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राहुल गाँधी नहीं रहे सांसद: लोकसभा सचिवालय ने सदस्यता खत्म करने का जारी किया नोटिफिकेशन, सूरत कोर्ट ने सुनाई थी 2 साल की सजा

राजनीतिक मर्यादा को ताक पर रखकर कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी द्वारा की गई टिप्पणी के मामले में आखिरकार उन्हें अपनी सांसदी से हाथ धोना पड़ गया। राहुल गाँधी को लोकसभा की सदस्यता को रद्द कर दिया गया है।

इस संबंध में लोकसभा के महासचिव उत्पल कुमार सिंह द्वारा पत्र जारी किया गया है। इसमें कहा गया है कि सूरत के चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट की अदालत द्वारा दोषी ठहराए जाने के बाद केरल के वायनाड से सांसद राहुल गाँधी को संसद की सदस्यता के अयोग्य ठहराया जा रहा है।

इस नोटिफिकेशन में कहा गया है कि यह दोषी ठहराए जाने की तिथि 23 मार्च 2023 से लागू होता है। नोटिफिकेशन में यह भी कहा गया है कि जनप्रतिनिधि कानून 1951 की धारा 8 के अनुसार यह कार्रवाई की गई है। लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला के निर्देश पर यह कार्रवाई की गई है।

23 मार्च 2023 को सूरत की जिला अदालत ने काॅन्ग्रेस सांसद राहुल गाँधी को मानहानि के एक मामले में दोषी ठहराते हुए दो साल की सजा सुनाई थी। सजा सुनाए जाने के तुरंत बाद उन्हें जमानत भी दे दी गई। उन्हें ऊपरी अदालत में अपील करने के लिए 30 दिनों का समय दिया है। इस दौरान उन पर सजा लागू नहीं होगी।

दरअसल, राहुल गाँधी ने कर्नाटक की एक रैली में 13 अप्रैल 2019 को था, “नीरव मोदी, ललित मोदी, नरेंद्र मोदी इन सभी के नाम में मोदी लगा हुआ है। सभी चोरों के नाम में मोदी क्यों लगा होता है।” इसके बाद उनके खिलाफ मानहानि का मुकदमा दर्ज किया गया था।

भाजपा नेता पूर्णेश मोदी ने कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष के खिलाफ सूरत में मामला दर्ज कराया था। राहुल गाँधी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 499 और 500 के तहत केस दर्ज करवाया था, जो आपराधिक मानहानि से संबंधित है। 4 साल के बाद अदालत ने मामले में राहुल गाँधी को दोषी पाते हुए सजा सुना दी।

इस केस के सिलसिले में राहुल गाँधी कई बार सूरत पहुँचे। जून 2021 में राहुल गाँधी ने पेशी के दौरान अपना बयान दर्ज कराया था। कॉन्ग्रेस नेता ने अदालत को बताया था कि उन्होंने चुनाव के दौरान राजनीतिक कटाक्ष किया था। उन्होंने यह बात किसी समाज के लिए नहीं कही थी। साथ ही कहा कि इस मामले में अब उन्हें ज्यादा कुछ याद नहीं है।

सजा सुनाए जाने के बाद राहुल गाँधी की सांसदी छिने जाने के कयास लगाए जा रहे थे। दरअसल, जनप्रतिनिधि कानून की धारा 8(3) के तहत यदि किसी सांसद को दोषी ठहराया जाता है और 2 साल या उससे अधिक की सजा होती है तो उसकी सदस्यता रद्द हो जाएगी। इतना ही नहीं सजा पूरी होने के बाद 6 साल तक वह व्यक्ति चुनाव भी नहीं लड़ सकता।

साल 2013 से पहले जनप्रतिनिधि अधिनियम की धारा 8(4) के अनुसार कोई भी सांसद या विधायक दोषी करार दिए जाने के तीन महीने के भीतर फैसले के खिलाफ अपील या रिव्यू पिटीशन दायर कर अपने पद पर बना रह सकता था। 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने धारा 8(4) को रद्द कर दिया। अदालत के 2013 में दिए गए फैसले के अनुसार अपील के बाद दोषी करार दिए गए सांसद को अदालत से सजा पर स्टे लेना होगा। स्टे मिल जाने के बाद ही उसकी सदस्यता बच सकती है।

सुप्रीम कोर्ट के जनप्रतिनिधि अधिनियम की धारा 8(4) को रद्द करने के फैसले के खिलाफ 2013 में केंद्र की तात्कालिक यूपीए-2 सरकार ने सदन में एक बिल पेश किया था। कोर्ट के फैसले के बाद उस वक्त कानून मंत्री रहे कॉन्ग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने जनप्रतिनिधि एक्ट में बदलाव के लिए विधेयक पेश किया था। सितंबर 2013 में सरकार ने इसे अध्यादेश के तौर पर लागू करने की कोशिश की। इसके तहत सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विपरीत दोषी एमपी या एमएलए की सदस्यता फौरन रद्द नहीं हो सकती थी।

इसके तहत अपील के बाद अदालत के फैसले तक आरोपित सदस्य सदन की कार्यवाही में शामिल हो सकते थे। उनकी सदस्यता बनी रहती, लेकिन वे वेतन प्राप्त करने और वोट देने के अधिकारी नहीं होते। 27 सितंबर 2013 को इसी अध्यादेश के प्रारंभिक ड्राफ्ट को राहुल गाँधी ने भरी प्रेस कॉन्फ्रेंस में नॉनसेंस बताते हुए फाड़ दिया था। तब राहुल ने कहा था, “इस कानून को और मजबूत किए जाने की जरूरत है।” बाद में इस अध्यादेश को वापस ले लिया गया था। अब लोगों का कहना है कि यदि राहुल उस बिल को पास हो जाने देते तो आज उनकी संसद सदस्यता पर खतरा नहीं पैदा होता।

वाराणसी में PM मोदी, ₹1785 करोड़ के प्रोजेक्ट्स की सौगात: 2025 तक भारत को टीबी मुक्त करने का संकल्प, WHO ने 2030 का रखा है टारगेट

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज 1780 करोड़ रुपए की परियोजनाओं की सौगात देने वाराणसी पहुँचे। उन्होंने वाराणसी पहुँच पहले ‘वन वर्ल्ड टीबी’ समिट का शुभारंभ किया और दुनिया के सामने टीबी को खत्म करने का संकल्प रखा। उन्होंने इस दौरान रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में भी लगी प्रदर्शनी को भी देखा।

उन्होंने कहा, 2014 के बाद से भारत ने जिस नई सोच और अप्रोच के साथ टीबी के खिलाफ काम करना शुरू किया, वो वाकई अभूतपूर्व है। भारत के ये प्रयास पूरे विश्व को इसलिए भी जानने चाहिए क्योंकि ये टीबी के खिलाफ वैश्विक लड़ाई का एक नया मॉडल है।

पीएम मोदी बोले, “कोई भी TB मरीज इलाज से छूटे नहीं, इसके लिए हमने नई रणनीति पर काम किया। TB के मरीजों की स्क्रीनिंग के लिए, उनके ट्रीटमेंट के लिए, हमने उन्हें आयुष्मान भारत योजना से जोड़ा है। TB की मुफ्त जांच के लिए हमने देशभर में लैब्स की संख्या बढ़ाई है।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत अब वर्ष 2025 तक TB खत्म करने के लक्ष्य पर काम कर रहा है। TB खत्म करने का ग्लोबल टार्गेट वर्ष 2030 है लेकिन भारत वर्ष 2025 तक TB खत्म करने के लक्ष्य पर काम कर रहा है।

सीएम योगी ने भी इस अवसर पर बताया कि वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन ने 2018 में संकल्प लिया था कि विश्व को 2030 तक टीबी मुक्त करेंगे। पीएम ने इसी क्रम में आगे बढ़कर संकल्प लिया कि वह भारत को 2025 तक टीबी मुक्त बनाएँगे। इस अभियान के तहत 13.10 लाख मरीज प्रधानमंत्री टीबी मुक्त अभियान के तहत लाभान्वित हुए। 71000 से अधिक निक्षय मित्र 10 लाख से अधिक टीबी रोगिययों की सहायता कर रहे हैं।

वाराणसी को पीएम मोदी देंगे सौगात

बता दें कि पीएम मोदी आज वाराणसी में संपूर्णानंद संस्कृत विद्यालय मैदान में कार्यक्रम के दौरान 1780 करोड़ रुपए से अधिक की परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यस करने वाले हैं।

वह नमामि गंगे योजना के तहत भगवानपुर में 55 एमएलडी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की आधारशिला भी रखेंगे, जिसे 300 करोड़ रुपए से अधिक की लागत से बनाया जाएगा। प्रधानमंत्री खेलो इंडिया योजना के तहत सिगरा स्टेडियम के पुनर्विकास कार्य के फेज 2 और 3 का शिलान्यास भी करेंगे। इसके अलावा जल जीवन मिशन के तहत, प्रधानमंत्री 19 पेयजल योजनाओं को समर्पित करेंगे, जिससे 63 पंचायतों के तीन लाख से अधिक लोग लाभान्वित होंगे। ऐसे ही 59 नई पेयजल योजनाओं की आधारशिला भी रखी जाएगी।

दिल्ली में ब्रिटेन के उच्चायुक्त के घर के बाहर बनेगा सार्वजनिक शौचालय, ब्रिटिश सरकार ने जताई आपत्तिः लंदन में खालिस्तानी उत्पात के बाद हटा दिए गए थे बैरिकेड्स

दिल्ली में स्थानीय अधिकारियों ने सार्वजनिक शौचालय का निर्माण करने के लिए ब्रिटिश उच्चायुक्त के निवास के पास का स्थान चुना है। आम लोगों की आवश्यकता को देखते हुए अधिकारी इसे जरूरी मानते हैं। वहीं, यूके की सरकार ने इस निर्माण पर आपत्ति जताते हुए सुरक्षा का हवाला दिया है।

इकोनोमिक टाइम्स ने 24 मार्च 2023 की अपनी रिपोर्ट में कहा गया है कि लुटियंस दिल्ली के मीना बाग में राजाजी मार्ग पर स्थित ब्रिटिश उच्चायुक्त एलेक्स एलिस के आवास के बगल में एक सार्वजनिक शौचालय की आवश्यकता महसूस की गई। यह खबर दिल्ली में ब्रिटिश उच्चायोग और उच्चायुक्त के आवास की सुरक्षा में कटौती के बाद आई है।

ब्रिटिश उच्चायोग और उच्चायुक्त के आवास के बाहर की सुरक्षा में कटौती के बाद सार्वजनिक शौचालय का निर्माण इंग्लैंड सरकारी की लापरवाही की प्रतिक्रिया के रूप में देखा जा रहा है। कुछ दिन पहले ब्रिटेन की राजधानी लंदन में स्थित भारतीय उच्चायोग पर खालिस्तानी चरमपंथियों हमला कर तिरंगे का अपमान किया था।

इससे पहले 22 मार्च 2023 को रिपोर्ट आई थी कि भारतीय अधिकारियों ने ब्रिटिश उच्चायोग और ब्रिटिश उच्चायुक्त के निवास के सामने लगाए गए बैरिकेड्स को हटा दिया। इसके साथ ही उनकी बाहरी सुरक्षा में कटौती कर दी।

ब्रिटिश उच्चायोग दिल्ली के चाणक्यपुरी में राजनयिक एन्क्लेव में शांतिपथ पर स्थित है। उसके गेट के सामने से बैरिकेड्स और बंकरों को हटाने के साथ-साथ वहाँ तैनात पीसीआर वैन और दिल्ली पुलिस की टीम को भी हटा दिया गया है।

ऊपर के वीडियो में साफ दिख रहा है कि रोड डायवर्टर, स्पीड ब्रेकर, सैंडबैग के बंकर, पीसीआर वैन और परिसर के बाहर तैनात स्थानीय पुलिस जैसे विशेष सुरक्षा उपायों नहीं दिख रहे हैं। कहा गया कि इसके पीछे भारत सरकार ने तर्क दिया है कि भारत में ब्रिटिश उच्चायोग पहले से ही सुरक्षित क्षेत्र में है। इसलिए अतिरिक्त सुरक्षा उपायों की कोई आवश्यकता नहीं है।

सूपनखा रावन कै बहिनी… नाक कान बिनु कीन्हि: रेणुका चौधरी को छोड़िए, जानिए शूर्पणखा को लेकर क्या कहता है रामचरितमानस

23 मार्च 2023 को काॅन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी (Rahul Gandhi) को सूरत की एक अदालत ने दो साल की सजा सुनाई। उन्हें अदालत ने आपराधिक मानहानि के मामले में दोषी पाया है। मामला एक चुनावी रैली में ‘सभी चोरों के नामों में मोदी क्यों लगा होता है’ वाले बयान से जुड़ा है। सजा सुनाए जाने के बाद अदालत ने काॅन्ग्रेस नेता को तत्काल बेल देते हुए ऊपरी अदालत में अपील के लिए 30 दिनों का वक्त दिया है।

जैसा कि हम जानते हैं कि काॅन्ग्रेसी बगुला की तरह उन मौकों की ताक में बैठे रहते हैं, जब वे शीर्ष परिवार के सामने खुद को सबसे बड़ा ‘वफादार’ साबित कर सके। अब अदालत के फैसले ने काॅन्ग्रेसियों को वही मौका प्रदान किया है। खुद को ‘सर्वश्रेष्ठ वफादार’ साबित करने की लगी होड़ में पूर्व काॅन्ग्रेस सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री रेणुका चौधरी ने खुद को शामिल करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ मानहानि का केस करने की बात कही है।

रेणुका चौधरी ने एक वीडियो क्लिप शेयर करते हुए ट्वीट किया है, “इस क्लासलेस अहंकारी ने मुझे राज्यसभा में शूर्पणखा (Shurpanakha) कहा था। मैं उसके खिलाफ मानहानि का केस करूँगी। अब देखेंगे कि अदालतें कितनी तेजी से एक्शन लेंगी।” काॅन्ग्रेस की पूर्व सांसद ने पीएम मोदी का जो वीडियो शेयर किया है वह 7 फरवरी 2018 का है। प्रधानमंत्री सदन में राष्ट्रपति के अभिभाषण प्रस्ताव पर बोल रहे थे।

खैर अब इस राजनीतिक कथा को यहीं विराम देते हैं। जानते हैं कि जिस शूर्पणखा को रेणुका चौधरी चर्चा में लेकर आईं हैं, वह कौन थी? यदि आपने रामचरितमानस पढ़ी होगी तो अरण्य कांड में शूर्पणखा का चरित्र चित्रण भी पढ़ा ही होगा। यदि रामचरितमानस नहीं पढ़ा है तो भी घबराने की जरूरत नहीं है। नीचे हम तुलसीदास रचित कुछ दोहे और उनका अर्थ बता रहे हैं ताकि आप शूर्पणखा को ठीक से जान बूझ लें।

सूपनखा रावन कै बहिनी। दुष्ट हृदय दारुन जस अहिनी॥
पंचबटी सो गइ एक बारा। देखि बिकल भइ जुगल कुमारा॥

हिंदी में बोले तो शूर्पणखा रावण की बहन थी। नागिन के समान भयानक और दुष्ट हृदय की थी। मतलब जहरीली थी। वह एक बार पंचवटी (भगवान श्री राम, माता जानकी और लक्ष्मण का निवास स्थान) में गई। राम और लक्ष्मण को देखकर विकल (मतलब सेक्स को आतुर) हो गई।

भ्राता पिता पुत्र उरगारी। पुरुष मनोहर निरखत नारी॥
होइ बिकल सक मनहि न रोकी। जिमि रबिमनि द्रव रबिहि बिलोकी॥

काकभुशुण्डिजी कहते हैं- हे गरुड़जी! जो स्त्री (शूर्पणखा- जैसी राक्षसी, जो कामांध है, जिसे धर्म का ज्ञान नहीं है) मनोहर पुरुष को देखकर, चाहे वह भाई, पिता, पुत्र ही हो, विकल हो जाती है। मन पर काबू नहीं रहता। जैसे सूर्यकान्तमणि सूर्य की ज्वाला से पिघल जाती है।

रुचिर रूप धरि प्रभु पहिं जाई। बोली बचन बहुत मुसुकाई॥
तुम्ह सम पुरुष न मो सम नारी। यह सँजोग बिधि रचा बिचारी॥

शूर्पणखा सुन्दर रूप धरकर प्रभु के पास जाती है। बहुत मुस्कुराकर कहती है- न तो तुम्हारे समान कोई पुरुष है, न मेरे समान स्त्री। विधाता ने यह संयोग (जोड़ा) बहुत विचार कर रचा है।

मम अनुरूप पुरुष जग माहीं। देखेउँ खोजि लोक तिहु नाहीं॥
तातें अब लगि रहिउँ कुमारी। मनु माना कछु तुम्हहि निहारी॥

मेरे योग्य पुरुष दुनिया में नहीं है। मैंने तीनों लोकों में खोजकर देखा है। यही कारण है कि अभी तक मैंने शादी नहीं की है। अब तुमको देखकर मेरा मन अटक गया है।

अगले कुछ दोहों में श्री राम द्वारा शूर्पणखा का अनुरोध ठुकराने, फिर प्रस्ताव लेकर उसके लक्ष्मण के पास जाने, वहाँ भी दुत्कार मिलने की कथा है। दुत्कारे जाने के बाद शूर्पणखा अपने असली रूप में आ जाती है। रामचरितमानस में कहा गया है;

तब खिसिआनि राम पहिं गई। रूप भयंकर प्रगटत भई॥
सीतहि सभय देखि रघुराई। कहा अनुज सन सयन बुझाई॥

गुस्से में शूर्पणखा श्री रामजी के पास जाती है। अपना भयंकर रूप दिखाती है। उसे देख सीताजी भयभीत होती जातीं हैं। फिर लक्ष्मण को श्री राम जी इशारा करते हैं।

लछिमन अति लाघवँ सो नाक कान बिनु कीन्हि।
ताके कर रावन कहँ मनौ चुनौती दीन्हि॥

इशारा पाते ही लक्ष्मण जी बड़ी फुर्ती से शूर्पणखा को बिना नाक-कान का कर देते हैं…

नोट: दोहों को बोलचाल की हिंदी में समझाने के लिए रामचरितमानस से हूबहू व्याख्या नहीं ली गई है।

निजी सेना, बुलेटप्रूफ जैकेट और निजी फायरिंग रेंज: अमृतपाल ने ‘खालिस्तानी डॉलर’ का बना रखा था डिजाइन, नशेड़ियों और पूर्व सैनिकों को AKF में कर रहा था भर्ती

पाकिस्तान से लगते सीमावर्ती राज्य पंजाब में अस्थिरता फैलाने के लिए खालिस्तानी अमृतपाल सिंह किस तरह लगा हुआ था, इसका अब खुलासा हो रहा है। दुबई से भारत आकर ‘वारिस पंजाब दे’ संगठन पर कब्जा करने के बाद अमृतपाल ने एक निजी फौज तैयार कर रहा था। उसके सदस्यों को वह गाँव के फायरिंग रेंज में गोली चलाने की ट्रेनिंग भी देता था।

अमृतपाल ने ‘आनंदपुर खालसा फौज (AKF)’ के नाम से एक निजी सेना तैयार कर रहा था। इसमें वह युवकों का माइंडवॉश करके भर्ती करता था। इसके साथ ही उन्हें हथियार चलाने की ट्रेनिंग भी देता था। इसके लिए उसने गाँव जल्लूपुर खेड़ा में नदी के किनारे स्थाई फायरिंग रेंज भी बनाया था। फायरिंग की ट्रेनिंग देते हुए उसका एक वीडियो भी सामने आया है।

यह बात भी सामने आई है कि वह ड्रग्स एडिक्ट और बदमाश बने सुरक्षाबल के पूर्व लोगों को विशेष तौर पर अपने साथ जोड़ रहा था। अमृतपाल अपने लोगों को उन पूर्व सैनिकों की तलाश शुरू करने के लिए कहा था कि जिन्हें बुरे आचरण की वजह सेना से जबरन सेवानिवृत्त कर दिया गया था। वह इन का इस्तेमाल हथियारों के प्रशिक्षण देने के लिए करना चाहता था।

पंजाब पुलिस का कहना है कि इस अस्थायी रेंज में युवाओं को हाईटेक हथियारों को पकड़ने, उसे लोड करने और चलाने का प्रशिक्षण दिया गया था। पुलिस ने बुधवार (22 मार्च 2023) को अमृतपाल के गनमैन तेजिंदर सिंह गिल उर्फ गोरखा बाबा को गिरफ्तार किया था। उसके मोबाइल फोन में इससे संबंधित कई तस्वीर और वीडियो मिले हैं।

इन तस्वीरों और वीडियो से अमृतपाल की देशद्रोही गतिविधियों में से एक और साजिश का खुलासा हुआ। पुलिस को गोरखा बाबा की मोबाइल से आनंदपुर खालसा फौज के होलोग्राम भी मिले हैं। इसके अलावा, ‘खालिस्तानी डॉलर’ का प्रारूप और डिजाइन भी मिले हैं। इसके साथ ही कई अन्य तरह के वीडियो भी मिले हैं।

पुलिस महानिरीक्षक (आईजीपी-मुख्यालय) सुखचैन सिंह गिल ने कहा कि बाबा के फोन से बरामद तस्वीरें और वीडियो अमृतपाल और उसके समूह की सीमावर्ती राज्य में भयावह गड़बड़ी की ओर इशारा करने के लिए पर्याप्त हैं। वीडियो यह दिखाने के लिए काफी हैं कि वे राष्ट्रीय सुरक्षा और पंजाब की शांति और सद्भाव के लिए कितना बड़ा खतरा बन रहे थे।

उन्होंने कहा कि परिस्थितियों को देखते हुए ऐसा लगता है कि इसमें पाकिस्तान की आईएसआई भी शामिल है और विदेशी फंडिंग भी। बता दें कि पंजाब पुलिस ने इसके पहले कहा था कि अमृतपाल AKF बनाने की कोशिश कर रहा था। इसके लिए उसने 35 बुलेटप्रूफ जैकेट, गाड़ियाँ और हथियार खरीदे थे। इन जैकेटों और राइफलों पर उसने इस संगठन का नाम तक छाप दिया था।

IGP गिल ने कहा कि बाबा के खिलाफ खन्ना पुलिस ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 188 (लोक सेवक द्वारा विधिवत आदेश देने की अवज्ञा) और 336 (दूसरों की निजी सुरक्षा को खतरे में डालने वाला कार्य) और शस्त्र की धारा 27 के तहत मामला दर्ज किया है। उन्होंने कहा कि अमृतपाल की योजनाओं की विस्तृत जानकारी के लिए पुलिस टीम बाबा से पूछताछ कर रही है।

आईजीपी ने कहा कि अब तक कुल 207 लोगों को हिरासत में लिया गया है, जिनमें से 30 आपराधिक गतिविधियों में शामिल हैं। उन्होंने कहा कि 177 लोगों को एहतियातन हिरासत में लिया गया है। उन्होंने कहा कि ‘कट्टर तत्वों’ के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और ‘गुमराह और निर्दोष युवाओं’ को चेतावनी देकर छोड़ दिया जाएगा।

‘मैं आपकी मदद करूँगा, वे बोलेंगे आपके जैकेट में नाक पोंछ दी’: राहुल गाँधी ने किया क्लियर, खड़गे के कपड़े में नहीं पोछी थी नकटी; देखिए Video

बीते दिनों राहुल गाँधी की कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की पीठ पर उंगली फेरने की स्लो मो वीडियो आने के बाद सोशल मीडिया पर कई कयास लगे थे। अब राहुल गाँधी ने उसी वीडियो को लेकर मल्लिकार्जुन के सामने अपनी सफाई दी है। उन्होंने खड़गे को सीढ़ियों से उतरने में सहायता करने के बाद कहा कि अगर वो मदद भी करते हैं तो लोग कहते हैं कि नाक पोंछ दी।

ताजा वीडियो में देख सकते हैं कि सोनिया गाँधी, राहुल गाँधी, कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे संसद परिसर के दरवाजे से बाहर निकल रहे हैं। इस दौरान राहुल कॉन्ग्रेस अध्यक्ष को पहले पकड़कर सीढ़ियों से उतारते हैं और फिर कहते हैं, “अगर मैंने आपको पकड़ा तो सब कहेंगे कि मैं नाक पोंछ रहा हूँ। क्या विशुद्ध बकवास है। आपने देखा क्या? मैं तो आपकी वहाँ मदद कर रहा था। पर लोगों ने कहा कि मैं आप पर अपनी नाक पोंछ रहा था।”

बता दें कि पिछले दिनों सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आई थी। इस वीडियो को पीछे से रिकॉर्ड किया गया था। इसमें दिख रहा था कि राहुल गाँधी मल्लिकार्जुन खड़गे के पीछे चल रहे हैं और फिर अचानक वो अपना हाथ नाक के पास ले जाते हैं, बाद में उसे दोबारा उंगली को खड़गे की जैकेट में पोंछ देते हैं।

इस वीडियो को देखने के बाद लोगों ने राहुल गाँधी को लेकर कई सवाल किए थे। जगह-जगह यही दावा किया गया था कि उन्होंने नाक ही पोंछी। लोगों ने इस हरकत को घिनौना बताते हुए कहा कि ये कितना अजीब है क्या सोनिया गाँधी ने राहुल को इतनी तमीज नहीं सिखाई कि किसी की जैकेट पर नाक पोंछना गंदी आदत हैं।

‘साधना के बल पर तय की भदौरिया से लेकर गुरु तक की यात्रा’: आश्रम ने ‘करौली सरकार’ पर लगे आरोपों का दिया जवाब, कहा – यहाँ कोई झाड़-फूँक नहीं होता

कानपुर के ‘करौली सरकार’ बाबा पर मीडिया रिपोर्ट्स में कई आरोप लगाए गए हैं अब ‘लवकुश आश्रम’ की तरफ से इन आरोपों का जवाब दिया गया है। उन पर पहली पत्नी को छोड़ कर दूसरी शादी करने और कभी टेम्पो में चलने से लेकर अब 3 रेन्ज रोवर कारों के मालिक होने की बात कही जा रही है। साथ ही उन पर अकूल संपत्ति जुटाने के आरोप भी लगे हैं। ‘करौली सरकार’ का असली नाम संतोष सिंह भदौरिया बताया जा रहा है, जो मूल रूप से पवई गाँव के हैं।

‘करौली सरकार’ (डॉ संतोष सिंह भदौरिया) के जीवन बारे में कानपुर के ‘लवकुश’ आश्रम ने दी जानकारी

‘लवकुश आश्रम’ की तरफ से जारी बयान में उन्हें ‘करौली शंकर महादेव’ कह कर संबोधित करते उन्हें सनातन संस्कृति का वाहक बताया गया है और कहा गया है कि एकाएक उन पर आरोप लगाए जा रहे हैं। आश्रम प्रशासन ने बताया है कि करीब 20 वर्ष पहले विधनू थाना क्षेत्र के गाँव करौली में आश्रम स्थापित किया गया। तभी से वहाँ प्राकृतिक कृषि, गौ-पालन के साथ आयुर्वेदिक व प्राकृतिक चिकित्सा की गतिविधियाँ चल रही हैं।

बताया गया है कि प्रतिदिन हजारों लोग लाभान्वित हो रहे हैं। आश्रम ने दावा किया कि अभी तक देश भर के लाखों लोग शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ हुए हैं, इनके प्रमाण उपलब्ध हैं। साथ ही कहा कि यह सब कार्य एक जुनून की तरह से डाॅ संतोष सिंह भदौरिया जी के नेतृत्व में होता रहा है। ‘डाॅ भदौरिया’ को तंत्र विद्या और अध्यात्म का भी साधक बताते हुए आश्रम ने कहा है कि उसी आलोक में तंत्र के गुरु श्री राधारमण मिश्र जी की कृपा और आशीर्वाद उन्हें शिष्य के रूप में प्राप्त हुआ है, जिसके फलस्वरूप डाॅ भदौरिया जी को विशेष ऊर्जा प्राप्त हुई।

बकौल आश्रम, इसी ऊर्जा के स्वामी होने के कारण जनसामान्य ने उन्हें गुरु के रूप में संबोधन दिया, स्वीकारा। ‘लवकुश आश्रम’ की तरफ से कहा गया है कि आज गुरु जी रूपी यह ऊर्जा ही वह आकर्षण है, जिसके चलते लाखों लोग करौली आश्रम खींचे चले आ रहे हैं, क्योंकि आश्रम में पहुँचने मात्र से लोग राहत महसूस करने लगते हैं। उनके समक्ष आने पर बीमार से बीमार व्यक्ति स्वयं से ही ऊर्जावान महसूस करने लगता है, बीमार हो तो स्वस्थ होने लगता है, चाहे वह शारीरिक रोग हो या मानसिक रोग।

‘करौली सरकार’ के आश्रम की तरफ से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया है कि संतोष सिंह भदौरिया बचपन से जवानी तक सामान्य व्यक्ति रहे हैं, वे आक्रामक किसान नेता भी रहे हैं, राजनीतिक क्रियाकलापों में भी रहे हैं, मुकदमेबाजी में फँसे हैं, जेल भी गए हैं। लेकिन, आश्रम का ये भी कहना है कि यह उनका अतीत था, तब वे सामान्य मनुष्य के रूप में भदौरिया थे, आज असामान्य रूप से गुरु जी हैं। बकौल आश्रम, भदौरिया से लेकर गुरु जी तक की यात्रा उन्होंने साधना के बल पर की है, उनकी पुस्तक ईश्वरीय चिकित्सा, एक अनुसंधान में इस पर सब कुछ स्पष्ट लिखा गया है।

आश्रम ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया कि अभी जो लोग उनकी इस साधना के बारे में अनभिज्ञ हैं, वे उन्हें भदौरिया मानकर ही चल रहे हैं, जिनके बहुत सारे व्यक्तिगत मित्र भी रहे हैं और शत्रु भी। जबकि मध्यस्थ दर्शन के प्रतिपादक संत अग्रहार नागराज का एक तथ्य है कि कोई भी मनुष्य अपनी संकल्प शक्ति से कब कितना बदल जाएगा, इसका अनुमान भी नहीं लगाया जा सकता। दावा किया गया है कि भदौरिया इतना ही बदले हैं, लेकिन कुछ लोगों को भदौरिया जी का गुरुजी बनना नहीं पच रहा है, इसलिए यह व्यक्तिगत ईर्ष्या-द्वेष और आरोप-प्रत्यारोप हैं, जो कि पूर्वाग्रहों से ग्रसित है।

बताया गया है कि वर्तमान में प्रतिदिन हजारों पीडि़त लोग आश्रम पहुँच रहे हैं। ये भी कहा गया है कि चूँकि यहाँ जीवन और आत्मा से जुड़े मन के क्रियाकलापों का भी प्राचीन वैदिक विज्ञान के तरीके से उपचार होता है, इसलिए बड़ी संख्या में मनोरोगी भी दरबार आते हैं। चूँकि आश्रम में साधन सीमित हैं, इसलिए उन्हें संभालने की पूरी जिम्मेदारी उनके परिजनों की ही होती है। संख्या अधिक होने के कारण कुछ लोगों से ‘करौली सरकार’ मिल पाते हैं, कुछ से नहीं मिल पाते हैं।

आश्रम ने कहा कि इसी कारण हजारों में एक दो लोग दुखी हो जाते हैं, आहत या आक्रोशित भी हो जाते हैं। कोई आश्रम की व्यवस्था मनोकूल न होने के कारण नाराज हो जाता है तो कोई अपेक्षानुसार लाभ न मिलने के कारण रुष्ट हो जाता है। कोई रहस्य या चमत्कार न दिख पाने के दरबार पर प्रश्न उठाने लगता है, जबकि सभी को बार-बार स्पष्ट किया जाता है कि यहाँ कोई रहस्य या चमत्कार नहीं है, न ही कोई जादू-टोना या झाड़-फूँक होती है। ‘लवकुश आश्रम’ ने कहा कि वास्तव में जो लोग सनातन या वैदिक ज्ञान से परिचित नहीं होते हैं या आधे-अधूरे परिचित होते हैं, वे ही लोग प्रश्न उठाते हैं।

‘करौली सरकार’ पर लगे आरोपों का भी आश्रम ने दिया जवाब

नोएडा के चिकित्सक महोदय सिद्वार्थ चौधरी ने आरोप लगाया था कि आश्रम में उन्हें ‘चमत्कार’ नहीं दिखा और ये कहने पर बाबा के समर्थकों ने उनकी पिटाई की। हालाँकि, ‘लवकुश आश्रम’ ने बताया है कि उनका आचरण काफी आक्रामक व अमानवीय रहा है, फिर भी आश्रम अपनी जिम्मेदारी को स्वीकारता है, उनके हितों की कामना करता है। वहीं उनके आरोपों के संबंध में आश्रम ने कहा कि पुलिस इसकी जाँच कर रही है, जाँच में जो भी निष्कर्ष निकलेंगे, उसका स्वागत किया जाएगा।

तब उचित रूप से अपना पक्ष प्रस्तुत किए जाने की बात भी कही गई है। इसी प्रकार दूसरा आरोप एक व्यक्ति का बच्चा खो जाने का है। इस पर आश्रम प्रशासन ने कहा कि ये पहले ही स्पष्ट किया जा चुका है, कि यहाँ आने वाले हर बीमार व्यक्ति की जिम्मेदारी उसके परिजनों की है। उनकी तरफ से बताया गया कि आश्रम में साधन सीमित हैं और निःशुल्क हैं, इसलिए सभी की सुरक्षा या देखभाल के लिए कर्मचारी तैनात नहीं किए जाते हैं।

‘लवकुश आश्रम’ ने कहा कि यह मंदिर परिसर है, जिसमें हजारों भक्त आते हैं, दूसरे मंदिरों की तरह ही, इसलिए कोई व्यक्ति यह कहे कि उसका बेटा मंदिर गया था, गायब हो गया और यह मंदिर प्रशासन की जिम्मेदारी है, तो यह कहना न तर्कसंगत है, न न्यायोचित। एक पूर्व सुरक्षा कर्मचारी द्वारा भी आरोप लगाया गया है कि उसके साथ आश्रम के वर्तमान सुरक्षाकर्मियों ने मारपीट की है। आश्रम ने कहा कि इस संबंध में केवल इतना कहना है कि ये सभी सुरक्षाकर्मी साथ-साथ ड्यूटी करते रहे थे।

स्पष्टीकरण में कहा गया है कि उनका दूसरे कर्मचारी से कुछ व्यक्तिगत ईर्ष्या द्वेष हो सकता है, इसके लिए आश्रम को जिम्मेदार ठहराना न्यायोचित नहीं है। वहीं जहाँ घटनास्थल बताया गया है, उसे दूसरे गाँव के एक गेस्टहाउस का मामला करार दिया गया है। इसके लिए ‘करौली सरकार’ को जिम्मेदार ठहराए जाने को उनके आश्रम ने केवल उनकी हताशा का प्रदर्शन बताया है। आश्रम ने कहा कि लोकतंत्र में विचारों और पद्धतियों से सहमति-असहमति चलती रहती है।

आश्रम ने कहा, “एक-दो लोगों के प्रचार या दुष्प्रचार के कारण पूरी वैदिक पद्धितियों या सनातन व्यवस्था पर सवाल खड़ा करना कतई भी उचित नहीं कहा जा सकता है, क्योंकि उनके कारण बाकी के जो हजारों लोग हैं, वे लाभ से वंचित रह सकते हैं। उनकी आस्था आहत होती है। दुर्भाग्यजनक यह है कि कुछ लोग ऐसा करके नकारात्मक तरीके से स्वयं को प्रसिद्ध करना चाहते हैं, ब्लैकमेल करना चाहते हैं। उनका यह कृत्य न केवल सनातन संस्कृति के लिए घातक है, बल्कि एक तरह से हमला है।”

पंजाब में ‘जेल ब्रेक’ की आशंका: कैदियों का ब्रेनवॉश कर रहे खालिस्तानी, भीड़ जुटा कर साथियों को छुड़ाने की साजिश

फरार चल रहे अमृतपाल सिंह के गिरफ्तार समर्थकों को पंजाब के बाहर शिफ्ट किया गया है। खुफिया एजेंसियों को अजनाला जैसी घटना की पुनरावृत्ति की आशंका थी। इसी वजह से यह कदम उठाया गया है। रिपोर्टों के मुताबिक खालिस्तानी समर्थक गिरफ्तार आरोपितों को छुड़ाने के लिए जेल पर हमले कर सकते हैं।

न्यूज एजेंसी एएनआई ने खुफिया सूत्रों के हवाले से जानकारी दी है कि खुफिया एजेंसी के ऑफिसर और पंजाब पुलिस के बीच मीटिंग के दौरान संभावित हमले की आशंका जाहिर की गई। एजेंसियों ने इनपुट्स के आधार पर पंजाब पुलिस को जानकारी दी कि एनएसए के तहत गिरफ्तार वारिस पंजाब दे के सदस्यों और खालिस्तानी समर्थकों को छुड़ाने के प्रयास हो सकते हैं। ऐसे में उन्हें पंजाब के बाहर शिफ्ट कर देना चाहिए।

इसके साथ-साथ खुफिया एजेंसियों को इनपुट्स मिले हैं कि जेल में बंद खालिस्तानी समर्थक अन्य कैदियों का ब्रेन वॉश कर उन्हें आनंदपुर खालसा फौज (AKF) में शामिल करा सकते हैं। कैदियों को उकसा कर जेल ब्रेक जैसी घटनाओं को भी अंजाम दिया जा सकता है। अर्थात खुफिया एजेंसियों को जेल के अंदर व जेल के बाहर से हमले के इनपुट्स मिले हैं। जिसके आधार पर कुछ कैदियों को शिफ्ट करने का फैसला लिया गया।

खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक, खालिस्तानी समर्थक भीड़ जमा कर अजनाला जैसी घटना अंजाम देने की साजिश रच सकते हैं। या पंजाब के जेलों से ही आपराधिक गतिविधियों को अंजाम दिया जा सकता है। रिपोर्टों में दावा है कि गिरफ्तार खालिस्तानी समर्थकों पर एनएसए लगाया गया है क्योंकि वे लोग खालिस्तान के नाम पर युवाओं के बीच हिंसा और गन कल्चर को बढ़ावा दे रहे थे। एकेएफ जैसे संगठनों को तैयार कर मजबूत करने की कोशिश हो रही थी। जो देश की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन सकते थे।

एजेंसियों का दावा है कि वारिस पंजाब दे संगठन के लोगों का लिंक ‘सिख फॉर जस्टिस’ जैसे प्रतिबंधित संगठनों से है। जो राज्य में आगे भी हिंसक घटनाओं को अंजाम दे सकते हैं। एसएफजे अब खुलकर ‘वारिस पंजाब दे’ के समर्थन में आ चुका है। बता दें कि पिछले दिनों अमृतपाल के चाचा और ड्राइवर ने सरेंडर कर दिया था। सुरक्षा कारणों से अमृतपाल सिंह के चाचा और 5 अन्य खालिस्तानी समर्थकों को असम के डिब्रूगढ़ जेल शिफ्ट कर दिया गया था।

अजनाला में क्या हुआ था?

हथियारों से लैश खालिस्तान समर्थकों ने 23 फरवरी 2023 को अमृतसर स्थित अजनाला थाने पर हमला कर दिया था। हजारों की संख्या में जुटे निहंग सिखों ने तलवार और बंदूक आदि हथियारों के साथ थाने पर धावा बोल दिया था। खालिस्तान समर्थक ‘वारिस पंजाब दे’ के चीफ अमृतपाल सिंह के खिलाफ FIR और उसके करीबी लवप्रीत तूफान की गिरफ्तारी का विरोध कर रहे थे। इतना ही नहीं, इसके बाद पंजाब पुलिस को विवश होकर लवप्रीत तूफान को छोड़ना पड़ा था। जिसके बाद पुलिस की जमकर आलोचना हुई थी।

स्टेशन- सीवान, ट्रेन- बरौनी मेल, मिला- 28 किलो विस्फोट… बिहार में शराब की थी तलाश, मिल गया बारूद का डब्बा: धमाका होता तो ट्रेन सहित उड़ जाता पूरा स्टेशन

ग्वालियर-बरौनी मेल बुधवार (22 मार्च 2023) को जब बिहार के सीवान रेलवे स्टेशन पर पहुँची तो ट्रेन में शराब की तलाशी का अभियान चलाया गया। इस दौरान GRP के हाथ विस्फोटक का जखीरा लग गया। एक जनरल कोच के शौचालय के पास पड़े जिस लावारिस डब्बे में शराब होने का अंदेशा था, उसमें करीब 28 किलो विस्फोटक थे। इस विस्फोटक की ताकत आप इस बात से समझ सकते हैं कि यदि धमाका होता तो ट्रेन सहित पूरा स्टेशन ही उड़ जाता।

उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और बिहार के कई स्टेशनों से होती हुई यह ट्रेन सीवान पहुँची थी। दो नंबर प्लेटाफाॅर्म पर खड़ी थी। जाँच के दौरान जनरल कोच के शौचालय के पास जीआरपी जवान शब्बीर खान को एक बड़ा सा डब्बा मिला। इस लेकर वे जीआरपी थाने आ गए और अपने सीनियर्स को इसकी जानकारी दी। डब्बा खोलने के बाद जीआरपी अधिकारियों को इसमें विस्फोटक होने का शक हुआ। इसके बाद पटना बम निरोधक दस्ते से संपर्क किया गया।

मिली जानकारी के अनुसार एएसआई नन्हेलाल पासवान, हवलदार हरि उराँव और हेड कांस्टेबल शब्बीर खान समेत जीआरपी की एक टीम ग्वालियर-बरौनी एक्सप्रेस के डब्बों में नियमित सर्च पर थी। इस दौरान ट्रेन के एक जनरल कोच के शौचालय के पास शब्बीर खान को प्लास्टिक के डब्बे में संदिग्ध सामान रखा मिला। शब्बीर ने यात्रियों से इसके बारे में जानकारी माँगी। किसी भी यात्री की तरफ से जवाब नहीं मिला। जीआरपी के जवानों को डब्बे में शराब होने का शक हुआ और वे उसे लेकर जीआरपी थाने पहुँच गए।

विस्फोटक मिलने की सूचना के बाद बम निरोधक दस्ते की टीम सीवान पहुँची। बताया जा रहा है कि बैग के अंदर 13 अलग-अलग पैकेटों में लगभग 28 किलो विस्फोटक भरे हुए थे। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार जाँच में पता चला कि विस्फोटक इतना शक्तिशाली था कि इससे ट्रेन समेत पूरे स्टेशन को उड़ाया जा सकता था। बम निरोधक दस्ते ने विस्फोटक को जीआरपी स्टेशन से सुरक्षित स्थान पर पहुँचाया। बम निरोधक दस्ता विस्फोटक को निष्क्रिय कर आगे की जाँच कर रहा है।

जीआरपी ने भी केस दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है। पता लगाने की कोशिश हो रही है कि ट्रेन के कोच में विस्फोटक कैसे पहुँचाया गया और इसे कहाँ ले जाया जा रहा था। बता दें कि ग्वालियर-बरौनी एक्सप्रेस मध्य प्रदेश के ग्वालियर से बिहार के बेगूसराय जिले के बरौनी के तक चलती है। सीवान तक पहुँचने से पहले ट्रेन कुल 34 स्टेशनों पर ठहरती है। जीआरपी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि ट्रेन में विस्फोटक किस स्टेशन पर और किसने रखा।

कोठियाँ, लग्जरी गाड़ियाँ और अकूत संपत्ति: बसपा के पूर्व मंत्री हाजी याकूब की ₹9 करोड़ की संपत्ति जब्त, अलीगढ़ में जहीर के ठिकानों पर 150 अधिकारियों का छापा

उत्तर प्रदेश में मीट कारोबारियों पर यूपी सरकार का ऐक्शन जारी है। बसपा नेता और मीट माफिया हाजी याकूब कुरैशी की 9 करोड़ रुपए की संपत्ति को कुर्क किया गया है। इसके साथ ही 31 करोड़ की अन्य अवैध संपत्ति को भी चिह्नित किया गया है। वहीं, अलीगढ़ के मीट कारोबारी हाजी जहीर के घर आयकर विभाग का छापा तीसरे दिन भी जारी है, जहाँ से करोड़ों रुपए की संपत्ति मिलने की बात कही जा रही है।

पहले बात करते हैं हाजी याकूब की। हाजी याकूब बसपा के नेता और पूर्व मंत्री रह चुके हैं। इसके साथ ही वह मीट कारोबारी हैं। मेरठ पुलिस ने गुरुवार (23 मार्च 2023) छातरपुर में याकूब के खेतों पर कुर्की की। ये दोनों याकूब की बीवी संजीदा बेगम के नाम पर है। इन खेतों की कीमत 9 करोड़ रुपए बताई जा रही है।

जेल में बंद याकूब की 31 करोड़ 77 लाख रुपए की अन्य अवैध संपत्तियाँ भी चिह्नित की गई हैं। इन पर भी जल्द ही कार्रवाई की जाएगी। सीओ किठौर रुपाली रॉय के अनुसार, याकूब की संपत्तियों का जो ब्योरा जुटाया गया है, उनमें 26 संपत्तियाँ जमीन और इमारत के रूप में हैं। 32 वाहन हैं। इसमें 24 से ज्यादा चार पहिया लग्जरी गाड़ियाँ हैं। बाकी दो पहिया वाहन हैं।

जो 26 संपत्तियाँ जमीन और इमारत के रूप में चिह्नित की गई हैं, उनमें 7 आलीशान कोठियाँ शामिल हैं। ये कोठियाँ मेरठ में अलग-अलग जगह पर हैं।पुलिस ने याकूब का हापुड़ रोड का स्कूल, अस्पताल, मीट फैक्टरी, प्लॉट, सराय बहलीम स्थित दो मकान समेत अन्य जगहों पर अवैध संपत्ति को चिह्नित किया है।

याकूब कुरैशी की 10 गाँवों में जमीन मिली है। इन जगहों पर कुछ जगह निर्माण भी किया गया है। सराय बहलीम कोतवाली में 2 कोठियाँ संजीदा बेगम के नाम पर हैं। जाहिदपुर में एक कोठी और 6 जगह भवन मिले हैं।

याकूब और उनके बेटे इमरान एवं फिरोज के नाम पर मर्सिडीज, जैगुवार, रेंजर रोवर जैसी लग्जरी एवं महंगी गाड़ियों के साथ स्पोर्ट्स बाइकें मिली हैं। अलफहीम मीटेक्स कंपनी के नाम 23 गाड़ियाँ हैं, जिनमें इनोवा, पजेरो, बलेरो और 5 स्कॉर्पियो शामिल हैं।

हाजी याकूब कुरैशी 7 जनवरी 2023 से सोनभद्र जेल में बंद हैं। उनके बेटे इमरान और फिरोज इस वक्त जमानत हैं। याकूब कुरैशी और उनके बेटों पर अवैध ढंग से अकूत कमाई करने और संपत्ति इकट्ठा करने का आरोप है। हाजी याकूब 1989 तक ठेले पर नींबू बेचते थे। फिर गुड़ के धंधे में हाथा लगाया। प्रॉपर्टी का काम किया। बाद में बसपा में शामिल होकर मायावती सरकार में मंत्री बन गए।

हाजी मोहम्मद जहीर

उधर अलीगढ़ के रहने वाले मीट कारोबारी हाजी मोहम्मद जहीर के खिलाफ पिछले तीन दिनों से आयकर विभाग की रेड जारी है। तीसरे दिन गुरुवार (23 मार्च 2023) को जहीर के गुरुग्राम स्थित मीट फैक्ट्रियों, कोठी और संबंधियों के ठिकानों पर यह छापेमारी की कार्रवाई की गई। इसमें 150 अधिकारियों की 5 टीमें लगी हुई हैं।

इसके पहले जहीर के दिल्ली, उत्तर प्रदेश और हरियाणा के ठि‍कानों पर छापेमारी हुई। इस छापेमारी में जहीर की कंपनी का दुबई कनेक्शन सामने आया है। इसके साथ ही अवैध तौर पर और आय से अधिक संपत्ति जमा करने का मामला सामने आया है। अलीगढ़ में जहीर की पाँच मीट फैक्ट्रियाँ हैं।

यह भी कहा जा रहा है कि जहीर ने अवैध तौर पर करोड़ों रुपए मनी लॉड्र‍िंग करके दुबई में काफी प्रॉपर्टी खरीदी है। यह नकदी के बजाय मीट देकर खरीदी गई हैं। अल हमद नाम की मीट निर्यातक कम्पनी जहीर की है और इसके कई निेदेशकों का दुबई से कनेक्शन सामने आया है।

कहा जा रहा है कि छापेमारी में पुलिस को भारी मात्रा में नकदी और आभूषण मिले हैं। इनकी चर्चा हर तरफ हो रही है। बुधवार (22 मार्च 2023) को हाजी जहीर के घर पर मिले नोट को गिनने के लिए आयकर विभाग को 10 मशीनें मँगवानी पड़ी थीं। यहाँ तक दस्तावेज भी बरामद किए गए हैं।

हाजी जहीर का मीट के अलावा रीयल एस्टेट का भी कारोबार बताया जा रहा है। कहा जा रहा है कि जहीर के अलावा उसकी बीवी और बेटों के नाम पर भी कंपनियाँ हैं, जो मनी लॉन्ड्रिंग के काम में लगी हुई हैं। हाल ही में जहीर की फैक्ट्री में गैस रिसाव के चलते 50 से ज्यादा मजदूर बेहोश हो गए थे।