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‘राजस्थान पुलिस ने पुलवामा के बलिदानियों की पत्नियों पर बरसाई लाठियाँ’: कॉन्ग्रेस सरकार की वादाखिलाफी पर परिजनों का धरना, घेरे में CM गहलोत

राजस्थान के जयपुर में पुलवामा आतंकी हमले के बलिदानी CRPF जवानों के परिजनों ने पुलिस द्वारा खुद को प्रताड़ित किए जाने का आरोप लगाया है। वीरगति पाए जवानों के परिवार वालों ने राजस्थान सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए इच्छामृत्यु की माँग की है। इन आरोपों के समर्थन में कुछ वीडियो भी वायरल हुए हैं, जिनमें राजस्थान पुलिस के जवान महिलाओं से बदसलूकी करते नजर आ रहे हैं। पीड़ित परिजन शहीद स्मारक पर अपनी माँगों को लेकर धरना दे रहे थे। भाजपा ने इस मामले में गहलोत सरकार को आड़े हाथों लिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, फरवरी 2019 के पुलवामा आतंकी हमले में बलिदान हुए CRPF जवानों के परिजन जयपुर स्थित शहीद स्मारक के एक हिस्से में अपनी माँगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। इस प्रदर्शन में बलिदानी जवानों की माताएँ और पत्नियाँ भी शामिल हैं। बलिदानी हेमराज मीणा की वीरांगना पत्नी मधुबाला मीणा ने बताया कि काफी पहले ही उनके गाँव का नाम उनके पति के नाम पर रखने और सांगोद के स्कूल में स्मारक बनाने का वादा हुआ था जो अब तक अधूरा है। मधुबाला का आरोप है कि ये कोई बहुत बड़ी माँग नहीं है, लेकिन राजस्थान सरकार के मंत्री इसे टाल रहे हैं।

एक अन्य बलिदानी रोहिताश लाम्बा की पत्नी मंजू ने बताया कि उनके पति के अंतिम संस्कार के समय तमाम नेता और मंत्री आ कर बड़े-बड़े वादे किए थे। तब मंजू के देवर जितेंद्र को सरकारी नौकरी के साथ रोहिताश का एक स्मारक भी बनवाने का वादा राज्य सरकार की तरफ से किया गया था। वारांगना मंजू का आरोप है कि वो तमाम सरकारी वादे अधूरे पड़े हैं। बताया गया कि अब रोहिताश के घर किसी मंत्री या नेता का आना-जाना तो दूर, कोई अधिकारी ठीक से बात भी नहीं करता।

रोते हुए मंजू लम्बा ने बताया कि जब उन्होंने अपनी माँगों के लिए आवाज उठाई, तब उन्हें राजस्थान पुलिस से प्रताड़ित करवाया गया। इस दौरान मंजू लाम्बा ने कहा, “हमने सोचा था कि हम अपने बच्चों को भी देश के लिए लड़ने भेजेंगे, पर यह सब देख कर हमने अपने हाथ वापस खींच लिए हैं।”

भाजपा ने उठाए सवाल

राजस्थान भाजपा ने पुलवामा हमले में वीरगति पाए जवानों की वीरांगनाओं के साथ पुलिस और गहलोत सरकार के रवैये की आलोचना की है। भाजपा नेता लक्ष्मीकांत भारद्वाज ने मंजू लाम्बा का वीडियो शेयर करते हुए लिखा, “मुख्यमंत्री से मिलने जा रही पुलवामा के अमर शहीद रोहिताश लांबा जी की पत्नी को कॉन्ग्रेस की राजस्थान सरकार की पुलिस ने लाठियाँ से पीटा। इस बिलखती वीरांगना के आँसू आपको सोने देंगे अशोक गहलोत जी?”

भाजपा सांसद किरोड़ी लाल मीणा ने घटनास्थल पर अपनी मौजूदगी का दावा किया। उन्होंने लिखा, “आज तीनों वीरांगनाओं के साथ राज्यपाल महोदय को ज्ञापन देने राजभवन गया था। ज्ञापन सौंपने के बाद वीरांगनाएँ मुख्यमंत्री जी से मिलने के लिए मुख्यमंत्री आवास की ओर पहुँचीं तो पुलिस ने उनके साथ अभद्रता व मारपीट की। इसमें मंजू जाट घायल हो गईं।”

किरोड़ी लाल मीणा ने एक वीडियो भी अपने ट्वीट में शेयर की है जिसमें राजस्थान पुलिस वीरांगनाओं से धक्का-मुक्की करती दिखाई दे रही है। राजस्थान के पूर्व उप-मुख्यमंत्री सचिन पायलट ने इस धरने पर बोलते हुए बताया कि जो माँग दोनों महिलाओं द्वारा की जा रही है, उसका प्रावधान ही नहीं है। उन्होंने बताया कि जमीन और नौकरी के वादे राज्य सरकार द्वारा पहले ही पूरे किए जा चुके हैं। हालाँकि, उन्होंने इस बाबत मुख्यमंत्री से चर्चा करने की बात कही है।

माँ की मौजूदगी में यौन शोषण करता था सौतेला बाप, नाबालिग यूट्यूबर ने दोनों की हरकतों का बनाया था वीडियो: कोर्ट ने सुनाई 5 साल की सजा

गुजरात की अहमदाबाद कोर्ट ने नाबालिग लड़की का यौन शोषण करने के आरोप में पीड़िता की माँ और उसके सौतेले पिता को 5 साल की सजा सुनाई है। पीड़ित लड़की ने अपने सौतेले पिता पर यौन शोषण करने का आरोप लगाया था। पीड़िता ने कहा था कि इसमें उसकी माँ भी सहयोग कर रही थी। पीड़ित नाबालिग लड़की यूट्यूबर है। उसने दोनों आरोपितों की हरकतों का वीडियो सबूत के तौर पर कोर्ट में पेश किया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अहमदाबाद के गेरतपुर की रहने वाली 17 वर्षीय यूट्यूबर ने दिसंबर 2021 में अपनी 52 वर्षीय माँ और 38 वर्षीय सौतेले पिता के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। पीड़िता महिला की चार बेटियों में सबसे छोटी है। उससे तीन बड़ी बहनों की शादी हो चुकी है। पीड़िता ने अपनी शिकायत में कहा था कि वह कोरोना महामारी के समय अपनी माँ के साथ रहने गई थी। वहाँ सौतेले पिता ने उसका यौन शोषण करना शुरू कर दिया था।

पीड़ित नाबालिग लड़की ने जब इसकी शिकायत अपनी माँ से की तो उसने अनसुना कर दिया। इसके साथ ही उसकी माँ ने कहा कि उसका सौतेला पिता जल्द ही उससे शादी कर लेगा। पीड़िता ने परेशान होकर अपने साथ हो रही घटना की जानकारी पड़ोसियों को दी। तब पड़ोसियों ने उससे अपनी माँ और सौतले पिता की हरकतों का वीडियो बनाने की सलाह दी।

इसके बाद जब सौतला पिता उसे गलत तरीके से छू रहा था, तब पीड़िता ने इसका वीडियो बना लिया। यही नहीं, उसने अपनी माँ का वीडियो भी रिकॉर्ड किया। वीडियो में माँ उसकी शादी होने तक इंतजार करने के लिए कह रही थी। इसके बाद पीड़िता ने वीडियो के बारे में पड़ोसियों को बताया। इस पर पड़ोसियों ने मामले की जानकारी पुलिस को दी।

पीड़िता के बयान और वीडियो फुटेज के आधार पर पुलिस ने 13 दिसंबर 2021 को पीड़िता की माँ और सौतेले पिता के खिलाफ आईपीसी (IPC) की धारा 354 और पॉक्सो एक्ट (Pocso Act) के तहत मुकदमा दर्ज किया था। मुकदमा दर्ज करने के बाद पुलिस ने दोनों को को गिरफ्तार कर लिया था।

वीडियो बना सबसे बड़ा सबूत

इस मामले की सुनवाई करते हुए विशेष पॉक्सो कोर्ट ने पीड़िता के बयान और वीडियो को सबूत मानते हुए कहा है कि आरोपित सौतेले पिता की हरकतों से यह साबित होता है कि वह अपने और पीड़िता के बीच संबंधों को ताक पर रखते हुए उसका यौन शोषण कर रहा था। भले ही पीड़िता उसकी सौतेली बेटी थी, लेकिन फिर वह एक बेटी ही है।

इसके बाद कोर्ट ने पीड़िता की माँ और सौतेले पिता पर नौ-नौ हजार रुपए का जुर्माना लगाते हुए 5 साल की सजा सुनाई। इसके साथ ही कोर्ट ने गुजरात सरकार को आदेश दिया है कि वह सहायता राशि के रूप में पीड़ित नाबालिग लड़की को 1 लाख रुपए प्रदान करे।

‘ये अवैध है, संविधान नहीं देता इजाजत’: सूरत स्टेशन के डिस्प्ले बोर्ड पर ‘जय श्री राम’ वाले वीडियो से भड़के कट्टर मुस्लिम, लोगों ने दिखा दी मस्जिद-मजार की तस्वीरें

सोशल मीडिया पर मुस्लिम यूजर्स भारतीय रेलवे के प्रति आक्रोश जता रहे हैं। कारण है एक वीडियो। ये वीडियो सूरत रेलवे स्टेशन का बताया जा रहा है। वीडियो में देखा जा सकता है कि जिस इन्फॉर्मेशन स्क्रीन पर ट्रेनों की टाइमिंग दिखती रहती है, उस पर साथ में ‘जय श्री राम’ भी लिखा हुआ है। साथ ही वहाँ ‘धर्मो रक्षति रक्षितः’ भी लिखा हुआ दिख रहा है। मुस्लिम ट्विटर यूजर इसे हिन्दू कट्टरवाद बता कर बौखलाए हुए हैं और मोदी सरकार का विरोध कर रहे हैं।

डिस्प्ले बोर्ड पर ‘जय श्री राम’ वाला वीडियो देख कर मुस्लिम यूजर्स भड़क गए हैं। इस वीडियो में ‘एक ही नारा, एक ही नाम’ लिखा हुआ भी दिख रहा है। इसके बाद आगे ‘जय श्री राम’ और ‘धर्मो रक्षति रक्षितः’ लिखा हुआ दिख रहा है। स्टेशन की मुख्य एंट्रेंस पर LED से इस तरह लिखा हुआ देख कर कट्टर मुस्लिम भड़क गए हैं। पत्रकार अहमद खबीर ने पूछा है कि क्या भारत के संविधान के हिसाब से इसकी अनुमति है, क्या ये वैध है?

मोहम्मद मुजीबुर रहमान नाम के ट्विटर यूजर ने लिखा, “सूरत रेलवे स्टेशन के डिस्प्ले बोर्ड पर ‘वेलकम’ की जगह ‘जय श्री राम’ लिखा आ रहा है। ये बताता है कि भारतीय रेलवे भी अब हिंदुत्ववादी हो गया है।”

आलम गुमत नाम के एक अन्य मुस्लिम यूजर ने केंद्रीय रेल मंत्रालय को टैग करते हुए पूछा, “ये सब क्या हो रहा है?”

हुसैन अहमद नाम के एक अन्य यूजर ने लिखा, “अगर कलबुर्गी रेलवे स्टेशन पर हरा रंग वैध नहीं है तो फिर सूरत रेलवे स्टेशन पर भी इस तरह की चीज लीगल नहीं है।”

अभी तक भारतीय रेलवे या केंद्रीय रेल मंत्रालय ने इन घटनाओं पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। उनका कमेंट आते ही हम इस आर्टिकल को अपडेट करेंगे। हालाँकि, इस दौरान लोग जवाब भी दे रहे हैं। एक व्यक्ति ने कुछ तस्वीरें शेयर की, जिनमें रेलवे स्टेशनों पर मुस्लिम भीड़ को नमाज पढ़ते हुए देखा जा सकता है। एक तस्वीर में इलाहाबाद जंक्शन पर मस्जिद बना कर नमाज पढ़ती मुस्लिम भीड़ देखी जा सकती है। अन्य तस्वीरों में रेलवे स्टेशन पर ही मजार बनी हुई देखी जा सकती है।

इन तस्वीरों को शेयर करते हुए समीर नाम के एक यूजर ने कहा कि सूरत रेलवे स्टेशन के डिस्प्ले बोर्ड पर ‘जय श्री राम’ लिखा आ रहा है तो इसे हटा दो, लेकिन ऐसी चीजों को भी हटाना होगा जो पूरी तरह अवैध हैं और असंवैधानिक भी। कुछ अन्य लोगों ने भी आवाज़ उठाई कि कैसे कई रेलवे स्टेशनों की जमीनों को कब्ज़ा कर के वहाँ मस्जिद या मजार बना दी गई है। ट्रेनों में नमाज पढ़ने के वीडियोज भी वायरल होते आ रहे हैं।

कॉन्ग्रेसी नेता हुआ टकला, वजह ममता बनर्जी: बोला- ‘कसम खाता हूँ कि जब तक ममता सरकार नहीं गिरा दूँ, सिर पर बाल नहीं रखूँगा’

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (CM Mamata Banerjee) पर कथित टिप्पणी के आरोप में गिरफ्तार युवा कॉन्ग्रेस नेता और वकील कौस्तव बागची (kaustav Bagchi) को जमानत मिल गई है। शनिवार (4 मार्च 2023) को कस्टडी से बाहर आते ही बागची ने अपना मुंडन करवाकर तृणमूल सरकार गिराने की कसम खाई। उन्होंने ममता सरकार गिर जाने तक सिर पर बाल नहीं रखने का संकल्प लिया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शनिवार को छूटते ही बागची ने कहा, “जब तक मैं ममता बनर्जी की सरकार नहीं गिरा दूँगा, तब तक बाल नहीं रखूँगा। मैं ममता बनर्जी की रातों की नींद उड़ा दूँगा।” कौस्तव बागची के मुताबिक, अगर ममता कॉन्ग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अधीर चौधरी से माफी माँगेंगी, तभी वह माफी के बारे में सोचेंगे। मुंडन करवाते कौस्तव का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

क्या था मामला

कौस्तव बागची पर आरोप है कि एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने पूर्व आईएएस अधिकारी दीपक कुमार घोष द्वारा लिखित पुस्तक ‘ममता बंद्योपाध्याय के जेमोन देखछि’ के हवाले से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के निजी जीवन के बारे में आपत्तिजनक बयान दिया था। इसी बयान को उनकी गिरफ्तारी की वजह बताई जा रही है। कॉन्ग्रेस और वामपंथी पार्टियों ने कौस्तव की गिरफ्तारी पर ममता सरकार की निंदा की।

कौस्तव का दावा था कि 189 पन्नों की किताब में चॉकलेट सैंडविच खाकर अनशन करने से लेकर ममता बनर्जी के काफी पारिवारिक मुद्दे हैं, जिनका खुलासा होने पर जनता उन्हें पहचान जाएगी। इसी प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद शनिवार सुबह बैरकपुर से कौस्तव बागची को पश्चिम बंगाल पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था।

कौस्तव अपने बयान पर कायम

हालाँकि, गिरफ्तारी के ही दिन शाम को कौस्तव को जमानत मिल गई। जमानत मिलने के बाद भी कॉन्ग्रेस नेता अपने बयान पर अड़े रहे। उन्होंने ममता बनर्जी पर रिटायर्ड IAS द्वारा लिखी गई किताब की सॉफ्ट कॉपी लोगों बाँटने का फैसला किया है।

इसी काम के लिए कौस्तव ने 2 व्हाट्सएप नंबर भी जारी किए हैं, जिस पर उन्होंने धमकी आने का आरोप लगाया है। कौस्तव ने कहा कि अगर भविष्य में उसके साथ कोई भी अनहोनी होती है तो उसके लिए ममता बनर्जी को जिम्मेदार माना जाए।

मनुस्मृति जलाकर पकाया मांस, उसी से सिगरेट भी लहराई: टीचर ट्रेनिंग वाली महिला दलित एक्टिविस्ट ने अम्बेडकर पर की बात

सोशल मीडिया पर एक लड़की द्वारा मनुस्मृति जलाने का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में लड़की मनुस्मृति जलाते हुए मांस पकाते दिखाई दे रही है। इसी वीडियो में लड़की जल रही मनुस्मृति से सिगरेट सुलगा कर कश लगाती भी दिखाई दे रही है। दावा किया जा रहा है कि लड़की का नाम प्रिया दास है जो बिहार की रहने वाली है। बिहार पुलिस इस मामले में सटीक सूचना मिलने पर कार्रवाई की बात कह रही है।

अपना वीडियो वायरल होने के बाद प्रिया दास खुद कैमरे पर आई। उसने कहा कि ये तो सिर्फ एक्शन है क्योंकि इसकी नींव बहुत पहले बाबा साहब अम्बेडकर रख चुके हैं। प्रिया दास के मुताबिक उसने मनुस्मृति जला कर ढोंग और पाखंडवाद पर वार किया है। मनुमृति पर एक दूसरे पर लोगों को बाँटने और ऊँच-नीच का भेद करने का आरोप लगाते हुए प्रिया दास ने कहा, “ये तो सिर्फ शुरुआत है। इसे अस्तित्वविहीन करना है।”

प्रिया दास ने आगे कहा, “समय लगेगा। लोग जाग रहे हैं। आज नहीं तो कल अस्तित्वविहीन होगा ही। लोगों को मूल शिक्षा समझना हमारा प्रयास है।” प्रिया दास ने कहा कि मनुस्मृति स्त्री और पुरुष में भी भेद करती है, जिसमें पुरुष को भगवान और स्त्री को भोग्या बताया गया है। बिहार पुलिस ने वीडियो के बारे में स्पष्ट जानकारी मिलने पर कार्रवाई की बात कही है। हालाँकि अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

युधिष्ठिर को बताया महाभारत का जिम्मेदार

मनुस्मृति जलाने के बाद प्रिया दास ने ‘द एक्टिविस्ट’ नाम के एक यूट्यूब चैनल को इंटरव्यू दिया। प्रिया दास ने इस चैनल के मोहम्मद कैफ से कहा, “महाभारत की जिम्मेदार द्रौपदी नहीं बल्कि धर्म का चोला ओढ़े युधिष्ठिर है।” इस दौरान प्रिया ने सभी कुरीतियों का जिम्मेदार मनुस्मृति को बताया। वीडियो में खुद के सिगरेट पीने की वजह भी प्रिया दास ने मनुस्मृति में औरतों के लिए बनाए कानून का विरोध करना बताया।

प्रिया दास ने खुद को टीचर की ट्रेनिंग लेते हुए राजनीति में सक्रिय एक दलित एक्टिविस्ट बताया है।

हवाई जहाज में फिर पेशाब-कांड: न्यूयॉर्क से मुंबई आ रही थी फ्लाइट, नशे में धुत छात्र ने बगल में बैठे यात्री पर किया सूसू, एयरपोर्ट पर गिरफ्तार

न्यूयॉर्क से दिल्ली आ रहे विमान में एक यात्री ने दूसरे यात्री पर फिर पेशाब कर दिया है। पेशाब करने वाले व्यक्ति की पहचान आर्य वोहरा के रूप में हुई है। वह अमेरिका रहकर पढ़ाई करता है। आरोप है कि आर्य वोहरा नशे में था और नींद में ही उसने दूसरे यात्री पर पेशाब कर दिया।

इस मामले में दिल्ली के इंदिरा गाँधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के डीसीपी ने कहा है कि उन्हें अमेरिकन एयरलाइंस से एक यात्री द्वारा दूसरे यात्री पर पेशाब करने की शिकायत मिली थी।आरोपित पर कानूनी कार्रवाई की जा रही है। दिल्ली हवाई अड्डे पर विमान के उतरते ही आरोपित को सीआईएसएफ ने गिरफ्तार कर दिल्ली पुलिस को सौंप दिया।

इस घटना को लेकर नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) के एक अधिकारी ने कहा, “हमें अमेरिकन एयरलाइंस से एक रिपोर्ट मिली है। उन्होंने स्थिति को अच्छे तरीके से संभाला और आवश्यक कार्रवाई की। इस घटना की जानकारी मिलते ही सीआईएसएफ और एयरलाइन की आंतरिक सुरक्षा टीम आवश्यक कार्रवाई में जुट गई थी। विमान के हवाई अड्डे पर उतरते ही आरोपित को गिरफ्तार कर लिया गया। संबंधित लोगों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं।”

वहीं, दिल्ली एयरपोर्ट अथॉरिटी के अनुसार, आरोपित आर्य वोहरा को पता है कि इस घटना से उसका करियर प्रभावित होगा। इसलिए उसने पीड़ित यात्री तथा क्रू मेंबर से माफी माँग ली है। एयरलाइन कंपनी ने मामले की जानकारी दिल्ली हवाई अड्डे की एयर ट्रैफिक पुलिस को भी दी है।

गौरतलब है कि भारत के विमानन नियमों के अनुसार, यदि कोई यात्री ऐसी हरकतें करते हुए पाया जाता है तो उस पर कानूनी कार्रवाई तो होती ही है। साथ ही उसके अपराध के आधार पर एक निश्चित समय के लिए फ्लाइट में बैठने पर भी प्रतिबंध लगा दिया जाता है।

दिल्ली पुलिस ने इस घटना ने संज्ञान लेते हुए कहा है कि वह अमेरिकन एयरलाइंस के संपर्क में है। पुलिस का कहना है, “इस घटना को लेकर हम एयरलाइन कंपनी (अमेरिकन एयरलाइंस) के संपर्क में हैं। पीड़ित यात्री न तो अपना नाम सार्वजनिक करना चाहता है और न ही शिकायत दर्ज कराना चाहता है।”

गौरतलब है कि हाल के दिनों में ऐसी कई घटनाएँ सामने आईं हैं। 26 नवंबर 2022 को न्यूयॉर्क से दिल्ली आ रही फ्लाइट में शंकर मिश्रा नामक व्यक्ति ने शराब के नशे में धुत होकर 70 वर्षीय बुजुर्ग महिला पर पेशाब कर दी थी। इसके बाद से पुलिस ने उसे बेंगलुरु से गिरफ्तार कर लिया था। इस मामले में पुलिस से लेकर नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने सख्त कार्रवाई करने की बात कही थी।

इसी तरह की एक घटना 30 जनवरी 2023 को सामने आई थी। तब विस्तारा एयरलाइंस का विमान UK 256 अबू धाबी से मुंबई आ रहा था। इस दौरान नशे में धुत महिला यात्री द्वारा क्रू मेंबर पर हमला करने और थूकने का मामला सामने आया था। जब उसे रोकने की कोशिश की गई तो उसने चिल्लाना शुरू कर दिया। फिर कपड़े उतारकर अर्धनग्न अवस्था में विमान में ही चलने लगी थी।

आरोपित महिला की पहचान पाओला पेरुशियो के रूप में हुई। वह इटली की नागरिक है। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया था, जहाँ कोर्ट ने उसका पासपोर्ट जब्त करते हुए 25000 रुपए के मुचलके पर जमानत दे दी थी।

होली पर ‘वीर्य वाले बैलून’ से हिन्दू धर्म को बदनाम करने की साजिश, क्या सैकड़ों-हजारों ने किया था सामूहिक हस्तमैथुन? लेफ्टिस्ट प्रोपेगंडा के 5 साल

अक्सर हिन्दू धर्म को बदनाम करने की कोशिश में मीडिया और तथाकथित बुद्धिजीवियों का लिबरल गिरोह लगा रहता है। इसके तहत हिन्दुओं को आतंकी साबित करने की कोशिश की जाती है। हिन्दू शास्त्रों को विज्ञान विरोधी बताया जाता है। हिन्दू मंदिरों के खिलाफ अभियान चलाए जाते हैं। और अव्वल तो ये कि हिन्दू पर्व-त्योहारों को बदनाम किया जाता है। ऐसा ही एक प्रोपेगंडा चलाया गया था होली में सीमेन भरे बैलूनों को लेकर।

हम जिस प्रकरण की बात कर रहे हैं, वो मार्च 2018 का है। अर्थात, इस घटना को 5 साल हो गए। क्या आपने कभी भारत में वामपंथी गिरोह को क्रिसमस या ईद के खिलाफ अभियान चलाते देखा है? नहीं। लेकिन, महाशिवरात्रि पर दूध बचाने और होली पर पानी बचाने के अलावा दीवाली पर प्रदूषण फैलने की बात करते हुए पटाखे प्रतिबंधित करने जैसे फैसले होते हैं। ज्ञान बाँचा जाता है। ‘सीमेन भरे बैलून’ इसी कड़ी की ‘नेक्स्ट लेवल पेशकश’ थी।

‘जीसस एंड मेरी कॉलेज’ के शिक्षकों और छात्रों ने दिल्ली में पुलिस मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन किया था और होली को ‘उपद्रवियों का त्योहार’ बताते हुए इस पर लगाम लगाने की माँग की थी। ये भारत में ही हो सकता है कि इसी धरती पर जिस धर्म को मानने वाले लोग बहुलता में रहते हैं, उनकी ही परंपराओं के खिलाफ बाहरी संप्रदायों के लोग आकर बैन लगाने की माँग करें। 2018 की होली के दौरान आरोप लगाया गया था कि महिलाओं पर ‘सीमेन भरे बैलून’ फेंके गए थे।

प्रोपेगंडा पत्रकार सागरिका घोष ने तब होली पर टिप्पणी करते हुए लिखा था, “ये काफी शर्मनाक और घृणास्पद है। क्या अब ‘सीमेन भरे बैलून’ भी होली के दौरान हिन्दू गर्व का हिस्सा हो गए हैं?” जब किसी ने उन्हें टोका और पूछा कि क्या अब सीमेन का भी रिलिजन होता है? इस पर उन्होंने ज़हर उगलते हुए लिखा था, “तो फिर सीमेन होली के टाइम पर क्यों फेंकते हैं सर? होली किस बड़े धर्म के अंतर्गत आता है? आपके क्या विचार हैं?”

सोचिए, इस तरह की घृणा कि किसी हिन्दू त्योहार के दौरान कोई घटना हो तो हिन्दू धर्म को ही जिम्मेदार ठहरा दो। बकरीद पर दुनिया भर में भले ही लाखों पशु कटते हों, लेकिन क्या इन लोगों ने कभी कहा कि पशु हत्या इस्लामी है? ये भी दें कि ‘सीमेन भरे बैलून’ वाली बात झूठ निकली थी। पहले आप ही अंदाज़ा लगाइए कि कौन से व्यक्ति के पास इतना सीमेन निकालने की क्षमता होगी कि एक पूरा का पूरा बैलून वो भर डाले?

अब सच्ची बात जान लीजिए। ‘फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी’ ने जाँच के बाद पाया था कि कथित छात्रों ने जिस बैलून का सैंपल सौंपा था, उसमें सीमेन की कोई मात्रा मिली ही नहीं थी। फरवरी 2018 में LSR (लेडी श्रीराम) कॉलेज के होली कार्यक्रम के दौरान ही इसे फेंके जाने की घटना सामने आई थी। बैलून में सीमेन वाली बात साबित ही नहीं हो पाई। यानी, ये एक हौव्वा था। एक साजिश थी, हिन्दू त्योहार को बदनाम करने की।

इस घटना को आधार बना कर हिन्दू त्योहार के दौरान लोगों द्वारा महिलाओं की प्रताड़ना की बात कही गई थी। हालाँकि, सवाल ये उठा था कि किस व्यक्ति के पास क्षमता है इतना सीमेन बैलून में भर डालने की। हाँ, उपद्रव पर एक्शन लेना चाहिए, लेकिन जो हुआ ही नहीं उसे आधार बना कर बदनामी की साजिश रची गई। एक छात्र ने इंस्टाग्राम पर पोस्ट लिख कर भी ऐसा दावा किया था। ये भी सामने नहीं आया था कि बैलून फेंकने वाला लड़का था या लड़की।

उस समय लोगों ने वैज्ञानिक ढंग से भी इस घटना को झूठ साबित कर दिया था। होली बैलून का डायमीटर 40 से 100 mm तक हो सकता है। यानी, उसका वॉल्यूम 268 से 4188.8 ml हो सकता है। एक औसत व्यक्ति 2-5 ml सीमेन निकाल सकता है। यानी, इस तरह के बैलून को भरने के लिए 54 से लेकर 2095 लोगों की ज़रूरत होगी। यानी, सैकड़ों-हजारों लोगों का सामूहिक हस्तमैथुन? साफ़ है, हिन्दू धर्म को बदनाम करने के लिए ये सब किया गया था।

भ्रष्टाचारी लालू यादव, करोड़ों की कमाई… AAP ने 10 साल पहले जिसे किया टारगेट, मनीष सिसोदिया को बचाने के लिए अब वही ‘ईमानदार’

दिल्ली शराब कांड (Delhi Liquor Scam) में पूर्व उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया (Ex DCM Manish Sisodia) की गिरफ्तारी के बाद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (CM Arvind Kejriwal) सहित 9 विपक्षी नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) को चिट्ठी लिखी है। चिट्ठी में कहा गया है कि मनीष सिसोदिया की गिरफ्तारी दिखाती है कि भारत लोकतांत्रिक देश से तानाशाही शासन में तब्दील हो गया है।

जिन नेताओं ने चिट्ठी लिखी है, उनमें बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, दिल्ली के CM अरविंद केजरीवाल, तेलंगाना के मुख्यमंत्री चंद्रशेखर राव, पंजाब के CM भगवंत मान, बिहार के उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव, नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता फारूक अब्दुल्ला, एनसीपी चीफ शरद पवार, महाराष्ट्र के पूर्व सीएम उद्धव ठाकरे और यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव शामिल हैं।

पीएम मोदी के शासनकाल में विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने का आरोप लगाते हुए चिट्ठी में लिखा गया है, “सिसोदिया जी के खिलाफ लगाए गए आरोप पूरी तरह बेबुनियाद है। यह राजनीतिक षडयंत्र के तहत की गई कार्रवाई है। इस गिरफ्तारी ने पूरे देश की आवाम को गुस्से से भर दिया है। दुनिया भर में मनीष सिसोदिया दिल्ली स्कूल एजुकेशन में बदलाव के लिए पहचाने जाते हैं। उनकी गिरफ्तारी को दुनिया भर में बदले की भावना से की गई राजनीतिक कार्रवाई के उदाहरण के तौर पर देखा जा रहा है।”

चिट्ठी में आगे लिखा गया है, “राजद के लालू यादव हों, शिवसेना के संजय राउत हों, समाजवादी पार्टी के आजम खान हों, NCP के नवाब मलिक, अनिल देशमुख हों या तृणमूल के अभिषेक बनर्जी, इन सभी नेताओं के खिलाफ जाँच एजेंसियों ने जिस तरह की कार्रवाई की है, उससे संदेश पैदा होता है कि ये केंद्र सरकार के अंतर्गत काम कर रही हैं। ऐसे कई मामलों में केस या गिरफ्तारी तब हुई जब चुनाव होने वाले थे। इससे ये साफ पता चलता है कि जाँच एजेसियों के ये ऐक्शन पॉलिटिकली मोटिवेटिड थे।”

मनीष सिसोदिया मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उन्हीं नेताओं ने पत्र लिखे हैं, जो खुद या उनकी पार्टी के नेता भ्रष्टाचार के मामले में जाँच एजेंसियों के घेरे में हैं। इनमें से एक बिहार के उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के पिता लालू यादव तो चारा घोटाले में सजा भी काट रहे हैं। इसके अलावा रेलवे में नौकरी के बदले रिश्वत के रूप में जमीन लेने के मामले में जाँच के घेरे में है। इतना ही नहीं, तेजस्वी यादव खुद इसमें आरोपित हैं।

अरविंद केजरीवाल ने जब अन्ना आंदोलन के सहारे भ्रष्टाचार के खिलाफ राजनीतिक अभियान शुरू करने के नाम पर आम आदमी पार्टी बनाई थी, तब कहा था कि वे भ्रष्टाचार को किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेंगे। हालाँकि, समय ने उनके इस दावे की पोल खोल दी। आज उनके दो पूर्व मंत्री भ्रष्टाचार के आरोप में जेल में हैं। इसके पहले कई मंत्री-विधायक जेल की हवा खा चुके हैं। इसके बावजूद वे आज भी खुद और अपनी पार्टी के नेताओं को ‘कट्टर ईमानदार’ बताते हैं।

अरविंद केजरीवाल आज तेजस्वी को लेकर भले प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिख रहे हों, लेकिन साल 2013 में उन्होंने खुद लालू यादव के चारा घोटाले का मामला उठाया था। उस दौरान केजरीवाल ने लालू पर कड़ी कार्रवाई नहीं होने को लेकर तंज कसा था। उन्होंने ट्वीट कर कहा था, “लालू ने चारा घोटाले में करोड़ों कमाए, लेकिन उस पैसे की वसूली का कोई आदेश नहीं है। सिर्फ 25 लाख जुर्माना और कुछ साल की जेल। स्वीट डील।”

इतना ही नहीं, मनीष सिसोदिया खुद लालू यादव और भ्रष्टाचार को लेकर कभी मुखर थे। वे लगातार सरकार पर हमलावर थे और भ्रष्टाचार के प्रति नरम रूख अपनाते हुए लालू यादव के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगा रहे थे। मनीष सिसोदिया भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई के लिए देश में लोकपाल कानून की लगातार माँग कर रहे थे।

मनीष सिसोदिया ने कहा था कि देश में लोकपाल कानून आ गया होता तो भ्रष्टाचार से कमाई लालू यादव की संपत्ति जब्त हो जाती। उन्होंने कहा था कि लालू के भ्रष्टाचार की बात स्वीकार करने में ही देश ने 17 साल लगा दिए। उन्होंने देश के न्याय प्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा था कि लालू को सजा दिलाने में ना जाने कितना समय लगेगा।

मनीष सिसोदिया ने कहा था कि लालू यादव का जेल जाना भ्रष्ट राजनीति का अवसान नहीं है। शायद उन्होंने सही कहा था। ये किसी को नहीं पता था कि जो पार्टी भ्रष्टाचार के खिलाफ लोगों की भावनाओं का दोहन करके अपने गठन के 10 सालों के भीतर ने राष्ट्रीय स्तर की पार्टी बन जाएगी, वो खुद भ्रष्टाचार में इतनी गहराई तक लिप्त हो जाएगी।

मनीष सिसोदिया को जब लगा कि वे केंद्रीय एजेंसियों के गिरफ्त में आ सकते हैं, तब उन्होंने खुद को ‘क्षत्रिय (राजपूत)’ बताकर जातिवादी कार्ड खेलने शुरू कर दिया। हालाँकि, मनीष सिसोदिया ने कभी कोई ऐसा काम नहीं किया, जिसके लिए क्षत्रिय समाज उन्हें याद करे। इतना ही नहीं, क्षत्रिय समाज के लिए उन्होंने कभी भी अपना मुँह नहीं खोला। ये उनकी कट्टर राजनीति है।

AAP के चीफ और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल कभी भ्रष्टाचार के नाम पर कॉन्ग्रेस, टीएमसी, राजद आदि पार्टियों और उसके नेताओं को कोसते रहते थे। आज उन्हीं पार्टी के नेताओं का सहारा लेकर प्रधानमंत्री को पत्र लिख रहे हैं और भ्रष्टाचार के खिलाफ पीएम मोदी की कार्रवाई को देश में तानाशाही बता रहे हैं।

अरविंद केजरीवाल को इस बात के लिए थोड़ा उम्मीद रखनी चाहिए कि मनीष सिसोदिया सहित उनके नेताओं के खिलाफ भ्रष्टाचार की अभी जाँच चल रही है। अभी उन पर आरोप हैं, जो साबित नहीं हुए हैं। कट्टर ईमानदार पार्टी के मुखिया को ईश्वर से प्रार्थना करना चाहिए कि जो आरोप उनके नेता पर लगे हैं, वो गलत साबित हों वरना उनकी ‘ईमानदारी’ की राजनीति हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी।

गुजरात शक्तिपीठ अंबाजी मंदिर के प्रसाद ‘मोहनथाल’ को प्रशासन ने बदला: स्थानीय लोगों का विरोध, हिंदू हित रक्षा समिति ने दिया 48 घंटे का अल्टीमेटम

गुजरात के प्रमुख शक्तिपीठों में से एक अंबाजी मंदिर में दशकों पुराने पारम्परिक प्रसाद ‘मोहनथाल को बदल कर ‘चिक्की’ करने पर विवाद खड़ा हो गया है। कुछ लोगों द्वारा इस बदलाव का विरोध हो रहा है। मोहनथाल एक गुजराती मिठाई है जिसमें बेसन, चीनी, घी और दूध मिला होता है। नए प्रसाद के तौर पर दी जा रही चिक्की को गुड़ और मेवे के साथ बनाया जाता है। मेवे के रूप में अधिकतर मूंगफली या तिल डाला जाता है।

अब नाराज और विरोध कर रहे लोगों ने न सिर्फ प्रसाद को बदले जाने का विरोध किया है बल्कि वापस पहले जैसा करने के लिए मंदिर प्रशासन को 48 घंटे का अल्टीमेटम भी दिया है। विरोध दर्ज करने वालों में भाजपा नेता भी शामिल हैं। इसके अलावा हिंदू हित रक्षा समिति नाम के संगठन ने 48 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए चिक्की के बदले फिर से मोहनथाल प्रसाद किए जाने की माँग की है। संगठन का कहना है कि प्रशासन को निर्णय बदलना ही पड़ेगा भले ही इसके लिए मंदिर को बंद ही क्यों न करना पड़े।

वहीं अपना पक्ष रखते हुए मंदिर प्रशासन ने दावा किया है कि चिक्की की तुलना में मोहनथाल की शेल्फ लाइफ कम होती है। दूसरे शब्दों में मंदिर प्रशासन का कहना है कि चिक्की की तुलना में मोहनथाल मिठाई जल्दी खराब हो जाती है। मंदिर प्रशासन इस बदलाव को भक्तों के फायदे का कदम बता रहा है।

विवाद पर सफाई देते हुए मंदिर ने आगे बताया कि कई श्रद्धालुओं ने ही उनसे प्रसाद बदलने का अनुरोध किया था। यहाँ तक कि बचाव में सोमनाथ और तिरुपति मंदिरों में भी इसी तरह के सूखे प्रसाद की पैरवी की गई, जहाँ फ़िलहाल लड्डू चढ़ाया जाता है। मंदिर प्रशासन के मुताबिक चिक्की या अन्य सूखे प्रसाद को विदेश में रहने वाले भक्तों को भी लड्डू और मोहनथाल की तुलना में आसानी से भेजा जा सकता है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, बनास डेयरी और अमूल डेयरी अम्बाजी मंदिर में चढ़ने वाले प्रसाद के लिए चिक्की का ठेका लेने पर विचार कर रही हैं। इधर प्रसाद बदले जाने के बाद मोहनथाल का स्टॉक तेजी से खाली हो रहा है।

जानकारी के मुताबिक पिछले हफ्ते बुधवार तक मोहनथाल प्रसाद के लगभग 19,200 पैकेट मौजूद थे जिसमें से अगले दिन गुरुवार को 11,000 बिक गए। फिलहाल अब मंदिर में मोहनथाल का सिर्फ 8,200 पैकेट बचा है। इसके भी आने वाले शुक्रवार तक खत्म हो जाने की उम्मीद जताई जा रही है।

राजधानी ट्रेन के बाद अब राजधानी बस: UP के हर जिले से लखनऊ तक, घर बैठे रिजर्वेशन… CM योगी ने दिखाई हरी झंडी

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार (4 मार्च 2023) को लखनऊ से राजधानी बस सेवा का शुभारम्भ हरी झंडी दिखा कर किया। यह सेवा प्रदेश की राजधानी लखनऊ को सभी जिला मुख्यालयों से जोड़ेगी। इस अवसर पर यात्रियों की सुविधा के लिए एक ऑनलाइन रिजर्वेशन ऐप UP-RAAHI भी लॉन्च किया गया। इसी के साथ मुख्यमंत्री ने परिवहन विभाग से कहा है कि वो प्रदेश के 1 लाख गाँवों तक यातायात के सुगम साधन उपलब्ध करवाने की व्यवस्था करें।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक नए बेड़े में कुल 115 बसें हैं। इसमें 76 राजधानी और 39 सामान्य बसें हैं। ये बसें अलग-अलग रुट पर चलेंगी। इन बसों का रिजर्वेशन UP-RAAHI ऐप से करवाया जा सकेगा। यह कार्यक्रम उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग के 50 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित हुआ था। इस मौके पर एक डाक टिकट भी जारी किया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे स्वर्ण जयंती बताते हुए परिवहन विभाग की उपलब्धियों को गिनाया।

उत्तर प्रदेश के बजट का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री योगी ने बताया कि इस बार परिवहन निगम को 1000 नई बसें खरीदने के लिए शासन ने 400 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं। मुख्यमंत्री के मुताबिक प्रदेश के बस अड्डों का कायाकल्प किया जाएगा और उन्हें एयरपोर्ट की तरह विकसित किया जाएगा।

सीएम योगी ने इस काम के लिए भी शासन द्वारा 100 करोड़ रुपए जारी किए जाने की जानकारी दी। बसों का निर्माण परिवहन निगम के ही वर्कशॉप में हो रहा है। इसी के साथ 10 साल से अधिक पुरानी बसों को स्क्रैप में बदल कर बाद में उनके सद्युपयोग की भी बात कही गई।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने परिवहन निगम से न सिर्फ सुदूर गाँवों बल्कि रेलवे और हवाई अड्डों से भी कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए कहा। कार्यक्रम में रोडवेज विभाग द्वारा कोरोना काल में किए गए कामों की भी तारीफ हुई।