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‘हिन्दू राष्ट्र’ का झंडा: बिहार पुलिस ने VHP नेता को गिरफ्तार किया, 100 पर FIR, बोले BJP विधायक – एक खास समुदाय को किया जा रहा खुश

अपडेट: ताज़ा खबर ये है कि VHP नेता को पुलिस ने छोड़ दिया है।

बिहार के दरभंगा जिले में लगे ‘हिन्दू राष्ट्र’ के बैनर पर उठाई गई आपत्ति के बाद पुलिस ने कार्रवाई की है। इस मामले में राजीव प्रकाश मधुकर नाम के एक ‘विश्व हिन्दू परिषद (VHP)’ नेता को गिरफ्तार किया गया है। मधुकर VHP के दरभंगा जिला मंत्री हैं। इस मामले में 4 नामजदों सहित 100 अज्ञात व्यक्तियों पर FIR दर्ज की गई है। विश्व हिन्दू परिषद् ने इस कार्रवाई का विरोध करते हुए बिहार सरकार पर जिहादी शक्तियों को पालने-पोषने का आरोप लगाया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला थाना क्षेत्र लहेरिया सराय का है। यहाँ नवरात्रि और हिन्दू नववर्ष के सामूहिक अवसर पर शुक्रवार (24 मार्च, 2023) को सड़क पर एक बैनर टांगा गया था, जिस पर ‘हिन्दू राष्ट्र’ लिखा हुआ था। आरोप है कि इस बैनर का मुस्लिम संगठनों विरोध किया। विरोधियों ने इस बैनर के चलते अपनी धार्मिक भावनाएँ आहत होने का आरोप लगाया। मामला पुलिस के संज्ञान में आया तो जाँच शुरू की गई। पुलिस ने इस बैनर को आपत्तिजनक और सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने वाला बताया।

आरोप है कि राजीव प्रकाश मधुकर को पीस कमेटी की मीटिंग में शामिल होने के लिए बुलाया गया जहाँ से उन्हें गिरफ्तार कर लिए गया। स्थानीय भाजपा विधायक संजय सरावगी ने इस गिरफ्तार का विरोध करते हुए कहा कि बिहार सरकार को हिन्दू शब्द से नफरत हो चुकी है। संजय के अनुसार, एक ख़ास समुदाय के लोगों को खुश करने की करने कोशिश की जा रही है। पुलिस ने कहा कि 1 आरोपित को गिरफ्तार कर के पूछताछ की जा रही है।

दरभंगा पुलिस ने जानकारी देते हुए बताया है कि मामले में 100 अज्ञात लोगों सहित 4 नामजद आरोपितों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। सोशल मीडिया पर भी सख्ती करते हुए पुलिस ने इस मामले में किसी भी प्रकार की आपत्तिजनक पोस्ट करने से भी लोगों को मना किया है। इसी के साथ दरभंगा पुलिस ने कई तरह से प्रतिबंधों की सूची भी जारी की है। इस सूची में DJ की ध्वनि 75 DB से अधिक न होने, नया जुलूस न निकलने देने, जुलूस निकालने वाले व्यक्ति का सत्यापन करने और पुलिस अधिकारियों द्वारा फ्लैग मार्च करने जैसे नियम शामिल हैं।

VHP ने किया विरोध

विश्व हिन्दू परिषद ने दरभंगा मामला में बिहार पुलिस की कार्रवाई की आलोचना की है। VHP के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने ऑपइंडिया से बात करते हुए कहा कि जिस बिहार पुलिस और शासन को राज्य में जड़ें जमा चुके PFI नेटवर्क को खत्म करने का काम करना था वो राष्ट्रवादी लोगों को गिरफ्तार कर रही है। बिहार सरकार और ख़ास कर उनके कुछ अधिकारियों पर मुस्लिम तुष्टिकरण का आरोप लगाते हुए बंसल ने हमें बताया कि उनकी माँग FIR वापस ले कर कार्यकर्ताओं को ससम्मान रिहा करने की है। हमें बताया गया कि ऐसी एकतरफा कार्रवाई से हिन्दू समाज के मन में रोष पनप रहा है।

कश्मीर अलग देश और लद्दाख का हिस्सा चीन में: विरोध होने के बाद बोला BYJU’S – यह छात्र का काम, इसे हटाया गया

ऑनलाइन शिक्षा उपलब्ध कराने वाली कंपनी बायजू (BYJU) पर एक बार फिर भारत का गलत नक्शा दिखाने की कोशिश की है। इसका एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो वायरल होने के बाद BYJU ने इसका खंडन किया है।

दरअसल, बाला नाम के एक सोशल मीडिया यूजर ने भारत का एक नक्शा शेयर करते हुए इसके बारे में बताया है। यूजर ने इस को BYJU नक्शा बताया है और अपने ट्वीट में संस्था को टैग भी किया है।

बाला ने लिखा, “पहले आप सरदार पटेल को बदनाम करते हैं, फिर आप चीन-समर्थक और पाकिस्तान-समर्थक प्रोपेगेंडा को बढ़ावा देते हैं। अब इसमें कश्मीर को एक अलग देश के रूप में दिखाया गया है और लद्दाख के कुछ हिस्से को चीन के साथ दिखाया गया है।”

इस ट्वीट पर BYJU ने जवाब दिया है। अपने आधिकारिक जवाब में BYJU ने कहा, ट्विटर पर अपलोड किए गए भारत के इस विकृत नक्शे को को बनाने में हम अपनी किसी भी भागीदारी को मजबूती से खंडन करते हैं। कथित वीडियो यूजर जेनरेटेड कंटेंट पर आधारित है, जिसे एक Osmo स्टूडेंट द्वारा अपलोड किया गया था।”

Osmo को लेकर BYJU ने कहा, “हमारी सहायक कंपनी Osmo एक प्लेटफॉर्म और तकनीक प्रदाता है, जो यूजर को कंटेंट अपलोड करने की सुविधा देता है। इस नक्शे को अब हटा दिया गया है।” कंपनी ने कहा कि भारत की एकता और अखंडता में उसकी उच्च स्तर की आस्था है। हम इस तरह के कंटेंट को प्रमोट नहीं करते हैं।”

BYJU का यह खंडन सोशल मीडिया यूजर को पच नहीं रहा है। वे इसे अक्सर माफी माँगने वाली संस्था बता रहे हैं। बता दें कि इससे पहले अक्टूबर 2022 में बायजू पर भारत का गलत मानचित्र दिखाने का आरोप लगा था। इसके बाद बायजू ने इसे फेक बताया था।

BYJU ने कहा था कि इस मामले में कार्रवाई के लिए वह अधिकारियों से संपर्क करेगी। BYJU ने कहा था कि इस फेक नक्शे के लिए कंपनी को गलत तरीके से जिम्मेदार ठहराया गया है। नक्शे में कश्मीर के कुछ हिस्सों को ‘आजाद कश्मीर’ और ‘अक्साई चिन’ के रूप में दिखाया गया था।

‘भारतीय उच्चायोग को सुरक्षा देने में विफल रही ब्रिटेन सरकार’: खालिस्तानियों के हमले पर विदेश मंत्री S जयशंकर की दो टूक

ब्रिटेन में भारतीय उच्चायोग पर हमले और तिरंगे के अपमान पर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि ब्रिटेन की सरकार भारतीय दूतावास को सुरक्षा देने में विफल रही है। विदेश मंत्री ने कहा कि भारत सुरक्षा के अलग-अलग मानकों को स्वीकार नहीं कर सकता। एस जयशंकर शुक्रवार (24 मार्च 2023) को बेंगलुरु में भारतीय जनता युवा मोर्चा द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहे थे।

बीजेपी एमपी तेजस्वी सूर्या द्वारा आयोजित BJYM के कार्यक्रम में सवालों का जवाब देते हुए एस जयशंकर ने कहा कि दूतावास या उच्चायोग के परिसर की सुरक्षा और सम्मान का ध्यान रखना उस देश का कर्तव्य है, जहाँ वह स्थित है। उस देश का उत्तरदायित्व है कि वह एक राजनयिक (Diplomats) को काम करने के लिए सुरक्षा प्रदान करे। ब्रिटेन में इन दायित्वों को पूरा नहीं किया गया। इसे लेकर हमारी ब्रिटिश सरकार से बातचीत हुई है।

विदेश मंत्री ने कहा कि जिस दिन उपद्रवी हाई कमीशन के आगे जमा हुए, उस दिन उच्चायोग की सुरक्षा में कमी रह गई थी। एस जयशंकर ने आगे कहा कि कई देश इसे लेकर लापरवाह हैं। अपनी सुरक्षा को लेकर वे अलग सोचते हैं जबकि दूसरों की सुरक्षा पर उनकी अलग राय है। उन्होंने कहा, “एक विदेश मंत्री के तौर पर मैं आपको बता दूँ कि हम इस तरह के अलग-अलग मानकों को स्वीकार नहीं करने वाले हैं।”

लंदन में क्या हुआ था?

दरअसल, खालिस्तान समर्थक भगोड़े अमृतपाल के खिलाफ भारत में कार्रवाई हो रही है। इस कार्रवाई के विरोध में खालिस्तान समर्थकों ने ब्रिटेन की राजधानी लंदन में भारतीय उच्चायोग के बाहर नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया था। इस प्रदर्शन के दौरान खालिस्तानियों ने उच्चायोग में लगे भारतीय तिरंगे को हटा कर खालिस्तानी झंडा लगाने की कोशिश की थी। इस दौरान खालिस्तानियों ने उच्चायोग में तोड़फोड़ भी की थी।

इस घटना के बाद भारत ने अंग्रेजी राजदूत को तलब करते हुए सख्ती दिखाई थी। इसके बाद राजदूत समेत ब्रिटेन के विदेश मंत्री और लंदन के मेयर ने घटना की निंदा की थी। भारत स्थित ब्रिटिश उच्चायोग और उच्चायुक्त आवास के बाहरी सुरक्षा घेरे में भी कटौती की खबरें आई थीं। जिसके बाद ब्रिटेन में भारतीय उच्चायोग के बाहर पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी और बैरिकेडिंग भी लगाए गए थे।

कॉन्ग्रेस नेता सिद्धारमैया ने भरी भीड़ में अपने ही समर्थक को झापड़ मारा: Video वायरल, 2019 में भी हुई थी ऐसी घटना

कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता सिद्धारमैया ने शुक्रवार (24 मार्च 2023) को अपने एक समर्थक को भरी भीड़ में झापड़ मारा। बताया जा रहा है कि उनका समर्थक शुक्रवार को उनके आवास उनसे मिलने आया था तभी ये घटना घटी।

वायरल वीडियो में देख सकते हैं, कि कैसे सिद्धारमैया अपने आवास के बाहर लोगों से घिरे हुए हैं, तभी उनका एक समर्थक भीड़ से निकलकर उनसे मिलने आता है और वो खिंचाकर उसे झापड़ मार देते हैं। वीडियो में भी झापड़ मारने की आवाज सुनाई पड़ती है।

बता दें कि ऐसा पहली बार नहीं है कि उन्होंने अपने ही समर्थकों को इस तरह जलील किया हो। इससे पहले सिद्धारमैया ने मैसूर एयरपोर्ट पर अपने साथी को चांटा मारा था। वीडियो में देखा गया था कि उनके एयरपोर्ट पर जाने पर उनका साथी उनसे हाथ मिलाने आगे बढ़ा। लेकिन उन्होंने हात मिलाने की जगह उन्हें थप्पड़ मार दिया।

टाइम्स ऑफ इंडिया बेंगलुरु ने यह वीडियो साल 2019 में शेयर की थी। तब लोगों ने यह घटना देखने के बाद उन्हें अहंकारी आदि बताया था। उन्हें अकसर मोदी विरोधी बयान देने के लिए जाना जाता रहा है। वो पीएम मोदी की तुलना हिटलर तक से कर चुके हैं। इस बार कर्नाटक चुनावों में वह वरुणा सीट से मैदान में उतरेंगे। कॉन्ग्रेस द्वारा जारी पहली लिस्ट में उनका नाम है।

‘देश भर में 10000 औषधि केंद्र, कई भाषाओं में मेडिकल कोर्स’: मेडिकल रिसर्च संस्थान से लेकर बेंगलुरु मेट्रो लाइन तक, कर्नाटक को PM मोदी ने दी कई सौगातें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कर्नाटक के चिक्कबल्लापुर में ‘श्री मधुसूदन साई इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंस एंड रिसर्च सेंटर’ का उद्घाटन किया। कर्नाटक को प्रधानमंत्री के इस दौरे में 13.71 किलोमीटर की बेंगलुरु मेट्रो लाइन की भी सौगात मिली। ये व्हाइटफील्ड (कदुगोड़ी) से लेकर कृष्णराजपुरा (KR पुरम) तक की लाइन है। कर्नाटक में विधानसभा चुनाव भी होने हैं और कॉन्ग्रेस पार्टी ने अपने उम्मीदवारों की पहली सूची भी जारी कर दी है।

मेडिकल संस्थान के उद्घाटन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि चिकबल्लापुर आधुनिक भारत के आर्किटेक्ट में से एक सर एम विश्वेश्वरय्या की जन्मभूमि है। उन्होंने सर विश्वेश्वरय्या की समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित की। साथ ही इसे पुण्य भूमि बताते हुए सिर झुका कर प्रणाम करता किया। उन्होंने कहा कि आजादी के ‘अमृत महोत्सव’ में देश ने विकसित होने का संकल्प लिया है। उन्होंने जिक्र किया कि कई बार लोग पूछते हैं कि भारत कैसे विकसित बनेगा? इतनी चुनौतियाँ हैं, इतना काम है, इतने कम समय में पूरा कैसे होगा?

बकौल पीएम मोदी, इस सवाल का जवाब है – सबका प्रयास। हर देशवासी के साझा प्रयासों से ये संभव होने वाला है। उन्होंने कहा कि बीते 9 वर्षों में भारत में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर बहुत ईमानदारी से, बहुत कुशलता से कार्य करने का प्रयास किया गया है। देश में स्वास्थ्य शिक्षा से जुड़े अनेक रिफॉर्म किए गए हैं। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार बेटियों को ऐसा जीवन देने में जुटी है, जिससे वो भी स्वस्थ रहें और आने वाली संतान भी स्वस्थ रहे।

पीएम मोदी ने कहा कि आरोग्य के साथ-साथ माताओं, बहनों, बेटियों के आर्थिक सशक्तिकरण पर भी डबल इंजन सरकार का पूरा ध्यान है। उन्होंने बताया कि कैसे स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर और सबकी पहुँच में बना कर गरीबों को फायदा पहुँचाया जा रहा है। उन्होंने जानकारी दी कि देश भर में 10,000 ‘औषधि केंद्र’ हैं, जिनमें से 1000 तो कर्नाटक में ही हैं। उन्होंने कन्नड़ सहित कई स्थानीय भाषाओं में मेडिकल शिक्षा की व्यवस्था किए जाने के फैसले को भी गिनाया।

जाकिर नाइक ने ओमान में सरेआम कराया हिंदू महिला का धर्मांतरण, बोला- काश आप अपने परिवार को भी इस्लाम कबूल करवा पाएँ

देश में धार्मिक विद्वेष फैलाने और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपित भगोड़े जाकिर नाईक को ओमान से लाने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है। इस दौरान राजधानी मस्कट में एक हिंदू महिला का धर्मांतरण कराने का भी उसने जिक्र किया है। उसने कहा कि भारत के हिंदू उसे प्यार करते हैं, लेकिन वोटबैंक की राजनीति की वजह से उसे निशाना बनाया जा रहा है।

जाकिर नाइक 23 मार्च 2023 को ओमान में था। इस दौरान उसने आरती नाम की एक हिंदू महिला का इस्लाम में धर्मांतरण कराया। इस दौरान वह कुछ आयतें पढ़ रहा था और महिला से उसे दोहराने के लिए कह रहा था। उसे दोहराने के बाद उसने महिला से कहा कि अब वह मुस्लिम बन गई है।

इस दौरान उसने महिला के दोस्तों और रिश्तेदारों को भी धर्मांतरित करने की इच्छा जाहिर की। जाकिर ने कहा, “अब आप पापरहित हैं। इंशाअल्लाह! आप अपने परिवार में दूसरे लोगों को, अपने दोस्तों को भी इस्लाम धर्म कुबूल करवाने का माध्यम बनें।” उसे 23 और 25 मार्च को इस्लाम पर लेक्चर देने के लिए ओमान बुलाया गया है।

महिला का सार्वजनिक तौर पर धर्मांतरण करते हुए कहा जाकिर कहता है, “क्या तुम मानती हो कि ईश्वर सिर्फ एक है? क्या तुम मानती हो कि सिर्फ अल्लाह के अलावा और किसी की पूजा नहीं हो सकती? क्या मानती हो कि मूर्तिपूजा गलत है? क्या ये भी मानती हो कि पैगंबर मोहम्मद आखिरी प्रवर्तक थे?” इन सब सवालों पर महिला अपनी सहमति जाहिर करती है। इसके बाद उसे कलमा पढ़वाकर वह उसे धर्मांतरित करा देता है।

ओमान में अपने बेटे फारिक नाइक के साथ पुलिस एस्कॉर्ट में घुमने वाले उन्मादी जाकिर नाइक ने कहा कि उसे भारत के बहुसंख्यक हिंदू प्यार करते हैं। यही कारण है कि उसकी स्पीच को हजारों-लाखों लोग सुनने के लिए आते थे। उसने आरोप लगाया कि वोटबैंक की राजनीति के कारण उसे निशाना बनाया जा रहा है।

ओमान में इस्लाम पर भाषण देने के दौरान वह राजनीति की बातें करने लगा। उसने केंद्र की मोदी सरकार, भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर निशाना साधा। उसने प्रोपेगेंडा फैलाते हुए कहा कि भारत में मुस्लिमों पर जुल्म होता है। इतना ही नहीं, उसने दुनिया भर के मुस्लिमों से इस्‍लाम के लिए आगे आने को कहा।

उधर, विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार (24 मार्च 2023) को कहा कि भारत सरकार जाकिर नाइक को वापस लाने के लिए सभी आवश्यक कार्रवाई करेगी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा, “ज़ाकिर नाइक भारत में कई मामलों में आरोपित है। वह भगोड़ा है। हमने इस मामले को ओमान सरकार के साथ उठाया है।”

जाकिर नाइक पर मुस्लिम युवाओं को आतंकवाद की ओर प्रेरित करने के आरोप हैं। उसकी स्पीच सुनकर कई युवाओं के आतंकवादी संगठनों में शामिल होने के मामले सामने आए हैं। उस पर धर्मांतरण को बढ़ावा देने, लोगों एवं समूहों के बीच नफरत फैलाने और मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में शामिल होने के आरोप हैं।

बता दें कि साल 2016 में भारत से भागने के बाद वह मलेशिया चला गया था। तब से वह वहीं रह रहा है। भारत सरकार मलेशिया की सरकार से उसके प्रत्यर्पण के लिए लगातार बातचीत कर रही है, लेकिन अभी तक उसका कोई परिणाम नहीं आया है। अब जबकि जाकिर ओमान में है तो भारत ने ओमान सरकार से बात शुरू की है।

‘पुलिस ने पकड़ा तो बहुत बेइज्जती होगी’: भगोड़े अमृतपाल के चाचा का ऑडियो वायरल, सरेंडर करने से पहले साथी से की बात

खालिस्तान समर्थक ‘भगोड़े’ अमृतपाल सिंह के चाचा हरजीत सिंह की एक ऑडियो वायरल हो रही है। ये ऑडियो उनकी गिरफ्तारी से पहले की है। इस ऑडियो में वह अपने सरेंडर की बात कह रहे हैं।

वायरल ऑडियो में उन्हें कहते सुना जा सकता है, “चूँकि हम और नहीं भाग सकते, हर जगह कैमरे लगे हैं, अच्छा है कि हम सरेंडर ही कर दें।” ऑडियो में हरजीत सिंह को अपने भतीजे को भी सरेंडर करने की सलाह देते सुना जा सकता है।

जानकारी के मुताबिक, हरजीत सिंह जिससे बात कर रहे थे वो उनका साथी व भगोड़ा पपलप्रीत सिंह था। ऑडियो में उन्हें कहते सुना गया था कि वो एक या दो दिन में सरेंडर कर देंगे। ऑडियो में ये भी कहा गया था- “अगर पुलिस ने हमें कल को पकड़ा तो बहुत बेइज्जती होगी। जांबाजों की तरह पुलिस के आगे सरेंडर करते हैं, मीडियो बुलाओ।”

उन्होंने अमृतपाल को भी सरेंडर की सलाह दी थी। पपलप्रीत से उन्होंने कहा था- “हर जगह कैमरे हैं, हम ज्यादा दिन नहीं बच पाएँगे। इसीलिए मैं आप से कह रहा हूँ। भाई साहब आपके साथ होंगे। आपकी बात सुनेंगे।”

कथिततौर पर अमृतपाल सिंह के एक चाचा सुखचैन सिंह पंजाब पुलिस में इंस्टपेक्टर थे, जो अब रिटायर हो चुके हैं। उन्हीं से अमृतपाल सिंह को और उसके दूसरे चाचा हरजीत सिंह पुलिस एक्शन की जानकारी मिली। जिसके बाद अमृतपाल फरार हो गया। वहीं हरजीत सिंह ने पुलिस की सक्रियता देखते हुए सरेंडर का मन बनाया।

बता दें कि पंजाब, हरियाणा, दिल्ली समेत कई जगह अमृतपाल सिंह को पकड़ने के लिए पुलिस प्रयास कर रही है। इस बीच उसके दो साथियों के खिलाफ बिलगा थाने में आपराधिक मामला दर्ज हुआ है। ये केस ग्रंथी सुखविंदर सिंह की पत्नी गुरमीत कौर ने दर्ज करवाई थी।

उन्होंने कहा था कि इसी साल 18 मार्च को तीन नकाबपोश लोग शेखूपुर गाँव स्थित गुरुद्वारा सिंह सभा में घुसे जिन्होंने कौर के परिवार को बंदूक की नोक पर एक कमरे में बंद कर दिया था। इसके बाद उन्होंने कौर के बेटे परवान सिंह से उसकी शॉल और पगड़ी जबरन छीनी, फिर उसे कहा कि वो चुपचाप उनकी सतलुज नदी पार करने में मदद करे। परवान सिंह का कहना है कि उन तीनों में से एक अमृतपाल सिंह था। पुलिस ने इस मामले को बिलगा पुलिस थाने में आईपीसी की धारा 386, 342, 506, 34 और आर्म्स एक्ट की धारा 25, 27, 54 और 59 के तहत दर्ज किया है।

जिस अध्यादेश को राहुल गाँधी ने फाड़ा, उसी कानून के कारण गई सांसदी: अब उसको लेकर सुप्रीम कोर्ट में दी गई याचिका

आपराधिक मानहानि मामले में कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी को सजा होने के बाद उनकी संसद सदस्यता रद्द होने पर देश में राजनीतिक बवाल हो गया है। अब सुप्रीम कोर्ट में जनप्रतिनिधि अधिनियम की धारा 8(3) की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई है।

सर्वोच्च न्यायालय में दायर याचिका में दोष सिद्ध होने के बाद निर्वाचित विधायी निकायों के प्रतिनिधियों की स्वत: अयोग्यता को चुनौती दी गई है। याचिका में सामाजिक कार्यकर्ता आभा मुरलीधरन ने कहा है कि धारा 8(3) के तहत अयोग्यता को मनमाना और अवैध घोषित किया जाए।

बता दें कि जनप्रतिनिधि कानून की धारा 8 (3) के तहत अगर किसी सांसद या विधायक को दोषी ठहराया जाता है और उसे दो साल या उससे अधिक की सजा मिलती है तो उसकी सदस्यता जा सकती है। इसमें अंतिम निर्णय सदन के स्पीकर पर छोड़ा गया है। हालाँकि, बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि ऐसी स्थिति में सदस्यता स्वत: चली जाएगी।

याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि लिली थॉमस का फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 1951 के इस अधिनियम की धारा 8(4) को रद्द कर दिया है। इसका राजनीतिक दलों द्वारा दुरुपयोग किया जा रहा है। धारा 8(4) सजायाफ्ता विधायकों को सजा की अपील करने के लिए तीन महीने का समय देती थी। इससे तत्काल अयोग्यता को रोका जा सके।

क्या है लिली थॉमस केस

सन 2005 में केरल के वकील लिली थॉमस और लोक प्रहरी नाम के एनजीओ के महासचिव पूर्व IAS अधिकारी एसएन शुक्ला ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की थी। इस याचिका में जनप्रतिनिधि कानून 1951 की धारा 8(4) को असंवैधानिक घोषित करने की माँग की गई थी।

याचिका में कहा गया था कि यह धारा दोषी सांसद-विधायकों की सदस्यता को बचाती है, क्योंकि अगर ऊपरी अदालतों में मामला लंबित है तो सदस्यता को रद्द नहीं किया जा सकता था। इसके लिए दोनों ने संविधान के अनुच्छेदों का हवाला दिया था।

याचिका में थॉमस और शुक्ला ने अपनी याचिका में संविधान के अनुच्छेद 102(1) और 191(1) का हवाला दिया गया था। दरअसल, अनुच्छेद 102(1) में सांसद और 191(1) में विधानसभा या विधान परिषद के सदस्य को अयोग्य ठहराने का प्रावधान है।

इस मामले पर सुनवाई करते हुए 10 जुलाई 2010 को सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस एके पटनायक और जस्टिस एसजे मुखोपाध्याय की बेंच ने फैसला सुनाया। इस दौरान कोर्ट ने कहा था कि केंद्र के पास धारा 8(4) को लागू करने का अधिकार नहीं है। अगर किसी मौजूदा सांसद-विधायक दोषी ठहराए जाते हैं तो जनप्रतिनिधि कानून की धारा 8(1), 8(2) और 8(3) के तहत वो अयोग्य हो जाएँगे।

राहुल गाँधी ने नहीं फाड़ा होता अध्यादेश तो नहीं जाती सांसदी

अब जबकि राहुल गाँधी की सांसदी जा चुकी है तो इसके लिए जिम्मेदार कानून को चुनौती दी गई है। इस मामले में अगर राहुल गाँधी ने साल 2013 में हस्तक्षेप नहीं किया होता तो आज उनके खुद के अलावा कई सांसदों और विधायकों की सदस्यता छिने जाने से पहले कुछ वक्त मिल जाता।

दरअसल, साल 2013 में कॉन्ग्रेस नेता अजय माकन सुप्रीम कोर्ट द्वारा जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 8 (4) को रद्द करने के फैसले के खिलाफ यूपीए सरकार से लाए जा रहे अध्यादेश की जानकारी दे रहे थे। इसी दौरान राहुल गाँधी आए और अध्यादेश की कॉपी फाड़ दी। उन्होंने कठोर कानून बनाए जाने की वकालत की थी।

यूपीए सरकार द्वारा लाए जा रहे इस अध्यादेश से दोषी ठहराए गए सांसदों को भी लोकसभा से अयोग्य ठहराने के लिए तीन महीने की राहत दी जा रही थी। इस अध्यादेश को राजद सुप्रीमो लालू यादव को राहत देने के लिए लाया जा रहा था। राहुल गाँधी के इस फैसले के बाद यूपीए सरकार ने इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया और अगले साल 2014 में सरकार बदल गई।

दिल्ली के कॉन्ग्रेस हेडक्वार्टर में चला बुलडोजर, तोड़ी गई अवैध सीढ़ियाँ: अधिकारी बोले- ये कोई बड़ी कार्रवाई नहीं

राहुल गाँधी की लोकसभा सदस्यता खत्म होने के बाद अब अरविन्द केजरीवाल सरकार के लोकनिर्माण विभाग ने कॉन्ग्रेस के निर्माणाधीन मुख्यालय पर अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई की है। इस कार्रवाई में कॉन्ग्रेस पार्टी के दीनदयाल उपाध्याय रोड स्थित बन रहे हेडक्वार्टर के कुछ अवैध हिस्सों पर बुलडोजर चलाया गया है। शुक्रवार (24 मार्च 2023) को हुई इस कार्रवाई के दौरान बन रही इमारत की कुछ सीढ़ियों को तोड़ा गया है। आरोप है कि सीढ़ियाँ बिना दिल्ली नगर की अनुमति के बनाई गईं थीं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ध्वस्तीकरण की यह कार्रवाई साल 2023 में होने वाले G- 20 सम्मेलन की तैयारियों के चलते की गई है। इस बाबत पहले भी कॉन्ग्रेस पार्टी को सूचना दे दी गई थी। कॉन्ग्रेस पार्टी ने भी इस कार्रवाई के लिए हरी झंडी दिखा दी थी। अतिक्रमण विरोधी अभियान में शामिल रहे एक अधिकारी के अनुसार यह कोई बड़ा एक्शन नहीं था। पार्टी कार्यालय में किनारे से लोगों के घुसने के लिए कुछ सीढ़ियों को बनाया गया था। यह निर्माण MCD द्वारा पास नहीं था।

तस्वीरों के मुताबिक तोड़ी गई सीढ़ियाँ बन रही एक बड़ी बिल्डिंग के शुरुआत में मौजूद एक मंजिला कमरे की तरफ ले जाती थीं। यह कमरा सुरक्षा या उस से जुड़े किसी अन्य काम में आना बताया जा रहा है। ये सीढ़ियाँ निर्माणाधीन 6 मंजिला कॉन्ग्रेस मुख्यालय की मुख्य बिल्डिंग से सीधे कनेक्ट नहीं थीं। इन कार्रवाई के बाद अब सामने वाले कमरे में जाने के लिए ढाँचे में थोड़ा बदलाव करना पड़ सकता है। जानकारी के मुताबिक नए बन रहे कॉन्ग्रेस मुख्यालय के 2 गेट हैं और ये दोनों गेट दीनदयाल उपाध्याय रोड की ही तरफ खुलते हैं।

फिलहाल कॉन्ग्रेस का वर्तमान समय में मुख्यालय दिल्ली के अकबर रोड पर मौजूद है। साल 2019 से ही इसे दीनदयाल उपाध्याय रोड पर शिफ्ट करने की तैयारी चल रही थी। हालाँकि शिफ्टिंग में थोड़ा समय लगा। अभी जहाँ कॉन्ग्रेस का हेड क्वार्टर है वो सरकारी भवन है। उसे छोड़ने की कई नोटिस पहले भी पार्टी को दी जा चुकी है। इसी दीनदयाल उपाध्याय रोड पर ही भाजपा और आम आदमी पार्टी का भी मुख्यालय है। भाजपा ने इस रोड पर अपनी पार्टी के हेडक्वार्टर का उद्घाटन साल 2018 में ही कर दिया था।

अमेरिका में ढोल बजाकर लगे ‘वंदे मातरम’ के नारे, तिरंगा ऊँचा उठा दिखा: खालिस्तानी हमले के बाद US में भारतीय एकजुट, देखें Video

पंजाब में ‘वारिस पंजाब दे’ का मुखिया के खिलाफ सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई के बाद ब्रिटेन और अमेरिका में खालिस्तानियों ने हंगामा किया। इसके बाद वहाँ रहने वाले भारतीयों ने तिरंगा यात्रा निकालकर देश के प्रति एकजुटता प्रकट की।

अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में भारतीय-अमेरिकी समुदाय के लोगों ने शुक्रवार (24 मार्च 2023) को भारत के वाणिज्य दूतावास के सामने शांति रैली निकाली। इस हफ्ते के शुरू में वाणिज्य दूतावास के बाहर खालिस्तानियों ने तोड़फोड़ की थी और खालिस्तान समर्थक नारे लगाए थे।

खालिस्तान समर्थकों ने पुलिस की ओर से लगाए गए अस्थायी सुरक्षा अवरोधकों को तोड़ दिया था। इतना ही नहीं वाणिज्य दूतावास परिसर में खालिस्तानी झंडे लगा दिए थे। हालाँकि, दूतावास के कर्मियों ने इन झंडों को तुरंत ही हटा दिया था। इस घटना के विरोध में बड़ी संख्या में भारतीय-अमेरिकी लोगों ने सैन फ्रांसिस्को और उसके आसपास तिरंगा झंडा फहराया।

जिस समय तिरंगा यात्रा निकाला गया, उस समय वहाँ कुछ अलगाववादी खालिस्तानी भी मौजूद थे। वहाँ किसी तरह की अप्रिय घटना ना हो, इसके लिए बड़ी संख्या में पुलिस मौजूद थी। इस। दौरान कुछ अलगाववादी सिखों ने खालिस्तान के समर्थन में नारे लगाए। वहीं, बड़ी संख्या में पहुँचे लोगों ने ‘वंदे मातरम’ के नारे लगाए और अमेरिका के साथ-साथ तिरंगा लहराया। 

बता दें कि वाणिज्य दूतावास में खालिस्तानियों के हमले के बाद भारत ने दिल्ली में अमेरिकी राजदूत को तलब कर कड़ा विरोध दर्ज कराया था। विदेश मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका की सरकार को ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए कठोर उपाय करने चाहिए।