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‘भारत पहले से ही हिन्दू राष्ट्र, इसे बनाना नहीं है’: RSS ने समझाया ‘State’ और ‘Nation’ का अंतर, मौलाना तौकीर रज़ा ने अलापा था ‘इस्लामी मुल्क’ का राग

भारत को आधिकारिक रूप से ‘हिन्दू राष्ट्र’ घोषित किए जाने की माँग होती रही है वहीं दूसरी तरफ इस्लामी कट्टरपंथी इसे अपना मजहब के खिलाफ साजिश बताते हैं। अब ‘राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS)’ ने भी भारत को ‘हिन्दू राष्ट्र’ बनाए जाने के सवाल पर जवाब दिया है। संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले से एक पत्रकार ने सवाल पूछा कि पूरे देश में ‘हिन्दू राष्ट्र’ को लेकर बहस छिड़ी हुई है, ऐसे में इस पर RSS का क्या दृष्टिकोण है?

साथ ही जनसंख्या नियंत्रण को लेकर उनसे सवाल पूछे गए। इस पर दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि संघ ने जनसंख्या नियंत्रण नहीं, बल्कि जनसंख्या संतुलन की बात की है। उन्होंने कहा कि RSS ने ‘Demographic Imbalance’ को रोकने की बात की है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में प्रस्ताव भी पारित किए जा चुके हैं और संगठन इस पर कायम है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट और चुनाव आयोग ने भी चिंता जताई है।

उन्होंने याद दिलाया कि इस पर महात्मा गाँधी ने भी कहा था। बकौल दत्तात्रेय होसबाले, हिंदुस्तान में जनसंख्या असंतुलन को लेकर सैकड़ों लोग चिंता जता चुके हैं, जिनमें विशेषज्ञों से लेकर अर्थशास्त्री तक शामिल हैं। उन्होंने कहा कि संघ ने कोई नई बात नहीं कह दी है। उन्होंने पूर्व राज्यपाल राजेश्वर द्वारा इस पर चिंता जताए जाने का जिक्र करते हुए कहा कि वो तो संघ से नहीं जुड़े थे। उन्होंने जनसंख्या अंसतुलन को देश के विकास के लिए खतरनाक करार दिया।

उन्होंने कहा कि इन्हीं चीजों को विस्तार से फिर बताने की ज़रूरत नहीं है। वहीं उन्होंने ‘हिन्दू राष्ट्र’ को लेकर कहा कि इस पर भी सब काफी कुछ कह चुके हैं। उन्होंने कहा कि ये एक भौगोलिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक कॉन्सेप्ट है। उन्होंने कहा कि पिछले 100 वर्षों से हम कह रहे हैं कि भारत ‘हिन्दू राष्ट्र’ है ही, इसे बनाना नहीं है। उन्होंने ‘State’ और ‘Nation’ के बीच का फर्क भी समझाया। उन्होंने कहा कि ‘राष्ट्र’ सांस्कृतिक होता है और इसे आर्यन, इंडिक, हिन्दू, सनातन कुछ भी कहा जा सकता है।

याद दिला दें कि हाल ही में मौलाना तौकीर रजा ने इस पर भड़काऊ बयानबाजी की थी। मौलाना ने कहा था कि उनके नौजवान खड़े हो जाएँ और ऐलान करें कि मुसलमान देश चाहिए। मुरादाबाद में उनके बयानों को लेकर FIR भी दर्ज हुई है। रज़ा ने उस दिन यह भी कहा था कि अगर हिन्दू राष्ट्र की माँग जायज है तो खालिस्तान की भी माँग सही है। उन्होंने पूछा था कि मुस्लिम भी अपना मुल्क माँगने लग जाएँ तो? कइयों ने उन्हें जवाब दिया था कि इस्लाम के नाम पर ही पाकिस्तान दिया गया था, और आज बांग्लादेश भी है।

पाकिस्तान में गृह युद्ध वाले हालात: पुलिस और इमरान खान समर्थकों में भिड़ंत-गोलीबारी, बोले पूर्व PM- मेरा अपहरण और हत्या करने की मंशा

पाकिस्तान के लाहौर के ज़मान पार्क में स्थित मुल्क के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान का घर फ़िलहाल पुलिस और PTI समर्थकों के बीच झड़प व हिंसा का अड्डा बना हुआ है। इमरान खान को गिरफ्तार करने के लिए सशस्त्र बलों को भेजा गया है, लेकिन उनके समर्थक बाहर खड़े हैं और पुलिस को भीतर नहीं घुसने दे रहे। इमरान खान खुद कह चुके हैं कि उनके आदमी अब उनकी भी नहीं सुनेंगे। उन्होंने न्यायपालिका से अब उम्मीद जताई है।

साथ ही उन्होंने पाकिस्तान की सरकार से भी लोगों के हित में फैसला लेने के लिए कहा। लगातार दूसरे दिन PTI कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच झड़प चल रही है। बख्तरबंद गाड़ियों को इमरान खान के आवास की तरफ कूच कराया गया, ताकि उन्हें गिरफ्तार किया जा सके। इमरान खान ने डर जताया है कि उनकी गिरफ़्तारी के नाटक के पीछे असली मंशा ये है कि उनका अपहरण कर के उनकी हत्या करा दी जाए। पुलिस द्वारा गोलीबारी के भी वीडियोज सामने आए हैं।

इमरान खान की पार्टी PTI ने ही वीडियो जारी कर दावा किया है कि उनके घर के बाहर पुलिस वाले गोलीबारी कर रहे हैं। इस्लामाबाद हाईकोर्ट में गिरफ़्तारी के आदेश के खिलाफ सुनवाई भी होनी है। पंजाब प्रांत की पुलिस का कहना है कि उसके 54 जवान घायल हुए हैं। इमरान खान ने पुछा कि उनका गुनाह क्या है? साथ ही उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में इस तरह किसी राजनेता के घर पर हमला नहीं देखा गया। उन्होंने कहा कि वो जेल जाना चाहते हैं, लेकिन उनके समर्थक उन्हें रोक रहे हैं क्योंकि उसके बाद उनकी पार्टी के नेताओं को प्रताड़ित किया जाएगा।

इमरान खान के समर्थकों ने लाहौर में एक सरकारी पानी टंकी को भी आग के हवाले कर दिया। कई गाड़ियों को भी फूँक दिया गया। पुलिस का कहना है कि उस पर पत्थरबाजी की जा रही है। सुरक्षा कारणों से इमरान खान अदालत की कई सुनवाइयों में नहीं पहुँचे थे। इमरान खान के घर की तरफ आँसू गैस के गोले भी छोड़े जा रहे हैं। इमरान खान की पार्टी के नेताओं का कहना है कि उनके सैकड़ों समर्थन घायल हुए हैं। इमरान खान पर आतंकवाद की धाराएँ भी लगाई गई हैं।

केरल में बीजेपी के 2 कार्यकर्ताओं पर हथियारों से हमला, बचाने दौड़ी माँ से भी मारपीट

वामपंथी शासन वाले केरल के पलक्कड़ में भाजपा के 2 कार्यकर्ताओं पर हमला होने की खबर है। हमले में दिनेश और विष्णु नाम के 2 भाजपा कार्यकर्ता घायल हो गए। हमले के दौरान विष्णु की माँ अपने बेटे को बचाने के लिए दौड़ी थीं। हमलावरों ने उन्हें भी मार कर घायल कर दिया। घटना मंगलवार (14 मार्च 2023) की है। तीनों घायलों का अस्पताल में इलाज चल रहा है। पुलिस ने केस दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है। अभी तक किसी हमलावर की गिरफ्तारी नहीं हुई है।

मामले की FIR बुधवार (15 मई 2023) को दर्ज हुई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना पलक्कड़ के थानाक्षेत्र अलथुर की है। इस हमले में विष्णु और दिनेश के हाथों पर चोटें आईं हैं। हमले के शिकार तीनों पीड़ितों की हालत स्थिर बताई जा रही है। इस मामले में अभी विस्तृत जानकारी की प्रतीक्षा है। जानकारी आने पर खबर को अपडेट किया जाएगा।

पहले भी भाजपा व RSS सदस्य रहे हैं निशाना

केरल में भाजपा और संघ के कार्यकर्ताओं को निशाना बनाने की ये पहली घटना नहीं है। पहले भी कई मौकों पर हिंदूवादियों पर घात लगा कर हमला किया जा चुका है। इन हमलों में कई की जान भी जा चुकी है। नवम्बर 2021 में 26 साल के युवा RSS कार्यकर्ता संजीत की हत्या उनकी पत्नी के आगे ही कर दी गई थी। घटनास्थल पलक्कड़ का इल्लापुल्ली था।

इसके अलावा 16-17 फरवरी 2022 की रात लगभग 12.30 पर बीजेपी कार्यकर्ता सरथ कुमारपुरम को चाकुओं से गोद दिया गया था। सरथ कुमारपुरम के करीब स्थित वरयंकोडे के रहने वाले थे। एक अन्य मामले में 26 सितम्बर 2022 से लापता भाजपा कार्यकर्ता बिंदु कुमार का शव बरामद हुआ था। यह घटना केरल के कोट्टयम जिले के चंगनसेरी क्षेत्र की थी।

नौकरी के बदले जमीन घोटाला: दिल्ली की कोर्ट ने लालू, राबड़ी और मीसा भारती को दी जमानत, पहली बार पत्नी और बेटी के साथ पेश हुए थे राजद सुप्रीमो

नौकरी के बदले जमीन घोटाले (Land For Job Scam) में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राजद सुप्रीमो लालू यादव (Lalu Yadav) को दिल्ली की एक अदालत ने जमानत दे दी है। उनकी पत्नी राबड़ी देवी (Rabri Devi) और सांसद बेटी मीसा भारती (Misa Bharti) सहित मामले के अन्य आरोपितों को भी जमानत मिल गई है। कोर्ट ने 50 हजार रुपए के मुचलके पर लालू और उनके परिवार के सदस्यों को जमानत दी है।

15 मार्च को पहली बार इस मामले में लालू यादव अपनी पत्नी और बेटी के साथ दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट के सामने पेश हुए। अदालत ने 27 फरवरी 2023 को को मामले के सभी 16 आरोपितों को पेश होने के लिए समन जारी किया था। सुनवाई के दौरान सीबीआई ने लालू और उनके परिवार के सदस्यों को जमानत का विरोध नहीं किया। व्हीलचेयर पर लालू यादव पेशी के लिए आए थे।

पेशी से पहले इस मामले में सीबीआई ने लालू और राबड़ी देवी से पूछताछ भी की थी। लालू से उनकी बेटी मीसा भारती के आवास पर दिल्ली में तो राबड़ी देवी से पटना में पूछताछ हुई थी। पूछताछ के बाद लालू की दूसरी बेटी रोहिणी आचार्य ने अपने पिता को परेशान करने का आरोप लगाते हुए दिल्ली की कुर्सी हिला देने की धमकी दी थी। इस मामले में सीबीआई ने लालू यादव के बेटे और बिहार के डिप्टी CM तेजस्वी यादव को भी 4 मार्च और 11 मई को पूछताछ के लिए बुलाया था। हालाँकि वे पूछताछ के लिए हाजिर नहीं हुए थे।

पिछले दिनों सीबीआई ने इस केस में चार्जशीट दाखिल की थी। चार्जशीट में बताया था कि रेलवे के चतुर्थ श्रेणी में हुई भर्ती के लिए भारतीय रेलवे द्वारा बनाई गई नियमावली का उललंघन किया गया था। ईडी ने भी इस मामले में पिछले दिनों दिल्ली, नोएडा, पटना और मुंबई में 15 से अधिक ठिकानों पर छापेमारी की थी। एजेंसी की रडार पर लालू यादव के बच्चे और करीबी थे।

क्या है नौकरी के बदले जमीन घोटाला

यह मामला करीब 14 साल पुराना है। तब लालू यादव केंद्र सरकार में रेल मंत्री हुआ करते थे। आरोप है कि कई लोगों को रेलवे में नौकरी के बदले उनकी जमीन लिखवा ली गई थी। इस घोटाले में 18 मई 2022 को CBI ने FIR दर्ज की थी। राबड़ी, मीसा भारती सहित कुल 16 लोगों को आरोपित किया है। अन्य आरोपितों के नाम राज कुमार सिंह, मिथलेश कुमार, अजय कुमार, संजय कुमार, धर्मेंद्र कुमार, विजय कुमार, अभिषेक कुमार, रविंद्र राय, किरण देवी, अखिलेश्वर सिंह, रामाशीष सिंह, कमल दीप मनरई और सौम्या राघवन हैं। सौम्या सेंट्रल रेलवे की तत्कालीन जीएम और कमल दीप सेंट्रल रेलवे के तत्कालीन सीपीओ थे। सीबीआई ने आरोप पत्र में बताया है कि रेलवे में नौकरी देने के बदले लोगों से जमीन रिश्वत के रूप में ली गई थी। इन जमीनों का अधिग्रहण सर्किल और मार्केट रेट से काफी कम कीमत पर किया गया था। ये जमीन राबड़ी देवी और उनकी बेटियों मीसा भारती एवं हेमा यादव के नाम पर ट्रांसफर किया गया था।

अमेठी के सरकारी स्कूल में प्रिंसिपल अनीस अहमद ने किया रेप: पानी भरने आई थी पीड़िता, केस दर्ज होने के बाद फरार

उत्तर प्रदेश में अमेठी जिले के एक सरकारी स्कूल के अंदर रेप किए जाने का मामला सामने आया है। पीड़िता स्कूल में लगे हैंडपम्प पर पानी भरने गई थी। आरोपित स्कूल का प्रिंसिपल अनीस अहमद है। अनीस पर पीड़िता के पूरे परिवार को मार डालने की धमकी का भी आरोप है। पुलिस ने इस मामले में FIR दर्ज कर ली है। केस दर्ज होने के बाद से अनीस फरार चल रहा है। घटना सोमवार (13 मार्च 2023) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना अमेठी के मोहनगंज थाना क्षेत्र की है। आरोपित अनीस अहमद यहाँ के एक कम्पोजिट स्कूल में प्रिंसिपल है। पीड़िता स्कूल के पास के गाँव में रहती है। उसने बताया है कि गाँव के नल पर काफी भीड़ होने के कारण वह सोमवार की शाम लगभग 4 बजे स्कूल में लगे हैंडपंप पर पानी भरने गई थी। उस समय अनीस अकेले ही स्कूल में था और अपनी केबिन का दरवाजा बंद करके बैठा था।

शिकायत में बताया गया है कि लड़की बाल्टी में पानी भर स्कूल से लौट रही थी कि अनीस ने उसे पानी लेने के बहाने अंदर अपनी केबिन में बुलाया। लड़की केबिन में पानी लेकर गई। अनीस ने पहले तो कुछ देर उससे बातें की और बाद में बदनीयती से उसे बेंच पर पटक दिया। लड़की ने शोर मचाना चाहा तो अनीस ने उसके मुँह को कपड़े से बाँध दिया और रेप किया। बाद में पीड़िता को उसके घर भेजते हुए किसी से बताने पर परिवार सहित मार डालने की भी धमकी दी।

इस मामले में पुलिस ने आरोपित प्रिंसिपल अनीस के खिलाफ IPC की धारा 376 और 506 के तहत FIR दर्ज कर ली है। केस दर्ज होने के बाद अनीस फरार हो गया है। पुलिस उसकी तलाश कर रही है। वहीं शिक्षा विभाग ने प्रिंसिपल अनीस को सस्पेंड कर दिया है।

आजमगढ़ में मदरसों के नाम पर खा गए सरकारी पैसे, 313 की जाँच-कागजों पर चलते मिले 219: अल्पसंख्यक विभाग के 7 अफसरों पर केस दर्ज

उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले में मदरसों के नाम पर बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। यहाँ बिना मानकों चल रहे 313 मदरसों की जाँच की गई थी। इनमें से 219 कागजों पर चल रहे थे। मामले की जाँच कर रही SIT ने 7 लोगों पर केस दर्ज करवाया है। इनमें अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के रजिस्ट्रार, तीन जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी, लिपिक और वक्फ निरीक्षक शामिल हैं। इन सभी पर धोखाधड़ी, गबन, सबूत मिटाने और आपराधिक साजिश का आरोप है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उत्तर प्रदेश सरकार ने साल 2017 में मदरसा पोर्टल प्रणाली लागू की थी। इस पोर्टल पर सभी मदरसों को अपनी जानकारी भेज कर खुद को सत्यापित करवाना था। जानकारी फीड होने के बाद जिले के अधिकारियों ने जाँच में 313 मदरसों को बिना मानकों के चलते पाया। साल 2018 में आजमगढ़ के जिलाधिकारी ने अपनी जाँच में पाया कि इन मदरसों को मानदेय भी मिल रहा था। इसके बाद तत्कालीन DM ने मदरसों को मान्यता देने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की सिफारिश शासन से की थी।

जिलाधिकारी की रिपोर्ट पर दिसंबर 2020 में SIT का गठन हुआ। जाँच दल ने 19 दिसंबर 2022 को अपनी रिपोर्ट शासन को सौंप दी। रिपोर्ट में जिलाधिकारी के आरोपों को सही पाया गया था। तब से ही ऐसे मदरसों को मान्यता देने और उन्हें चलाने वाले तत्कालीन अधिकारियों पर कार्रवाई तय मानी जा रही थी। जिन अधिकारियों पर FIR दर्ज हुई है वे हैं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के तत्कालीन रजिस्ट्रार जावेद असलम, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी लालमन, अकील अहमद और प्रभात कुमार, लिपिक सरफराज, वक्फ निरीक्षक मुन्नर राम, लिपिक वक्फ ओमप्रकाश पांडेय। अल्पसंख्यक कल्याण विभाग आजमगढ़ में तैनात वरिष्ठ लिपिक मनोज राय के मुताबिक आरोपितों पर केस लखनऊ में दर्ज हुआ है।

बताया जा रहा है कि इन 7 आरोपित अधिकारियों में से एक अधिकारी रिटायर हो चुके हैं, जबकि एक अन्य की मृत्यु हो चुकी है। ये अधिकारी अलग-अलग समय में आजमगढ़ जिले में पोस्टेड रहे थे। इसमें से कुछ की अभी भी तैनाती अलग-अलग जिलों में है। 313 मदरसों में 39 ऐसे भी पाए गए जो सरकार द्वारा लागू मदरसा आधुनिकीकरण योजना का भी लाभ ले रहे थे। अब अल्पसंख्यक कल्याण विभाग इन 219 मदरसों के संचालकों पर भी FIR दर्ज करवाने जा रहा है। आजमगढ़ की जिला अल्पसंख्यक कल्याण विभाग अधिकारी वर्षा अग्रवाल ने इसकी पुष्टि की है।

मस्जिदों से माइक हटाएँगे, तोड़ेंगे वे मस्जिदें जो मंदिरों पर बने: दैनिक भास्कर को दिए इंटरव्यू में बोले BJP नेता, पूछा था- क्या अल्लाह बहरा है

कर्नाटक में इस साल विधानसभा चुनाव होने हैं। बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री केएस ईश्वरप्पा (KS Eshwarappa) ने कहा है कि राज्य में फिर से पार्टी की सरकार बनने पर मस्जिदों से माइक हटाए जाएँगे। साथ ही उन्होंने उन मस्जिदों को तोड़ने की बात भी कही है जो हिंदू मंदिरों को तोड़कर बनाए गए हैं।

ईश्वरप्पा ने ये बातें दैनिक भास्कर को दिए एक इंटरव्यू में कही है। वे इस समय ‘अल्लाह बहरा है’ वाले बयान को लेकर विवादों में हैं। दरअसल मंगलुरु में 13 मार्च 2023 को एक जनसभा को संबोधित करते हुए बीजेपी नेता ने पूछा था कि क्या अजान के दौरान लाउडस्पीकर का इस्तेमाल करने पर ही अल्लाह नमाज सुनेगा? उन्होंने कहा था, “मंदिरों में भजन होता है। हम भी धार्मिक हैं, लेकिन लाउडस्पीकर का इस्तेमाल नहीं करते हैं। यदि आपको लाउडस्पीकर से नमाज अदा करनी है तो इसका मतलब है कि अल्लाह बहरा है।”

बाद में ईश्वरप्पा ने ये भी कहा था कि वे मुस्लिमों के विरोधी नहीं हैं। उनका बयान राष्ट्रद्रोहियों के खिलाफ है। साथ ही एसडीपीआई और कॉन्ग्रेस पर सांप्रदायिक भावनाओं को भड़काने का आरोप लगाया था। उल्लेखनीय है कि कर्नाटक में बीजेपी की विजय संकल्प यात्रा चल रही है। इसी यात्रा के तहत पार्टी नेता पूरा राज्य में घूम रहे हैं। ईश्वरप्पा का ये बयान भी इसी यात्रा के दौरान आया था।

‘क्या अल्लाह बहरा है’ बयान से जुड़े विवाद को लेकर दैनिक भास्कर के सवाल का जवाब देते हुए बीजेपी नेता ने कहा है कि वे विजय संकल्प यात्रा के तहत एक रथ यात्रा की अगुआई कर रहे हैं। मंगलुरु में जैसे ही उन्होंने भाषण देना शुरू किया अजान शुरू हो गई। इसके कारण जनसभा में पैदा हुए व्यवधान को लेकर उन्होंने यह बात कही थी। उन्होंने कहा कि माइक पर अजान को लेकर सुप्रीम कोर्ट भी कहा चुका है।

उन्होंने कहा, “मैंने जो बोला है, वो सब अचानक नहीं हुआ। आने वाले दिनों में आप देखेंगे कि हम क्या एक्शन ले सकते हैं। मैं केंद्र और राज्य सरकार से आग्रह करूँगा कि इस पर तुरंत एक्शन लिया जाए। लोगों को परेशानी नहीं होनी चाहिए।” इंटरव्यू के दौरान बीजेपी नेता पर जानबूझकर ऐसे बयान देने के आरोप लगाते हुए पूछा गया कि उन्होंने 36 हजार मंदिरों को तोड़कर उन पर मस्जिद बनाने की बात कही थी। इसका आधार क्या है?

जवाब में ईश्वरप्पा ने कहा, “मैं नई मस्जिदों को तोड़ने की बात नहीं कर रहा हूँ। मैंने कहा कि जहाँ हिंदुओं के मंदिर तोड़कर मस्जिदें बनाई गई हैं, वहाँ दोबारा मंदिर बनाएँगे। मैंने एक आर्टिकल में पढ़ा था कि 36 हजार मंदिरों को तोड़कर मस्जिदें बनाई गईं। असली नंबर क्या है, मुझे मालूम नहीं। अभी मैंने इस बारे में कुछ किया नहीं। देखते हैं आगे क्या किया जा सकता है। अभी जो मेरे मन में था, वो मैंने कहा।”

10000 कर्मचारियों की छँटनी करेगा मेटा, इससे पहले 11000 की कर दी थी छुट्टी: 5000 नई भर्तियों पर भी रोक

फेसबुक की पेरेंट कंपनी मेटा 10 हजार कर्मियों की छँटनी की तैयारी कर रही है। कंपनी की तरफ से इसकी घोषणा कर दी गई है। जानकारी के मुताबिक होने जा रही 5 हजार नई भर्तियों को भी रद्द किया जा सकता है। चार महीने के भीतर कंपनी दूसरी बार हजारों लोगों को बाहर का रास्ता दिखा रही है।

मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने कर्मचारियों को दिए पैगाम में कहा है कि हम अपनी कंपनी में 10 हजार कर्मचारियों की कटौती और 5 हजार अतिरिक्त भर्तियों को बंद करने जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि कोरोना महामारी के बाद से मंदी झेल रही कंपनी मेटा फ्यूचरिस्टिक मेटावर्स पर अरबों डॉलर खर्च कर रहा है। कंपनी पर ब्याज दरों का दबाव है इसलिए यह निर्णय लिया गया है।

ज़ी न्यूज ने द वर्ज के रिपोर्ट के हवाले से दावा किया है कि मेटा अब फेसबुक और इंस्टाग्राम पर डिजिटल कलेक्टिबल्स (Digital collectibles) के साथ अपना काम बंद कर रहा है। दावा है कि मेटा इंस्टाग्राम पर एनएफटी (Non Fungible Token) बनाने और बेचने की टेस्टिंग को भी रोक देगा। यूजर्स की फेसबुक और इंस्टाग्राम पर एनएफटी शेयर करने की क्षमता भी बंद कर दी जाएगी।

बता दें कि नवंबर 2022 में भी मेटा ने लगभग 11 हजार लोगों को नौकरी से निकाल दिया था। यह कंपनी के इतिहास की सबसे बड़ी छँटनी थी। चार महीनों में ही कंपनी दूसरी बड़ी छँटनी करने जा रही है। वैसे फेसबुक अकेली कंपनी नहीं है जिसने कर्मचारियों की छँटनी की है। बड़ी पैमाने पर नौकरी से निकालने में गोल्डमैन सैक्स और मॉर्गन स्टेनली जैसे वॉल स्ट्रीट बैंकों से लेकर अमेजन और माइक्रोसॉफ्ट जैसी बड़ी टेक कंपनियाँ भी शामिल हैं।

कैम्प लगा कर हथियारों की ट्रेनिंग दे रहे थे आसिफ-सादिक, भारत को इस्लामी मुल्क बनाने के लिए जुटा रहे थे धन: PFI मामले में NIA की पहली चार्जशीट

‘केंद्रीय जाँच एजेंसी एनआईए (NIA)’ ने प्रतिबंधित संगठन पीएफआई (PFI) के 2 सदस्यों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी है। राजस्थान की अदालत में मोहम्मद आसिफ और सादिक सर्राफ के खिलाफ यह चार्जशीट दायर की गई है। बताया जा रहा है कि केंद्रीय जाँच एजेंसी ने सितंबर 2022 में दोनों आरोपितों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया था।

आरोप पत्र (charge sheet) के अनुसार मोहम्मद आसिफ और सादिक सर्राफ पीएफआई के लिए नए सदस्यों की भर्ती के साथ-साथ नौजवानों का ब्रेनवॉश कर उन्हें कट्टर बनाने का काम कर रहे थे। मोहम्मद आशिफ कोटा का जबकि सादिक बाराँ का रहने वाला है। चार्जशीट में बताया गया है कि दोनों मुस्लिम नौजवानों को इस्लाम खतरे में होने का डर भर कर उन्हें जिहाद (धार्मिक लड़ाई) के लिए उकसा रहे थे।

चार्जशीट के मुताबिक, दोनों आरोपित भर्ती किए गए नौजवानों को कैंप लगाकर हथियार और बम चलाने की ट्रेनिंग भी दे रहे थे। इसके अलावा दोनों की जिम्मेदारी धन जुटाना और आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए नौजवानों को उकसाना था। दोनों आरोपितों की कोशिश हिंदुओं और मुस्लिमों के बीच भावनाओं को भड़काकर दुश्मनी पैदा कर दंगे कराने की थी। दोनों का उद्देश्य साल 2047 तक भारत में इस्लाम का शासन स्थापित करना था। पीएफआई के मामले में NIA का यह पहला आरोप पत्र है।

बता दें कि एनआईए प्रतिबंधित संस्था पीएफआई के खिलाफ कई मामलों में जाँच कर रही है। कुछ दिन पहले ही पीएफआई के हवाला नेटवर्क का खुलासा करते हुए एनआईए ने पाँच लोगों को गिरफ्तार भी किया था। देश में सीएए विरोधी प्रदर्शनों में इस संगठन पर हिंसा भड़काने के आरोप लगे थे। पीएफआई को स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (SIMI) का ही नया रूप बताया जाता है।

दूल्हा-दुल्हन पक्ष के लोगों ने मिल कर मौलवी साहब को ही लाठी-डंडों से पीटा: DJ के कारण निकाह पढ़ाने से किया था इनकार, परिजन भी अस्पताल में

बिजनौर में एक ऐसा मामला सामने आया है, जहाँ दूल्हा और दुल्हन पक्ष वालों ने मिल कर निकाह पढ़ाने आए मौलवी को ही पीट दिया। असल में मौलवी ने निकाह में DJ बजाए जाने पर आपत्ति जताते हुए निकाह पढ़ाने से इनकार कर दिया था। इस पर सबसे पहले दुल्हन पक्ष वाले भड़क गए और उस पर धावा बोल दिया। न सिर्फ मौलवी को लाठी-डंडों से जम कर पीटा गया, बल्कि उसके परिवार वालों को भी मार-मार कर अधमरा कर दिया है।

मारपीट में महिलाओं सहित कई लोग जख्मी हुए हैं। CHC अस्पताल में सभी घायलों का इलाज चल रहा है। एक व्यक्ति की हालत नाजुक है, ऐसे में उसका इलाज जिला अस्पताल में चल रहा है। पीड़ित मौलवी ने परिजनों ने थाने में शिकायत भी दर्ज कराई है। उक्त मौलवी बास्टा क्षेत्र का रहने वाला है। निकाह समारोह में DJ बजाए जाने से वो भड़क गया था। लगभग एक घंटे तक उससे दूल्हा-दुल्हन पक्ष के लोग मिन्नतें करते रहे थे।

इसके बावजूद निकाह पढ़ाने से इनकार करने के बाद वो वहाँ से चला गया था। इसके बाद दूसरा मौलवी बुलाया गया। लेकिन, इस मौलवी ने उसके भी कान भर दिए और वो भी भाग गया। निकाह को लेकर बरात भी 5 घंटे देर हुई, जिससे लोगों का गुस्सा बढ़ा। किसी तरह एक तीसरे मौलवी को लाया गया, जिसने निकाह पढ़ाया। इसके बाद दुल्हन पक्ष वालों ने मौलवी के घर पर हमला कर दिया। बताया जाता है कि दूल्हे की तरफ के कुछ लोग भी इसमें शामिल थे।

बताया जा रहा है कि पूरे प्रकरण में जम कर लाठी-डंडे चले। मौलवी के परिवार की कई महिलाएँ जख्मी हुई हैं। पीड़ित मौलवी ने कहा कि उसने निकाह में इस्लामी रीति-रिवाज और ईमान का पालन करने की सलाह दी थी और DJ बजाने से मना किया था। हालाँकि, उसने दूसरे मौलवी के कान भरने की बात से इनकार किया है। उसने बताया कि मौलवी ने बताया कि ये लोग उसके घर पहुँच गए और हमला किया। पुलिस ने बताया कि रिपोर्ट दर्ज कर विधि अनुसार कार्रवाई की जा रही है।