्रकाशित खबर में जानकारी दी गई है कि 24 मार्च को केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने अपनी गंभीर चिंताओं को लेकर राज्य की TMC सरकार को अवगत करा दिया है। साथ ही कहाँ-कहाँ गड़बड़ी हुई है, इस बारे में भी बताया गया है। कितने मिडडे मील्स दिए गए, इन आँकड़ों को भी बढ़ा-चढ़ा कर पेश किया गया। इसमें जो वित्तीय गड़बड़ियाँ हुई हैं, उसे केंद्र ने रेखांकित किया है। इसके जवाब में 30 मार्च को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सरकार ने केंद्र को बताया कि स्थानीय प्रोजेक्ट डायरेक्टरों को इन गड़बड़ियों अध्ययन करने के लिए कहा गया है।

2023 में 29 जनवरी से लेकर 7 फरवरी तक मिशन ने दौरा कर के ये समीक्षा की थी, जिसमें ये गड़बड़ियाँ सामने आई थीं। मिडडे मील्स खाने वाले बच्चों को लेकर जिला स्तर पर जो रजिस्टर था और जो आँकड़े राज्य सरकार ने केंद्र को भेजे, उनमें भी गड़बड़ी सामने आई है। उत्तराखंड स्थित जीबी पंत यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर एन्ड टेक्नोलॉजी में फ़ूड एन्ड न्यूट्रिशन विभाग की अध्यक्ष (HOD) प्रोफेसर अनुराधा दत्ता इस JRM का नेतृत्व कर रही हैं।

केंद्र सरकार की जाँच समिति ने पाया है कि उक्त अवधि के बीच जिला स्तर के आँकड़ों को देखने पर पता चलता है कि 124.22 करोड़ मिडडे मील्स दिए गए, जबकि राज्य सरकार ने केंद्र सरकार को जो रिपोर्ट भेजी, उसमें ये आँकड़ा 140.25 करोड़ है। राज्य सरकार के अधिकारियों का कहना है कि पश्चिम बंगाल में किसी अधिकारी के हस्ताक्षर के बिना ही JRM रिपोर्ट को फाइनल कर दिया गया। साथ ही केंद्र सरकार पर नियमों का पालन न करने का आरोप मढ़ा।

’30 अप्रैल को सलमान खान की हत्या करूँगा’: मुंबई पुलिस को ‘राॅकी भाई’ का काॅल, धमकियों के बीच अभिनेता ने विदेश से मँगवाई बुलेट प्रूफ कार

बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान (Salman Khan) को एक बार फिर जान से मारने की धमकी मिली है। मुंबई पुलिस ने सोमवार (10 अप्रैल 2023) को इस बात की जानकारी दी। पुलिस के अनुसार, कंट्रोल रूम में एक शख्स ने धमकी वाला कॉल किया था। वह खुद को राजस्थान के जोधपुर का रहने वाला बता रहा था। उसने अपना नाम रॉकी भाई बताया है। कॉल करने वाले ने दावा किया है कि वह 30 अप्रैल 2023 को सलमान खान को मार देगा। अभिनेता को धमकी मिलते ही मुंबई पुलिस मामले की जाँच में जुट गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सलमान खान ने लगातार मिल रही धमकियों के बीच नई बुलेट प्रूफ कार भी खरीदी है। यह निसान एसयूवी है, जिसे उन्होंने विदेश से इंपोर्ट कराया है। अभी तक यह गाड़ी मार्केट में लॉन्च नहीं हुई है।

बता दें कि इससे पहले भी कई बार सलमान खान को जान से मारने की धमकी मिल चुकी है। मार्च 2023 में भी अभिनेता को एक धमकी भरा ईमेल मिला था, जिसके बाद पुलिस ने उनकी सुरक्षा बढ़ा दी थी। साथ ही गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई, गोल्डी बराड़ और रोहित बराड़ के विरुद्ध नई FIR भी दर्ज की गई थी। बांद्रा पुलिस थाने में इन तीनों के खिलाफ IPC (भारतीय दंड संहिता) की धारा 506 (2) (आपराधिक धमकी), 120 (B) (आपराधिक षड्यंत्र) और 34 (समान इरादे से संयुक्त अपराध) के तहत मामला दर्ज किया था।

धमकी भरा ईमेल ‘मोहित गर्ग’ के नाम से भेजा गया था। इसमें लिखा था, “गोल्डी भाई को बात करनी है तेरे बॉस सलमान खान से।” इसके बाद मुंबई पुलिस ने राजस्थान पुलिस के साथ संयुक्त ऑपरेशन चलाते हुए जोधपुर जिले के लूणी गाँव से राम विश्नोई (21 वर्ष) को गिरफ्तार किया था।

वर्क फ्रंट की बात करें तो 21 अप्रैल 2023 को सलमान खान की फिल्म ‘किसी का भाई किसी की जान’ रिलीज होने वाली है। इस फिल्म में पूजा हेगड़े और शहनाज गिल भी मुख्य भूमिका में नजर आएँगी। इसके अलावा सलमान ‘टाइगर 3’ में भी दिखाई देंगे। अप्रैल 2024 से शाहरुख के साथ सलमान ‘टाइगर वर्सेज पठान’ की भी शूटिंग शुरू करने वाले हैं।

‘RSS तमिलनाडु में निकाल सकता है रूट मार्च’: सुप्रीम कोर्ट ने स्टालिन सरकार की अपील खारिज की, मद्रास हाईकोर्ट के फैसले को रखा बरकरार

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने तमिलनाडु सरकार को जबरदस्त झटका देते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को पथ संचालन (RSS Root March in Tamil Nadu) की इजाजत दे दी। RSS ने राज्य में 47 जगहों पर पथ संचलन निकालना चाहती थी, लेकिन तमिलनाडु सरकार ने इसकी इजाजत नहीं दी।

सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार (11 अप्रैल 2023) को मद्रास उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ तमिलनाडु सरकार की उस अपील को खारिज कर दिया, जिसमें RSS को राज्य में मार्च निकालने की इजाजत दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस वी रामासुब्रमण्यम और पंकज मित्तल की पीठ ने 10 फरवरी को दिए गए मद्रास हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा।

इससे पहले, आरएसएस की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी ने कहा था कि अनुच्छेद 19(1)(बी) के तहत बिना हथियारों के शांतिपूर्ण तरीके से एकत्र होना सबका मौलिक अधिकार है। इसे बहुत मजबूत आधार के अभाव में किसी भी तरह से कम नहीं किया जा सकता है।

जेठमलानी ने सरकार द्वारा आरएसएस पर इस आधार पर कुछ क्षेत्रों में मार्च निकालने पर लगाए गए प्रतिबंध पर सवाल उठाया कि पीएफआई पर भी हाल ही में प्रतिबंध लगाया गया था। जेठमलानी ने कहा, “जिन क्षेत्रों में ये मार्च निकाले गए, वहां से हिंसा की एक भी घटना की सूचना नहीं है।”

मामले की सुनवाई के दौरान भी सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु की स्टालिन सरकार के रवैये की आलोचना करते हुए कड़ी फटकार भी लगाई थी। न्यायाधीशों ने कहा था कि सरकार किसी के लिए लोकतंत्र की भाषा बोलती है और किसी के लिए सत्ता की भाषा बोलती है।

दरअसल, पिछले साल 2 अक्टूबर को पथ संचालन निकालने के लिए संघ ने राज्य सरकार से अनुमति माँगी थी। तमिलनाडु की स्टालिन सरकार सड़कों पर मार्च निकालने की अनुमति नहीं दी। अनुमति दी भी तो सीमिति जगहों पर और वह बंद परिसरों में। सरकार ने तर्क दिया था कि 6 ज़िले ऐसे हैं, जहाँ प्रतिबंधित इस्लामिक संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) का प्रभाव है। ऐसे में प्रदेश का माहौल बिगड़ सकता है।

संघ ने इसका विरोध किया और अपने मौलिक अधिकारों का हनन बताया था। राज्य सरकार के फैसले के खिलाफ संघ ने तमिलनाडु स्थित मद्रास हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। हाईकोर्ट की एकल पीठ ने 4 नवंबर 2022 को सुनवाई करते हुए RSS को 6 जगहों को छोड़कर बाकी जगहों पर कुछ शर्तों के साथ मार्च निकालने की इजाजत दी थी। 

हाईकोर्ट द्वारा लगाई गई शर्तों में कहा गया था कि संघ के स्वयंसेवक बिना लाठी-डंडे या हथियारों के मार्च निकालेंगे। इसके साथ ही यह भी शर्त जोड़ी गई थी कि वे ऐसे किसी भी मुद्दे पर नहीं बोलेंगे, जिससे देश की अखंडता पर असर पड़े। हालाँकि कोर्ट के फैसले से नाखुश होकर RSS ने 6 नवंबर को होने वाले रूट मार्च को स्थगित कर दिया। इसके साथ ही कोर्ट से इस पर पुनर्विचार करने के लिए कहा।

इसके बाद मद्रास हाईकोर्ट की डबल बेंच ने 10 फरवरी 2023 को को सुनवाई करकते हुए उच्च न्यायालय की एकल खंडपीठ के प्रतिबंधों को हटा दिया। डबल बेंच ने एक स्वस्थ लोकतंत्र में विरोध के महत्व पर जोर दिया था। इस दौरान तमिलनाडु सरकार ने हाईकोर्ट में मार्च की अनुमति देने का विरोध किया।

हाईकोर्ट के डबल बेंच के फैसले के विरोध में तमिलनाडु सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की, जिसे आखिरकार सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया। इससे पहले सर्वोच्च न्यायालय ने 17 मार्च 2023 को हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली राज्य सरकार की याचिका पर सुनवाई टाल दी थी। इसके बाद 27 मार्च को कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।