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‘हमारे बाप-दादाओं की जेब में रहते थे राम’: राकेश टिकैत के साथी नेता ने ‘जाट महाकुंभ’ में उगला ज़हर, बोले – ‘मैंने पुजारी से कहा – तेरा बाप मरा तो…’

राजस्थान की राजधानी जयपुर में रविवार (05 मार्च, 2023) को आयोजित जाट महाकुंभ में ‘अखिल भारतीय जाट महासभा’ के महासचिव युद्धवीर सिंह ने विवादास्पद बयान दिया। भारतीय किसान युनियन नेता राकेश टिकैत के साथी युद्धवीर सिंह ने कहा कि जाट समुदाय के लोग कभी किसी मंदिर में पानी चढ़ाने नहीं जाते। उन्होंने कहा कि राम हमारे बाप-दादाओं की जेब में रहते थे। युद्धवीर ने मंदिर के पुजारियों पर भी विवादास्पद टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि 50 साल पहले तक जाट के गाँव में मंदिर नहीं हुआ करते थे।

जयपुर के विद्याधर नगर में भैरोंसिंह शेखावत स्टेडियम में आयोजित जाट महाकुंभ में को संबोधित करते हुए युद्धवीर सिंह ने मंदिरों में पूजा को पंडितों और पुजारियों का पाखंड करार दिया। उन्होंने कहा कि राम पर किसी का विशेषाधिकार नहीं है। किसान उठते-सोते सैकड़ों बार राम का नाम लेता है। लेकिन वह किसी मंदिर में पानी चढ़ाने नहीं जाता। भीड़ में उपस्थित जाटों से सवाल करते हुए युद्धवीर कहते हैं क्या आपने अपने बाप दादाओं को मंदिर जाते देखा है?

युद्धवीर कहते हैं हमारे बाप-दादाओं का राम उनके साथ रहता था, उनकी जेब में रहता था। निकाल कर अपने से मिल लेते थे। आज हम राम को ढूँढने के लिए मंदिर जाते हैं। इसके बाद युद्धवीर मंदिर के पुजारियों पर टिप्पणी करते हैं। युद्धवीर पुजारी के साथ हुआ अपना संवाद सुनाते हैं। युद्धवीर के अनुसार मंदिर के एक पुजारी ने उनसे मंदिर में जल चढ़ाने के लिए कहा। इस पर उन्होंने जवाब दिया यह तो पत्थर की मूर्ति, है बगल के कारीगर ने बनाई थी। तो पुजारी ने इसमें प्राण प्रतिष्ठा किए जाने की बात कही। इसपर युद्धवीर ने पुजारी से कहा, “जब तेरा बापू मरा उसमें प्राण प्रतिष्ठा क्यों नहीं की? अपनी माँ की क्यों नहीं करी? अपने रिश्तेदारों की क्यों नहीं की?

युद्धवीर आगे कहते हैं कि हमें बेवकूफ बनाया गया। आज से 50 साल पहले किसी भी जाट के गाँव में मंदिर नहीं हुआ करते थे। शिवालय होते थे जिसमें कोई पंडित नहीं होता था। महिलाएँ जल व दूध चढ़ा आया करती थीं। कोई पाखंड नहीं हुआ करता था। आज की युवा पीढ़ी को पता ही नहीं है। बता दें कि जिस समय युद्धवीर यह बातें कर रहे थे उस वक्त मंच पर बीजेपी-कॉन्ग्रेस के अलावा कई पार्टियों के नेता मंच पर मौजूद थे। उनका यह वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है।

तमिलनाडु BJP प्रदेश अध्यक्ष पर भी FIR: बिहार के लौटे मजदूरों ने सुनाई मारपीट और धमकी की दास्तान, हिंसा पर राज्यपाल से मिलेंगे चिराग पासवान

तमिलनाडु में हिंदी भाषी मजदूरों पर हमले का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इस मामले में अब तमिलनाडु भाजपा के अध्यक्ष के अन्नामलाई के खिलाफ कथित तौर पर हिंसा भड़काने के आरोप में मुकदमा दर्ज हुआ है। वहीं, सांसद चिराग पासवान तमिलनाडु के राज्यपाल से मिलने जा रहे हैं। एक ओर जहाँ राज्य सरकार हिंसा की बातों को फर्जी बता रही है। वहीं, तमिलनाडु से लौटे मजदूर हिंसक घटनाओं की दास्ताँ बयान कर रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, तमिलनाडु भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष के अन्नामलाई ने एक बयान जारी कर कहा था कि डीएमके द्वारा उत्तर भारतीयों द्वारा किए गए कामों का ‘मजाक’ उड़ाने का प्रयास किया जाता है। यही कारण है कि फेक खबरें तेजी से फैल रहीं हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि डीएमके के गठन के बाद से पार्टी द्वारा एक विशेष समुदाय के खिलाफ नफरत उगली जा रही है। जब से डीएमके सत्ता में आई है, पार्टी के मंत्रियों और सांसदों ने कई बार बार अपने भाषणों में (उत्तर भारतीयों) का मजाक उड़ाया है। यही नहीं, अन्नामलाई ने झूठी खबरें फैलाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की भी माँग की थी।

अन्नामलाई के इस बयान के बाद चेन्नई की साइबर क्राइम यूनिट ने उनके खिलाफ धारा 153, 153 ए(1) (ए), 505(1)(बी) और 505 (1) (सी) के तहत मुकदमा दर्ज किया है। मुकदमा दर्ज होने के बाद अन्नामलाई ने उन्हें गिरफ्तार करने की चुनौती दी है। उन्होंने ट्वीट कर कहा है, “आप (डीएमके सरकार) सोचते हैं कि झूठे मुकदमे दर्ज कर लोकतंत्र की आवाज दबा सकते हैं। एक आम आदमी के रूप में मैं आपको 24 घंटे देता हूँ। यदि संभव हो तो मुझे गिरफ्तार करके दिखाओ।”

राज्यपाल से मिलेंगे चिराग पासवान

लोक जनशक्ति पार्टी नेता और सांसद चिराग पासवान सोमवार (6 मार्च 2023) को तमिलनाडु के राज्यपाल से मुलाकात करेंगे। इसके बाद वह वहाँ रह रहे बिहारी मजदूरों तथा कामगारों से भी मुलाकात करेंगे। इसके बाद इन मुलाकातों को लेकर वह प्रेस कॉन्फ्रेंस भी करेंगे। इससे पहले चिराग पासवान ने तमिलनाडु में हो रही घटनाओं के लिए बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को जिम्मेदार ठहराया था।

तमिलनाडु से लौटे मजदूरों ने सुनाई दास्ताँ

तमिलनाडु सरकार वहाँ हो रही किसी भी प्रकार की हिंसक घटनाओं से इनकार कर रही है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे फोटोज और वीडियो को ‘फर्जी और भ्रामक’ बताया जा रहा है। हालाँकि, मीडिया रिपोर्ट्स में हिंदी भाषी मजदूरों को मिलने वाली धमकियों और हिंसा को लेकर सवाल उठाया है रहा है।

‘हिंदुस्तान’ ने अपनी रिपोर्ट में तमिलनाडु के एलेप्पी से झारखंड के दुमका लौटे राजू हेम्ब्रम के हवाले से कहा है कि वह तिरुपुर में स्थित एक फैक्ट्री में मजदूरी करता था। जहाँ बीते कुछ दिनों से उसे लगातार धमकियाँ मिल रहीं थीं। हालाँकि फैक्ट्री मालिक उसे घर जाने की छुट्टी नहीं दे रहा था। लेकिन डर की वजह से वह घर लौट आया। इसी तरह तमिलनाडु के परमपुर में मजदूरी कर रहे पीरपैंती प्रखंड के सलेमपुर निवासी एक व्यक्ति ने कहा है कि स्थानीय लोगों द्वारा बिहारियों को निशाना बनाया जा रहा है। तमिलनाडु के कई शहरों में मारपीट हो रही है।

वहीं, ‘दैनिक जागरण’ की रिपोर्ट में बिहार के जमुई अंतर्गत सिकंदरा थाना क्षेत्र निवासी दो युवकों की मौत तथा दो के घायल होने की बात कही गई है। तमिलनाडु के त्रिपुर में 21 फरवरी को जमुई के धधौर निवासी पवन यादव पर नारियल काटने वाले धारदार हथियार हमला कर हत्या कर दी है। इस दौरान उसे बचाने गए उसके भाई नीरज के सिर पर भी धारदार हथियार से हमला हुआ था। मृतक पवन के एक अन्य रिश्तेदार के साथ मारपीट की खबर है।

जमुई के पोहे गाँव में रहने वाले संजू मांझी, धर्मेंद्र कुमार समेत अन्य लोग तमिलनाडु में रहकर काम करते थे। इन लोगों का कहना है कि वो लोग जैसे-तैसे भागकर घर वापस आए हैं। वहाँ की स्थिति ठीक नहीं है। मजदूरी को लेकर सवाल करने पर बिहारियों को मारा-काटा जा रहा है।

विजय चौधरी को अतीक अहमद ने बनाया उस्मान, UP पुलिस ने मार गिराया: उमेश पाल पर पहली गोली चलाने वाले के ‘धर्म परिवर्तन’ की भी होगी जाँच

उमेश पाल हत्याकांड में पहली गोली चलाने वाले उस्मान के एनकाउंटर के बाद अब धर्मांतरण का एंगल सामने आया है। इस संबंध में लॉ एंड ऑर्डर एडीजी प्रशांत कुमार ने संज्ञान लिया है। उन्होंने कहा है कि इस बात की जाँच हो रही है कि शूटर विजय चौधरी, उस्मान कैसे बना।

अभी तक सामने आई जानकारी के अनुसार, अतीक अहमद के बेटों ने विजय चौधरी की वफादारी देखते हुए उसे उस्मान नाम दिया था। उस्मान बेहद शातिर अपराधी था। जब वह अहमद गैंग आईएएस 227 में शामिल हुआ था तभी उसे उस्मान नाम दिया गया था। कथिततौर पर चौधरी का उस्मान नाम रखने के वक्त अतीक अहमद ने ही उसका धर्म परिवर्तन भी कराया था। अब पुलिस इस मामले में जाँच कर रही है।

लॉ एंड ऑर्डर एडीजी प्रशांत कुमार ने कहा कि शूटर के विजय से उस्मान बनने का मामला हमारे संज्ञान में है। कोई सामान्य व्यक्ति खुद का नाम उस्मान क्यों रखेगा?

उस्मान का एनकाउंटर

बता दें कि प्रयागराज की कौंधियारा पुलिस ने आज सुबह 4 बजे उस्मान को लालापुर में एनकाउंटर में मारा। वो अतीक गैंग का वो शार्प शूटर था जिसने उमेश पाल पर सामने से पहली गोली चलाई थी। पूरी वारदात एक सीसीटीवी में कैद हुई थी। उसे पकड़ने के लिए उसपर 50 हजार रुपए का इनाम रखा गया था।

जानकारी के मुताबिक, प्रयागराज के लालापुर में जब एसओजी की टीम ने उस्मान को पकड़ने के लिए घेराबंदी की, तो शार्प शूटर ने पहले टीम पर गोली चलानी शुरू की, जिसके बाद पुलिस ने भी उसपर जवाबी फायरिंग की और उस्मान को ढेर किया।

इस मुठभेड़ को लेकर शलभ मणि त्रिपाठी ने लिखा, “कहा था ना कि मिट्टी में मिला देंगे !! उमेश पाल और संदीप निषाद पर पहली गोली चलाने वाला खूंखार हत्यारा उस्मान भी आज पुलिस मुठभेड़ में ढेर।” 

उस्मान से पहले पुलिस ने 27 फरवरी को एक और बदमाश अरबाज का एनकाउंटर हुआ था। अरबाज़ पर आरोप था कि वो हमले के दौरान उस क्रेटा गाड़ी को चला रहा था, जिससे शूटर आए थे। 1 दिन पहले यह क्रेटा गाड़ी अतीक अहमद के घर से बरामद हुई थी।

असम में सरकारी डॉक्टरों की नियुक्ति, 64% मुस्लिम: जानिए वायरल दावे का क्या है सच

असम को लेकर सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्मों पर एक संदेश वायरल हो रहा है। इसमें दावा किया जा रहा है कि असम में हाल ही में नियुक्त किए गए डॉक्टरों में से अधिकांश अल्पसंख्यक हैं। दावे के साथ डॉक्टरों की तीन पन्नों की डॉक्टरों की नियुक्ति की एक सूची भी शेयर की जा रही है। इसमें कहा गया है कि असम लोक सेवा आयोग ने हाल में 55 डॉक्टर नियुक्त किए हैं। इनमें से 34 अल्पसंख्यक (मुस्लिम) से हैं। यानी नियुक्त किए गए डॉक्टरों में 64% प्रतिशत संख्या मुस्लिम डॉक्टरों की है।

वायरल लिस्ट के नामों को देखने से भी ऐसा प्रतीत होता है कि अधिकांश मुस्लिम नाम वाले डॉक्टर हैं। लेकिन यह दावा भ्रामक है। दरअसल जो लिस्ट वायरल की जा रही है, वह असम में नवनियुक्त डॉक्टरों की चयन सूची नहीं है। यह स्थानांतरण सूची है। असम सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की ओर से जारी आदेश में पहले के एक आदेश को संशोधित किया गया है। इसके अनुसार 19 जनवरी, 2023 को जारी नोटिफिकेशन संख्या 1/2023/94 में आंशिक संशोधन करते हुए नव नियुक्त चिकित्सकों को तत्काल प्रभाव से अगले आदेश तक उनके नाम के साथ अंकित स्थान पर नियुक्त किया जाता है। सूची का मूल पीडीएफ यहाँ देख सकते हैं।

वायरल लिस्ट का स्क्रीन शॉट

नए आदेश के अनुसार 55 चिकित्सकों को पहले नियुक्त किए गए स्थान से ट्रांसफर किया गया है। इसलिए इस सूची में केवल उन्हीं डॉक्टरों को शामिल किया गया है, जिनकी नियुक्ति दूसरे स्थानों पर की जा रही है। इस सूची में 64% मुस्लिम नाम हैं। नए आदेश में 19 जनवरी, 2023 के पूर्व के एक नियुक्ति संबंधी आदेश का जिक्र है। 19 जनवरी को जारी आदेश के अनुसार असम में नए 541 चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों (Medical and Health Officers) की नियुक्ति की गई थी। उस आदेश का पीडीएफ यहाँ देख सकते हैं।

19 जनवरी को जारी 541 डॉक्टरों की नियुक्ति सूची में उनके धर्म का उल्लेख नहीं है। ऑपइंडिया ने बहाल डॉक्टरों के नाम और उपनाम के आधार पर उनके धर्म का पता लगाने की कोशिश की। लिस्ट के नामों की विवेचना के अनुसार हमें नवनियुक्त 541 चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों-1 में 183 मुस्लिम नाम वाले डॉक्टर मिले। इसका अर्थ है कि राज्य में नियुक्त डॉक्टरों में लगभग 34% मुस्लिम हैं, न कि 64 प्रतिशत।

बता दें लिस्ट में शामिल नाम के आधार पर धर्म का पता लगाने में कुछ त्रुटियाँ हो सकती हैं। हालाँकि असम में मुस्लिमों के नाम और उपनाम देश के दूसरे राज्यों की तुलना में आसानी से समझे जा सकते हैं, इसलिए त्रुटि होने की संभावना कम से कम है। लेकिन राष्ट्रीय हिस्सेदारी के हिसाब से डॉक्टरों की नियुक्ति में मुस्लिमों की 34 प्रतिशत हिस्सेदारी भी अधिक लगती है। राज्य के हिसाब से देखें तो असम में 34 प्रतिशत मुस्लिम हैं, इस अनुसार मुस्लिमों की नियुक्ति जनसंख्या के अनुसार सामान्य प्रतीत होती है।

यह दावा कि असम में नियुक्त नए सरकारी डॉक्टरों में से 64% अल्पसंख्यक हैं, गलत और भ्रामक है। इसी तरह यह दावा कि डॉक्टरों की नियुक्ति असम लोक सेवा आयोग द्वारा की गई है, यह भी गलत है। दोनों आदेशों में देखा जा सकता है कि यह नियुक्ति चिकित्सा एवं स्वास्थ्य भर्ती बोर्ड की सिफारिश पर असम सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग द्वारा की गई है।

साँस लेने में दिक्कत, हिलने-डुलने में तकलीफ, दर्द, पट्टियाँ… प्रभास की फिल्म की शूटिंग के दौरान घायल हुए अमिताभ बच्चन, ‘कुली’ के समय भी हुआ था हादसा

बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन (Amitabh Bachchan) हैदराबाद में अपनी अपकमिंग फिल्म ‘प्रोजेक्ट के’ (Project K) की शूटिंग के दौरान घायल हो गए। बिग बी ने रविवार (5 मार्च, 2023) को अपने ब्लॉग पर चोट लगने की जानकारी दी है। उनकी पसलियों में चोट आई है। फिल्म की शूटिंग कैंसिल कर दी गई है। हैदराबाद के एआईजी अस्पताल में अमिताभ का चेकअप कराने के बाद उन्हें मुंबई भेज दिया गया है।

अमिताभ बच्चन ने अपने ब्लॉग में लिखा, “हैदराबाद में ‘प्रोजेक्ट के’ की शूटिंग के दौरान एक एक्शन शॉट करते हुए मुझे चोट लग गई है। रिब कार्टिलेज फट गया है। दाहिनी रिब केज की मांसपेशियों में खिंचाव आ गया है। शूटिंग कैंसिल कर दी गई है। टीम के लोग मुझे हैदराबाद के एआईजी अस्पताल में ले गए। वहाँ डॉक्टरों ने मेरा सीटी स्कैन कराया और अब मैं अपने घर वापस आ गया हूँ। पट्टी बाँधी गई है और इलाज किया जा रहा है। काफी ज्यादा दर्द हो रहा है। हिलने-डुलने में तकलीफ हो रही है। साँस लेने में भी दिक्कत आ रही है। इस दर्द के लिए मुझे कुछ दवाएँ दी गई हैं। ठीक होने में अभी कुछ हफ्ते लगेंगे।”

अमिताभ बच्चन के ब्लॉग का स्क्रीनशॉट

​​​​​​बिग बी ने आगे लिखा, “जब तक मैं ठीक नहीं हो जाता, तब तक के लिए सभी काम रद्द कर दिया गया है। मैं जलसा में आराम कर रहा हूँ। मोबाइल पर उपलब्ध रहूँगा, लेकिन ज्यादातर बेड रेस्ट पर ही रहूँगा। जरूरी चीजों के लिए ही थोड़ा बहुत चलूँगा। मेरे लिए यह कहना काफी मुश्किल है, पर मैं आज जलसा के गेट पर अपने चाहने वालों से नहीं मिल पाऊँगा। मेरी सलाह है कि आप यहाँ ना आएँ। आप उन लोगों को भी यह बात बता दें, जो जलसा आने की योजना बना रहे हैं। इसके अलावा बाकी सब ठीक है।”

गौरतलब है कि 1982 को बेंगलुरु में फिल्म ‘कुली’ की शूटिंग के दौरान एक एक्शन सीन करते हुए अमिताभ बच्चन के पेट की झिल्ली और छोटी आँत फट गई थी। दरअसल, उस सीन में पुनीत इस्सर को अमिताभ बच्चन के पेट पर पंच मारना था, लेकिन गलती से यह पंच ज्यादा तेज से लग गया, जिससे के बाद अमिताभ की हालत गंभीर हो गई। उन्हें आनन-फानन में अस्पताल ले जाया गया। इस हादसे से बाद अमिताभ 61 दिन तक अस्पताल में जिंदगी और मौत से लड़े थे। एक समय पर डॉक्टर्स ने भी जवाब दे दिया था। तब उनके फैंस बिग बी के ठीक होने की दुआएँ माँग रहे थे। बताया जाता है कि तब अमिताभ बच्चन लगभग कोमा में चले गए थे।

बता दें कि ‘प्रोजेक्ट के’ एक फैंटेसी ड्रामा है, जिसमें साउथ के सुपरस्टार प्रभास एक नए अवतार में नजर आएँगे। इस फिल्म में अमिताभ बच्चन के अलावा दीपिका पादुकोण भी अहम भूमिका में हैं। ‘प्रोजेक्ट के’ 2024 में सिनेमाघरों में रिलीज हो सकती है।

‘एक मोहल्ला, एक होलिका’ का ज्ञान देने वाले ईद पर ‘एक मोहल्ला, एक बकरा’ वाली सलाह देंगे? – हिन्दू त्योहारों पर ज्ञान बाँचने का चलन फिर शुरू, लिबरल गिरोह एक्टिव

होली आ गई है। होली, मतलब रंग-गुलाल का त्योहार। हिन्दू त्योहार। अब चूँकि त्योहार हिन्दुओं का है, इसीलिए इस पर हंगामा मचाया जाना और इसके प्रति घृणा फैलाई जानी तो स्वाभाविक है। ऐसा करने वाले वामपंथी होते हैं, जिनका साथ कट्टर इस्लामी लोग बखूबी देते हैं। हिन्दू त्योहारों के खिलाफ प्रोपेगंडा में मीडिया, बुद्धिजीवी और सेलेब्रिटीज का एक पूरा का पूरा गठबंधन शामिल रहता है। होली को लेकर भी समय-समय पर ज्ञान दिए जाते रहे हैं।

ये कोई नई बात भी नहीं है। होली को लेकर पहले भी ज्ञान दिया जाता रहा है। जैसे, होली आते ही सब ‘वॉटर एक्टिविस्ट’ बन जाते हैं और पानी बचाने की बातें करने लगते हैं। ऐसे सेलेब्रिटी जो अपने घर में स्विमिंग पूल में नहा-नहा कर रोज हजारों लीटर पानी बर्बाद करते हैं, वो भी होली पर पानी बचाने का ज्ञान देते नजर आते हैं। कभी ‘सूखी होली’ खेलने को कहा जाता है तो कभी केवल फूलों का इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है।

जब रंग ही गायब हो जाए तो होली कैसी? अब ‘दैनिक जागरण’ के एक विज्ञापन को देखिए। ये स्पष्ट नहीं है कि ये विज्ञापन कब का है, लेकिन ये होलिका दहन को लेकर ही है। ‘दैनिक जागरण की पहल’ के नाम पर अख़बार ‘एक मोहल्ला, एक होलिका’ नाम से एक विज्ञापन लेकर आ गया। इसमें उसने लिखा, “इस बार होली पर प्रयास करें कि थोड़ी दूर पर अलग-अलग होलिका जलाने की जितना जगह हो सके, एक मोहल्ले में एक ही होलिका जलाएँ। इससे प्रदूषण घटेगा, अपमापन बढ़ेगा।” साथ ही कुछ ‘दिशानिर्देश’ भी दिए गए।

ईद-क्रिसमस पर जम कर बधाइयाँ देने वाली मीडिया होली पर जम कर हिन्दुओं को नीचा दिखाती है। ‘दैनिक जागरण’ ने भी हिन्दुओं को ये सलाह दिया – यातायात बाधित न करें, इससे हमें और आपको ही परेशानी होगी, हाईटेंशन व अन्य तारों को बचाएँ, लकड़ी की जगह उपलों का प्रयोग करें, ताकि बचे रहें हमारे पेड़, ऐसा कोई सामान न जलाएँ जिससे पर्यावरण में प्रदूषण पैदा हो। क्या ईद-क्रिसमस पर ऐसे ज्ञान निकलते हैं?

अब जरा सोचिए। क्या ईद पर मीडिया लोगों को ये सलाह देती है कि एक मोहल्ले में एक ही बकरा काटें, क्योंकि जीव-जंतुओं की हत्या करना ठीक नहीं है? क्या ऐसे सलाह दिए जाते हैं कि जानवरों के खून को सड़क पर न बहाया जाए और बचे हुए मांस के टुकड़ों को सड़क पर न फेंका जाए? इससे तो बीमारी पैदा ही होती ही है। इस्लामी मुल्कों में सड़क पर खून की नदियाँ बहती दिखती हैं। ऐसे ही, ईद पर कभी ये ज्ञान नहीं दिया जाता कि सड़क जाम कर के नमाज न पढ़ें, इससे तो सचमुच यातायात बाधित होता है।

इसी तरह क्रिसमस और ईसाई नववर्ष के मौके पर कभी ये ज्ञान नहीं दिया जाता कि पटाखे न जलाएँ। दीवाली खत्म होते ही इस तरह का ज्ञान देने की तारीख़ एक्सपायर हो जाती है। क्रिसमस पर कभी आर्टिफिसियल पेड़ों को घर पर न लाने की सलाह नहीं दी जाती। कभी ये नहीं कहा जाता कि पार्टियों में पानी और भोजन बर्बाद न करें। उलटा और खुल कर जश्न मनाने की सलाह दी जाती है, क्योंकि सारे पर्यावरण का ठेका हिन्दुओं ने ही ले रखा है जो प्रकृति की पूजा करते हैं।

क्या हम ‘दैनिक जागरण’ से ये पूछ सकते हैं कि अख़बारों के लिए कागज कैसे बनता है? इसके लिए पेड़ काटे जाते हैं या नहीं? क्या ‘दैनिक जागरण’ लोगों को ये सलाह देते हुए खबर प्रकाशित करेगा कि आप अखबर न खरीदें, क्योंकि इसके लिए जो कागज आता है वो पेड़ काट कर बनाया जाता है। लेकिन नहीं, जिन्हें ‘एक मोहल्ला, एक बकरा’ और ‘एक मोहल्ला, एक क्रिसमस ट्री’ लिखने की हिम्मत नहीं है, वो एक मोहल्ला, एक होलिका’ लिख रहे हैं।

होलिका दहन एक ऐसा त्योहार है, जिसे भक्त प्रह्लाद के राक्षसों के अत्याचार के बावजूद ज़िंदा बच जाने की कहानी कहता है। अब देखिए, एक यूट्यूबर और कथित महिला एक्टिविस्ट ने तो होलिका दहन को ही महिला विरोधी त्योहार बताते हुए पूछ दिया कि एक सभ्य समाज में स्त्री को ज़िंदा जलाना कहाँ तक उचित है? ऐसी बातें वही करते हैं, जिन्हें न तो हमारे पर्व-त्योहारों के पीछे का कॉन्सेप्ट पता है और न इसका इतिहास और इसकी कथा।

होलिका दहन के बारे में हिन्दुओं को पता है कि होलिका अपने मासूम भतीजे प्रह्लाद को ज़िंदा जलाने के लिए आग में बैठ गई थी, लेकिन वो जल गई और भक्त प्रह्लाद बच गए। अगर होलिका जलाना स्त्री-विरोधी है तो क्या हर साल रावण को दशहरा के मौके पर जलाए जाने को पुरुष विरोधी बता कर आंदोलन खड़ा कर दिया जाना चाहिए? स्त्रियों की जहाँ पूजा होती है, उस हिन्दू धर्म में इस तरह के पाश्चात्य वोक एक्टिविज्म की ज़रूरत ही नहीं है।

होली रंगों का त्योहार है। रंग और पानी के बिना इसे हम क्यों मनाए? ऐसे ही, महाशिवरात्रि पर दूध बचाने का ज्ञान दिया जाता है। दीवाली पर कहा जाता है कि दीये मत जलाओ और पटाखे मत उड़ाओ। दुर्गा पूजा कर हिन्दुओं को ये कह कर नीचा दिखाया जाता है कि भारत में बलात्कार होते हैं। गणेश चतुर्थी के मौके पर प्रतिमा जल में न विसर्जित करने को कहा जाता है। अर्थात, जितने हिन्दू त्योहार उतने ही किस्म के नए-नए ज्ञान।

त्योहार हमेशा से वैसे ही मनाए जाने चाहिए जैसा हमारे शास्त्रों पर वर्णित है और जैसे हमारे पूर्वज पूरे उत्साह के साथ मनाते रहे हैं। हिन्दू त्योहारों में न तो हिंसा के लिए कोई जगह है और न ही किसी और को नुकसान पहुँचाया जाता है। उत्सव के दौरान सब जश्न में डूबे रहते हैं, एक-दूसरे से मिलते हैं और ईश्वर की पूजा-अर्चना करते हैं। इसमें लिबरल गिरोह के ज्ञान के लिए कोई जगह नहीं है। गया की ज़रूरत जिन्हें है, उन्हें देने में इनकी हालत पस्त हो जाती है क्योंकि वो ‘सिर तन से जुदा’ कर देते हैं।

इसीलिए, खूब अच्छे से होली मनाइए। रंग लगाइए एक-दूसरे को। पानी में रंग घोल कर एक-दूसरे पर उड़ेलिए। हाँ, बस हमें ऐसे रंगों का प्रयोग नहीं करना है जिससे हमारा नुकसान हो जाए। ब्रज में फूलों की होली खेलिए, काशी में चिताभस्म की होली खेलिए और मोहल्ले में अबीर-गुलाल सबका प्रयोग कर के होली खेलिए। पकवान खाइए, पूजा-पाठ कीजिए और ज्ञान देने वाले को दिखा-दिखा कर ये सब कीजिए। कोई ‘दैनिक जागरण’ या फिर कोई ‘निर्देश सिंह’ ये डिसाइड नहीं कर सकते कि हिन्दू अपने त्योहार कैसे मनाएँ।

मेरठ में हिंदुओं पर मुस्लिम भीड़ का हमला, पथराव-तोड़फोड़: दावा- होलिका पर मारी लात, इस्लाम कबूलने को कहा

उत्तर प्रदेश के मेरठ में होलिका दहन के लिए चंदा वसूली के दौरान कहासुनी के बाद हालात बिगड़ गए। खबरों के मुताबिक होलिका दहन के लिए चंदा जमा कर रहे हिंदू युवकों पर मुस्लिमों के एक ग्रुप ने हमला कर दिया। इसके बाद दोनों तरफ से पत्थरबाजी शुरू हो गई। झड़प में 2 लोगों के जख्मी होने की खबर है। पुलिस ने तीन लोगों को हिरासत में लिया है। इलाके में अब भी तनाव है।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक ब्रहमपुरी थाना क्षेत्र के हरिनगर मोहल्ले में 50 सालों से आयोजित होने वाले होलिका दहन के लिए स्थानीय निवासी अमित गुप्ता, सोनू प्रजापति और मुल्लू चंदा जमा कर रहे थे। आरोप है कि इलाके के पार्षद शहजाद मेवाती, उसका भाई भूरा बेटों (इंतजार, सेफू) समेत मौके पर पहुँचे और चंदा माँग रहे हिंदू युवकों पर छींटाकशी करने लगे। स्थानीय लोगों का आरोप है कि शहजाद और उसके साथ आए लोगों ने चंदा माँगने वाले हिंदू युवकों से कहा, “हमसे भी चंदा ले लो और चंदा लेकर इस्लाम कबूल लो।” इस बात पर दोनों पक्षों में विवाद हो गया।

आपत्ति जताए जाने के बाद शहजाद और उसके साथियों ने हिंदू युवकों के साथ मारपीट शुरू कर दी। अमित और मुल्लू की बुरी तरह पिटाई की गई। इतना ही नहीं मुस्लिम उपद्रवियों ने होलिका को भी लात मार कर अपमानित किया। इस तरह इलाके में सांप्रदायिक तनाव फैल गया। करीबन आधे घंटे वहाँ दोनों पक्षों में पथराव हुआ, कई वाहन क्षतिग्रस्त किए गए। घटना की जानकारी मिलते ही ब्रहमपुरी थाना की पुलिस मौके पर पहुँची। पुलिस ने मामले में तीन लोगों को हिरासत में लिया है वहीं अमित और मुल्लू को गंभीर चोटें आने की बात कही जा रही है।

तनाव को देखते हुए मौके पर कई थानों की पुलिस तैनात की गई है। एसपी सिटी पीयूष सिंह का कहना है कि चश्मदीदों से पूछताछ की जा रही है और घटना की जानकारी ली जा रही है। दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

‘जमीन के बदले नौकरी…’ : राबड़ी देवी के घर पड़ा CBI का छापा, अधिकारियों की 3 गाड़ी आवास पर पहुँचीं

बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के घर आज (6 मार्च 2023) सीबीआई का छापा पड़ा है। सामने आई तस्वीरों में उनके घर के बाहर भारी मात्रा में सुरक्षाकर्मी लगे दिख रहे हैं।

कथितौर पर सीबीआई ने ये कार्रवाई जमीन के बदले नौकरी मामले में की है। केस में राबड़ी देवी के अलावा उनके पति लालू प्रसाद यादव और दोनों की बेटी मीसा भारती भी आरोपित हैं।

बता दें कि सीबीआई का छापा पूर्व सीएम के आवास पर तब पड़ा जब जब विधानसभा का सत्र शुरू होने वाला था। इसी दौरान राबड़ी देवी के आवास पर सीबीआई की कई गाड़ियाँ पहुँची और घर में जाँच शुरू हुई। इस छापेमारी से पहले तेजस्वी यादव आवास से विधानसभा सत्र के लिए निकल गए थे।

इस छापेमारी से पहले लालू, राबड़ी देवी, मीसा भारती समेत 14 लोगों के खिलाफ सीबीआई ने समन भेजा था। सीबीआई ने समन में सब लोगों को 15 मार्च को पेश होने के लिए कहा है।

उल्लेखनीय है कि 14 साल पहले जिस समय यह घोटाला हुआ था, उस समय लालू प्रसाद यादव यूपीए शासनकाल में रेलमंत्री थे। उस समय नौकरी के देने बदले लालू प्रसाद यादव के परिजनों को पटना में करीब 1.05 लाख वर्ग फुट जमीन अधिग्रहित की गई थी।

इस घोटाले में बिना विज्ञापन निकाले रिश्वत देने वाले अभ्यार्थियों को तीन दिन के अंदर रेलवे में नौकरी दे दी गई थी। इतना ही नहीं, इन उम्मीदवारों ने नौकरी के लिए झूठे स्थानांतरण प्रमाण पत्र का इस्तेमाल किया है और रेल मंत्रालय में झूठे प्रमाणित दस्तावेज भी जमा कराए थे।

दिनदहाड़े आए और गोलियों से भून चले गए: भारत के 4 मोस्ट वांटेड आतंकी खलास, 3 पाकिस्तान में और 1 अफगानिस्तान में मारा गया

पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में आतंकी सैयद नूर शालोबार की गोली मार कर हत्या कर दी गई। शनिवार (04 मार्च, 2023) को अज्ञात हमलावरों ने कश्मीर में कई आतंकवादी घटनाओं के लिए जिम्मेदार शालोबार को गोलियों से भून डाला। नूर शालोबार से पहले सैयद खालिद राजा, एजाज अहमद अहंगर और बशीर अहमद नाम के आतंकियों की भी गोली मार कर हत्या हो चुकी है। मारे गए चारों आतंकी भारत में मोस्ट वांटेड थे। इनमें से एक को अफगानिस्तान में ढेर किया गया जबकि 3 का शिकार पाकिस्तान में ही बनाया गया।

आतंकी सैयद नूर शालोबार

रिपोर्टों के मुताबिक सैयद नूर शालोबार पाकिस्तानी सेना और आईएसआई के साथ मिलकर कश्मीर में आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देने का काम कर रहा था। उसपर आतंकी संगठनों के लिए नए लोगों खास कर कश्मीरियों की भर्ती की जिम्मेदारी थी। शालोबार 4 मार्च को पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा इलाके में अज्ञात बंदूकधारियों के हाथों मारा गया।

अलबद्र कमांडर सैयद खालिद राजा

27 फरवरी को कश्मीर में सक्रिय रहे आतंकी सैयद खालिद राजा को मार दिया गया था। खालिद राजा अल-बद्र का आतंकी कमांडर था। खालिद कुछ समय से पाकिस्तान के कराची में रह रहा था। जहाँ वह ‘फेडरेशन ऑफ प्राइवेट स्कूल्ज’ का वाइस चेयरमैन बना दिया गया था। हालाँकि वह कश्मीरी आतंकियों के साथ जुड़ा हुआ था और पाकिस्तान में बैठकर उनकी मदद कर रहा था। खालिद को हमलावरों ने उसके घर के बाहर ही गोली मार दी और मौके पर ही उसकी मौत हो गई।

आईएस आतंकी एजाज अहमद अहंगर

इसी तरह कश्मीर में पैदा हुए आतंकी एजाज अहमद अहंगर को 22 फरवरी, 2023 को मार गिराया गया था। अहंगर इस्लामिक स्टेट से जुड़ा हुआ था और भारतीयों पर हमला करने के लिए आत्मघाती हमलावरों को तैयार करता था। गृह मंत्रालय ने जनवरी 2023 में ही अहंगर को आतंकी घोषित किया था। अहंगर को अबू उस्मान अल-कश्मीरी के नाम से भी जाना जाता था। रिपोर्टों के मुताबिक अहंगर को तालिबान ने अफगानिस्‍तान के कुनार इलाके में मार गिराया।

बशीर अहमद पीर

21 फरवरी, 2023 को हिजबुल मुजाहिद्दीन के टॉप कमांडर बशीर अहमद पीर को पाकिस्तान के रावलपिंडी में मार गिराया गया था। रिपोर्टों के मुताबिक बशीर अपने घर के पास मस्जिद में नमाज पढ़ने गया था। मस्जिद से बाहर निकलने के बाद बाइक सवार दो हमलावरों ने आतंकी को गोली मारी और चलते बने। अक्टूबर 2022 में भारत में आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देने में शामिल होने की वजह से उसे आतंकवादी घोषित किया गया था।

बशीर कश्मीर में आतंकवाद के लिए भर्ती किए गए नौजवानों को हथियार और गोला-बारूद उपलब्ध कराता था। इसके अलावा पीओके में संचालित आतंकी शिविरों और लॉन्च पैड्स से आतंकियों को भारत में घुसपैठ कराने में भी मदद कर रहा था। बशीर जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा जिले का रहने वाला था लेकिन पिछले 15 सालों से वह पाकिस्तान में रह रहा था।

अल-बद्र के आतंकी खालिद के हत्या की जिम्मेदारी सिंधुदेश रिवॉल्युशनरी आर्मी ने ली है। सिंधुदेश रिवॉल्युशनरी आर्मी नाम का संगठन पाकिस्तान से अलग सिंधुदेश बनाने की माँग कर रहा है। आतंकी अहंगर को तालिबान ने मारा जबकि बाकी के 2 आतंकियों नूर शालोबार और बशीर अहमद पीर को ढेर करने वालों के बारे में जानकारी नहीं मिल सकी है।

ईसाई बनो, मकान-नौकरी सब मिलेगा: कानपुर में किराए के घर से चल रहा था धर्मांतरण का रैकेट, हिंदुओं को शादी तक का दे रहे थे लालच

उत्तर प्रदेश के कानपुर से रविवार (6 मार्च 2023) को धर्मांतरण का मामला सामने आया है। पुलिस ने इस संबंध में दो लोगों को पकड़ा है। ये दोनों एक फ्लैट में रहकर लोगों को अच्छी नौकरी, बिजनेस, मकान और शादी का लालच देकर बरगलाने का काम करते थे। पुलिस को इनके पास से ताइवान भाषा में लिखी कुछ पुस्तकें बरामद हुई हैं। अब इस मामले की जाँच एटीएस, आईबी, मिलिट्री इंटेलिजेंस समेत अन्य जाँच एजेंसियों के अधिकारी कर रहे हैं।

पूरा मामला चकेरी थाने के श्यामनगर का है। स्थानीय लोगों ने शिकायत की थी कि फ्लैट में धर्मांतरण का कार्य होता है। इसी बाबत बजरंग दल और विहिप के कार्यकर्ता वहाँ पहुँचे और उन्होंने फ्लैट पर 50 से अधिक पुरुष और महिलाओं को पाया। विश्व हिंदू परिषद के उपाध्यक्ष आनंद सिंह ने बताया कि इन सब लोगों का फ्लैट में ब्रेन वॉश हो रहा था, जिन्हें ईसाई धर्म से जुड़े साहित्य भी उपलब्ध कराए गए थे। उनके मुताबिक करीबन 8-10 लोगों को हिंदू धर्म छोड़कर ईसाई बनने को कहा जा रहा था।

जब पुलिस को इस धर्मांतरण के खेल की सूचना मिली तो फ्लैट पर फोर्स पहुँची और दो युवकों (अभिजीत और रजत) को धरा। साथ ही 6 संदिग्धों (जीवन, शिवांग, शीतल, जाबिन, राणाजी समेत 6) को हिरासत में लिया। गिरफ्तार हुए युवकों में से एक ने खुद को उत्तराखंड के चमोली का बताया और दूसरे ने खुद को थर्ड जेनरेन क्रिश्चियन बताया।

पुलिस को इनके पास से लैपटॉप, कम्प्यूटर में धर्मांतरण की प्रचार सामग्री बरामद हुई है। 4 ऐसे लोग भी मिले हैं जिन्हें लालच देकर धर्म परिवर्तन के लिए मना लिया गया था। अब पुलिस इनका फंडिंग कनेक्शन तलाश रही है। पुलिस का कहना है कि उन्हें छानबीन में मिले दस्तावेजों में ताइवान की भाषा लिखी हुई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर आनंद देव तिवारी ने बताया कि फ्लैट पर धर्म परिवर्तन का काम नौकरी और बेहतर जीवन के नाम पर किया जा रहा था। फ्लैट से जिस प्रकार के दस्तावेज मिले हैं उसे देख यही लगता है कि मामले में और जाँच की जरूरत है। उन्होंने बताया कि पुलिस की पड़ताल में 4 लोग ऐसे भी मिले जो धर्मांतरण को तैयार थे पर अभी उनका धर्म परिवर्तन हुआ नहीं था। पुलिस ने बताया कि फ्लैट में रहकर धर्मांतरण की गतिविधि ऑपरेट की जा रही थी।

हैरानी की बात ये है कि आरोपितों की कोई लोकल इनकम सोर्स का नहीं पता चल पाया है जबकि इनका मासिक खर्चा 2 लाख रुपए से ऊपर का है। पुलिस मान रही है कि कानपुर में धर्मांतरण का खेल किसी एनजीओ द्वारा संचालित हो रहा था।  पुलिस अब दोनों आरोपितों को रिमांड पर लेकर पूछताछ करेगी।