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अपराधी कर रहे थे फायरिंग, पीछे हट रही थी बिहार पुलिस: जेठुली कांड का वीडियो वायरल, 4 की मौत के बाद 22 की हुई थी गिरफ्तारी

बिहार की राजधानी पटना (Patna, Bihar) के फतुहा से सटे जेठुली गाँव में 19 फरवरी 2023 को मामूली विवाद के बाद फायरिंग हुई थी। इस फायरिंग में 4 लोगों की मौत हो गई। घटना के बाद गुस्साए लोगों ने आरोपितों के घर, मैरिज हॉल समेत गाड़ियों में आग लगी दी थी। इसका एक वीडियो अब सामने आया है। वीडियो में पुलिस की मौजूदगी में फायरिंग होते दिख रही है। वहीं, फायरिंग होते ही पुलिस घबराई हुई पीछे हटती दिख रही है।

जेठुली गोलीकांड के इस वीडियो में देखा जा सकता है कि बिहार पुलिस मौके पर मौजूद है। पुलिस की मौजूदगी में ही बवाल होता दिख रहा है। पुलिस बवाल शांत कराने के बजाए तमाशबीन बनी हुई है। यही नहीं, बवाल के बीच में पुलिस आगे बढ़ने की जगह पीछे हटती दिख रही है। वहीं, वीडियो में कुछ लोग ‘अब मर्डर होगा यहाँ’ कहते सुने जा सकते हैं। वीडियो के आखिर में 3 राउंड फायरिंग की आवाज सुनाई दे रही है।

वहीं, इस घटना को लेकर बिहार पुलिस ने 22 लोगों की गिरफ्तारी का दावा किया था। पुलिस ने कहा था कि फायरिंग में संलिप्त 9 लोग तथा आगजनी एवं पुलिस पर हमले के मामले में 13 लोगों की गिरफ्तारी हुई है। अब वीडियो सामने आने के बाद बिहार पुलिस पर सवाल उठ रहे हैं।

उस वक्त पुलिस की नाकामी को लेकर बिहार के एडीजी लॉ एंड ऑर्डर संजय सिंह से सवाल किया गया था तो उन्होंने कहा था कि पटना रेंज के आईजी पुलिस टीम की लापरवाही का मामले को देख रहे हैं। रिपोर्ट के आधार पर दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई होगी। हालाँकि, वीडियो कार्रवाई से पहले ही यह वीडियो सामने आ गया।

बता दें कि बिहार में कानून व्यवस्था को लेकर सरकार पर विपक्ष हमलावर है। जेठुली गाँव में फायरिंग के बाद विपक्ष ने नीतीश सरकार पर जंगलराज को बढ़ावा देने का आरोप लगाया था। अब इस गोलीकांड को लेकर वायरल वीडियो में पुलिसकर्मियों के पीछे हटने को लेकर लोग सोशल मीडिया पर तरह-तरह के सवाल उठा रहे हैं।

क्या था मामला…

19 फरवरी 2023 को राजधानी पटना के नदी थाना क्षेत्र के जेठुली गाँव के गंगा घाट इलाके में पार्किंग को लेकर दो पक्षों में विवाद हुआ था। यह विवाद इस हद तक आगे बढ़ा कि फायरिंग की नौबत आ गई। मृतक के परिजनों का आरोप है कि उमेश राय नामक दबंग ने इस घटना को अंजाम दिया है। उमेश ट्रक से गिट्टी गिरवा रहा था। इस कारण पार्किंग का रास्ता बंद हो गया था और कार निकालने में दिक्कत हो रही थी। जब उससे रास्ता खाली करने के लिए कहा गया तो वह विवाद करने लगा।

पीड़ितों के परिजन संजीत कुमार उर्फ टुनटुन यादव का कहना है कि कार पार्किंग को लेकर शुरू हुए विवाद के बाद रमेश राय, सतीश राय, उमेश राय, बच्चा राय ने मिलकर गौतम कुमार पर जमकर गोलीबारी की। उन्होंने यह भी कहा था कि उमेश राय के लोगों ने 50 राउंड से अधिक गोलीबारी की है। इसमें कुल 5 लोगों को गोली लगी थी, जिसमें 4 लोगों की मौत हो चुकी है।

वहीं फायरिंग की घटना के बाद गुस्साए लोगों ने आरोपितों के घर और मैरिज हॉल में आग लगा दी। इससे घर में खड़ी गाड़ियाँ जलकर खाक हो गईं। वहीं घर के अंदर मौजूद महिलाओं, बच्चों व अन्य लोगों को पुलिस ने रेस्क्यू कर बचाया था। लोगों ने अन्य आरोपितों के घरों पर भी आग लगाने की कोशिश की थी। यही नहीं, आग बुझाने गई फायर ब्रिगेड का रास्ता रोकते हुए उसके पहियों की हवा निकाल दी गई थी।

PM मोदी ने हिंदू मंदिरों पर हमले का मसला ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री के समक्ष उठाया, 2 महीने में कम से कम 5 मंदिरों को खालिस्तानी बना चुके हैं निशाना

पिछले कुछ समय से विदेशों में हिंदुओं की आस्था के केंद्र मंदिरों पर हमले किए जा रहे हैं। इन हमलों के पीछे खालिस्तानी तत्वों का हाथ बताया जा रहा है। इसी तरह के हमले ऑस्ट्रेलिया में भी अंजाम दिए गए हैं। ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज (Anthony Albanese) इस समय भारत दौरे पर हैं। पीएम नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने अल्बनीज के साथ इस मुद्दे को उठाया है।

प्रधानमंत्री मोदी ने ऑस्ट्रेलिया में खालिस्तानी तत्वों द्वारा हिंदू मंदिरों पर हमले का मुद्दा उठाते हुए कहा, “मैंने ऑस्ट्रेलिया में मंदिरों पर हमले की खबरें देखी हैं। मैंने पीएम अल्बनीज को इस बात से अवगत करा दिया है और उन्होंने मुझे आश्वासन दिया है कि ऑस्ट्रेलिया में भारतीय समुदाय की सुरक्षा और भलाई उनके लिए प्राथमिकता है।”

पिछले दो महीने में ऑस्ट्रेलिया में कम-से-कम 5 बार हिंदू मंदिरों को निशाना बनाया गया है। ऑस्ट्रेलिया में खालिस्तानियों द्वारा जिन हिंदू मंदिरों को निशाना बनाया गया है, वे निम्नलिखित हैं।

ब्रिस्बेन में श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर: 4 मार्च 2023 को ब्रिस्बेन के बरबैंक उपनगर में श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर पर हिंदू विरोधी और भारत विरोधी तस्वीरें बना दी गई थीं। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, तोड़फोड़ को खालिस्तानी समर्थक समर्थकों ने अंजाम दिया थ। तोड़फोड़ के दौरान बदमाशों ने मंदिर के पास दीवारों पर हिंदू विरोधी, भारत विरोधी और खालिस्तानी समर्थक नारे लिखे थे।

ब्रिस्बेन के प्रसिद्ध गायत्री: 17 फरवरी 2023 को ब्रिस्बेन को गायत्री माता मंदिर के पुजारी को महाशिवरात्रि ना मनाने की चेतावनी दी गई थी। चेतावनी देने वाले शख्स ने खुद को खालिस्तानी बताया था और कहा था कि वह पाकिस्तान के लाहौर से फोन कर रहा है। फोन करने वाले ने कहा था, “यदि तुम 19 फरवरी 2023 को महाशिवरात्रि मनाने की योजना बना रहे हो तो पुजारी से खालिस्तान का समर्थन करने के लिए कहो। तुमको अपने कार्यक्रम के दौरान पाँच बार ‘खालिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगाना है।”

मेलबर्न काली माता मंदिर: 16 फरवरी 2023 को मेलबर्न के काली माता मंदिर में भजन कार्यक्रम आयोजित करने के खिलाफ चेतावनी दी गई थी। ऑस्ट्रेलिया में मेलबर्न के उत्तरी उपनगर में स्थित काली माता मंदिर की एक महिला पुजारी को भारतीय गायक कन्हैया मित्तल का भजन कार्यक्रम आयोजित करने पर धमकी दी गई थी। कहा जाता है कि ये धमकी खालिस्तानी आतंकवादियों ने दी थी।

हरे कृष्ण मंदिर: 23 जनवरी 2023 को खालिस्तान समर्थकों द्वारा ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न शहर के अल्बर्ट पार्क स्थित हरे कृष्ण मंदिर में इसी तरह की घटना को अंजाम दिया गया था। मंदिर मेलबर्न में भक्ति योग आंदोलन के केंद्र के रूप में कार्य करता था और इंटरनेशनल सोसाइटी ऑफ कृष्णा कॉन्शसनेस (इस्कॉन) द्वारा चलाया जाता है। रिपोर्टों के अनुसार, मंदिर की दीवारों को ‘खालिस्तान जिंदाबाद’ और ‘हिंदुस्तान मुर्दाबाद’ नारे लिखे गए थे। इतना ही नहीं, बदमाशों ने मारे गए खालिस्तानी आतंकवादी जरनैल सिंह भिंडरावाले को शहीद भी बताया था।

मेलबर्न में शिव विष्णु मंदिर: 17 जनवरी 2023 को खालिस्तान समर्थकों ने मेलबर्न के कैरम डाउन्स स्थित ऐतिहासिक श्री शिव विष्णु मंदिर में तोड़फोड़ की। तोड़फोड़ के दौरान बदमाशों ने मंदिर के पास की दीवारों पर हिंदू विरोधी और भारत विरोधी नारे लिखे। ‘टारगेट मोदी’, ‘मोदी हिटलर’ और ‘हिंदुस्तान मुर्दाबाद’ के नारे मंदिरों की दीवारों पर लिखे गए थे।

मेलबोर्न में BAPS स्वामीनारायण मंदिर: 12 जनवरी 2023 को मेलबोर्न में रहने वाले हिंदू समुदाय के हिंदू मंदिर पर हमला किया गया था। मेलबोर्न के उत्तरी उपनगर मील पार्क में स्थित BAPS स्वामीनारायण मंदिर में खालिस्तानी हमलावरों ने तोड़फोड़ की थी। मंदिर की दीवारों पर भारत विरोधी और नरेंद्र मोदी विरोधी नारे लिख दिए थे।

पिछले महीने विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर ऑस्ट्रेलिया में चरमपंथी खालिस्तानी समूहों द्वारा भारतीय समुदाय पर किए गए हमले की निंदा की थी। विदेश मंत्रालय ने स्थानीय अधिकारियों से मामले की जांच शुरू करने और अपराधियों को दंडित करने का आग्रह किया था। खालिस्तानी स्वतंत्र खालिस्तान के लिए ऑस्ट्रेलिया में तथाकथित जनमत संग्रह भी करवा रहे हैं।

नौकरी के बदले जमीन घोटाला: दिल्ली-मुंबई से लेकर पटना तक ED की रेड, एजेंसी की रडार पर लालू यादव के बच्चे और करीबी

नौकरी के बदले जमीन घोटाला (Land for jobs scam) में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव की मुश्किलें बढ़ती जा रही है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने दिल्ली, नोएडा, पटना और मुंबई में 15 से अधिक ठिकानों पर छापेमारी की है। एजेंसी की रडार पर लालू यादव (Lalu Prasad Yadav) के बच्चे और करीबी हैं। बीते दिनों इस मामले में लालू यादव और उनकी पत्नी राबड़ी देवी से CBI ने पूछताछ भी की थी।

इस मामले में सीबीआई बाद ईडी दूसरी एजेंसी है जिसने लालू यादव और उनके करीबियों पर शिकंजा कसा है। रिपोर्टों के मुताबिक ईडी ने दिल्ली में उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव और लालू यादव की बेटियों रागिनी, हेमा और चंदा के घर पर छापा मारा है। इसके अलावा लालू यादव के सीए के घर समेत 12 अन्य ठिकानों पर छापा मारा गया है। राष्ट्रीय जनता दल के पूर्व विधायक अबु दोजाना के घर पर भी छापा मारा गया है।

दोजाना के पटना के फुलवारीशरीफ स्थित घर पर ईडी की रेड पड़ी है। दोजाना को लालू परिवार का काफी करीबी माना जाता है। बताया जा रहा है कि आय से अधिक संपत्ति मामले में ई़डी के चार ऑफिसरों ने अबू दोजाना के घर पर छापा मारा और पूछताछ की।

लालू यादव और राबड़ी देवी से हुई थी पूछताछ

बता दें कि मंगलवार (07 मार्च, 2023) को नौकरी के बदले जमीन घोटाला मामले में सीबीआई की टीम ने दिल्ली में राजद सुप्रीमो लालू यादव से पूछताछ की थी। उससे पहले सोमवार (06 मार्च, 2023) को सीबीआई की टीम ने पटना में राबड़ी देवी से पूछताछ की थी। इस मामले में राबड़ी देवी, उनके पति लालू प्रसाद यादव के अलावा बेटी मीसा भारती भी आरोपित हैं। मामले में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने लालू यादव, राबड़ी देवी और मीसा भारती को समन जारी कर रखा है। तीनों को 15 मार्च 2023 को अदालत में पेश होना है।

क्या है मामला ?

14 साल पहले जिस समय यह घोटाला हुआ था, उस समय लालू प्रसाद यादव यूपीए-1 शासनकाल में केंद्रीय रेल मंत्री थे। रेलवे में नौकरी देने के बदले लालू प्रसाद यादव के परिजनों पर पटना में करीब 1.05 लाख वर्ग फुट जमीन अधिग्रहित करने का आरोप है। बिना विज्ञापन निकाले रिश्वत देने वाले अभ्यार्थियों को तीन दिन के अंदर रेलवे में नौकरी देने का आरोप है। इन उम्मीदवारों द्वारा नौकरी के लिए फर्जी प्रमाण-पत्र का इस्तेमाल करने और रेल मंत्रालय में झूठे प्रमाणित दस्तावेज जमा कराने की बात भी सामने आई थी।

भारत से बातचीत के लिए अमेरिकी प्रवक्ता से गिड़गिड़ाने लगा पाकिस्तानी पत्रकार, तंग हो फटकारा: BBC डॉक्यूमेंट्री पर भी कर दी थी बोलती बंद

अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नेड प्राइस से गुरुवार (9 मार्च 2023) को एक पाकिस्तानी पत्रकार ने बार-बार पूछा कि अमेरिका भारत से पाकिस्तान की बातचीत क्यों नहीं करवा रहा है। पाकिस्तानी न्यूज चैनल ARY News के पत्रकार (अब सस्पेंड) जहाँजैब अली (Jahanzaib Ali) ने अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नेड प्राइस से पूछा, “पाकिस्तान ने कई बार भारत के साथ शांति वार्ता करने की पेशकश की, लेकिन भारत सरकार इससे बचने की कोशिश करती है। इसलिए जब आप (नेड प्राइस) भारतीय अधिकारियों के साथ बातचीत करते हैं तो वे क्या कारण बताते हैं? भारत लंबित मुद्दों पर पाकिस्तान से क्यों बात नहीं करना चाहता है?”

इसको लेकर नेड प्राइस ने जोर देते हुए कहा, “हम रचनात्मक बातचीत का समर्थन करते हैं। हम भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से चले आ रहे पुराने विवादों को हल करने के लिए कूटनीति का समर्थन करते हैं। हम एक भागीदार हैं और किसी भी तरह से दोनों की बातचीत हो इसका समर्थन करते हैं।” हालाँकि, अमेरिका ने यह साफ कर दिया कि बातचीत का फैसला दोनों पड़ोसी देशों को खुद करना होगा। यह अमेरिका का काम नहीं है कि वह भारत और पाकिस्तान के बीच बातचीत के तरीकों को तय करे।

अमेरिका के यह स्पष्ट किए जाने के बावजूद कि भारत और पाकिस्तान को खुद बातचीत करने का फैसला करना होगा, अली ने नेड प्राइस को बार-बार एक ​ही प्रश्न पूछकर परेशान किया। पाकिस्तानी पत्रकार ने अपनी बात को दोहराते हुए फिर पूछा, “कई विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका के पास दोनों देशों (पाकिस्तान और भारत) के बीच मध्यस्थता करने की शक्ति और अधिकार है, तो आप मध्यस्थता क्यों नहीं करवाते?”

प्राइस ने अली को फटकारते हुए कहा, “क्योंकि ये फैसले देश खुद लेते हैं। अगर वे अमेरिका की किसी विशेष भूमिका के लिए सहमत होते हैं, तो अमेरिका दोनों देशों के सहयोगी के तौर पर उस प्रक्रिया का समर्थन करने के लिए तैयार है, जो हम जिम्मेदारी के साथ कर सकते हैं। लेकिन अमेरिका ये फैसला नहीं कर सकता है कि भारत और पाकिस्तान एक-दूसरे से किस तरह बातचीत करें। हम जो कर सकते हैं, वो है रचनात्मक बातचीत का समर्थन। हम लंबे समय से चले आ रहे संघर्षों को हल करने के लिए भारत और पाकिस्तान के बीच रचनात्मक बातचीत और कूटनीति का समर्थन करते हैं।”

बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री पर पाकिस्तानी पत्रकार को फटकारा

गौरतलब है कि इससे पहले इस साल जनवरी में बीबीसी की विवादित डॉक्यूमेंट्री को लेकर अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नेड प्राइस (Ned Price) ने जलील अफरीदी नाम के एक पाकिस्तानी पत्रकार की बोलती बंद कर दी थी। नेड प्राइस ने कहा था कि उन्हें बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री के बारे में तो जानकारी नहीं है, लेकिन अमेरिका और भारत जैसे बड़े लोकतांत्रिक देशों के ऐसे साझा मूल्यों के बारे में जानकारी है जो दोनों देशों के संबंध को मजबूत बनाते हैं।

बता दें कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ (Pakistan PM Shehbaz Sharif) ने भी ‘अल अरेबिया न्यूज’ चैनल को दिए एक इंटरव्यू में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बातचीत की इच्छा जताई थी। उन्होंने कहा था कि भारत के साथ तीन युद्ध लड़कर पाकिस्तान ने सबक सीख लिया है।

‘मैं हिंदी भाषियों को पीटूँगा, जल्दी ही ये सामान पैक कर भागेंगे’: प्रशांत किशोर ने वीडियो शेयर कर तमिलनाडु CM से पूछा- इन लोगों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई

तमिलनाडु (Tamil Nadu) में हिंदी भाषी लोगों के खिलाफ हिंसा (Violence against Hindi Speaking People) की बात को वहाँ की स्टालिन सरकार (MK Stalin Government) दबाने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपना रही है। इस मुद्दे को उठाने वाले सोशल मीडिया यूजर से लेकर मीडिया संस्थानों एवं पत्रकारों के खिलाफ दमनात्मक कार्रवाई करते हुए उन पर मुकदमा दर्ज कर रही है। अब तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी DMK के चुनावी रणनीतिकार रहे प्रशांत किशोर (Prashant Kishore) ने इस मामले को उठाया है।

बिहार में राजनीतिक जमीन तलाश रहे प्रशांत किशोर ने इस मामले में शुक्रवार (10 मार्च 2023) को एक ट्वीट किया। ट्वीट में उन्होंने स्टालिन सरकार पर सवाल उठाया और पूछा कि तमिलनाडु में हिंदी भाषी लोगों के खिलाफ जहर उगलने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की गई।

प्रशांत किशोर ने ट्वीट किया, “नफरत और हिंसा भड़काने के लिए फर्जी वीडियो का इस्तेमाल करने वाले लोगों से कानून के मुताबिक निपटा जाना चाहिए, लेकिन यह उन लोगों को दोषमुक्त नहीं करता है जो खुले तौर पर तमिलनाडु में हिंदी भाषी लोगों के खिलाफ हिंसा का आह्वान कर रहे हैं। सेंथामिजन सीमन जैसे उकसाने वाले लोगों के खिलाफ कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई?”

प्रशांत किशोर ने अपने ट्वीट के साथ सीमन का एक वीडियो भी शेयर किया है, जिसमें वह हिंदी भाषी लोगों के खिलाफ विष उगल रहे हैं। ट्विटर प्रोफाइल के मुताबिक, सीमन ‘नाम तमिलार काटची (NTK)’ के मुख्य समन्वयक हैं। यह तमिलनाडु की एक प्रमुख पार्टी है। इसमें वे इस वीडियो में लोगों को भड़काने का काम कर रहे हैं।

प्रशांत किशोर द्वारा शेयर किए गए वीडियो में सेंथामिजन सीमन तमिल लोगों के एक समूह को संबोधित करते हुए कह रहे हैं, “हिंदी भाषी लोग बदहवासी में अपना सामान पैक करके यहाँ से भागेंगे। मुझे नहीं पता कि मैं कितनों को पीटूँगा। एक हफ्ते के अंदर वे अपना सामान बाँध लेंगे।”

बता दें कि तमिलनाडु में हिंदी भाषी मजदूरों के खिलाफ हिंसा की बात वहाँ से लौट कर आए मजदूरों ने खुद सुनाई है। वे डरे हुए हैं। इन लोगों का कहना है कि तमिलनाडु में स्थानीय लोगों दूसरे राज्यों से आए लोगों का नाम-पता पूछ-पूछकर पीट रहे हैं। इतना ही नहीं, वहाँ कुछ लोगों की हत्या की भी बात कही जा रही है। हालाँकि, तमिलनाडु की पुलिस हिंसा या हत्या की किसी भी बात को पूरी तरह नकार रही है।

तमिलनाडु पुलिस द्वारा हिंसा की बात नकारे जाने के बावजूद वहाँ से चोरी-छिपे लौटकर आ रहे लोग समस्या की भयावहता के बारे में बता रहे हैं। इस खबर को प्रकाशित करने के बाद तमिलनाडु पुलिस ने कई पत्रकारों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। बिहार के नेता पप्पू यादव ने पत्रकारों पर केस का विरोध किया था।

होली के दिन सुमेधा शर्मा को जौहर महमूद ने मार डाला, मांस काटने वाला चाकू पेट में घोंपा: छुट्टियों पर दिल्ली से जम्मू गई थी महिला डॉक्टर

जम्मू-कश्मीर में होली के दिन एक महिला डॉक्टर की निर्मम तरीके से हत्या किए जाने का मामला सामने आया है। महिला की पहचान सुमेधा शर्मा के तौर पर हुई है। आरोपित जौहर महमूद गनी है। सुमेधा की हत्या के लिए जानवरों का मांस काटने वाले चाकू का इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई है।

रिपोर्टों के अनुसार सुमेधा और जौहर पहले से परिचित थे। जम्मू में 8 मार्च 2023 की शाम हत्या करने के बाद जौहर ने खुदकुशी करने की बात फेसबुक पर कही। इसके बाद उसके घर पुलिस पहुँची और पूरे मामले का खुलासा हुआ।

रिपोर्टों के मुताबिक जम्मू के तालाब तिल्लो के गोल पुली की रहने वाली सुमेधा दिल्ली में रहकर एमडीएस की पढ़ाई कर रही थी। कई सालों से उसकी दोस्ती पमपोश कॉलोनी के रहने वाले जौहर से थी। जौहर और सुमेधा दोनों ने जम्मू के सियोडा गंग्याल डेंटल कॉलेज से बीडीएस की पढ़ाई की थी। इसी दौरान उनकी दोस्ती हुई थी। सुमेधा आगे की पढ़ाई करने दिल्ली चली गई थी, जबकि जौहर जम्मू में रहकर ही पढ़ाई कर रहा था।

मिली जानकारी के मुताबिक दिल्ली से होली की छुट्टियों पर जम्मू पहुँचते ही सुमेधा अपने घर न जाकर सीधे जौहर से मिलने पमपोश कॉलोनी स्थित उसके घर पर चली गई। यहाँ किसी बात को लेकर दोनों के बीच झगड़ा हो गया। झगड़े के दौरान जौहर ने किचन से चाकू लाकर सुमेधा के पेट पर ताबड़तोड़ वार किए। मौके पर ही सुमेधा की मौत हो गई।

सुमेधा की मौत के बाद जौहर ने फेसबुक पर पोस्ट लिखा कि वह अपने जीवन से तंग आ चुका है और खुदकुशी कर रहा है। जौहर का फेसबुक पोस्ट देखकर परिजनों ने पुलिस से संपर्क किया। पुलिस जब जौहर के घर पहुँची तो घर का दरवाजा अंदर से बंद था। दरवाजा तोड़ कर घर के अंदर दाखिल हुई पुलिस को खून से लथपथ सुमेधा और घायल अवस्था में पड़ा जौहर मिला। दोनों को आनन-फानन में अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने सुमेधा को मृत घोषित कर दिया। जौहर का इलाज चल रहा है।

पुलिस हत्या के कारणों का पता लगा रही है। पुलिस का कहना है कि उपचार के बाद जौहर का बयान लिया जाएगा। फिलहाल मौका-ए-वारदात से मिले सबूतों के आधार पर जौहर के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और आगे की जाँच की जा रही है।

जर्मनी के चर्च में गोलीबारी, 7 के मरने की खबर: सर्च ऑपरेशन जारी, हमलावर की पहचान का खुलासा नहीं

जर्मनी के एक चर्च में हुई फायरिंग में 7 लोगों के मरने की खबर आ रही है। यह घटना गुरुवार (09 मार्च, 2023) रात 9 बजे हैम्बर्ग में हुई। 8 लोग जख्मी बताए जा रहे हैं। मृतकों की संख्या की आधिकारिक तौर पर फिलहाल पुष्टि नहीं हुई है।

हमलावर की पहचान अभी सामने नहीं आई है। उसके मारे जाने की भी संभावना जताई जा रही है। पुलिस की तरफ से दी गई जानकारी के अनुसार रात करीब 9:15 बजे हैम्बर्ग के यहोवा स्थित किंगडम हॉल में गोली चलने की सूचना प्राप्त हुई। मौके पर पहुँची पुलिस को कई घायल मिले जिन्हें गोली लगी हुई थी। घायलों को फौरी तौर पर अस्पताल ले जाया गया। मीडिया रिपोर्ट्स में मरने वालों की संख्या 7 बताई जा रही है। पुलिस ने लोगों से किसी तरह का अफवाह न फैलाने की अपील की है।

पुलिस के अनुसार फायरिंग के बाद किसी के भागने के संकेत नहीं मिले हैं। पुलिस को शक है कि हमलावर या तो मारे गए लोगों में शामिल है या इमारत में अब भी छिपा हुआ है। पूरी इमारत को खाली करा लिया गया है और सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। हमला क्यों किया गया यह साफ़ नहीं है। शुरुआती जाँच के आधार पर पता चला है कि चर्च में गुरुवार शाम चर्च में को कोई कार्यक्रम चल रहा था। इसी दौरान गोलीबारी की घटना को अंजाम दिया गया।

शुक्रवार (10 मार्च, 2023) की सुबह हैम्बर्ग पुलिस ने ट्विटर पर जानकारी दी कि कम्युनिटी सेंटर के पास एक संदिग्ध की लाश मिली है जो हमलावर का हो सकता है। हमले में अन्य लोग भी शामिल थे या नहीं इसकी जाँच की जा रही है। कई स्थानों पर सर्च ऑपरेशन चलाए जा रहे हैं। वहीं शहर के मेयर पीटर चेंचचर ने ट्विटर पर गोलीबारी की घटना पर शोक व्यक्त किया है और मारे गए लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त की है।

बता दें हाल के वर्षों में जर्मनी में इस तरह की घटनाएँ बढ़ी हैं। दिसंबर 2016 में राजधानी बर्लिन के क्रिसमस बाजार में इस्लामी कट्टरपंथियों ने हमला कर दिया था। हमलावरों ने भीड़-भाड़ वाले स्थान पर ट्रक से कई लोगों को कुचल दिया था। इस हमले में 12 लोग मारे गए थे। हमलावर आईएसआईएस समर्थक था।

पुलवामा बलिदानियों की विधवाओं के मुँह में घास, पुलिस ने CM हाउस जाने से रोका तो जमीन पर लेट गईं: बीजेपी MP ने बताया- राजस्थान पुलिस ने वीरांगनाओं को रातोंरात उठाया

राजस्थान में पुलवामा बलिदानियों की विधवाओं का धरना अभी तक खत्म नहीं हुआ है। गुरुवार (9 मार्च 2023) को इन्होंने अनूठे तरीके से विरोध-प्रदर्शन किया। मुँह में घास दबाकर सीएम हाउस जाने की कोशिश की। पुलिस ने रोका तो जमीन पर लेट गईं। इस बीच बीजेपी सांसद किरोड़ी लाल मीणा ने ट्वीट कर बलिदानियों की विधवाओं के साथ धरने पर बैठे लोगों को हिरासत में लिए जाने की जानकारी दी है।

बीजेपी सांसद किरोड़ी लाल मीणा ने वीरांगनाओं और अपने समर्थकों को उठाने का आरोप राजस्थान पुलिस पर लगाया है। उन्होंने इसको लेकर एक के बाद एक कई ट्वीट किए हैं। एक ट्वीट में कहा है, “सरकार को 3 वीरांगनाओं से इतना डर क्यों है कि पुलिस ने रातोंरात उन्हें उठा लिया। पता नहीं उन्हें कहाँ लेकर गए हैं? वीरांगनाएं मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से मिलने की गुहार ही तो लगा रही है। मिलकर उनकी बात सुनने से मुख्यमंत्री इतना क्यों घबरा रहे हैं?” राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने धरने को गंभीरता से लेते हुए राजस्थान के डीजीपी को व्यक्तिगत रूप से इस मामले को देखने को कहा है।”

बलिदानियों की विधवाओं का धरना पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट के आवास के बाहर चल रहा है। गुरुवार को धरने का 11वाँ दिन था। बीजेपी सांसद किरोड़ी लाल मीणा और उनके समर्थक भी शुरुआत से इनके साथ धरने पर हैं। मीणा ने ट्वीट कर कहा है, “वीरांगनाओं से ससम्मान मिलने की जगह मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पुलिस के दम पर उनका दमन करना चाहते हैं। अल सुबह 3 बजे पुलिस वीरांगनाओं, उनके परिजनों और कार्यकर्ताओं को उठाकर ले गई। ऐसा करके सरकार वीरांगनाओं के हौसले को तोड़ नहीं सकती। हक मिलने तक संघर्ष जारी रहेगा।”

इस बीच राष्ट्रीय महिला आयोग ने ट्वीट कर बताया है कि पूरे मामले का चेयरपर्सन रेखा शर्मा ने संज्ञान लिया है। उन्होंने राजस्थान के डीजीपी को व्यक्तिगत तौर पर इस मामले को देखने को कहा है। बलिदानियों की विधवाओं द्वारा पुलिस अधिकारियों पर लगाए गए बदसलूकी के आरोपों की जाँच को कहा है।

गौरतलब है कि धरना दे रही वीरांगनाओं के पति 2019 में पुलवामा में हुए आतंकी हमले में बलिदान हुए थे। किरोड़ी लाल मीणा का कहना है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 7 मार्च को दो मंत्रियों प्रताप सिंह खाचरियावास और शकुंतला रावत को भेजकर इनकी माँगें मान ली थी। लेकिन बाद में सरकार उससे पीछे हट गई। वहीं कॉन्ग्रेस का कहना है कि वीरांगनाओं को पैकेज दिया जा चुका है। उनकी मौजूदा माँगें अनुचित हैं और बीजेपी उनका राजनीतिक इस्तेमाल कर रही है।

‘₹30 करोड़ लो और CM विजयन का नाम मत लेना’ : केरल के सोना तस्करी केस में स्वप्ना सुरेश ने लगाए आरोप, कहा- मुझे जान से मारने की धमकी मिली

केरल के सोना तस्करी केस की मुख्य आरोपित स्वप्ना सुरेश ने गुरुवार (9 मार्च 2023) को फेसबुक लाइव में नया खुलासा किया। उन्होंने इस लाइव में आरोप लगाया है कि हाल में उन्हें एक शख्स ने कॉल के जरिए 30 करोड़ रुपए का ऑफर देकर कहा कि सोना तस्करी मामले से सीएम विजयन को दूर रखा जाए। स्वप्ना के मुताबिक उन्हें सीपीएम सचिव गोविंदन मास्टर ने धमकी भी दी कि अगर वो इस पेशकश को ठुकराती हैं तो उन्हें मार दिया जाएगा।

स्वप्ना ने इस लाइव के दौरान बताया कि उन्हें 30 करोड़ रुपए का ऑफर देने वाला शख्स तीन दिन पहले ओटीटी प्लेटफॉर्म पर इंटरव्यू के बहाने उनसे संपर्क में आया था। अब उन्होंने इस संबंध में कर्नाटक गृह मंत्रालय में शिकायत दर्ज करवाई है।

वह बोलीं, “मुझे विजय पिल्लई नाम के एक व्यक्ति का गुमनाम फोन आया। वह समझौता के लिए था। उसने मुझे बेंगलुरु छोड़ने के लिए कहा। सीपीएम पार्टी के सचिव गोविंदन मास्टर ने उससे कहा था कि मुझे धमकाओ और प्रदेश छोड़ने को कहो। उसने मुझे पिनाराई विजयन, उनकी बेटी और व्यवसायी युसुफ अली के बारे में चुप होने के लिए कहा। उन्होंने मुझे 30 करोड़ रुपए ऑफर किए।”

स्वप्ना सुरेश ने दावा किया, “वे चाहते हैं कि मैं हरियाणा या जयपुर चली जाऊँ। उन्होंने कहा कि मुझे हर तरह की मदद दी जाएगी, फ्लैट भी दिया जाएगा। बदले में वे चाहते हैं कि मैं मुख्यमंत्री, उनकी पत्नी, उनके बेटे, उनकी बेटी और उनके अडिशनल प्राइवेट सेक्रटरी सीएम रविंद्रन को लेकर मेरे पास जो भी डीटेल हैं, उसे उन्हें सौंप दूँ। उन्होंने कहा कि अगर मैं ये ऑफर स्वीकार नहीं करती हूँ तो वे मुझे खत्म कर देंगे। ये जान से मारने की धमकी का केस है।”

स्वप्ना के अनुसार उस शख्स ने उन्हें कहा कि केरल सीएम की ओर से उन्हें संपर्क करने वाले शख्स ने ये भी कहा कि अगर वे भारत छोड़ना चाहती हैं तो एक माह के भीतर फर्जी पासपोर्ट की व्यवस्था हो जाएगी।

स्वप्ना सुरेश ने लगाया था यौन दुराचार का आरोप

उल्लेखनीय है कि इससे पहले गोल्ड स्मगलिंग मामले की मुख्य आरोपित स्वप्ना सुरेश ने राज्य के तीन वरिष्ठ माकपा नेताओं पर यौन दुराचार का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि माकपा के दो पूर्व मंत्रियों और एक पूर्व विधानसभा अध्यक्ष ने उनसे शारीरिक संबंध बनाने के लिए कहा था।

बता दें कि इससे पहले स्वप्ना ने कहा था कि सोना तस्करी में सीएम विजयन और उनका परिवार शामिल है। इसके साथ ही एक आरोपित का अपहरण करने का आरोप लगाया था। स्वप्ना ने यह भी कहा था कि केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने आतंकियों को भगाने में यूएई वाणिज्य दूतावास की मदद की थी। 4 जुलाई 2017 को यूएई के एक नागरिक को सीआईएसएफ ने कोच्चि हवाई अड्डे पर भारत में प्रतिबंधित थुरया सैटेलाइट फोन के साथ पकड़ा था।

स्पेशल मैरिज एक्ट और समान नागरिक संहिता: केरल के मोहम्मद शुक्कुर को निकाह के 29 साल बाद फिर क्यों करनी पड़ी शादी, UCC से जानें कनेक्शन

देश में कानूनी समानता के लिए समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) की माँग लंबे समय से की जा रही है। समान नागरिक संहिता से कई तरह की परेशानियों से निजात मिलने के साथ ही मध्ययुगीन कानूनों से लोगों को निजात मिलेगी। समान नागरिक संहिता क्यों जरूरी है, हाल ही में सामने आए दो मामलों ने साबित कर दिया।

हाल ही में गुजरात में एक मामला सामने आया था, जिसमें रंजन त्रिपाठी एक हिंदू महिला ने अपने सरकारी कर्मचारी पति की मौत के बाद एक मुस्लिम युवक के साथ लिव-इन में रहने लगी। उसे पति की अनुकंपा वाली सरकारी नौकरी भी मिली। प्रेमी के साथ रहने के दौरान महिला के पति से हुई उसकी तीन बेटियाँ अपने दादा-दादी के पास ही रहीं।

इसके बाद महिला ने लिव-इन रिलेशन में रहते हुए एक बेटे को जन्म दिया। बाद में उसकी संपत्ति उसकी बेटियों की जगह उसके बेटे को मिले, इसलिए उसने मुस्लिम युवक से इस्लाम अपनाकर विधिवत निकाह कर लिया और संपत्ति का वसीयत अपने बेटे के नाम कर दिया। इसके बाद महिला की हिंदू बेटियों ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

अपने निर्णय में कोर्ट ने कहा, “सभी मुसलमान मुस्लिम कानून द्वारा शासित होते हैं, भले ही वे इस्लाम में परिवर्तित हो गए हों। उनके पिछले धार्मिक और व्यक्तिगत कानून को इस्लाम द्वारा प्रतिस्थापित कर दिया गया। मुस्लिम कानून के तहत एक हिंदू किसी मुस्लिम की संपत्ति का वारिस नहीं हो सकता।” इस तह हिंदू बेटियाँ अपनी माँ की संपत्ति पर का अधिकार खो दीं।

दूसरा मामला है केरल के कासरगोड जिले (Kasargod, Kerala) का। यहाँ एक मुस्लिम जोड़े ने अपनी निकाह के 29 साल बाद एक बार फिर शादी से बुधवार (8 मार्च 2023) को शादी की। इस शादी की खास बात यह है कि शरियत कानून की खामियों से अपने बच्चे को बचाने के लिए दंपत्ति ने यह रास्ता अपनाया है।

मुस्लिम दंपत्ति चाहता है कि उनकी संपत्ति उनकी बेटियों को मिले। इसलिए उसने अपनी तीन बेटियों की आर्थिक सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए विशेष विवाह अधिनियम (Special Marriage Act) के तहत दोबारा कोर्ट मैरेज की। शरिया कानून कहता है कि अम्मी-अब्बू की संपत्ति में बेटियों का हिस्सा बेटे के हिस्से का आधा होता है। यानी बराबर का हक नहीं मिलता।

जिस व्यक्ति ने यह क्रांतिकारी कदम उठाया है, उनका नाम सी शुक्कुर है। शुक्कुर एक अभिनेता और वकील भी हैं। उन्होंने साल 2022 में आई फिल्म ‘नना थान केस कोडू’ में वकील की भूमिका निभाई थी। शुक्कुर की पत्नी शीना महात्मा गाँधी विश्वविद्यालय की पूर्व वाइस चांसलर हैं। दोनों ने साल 1994 में निकाह किया था।

शुक्कुर ने कहा है कि हाल के दिनों में कुछ ऐसा हुआ जिससे वह यह सोचने में मजबूर हो गए कि वह मृत्यु के बाद अपनी बेटियों के लिए क्या छोड़ कर जाएँगे। उनकी चिंता थी कि क्या उनकी संपत्ति में उनकी बेटियों को पूरा अधिकार मिलेगा। इसके लिए उन्होंने यह कदम उठाया।

शरिया कानून में बेटियों को पिता की संपत्ति में बराबरी का अधिकार नहीं मिलता है। शुक्कुर को कोई बेटा नहीं है। ऐसे में शेष संपत्ति शुक्कुर के भाइयों को मिल जाता। शुक्कुर दंपत्ति ने कहा है कि उनकी तीन बेटियाँ उनकी कानूनी उत्तराधिकारी बनें, इसलिए उन्होंने यह कदम उठाया है।

शुक्कुर ने बताया था, “विशेष विवाह अधिनियम के तहत हमारी शादी को पंजीकृत करना ही एकमात्र तरीका है, जिससे हम यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि हमारे जाने के बाद हमारी तीन बेटियों को अपमानित नहीं किया जाए।” शुक्कुर जैसे माता-पिता, जो अपनी बेटियों के भविष्य को लेकर चिंतित हैं, वे उसके भविष्य को लेकर सतर्क रहते हैं।

उत्तराधिकार को लेकर क्या कहता है शरिया कानून

मुस्लिमों के दीवानी मामले मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरीयत) एक्ट 1937 के तहत शासित होते हैं। यह मुस्लिमों की धार्मिक रिवाजों को देखते हुए अंग्रेजों ने बनाया था, जिसे आजादी के बाद भी सरकार ने जारी रखा। शरीयत में दो तरह के उत्तराधिकारी को मान्यता दी गई है- हिस्सेदार और शेष (रेशिडुअरी)।

शरीयत के अनुसार बारह श्रेणियाँ हैं, जिन्हें विरासत में हिस्सा मिलता है: (1) शौहर, (2) बीवी, (3) बेटी, (4) एक बेटे की बेटी (या बेटे का बेटा या बेटे का बेटा और इसी प्रकार), (5) पिता, (6) दादा, (7) माता, (8) पिता पक्ष की ओर की दादी, (9) सहोदर बहन (10) जैविक बहन (11) सौतेली बहन और (12) सौतेला भाई।

चाची, चाचा, भतीजी, भतीजे और अन्य दूर के रिश्तेदार रेशिडुअरी उत्तराधिकारी हो सकते हैं। किस व्यक्ति का संपत्ति में हिस्सा कितना होगा, यह कई बातों पर निर्भर करता है। शरीयत के मुताबिक, शौहर की मौत हो जाती है तो बीवी को संपत्ति का 1/8 हिस्सा मिलेगा, यदि वह अपने शौहर के वंश से आती है। यदि ऐसा नहीं है तो उसे 1/4 भाग मिलेगा।

अगर बेटियों की बात की जाए तो वह बेटों की तुलना में अधिक-से-अधिक उनकी संपत्ति के आधा के बराबर हिस्सा ले सकती हैं। शरीयत कानून की सबसे खास बात यह है कि एक मुस्लिम की संपत्ति का वारिस सिर्फ मुस्लिम ही हो सकता है। यदि किसी पुरुष की मौत हो जाती है और उसका बेटा किसी और धर्म को मानता है तो उसे पैतृक संपत्ति में हिस्सा नहीं मिलेगा।

इतना ही नहीं, शरीयत कानून के तहत एक मुस्लिम सिर्फ अपनी संपत्ति का एक-तिहाई हिस्सा ही किसी को वसीयत कर सकता है। शेष संपत्ति को शरीयत कानून के अनुसार विभाजित करना होगा। शरीयत कानून में किसी भी लड़का या लड़की को पूरी संपत्ति वसीयत करने का प्रावधान नहीं है। ऐसी स्थिति में शुक्कुर जैसे पिता के सामने विशेष विवाह अधिनियम जैसे विकल्प बचते हैं।

क्या है विशेष विवाह अधिनियम?

विशेष विवाह अधिनियम के तहत विवाह के पंजीकरण का मतलब है कि पति-पत्नी पर शादी से संबंधित धार्मिक कानून लागू नहीं होंगे। यह विवाह विरासत संबंधी मामलों में धर्मनिरपेक्ष कानून भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम द्वारा शासित होगा।

सुप्रीम कोर्ट में अधिवक्ता संभ्रांत कृष्ण कहते हैं, “भारत में व्यक्तिगत क़ानूनों में कमियों की वजह से लोगों को स्पेशल मैरिज एक्ट का सहारा लेना पड़ता है। किसी भी विधि के अन्तर्गत हुई शादी का पंजीकरण इस एक्ट की धारा 15 के तहत की जा सकती है। धारा 18 इस पंजीकरण के प्रभाव के बारे में यह कहता है कि किसी भी विधि से हुई शादी अगर इस एक्ट के तहत पंजीकृत होती है तो यह माना जाएगा कि उस तिथि से वह विवाह स्पेशल मैरिज एक्ट से संचालित होगा।”

विशेष विवाह अधिनियम (Special Marriage Act) के तहत किसी भी शादी को पंजीकृत करने के लिए कुछ नियम तय किए गए हैं। इसके लिए निम्नलिखित आवश्यक है:

(क) दो पक्षों के बीच शादी और वे तब से पति और पत्नी के रूप में एक साथ रह रहे हैं;

(ख) पंजीकरण के समय किसी भी पक्ष के एक से अधिक जीवित पति/पत्नी नहीं हैं;

(ग) पंजीकरण के समय कोई भी पार्टी मूर्ख या पागल नहीं है;

(घ) पक्षों ने पंजीकरण के समय इक्कीस वर्ष की आयु पूरी कर ली है;

(च) पार्टियाँ निषिद्ध रिश्तों के अंतर्गत नहीं आतीं।

इस आधार पर किसी भी विवाह को स्पेशल मैरिज अधिनियम के तहत पंजीकृत कराया जा सकता है। विवाह के पंजीकृत की प्रक्रिया नई शादी की तरह ही होती है। दोनों पक्षों को कम-से-कम 30 दिनों के लिए विवाह अधिकारी के जिले का निवासी होना चाहिए। इस दौरान विवाह अधिकारी द्वारा आपत्तियों के लिए 30 दिन का नोटिस दिया जाता है।

वैवाहिक मामलों में उत्तराधिकार मामलों में विवाद से निजात पाने के लिए यह कानून बेहद मददगार है, लेकिन भारत के आम लोगों को इसकी जानकारी नहीं है। यह किसी शुक्कुर जैसे लोगों को छोड़ दें तो एक आम व्यक्ति धर्म के खिलाफ जाना पसंद नहीं करता।

समान नागरिक संहिता की माँग और उसके फायदे

देश में समान नागरिक संहिता की माँग और रफ्तार पकड़ रही है। ऊपर बताए गए दो मामले ऐसे हैं, जो बताते हैं कि देश में यूनिफॉर्म सिविल कोड की क्यों जरूरत है। अगर यह कानून लागू किया जाता है तो इसका सबसे अधिक फायदा मुस्लिम महिलाओं को मिलेगा। कोर्ट के समय-समय पर निर्णय के कारण हिंदू महिलाएँ तो अपना न्यायसंगत हिस्सा पा रही हैं।

अधिवक्ता संभ्रांत कृष्ण आगे कहते हैं, “अगर आपके व्यक्तिगत क़ानून आपको वो अधिकार नहीं देते, जो आपको किसी भी आधुनिक समाज में मिलने चाहिए, तब आपको उन कानूनों को त्यागना पड़ता है। भारत में व्यक्तिगत क़ानूनों से सबसे बड़ा नुक़सान उन समाजों की महिलाओं को है। वहीं, समान नागरिक संहिता का विरोध उन समाज के पुरुष वर्ग द्वारा किया जा रहा है।”

देश-देश में जब-जब समान नागरिक संहिता पर चर्चा होती है मुस्लिम समुदाय के उलेमा इसे मुद्दा बनाने लगता है। मुस्लिम मौलाना इसे इस्लाम पर हमला का रूप देकर सरकार के हस्तक्षेप को नाजायज ठहराने की कोशिश करने लगते हैं। इसका परिणाम ये होता है कि लोगों में जागरूकता पैदा करने के लिए सरकार को समय लेना पड़ता है।

अगर समान नागरिकता लागू हो जाती है तो मुस्लिम महिलाओं से जुड़ा बहुत सी समस्याएँ खत्म हो जाएँगी। समान नागरिक संहिता लागू होने के बाद मुस्लिमों में चार शादियों पर रोक लग जाएगी, तलाक की स्थिति में महिला को गुजारा भत्ता या एकमुश्त राशि देना होगा, संपत्ति में बेटियों बराबर का अधिकार देना होगा, मुस्लिमों द्वारा गोद लिए बच्चों को संपत्ति का वारिस घोषित करना होगा, तलाक के बाद बच्चे की कस्टडी महिला को मिल सकेगी।

इसका सीधा लाभ मुस्लिम महिलाओं को ही मिलेगा। समान नागरिक संहिता लागू होने के बाद मुस्लिम महिलाओं को किस तरह के फायदे होंगे, इसे डिटेल में जानने के लिए इस इस लिंक को क्लिक कर पढ़ सकते हैं। समान नागरिक संहिता गोवा में पहले से ही लागू है। उत्तराखंड, गुजरात जैसे राज्य उसे लागू करने के लिए कमिटी गठित कर चुके हैं। ऐसे में देश को एक बेहतर संकेत भी मिल रहे हैं। मुस्लिम महिलाओं को इस संकेत के हकीकत में बदलने की बेसब्री से उम्मीद होगी।