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फोन छीना, मारपीट की… फिर भी कोई कार्रवाई नहीं: पत्रकार से बदसलूकी केस में सलमान खान को राहत, बॉम्बे HC ने शिकायत रद्द की

बॉम्बे हाईकोर्ट ( Bombay High Court) से बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान (Salman Khan) को बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने गुरुवार (30 मार्च 2023) को अभिनेता को क्लीन चिट देते हुए एक पत्रकार द्वारा 2019 में उनके खिलाफ दर्ज की गई शिकायत को रद्द करने का आदेश दिया। दरअसल, पत्रकार अशोक पांडेय ने सलमान और उनके बॉडीगार्ड नवाज शेख पर उनका फोन छीनने का आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कारवाई थी। पत्रकार ने अभिनेता पर दुर्व्यवहार और मारपीट का आरोप भी लगाया था।

जस्टिस भारती डांगरे की एकल पीठ ने आज सलमान खान और नवाज शेख द्वारा दायर याचिका को स्वीकार करते हुए अपना आदेश सुनाया। अदालत ने खान और शेख के खिलाफ जारी समन भी रद्द कर दिया। अब एक्टर को अँधेरी कोर्ट में हाजिरी नहीं लगानी पड़ेगी। सलमान खान ने मार्च 2022 में अँधेरी मजिस्ट्रेट अदालत द्वारा जारी आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का रुख किया था। यह समन पत्रकार अशोक पांडेय की शिकायत के आधार पर जारी किया गया था, जिसमें आरोप लगाया था कि खान और उनके बॉडीगार्ड ने उन्हें धमकी दी और उनके साथ मारपीट की।

शिकायत के अनुसार, खान और शेख ने अप्रैल 2019 में पत्रकार के साथ दुर्व्यवहार किया और मारपीट की। सलमान खान मुंबई की सड़कों पर साइकिल चला रहे थे, इस दौरान अशोक उनका वीडियो बनाने लगा। ये बात सलमान को अच्छी नहीं लगी और वो भड़क गए। उन्होंने उसका (पांडेय) फोन भी छीन लिया। दूसरी ओर, ‘टाईगर जिंदा है’ फिल्म के अभिनेता ने दावा किया था कि पांडेय की शिकायत में विरोधाभास है। उन्होंने पांडेय से कुछ भी नहीं कहा था। हालाँकि, सलमान के बॉडीगार्ड ने अपनी शिकायत में पुलिस को बताया था कि वह शख्स सलमान खान की इजाजत के बिना उनका पीछा कर रहा था। साथ ही उनका विडियो भी बना रहा था।

बता दें कि इस पत्रकार ने सलमान खान पर मुंबई मेट्रोपॉलिटन मैजिस्ट्रेट कोर्ट के समक्ष 25 जून को धारा 323, 392, 426, 506, और 34 के तहत लूट, मारपीट और आपराधिक धमकी के लिए शिकायत दर्ज की थी। अशोक पांडेय के अनुसार, सलमान खान ने उनका मोबाइल छीना था। वहीं, पत्रकार के वकील ने कहा था कि सलमान खान ने उसके मुवक्किल के मोबाइल से उनका डाटा भी डिलीट कर दिया था।

रामनवमी पर बंगाल में ‘मुस्लिम इलाकों’ की चिंता, शांति के लिए बिहार में सैकड़ों DJ जब्त: ताजिया जुलूस का स्वागत तो हिंदुओं से नफरत क्यों?

आज पूरे देश में रामनवमी (Ramnavami) का पर्व बड़े ही धूमधाम से मनाया जा रहा है। सुबह से ही मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिल रही है। इस खास मौके पर कोलकाता में भी 43 जुलूस निकाले जाने हैं। इनमें काशीपुर रोड और वटगंज में दो बड़े रामनवमी जुलूस हैं। लेकिन पश्चिम बंगाल में रामनवमी पर राजनीति शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने विपक्ष को रामनवमी पर किसी भी तरह की अप्रिय घटना से बचने की चेतावनी दी है।

उन्होंने कहा, “रामनवमी मनाओ, लेकिन रमजान के महीने का पालन करते हुए। रमजान का महीना भी चल रहा है। अगर तुम किसी मुस्लिम इलाके में जाकर हमला करते हो तो याद रखना, उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।”

इसी तरह रामनवमी से दो दिन पहले बिहार के बेगूसराय में डीजे पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया और फिर बिहार की बेगूसराय पुलिस 24 घंटे के दौरान 62 डीजे ज़ब्त कर थाने लेकर आ गई, ताकि रामनवमी के दिन डीजे न बज सके। इतना ही नहीं, बिहार में डीजे संचालकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की गई। एसपी ने इस कदम के पीछे बताया कि रामनवमी पर्व, चैती दुर्गा पूजा व चैती छट पर्व से लेकर रमजान पर्व को लेकर शांति व्यवस्था के लिए जिले की पुलिस अलर्ट मोड पर है। इसी क्रम में ऐसा किया गया है।

अब प्रश्न ये उठता है कि आखिर ये मुस्लिम इलाका होता क्या है जिसका हवाला देकर हिंदुओं को चेतावनी दी जा रही है? अगर यह वास्तव में होता है, तो क्या इसी तर्ज पर हिन्दू इलाका नहीं होना चाहिए? और अगर नहीं होता, तो फिर कहाँ जाने से रामनवमी पर हिंदुओं को रोका जाता है?

ताजिया जुलूस से कोई दिक्कत क्यों नहीं

ध्यान दें कि इस्लामिक कैलेंडर के मुताबिक, मुहर्रम के 10वें दिन मुस्लिम सम्प्रदाय के लोग सड़कों पर ताजिया जुलूस निकालते हैं। इस जुलूस में ये लोग शोक व्यक्त करते हैं और अपनी छाती पीटकर इमाम हुसैन की शहादत को याद करते हैं। इस दौरान जुलूस में शामिल मुस्लिम लाठी-डंडों से करतब भी दिखाते हैं। यह जुलूस कई कस्बों और विभिन्न मार्गों से होकर गुजरता है, जहाँ बड़ी संख्या में हिन्दू भी रहते हैं। इसके कारण सड़कों पर भीड़ इकट्ठा होने से कई बार माहौल खराब हो जाता है। जूलूस से ट्रैफिक भी प्रभावित होता है।

देश के कई राज्यों में, जहाँ बड़ी संख्या में हिन्दू रहते हैं, उन जगहों पर मस्जिद बनी हुई है। वहाँ मुस्लिम लाउडस्पीकर पर नमाज अदा करते हैं। हद तो तब हो गई, जब 2021 और दिसंबर 2022 में हरियाणा के गुरुग्राम में मुस्लिम सड़कों पर ही नमाज पढ़ने के लिए जुट गए। क्या इस दौरान नेता हिंदू इलाका और मुस्लिम इलाका का फर्क भूल जाते हैं।

हिंदुओं को अपने पर्व मनाने के लिए किस इलाके में जाना होगा? क्या उसे (हिंदुओं) हमेशा अपने त्योहारों को मनाने के लिए अपना मन मारना पड़ेगा? क्या आजाद भारत में उन्हें अब भी अपने त्योहार मनाने की आजादी नहीं मिल पाई है? यह सवाल उन राज्यों की सरकारों से है, जो सभी समुदाय को एक दृष्टि से देखने का दंभ भरती हैं। क्या उनके लिए हिंदू केवल एक वोट बैंक है, जो उन्हें चुनाव के समय ही याद आता है। क्या उनकी धार्मिक आस्था इन लोगों के लिए कोई मायने नहीं रखती है?

हिंदुओं से इतनी घृणा का कारण क्या है?

बहरहाल, पश्चिम बंगाल हो या फिर बिहार केंद्र की मोदी सरकार को घेरने के लिए नए-नए हथकंडे अपनाती रही है। कई बार देश की सबसे पुरानी पार्टी कॉन्ग्रेस के साथ मिलकर क्षेत्रीय दलों ने मोदी सरकार के खिलाफ अपने एजेंडे को भुनाने के भरसक प्रयास किए, लेकिन वे हमेशा अपने नापाक मंसूबे में विफल ही रहे। आखिर, हिंदुओं से इतनी घृणा का कारण क्या है? क्या हिंदुस्तान में केवल तथाकथिक अल्पसंख्यकों को ही खुश करने में लगी रहेंगी ये राजनीतिक पार्टियाँ?

खैर, ममता बनर्जी तो पहले ही इस बात को पुख्ता कर चुकी हैं कि वह हिंदुओं और उनके त्योहारों से कितनी घृणा करती हैं। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव 2021 के नतीजे घोषित होने के बाद से बड़े पैमाने पर राजनीतिक हिंसा हुई। इसमें जॉय प्रकाश यादव, कुश खेत्रपाल और अभिजीत सरकार के अलावा कई हिंदू मारे गए थे। सीबीआई की 34 एफआईआर में से कई में ‘TMC गुंडों’ के नाम सामने आए थे। उन पर आरोप लगाया गया था कि वे हिंदू धर्म खत्म कर देंगे और सबको मार देंगे

जो करते हैं हिंदुस्तान को बदनाम, उनको पैसे नहीं दें भारत के बिजनेसमैन: उपराष्ट्रपति धनखड़ ने IIT-IIM की दी सलाह

भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कहा कि पिछले 8-9 वर्षों में बहुत बड़ा परिवर्तन हुआ है। सत्ता के मध्यस्थों से मुक्ति मिली है और उन लोगों से भी मुक्ति मिली है, जो अतिरिक्त कानूनी माध्यमों से शासन प्रणाली का लाभ उठाते थे।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि भाजपा के शासन में नए भारत का मंत्र है ‘न्यूनतम सरकार, अधिकतम सुशासन’। ‘जीवन में सुगमता’ के बड़े उद्देश्य के साथ कार्यपालिका ‘कारोबार में सुगमता’ को सुलभ बना रही है। उन्होंने कहा कि आज भारत अवसरों, नवाचारों और निवेश के पसंदीदा वैश्विक स्थल बन गया है।

उपराष्ट्रपति ने दिल्ली के भारतीय लोक प्रशासन संस्थान (IIPA) में दूसरा डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद स्मृति व्याख्यान को संबोधित करते हुए कहा, “आगामी 25 साल देश के लिए महत्वपूर्ण है। पिछले 9 वर्षों में हमने सकारात्मक कदमों की एक नींव रखी है कि 2047 में जब देश आजादी की शताब्दी मना रहा होगा, तो हमें पहले नंबर पर होना है और मेरे युवा साथी 2047 के योद्धा होंगे।”

उन्होंने कहा कि देश में जिस तरह का पारिस्थितिकी तंत्र विकसित हुआ है और स्थिरता देखने को मिल रही है, इससे स्पष्ट है कि भारत उस समय दुनिया में नंबर एक होगा। कोविड के दौरान भारत ने न केवल दवाओं, उपकरणों और टीकों के विकास और उत्पादन के लिए अपनी क्षमताओं को बढ़ाया और अस्पतालों एवं ऑक्सीजन संयंत्रों की स्थापना की, बल्कि महामारी के प्रसार की निगरानी के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म भी विकसित किए गए।

उपराष्ट्रपति धनखड़ ने कहा, “जब कोविड महामारी ने हमें चुनौती दी तो हम अपनी सभ्यता से जुड़े लोकाचारों को नहीं भूले। हमने अपने टीकों को उपलब्ध कराकर 100 से अधिक देशों को मदद दी। उनमें से बहुत को मित्रवत भाव के रूप में ये मदद मिली।”

अपने संबोधन के दौरान उपराष्ट्र ने भारत को एक शक्ति के रूप में उभरने पर उसे बदनाम की साजिश की भी बात कही। उन्होंने कहा, “हमें बदनाम करने के लिए भारत के मूल्यों, अखंडता और इसकी संस्थाओं पर व्यवस्थित तरीके से हमला किया जा रहा है। वैश्विक शक्ति के रूप में उभरते हुए भारत के खिलाफ एक पारिस्थितिकी तंत्र को पोषित किया जा रहा है।”

उपराष्ट्रपति ने कहा कि कुछ बाहरी संस्थानों द्वारा राष्ट्र के रूप में भारत की वैधता और इसके संविधान पर हमला किया जा रहा है। उन्होंने कहा, “भारत के कुछ अरबपति और बुद्धिजीवी परिणाम की परवाह किए बिना इन संस्थानों को फंड देकर इस तरह के विनाशकारी षडयंत्रों के शिकार हो गए हैं।”

उन्होंने कहा कि उद्योगपति को सीएसआर फंड के पैसे का इस्तेमाल देश के बाहर करने के बजाय IIMs और IITs जैसे महत्वपूर्ण संस्थानों को वित्तपोषित करना चाहिए। उन्होंने कहा, “मुझ याद है कि देश के एक अरबपति ने सीएसआर के 200 करोड़ रुपए एक अमेरिकी संस्थान को दे दिए। इसी तरह 2008 में खुद भारत सरकार ने 20 करोड़ दूसरे संस्थान को दिए थे।”

न्यायपालिका को लेकर उपराष्ट्रपति ने एक बार फिर हमला बोला। उन्होंने कहा कि कानून बनाने का विशेषाधिकार संसद के पास है और बनाए गए कानून का विश्लेषण, मूल्यांकन या हस्तक्षेप किसी अन्य पक्ष (न्यायपालिका या कार्यपालिका) को करने की जरूरत नहीं है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि इससे नाजुक संतुलन बिगड़ जाएगा।

मोदी सरकार द्वारा साल 2014 में जजों की नियुक्ति से संबंधित कॉलेजियम सिस्टम की जगह बनाए गए नेशनल ज्यूडिशियल अपॉइंटमेंट कमेटी की भी उन्होंने चर्चा की। उपराष्ट्रपति ने कहा, “इसे सर्वसम्मति से बनाया गया था और लोकसभा एवं राज्यसभा द्वारा पास किया गया। 16 राज्य की विधानसभाओं ने इसका समर्थन किया। देश के माननीय राष्ट्रपति ने संविधान के अनुच्छेद 111 के तहत अपने संवैधानिक अधिकार के तहत इस पर हस्ताक्षर किए। आगे क्या हुआ, सब जानते हैं।” बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने इस कानून को रद्द कर दिया था।

उन्होंने कहा कि न्यायाधीशों के चयन में भारत के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श की बात कही गई थी। इसे न्यायिक आदेश के जरिए सहमति बना दिया गया। उन्होंने कहा कि परामर्श और सहमति के बीच एक मूलभूत अंतर है। न्यायपालिका ने कहा कि परामर्श ही सहमति होगी। उन्होंने कहा कि डॉ. अंबेडकर ने 24 मई 1949 को संविधान सभा में इस तरह के सुझाव का कड़ा विरोध किया था।

उपराष्ट्रपति धनखड़ ने कहा कि किसी भी मूल संरचना का आधार कानून निर्माण में संसद की सर्वोच्चता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत में और बाहर कुछ लोग हैं, जो देश की प्रगति को देखकर प्रसन्न नहीं हैं। देश के बुद्धिजीवियों और उद्योगपतियों को ऐसे तत्वों सावधान रहने और उनके नीच मंसूबों का विरोध करने का अनुरोध किया।

कट्टर मुस्लिमों ने सचिन तेंदुलकर को कर दिया OUT: इजरायल-फिलिस्तीन के चक्कर में लपेटा, बोला – ‘आप लोगों से उम्मीद नहीं’

विश्व के महानतम बल्लेबाजों में से एक भारत के पूर्व क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर ने 18 मार्च 2023 (शनिवार) को अपने इंस्टाग्राम हैंडल से एक फोटो शेयर की। इस फोटो में वो जेरुसलम शहर के अल-अक्सा मस्जिद के आगे खड़े दिखाई दे रहे हैं। तस्वीर की लोकेशन में जेरुसलम इजरायल के पुराने शहर के तौर पर आ रहा है। इस तस्वीर के हैशटैग में सचिन ने #Israel लिखा है। इसके बाद कट्टर मुस्लिम लोग सचिन पर भड़क गए।

सचिन तेंदुलकर ने इस यात्रा का उद्देश्य बताया घूमना-टहलना। उन्हें शायद अंदाजा नहीं होगा कि इजरायल शब्द उनकी इस तस्वीर पर कितना भारी पड़ेगा। इस फोटो पर कुछ कट्टर मुस्लिम लोग आपत्ति दर्ज करा रहे हैं। उनका कहना है कि जेरुसलम इजरायल का नहीं बल्कि फिलिस्तीन का हिस्सा है।

इस तस्वीर में सचिन ने जैकेट पहन रखी है और उनके सिर पर टोपी है। पीछे कुछ अन्य लोग अल-अक्सा के साथ ग्रुप सेल्फी लेते दिखाई दे रहे हैं। सचिन ने अल-अक्सा की 3 अलग-अलग एंगल से तस्वीरें ली हैं जिसमें वो खुद भी दिखाई दे रहे हैं। इन तस्वीरों में कैप्शन के तौर पर सचिन ने लिखा, “मेरा सलाम फ्रॉम जेरुसलम” और इंग्लिश में इजरायल का हैशटैग भी लगाया।

सचिन, जेरुसलम, इजरायल और विवाद

सचिन तेंदुलकर द्वारा जेरुसलम को इजरायल का शहर बताने वाली इस फोटो को 12 लाख से ज्यादा यूजर्स ने लाइक किया है। लेकिन यह कई मुस्लिम यूजर्स को रास नहीं आया। इन यूजर्स में कई लोग खुद को सचिन तेंदुलकर का फैन बताते हुए उनका विरोध कर रहे हैं। कुछ ने कमेंट बॉक्स में जेरुसलम को फिलिस्तीन का बताया है।

नाराजगी जता रहे लोगों में भारत के अलावा कई अन्य देशों के मुस्लिम शामिल हैं। विरोध कर रहे लोगों में अल जजीरा के पत्रकार सैफ खालिद भी शामिल हैं। उन्होंने लिखा है कि भारतीय खेल जगत के सबसे बड़े नाम सचिन तेंदुलकर ने जेरुसलम को इजरायल का बता कर न सिर्फ फिलिस्तीनियों को आहत किया है बल्कि इजरायल के अवैध कब्ज़े को भी जायज ठहराया है।

सचिन तेंदुलकर का विरोध उनके इंस्टाग्राम पर भी जारी है। मुम्शाद अहमद, मुल्ला मोहम्मद उमर और कुरान द गाइडेंस नाम के यूजर्स ने कमेंट करके जेरुसलम को फिलिस्तीन का बताया है। वहीं अशरफ कमाल ने लिखा, “हम बहुत बड़े फैन थे सचिन के लेकिन इन्हीं सबकी वजह से अब फैन नहीं हैं। इजरायल की जगह फिलिस्तीन लिखना चाहिए था लेकिन आप लोगों से उम्मीद भी नहीं है।”

सचिन तेंदुलकर की इंस्टाग्रम प्रोफ़ाइल पर आए कमेंट

हालाँकि कई नेटीजेंस ने सचिन का समर्थन भी किया है। उन्होंने न सिर्फ सचिन की तारीफ की है बल्कि जेरुसलम को इजरायल का ही हिस्सा माना है।

मस्जिद के आगे से गुजरा रामनवमी का जुलूस, DJ सुन कट्टरपंथी मुस्लिम भीड़ भड़की: जलगाँव में पत्थरबाजी के बाद 45 गिरफ्तार, 4 घायल

महाराष्ट्र के जलगाँव से साम्प्रदायिक हिंसा की खबर है। यहाँ विवाद एक मस्जिद के आगे निकल रहे हिन्दुओं के जुलूस में DJ की आवाज को ले कर शुरू हुआ। कुछ ही देर में मामला हिंसक रूप ले लिया। इस दौरान पत्थरबाजी की गई। घटना में कुछ लोग घायल हुए हैं जिनका इलाज अस्पताल में चल रहा है। मामले में 2 FIR दर्ज हुए हैं जिसमें हिन्दू और मुस्लिम दोनों को आरोपित किया गया है। अब तक कुल 45 आरोपितों की गिरफ्तारी की खबर है। घटना मंगलवार (28 मार्च 2023) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह मामला जलगाँव के पालधी गाँव का है। विवाद की शुरुआत तब हुआ जब हिन्दू समाज का एक धार्मिक जुलूस गाँव की मस्जिद के आगे से गुजरा। इस जुलूस का नाम ‘दिंडी’ था जो नासिक जिले से निकल कर जलगाँव के रास्ते होते हुए वाणी जा रहा था। बताया जा रहा है कि इस जुलूस में DJ बज रहा था जिसमें कुछ धार्मिक गाने बजाए जा रहे थे। इन गानों पर मस्जिद और आस-पास के कट्टरपंथी मुस्लिम लोगों ने आपत्ति दर्ज की और इसे बंद करने को कहा।

जानकारी के मुताबिक हिन्दू पक्ष ने थोड़े समय के लिए म्यूजिक बंद कर दिया। थोड़ा आगे जाने के बाद फिर से म्यूजिक बजने लगा। आरोप है कि इसके चलते कुछ लोग उग्र हो उठे। पहले तो दोनों पक्षों में बहस हुई और बाद में विवाद इतना बड़ा कि पत्थर चलने लगे। इस घटना से आस-पास अफरातफरी मच गई। घटना की जानकारी पुलिस को हुई तो उसने मौके पर पहुँच कर हालात को संभाला और हमलावरों को तितर-बितर किया। पुलिस के अनुसार हालात पूरी तरह से नियंत्रण में हैं। इस घटना में 4 लोग घायल हुए हैं जिनको इलाज के लिए भेजा गया।

दोनों पक्षों द्वारा एक दूसरे पर हमले के आरोप लगाए जा रहे हैं। पुलिस के मुताबिक अब तक इस मामले में 2 FIR दर्ज हुई है। एक केस में हिन्दू पक्ष के 9 लोगों को आरोपित किया गया है। वहीं दूसरी FIR में मुस्लिम पक्ष के 63 लोग नामजद हुए हैं। अब तक कुल 45 लोगों की गिरफ्तारी की जा चुकी है। पुलिस का कहना है कि अन्य आरोपितों की तलाश में दबिश दी जा रही है। साथ ही मामले की जाँच चल रही है। दोनों पक्षों द्वारा एक दूसरे पर हमले के आरोप लगाए जा रहे हैं। मुस्लिमों द्वारा अपने साथ लूटपाट के आरोपों को पुलिस ने गलत बताया है।

जहाँ हनुमान जयंती जुलूस पर हमला, दिल्ली के उसी जहाँगीरपुरी में रामनवमी का जुलूस: हिंदू-घृणा से सने लोग हुए अपच के शिकार

देश भर में रामनवमी धूमधाम से मनाई जा रही है। इस बीच मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति भी जारी है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री मुस्लिम इलाकों से जुलूस निकालने पर अंजाम भुगतने की धमकी दे रही हैं। वहीं, दिल्ली में अरविंद केजरीवाल सरकार ने भी दिल्ली के सीमित इलाकों में ही भगवान राम का जुलूस निकालने की इजाजत दी है।

पिछले साल दिल्ली के जहाँगीरपुरी में हनुमान जयंती के जुलूस पर हमला कर दिया गया था। बाद मे बड़े पैमाने पर हिंदुओं को भी निशाना बनाया गया था। जहाँगीरपुरी इलाके के कई हिंदू डर से इलाका छोड़ दिए थे। रामनवमी के शोभा यात्रा के साथ भी यही हुआ था। अब रामनवमी पर जुलूस निकालने से हिंदुओं को रोक दिया गया है।

इस बार भी रामनवमी लोग उमंग और उत्साह से मनाए जा रहे हैं। पिछले साल के हनुमान जयंती की तरह इस बार भी हिंदुओं पर किसी तरह का हमला ना हो, इसके लिए दिल्ली पुलिस ने कड़े इंतजाम किए हैं। इलाके की निगरानी ड्रोन कैमरों से की जा रही हैं। हालाँकि, जहाँगीरपुरी के जिस इलाके में पिछले साल हिंदुओं पर हमले किए गए थे, उस तरफ जुलूस की इजाजत नहीं दी गई है।

हालाँकि, प्रशासन ने जहाँगीरपुरी के एक सीमित इलाके में ही रामनवमी का जुलूस निकालने की अनुमति दे दी है। इसके लिए पुलिस ने जहाँगीरपुरी के रामलीला मैदान के 200 मीटर के दायरे में बैरिकेडिंग की है। इस बैरिकेडिंग के बाहर कोई जुलूस आदि नहीं निकल सकता। हर आयोजक यह सीमा मानने के लिए बाध्य है। हालाँकि, हिंदू शांतिपूर्ण तरीके से भगवान राम का जन्मोत्सव मना रहे हैैं।

शोभा यात्रा को लेकर दिल्ली नॉर्थ-वेस्ट जिले के डीसीपी जीतेंद्र मीणा ने कहा, “पूरे ज़िले में पुलिस तैनात है। जहाँगीरपुरी में एहतियाती व्यवस्था की गई है। जुलूस या शोभा यात्रा की अनुमति नहीं है, लोग पार्क में शांतिपूर्वक रामनवमी मना सकते हैं।” इस दौरान भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है।

हालाँकि, सायमा जैसी कट्टरपंथी सोच रखने वाले लोग जहाँगीरपुरी में सीमित दायरे में भी राम नवमी मनाए जाने को भी बर्दाश्त नहीं कर पा रही हैं। सायमा ने रामनवमी मना रहे लोगों की तस्वीरें रिट्वीट करते हुए लिखा, “ये क्या है?”

शहजाद खान नाम के एक कथित पत्रकार ने लिखा, “जहाँगीरपुरी में रामनवमी जुलूस और रमज़ान प्रेयर दोनों की परमिशन पुलिस ने नहीं दी, लेकिन रामनवमी का जुलूस निकाला गया।”

उमर नाम के एक मुस्लिम यूजर ने लिखा, “देखिए कि रैली करने की अनुमति देने से पुलिस द्वारा इनकार करने के बाद भी वे अपना रास्ता बनाया?”

बता दें कि पिछले साल 16 अप्रैल को दिल्ली के जहाँगीरपुरी इलाके में हनुमान जयंती के जुलूस पर मुस्लिम भीड़ ने हमला कर दिया था। जुलूस शांतिपूर्वक चल रहा था। इसी दौरान इलाके के जामा मस्जिद के पास अंसार शेख और उसके साथी ने जुलूस को रोक दिया। इस दौरान उन्होंने बहस करना शुरू कर दिया। बाद में जुलूस पर पथराव कर दिया गया।

प्राथमिकी के अनुसार, पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया, लेकिन इस्लामवादियों ने आदेशों की अवहेलना की और वाहनों में आग लगा दी। उन्होंने हिंदू श्रद्धालुओं पर पत्थर और कांच की बोतलें भी फेंकी। बाद में सोनू चिकना नाम के एक मुस्लिम व्यक्ति द्वारा जुलूस पर गोलियाँ चलाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

राम मंदिर के सामने पत्थरबाजी और बमबाजी, पुलिस की गाड़ियों को भी लगाई आग: रामनवमी पर महाराष्ट्र के संभाजीनगर में साम्प्रदायिक हिंसा

महाराष्ट्र के संभाजी नगर जिले में साम्प्रदायिक हिंसा की खबर है। यहाँ एक मंदिर के आगे मामूली सी बात से शुरू हुए झगड़े ने हिंसा का रूप ले लिया। इस दौरान हिन्दू और मुस्लिम पक्ष आमने-सामने आ गए। हिंसा के दौरान पत्थरबाजी हुई और पुलिस तथा कुछ स्थानीय लोगों के वाहनों में आग लगा दी गई। घटना में कुछ पुलिस वालों सहित स्थानीय लोग घायल हुए हैं, जिनका इलाज करवाया जा रहा है। मौके पर भारी पुलिस फ़ोर्स तैनात किया गया है। घटना बुधवार (29 मार्च 2023) की है।

यह मामला संभाजी नगर के किराड़पुर का है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 29-30 मार्च को संभाजी नगर स्थित भगवान राम के एक मंदिर के आगे 2 युवकों में किसी बात को लेकर बहस हो गई। दोनों ही अलग-अलग समुदाय से हैं। थोड़ी ही देर में दोनों पक्षों के लोग आमने-सामने आ गए।

आरोप है कि इस दौरान न सिर्फ पत्थरबाजी की गई बल्कि बम भी फेंके गए। हालात को संभालने पहुँची पुलिस के वाहनों को भीड़ ने जला दिया और आस-पास खड़े वाहनों को भी नुकसान पहुँचाया। बताया जा रहा है कि विवाद करने वालों में कई लोग ड्रग्स के नशे में थे।

इस घटना के दौरान इलाके में तोड़फोड़ और आगजनी भी की गई है। पुलिस का कहना है कि आरोपितों को चिन्हित करके उन पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। सामने आ रहे घटना के कुछ विजुअल में पुलिस को जलाए गए वाहनों को हटाते भी देखा जा सकता है।

सुदर्शन न्यूज के प्रधान सम्पादक सुरेश चव्हाणके ने इस विजुअल को शेयर करते हुए राम मंदिर पर हमले का आरोप लगाया है। उन्होंने पुलिस प्रशासन से आरोपितों की गिरफ्तारी के बावत सवाल भी किया है।

स्थानीय सांसद इम्तियाज जलील का दावा है कि मंदिर को किसी भी प्रकार का कोई नुकसान नहीं पहुँचा है। उन्होंने बताया कि न सिर्फ मंदिर बल्कि उसके सभी पुजारी और भक्त आदि पूरी तरह से सुरक्षित हैं। महाराष्ट्र सरकार में मंत्री अतुल सावे ने भी मंदिर को पूरी तरह से सुरक्षित बताते हुए पुलिस से उपद्रवियों पर कड़ी कार्रवाई की उम्मीद जताई है।

फ़िलहाल संभाजी नगर में हालात काबू में बताए जा रहे हैं। पुलिस ने फुटेज आदि के आधार पर आरोपितों की पहचान शुरू कर दी है। प्रशासन का दावा है कि उपद्रवियों को गिरफ्तार करके कड़ी सजा दिलाई जाएगी।

रमजान में भीड़ पढ़ रही थी दुनिया की सबसे बिजी सड़क पर तरावीह की नमाज… आटे के चक्कर में मर गए 11 पाकिस्तानी

पाकिस्तान में रमजान के दौरान आटे के लिए हुई छीना-झपटी में अकेले पंजाब प्रांत में ही 11 लोगों की जान चली गई है। ये लोग सरकार द्वारा बाँटे जा रहे फ्री का आटा लेना चाह रहे थे। ये मौतें अलग-अलग दिनों में अलग-अलग स्थानों में हुई हैं। मृतकों में महिलाएँ भी शामिल हैं। जब एक तरफ पाकिस्तान में आटे के लिए त्राहि-त्राहि मची है, तब उसी समय अमेरिका के टाइम्स स्क्वायर पर नमाज़ पढ़ी जा रही थी। इस कार्यक्रम में सैंडविच और पिज्जा बाँटा जा रहा था।

पहला मामला पाकिस्तान का है, जहाँ आटे की किल्लत ने जानलेवा रूप ले लिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अकेले पंजाब प्रांत में फ्री का आटा पाने के चक्कर में अब तक 11 लोग जान से हाथ धो बैठे हैं। मरने वालों में औरतें भी शामिल हैं। 11 मौतों के अलावा 60 पाकिस्तानी घायल भी हुए हैं। यह मारामारी ख़ास तौर पर दक्षिणी पंजाब के साहीवाल, बहावलपुर, मुजफ्फरगढ़ और ओकारा जिलों में मची है। इसके अलावा फैसलाबाद, जेहनियाँ और मुल्तान में भी आटे की छीना-झपटी में हिंसक घटनाओं की खबर है।

बताया यह भी जा रहा है कि कई जगहों पर हालात को काबू करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा है। पुलिस ने आटा बाँट रहे सेंटरों पर जरूरी इंतजाम न होने का आरोप लगाया है। पंजाब प्रांत के मुख्यमंत्री मोहसिन नकवी ने फ्री आटा सेंटरों की अव्यवस्था पर नाराजगी जताते हुए इसे दुरुस्त करने का फरमान सुनाया है। बुधवार (29 मार्च 2023) को CM नकवी ने फ्री आटा सेंटरों को सुबह 6 बजे से खोलने के निर्देश दिए हैं।

पाकिस्तान में नहीं आटा, अमेरिका में पिज्जा बाँटा

पाकिस्तान में फ्री का आटा पाने के लिए सिर्फ एक प्रदेश में 11 लोग मर गए। लगभग इसी समय-काल में अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर में प्रसिद्ध जगह टाइम्स स्क्वायर पर नमाज़ के दौरान हजारों खाने के पैकेट बाँट दिए गए। इसमें पिज्जा, सैंडविच आदि शामिल हैं।

लगातार दूसरे साल इसी जगह पर हुई नमाज़ में अमेरिका के अलग-अलग शहरों से मुस्लिम लोग जमा हुए। तरावीह की इस नमाज़ के दौरान सड़क को काफी समय के लिए पूरी तरह से जाम कर दिया गया। आपको बता दें कि टाइम्स स्क्वायर दुनिया की सबसे व्यस्त सड़कों-पैदल यात्रियों के लिए मशहूर है। ‘सड़क जाम करो और नमाज पढ़ो’ वाला स्टाइल अब अमेरिका भी पहुँच गया है और टाइम्स स्क्वायर पर इसके आयोजकों का कहना है कि वो हर साल ऐसा करने के लिए प्रेरित हैं।

मस्जिद में लड़के का रेप… बुलाया था रमजान में दुआ के बहाने: जिस मौलवी को पूरी कुरान कंठस्त, वो हुआ गिरफ्तार

पाकिस्तान के गुजरात जिले में मस्जिद के एक मौलवी पर युवक के साथ अप्राकृतिक दुष्कर्म का आरोप लगा है। पीड़ित को रमज़ान के महीने में दुआओं का बहाना लेकर मस्जिद में बुलाया गया था। आरोपित मौलवी का नाम मोहम्मद रियाज़ है। पुलिस ने इस घटना की FIR दर्ज कर ली है। पुलिस ने आरोपित मौलवी को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया है। सोमवार (27 मार्च 2023) को पुलिस ने आरोपित मौलवी की गिरफ्तारी की पुष्टि की है।

पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामले में दर्ज FIR के मुताबिक यह घटना 9-10 मार्च 2023 की है। घटना थाना शाहीन चौक की है। पीड़ित ने अपनी शिकायत में बताया है कि 9 मार्च की रात को जामा मस्जिद के मौलवी मुहम्मद रियाज ने उसे फोन करके अपने पास बुलाया। मौलवी ने रमजान के महीने में दुआएँ आदि पढ़ाने का बहाना बनाया था। रात में तरावीह की नमाज़ के बाद पीड़ित को मौलवी ने मस्जिद में ही सोने के लिए रोक लिया। आरोप है कि इस दौरान युवक को रियाज़ ने खाने में कुछ नशीला पदार्थ मिला कर दे दिया था।

पीड़ित ने बताया कि रात में वह बेसुध हो गया था। जब उसे सुबह होश आया तो पीड़ित ने देखा कि मौलवी रियाज़ उसका रेप कर रहा था। जब युवक ने मौलवी को रोकने की कोशिश को तो उसे मुँह बंद रखने की धमकी देने लगा। आरोप है कि मौलवी ने पीड़ित को रात भर गालियाँ दीं और पिटाई भी की।

युवक ने अपनी शिकायत में मौलवी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग की है। पुलिस ने इस शिकयत पर पाकिस्तान पीनल कोड की धारा 377 के तहत FIR दर्ज की। आरोपित मौलवी को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया गया है। पुलिस के मुताबिक मामले की जाँच की जा रही है। आरोपित मौलवी मस्जिद में लोगों को दीनी तालीम दिया करता था। वह कुरान में हाफिज बताया जा रहा है।

राहुल, गाँधी परिवार, भारत के लुटेरे… भौंकते रहो: ललित मोदी ने 3 ट्वीट में कॉन्ग्रेसियों की हवा निकाल दी

मोदी सरनेम को लेकर आजकल कॉन्ग्रेसी नेता कुछ ज्यादा ही उछल रहे हैं। ‘हर चोर का मोदी सरनेम क्यों’ मामले में राहुल गाँधी को जब से 2 साल की सजा सुनाई गई है, तब से उनकी पार्टी के नेता बिलबिलाए हुए हैं, कुछ भी अल-बल बक रहे हैं। अब लेकिन करारा जवाब मिला है… वो भी मोदी सरनेम वाले से ही, ललित मोदी की ओर से।

ललित मोदी ने 30 मार्च 2023 को 3 ट्वीट किए। तीनों में निशाने पर रहे राहुल गाँधी, उनकी पार्टी कॉन्ग्रेस और उनके भ्रष्टाचारी नेता लोग। पहली ही ट्वीट में ललित मोदी ने क्लियर कर दिया कि वो राहुल गाँधी पर केस करने वाले हैं लंदन की अदालत में। सासंदी छिनने के बाद आम आदमी कहते हुए उन्होंने राहुल गाँधी को चेतावनी भी दी कि कोर्ट में सॉलिड बचाव के साथ आना है।

ललित मोदी ने लिखा:

“मैं देख रहा हूँ कि हर ऐरा-गैरा और गाँधी मुझे भगोड़ा कह रहा। क्यों? कैसे? क्या अब तक मुझे कभी भी इसके लिए दोषी ठहराया गया? जबकि इसके विपरीत #Papu उर्फ राहुल गाँधी को तो सजा भी सुना दी गई है, अब वो एक सामान्य नागरिक है… वो यह बोल रहा है। और ऐसा लगता है कि सभी विपक्षी नेताओं के पास करने के लिए और कुछ नहीं है, इसलिए वे भी या तो गलत जानकारी रखते हैं या सिर्फ बदले की भावना रख कर ऐसा बोल रहे हैं।”

ललित मोदी ने इसी ट्वीट में अपने लिए फैसले पर बात की। उन्होंने लिखा कि वो राहुल गाँधी पर इंग्लैंड की अदालत में केस करेंगे। साथ ही कटाक्ष या चेतावनी भरे लहजे में यह भी लिखा कि राहुल को ठोस सबूतों के साथ आना होगा क्योंकि वो उत्सुक हैं उन्हें पूर्ण रूप से #मूर्ख बनते हुए देखने के लिए।

इसी ट्वीट में ललित मोदी ने कुछ कॉन्ग्रेसी नेताओं का नाम भी लिखा। इन नेताओं को गाँधी परिवार ने कैसे यूज किया, उसे उजागर किया। उन्होंने लिखा, “आरके धवन #सीताराम केसरी #मोती लाल वोहरा आदि सभी गाँधी परिवार के लिए पंचिंग बैग रहे हैं। #नारायण दत्त तिवारी को भी नहीं भूलना चाहिए।”

दूसरे ट्वीट में ललित मोदी ने कॉन्ग्रेसी नेताओं के भ्रष्टाचार पर वार किया। उन्होंने डायरेक्ट सवाल किया कि इन लोगों के पास विदेशों में संपत्ति कैसे है? खुद ही जवाब देते हुए “कमलनाथ से पूछो” वाला सूत्र भी दे दिया। इतना ही नहीं, ललित मोदी ने एक कदम आगे बढ़ कर यह भी लिख डाला कि वो इन संपत्तियों के पते और फोटो आदि भेज सकते हैं। इसके बाद उन्होंने लिखा:

“भारत की जनता को बेवकूफ मत बनाओ। असली धूर्त और बदमाश कौन है, सब जानते हैं। #गाँधी परिवार न हो गया मानो वे हमारे देश पर शासन करने के हकदार हैं। और हाँ, जैसे ही आप कड़े कानून पारित करेंगे, मैं वापस आ जाऊंगा। ? जय-हिंद”

IPL पर बोलते हुए ललित मोदी ने लिखा कि उन्होंने पिछले 15 सालों में आज तक एक पैसा भी लिया हो, यह साबित नहीं हुआ है। हाँ, यह स्पष्ट रूप से सिद्ध हो गया है कि उन्होंने इस दुनिया में सबसे बड़ा खेल आयोजन बनाया, जिसने 100 बिलियन डॉलर के करीब बिजनेस किया।

तीसरे और अंतिम ट्वीट में उन्होंने याद दिलाया कि एक कॉन्ग्रेसी नेता को यह नहीं भूलना चाहिए कि 1950 के दशक की शुरुआत से ही मोदी-परिवार ने उनके लिए और भारत देश के लिए इतना कुछ किया है जिसकी वे कभी कल्पना भी नहीं कर सकते। अपनी तारीफ करते हुए उन्होंने लिखा कि जितना करने का सपना देखा था, उससे कहीं अधिक किया। अन्त में सबसे मारक लाइन ललित मोदी ने लिखी:

“इसलिए गाँधी परिवार की तरह घोटालेबाज, दागदार, भारत के लुटेरे… भौंकते रहो ? जय हिन्द।”