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पाकिस्तान में रमजान के पहले दिन गैस सप्लाई बंद: कोयले पर बना खाना, कराची में चूल्हों से सिर्फ दुर्गंध निकली

इस्लामी मुल्क पाकिस्तान की हालत दिन-ब-दिन बदतर होती जा रही है। बढ़ती महंगाई और बिजली संकट के बाद पाकिस्तानियों को गैस की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। प्राकृतिक गैस की कमी से कराची, क्वेटा और रावलपिंडी जैसे प्रमुख शहरों के लोग परेशान हैं। रमजान के पहले ही दिन गैस की किल्लत झेल रहे लोगों का चूल्हा नहीं जल सका।

पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्टों की मानें तो कराची समेत पाकिस्तान के प्रमुख शहरों में कई महीनों से गैस की सप्लाई प्रभावित है। ऐसे में रमजान का चाँद नजर आने के बाद लोगों के घरों में होने वाली गैस की सप्लाई बंद हो गई। सप्लाई में कमी के बाद लोगों ने इसकी शिकायत सरकार से की थी। सरकार की तरफ से भरोसा दिलाया गया था कि सहरी और इफ्तार से पहले उपभोक्ताओं के लिए गैस उपलब्ध होगी।

रमजान के पहले दिन पड़ोसी मुल्क के प्रमुख शहरों में उपभोक्ताओं ने दिन भर गैस सप्लाई बंद रहने और कम गैस प्रेशर की शिकायत की। पाकिस्तान में प्राकृतिक गैस की सप्लाई करने वाली सुई साउदर्न गैस कंपनी (Sui Southern Gas Company) ने गैस प्रोफाइलिंग (गैस सप्लाई करने का समय) निर्धारित किया था। कंपनी ने उपभोक्ताओं से सहरी और इफ्तारी के लिए गैस सप्लाई का वादा किया था।

SSGC की तरफ से कहा जा रहा है कि देश के गैस भंडार में भारी कमी की वजह से सप्लाई प्रभावित हो रही है। इसलिए बेहतर गैस दबाव के लिए कई घंटों तक सप्लाई रोकनी पड़ेगी। कराची की रहने वाली सबा नावेद का कहना है कि उनके यहाँ 4 महीनों से गैस की सप्लाई नहीं हो रही है। चूल्हा जलाने की कोशिश करने पर गैस की जगह सिर्फ दुर्गंध आती है। खाना बनाने के लिए परिवार 2.5 किलोग्राम का सिलेंडर इस्तेमाल कर रहा है। इसे भराने में 600 रुपए खर्च होते हैं। महीने में 2 बार इसे भराना पड़ता है।

इसी तरह रावलपिंडी में भी गैस सप्लाई न हो पाने के कारण लोग कोयले पर खाना बनाने को मजबूर हैं। क्वेटा के लोगों ने स्थानीय मीडिया को बताया कि गैस की सप्लाई न होने के कारण सेहरी के लिए कुछ पका नहीं सके। परेशान लोगों का कहना है कि लगातार शिकायत के बावजूद उनकी बात नहीं सुनी जा रही है। वहीं एसएसजीसी कंपनी की तरफ से कहा गया है कि एक ही वक्त पर लाखों स्टोव जलाए जाने की वजह से प्रेशर का कम होना स्वभाविक है।

परिणीति चोपड़ा का नाम सुन खिल उठा राघव चड्ढा का चेहरा: पत्रकारों से बोले- मुझसे बस राजनीति पर सवाल करिए, शादी आपको बताकर करूँगा

आम आदमी पार्टी के नेता राघव चड्ढा (Raghav Chadha) और बॉलीवुड अभिनेत्री परिणीति चोपड़ा (Parineeti Chopra) को मुंबई में एक साथ स्पॉट किए जाने के बाद से दोनों की शादी के कयास लगाए जा रहे हैं। इस बारे में राघव चड्ढा से सवाल पूछा गया तो उन्होंने शर्माते हुए कहा, “आप मुझसे राजनीति पर सवाल करिए, परिणीति पर नहीं।”

जब उनसे सवाल किया गया कि जो परिणीति के बारे में सवाल कर रहे हैं उनको आप क्या जवाब देंगे। इस पर राघव ने मुस्कुराते हुए कहा कि आपको जवाब देंगे। उनसे आगे यह पूछा गया कि आपकी मुस्कुराहट से और कयास लगेंगे, तो राघव ने थैंक्यू कहकर बात खत्म कर दी और कार में बैठकर चले गए।

एक अन्य वीडियो में पत्रकार ने उनसे यह भी पूछा कि आपको मुंबई में परिणीति के साथ घूमते हुए देखा गया है, तो राघव शरमा गए। पत्रकार ने उनसे फिर पूछा कि क्या आप शादी नहीं कर रहे हैं। इस सवाल के जवाब में आप नेता ने कहा, “आपको बताएँगे, तब शादी करेंगे।” आप इस पर इतना सस्पेंस क्यों बना रहे हैं, इसके जवाब में राघव ने कहा कि वह कोई सस्पेंस नहीं बना रहे हैं, जब शादी करेंगे तो इसके बारे में जरूर बताएँगे।

बता दें कि राघव चड्ढा और परिणीति चोपड़ा को मुंबई में गुरुवार (23 मार्च 2023) शाम एक रेस्टोरेंट के बाहर देखा गया था। यहाँ ये दोनों व्हाइट शर्ट पहने हुए दिखाई दिए थे। सोशल मीडिया पर इनकी तस्वीरें वायरल होने के बाद दोनों के एक-दूसरे को डेट करने के कयास लगाए जाने लगे। हालाँकि, अभी तक दोनों में से किसी ने भी इस पर खुल कर कोई बयान नहीं दिया है। एक अन्य वीडियो में भी दोनों को गाड़ी में बैठते हुए देखा गया था। इस दौरान राघव चड्ढा मीडिया में ज्यादा दिलचस्पी न दिखाते हुए आगे बढ़ते हुए और परिणीति चोपड़ा गाड़ी में बैठने से पहले पोज देती हुई नजर आई थीं।

उमेश पाल का ‘दोस्त’ मोहम्मद सजर ही था अतीक अहमद का मुखबिर: कभी साथ चलाता था ऑटो, पड़ोस में रहकर रखता था नजर

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में हुई उमेश पाल की हत्या के मामले में आए दिन नए खुलासे हो रहे हैं। पुलिस ने मंगलवार (21 मार्च 2023) को अतीक अहमद गिरोह के 5 सदस्यों को गिरफ्तार किया था। इन लोगों से हुई पूछताछ में खुलासा हुआ है कि उमेश पाल की हत्या की मुखबिरी उनके बचपन के दोस्त और पड़ोसी मोहम्मद सजर ने की थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उमेश पाल हत्याकांड की जाँच कर रही पुलिस ने प्रयागराज के सूबेदारगंज से हत्या में मददगार रहे 5 लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें जयंतीपुर सुलेमसराय निवासी मोहम्मद सजर का नाम भी शामिल है। मोहम्मद सजर ने उमेश पाल की हत्या में मुखबिरी की थी। सजर उमेश पाल का बचपन का दोस्त है।

दो दशक पहले जब उमेश पाल ऑटो चलाते थे, तब मोहम्मद सजर भी उनकी ही तरह ऑटो ड्राइवर था। उसका मकान भी उमेश पाल के घर के पास ही है। इसके कारण उमेश और सजर का रोज मिलना-जुलना होता था। इस तरह दोनों में दोस्ती भी थी।

कहा जा रहा है कि विधायक रहे राजू पाल की हत्या के बाद उमेश पाल को भी अतीक अहमद से अपनी जान का खतरा था। इस कारण वह बहुत जरूरी होने पर ही कहीं आते-जाते थे। साथ ही वह अपनी सुरक्षा को लेकर बेहद सजग भी रहते थे, लेकिन बचपन के दोस्त और पड़ोसी की मुखबिरी के आगे उनकी सजगता पूरी तरह फेल हो गई।

रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि मोहम्मद सजर अक्सर पान और किराने की दुकान पर खड़ा रहता था। इस दौरान उसकी नजर उमेश पाल पर ही रहती थी। हत्या के दिन 24 फरवरी 2023 को भी सजर ने अतीक द्वारा दिए गए आईफोन के जरिए ही शूटरों को उमेश पाल की लोकेशन बताई थी। इसके बाद अतीक के गुर्गों ने उमेश पाल और उनके दो सुरक्षाकर्मियों की हत्या कर दी।

क्या है मामला…

बहुजन समाज पार्टी (BSP) के विधायक रहे राजू पाल हत्याकांड के प्रमुख गवाह उमेश पाल की 24 फरवरी 2023 को हत्या कर दी गई थी। गोली और बम से किए गए हमले में उमेश पाल के गनर संदीप निषाद और राघवेंद्र सिंह की भी मौत हो गई थी। जिस समय हत्या को अंजाम दिया गया, उस समय उमेश पाल कोर्ट से गवाही देकर घर लौटे थे।

इस मामले में पुलिस ने अब तक कई आरोपितों को गिरफ्तार किया है। वहीं, कुछ आरोपित पुलिस मुठभेड़ में भी ढेर हुए हैं। कुछ फरार भी है। इस घटना का मुख्य शूटर और अतीक अहमद की पत्नी शाइस्ता परवीन तथा बेटे अब भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। पुलिस ने इन पर इनाम घोषित किया है।

हिंदू धर्म अपनाकर सायमा और खुशनुमा ने अपने-अपने प्रेमियों संग की शादी: बोली- अब तीन तलाक का डर नहीं, सुरक्षा की भी माँग

उत्तर प्रदेश से दो महिलाओं ने घरवापसी (Ghar Wapasi) करके अपने हिंदू प्रेमियों से शादी कर ली। पहला मामला बरेली का है। यहाँ की रहने वाली सायमा हिंदू धर्म अपनाकर शालिनी बन गई है और गुरुवार (23 मार्च 2023) को अपने प्रेमी शरद के साथ विवाह कर लिया। दूसरा मामला औरैया जिले का है। सहबाजपुर क्षेत्र की रहने वाली खुशनुमा ने खुशबू बनकर अपने हिंदू प्रेमी अमन से शादी रचाई और मंदिर में पूजा-अर्चना की।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, बरेली के देवरनिया थाना क्षेत्र के गाँव रहपुरा की निवासी शालिनी और उसके प्रेमी शरद उर्फ विपिन कुमार बालिग हैं और सहमति से विवाह किया है। उन्होंने इसका दस्तावेज भी दिखाए हैं। सायमा ने बताया कि हिंदू धर्म में उसकी पहले से ही आस्था है। अब शरद से शादी करने के बाद उसे तीन तलाक का डर भी नहीं रहेगा।

बताया जा रहा है कि इन दोनों के घर गाँव में आसपास है। ये काफी समय से एक-दूसरे को चाहते थे, लेकिन दोनों के परिवार वाले उनकी शादी के खिलाफ थे। इसके बाद दोनों ने मंदिर में शादी करने का निर्णय लिया। शालिनी ने सीएम योगी आदित्यनाथ और बरेली प्रशासन से सुरक्षा की माँग की भी माँग की है। शालिनी ने कहा कि उसे और उसके पति को कुछ होता है तो इसके जिम्मेदार उसके पिता और भाई होंगे।

वहीं, ओरैया की खुशबू का कहना है कि वह अमन से बहुत प्यार करती है। काफी समय से उससे शादी का प्रयास कर रही थी। इसके लिए दोनों अपने घरवालों को समझाने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन कभी धर्म तो कभी किसी और बात के कारण उनका विवाह नहीं हो पा रहा था।

दोनों का कहना है कि उन्होंने कुछ बड़े लोगों से गुहार लगाई और उन्होंने उनकी बात सुनी। इसके बाद अमन और खुशबू ने मंदिर में 7 फेरे लिए। खुशबू एक हॉस्पिटल में काम करती थी। यहीं पर फफूँद के गाँव भर्रापुर का लड़का अमन भी काम करता था। वह दिव्यांग है। काम के दौरान दोनों में बातचीत शुरू हुई और धीरे-धीरे प्यार में बदल गई।

खुशबू बताती हैं, “मेरे घरवाले इस शादी के लिए बिल्कुल भी नहीं मान रहे थे। अमन ने भी अपने घर वालों को बताया तो वो भी इस रिश्ते के लिए तैयार नहीं थे। इसके बाद मैंने विधायक गुड़िया कठेरिया से हमारी शादी के लिए गुहार लगाई। उन्होंने हमें भरोसा दिलाया कि हम आपकी शादी कराएँगे।”

उन्होंने आगे कहा, “विधायक के आश्वासन के बाद हमें कुछ तसल्ली हुई। इसके बाद विधायक ने दोनों के परिवार वालों से बातचीत की। फिर हमारे परिवार वाले शादी के लिए राजी हो गए। हमने मंदिर में हिंदू रीति रिवाज से शादी की। विधायक ने शादी में पहुँचकर हमें आशीर्वाद भी दिया।”

‘क्या अंकित शर्मा की हत्या के बारे में जानते थे संजय सिंह, ताहिर हुसैन से फोन पर हो रही थी बात’: AAP सांसद से कपिल मिश्रा ने पूछे कठिन सवाल

साल 2020 में दिल्ली में हिंदू विरोधी दंगे हुए थे। इन दंगों में आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की निर्मम हत्या कर दी गई थी। इस मामले में दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने गुरुवार (23 मार्च 2023) को AAP नेता ताहिर हुसैन समेत 11 लोगों के खिलाफ हत्या और साजिश रचने के आरोप तय किए हैं। इसके बाद BJP प्रवक्ता कपिल मिश्रा ने एक वीडियो जारी किया है। वीडियो में उन्होंने दिल्ली दंगों के दौरान AAP नेता संजय सिंह की भूमिका पर सवाल उठाए हैं।

ताहिर हुसैन के खिलाफ आरोप तय होने के बाद शुक्रवार (24 मार्च) को कपिल मिश्रा ने ट्विटर पर एक वीडियो शेयर किया है। इस वीडियो में उन्होंने कहा है, “अदालत के फैसले ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगे हिंदुओं को मार कर भगाने की साजिश के तहत रचे गए थे। ताहिर हुसैन और उमर खालिद जैसे लोग उस साजिश का हिस्सा थे।”

उन्होंने आगे कहा है, “ताहिर हुसैन के घर की छत पर बम, पेट्रोल गुलेल जैसी चीजें मिलीं थीं। इसके वीडियो भी मैंने शेयर किए थे। लेकिन तब देश के कई बड़े लोग ताहिर हुसैन को बचाने की कोशिश कर रहे थे। दिल्ली दंगों का दूसरा ही चेहरा दिखाने की कोशिश कर रहे थे। अब कोर्ट के फैसले के बाद सवाल यह उठता है कि जो लोग ताहिर हुसैन जैसे लोगों को बचा रहे थे, उनकी नियत क्या थी?”

कपिल मिश्रा ने आगे कहा है, “सबसे बड़ा सवाल आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह पर उठता है। संजय सिंह मीडिया के सामने आकर बार-बार कह रहे थे कि ताहिर हुसैन लगातार उनके संपर्क में था और फोन पर बात कर रहा था। इसका मतलब यह है कि जब ताहिर हुसैन के घर में आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या की जा रही थी, तब ताहिर हुसैन और संजय सिंह एक दूसरे से फोन पर बात कर रहे थे। अब सवाल यह है कि क्या संजय सिंह को अंकित शर्मा की हत्या के बारे में पता था? क्या संजय सिंह ने जानबूझकर इस पूरे अपराध पर पर्दा डालने के लिए मीडिया के सामने झूठे बयान दिए?”

उन्होंने आम आदमी पार्टी पर सवाल उठाते हुए कहा है, “अमानतुल्लाह खान से लेकर संजय सिंह तक आम आदमी पार्टी के पूरे नेतृत्व पर यह गंभीर सवाल है। आखिर दिल्ली दंगों के आरोपितों को बचाने की कोशिश क्यों कर रहे थे? क्या ये लोग भी इस षड्यंत्र में शामिल थे? मुझे लगता है कि दिल्ली की जनता को इन सवालों के जवाब मिलने चाहिए। संजय सिंह को सामने आकर यह बताना चाहिए कि वह एक हत्यारे को बचाने का बेशर्म प्रयास क्यों कर रहे थे?”

कोर्ट ने ताहिर हुसैन के खिलाफ किए आरोप तय

बता दें कि दिल्ली दंगों के दौरान हिंदुओं को निशाना बनाकर की गई हिंसा के बाद अंकित शर्मा का शव दिल्ली के एक नाले से बरामद किया गया था। इस मामले में कोर्ट ने ताहिर हुसैन समेत 11 लोगों पर IPC की धारा 147, 148, 153 ए, 302, 365, 120 बी, 149 और 188 के तहत आरोप तय किए हैं। ताहिर हुसैन पर आईपीसी की धारा 104, 109 और 505 के तहत भी आरोप तय किए गए।

ताहिर हुसैन के खिलाफ आरोप तय करते हुए अदालत ने कहा है, “ताहिर हुसैन लगातार इस भीड़ की निगरानी करते हुए लोगों को उकसा रहा था। सब कुछ हिंदुओं को निशाना बनाने के उद्देश्य से किया गया। भीड़ में इकट्ठा हुआ हर व्यक्ति हिंदुओं को निशाना बनाना चाहता था।”

संजय सिंह ने किया था ताहिर हुसैन का बचाव

फरवरी 2020 में, AAP नेता संजय सिंह ने अपनी पार्टी के पार्षद ताहिर हुसैन का बचाव करने के लिए मीडिया के सामने दावा किया था कि ताहिर हुसैन पुलिस को फोन कर रहा था। संजय सिंह ने एक बयान में दावा किया था, “ताहिर हुसैन पहले ही अपना बयान दे चुका है। इसमें उसने कहा है कि दंगों के दौरान उसने पुलिस से सुरक्षा माँगी थी। पुलिस आठ घंटे देरी से आई और उसके परिवार को उसके घर से बचाया।”

संजय सिंह ने यह भी दावा किया था, “पुलिस ने ताहिर हुसैन और उसके परिवार को उनके घर से बाहर निकलने में मदद की। वह दो दिन से घर पर नहीं था। जब वह घर में नहीं था, तो पत्थरों और अन्य चीजों पर सवाल नहीं उठना चाहिए।”

संजय सिंह ने ताहिर हुसैन का बचाव करते हुए पुलिस पर दंगे रोकने के लिए आवश्यक कार्रवाई न करने का आरोप लगाया था। उन्होंने दावा किया था, ”पुलिस ने कार्रवाई समय पर नहीं की, यह निश्चित रूप से एक गंभीर गलती है, देर क्यों हुई, किसकी वजह से हुई यह सब जाँच का विषय है।”

दिल्ली दंगों के दौरान संजय सिंह के संपर्क में था ताहिर हुसैन

AAP पूर्व पार्षद और दिल्ली में हुए हिंदू विरोधी दंगों के आरोपित ताहिर हुसैन ने स्वीकार किया था कि वह फोन के पर संजय सिंह के साथ लगातार संपर्क में था। उसने बीबीसी हिंदी को दिए एक इंटरव्यू में कहा था, “दंगों के दौरान मैंने संजय सिंह से बात की थी। उन्होंने मुझे खुद को सुरक्षित रखने के लिए कहा था। संजय सिंह ने कहा था कि वह जल्द से जल्द मदद भेजने की कोशिश करेंगे। उन्होंने डीसीपी को तीन बार फोन किया… अगर संजय भाई इतने सक्रिय नहीं होते तो पुलिस यहाँ कभी नहीं आती।”

न्यूज 18 को दिए एक इंटरव्यू में ताहिर हुसैन ने यह भी स्वीकार किया था कि दंगों के दौरान उसने संजय सिंह से मदद माँगी थी। इससे पहले ऑपइंडिया को मिले दस्तावेजों में खुलासा हुआ था कि पीएफआई का दिल्ली प्रमुख लगातार AAP नेता संजय सिंह और कॉन्ग्रेस नेता उदित राज के संपर्क में था।

लंदन में खालिस्तानियों का हमला, दिल्ली में UAPA के तहत केसः भारतीय उच्चायोग को बनाया था निशाना, एक्शन में गृह मंत्रालय

भगोड़े अमृतपाल सिंह पर कार्रवाई से तिलमिलाए खालिस्तान समर्थकों ने रविवार (19 मार्च 2023) को लंदन में स्थित भारतीय उच्चायोग के बाहर प्रदर्शन किया था। इस दौरान खालिस्तानियों ने तिरंगा निकालकर खालिस्तानी झंडा लगाने भी कोशिश की थी। इस मामले में गृह मंत्रालय के निर्देश पर दिल्ली पुलिस ने UAPA और PDPP एक्ट समेत अन्य संगीन धाराओं में FIR दर्ज की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, विरोध प्रदर्शन को लेकर विदेश मंत्रालय ने गृह मंत्रालय को एक रिपोर्ट सौंपी थी। इस रिपोर्ट में कहा गया था कि लंदन में हुए विरोध प्रदर्शन में भारतीय नागरिक भी शामिल हुए थे। इस रिपोर्ट के बाद गृह मंत्रालय ने स्पेशल सेल को मामले की जाँच कर कार्रवाई करने का निर्देश दिया। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने कार्रवाई करते हुए एफआईआर दर्ज की है।

FIR में आरोपितों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा, गैरकानूनी गतिविधियाँ रोकथाम अधिनियम (UAPA) और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान से रोकथाम अधिनियम (PDPP) एक्ट की धाराएँ लगाई गई हैं। चूँकि विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए लोगों में से कुछ लोग भारतीय नागरिक भी थे। ऐसे में स्पेशल सेल इनके खिलाफ भारतीय कानून के तहत कार्रवाई करेगा।

भारतीय उच्चायोग के सामने हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान भारत के राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे का अपमान करने के आरोप में लंदन पुलिस ने एक खालिस्तानी को गिरफ्तार किया है। आरोपित की पहचान अवतार सिंह खंडा के रूप में हुई है। वह प्रतिबंधित संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल (BKI) का सदस्य है। वहीं, अमृतपाल को लेकर भारत में चल रही जाँच में भी खंडा का नाम सामने आया है। कहा जा रहा है कि वह अमृतपाल सिंह का हैंडलर है।

क्या है मामला…

दरअसल, खालिस्तान समर्थक भगोड़े अमृतपाल के खिलाफ भारत में कार्रवाई हो रही है। इस कार्रवाई के विरोध में खालिस्तान समर्थकों ने ब्रिटेन की राजधानी लंदन में स्थित भारतीय उच्चायोग के बाहर नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया था। इस प्रदर्शन के दौरान खालिस्तानियों ने उच्चायोग में लगे भारतीय तिरंगे को निकाल कर फेंक दिया था।

उन्होंने खालिस्तानी झंडा लगाने की भी कोशिश की थी। इस दौरान खालिस्तानियों ने उच्चायोग में तोड़फोड़ की भी कोशिश की थी। इस घटना के बाद भारत ने अंग्रेजी राजदूत को तलब करते हुए सख्ती दिखाई थी। इसके बाद राजदूत समेत ब्रिटेन के विदेश मंत्री और लंदन के मेयर ने घटना की निंदा की थी।

‘भगवान राम भी अल्लाह की तरफ से ही भेजे गए हैं”: बोले जम्मू-कश्मीर के पूर्व CM फारूक अब्दुल्ला, पाकिस्तानी मौलाना का दिया हवाला

जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री व नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रमुख फारूक अब्दुल्ला (Farooq Abdullah) गुरुवार (23 मार्च 2023) को पैंथर्स पार्टी के स्थापना दिवस के अवसर पर उधमपुर पहुँचे। यहाँ उन्होंने कहा, “भगवान राम सिर्फ हिंदुओं के भगवान नहीं हैं। ये अपने दिमाग से निकालिए। भगवान राम सबके भगवान हैं। फिर चाहे वो हिंदू हो, मुस्लिम हो, सिख हो, अमरीकन हो या फिर रूसी हो। अल्लाह सिर्फ मुस्लिमों का रब नहीं है, वह सबका रब है।”

इस दौरान फारूक अब्दुल्ला ने पाकिस्तान के एक बुजुर्ग प्रोफेसर (जिनकी कुछ समय पहले मृत्यु हो गई) का हवाला देते हुए कहा, “उन्होंने लिखा था कि लोगों को सही रास्ता दिखाने के लिए भगवान राम भी अल्लाह की तरफ से ही भेजे गए हैं।”

अब्दुल्ला ने बीजेपी का नाम लिए बिना उस पर निशाना साधते हुए आगे कहा, “ये जो आपके सामने आते हैं और कहते हैं कि वो ही राम के पुजारी है, ऐसा कहने वाले लोग बेवकूफ हैं। ये लोग राम को बेचना चाहते हैं। इन्हें राम से कोई मोहब्बत नहीं हैं। इन्हें हुकूमत से मोहब्बत है।”

राज्य में आगामी चुनावों के बारे में बोलते हुए पूर्व सीएम ने कहा, “मुझे लगता है कि जब जम्मू-कश्मीर में चुनावों की घोषणा होगी तो वे आम आदमी का ध्यान हटाने के लिए राम मंदिर का उद्घाटन करेंगे।”

फारूक अब्दुल्ला का यह वीडियो सामने आने के बाद एक यूजर ने लिखा, “जो लोग राम मंदिर का विरोध करते थे आज राम का नाम जप रहे हैं। इससे ज्यादा और क्या चाहिए मोदी जी से।”

एक और यूजर ने अब्दुल्ला को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि राम जन्मभूमि पर बन रहा मंदिर जनता की धरोहर है। उनकी आस्था पर बुरी नजर मत डालो मियाँ।

बता दें कि पिछले साल नवंबर में भी फारूक अब्दुल्ला ने कहा था कि भगवान राम सिर्फ हिंदुओं के ही नहीं, बल्कि सबके भगवान हैं। उन्होंने लोगों से धर्म के आधार पर बाँटने की कोशिशों के प्रति सतर्क रहने की अपील की थी। उस दौरान भी भाजपा पर अप्रत्यक्ष हमला करते हुए फारूक ने कहा था, “कोई भी धर्म बुरा नहीं है, उसके इंसान भ्रष्ट हैं, धर्म नहीं… वे चुनाव के दौरान ‘हिंदू खतरे में है’ का बहुत उपयोग करेंगे। मैं आपसे अनुरोध करता हूँ कि आप इसके शिकार न हों। भारत में 70 से 80 प्रतिशत हिंदू आबादी है और क्या आपको लगता है कि वे खतरे में पड़ जाएँगे?”

राहुल गाँधी नहीं रहे सांसद: लोकसभा सचिवालय ने सदस्यता खत्म करने का जारी किया नोटिफिकेशन, सूरत कोर्ट ने सुनाई थी 2 साल की सजा

राजनीतिक मर्यादा को ताक पर रखकर कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी द्वारा की गई टिप्पणी के मामले में आखिरकार उन्हें अपनी सांसदी से हाथ धोना पड़ गया। राहुल गाँधी को लोकसभा की सदस्यता को रद्द कर दिया गया है।

इस संबंध में लोकसभा के महासचिव उत्पल कुमार सिंह द्वारा पत्र जारी किया गया है। इसमें कहा गया है कि सूरत के चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट की अदालत द्वारा दोषी ठहराए जाने के बाद केरल के वायनाड से सांसद राहुल गाँधी को संसद की सदस्यता के अयोग्य ठहराया जा रहा है।

इस नोटिफिकेशन में कहा गया है कि यह दोषी ठहराए जाने की तिथि 23 मार्च 2023 से लागू होता है। नोटिफिकेशन में यह भी कहा गया है कि जनप्रतिनिधि कानून 1951 की धारा 8 के अनुसार यह कार्रवाई की गई है। लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला के निर्देश पर यह कार्रवाई की गई है।

23 मार्च 2023 को सूरत की जिला अदालत ने काॅन्ग्रेस सांसद राहुल गाँधी को मानहानि के एक मामले में दोषी ठहराते हुए दो साल की सजा सुनाई थी। सजा सुनाए जाने के तुरंत बाद उन्हें जमानत भी दे दी गई। उन्हें ऊपरी अदालत में अपील करने के लिए 30 दिनों का समय दिया है। इस दौरान उन पर सजा लागू नहीं होगी।

दरअसल, राहुल गाँधी ने कर्नाटक की एक रैली में 13 अप्रैल 2019 को था, “नीरव मोदी, ललित मोदी, नरेंद्र मोदी इन सभी के नाम में मोदी लगा हुआ है। सभी चोरों के नाम में मोदी क्यों लगा होता है।” इसके बाद उनके खिलाफ मानहानि का मुकदमा दर्ज किया गया था।

भाजपा नेता पूर्णेश मोदी ने कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष के खिलाफ सूरत में मामला दर्ज कराया था। राहुल गाँधी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 499 और 500 के तहत केस दर्ज करवाया था, जो आपराधिक मानहानि से संबंधित है। 4 साल के बाद अदालत ने मामले में राहुल गाँधी को दोषी पाते हुए सजा सुना दी।

इस केस के सिलसिले में राहुल गाँधी कई बार सूरत पहुँचे। जून 2021 में राहुल गाँधी ने पेशी के दौरान अपना बयान दर्ज कराया था। कॉन्ग्रेस नेता ने अदालत को बताया था कि उन्होंने चुनाव के दौरान राजनीतिक कटाक्ष किया था। उन्होंने यह बात किसी समाज के लिए नहीं कही थी। साथ ही कहा कि इस मामले में अब उन्हें ज्यादा कुछ याद नहीं है।

सजा सुनाए जाने के बाद राहुल गाँधी की सांसदी छिने जाने के कयास लगाए जा रहे थे। दरअसल, जनप्रतिनिधि कानून की धारा 8(3) के तहत यदि किसी सांसद को दोषी ठहराया जाता है और 2 साल या उससे अधिक की सजा होती है तो उसकी सदस्यता रद्द हो जाएगी। इतना ही नहीं सजा पूरी होने के बाद 6 साल तक वह व्यक्ति चुनाव भी नहीं लड़ सकता।

साल 2013 से पहले जनप्रतिनिधि अधिनियम की धारा 8(4) के अनुसार कोई भी सांसद या विधायक दोषी करार दिए जाने के तीन महीने के भीतर फैसले के खिलाफ अपील या रिव्यू पिटीशन दायर कर अपने पद पर बना रह सकता था। 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने धारा 8(4) को रद्द कर दिया। अदालत के 2013 में दिए गए फैसले के अनुसार अपील के बाद दोषी करार दिए गए सांसद को अदालत से सजा पर स्टे लेना होगा। स्टे मिल जाने के बाद ही उसकी सदस्यता बच सकती है।

सुप्रीम कोर्ट के जनप्रतिनिधि अधिनियम की धारा 8(4) को रद्द करने के फैसले के खिलाफ 2013 में केंद्र की तात्कालिक यूपीए-2 सरकार ने सदन में एक बिल पेश किया था। कोर्ट के फैसले के बाद उस वक्त कानून मंत्री रहे कॉन्ग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने जनप्रतिनिधि एक्ट में बदलाव के लिए विधेयक पेश किया था। सितंबर 2013 में सरकार ने इसे अध्यादेश के तौर पर लागू करने की कोशिश की। इसके तहत सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विपरीत दोषी एमपी या एमएलए की सदस्यता फौरन रद्द नहीं हो सकती थी।

इसके तहत अपील के बाद अदालत के फैसले तक आरोपित सदस्य सदन की कार्यवाही में शामिल हो सकते थे। उनकी सदस्यता बनी रहती, लेकिन वे वेतन प्राप्त करने और वोट देने के अधिकारी नहीं होते। 27 सितंबर 2013 को इसी अध्यादेश के प्रारंभिक ड्राफ्ट को राहुल गाँधी ने भरी प्रेस कॉन्फ्रेंस में नॉनसेंस बताते हुए फाड़ दिया था। तब राहुल ने कहा था, “इस कानून को और मजबूत किए जाने की जरूरत है।” बाद में इस अध्यादेश को वापस ले लिया गया था। अब लोगों का कहना है कि यदि राहुल उस बिल को पास हो जाने देते तो आज उनकी संसद सदस्यता पर खतरा नहीं पैदा होता।

वाराणसी में PM मोदी, ₹1785 करोड़ के प्रोजेक्ट्स की सौगात: 2025 तक भारत को टीबी मुक्त करने का संकल्प, WHO ने 2030 का रखा है टारगेट

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज 1780 करोड़ रुपए की परियोजनाओं की सौगात देने वाराणसी पहुँचे। उन्होंने वाराणसी पहुँच पहले ‘वन वर्ल्ड टीबी’ समिट का शुभारंभ किया और दुनिया के सामने टीबी को खत्म करने का संकल्प रखा। उन्होंने इस दौरान रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में भी लगी प्रदर्शनी को भी देखा।

उन्होंने कहा, 2014 के बाद से भारत ने जिस नई सोच और अप्रोच के साथ टीबी के खिलाफ काम करना शुरू किया, वो वाकई अभूतपूर्व है। भारत के ये प्रयास पूरे विश्व को इसलिए भी जानने चाहिए क्योंकि ये टीबी के खिलाफ वैश्विक लड़ाई का एक नया मॉडल है।

पीएम मोदी बोले, “कोई भी TB मरीज इलाज से छूटे नहीं, इसके लिए हमने नई रणनीति पर काम किया। TB के मरीजों की स्क्रीनिंग के लिए, उनके ट्रीटमेंट के लिए, हमने उन्हें आयुष्मान भारत योजना से जोड़ा है। TB की मुफ्त जांच के लिए हमने देशभर में लैब्स की संख्या बढ़ाई है।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत अब वर्ष 2025 तक TB खत्म करने के लक्ष्य पर काम कर रहा है। TB खत्म करने का ग्लोबल टार्गेट वर्ष 2030 है लेकिन भारत वर्ष 2025 तक TB खत्म करने के लक्ष्य पर काम कर रहा है।

सीएम योगी ने भी इस अवसर पर बताया कि वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन ने 2018 में संकल्प लिया था कि विश्व को 2030 तक टीबी मुक्त करेंगे। पीएम ने इसी क्रम में आगे बढ़कर संकल्प लिया कि वह भारत को 2025 तक टीबी मुक्त बनाएँगे। इस अभियान के तहत 13.10 लाख मरीज प्रधानमंत्री टीबी मुक्त अभियान के तहत लाभान्वित हुए। 71000 से अधिक निक्षय मित्र 10 लाख से अधिक टीबी रोगिययों की सहायता कर रहे हैं।

वाराणसी को पीएम मोदी देंगे सौगात

बता दें कि पीएम मोदी आज वाराणसी में संपूर्णानंद संस्कृत विद्यालय मैदान में कार्यक्रम के दौरान 1780 करोड़ रुपए से अधिक की परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यस करने वाले हैं।

वह नमामि गंगे योजना के तहत भगवानपुर में 55 एमएलडी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की आधारशिला भी रखेंगे, जिसे 300 करोड़ रुपए से अधिक की लागत से बनाया जाएगा। प्रधानमंत्री खेलो इंडिया योजना के तहत सिगरा स्टेडियम के पुनर्विकास कार्य के फेज 2 और 3 का शिलान्यास भी करेंगे। इसके अलावा जल जीवन मिशन के तहत, प्रधानमंत्री 19 पेयजल योजनाओं को समर्पित करेंगे, जिससे 63 पंचायतों के तीन लाख से अधिक लोग लाभान्वित होंगे। ऐसे ही 59 नई पेयजल योजनाओं की आधारशिला भी रखी जाएगी।

दिल्ली में ब्रिटेन के उच्चायुक्त के घर के बाहर बनेगा सार्वजनिक शौचालय, ब्रिटिश सरकार ने जताई आपत्तिः लंदन में खालिस्तानी उत्पात के बाद हटा दिए गए थे बैरिकेड्स

दिल्ली में स्थानीय अधिकारियों ने सार्वजनिक शौचालय का निर्माण करने के लिए ब्रिटिश उच्चायुक्त के निवास के पास का स्थान चुना है। आम लोगों की आवश्यकता को देखते हुए अधिकारी इसे जरूरी मानते हैं। वहीं, यूके की सरकार ने इस निर्माण पर आपत्ति जताते हुए सुरक्षा का हवाला दिया है।

इकोनोमिक टाइम्स ने 24 मार्च 2023 की अपनी रिपोर्ट में कहा गया है कि लुटियंस दिल्ली के मीना बाग में राजाजी मार्ग पर स्थित ब्रिटिश उच्चायुक्त एलेक्स एलिस के आवास के बगल में एक सार्वजनिक शौचालय की आवश्यकता महसूस की गई। यह खबर दिल्ली में ब्रिटिश उच्चायोग और उच्चायुक्त के आवास की सुरक्षा में कटौती के बाद आई है।

ब्रिटिश उच्चायोग और उच्चायुक्त के आवास के बाहर की सुरक्षा में कटौती के बाद सार्वजनिक शौचालय का निर्माण इंग्लैंड सरकारी की लापरवाही की प्रतिक्रिया के रूप में देखा जा रहा है। कुछ दिन पहले ब्रिटेन की राजधानी लंदन में स्थित भारतीय उच्चायोग पर खालिस्तानी चरमपंथियों हमला कर तिरंगे का अपमान किया था।

इससे पहले 22 मार्च 2023 को रिपोर्ट आई थी कि भारतीय अधिकारियों ने ब्रिटिश उच्चायोग और ब्रिटिश उच्चायुक्त के निवास के सामने लगाए गए बैरिकेड्स को हटा दिया। इसके साथ ही उनकी बाहरी सुरक्षा में कटौती कर दी।

ब्रिटिश उच्चायोग दिल्ली के चाणक्यपुरी में राजनयिक एन्क्लेव में शांतिपथ पर स्थित है। उसके गेट के सामने से बैरिकेड्स और बंकरों को हटाने के साथ-साथ वहाँ तैनात पीसीआर वैन और दिल्ली पुलिस की टीम को भी हटा दिया गया है।

ऊपर के वीडियो में साफ दिख रहा है कि रोड डायवर्टर, स्पीड ब्रेकर, सैंडबैग के बंकर, पीसीआर वैन और परिसर के बाहर तैनात स्थानीय पुलिस जैसे विशेष सुरक्षा उपायों नहीं दिख रहे हैं। कहा गया कि इसके पीछे भारत सरकार ने तर्क दिया है कि भारत में ब्रिटिश उच्चायोग पहले से ही सुरक्षित क्षेत्र में है। इसलिए अतिरिक्त सुरक्षा उपायों की कोई आवश्यकता नहीं है।