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‘रेप करके वकील शेख ने खुद को मारे थप्पड़…शादी से मुकरा’ : बॉलीवुड की जूनियर आर्टिस्ट का आरोप, बजरंगी भाईजान समेत कई फिल्मों में कर चुकी हैं काम

बजरंगी भाईजान, सिंघम, बाजीराव मस्तानी, पद्मावत जैसी फिल्मों में काम कर चुकी बॉलीवुड (Bollywood) की जूनियर कलाकार ने वकील बीजे शेख (B J Shaikh) पर दुष्कर्म का आरोप लगाया है। पीड़िता ने मालवानी पुलिस थाने में शेख के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। इसके बाद से आरोपित फरार है।

बॉलीवुड की जूनियर कलाकार के मुताबिक, बोरीवली कोर्ट में उसका एक संपत्ति विवाद चल रहा है, जिसके लिए उसने शेख को रखा था। इस सिलसिले में इस साल जनवरी में उसकी आरोपित से मुलाकात हुई थी। 2012 में गोरेगाँव पुलिस स्टेशन में संपत्ति विवाद का मामला दर्ज कराया गया था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, अपने पिता और भाई की मृत्यु के बाद शिकायतकर्ता अपने भरण-पोषण के लिए फिल्मों और टीवी सीरियल्स में काम कर रही है। लेकिन कोरोना महामारी के दौरान उसे काम मिलना बंद हो गया। ऐसे में उसने कम फीस वाले वकील की तलाश शुरू की। तभी आरोपित ने उससे संपर्क किया।

पीड़िता के अनुसार, कोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान दोनों की कई मुलाकातें हुईं। इसी बीच शेख ने उसे शादी के लिए प्रपोज किया और वह भी इसके लिए राजी हो गई। शेख ने उससे वादा किया कि वह 5 मार्च 2023 को उसके घर पर अपने अम्मी-अब्बू को लेकर आएगा और सगाई करेगा।

महिला ने मिड-डे से बताया, “मैंने सारा इंतजाम कर लिया था, लेकिन उस दिन वह अकेले मेरे घर पर पहुँचा। शेख ने मुझे बताया कि उसकी अम्मी बहुत बीमार हैं और अस्पताल में भर्ती हैं।” पीड़िता के घरवाले भी खाना खाने के बाद वहाँ से चले गए। इसके बाद आरोपित ने महिला के साथ जबरदस्ती की।

पीड़िता ने आगे बताया, “जब मैं रोने लगी तो, शेख ने पछताने का नाटक किया। उसने खुद को थप्पड़ मारना शुरू कर दिया और कहा कि उससे बहुत बड़ी गलती हो गई। उसने मुझसे माफी माँगी और भाग गया। जब शेख को पता चला कि मैं पुलिस के पास जाने वाली हूँ, तो उसने मुझे फोन किया और कहा कि वह 15 मार्च 2023 को बांद्रा कोर्ट में उससे शादी करेगा। लेकिन पहले की तरह इस बार भी उसने मुझसे झूठ बोला और कोर्ट नहीं पहुँचा। इसके बाद उसने 23 मार्च को मुझसे कहा कि वह शादी नहीं करना चाहता है।”

वहीं आरोपित ने महिला द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को बेबुनियाद बताया है। शेख ने कहा, “डिंडोशी सेशन कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई तक मेरी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है।” उसने शिकायतकर्ता पर आरोप लगाया, ”उसकी प्रवृत्ति लोगों को झूठे मामलों में फँसाने की है। घटना वाले दिन मैं एक अन्य क्लाइंट से मिलने के लिए मढ़ गया हुआ था। जब मैंने उसे फोन किया, तो उसने मुझे अपने घर आने के लिए कहा। मैं उससे उसकी बहन और जीजा की मौजूदगी में मिला था। रेप का आरोप झूठा है।”

दामाद नासिर के प्यार में अंधी हो गई थी सास जुलेखा बीवी, शौहर मुस्लिम को कुल्हाड़ी से काट डाला: अवैध संबंधों को छिपाने के लिए बेटी से करवाया था निकाह

झारखंड के गढ़वा से एक घटना सामने आई है, जिसमें हवस में अंधी एक महिला ने अपने दामाद के साथ मिलकर अपने शौहर मुस्लिम अंसारी की ही हत्या कर दी। मुस्लिम की बीवी जुलेखा बीवी और दामाद नाजिर अंसारी ने शव को छिपाने की कोशिश भी की। पुलिस ने हत्या में इस्तेमाल कुल्हाड़ी बरामद कर लिया है।

घटना गढ़वा के सोनवर्षा इलाके की है। इस हत्याकांड के खुलासे ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। दोनों ने मिलकर इस हत्याकांड को छिपाने की भी पूरी कोशिश की। हालाँकि, पुलिस ने आखिरकार दोनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है।

एसडीपीओ प्रमोद केसरी के अनुसार, मुस्लिम और नाजिर बंगलोर में एक साथ काम करते थे। जान-पहचान की वजह से नाजिर मुस्लिम के घर आने-जाने लगा। यहाँ उसका संबंध मुस्लिम की पत्नी जुलेखा बीवी से हो गया। इसकी भनक मुस्लिम को लगी तो शौहर-बीवी के बीच अक्सर अनबन होने लगी।

इसी बीच जुलेखा ने एक साजिश रची। उसने अपने शौहर मुस्लिम से कहा कि अगर उसे शंका है तो वह अपनी बेटी की शादी नाजिर से कर दे। जुलेखा बेटी के साथ निकाह की आड़ में नाजिर के साथ अपने अवैध संबंधों को जारी रखना चाहती थी। मुस्लिम जुलेखा के प्रस्ताव को मान गया और नाजिर से बेटी का निकाह कर दिया।

बेटी से निकाह के बाद भी जुलेखा और नाजिर का प्रेम परवान चढ़ता गया। अब रिश्तों की आड़ में इसे खुलकर अंजाम देने लगे। मुस्लिम को पता चला कि बेटी से निकाह के बाद भी दोनों के बीच अवैध रिश्ते जारी हैं तो वह खफा हो गया। इसके बाद जुलेखा ने दामाद बने अपने प्रेमी नाजिर के साथ मिलकर शौहर मुस्लिम को रास्ते से हटाने का प्लान बना लिया।

इसके बाद 25 मार्च की रात जुलेखा ने अपने दामाद नाजिर के मिलकर अपने शौहर मुस्लिम को कुल्हाड़ी से काटकर हत्या कर दी। इसके बाद दोनों ने शव को छिपाने की कोशिश की। बाद में इस शव को दोनों ने एक खेत में फेंक दिया। इसके बाद पुलिस को इस घटना की जानकारी मिली।

अनुसंधान के दौरान पुलिस को पता चला कि बेटी का निकाह करने से पहले ही जुलेखा बीवी और नाजिर अंसारी के बीच प्रेम संबंध रहे हैं। पुलिस ने इस एंगल पर जाँच शुरू की तो उसे कई महत्वपूर्ण सबूत मिले। इसके बाद दोनों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई तो उन्होंने अपना जुर्म कबूल कर लिया।

एयरपोर्ट गए AAP नेता राघव चड्ढा, परिणीति चोपड़ा को रिसीव किया… एक ही गाड़ी में बैठ निकल लिए: पार्टी के सांसद दे चुके हैं बधाई

राघव चड्ढा और परिणीति चोपड़ा को दिल्ली एयरपोर्ट पर एक साथ देखा गया। आम आदमी पार्टी के नेता ने परिणीति को एयरपोर्ट से रिसीव किया और एक ही गाड़ी में सवार होकर निकल गए। बताया जा रहा है कि एक हफ्ते के भीतर दोनों की यह तीसरी मुलाकात है। यही वजह है कि मीडिया में उनके शादी की अटकलें तेज हो गई हैं। सिंगर और एक्टर हार्डी संधू ने भी एक इंटरव्यू के दौरान राघव और परिणीति के रिश्तों की खबरों पर मुहर लगा दी है।

मुंबई में लगातार दो दिन लंच और डिनर डेट पर साथ देखे जाने के बाद से ही राघव और परिणीति के बीच रिलेशनशिप की खबरें सामने आई थीं। अब दिल्ली एयरपोर्ट पर दोनों को साथ देखा गया है। एयरपोर्ट पर सिक्योरिटी गार्ड्स से घिरे राघव और परिणीति मीडिया के सवालों से बचते नजर आए। एयरपोर्ट से निकलकर परिणीति सीधे राघव के साथ कार में बैठ गईं।

मंगलवार (28 मार्च 2023) को AAP सांसद संजीव अरोड़ा ने चड्ढा और परिणीति चोपड़ा की तस्वीर शेयर करते हुए उन्हें बधाई दी थी। इसके बाद कयास लगाए जाने लगे कि दोनों ने सगाई कर ली है। दूसरी तरफ सिंगर और एक्टर हार्डी संधू ने भी डीएनए को दिए साक्षात्कार में दोनों के रिश्तों पर मुहर लगा दी। उन्होंने कहा कि आखिरकार परिणीति अपनी जिंदगी में सेटल हो रही हैं। संधू ने कहा, “मैं बहुत खुश हूँ कि ऐसा हो रहा है, मैं आगे के लिए उन्हें शुभकामनाएँ देता हूँ।”

हार्डी संधू ने कहा कि एक फिल्म की शूटिंग के दौरान परिणीति ने उनसे सही लड़का मिलने पर शादी की बात कही थी। संधू ने कहा कि उन्होंने परिणीति से फोन पर बात कर उन्हें बधाई दी है। रिपोर्टों के अनुसार राघव चड्ढा और परिणीति चोपड़ा दोनों ने इंग्लैंड से अपनी पढ़ाई की है और इसी दौरान दोनों एक दूसरे को जानते थे। राघव ने लंदन स्कूल ऑफ इकॉनमिक्स से पढ़ाई की है जबकि परिणीति ने मैनचेस्टर बिजनेस स्कूल से पढ़ाई की है।

आपको बता दें कि राघव चड्ढा को लेकर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भविष्यवाणी की थी। उनके अनुसार भाजपा वाले मनीष सिसोदिया की तरह राघव चड्ढा को भी गिरफ्तार करवा सकते हैं। भविष्यवाणी तो सही नहीं हुई लेकिन व्यक्तिगत जीवन में किसी को एयरपोर्ट पर रिसीव करने जरूर जाने लगे!

10 करोड़ सहारा निवेशकों को ब्याज समेत मिलेगा रुपया: अमित शाह का ऐलान, 3-4 महीने में आ जाएँगे पैसे

सहारा ग्रुप में पैसा लगाने वाले 10 करोड़ निवेशकों को गुरुवार को गृहमंत्री अमित शाह ने एक खुशखबरी दी। अमित शाह ने बताया कि ग्रुप की चार अलग समितियों में पैसा लगाने वाले लोगों को उनका पैसा ब्याज सहित मिलेगा। यह ऐलान उन्होंने 30 मार्च 2023 को उत्तराखंड के हरिद्वार के ऋषिकुल मैदान में सहकारिता विभाग द्वारा आयोजित कार्यक्रम में किया। 

अमित शाह के इस ऐलान की वीडियो उनके ट्वीट में भी देख सकते हैं। उन्होंने कहा,

“सहारा ग्रुप की चार कॉपरेटिव सोसायटी में जिन-जिन लोगों ने अपना पैसा लगाया था, उनको पैसा और और सूद दोनों नहीं मिलता था। अब सहकारिता मंत्रालय की पहल से सुप्रीम कोर्ट ने ऑर्डर दिया है जिससे लगऊह 10 करोड़ लोगो को अपना पैसा वापस मिलेगा। मैं इस कार्यक्रम के माध्यम से देश भर के सहारा कॉपरेटिव डिपोजिटर्स को कहना चाहता हूँ आप सेंट्रल रजिस्ट्रा कॉपरेटिव सोसाटी को अपना डिमांड भेज दीजिए। सत्यापन के बाद तीन-चार महीने में ही ये पैसा देने की व्यवस्था हो जाएगी।”

उल्लेखनीय है कि इन 10 करोड़ निवेशकों का पैसा सहारा कंपनी की चार सहकारी समितियों में फँसा है। ऐसे में केंद्र ने एक जनहित याचिका में कोर्ट से आवेदन दिया था, जिसमें सहारा समूह की ओर से बाजार नियामक सेबी के पास जमा कराए गए 24,000 करोड़ रुपए में से 5,000 हजार करोड़ रुपए निवेशकों को आवंटित करने की बात थी।

जनहित याचिका पिनाकी पाणि मोहंती नाम के व्यक्ति ने दायर की थी। याचिका में विभिन्न चिट फंड कंपनियों और सहारा क्रेडिट कंपनियों में निवेश करने वाले जमाकर्ताओं को भुगतान करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया था। 

अब कोर्ट के निर्देश आने के बाद सरकार ने निवेशकों को उनके पैसे वापस आने की आस दे दी है। अमित शाह के ऐलान से पहले बुधवार (29 मार्च 2023) को सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय का आदेश आने के बाद जानकारी दी थी कि अब निवेशकों के पैसे उन्हें 9 महींने के अंदर मिल जाएँगे।

रामराज्य की स्थापना में कंटक है इस्लामी कट्टरता, श्रीराम के कर्मपथ का अनुसरण कर ही मजहबी क्रूरता पर मिलेगी विजय

इस भारत वसुन्धरा पर सहस्रों वर्ष पूर्व आदिकवि वाल्मीकि ने ‘रामायण’ में राम को मानवीय भावभूमि पर प्रतिष्ठित कर विश्वसाहित्य में एक अविस्मरणीय चरित्र की अद्भुत सृष्टि की। यह चरित्र-सृष्टि इतनी मोहक, आकर्षक और प्रेरक थी कि परवर्ती साहित्य में पुनः-पुनः प्रकट होकर, यत्किंचित अंतर युक्त होकर भी समाज को प्रभावित करती रही, लुभाती रही।

विक्रम संवत् 1631 में गोस्वामी तुलसीदास ने अब से 450 वर्ष पूर्व आदिकवि की मानवीय चरित्र-सृष्टि को पौराणिक अवतारवादी धरातल पर विष्णु के अवतार के रूप में प्रतिष्ठित कर रामकथा को नया आयाम प्रदान किया। राम के महामानव आदर्श के अंकन ने समाज को उनके आचरण का अनुकरण करने की शुभ प्रदायिनी प्रेरणा दी तो गोस्वामी तुलसीदास के नरलीला परक अवतारवाद ने इस्लामिक सत्ता की विस्तारवादी क्रूरता के विरूद्ध संघर्ष करने का साहस, शौर्य और आस्थापुष्ट संबल दिया।

‘रामायण’ और रामचरितमानस’ में अंकित राम के ये दोनों ही- मानवीय और नारायणीय रूप लोक जीवन में दूर तक स्वीकृत और समादृत हैं। राम दोनों ही रूपों में आज व्याख्येय हैं। जहाँ दूरस्थ ग्रामीण अंचलों से लेकर नगरों, महानगरों और राजधानियों तक फैले छोटे-बड़े असंख्य मंदिरों में प्रतिष्ठित-पूजित राम प्रतिमाएँ उनके नारायणत्व ईश्वरत्व की साक्षी देती हैं, वहीं विश्व की विविध भाषाओं में रचित रामकथा परक साहित्य की अगणित प्राचीन, अर्वाचीन और नवीन कृतियाँ उनके ईश्वरत्व के साथ नरत्व का प्रेरक प्रत्याख्यान करती हैं।

‘रामराज्य’ सुशासन का प्रतीक-पर्याय बनकर भारतवर्ष में सर्वत्र स्वीकृत हुआ है। आदिकवि महर्षि वाल्मीकि से लेकर महात्मा गाँधी तक, रामराज्य की अवधारणा निरंतर हमारी संस्कृति का आदर्श मानक रही है और आज भी है किन्तु रामराज्य के लिए जिस राजनीतिक व्यक्तित्व विकास एवं पारिस्थितिक परिवेश परिवर्तन की प्रक्रिया अपेक्षित है, उसकी ओर हमारा ध्यान नहीं जाता। व्यक्ति में ‘रामत्व’ की प्रतिष्ठिा किए बिना और समाज-उपवन के कष्ट कंटकों का समूल उच्छेदन किए बिना रामराज्य का पुनर्संस्थापन कैसे संभव है?

जब तक कोई साधन विहीन राम अपने पुरुषार्थ, साहस, शौर्य और संगठन-कौशल के बल पर उत्पीड़क राक्षसी मानसिकता का सर्वनाश नहीं कर देता तब तक समाज में रामराज्य कैसे आ सकता है? रामराज्य की स्थापना के लिए राम की आवश्यकता है और राम की; रामत्व की प्राप्ति के निमित्त व्यक्तित्व विकास एवं चरित्र निर्माण की उस लम्बी साधना-सुलभ प्रक्रिया की आवश्यकता है जो साधारण मनुष्य में देवत्व का, व्यक्ति के व्यक्तित्व में ‘रामत्व’ का सचेत सन्निधान करती है।

कोई व्यक्ति एक दिन में राम नहीं बन सकता। रामत्व प्राप्त नहीं कर सकता। राम में रामत्व का विकास उनके वात्सल्य-प्रेम पुष्ट बाल्यकाल से प्रौढ़ावस्था तक के सुदीर्घ अनुभव, शास्त्रज्ञान एवं सतत जाग्रत विवेकयुक्त शक्ति का सम्मिलित परिणाम है। जब व्यक्ति संघर्ष की आँच में तपकर लोक-कल्याण के विचार को उत्तरोत्तर पुष्ट करता हुआ राम बनता है, तब रामराज्य आता है।

राजगृह में जन्म लेकर, गुरुकुल में अनुशासन-संयम की छाँह में अध्ययन कर और चौदह वर्ष की दीर्घ अवधि तक वन-प्रान्तर में अनेक वनजातियों एवं तपस्वियों के मध्य निवास करते हुए प्रबलतम शत्रुशक्ति पर विजय प्राप्त कर राम ने अद्भुत सामर्थ्य अर्जित की और राजपद पर अभिषिक्त होकर स्वयं को जनता जनार्दन की कल्याण-साधना के प्रति सहर्ष अर्पित कर दिया। लोक-पथ पर लोक-हित के दिव्य रथ का संचालन सीखने के लिए राम के व्यक्तित्व विकास, उनके शील-सौन्दर्य एवं शक्ति-संयुक्त स्वरूप को समझना होगा।

दार्शनिक मान्यताओं के अनुसार संसार में ‘सत’ और ‘असत’ का संघर्ष सनातन है; शाश्वत है। यह संघर्ष मनुष्य के बाहर भी है और भीतर भी। मन में सद् इच्छाओं और दुरभिलाषाओं के मध्य होने वाला द्वन्द्व कर्म के स्तर पर बाह्य जगत में प्रकट है। यही द्वन्द्व समाज में विविध रूपों में संघर्ष का कारण बनता है। सबकों सुख पहुँचाना, सबके हित की चिंता करना और सबके हर्ष का कारण बनना सत है; स्वयं जीना तथा सबको जीने देना और कभी-कभी सबके जीवन के लिए अपने जीवन को भी सहर्ष उत्सर्गित कर देना सत है। इसके विपरीत सबसे सबका सब कुछ छीनकर अपना पोषण करना असत है; अपने मत, मान्यता, कर्म को मानने के लिए अन्य को उसकी इच्छा के विरूद्ध बलपूर्वक अथवा लोभ देकर विवश करना असत है। ‘राम’ और ‘रावण’ भारतीय धर्म, दर्शन, साहित्य और समाज में ‘इसी सत’ और ‘असत’ का प्रतीकार्थ प्रकट करते हैं। इस प्रकार राम और रावण इस भौतिक जगत के ऐतिहासिक-पौराणिक पात्र होने के साथ-साथ प्रतीक पात्र भी हैं, जिनकी प्रतीकात्मक प्रस्तुति समाज और साहित्य में अपरिवर्तनीय है।

भारतीय समाज के विस्तृत पटल पर और देश-विदेश में बसे एक अरब से अधिक सनातनी हिन्दुओं की दृष्टि में आज भी राम ही सत के प्रतीक हैं और रावण असत का प्रतीक है। इसीलिए प्रतिवर्ष आश्विन सुदी दशमी को दशहरे पर सत् की असत् पर विजय दर्शाते हुए रावण-दहन किया जाता है, किया जाता रहेगा क्योंकि मनुष्य की सहज वृत्ति सत्पथगामिनी है। निहित स्वार्थों के लिए कोई समूह भले ही असत के पोषण में, रावण के महिमा मण्डन में व्यस्त हो जाए किन्तु अन्ततः उसे राम के रूप में ही सत का वन्दन-अभिनंदन करने को बाध्य होना होगा, क्योंकि असत के प्रसार की रावणी-चित्तवृत्ति व्यक्ति और समाज-दोनों को ही अन्ततः नष्ट कर देगी। मनुष्य-विवेकशील मनुष्य इस सत्य को जानता है, समझता है इसलिए सत के प्रतीकार्थ में श्रीराम को स्वीकार करता है, करता रहेगा।

राम यथार्थ और आदर्श की समन्वित-सन्तुलित प्रकृत भूमि पर अवस्थित हैं। वे भगवान बुद्ध और भगवान महावीर की भाँति कोमलता के एक ध्रुव पर प्रतिष्ठित नहीं हैं। वे कोमलता के साथ-साथ आवश्यक कठोरता से भी समृद्ध हैं, क्योंकि कोमलता की रक्षा कठोरता के अभाव में असंभव है। श्रीराम शस्त्र और शास्त्र- दोनों के विवेकपूर्ण उपयोग के पक्षधर हैं। इसलिए अधिक व्यावहारिक और अधिक अनुकरणीय हैं। भगवान बुद्ध और महावीर के एकान्त अहिंसा-पथ को ग्रहण कर हम इस्लामिक कट्टरता की क्रूरता के समक्ष स्वयं को बलिपशुवत अर्पित कर सकते हैं- स्वैच्छिक आत्मघात कर स्वयं को धन्य मान सकते हैं, किन्तु अपनी मानवीय गरिमा, स्वाभिमान, स्वधर्मानुरूप विश्वास और जीवन की रक्षा नहीं कर सकते। आत्मगौरव, स्वधर्म और स्वाभिमानपूर्ण तेजस्वी-यशस्वी जीवन की रक्षा श्रीराम के कर्मपथ का अनुसरण करके ही संभव है, क्योंकि रावण जैसी दुर्दान्त राक्षसी ताकतों को राम की शस्त्रधारी सामरिक शक्ति ही उचित उत्तर दे सकती है। याचना के बल पर रावण से सीता को वापस नहीं लिया जा सकता। इसीलिए लोक में राम का धनुर्धारी रुप सर्वत्र वंदित है।

श्रीराम भारतवर्ष की अस्मिता हैं; सांस्कृतिक पहचान हैं। यहाँ के जन-जन में, कण-कण में बसे हैं; भक्तों के रोम-रोम में रमे हैं। वे लोक की निधि हैं। लोकगीतों का प्रिय विषय हैं। अवधी ही नहीं ब्रज, मालवी, निमाड़ी, बुन्देली, पहाड़ी भारतवर्ष की कोई भाषा बोली ऐसी नहीं जिसके लोकगीतों में राम न हों, और तो और आज के ‘बॉलीवुड’ का अभिजात्य संसार भी राम का आश्रय लेकर अपार लोकप्रियता और अर्थ अर्जित कर लेता है।

भारतवर्ष के प्रत्येक प्रांत में हजारों वर्षों से राम के नाम पर बालकों का नामकरण हो रहा है। हिमालय के पहाड़ हों, उत्तर भारत के मैदान हों, बिहार-बंगाल के क्षेत्र हों, राजस्थान का रेगिस्तान हो, मध्यभारत का विंध्य-सतपुड़ा का पठार हो, अथवा महाराष्ट्र-तमिलनाडु का दूर तक फैला समुद्र तट हो- हिन्दुओं के हर वर्ण, जाति, सम्प्रदाय में राम और रामकथा के रामभक्त पात्रों पर केन्द्रित नामधारी व्यक्ति अवश्य मिल जाएँगे। राम की व्यापकता भाषाओं, क्षेत्रों, जाति-समूहों और समय की असीम अवधियों को पारकर भारतीय समाज के सबसे बड़े अंश को प्रभावित कर रही है। अभिवादन पद के रूप में ‘राम-राम’, ‘जय रामजी की’, ‘सीताराम’, ‘जय श्रीराम’ का उच्चारण भारत में हजारों वर्षों से हो रहा है। एक हजार वर्ष से अधिक की इस्लामिक-ईसाई दासता अभिवादन पदों और नामकरणों की इस पुरातन विरासत को क्षतिग्रस्त नहीं कर सकी; छीन नहीं सकी।

इस्लाम की विस्तारवादी आँधी ने अत्यंत क्रूरता और निर्ममता पूर्वक लाखों मंदिर धराशायी कर दिए किन्तु भारतीयों के मन पर अंकित ‘राम’ नाम के दो अक्षरों को जरा भी धूमिल नहीं कर सकी। शपथ-सौगन्ध के लिए राम काम में आते हैं। कोई दुःखद सूचना पाकर मुख से ‘राम’ शब्द स्वतः निकल जाता है। किसी कारूणिक वर्णन को सुनकर अथवा किसी पर हुए अत्याचार को जानकर पीड़ित के पक्ष में व्यक्त सहानुभूति के रूप में हम ‘अरे राम-राम!’ कह उठते है। शव-यात्रा राम का नाम लिए बिना आगे नहीं बढ़ती। अर्थीं काँधे पर आते ही राम बरबस याद आ जाते हैं और राम के नाम की सत्यता अन्तर्मन में अनुभूत होकर स्वर बनकर वातावरण को गुँजायमान कर देती है।

उत्तर भारत एवं देश के अनेक क्षेत्रों में तराजू पर अनाज आदि तौलते समय तौलने वाला व्यक्ति पहली तोल में ‘एक’ के स्थान पर ‘राम’ शब्द का उच्चारण करता है। हिन्दी की बहुत सी लोकोक्तियाँ- ‘राम कहो’, ‘राम की माया कहीं धूप कहीं छाया’, ‘मुँह में राम बगल में छुरी’, ‘राम की चिरैय्याँ रामहिं को खेत, खाउ री चिरइयों भर-भर पेट’, ‘रामजी का सहारा’, ‘राम करै सो होय’, ‘जाही विधि राखै राम ताही विधि रहिए’, राम पर आधारित हैं और लोकजीवन में राम की गहरी स्वीकृति प्रमाणित करती हैं। राम की यह विस्तृत व्याप्ति और लोक-स्वीकृति उन्हें भारत का पर्याय सिद्ध करने के लिए पर्याप्त है।

इसी आधार पर राम भारत की अस्मिता हैं, वे स्वयं भारत हैं और इसीलिए भारत-विरोधी शक्तियाँ राम का विरोध करती हैं। राम को शक्तिहीन सिद्ध करने के लिए इस्लाम ने रामजन्मभूमि पर बना भव्य मंदिर ध्वस्त कर भारत के मन पर गहरी चोट की, भारत ने उस व्रण की पीड़ा शताब्दियों तक सही किन्तु उसे भरने-सूखने नहीं दिया, विस्मृत नहीं किया। उसे रक्त से सींचकर हरा रखा और अब राम की शक्ति को पुनः प्रतिष्ठा दी। राम से भारत का मन छिन्न करने के लिए ईसाई बौद्धिक धरातल पर भारतीय हिन्दू कम्युनिस्टों के सहयोग से निरंतर राम के विरूद्ध लेखन के स्तर पर भयंकर विष-वमन कर रहे हैं तथापि भारत में, भारतीयों के मन-मंदिर में राम की प्रतिष्ठा यथावत संरक्षित है। इसका संरक्षण हमारी जातीयता अस्मिता और सांस्कृतिक जीवन धारा का संवर्धन है; भारत की भावी पीढ़ियों के लिए उनकी वास्तविक पहचान का परिचय है, अतः सर्वथा करणीय है।

‘राम हैं तो भारत है, राम नहीं तो भारत नहीं’ इस सांस्कृतिक सूत्र को समझकर हमें राम और भारत के विरूद्ध हर कुचक्र को विफल करना होगा। यह हमारा कर्तव्य भी है और दायित्व भी। आधुनिक भारत की अनेक जटिल समस्याओं की जड़ें राम और रामकथा के सही अर्थ से भटकने में है। रामकथा सामाजिक-सांस्कृतिक समन्वय और समरसता की महागाथा है जो व्यक्ति और समाज, राष्ट्र और विश्व सबके लिए कल्याणकारी है। अतः सर्वथा प्रासंगिक भी है।

(लेखक डॉ. कृष्णगोपाल मिश्र, शासकीय नर्मदा महाविद्यालय नर्मदापुरम् (मध्य प्रदेश) में हिन्दी के विभागाध्यक्ष हैं)

‘पत्थर मारो सालों को…’ : वडोदरा में मस्जिद से शोभायात्रा पर हुआ पथराव, कट्टरपंथी मुस्लिम महिलाओं ने पुलिस को गाली बकी; सामने आए Videos

गुजरात के वडोदरा जिले में रामनवमी की शोभा यात्रा पर पथराव के कई वीडियो सामने आए हैं। शोभा यात्रा पर हमले के बाद इलाके में तनाव फैल गया है। सामने आए वीडियो में दिख रहा है कि पथराव एक मस्जिद के पास से की जा रही है, जबकि कट्टरपंथी मुस्लिम महिलाएँ पुलिस का रास्ता रोककर खड़ी हैं।

सामने आए ताजा वीडियो में दिख रहा है कि शोभा यात्रा पर पथराव सिर्फ मस्जिद के आसपास की छतों से ही नहीं, बल्कि मस्जिद से भी की गई। वीडियो में दिख रहा है कि नमाजी टोपी पहना एक शख्स मस्जिद से शोभायात्रा में शामिल लोगों पर पत्थर फेंकता और फिर भाग जाता है।

इस वीडियो को इंडिया टीवी के पत्रकार निर्णय कपूर ने साझा किया है। वीडियो को शेयर करते हुए उन्होंने लिखा है, “वड़ोदरा का ये वीडियो इस बात की पुष्टि कर रहा है कि गुरुवार को कुम्भारवाड़ा से निकली यात्रा पर मस्जिद में मौजूद लोगों ने पथराव किया था। देखिये इस आदमी को- मस्जिद के गेट पर बने छपरे से पत्थर फेंक कर मस्जिद के अंदर कूदता दिख रहा है, जिसके बाद पुलिस मस्जिद में दाखिल होते दिख रही है।”

इसके साथ ही एक और वीडियो सामने आया है। इस वीडियो में दिख रहा है कि शोभा यात्रा पर पथराव करने वाले अपराधियों को गिरफ्तार करने के लिए पुलिस जब मुस्लिम इलाके में गई तो मुस्लिम महिलाओं ने उन्हें घेर लिया। वीडियो में साफ दिख रहा है कि मुस्लिम महिलाएँ ना सिर्फ पुलिस का रास्ता रोक रही हैं, बल्कि उनके साथ गाली-गलौच भी कर रही हैं।

कट्टरपंथी मुस्लिम महिलाएँ पुलिस के चीख-चिल्ला रही हैं, बल्कि ‘पत्थर मारो सालों को’ कहकर गाली भी दे रही हैं और आसपास के लोगों को पुलिस के खिलाफ भड़का भी रही हैं। इस वीडियो में इनकी गाली को सुना जा सकता है।

बता दें कि गुरुवार (30 मार्च 2023) को देश भर में हर्ष और उल्लास के साथ रामनवमी मनाया गया, लेकिन कुछ राजनीतिक वजह से और कुछ कट्टरपंथियों की महजहबी वजह से कई राज्यों में शोभा यात्रा पर हमले किए गए। बंगाल में सीएम ममता बनर्जी द्वारा जूलुस को मुस्लिम इलाके में ले जाने की धमकी के बाद वहाँ बड़े पैमाने पर हिंसा भड़क उठी। कट्टरपंथियों ने उनके बयान में उनका सहयोग माना।

वहीं, महाराष्ट्र और गुजरात के कई इलाकों में भी हिंसा की खबर है। गुजरात के वड़ोदरा जिले के फतेहपुरा गराना पुलिस चौकी क्षेत्र में हिंदुओं द्वारा रामनवमी की शोभा यात्रा निकाली गई थी। शोभा यात्रा जैसे ही एक मस्जिद के सामने से गुजरने लगी, उस पर पथराव कर दिया गया। कट्टरपंथियों ने इस हमले के लिए हिंदुओं पर आरोप लगाया था, लेकिन वीडियो सामने आने के बाद उनका यह झूठ भी पकड़ा गया है।

सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पुलिस आरोपितों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार करने में जुटी। है। हालाँकि, जैसा कि ऊपर के वीडियो में दिख रहा है, पुलिस प्रशासन को उनके काम को करने से भी रोका जा रहा है और कट्टरपंथी मुस्लिम महिलाएँ इस काम में बढ़-चढ़कर अपनी भूमिका निभा रही हैं।

जिस मुस्लिम लड़की से किया प्रेम विवाह… उसने दुर्गा प्रतिमा तोड़ी, नवरात्र में मीट खाने और पूरे परिवार को इस्लाम कबूलने की दी धमकी

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में अजय कुमार नाम के शख्स ने पत्नी पर धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाने का आरोप लगाया है। पति का आरोप है कि दुर्गा पूजा (चैत्र नवरात्र) के दौरान उसकी पत्नी मुस्कान ने घर में रखी देवी की प्रतिमा को खंडित कर दिया। आरोप है कि पिछले 15 दिनों से मुस्कान अपने पति अजय और घरवालों पर इस्लाम अपनाने का दबाव बना रही है। अजय ने इसे लेकर नजदीकी थाने में पत्नी मुस्कान और ससुराल पक्ष के खिलाफ मामला दर्ज कराया है।

पुलिस को दी गई अपनी शिकायत में अजय ने बताया है कि दिसंबर 2022 में उसने मुस्कान के साथ प्रेम विवाह किया था। अजय अकराबाद थाना इलाके के फरीदपुर का रहने वाला है और मुस्कान पास के गुल्लूपुर सिहोर की रहने वाली है। रिपोर्ट्स के अनुसार फरीदपुर में मुस्लिम आबादी ज्यादा है। गाँव में अजय का परिवार अकेला हिंदू परिवार है।

अजय का आरोप है कि आस-पास की महिलाओं ने उनकी पत्नी को भड़काया है। शादी के कुछ दिनों बाद जब मुस्कान आस-पास की मुस्लिम महिलाओं के संपर्क में आई, उसके बाद से ही वह पति समेत घरवालों पर धर्मपरिवर्तन का दबाव बना रही है।

स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार चैत्र नवरात्र के दौरान मुस्कान ने मीट खाने की जिद शुरू कर दी। घरवालों ने व्रत होने और दुर्गा पूजा की बात कही तो उसने दुर्गा प्रतिमा को क्षति पहुँचाया और हंगामा खड़ा कर दिया। अजय का कहना है कि इस संबंध में उन्होंने मुस्कान के घर वालों से भी बात की। अजय के ससुरालवालों ने भी बेटी का पक्ष लिया और धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया।

सोशल मीडिया पर झगड़े का एक वीडियो भी वायरल हो रहा है। दावा है कि अजय ने इसे रिकॉर्ड किया है। वीडियो में सुना जा सकता है कि स्थानीय भाषा में मुस्कान अपने ससुराल वालों को धमकी दे रही है। वीडियो बनाने वाला संभवतः मुस्कान का पति अजय बार-बार कह रहा है कि उसे मरना मंजूर है लेकिन वो अपना धर्म नहीं छोड़ेगा। इस पर उसकी पत्नी कहती है कि सबको मरना होगा।

अलीगढ़ पुलिस ने अजय की शिकायत पर पाँच लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। सीओ बरला सर्जना सिंह ने जानकारी दी है कि पीड़ित पति की शिकायत पर पत्नी मुस्कान उसके पिता यूनिस, मुस्कान के बहनोई सुहेल और साले के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। मामले की जाँच की जा रही है और सामने आए तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।

रामनवमी पर महाराष्ट्र और बंगाल में 2 की मौत: देश के कई शहरों में पथराव-हिंसा, कहीं मस्जिद तो कहीं ‘मुस्लिम एरिया’ बनी वजह

रामनवमी के अवसर पर देश के कई शहरों में जुलूस पर पत्थरबाजी और हिंसा की खबरें सामने आईं। हिंसक घटनाओं में पश्चिम बंगाल में एक और महाराष्ट्र में एक शख्स की मौत हो गई। इसके अलावा गुजरात और उत्तर प्रदेश से भी रामनवमी की शोभा यात्रा पर पथराव की खबरें सामने आई हैं।

पश्चिम बंगाल में उत्तर दिनाजपुर के इस्लामपुर शहर के दालखोला इलाके में रामनवमी के जुलूस के दौरान दो समुदायों के बीच झड़प हो गई। मुस्लिम बहुल इलाके में हुई झड़प में एक शख्स की मौत हो गई जबकि 5-6 पुलिसकर्मी जख्मी हो गए। बंगाल पुलिस युवक के मौत की वजह हार्ट अटैक बता रही है।

हावड़ा में असामाजिक तत्वों ने रामनवमी के जुलूस पर पत्थरबाजी की और हिंसा भड़कने पर फिर कई वाहनों में आग लगा दी। घटना हावड़ा के शिबपुर की है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में लोग छतों से जुलूस पर पथराव करते नजर आ रहे हैं।

महाराष्ट्र के संभाजीनगर (औरंगाबाद) और जलगाँव में रामनवमी के अवसर पर सांप्रदायिक हिंसा भड़क उठी। संभाजीनगर के किराड़पुर में एक मंदिर के आगे मामूली सी बात से शुरू हुए झगड़े ने हिंसा का रूप ले लिया। रिपोर्टों के मुताबिक गोली लगने से जख्मी एक शख्स की अस्पताल में मौत हो गई।

संभाजीनगर में हिंसा के दौरान न सिर्फ पत्थरबाजी की गई बल्कि बम भी फेंके गए। हालात को संभालने पहुँची पुलिस के वाहनों को भीड़ ने जला दिया और आस-पास खड़े वाहनों को भी नुकसान पहुँचाया। बताया जा रहा है कि घटना में 14 पुलिसकर्मी जख्मी हैं। असमाजिक तत्वों ने पुलिस को 13 गाड़ियों को फूँक दिया।

महाराष्ट्र के ही जलगाँव में मस्जिद के आगे से निकल रहे हिन्दुओं के जुलूस में डीजे की आवाज को लेकर हुए विवाद ने देखते-देखते हिंसक रूप ले लिया। मामले में 2 FIR दर्ज हुए हैं, जिसमें हिन्दू और मुस्लिम दोनों को आरोपित किया गया है। अब तक कुल 45 आरोपितों की गिरफ्तारी की खबर है। यह घटना मंगलवार (28 मार्च 2023) की है।

गुजरात के वडोदरा में भी 2 स्थानों पर कट्टरपंथी भीड़ ने रामनवमी के जुलूस को निशाना बनाया। रिपोर्ट्स के मुताबिक फतेहपुरा गराना पुलिस चौकी क्षेत्र का है। गुरुवार को हिन्दुओं द्वारा यहाँ से रामनवमी की शोभा यात्रा निकाली गई थी। जैसे ही यात्रा इलाके की एक मस्जिद के पास पहुँची, किसी बात को लेकर दो पक्षों में विवाद हो गया। देखते-देखते मस्जिद के पास से जुलूस में शामिल श्रद्धालुओं पर पत्थरबाजी शुरू हो गई। कुंभारवाडा इलाके में भी रामनवमी की शोभा यात्रा पर पथराव की घटना सामने आई।

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में भी मस्जिद के सामने शोभायात्रा पर पत्थरबाजी की घटना सामने आई। इस विवाद में शामिल एक गाड़ी में तोड़फोड़ की गई। पीड़ित पक्ष ने मुस्लिम महिलाओं द्वारा पत्थर फेंके जाने का आरोप लगाया है।

कट्टरपंथी मुस्लिम महिलाओं ने रामनवमी जुलूस पर पत्थर बरसाए, दौड़ा-दौड़ा कर पीटे गए श्रद्धालु: लखनऊ में हिन्दू संगठनों ने दिया थाने पर धरना

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में रामनवमी के अवसर गुरुवार (30 मार्च 2023) को शोभायात्रा के दौरान विवाद की खबर है। यह विवाद एक मस्जिद के सामने से जुलूस निकलने के दौरान हुआ। इस विवाद में शामिल एक गाड़ी में तोड़फोड़ की गई है। पीड़ित पक्ष ने मुस्लिम महिलाओं द्वारा पत्थर फेंके जाने का आरोप लगाया है।

यह घटनाक्रम लखनऊ के थानाक्षेत्र जानकीपुरम विस्तार का है। इस भगवा यात्रा के संयोजक और भाजपा नेता कुलदीप सिंह राठौर से ऑपइंडिया ने बात की। कुलदीप सिंह ने बताया कि इस यात्रा के लिए उन्होंने अधिकारियों से अनुमति ली थी, फिर भी यात्रा अराजकता का शिकार हुई। उन्होंने आगे बताया कि घटना के समय यात्रा ठीक से शुरू भी नहीं हुई थी और अधिकतम 50 लोग ही जमा होकर आगे की तैयारी कर रहे थे।

कुलदीप सिंह ने कहा कि शोभा यात्रा में शामिल किसी व्यक्ति ने ना तो किसी स बहस की और न ही कोई विवाद हुआ। बकौल कुलदीप सिंह, जैसे ही शोभायात्रा शाही मस्जिद के आगे से निकलने लगी, वैसे ही छतों से महिलाओं ने पत्थर मारने शुरू कर दिए और नीचे नाबालिग लड़कों ने हमला कर दिया। इस दौरान पुरुषों के वयस्क हमलावरों की संख्या लगभग 20 बताई जा रही है।

शोभायात्रा में शामिल लोग कुछ समझ पाते, आरोपितों ने यात्रा में शामिल एक वाहन को तोड़ डाला। इतना ही नहीं, इसमें शामिल लोगों को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा भी गया। कुलदीप सिंह के एक साथी के सिर पर भी चोट लगने की जानकारी सामने आई है। विवाद के बाद टूटे वाहन की फोटो कुलदीप सिंह ने अपने ट्विटर हैंडल पर शेयर भी की है।

पुलिस का जोर सिर्फ हम पर ही

कुलदीप सिंह जिस वक्त ऑपइंडिया से बात कर रहे थे, उस वक्त वे थाने में होने की बात कही थी। उन्होंने आरोप लगाया कि भगवा यात्रा में शामिल लगभग 7 लोगों को पुलिस ने कस्टडी में ले लिया है। इनमें कई बच्चे नाबालिग भी हैं। हमें बताया गया कि पुलिस वाले तमाम मिन्नतों के बाद भी उन लोगों को छोड़ नहीं रहे हैं।

भाजपा नेता ने यह भी दावा किया कि उनकी तरफ के नाबालिगों सहित लगभग 7 लोगों को हिरासत में लिया गया है, जबकि हमलावरों की तरफ से केवल 2 लोगों को थाने में लाया गया है। पुलिस कार्रवाई से खुद को असंतुष्ट बताते हुए कुलदीप ने हमलावरों पर कार्रवाई और अपने साथियों की रिहाई की माँग की।

जानकीपुरम थाना के प्रभारी बृजेश त्रिपाठी ने कहा कि अभी किसी तरफ से तहरीर नहीं दी गई है। इसलिए आगे की कार्रवाई नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि रामनवमी जुलूस में शामिल लोगों को पूछताछ के बाद छोड़ दिया गया है।

पिछली बार भी हुआ था विवाद

ऑपइंडिया से बात करते हुए कुलदीप सिंह ने आगे बताया कि पिछली बार की रामनवमी में भी मुस्लिम पक्ष ने हिन्दू पक्ष से विवाद किया था। तब गोली चल गई थी, लेकिन पुलिस बार-बार सिर्फ अज्ञात में FIR दर्ज करती है। उन्होंने समाजवादी पार्टी के पार्षद चाँद पर स्थानीय असामाजिक तत्वों को बढ़ावा देने का आरोप लगाया।

पुलिस ने दी कार्रवाई जारी होने की जानकारी

लखनऊ पुलिस के उत्तरी जोन के DCP कासिम आब्दी ने इस विवाद की वजह DJ पर हो रहे गाने को बताया। DCP ने मस्जिद के आगे कहासुनी को स्वीकार करते हुए दोनों पक्षों को थाने लाने की जानकारी दी है। मौके पर शांति बताते हुए उन्होंने कहा कि आगे की कार्रवाई जारी है।

थाने में लग रहे पुलिस प्रशासन मुर्दाबाद के नारे

जब जुलूस में शामिल लोगों को पुलिस ने नहीं छोड़ा तब भाजपा नेता कुलदीप सिंह राठौर और भाजपा नेत्री किरन सिंह राठौर सहित कई थाने में ही धरने पर बैठ गए। किरन सिंह थाने से अपने फेसबुक से LIVE आईं। इस वीडियो में पुरुषों और महिलाओं को पुलिस कार्रवाई से नाराजगी जताते हुए प्रदर्शन करते देखा जा सकता है।

इस दौरान पुलिस प्रशासन मुर्दाबाद के नारे भी लगाए। थाना प्रभारी बृजेश त्रिपाठी लोगों को समझाने की कोशिश की। हालाँकि, लोग मानने को तैयार नहीं हुए। बाद में जुलूस में शामिल लोगों को छोड़ दिया गया। इसके बाद थाने में धरने पर बैठे लोग भी वापस चले गए।

एक अन्य LIVE विजुअल में हिन्दू संगठन के लोगों को पुलिस से बहस करते देखा जा सकता है। उस वीडियो में थाने में मौजूद एक भगवा वस्त्रधारी ने कहा, “हमेशा हिन्दू मारे जाते हैं।” सभी प्रदर्शनकारी हिरासत में लिए गए हिन्दुओं को छोड़ने और CCTV फुटेज के आधार पर आरोपितों की गिरफ्तारी की माँग कर रहे हैं।

छतों से मारे पत्थर, वाहनों में आग लगाई: बंगाल में जहाँ निकल रहा था रामनवमी का जुलूस, वहाँ हिंसा; CM ममता बोलीं- ‘रमजान में मुस्लिम गलत नहीं करते’

महाराष्ट्र, गुजरात के बाद अब पश्चिम बंगाल के हावड़ा में भी रामनवमी के मौके पर हंगामे की खबर है। सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर करके दावा किया जा रहा है कि वहाँ असामाजिक तत्वों ने रामनवमी के जुलूस पर पत्थरबाजी की और हिंसा भड़कने पर फिर कई वाहनों में आग लगा दी गई। घटना हावड़ा के शिबपुर की है। मौके पर फिलहाल पुलिसकर्मी मौजूद हैं। पुलिस की भी एक गाड़ी में आग लगाने की बात सामने आई है।

कुछ मीडिया रिपोर्ट्स (इंडिया टुडे, अमर उजाला) रिपोर्ट्स बता रही हैं कि बंगाल मुख्यमंत्री ने इस घटना के बाद सारा ठीकरा हिंदुओं पर फोड़ा है। उन्होंने कहा, “मेरे आँख-कान खुले हैं। मुझे सब दिख रहा है। मैंने पहले ही चेतावनी दी थी कि मुस्लिम बहुल इलाकों से यात्रा ना निकाली जाए। मैंने पहले ही कहा था कि राम नवमी पर रैली निकाली गई तो हिंसा हो सकती है। वह बोलीं, “यह रमजान का वक्त है। इस वक्त में वे (मुस्लिम समुदाय) कुछ गलत काम नहीं कर सकते।”

उन्होंने कहा, “जो कोई भी हिंसा और हमले में शामिल है, हम उनकी एक नहीं सुनेंगे। मैं पुलिस से उन लोगों के विरुद्ध एक्शन लेने को कहूँगी जिन्होंने उन्हें इलाके में घुसने की अनुमति दी थी और जो हिंसा व साजिश में शामिल थे “

बता दें कि रामनवमी का जुलूस इलाके में पहुँचने के बाद हिंसा भड़की। श्रद्धालुओं पर पत्थर फेंके गए। जब उन्होंने इसका जवाब दिया तब हालात और गंभीर हो गए।।

जानकारी के अनुसार, बंगाल में रामनवमी पर निकाले गए जुलूसों में भाजपा द्वारा निकाला गया एक जुलूस भी था। इसमें सुवेंदु अधिकारी थे। जिनके 1.5 किलोमीटर बढ़ते ही ये विवाद होने लगा। कुछ वीडियोज में दिख रहा है कि कैसे छतों से पत्थर फेंके गए और वाहन में आग लगाई गई

हावड़ा में हुई इस हिंसा के लिए भाजपा ने बंगाल की मुख्यमंत्री और गृहमंत्री ममता बनर्जी ने को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा, “10000 जुलूस निकल रहे हैं, ऐसे में ममता बनर्जी को पुलिस मैनेजमेंट देखना चाहिए था, लेकिन वो धरने पर बैठीं।”

बता दें कि ममता बनर्जी ने धरने पर बैठने के बाद रामनवमी के अवसर पर हिंदुओं को मुस्लिम इलाकों में न जाने की सलाह दी थी। उन्होंने कहा था कि ये रमजान का महीना है। ऐसे में मुस्लिम इलाकों में राम नवमी का जुलूस न निकालें। उन्होंने ये भी कहा था कि अगर ऐसा हुआ तो फिर आरोपितों को कोर्ट छोड़ेगा नहीं।