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स्कॉर्पियो से आए नकाबपोश, दफ्तर से निकाल कर घसीटते हुए ले गए: बिहार में सत्ताधारी RJD नेता का अपहरण, CCTV में कैद हुई वारदात

बिहार की कानून व्यवस्था पर उठ रहे तमाम सवालों के बीच अब छपरा में सत्ताधारी RJD (राष्ट्रीय जनता दल) के नेता सुनील राय के ही अपहरण की खबर है। अपहृत सुनील राय राजद के पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष भी रह चुके हैं। घटना मंगलवार (14 मार्च, 2023) की है और घटनास्थल सुनील राय का ऑफिस है। अपहरण की यह वारदात CCTV में कैद हो गई है। आरोपित सफेद रंग की स्कॉर्पियो गाड़ी से आए थे। पुलिस ने केस दर्ज कर के सुनील राय की तलाश शुरू कर दी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना मुफस्सिल थानाक्षेत्र के बाजार समिति के पास की है। सुनील राय के पिता रामविलास राय ने मामले की जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि सुबह किसी ने उनके बेटे को फोन कर के बुलाया। इस कॉल के बाद तड़के लगभग 4 बजे सुनील अपने घर से निकल कर ऑफिस की तरफ गए थे। उसी समय सफेद रंग की स्कॉर्पियो गाड़ी वहाँ पहुँची। गाड़ी से कुछ लोग उतर कर सुनील को अंदर घसीटने लगे। सुनील ने काफी विरोध किया, लेकिन अपहरणकर्ताओं ने उनको अंदर खींच लिया।

इसके बाद सभी आरोपित स्कॉर्पियो से फरार हो गए। अपहरणकर्ताओं की संख्या लगभग आधा दर्जन बताई जा रही है। नई उम्र के बताए जा रहे आरोपितों के हाथों में हथियार थे। उन सभी ने नकाब पहन रखे थे। यह पूरी घटना सुनील राय के ऑफिस के पास लगे एक CCTV में कैद हो गई। घटना के दौरान आसपास कोई मौजूद भी नहीं था। फोन करने वाले को अपने बेटे का पुराना परिचित बताते हुए रामविलास राय ने कहा कि उनकी किसी से कोई दुश्मनी नहीं है। हालाँकि, रामविलास अपहरण से पहले आए फोन पर हुई बातचीत की जानकारी नहीं दे पाए।

सुनील भारतीय वायुसेना से रिटायर्ड हैं, यानी पूर्व सैनिक भी हैं जो फिलहाल राजद में नेतागीरी के साथ प्रॉपर्टी का भी काम करते हैं। बिहार पुलिस ने इस मामले का संज्ञान लेते हुए सुनील की तलाश शुरू कर दी है। सारण पुलिस के मुताबिक CCTV फुटेज के अलावा अन्य बिंदुओं पर जाँच-पड़ताल की जा रही है। पुलिस ने सुनील की तलाश के लिए SIT (विशेष जाँच दल) का भी गठन कर दिया है।

कार से आए, उठा ले गए… एक ही परिवार की 2 नाबालिग लड़कियों का अपहरण, मोईन, इम्तियाज, छोटकऊ और छोटकऊ की बहन पर FIR

उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में एक हिन्दू परिवार की 2 नाबालिग लड़कियों के अपहरण की खबर है। दोनों पीड़िताएँ आपस में चचेरी बहनें हैं। अपहरण का आरोप, दूसरे समुदाय के 4 लोगों पर लगा है। आरोपितों में 3 युवक और एक लड़की भी शामिल है। पुलिस ने केस दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी है। अभी तक न तो लड़कियाँ बरामद हुईं हैं और न ही किसी आरोपित की गिरफ्तारी हो पाई है। गाँव में तनाव को देखते हुए एहतियातन पुलिस फ़ोर्स तैनात कर दी गई है। घटना रविवार (11 मार्च 2023) की है।

घटना बहराइच के रानीपुर थानाक्षेत्र के गाँव जिगिनिया की है। यहाँ का रहने वाला पीड़ित OBC समुदाय से है। वह कारपेंटर (बढई) का काम कर के अपने परिवार का गुजारा करता है। पुलिस को दी गई शिकायत में पीड़ित ने बताया कि उसकी 16 साल की बेटी और उनके भतीजे की भी 16 वर्षीया बेटी 11 मार्च को शौच के लिए गाँव की नहर पर गईं थीं। इस दौरान वहाँ उसी गाँव का रहने वाला 25 साल का इम्तियाज और मुसीबत अली का 20 साल का बेटा छोटकऊ घात लगाए बैठे थे। दोनों आरोपितों ने एक 4 पहिया वाहन से दोनों नाबालिग लड़कियों का अपहरण कर लिया।

शिकायत के मुताबिक, पीड़ित उस दिन किसी बारात में गया था। जब सुबह वह अपने घर लौटा तो उसे अपने घर की एक अन्य 7 साल की बच्ची ने पूरी बात बताई। मामले की जानकारी होते ही पीड़ित ने अपनी तरफ से अपनी बेटी और भतीजे की बेटी को खोजने की कोशिश की। इसी दौरान उसे पता चला कि अपहरण में 40 साल के मोईन और मुसीबत अली की 19 वर्षीया बेटी ने भी सहयोग किया है। नाबालिग बच्चियों को खुद से खोज कर हार गए पीड़ित ने आख़िरकार पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई।

रानीपुर थाना पुलिस ने इस मामले को IPC की धारा 364 के तहत दर्ज किया। मामले में मोईन, इम्तियाज, छोटकऊ और छोटकऊ की बहन को नामजद आरोपित बनाया गया। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है। हमसे बात करते हुए पीड़ित पिता ने बताया कि उनके गाँव में मुस्लिम आबादी लगभग 70% है। उन्होंने कहा कि पुलिस उन्हें बच्चियों को जल्द बरामद करने और आरोपितों को गिरफ्तार करने का भरोसा दे रही है। बकौल पीड़ित गाँव में पुलिस बल भी तैनात किया गया है।

खालिस्तान समर्थक अमृतपाल सिंह का सहयोगी गिरफ्तार, निहंगों की वेशभूषा में साथियों संग मिल कर लूटी थी कार

पंजाब पुलिस ने ‘वारिस पंजाब दे’ के प्रमुख और खालिस्तान समर्थक अमृतपाल सिंह के एक कथित सहयोगी को कार चोरी और लूट के आरोप में गिरफ्तार किया है। आरोपित की पहचान सुखमिंदर सिंह के रूप में हुई है। वह पंजाब के मोगा जिले के डोढीके गाँव का रहने वाला है। गिरफ्तारी सोमवार (13 मार्च, 2023) को हुई।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 4 मार्च 2023 को देर रात सुखमिंदर सिंह ने अपने 5 अन्य साथियों के साथ मिलकर अमृतसर में लूट की घटना को अंजाम दिया था। आरोप है कि सुखमिंदर और उसके साथियों ने करणवीर सिंह उर्फ विक्की नामक व्यक्ति के साथ मारपीट कर उसकी हुंडई आई20 कार, पर्स और मोबाइल छीन लिया था। अपने बयान में पीड़ित ने पुलिस को बताया था कि निहंगों के कपड़े पहने 6 लोगों ने उसके साथ लूट की है।

हालाँकि इस मामले में अब तक पुलिस ने कोई बयान जारी नहीं किया है। लेकिन, रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि गिरफ्तार आरोपित अमृतपाल सिंह का सहयोगी है। यह नहीं, सुखमिंदर ने दावा किया है कि वह अमृतसर केवल अमृतपाल सिंह के लिए ही आया था। गिरफ्तारी के बाद उसने अपने 5 अन्य सहयोगियों के बारे में भी पुलिस को जानकारी दी है।

अमृतपाल ने सुखमिंदर को पहचानने से किया इनकार

एक ओर जहाँ सुखमिंदर ने खुद को अमृतपाल सिंह का सहयोगी बताया है। वहीं, दूसरी ओर अमृतपाल सिंह ने सुखमिंदर के साथ किसी भी तरह के संबंध होने से इनकार किया है। उसने कहा है कि यदि कोई उससे मिलता है और बाद में अपराध करता है तो इसका मतलब यह नहीं है कि वह उसका करीबी है।

बता दें कि अमृतपाल सिंह का पहले से ही राज्य सरकार के साथ कई मोर्चों पर टकराव चल रहा है। हाल ही में, राज्य के अधिकारियों ने उसके सहयोगियों के बंदूक के लाइसेंस रद्द कर दिए थे। इसके अलावा, कहा जा रहा है कि अमृतपाल सिंह के एक चाचा हरजीत सिंह का नाम भी उन लोगों की सूची में है जिनका लाइसेंस रद्द किया जा सकता है। हरजीत सिंह 23 फरवरी 2023 को अजनाला में हुई हिंसक घटना के दौरान मौके पर मौजूद था।

हथियारों के लाइसेंस रद्द करने को लेकर अमृतपाल सिंह ने कहा है कि सिखों को निहत्था करने के लिए एक सुनियोजित साजिश रची जा रही है। उसने कहा है कि जब पंथ को उनकी जरूरत है, तो उन्हें इसके साथ खड़ा होना चाहिए। जनरल शुबेग सिंह की तरह, जिन्होंने जरूरत के समय पंथ का साथ देने का फैसला किया। यह तभी संभव है जब युवा कम उम्र में सिख धर्म का अध्ययन करें। उसने आगे कहा है कि ‘पंथ’ संकट से गुजर रहा है। इसलिए लोगों को गुरूगुरुप्रचार और गुरमत संगत जैसे धार्मिक कार्यक्रम आयोजित करने चाहिए।

पहले नाबालिग लड़की से रेप, अब दोस्त का किया बलात्कार: ट्रांसजेंडर को ब्रिटेन की कोर्ट ने दोषी ठहराया, सुनवाई में बोला – मैं ‘ब्लैकआउट’ से पीड़ित, कुछ याद नहीं

ब्रिटेन की एक अदालत ने लेक्सी रोज क्रॉफर्ड नामक ट्रांसजेंडर को दोस्त के साथ बलात्कार करने के आरोप में दोषी ठहराया। इससे पहले वह एक नाबालिग लड़की का बलात्कार करने के आरोप में 4 साल की सजा काट चुका है। लेक्सी रोज क्रॉफर्ड जन्म से पुरुष था। लेकिन अब वह खुद को महिला बताता है। यहाँ तक कि उसने अपना नाम भी महिलाओं की तरह रखा हुआ है।

‘डेली मेल’ की रिपोर्ट के अनुसार, एक ऑन लाइन के माध्यम से लेक्सी रोज क्रॉफर्ड की मुलाकात एक नाबालिग लड़की से हुई थी। क्रॉफर्ड ने उस लड़की के साथ बलात्कार किया। इसके बाद उसे 4 साल की सजा सुनाई गई। सजा काटने के बाद जनवरी 2019 में वह जेल से रिहा हुआ था। इसके बाद अप्रैल 2019 में उसने दोस्त के साथ बलात्कार किया।

ब्रिटेन की ब्रिस्टल क्राउन कोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान आरोपित लेक्सी रोज क्रॉफर्ड ने खुद को ‘ब्लैकआउट’ से पीड़ित बताते हुए कहा कि उसे कुछ भी याद नहीं है। ‘ब्लैकआउट’ पीड़ित व्यक्ति को भूलने की बीमारी होती है। यानी कि उसने क्या किया या फिर उसके साथ क्या हुआ उसे याद नहीं रहता। हालाँकि, ये साफ नहीं है कि बलात्कारी के इस दावे में कितनी सच्चाई है।

वहीं पीड़ित ने अपने बयान में कहा है, “अप्रैल 2019 में लेक्सी रोज क्रॉफर्ड उसके घर आया और कम्प्यूटर में गेम खेला। वह चाहता था कि मैं उसके बगल में लेट जाऊँ। इसके बाद उसने मुझसे लिपटना शुरू किया। मुझे असहज महसूस हो रहा था। फिर उसने मेरे कपड़े उतारने शुरू कर दिए। मेरे बार-बार मना करने के बाद भी वह नहीं रुका और मेरा बलात्कार किया। इसके बाद वह लेट गया और सोने का नाटक करने लगा।”

पीड़ित और आरोपित के बयानों को सुनने के बाद कोर्ट ने लेक्सी रोज क्रॉफर्ड को बलात्कार का दोषी करार दिया। हालाँकि, कोर्ट ने अभी उसकी सजा का ऐलान नहीं किया है। क्रॉफर्ड की सजा का ऐलान 10 मई, 2023 को होगा। तब तक के लिए कोर्ट ने उसे जमानत पर रिहा कर दिया है। हालाँकि, कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान क्रॉफर्ड को वकीलों और जजों ने ‘मिस’ कहकर संबोधित किया है। लेकिन, इसके बाद भी ऐसा माना जा रहा है कि सजा के बाद उसे पुरुष जेल में रखा जाएगा।

सैफी, आरिफ, अनीश, इरशाद, सिराजुद्दीन, फुरकान, इरशाद, मुस्तकीम… राहुल सोलंकी की गोली मार कर दी थी हत्या, अब कोर्ट ने तय किए आरोप: दुकानें जलाईं, की थी लूटपाट

राजधानी दिल्ली में हुए साल 2020 के हिन्दू विरोधी दंगों के एक मामले में 8 आरोपितों पर अदालत में आरोप तय हुए हैं। इन सभी पर हत्या और आगजनी का आरोप है। आरोपितों के नाम सोनू सैफी, आरिफ, अनीश कुरैशी, सिराजुद्दीन, मोहम्मद फुरकान, मोहम्मद इरशाद और मोहम्मद मुस्तकीम हैं। इन सभी पर 24 फरवरी, 2020 को भड़की हिंसा में शिव विहार इलाके में हिन्दुओं की दुकानों और मकानों में आगजनी व लूटपाट के साथ राहुल सोलंकी नाम के एक युवक की हत्या का आरोप है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस मामले की सुनवाई दिल्ली के कड़कड़डूमा कोर्ट में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पुलत्स्य की मौजूदगी में हुई। अदालत ने सभी 8 आरोपितों के खिलाफ पेश किए गए सबूतों को ट्रायल चलाने के लिए पर्याप्त पाया। पुलिस द्वारा सभी 8 आरोपितों पर भीड़ जुटा कर बलवा करने, लूटपाट करने, आगजनी करने के साथ हत्या करने की धाराएँ लगाई गईं हैं। इसके अलावा सोनू सैफी और मोहम्मद मुस्तकीम पर अवैध हथियार रखने का भी आरोप तय हुआ है। दोनों के पास एक-एक पिस्टल बरामद हुई थी जो FSL जाँच में प्रयोग करने योग्य पाई गई थी।

अदालत ने आरोपितों पर IPC की धारा 295 -A न लगने योग्य पाया। कोर्ट के मुताबिक ऐसे कोई सबूत पुलिस द्वारा पेश नहीं किए गए हैं जिस से ये साबित होता हो कि आरोपितों ने धार्मिक भावनाओं को आहत किया हो। इसी के साथ कोर्ट द्वारा सभी 8 आरोपितों पर लगी आपराधिक साजिश की धारा को भी हटा दिया गया है। अदालत का मानना है कि ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है कि हमलावरों ने पहले से कोई प्लानिंग कर के अपनी साजिश को अंजाम दिया हो।

अदालत ने पुलिस द्वारा जमा किए गए CCTV फुटेज और मृतक राहुल सोलंकी के परिजन अनिल के बयानों के आधार पर मुस्तकीम को गोली चलाने का आरोपित पाया है। हमलावरों की इसी गोलीबारी में 26 साल के सिविल इंजीनियरिंग की डिग्रीधारक राहुल सोलंकी की जान चली गई थी। इसी भीड़ द्वारा बाद में कौशिक की दुकान को लूट कर उसमें तोड़फोड़ की गई थी। बाद में दुकान को आग के हवाले कर दिया गया था।

‘जो बम 2014 से पहले फटा करते थे, वो कहाँ चले गए…’ – UP पुलिस ने दर्ज की FIR, मौलाना तौकीर रज़ा ने मजार पर चादर चढ़ा उगला था जहर

अपने विवादित बयानों के लिए कुख्यात मौलाना तौकीर रज़ा पर उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले में FIR दर्ज कर ली गई है। यह केस तौकीर के मुस्लिम राष्ट्र वाले बयान पर दर्ज हुआ है। मामले में शिकायतकर्ता खुद पुलिस है। शिकायत में तौकीर रज़ा पर लोगों की भावनाएँ भड़काने और आम लोगों में डर फैलाने का आरोप है। रविवार (12 मार्च 2023) को यह केस दर्ज करते हुए पुलिस ने तौकीर द्वारा एक दिन पहले 11 मार्च को यह विवादित बयान देना बताया है।

यह FIR मुरादाबाद जिले के नागफनी थाने में दर्ज हुई है। मामले में शिकायत सब इंस्पेक्टर ओमपाल सिंह द्वारा दी गई है। पुलिस ने दर्ज FIR का आधार तौकीर के विवादित बयान का वायरल वीडियो बताया है। पुलिस के मुताबिक 11 मार्च को तौकीर रज़ा खान तिरंगा यात्रा लेकर बरेली से निकलकर रामपुर होते हुए मुरादाबाद पहुँचे थे। यहाँ तौकीर ने मदरसा जामिया अशरफिया तहजीबुल इस्लाम कोहना के पास मौजूद एक मजार पर चादर चढ़ाई थी। इसके बाद उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेन्स में हिस्सा लिया था।

शिकायत में आगे बताया गया है कि मौलाना तौकीर ने अपनी इसी प्रेस कॉन्फ्रेंस में समुदाय विशेष में नफरत फैलाने वाले शब्दों का प्रयोग किया। मौलाना तौकीर के शब्दों से सामाजिक सौहार्द बिगड़ने की बात लिखी गई है। साथ ही मौलाना के उस बयान का भी जिक्र है, जिसमें उन्होंने कहा कि हिन्दू राष्ट्र वाले वाले इतनी नफ़रतें बढ़ा दें कि अफरातफरी का माहौल बना दें। इसी शिकायत में तौकीर के मुस्लिम राष्ट्र वाले बयान का भी जिक्र है। शिकायत में कहा गया कि मौलाना ने कहा कि उनके नौजवान खड़े हो जाएँ और ऐलान करें कि मुसलमान देश चाहिए।

पुलिस की इस शिकायत में नवभारत चैनल पर चल रही ब्रेकिंग न्यूज़ का हवाला दिया गया है। इसी हवाले से बताया गया कि तौकीर रज़ा कह रहा, “जो बम 2014 से पहले फटा करते थे, वह बम आज कहाँ चले गए। वह बम अब क्यों नहीं फट रहा है, अगर मुसलमान उस समय फोड़ रहा था? आज मुसलमान ज्यादा परेशान है। आज मुसलमान को आतंकवादी बनना चाहिए और बम फोड़ना चाहिए। मुसलमान न उस समय बम मार रहे थे, न आज बम मार रहा है। जो बम मार रहे थे, वो हिन्दू समाज को बहकाने का काम कर रहे थे।”

ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है। पुलिस ने इस FIR में अकेले मौलाना तौकीर रज़ा को नामजद किया है। उनके खिलाफ IPC की धारा 153- A, 295- A और 505 (2) के तहत केस दर्ज हुआ है। पुलिस के मुताबिक मामले की जाँच की जा रही है।

आपको बता दें कि तौकीर रज़ा ने उस दिन यह भी कहा था कि अगर हिन्दू राष्ट्र की माँग जायज है तो खालिस्तान की भी माँग सही है। उन्होंने आगे कहा था कि अगर मुस्लिम नौजवान भी इस्लामी मुल्क की माँग करने लगें तो क्या होगा।

वंदे भारत एक्सप्रेस को चलाने वाली पहली महिला लोको पायलट: सोलापुर से CSMT तक, राइट टाइम से 5 मिनट पहले पहुँची ट्रेन

एशिया की पहली महिला लोको पायलट होने का गौरव रखने वाली सुरेखा यादव ने एक और उपलब्धि हासिल कर ली। सुरेखा ने वंदे भारत एक्सप्रेस को सोमवार (13 मार्च 2023) को सोलापुर से राइट टाइम पर चलाई और छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT) राइट टाइम से 5 मिनट पहले ही पहुँचा दी। इसके साथ ही वह वंदे भारत एक्सप्रेस चलाने वाली पहली महिला लोको पायलट भी बन गईं।

महाराष्ट्र के सतारा की रहने वाली सुरेखा यादव साल बीते 34 सालों से रेलवे में काम कर रही हैं। इस दौरान एशिया की पहली महिला लोको पायलट सुरेखा ने रेल चालक विभाग के विभिन्न पदों पर काम किया है। अब एक और कीर्तिमान उनके नाम जुड़ गया। दिलचस्प बात यह है कि साल 2021 के महिला दिवस पर उन्होंने वंदे भारत एक्सप्रेस चलाने की इच्छा जाहिर की थी। अब दो साल बाद उनकी यह इच्छा पूरी हो गई।

वंदे भारत एक्सप्रेस को सफलतापूर्वक चलाने के बाद सुरेखा यादव ने खुशी जाहिर की है। उन्होंने कहा, “भारतीय रेलवे ने मुझे नए जमाने की अत्याधुनिक ट्रेन वंदे भारत एक्सप्रेस चलाने का मौका दिया। इसके लिए मैं रेलवे की शुक्रगुजार हूँ।” बता दें कि लोको पायलट बनने के बाद वह रेलवे के लिए लोको पायलट प्रशिक्षक का भी काम करतीं हैं। मतलब वह अब तक कई लोको पायलट को ट्रेन चलाने का प्रशिक्षण दे चुकी हैं।

सुरेखा यादव द्वारा वंदे भारत एक्सप्रेस चलाने को लेकर रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने ट्वीट किया है। उन्होंने कहा, “वंदे भारत, नारी शक्ति द्वारा संचालित। श्रीमती सुरेखा यादव वंदे भारत एक्सप्रेस की पहली महिला लोको पायलट हैं।” वहीं, इसको लेकर रेलवे ने एक बयान में कहा है कि वह महिला कर्मचारियों को सशक्त बनाने के मिशन पर है।

साल 2017 में, मध्य रेलवे का माटुंगा स्टेशन महिला कर्मचारी द्वारा चलाया जाने वाला पहला स्टेशन बना था। कुछ महीने बाद, पश्चिम रेलवे ने माटुंगा रोड स्टेशन पर भी ऐसा ही करने का विचार पेश किया था। देश भर में करीब 1500 महिला लोको पायलट हैं।

बता दें कि सतारा के सेंट पॉल कॉन्वेंट स्कूल में पढ़ाई के बाद सुरेखा यादव ने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा किया था। इसके बाद साल 1986 में उन्होंने रेलवे की परीक्षा पास की थी। फिर रेलवे का इंटरव्यू भी पास करने के बाद उन्हें ट्रेनिंग दी गई और फिर सहायक लोको पायलट के रूप में नियुक्त किया गया था।

26 अवैध मजारों पर चला बुलडोजर… नीचे नहीं मिला कोई मानव अवशेष: एक्शन में उत्तराखंड की धामी सरकार, ऐसे 1400 जगह लिस्ट में

उत्तराखंड प्रशासन ने अवैध मजारों के खिलाफ बड़ा अभियान शुरू किया है। स्थानीय मीडिया में दावा किया जा रहा है कि इस अभियान के तहत प्रदेश में एक ही रात के अंदर 26 अवैध मजारों को ध्वस्त कर दिया गया। अभियान को अंजाम देने के लिए पहले से बुलडोजर तैनात कर दिए गए थे। ध्वस्त हुई मजारों में कुछ ऐसी भी हैं, जो राजधानी देहरादून के जंगली जानवरों के लिए रिजर्व क्षेत्र में बनी हुई थीं। यह कार्रवाई रविवार (12 मार्च 2023) को हुई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सभी 26 मजारें उत्तराखंड वन विभाग की जमीनों पर बनाई गई थीं। इसमें कई मजारें हाल-फ़िलहाल में बनी हुईं थीं। दिलचस्प बात यह कि इन मजारों के नीचे से कोई मानव अवशेष भी नहीं मिले।

उत्तराखंड राज्य सरकार ने लगभग 1400 ऐसे स्थानों को चिन्हित किया है, जिसमें इसी प्रकार से मजहबी निर्माण करके अतिक्रमण किया गया है। कुछ ही समय बाद उन सभी स्थानों पर इसी प्रकार की कार्रवाई की उम्मीद जताई जा रही है। इस मामले में खुद मुख्यमंत्री पुष्कर धामी द्वारा अधिकारीयों को सख्त निर्देश मिलने की बात कही जा रही है।

कुछ रिपोर्ट्स में ध्वस्त हुई मजारों की संख्या एक रात के बजाए अब तक की कुल कार्रवाई के तौर पर गिनाई गई है। बताया ये भी जा रहा है कि अभी अवैध मजारों को चिन्हित करने का काम भी जारी है।

मजारों के अलावा उत्तराखंड प्रशासन अन्य अतिक्रमणों पर भी एक्शन के मूड में है। राजधानी देहरादून में शक्ति नहर डाकपथर के किनारे बसे लोगों की भी पहचान का सत्यापन चल रहा है। कई लोगों ने खुद ही वो जगह छोड़नी शुरू कर दी। आरोप है कि यहाँ सरकारी जमीन पर बाहरी लोगों ने आकर कब्ज़ा कर लिया था।

नगर निगम ने भी शक्तिनहर किनारे की सरकारी भूमि खाली करवाने के लिए अभी से वहाँ बुलडोजर और ट्रैक्टर खड़े कर दिए हैं। लोगों के सत्यापन की प्रक्रिया खत्म होने के बाद माना जा रहा है कि यहाँ JCB मशीन चलाई जाएगी। बताया जा रहा है कि अवैध अतिक्रमण के खिलाफ साल 2018 से ही कार्रवाई की तैयारी थी लेकिन इसमें कुछ कारणों से देर लगी।

गौरतलब है कि उत्तराखंड में सरकारी जमीनों पर अवैध मजारों को ऑपइंडिया ने भी अपनी ग्राउंड रिपोर्ट में बताया था। तब हमने बाघों के लिए दुनिया भर में मशहूर जिम कार्बेट पार्क के अंदर जाकर वहाँ मौजूद मजारों को दिखाया था। इसके अलावा देहरादून के प्रसिद्ध संत स्वामी दर्शन भारती ने भी हमसे बात करते हुए लैंड जिहाद को उत्तराखंड के आने वाले भविष्य के लिए खतरनाक संकेत बताया था।

‘लिखकर दो कि गोली नहीं मारोगे’ – जिस रिजवान ने अपनी बीवी पर डाला एसिड… उसे भी UP पुलिस से एनकाउंटर का डर

उत्तर प्रदेश के हरदोई जेल से इलाज के लिए हॉस्पिटल लाए गए कैदी ने वापस जेल जाने से इनकार कर दिया। वह एनकाउंटर से डरा हुआ है। वापस जेल जाने को लेकर उसने यूपी पुलिस से कहा कि पहले लिखकर दो गोली नहीं मारोगे, तभी जेल जाऊँगा। उसका यह भी कहना था कि सीएम योगी ने ना जाने कौन सी बूटी पुलिस को सुँघा दी है कि वह पैर पर ही गोली मारती है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एनकाउंटर के डर से जेल न जाने की बात कहने वाले इस कैदी का नाम रिजवान है। आरोप है कि साल 2014 में उसने अपनी पत्नी नाजरा बेगम पर एसिड डाल दिया था। इससे वह बुरी तरह झुलस गई थी। पीड़ित महिला की शिकायत पर पुलिस ने रिजवान के खिलाफ केस दर्ज करते हुए उसे जेल में डाल दिया था।

रिजवान को इस मामले में हालाँकि बाद में कोर्ट से जमानत मिल गई थी। लेकिन जमानत के बाद वह फरार हो गया था। इसके बाद अदालत ने उसके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया था। पाँच महीने पहले ही रिजवान ने पुलिस के डर से सरेंडर किया था।

दरअसल, रिजवान को किडनी की बीमारी है। इसलिए KGMU लखनऊ के डॉक्टर्स ने उसे डायलिसिस कराने के लिए कहा था। इसके चलते ही उसे हरदोई मेडिकल कॉलेज ले जाया गया था। लेकिन उसने हँगामा करते हुए डायलिसिस कराने से भी मना कर दिया। इसके बाद मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर्स ने उसे KGMU ही ले जाने की सलाह दी।

पुलिस जब रिजवान को एंबुलेंस में बैठाकर ले जाने लगी तो उसने बैठने से इनकार कर दिया। यही नहीं वो हंगामा करते हुए पुलिसकर्मियों से गोली ना मारने की बात कहने लगा। उसका कहना था कि पुलिस उसे लिखकर दे कि रास्ते में गोली नहीं मारेगी, तभी वह उनके साथ जाएगा। पुलिस वालों के बार-बार आश्वस्त करने के बाद भी वह KGMU जाने को तैयार नहीं हुआ। लेकिन बाद में कोतवाली पुलिस की कार में बैठकर जिला जेल चला गया।

सिलिकन वैली के बाद अमेरिका के एक और बैंक में लगा ताला: राष्ट्रपति बायडेन को जारी करना पड़ा बयान, 2008 की मंदी में आए थे ऐसे बुरे हालात

अमेरिका के बैंकिंग सेक्टर में बड़ी उथल-पुथल देखने को मिल रही है। सिलिकॉन वैली बैंक बंद होने के बाद अब एक और अमेरिकी बैंक में ताला लग गया। बंद होने वाला नया बैंक सिग्नेचर बैंक (Signature Bank है। फिलहाल इस बैंक को अस्थायी रूप से बंद किया गया है। लेकिन यह बैंक कब खुलेगा और कभी खुलेगा भी या नहीं इस बारे में कुछ भी कह पाना संभव नहीं है।

न्यूयॉर्क के वित्तीय सेवा विभाग के अनुसार सिग्नेचर बैंक का नियंत्रण अब फेडरल डिपॉजिट इंश्योरेंस कॉरपोरेशन (FDIC) के पास। इस बैंक के पास साल 2022 के अंत में 110.36 बिलियन डॉलर की संपत्ति थी। वहीं, बैंक के खातों में 88.59 डॉलर जमा थे। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग और अन्य बैंक नियामकों ने एक संयुक्त बयान में कहा है कि सिग्नेचर बैंक और सिलिकॉन वैली बैंक के सभी खाताधारकों को उनके पैसे का भुगतान किया जाएगा। करदाताओं (टैक्स देने वालों) को किसी प्रकार का नुकसान नहीं उठाना पड़ेगा।

बैंकिंग सेक्टर में आ रही भारी गिरावट के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति जो बायडेन का बयान भी सामने आया है। बायडेन ने कहा है कि बैंकों के डूबने के लिए जो लोग भी जिम्मेदार हैं हैं पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने सिलिकॉन वैली और सिग्नेचर बैंक के खाताधारकों को कहा है कि उनके पैसे सुरक्षित हैं। बाइडेन ने यह भी कहा है कि उन्होंने सेक्रेटरी येलेन, नेशनल इकोनॉमिक काउंसिल डायरेक्टर बैंकिंग रेगुलेटर के साथ बैठक की है। इस बैठक में उन्होंने सिलिकॉन वैली बैंक और सिग्नेचर बैंक संकट को दूर करने का निर्देश दिया है।

बता दें कि सिलिकॉन वैली बैंक के बाद सिग्नेचर बैंक का बंद होना अमेरिका के बैकिंग सेक्टर के इतिहास में तीसरी बड़ी असफलता है। इससे पहले साल 2008 में आई आर्थिक मंदी के बाद वाशिंगटन म्यूचुअल बैंक को बंद करना पड़ा था। गौरतलब है कि इससे पहले शुक्रवार (10 मार्च 2023) अमेरिकी रेगुलेटर्स ने देश के सबसे बड़े बैंकों में शुमार सिलिकॉन वैली बैंक (Silicon Valley Bank) को बंद करने के आदेश दे दिए थे। बीते महीने ही बैंक को फोर्ब्स पत्रिका द्वारा अमेरिका के सर्वश्रेष्ठ बैंको की सूची में स्थान दिया गया था।

कैलिफोर्निया के डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेंशियल प्रोटेक्शन और इनोवेशन द्वारा बैंक को बंद करने के आदेश के साथ ही फेडरल डिपॉजिट इंश्योरेंस कॉरपोरेशन (FDIC) को बैंक का रिसीवर नियुक्त किया गया है। बैंक के ग्राहकों के पैसों की सुरक्षा भी FDIC ही संभालेगी।