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भगवान शंकर की तस्वीर को फाड़ा, फिर होलिका में डाल जला दिया: मोहम्मद समीर और शाहिद खान समेत 7 धराए, 5 हैं नाबालिग

छत्तीसगढ़ के रायपुर (Raipur, Chhattisgarh) में धार्मिक पोस्टर फाड़कर जलाने के मामले में सैकड़ों लोग सड़क पर उतर कर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। लोगों की नाराजगी को देखते हुए पुलिस ने इस मामले में समीर और शाहिद खान सहित 7 लड़कों को गिरफ्तार किया है। बाकी के 5 लड़के नाबालिग बताए जा रहे हैं।

ये घटना गुढ़ियारी इलाके के घटना रामनगर की है। यहाँ कुछ लोगों ने देवी-देवताओं के पोस्टर लगवाए थे। होलिका दहन के वक्त रात में कुछ बदमाशों ने इसे फाड़ा और फिर होलिका में डालकर भाग गए। शुक्रवार (10 मार्च 2023) को इसका CCTV फुटेज सामने आया तो लोग आक्रोशित होकर विरोध में सड़कों पर सड़कों पर उतर आए।

लोगों के गुस्से को देखते हुए पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए 7 आरोपितों को पकड़ लिया। हालात को देखते हुए। मौके पर तीन थानों की पुलिस को बुलाया गया और लोगों को समझाने की कोशिश की जाती रही। हालाँकि, भीड़ संदिग्ध लड़कों के घर जाने का प्रयास कर रही थी, लेकिन पुलिस इन्हें रोकती रही।

पुलिस अधिकारियों ने जाम लगाए प्रदर्शनकारियों को घंटों तक समझाया। अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि पोस्टर फाड़कर जलाने वालों को किसी भी कीमत पर छोड़ नहीं जाएगा। अधिकारियों ने इसके लिए अलग-अलग टीम बनाकर आरोपितों को पकड़ने में लगाया। इसके बाद लोग सड़क से हटने को राजी हुए और भीड़ छँटी।

पुलिस ने आरोपितों पर धार्मिक भावनाएँ आहत करने का केस दर्ज किया है। आरोपितों पर IPC की धारा 295(क) और 34 लगाया गया है। पकड़े गए युवकों में 19 साल का शाहिद खान और 18 साल का समीर शामिल हैं। ये सभी आरोपित रामनगर इलाके में रहते हैं। गुढ़ियारी में तनाव है। गिरफ्तार किए गए युवकों से पूछताछ जारी है।

रायपुर पश्चिम एडिशनल एसपी डीसी पटेल ने बताया कि होलिका दहन की रात होलिका जलाई जा रही थी। उसी समय पास में लगे भगवान शिव के पोस्टर को कुछ असामाजिक तत्वों ने होलिका में डालकर जला दिया था। इस पर मोहल्ले वालों ने अपना रोष व्यक्त किया। इसको देखते हुए पुलिस की टीम लगातार गश्त कर रही है। वहीं,

भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच क्रिकेट के 75 साल: BCCI ने PM मोदी और अल्बनीज को दिया खूबसूरत गिफ्ट

भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच बॉर्डर गावस्कर ट्रॉफी (Border Gavaskar Trophy) का चौथा और आखिरी मैच अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेला जा रहा है। मैच के पहले दिन भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज मैच देखने पहुँचे थे। वहाँ BCCI ने दोनों देशों के प्रधानमंत्री को उपहार में फोटो भेंट की थी। इस फोटो में भारत और ऑस्ट्रेलिया के क्रिकेटरों की फोटो का कोलाज बना हुआ था।

दरअसल, भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच क्रिकेट सीरीज शुरू हुए 75 साल पूरे हो चुके हैं। इस मौके को यादगार बनाने के लिए नरेंद्र मोदी स्टेडियम में कार्यक्रम आयोजित किया गया था। चूँकि ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज भारत के दौरे पर हैं, ऐसे में पीएम मोदी (Narendra Modi) और एंथनी अल्बनीज (Anthony Albanese) भारत-ऑस्ट्रेलिया टेस्ट मैच को देखने के लिए स्टेडियम पहुँचे थे।

इस मैच के दौरान भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) अध्यक्ष रोजर बिन्नी ने ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज का सम्मान करते हुए उन्हें एक फोटो भेंट की थी। इसी तरह बीसीसीआई सचिव जय शाह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक फोटो भेंट की थी।

पहली नजर में इन फोटोज को देखने में ऐसा लग रहा था कि ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री को उनकी खुद की फोटो तथा पीएम मोदी को भी उनकी ही फोटो भेंट की गई है। हालाँकि यह अधूरा सच है। वास्तव में, इस फोटो के बैकग्राउंड में बीते 75 सालों में भारत और ऑस्ट्रेलिया का प्रतिनिधित्व कर चुके क्रिकेटरों की फोटो का कोलाज तैयार किया गया है।

इससे पहले पीएम मोदी और अल्बनीज ने स्टेडियम का ‘लैप ऑफ ऑनर’ लगाया था। पीएम मोदी और अल्बनीज गोल्फ के मैदान में इस्तेमाल किए जाने वाले मोटर वाहन में सवार हुए और स्टेडियम का चक्कर लगाया। मैच शुरू से होने पहले प्रधानमंत्री मोदी ने भारतीय कप्तान रोहित शर्मा और एंथनी अल्बनीज ने ऑस्ट्रेलियाई कप्तान स्टीव स्मिथ को टेस्ट कैप सौंपी।

बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी की बात करें तो टीम इंडिया पहले ही इस सीरीज में 2-0 की अजेय बढ़त हासिल कर चुकी है। हालाँकि विश्व टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) के फाइनल में पहुँचने के लिए भारत को यह टेस्ट जीतना बेहद जरूरी है।

यदि टीम इंडिया को इस मैच में हार मिलती है या फिर मैच ड्रा पर समाप्त होता है तो फिर WTC फाइनल का रास्ता श्रीलंका और न्यूजीलैंड के बीच चल रही टेस्ट सीरीज के नतीजे पर निर्भर करेगा। यदि श्रीलंका न्यूजीलैंड को 2-0 से हरा देता है तो वह WTC के फाइनल में पहुँच जाएगा। यदि ऐसा नहीं होता है तो भारत ऑस्ट्रेलिया के साथ WTC के फाइनल में भिड़ेगा।

मस्जिदों में लाउडस्पीकर और इफ्तार पर पाबंदी, बच्चों के जाने पर भी रोक: सऊदी अरब में रमजान को लेकर जारी हुआ फरमान

सऊदी अरब में 22 मार्च 2023 से शुरू हो रहे रमजान को लेकर कई पाबंदियाँ लगा दी गई हैं। जारी की गई नई गाइडलाइन्स के मुताबिक, मस्जिदों में लाउडस्पीकर बजाने के साथ-साथ इफ्तार पार्टी पर रोक लगा दी गई है। इसके अलावा, बिना आईडी के ऐतिकाफ के लिए बैठने और नमाज के प्रसारण पर भी रोक लगा दी गई है।

सऊदी अरब के इस्लामी मामलों के मंत्री शेख डॉक्टर अब्दुल लतीफ बिन अब्दुलअजीज अल-अलशेख की तरफ से 10-सूत्री निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए उन्होंने लिस्ट जारी की है। मंत्रालय की तरफ से जारी हुक्म में कहा गया है कि इमाम और मोअज्जिन रमजान के दौरान गैर-हाजिर नहीं रहेंगे। किसी आपात स्थिति में इमाम और मोअज्जिन अपनी जगह किसी और को नियुक्त करके ही जाएँ।

इमाम और मोअज्जिन को शाम की नमाज़ को छोटा रखने और रात की नमाज़ को पर्याप्त समय के साथ पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा, लोगों से कहा गया है कि वे अपने बच्चों को लेकर मस्जिद न आएँ। इसके पीछे तर्क दिया गया है कि बच्चे लोगों को परेशान करते हैं और इससे लोगों की इबादत में खलल पड़ता है।

आदेश के अनुसार, नमाज के दौरान मस्जिद में लाउडस्पीकर के अलावा फोटोग्राफी और प्रसारण पर भी रोक लगाई गई है। मस्जिद में इफ्तार की भी इजाजत नहीं है। इसलिए इफ्तार के लिए चंदा जुटाने पर भी पाबंदी लगा दी गई है। यदि कोई व्यक्तिगत रूप से रोजेदार को इफ्तार कराना चाहता है तो वह इमाम की इजाजत लेकर मस्जिद के अहाते (परिसर) में करा सकता है, लेकिन इसकी साफ-सफाई का भी इंतजाम खुद करना होगा।

रमजान के आखिरी 10 दिनों में ‘एतिकाफ’ के लिए भी कड़े नियम बनाए गए हैं। इतिकाफ के लिए मस्जिद के इमाम से इजाजत लेनी होगी। मस्जिद का इमाम ही उन्हें सत्यापित करेगा। बता दें कि ‘ऐतिकाफ’ इस्लाम में एक प्रथा है, जिसमें रमजान के आखिरी के 10 दिनों के दौरान कुछ लोग मस्जिद में एकान्त होकर अल्लाह की इबादत करते हैं। 10 दिनों तक ये लोग मस्जिद में ही रहते हैं।

‘भारत के खिलाफ एजेंडा चलाने की अनुमति नहीं दी जाएगी’: PM मोदी और भारत के खिलाफ दुष्प्रचार पर केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने न्यूयॉर्क टाइम्स को लताड़ा

केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर (Information & Broadcast Minister Anurag Thakur) ने शुक्रवार (10 मार्च 2023) को न्यूयॉर्क टाइम्स (NYT) पर जमकर निशाना साधा। केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री ने 8 मार्च 2023 को छपे एक लेख को लेकर NYT पर भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) के खिलाफ झूठ फैलाने का आरोप लगाया। इस लेख को ‘द कश्मीर टाइम्स’ की कार्यकारी संपादक अनुराधा भसीन ने लिखा था।

ट्विटर पर थ्रेड के जरिए अनुराग ठाकुर ने देश और पीएम मोदी के खिलाफ दुष्प्रचार के लिए NYT समेत कुछ विदेशी मीडिया घरानों को जमकर फटकार लगाई। अनुराग ठाकुर ने ट्वीट किया, “न्यूयॉर्क टाइम्स ने भारत के संबंध में कुछ भी लिखने से पहले तटस्थता जैसी चीजों को बहुत पहले ही छोड़ दिया था। कश्मीर में प्रेस की आजादी पर न्यूयॉर्क टाइम्स का ऑप-एड (ओपिनियन) झूठ और काल्पनिक है, जिसका एकमात्र उद्देश्य भारत के बारे में दुष्प्रचार फैलाना है।”

अनुराग ठाकुर आगे लिखते हैं, “न्यूयार्क टाइम्स और कुछ अन्य विदेशी मीडिया घराने भारत और लोकतांत्रिक रूप से चुने गए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर लगातार झूठ फैलाते रहते हैं। इस तरह के झूठ लंबे समय तक नहीं चल सकते।”

उन्होंने कहा कि कुछ विदेशी मीडिया भारत और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ द्वेष की भावना से ग्रसित हैं। वे लोग लंबे समय से भारतीय लोकतंत्र और बहुसंख्यक समाज के बारे में झूठ फैला रहे हैं। भारत में अन्य मौलिक अधिकारों की तरह ही प्रेस की स्वतंत्रता को स्थान दिया गया है।

केंद्रीय मंत्री ने लिखा कि भारत का लोकतंत्र बहुत ही परिपक्व है और देश को किसी एजेंडाबाज मीडिया से लोकतंत्र की शिक्षा लेने की आवश्यकता नहीं है। अनुराग ठाकुर ने कश्मीर में प्रेस की आजादी को लेकर NYT द्वारा फैलाए जा रहे झूठ की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा कि भारतीय अपनी धरती पर इस तरह का एजेंडा चलाने की अनुमति नहीं देगा।

न्यूयॉर्क टाइम्स में किसने क्या लिखा?

8 मार्च 2023 को कश्मीर टाइम्स की कार्यकारी संपादक अनुराधा भसीन ने न्यूयॉर्क टाइम्स में भारतीय मीडिया और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के खिलाफ पीएम मोदी के रुख की आलोचना करते हुए एक ऑप-एड लिखा था। अनुराधा ने न्यूयॉर्क टाइम्स में ‘भारत की प्रेस स्वतंत्रता पर मोदी का अंतिम हमला शुरू (Modi’s final assault on India’s Press Freedom has begun) शीर्षक से लेख लिखा था। अपने आर्टिकल में उन्होंने पीएम मोदी पर देश में दमनकारी मीडिया नीति लागू करने जैसे आरोप लगाए थे।

आर्टिकल के जरिए यह भी आरोप लगाया गया कि मोदी सरकार के खिलाफ आवाज उठाने वाले मीडिया घरानों को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने लिखा है कि ‘द कश्मीर टाइम्स’ भी मोदी से नहीं बच सका। पीएम मोदी चाहते हैं कि सभी मीडिया घराने सरकार के मुखपत्र की तरह कार्य करे।

आर्टिकल में सरकार पर कश्मीर को सूचना शून्य बनाने का आरोप लगाया गया। इसके अलावा इस लंबे लेख में पत्रकारों को पुलिस द्वारा परेशान करने, आयकर उल्लंघन, आतंकवाद और अलगाववाद जैसे आरोपों के साथ धमकाने जैसे आरोप भी लगाए गए हैं। कुल मिलाकर आर्टिकल द्वारा कश्मीर को लेकर देश और प्रधानमंत्री की छवि खराब करने की कोशिश की गई है।

17 मार्च तक ED की कस्टडी में रहेंगे मनीष सिसोदिया, कोर्ट को बताया- दूसरों के नाम पर सिम यूज करते थे AAP नेता: जमानत पर सुनवाई 23 मार्च तक टली

दिल्ली के पूर्व उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को जोरदार झटका लगा है। उनकी जमानत पर सुनवाई 21 मार्च तक के लिए टल गई है। वे 17 मार्च तक प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कस्टडी में रहेंगे। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने शुक्रवार (10 मार्च 2023) को प्रवर्तन निदेशालय को सिसोदिया की 7 दिन की रिमांड दी। एजेंसी ने 10 दिन की रिमांड माँगी थी, जिसका आप नेता के वकीलों ने पुरजोर विरोध किया था।

ईडी ने अदालत को बताया कि शराब घोटाले की जाँच में सिसोदिया सहयोग नहीं कर रहे हैं। लिहाजा उन्हें रिमांड पर लेकर पूछताछ जरूरी है। इससे पहले अदालत ने इसी आधार पर सीबीआई को भी सिसोदिया की रिमांड दी थी।

शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान ईडी ने सिसोदिया पर सबूत नष्ट करने का भी आरोप लगाया। कहा कि वे दूसरे लोगों के नाम से सिम कार्ड खरीद कर इस्तेमाल करते थे ताकि मामला खुलने पर खुद का बचाव कर सकें। ईडी ने अदालत से कहा कि शराब घोटाले में मनीष सिसोदिया की सीधी भूमिका है। लाभ का मार्जिन 12 प्रतिशत त​क रखा गया, जो पूरी तरह से नीति के खिलाफ था। जाँच एजेंसी के मुताबिक, कुछ लोगों को फायदा देने के लिए मनीष सिसोदिया ने ये सब किया। शराब की बिक्री के लिए जो नीति तय की गई थी उसका उल्लंघन किया गया।

ईडी ने कोर्ट से कहा, “लेन-देन को लेकर मनीष सिसोदिया का बयान अन्य लोगों के बयानों से मेल नहीं खाता है। इसलिए 10 दिनों की हिरासत की माँग की जा रही है ताकि अन्य लोगों से आमने-सामने बिठाकर पूछताछ की जा सके।” वहीं, मनीष सिसोदिया की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता दयान कृष्णन ने कहा कि ईडी का रिमांड के लिए आवेदन ही कानूनन गलत है। कोर्ट को ऐसे आवेदन पर जाँच एजेंसी को फटकार लगानी चाहिए।

बता दें कि मनी लॉन्ड्रिंग के केस में गुरुवार (9 मार्च 2023) को करीब 8 घंटे की पूछताछ के बाद ईडी ने सिसोदिया को गिरफ्तार किया था। प्रवर्तन निदेशालय ने उनके ऊपर ये कार्रवाई उनकी जमानत याचिका पर होने वाली सुनवाई से ठीक एक दिन पहले की थी। इससे पहले शराब घोटाला मामले में पूछताछ के बाद सीबीआई ने मनीष सिसोदिया को गिरफ्तार किया था, जिसके बाद सिसोदिया ने सीबीआई की कार्रवाई को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।

कानुपर धर्मांतरण रैकेट की NIA और STF करेगी जाँच, हिंदुओं को ईसाई बनने के लिए मकान-नौकरी से लेकर शादी तक का दिया जा रहा था लालच

उत्तर प्रदेश के कानुपर में पिछले दिनों ईसाई धर्मांतरण रैकेट (Conversion case in Kanpur) का खुलासा हुआ था। अब इसकी जाँच नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) और यूपी की स्पेशल टास्क फोर्स (UPSTF) करेगी। श्याम नगर के किराए के एक फ्लैट से यह रैकेट चलाया जा रहा था। दो लोगों को गिरफ्तार कर फोटो, वीडियो, कंप्यूटर और विदेशी भाषा में लिखी कुछ पुस्तकें भी बरामद की गई थीं।

संयुक्त पुलिस आयुक्त आनंद प्रकाश तिवारी के अनुसार कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जाँच NIA और STF को देने का फैसला किया गया है। फतेहपुर और प्रयागराज धर्मांतरण मामले की जाँच करने वाली टीम ही इस मामले को भी देखेगी।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, धर्म परिवर्तन मामले में पुलिस ने अब तक कई लोगों के बयान दर्ज किए हैं। पुलिस ने बताया है कि अब तक की जाँच में सामने आया है कि आरोपित और उनके सहयोगी चकेरी के आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से स्कूलों के बच्चों को पिकनिक के बहाने श्याम नगर स्थित फ्लैट पर लाते थे। इसके बाद बंद कमरे में उनका ब्रेनवॉश किया जाता था। पुलिस का कहना है कि आरोपित पिछले कई सालों से इस काम में लगे हुए थे। धर्म परिवर्तन कराने के लिए उन्हें मोटी रकम मिलती थी।

संयुक्त पुलिस आयुक्त आनंद प्रकाश तिवारी ने कहा कि इस मामले में किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा। मामले की गंभीरता से जाँच चल रही है। आरोपितों से फंडिंग और उनके आकाओं की पूरी जानकारियाँ जुटाई जा रही हैं। पुलिस की कई टीमों को जाँच में लगाया गया है। जल्द ही सभी आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

उल्लेखनीय है कि कानपुर में चकेरी थाना क्षेत्र के एक फ्लैट से 6 मार्च 2023 को धर्मांतरण मामले में पुलिस ने दो आरोपितों को गिरफ्तार और कई लोगों को हिरासत में लिया था। ये दोनों लोगों को अच्छी नौकरी, बिजनेस, मकान और शादी का लालच देकर उन्हें बरगलाने का काम करते थे।

स्थानीय लोगों ने शिकायत की थी कि फ्लैट में धर्मांतरण का कार्य होता है। इसको लेकर बजरंग दल और विहिप के कार्यकर्ता वहाँ पहुँचे और उन्होंने फ्लैट पर 50 से अधिक पुरुष और महिलाओं को पाया था। विश्व हिंदू परिषद के उपाध्यक्ष आनंद सिंह ने बताया था कि इन सब लोगों का फ्लैट में ब्रेनवॉश हो रहा था। उन्हें ईसाई धर्म से जुड़े साहित्य भी उपलब्ध कराए गए थे। उनके मुताबिक करीब 8-10 लोगों को हिंदू धर्म छोड़कर ईसाई बनने को कहा जा रहा था।

स्पेशल मैरिज ऐक्ट में शादी करने वाले मुस्लिम जोड़े के खिलाफ फतवा, मिल रही है धमकी: केरल पुलिस ने घर के पास बढ़ाई निगरानी

केरल के कासरगोड जिले में रहने वाले मुस्लिम जोड़े द्वारा दोबारा शादी करने पर धमकी दी जा रही है। इस मुस्लिम जोड़े और उसके परिवार को इस्लामी कट्टरपंथियों द्वारा धमकियाँ दी जा रही हैं। यही नहीं, इस शादी द्वारा शरीयत कानून का मजाक बनाने का आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ फतवा भी जारी किया गया है। दरअसल, केरल के एक्टर और वकील सी शुक्कुर ने अपनी पत्नी शीना से अपने निकाह के 29 साल फिर से शादी की।

केरल के एक्टर और वकील सी शुक्कुर ने यह शादी अपनी बेटियों को आर्थिक सुरक्षा के लिए विशेष विवाह अधिनियम (Special Marriage Act) के तहत की, लेकिन अब उन्हें धमकियाँ मिल रहीं हैं। इसको लेकर पुलिस ने कहा, “कुछ संगठनों द्वारा सी शुक्कुर और उनके परिवार को धमकियाँ दी जा रही हैं। धमकियों को देखते हुए कान्हागढ़ में स्थित उनके घर के आसपास सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है।”

पुलिस का कहना है, “शुक्कुर परिवार को व्यक्तिगत सुरक्षा नहीं दी गई है। यह उनके परिवार या घर को दी गई पूर्णकालिक सुरक्षा भी नहीं है। बीते कुछ दिनों में मीडिया ने उनकी इस शादी को बड़े पैमाने पर दिखाया है। वहीं, कुछ अखबारों ने शुक्कुर के खिलाफ जारी किए फतवों की खबर भी प्रकाशित की है। हालाँकि पुलिस के पास इस परिवार को मिल रहीं धमकियों के बारे में भी कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है, लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स को देखते हुए इलाके में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई है।”

यही नहीं, दारुल हुदा इस्लामिक यूनिवर्सिटी ने इस शादी को ड्रामा करार देते हुए सी शुक्कुर और उनकी पत्नी के खिलाफ फतवा जारी किया है। दारुल हुदा इस्लामिक यूनिवर्सिटी के काउंसिल फॉर फतवा एंड रिसर्च का कहना है कि विशेष विवाह अधिनियम के तहत एडवोकेट सी शुक्कुर और उनकी पत्नी डॉ शीना शुक्कुर की शादी मुस्लिम पर्सनल लॉ का मजाक उड़ाने के लिए किया गया ड्रामा है।

इस्लामी यूनिवर्सिटी ने कहा, “बच्चों के जीवित रहने पर उनकी सारी संपत्ति उन्हें सौंपने के खिलाफ कोई कानून नहीं है। पर्सनल लॉ केवल उत्तराधिकारी के लिए मायने रखता है। जो लोग अल्लाह में विश्वास करते हैं और उसकी पूर्णता को स्वीकार करते हैं, उन्हें इसको लेकर कोई पछतावा नहीं होगा। उन्हें यह लालच नहीं होगा कि उनकी संपत्ति उनके बच्चों के पास ही जानी चाहिए।”

बता दें कि अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस यानी 8 मार्च 2023 को एक्टर और वकील सी शुक्कुर ने अपनी पत्नी डॉ. शीना शुक्कुर से शादी की थी। सी शुक्कुर ने साल 2022 में आई फिल्म ‘नना थान केस कोडू’ में वकील की भूमिका निभाई थी। वहीं, डॉ. शीना महात्मा गाँधी विश्वविद्यालय की वाइस चांसलर रही हैं। दोनों का साल 1994 में निकाह हुआ था। हालाँकि अब उन्होंने विशेष विवाह अधिनियम (Special Marriage Act) के तहत शादी की।

क्यों करनी पड़ी दोबारा शादी…?

दरअसल, सी शुक्कुर और डॉ. शीना का निकाह हुआ था। निकाह मुस्लिम पर्सनल लॉ यानी शरीयत कानून के अंतर्गत आता है। शरिया कानून के अनुसार बेटियों को पिता की संपत्ति में बराबरी का अधिकार नहीं मिलता।

इसका मतलब यह है कि शुक्कुर की मौत के बाद उनकी बेटियों को संपत्ति में सिर्फ कुछ हिस्सा ही मिलता। चूँकि शुक्कुर के बेटा नहीं है। ऐसे में शेष बचे हिस्से में शुक्कुर के भाइयों का अधिकार होगा। ऐसे में शुक्कुर ने अपनी बेटियों को आर्थिक रूप से मजबूत करने के लिए विशेष विवाह अधिनियम के तहत दोबारा शादी करने का फैसला किया।

एक फेसबुक पोस्ट में शुक्कुर ने कहा है कि हाल के दिनों में कुछ ऐसा हुआ जिससे वह यह सोचने में मजबूर हो गए कि वह मृत्यु के बाद अपनी बेटियों के लिए क्या छोड़ कर जाएँगे। उनकी चिंता थी कि क्या उनकी संपत्ति में उनकी बेटियों को पूरा अधिकार मिलेगा।

भारत में Youtube पर गुलशन कुमार की हनुमान चालीसा का डंका: व्यूज 3 बिलियन के पार, सबसे ज्यादा बार प्ले किया जाने वाला वीडियो बना

यूट्यूब पर आपको हनुमान चालीसा के कई वर्जन मिलेंगे। इनसे से सबसे ज्यादा लोकप्रिय टी-सीरीज का वह ‘हनुमान चालीसा’ है जिसमें गुलशन कुमार दिखते हैं। इसे हरिहरन ने आवाज दी है। यह भारत का यूट्यूब पर सबसे ज्यादा देखा जाने वाला वीडियो बन गया है। इसका व्यूज 3 अरब से ज्यादा हो गया है।

टी-सीरीज ने ट्वीट कर इस उपलब्धि की जानकारी दी है। 10 मई 2011 को यह वीडियो अपलोड किया गया था। 9 मिनट 41 सेकेंड के इस वीडियो में पूरी हनुमान चालीसा है। आपको बता दें कि साल 1983 गुलशन कुमार ने टी-सीरीज कंपनी शुरू की थी और आज इस कंपनी की ब्रैंड वैल्यू करोड़ों में है।

टी-सीरीज ने इस मुकाम पर पहुँचने के लिए लोगों को धन्यवाद देते हुए गुरुवार (9 मार्च 2023) को ट्वीट किया, “जश्न शुरू हो गया है, क्योंकि हनुमान चालीसा ने 3 अरब लोगों के दिलों में अपनी जगह बना ली है। YouTube पर 3 बिलियन से अधिक बार देखे जाने वाला पहला भारतीय वीडियो बनाने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।”

इसको लेकर सोशल मीडिया पर एक यूजर ने लिखा, “पहले लॉकडाउन के दौरान लगभग 8 दिनों तक हर रोज इस वीडियो को सुनने और देखने के बाद यह मेरे दिल में बस गया। जय श्री राम जय श्री हनुमान।”

इससे पहले अक्टूबर 2021 में इस हनुमान चालीसा का यूट्यूब पर 2 बिलियन व्यूज पूरा हुआ था। इसका जश्न मनाते हुए गुलशन कुमार के बेटे निर्माता भूषण कुमार ने लंगर का आयोजन किया था। इस दौरान भूषण कुमार की माँ कृष्ण कुमार, बहन तुलसी कुमार और खुशाली कुमार भी मौजूद थीं।

कौन थे गुलशन कुमार

गुलशन कुमार टी-सीरीज कंपनी के संस्थापक थे। उनका पूरा नाम गुलशन कुमार दुआ था। एक पंजाबी परिवार में जन्मे गुलशन कुमार ने बेहद कम समय में उन बुलंदियों को हासिल किया, जहाँ पहुँचने का सपना हर कोई देखता है। उनके पिता दिल्ली के दरियागंज बाजार में फ्रूट जूस के विक्रेता थे। उन्होंने परिवार की आर्थिक मदद के लिए 23 साल की उम्र में एक दुकान ले ली और वहाँ पर सस्ते ऑडियो कैसेट बेचना शुरू कर दिया था। कुछ समय बाद उनके काम ने रफ्तार पकड़ ली। 1970 में उन्होंने नोएडा में अपनी एक कंपनी खोल दी और घर-घर में उनके कैसेट्स बजने लगे। इसके बाद वह अपना बिजनेस बढ़ाने के लिए मुंबई आ गए और कंपनी का नाम बदलकर टी-सीरीज रख दिया। उनके स्टूडियो में कई गाने और रिमिक्स सॉन्ग बनाए गए। साथ ही उन्होंने कुमार सानू, सोनू निगम और अनुराधा पौडवाल जैसे कई सिंगर्स को गाने का मौका भी दिया।

12 अगस्त 1997 को मुंबई के अँधेरी इलाके में एक शिव मंदिर से बाहर आते ही गुलशन कुमार की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। कहा जाता है कि गुलशन कुमार से अंडरवर्ल्ड ने फिरौती माँगी थी, जिसे देने से उन्होंने इनकार कर दिया था। इसी कारण डॉन अबू सलेम ने गुलशन कुमार की हत्या करवा दी थी। इस मामले में पुलिस ने नदीम सैफी को आरोपित बनाया था।

‘निकाह कर नहीं तो गोली मार दूँगा’: 9वीं की हिंदू छात्रा को धमकी, पीड़िता की माँ ने CM योगी से लगाई गुहार

उत्तर प्रदेश के कन्नौज (Kannauj, Uttar Pradesh) जिले में एक हिंदू लड़की पर निकाह करने के लिए दवाब डालने का मामला सामने आया है। आरोप है कि मोहम्मद सकलेन नामक युवक 9वीं कक्षा में पढ़ने वाली छात्रा के साथ अश्लील हरकत करता था। मना करने पर सकलेन और उसके परिवार वालों ने मारपीट कर तेजाब फेंकने तथा जान से मारने की धमकी दी। इस मामले में पीड़िता ने पुलिस से शिकायत कर की है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री को पत्र भी लिखा है।

मामला कन्नौज जिले के छिबरामऊ थाना क्षेत्र के कांशीराम कॉलोनी का है। पीड़िता का कहना है कि वह 9वीं कक्षा की छात्रा है। जब वह पढ़ने के लिए इंटर कॉलेज जाती है तो सकलेन नामक मुस्लिम युवक उसका पीछा करते हुए उस पर निकाह का दवाब बनाता है। निकाह नहीं करने पर जान से मारने की धमकी देता है। पीड़िता ने जब पूरे मामले की जानकारी अपनी माँ को दी तो माँ ने आरोपित के घर जाकर शिकायत की। इसके बाद भी सकलेन नहीं माना और पीड़िता को गोली मारने की धमकी देने लगा।

इस मामले में पीड़िता की माँ ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखा है। यह पत्र अब सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है। इस पत्र में पीड़िता की माँ ने आरोप है कि सकलेन उसकी बेटी का पीछा करते हुए छेड़छाड़ तथा अश्लील हरकत करता है। इसके साथ ही उस पर निकाह करने का दवाब भी बना रहा है।

पत्र में पीड़िता की माँ ने आगे कहा है कि उसने आरोपित सकलेन के घर जाकर भी इसकी शिकायत की थी। जहाँ आरोपित की माँ पिच्ची और बहन सबूबी ने कहा कि उसके भाई से निकाह करने में क्या दिक्कत है। इसके बाद आरोपित सकलेन अपनी माँ और बहन के साथ पीड़िता के घर जाकर उसके भाई-बहन के साथ मारपीट की। यही नहीं निकाह नहीं करने पर पीड़िता को रोज छेड़ने तथा उसके पिता पर तेजाब फेंकने और जान से मारने की धमकी दी।

कन्नौज के एसपी ने भी इस मामले में कहा कि आरोपित के खिलाफ साल 2021 में भी शिकायत की गई थी। इस मामले में मुकदमा पंजीकृत किया गया था। एसपी ने बताया कि इस मुकदमे मेें आरोपित जेल भी गया था।

इस मामले में प्रभारी निरीक्षक संतोष कुमार कुशवाहा का कहना है कि पीड़िता की शिकायत के आधार पर जाँच की जा रही है। उक्त शिकायत सही पाए जाने पर आरोपित युवक के खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

तमिलनाडु में बिहार के शंभू मुखिया ने की सुसाइड, पुलिस ने हत्या की खबरों को बताया झूठ: दैनिक जागरण पर कार्रवाई की बात भी कही

तमिलनाडु पुलिस ने बिहार के मधुबनी जिले के युवक शंभू मुखिया की मौत को सुसाइड बताया है। दैनिक जागरण में उसकी हत्या की छपी खबर को झूठ बताया है। अखबार के खिलाफ कानूनी कार्यवाही की बात भी कही है। शंभू मुखिया मधुबनी जिले के जयनगर के देवधा थाना क्षेत्र के पिठवाटोल इनरवा का रहने वाला था। तिरुपुर में काम करता था और एक तमिल लड़की से शादी की थी।

तमिलनाडु पुलिस ने दैनिक जागरण में प्रकाशित समाचार का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए ट्वीट में कहा है कि तमिलनाडु में मधुबनी के युवक की हत्या से जुड़ी झूठी खबर छापी गई है। अनुसंधान में पाया गया है कि मधुबनी का युवक शंभू मुखिया तमिलनाडु के तिरुपुर में काम करता था। उसने तमिलनाडु की ही एक लड़की से विवाह किया था।

तमिलनाडु पुलिस के अनुसार शंभू मुखिया अपनी बहन का विवाह नहीं होने के कारण दुखी रहा करता था। 5 मार्च को उसने अपने हाथ की नस काट कर अपने ही घर में ही बाथरूम के पास आत्महत्या कर ली थी। उसके मृत शरीर को सबसे पहले उसकी पत्नी शरणय्या ने ही देखा था। मछली खरीदते समय उस पर धारदार हथियार से हमला होने की बात पूरी तरह से गलत है। पुलिस ने कहा है, “शंभू मुखिया का मृत शरीर उसके घर के बाथरूम के पास पाया गया था। उसके हाथ का नस कटा हुआ था। झूठ फैलाने वाले दैनिक जागरण के खिलाफ कानूनी कार्यवाही की जा रही है।”

इससे पहले मधुबनी की पुलिस ने भी हत्या की खबर का खंडन किया था। मधुबनी पुलिस ने ट्वीट कर कहा ​था कि समाचार पत्रों में खबर छपने के बाद उन्होंने तमिलनाडु के तिरुपुर पुलिस से संपर्क किया था। तिरुपुर पुलिस ने शंभू की मौत को परिवारिक कलह में आत्महत्या का मामला करार दिया है। तिरुपुर पुलिस ने कहा है कि घर में कलह के बाद शंभू ने अपने हाथ की नस काट ली जिससे उसकी मौत हो गई। मधुबनी पुलिस के अनुसार मृतक के भाई तमिलनाडु निकलने की तैयारी कर रहे हैं। वहाँ पहुँचने के बाद जो तथ्य परिजन देंगे उस पर पुलिस आगे जाँच करेगी। प्रथम दृष्टया मामला आत्महत्या का लग रहा है।

शंभू मुखिया की हत्या की खबर 9 मार्च 2023 की रात दैनिक जागरण ने ऑनलाइन प्रकाशित की थी। इसमें शंभू मुखिया के भाइयों के हवाले से तिरुपुर में धारदार हथियारों से हमले का दावा किया गया था। भाइयों को यह सूचना फोन पर शंभू की पत्नी ने दी थी। 10 मार्च को लाइव हिंदुस्तान ने भी इसी तरह की जानकारी के साथ यह रिपोर्ट प्रकाशित की थी। आप दोनों जगहों पर प्रकाशित शुरुआती खबरों की हेडलाइन का स्क्रीनशॉट नीचे देख सकते हैं।

दैनिक जागरण और लाइव हिंदुस्तान पर प्रकाशित खबर की हेडलाइन का स्क्रीनशॉट

हालाँकि तमिलनाडु और बिहार पुलिस के खंडन के बाद दैनिक जागरण ने अपनी ऑनलाइन रिपोर्ट में बदलाव किया है। रिपोर्ट से शंभू मुखिया के भाइयों के हवाले से किए गए दावे को हटा लिया है। अपडेटेड रिपोर्ट में बताया गया है कि शंभू मुखिया की पत्नी ने हत्या की आशंका जताई थी, जिसे पुलिस ने खारिज कर दिया है।

हमारी शुरुआती रिपोर्ट भी दैनिक जागरण की खबर पर आधारित थी। पुलिस के खंडन और जागरण की रिपोर्ट में बदलाव के बाद हमने भी अपनी कॉपी में आवश्यक सुधार किए हैं। उल्लेखनीय है कि जागरण ने यह रिपोर्ट ऐसे समय में प्रकाशित की थी जब हिंदी भाषी श्रमिकों के साथ हिंसा के कथित दावों को तमिलनाडु पुलिस पहले भी नकार चुकी थी।