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माहिम के बाद अब पनवेल वाली दरगाह हटाने की माँग: MNS कार्यकर्ताओं ने जारी किया पोस्टर, 15 साल पहले पहाड़ी इलाके में हुआ था कब्जा

राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) ने अब मुंबई के पनवेल में अवैध दरगाह हटाने की माँग उठाई है। मनसे का दावा है कि अवैध दरगाह के नाम पर लगभग 15 साल पहले पहाड़ी क्षेत्र पर अतिक्रमण किया गया था। राज ठाकरे के संगठन ने इसे देश की आतंरिक सुरक्षा के लिए खतरा बताते हुए नवी मुंबई में प्रस्तावित हवाई अड्डे के निर्माण में भी बाधक कहा है। शनिवार (24 मार्च 2023) को इस बाबत राज ठाकरे की पार्टी ने सरकार को सम्बोधित करते हुए एक बैनर भी जारी किया।

मनसे कार्यकर्ताओं ने पनवेल की मजार हटाने की माँग के साथ एक वीडियो भी जारी किया है। वीडियो में उनके पीछे मजार का एक बड़ा सा पोस्टर भी दिखाई दे रहा है। पोस्टर में बड़े शब्दों में हरे रंग से ‘लैंड जिहाद’ लिखा हुआ है। इसके ऊपर देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे से माँग की गई है कि नवी मुंबई के विकास के लिए पनवेल की अवैध दरगाह को हटाया जाए।

अंत में लिखा गया है, “तुम रुकोगे या नहीं।” इस बैनर मनसे पदाधिकारी योगेश जनार्दन चिले की तरफ से जारी किया गया है। हरे रंग के ही बैकग्राउंड में बने इस बैनर के बीच में दरगाह की बड़ी सी फोटो भी लगाई गई है।

इस दरगाह को हटाने की माँग करते हुए कुछ मनसे कार्यकर्ता पहले राज ठाकरे की माँग पर हटी माहिम की दरगाह का जिक्र करते दिखाई दे रहे। बाद में उन्होंने प्रदेश में अब हिंदूवादी सरकार होने की बात कहते हुए लगाए गए बैनर में की गई माँग को पूरी करने की माँग की है।

MNS कार्यकर्ताओं ने कहा कि पनवेल की दरगाह से पूरे हवाई अड्डे पर नजर रखी जा सकती है जो सुरक्षा के नजरिए से खतरनाक है। वीडियो के अंत में कहा गया है कि अगर दरगाह के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई तो पनवेल प्रशासन के खिलाफ महामोर्चा बनाया जाएगा।

गौरतलब है कि इसी सप्ताह राज ठाकरे की माँग पर माहिम में एक अवैध दरगाह को प्रशासन द्वारा गुरुवार (23 मार्च 2023) को  ध्वस्त कर दिया गया था। 24 मार्च (शुक्रवार) को राज ठाकरे ने इस कार्रवाई के लिए मुंबई प्रशासन को धन्यवाद दिया है। अपने ट्वीट में राज ठाकरे ने माहिम दरगाह से पहले और बाद के चित्र को भी शेयर किया है।

कर्नाटक सरकार ने मुस्लिमों का 4% आरक्षण खत्म किया: SC-ST को मिलेगा लाभ, कुल आरक्षण 50 से बढ़कर 56% हुआ

कर्नाटक विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों के बीच सरगर्मी बढ़ गई है। चुनाव के तारीखों की घोषणा से पहले ही कॉन्ग्रेस ने अपने 124 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी है। वहीं, मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने राज्य की आरक्षण व्यवस्था में बदलाव करते हुए मुस्लिमों के लिए आवंटित 4 प्रतिशत कोटा को हटा दिया है।

कर्नाटक की भाजपा सरकार ने शुक्रवार (24 मार्च 2023) को हुई एक कैबिनेट बैठक में आरक्षण कोटा को 50 प्रतिशत से बढ़ाकर 56 प्रतिशत कर दिया। आरक्षण में बढ़ोतरी के बावजूद राज्य सरकार ने मुस्लिमों के 4 प्रतिशत के आरक्षित कोटे को खत्म कर दिया। OBC मुस्लिमों को यह आरक्षण दिया जा रहा था।

बैठक के बाद सीएम बोम्मई ने कहा कि मुस्लिमों को आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए दी गई 10 प्रतिशत के आरक्षण श्रेणी में लाया जाएगा। बता दें कि आर्थिक रूप से कमजोर सवर्णों के लिए EWS कोटा दिया गया है। इसमें जैन, सिख आदि भी शामिल हैं।

सरकार ने फैसला किया है कि मुस्लिमों को दिया जाने वाला 4 प्रतिशत कोटा अब वोक्कालिगा (2 प्रतिशत) और लिंगायत (2 प्रतिशत) को दिया जाएगा। पिछले साल बेलगावी विधानसभा सत्र के दौरान 2C और 2D नाम की आरक्षण की दो नई श्रेणियाँ बनाई गई थीं।

इसके अलावा, कर्नाटक सरकार ने अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के आरक्षण में भी बदलाव किया गया है। अनुसूचित जाति को दी जाने वाली आरक्षण को 15 प्रतिशत से बढ़ाकर 17 प्रतिशत और अनुसूचित जनजाति आरक्षण को 3 प्रतिशत से बढ़ाकर 7 प्रतिशत कर दिया गया है।

सीएम बोम्मई ने कहा, “चार प्रतिशत (अल्पसंख्यकों के लिए आरक्षण) आरक्षण को 2C और 2D के बीच विभाजित किया जाएगा। वोक्कालिगा और अन्य के लिए दी जाने वाली 4 प्रतिशत आरक्षण को बढ़ाकर 6 प्रतिशत किया जाएगा। वहीं, वीरशैव पंचमसाली और अन्य (लिंगायत) के 5 प्रतिशत आरक्षण को बढ़ाकर 7 प्रतिशत किया जाएगा।”

सरकार के इस फैसले से सभी लोगों को फायदा मिलेगा। मुस्लिमों को जहाँ 4 प्रतिशत की जगह अब 10 प्रतिशत का लाभ मिलेगा, वहीं वोक्कालिगा और लिंगायत समुदाय के आरक्षणों में भी 2-2 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

उधर, कॉन्ग्रेस ने 124 उम्मीदवारों के नाम की पहली सूची जारी की है। इसमें पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धरमैया वरुणा सीट से और दिग्गज नेता डीके शिवकुमार कनकपुरा सीट से मैदान में उतरेंगे। कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बेटे प्रियांक चितापुर से चुनाव लडेंगे। बता दें कि कर्नाटक की 224 सीटों के लिए जल्दी ही चुनाव की घोषणा हो सकती है।

छिन सकता है सरकारी आवास, सजा न हुई कम तो 8 साल चुनाव भी नहीं लड़ पाएँगे: सांसदी जाने से खत्म नहीं हुई राहुल गाँधी की मुसीबतें

आपराधिक मामले में 2 साल की सजा होने के दो दिन बाद लोकसभा सचिवालय द्वारा कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी की सदस्यता रद्द करने को लेकर बवाल हो गया है। कॉन्ग्रेस इसे अधिनायकवादी व्यवस्था बता रही है तो भाजपा इस फैसले का स्वागत कर रही है। राहुल की सदस्यता रद्द होने के साथ ही संसद की वेबसाइट से उनका नाम हटा दिया गया है।

भाजपा भले कहे कि इसमें उसकी कोई भूमिका नहीं है, लेकिन लगभग सारे विपक्षी दल कॉन्ग्रेस के साथ एकजुटता दिखाते हुए इसके लिए भाजपा को दोषी ठहरा रही है। कॉन्ग्रेस का कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी और उद्योगपति गौतम अडानी के बीच रिश्तों पर सदन में बहस और संयुक्त संसदीय समिति बनाने की माँग के कारण राहुल गाँधी को सजा दी गई है।

कॉन्ग्रेस ने इस एक्शन की वैधानिकता पर भी सवाल उठाया है। पार्टी ने कहा कि राष्ट्रपति ही चुनाव आयोग के साथ विमर्श कर किसी सांसद को अयोग्य घोषित कर सकते हैं। कॉन्ग्रेस ने कर्नाटक में राहुल गाँधी के बयान पर गुजरात में FIR पर भी सवाल उठाया है। कॉन्ग्रेस का तर्क है कि अगर कोई मामला संबंधित न्यायालय के न्यायाधिकरण क्षेत्र में नहीं आता है तो उसे इस पर जाँच करानी होती है। सूरत की अदालत ने ऐसा नहीं किया।

आरोप-प्रत्यारोप और कानून

कॉन्ग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा है कि सभी जानते हैं कि राहुल गांधी संसद के अंदर और बाहर दोनों जगह निडर होकर बोलते रहे हैं. वह इसकी कीमत चुका रहे हैं. सरकार बौखला गई है. यह सरकार उनकी आवाज दबाने के लिए नई तरीके खोज रही है। वहीं, कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने इसे लोकतंत्र पर हमला बताया है।

दरअसल, राहुल गाँधी ने कर्नाटक के कोलार में 13 अप्रैल 2019 को चुनावी रैली में कहा था, “सारे चोर मोदी सरनेम वाले ही क्यों होते हैं….नीरव मोदी, ललित मोदी, नरेंद्र मोदी।” राहुल गाँधी के इस बयान को लेकर बीजेपी विधायक और पूर्व मंत्री पूर्णेश मोदी ने उनके खिलाफ गुजरात में धारा 499 और 500 के तहत आपराधिक मानहानि का केस दर्ज कराया था।

कॉन्ग्रेस नेताओं का आरोप है कि राहुल गाँधी से सरकार डर गई थी। कॉन्ग्रेस नेताओं का स्पष्ट कहना है कि सूरत की अदालत ने राहुल गाँधी को 2 साल की सजा सुनाई थी और तुरंत जमानत भी दे दी थी। इसके साथ ही उन्हें 30 दिन अवधि ऊपरी अदालतों में अपील के भी दी थी। ऐसे में भाजपा ने कोर्ट के आदेश के विपरीत जाकर दो दिन में ही सदस्यता रद्द करा दी।

वहीं, भाजपा का कहना है कि राहुल गाँधी ऊपरी कोर्ट में अपील करना ही नहीं चाहते थे। वे मोदी सरकार के खिलाफ खुद को शहीद दिखाना चाहते थे। इसलिए उन्होंने सजा देने के दो दिन बाद भी ऊपरी अदालतों में अपील नहीं की। भाजपा नेता रविशंकर प्रसाद ने यह भी तर्क दिया कि सुप्रीम कोर्ट के नियमों के तहत अगर कोर्ट द्वारा 2 साल या उससे अधिक सजा दे दी जाती है तो सदस्यता तुरंत निलंबित मानी जाती है।

कॉन्ग्रेस के नेताओं ने इस पर तर्क दिया कि सुप्रीम कोर्ट ने पहली और दूसरी बार इसमें रियायत दी है। इन दोनों स्थितियों में अपील करने की अवधि दी है। लेकिन, अगर कोई ऐसा तीसरी बार करता है तभी सदस्यता तुरंत निलंबित हो सकती है।

इसको लेकर कॉन्ग्रेस के नेताओं ने कहा कि अपने फैसले में सूरत की अदालत ने 30 दिन का समय दिया था। इसके अलावा, उन्हें कोर्ट के फैसले की कॉपी नहीं मिली थी। कॉपी मिलते ही अपील करने की तैयारी की जा रही थी। इसी बीच भाजपा ने लोकसभा स्पीकर के माध्यम से उनकी सदस्यता रद्द करा दी।

क्या हो सकता है आगे

कानून के जानकारों का कहना है कि राहुल गाँधी के पास अब सेशंस कोर्ट में जाना होगा। वहाँ से मामला खारिज होने के बाद उनके पास गुजरात हाईकोर्ट में अपील का विकल्प है। अगर संबंधित फैसले के स्थान वाले हाईकोर्ट, गुजरात में उनकी अपील खारिज हो जाती है तो उनके पास सुप्रीम कोर्ट जाने का विकल्प रहेगा। राहुल गाँधी के पास संविधान के अनुच्छेद 136 के तहत सीधे सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का भी अधिकार है। सुप्रीम कोर्ट का देश के सभी अदालतों एवं ट्रिब्यूनलों पर अपीलीय क्षेत्राधिकार होता है।

अगर सुप्रीम कोर्ट भी निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखता है तो राहुल गाँधी 8 साल तक चुनाव नहीं लड़ पाएँगे। इसके साथ ही वे 2 साल तक उन्हें जेल की सजा भी काटनी होगी। इतना ही नहीं, राहुल गाँधी को अपना सरकारी बंगला भी खाली करना पड़ सकता है। हालाँकि, यह गृह मंत्रालय द्वारा उनकी सुरक्षा को लेकर लिए जाने वाले निर्णय पर निर्भर करेगा।

बता दें कि लोकसभा सचिवालय ने राहुल गाँधी की संसदीय सीट केरल के वायनाड को खाली घोषित कर दिया है। लोकसभा की वेबसाइट से उनका नाम भी हटा दिया गया है। ऐसे में चुनाव आयोग इस सीट पर चुनाव कराने का ऐलान कर सकता है। आयोग यह चुनाव अभी करा सकता है या फिर अगले साल होने वाले देश भर में लोकसभा चुनावों के साथ करा सकता है।

अगर हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट सूरत की अदालत के फैसले पर स्टे लगा देता है या फिर उसके निर्णय को बदल देता है तो राहुल गाँधी की लोकसभा सदस्यता बहाल हो सकती है।

कब जा सकती है सांसद-विधायकों की सदस्यता

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 102 (1) और जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के तहत राहुल गाँधी की सदस्यता को रद्द किया गया है। संसद या विधानसभा की सदस्यता की जाने की प्रमुख वजहें निम्नलिखित हैं।

संविधान के अनुच्छेद 102(1) और 191(1) के तहत अगर संसद या विधानसभा का कोई सदस्य लाभ का कोई पद लेता है, दिमाग़ी रूप से अस्वस्थ है, दिवालिया है या फिर वैध भारतीय नागरिक नहीं है तो उसकी सदस्यता को रद्द किया जा सकता है।

सांसद और विधायकों की अयोग्यता से संबंधित दूसरा नियम संविधान की 10वीं अनुसूची में दी गई है। इस कानून के तहत अगर किसी सदस्य को दल-बदल के आधार पर दोषी ठहराया जाता है तो उसकी सदस्यता रद्द कर दी जाएगी।

इसके अलावा लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के तहत भी सांसदों या विधायकों की सदस्यता जा सकती है। इस कानून के तहत किसी सदस्य को आपराधिक मामलों कम-से-कम 2 साल की सज़ा होने पर सदस्यता रद्द हो जाएगी।

जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 8(1) के के तहत अगर कोई सदन सदस्य दो समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देता है, रिश्वत लेता या फिर चुनाव में अपने प्रभाव का ग़लत इस्तेमाल करता है तो उसकी सदस्यता जा सकती है।

इसी तरह जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 8 (2) के तहत जमाखोरी, मुनाफ़ाखोरी, खाद्य पदार्थों में मिलावट या फिर दहेज निषेध अधिनियम के तहत दोषी ठहराए जाने और कम-से-कम छह महीने की सज़ा मिलने पर सदस्यता रद्द हो सकती है।

इसी अधिनियम की धारा 8 (3) के तहत अगर किसी सांसद या विधायक को दोषी ठहराया जाता है और उसे दो साल या उससे अधिक की सज़ा मिलती है तो उसकी सदस्यता जा सकती है। इसमें अंतिम निर्णय सदन के स्पीकर पर छोड़ा गया है। हालाँकि, बाद में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि सदस्यता जाएगी ही।

धक्का-मुक्की, पथराव और नारेबाजी: राहुल गाँधी की सांसदी जाने के बाद रायपुर में बवाल, BJP कार्यकर्ताओं से कॉन्ग्रेसी भिड़े

मानहानि केस में 2 साल की सजा सुनाए जाने के बाद राहुल गाँधी की लोकसभा सदस्यता खतरे में थी। शुक्रवार (24 मार्च 2023) को लोकसभा सचिवालय ने नोटिफिकेशन जारी कर उनकी सदस्यता रद्द कर दी। इसको लेकर कॉन्ग्रेस लगातार विरोध दर्ज करा रही है। वहीं, भाजपा और कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच जुबानी जंग के साथ ही झड़प भी देखने को मिली।

दरअसल, राहुल गाँधी की संसद सदस्यता खत्म होने के बाद से ही कॉन्ग्रेस भाजपा पर हमलावर है। इसको लेकर छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने भाजपा कार्यालय के बाहर हंगामा करना शुरू कर दिया। कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता भाजपा कार्यालय के अंदर घुसने की कोशिश कर रहे थे। यही नहीं उन्होंने भाजपा कार्यालय में लगे पोस्टर पर कालिख फेंक दी। इससे भाजपा कार्यकर्ता भड़क गए और पार्टी के झंडे लेकर सड़क पर उतर आए और राहुल गाँधी के खिलाफ नारेबाजी करनी शुरू कर दी।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इस बीच भाजपा और कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता आपस में भिड़ गए। दोनों पार्टियों के कार्यकर्ताओं के बीच करीब आधे घण्टे तक धक्का मुक्की चलती रही। कुछ पुलिसकर्मी भी मौके पर पहुँचे। लेकिन बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा था। इसके बाद फोर्स उतारनी पड़ी। तब जाकर कहीं भाजपा कार्यालय के बाहर मामला शांत हुआ। हालाँकि विवाद यहीं नहीं रुका। पार्टी कार्यालय में हुए हंगामे के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं ने कहा कि वह कॉन्ग्रेस की इस हरकत का जवाब देंगे।

भाजपा कार्यकर्ताओं की धमकी के बाद एक ओर जहाँ कॉन्ग्रेस कार्यालय में पार्टी के कार्यकर्ता इकट्ठा होने लगे वहीं पुलिस की भी तैनाती कर दी गई। दूसरी ओर भाजपा कार्यकर्ता भी कॉन्ग्रेस कार्यालय पहुँच गए। वहाँ मौजूद पुलिस ने भाजपा कार्यकर्ताओं को रोकने की काफी कोशिश की। लेकिन वह नहीं माने और कॉन्ग्रेस कार्यालय में कालिख फेंक दी। यही नहीं, कॉन्ग्रेस और भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच एक दूसरे पर ईंट और पत्थर से भी हमला किया गया। इस हमले में कुछ कार्यकर्ताओं के घायल होने की भी खबर है।

दोनों पार्टी के नेता और कार्यकर्ता रुकने के नाम नहीं ले रहे थे। हालाँकि पुलिस अधिकारियों द्वारा बीच बचाव किए जाने के बाद मामला शांत हुआ। इसके बाद दोनों पक्ष थाने जा पहुँचे और एक दूसरे के खिलाफ FIR कराने की बात पर अड़े रहे। इस मामले में एएसपी अभिषेक माहेश्वरी का कहना है कि दोनों पार्टी के नेताओं ने पथराव किया है। वीडियो फुटेज की जाँच की जा रही है। दोनों पक्षों के खिलाफ कार्रवाई होगी।

इस मामले में छत्तीसगढ़ भाजपा ने ट्वीट कर कहा है, “ये कॉन्ग्रेसी लोकतंत्र और संविधान विरोधी हैं। राहुल गाँधी की संसद सदस्यता रद्द होने के बाद NSUI और कॉन्ग्रेस नेताओं ने शर्मनाक कृत्य करते हुए भाजपा रायपुर जिला कार्यालय ‘एकात्म परिसर’ पर हमला किया। भाजपा नेताओं के साथ अभद्र व्यवहार किया।”

एक अन्य ट्वीट में भाजपा की ओर से कहा गया है, “लोकतंत्र के इन हत्यारों का भाजपा कार्यकर्ताओं ने जमकर मुकाबला किया। कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने भाजपा युवा नेता गोविंदा गुप्ता का सर फोड़ा। अन्य भाजपा कार्यकर्ता भी घायल हुए। गलती राहुल गाँधी ने की, सजा न्यायालय ने संविधान और कानून के नियमों के तहत दी। इसमें भाजपा पर हमला क्यों?”

वायनाड में कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने किया सरकार विरोधी प्रदर्शन…

चूँकि राहुल गाँधी केरल के वायनाड से सांसद थे। ऐसे में उनकी सदस्यता रद्द होने के बाद वायनाड के कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता भी सड़क पर उतार आए और मोदी सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

‘100 हरे झंडों की जगह भगवा लगवाओ’: बागेश्वर धाम के महंत धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के बयान के खिलाफ राजस्थान में FIR, धार्मिक भावनाएँ भड़काने का आरोप

बागेश्वर धाम के महंत धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री एक बार फिर विवादों से घिर गए हैं। दरअसल, उन्होंने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कुंभलगढ़ किले पर लगे हरे झंडों की जगह भगवा झंडे लगाने की बात कही थी। इस बयान के चलते उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ है।

बागेश्वर धाम सरकार के नाम से मशहूर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री गुरुवार (23 मार्च 2023) को राजस्थान के उदयपुर पहुँचे थे। जहाँ गाँधी मैदान में आयोजित एक धर्मसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा है कि पाकिस्तान को हिंदू राष्ट्र तो बना ही लेंगे। कुंभलगढ़ में जो 100 हरे झंडे लगे हैं उन्हें भगवामय बनाना है। उन्होंने आगे कहा है, “100 हरे झंडे कुंभलगढ़ के किले में अंदर लहरा रहे हैं, यह हरों का देश नहीं भगवामयों का देश है। वीडियो में उनके इस बयान को 8:30 मिनट के बाद सुना जा सकता है।

उन्होंने यह भी कहा है, “ऐसा तुम नहीं कर पाए तो तुम बुजदिल हो। तुम डूब मरो। तुम्हारे रहते कोई हरा झंडा फहरा दे, महाराणा प्रताप के किले में, बप्पा रावल के किले में, मीराबाई की भूमि में कोई हरा झंडा फहरा दे। यहाँ राम का झंडा फहराना चाहिए। हम तुमसे प्रार्थना करते हैं अगर तुम सनातनी हो और तुम्हारे अंदर थोड़ा सा भी सनातन का खून है तो उठो और जाग जाओ। जो 100 हर झंडे लगे हैं वहाँ भगवा लगवाओ। इतना तुम नहीं कर पाए तो गड़बड़ आदमी हो।”

वन इंडिया ने एसपी विकास शर्मा के हवाले से कहा है कि धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कुंभलगढ़ के किले पर लगे हरे झंडों की जगह भगवा झंडे लगाने की बात कही थी। इसी भड़काऊ बयान को लेकर FIR दर्ज की गई है। एसपी ने यह भी कहा है कि सभा के संबोधन में धीरेन्द्र शास्त्री ने कई ऐसी बातें कहीं हैं जिससे शहर के लोगों की धार्मिक भावनाएँ भड़की हैं। ऐसे में पुलिस ने उनके खिलाफ मामला दर्ज किया है। इस पूरे मामले की गहनता से जाँच की जा रही है।

भड़काऊ भाषण देने के इस मामले में धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के खिलाफ IPC की धारा धीरेंद्र शास्त्री के खिलाफ आईपीसी की धारा 153A के तहत मामला दर्ज हुआ है। 153A के तहत मामला तब दर्ज किया जाता है जब भाषा या निवास आदि के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देने और सद्भावना बिगाड़ने का प्रयास किया जाता है। इस मामले में दोषी पाए जाने पर 3 साल तक की जेल या जुर्माना या फिर दोनों हो सकते हैं।

वहीं, एएसपी चन्द्रशील ठाकुर का कहना है कि धीरेंद्र शास्त्री ने अपने भाषण में दो समुदायों के बीच विवाद बढ़ाने वाले शब्दों का प्रयोग किया था। उनके इस बयान के बाद गुरुवार (23 मार्च 2023) की रात कुछ युवाओं ने कुंभलगढ़ के किले पर उपद्रव करने की कोशिश की थी। इस मामले में 5 लड़कों को गिरफ्तार भी किया गया है।

जगन्नाथ पुरी मंदिर में जबरन घुसा रहमान खान, रोकने पर पुलिस को बकी गाली: धार्मिक भावनाएँ ठेस पहुँचाने पर गिरफ्तार

ओडिशा के जगन्नाथ पुरी मंदिर (Jagannath Puri Temple) में जबरन प्रवेश करने के आरोप में पुलिस ने गुरुवार (23 मार्च 2023) को रहमान खान नाम शख्स को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने 25 वर्षीय रहमान पर गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध के नियमों का उल्लंघन करने और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने का आरोप लगाया है।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद का रहने वाला रहमान जगन्नाथ पुरी मंदिर में जबरन घुस गया, तभी सुरक्षाकर्मियों ने उसे पकड़ लिया। मंदिर के नियमों के अनुसार, मंदिर में गैर-हिंदुओं को प्रवेश करने की अनुमति नहीं है। यह घटना बुधवार (22 मार्च 2023) रात करीब 8:30 बजे पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के मंदिर में पूजा-अर्चना करने के कुछ घंटे बाद हुई।

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, “हमने उसे मंदिर के नियमों का उल्लंघन करने और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने के आरोप में गिरफ्तार किया है। उसने सुरक्षाकर्मियों को चकमा देकर इस तरह से मंदिर में जबरन घुसने की कोशिश क्यों की, इसकी जाँच की जा रही है। हमने उसका मोबाइल फोन भी जब्त कर लिया है।”

पुलिस के अनुसार, रहमान खान ने खुद की जान लेने के लिए मंदिर के गुंबद के ऊपर चढ़ने की कोशिश की। हालाँकि, जब अधिकारियों ने उससे आत्महत्या करने का कारण पूछा तो वह कोई ठोस जवाब नहीं दे सका। ओडिशा पुलिस बंगाल पुलिस की मदद से इस मामले की जाँच कर रही है। रहमान के परिवार को भी इस घटना से अवगत करा दिया गया है।

इस दौरान मंदिर के अधिकारियों ने देवी-देवताओं के दर्शन की सुविधा अस्थायी रूप से बंद कर दी थी। बताया जा रहा है कि सुरक्षाकर्मियों को चकमा देते हुए रहमान खान मंदिर के दक्षिण द्वार से अंदर भागा और जैसे ही पुलिस अधिकारी उसके पीछे भागे, वह गुंबद पर चढ़ने लगा। इस दौरान पुलिस ने उसे पकड़ लिया।

पुलिस अधिकारी ने कहा, “जैसे ही हम उसे वहाँ से ले जाने लगे, उसने हमें गालियाँ देनी शुरू कर दी। उसे उस रात सिंहद्वार पुलिस स्टेशन ले जाया गया और पूछताछ के लिए हिरासत में रखा गया। हमें नहीं लगता कि उसकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं है। उसे मंदिर में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध के बारे में पता था। इसके बावजूद उसने जबरन मंदिर में प्रवेश किया।”

‘बेकसूर… उसे सिर्फ मुस्लिम होने की सजा मिली’ : याद करें ताहिर हुसैन को समर्थन देने वालों के नाम, जो गिरफ्तारी के बाद बिलबिलाए थे, अब साधी चुप्पी

दिल्ली में हुए हिंदू विरोधी दंगा मामले में आप के पूर्व पार्षद रहे ताहिर हुसैन के खिलाफ कड़कड़डूमा कोर्ट ने आरोप तय कर दिए हैं। मामला दंगो के दौरान आईबी स्टाफ अंकित शर्मा की हत्या से जुड़ा है। दिल्ली दंगो के दौरान उत्तर-पूर्वी दिल्ली में अंकित शर्मा की हत्या कर दी गई थी। इसी हत्या मामले में ताहिर हुसैन समेत 11 अन्य लोगों पर आरोप तय किए गए हैं। बीजेपी नेता कपिल मिश्रा ने सोशल मीडिया पर ताहिर हुसैन की गिरफ्तारी के बाद उसे बचाने की कोशिश करने वालों पर जबर्दस्त हमला बोला।

कपिल मिश्रा ने ट्विटर पर एक वीडियो शेयर करते हुए लिखा, “राजदीप, स्वरा भास्कर, अरफ़ा शेरवानी, जावेद अख़्तर, विशाल ददलानी, जुबैर, सायमा, विनोद कापरी जैसे लोग ताहिर हुसैन को विक्टिम बताने की कोशिश कर रहे थे। वे लोग गलती से ऐसा कर रहे थे या सब दंगों की साज़िश का हिस्सा था?”

शेयर किए गए वीडियो में कपिल मिश्रा ने पूछा कि आखिर दिल्ली दंगों के आरोपित और अंकित शर्मा के हत्या में ताहिर हुसैन को किस नियत से बचाया जा रहा था। अपने 1 मिनट 55 सेकेंड के वीडियो में भाजपा नेता ने कई ऐसे नाम गिनवाए जिन्होंने ताहिर हुसैन को विक्टिम साबित कर उसे बचाने की कोशिश की थी।

दिल्ली दंगों में ताहिर हुसैन की भूमिका सामने आने के बाद वामपंथी गिरोह ने ऑर्गनाइज तरीके से मिल रहे सबूतों को नकार दिया था। अपने इकोसिस्टम का इस्तेमाल कर दंगाई को ही विक्टिम बनाने की कोशिश की थी। उदाहरण के लिए साल 2020 में दंगों में ताहिर हुसैन का नाम सामने आने के बाद किए गए कुछ ट्वीट देखिए।

तथाकथित पत्रकार राणा अय्यूब ने 6 मार्च 2020 को लिखा, “ताहिर हुसैन गिरफ्तार कर लिया गया। कपिल मिश्रा को Y+ स्तर की सुरक्षा दी गई। अनुराग ठाकुर स्वतंत्र हैं। अमित शाह से सवाल पूछने वाला कोई नहीं है। मोदी के नाम का जश्न मनाया जा रहा है। इसे ही मेजोरिटी प्रिविलेज (बहुसंख्यक विशेषाधिकार) कहा जाता है।”

पत्रकार राजदीप सरदेसाई को इस बात से आपत्ति हो गई कि लोग अंकित शर्मा के नृशंस हत्या की बात क्यों कर रहे हैं। उन्होंने ट्वीट किया कि दिल्ली दंगों में अब तक 35 लोगों की मौत हो गई है। लेकिन दक्षिणपंथियों के लिए सिर्फ अंकित शर्मा की हत्या मायने रखती है क्योंकि आरोपित ताहिर हुसैन है।

फिल्म निर्माता अनुराग कश्यप ने ट्वीट कर ताहिर हुसैन, उमर खालिद और खालिद सैफी को बेकसूर बताने की कोशिश की। कश्यप ने लिखा कि दिल्ली पुलिस के अनुसार 8 जनवरी को तत्कालिक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भारत यात्रा के समय देश का माहौल खराब करने के लिए ताहिर, उमर और खालिद ने दंगो की साजिश रची। जबकि ट्रंप के दौरे की जानकारी 13 जनवरी को दी गई थी।

इसी तरह बॉलीवुड गायक और म्यूजिक कंपोजर विशाल ददलानी ने भी ताहिर हुसैन को बेकसूर बताया। विशाल ने ट्विटर पर लिखा कि दंगो में शामिल कोई शख्स पुलिस को फोन क्यों करेगा।

साक्षी जोशी ने भी पुलिस को फोन करने के आधार पर ताहिर हुसैन को बेकसूर ठहराया। साक्षी जोशी के पति विनोद कापरी ने भी पुलिस को फोन करने के आधार पर ताहिर हुसैन को बेकसूर बताने की कोशिश कर रहे थे।

उन्होंने लिखा, “वीडियो तो दंगों के वक्त का ही है, ये साफ है। ताहिर दंगों में शामिल था तो वो बार बार पुलिस को अपने घर क्यों बुला रहा था? पुलिस ने भी तस्दीक़ (पुष्टि) की है कि ताहिर ने उन्हें कई बार फोन किया था।”

इन सब से 2 कदम आगे बढ़ते हुए आरफा खानम शेरवानी ने ताहिर हुसैन का इंटरव्यू किया। यह साक्षात्कार तब किया गया जब दिल्ली पुलिस ताहिर हुसैन की तलाश कर रही थी। उसने दंगाई ताहिर को कानून का पालन करने वाला नागरिक दिखाने की कोशिश की। आरफा ने साक्षात्कार के लिंक को ट्विटर पर शेयर किया। उसने लिखा, “कोर्ट द्वारा आत्मसमर्पण याचिका रद्द कर दी गई है। ताहिर हुसैन को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।” ताहिर हुसैन ने ‘द वायर’ से कहा था, “मुझे अपनी न्यायिक व्यवस्था पर पूरा भरोसा है। कोर्ट के समक्ष आत्मसमर्पण करने जा रहा हूँ। पूरा इंटर्वयू यहाँ देखें।”

बॉलीवुड गीतकार जावेद अख्तर ने दिल्ली पुलिस को कोसते हुए लिखा था कि दंगो में कई लोग मारे गए, कई घायल हुए, कई घर जला दिए गए, दुकानें लूट ली गईं, बहुत सारे लोग बेसहारा हो गए लेकिन दिल्ली पुलिस ने केवल एक घर सील किया। उस घर के मालिक का नाम है ताहिर हुसैन।

आम आदमी पार्टी नेता अमानतुल्लाह खान ने भी ताहिर हुसैन की बचाव में कई ट्वीट किए। अमानतुल्लाह ने मुस्लिम कार्ड खेलते हुए लिखा कि ताहिर आज मस्लिम होने की सजा पा रहा है। एक अन्य ट्वीट में अमानतुल्ला ने लिखा कि बीजेपी अपने लोगों को बचा रही है और आम आदमी पार्टी को बदनाम करने की कोशिश कर रही है।

बता दें कि ताहिर हुसैन ने न्यायिक हिरासत के दौरान अपना गुनाह कबूला था। उसने खुलासा करते हुए बताया था कि वो CAA के समर्थकों को सबक सिखाना चाहता था। इसलिए साथियों के साथ मिलकर दंगो की प्लानिंग की थी। 23 मार्च 2023 को कोर्ट ने माना कि उत्तर-पूर्वी दिल्ली में साजिश के तहत हिंदुओं पर हमले किए गए। ताहिर हुसैन इस साजिश में शामिल था। ताहिर हुसैन के अलावा हसीन, नाजिम, कासिम, समीर खान, अनस, फिरोज, जावेद, गुलफाम, शोएब आलम और मुंतजिम हिंसा में शामिल थे।

‘हिंदू धर्म नीच, सब तड़पकर मरोगे’: इंदौर में ग्रामीणों को धर्मांतरण के लिए उकसाने वाला ईसाई युवक गिरफ्तार, पैसों का देता था लालच

मध्य प्रदेश के इंदौर में धर्मांतरण के लिए प्रलोभन तथा धमकी देने का मामला सामने आया है। आरोप है कि राहुल बरगुंडा नामक व्यक्ति हिंदू धर्म को ‘नीच’ बताते हुए लोगों को बरगला रहा था और धर्मांतरण के लिए 1-1 लाख रुपए नकद देने व रोग ठीक करने की बात कर रहा था। मामला गुरुवार (23 मार्च 2023) का है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इंदौर के खुड़ैल थाना क्षेत्र में राहुल बरगुंडा नामक ईसाई युवक ग्रामीणों को धर्मांतरण के लिए बरगला रहा था। उसने एक घर में करीब 24 लोगों को इकट्ठा किया था, जहाँ भोले-भाले ग्रामीणों को ईसाई बनाने के लिए 1-1 लाख रुपए देने की बात कह रहा था। बरगुंडा पर आरोप है कि उसने हिंदू धर्म और देवी-देवताओं को लेकर अपमानजनक टिप्पणी की है।

लोगों को धर्मांतरण का शिकार बनाने के लिए राहुल कहता था, “हिंदू धर्म नीच है। इस धर्म का विकास नहीं हो पाएगा। तुम लोग इस धर्म में कभी भी सुखी नहीं रह पाओगे। यीशु का यह संदेश है कि उनकी शरण में आने से सब ठीक हो जाएगा। प्रभु यीशु ही सत्य है। उसकी शरण में आ जाओ, नहीं तो सब लोग तड़प-तड़प कर मर जाओगे। जल्द ही बहुत सारी बीमारियाँ आने वाली हैं। प्रभु यीशु ने सबके लिए स्वर्ग की सीढ़ी भेजी है। ईसाई में शामिल हो जाओ। यहाँ सबका स्वागत है।”

धर्मांतरण के लिए लोगों को बरगलाने और हिंदू धर्म का अपमान करने की जानकारी मिलने के बाद तेलिया खेड़ी निवासी रोहित कनोसिया ने शिकायत की। रोहित ने पुलिस को बताया है कि आरोपित राहुल बरगुंडा धर्मांतरण कराने के उद्देश्य से बीते कई दिनों से इस क्षेत्र में आ रहा है। वह लोगों से कहता था कि वह उनके रोग ठीक कर सकता है और उन्हें पैसे दिलवा सकता है।

वह मिशनरी स्कूल में मुफ्त में पढ़ाई और हॉस्पिटल में फ्री में इलाज का भी वादा करता था। आरोपित राहुल की हिंदू विरोधी बातें और धर्मांतरण की गतिविधियों से तंग आकर रोहित कनोसिया ने इसकी जानकारी हिंदूवादी संगठन के साथियों को दी। इसके बाद लोगों ने उसे पकड़कर पुलिस को सौंप दिया।

पुलिस ने धर्मांतरण के लिए दवाब बनाने के आरोपित राहुल बरगुंडा के खिलाफ मध्य प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। वहीं, टीआई अजय गुर्जर का कहना है कि आरोपित राहुल से पूछताछ की जा रही है। वह हिंदू से ईसाई बना है। उसके धर्मांतरण के पीछे किसका हाथ है, इसकी भी जाँच की जाएगी।

इससे पहले गत 5 मार्च 2023 को भी खुड़ैल थाना क्षेत्र से धर्मांतरण का एक और मामला सामने आया था। यहाँ पीड़ित ने क्रिस नार्मन बेबर्ता नामक ईसाई युवक पर धर्मांतरण के लिए दवाब बनाने तथा डराने का आरोप लगाया था। पीड़ित की शिकायत के बाद पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर उससे पूछताछ की।

फूल बेचने वाले ने गुरुग्राम में शुरू किया कैफे, हनुमान चालीसा पाठ से बना हाॅटस्पाॅट: मिलिए विवेक गुलाटी से, जानिए कैसे शुरू हुआ आध्यात्मिक जैमिंग

सोशल मीडिया में आध्यात्मिक जैमिंग का एक वीडियो वायरल है। वीडियो में युवाओं के एक समूह को ढोल, गिटार व अन्य वाद्य यंत्रों के साथ एक कैफे में संगीतमय अंदाज में हनुमान चालीसा का पाठ करते सुना जा सकता है। ‘केक डिजायर’ नाम का यह कैफे गुरुग्राम के सेक्टर 22 के मार्केट में है। इसके मालिक विवेक गुलाटी हैं। आध्यात्मिक जैमिंग उनके ही दिमाग की उपज है और इससे जुड़े युवाओं का वही नेतृत्व कर रहे हैं।

40 साल के गुलाटी ने ऑपइंडिया से बातचीत में अपनी अपनी सफलता को हनुमान जी की कृपा बताया। हमने भी उन्हें काॅल किया तो पाया कि उनके मोबाइल फोन की कॉलर ट्यून में भी हनुमान चालीसा लगी हुई थी। गुलाटी के अनुसार करीब 10 साल से उनके मोबाइल का कॉलर ट्यून हनुमान चालीसा ही है। मूल रूप से गाजियाबाद के रहने वाले गुलाटी करीब 20 साल पहले बिजनेस के सिलसिले में गुरुग्राम में आकर बस गए थे।

‘आर्टिस्ट चौक’ से जुड़े युवाओं के साथ कैफे मालिक विवेक गुलाटी

कभी बेचते थे फूल, आज तीन कैफे

अपने व्यवसायिक संघर्ष के बारे में बात करते हुए गुलाटी ने बताया कि गाजियाबाद से शिफ्ट होने के बाद लम्बे समय तक उन्होंने गुरुग्राम में फूल बेचे। 5 साल पहले एक बेकरी शॉप खोली। लेकिन कोरोना लॉकडाउन में उस पर ताला लग गया। कोरोना के बाद हालात सामान्य होने पर उन्होंने कैफे खोला। वे कहते हैं, “आज गुरुग्राम में मेरे 3 कैफे हैं। सब हनुमान जी की कृपा है।”

कैसे शुरू हुआ आध्यात्मिक जैमिंग

हनुमान चालीसा का वायरल वीडियो मंगलवार (14 मार्च 2021) का है। गुलाटी ने बताया कि दो सप्ताह पहले ही मंगलवार को कैफे में पाठ की शुरुआत हुई है। उनके साथ करीब 50 युवा जुड़े हुए हैं। ये ऐसे आर्टिस्ट हैं जो या तो अभाव में जी रहे हैं या कैरियर में बड़े मौके के लिए संघर्ष कर रहे हैं। युवाओं के इस समूह को ‘आर्टिस्ट चौक’ का नाम दिया गया है। इससे जुड़े युवा दिल्ली NCR से हैं।

गुलाटी ने बताया कि हनुमान चालीसा पाठ से कैफे में आने वाले ग्राहक भी सुकून महसूस करते हैं। वैसे उनके कैफे में फ़िल्मी गाने भी चलते हैं। लेकिन अब मंगलवार का दिन उन्होंने पूरी तरह हनुमान जी नाम समर्पित कर दिया है। उस दिन शाम करीब 7 बजे से रात के 9:30 बजे तक आध्यात्मिक जैमिंग चलता है। गुलाटी की योजना आध्यात्मिक जैमिंग से जुड़े युवाओं के साथ अयोध्या से रामेश्वरम की यात्रा करने का भी है।

दरभंगा के एक मोहल्ले में लगा ‘हिंदू राष्ट्र’ लिखा झंडा, पुलिस ने ‘आपत्तिजनक पोस्टर’ बता दर्ज किया केस: मुस्लिम संगठन ने पत्र लिखकर चेताया था

बिहार के दरभंगा में नवरात्रि पर ‘हिंदू राष्ट्र’ का बैनर लगाने पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार वाली पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस ने ‘हिंदू राष्ट्र’ के बैनर को आपत्तिजनक और सामाजिक सद्भाव बिगाड़ने वाला बताया है। दरअसल, इस बैनर के बारे में एक मुस्लिम संगठन ने शिकायत की थी। इसके बाद रमजान में पुलिस ने ये एक्शन लिया है।

इसको लेकर दरभंगा पुलिस ने ट्वीट भी किया है। अपने ट्वीट में पुलिस ने लिखा, “दिनांक 23.03.23 को दरभंगा जिला के लहेरियासराय थाना अंतर्गत मुहल्ला मौलागंज में कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा नवरात्रि के अवसर पर आपत्तिजनक पोस्टर/बैनर लगाकर समाजिक एवं धार्मिक सदभाव बिगाड़ने को लेकर 4 नामजद अभियुक्त एवं 100 अज्ञात के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की गई है।”

इस संबंध में ऑल इंडिया मुस्लिम बेदारी कारवां नाम के एक संगठन ने शिकायत की थी। इस संगठन ने 22 मार्च 2023 को दरभंगा के जिलाधिकारी को एक शिकायती पत्र लिखा था। इस संगठन ने कहा था कि हिंदू राष्ट्र का बैनर लगाकर इलाके में अमन शांति भंग करने की कोशिश की जा रही है।

मुस्लिम बेदारी के अध्यक्ष किसी नजरे आलम की ओर से पत्र में लिखा गया था, “दरभंगा शहर के मुहल्ला मौलागंज में हिंदू राष्ट्र का बैनर लगाकर समाज में बेचैनी पैदा कर दी गई है। बैनर के लगने से अमन शांति को खतरा हो सकता है। भारत सभी धर्मों के मानने वाले और समुदायों का देश है। यह देश हिंदू राष्ट्र कैसे हो सकता है।”

चुनावी मौसम और वोटबैंक की राजनीति को देखते हुए पुलिस तत्काल कार्रवाई की और इस मामले में 4 नामजद लोगों और 100 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। हालाँकि, पुलिस की इस कार्रवाई पर सोशल मीडिया पर सवाल उठा रहे हैं और बिहार सरकार को फटकार रहे हैं।