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‘बुद्धिजीवी बना रहे निशाना, बढ़ रही हिंसा’: अमेरिका की एसेंबली में पहली बार हिन्दू घृणा के खिलाफ प्रस्ताव पारित, कहा – ये विविध संस्कृतियों वाला धर्म

अमेरिका के जॉर्जिया प्रांत में हिन्दूफोबिया के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया गया है। ये प्रस्ताव वहाँ की एसेंबली में पारित किया गया। USA में पहली बार ऐसा हुआ है। हिन्दुओं के खिलाफ घृणा की निंदा करते हुए जॉर्जिया एसेंबली ने कहा कि हिन्दू धर्म विश्व के सबसे पुराने और बड़े धर्मों में से एक है, जिसके दुनिया भर में 120 करोड़ से भी अधिक मानने वाले हैं। 100 से भी अधिक देशों में हिन्दू धर्म के लोग फैले हुए हैं। हिन्दू संगठनों ने इसका स्वागत किया है।

जॉर्जिया की एसेंबली ने इस प्रस्ताव में हिन्दू धर्म की तारीफ करते हुए कहा कि विविधताएँ भरी कई संस्कृतियाँ इसका हिस्सा हैं। अलग-अलग दर्शन/विचार को मानने वाले लोग हिन्दू धर्म का हिस्सा हैं। साथ ही हिन्दू धर्म को स्वीकार्यता, आपसी सम्मान और शांति का धर्म भी बताया गया। रिप्रेजेन्टेटिव लॉरेन मैकडोनाल्ड और टेड जोन्स ये प्रस्ताव लेकर आए। ये एटलांटा के सबअर्ब्स फोरसिथ का प्रतिनिधित्व करते हैं। जॉर्जिया की सबसे बड़ी हिन्दू जनसंख्या यहीं रहती है।

अमेरिका में हिन्दू समुदाय के योगदानों का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने स्वास्थ्य, विज्ञान और इंजीनियरिंग के अलावा इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, हॉस्पिटैलिटी, वित्त, एकेडमी, निर्माण कार्य, एनर्जी, व्यापार और रिटेल में वो अच्छा कार्य कर रहे हैं। योग, आयुर्वेद, ध्यान, भोजन, संगीत और कला के क्षेत्र में हिन्दुओं के योगदान की सराहना करते हुए कहा गया कि इससे अमेरिका के लाखों लोगों को फायदा मिला है, यहाँ की संस्कृति समृद्ध हुई है।

एसेंबली ने कहा कि पिछले कुछ दशकों में हिन्दुओं के खिलाफ घृणा और अपराध में बढ़ोतरी हुई है। बुद्धिजीवी वर्ग के एक हिस्से का भी इसे समर्थन प्राप्त है। ऐसे लोग पवित्र साहित्य पर हिंसा और अत्याचार का आरोप लगाते हैं। 22 मार्च को जॉर्जिया में ‘हिन्दू एडवोकेसी डे’ इन्हीं घटनाओं के विरोध में मनाया गया था। Rutgers यूनिवर्सिटी ने भी ऐसी घटनाओं के बढ़ने की बात एक रिसर्च में कही है। अकादमिक जगत के ऐसे लोगों की भी निंदा की गई, जो हिन्दू धर्म को निशाना बनाते हैं।

‘कब तक हिन्दुओं पर हमले कराती रहेंगी ममता बनर्जी?’: स्मृति ईरानी ने दागे सवाल, CM ने कहा था – रमजान में गलत काम नहीं कर सकते मुस्लिम

पश्चिम बंगाल में रामनवमी पर हिंसा को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा इस हिंसा के लिए केंद्र की भाजपा सरकार को दोषी ठहराने के बाद अब भाजपा ने भी बनर्जी पर हमला बोला है। केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने पूछा कि हिंदू समुदाय पर ममता बनर्जी कब तक हमले कराती रहेंगी।

बता दें कि रामनवमी के दिन शुरू हुई हिंसा बंगाल में अगले दिन भी जारी रही। हालात इतने तनावपूर्ण हैं कि इलाके में धारा 144 लगाना पड़ा है। हावड़ा के कई इलाकों में दूसरे दिन भी जारी हिंसा के कई वीडियो सामने आए थे।

केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने आरोप लगाया कि रामनवमी की शोभायात्रा पर हावड़ा में पथराव हुआ, लेकिन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पत्थरबाजों को क्लीन चिट दे दी। उन्होंने कहा कि सवाल यह है कि ममता कब तक हिंदू समुदाय पर हमले कराती रहेंगी।

स्मृति ईरानी ने कहा कि ममता के शासन में हुई यह पहली घटना नहीं है। साल 2022 में लक्ष्मी पूजा कर रहे दलितों पर हमला किया गया था। उस समय भी ममता चुप थीं। इससे पहले बंगाल भाजपा के नेता ने ममता बनर्जी पर आरोप लगाया था। उन्होंने मामले की जाँच NIA से कराने की माँग की थी।

उधर, बंगाल की सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के महासचिव और ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी ने कहा कि अपराधियों का कोई धर्म नहीं होता। उन्होंने कहा कि ये भाजपा ही है, जो कार्रवाई करने से पहले अपराधियों के धर्म के बारे में बात करती है।

गौरतलब है कि रामनवमी के दिन शोभायात्रा से पहले बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हिंदुओं को चेतावनी देते हुए कहा था कि मुस्लिम रमजान में हिंसा नहीं करते। उन्होंने हिंसा का ठीकरा भाजपा और हिंदुओं पर फोड़ा था। इसके साथ ही शोभात्रा को मुस्लिम इलाके में नहीं ले जाने की चेतावनी दी थी।

ममता ने कहा था, “मेरे आँख-कान खुले हैं। मुझे सब दिख रहा है। मैंने पहले ही चेतावनी दी थी कि मुस्लिम बहुल इलाकों से यात्रा ना निकाली जाए। मैंने पहले ही कहा था कि राम नवमी पर रैली निकाली गई तो हिंसा हो सकती है।” वह बोलीं, “यह रमजान का वक्त है। इस वक्त में वे (मुस्लिम समुदाय) कुछ गलत काम नहीं कर सकते।”

अभिषेक बनर्जी यहीं नहीं रूके। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी ने सभी लोगों से शांति की अपील की, लेकिन भाजपा के किसी नेता ने ऐसी अपील नहीं की। उन्होंने कहा कि भाजपा चाहती है कि शांति कभी ना हो। बनर्जी ने आरोप लगाया कि शोभायात्रा में शामिल लोग तलवार, बंदूक, पिस्तौल जैसे हथियार लिए हुए थे।

सीपीएम के मोहम्मद सलीम ने बंगाल में हिंसा के लिए भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के साथ-साथ टीएमसी को भी जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि भाजपा ने इन धार्मिक जुलूसों को राजनीतिक रंग दे दिया है। उन्होंने कहा कि रामनवमी पर निकाले गए कई जुलूसों का नेतृत्व टीएमसी के नेताओं ने किया है।

बात मान कर डीजे-जयकारा बंद कर दिया, फिर भी हमला: बिहार के गया में रामनवमी की शोभा यात्रा के साथ-साथ पुलिस पर भी हमला, पत्थरबाजी

जहाँ एक तरफ बिहार के सासाराम और नालंदा में बवाल जारी है, वहीं दूसरी तरफ गया में पुलिस पर ही हमला कर दिया गया रामनवमी की शोभा यात्रा के साथ-साथ गया में पुलिस वालों को भी निशाना बनाया गया है। भीड़ ने जम कर पत्थरबाजी की। ये घटना चाकंद थाना क्षेत्र के डब्बू गाँव की है। शुक्रवार (31 मार्च, 2023) को झड़प की सूचना के बाद पुलिस वहाँ पहुँची थी, जिसके बाद उक्त घटना हुई। इस घटना में 2 पुलिसकर्मी घायल भी हुए हैं।

इन दोनों का इलाज बेलागंज अस्पताल में चल रहा है। बिहार पुलिस ने इस मामले में 16 लोगों को गिरफ्तार किया है। रोड़ेबाजी करने वाले कई लोग फरार भी हो गए हैं, जिसके बाद गाँव में कैम्प कर कर पुलिस दबिश दे रही है। ढकायीन गाँव से रामनवमी की ये शोभा यात्रा निकाली गई थी। डब्बू गाँव में यात्रा के पहुँचते ही वहाँ मुस्लिम भीड़ ने डीजे और जयघोष को बंद करने का दबाव बनाया। इस बात को लेकर कहासुनी हुई।

लेकिन, इसके बावजूद बात मान कर हिन्दू समाज के लोग डीजे और जयकारा बंद कर के शोभा यात्रा को आगे बढ़ाने लगे। लेकिन, इसके बावजूद आगे शोभा यात्रा को रुकने को मजबूर कर दिया गया। इसके बाद माहौल बिगड़ने लगा और पुलिस को सूचना दे दी गई। पुलिस जैसे ही वहाँ पहुँची, उस पर ही पत्थर बरसाए जाने लगे। इसके बाद वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुँचे। हालात को काबू करने के लिए पुलिस ने गाँव में कैम्प किया।

बिहार पुलिस ने घटना के संबंध में बताया है, “मौके पर उपस्थित कुछ असामाजिक तत्वों के द्वारा पुलिस बल पर पत्थर चलाया गया, जिससे दो पुलिस कर्मी को हल्की चोटें आई है, जिन्हें स्थानीय अस्पताल में First Aid के पश्चात थाना वापस भेज दिया गया। दोनों पक्षों में असामाजिक तत्वों को चिह्नित किया जा रहा है। इस संबंध में कांड दर्ज कर अग्रतर कारवाई की जा रही है। वर्तमान में स्थिति सामान्य है, फिर भी निगरानी रखी जा रही है। स्थिति सामान्य होने तक के लिए पुलिस पदाधिकारी/बलों की प्रतिनियुक्ति डब्बूनगर गॉव एवं आस-पास के क्षेत्र में की गई है।”

मस्जिद के सामने गुजरते ही शोभायात्रा पर पथराव, फिर फायरिंग: नालंदा में दुकानों एवं गाड़ियों में लूटपाट के बाद आगजनी, 4 लोगों को लगी गोली

तुष्टिकरण की राजनीति ने आज ऐसी स्थिति लाकर खड़ी कर दी है कि रामनवमी बीतने के बाद भी हिंसा रूकने का नाम नहीं ले रही हैं। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के गृह जिले नालंदा में रामनवमी के बाद भी हिंसा का दौर रूक नहीं रहा है। बिहारशरीफ में ना सिर्फ पथराव किया गया, बल्कि जमकर फायरिंग भी की गई। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए इलाके में धारा 144 लगानी पड़ी।

बिहारशरीफ में लहेरी थाना क्षेत्र के दीवानगंज इलाके में शोभायात्रा के दौरान जमकर पथराव किया गया। दंगाइयों ने ना सिर्फ पथराव किया, बल्कि आसपास के घरों और दुकानों में आगजनी की और जमकर फायरिंग भी की। फायरिंग में चार लोगों को गोली लगी है। हमले के कारण शोभायात्रा शामिल छह युवक घायल हो गए। इनमें से दो की हालत गंभीर है।

इससे पहले किए गए पथराव में 9 लोग घायल हो गए थे। इनमें दो युवतियाँ भी शामिल हैं। पुलिस प्रशासन का दावा है कि स्थिति नियंत्रण में और शांतिपूर्ण है। पूरे शहर में धारा 144 लगा दी गई है। हालाँकि, इलाके में तनाव को अभी भी महसूस किया जा सकता है।

नालंदा के एसपी अशोक मिश्रा का कहना है कि पुलिस इलाके में पेट्रोलिंग कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि इलाके में इंटरनेट सेवा को फिलहाल बंद करने का अनुरोध किया गया है। एसपी मिश्रा ने कहा कि बदमाशों की पहचान की जा रही है और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

इलाके में मस्जिद में आग लगाए जाने की घटना को डीएम शशांक शुभंकर ने नकार दिया। उन्होंने कहा कि किसी मस्जिद में आग लगाए जाने की सूचना नहीं है। उन्होंने कहा कि सीसीटीवी फुटेज, ड्रोन कैमरा आदि से स्थिति की पहचान की जा रही है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि रामनवमी के मौके पर हिंदू समुदाय ने शोभायात्रा निकाली थी। शोभायात्रा जब दीवानगंज इलाके के मस्जिद से गुजर रहा था, उसी दौरान कट्टरपंथी मुस्लिम उस पर पत्थरबाजी करने लगे। इसके बाद हिंदू समुदाय भी अपने बचाव में उतर आया। इस दौरान दंगाइयों ने गाड़ियों मेें तोड़फोड़ और आगजनी की। इसके बाद दुकानों में लूटपाट करके आग लगी।

बिहार पुलिस कह रही ‘शांतिपूर्ण’, लेकिन सासाराम में रात भर होता रहा बवाल: पत्थरबाजी के बाद आगजनी-हिंसा-गोलीबारी, पहुँच रहे अमित शाह

बिहार के सासाराम में रामनवमी का त्योहार बीत जाने के बावजूद हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है। बिहार पुलिस ने कहा कि इलाके में शांति है, लेकिन पिछले 24 घंटे से बवाल जारी है जो रात में भी नहीं थमा। शहर के कई अलग-अलग इलाकों में हिंसा हुई है। इंटरनेट सेवाएँ प्रतिबंधित कर दी गई हैं। हिन्दू-मुस्लिम तनाव के कारण पूरे जिले में धारा-144 लागू करने के साथ ही भारी संख्या में पुलिस के जवानों की तैनाती भी की गई है।

सासाराम के सहजलाल, बस्ती मोर, चौखंडी, आदमखानी और सोना पट्टी जैसे इलाकों में हिंसा की सबसे ज्यादा घटनाएँ हुई हैं। दोनों पक्षों के बीच पत्थरबाजी होती रही। सोना पट्टी इलाके में आभूषण दुकानों के शटर तक को खोलने का प्रयास किया गया। कई घरों और दुकानों को भी आग के हवाले कर दिया गया है। मिड टाउन के इलाके सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं, जहाँ घनी आबादी रहती है। लोगों में भी दहशत का माहौल बना हुआ है।

सासाराम में पड़ोसी जिले औरंगाबाद से पुलिस फोर्स मँगाई गई है। ये सब तब हो रहा है, जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जिले के दौरे पर आने वाले हैं। स्थानीय लोगों के अलावा पुलिसकर्मी और पत्रकार भी घायलों में शामिल हैं। एसडीओ के बॉडीगार्ड का सिर फट गया। रामनवमी जुलूस समाप्त होने के बाद वहाँ हिंसा शुरू हुई। रविवार (2 अप्रैल, 2023) को यहाँ अमित शाह की विशाल रैली है। गोलीबारी की भी खबर है, लेकिन प्रशासन ने फ़िलहाल चुप्पी साधी हुई है।

रामनवमी की विसर्जन यात्रा और जुमा, दोनों एक ही दिन था। जेपी के पूर्व विधायक जवाहर प्रसाद का कहना है कि खिरकी घाट में हनुमान मंदिर पर हमला किया गया है। सम्राट अशोक के लघु शिलालेख को भी अमित शाह देखने जाएँगे, जहाँ मुस्लिमों के कब्जे की बात कही जा रही है। कई वरिष्ठ अधिकारी मौके पर कैम्प कर रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद हिंसा का होना बिहार पुलिस के कामकाज के तरीके पर सवाल खड़ा कर रहा है।

ISI के आकाओं को भेज रहे थे गोपनीय सूचनाएँ, राजस्थान में रतन खान सहित 2 धराए: रिश्तेदारों से मिलने के बहाने कई बार गया पाकिस्तान

पाकिस्तान के लिए जासूसी करने आरोप में सुरक्षा एजेंसियों ने राजस्थान के सीमावर्ती जिले बाड़मेर से रतन खान सहित 2 और लोगों को गिरफ्तार किया है। इससे पहले राजस्थान की सुरक्षा एजेंसियों ने बाड़मेर से 4 संदिग्धों पकड़ा था। ये पाकिस्तान में बैठे अपने आकाओं को गोपनीय सूचनाएँ भेज रहे थे।

दोनों आरोपित पाकिस्तान की कुख्यात खुफिया एजेंसी ISI के लिए जासूसी कर रहे थे। रतन खान कई बार पाकिस्तान भी जा चुका है। वहीं, दूसरा आरोपित जवान तेल उत्पादन क्षेत्र एमपीटी में तैनात था। इसे आईएसआई की एजेंट महिला ने हनीट्रैप में फँसाकर और पैसों का लालच देकर अपने जाल में फाँसा था।

दरअसल, राजस्थान की सुरक्षा एजेंसी CID इंटेलिजेंस पाकिस्तान द्वारा राज्य में की जाने वाली जासूसी गतिविधियों की निगरानी कर रही थी। इस दौरान उसे बाड़मेर जिले में दो संदिग्ध मिले, जो सोशल मीडिया के जरिए पाकिस्तान के संपर्क में थे। इसके बाद इन पर निगरानी बढ़ा दी गई।

एजेंसी ने जाँच की तो एक शिव लंगों की ढाणी धारवी कलां का रहने वाला 52 साल का रतन खान के रूप में मिला। वहीं, दूसरा आरोपित चिमाणियों की ढाणी शोभाला जेतमाल गाँव का रहने वाला पारूराम है। एजेंसी ने दोनों की पृष्ठभूमि भी खंगाली।

CID इंटेलिजेंस के मुताबिक, रतन खान साल 2012 से ही अपने रिश्तेदारों से मिलने के बहाने पाकिस्तान जाता रहा है। वहाँ जाकर वह ISI मिलता और जासूसी की ट्रेनिंग लेता था। उसने वहाँ जाकर सीखा कि सीमावर्ती इलाकों की गोपनीय सूचनाएँ अपने मोबाइल फोन से तैयार कर सोशल मीडिया के माध्यम से कैसे भेजनी है।

ट्रेनिंग के बाद रतन खान प्रतिबंधित सीमावर्ती इलाके की फोटो, वीडियो सहित गोपनीय सूचनाएँ वॉट्सऐप के जरिए पाकिस्तान भेजने लगा। इसके बदले में उसे पाकिस्तान की ओर से पैसे भी दिए जाते थे। वह पिछले 10 सालों में 20 से ज्यादा बार पाकिस्तान जा चुका है।

वहीं, 34 साल का पारूराम बॉर्डर होमगार्ड में गार्डमैन के पद पर कार्यरत है। वह नागाणा कवास (बाड़मेर) स्थित मंगला प्रोसेसिंग टर्मिनल में सुरक्षा गार्ड की नौकरी कर रहा था। ISI की महिला हैंडलर ने उसे हनीट्रैप में फँसा लिया। वह हनीट्रैप और पैसों के लालच में गोपनीय सूचनाएँ भेजता था।

पुलिस ने डीजे पर लगा दिया बैन, ट्रेलर भी जब्त कर लिया, फिर भी रामनवमी की विसर्जन यात्रा पर पत्थरबाजी: झारखंड के जमशेदपुर में घटना, 5 घायल

अब झारखंड के जमशेदपुर में रामनवमी के त्योहार के दौरान पत्थरबाजी की खबरें सामने आई हैं। पश्चिम बंगाल और बिहार में भी इस तरह के मामले देखने को मिले थे। ताज़ा घटना शुक्रवार (31 मार्च, 2023) की है। हल्दीपोखर इलाके में रामनवमी की शोभा यात्रा पर पत्थरबाजी की गई। हालाँकि, पुलिस कह रही है कि अब स्थिति शांतिपूर्ण है। जुगसलाई क्षेत्र में लोगों ने रामनवमी की शोभा यात्रा निकाले जाने का विरोध किया, जिसके बाद तनाव उत्पन्न हो गया।

पत्थरबाजी के बाद तनाव और ज्यादा बढ़ गया। शोभा यात्रा रोके जाने से हिन्दू भी आक्रोशित हो गए और उन्होंने स्थानीय बाटा चौक पर बैठ कर हनुमान चालीसा का पाठ करने लगे। साथ ही रेलवे फाटक के ऊपर स्थित रेलवे ब्रिज को भी जाम कर दिया गया। इसके बाद दोनों पक्षों की तरफ से नारेबाजी की जाने लगी। गुस्साए लोगों ने सड़क पर टायर जला कर विरोध प्रदर्शन किया। साथ ही पुलिस की गाड़ी में भी तोड़फोड़ की गई।

जमशेदपुर के डीएम और एसपी सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों को मौके पर पहुँच कर स्थिति को नियंत्रित करना पड़ा। बताया जा रहा है कि पत्थरबाजी करने वाले मुस्लिम समुदाय के लोग थे। रंकिणी मंदिर से 50 कदम दूर हुए पथराव में हल्दीपोखर पूर्वी की मुखिया देवी कुमारी भूमिज, सीओ इम्तियाज अहमद, पूर्व मुखिया सैय्यद जबीउल्लाह, सैप के हवलदार नंदलाल हाजरा, पुलिस जवान संदेश राम घायल हो गए हैं। अस्पताल में इन सबका इलाज चल रहा है।

ये घटना विसर्जन के दौरान हुई है। बाद में पुलिस की मौजूदगी में झंडे का विसर्जन किया गया। विसर्जन जुलूस में ट्रेलर और डीजे को पुलिस ने बैन कर दिया था, इस कारण हिन्दुओं ने शाम तक विसर्जन जुलूस नहीं निकाला। पुलिस ने एक ट्रेलर जब्त भी कर लिया। विजय बजरंग अखाड़ा हल्दीपोखर संगठन के बैनर तले हनुमान मंदिर से यात्रा निकाली गई थी। रंकिणी मंदिर के पास मुस्लिम भीड़ आ धमकी और पत्थर फेंकने लगी।

‘मेरे साथ बंगाल में पुलिस अधिकारी ने की मारपीट’ : NCPCR अध्यक्ष का आरोप, राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने कहा था- यहाँ मत आओ

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने बंगाल पुलिस के अधिकारी बिस्वाक मुखर्जी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। NCPCR अध्यक्ष ने ट्वीट कर बताया कि वो जब तिलजिला थाने में बच्ची की मौत को लेकर उसके घर पहुँचे तो उनके साथ दुर्व्यवहार हुआ। उनका आरोप है कि पुलिस ने एनसीपीसीआर की पूछताछ की चोरी-छिपे रिकॉर्डिंग की और विरोध करने पर उनके साथ मारपीट हुई।

बता दें कि इससे पहले पश्चिम बंगाल के तिलजला में बच्ची के बलात्कार व हत्या एवं मालदा में स्कूल के अंदर ६ वीं कक्षा की छात्रा के बलात्कार के मामलों की जाँच के लिए प्रियंक कानूनगो ने 31 मार्च और 1 अप्रैल की तारीख बताई थी। उन्होंने कहा था कि दो दिन पूर्व सूचना देने के बावजूद तक राज्य सरकार ने जाँच हेतु व सुरक्षा हेतु अधिकारियों कA जानकारी नहीं दी। ऐसे में NCPCR वहाँ जाएगा।

रिपोर्ट्स की मानें तो एनसीपीसीआर के राज्य में आने की सूचना पर राज्य बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष सुदेशना राय ने दिल्ली को पत्र भेजकर कहा था कि तिलजला बाल हत्या मामले में राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग को शहर आने की जरूरत नहीं है। हालाँकि एनसीपीआर के अध्यक्ष फिर भी वहाँ पहुँचे और उसके बाद अध्यक्ष ने बदसलूकी का मामला दर्ज कराया।

‘मीडिया से लेकर DU की साइट तक…हर जगह मौजूद है PM मोदी की डिग्री’ : गुजरात HC ने लगाई केजरीवाल को फटकार, ₹25 हजार का जुर्माना भी ठोका

गुजरात हाईकोर्ट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) की स्नातकोत्तर (MA) की डिग्री माँगने पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejariwal) पर 25000 रुपए का जुर्माना लगाया है। उच्च न्यायालय ने शुक्रवार (31 मार्च 2023) को अपने फैसले में कहा कि पीएम मोदी का प्रमाणपत्र देने की जरूरत नहीं है।

इसके साथ ही गुजरात हाईकोर्ट के जस्टिस बीरेन वैष्णव ने मुख्य सूचना आयोग (CIC) के उस आदेश को भी रद्द कर दिया, जिसमें PMO के साथ-साथ गुजरात विश्वविद्यालय और दिल्ली विश्वविद्यालय के अधिकारियों को पीएम मोदी की स्नातक और स्नातकोत्तर डिग्री का डिटेल देने का निर्देश दिया गया था।

अपने फैसले में कोर्ट ने कहा कि पीएम की डिग्री मीडिया, सोशल मीडिया और यूनिवर्सिटी की वेबसाइट पर उपलब्ध है। इसके बावजूद मुख्यमंत्री केजरीवाल ने यह जानते हुए भी इस विवाद को जानबूझकर पैदा किया कि डिग्री आरटीआई के दायरे में नहीं आती है।

न्यूजपर्सन अंकुर सिंह ने जिस कॉपी को गुजरात हाईकोर्ट के जजमेंट की कॉपी बताकर शेयर किया। है, उसमें इसका जिक्र किया गया है। गुजरात हाईकोर्ट ने कहा कि केजरीवाल ने अदालती कार्यवाही के दौरान विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर अपलोड की गई पीएम की डिग्री की प्रामाणिकता पर सवाल नहीं उठाया।

कोर्ट ने कहा कि आरटीआई के जरिए डिग्री का डिटेल माँगकर केजरीवाल अवांछित विवाद पैदा करना चाहते थे। वे अच्छी तरह से जानते हैं कि विश्वविद्यालय आरटीआई के तहत तीसरे पक्ष को डिग्री नहीं दे सकता।

अरविंद केजरीवाल को फटकार लगाते हुए कोर्ट ने कहा कि उन्होंने आरटीआई अधिनियम के इरादे और उद्देश्य का मज़ाक उड़ाया। केजरीवाल ने एक ऐसे मुद्दे पर विवाद पैदा करने के लिए आरटीआई अधिनियम का अंधाधुंन दुरुपयोग किया, जो आरटीआई के दायरे में आता ही नहीं है।

दरअसल, 2016 में सूचना के अधिकार (RTI) के तहत पीएम मोदी की स्नातक और स्नातकोत्तर की डिग्री का विवरण माँगा गया था। इसका जवाब देते हुए केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) ने प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), गुजरात विश्वविद्यालय और दिल्ली विश्वविद्यालय को निर्देश दिया था कि पीएम की डिग्री के बारे में जानकारी दे।

केंद्रीय सूचना आयोग के इस निर्देश को गुजरात यूनिवर्सिटी ने गुजरात हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। गुजरात हाईकोर्ट ने इसी मामले में अरविंद केजरीवाल को फटकार लगाते हुए उन पर जुर्माना लगाया है। कोर्ट का फैसला आने के बाद केजरीवाल ने एक ट्वीट किया है।

उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा, “क्या देश को ये जानने का भी अधिकार नहीं है कि उनके PM कितना पढ़े हैं? कोर्ट में इन्होंने डिग्री दिखाए जाने का ज़बरदस्त विरोध किया। क्यों? और उनकी डिग्री देखने की माँग करने वालों पर जुर्माना लगा दिया जायेगा? ये क्या हो रहा है? अनपढ़ या कम पढ़े लिखे PM देश के लिए बेहद ख़तरनाक हैं।”

उधर, हाईकोर्ट के फैसले के बाद आम आदमी पार्टी (AAP) की गुजरात इकाई ने कहा कि वह इस आदेश के खिलाफ अपील करेगी। AAP गुजरात के कानूनी प्रकोष्ठ के अध्यक्ष प्रणव ठक्कर ने कहा कि इस फैसले के साथ ही नागरिकों ने प्रधानमंत्री की डिग्री के बारे में जानकारी माँगने का अधिकार खो दिया।

RSS को ‘कौरव’ कहने पर राहुल गाँधी के खिलाफ मानहानि का मामला दर्ज, संघ कार्यकर्ता ने दी याचिका: ‘मोदी सरनेम विवाद’ में पटना कोर्ट में होना होगा पेश

कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी (Rahul Gandhi) की मुश्किलें कम होती नजर नहीं आ रही हैं। पहले सांसदी गई। उसके बाद आवास खाली करने का नोटिस मिला। अब उनके खिलाफ मानहानि का परिवाद दाखिल किया गया है। यह राष्ट्रीय सेवक संघ (RSS) की तुलना कौरवों से करने से संबंधित है।

आरएसएस के एक कार्यकर्ता ने यह राहुल गाँधी के खिलाफ मानहानि का यह परिवाद उत्तराखंड के हरिद्वार स्थित द्वितीय न्यायिक मजिस्ट्रेट शिव सिंह की अदालत में दाखिल किया है। इस पर न्यायालय ने सुनवाई की तिथि 12 अप्रैल 2023 तय की है। 

रुद्र विहार जगजीतपुर कनखल निवासी कमल भदौरिया ने न्यायालय में यह परिवाद दाखिल किया है। इसमें कमल भदौरिया ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कार्यकाल में धारा 370 हटाने, मुस्लिम महिलाओं को अधिकार देते हुए तीन तलाक पर कानून बनाने, राम मंदिर की नींव रखने समेत कई कार्य हुए।

परिवाद में कमल ने कहा कि देश में कहीं पर भी कोई विपत्ति आती है तो संघ अहम भूमिका निभाता है। इसके बावजूद राहुल गाँधी ने 9 जनवरी 2023 को कुरुक्षेत्र अंबाला में संघ को 21वीं सदी का कौरव बताया था। उन्होंने कहा था कि ‘आज के कौरव खाकी हाफ पैंट पहनते हैं और हाथ में लाठी लिए होते हैं’।

कमल ने आगे कहा है कि राहुल गाँधी ने कहा था कि यह देश पुजारियों का नहीं, बल्कि तपस्वियों का है। इस बयान को उन्होंने भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाला बताया। परिवाद दाखिल करने के बाद कोर्ट ने राहुल गाँधी को 12 अप्रैल को पेश होने का नोटिस भी जारी कर दिया है।

वहीं, मोदी सरनेम को लेकर राहुल गाँधी को पटना की अदालत ने भी 12 अप्रैल को हाजिर होने के लिए कहा है। राज्यसभा सांसद और भाजपा नेता सुशील मोदी ने कहा कि उनके मामले में राहुल गाँधी को धारा 317 के तहत बयान दर्ज कराने के लिए पटना के एमपी-एमएलए विशेष न्यायालय में 12 अप्रैल 2023 को उपस्थित होना है। इसका नोटिस भेज दिया गया है।

सुशील मोदी ने कहा कि धारा 500 के तहत किसी व्यक्ति या समुदाय की मानहानि करना दंडनीय अपराध है। उन्होंने कहा सूरत कोर्ट की तरह ही बिहार में भी उन्हें 2 साल की सजा हो सकती है। सुशील मोदी ने कहा कि राहुल को इस मामले में 6 जुलाई 2019 को पटना की अदालत में हाजिर होकर जमानत लेनी पड़ी थी।