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‘सलाखों के पीछे होंगे केजरीवाल, कानून घसीट कर लाएगा नीचे’: दिल्ली BJP के नए अध्यक्ष ने बताई पार्टी की रणनीति, बोले – राहुल ने चुराया गाँधी सरनेम

दिल्ली में हाल ही में हुए MCD के चुनावों में भाजपा को 104 सीटें मिलीं, जबकि 134 सीटें जीत कर AAP ने अपना मेयर बनाया। भाजपा पिछले 25 वर्षों में दिल्ली की सत्ता से बाहर है, अब MCD में भी उसे हार का सामना करना पड़ा। ऐसे में पार्टी ने आदेश गुप्ता की छुट्टी कर के वीरेंद्र सचदेवा को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया। अब उन्हें पूर्णकालिक अध्यक्ष की जिम्मेदारी दे दी गई है। ऑपइंडिया ने उनसे कई मुद्दों पर बातचीत की और जानने की कोशिश की कि दिल्ली में भाजपा अब कैसे आगे बढ़ेगी?

आप RSS से जुड़े रहे हैं और भाजपा में भी आपने जमीनी काम किया है। ऐसे में आप अपने शुरुआती राजनीतिक करियर के बारे में बताएँ।
संघ के विचार से तो मेरा पूरा परिवार जुड़ा हुआ है। मेरे पिताजी भी स्वयंसेवक रहे हैं। मैं भी स्वयंसेवक हूँ। मेरी जो पहली राजनीतिक जिम्मेदारी थी, वो मुझे 1989 में मिली थी। तब मुझे सीतारमैय्या मंडल में 78 नंबर समिति का अध्यक्ष बनाया गया था। लोकसभा का चुनाव आया, जो हम जीत नहीं पाए थे। लेकिन, मेरे काम को देखते हुए पार्टी ने मुझे जिम्मेदारी दी थी। उस समय जो यात्रा शुरू हुई, वो अब तक अनवरत जारी है। पार्टी जो काम देती है, वो मैं करता हूँ। मेरे लिए पद महत्वपूर्ण नहीं है, पार्टी कौन सा कार्य सौंप रही है ये महत्वपूर्ण है।

क्या आपको नहीं लगता कि इस बार पार्टी ने आपको काँटों का ताज पहना दिया है? भाजपा पिछले 25 वर्षों से दिल्ली की सत्ता से बाहर है, अब MCD भी पार्टी के हाथ में नहीं रही। ऐसे में आपको नहीं लगता कि मुश्किल समय में एक चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारी आपको दी गई है?
सबसे पहली बात तो ये कि मैं इसे ताज नहीं मानता। हम सब कार्यकर्ता हैं और कार्यकर्ता को जो कार्य दिया जाता है वो करते हैं। आपने कहा कि MCD में हम चुनाव हारे हैं। 15 वर्ष हमने दिल्ली की सेवा की, कुछ कारण रहे होंगे कि हमारी सीटें कम हुईं। लेकिन, इस चुनाव में एक बात साफ़ कर दी कि भले ही दिल्ली में हम सरकार बनाने में कामयाब नहीं रहे लेकिन दिल्ली की जनता का दिल हमने जीता। हमारी विरोधी पार्टी हमें 30-40 पर खत्म कर रही थी, लेकिन हम आज 106 पर हैं और उनसे ज्यादा दूर नहीं हैं। इसीलिए मैं कहता हूँ कि कुछ कारण रहे हैं जिन पर हमने समीक्षा भी की है। हमें लगता है कि हमें और बेहतर परिणाम की उम्मीद थी। क्योंकि, 10 सीटें ऐसी थीं जिन पर हम 500 से भी कम वोटों से हारे हैं। 14 सीटें ऐसी हैं, जिन पर हम 500-1000 के बीच वोटों से हारे हैं। अगर ये 24 सीटें हमारे पक्ष में होतीं तो परिणाम कुछ और होता। मैं इस चुनाव को हारा हुआ नहीं मानता। परिणाम हमारे अनुकूल नहीं आए, लेकिन भाजपा की हार नहीं हुई।

जैसा कि भाजपा के संगठन के कामकाज का तरीका रहा है, MCD में सीटें कम होने के बाद इस पर मंथन तो हुआ होगा, समीक्षा हुई होगी। इसमें क्या कुछ सामने आया?
हमारे हर चुनाव के बाद, चाहे उसका परिणाम कुछ भी हो, पक्ष में हो या विपक्ष में हो – हम उसकी समीक्षा ज़रूर करते हैं। इन्हीं समीक्षा बिंदुओं के ऊपर हमारी रणनीति तैयार की जाती है और हम आगे का काम करते हैं।

हाल ही में दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री शराब घोटाला में जेल गए। दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री रहे सत्येंद्र जैन भी मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों में जेल में हैं। इन मुद्दों को जनता तक ले जाने के लिए भाजपा क्या कर रही है?
देखिए, अगर आप थोड़ा पीछे जाएँगे तो पाएँगे कि भाजपा संगठन पिछले 1 साल से दिल्ली की शराब एवं आबकारी नीति के खिलाफ सड़क पर प्रदर्शन कर रहा है। इसी का परिणाम है कि दोनों भ्रष्टाचारी आज जेल में हैं। वरना, दिल्ली के ये जो फ्रॉड चीफ मिनिस्टर हैं, जिन्हें मैं नकली मुख्यमंत्री कहता हूँ, ये तो सत्येंद्र जैन को भारत रत्न देने की बात कर रहे थे। अब कहाँ हैं सत्येंद्र जैन? आप जिनके बारे में कह रहे हैं कि हम आरोप लगा रहे हैं, असल में वो आरोपित नहीं बल्कि दोषी हैं। तभी उन्हें जमानत नहीं मिली। मनीष सिसोदिया ने फीडबैक के मामले में भी भ्रष्टाचार किया है। हम दिल्ली की जनता की लड़ाई लड़ रहे हैं और आने वाले दिनों में आप देखेंगे कि अरविंद केजरीवाल भी सलाखों के पीछे होंगे। ये दिल्ली के पहले मुख्यमंत्री हैं, जिनके दो-दो मंत्री जेल में हैं। फीडबैक यूनिट की रिपोर्ट आप देख लीजिए, इनके जो स्पेशल एडवाइजर सिन्हा थे – उन्होंने बताया है कि उन्हें इंस्ट्रक्शंस मिले थे कि सारी रिपोर्ट्स अरविंद केजरीवाल को दी जाए। इसका मतलब है कि सारे निर्देश वहीं से आ रहे थे। शराब घोटाले में इसी अरविंद केजरीवाल के बारे में IAS अधिकारी ने बताया है कि उन्हें CM आवास बुला कर शराब नीति में क्या-क्या बदलाव करना है ये बताया गया, सीएम के सामने। अरविंद केजरीवाल अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते। मनीष सिसोदिया का साथ देने के लिए उन्हें जाना होगा।

लेकिन, अरविंद केजरीवाल अपने पास कोई मंत्रालय रखते ही नहीं हैं, फाइलों पर उनके हस्ताक्षर होते नहीं। भाजपा इस चीज को कैसे देखती है?
अरविंद केजरीवाल को लगता है कि वो ये कह कर बच सकते हैं कि फाइलों पर उनके हस्ताक्षर नहीं हैं, लेकिन जिस मंत्रिपरिषद ने निर्णय लिया उसके मुखिया वही हैं। और, मुखिया होने के नाते वो जिम्मेदारियों से बच नहीं सकते। उन्हें ये जिम्मेदारी स्वीकार करनी पड़ेगी। अगर वो ऐसा नहीं करेंगे, तो भाजपा दिल्ली की जनता के साथ संघर्ष कर रही है और इसका परिणाम जल्द ही देखने को मिलेगा।

अरविंद केजरीवाल के मुकाबले दिल्ली भाजपा का चेहरा कौन है? वो अक्सर सुर्ख़ियों में रहते हैं, ऐसे में किसके नेतृत्व में भाजपा आगे बढ़ेगी? चेहरा कौन है? क्या आप ही पार्टी का चेहरा हैं?
मैंने व्यक्तव्य दे दिया है कि 2025 तक मैं कोई चुनाव नहीं लड़ूँगा। विधानसभा चुनाव 2025 में होने हैं। मेरा लक्ष्य है कि भाजपा को चुनाव जिता कर किसी भाजपा कार्यकर्ता को मुख्यमंत्री बनाना। भाजपा का हर कार्यकर्ता सीएम बनने में सक्षम है, यहाँ चेहरों की कमी नहीं है। जो नकली चेहरे हैं, जो नकाब ओढ़े चेहरे हैं, जो भ्रष्टाचार में डूबे चेहरे हैं, उनका नकाब हम हटाएँगे ये तय है। हमारे यहाँ सामूहिक नेतृत्व होता है। भाजपा का हर कार्यकर्ता मिल कर इस सरकार को उखाड़ फेंकेगा।

इन चर्चाओं के बीच आप कॉन्ग्रेस को कहाँ देखते हैं? हाल ही में राहुल गाँधी को 2 साल की सज़ा हुई, उनकी संसद सदस्यता खत्म हुई और अब उन्हें सरकारी आवास खाली करने को कह दिया गया है। आपको लगता है कि इसके खिलाफ आंदोलन खड़ा कर के कॉन्ग्रेस अपने लिए सहानुभूति लहर पैदा करेगी? क्या दिल्ली में कॉन्ग्रेस फिर से खड़ा हो जाएगी?
कॉन्ग्रेस का खड़ा होना या न होना, ये उनका विषय है। उस पर मैं टिप्पणी नहीं कर सकता। रही बात राहुल गाँधी को सज़ा होने की तो ये निर्णय कोर्ट ने दिया है, भाजपा ने इसमें कुछ नहीं किया है। रही बार घर खाली कराने की तो ये है तय प्रक्रिया है। अगर आप सांसद नहीं रहे तो आपको सरकारी सुविधाएँ छोड़नी पड़ेंगी। जहाँ तक बात माफ़ी की है, खुद गाँधी नाम उन्होंने चुराया हुआ है। उसे हम क्या उम्मीद कर सकते हैं। जहाँ तक उनका ये बयान है कि ‘मैं सावरकर नहीं हूँ’, इस पर मैं कहना चाहता हूँ कि आप सावरकर बन भी नहीं सकते। उसके लिए त्याग, समर्पण और धैर्य चाहिए। देश के प्रति निष्ठा चाहिए, जो राहुल गाँधी और उनके परिवार में नहीं है। वीर सावरकर पर कुछ भी टिप्पणी करने से पहले राहुल गाँधी को खुद के परिवार की जन्मकुंडली देखनी चाहिए। मैं कॉन्ग्रेस को शुभकामनाएँ देता हूँ कि वो अच्छा करे (इस सवाल पर कि उसका प्रदर्शन आगे कैसा रहेगा)।

दिल्ली की प्रदेश भाजपा में गुटबाजी को लेकर चचाएँ होती हैं और कहा जाता है कि सब किसी मुद्दे पर एक साथ नहीं आ पाते। इससे आप कैसे निपटेंगे?
मैं ये बताना चाहता हूँ कि भारतीय जनता पार्टी में सिर्फ एक ही गुट है और वो है हमारी विचारधारा का गुट। उस गुट में हम सभी शामिल हैं और हम सबका कार्य है कि हम उस विचारधारा पर चलें, जिसका नेतृत्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कर रहे हैं। गरीब कल्याण हमारा उद्देश्य है। दिल्ली में लोकसभा की सातों सीटें जीतना और इस भ्रष्ट AAP सरकार को उखाड़ फेंकना हमारा लक्ष्य है।

आप पंजाबी समुदाय से आते हैं। इससे पहले दिल्ली भाजपा का अध्यक्ष पद पूर्वांचल को जाता रहा है। आपके पास चुनौती है पंजाबियों और पूर्वांचलियों को एक साथ साधने की?
मुझे इस पर हैरानी होती है जब हम किसी व्यक्ति को जात-पात से जोड़ते हैं। इसमें मेरा क्या योगदान है, अगर मैं पंजाबी परिवार में पैदा हुआ? दिल्ली पूरे भारत का प्रतिनिधित्व करती है। ये ऐसा प्रदेश है, जहाँ देश का प्राण बसता है। यहाँ जितने भी लोग हैं, हम सब भाई हैं और मेरा कार्य है सभी को एक सूत्र में पिरो कर चलना। एक ही माला के मोती सब हैं – कोई पूर्वांचल का होगा, कोई पंजाबी होगा, कोई वैश्य होगा, कोई उत्तराखंड-हिमाचल से होगा – ये विषय नहीं है। हम सब मोती हैं और एक माला में पिरो कर इसे बनाना हमारा लक्ष्य हैं।

आपने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पार्टी का चेहरा हैं, AAP अब सीधे उन पर हमला कर रही है। उन पर पोस्टर लगाए जा रहे हैं, कई भाषाओं में। इस पर FIR भी हुए। AAP की इस रणनीति को आप कैसे देखते हैं?
जिसे आप रणनीति बता रहे हैं, उसे मैं कमजोरी कहता हूँ। आपने जिस पोस्टर की बात की, दिल्ली में या पूरे भारत में पोस्टर लगाने की कोई पाबंदी नहीं है लेकिन आपको कानून का पालन करना पड़ेगा। दिल्ली के कानून के हिसाब से ये प्रावधान है कि पोस्टर पर अपना नाम, प्रिंटर का नाम और पता लिखा होना चाहिए। जिन पोस्टरों पर FIR दर्ज हुई है, उनमें इस कानून का उल्लंघन किया गया था। AAP पर पोस्टर के मामले पर नहीं, कानून के उल्लंघन पर मामला दर्ज हुआ। अरविंद केजरीवाल की मैं मानसिकता बताता हूँ, ये बड़े अच्छे भविष्यवक्ता हैं। इन्हें पता था कि सत्येंद्र जैन जेल जाने वाले हैं, उन्होंने सत्येंद्र जैन को भारत रत्न देने की माँग करते हुए पूरे मीडिया में माहौल बनाया। इन्हें पता था मनीष सिसोदिया जेल जाने वाले हैं, तो इन्होंने सिसोदिया को शिक्षा क्रांति का श्रेय देते हुए पद्मश्री देने की माँग की। आज मनीष सिसोदिया धार्मिक किताबें पढ़ रहे हैं। अरविंद केजरीवाल को भी पता है कि उन्हें कहाँ जाना है, इसीलिए वो सीधा-सीधा प्रधानमंत्री पर हमला कर रहे हैं। कल जब कानून अपना काम करेगा और अरविंद केजरीवाल को घसीट कर नीचे लाएगा, तब वो ये आरोप लगा सकें कि उन्होंने प्रधानमंत्री पर टिप्पणी की थी इसीलिए ऐसा किया गया – इसके लिए वो ग्राउंड तैयार कर रहे हैं। लेकिन, दिल्ली की जनता जानती है कि अरविंद केजरीवाल को अपना हश्र मालूम है।

भाजपा हमेशा से हिंदुत्व की पक्षधर रही है। आजकल खबरें चल रही हैं कि पार्टी मुस्लिमों के बीच अपनी पैठ बना रही है, खासकर पसमांदा समाज में। क्या इसके लिए कोई रणनीति बनी हुई है?
एक तो हिन्दू शब्द की अवधारणा समझने की ज़रूरत है। हिंदुस्तान में रहने वाला हर व्यक्ति हिन्दू है। उसका धर्म क्या है, ये विषय नहीं है। जहाँ तक बात है मुस्लिम समाज की, प्रधानमंत्री का एक ही मत है – सबका साथ, सबका विकास, सबका प्रयास। जब हम सबके साथ की बात करते हैं तो इसमें हिन्दू-मुस्लिम-सिख-ईसाई सब शामिल हैं। प्रधानमंत्री ने पसमांदा या बोहरा समाज की बात की, उससे उनका अभिप्राय समाज के हर उस वर्ग से है जो उपेक्षित है। वो मुस्लिम समाज में भी हो सकता है, हिन्दू या इसे में भी हो सकता है। सबको साथ लेकर उनका उत्थान करना हमारा लक्ष्य है। जो भी हमारे साथ जुड़ेगा, उनका स्वगात है। अगर आप दिल्ली नगर निगम के पिछले चुनाव के आँकड़े देखें, तो जिस मुस्लिम समाज को भाजपा के लिए अछूत माना जाता है, 70,000 से ज्यादा वोट हमें मुस्लिम समाज से मिला है। ये पहले के मुकाबले सुधार है और आगे और बढ़ेगा।

‘हिन्दुओं के खिलाफ भी दिए जाते हैं द्वेषपूर्ण भाषण, सेलेक्टिव न हो सुप्रीम कोर्ट’: हेट स्पीच पर सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल की दो टूक, SC ने सरकारों को कहा नाकाम

बुधवार (23 मार्च, 2023) को हेट स्पीच मामले में सुप्रीम कोर्ट में दूसरे दिन भी सुनवाई हुई। इस दौरान अदालत में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने याचिका कर्ता की मंशा पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता ने कुछ सेलेक्टिव खबरों के आधार पर याचिका दायर की है। तुषार मेहता ने कहा कि हिंदुओं के खिलाफ भी लगातार द्वेषपूर्ण भाषण दिए जा रहे हैं। कोर्ट को इसमें सेलेक्टिव नहीं होना चाहिए।

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट शाहीन अब्दुल्ला की याचिका पर सुनवाई कर रही है। बुधवार को केएम जोसेफ और बीवी नागरत्ना की पीठ ने मामले पर सुनवाई की। इस दौरान कोर्ट ने हेट स्पीच को लेकर कई सख्त टिप्पणियाँ की। कोर्ट ने कहा कि हम इन याचिकाओं पर इसलिए सनवाई कर रहे हैं क्योंकि राज्य सरकारें समय पर कार्रवाई नहीं कर पा रही हैं। राज्य सरकारें इन मामलों में नाकाम और शक्तिहीन हो चुकी हैं।

सुप्रीम कोर्ट की तरफ से कहा गया कि हर दिन असामाजिक तत्व इस तरह के भाषण दे रहे हैं जिससे समाज में बैर की भावना पनप रही है। कोर्ट में तुषार मेहता और जजों के बीच तीखी बहस भी देखने को मिली। तुषार मेहता ने हिंदुओं के खिलाफ दिए गए कई बयानों का उल्लेख किया। उन्होंने केरल के एक कार्यक्रम में फैलाए जा रहे हिंदू घृणा और तमिलनाडु में डीएमके नेता द्वारा ब्राह्मणों के वध की बात करने का उल्लेख किया।

सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि याचिका कर्ता ने इन घटनाओं का उल्लेख अपनी याचिका में नहीं किया है। याचिका कर्ता अब्दुल्ला ने खास घटनाओं को ही अपने पेटिशन में शामिल किया है जो उनकी मंशा जाहिर करता है। कोर्ट को ऐसे मामलों में सेलेक्टिव नहीं होना चाहिए। इस पर जस्टिस जोसेफ ने कहा कि हर क्रिया की प्रतिक्रिया होती है। तुषार मेहता ने इसपर अदालत से इस तरह की टिप्पणी न करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि इससे इस तरह के हेट स्पीचों को उचित ठहराया जाना माना जाएगा।

एसजी तुषार मेहता ने कहा कि यदि इन मामलों को वास्तव में कम करना है तो ऐसे मामलों में किसी खास धर्म, वर्ग या राज्य की बात न कर के सभी मामलों को एक साथ देखना होगा। कोर्ट ने 28 अप्रैल 2023 को ममले पर विचार करने की बात कही है।

जिस दिन अतीक को सुनाई गई उम्रकैद, उसी दिन MLA पूजा पाल के भाई पर बम से हमले का दावा: सज़ा देने वाले जज की सुरक्षा भी बढ़ी

बसपा विधायक राजू पाल हत्याकांड में प्रमुख गवाह उमेश पाल के अपहरण मामले में गैंगस्टर अतीक अहमद समेत 3 अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। इसके बाद सजा सुनाने वाले जज को वाई कैटेगरी की सुरक्षा उपलब्ध कराई गई है। इसी बीच राजू पाल की पत्नी पूजा पाल (Pooja Pal) के भाई राहुल पाल ने पुलिस में शिकायत करके कहा है कि उन पर बम से हमला किया गया है।

राहुल पाल ने अपनी तहरीर में कहा है कि वह मंगलवार (28 मार्च 2023) की शाम को अपनी कार से कहीं जा रहे थे। इसी दौरान प्रीतम नगर और नीवा नगर में क्षेत्र में उनकी कार पर बम से हमला किया गया। उस समय उनकी कार के पीछे धमाके की आवाज आई और जब उन्होंने पलटकर देखा तो धुँआ उड़ता दिखा। इसके बाद एक और धमाका हुआ।

घटना के अगले दिन यानी बुधवार (29 मार्च 2023) को राहुल पाल ने प्रयागराज के धूमनगंज पुलिस थाने में इसकी शिकायत दी। शिकायत मिलने के बाद पुलिस मामले की जाँच कर रही है। पुलिस इस मामले की सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है।

बता दें कि मंगलवार को ही उमेश पाल के अपहरण केस में अतीक अहमद सहित तीन लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। वहीं, 7 आरोपियों को कोर्ट ने बरी कर दिया है। उमेश पाल बसपा (BSP) विधायक राजू पाल की पत्नी पूजा पाल के मौसेरे भाई हैं। इस मामले में वह मुख्य गवाह थे। राजू पाल की सन 2005 में हत्या कर दी गई थी और उमेश पाल की इस साल फरवरी में। इन दोनों हत्या का आरोप अतीक अहमद पर है।

फैसला सुनाने के बाद हालात को देखते हुए जज डॉ. दिनेश चंद्र शुक्ला की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्हें वाई श्रेणी की सुरक्षा प्रदान की गई है। जज के साथ 8 सुरक्षाकर्मी रहेंगे, जिनमें दो कमांडो रहेंगे। इसी वर्ष परतापुर से सपा विधायक विजमा यादव को भी 22 साल पुराने एक मामले में दिनेश शुक्ला ने डेढ़ साल की सजा सुनाई है।

गुजरात के साबरमती जेल से प्रयागराज सुनवाई के लिए लाए गए अतीक अहमद को वापस साबरमती जेल भेज दिया गया है। वहीं, अतीक के भाई अशरफ को प्रयागराज कोर्ट में पेशी के बाद बरेली जिला जेल दिया गया है। वहीं, अशरफ ने सीएम योगी से गुजारिश की है कि उस पर दर्ज फर्जी मुकदमों का संज्ञान लें।

‘जेल में डालने की धमकी दी’: भोपाल में मंदिर में लाउडस्पीकर बजाने पर SDM ने संचालक को थमाई नोटिस, बोला प्रशासन – लोगों ने की शिकायत, दिया जा रहा धार्मिक रंग

मध्य प्रदेश के भोपाल में एक मंदिर संचालक को नोटिस देकर लाउडस्पीकर हटाने का आदेश दिया गया है। इसके बाद से मंदिर में भजन-कीर्तन और सुंदरकाण्ड का पाठ बंद है। हिंदू संगठनों ने इस पर आपत्ति जताई है। मंदिर पक्ष का कहना है कि नवरात्रि का त्योहार चल रहा है, ऐसे में मंदिरों में लाउडस्पीकर नहीं बजेंगे तो कहाँ बजेंगे। वहीं एसडीएम राजेश गुप्ता का कहना है कि इलाके के लोगों ने मंदिर में तेज आवाज में लाउडस्पीकर बजने की शिकायत दी थी।

मामला भोपाल के अवधपुरी स्थित खाम्बरा मंदिर का है। एसडीएम राजेश गुप्ता की तरफ से नोटिस प्राप्त होने के बाद मंदिर संचालक ने एक वीडियो जारी किया। वीडियो में संचालक नोटिस मिलने की बात कहते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से कार्रवाई की माँग कर रहे हैं। मंदिर संचालक का कहना है कि किसी की झूठी शिकायत पर एसडीएम ने बिना जाँच किए उनके खिलाफ नोटिस जारी कर दिया। मंदिर प्रबंधक को एसडीएम राजेश गुप्ता ने 20 मार्च 2023 को नोटिस दिया था। उन्हें 28 मार्च को ऑफिस में बुलाया गया था। मंदिर संचालक के बेटे लक्ष्य खामरा एसडीएम के सामने पेश हुए थे।

संचालक का कहना है कि लाउडस्पीकर पर भजन-कीर्तन और सुंदरकाण्ड का पाठ करने पर उन्हें और उनके बेटे को जेल में डालने की धमकी दी गई है। उन्होंने कहा है कि मंदिर के आस पास लोग नहीं रहते। दूसरी तरफ एसडीएम ने कहा है कि मामले को धार्मिक रंग दिया जा रहा है। जबकि उन्हें लोगों की शिकायत मिली थी। स्थानीय पार्षद ने भी तेज आवाज में लाउड स्पीकर बजाए जाने की शिकायत की थी। इसके बाद जाँच कराई गई। जाँच में तय ध्वनि मानकों से अधिक आवाज में लाउड स्पीकर का बजना पाया गया जिसके बाद नोटिस दी गई।

इधर नोटिस मिलने के बाद से मंदिर संचालकों के साथ-साथ स्थानीय हिंदू संगठनों ने भी नाराजगी जताई है। संस्कृति बचाओ मंच के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी ने कहा है कि नवरात्रि चल रही है। रामनवमी का त्योहार है। ऐसे में मंदिरों को निशाना बनाया जा रहा है। अधिकारी मस्जिदों पर बज रहे लाउडस्पीकरों को नहीं रोक पा रहे हैं। मंदिरों को नोटिस जारी कर रहे हैं। संगठन ने धमकी दी कि यदि नोटिस वापस नहीं ली गई तो सड़क पर उतर कर आंदोलन किया जाएगा।

‘इस बार बैसाखी ऐतिहासिक हो’ : सिखों को भड़काते अमृतपाल की वीडियो-ऑडियो मीडिया में वायरल, रिपोर्ट्स- सरेंडर के लिए भगोड़े ने रखी 3 शर्त

हर रोज अलग-अलग जगहों से भगोड़े अमृतपाल सिंह की तस्वीरें सामने आने की खबरों के बीच अब पता चला है कि वह खालिस्तानी समर्थक पंजाब में ही छिपा है। दावा किया जा रहा है कि अमृतपाल ने एक वीडियो मैसेज जारी किया है। इस संदेश में उसने देश और विदेशों में रह रहे सिखों को बड़े मकसद के लिए एकजुट होने के लिए कहा है। ये वीडियो कब की है और कहाँ रिकॉर्ड की गई है, इसकी पुष्टि ऑपइंडिया नहीं करता। इस वीडियो पर कई नामी मीडिया संस्थान जैसे टाइम्स नाऊ, आजतक, हिंदुस्तान टाइम्स आदि ने रिपोर्ट की हुई है।

दावा है कि ये पहली वीडियो इन मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक एक यूट्यूब चैनल पर जारी वीडियो मैसेज में अमृतपाल ने 18 मार्च की घटना के बारे में जानकारी दी। उसने कहा कि सरकार उसके समर्थकों यहाँ तक की महिलाओं और बच्चों पर अत्याचार कर ही है। सरकार ने कई साथियों पर एनएसए लगा दिया और असम भेज दिया। उसने कहा, “हम जिस रास्ते पर चल रहे हैं एक न एक दिन यह दिन आना ही था और हमें इसका सामना करना होगा।”

वीडियो में आगे अमृतपाल बैसाखी के मौके पर होने वाले सरबर खालसा (सिख संगठनों का सम्मेलन) कार्यक्रम में शामिल होने के लिए देश-विदेश के सिखों को न्योता दे रहा है। वह कहता है, “जिस तरह सरकार ने हमसे धोखा किया है हमें ध्यान रखना होगा। पंजाब के मसलों को हल करने के लिए एकसाथ आना होगा।” अमृतपाल कहता है कि सरकार ने जिस तरह लोगों के बीच में डर पैदा किया है, इस साल की बैसाखी का त्योहार ऐतिहासिक होना चाहिए।

फिलहाल यह पता नहीं चल सका है कि वीडियो को कहाँ रिकॉर्ड किया गया है। इसके साथ साथ अमृतपाल ने अपना एक ऑडियो भी जारी किया है जो पंजाबी में है। इस ऑडियो में वह पंजाब के लोगों को भड़काने की कोशिश कर रहा है। वह पुलिस और सिस्टम को चुनौती देते हुए कह रहा है कि कमर कसने का वक्त आ गया है। अगर आज नहीं जागे तो फिर कभी नहीं हो पाएगा। इस ऑडियो की रिकॉर्डिंग डेट भी पुष्टि नहीं हो पाई है।

पंजाब पुलिस की मानें तो मंगलवार (28 मार्च 2023) की रात को अमृतपाल पंजाब में देखा गया था। खबरें ये भी हैं कि अमृतपाल अमृतसर में गोल्डन टेंपल के श्री अकाल तख्त साहिब में आकर सरेंडर कर सकता है। कुछ रिपोर्टों में कहा जा रहा है कि वह बठिंडा के तलवंडी साहिब स्थित तख्त श्री दमदमा साहिब में सरेंडर कर सकता है। ऐसे में दोनों स्थानों की सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। दोनों शहरों में चेकिंग बढ़ा दी गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स में पुलिस सूत्रों के हवाले से बताया जा रहा है कि सरेंडर के लिए अमृतपाल ने तीन शर्तें रखी हैं। पहली शर्त है कि पुलिस हिरासत में उसके साथ मारपीट न हो। दूसरी शर्त है कि उसे पंजाब के बाहर न ले जाया जाए। अमृतपाल की तीसरी शर्त है कि उसको सरेंडर को गिरफ्तारी न दिखाई जाए। कहा जा रहा है कि कुछ धार्मिक नेता उसके सरेंडर को लेकर मध्यस्थता कर रहे हैं।

गाइडलाइन्स में लिखी थी ‘आधी बाजू’… फिर भी हिजाब पहन SET परीक्षा देने की जिद्द पर अड़ीं 3 छात्राएँ: वायरल Video में दावा- कॉलेज ने एंट्री नहीं दी

राजस्थान के जयपुर में तीन छात्राएँ हिजाब पहनकर सेट की परीक्षा में शामिल होने की जिद कर रही थीं। तीनों को परीक्षा केंद्र के गेट पर ही रोक दिया गया। मामला यूनिवर्सिटी राजस्थान कॉलेज का है। इस संबंध में तीन छात्राओं का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल किया जा रहा है।

टीवी 9 भारतवर्ष की एक रिपोर्ट के मुताबिक रविवार (26 मार्च 2023) को आयोजित राजस्थान सेट की परीक्षा में शामिल होने आई तीन लड़कियों को गेट के अंदर दाखिल नहीं होने दिया गया। तीनों छात्राएँ हिजाब पहनकर परीक्षा में शामिल होने की जिद कर रही थीं। जाँच कर रहे स्टाफ ने छात्राओं को हिजाब उतार कर अंदर जाने को कहा। छात्राएँ ऐसा करने को तैयार नहीं हुईं और अपनी जिद पर अड़ी रहीं।

कॉलेज प्रबंधन ने छात्राओं को अंदर आने की अनुमति नहीं दी। जिसके बाद परीक्षा केंद्र के बाहर छात्राओं का वीडियो बनाया गया। जो वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। इसमें दावा किया गया है कि एडमिट कार्ड पर कहीं भी नहीं लिखा कि हिजाब या बुर्के में परीक्षा में शामिल नहीं होना है। जबकि ध्यान से देखें तो साफ दिख रहा है कि एडमिट कार्ड में ड्रेस कोड का पालन करने को कहा गया है।

बता दें कि SET परीक्षा को लेकर विस्तार से गाइडलाइन्स दी गई थी। इसे परीक्षा से ठीक पहले कई न्यूज पोर्टल्स पर प्रकाशित किया गया। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार ड्रेस कोड में पुरुषों के लिए आधी बाजू वाली शर्ट या टी शर्ट, पैंट एवं हवाई चप्पल/स्लीपर पहनकर आने के लिए कहा गया था। वहीं महिला उम्मीदवारों को सलवार सूट या साड़ी, आधी आस्तीन वाला कुर्ता/ब्लाउज, हवाई चप्पल/स्लीपर पहनकर ही परीक्षा में शामिल होना था। बालों में सिर्फ साधारण रबड़ बैंड लगा कर आने की इजाजत थी।

गाइडलाइन्स के अनुसार परीक्षार्थियों को घड़ी, सैंडल, सन ग्लास, बैल्ट,कैप, स्कार्फ, स्टॉल, शॉल, मफलर इत्यादि पहनकर परीक्षा में शामिल होने की इजाजत नहीं थी। यदि किसी पहनावे को लेकर विवाद हो तो परीक्षा केंद्र के अधिकारी का निर्णय मान्य होगा।

लालच में बने ईसाई, फिर याद हिन्दू धर्म की आने लगी: MP में एक परिवार के 8 लोगों ने 9 साल बाद की घर वापसी, बोले- सनातन धर्म सबसे सच्चा

मध्य प्रदेश के झाबुआ जिले में 9 साल पहले धर्मान्तरित हुए एक परिवार ने घर वापसी की है। ईसाई मत से अपने मूल धर्म हिन्दू में वापस आने वाले एक ही परिवार के 8 सदस्य हैं। इन सभी ने 9 साल पहले अपने धर्म परिवर्तन को खुद का भटकाव कहा और घर वापसी पर ख़ुशी जताई। विश्व हिन्दू परिषद के पदाधिकारियों ने वापस लौटे सभी सदस्यों का स्वागत किया है। घर वापसी का यह कार्यक्रम मंगलवार (28 मार्च 2023) को महादेव शिव के मंदिर में आयोजित हुआ था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घर वापसी करने वाला परिवार झाबुआ जिले के गाँव धामंदा का रहने वाला है। घर वापसी करने वाले कैलाश और उनके परिवार वालों ने बताया कि 9 साल पहले उनके घर में कुछ लोग बीमार रहा करते थे। इस बीच ईसाई मिशनरियों से जुड़े एक व्यक्ति की उनसे मुलाकात हुई। उस व्यक्ति ने ईसाई बन जाने पर हिन्दू परिवार को बेहतर इलाज का झाँसा दिया। कैलाश के मुताबिक उसी लालच में वो ईसाई बन गए थे। हालाँकि बाद में उन्हें अपने मूल धर्म की याद आने लगी। अपनी संस्कृति को याद करते हुए घर वापसी करने वाले परिवार ने कहा कि सनातन धर्म ही सच्चा है।

घर वापसी करने वालों में कैलाश, शुकली, दुर्गेश, गोविन्द, काली, मुकेश, मोनिका और अभिषेक शामिल हैं। कैलाश और शुकली पति-पत्नी हैं और बाकी सभी उनके बेटे और बेटियाँ हैं। इन सभी ने खुद को फिर से हिन्दू धर्म में आ कर बेहद खुश बताया। विहिप कार्यकर्ताओं ने बताया कि इन सभी की मुलाकात धर्म परिवर्तन के खिलाफ अभियान चला रहे हिन्दू संगठन के सदस्यों से हुई। उन्होंने इस परिवार को सुबह का भूला बता कर घर वापसी का कार्यक्रम तय किया।

जानकारी के अनुसार यह कार्यक्रम गाँव कोकावद में बने महादेव धाम में आयोजित हुआ। घर वापसी करने वाले सदस्यों ने यहाँ बाकायदा वेदमंत्रों के बीच हिन्दू देवी-देवताओं की आराधना की। मंदिर के संत कमल ने सभी को आशीर्वाद दिया और हवन करवाया। घर वापसी करने वालों ने संत खूमसिंह महाराज की प्रतिमा को भी नमन किया। इस मौके पर ग्रामीण और हिन्दू संगठन के लोग जुटे थे। हिन्दू संगठनों ने धर्म परिवर्तन को गंभीर समस्या बताया।

‘मेरा घर राहुल गाँधी का घर’: कॉन्ग्रेसियों ने शुरू किया नया अभियान, छोटे बच्चों और बुजुर्गों के हाथ में तख्ती पकड़ाई

लोकसभा की सदस्यता खत्म होने के बाद कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी (Rahul Gandhi) काे नई दिल्ली में स्थित सरकारी बँगला खाली करने का नोटिस दिया गया है। इसके विरोध में कॉन्ग्रेस पार्टी ने महाभियान शुरू किया है। इसका नाम ‘मेरा घर राहुल गाँधी का घर’ है।

इस क्रम में उत्तर प्रदेश कॉन्ग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय राय ( Ajay Rai) ने अपने घर पर राहुल गाँधी की नेम प्लेट लगाई है। पूर्व विधायक और उनकी पत्नी ने शहर के लहुराबीर इलाके में अपने घर पर मंगलवार (28 मार्च 2023) को एक बोर्ड लगाया, जिसमें लिखा है, “मेरा घर श्री राहुल गाँधी जी का घर।”

अजय राय ने अपने ट्विटर हैंडल पर कुछ तस्वीरें भी शेयर की हैं। इसके साथ ही उन्होंने लिखा, “तानाशाह आप कितने घर खाली कराओगे? हर कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता का घर राहुल जी का घर है। आज हमने काशी स्थित आवास को राहुल गाँधी जी को समर्पित किया। आइए राहुल जी, काशी में आपका स्वागत है। हर हर महादेव।”

उन्होंने आगे कहा कि राहुल गाँधी के समर्थन में यह अभियान काशी सहित पूरे प्रयागराज क्षेत्र में शुरू किया गया है। गाँधी परिवार ने पूरे आनंद भवन (प्रयागराज में) को राष्ट्र को समर्पित किया है।

इसी तरह प्रदेश कॉन्ग्रेस प्रवक्ता अशोक सिंह ने कहा कि ‘मेरा घर आपका घर’। अशोक सिंह ने बुधवार (29 मार्च 2023) को ट्वीट किया, “जिसने लोगों के दिल में घर कर लिया, उसके लिए हर घर ने अपने दरवाजे खोल दिए हैं, क्योंकि राहुल गाँधी ने नफरत के बाजार में मोहब्बत की दुकान खोलने का संकल्प लिया है। मेरे नेता, मेरी प्रेरणा, मेरे भाई राहुल जी, मेरा घर आपका घर।”

बता दें कि कॉन्ग्रेस अपनी राजनीति के लिए भले ही यह अभियान शुरू करे, लेकिन इसमें बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक का इस्तेमाल किया जा रहा है। छोटे-छोटे बच्चों और बुजुर्गों के हाथ में ‘मेरा घर आपका घर’ तख्तियाँ पकवाड़कर फोटो खिंची जा रही हैं और उसे सोशल मीडिया पर डाला जा रहा है। ये एक तरह से राजनीतिक टूल बनते हुए नजर आ रहे हैं।

बता दें कि राहुल गाँधी तुगलक लेन स्थित सरकारी बँगले में पिछले 12 वर्षों से रह रहे हैं। अमेठी से पहली बार सांसद बनने के बाद उन्हें 2004 में 12 तुगलक लेन बँगला दिया गया था। चूँकि वो सांसद नहीं रहे, इसीलिए उन्हें ये बँगला खाली करना पड़ेगा। राहुल गाँधी ने 2019 लोकसभा चुनाव में केरल के वायनाड से जीत दर्ज की थी।

‘मोदी’ सरनेम पर टिप्पणी किए जाने के बाद सूरत की अदालत ने उन्हें 2 वर्ष की सज़ा सुनाई। इसके बाद लोकसभा सचिवालय ने उनकी संसद सदस्यता का नोटिफिकेशन जारी कर दिया। इसके बाद कॉन्ग्रेस के सभी सांसद विरोध जताने के लिए काले कपड़ों में संसद भवन पहुँचे थे। अब सांसदी जाते ही उन्हें बँगला खाली करने का नोटिस दे दिया गया।

राष्ट्रगान अपमान केस में बॉम्बे HC ने दिया ममता बनर्जी को झटका, याचिका खारिज: कार्रवाई रोकने के लिए अर्जी करवाना चाहती थीं रद्द

राष्ट्रगान का अपमान करने के मामले में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को बॉम्बे हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली है। न्यायमूर्ति अमित बोरकर की पीठ ने जनवरी 2023 के सत्र अदालत (Session court) के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी। सत्र अदालत ने राष्ट्रगान का अपमान करने के मामले में कार्रवाई करने की माँग वाली अर्जी को पुनर्विचार के लिए मजिस्ट्रेट अदालत में भेज दिया था। जबकि ममता बनर्जी चाहती थीं कि इस अर्जी को रद्द कर देना चाहिए।

दरअसल, मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट की कोर्ट में सीएम ममता पर भाजपा नेता विवेकानंद गुप्ता ने राष्ट्रगान का अपमान करने के आरोप में शिकायत दर्ज कराई थी। मामला दिसंबर 2021 का था। इस शिकायत पर कोर्ट ने मार्च 2022 में ममता बनर्जी को समन जारी किया था। ममता बनर्जी ने इस समन को सेशन कोर्ट में चुनौती दी। कोर्ट ने मामले को मजिस्ट्रेट के पास भेज दिया था और शिकायत पर नए सिरे से विचार करने को कहा था।

इसी मामले को लेकर ममता बनर्जी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। इस अर्जी में ममता बनर्जी ने कहा कि सत्र अदालत को समन हमेशा के लिए रद्द कर देना चाहिए था न कि मामले को दोबारा विचार करने के लिए मजिस्ट्रेट के पास भेजना चाहिए था। जस्टिस बोरकर ने कहा कि हाईकोर्ट को इस मामले में दखल देने की जरूरत नहीं है।

सीएम ममता बनर्जी पर क्या है आरोप ?

भाजपा नेता की शिकायत के अनुसार दिसंबर 2021 में ममता बनर्जी कार्यक्रम के सिलसिले में मुंबई के यशवंतराव चव्हाण ऑडिटॉरियम पहुँची थीं। कार्यक्रम में राष्ट्रगान बजने के बाद तक वे बैठी रहीं। इसके बाद अचानक से उठीं। राष्ट्रगान की 2 पक्तियाँ गाने के बाद राष्ट्रगान के बीच हीं वे कार्यक्रम स्थल से चली गईं। बीजेपी नेता विवेकानंद गुप्ता ने मार्च 2022 में इसकी शिकायत की थी। जिसके बाद बंगाल की सीएम को समन जारी किया गया।

जयपुर के जिन 8 बम ब्लास्टों में हुई 71 लोगों की मौत, उसके चारों दोषी बरी: राजस्थान हाईकोर्ट ने दिया फैसला, जाँच के भी आदेश

राजस्थान हाईकोर्ट ने राजधानी जयपुर में हुए सीरियल ब्लास्ट के सभी 4 दोषियों को बरी कर दिया है। इसके साथ ही जाँच अधिकारियों के खिलाफ जाँच का निर्देश दिया है। आरोपितों के खिलाफ पुलिस अदालत के समक्ष पुख्ता सबूत पेश नहीं कर पाई। बता दें कि 13 मई 2008 को जयपुर में कई बम ब्लास्ट किए गए थे, जिनमें 71 लोग मारे गए थे।

मामले के सभी आरोपितों की अपीलों पर सुनवाई करने के दौरान जस्टिस पंकज भंडारी और समीर जैन की खंडपीठ ने कहा कि जाँच अधिकारी को कानून की जानकारी नहीं है। कोर्ट ने जाँच अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए राज्य के DGP को भी निर्देश दिया। इसके साथ ही कोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव को भी जाँच अधिकारियों की जाँच कराने के लिए कहा है।

इस मामले में फाँसी की सजा पाए चारों आरोपितों सहित 28 अपीलों पर सुनवाई करते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने बरी कर दिया। कोर्ट ने ATS द्वारा दिए गए सबूतों को खारिज करते हुए कहा कि ये सबूत भरोसे के लायक नहीं हैं।

बता दें कि 13 मई 2008 को जयपुर में 8 जगहों पर सीरियल बम ब्लास्ट हुए थे। इन धमाकों में 71 लोगों की मौत हो गई थी और 185 लोग घायल हो गए थे। इस मामले में पुलिस ने मोहम्मद सैफ, सैफुर्रहमान, सरवर आजमी और मोहम्मद सलमान सहित 13 लोगों को आरोपित बनाया था। इसके बाद कोर्ट ने इन चारों को हत्या, राजद्रोह और विस्फोटक अधिनियम के तहत दोषी पाया था।

इस मामले में 3 आरोपित अभी भी फरार हैं। इन सबके अलावा, 3 आरोपित हैदराबाद और दिल्ली की जेल में बंद हैं। बाकी बचे दो आरोपित दिल्ली के बाटला हाउस मुठभेड़ में मार गिराए गए थे। वहीं, चार आरोपित जयपुर जेल में बंद थे। इन्हीं चार लोगों को निचली अदालत ने फाँसी की सजा सुनाई थी।

पुलिस ने साल 2008 में यूपी के मौलवीगज निवासी शाहबाज हुसैन, आजमगढ़ के सरायमीर निवासी मोहम्मद सैफ को गिरफ्तार किया गया था। आजमगढ़ के चाँदपट्टी निवासी मोहम्मद सरवर आजमी और सैफ उर्फ सैफुर्रहमान को साल 2009 में तथा यूपी के निजामाबाद निवासी मोहम्मद सलमान को साल 2010 को गिरफ्तार किया था।

निचली अदालत में सुनवाई में 24 गवाह बचाव पक्ष ने पेश किए थे, जबकि सरकार की ओर से 1270 गवाह पेश हुए थे। सरकार की ओर से वकीलों ने 800 पेज की बहस की थी। कोर्ट ने 2500 पेज का फैसला सुनाया था। इस तरह कोर्ट ने दिसंबर 2019 में चार दोषियों को फाँसी की सजा दी।

सजा सुनाते वक्त कोर्ट ने कहा था कि विस्फोट के पीछे जेहादी मानसिकता थी। यह मानसिकता यहीं नहीं थमी। जयपुर हमले के बाद आरोपितों ने दिल्ली और अहमदाबाद में भी विस्फोट किए। तब से ये आरोपित फाँसी की प्रतीक्षा में जेल में बंद थे।