उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में अजय कुमार नाम के शख्स ने पत्नी पर धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाने का आरोप लगाया है। पति का आरोप है कि दुर्गा पूजा (चैत्र नवरात्र) के दौरान उसकी पत्नी मुस्कान ने घर में रखी देवी की प्रतिमा को खंडित कर दिया। आरोप है कि पिछले 15 दिनों से मुस्कान अपने पति अजय और घरवालों पर इस्लाम अपनाने का दबाव बना रही है। अजय ने इसे लेकर नजदीकी थाने में पत्नी मुस्कान और ससुराल पक्ष के खिलाफ मामला दर्ज कराया है।
पुलिस को दी गई अपनी शिकायत में अजय ने बताया है कि दिसंबर 2022 में उसने मुस्कान के साथ प्रेम विवाह किया था। अजय अकराबाद थाना इलाके के फरीदपुर का रहने वाला है और मुस्कान पास के गुल्लूपुर सिहोर की रहने वाली है। रिपोर्ट्स के अनुसार फरीदपुर में मुस्लिम आबादी ज्यादा है। गाँव में अजय का परिवार अकेला हिंदू परिवार है।
अजय का आरोप है कि आस-पास की महिलाओं ने उनकी पत्नी को भड़काया है। शादी के कुछ दिनों बाद जब मुस्कान आस-पास की मुस्लिम महिलाओं के संपर्क में आई, उसके बाद से ही वह पति समेत घरवालों पर धर्मपरिवर्तन का दबाव बना रही है।
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार चैत्र नवरात्र के दौरान मुस्कान ने मीट खाने की जिद शुरू कर दी। घरवालों ने व्रत होने और दुर्गा पूजा की बात कही तो उसने दुर्गा प्रतिमा को क्षति पहुँचाया और हंगामा खड़ा कर दिया। अजय का कहना है कि इस संबंध में उन्होंने मुस्कान के घर वालों से भी बात की। अजय के ससुरालवालों ने भी बेटी का पक्ष लिया और धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया।
सोशल मीडिया पर झगड़े का एक वीडियो भी वायरल हो रहा है। दावा है कि अजय ने इसे रिकॉर्ड किया है। वीडियो में सुना जा सकता है कि स्थानीय भाषा में मुस्कान अपने ससुराल वालों को धमकी दे रही है। वीडियो बनाने वाला संभवतः मुस्कान का पति अजय बार-बार कह रहा है कि उसे मरना मंजूर है लेकिन वो अपना धर्म नहीं छोड़ेगा। इस पर उसकी पत्नी कहती है कि सबको मरना होगा।
This woman threatening her in-law family with murder is Muskan Bano, wife of Ajay Kumar
She married Ajay against her family’s wishes three months ago
Ajay recorded this video as proof that she and her community are pressuring him to convert to her religion, which he says he… pic.twitter.com/7zRmyeCYxc
अलीगढ़ पुलिस ने अजय की शिकायत पर पाँच लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। सीओ बरला सर्जना सिंह ने जानकारी दी है कि पीड़ित पति की शिकायत पर पत्नी मुस्कान उसके पिता यूनिस, मुस्कान के बहनोई सुहेल और साले के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। मामले की जाँच की जा रही है और सामने आए तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
रामनवमी के अवसर पर देश के कई शहरों में जुलूस पर पत्थरबाजी और हिंसा की खबरें सामने आईं। हिंसक घटनाओं में पश्चिम बंगाल में एक और महाराष्ट्र में एक शख्स की मौत हो गई। इसके अलावा गुजरात और उत्तर प्रदेश से भी रामनवमी की शोभा यात्रा पर पथराव की खबरें सामने आई हैं।
पश्चिम बंगाल में उत्तर दिनाजपुर के इस्लामपुर शहर के दालखोला इलाके में रामनवमी के जुलूस के दौरान दो समुदायों के बीच झड़प हो गई। मुस्लिम बहुल इलाके में हुई झड़प में एक शख्स की मौत हो गई जबकि 5-6 पुलिसकर्मी जख्मी हो गए। बंगाल पुलिस युवक के मौत की वजह हार्ट अटैक बता रही है।
_*??I sincerely request the Hon'ble Chief Secretary of West Bengal to act immediately, in order to control the deteriorating Law and Order condition of Shibpur; Howrah & Dalkhola; Uttar Dinajpur.*_ pic.twitter.com/0t2XNUCmCz
हावड़ा में असामाजिक तत्वों ने रामनवमी के जुलूस पर पत्थरबाजी की और हिंसा भड़कने पर फिर कई वाहनों में आग लगा दी। घटना हावड़ा के शिबपुर की है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में लोग छतों से जुलूस पर पथराव करते नजर आ रहे हैं।
महाराष्ट्र के संभाजीनगर (औरंगाबाद) और जलगाँव में रामनवमी के अवसर पर सांप्रदायिक हिंसा भड़क उठी। संभाजीनगर के किराड़पुर में एक मंदिर के आगे मामूली सी बात से शुरू हुए झगड़े ने हिंसा का रूप ले लिया। रिपोर्टों के मुताबिक गोली लगने से जख्मी एक शख्स की अस्पताल में मौत हो गई।
संभाजीनगर में हिंसा के दौरान न सिर्फ पत्थरबाजी की गई बल्कि बम भी फेंके गए। हालात को संभालने पहुँची पुलिस के वाहनों को भीड़ ने जला दिया और आस-पास खड़े वाहनों को भी नुकसान पहुँचाया। बताया जा रहा है कि घटना में 14 पुलिसकर्मी जख्मी हैं। असमाजिक तत्वों ने पुलिस को 13 गाड़ियों को फूँक दिया।
महाराष्ट्र के ही जलगाँव में मस्जिद के आगे से निकल रहे हिन्दुओं के जुलूस में डीजे की आवाज को लेकर हुए विवाद ने देखते-देखते हिंसक रूप ले लिया। मामले में 2 FIR दर्ज हुए हैं, जिसमें हिन्दू और मुस्लिम दोनों को आरोपित किया गया है। अब तक कुल 45 आरोपितों की गिरफ्तारी की खबर है। यह घटना मंगलवार (28 मार्च 2023) की है।
गुजरात के वडोदरा में भी 2 स्थानों पर कट्टरपंथी भीड़ ने रामनवमी के जुलूस को निशाना बनाया। रिपोर्ट्स के मुताबिक फतेहपुरा गराना पुलिस चौकी क्षेत्र का है। गुरुवार को हिन्दुओं द्वारा यहाँ से रामनवमी की शोभा यात्रा निकाली गई थी। जैसे ही यात्रा इलाके की एक मस्जिद के पास पहुँची, किसी बात को लेकर दो पक्षों में विवाद हो गया। देखते-देखते मस्जिद के पास से जुलूस में शामिल श्रद्धालुओं पर पत्थरबाजी शुरू हो गई। कुंभारवाडा इलाके में भी रामनवमी की शोभा यात्रा पर पथराव की घटना सामने आई।
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में भी मस्जिद के सामने शोभायात्रा पर पत्थरबाजी की घटना सामने आई। इस विवाद में शामिल एक गाड़ी में तोड़फोड़ की गई। पीड़ित पक्ष ने मुस्लिम महिलाओं द्वारा पत्थर फेंके जाने का आरोप लगाया है।
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में रामनवमी के अवसर गुरुवार (30 मार्च 2023) को शोभायात्रा के दौरान विवाद की खबर है। यह विवाद एक मस्जिद के सामने से जुलूस निकलने के दौरान हुआ। इस विवाद में शामिल एक गाड़ी में तोड़फोड़ की गई है। पीड़ित पक्ष ने मुस्लिम महिलाओं द्वारा पत्थर फेंके जाने का आरोप लगाया है।
यह घटनाक्रम लखनऊ के थानाक्षेत्र जानकीपुरम विस्तार का है। इस भगवा यात्रा के संयोजक और भाजपा नेता कुलदीप सिंह राठौर से ऑपइंडिया ने बात की। कुलदीप सिंह ने बताया कि इस यात्रा के लिए उन्होंने अधिकारियों से अनुमति ली थी, फिर भी यात्रा अराजकता का शिकार हुई। उन्होंने आगे बताया कि घटना के समय यात्रा ठीक से शुरू भी नहीं हुई थी और अधिकतम 50 लोग ही जमा होकर आगे की तैयारी कर रहे थे।
कुलदीप सिंह ने कहा कि शोभा यात्रा में शामिल किसी व्यक्ति ने ना तो किसी स बहस की और न ही कोई विवाद हुआ। बकौल कुलदीप सिंह, जैसे ही शोभायात्रा शाही मस्जिद के आगे से निकलने लगी, वैसे ही छतों से महिलाओं ने पत्थर मारने शुरू कर दिए और नीचे नाबालिग लड़कों ने हमला कर दिया। इस दौरान पुरुषों के वयस्क हमलावरों की संख्या लगभग 20 बताई जा रही है।
शोभायात्रा में शामिल लोग कुछ समझ पाते, आरोपितों ने यात्रा में शामिल एक वाहन को तोड़ डाला। इतना ही नहीं, इसमें शामिल लोगों को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा भी गया। कुलदीप सिंह के एक साथी के सिर पर भी चोट लगने की जानकारी सामने आई है। विवाद के बाद टूटे वाहन की फोटो कुलदीप सिंह ने अपने ट्विटर हैंडल पर शेयर भी की है।
— Kuldeep Singh RathOur?? (@KuldeepBjpUP) March 30, 2023
पुलिस का जोर सिर्फ हम पर ही
कुलदीप सिंह जिस वक्त ऑपइंडिया से बात कर रहे थे, उस वक्त वे थाने में होने की बात कही थी। उन्होंने आरोप लगाया कि भगवा यात्रा में शामिल लगभग 7 लोगों को पुलिस ने कस्टडी में ले लिया है। इनमें कई बच्चे नाबालिग भी हैं। हमें बताया गया कि पुलिस वाले तमाम मिन्नतों के बाद भी उन लोगों को छोड़ नहीं रहे हैं।
भाजपा नेता ने यह भी दावा किया कि उनकी तरफ के नाबालिगों सहित लगभग 7 लोगों को हिरासत में लिया गया है, जबकि हमलावरों की तरफ से केवल 2 लोगों को थाने में लाया गया है। पुलिस कार्रवाई से खुद को असंतुष्ट बताते हुए कुलदीप ने हमलावरों पर कार्रवाई और अपने साथियों की रिहाई की माँग की।
जानकीपुरम थाना के प्रभारी बृजेश त्रिपाठी ने कहा कि अभी किसी तरफ से तहरीर नहीं दी गई है। इसलिए आगे की कार्रवाई नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि रामनवमी जुलूस में शामिल लोगों को पूछताछ के बाद छोड़ दिया गया है।
पिछली बार भी हुआ था विवाद
ऑपइंडिया से बात करते हुए कुलदीप सिंह ने आगे बताया कि पिछली बार की रामनवमी में भी मुस्लिम पक्ष ने हिन्दू पक्ष से विवाद किया था। तब गोली चल गई थी, लेकिन पुलिस बार-बार सिर्फ अज्ञात में FIR दर्ज करती है। उन्होंने समाजवादी पार्टी के पार्षद चाँद पर स्थानीय असामाजिक तत्वों को बढ़ावा देने का आरोप लगाया।
पुलिस ने दी कार्रवाई जारी होने की जानकारी
लखनऊ पुलिस के उत्तरी जोन के DCP कासिम आब्दी ने इस विवाद की वजह DJ पर हो रहे गाने को बताया। DCP ने मस्जिद के आगे कहासुनी को स्वीकार करते हुए दोनों पक्षों को थाने लाने की जानकारी दी है। मौके पर शांति बताते हुए उन्होंने कहा कि आगे की कार्रवाई जारी है।
थाना जानकीपुरम क्षेत्र में 2 पक्षों में कुछ विवाद हो गया था। पुलिस मौके पर पहुंची। सुमित नामक व्यक्ति गांव के कुछ लोगों के साथ डीजे पर गाना बजा रहा था और उनका काफिला जब शाही मस्जिद से निकला तो वहां कुछ लोगों ने आपत्ति की। इनके बीच आपस में कहासुनी हुई। दोनों पक्षों को थाने लाया… pic.twitter.com/Yq4Oks4zqX
जब जुलूस में शामिल लोगों को पुलिस ने नहीं छोड़ा तब भाजपा नेता कुलदीप सिंह राठौर और भाजपा नेत्री किरन सिंह राठौर सहित कई थाने में ही धरने पर बैठ गए। किरन सिंह थाने से अपने फेसबुक से LIVE आईं। इस वीडियो में पुरुषों और महिलाओं को पुलिस कार्रवाई से नाराजगी जताते हुए प्रदर्शन करते देखा जा सकता है।
इस दौरान पुलिस प्रशासन मुर्दाबाद के नारे भी लगाए। थाना प्रभारी बृजेश त्रिपाठी लोगों को समझाने की कोशिश की। हालाँकि, लोग मानने को तैयार नहीं हुए। बाद में जुलूस में शामिल लोगों को छोड़ दिया गया। इसके बाद थाने में धरने पर बैठे लोग भी वापस चले गए।
एक अन्य LIVE विजुअल में हिन्दू संगठन के लोगों को पुलिस से बहस करते देखा जा सकता है। उस वीडियो में थाने में मौजूद एक भगवा वस्त्रधारी ने कहा, “हमेशा हिन्दू मारे जाते हैं।” सभी प्रदर्शनकारी हिरासत में लिए गए हिन्दुओं को छोड़ने और CCTV फुटेज के आधार पर आरोपितों की गिरफ्तारी की माँग कर रहे हैं।
महाराष्ट्र, गुजरात के बाद अब पश्चिम बंगाल के हावड़ा में भी रामनवमी के मौके पर हंगामे की खबर है। सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर करके दावा किया जा रहा है कि वहाँ असामाजिक तत्वों ने रामनवमी के जुलूस पर पत्थरबाजी की और हिंसा भड़कने पर फिर कई वाहनों में आग लगा दी गई। घटना हावड़ा के शिबपुर की है। मौके पर फिलहाल पुलिसकर्मी मौजूद हैं। पुलिस की भी एक गाड़ी में आग लगाने की बात सामने आई है।
कुछ मीडिया रिपोर्ट्स (इंडिया टुडे, अमर उजाला) रिपोर्ट्स बता रही हैंकि बंगाल मुख्यमंत्री ने इस घटना के बाद सारा ठीकरा हिंदुओं पर फोड़ा है। उन्होंने कहा, “मेरे आँख-कान खुले हैं। मुझे सब दिख रहा है। मैंने पहले ही चेतावनी दी थी कि मुस्लिम बहुल इलाकों से यात्रा ना निकाली जाए। मैंने पहले ही कहा था कि राम नवमी पर रैली निकाली गई तो हिंसा हो सकती है। वह बोलीं, “यह रमजान का वक्त है। इस वक्त में वे (मुस्लिम समुदाय) कुछ गलत काम नहीं कर सकते।”
उन्होंने कहा, “जो कोई भी हिंसा और हमले में शामिल है, हम उनकी एक नहीं सुनेंगे। मैं पुलिस से उन लोगों के विरुद्ध एक्शन लेने को कहूँगी जिन्होंने उन्हें इलाके में घुसने की अनुमति दी थी और जो हिंसा व साजिश में शामिल थे “
#WATCH | West Bengal: Ruckus during ‘Rama Navami’ procession in Howrah; vehicles torched. Police personnel on the spot. pic.twitter.com/RFQDkPxW89
बता दें कि रामनवमी का जुलूस इलाके में पहुँचने के बाद हिंसा भड़की। श्रद्धालुओं पर पत्थर फेंके गए। जब उन्होंने इसका जवाब दिया तब हालात और गंभीर हो गए।।
जानकारी के अनुसार, बंगाल में रामनवमी पर निकाले गए जुलूसों में भाजपा द्वारा निकाला गया एक जुलूस भी था। इसमें सुवेंदु अधिकारी थे। जिनके 1.5 किलोमीटर बढ़ते ही ये विवाद होने लगा। कुछ वीडियोज में दिख रहा है कि कैसे छतों से पत्थर फेंके गए और वाहन में आग लगाई गई
हावड़ा में हुई इस हिंसा के लिए भाजपा ने बंगाल की मुख्यमंत्री और गृहमंत्री ममता बनर्जी ने को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा, “10000 जुलूस निकल रहे हैं, ऐसे में ममता बनर्जी को पुलिस मैनेजमेंट देखना चाहिए था, लेकिन वो धरने पर बैठीं।”
“As Bengal’s CM-HM, Mamata Banerjee directly responsible for violence. When over 10,000 processions were taken out, she was on a Dharna. When she should’ve looked after Police mgmt, she was doing politics..,” says BJP’s Amit Malviya on Howarah ruckus during Ram Navami procession pic.twitter.com/54IUqvTgqp
बता दें कि ममता बनर्जी ने धरने पर बैठने के बाद रामनवमी के अवसर पर हिंदुओं को मुस्लिम इलाकों में न जाने की सलाह दी थी। उन्होंने कहा था कि ये रमजान का महीना है। ऐसे में मुस्लिम इलाकों में राम नवमी का जुलूस न निकालें। उन्होंने ये भी कहा था कि अगर ऐसा हुआ तो फिर आरोपितों को कोर्ट छोड़ेगा नहीं।
मुझे उम्मीद है कि आपको इस खुले पत्र को पढ़ने का समय मिल गया होगा, क्योंकि अब काफी समय बीत चुका है। मुझे उम्मीद है कि आप ब्राह्मणों के नरसंहार के आह्वान के अपने आनंद से उबर चुके होंगे। सामान्य रूप से हिंदुओं का न्यायपालिका में हमेशा अटूट विश्वास रहा है। यह न्यायपालिका की स्वतंत्रता का प्रमाण नहीं है, बल्कि यह ‘न्याय’ के विचार का परिणाम है, जिसमें हिंदू विश्वास करते हैं।
आमतौर पर हिंदू जब भी न्याय के बारे में सोचते हैं (अंग्रेजी का जस्टिस शब्द शायद ही न्याय की अवधारणा के लिए ‘न्याय’ करता है) तो वे श्रीकृष्ण और महान योद्धा अर्जुन की छवियों के साथ श्रीमदभगवद गीता की सोच से प्रेरित होते हैं। न्यायपालिका और न्यायाधीशों के लिए सम्मान अनिवार्य रूप से न्याय प्रदान करने और एक व्यवस्थित, सुसंस्कृत, न्यायपूर्ण, धार्मिक समाज में संतुलन बहाल करने की कल्पना से उपजा है।
हिंदुओं में न्यायपालिका के प्रति सम्मान उसकी धार्मिक शिक्षाओं से उपजा है, न कि न्यायालय के कार्यों से। दिल्ली दंगों को कवर करते हुए मैंने लंबे समय तक न्याय की अवधारणा पर विचार किया है। न्याय क्या है? ऐसा कहा जाता है कि न्याय प्रदान नहीं किया जा सकता है, लेकिन ऐसा प्रतीत होना चाहिए कि इसमें शामिल पक्षों को मिल गया। इसका अर्थ है कि सभी पक्षों को यह महसूस होना चाहिए कि जब न्याय हुआ तो उन्हें वो मिल गया, जिसके वो अधिकारी थे।
अलग-अलग नैतिक मानकों वाले एक जटिल समाज में न्याय एक भ्रम है। दिल्ली दंगों में मुस्लिम भीड़ द्वारा की गई हिंसा को इसके षड्यंत्रकारियों द्वारा उचित कार्रवाई के रूप में देखा गया क्योंकि उनका मानना था कि उनके पास हिंदुओं के खिलाफ सामूहिक कार्रवाई के लिए पर्याप्त कारण थे। दूसरी ओर, हिंदुओं ने उनकी हिंसा और उनके नरसंहार बयानबाजी को एक अन्याय और पाप के रूप में देखा।
इस तरह, मुस्लिम पक्ष कभी विश्वास नहीं करेगा कि उसे न्याय मिला है, जब तक कि अदालतें स्पष्ट रूप से झूठ बोलते हुए यह नहीं कहतीं कि इस्लामवादियों द्वारा महीनों तक किया गया दंगा वास्तव में मुस्लिमों के खिलाफ हिंदुओं द्वारा की गई हिंसा थी। इस हिंसा के पीड़ितों को न्याय कभी मिला ही नहीं। अपराधियों को सजा मिलने के बाद भी।
एक हिंदू दुकान मालिक, जिसकी दुकान जला दी गई थी, गवाही देने से इंकार कर देगा, क्योंकि उसे डर है कि अगर उसने ऐसा किया तो मुस्लिम भीड़ एवं उसके पड़ोसी उससे प्रतिशोध लेने आ जाएँगे। संतुलन बहाल करने में असमर्थ होने और उसके अधिकारों के लिए बोलने वाला कोई नहीं होने के कारण वह हमेशा अन्याय की आग में जलता रहेगा।
दिलबर नेगी की माँ को उनके बेटे के बिना हमेशा के लिए छोड़ दिया जाएगा। उनके हत्यारों को न्यायपालिका द्वारा अनुचित रियायतें दी जा रही हैं, क्योंकि मुस्लिम पक्ष का न्याय का विचार बहुत अलग है। भले ही दिलबर नेगी और अंकित शर्मा के हत्यारों को दंडित किया जाता है, लेकिन जिन लोगों ने 3 महीने से अधिक समय तक हिंसा भड़काकर हिंदुओं की जानें लीं, वे सजा से बचे रह जाएँगे।
कल आपने देश में हेट स्पीच को रेगुलेट करने के लिए दिशा-निर्देशों की माँग करने वाली याचिकाओं के एक समूह में दायर एक अवमानना याचिका सुनी। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बावजूद हिंदू संगठनों द्वारा कथित रूप से नफरत फैलाने वाले भाषणों को रोकने में विफल रहने के लिए महाराष्ट्र सरकार के खिलाफ दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए आपने न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना के साथ महत्वपूर्ण टिप्पणियाँ कीं।
न्याय की अवधारणा क्या है, इस पर मैं आपको उपदेश नहीं दे रही हूँ। न्याय की अवधारणा कहती है कि न्याय करने वाला निष्पक्ष होना चाहिए। वह सही और गलत के बीच की रेखा खींचने में सच्चा हो और उस रेखा को खींचने के बाद जो गलत है, उसको दंड देने का साहस भी रखता हो। जो लोग ‘न्याय’ देने वाले प्राधिकरण में बैठते हैं, उन्हें कम से कम ईमानदार एवं निष्पक्ष मूल्यांकन शुरू करना चाहिए।
जस्टिस जोसेफ, मैं विनम्रतापूर्वक आपसे पूछना चाहती हूँ कि क्या आपने अपने पूर्वाग्रहपूर्ण बयान को लेकर खुद से सवाल किया है। मैं यह कहने की हिम्मत कर सकती हूँ कि आपने कहा वह कम-से-कम इतना संकेत दे दिया कि आखिरकार आपका निर्णय क्या होगा। हिंदू समाज के वकील को जिस उपहास और अपमान का सामना करना पड़ा, वह न्यायपालिका के सामान्य नैतिक ताने-बाने और उन सिद्धांतों के खिलाफ है, जिनका समर्थन करने का न्यायाधीश दावा करते हैं।
A counsel: I appear for Hindu samaj
Justice Joseph: Oh very good. You are the one doing this in Maharashtra
जब वकील ने कहा कि उसकी दलील हिंदुओं के व्यापक हित में है तो वह तुरंत आपके गुस्से का शिकार हो गया। आपने कहा, “तो अब आप हमारे सामने हैं और आप रैलियाँ कर रहे हैं। क्या आपको कानून तोड़ने का अधिकार है? क्या आप देश के कानून को तोड़ सकते हैं?”
यहाँ आपने पूछा है कि अल्पसंख्यकों के अधिकारों का क्या होगा, जैसा कि हमारे पूर्वजों ने कल्पना की थी कि सहिष्णुता हमारी विरासत है और मुस्लिमों ने विभाजन के बाद रहने के लिए इस देश को चुना और उनकी गरिमा को बरकरार रखा जाना चाहिए। आपने यह भी कहा है कि वे हमारे भाई-बहन हैं और यदि कोई कानून तोड़ता है तो कानून उस पर टनों ईंटों की तरह गिरेगा।
मुझे विश्वास है कि अगर महात्मा गाँधी जीवित होते तो वे आपको जस्टिस जोसेफ अपना योग्य उत्तराधिकारी चुन लेते। न्यायमूर्ति नागरत्ना ने जो कहा उससे मैं असहमत नहीं हूँ। सभी को रैली करने का अधिकार है, लेकिन उस रैली में क्या होता है यह विवाद का विषय है और इसी न्यायपालिका ने उस सिद्धांत को क्यों खारिज किया, इस पर हम इस लेख में आगे चर्चा करेंगे।
जस्टिस जोसेफ सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि भारत एक प्राचीन सभ्यता है। शायद आज हम जो धार्मिक संघर्ष देखते हैं, वह इसलिए है क्योंकि हमने देवताओं द्वारा स्थापित और पोषित सभ्यता को “संस्थापक पूर्वजों” में नहीं बदला है। आपने यह भी कहा था कि सहिष्णुता किसी पर दबाव डालना है, बल्कि मतभेदों को स्वीकार करना है। यह बयानबाजी में अच्छा लगता है, लेकिन सहनशीलता की वास्तविक परिभाषा ‘दर्द या कठिनाई सहने की क्षमता’ है।
यहाँ मैं आपसे सहमत हूँ। जब से हम एक राष्ट्र बने हैं, हिंदुओं में अत्यधिक सहिष्णुता विकसित हुई है। हमने नोआखाली नरसंहार को सहन किया। हमने डायरेक्ट एक्शन डे को बर्दाश्त किया। हमने हिंदुओं के मालाबार नरसंहार को सहन किया। हमें कहा जा रहा था कि हमें अपने चेहरों पर मुस्कान के साथ मरना चाहिए। हमने अपने स्वयं के नरसंहार के लिए जिम्मेदार ठहराए जाने को सहन किया। हम आज तक सहते हैं।
कल ही हमने रिपोर्ट किया था कि हिंदुओं को रामनवमी जुलूस निकालने के उनके अधिकार से वंचित कर दिया गया, क्योंकि एक साल पहले जहाँगीरपुरी में पीड़ित अल्पसंख्यक हनुमान जयंती के दौरान हिंदुओं के खिलाफ उग्र हो गए थे। हमने अपने अधिकारों को छीने जाने को सहन किया, ताकि वे नाराज न हों, मी लॉर्ड। हाँ, हम सहिष्णु हैं। हमारे पास एक विरासत है, अन्याय सहन करने की विरासत। आप हमसे उस दागदार विरासत का सम्मान करने के लिए कहते हैं, जो मुझे एक हिंदू के रूप में आहत करता है।
आप कहते हैं कि मुस्लिमों ने भारत में रहने का विकल्प चुना और वे हमारे भाई-बहन हैं। हम उनकी गरिमा और स्वाभिमान को ठेस नहीं पहुँचा सकते। श्रीमान जी, मैं आपसे सहमत हूँ। अगर मैं इतना गुस्ताख़ हो सकता हूँ तो मैं यह बताना चाहूँगी कि आप सहिष्णुता के बारे में नहीं, बल्कि बहुलवाद के बारे में बात कर रहे हैं। यह एक ऐसी अवधारणा है, जिसके लिए हमें यह स्वीकार करना होगा कि हर आस्था में सच्चाई होती है और इसलिए, हर आस्था का सम्मान किया जाना चाहिए। हिंदुओं ने अपना काम किया, लेकिन क्या उन लोगों ने किया जिन लोगों की आपने रक्षा की?
“इस्लाम का भाईचारा मनुष्य का सार्वभौमिक भाईचारा नहीं है। यह मुसलमानों का भाईचारा मुसलमानों के लिए ही है। एक भाईचारा है, लेकिन इसका लाभ उस दीन के भीतर तक ही सीमित है।” ये मेरे शब्द नहीं, श्रीमान। आपने जिन हमारे ‘संस्थापक पूर्वजों’ का उल्लेख किया, ये उनमें से एक डॉ बीआर अंबेडकर के शब्द हैं।
उन्होंने आगे कहा है, “यथार्थवादियों को इस तथ्य पर ध्यान देना चाहिए कि मुसलमान हिंदुओं को काफिरों के रूप में देखते हैं, जो खत्म करने के योग्य हैं। यथार्थवादी को इस तथ्य पर ध्यान देना चाहिए कि जहाँ मुसलमान यूरोपीय को अपने से ऊपर मानता है, वहीं वह हिंदुओं को अपने से नीचे देखता है।”
उन्होंने एक बात और लिखी है, “कट्टरपंथी मुस्लिमों द्वारा मारे गए प्रमुख हिंदुओं की संख्या बड़ी हो या छोटी, यह बहुत कम मायने रखती है। मायने यह रखता है कि गिनती करने वालों का इन हत्यारों के प्रति क्या रवैया है। जहाँ कानून है, वहाँ हत्यारों ने दंड भोगा। हालाँकि, प्रमुख मुस्लिमों ने कभी भी इन अपराधियों की निंदा नहीं की। इसके विपरीत, उन्हें धार्मिक शहीदों के रूप में सम्मानित किया गया और क्षमादान के लिए आंदोलन चलाया गया।”
जहाँ तक इस बात का सवाल है कि मुस्लिम यहाँ इसलिए रह गए क्योंकि वे हमारे भाई हैं, मुझे यकीन है कि आप जानते हैं कि यह पूरी तरह सच नहीं है। साक्ष्य इसके विपरीत मौजूद है। मैं आपको केवल इस लेख की ओर इंगित करूँगी और इसे उस पर छोड़ दूँगा।
जब SG तुषार मेहता ने कहा कि अभद्र भाषा पर एक मामले की सुनवाई करते समय हिंदू समुदाय के खिलाफ किए गए अभद्र भाषणों पर भी विचार करना चाहिए तो आप मुस्कुराए। आपके बयान से यह आभास हुआ कि आप और आपके साथी न्यायाधीश उन कॉलों को सही ठहरा रहे थे। मैं समझती हूँ कि SG मेहता ने इसे क्यों उठाया – आप एक समुदाय को दूसरे समुदाय से अलग-थलग करने के लिए दोषी ठहरा रहे थे। जब अभद्र भाषा का मूल्यांकन धर्म के आधार पर किया जाता है तो दोनों पक्षों को अवश्य सुना जाना चाहिए। हालाँकि, आपने हिंदुओं को उस अवसर से वंचित कर दिया।
जब न्यायमूर्ति नागरत्ना ने एसजी से पूछा कि डीएमके नेता ने ‘क्यों’ कहा कि ‘यदि आप समानता चाहते हैं तो सभी ब्राह्मणों को कत्ल कर देना चाहिए’ तो दरअसल उन्होंने यह पूछा कि ब्राह्मणों ऐसा क्या किया है कि डीएमके नेता को उनके नरसंहार के लिए कहने को मजबूर होना पड़ा। जब आपने मुस्कुराकर एसजी से पूछा कि क्या वह जानते हैं कि पेरियार कौन हैं तो आपने बताया कि पेरियार ब्राह्मणों का नरसंहार चाहते थे। इसलिए डीएमके नेता का ऐसा कहना न्यायोचित है।
इसी तर्क के आधार सर, क्या आप भारत के बँटवारे की माँग को जायज कहेंगे, क्योंकि जिन्ना भी यही चाहते थे? क्या आप अलगाववादियों के आह्वान को उचित मानेंगे? अगर कोई मुस्लिम यह कहते हुए हिंदुओं के नरसंहार का आह्वान करता है कि जिस दिन बद्र की लड़ाई लड़ी गई और उसमें अल्लाह ने जीत हासिल की तो क्या आप मुस्कुराएँगे? यदि एक इस्लामवादी कहता है कि उसे गैर-मुस्लिमों को मारने का अधिकार है तो क्या आप कुरान को यह कहने के लिए उद्धृत करेंगे कि नरसंहार करने की बात उसकी उचित है?
आप यहीं नहीं रुके, सर। आपने आगे बढ़कर एक अभियुक्त आतंकी संगठन द्वारा हिंदुओं की हत्या को उकसाने वाले बयानों का संदर्भ दिया और इसके लिए हिंदुओं को दोषी ठहराया। जब एसजी मेहता ने जोर देकर कहा कि आप हिंदुओं के नरसंहार का आह्वान करते हुए पीएफआई की रैली में दिए गए भाषण की वीडियो क्लिप देखें तो आपने मना कर दिया। आपके फायदे के लिए मैं यहाँ उस रैली के वीडियो के कंटेंट दे रही हूँ, जिसे देखने के लिए एसजी मेहता आपसे कह रहे थे।
पीएफआई के सदस्य मलयालम में चिल्लाकर कह रहा था, “यदि तुम हमारी जमीन पर चुपचाप नहीं रहोगे तो अपने मृत्यु संस्कार के लिए तैयार रहो। यदि तुम चुपचाप नहीं रहोगे (हिंदुओं के लिए) तो अपने मुँह में चावल के गुच्छे डालकर तैयार हो जाओ। यदि तुम चुपचाप नहीं रहेंगे (ईसाइयों के लिए) तो अपने घर में अगरबत्ती जलाने के लिए तैयार रहो, क्योंकि हम आ रहे हैं। हम तुम्हारी मौत हैं। हम पाकिस्तान या बांग्लादेश नहीं जाएँगे। जैसा हम कहते हैं उसके अनुसार तुम्हें यहाँ रहना होगा, वरना हम जानते हैं कि तुम्हें चुप कैसे कराना है। हम पर हमला किया जाए तो भी हम तुम्हें मार देंगे। हमें शहीद होने पर गर्व है। अगर तुम चुप नहीं रहे तो हम ‘आजादी’ माँगना जानते हैं। अपनी मौत के लिए तैयार रहो।”
इसके अलावा, भीड़ ने अयोध्या में बाबरी मस्जिद के विवादित भवन में फिर से ‘सुजूद’ (एक प्रकार की प्रार्थना) आयोजित करने की कसम खाई। भीड़ ने वाराणसी में एक मंदिर के खंडहर पर बनी ‘ज्ञानवापी मस्जिद’ नामक विवादित ढाँचे में ‘सुजूद’ जारी रखने का फैसला किया है। भीड़ ने कहा कि वे पाकिस्तान या बांग्लादेश नहीं जा रहे हैं और अगर वे ऐसा करते हैं तो वे संघ परिवार को साथ ले जाएँगे।
वीडियो में एक लड़के को नारा लगाते हुए सुना जा सकता है, “हिंदुओं को अपने अंतिम संस्कार के लिए चावल रखना चाहिए, और ईसाई अपने अंतिम संस्कार के लिए अगरबत्ती रखना चाहिए। अगर तुम शांति से रहते हैं तो हमारी जमीन में रह सकते हो और यदि ठीक से नहीं रहते तो हम आज़ादी (स्वतंत्रता) को जानते हैं।” शालीनता से, शालीनता से, शालीनता से जिएं। रैली में शामिल लोग नारा दोहरा रहे थे।
जस्टिस जोसेफ, इस भाषण के लिए आपने कहा कि अभद्र भाषा एक दुष्चक्र है और हर क्रिया की एक समान और विपरीत प्रतिक्रिया होती है। आपने यहाँ जो संकेत दिया था, वह यह था कि हिंदुओं और ईसाइयों के नरसंहार का आह्वान एक प्रतिक्रिया थी। इसलिए यह उचित था। मैं आपको याद दिला दूँ कि पीएफआई एक प्रतिबंधित आतंकी संगठन है।
आपने अपनी टिप्पणी के साथ एक प्रतिबंधित इस्लामी आतंकी संगठन द्वारा नरसंहार संबंधी टिप्पणियों के लिए हिंदुओं को दोष देकर खत्म कर दिया। आप तब भी अपनी आग लगाने वाली टिप्पणी को दोहराते रहे, जब अधिवक्ता विष्णु जैन ने कथित ‘ईशनिंदा’ के आरोप में हिंदुओं के ‘सर तन से जुदा’ किए जाने की माँग का उल्लेख किया।
Justice Joseph: action has an equal reaction..
SG: please please please do not do this and this will be a justification of the clip. No no.
Justice Joseph: state is behaving impotent and does not take action in time
SG: Why do you not see the Kerala clip? Mr Jain’s plea has…
याचिकाकर्ता को अपनी याचिका में इन नफरत भरे भाषणों को भी शामिल करने के आग्रह पर आपने सबमिशन को एक ‘नाटक’ कहा और राज्य को नपुंसक कहकर सरसरी तौर पर आगे बढ़ गए।
Justice Joseph: Mr Jain come on April 28, 2023. Let us not make this into a drama. This is a legal proceeding.
SG Mehta: drama is now over. Please issue to Kerala also
महोदय, एक ऐसे नागरिक और हिंदू के रूप में आपसे कुछ प्रश्न हैं, जिसने पिछले दशक के नफरत फैलाने वाले भाषणों और हिंदुओं के खिलाफ अपराधों का दस्तावेजीकरण किया है। मैं उम्मीद करती हूँ कि असहमति को लोकतंत्र का सेफ्टी वॉल्व मानने वाली संस्था प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से मेरे सवालों का जवाब देगी।
1. इससे पहले सुनवाई के दौरान आपने कहा था, “अगर आप कानून तोड़ेंगे तो कानून आप पर ईंटों के ढेर की तरह गिरेगा। यदि आप एक महाशक्ति बनना चाहते हैं तो कानून का शासन होना चाहिए”। मैं आपसे सहमत हूँ। मैंने लंबे समय से राज्य द्वारा अपनी रिट को बलपूर्वक लागू करने की वकालत की है। जब एसजी तुषार मेहता, विष्णु शंकर जैन और पीवी योगेश्वरन जैसे वकीलों ने हिंदू समुदाय को व्यक्तिगत रूप से या लोगों के समूह के रूप में उनके धर्म के आधार पर मौत, हत्या और नरसंहार की माँग की ओर इशारा किया तो आपने इस सिद्धांत को क्यों छोड़ दिया?
2. जब न्याय देने वाला कोई व्यक्ति ब्राह्मण नरसंहार के आह्वान के मात्र उल्लेख पर मुस्कुराता है और फिर एक राजनेता ने दशकों पहले जो कहा था, उसके आधार पर ऐसी माँगों का औचित्य पेश करने के लिए आगे बढ़ता है, तो क्या आप वास्तव में विश्वास करते हैं कि आपके पास न्याय करने की नैतिकता है?
3. यदि आप वास्तव में मानते हैं कि प्रत्येक क्रिया की एक समान और विपरीत प्रतिक्रिया होती है तो एक शिक्षित, न्याय के विधाता के रूप में क्या आप कहेंगे कि एक असहिष्णु समुदाय के रूप में हिंदू द्वारा अपने अधिकारों को रौंदे जाने के खिलाफ रैलियाँ निकालकर सरकार से उचित कार्रवाई की माँग भी प्रतिक्रिया है? मैं बताती हूँ।
2022 के “लव जिहाद” के 153 मामलों का हमने विश्लेषण करने का प्रयास किया, जिन्हें ऑपइंडिया ने रिपोर्ट किया था। उनमें से हर एक का एक धार्मिक कोण था, जहाँ हिंदू महिला को उसके धर्म के आधार पर सताया गया था। कुछ मुस्लिम पुरुषों ने हिंदू होने का नाटक किया। हिंदू महिलाओं को जबरन गोमांस खिलाया गया। इस्लाम में परिवर्तित किया गया या ऐसा करने के लिए दबाव डाला गया। जबरन हलाला के मामले के सामने आए।
153 मामलों में हमने देखा कि इनमें से 22 मामलों में मुस्लिम पुरुष ने या तो हिंदू महिला को जबरदस्ती गोमांस खिलाया, उसे हिजाब पहनने के लिए मजबूर किया या अपने धर्म का पालन करने से रोकते हुए मूर्तियों को तोड़ा और इस्लाम में परिवर्तित होने से रोका। ऐसे 21 मामलों में मुस्लिम व्यक्ति ने निजी वीडियो सार्वजनिक करने की धमकी दी थी और 3 मामलों में हिंदू महिला को सिर कलम करने की धमकी दी थी। 153 मामलों में से 125 मामले वयस्क पीड़ितों के साथ थे, जबकि 28 मामले नाबालिग पीड़ितों के थे।
ये केवल ऐसे मामले हैं, जिन्हें ऑपइंडिया कवर करने में कामयाब रहा। और भी बहुत ऐसे मामले होंगे, जिन्हें कवर करने से हम चूक गए होंगे या जिनके बारे में हमें पता नहीं था। यह सिर्फ एक साल का है। इन परिस्थितियों में क्या यह कहना उचित नहीं होगा कि महाराष्ट्र राज्य में धर्मांतरण विरोधी कानून की माँग को लेकर हिंदुओं की रैली एक उचित प्रतिक्रिया है? मैं निश्चित रूप से यह नहीं कहूँगी कि यह ‘समान और विपरीत प्रतिक्रिया’ है।
इसे और आगे बढ़ाते हैं। मुझे यकीन है कि आपने वह वीडियो देखा होगा, जिसमें दो इस्लामवादियों ने कन्हैया लाल का सिर काट दिया था। वह शख्स, जिसने हिंदुओं की आस्था का अपमान किया और नूपुर शर्मा को टेलीविजन पर बयान देने के लिए उकसाया, आज आजाद घूम रहा है। नूपुर शर्मा की जिंदगी हमेशा के लिए बर्बाद हो गई है। अदालत ने उस समय इस्लामवादियों द्वारा कई लोगों की हत्या के लिए नूपुर शर्मा की ‘ढीली जीभ’ को दोषी ठहराया था।
इस मामले में राज्य और न्यायपालिका से उम्मीद खोने के बाद अगर हिंदू कहते हैं कि वे अपने भाइयों की हत्या करने वाले समुदाय का आर्थिक रूप से बहिष्कार करेंगे तो क्या आप इसे ‘प्रतिक्रिया’ नहीं मानेंगे? DMK नेताओं और PFI आतंकवादियों द्वारा नरसंहार के आह्वान को आपके द्वारा ‘प्रतिक्रिया’ क्यों माना गया, लेकिन हिंदू समुदाय के विरोध को नहीं?
4. जब अदालत में हिंदुओं के खिलाफ अभद्र भाषा का मामला उठाया गया था तो आपने कहा था कि समय पर ऐसे अभद्र भाषा से निपटने में राज्य नपुंसक है। श्रीमान जी, मैं आपसे सहमत हूँ। जब असहिष्णु अल्पसंख्यक से निपटने की बात आती है तो राज्य नपुंसक होता है। मैंने उस प्रभाव के लिए विस्तार से लिखा है, लेकिन मेरे दो सवाल हैं।
सबसे पहले, जब राज्य नपुंसक हो जाता है तो नागरिक इस उम्मीद के साथ न्यायपालिका की ओर रुख करते हैं कि उनके अधिकारों की रक्षा होगी। अपने अधिकारों की माँग कर रहे हिंदुओं का प्रतिनिधित्व करने वाले हिंदू वकीलों की दलीलों को खारिज करते हुए एक मुस्लिम याचिकाकर्ता की दलीलों को सुनकर आप ज्यादा खुश क्यों थे?
दूसरे, यह कहकर कि राज्य नपुंसक है और उन्हें हिंदुओं के खिलाफ अभद्र भाषा के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए थी, आपने अनिवार्य रूप से यह संकेत दिया कि अदालत को उन पहलुओं में शामिल होने का कोई अधिकार नहीं है और इस तरह के नरसंहार को कम करना राज्य का काम है। यदि यह सच है तो मुस्लिम व्यक्ति की याचिका में भी आप उसी निष्कर्ष पर क्यों नहीं पहुँचे?
5. जस्टिस जोसेफ, आप मानते हैं कि राज्य की आलोचना करना आपका अधिकार है, जहाँ वह गलत है। इसलिए राज्य को नपुंसक कहना आपने उचित समझा। इस आकलन से मैं सहमत हूँ। हालाँकि, यदि अनिर्वाचित निर्वाचित को उनकी नैतिकता के आधार पर नपुंसक कह सकते हैं तो अदालत सामान्य नागरिकों के सवाल से ऊपर क्यों है? जब आपकी (न्यायालय की) राय पर सवाल उठाया जाता है तो अदालत ‘अवमानना’ के आरोपों में नागरिकों को फँसाना क्यों उचित समझती है?
सुप्रीम कोर्ट ने अतीत में भारत के चुनाव आयोग बनाम एमआर विजयभास्कर, (2021) 9 एससीसी 770 केस में मद्रास उच्च न्यायालय के एक न्यायाधीश द्वारा की गई कुछ मौखिक टिप्पणियों के खिलाफ चुनाव आयोग द्वारा दायर एक याचिका में ‘ऑफ द कफ’ टिप्पणी का न्यायिक संज्ञान लिया था। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि मौखिक टिप्पणी आधिकारिक रिकॉर्ड का हिस्सा नहीं है और कोई औपचारिक राय व्यक्त नहीं करती है और इसलिए, इसे हटाया नहीं जा सकता है। न्यायालय ने इस बात पर प्रकाश डाला है कि इस तरह के अधिकांश मौखिक टिप्पणी जानकारी से संबंधित होते हैं।
हालाँकि, अदालत ने सुनवाई के दौरान वादियों के खिलाफ तीखी टिप्पणी की न्यायाधीशों में बढ़ती प्रवृत्ति के बारे में कुछ आशंकाएँ दूर कीं। सर्वोच्च न्यायालय ने इस बात पर प्रकाश डाला कि ‘हमें खुली अदालत में आकस्मिक टिप्पणियों में सावधानी बरतने के लिए न्यायाधीशों की आवश्यकता पर जोर देना चाहिए, जो गलत बयानी के लिए अतिसंवेदनशील हो सकते हैं’। चुनाव आयोग का मामला यह था कि कोविड-19 महामारी के संदर्भ में मद्रास उच्च न्यायालय के न्यायाधीश द्वारा ‘हत्या के आरोप’ की मौखिक टिप्पणी गलत थी। सर्वोच्च न्यायालय ने इस संदर्भ में कहा कि उच्च न्यायालय की टिप्पणी कहा था।
यदि जस्टिस और न्याय के हित में नहीं तो कम-से-कम सुसंगत होने के हित में क्या आप अपनी मौखिक टिप्पणियों को लेकर अधिक सावधान रहेंगे? व्यक्तिगत रूप से मुझे एक संस्था के रूप में न्यायपालिका पर बहुत विश्वास है। हालाँकि, हिंदू समुदाय के एक सदस्य के रूप में मुझे विश्वास है कि जब अदालत के समक्ष सामूहिक अधिकारों का सवाल आएगा तो ‘न्याय’ उत्पीड़ित बहुसंख्यक समाज से हमेशा के लिए दूर हो जाएगा।
CAA विरोधी हिंसक प्रदर्शनों के दौरान चर्चा में आईं उजमा परवीन ने सोमवार (27 मार्च 2023) को एक झूठा ट्वीट करके कई लोगों को गुमराह किया। उन्होंने सोशल मीडिया पर नमाज़ पढ़ते अपना वीडियो शेयर किया और कहा कि ये नमाज लखनऊ विधानसभा के आगे बैठकर पढ़ी गई है। इस बात पर उन्हें कई लोगों ने शाबाशी दी। हालाँकि अब पुलिस ने उजमा की पोल खोलते हुए कहा है कि नमाज़ को विधानसभा के बजाय एक मजार के आगे पढ़ा गया। इस झूठ को फैलाने के आरोप में पुलिस ने उजमा पर FIR भी दर्ज कर ली है। वहीं पोल खुलने के बाद सोशल मीडिया के कई मुस्लिम यूजर्स भी उजमा को ट्रोल कर रहे हैं।
यह मामला लखनऊ के थानाक्षेत्र हुसैनगंज का है। मामले में शिकायतकर्ता थाने के ही पुलिस सब इंस्पेक्टर सागर खुराना हैं। 29 मार्च 2023 (बुधवार) को उनके द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत में उजमा के ट्विटर हैंडल पर शेयर फोटो और लिखे गए शब्दों का हवाला दिया गया है। इसमें लिखा गया था, “अलहम्दुलिल्लाह लखनऊ विधानसभा के सामने असर की नमाज़ अदा की। जो यह कहते हैं हमारी नमाज़ पर पाबंदी लगा देंगे तो हम भी अपने हिंदुस्तान की हर सरज़मीन पर नमाज पढ़कर दिखा देंगे। हमारा देश आजाद है इसीलिए मुझे आज़ादी से नमाज पढ़ने का अधिकार है।”
अलहमदुलिल्ला लखनऊ विधानसभा के सामने असर की नमाज़ अदा की जो यह कहते हैं हमारी नमाज़ पर पाबंदी लगा देंगे तो हम भी अपने हिंदुस्तान की हर सरज़मीन पर नमाज़ पढ़कर दिखा देंगे हमारा देश आज़ाद है इसीलिए मुझे आज़ादी से नमाज पढ़ने का अधिकार है pic.twitter.com/2ePQ9TxVCs
पुलिस के मुताबिक उजमा द्वारा विधानसभा के आगे नमाज पढ़ने का दावा झूठा है। यह नमाज़ विधानसभा से कुछ दूर सड़क के किनारे बनी एक मजार के आगे पढ़ी गई थी। पुलिस ने इस हरकत को समाज में अशाँति फैलाने वाला बताते हुए उजमा पर IPC की धारा 153, 200, 283 और 290 के साथ IT एक्ट की धारा 66 के तहत केस दर्ज कर लिया है।
पुलिस FIR में खुली पोल
पोल खुलने के बाद भी जारी रहे ट्वीट
पोल खुलने के बाद भी उजमा ने अपनी बयानबाजी जारी रखी। उन्होंने ताबड़तोड़ ट्वीट कर के अपनी करतूत को चर्चा में रखने की पूरी कोशिश की। कई मीडिया रिपोर्ट्स में भी उजमा के झूठ को सच मान लिया गया। उजमा ने खुद उन मीडिया रिपोर्ट्स के स्क्रीनशॉट शेयर किए हैं।
उजमा परवीन के ट्वीट्स
झूठ पर मिली खूब शाबासी
उजमा के फैलाए झूठ को सच मान कर उन्हें सोशल मीडिया पर ढेर सारी बधाइयाँ मिलने लगीं। किसी ने उनके सम्मान में शायरी पढ़ी तो किसी ने भारी यादव ने उन्हें LOVE YOU तक बोल दिया। साहिल ने भी बेशक लिख कर दिल का निशान ट्वीट किया।
उजमा को झूठ पर मिली शाबासी, चित्र साभार- @UzmaParveenLKO
मुस्लिम यूजर्स ने ही बताया पब्लिसिटी स्टंट
हालाँकि उजमा की पोल खुल जाने के बाद मुस्लिम समाज के ही कई यूजर्स उनके खिलाफ खड़े हो गए। तमाम लोगों ने उजमा द्वारा शेयर वीडियो को पब्लिसिटी स्टंट बताया है। तमाम नेटीजेंस उजमा परवीन को ट्रोल कर रहे हैं।
उजमा को मिले जवाब, चित्र साभार- @UzmaParveenLKO
उजमा खुद को समाजिक और मानवाधिकारी कार्यकर्ता बताती हैं। फिलहाल लखनऊ पुलिस पूरे मामले की जाँच कर रही है।
मध्य प्रदेश के इंदौर में रामनवमी (30 मार्च 2023) के मौके पर एक मंदिर में बड़ा हादसा हो गया। इस हादसे में अब तक 12 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई घायल हो गए हैं। वहीं, आंध्र प्रदेश के पश्चिमी गोदावरी जिले में रामनवमी पर बड़ा हादसा होने से बच गया। यहाँ के वेणुगोपाल मंदिर परिसर में रामनवमी के लिए बनाए गए पंडाल में शार्ट सर्किट के बाद भीषण आग लग गई, लेकिन मौके पर श्रद्धालुओं को मंदिर से बाहर निकाल लिया गया। इसके बाद से मंदिर के आस-पास के इलाके में लोगों की आवाजाही रोक दी गई है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, पटेल नगर में श्री बेलेश्वर महादेव झूलेलाल मंदिर में रामनवमी के मौके पर भारी संख्या में लोग दर्शन के लिए आए थे। उसी दौरान मंदिर की छत ढहने से लगभग 25 से अधिक लोग बावड़ी (एक बड़े से कुएँ) में गिर गए। फिलहाल, कई लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। राहत एवं बचाव कार्य जारी है। कहा जा रहा है कि मरने वालों की संख्या बढ़ सकती है।
#UPDATE | Madhya Pradesh: Four people dead while 19 people have been rescued so far after a stepwell collapsed at Indore temple: Indore Police officials https://t.co/ZepjNnYL5J
बताया जा रहा है कि घटनास्थल की स्थिति काफी खराब है। हादसे का शिकार हुए लोगों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। बावड़ी में से महिला और बच्ची समेत 19 लोगों को बाहर निकाला जा चुका है। अन्य लोगों के लिए ऑक्सीजन सप्लाई की गई है। हादसे के बाद से लोगों में काफी आक्रोश है।
निगम अफसरों के मुताबिक, बावड़ी 40 फीट गहरी है, उस पर लोहे की जाली लगी हुई थी। लोहे की जाली पर ही स्लैब डालकर इसका निर्माण किया गया था। हवन के दौरान बावड़ी की छत पर ज्यादा लोगों के होने से जाली टूट गई और हादसा हो गया। इंदौर के जिला कलेक्टर इलैयाराजा टी ने कहा, “अगले 30 मिनट में अन्य लोगों को भी बचाया जाएगा। हमारा ध्यान सबसे पहले बचाव कार्यों पर है।”
VIDEO | “Our focus is on the rescue operations first. Fifteen people have been rescued, and other people will be rescued in the next 30 minutes,” says Ilayaraja T, District Collector, Indore pic.twitter.com/HkeSKdQb2i
Extremely pained by the mishap in Indore. Spoke to CM @ChouhanShivraj Ji and took an update on the situation. The State Government is spearheading rescue and relief work at a quick pace. My prayers with all those affected and their families.
बता दें कि बावड़ी हादसे को लेकर पीएम मोदी ने भी दुख जताया है। उन्होंने ट्वीट किया, “इंदौर में हुए हादसे से बेहद आहत हूँ। सीएम शिवराज सिंह चौहान शिवराज से बात की और स्थिति की जानकारी ली। राज्य सरकार बचाव और राहत कार्य में तेजी से आगे बढ़ रही है। मेरी प्रार्थना उन सभी प्रभावितों और उनके परिवार वालों के साथ है।”
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने बुधवार (29 मार्च) को न्यूज18 राइजिंग इंडिया समिट 2023 के मंच पर दावा किया कि कॉन्ग्रेस नीत यूपीए सरकार के कार्यकाल में केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) ने उन पर पीएम मोदी (उस समय गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री) को फँसाने के लिए दबाव डाला था। गृहमंत्री ने पीएम मोदी द्वारा केंद्रीय एजेंसियों के कथित दुरुपयोग के खिलाफ विपक्ष के बढ़ते विरोध को लेकर पुरानी घटना को साझा किया।
उन्होंने कहा, “उस वक्त एक फर्जी एनकाउंटर हुआ था। तब मैं राज्य का गृहमंत्री था। मुझ पर केस कर दिया। सीबीआई ने मुझे अरेस्ट कर लिया। सीबीआई के रिकॉर्ड में आज भी वह टेप पड़ा होगा। उस वक्त सीबीआई के अफसरों ने उसे प्रमाणिकता से रिकॉर्ड किया था। वह होगा, अगर कॉन्ग्रेस ने उसे मिटाया नहीं होगा तो। 90 फीसदी सवालों में यही पूछा गया कि काहे को परेशान हो रहे हो। मोदी का नाम दे दो, आपको छोड़ देंगे।”
शाह ने कहा, “इसको लेकर हमने तो काले कपड़े नहीं पहने। कोई विरोध नहीं किया। गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी जी के खिलाफ एक एसआईटी बनाई। कोई भ्रष्टाचार का मामला नहीं था। दंगों में फर्जी टाइप का इन्वाल्वमेंट किया, जो अंत में सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया। हमने तो उस समय कभी कोई हाय तौबा नहीं की थी। कभी भी काले कपड़े पहनकर संसद को जाम नहीं किया था।”
उन्होंने आगे कहा, “मैं बताता हूँ आपको इसका क्या नतीजा आया था। उन्होंने मुझे अरेस्ट किया, लेकिन हाईकोर्ट ने मुझे 3 दिन में ही बेल दे दी। हाईकोर्ट ने कहा कि अरेस्ट करने के लिए पर्याप्त प्रूफ ही नहीं हैं। हम इस केस को गुजरात से बाहर ले गए।”
शाह के मुताबिक, “मुंबई की अदालत ने कहा कि राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से सीबीआई ने राजनीतिक इशारों पर यह केस किया है। इसलिए हम अमित शाह के खिलाफ लगाए गए सभी आरोपों को खारिज करते हैं। उस वक्त हमने तो हाय तौबा नहीं मचाई। तब यही लोग थे। यही चिदम्बरम बैठे थे। यही सोनिया गाँधी यूपीए का नेतृत्व करती थीं। यही मनमोहन सिंह थे और यही राहुल गाँधी सांसद थे। अब क्या हो गया? हमने ने इन पर बदजुबानी का केस किया है, कोई फर्जी केस नहीं किया।”
बता दें कि बीते दिनों ‘मोदी’ सरनेम पर विवादित टिप्पणी किए जाने के बाद सूरत की अदालत ने राहुल गाँधी को 2 वर्ष की सज़ा सुनाई। इसके बाद लोकसभा सचिवालय ने उनकी संसद सदस्यता का नोटिफिकेशन जारी कर दिया। इसको लेकर कॉन्ग्रेस के सभी सांसद विरोध जताने के लिए काले कपड़ों में संसद भवन पहुँचे थे। सांसदी जाते ही राहुल को दिल्ली के तुगलक लेन स्थित सरकारी बँगले को खाली करने का नोटिस दिया गया।
गुजरात के वडोदरा जिले में रामनवमी की शोभा यात्रा पर पत्थरबाजी की खबर है। इस घटना के बाद इलाके में तनाव फ़ैल गया है। पत्थरबाजी एक मस्जिद के पास की गई। हालात काबू करने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। आरोपितों की धर-पकड़ के लिए CCTV फुटेज खँगाले जा रहे हैं। थोड़ी देर के लिए बाधित हुई यात्रा फिलहाल आगे बढ़ चुकी है। घटना गुरुवार (30 मार्च 2023) की है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक फतेहपुरा गराना पुलिस चौकी क्षेत्र का है। गुरुवार को हिन्दुओं द्वारा यहाँ से रामनवमी की शोभा यात्रा निकाली गई थी। इस दौरान जैसे ही शोभा यात्रा इस क्षेत्र की एक मस्जिद के सामने से हो कर गुजरी वहाँ किसी बात को ले कर दो पक्षों में विवाद हो गया। थोड़ी ही देर की बहस के बाद मस्जिद के पास से जुलूस में शामिल श्रद्धालुओं पर पत्थरबाजी शुरू हो गई। इस विवाद से घटनास्थल पर तनाव फ़ैल गया। फिलहाल दोनों पक्ष ने एक दूसरे पर हमले के आरोप लगाए हैं।
मामले की जानकारी होते ही वडोदरा के तमाम बड़े अधिकारी मौके पर पहुँच गए। भारी संख्या में पहुँचे पुलिस बल ने हालात को काबू किया। नाराज श्रद्धालुओं को समझा-बुझा कर जुलूस को आगे बढ़ाया गया। पुलिस ने CCTV फुटेज के आधार पर आरोपितों की पहचान करनी शुरू कर दी है। फ़िलहाल किसी प्रकार की तोड़फोड़ नहीं हुई है। पुलिस के मुताबिक हालात काबू में हैं। पुलिस ने बताया कि पत्थरबाजी में कोई घायल नहीं हुआ है।
वडोदरा में विश्व हिंदु परिषद और बजरंगदल द्वारा आयोजित श्री राम की भव्य शोभायात्रा में घर्षण!!
इस यात्रा का आयोजन विश्व हिन्दू परिषद, बजरंग दल द्वारा किया गया है। यात्रा में युवा हाथों में भगवा झंडे ले कर चल रहे है। यात्रा की झाँकी के साथ बड़ी सँख्या में लोग भी चल रहे हैं। इसमें वाहनों का भी काफिला है। यात्रा के पोस्टर पर भगवान् राम के चित्र छपे हैं।
उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में हत्या का एक वीभत्स मामला सामने आया है। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) के छात्र गुलामुद्दीन ने अपने अब्बू इशहाक और अम्मी शहजादी की हत्या कर दी। मौत के बाद वह अपने अम्मी-अब्बू के शव पर कैंची से लगातार वार करता रहा। इसका वीडियो भी सामने आया है।
वीडियो में साफ दिख रहा है कि गुलामुद्दीन हत्या के बाद शांत भाव से बैठकर अपने अब्बू के शव पर ऐसे कैंची मार रहा है, जैसे चिकन शॉप में वह चिकन काट रहा हो। घटनास्थल पर चारों तरफ खून फैला हुआ है, लेकिन गुलामुद्दीन को इससे कोई फर्क नहीं पड़ रहा। कोई आम आदमी होता तो वह विचलित होकर बेहोश हो गया होता या वहाँ भाग गया होता।
UP के अलीगढ़ में AMU के स्टूडेंट गुलामुद्दीन ने पिता इशहाक और मां शहजादी की हत्या कर दी। दोनों के मरने के बावजूद उन्हें कैंची मारता रहा। हत्या की वजह स्पष्ट नहीं है। pic.twitter.com/jNAv4AwCJD
वीडियो में कुछ लोगों को बोलते हुए भी सुना जा सकता है। वे गुलामुद्दीन को मना कर रहे हैं कि शव पर अब कैंची ना मारे, लेकिन उस पर कोई फर्क नहीं पड़ रहा है। वह लोगों की तरफ देखता है और फिर अंधाधुन शव पर कैंची मारने लगता है। इस दौरान दूसरे कमरे में सोई उसकी बहनें खिड़की से चिल्लाती रहती हैं, फिर भी वह नहीं मानता है।
शोरगुल सुनकर पड़ोसी भी वहाँ आ जाते हैं और उसे मना करते हैं, लेकिन वह नहीं मानता है। गेट बंद होने के कारण कोई व्यक्ति अंदर जाने की स्थिति में नहीं था। इसी दौरान किसी पड़ोसी ने उसका वीडियो बना लिया और किसी ने पुलिस को फोन करके इसकी जानकारी दी।
घटना बुधवार (29 मार्च 2023) की है। अलीगढ़ के एसपी ने बताया कि इस घटना की जानकारी पुलिस को 112 पर मिली थी। पुलिस के अनुसार, हत्या के लिए गुलामुद्दीन ने प्रेस और कैंची का इस्तेमाल किया है। क्वार्सी थाना के अंतर्गत जाकिर नगर के गली नंबर 7 में हुई घटना के आरोपित 24 साल के गुलामुद्दीन को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।
गुलामुद्दीन अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में B.Com का छात्र है। लोगों का कहना कि पिछले कई दिनों से उसका अपने अम्मी-अब्बू से अनबन चल रहा था। यह भी कहा जा रहा है कि आरोपित युवक का मानसिक संतुलन ठीक नहीं था। हालाँकि, एसपी ने कहा कि उसे मानसिक बीमारी है या नहीं, इसकी जाँच की जा रही है।
जिस घर में यह परिवार रहता था, उसका मकान मालिक मोहम्मद सलीम है। सलीम ने बताया कि यह परिवार चार-पाँच दिन पहले ही उसके घर में किराए पर रहने के लिए आया था। सलीम के अनुसार, उसका मानसिक संतुलन ठीक नहीं था और यह घर से भाग गया था। इलाज के बाद भी वह अपने अम्मी-अब्बू के साथ नहीं रहना चाहता था।
सलीम ने बताया कि बुधवार की देर शाम को गुलामुद्दीन ने गेट बंद करके अपने अम्मी-अब्बू का गला काट दिया। जिस वक्त उसने घटना को अंजाम दिया, उस वक्त उसके अन्य भाई-बहन सो रहे थे। हत्या के बाद भी वह रूका नहीं। वह शव पर कैंची से लगातार वार करता रहा।
सलीम के यहाँ इशहाक (62) और उसकी बीवी शहजादी बेगम (57) अपने दो बेटों और दो बेटियों के साथ किराए पर रहते थे। गुलामुद्दीन अपने चार भाई-बहनों में दूसरे स्थान पर है। उससे बड़ी एक उसकी बहन है। इशहाक का परिवार मूल रूप से रामपुर जिले का रहने वाला है।
भास्कार डॉट कॉम के अनुसार, पूछताछ में गुलामुद्दीन ने पुलिस को बताया कि उसे वहम हो गया था कि उसकी अम्मी शहजादी उसकी सौतेली माँ है। जब पुलिस ने वहम का कारण पूछा तो उसने बताया कि दो साल पहले जब उसे कोरोना हुआ था, तब उसे किसी ने बताया था कि उसका DNA उसके अब्बू से मिलता है, लेकिन उसकी अम्मी से नहीं। तभी से उसे यह वहम था।
उसने बताया कि जब उसकी अम्मी पढ़ाई-लिखाई को लेकर उसको कुछ कहती थी तो वह तुरंत झगड़ा करने लगता था। उसको यह लगता था कि वह सौतेला बेटा है, इसलिए उसके साथ ऐसा बर्ताव किया जा रहा है। पिछले तीन-चार दिनों से भी माँ-बेटे के बीच कई बार विवाद हुआ था।