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सिलिकन वैली के बाद अमेरिका के एक और बैंक में लगा ताला: राष्ट्रपति बायडेन को जारी करना पड़ा बयान, 2008 की मंदी में आए थे ऐसे बुरे हालात

अमेरिका के बैंकिंग सेक्टर में बड़ी उथल-पुथल देखने को मिल रही है। सिलिकॉन वैली बैंक बंद होने के बाद अब एक और अमेरिकी बैंक में ताला लग गया। बंद होने वाला नया बैंक सिग्नेचर बैंक (Signature Bank है। फिलहाल इस बैंक को अस्थायी रूप से बंद किया गया है। लेकिन यह बैंक कब खुलेगा और कभी खुलेगा भी या नहीं इस बारे में कुछ भी कह पाना संभव नहीं है।

न्यूयॉर्क के वित्तीय सेवा विभाग के अनुसार सिग्नेचर बैंक का नियंत्रण अब फेडरल डिपॉजिट इंश्योरेंस कॉरपोरेशन (FDIC) के पास। इस बैंक के पास साल 2022 के अंत में 110.36 बिलियन डॉलर की संपत्ति थी। वहीं, बैंक के खातों में 88.59 डॉलर जमा थे। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग और अन्य बैंक नियामकों ने एक संयुक्त बयान में कहा है कि सिग्नेचर बैंक और सिलिकॉन वैली बैंक के सभी खाताधारकों को उनके पैसे का भुगतान किया जाएगा। करदाताओं (टैक्स देने वालों) को किसी प्रकार का नुकसान नहीं उठाना पड़ेगा।

बैंकिंग सेक्टर में आ रही भारी गिरावट के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति जो बायडेन का बयान भी सामने आया है। बायडेन ने कहा है कि बैंकों के डूबने के लिए जो लोग भी जिम्मेदार हैं हैं पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने सिलिकॉन वैली और सिग्नेचर बैंक के खाताधारकों को कहा है कि उनके पैसे सुरक्षित हैं। बाइडेन ने यह भी कहा है कि उन्होंने सेक्रेटरी येलेन, नेशनल इकोनॉमिक काउंसिल डायरेक्टर बैंकिंग रेगुलेटर के साथ बैठक की है। इस बैठक में उन्होंने सिलिकॉन वैली बैंक और सिग्नेचर बैंक संकट को दूर करने का निर्देश दिया है।

बता दें कि सिलिकॉन वैली बैंक के बाद सिग्नेचर बैंक का बंद होना अमेरिका के बैकिंग सेक्टर के इतिहास में तीसरी बड़ी असफलता है। इससे पहले साल 2008 में आई आर्थिक मंदी के बाद वाशिंगटन म्यूचुअल बैंक को बंद करना पड़ा था। गौरतलब है कि इससे पहले शुक्रवार (10 मार्च 2023) अमेरिकी रेगुलेटर्स ने देश के सबसे बड़े बैंकों में शुमार सिलिकॉन वैली बैंक (Silicon Valley Bank) को बंद करने के आदेश दे दिए थे। बीते महीने ही बैंक को फोर्ब्स पत्रिका द्वारा अमेरिका के सर्वश्रेष्ठ बैंको की सूची में स्थान दिया गया था।

कैलिफोर्निया के डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेंशियल प्रोटेक्शन और इनोवेशन द्वारा बैंक को बंद करने के आदेश के साथ ही फेडरल डिपॉजिट इंश्योरेंस कॉरपोरेशन (FDIC) को बैंक का रिसीवर नियुक्त किया गया है। बैंक के ग्राहकों के पैसों की सुरक्षा भी FDIC ही संभालेगी।

‘बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं को चुकानी होगी बड़ी रकम’: मीडिया में चल रही ख़बरों की ये है सच्चाई

सोशल मीडिया पर आए दिन नए-नए दावे होते रहते हैं। इन दावों की मीडिया द्वारा भी हवा दी जाती है। जिससे ये दावे अफवाह का रूप ले लेते हैं। ऐसा ही एक दावा वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर को लेकर किया जा रहा है। वायरल दावे में कहा जा रहा है कि अब मंदिर में भगवान विश्वनाथ के स्पर्श दर्शन के लिए श्रद्धालुओं को शुल्क देना पड़ेगा। यहाँ हम आपको बताएँगे कि इस दावे की असलियत क्या है।

दरअसल, सोशल मीडिया से लेकर मीडिया संस्थानों द्वारा काशी विश्वनाथ धाम में स्पर्श दर्शन को लेकर कई तरह के दावे किए जा रहे हैं। ‘जी उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड’ ने अपनी रिपोर्ट की हेडलाइन में कहा है, “काशी विश्वनाथ मंदिर में स्पर्श दर्शन के लिए चुकानी होगी बड़ी रकम, VIP सुविधा की जगह हर श्रद्धालु को मिलेगा मौका”।

(फोटो साभार: Zee Up-Uk का स्क्रीनशॉट)

इसी तरह, ‘दैनिक जागरण’ की रिपोर्ट की हेडलाइन है, “काशी विश्वनाथ मंदिर में बाबा के स्पर्श दर्शन का लगेगा शुल्क, न्यास परिषद ने दी हरी झंडी”।

(फोटो साभार: दैनिक जागरण की रिपोर्ट का स्क्रीनशॉट)

‘भारत समाचार’ ने भी ट्विटर अकाउंट पर 500-1000 रुपए शुल्क लगने का दावा किया है। साथ ही कहा है कि शुल्क देने के बाद ही गर्भ गृह में भक्तों को प्रवेश मिलेगा।

(फोटो साभार: भारत समाचार क ट्विटर अकाउंट)

‘UP Tak’ ने भी ट्विटर पर कहा है, “काशी विश्वनाथ बाबा के स्पर्श दर्शन कर के के लिए आपको जल्द देना पड़ सकता है शुल्क। भक्तों से ₹500-₹1000 ले सकता है मंदिर प्रशासन काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास परिषद की तरफ से भी इस प्रस्ताव को हरी झंडी मिल चुकी है।”

उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य और समाजवादी पार्टी नेता आशुतोष मिश्रा ने भी इसको लेकर ट्वीट किया। उन्होंने कहा, “भाजपा सरकार ने पहले काशी विश्वनाथ मन्दिर में ‘आरती शुल्क’ लगाकर आम-जनमानस को आरती से दूर किया। अब ‘स्पर्श शुल्क’ लगाकर गरीब व वंचितवर्ग को दर्शन से दूर कर रही है। हम इस भाजपाई षड्यंत्र को निरंतर बेनकाब करते रहेंगे।”

(फोटो साभार: आशुतोष मिश्रा का ट्विटर अकाउंट)

वंदना कालरा नामक यूजर ने एक अखबार की कटिंग शेयर करते हुए लिखा था, “श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में बाबा के स्पर्श दर्शन का लगेगा शुल्क! क्या जब सब कुछ खत्म हो जाएगा तभी सरकार और देश की जनता मानेगी?”

(फोटो साभार: वंदना कालरा का ट्विटर अकाउंट)

इस वायरल दावे की जाँच करते हुए हमें वाराणसी कमिश्नर कौशल राज शर्मा का एक बयान मिला। इस बयान में उन्होंने इस इस तरह की खबरों को गलत बताया है। वाराणसी कमिश्नर ने कहा है, “एक दिन ट्रस्ट की मीटिंग हुई थी। एक-दो दिन बाद भी ऐसी ही बात सामने आई थी। तब भी स्पष्ट किया गया था। पुरानी ही बैठकों में हुए डिस्कशन के पॉइंट ट्रस्ट के अलग-अलग लोगों के हवाले से बता दिए जाते हैं। सोशल मीडिया में कई मैसेज ऐसे भी सर्कुलेट हो जाते हैं तो पुरानी बातें होती हैं।”

उन्होंने आगे कहा है “भारत के अलग-अलग मंदिरों की अलग-अलग व्यवस्थाएँ हैं। उसका तुलनात्मक अध्ययन किया गया था। उसकी ही चर्चाएँ हुई थी, उन्हीं चर्चाओं में यह बात आई थी कि बाकी मंदिरों में इस प्रकार का शुल्क लगता है। लेकिन, वाराणसी के मंदिर में कोई शुल्क लगाने का अभी निर्णय नहीं हुआ है और ऐसा कोई निर्णय भविष्य में अगर होगा तो उसकी जानकारी दी जाएगी। फिलहाल मंदिर में स्पर्श दर्शन के लिए किसी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जा रहा है।”

इस तरह सोशल मीडिया से लेकर मीडिया संस्थानों तक श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में स्पर्श दर्शन को लेकर किया जा रहा यह दावा हमारे फैक्ट चेक में पूरी तरह फेक पाया गया।

मोदी सरकार में डर का माहौल है… ‘कुपोषित’ अकबर को देख लोगों को याद आया कॉन्ग्रेस के समय का ‘खुश अकबर’, बोले – आइंस्टीन को पहना दी मुगलिया पोशाक

सन् 1960 में आई फिल्म ‘मुग़ल-ए-आज़म’ में दिग्गज अभिनेता पृथ्वीराज चौहान ने मुग़ल बादशाह अकबर का किरदार निभाया था वहीं 2023 में आई वेब सीरीज ‘ताज’ में नसीरुद्दीन शाह अकबर का किरदार निभा रहे हैं। जहाँ पृथ्वीराज कपूर वाले किरदार में अकबर दमदार और रुतबे वाला था, वहीं नसीरुद्दीन शाह वाला अकबर बूढ़ा और थका-थका सा है। वो अपने बेटों की कलह से परेशान है। ‘मुग़ल-ए-आज़म’ और ‘ताज’, अकबर का महिमामंडन दोनों ही में किया गया।

सोशल मीडिया पर लोग इन दोनों किरदारों की तुलना करते हुए तंज कस रहे हैं। लेखक साकेत सूर्येश ने ‘ताज’ वाले कमजोर अकबर पर तंज कसते हुए लिखा कि ‘फासिस्ट’ मोदी सरकार में अकबर को कुछ खाने के लिए नहीं मिल रहा है।

वहीं एक्टिविस्ट शेफाली वैद्य ने कहा कि मोदी सरकार में तो अकबर अवसादग्रस्त, कुपोषित, और एक ऐसे रुग्ण बूढ़े व्यक्ति के रूप में दिख रहा है जो दिमागी समस्याओं से जूझ रहा हो। अभिनेता सतीश शाह ने तो यहाँ तक कह दिया कि ऐसा लग रहा है कि वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन को अकबर की ड्रेस पहना दी गई हो।

वहीं कुछ लोगों ने तो ‘जोधा अकबर’ (2008) वाले अकबर की भी तस्वीर शेयर की। उस समय अभिनेता ऋतिक रोशन ने अकबर का किरदार निभाया था। एक यूजर ने लिखा कि देखो, जब डॉक्टर मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे तब अकबर कितना खुश और रोमांटिक नजर आ रहा है।

वहीं कुछ लोगों ने मीम्स शेयर करते हुए लिखा कि ये बंदा (नसीरुद्दीन शाह) पहले से ही डरा हुआ है, कृपया इसे और न डराएँ। एक यूजर ने लिखा कि मोदी सरकार में भूखे-सिकुड़े अकबर को देख कर ऐसा लगता है कि सचमुच डर का माहौल है। एक अन्य यूजर ने लिखा कि सचमुच ये अकबर काफी डरा हुआ लग रहा है।

फीडबैक के नाम पर विपक्षी नेताओं की जासूसी: NIA जाँच की माँग के बाद LG ने दिया कार्रवाई का आदेश, AAP सरकार के फैसले से खजाने को भी लगा था चूना

शराब घोटाला समेत भ्रष्टाचार के अन्य मामलों में घिरी दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ती दिख रहीं हैं। दरअसल, दिल्ली सरकार पर फीडबैक यूनिट द्वारा नेताओं की जासूसी कराने का आरोप लगा था। इस मामले में कॉन्ग्रेस नेताओं ने NIA से जाँच कराते हुए मनीष सिसोदिया को गिरफ्तार करने की माँग की थी। अब इस मामले को दिल्ली के उप-राज्यपाल ने मुख्य सचिव को भेजते हुए कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दिल्ली के उपराज्यपाल कार्यालय द्वारा कहा गया है कि कॉन्ग्रेस नेता संदीप दीक्षित, प्रोफेसर किरण वालिया और मंगत राम सिंगल द्वारा जासूसी काण्ड की जाँच कराने की माँग की गई थी। साथ ही कहा था कि इसकी जाँच गैर कानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) द्वारा कराई जाए। अब इस मामले में उप-राज्यपाल ने संज्ञान लेते हुए मुख्य सचिव को कहा है कि वह इस पर आवश्यक कार्रवाई करें।

चूँकि अब मामला मुख्य सचिव के पाले में है, ऐसे में अब देखना होगा कि वह इस मामले की जाँच NIA से कराने के लिए एक्शन लेते हैं या नहीं। वैसे जासूसी कांड मामले में CBI पहले ही जाँच कर रही है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने गत 22 फरवरी को मनीष सिसोदिया के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज करने की अनुमति दे दी थी।

क्या है पूरा मामला

साल 2015 में दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के बाद सीएम अरविंद केजरीवाल एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) का नियंत्रण चाहते थे। लेकिन इसमें उन्हें सफलता नहीं मिली। इसके बाद केजरीवाल ने अपने सतकर्ता विभाग के तहत फीडबैक यूनिट बनाने का फैसला किया। इस यूनिट का उद्देश्य दिल्ली सरकार के अंतर्गत आने वाली संस्थाओं की निगरानी करते हुए सुधार के लिए फीडबैक देना था। हालाँकि, आरोप है कि दिल्ली सरकार के इशारे पर इस फीडबैक यूनिट ने विपक्षी दलों के नेताओं की जासूसी करनी शुरू कर दी। कई नेताओं के कामकाज पर भी नजर रखने का आरोप है।

सीबीआई के आरोप

सीबीआई ने आरोप लगाया है कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने 2015 में कैबिनेट की बैठक में फीडबैक यूनिट के लिए प्रस्ताव पेश किया था। लेकिन इसके लिए कोई एजेंडा नोट वितरित नहीं किया गया। फीडबैक यूनिट में नियुक्तियों के लिए उपराज्यपाल से भी कोई मंजूरी नहीं ली गई थी। सीबीआई ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट में कहा है कि फीडबैक यूनिट ने अनिवार्य जानकारी एकत्र करने के अलावा राजनीतिक खुफिया जानकारी भी जुटाई है।

सीबीआई ने फरवरी 2016 और सितंबर 2016 के बीच फीडबैक यूनिट द्वारा जारी रिपोर्टों का भी विश्लेषण किया। इन रिपोर्ट्स के आधार पर सामने आया कि इसमें से 40% रिपोर्ट राजनीतिक दलों के नेताओं की जासूसी पर हैं। साथ ही सीबीआई ने कहा है कि फीडबैक यूनिट के निर्माण और काम करने के गैरकानूनी तरीके से सरकारी खजाने को लगभग 36 लाख रुपए का नुकसान हुआ।

अलग-अलग हैं घूसकांड वीडियो वाले अनिरुद्ध सिंह और एनकाउंटर स्पेशलिस्ट DSP अनिरुद्ध सिंह: मीडिया ने चला दी जिनकी तस्वीर, उनका इस घटना से कोई लेनादेना नहीं

यूपी पुलिस के एक मामले को लेकर मीडिया में एक कन्फ्यूजन सा हो गया है। इससे एक IPS अधिकारी की बेवजह बदनामी हो रही है। दरअसल, यूपी पुलिस के एक अधिकारी का वीडियो कॉल पर घूस माँगते हुए पुराना वीडियो वायरल हुआ। इस वीडियो में दिख रहे व्यक्ति 2018 बैच के IPS अधिकारी अनिरुद्ध सिंह निकले। वीडियो में वो 10-20 लाख रुपए के घूस की डील करते हुए दिखे थे। तब वो वाराणसी पुलिस आयुक्तालय में सहायक पुलिस आयुक्त के रूप में तैनात थे।

मीडिया ने ये खबर तो चलाई, लेकिन तस्वीर गलत लगा दी। जिनकी तस्वीर लगाई, उनका भी नाम अनिरुद्ध सिंह है। यूपी के धाकड़ पुलिस अधिकारी, जो फ़िलहाल चंदौली में बतौर डीएसपी तैनात हैं। कई फिल्मों में भी रोल अदा कर चुके हैं। ‘न्यूज़ 24’ जैसे मुख्यधारा के बड़े मीडिया संस्थान ने भी चंदौली वाले अनिरुद्ध सिंह की तस्वीर लगा दी, जिनका इस प्रकरण से कोई लेनादेना नहीं। स्पष्ट है, मानहानि होने से उन्हें भी गुस्सा आ गया।

उन्होंने ‘न्यूज़ 24’ को उसकी गलती का एहसास कराते हुए लिखा, “वाह री पत्रकारिता! ये इतनी जल्दी में हैं, इसका आलम यह है कि सारे भारत के अनिरुद्ध नाम के व्यक्ति का तात्पर्य लगता है कि मुझसे ही है। फोटो मेरी और समाचार किसी दूसरे का, ग़ज़ब की मानहानि की भी पराकाष्ठा है।” इसके बाद ‘News 24’ ने माफ़ी माँगते हुए इसे मानवीय भूल बताया। हालाँकि, अनिरुद्ध सिंह का कहना था कि इससे गूगल सर्च में उसकी छवि दागदार हो जाएगी उसकी भरपाई कैसे संभव है?

मीडिया संस्थान को ये ट्वीट डिलीट भी करनी पड़ी। वहीं जिन अनिरुद्ध सिंह पर आरोप लगा है, वो उस वक्त चेतगंज थाने में तैनात थे। तब एक नामी स्कूल के एक कर्मचारी द्वारा छात्रा के बलात्कार का मामला सामने आया था। स्कूल प्रबंधन के कुछ लोगों के नाम भी FIR में डाले गए थे। इसी को हटाने के लिए मोलभाव हो रहा था। अनिरुद्ध सिंह की पत्नी आरती भी IPS हैं। उन पर भी माकन मालिक को किराया न देने का मामला चल रहा है। अनिरुद्ध सिंह जहाँ फ़िलहाल मेरठ के एडिशनल एसपी हैं, पत्नी आरती वाराणसी की एडिशनल एसपी हैं।

मार्च 2021 में आरती सिंह वाराणसी की पहली महिला एडिशनल डिप्टी कमिश्नर के पद पर तैनाती दी गई थी। दोनों की शादी 2015 में हुई थी। 2016 में दोनों पति-पत्नी ने IPS की परीक्षा दी थी। आरती को 2016 में कामयाबी मिली, वहीं अनिरुद्ध सिंह ने 2017 में वर्दी पहनी। जहाँ आरती को सिविल सर्विस की परीक्षा में 118वीं, वहीं अनिरुद्ध को 146वीं रैंक हासिल हुई थी। आरती की पढ़ाई-लिखाई सोनभद्र और फिर जबलपुर से हुई थी।

वहीं चंदौली वाले अनिरुद्ध सिंह, जिनका इस प्रकरण से कोई लेना-देना नहीं, वो इससे पहले दिसंबर 2021 में तब चर्चा में आए थे जब समाजवादी पार्टी के नेताओं ने उनके साथ हाथापाई की थी। जालौन जिले के रहने वाले अनिरुद्ध सिंह के बारे में बता दें कि वो 2001 में पुलिस की नौकरी जॉइन कर वाराणसी में सब इंस्पेक्टर बने थे। बदायूँ जिले में इनके कामों की चर्चा पूरे उत्तर प्रदेश में होती रही है। वो अपने लुक्स के कारण चर्चा में रहते हैं। फिल्मों में भी काम करते रहे हैं।

इस प्रकरण के बाद DSP अनिरुद्ध सिंह ने अपनी तस्वीर के साथ ट्वीट करते हुए लिखा, “माँगने से अहंकार खत्म होता है, जबकि क्षमा करने से संस्कार बनते हैं। जिसके पास क्षमा का गुण है, वे हमेशा प्रसन्नचित रहते हैं, उनके शत्रु भी नहीं होते हैं। मनुष्य के जीवन में क्षमा का बहुत बड़ा महत्व है।अगर कोई इंसान गलती की माफी माँग ले तो सामने वाले का गुस्सा काफी हद तक दूर हो जाता है।” इसे भी इसी प्रकरण से जोड़ कर देखा जा रहा है।

वैसे, ‘न्यूज़ 24’ अकेला संस्थान नहीं है जिसने इस तरह की हरकत की हो। इससे पहले ‘TV9 भारतवर्ष’ भी ऐसा कर चुका है। उसने एक खबर में डीएसपी अनिरुद्ध सिंह की तस्वीर लगाते हुए उनके खिलाफ गैर-जमानती वॉरंट जारी होने की खबर चलाई थी। साथ ही लिखा था कि जफराबाद में एक हत्याकांड में वो विवेचक थे। उनके वेतन रोके जाने की खबर भी चलाई थी। इस पर ध्यान दिलाए जाने पर अनिरुद्ध सिंह ने बताया कि टीआरपी के चक्कर में इन्होने फेक न्यूज़ चिपकाया था, माफ़ी न माँगने की स्थिति में इन्हें भी मानहानि का नोटिस जाता।

ऑप इंडिया ने इस मामले में डिप्टी एसपी अनिरुद्ध सिंह से बात की।। उन्होंने कहा, “मीडियाकर्मी भाइयों से निवेदन है कि वो कोई भी चीज खूब जाँच-पड़ताल के बाद ही डालें। आज कल इंटरनेट का जमाना है और कुछ समय बाद कोई सर्च करेगा तो मेरी तस्वीर आएगी। ऐसी भ्रामक चीजों से अच्छे लोगों के व्यक्तिगत नुकसान हो जाते हैं।”

‘मिल रही जान से मारने और मथुरा छोड़ने की धमकी’: ‘श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति निर्माण ट्रस्ट’ के अध्यक्ष ने किया केस वापस लेने का एलान

‘श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति निर्माण ट्रस्ट’ के केंद्रीय अध्यक्ष आशुतोष पांडेय को जान से मारने की धमकी दी गई है। इस बात का खुलासा खुद आशुतोष ने रविवार (12 मार्च, 2023) को मथुरा में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए किया है। धमकी देने वाले ने आशुतोष से मथुरा छोड़ देने और अपना केस वापस लेने के लिए कहा है। इस मामले की शिकायत पुलिस में भी की गई है। पीड़ित ने खुद को कुछ पुलिसकर्मियों द्वारा भी धमकाए जाने का आरोप लगाया है। आशुतोष ने आने वाली 23 मार्च, 2023 को अपना मुकदमा वापस लेने का एलान भी किया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आशुतोष पांडेय ने कहा कि इस से पहले भी उन्हें 3 बार जान से मारने की धमकी मिली है। धमकी देने वाले को आशुतोष ने मुस्लिम युवक बताया है। इसकी शिकायत उन्होंने पुलिस ने की लेकिन आरोपों के अनुसार ,इस पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। आशुतोष ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि के पक्षकारों पर भी गलत तरीके से पैरवी का आरोप लगाया है। बकौल आशुतोष, उन पर 22 केस हैं जो व्यक्तिगत झगड़ो के नहीं बल्कि धर्म की रक्षा के लिए लड़ाई के चलते दर्ज हुए हैं।

आशुतोष पांडेय ने अपनी शिकायत में मथुरा जिले में तैनात कुछ पुलिस वालों पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें केस वापसी की धमकी देने में कुछ खाकी वर्दी वाले भी शामिल हैं। मथुरा में मस्जिदों से लाऊडस्पीकर के जरिए अजान होने का आरोप लगाते हुए आशुतोष पांडेय ने इसमें स्थानीय प्रशासन की मिलीभगत बताया। उनका यह भी कहना है कि स्थानीय प्रशासन ने उनकी जन जागरण यात्रा को मुख्यमंत्री का आदेश बता कर रुकवा दिया था।

आशुतोष पांडेय सिद्धपीठ माता शाकम्भरी के पीठाधीश्वर भी हैं। अपने कामों के बारे में बताते हुए आशुतोष ने कहा कि उन्होंने ईदगाह कमेटी पर कई केस दर्ज करवाए। इसमें बिजली चोरी का केस भी शामिल हैं। आशुतोष का मुकदमा वाद संख्या 12/2023 है। उन्होंने कहा कि आने 23 मार्च को वो अपना केस वापस ले लेंगे।

‘तुम्हारा दुपट्टा किधर है? इस्लाम का मजाक बना रखा है’: ‘ससुराल सिमर का’ वाली हीरोइन पर बरसे कट्टरपंथी, कहा – तय करो हमारी तरफ हो या नहीं

टीवी सीरियल ‘ससुराल सिमर का’ से मशहूर हुई टीवी एक्ट्रेस दीपिका कक्कड़ इब्राहिम उर्फ फैजा इन दिनों अपनी प्रेगनेंसी को लेकर काफी चर्चा में है। सोशल मीडिया पर उनकी आए दिन कोई न कोई तस्वीर सामने आती रहती है। कल (12 मार्च 2023) भी उन्होंने अपनी एक कैंडिड फोटो शेयर की। इस फोटो में उन्होंने प्रिंटिड ड्रेस पहनी थी और लिखा था कि जब पोज देने की कोशिश करो लेकिन आपको मिलती एक पर्फेक्ट कैंडिड है।

इस तस्वीर में देखने में कुछ अटपटा नहीं है। मगर फिर भी कट्टरपंथियों को ये तस्वीर पसंद नहीं आई। उन्होंने फौरन दीपिका को निशाना बना लिया और प्रेगनेंसी में दुपट्टा न लेने के लिए उन्हें खरी-खोटी सुनाने लगे। उन्हें कहा गया कि वैसे तो घर में बड़ा दुपट्टा पहनकर घूमती हो, लेकिन अब जब असल में जरूरत है तो फिर दुपट्टा कहाँ गया।

एक यूजर ने उन्हें लिखा, ऐसे कपड़े पहनकर केवल इस्लाम का मजाक बनाया जा रहा है।

दीपिका की फोटो पर आए कमेंट

एक ने लिखा, “आप तय करो आप इस्लाम की साइड हो या नहीं…किचन में दुपट्टा ले लेती हो, बाहर नहीं। जबकि बाहर निकलते समय खुद को ढकना होता है। किस तरह का इस्लाम फॉलो कर रही हो तुम।”

शहनवाज खान ने कहा, “तेरा दुपट्टा कहाँ है। सबा की शादी में तो बहुत दिखा रही थी सिर पर दुपट्टा रखकर।”

दीपिका की फोटो पर आए कमेंट

उल्लेखनीय है कि शोएब इब्राहिम से निकाह करने के लिए फैजा बनीं दीपिका को लोग अक्सर उनके बदले रहन-सहन और पहनावे पर टोंकते हैं। कई बार वो इन बातों पर प्यार से सफाई देती हैं और कई बार भड़क जाती हैं। इन दिनों भी उन्हें लेकर कई तरह की अफवाहे फैलाई गई हैं जिसकी सफाई वो अपनी वीडियोज में दे चुकी हैं। हालाँकि लोग इससे संतुष्ट नहीं हैं। उनके इस्लामी तौर-तरीकों में ढलने के बाद भी कट्टरपंथी दीपिका में आज भी कमी निकालते हैं। इस बार उन्होंने दीपिका को दुपट्टा न लेने के लिए सुनाया है।

‘प्रियंका से ₹2 करोड़ की पेंटिंग खरीदो, पद्म विभूषण मिलेगा’: यस बैंक के सह-संस्थापक पर था कॉन्ग्रेसियों का दबाव, FATF रिपोर्ट में खुलासा

यस बैंक के सह-संस्थापक राणा कपूर ने दावा किया था कि कॉन्ग्रेस नेता प्रियंका गाँधी वाड्रा द्वारा उन्हें पेंटिंग खरीदने के लिए मजबूर किया गया था। अब इस दावे की फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) ने भी पुष्टि कर दी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि राणा कपूर ने कॉन्ग्रेस से एक “औसत दर्जे” की पेंटिंग खरीद कर गलत तरीके से पुरुस्कार और प्रशंसा प्राप्त की।

दरअसल, FATF ने एक रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट में राणा कपूर को अप्रत्यक्ष रूप से ‘मिस्टर ए’ कहा गया है। साथ ही उन पर अपने पद का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ‘मिस्टर ए’ ने पिछली सत्तारूढ़ पार्टी (कॉन्ग्रेस) के एक करीबी रिश्तेदार से 264,000 डॉलर (21721867 रुपए) में एक पेंटिंग खरीदी थी जिसकी कोई खास कीमत नहीं थी। यानी कि एक ‘औसत’ पेंटिंग को बढ़ी हुई कीमत में खरीदा गया था।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ‘कंपनी बी’ ने ‘कंपनी सी’ सहित 79 शेल कंपनियों को कर्ज दिया है। इस कंपनी के मालिक ‘मिस्टर ए’ और उनकी बेटियाँ थीं। ‘कंपनी सी’ को 79 मिलियन अमेरिका डालर प्राप्त हुए। इस तरह से हुई कमाई का एक हिस्सा प्रसिद्ध चित्रकारों और प्रभावशाली लोगों से ‘आर्ट वर्क’ सहित अन्य संपत्ति खरीदने के लिए इस्तेमाल किया गया। ‘मिस्टर ए’ ने आय का एक बड़ा हिस्सा प्रसिद्ध कलाकारों की पेंटिंग खरीदने में खर्च किया। जाँच में पता चला कि है कि ‘मिस्टर ए’ ने करीब 44 पेंटिंग खरीदी थीं

इस रिपोर्ट में आरोप लगाते हुए कहा गया है कि ‘मिस्टर ए’ ने गलत तरीके से कई संगठनों से पुरस्कार प्राप्त किए थे। जाँच में सामने आया है कि ‘मिस्टर ए’ ने पुरस्कार प्राप्त करने के लिए रिश्वत दी थी। यह रिश्वत देने के लिए नेताओं से घटिया पेंटिंग खरीदी थी। इस रिश्वत को सही ठहराने के लिए पेंटिंग खरीदी जाती थीं और बैंकों जरिए पेमेंट किया जाता था। ऐसा ही एक उदाहरण, ‘मिस्टर ए’ ने कथित तौर पर पिछली सत्तारूढ़ राजनीतिक पार्टी के एक सदस्य के करीबी रिश्तेदार से 264000 डॉलर (21721867 रुपए) में एक पेंटिंग खरीदी थी। साल 2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने से पहले कॉन्ग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार सत्ता में थी।

इस जाँच में यह भी कहा गया है कि पेंटिंग का वास्तविक मूल्य काफी कम था। लेकिन ‘पद्म भूषण’ पुरुस्कार हासिल करने के लिए यह पेंटिंग बढ़ी हुई कीमत में खरीदी गई थी। यह कीमत रिश्वत के रूप में दी गई थी।

राणा कपूर ने ईडी को दिया बयान

बता दें कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) की पूछताछ में राणा कपूर ने बताया था कि उन्हें कॉन्ग्रेस नेता प्रियंका गाँधी वाड्रा से एमएफ हुसैन (MF Husain) की एक पेंटिंग खरीदने के लिए मजबूर किया गया था। उन्होंने यह भी कहा था कि पेंटिंग बेच कर मिले पैसों का इस्तेमाल गाँधी परिवार ने कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी के न्यूयॉर्क में इलाज के लिए किया था।

राणा कपूर ने यह भी खुलासा किया था कि कॉन्ग्रेस नेता प्रियंका गाँधी ने उन्हें जो पेंटिंग बेची थी, उस पूरी प्रक्रिया में पूर्व केंद्रीय मंत्री मिलिंद देवड़ा ने बिचौलिए की भूमिका निभाई थी। राणा कपूर ने ईडी को यह भी बताया था कि उन्हें पूर्व पेट्रोलियम मंत्री मुरली देवड़ा ने कहा था कि एमएफ हुसैन की पेंटिंग खरीदने से इनकार करने पर गाँधी परिवार के साथ उनके संबंधों में खटास आ सकती है। इनकार करने पर पद्म भूषण पुरस्कार नहीं देने की धमकी दी गई थी।

राणा कपूर ने ईडी को यह भी बताया था कि सोनिया गाँधी के करीबी अहमद पटेल ने उनसे कहा था कि सोनिया के इलाज के लिए सही समय पर गाँधी परिवार की मदद करके अच्छा काम किया है। इसलिए ‘पद्म भूषण’ पुरस्कार के लिए उनके नाम पर विचार किया जाएगा।

अखिलेश यादव के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला, सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से किया इनकार: 2013 में CBI ने बंद कर दिया था मामला

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने दिवंगत मुलायम सिंह यादव के दोनों बेटों प्रतीक और अखिलेश के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले में आगे सुनवाई से इनकार कर दिया। अदालत ने बताया कि साल 2013 में CBI जिस मामले को बंद कर चुकी है, उसमें अब रिपोर्ट मँगाने की जरूरत नहीं है। सोमवार (13 मार्च, 2023) को इस मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने यह टिप्पणी की।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस मामले के याचिकाकर्ता विश्वनाथ चतुर्वेदी हैं। याचिका में आरोप लगाया गया था कि आय से अधिक संपत्ति मामले में मुलायम परिवार के खिलाफ CBI ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की थी। याचिकाकर्ता ने साल 2007 के कोर्ट के आदेश का हवाला दिया, जिसमें अखिलेश और प्रतीक यादव की आय से अधिक संपत्ति की जाँच के आदेश दिए गए थे। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने CBI की साल 2013 की प्रारम्भिक जाँच रिपोर्ट का हवाला दिया। इस रिपोर्ट में मामले को बंद करने की संस्तुति की गई थी।

इस मामले में मुलायम सिंह यादव भी आरोपित किए गए थे। याचिकाकर्ता विश्वनाथ चतुर्वेदी ने सुनवाई के दौरान CBI की क्लोजर रिपोर्ट भी तलब करने की माँग की थी। हालाँकि, अदालत ने इस माँग को भी नहीं माना। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अब मामले में सुनवाई का कोई आधार नहीं है क्योंकि केस की जाँच बंद होने पर याचिका को सुनने का कोई औचित्य नहीं है। विश्वनाथ चतुर्वेदी कॉन्ग्रेस पार्टी से जुड़े हुए हैं। अप्रैल 2019 में CBI ने सुप्रीम कोर्ट से स्पष्ट कर दिया था कि मुलायम परिवार पर लगे आरोपों को साबित नहीं किया जा सका।

दिसंबर 2022 में जब इस मामले की जब दुबारा सुनवाई की माँग हुई थी तब अखिलेश यादव की तरफ से एडवोकेट और कॉन्ग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने बहस की थी। कपिल सिब्बल ने भी सुप्रीम कोर्ट से इस मामले को बंद करने की माँग की थी। हालाँकि तब अदालत ने मुलायम सिंह यादव के निधन होने की बात कहते हुए बाकी सदस्यों पर जाँच जारी रहने की टिप्पणी की थी।

इलाहाबाद HC के परिसर में मस्जिद, सुप्रीम कोर्ट ने कहा – 3 महीने में हटाओ, वरना तोड़ा जाएगा: काम नहीं आई कपिल सिब्बल की दलीलें

सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट परिसर में बनी मस्जिद को 3 महीने के अंदर हटाने का आदेश दिया है। साथ ही कहा है कि मस्जिद बनाने के लिए वक्फ बोर्ड राज्य सरकार राज्य सरकार से दूसरी जगह जमीन माँग सकता है। इससे पहले साल 2017 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कोर्ट परिसर में बनी मस्जिद हटाने का आदेश दिया था।

सोमवार (13 मार्च 2023) को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस सीटी कुमार की बेंच ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के मस्जिद हटाने वाले फैसले के खिलाफ दायर सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया। साथ ही कोर्ट ने मस्जिद हटाने के लिए 3 महीने का समय दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि यदि मस्जिद को 3 महीने के अंदर नहीं हटाया गया तो इलाहाबाद हाई कोर्ट समेत अन्य अधिकारी मस्जिद को तोड़ कर सकते हैं। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि याचिकाकर्ता चाहें तो मस्जिद बनाने के लिए राज्य सरकार से दूसरी जगह जमीन माँग सकते हैं।

मस्जिद हटाने का फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा है कि मस्जिद एक सरकारी पट्टे (लीज) वाली जमीन में बनी है। इस लीज को साल 2002 में ही रद्द किया जा चुका है। इसके बाद साल 2012 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि यह जमीन सरकारी है। इसलिए कोई भी इस जमीन को लेकर किसी भी प्रकार का दावा नहीं कर सकता।

मस्जिद की ओर से पेश हुए पूर्व कॉन्ग्रेस नेता और वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि मस्जिद 1950 के दशक से बनी हुई है। इसलिए ऐसे ही हटाने के लिए नहीं कहा जा सकता। उन्होंने कहा, “साल 2017 में सरकार बदल गई और सब कुछ बदल गया। नई सरकार के गठन के 10 दिन बाद एक जनहित याचिका दायर की जाती है। दूसरी जमीन मिलने तक हमें मस्जिद कहीं शिफ्ट करने में समस्या होगा।”

वहीं इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने कहा कि यह पूरी तरह धोखाधड़ी का मामला है। उन्होंने कहा, “नवीनीकरण के लिए दो बार आवेदन किए गए। लेकिन, इस बारे में नहीं बताया गया कि मस्जिद का निर्माण किया गया है और इसका इस्तेमाल जनता के लिए किया जा रहा है। बल्कि यह कहते हुए नवीनीकरण की माँग की गई थी कि आवासीय उद्देश्यों के लिए इसकी आवश्यकता है। सिर्फ यहाँ नमाज पढ़ने से यह जगह मस्जिद नहीं हो जाती। अगर सुप्रीम कोर्ट के बरामदे या हाई कोर्ट के बरामदे में, सुविधा के लिए नमाज की अनुमति दी जाती है, तो यह मस्जिद नहीं बन जाएगा।”