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डोनाल्ड ट्रंप को भारी पड़ी पॉर्न स्टार से मुलाकात, 1 लाख 30 हजार डॉलर देने के मामले में आरोपित करार: US के पूर्व राष्ट्रपति पर चलेगा मुकदमा

अमेरिका की पॉर्न स्टार स्टॉर्मी डेनियल्स इन दिनों सुर्खियों में हैं। पॉर्न स्टार को अवैध तरीके से करीबन डेढ़ लाख डॉलर दिए जाने के मामले में मैनहट्टन की ग्रैंड जूरी ने डोनाल्ड ट्रंप को आरोपित माना है। इसी के साथ ट्रंप अमेरिका के पहले ऐसे पूर्व राष्ट्रपति बन गए हैं जिनके खिलाफ आपराधिक मामला चलेगा। साथ ही ट्रंप को अदालत में भी पेश किया जाएगा। ट्रंप मंगलवार (4 अप्रैल 2023) को सरेंडर करने वाले हैं। पूरा मामला 2016 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव से पहले का है।

कौन हैं स्टॉर्मी डेनियल्स ?

44 साल की स्टॉर्मी डेनियल्स का असली नाम स्टेफनी क्लिफोर्ड है जो अमेरिका के लुइसियाना के बैटन रूज में पली-बढ़ी। स्टॉर्मी शुरुआत में एक पत्रकार बनना चाहती थीं लेकिन बड़े होने के साथ वह एडल्ट फिल्मों की दुनिया में चली गईं। उन्होंने 40 ईयर ओल्ड वर्जिन और मैरून-5 जैसी फिल्मों में अभिनय भी किया है। इसके बाद पॉर्न स्टार की शोहरत बढ़ती गई।

क्या है ट्रंप और स्टॉर्मी का रिश्ता?

वर्ष 2018 में डेनियल्स ने न्यूयॉर्क टाइम्स के साथ साक्षात्कार में विस्तार से अपने और ट्रंप के संबंधो पर चर्चा की थी। स्टॉर्मी ने बताया कि वर्ष 2006 में लेक ताहो में एक गोल्फ टूर्नामेंट के दौरान उनकी ट्रंप से मुलाकात हुई थी। जिसके बाद ट्रंप ने उन्हें डिनर पर बुलाया था। इसी दौरान दोनों के बीच जिस्मानी संबंध बने थे।

बता दें ट्रंप ने हमेशा इससे इनकार किया है। लेकिन पॉर्न स्टार का दावा है कि जिस वक्त दोनों के बीच शारीरिक संबंध बने थे ट्रंप 60 साल के थे और स्टॉर्मी 27 साल की थीं। स्टॉर्मी डेनियल्स ने इंटरव्यू के दौरान कहा था कि डोनाल्ड ट्रंप ने सहमति के साथ यौन संबंध बनाए थे।

डेनियल्स का दावा है कि ट्रंप आगे भी उसके साथ संबंध बनाना चाहते थे। लेकिन वह इसके लिए तैयार नहीं हुईं थीं। जिसके बाद ट्रंप ने उन्हें एक टीवी शो से बाहर करवा दिया था। दरअसल ट्रंप ने पहले स्टॉर्मी को एक टीवी शो में शामिल करने की बात कही थी।

कहाँ बिगड़ी बात ?

मीडिया रिपोर्टों की मानें तो 2011 में स्टॉर्मी ने अपने और ट्रंप के बीच बने संबंध की कहानी इन टच वीकली मैग्जीन को बेचने की कोशिश की। इसके लिए 15 हजार डॉलर का सौदा हुआ था। मगर ट्रंप के वकीलों ने ऐसा नहीं होने दिया। उस वक्त ट्रंप के वकील रहे माइकल कोहेन ने साक्षात्कार चलने पर पत्रिका पर मुकदमा करने की धमकी दी थी।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, घटना के बाद 2016 अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो गई। ट्रंप ने अपना नामांकन दिया। स्टॉर्मी तब भी अपने और ट्रंप के बीच बने संबंधों की कहानी बेचना चाहती थी। मीडिया में भी इसे लेकर सुगबुगाहट थी। चुनावी साल में ही ट्रंप औऱ डेनियल की कहानी मीडिया में प्रकाशित होने वाली थी। उसी समय ट्रंप के पूर्व वकील माइकल कोहेन ने चुनाव से पहले डेनियल को चुप रहने के लिए उसे 1,30,000 डॉलर का भुगतान किया था।

कैसे फँसे ट्रंप?

हालाँकि बात छिपी नहीं रह सकी और ट्रंप के प्रेसिडेंट बनने के बाद जनवरी 2018 में वॉल स्ट्रीट जर्नल में यह कहानी प्रकाशित हो गई। कहानी प्रकाशित होने के बाद मामले की जाँच शुरू हुई। ट्रंप के वकील पर पॉर्न स्टार के खाते में 1 लाख 30 हजार डॉलर भेजने का आरोप लगा जो जाँच में सही पाया गया। इसी मामले में ट्रंप को भी आरोपित बनाकर जाँच की गई और अब मैनहट्टन की ग्रैंड जूरी ने उनपर मुकदमा चलाने की ने अनुमति दी है।

गुरुद्वारे के ग्रंथी का एक पैर काटकर साथ ले गए अज्ञात अपराधी, एक हाथ की अंगुलियाँ भी काटीं: पंजाब के तरनतारन की घटना

देश में माहौल को बिगाड़ने के पूरे प्रयास किए जा रहे हैं। पंजाब में एक गुरुद्वारे के ग्रंथी पर हमला करके सांप्रदायिक तनाव फैलाने की कोशिश की गई है। अज्ञात अपराधियों ने घर लौट रहे ग्रंथी सुखचैन सिंह के पैर काटकर अपने साथ ले गए। अपराधियों ने हाथ की अंगुलियाँ भी नहीं छोड़ीं। अपराधियों को पकड़ने के लिए SIT गठित की गई है।

दरअसल, पंजाब के तरनतारन स्थित कस्बा खडूर साहिब के रहने वाले 55 वर्षीय सुखचैन सिंह बाणियाँ गाँव के गुरुद्वारे में ग्रंथी हैं। गुरुवार (30 मार्च 2023) की देर शाम वे अपने घर लौट रहे थे। इसी दौरान कुछ अज्ञात बदमाशों ने उन्हें रोका और तेजधार हथियार से उन पर हमला कर दिया।

मीडिया रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि बदमाश ग्रंथी के हाथों की अंगुलियाँ काट दीं और टांग काटकर अपने साथ ले गए। गंभीर रूप से घायल ग्रंथी को अमृतसर के अमनदीप अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। वहाँ उनका इलाज चल रहा है।

उधर पंजाब के हालात को देखते हुए पुलिस सतर्क है और अपराधियों की सुराग लगा रही है। पंजाब पुलिस इलाके के सारे सीसीटीवी की फुटेज खंगाल कर अपराधियों की पहचान करने की कोशिश कर रही है। पुलिस के अनुसार, यह स्पष्ट नहीं है कि किसी दुश्मनी के तहत घटना को अंजाम दिया गया है या माहौल को खराब करने की कोशिश की गई है।

गोइंदवाल साहिब स्टेशन हाउस ऑफिसर (एसएचओ) राजिंदर सिंह ने कहा, “हम आरोपितों का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं। पीड़िता का दाहिना पैर काटकर आरोपी ले गए हैं। जब सुखचैन सिंह ने अपने पैर पर धारदार हथियार के प्रहार को रोकने की कोशिश की तो उनके हाथ की अंगलियाँ भी कट गईं।”

बता दें कि पंजाब में पिछले एक महीने में इस तरह की यह दूसरी घटना है। इससे पहले 8 फरवरी 2023 को मोहाली के हरदीप सिंह राजू को तीन युवकों ने अगवा कर लिया था और चाकू से उनकी अंगलियाँ काट दी थीं। इस घटना का वीडियो भी वायरल हुआ था। बाद में पुलिस ने 24 फरवरी को आरोपित को गिरफ्तार कर लिया था।

‘सरकार’ सरनेम की जगह हुआ ‘सरकारी’…और जमीनें छिन गईं : एक मात्रा की गलती का खामियाजा भुगत रहे 727 हिंदू शरणार्थी, कर्नाटक का मामला

कर्नाटक में नाम में मात्रा बदल जाने के कारण पूर्वी पाकिस्तान (East Pakistan) से आए 727 हिंदू शरणार्थिर्यों की जमीन छिन जाने का मामला सामने आया है। जमीनी अभिलेखों में हुई गलती के कारण ये लोग दर-दर भटकने को मजबूर हैं। दरअसल, इन हिंदू शरणार्थिर्यों के बंगाली सरनेम में ‘सरकार’ लिखा हुआ था, जो गलती से ‘सरकारी’ लिख दिया गया। इसके बाद इन लोगों की जमीन को सरकारी घोषित कर दिया गया।

मालूम हो कि 1971 में हजारों की तादाद में हिंदू शरणार्थी पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) से भारत आए थे। इन्हें कर्नाटक सहित सात राज्यों में शरणार्थी शिविरों में रखा गया था। हर परिवार को नई शुरुआत करने के लिए पाँच एकड़ जमीन दी गई थी, लेकिन एक मात्रा बदल जाने का खामियाजा इतना बड़ा होगा, ये इन्होंने कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा। इसके चलते बीते पाँच सालों से वे संघर्ष कर रहे हैं।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, 65 वर्षीय किसान विभूति सरकार भी उन लोगों में से हैं, जिनको कई दशकों तक अपनी जमीन के लिए जूझना पड़ा है, जिसे एकाएक ‘सरकारी’ संपत्ति घोषित कर दिया गया। भले ही विभूति के सरनेम सरकार में बस एक मात्रा की गलती हुई है, लेकिन ‘सरकारी’ लिखने का मतलब उनसे अधिक कोई नहीं जान सकता। इसकी वजह से उन्हें रायचूर जिले के सिंधनूर तालुक में पाँच एकड़ में बोई गई ज्वार की फसल के लिए पिछले साल बीमा से वंचित कर दिया गया। उनकी शिकायत के आधार पर जब राजस्व विभाग में इसकी जाँच की गई तो नई जानकारी निकलकर सामने आई। जाँच में पाया गया कि तीन पुनर्वास शिविरों में बसे अन्य 726 हिन्दू शरणार्थियों की जमीन को भी सरकारी जमीन के रूप में चिन्हित किया गया है। कर्नाटक सरकार के भूमि रिकॉर्ड पोर्टल पर उपलब्ध आँकड़ों में इसकी पुष्टि हुई है।

सिंधनूर तालुक के चार पुनर्वास शिविरों – आरएच2, आरएच3, आरएच4 और आरएच5 में बसे 22,000 हिंदू शरणार्थियों के प्रतिनिधि प्रसेन राप्टाना विभूति के लिए आगे आए। उन्होंने दिसंबर 2022 में तकनीकी समस्या के बारे में रायचूर डीसी को पत्र लिखा। एक महीने पहले, लिंगसुगुर के सहायक आयुक्त ने डीसी से बातचीत के बाद इस मुद्दे पर सहमति जताई। सभी प्रभावित किसान आरएच 2, 3 और 4 के निवासी हैं।

विभूति के अलावा एक अन्य हिन्दू शरणार्थी पंकज सरकार ने कहा, “हमें बिना किसी गलती के इस अजीब समस्या से जूझना पड़ रहा है। हम सरनेम ‘सरकार’ में ‘ी’ जुड़ जाने के कारण जमीन का मालिकाना हक पाने में फँस गए।” उन्होंने टीओआई को बताया, “हमने तहसीलदार से बात की। उन्होंने कहा कि यह एक सॉफ्टवेयर समस्या थी, जिसे बेंगलुरु में ठीक किया जाना था। हमें सरकारी विभाग की गलती का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। हमें इसे ठीक करने के लिए बेंगलुरु की यात्रा क्यों करनी पड़ रही है?”

हावड़ा में जुमे के दिन फिर सड़कों पर उतरी कट्टरपंथियों की भीड़, घरों और दुकानों पर पत्थरबाजी: इलाके में भारी पुलिस बल तैनात, Videos सामने आए

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी रामनवमी पर राज्य में हिंसा के लिए भले ही राजनीतिक बयानबाजी करें, लेकिन ये सही है कि इसकी शह उनके बयान से मिला था। रामनवमी के मौके पर राज्य में हावड़ा सहित कई जगहों पर हिंसा हुई थी। रामनवमी खत्म होने के बाद भी हावड़ा में यह हिंसा जारी है।

रामनवमी के अगले दिन शुक्रवार यानी जुम्मे के दिन (31 मार्च 2023) को भी हावड़ा में पत्थरबाजी की घटना के कई वीडियो सामने आए हैं। एक वीडियो में लोगों का एक गुट नजर आ रहा है और सड़क पर भारी मात्रा में ईंट-पत्थर बिखरे हुए दिख रहे हैं।

बता दें कि रामनवमी के अवसर पर हावड़ा सहित कई जगहों पर शोभायात्रा निकाली गई थी। इस शोभायात्रा पर असामाजिक तत्वों ने पत्थरबाजी की थी। इसके साथ ही आगजनी की भी घटना सामने आई थी। घटना हावड़ा के शिबपुर की है। ममता ने इसका ठीकरा भाजपा पर फोड़ा था।

रामनवमी से पहले ममता बनर्जी ने हिंदुओं को मुस्लिम इलाकों में न जाने की सलाह दी थी। उन्होंने कहा था कि ये रमजान का महीना है। ऐसे में मुस्लिम इलाकों में रामनवमी का जुलूस न निकालें। अगर ऐसा हुआ तो फिर आरोपितों को कोर्ट छोड़ेगा नहीं।

मुख्यमंत्री के इस बयान को कट्टरपंथियों ने अपने फेवर का माना और हिंसा की शुरुआत कर दी। रामनवमी पर हुई यह हिंसा पहली घटना नहीं है। पिछले यानी 2022 में भी रामनवमी पर राज्य में बड़े पैमाने पर हिंसा को अंजाम दिया गया था। हावड़ा के बांकुरा में जैसे ही शोभायात्रा मस्जिद के पास पहुँची थी, उस पर हमला कर दिया गया था। आगजनी को भी अंजाम दिया गया था।

सीएम ममता ने इस बवाल का सारा ठीकरा पहले की ही भाँति इस बार भी भाजपा पर फोड़ा है। ममता ने कहा कि उन्होंने रामनवमी रैली को नहीं रोका था। उन्होंने भाजपा पर एक महीने के लिए हिंसा की योजना बनाने का आरोप लगाया। वहीं, विश्व हिंदू परिषद ने कहा है कि ममता द्वारा शोभायात्रा का रास्ता बदलने का लगाया आरोप झूठा है।

मुख्यमंत्री ममता ने कहा कि अल्पसंख्यक समुदाय रमजान के दौरान रोजा रख रहा है। इसलिए वह हिंसा शुरू नहीं कर सकता। उन्होंने हिंसा के लिए बाहरी लोगों जिम्मेदार ठहराया। ममता ने कहा कि हिंसा में शामिल लोग स्थानीय नहीं हैं और वे बाहर से लाए गए थे।

उन्होंने कहा, “मेरे आँख-कान खुले हैं। मुझे सब दिख रहा है। मैंने पहले ही चेतावनी दी थी कि मुस्लिम बहुल इलाकों से यात्रा ना निकाली जाए। मैंने पहले ही कहा था कि राम नवमी पर रैली निकाली गई तो हिंसा हो सकती है। वह बोलीं, “यह रमजान का वक्त है। इस वक्त में वे (मुस्लिम समुदाय) कुछ गलत काम नहीं कर सकते।”

बता दें कि शिबपुर में रामनवमी के जुलूस के दौरान कट्टरपंथियों की भीड़ ने वाहनों को आग लगा दी थी। वहीं, दलखोला में जुलूस के दौरान दो गुटों के बीच हुई झड़प में एक व्यक्ति की मौत हो गयी, जबकि कई अन्य घायल हो गये। इस घटना में 5-6 पुलिसकर्मियों के घायल होने की बात भी कही जा रही है।

‘रेप करके वकील शेख ने खुद को मारे थप्पड़…शादी से मुकरा’ : बॉलीवुड की जूनियर आर्टिस्ट का आरोप, बजरंगी भाईजान समेत कई फिल्मों में कर चुकी हैं काम

बजरंगी भाईजान, सिंघम, बाजीराव मस्तानी, पद्मावत जैसी फिल्मों में काम कर चुकी बॉलीवुड (Bollywood) की जूनियर कलाकार ने वकील बीजे शेख (B J Shaikh) पर दुष्कर्म का आरोप लगाया है। पीड़िता ने मालवानी पुलिस थाने में शेख के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। इसके बाद से आरोपित फरार है।

बॉलीवुड की जूनियर कलाकार के मुताबिक, बोरीवली कोर्ट में उसका एक संपत्ति विवाद चल रहा है, जिसके लिए उसने शेख को रखा था। इस सिलसिले में इस साल जनवरी में उसकी आरोपित से मुलाकात हुई थी। 2012 में गोरेगाँव पुलिस स्टेशन में संपत्ति विवाद का मामला दर्ज कराया गया था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, अपने पिता और भाई की मृत्यु के बाद शिकायतकर्ता अपने भरण-पोषण के लिए फिल्मों और टीवी सीरियल्स में काम कर रही है। लेकिन कोरोना महामारी के दौरान उसे काम मिलना बंद हो गया। ऐसे में उसने कम फीस वाले वकील की तलाश शुरू की। तभी आरोपित ने उससे संपर्क किया।

पीड़िता के अनुसार, कोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान दोनों की कई मुलाकातें हुईं। इसी बीच शेख ने उसे शादी के लिए प्रपोज किया और वह भी इसके लिए राजी हो गई। शेख ने उससे वादा किया कि वह 5 मार्च 2023 को उसके घर पर अपने अम्मी-अब्बू को लेकर आएगा और सगाई करेगा

महिला ने मिड-डे से बताया, “मैंने सारा इंतजाम कर लिया था, लेकिन उस दिन वह अकेले मेरे घर पर पहुँचा। शेख ने मुझे बताया कि उसकी अम्मी बहुत बीमार हैं और अस्पताल में भर्ती हैं।” पीड़िता के घरवाले भी खाना खाने के बाद वहाँ से चले गए। इसके बाद आरोपित ने महिला के साथ जबरदस्ती की।

पीड़िता ने आगे बताया, “जब मैं रोने लगी तो, शेख ने पछताने का नाटक किया। उसने खुद को थप्पड़ मारना शुरू कर दिया और कहा कि उससे बहुत बड़ी गलती हो गई। उसने मुझसे माफी माँगी और भाग गया। जब शेख को पता चला कि मैं पुलिस के पास जाने वाली हूँ, तो उसने मुझे फोन किया और कहा कि वह 15 मार्च 2023 को बांद्रा कोर्ट में उससे शादी करेगा। लेकिन पहले की तरह इस बार भी उसने मुझसे झूठ बोला और कोर्ट नहीं पहुँचा। इसके बाद उसने 23 मार्च को मुझसे कहा कि वह शादी नहीं करना चाहता है।”

वहीं आरोपित ने महिला द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को बेबुनियाद बताया है। शेख ने कहा, “डिंडोशी सेशन कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई तक मेरी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है।” उसने शिकायतकर्ता पर आरोप लगाया, ”उसकी प्रवृत्ति लोगों को झूठे मामलों में फँसाने की है। घटना वाले दिन मैं एक अन्य क्लाइंट से मिलने के लिए मढ़ गया हुआ था। जब मैंने उसे फोन किया, तो उसने मुझे अपने घर आने के लिए कहा। मैं उससे उसकी बहन और जीजा की मौजूदगी में मिला था। रेप का आरोप झूठा है।”

दामाद नासिर के प्यार में अंधी हो गई थी सास जुलेखा बीवी, शौहर मुस्लिम को कुल्हाड़ी से काट डाला: अवैध संबंधों को छिपाने के लिए बेटी से करवाया था निकाह

झारखंड के गढ़वा से एक घटना सामने आई है, जिसमें हवस में अंधी एक महिला ने अपने दामाद के साथ मिलकर अपने शौहर मुस्लिम अंसारी की ही हत्या कर दी। मुस्लिम की बीवी जुलेखा बीवी और दामाद नाजिर अंसारी ने शव को छिपाने की कोशिश भी की। पुलिस ने हत्या में इस्तेमाल कुल्हाड़ी बरामद कर लिया है।

घटना गढ़वा के सोनवर्षा इलाके की है। इस हत्याकांड के खुलासे ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। दोनों ने मिलकर इस हत्याकांड को छिपाने की भी पूरी कोशिश की। हालाँकि, पुलिस ने आखिरकार दोनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है।

एसडीपीओ प्रमोद केसरी के अनुसार, मुस्लिम और नाजिर बंगलोर में एक साथ काम करते थे। जान-पहचान की वजह से नाजिर मुस्लिम के घर आने-जाने लगा। यहाँ उसका संबंध मुस्लिम की पत्नी जुलेखा बीवी से हो गया। इसकी भनक मुस्लिम को लगी तो शौहर-बीवी के बीच अक्सर अनबन होने लगी।

इसी बीच जुलेखा ने एक साजिश रची। उसने अपने शौहर मुस्लिम से कहा कि अगर उसे शंका है तो वह अपनी बेटी की शादी नाजिर से कर दे। जुलेखा बेटी के साथ निकाह की आड़ में नाजिर के साथ अपने अवैध संबंधों को जारी रखना चाहती थी। मुस्लिम जुलेखा के प्रस्ताव को मान गया और नाजिर से बेटी का निकाह कर दिया।

बेटी से निकाह के बाद भी जुलेखा और नाजिर का प्रेम परवान चढ़ता गया। अब रिश्तों की आड़ में इसे खुलकर अंजाम देने लगे। मुस्लिम को पता चला कि बेटी से निकाह के बाद भी दोनों के बीच अवैध रिश्ते जारी हैं तो वह खफा हो गया। इसके बाद जुलेखा ने दामाद बने अपने प्रेमी नाजिर के साथ मिलकर शौहर मुस्लिम को रास्ते से हटाने का प्लान बना लिया।

इसके बाद 25 मार्च की रात जुलेखा ने अपने दामाद नाजिर के मिलकर अपने शौहर मुस्लिम को कुल्हाड़ी से काटकर हत्या कर दी। इसके बाद दोनों ने शव को छिपाने की कोशिश की। बाद में इस शव को दोनों ने एक खेत में फेंक दिया। इसके बाद पुलिस को इस घटना की जानकारी मिली।

अनुसंधान के दौरान पुलिस को पता चला कि बेटी का निकाह करने से पहले ही जुलेखा बीवी और नाजिर अंसारी के बीच प्रेम संबंध रहे हैं। पुलिस ने इस एंगल पर जाँच शुरू की तो उसे कई महत्वपूर्ण सबूत मिले। इसके बाद दोनों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई तो उन्होंने अपना जुर्म कबूल कर लिया।

एयरपोर्ट गए AAP नेता राघव चड्ढा, परिणीति चोपड़ा को रिसीव किया… एक ही गाड़ी में बैठ निकल लिए: पार्टी के सांसद दे चुके हैं बधाई

राघव चड्ढा और परिणीति चोपड़ा को दिल्ली एयरपोर्ट पर एक साथ देखा गया। आम आदमी पार्टी के नेता ने परिणीति को एयरपोर्ट से रिसीव किया और एक ही गाड़ी में सवार होकर निकल गए। बताया जा रहा है कि एक हफ्ते के भीतर दोनों की यह तीसरी मुलाकात है। यही वजह है कि मीडिया में उनके शादी की अटकलें तेज हो गई हैं। सिंगर और एक्टर हार्डी संधू ने भी एक इंटरव्यू के दौरान राघव और परिणीति के रिश्तों की खबरों पर मुहर लगा दी है।

मुंबई में लगातार दो दिन लंच और डिनर डेट पर साथ देखे जाने के बाद से ही राघव और परिणीति के बीच रिलेशनशिप की खबरें सामने आई थीं। अब दिल्ली एयरपोर्ट पर दोनों को साथ देखा गया है। एयरपोर्ट पर सिक्योरिटी गार्ड्स से घिरे राघव और परिणीति मीडिया के सवालों से बचते नजर आए। एयरपोर्ट से निकलकर परिणीति सीधे राघव के साथ कार में बैठ गईं।

मंगलवार (28 मार्च 2023) को AAP सांसद संजीव अरोड़ा ने चड्ढा और परिणीति चोपड़ा की तस्वीर शेयर करते हुए उन्हें बधाई दी थी। इसके बाद कयास लगाए जाने लगे कि दोनों ने सगाई कर ली है। दूसरी तरफ सिंगर और एक्टर हार्डी संधू ने भी डीएनए को दिए साक्षात्कार में दोनों के रिश्तों पर मुहर लगा दी। उन्होंने कहा कि आखिरकार परिणीति अपनी जिंदगी में सेटल हो रही हैं। संधू ने कहा, “मैं बहुत खुश हूँ कि ऐसा हो रहा है, मैं आगे के लिए उन्हें शुभकामनाएँ देता हूँ।”

हार्डी संधू ने कहा कि एक फिल्म की शूटिंग के दौरान परिणीति ने उनसे सही लड़का मिलने पर शादी की बात कही थी। संधू ने कहा कि उन्होंने परिणीति से फोन पर बात कर उन्हें बधाई दी है। रिपोर्टों के अनुसार राघव चड्ढा और परिणीति चोपड़ा दोनों ने इंग्लैंड से अपनी पढ़ाई की है और इसी दौरान दोनों एक दूसरे को जानते थे। राघव ने लंदन स्कूल ऑफ इकॉनमिक्स से पढ़ाई की है जबकि परिणीति ने मैनचेस्टर बिजनेस स्कूल से पढ़ाई की है।

आपको बता दें कि राघव चड्ढा को लेकर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भविष्यवाणी की थी। उनके अनुसार भाजपा वाले मनीष सिसोदिया की तरह राघव चड्ढा को भी गिरफ्तार करवा सकते हैं। भविष्यवाणी तो सही नहीं हुई लेकिन व्यक्तिगत जीवन में किसी को एयरपोर्ट पर रिसीव करने जरूर जाने लगे!

10 करोड़ सहारा निवेशकों को ब्याज समेत मिलेगा रुपया: अमित शाह का ऐलान, 3-4 महीने में आ जाएँगे पैसे

सहारा ग्रुप में पैसा लगाने वाले 10 करोड़ निवेशकों को गुरुवार को गृहमंत्री अमित शाह ने एक खुशखबरी दी। अमित शाह ने बताया कि ग्रुप की चार अलग समितियों में पैसा लगाने वाले लोगों को उनका पैसा ब्याज सहित मिलेगा। यह ऐलान उन्होंने 30 मार्च 2023 को उत्तराखंड के हरिद्वार के ऋषिकुल मैदान में सहकारिता विभाग द्वारा आयोजित कार्यक्रम में किया। 

अमित शाह के इस ऐलान की वीडियो उनके ट्वीट में भी देख सकते हैं। उन्होंने कहा,

“सहारा ग्रुप की चार कॉपरेटिव सोसायटी में जिन-जिन लोगों ने अपना पैसा लगाया था, उनको पैसा और और सूद दोनों नहीं मिलता था। अब सहकारिता मंत्रालय की पहल से सुप्रीम कोर्ट ने ऑर्डर दिया है जिससे लगऊह 10 करोड़ लोगो को अपना पैसा वापस मिलेगा। मैं इस कार्यक्रम के माध्यम से देश भर के सहारा कॉपरेटिव डिपोजिटर्स को कहना चाहता हूँ आप सेंट्रल रजिस्ट्रा कॉपरेटिव सोसाटी को अपना डिमांड भेज दीजिए। सत्यापन के बाद तीन-चार महीने में ही ये पैसा देने की व्यवस्था हो जाएगी।”

उल्लेखनीय है कि इन 10 करोड़ निवेशकों का पैसा सहारा कंपनी की चार सहकारी समितियों में फँसा है। ऐसे में केंद्र ने एक जनहित याचिका में कोर्ट से आवेदन दिया था, जिसमें सहारा समूह की ओर से बाजार नियामक सेबी के पास जमा कराए गए 24,000 करोड़ रुपए में से 5,000 हजार करोड़ रुपए निवेशकों को आवंटित करने की बात थी।

जनहित याचिका पिनाकी पाणि मोहंती नाम के व्यक्ति ने दायर की थी। याचिका में विभिन्न चिट फंड कंपनियों और सहारा क्रेडिट कंपनियों में निवेश करने वाले जमाकर्ताओं को भुगतान करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया था। 

अब कोर्ट के निर्देश आने के बाद सरकार ने निवेशकों को उनके पैसे वापस आने की आस दे दी है। अमित शाह के ऐलान से पहले बुधवार (29 मार्च 2023) को सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय का आदेश आने के बाद जानकारी दी थी कि अब निवेशकों के पैसे उन्हें 9 महींने के अंदर मिल जाएँगे।

रामराज्य की स्थापना में कंटक है इस्लामी कट्टरता, श्रीराम के कर्मपथ का अनुसरण कर ही मजहबी क्रूरता पर मिलेगी विजय

इस भारत वसुन्धरा पर सहस्रों वर्ष पूर्व आदिकवि वाल्मीकि ने ‘रामायण’ में राम को मानवीय भावभूमि पर प्रतिष्ठित कर विश्वसाहित्य में एक अविस्मरणीय चरित्र की अद्भुत सृष्टि की। यह चरित्र-सृष्टि इतनी मोहक, आकर्षक और प्रेरक थी कि परवर्ती साहित्य में पुनः-पुनः प्रकट होकर, यत्किंचित अंतर युक्त होकर भी समाज को प्रभावित करती रही, लुभाती रही।

विक्रम संवत् 1631 में गोस्वामी तुलसीदास ने अब से 450 वर्ष पूर्व आदिकवि की मानवीय चरित्र-सृष्टि को पौराणिक अवतारवादी धरातल पर विष्णु के अवतार के रूप में प्रतिष्ठित कर रामकथा को नया आयाम प्रदान किया। राम के महामानव आदर्श के अंकन ने समाज को उनके आचरण का अनुकरण करने की शुभ प्रदायिनी प्रेरणा दी तो गोस्वामी तुलसीदास के नरलीला परक अवतारवाद ने इस्लामिक सत्ता की विस्तारवादी क्रूरता के विरूद्ध संघर्ष करने का साहस, शौर्य और आस्थापुष्ट संबल दिया।

‘रामायण’ और रामचरितमानस’ में अंकित राम के ये दोनों ही- मानवीय और नारायणीय रूप लोक जीवन में दूर तक स्वीकृत और समादृत हैं। राम दोनों ही रूपों में आज व्याख्येय हैं। जहाँ दूरस्थ ग्रामीण अंचलों से लेकर नगरों, महानगरों और राजधानियों तक फैले छोटे-बड़े असंख्य मंदिरों में प्रतिष्ठित-पूजित राम प्रतिमाएँ उनके नारायणत्व ईश्वरत्व की साक्षी देती हैं, वहीं विश्व की विविध भाषाओं में रचित रामकथा परक साहित्य की अगणित प्राचीन, अर्वाचीन और नवीन कृतियाँ उनके ईश्वरत्व के साथ नरत्व का प्रेरक प्रत्याख्यान करती हैं।

‘रामराज्य’ सुशासन का प्रतीक-पर्याय बनकर भारतवर्ष में सर्वत्र स्वीकृत हुआ है। आदिकवि महर्षि वाल्मीकि से लेकर महात्मा गाँधी तक, रामराज्य की अवधारणा निरंतर हमारी संस्कृति का आदर्श मानक रही है और आज भी है किन्तु रामराज्य के लिए जिस राजनीतिक व्यक्तित्व विकास एवं पारिस्थितिक परिवेश परिवर्तन की प्रक्रिया अपेक्षित है, उसकी ओर हमारा ध्यान नहीं जाता। व्यक्ति में ‘रामत्व’ की प्रतिष्ठिा किए बिना और समाज-उपवन के कष्ट कंटकों का समूल उच्छेदन किए बिना रामराज्य का पुनर्संस्थापन कैसे संभव है?

जब तक कोई साधन विहीन राम अपने पुरुषार्थ, साहस, शौर्य और संगठन-कौशल के बल पर उत्पीड़क राक्षसी मानसिकता का सर्वनाश नहीं कर देता तब तक समाज में रामराज्य कैसे आ सकता है? रामराज्य की स्थापना के लिए राम की आवश्यकता है और राम की; रामत्व की प्राप्ति के निमित्त व्यक्तित्व विकास एवं चरित्र निर्माण की उस लम्बी साधना-सुलभ प्रक्रिया की आवश्यकता है जो साधारण मनुष्य में देवत्व का, व्यक्ति के व्यक्तित्व में ‘रामत्व’ का सचेत सन्निधान करती है।

कोई व्यक्ति एक दिन में राम नहीं बन सकता। रामत्व प्राप्त नहीं कर सकता। राम में रामत्व का विकास उनके वात्सल्य-प्रेम पुष्ट बाल्यकाल से प्रौढ़ावस्था तक के सुदीर्घ अनुभव, शास्त्रज्ञान एवं सतत जाग्रत विवेकयुक्त शक्ति का सम्मिलित परिणाम है। जब व्यक्ति संघर्ष की आँच में तपकर लोक-कल्याण के विचार को उत्तरोत्तर पुष्ट करता हुआ राम बनता है, तब रामराज्य आता है।

राजगृह में जन्म लेकर, गुरुकुल में अनुशासन-संयम की छाँह में अध्ययन कर और चौदह वर्ष की दीर्घ अवधि तक वन-प्रान्तर में अनेक वनजातियों एवं तपस्वियों के मध्य निवास करते हुए प्रबलतम शत्रुशक्ति पर विजय प्राप्त कर राम ने अद्भुत सामर्थ्य अर्जित की और राजपद पर अभिषिक्त होकर स्वयं को जनता जनार्दन की कल्याण-साधना के प्रति सहर्ष अर्पित कर दिया। लोक-पथ पर लोक-हित के दिव्य रथ का संचालन सीखने के लिए राम के व्यक्तित्व विकास, उनके शील-सौन्दर्य एवं शक्ति-संयुक्त स्वरूप को समझना होगा।

दार्शनिक मान्यताओं के अनुसार संसार में ‘सत’ और ‘असत’ का संघर्ष सनातन है; शाश्वत है। यह संघर्ष मनुष्य के बाहर भी है और भीतर भी। मन में सद् इच्छाओं और दुरभिलाषाओं के मध्य होने वाला द्वन्द्व कर्म के स्तर पर बाह्य जगत में प्रकट है। यही द्वन्द्व समाज में विविध रूपों में संघर्ष का कारण बनता है। सबकों सुख पहुँचाना, सबके हित की चिंता करना और सबके हर्ष का कारण बनना सत है; स्वयं जीना तथा सबको जीने देना और कभी-कभी सबके जीवन के लिए अपने जीवन को भी सहर्ष उत्सर्गित कर देना सत है। इसके विपरीत सबसे सबका सब कुछ छीनकर अपना पोषण करना असत है; अपने मत, मान्यता, कर्म को मानने के लिए अन्य को उसकी इच्छा के विरूद्ध बलपूर्वक अथवा लोभ देकर विवश करना असत है। ‘राम’ और ‘रावण’ भारतीय धर्म, दर्शन, साहित्य और समाज में ‘इसी सत’ और ‘असत’ का प्रतीकार्थ प्रकट करते हैं। इस प्रकार राम और रावण इस भौतिक जगत के ऐतिहासिक-पौराणिक पात्र होने के साथ-साथ प्रतीक पात्र भी हैं, जिनकी प्रतीकात्मक प्रस्तुति समाज और साहित्य में अपरिवर्तनीय है।

भारतीय समाज के विस्तृत पटल पर और देश-विदेश में बसे एक अरब से अधिक सनातनी हिन्दुओं की दृष्टि में आज भी राम ही सत के प्रतीक हैं और रावण असत का प्रतीक है। इसीलिए प्रतिवर्ष आश्विन सुदी दशमी को दशहरे पर सत् की असत् पर विजय दर्शाते हुए रावण-दहन किया जाता है, किया जाता रहेगा क्योंकि मनुष्य की सहज वृत्ति सत्पथगामिनी है। निहित स्वार्थों के लिए कोई समूह भले ही असत के पोषण में, रावण के महिमा मण्डन में व्यस्त हो जाए किन्तु अन्ततः उसे राम के रूप में ही सत का वन्दन-अभिनंदन करने को बाध्य होना होगा, क्योंकि असत के प्रसार की रावणी-चित्तवृत्ति व्यक्ति और समाज-दोनों को ही अन्ततः नष्ट कर देगी। मनुष्य-विवेकशील मनुष्य इस सत्य को जानता है, समझता है इसलिए सत के प्रतीकार्थ में श्रीराम को स्वीकार करता है, करता रहेगा।

राम यथार्थ और आदर्श की समन्वित-सन्तुलित प्रकृत भूमि पर अवस्थित हैं। वे भगवान बुद्ध और भगवान महावीर की भाँति कोमलता के एक ध्रुव पर प्रतिष्ठित नहीं हैं। वे कोमलता के साथ-साथ आवश्यक कठोरता से भी समृद्ध हैं, क्योंकि कोमलता की रक्षा कठोरता के अभाव में असंभव है। श्रीराम शस्त्र और शास्त्र- दोनों के विवेकपूर्ण उपयोग के पक्षधर हैं। इसलिए अधिक व्यावहारिक और अधिक अनुकरणीय हैं। भगवान बुद्ध और महावीर के एकान्त अहिंसा-पथ को ग्रहण कर हम इस्लामिक कट्टरता की क्रूरता के समक्ष स्वयं को बलिपशुवत अर्पित कर सकते हैं- स्वैच्छिक आत्मघात कर स्वयं को धन्य मान सकते हैं, किन्तु अपनी मानवीय गरिमा, स्वाभिमान, स्वधर्मानुरूप विश्वास और जीवन की रक्षा नहीं कर सकते। आत्मगौरव, स्वधर्म और स्वाभिमानपूर्ण तेजस्वी-यशस्वी जीवन की रक्षा श्रीराम के कर्मपथ का अनुसरण करके ही संभव है, क्योंकि रावण जैसी दुर्दान्त राक्षसी ताकतों को राम की शस्त्रधारी सामरिक शक्ति ही उचित उत्तर दे सकती है। याचना के बल पर रावण से सीता को वापस नहीं लिया जा सकता। इसीलिए लोक में राम का धनुर्धारी रुप सर्वत्र वंदित है।

श्रीराम भारतवर्ष की अस्मिता हैं; सांस्कृतिक पहचान हैं। यहाँ के जन-जन में, कण-कण में बसे हैं; भक्तों के रोम-रोम में रमे हैं। वे लोक की निधि हैं। लोकगीतों का प्रिय विषय हैं। अवधी ही नहीं ब्रज, मालवी, निमाड़ी, बुन्देली, पहाड़ी भारतवर्ष की कोई भाषा बोली ऐसी नहीं जिसके लोकगीतों में राम न हों, और तो और आज के ‘बॉलीवुड’ का अभिजात्य संसार भी राम का आश्रय लेकर अपार लोकप्रियता और अर्थ अर्जित कर लेता है।

भारतवर्ष के प्रत्येक प्रांत में हजारों वर्षों से राम के नाम पर बालकों का नामकरण हो रहा है। हिमालय के पहाड़ हों, उत्तर भारत के मैदान हों, बिहार-बंगाल के क्षेत्र हों, राजस्थान का रेगिस्तान हो, मध्यभारत का विंध्य-सतपुड़ा का पठार हो, अथवा महाराष्ट्र-तमिलनाडु का दूर तक फैला समुद्र तट हो- हिन्दुओं के हर वर्ण, जाति, सम्प्रदाय में राम और रामकथा के रामभक्त पात्रों पर केन्द्रित नामधारी व्यक्ति अवश्य मिल जाएँगे। राम की व्यापकता भाषाओं, क्षेत्रों, जाति-समूहों और समय की असीम अवधियों को पारकर भारतीय समाज के सबसे बड़े अंश को प्रभावित कर रही है। अभिवादन पद के रूप में ‘राम-राम’, ‘जय रामजी की’, ‘सीताराम’, ‘जय श्रीराम’ का उच्चारण भारत में हजारों वर्षों से हो रहा है। एक हजार वर्ष से अधिक की इस्लामिक-ईसाई दासता अभिवादन पदों और नामकरणों की इस पुरातन विरासत को क्षतिग्रस्त नहीं कर सकी; छीन नहीं सकी।

इस्लाम की विस्तारवादी आँधी ने अत्यंत क्रूरता और निर्ममता पूर्वक लाखों मंदिर धराशायी कर दिए किन्तु भारतीयों के मन पर अंकित ‘राम’ नाम के दो अक्षरों को जरा भी धूमिल नहीं कर सकी। शपथ-सौगन्ध के लिए राम काम में आते हैं। कोई दुःखद सूचना पाकर मुख से ‘राम’ शब्द स्वतः निकल जाता है। किसी कारूणिक वर्णन को सुनकर अथवा किसी पर हुए अत्याचार को जानकर पीड़ित के पक्ष में व्यक्त सहानुभूति के रूप में हम ‘अरे राम-राम!’ कह उठते है। शव-यात्रा राम का नाम लिए बिना आगे नहीं बढ़ती। अर्थीं काँधे पर आते ही राम बरबस याद आ जाते हैं और राम के नाम की सत्यता अन्तर्मन में अनुभूत होकर स्वर बनकर वातावरण को गुँजायमान कर देती है।

उत्तर भारत एवं देश के अनेक क्षेत्रों में तराजू पर अनाज आदि तौलते समय तौलने वाला व्यक्ति पहली तोल में ‘एक’ के स्थान पर ‘राम’ शब्द का उच्चारण करता है। हिन्दी की बहुत सी लोकोक्तियाँ- ‘राम कहो’, ‘राम की माया कहीं धूप कहीं छाया’, ‘मुँह में राम बगल में छुरी’, ‘राम की चिरैय्याँ रामहिं को खेत, खाउ री चिरइयों भर-भर पेट’, ‘रामजी का सहारा’, ‘राम करै सो होय’, ‘जाही विधि राखै राम ताही विधि रहिए’, राम पर आधारित हैं और लोकजीवन में राम की गहरी स्वीकृति प्रमाणित करती हैं। राम की यह विस्तृत व्याप्ति और लोक-स्वीकृति उन्हें भारत का पर्याय सिद्ध करने के लिए पर्याप्त है।

इसी आधार पर राम भारत की अस्मिता हैं, वे स्वयं भारत हैं और इसीलिए भारत-विरोधी शक्तियाँ राम का विरोध करती हैं। राम को शक्तिहीन सिद्ध करने के लिए इस्लाम ने रामजन्मभूमि पर बना भव्य मंदिर ध्वस्त कर भारत के मन पर गहरी चोट की, भारत ने उस व्रण की पीड़ा शताब्दियों तक सही किन्तु उसे भरने-सूखने नहीं दिया, विस्मृत नहीं किया। उसे रक्त से सींचकर हरा रखा और अब राम की शक्ति को पुनः प्रतिष्ठा दी। राम से भारत का मन छिन्न करने के लिए ईसाई बौद्धिक धरातल पर भारतीय हिन्दू कम्युनिस्टों के सहयोग से निरंतर राम के विरूद्ध लेखन के स्तर पर भयंकर विष-वमन कर रहे हैं तथापि भारत में, भारतीयों के मन-मंदिर में राम की प्रतिष्ठा यथावत संरक्षित है। इसका संरक्षण हमारी जातीयता अस्मिता और सांस्कृतिक जीवन धारा का संवर्धन है; भारत की भावी पीढ़ियों के लिए उनकी वास्तविक पहचान का परिचय है, अतः सर्वथा करणीय है।

‘राम हैं तो भारत है, राम नहीं तो भारत नहीं’ इस सांस्कृतिक सूत्र को समझकर हमें राम और भारत के विरूद्ध हर कुचक्र को विफल करना होगा। यह हमारा कर्तव्य भी है और दायित्व भी। आधुनिक भारत की अनेक जटिल समस्याओं की जड़ें राम और रामकथा के सही अर्थ से भटकने में है। रामकथा सामाजिक-सांस्कृतिक समन्वय और समरसता की महागाथा है जो व्यक्ति और समाज, राष्ट्र और विश्व सबके लिए कल्याणकारी है। अतः सर्वथा प्रासंगिक भी है।

(लेखक डॉ. कृष्णगोपाल मिश्र, शासकीय नर्मदा महाविद्यालय नर्मदापुरम् (मध्य प्रदेश) में हिन्दी के विभागाध्यक्ष हैं)

‘पत्थर मारो सालों को…’ : वडोदरा में मस्जिद से शोभायात्रा पर हुआ पथराव, कट्टरपंथी मुस्लिम महिलाओं ने पुलिस को गाली बकी; सामने आए Videos

गुजरात के वडोदरा जिले में रामनवमी की शोभा यात्रा पर पथराव के कई वीडियो सामने आए हैं। शोभा यात्रा पर हमले के बाद इलाके में तनाव फैल गया है। सामने आए वीडियो में दिख रहा है कि पथराव एक मस्जिद के पास से की जा रही है, जबकि कट्टरपंथी मुस्लिम महिलाएँ पुलिस का रास्ता रोककर खड़ी हैं।

सामने आए ताजा वीडियो में दिख रहा है कि शोभा यात्रा पर पथराव सिर्फ मस्जिद के आसपास की छतों से ही नहीं, बल्कि मस्जिद से भी की गई। वीडियो में दिख रहा है कि नमाजी टोपी पहना एक शख्स मस्जिद से शोभायात्रा में शामिल लोगों पर पत्थर फेंकता और फिर भाग जाता है।

इस वीडियो को इंडिया टीवी के पत्रकार निर्णय कपूर ने साझा किया है। वीडियो को शेयर करते हुए उन्होंने लिखा है, “वड़ोदरा का ये वीडियो इस बात की पुष्टि कर रहा है कि गुरुवार को कुम्भारवाड़ा से निकली यात्रा पर मस्जिद में मौजूद लोगों ने पथराव किया था। देखिये इस आदमी को- मस्जिद के गेट पर बने छपरे से पत्थर फेंक कर मस्जिद के अंदर कूदता दिख रहा है, जिसके बाद पुलिस मस्जिद में दाखिल होते दिख रही है।”

इसके साथ ही एक और वीडियो सामने आया है। इस वीडियो में दिख रहा है कि शोभा यात्रा पर पथराव करने वाले अपराधियों को गिरफ्तार करने के लिए पुलिस जब मुस्लिम इलाके में गई तो मुस्लिम महिलाओं ने उन्हें घेर लिया। वीडियो में साफ दिख रहा है कि मुस्लिम महिलाएँ ना सिर्फ पुलिस का रास्ता रोक रही हैं, बल्कि उनके साथ गाली-गलौच भी कर रही हैं।

कट्टरपंथी मुस्लिम महिलाएँ पुलिस के चीख-चिल्ला रही हैं, बल्कि ‘पत्थर मारो सालों को’ कहकर गाली भी दे रही हैं और आसपास के लोगों को पुलिस के खिलाफ भड़का भी रही हैं। इस वीडियो में इनकी गाली को सुना जा सकता है।

बता दें कि गुरुवार (30 मार्च 2023) को देश भर में हर्ष और उल्लास के साथ रामनवमी मनाया गया, लेकिन कुछ राजनीतिक वजह से और कुछ कट्टरपंथियों की महजहबी वजह से कई राज्यों में शोभा यात्रा पर हमले किए गए। बंगाल में सीएम ममता बनर्जी द्वारा जूलुस को मुस्लिम इलाके में ले जाने की धमकी के बाद वहाँ बड़े पैमाने पर हिंसा भड़क उठी। कट्टरपंथियों ने उनके बयान में उनका सहयोग माना।

वहीं, महाराष्ट्र और गुजरात के कई इलाकों में भी हिंसा की खबर है। गुजरात के वड़ोदरा जिले के फतेहपुरा गराना पुलिस चौकी क्षेत्र में हिंदुओं द्वारा रामनवमी की शोभा यात्रा निकाली गई थी। शोभा यात्रा जैसे ही एक मस्जिद के सामने से गुजरने लगी, उस पर पथराव कर दिया गया। कट्टरपंथियों ने इस हमले के लिए हिंदुओं पर आरोप लगाया था, लेकिन वीडियो सामने आने के बाद उनका यह झूठ भी पकड़ा गया है।

सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पुलिस आरोपितों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार करने में जुटी। है। हालाँकि, जैसा कि ऊपर के वीडियो में दिख रहा है, पुलिस प्रशासन को उनके काम को करने से भी रोका जा रहा है और कट्टरपंथी मुस्लिम महिलाएँ इस काम में बढ़-चढ़कर अपनी भूमिका निभा रही हैं।