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भाई हिस्ट्रीशीटर, गाँव की लड़की को भगाकर ब्याह: जिसे अतीक अहमद ने विजय से बनाया उस्मान, पढ़िए उसका पूरा काला चिट्ठा; मुस्लिम हॉस्टल भी सील

उमेश पाल हत्याकांड में आज (6 मार्च 2023) यूपी पुलिस ने दो बड़ी कार्रवाई की हैं। एक तो वारदात के समय पहली गोली चलाने वाले उस्मान का एनकाउंटर करके और दूसरी उस मुस्लिम हॉस्टल को सील करके… जहाँ इस पूरे मर्डर की साजिश रची गई थी। दोनों एक्शन के बाद से इन पर चर्चा तेज है। एक ओर मीडिया में उस्मान का बैकग्राउंड सामने आया है तो वहीं दूसरी ओर मुस्लिम हॉस्टल में अवैध रूप से रह रहे लोगों का पता चला है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, प्रयागराज स्थित मुस्लिम बोर्डिंग हॉस्टल को सोमवार (06 मार्च, 2023) को सील किया गया है। हॉस्टल के सभी 100 से अधिक कमरों को खाली करवा दिया गया है। जानकारी के अनुसार इसी हॉस्टल के कमरा नंबर 36 में उमेश पाल हत्याकांड की साजिश रची गई थी। कमरा नंबर 36 में अतीक अहमद का गुर्गा सदाकत खान अवैध तरीके से रह रहा था।

पुलिस के अनुसार मुस्लिम होस्टल में कई तरह की अवैध गतिविधियों की जानकारी मिली थी। जिसके बाद हॉस्टल को सील कर दिया गया है। सदाकत के अलावा 65 अन्य लोगों के होस्टल में अवैध तरीके से रहने की जानकारी मिली है। अवैध तरीके से रहने वाले छात्रों को बाहर निकाला जा रहा है।

दूसरी ओर उन लोगों को ढूँढ-ढूँढकर ढेर किया जा रहा जो उमेश पाल हत्याकांड में शामिल थे। इसी क्रम में आज ही मुख्य आरोपितों में से एक उस्मान उर्फ विजय चौधरी को प्रयागराज स्थित अपने गाँव के पास एनकाउंटर किया गया। विजय चौधरी की पत्नी का आरोप है कि उसके पति को फँसाकर मारा गया। हालँकि पुलिस रिकॉर्ड बताते हैं कि वह पहले भी जेल की हवा खा चुका था। खुद विजय की पत्नी सुहानी के भाई ने उसे जेल भिजवाया था।

उस्मान (विजय चौधरी) कौंधियारा थाने के बमौखर गाँव का रहने वाला था। उसका अपने ही गाँव की रहने वाली ब्राह्मण लड़की सुहानी से अफेयर चल रहा था। साल 2019 में उस्मान सुहानी को लेकर भाग गया था। मामले में सुहानी के भाई ने उस्मान के खिलाफ FIR दर्ज कराई थी। इसके बाद पुलिस ने उस्मान को गिरफ्तार कर के जेल भेज दिया था। जमानत पर रिहा होने के बाद उसने सुहानी को भगा कर शादी कर ली थी।

उस्मान का बड़ा भाई राकेश भी हिस्ट्रीशीटर है। फिलहाल वाहन चोरी के एक मामले में वह जेल में बंद है। बाकी के 2 भाई और हैं जो शादियो में डीजे बजाने का काम करते हैं। परिवार वालों का कहना है कि विजय चौधरी के उस्मान बनने की बात उन्हें पता नहीं है। कहा जा रहा है कि अतीक अहमद और उसके बेटों ने विजय को यह नाम दिया था। पुलिस ने उस्मान उर्फ विजय के धर्म परिवर्तन की जाँच की बात भी कही है।

कलक्टर के आदेश के बाद अम्बाजी मंदिर में बदल दी गई 500 साल पुरानी परंपरा, गुजरात के अम्बाजी मंदिर के प्रसाद में बदलाव: आक्रोशित हिन्दू संगठनों का अल्टीमेटम

गुजरात के बनासकांठा स्थित अंबाजी मंदिर में वितरित किए जाने वाले प्रसाद को बदल दिया गया है। मंदिर ट्रस्ट का यह फैसला भक्तों को पसंद नहीं आ रहा है। देश के 51 शक्तिपीठों में शामिल अंबाजी मंदिर में वर्षों से मोहनथाल प्रसाद का वितरण किया जा रहा था। इसके स्थान पर अब चिक्की के प्रसाद का वितरण किया जा रहा है। हिंदू संगठनों ने इस पर आपत्ति जताई है और मंदिर ट्र्स्ट को प्रसाद के रूप में मोहनथाल का वितरण करने की अपील की है।

रिपोर्टों के अनुसार, पिछले 500 सालों से अंबाजी मंदिर द्वारा श्रद्धालुओं को बतौर प्रसाद मोहनथाल देने की परंपरा थी। पिछले कुछ दिनों से बनासकांठ कलेक्टर के आदेश पर मंदिर ट्रस्ट द्वारा मोहनथाल प्रसाद के स्थान पर भक्तों को सूखी चिक्की दी जाने लगी। बनासकांठा के कलेक्टर आनंद पटेल ने अनुसार, विदेशी पर्यटक और दूसरे देशों में बसे माता के भक्त सूखे प्रसाद की माँग कर रहे थे। उनका मानना है कि मोहनथाल के तुलना में चिक्की जल्दी खराब नहीं होता। ट्रस्ट ने इसलिए चिक्की का प्रसाद देने का फैसला किया।

ट्रस्ट के इस फैसले से भक्त और हिंदू संगठन के लोग नाराज हैं। उन्होंने प्रशासन और ट्रस्ट से प्रसाद के रूप में मोहनथाल के वितरण की अपील की है। हिंदू हित रक्षा समिति ने प्रसाद में बदलाव का विरोध किया करते हुए 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। समिति की तरफ से कहा जा रहा है कि प्रसाद में बदलाव को स्वीकार नहीं किया जाएगा इसके लिए जरूरत पड़ी तो मंदिर भी बंद कराई जा सकती है। कहा जा रहा है कि ट्रस्ट के इस फैसले से विधवा औरतों समेत सैकड़ों ऐसे लोग बेरोजगार हो गए हैं जो मोहनथाल बनाते थे। राज्य की बीजेपी युवा इकाई द्वारा भी अंबाजी मंदिर के प्रसाद में हुए बदलाव का विरोध किया गया है।

बता दें मोहनथाल बेसन की बनी प्रसिद्ध गुजराती बर्फी है। इसे शुद्ध देशी घी से तैयार किया जाता है। अंबाजी को भोग लगने वाले थाल में इसे चढ़ाया जाता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक मंदिर के प्रसाद के लिए बनास डेयरी और अमूल डेयरी को चिक्की बनाने का ठेका देने पर विचार किया जा रहा है।

राजस्थान में तमिलनाडु के 12 पुलिसकर्मी गिरफ्तार: महिला को पकड़कर ले जा रही थी, चोरी के केस से नाम हटाने को माँगे थे ₹25 लाख

बिहार के मजदूरों के साथ हिंसा को झुठलाने के आरोपों में घिरी तमिलनाडु पुलिस के 12 जवान राजस्थान में गिरफ्तार किए गए हैं। गोल्ड चोरी के मामले में कार्रवाई को लेकर अजमेर आई तमिलनाडु पुलिस की टीम पर केस से नाम हटाने के एवज में 25 लाख रुपए घूस माँगने का आरोप है। एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने 4 मर्चा 2023 की देर रात इन पुलिसकर्मियों को अजमेर रेलवे स्टेशन से हिरासत में लिया। वे अपने साथ एक आरोपित महिला को भी ले जा रहे थे।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक तमिलनाडु पुलिस 105 तोला सोना चोरी के एक मामले की जाँच कर रही थी। चोरी किए गए सोने की कीमत तकरीबन 52 लाख रुपए बताई जा रही है। तमिलनाडु पुलिस के जवान अजमेर के भिनाय थाना क्षेत्र के रहने वाले पन्नालाल सोनी और उनकी पत्नी सोनिया के घर पहुँचे। जानकारी के मुताबिक तमिलनाडु पुलिस आरोपित सोनिया को अपने साथ ले गई। साथ ही केस से नाम हटाने के लिए 25 लाख रुपए की माँग की।

4 मार्च 2023 को अजमेर एसीबी को पन्नालाल सोनी ने इसकी शिकायत दी। अजमेर एसीबी ने अपने स्तर पर जाँच कराई तो आरोप सही निकले। इसके बाद दक्षिण भारतीय राज्य के पुलिसकर्मियों को एसीबी की 2 टीमों ने देर रात हिरासत में ले लिया। पकड़े गए तमिलनाडु पुलिस के जवानों से पूछताछ की जा रही है।

एसीबी के डीआईजी समीर कुमार सिंह ने जानकारी दी है कि प्रारंभिक पूछताछ में तमिलनाडु में सोना चोरी को लेकर चार मुकदमे दर्ज होने की बात सामने आई है। चोरी की घटना में भिनाय के भैरूखेड़ा के रहने वाले लोगों के शामिल होने की बात कही जा रही है। इन्हीं लोगों से बरामदगी के लिए तमिलनाडु की पुलिस अजमेर पहुँची थी। इस संबंध में तमिलनाडु की पुलिस ने जरूरी दस्तावेज भी दिखाए हैं।

तमिलनाडु पुलिस द्वारा दिए गए दस्तावेजों में सभी आरोपितों की गिरफ्तारी दिखाई गई है। राजस्थान पुलिस ने तमिलनाडु पुलिस से संपर्क कर मामले की जानकारी दे दी है।

‘2 साल से हर महीने ₹10 लाख दे रहा, मेडिकल-स्कूल फीस का खर्च अलग से’: बीवी के आरोपों पर बोले नवाजुद्दीन सिद्दीकी – मेरा करियर बर्बाद करना उसकी मंशा

बॉलीवुड अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्दीकी (Nawazuddin Siddiqui) ने सोमवार (6 मार्च 2023) को अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक लंबा पोस्ट शेयर कर बीवी आलिया सिद्दीकी उर्फ अंजना किशोर पांडे के आरोपों पर चुप्पी तोड़ी है। इसके कैप्शन में उन्होंने लिखा कि वह कोई आरोप नहीं लगा रहे हैं, बल्कि अपनी भावनाओं को व्यक्त कर रहे हैं।

तीन पन्नों के नोट में नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने अपनी सफाई देते हुए लिखा, “मेरी खामोशी की वजह से मुझे हर जगह बुरा आदमी कहा जाता है। मैं अपने बच्चों के कारण चुप हूँ, क्योंकि यह सारा तमाशा कहीं न कहीं मेरे छोटे-छोटे बच्चे पढ़ लेंगे। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, प्रेस और लोगों का एक समूह एकतरफा और हेरफेर करके बनाए गए वीडियो के आधार पर मेरे चरित्र हनन का आनंद ले रहे हैं।” उन्होंने कहा कि वह कुछ प्वॉइंट्स को साफ करना चाहते हैं।

अभिनेता ने लिखा, “सबसे पहले मैं और आलिया कई सालों से एक साथ नहीं रह रहे हैं। हम पहले से तलाकशुदा हैं, लेकिन हमारे बीच अंडरस्टेंडिंग सिर्फ हमारे बच्चों के लिए थी। दूसरा क्या कोई जानता है, मेरे बच्चे भारत में क्यों हैं और स्कूल क्यों नहीं जा रहे हैं, 45 दिन से। स्कूल वाले मुझे हर दिन लेटर भेज रहे हैं कि यह बहुत लंबी अनुपस्थिति है। मेरे बच्चों को पिछले 45 दिनों से बंधक बना लिया गया है और दुबई में उनकी स्कूली शिक्षा प्रभावित हो रही है।”

‘पिछले 2 सालों से हर महीने 10 लाख रुपए दिए जा रहे’

नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने अपनी पोस्ट में यह भी दावा किया आलिया को पिछले 2 सालों से हर महीने 10 लाख रुपए दिए जा रहे हैं। वहीं, बच्चों के साथ दुबई शिफ्ट होने से पहले आलिया को 5 से 7 लाख रुपए महीने के दिए जा रहे थे। बच्चों के स्कूल की फीस, मेडिकल और ट्रैवल का खर्चा अलग से दिया जाता है। नवाजुद्दीन ने आगे दावा किया, “पैसे माँगने के बहाने आलिया ने मेरे बच्चों शोरा और यानी को मुंबई बुलाने से पहले पिछले 4 महीनों के लिए दुबई में छोड़ दिया। मैंने उनकी 3 फिल्मों को भी फाइनेंस किया है, जिसमें मुझे करोड़ों रुपए का खर्चा आया। यह सब सिर्फ इसलिए किया, ताकि उनकी आय का स्रोत बन सके, क्योंकि वह मेरे बच्चों की अम्मी है। उसे मेरे बच्चों के लिए शानदार कारें दी गई थीं, लेकिन उसने उन्हें बेच दिया और वो पैसे खुद पर खर्च कर दिए। मैंने अपने बच्चों के लिए मुंबई के वर्सोवा में सी फेसिंग एक अपार्टमेंट भी खरीदा है। आलिया को उस अपार्टमेंट का मालिक बनाया गया, क्योंकि अभी मेरे बच्चे छोटे हैं। मैंने अपने बच्चों के लिए दुबई में एक अपार्टमेंट खरीदा है, जहां वो भी लग्जरी लाइफ जीती है।”

‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ फिल्म के अभिनेता ने आलिया पर आरोप लगाया कि वह यह सब केवल पैसों के लिए कर रही है। वह और पैसे चाहती है और इसलिए उसने उन पर और उनकी अम्मी पर कई मुकदमे दायर किए हैं। यह उसकी दिनचर्या है, उसने पहले भी ऐसा ही किया है और अपनी माँग के अनुसार भुगतान किए जाने पर केस वापस ले लेती है।

‘मेरा करियर बर्बाद करने के लिए ये सब कर रही’

बीवी के घर से निकालने वाले आरोप पर एक्टर ने कहा, “मेरे बच्चे जब भी छुट्टियों में भारत आते हैं, तो वो अपनी दादी के पास ही रहते हैं। कोई उन्हें घर से कैसे निकाल सकता है। मैं खुद उस वक्त घर में नहीं था। वह घर से निकालने वाला वीडियो क्यों नहीं बनाती, जबकि वह हर चीज का वीडियो बना लेती है। उसने इस नाटक में बच्चों को घसीटा है और वह यह सब सिर्फ मुझे ब्लैकमेल करने, मेरी छवि को खराब करने, मेरा करियर बर्बाद करने और अपनी नाजायज माँगों को पूरा करने के लिए कर रही है।”

नवाज यहीं नहीं रुके उन्होंने अंत में एक और बात लिखी है। उन्होंने कहा, “अंतिम लेकिन जरूरी बात। कोई भी माता-पिता कभी भी ये नहीं चाहेंगे कि उनके बच्चे अपनी पढ़ाई छोड़ दें या अपने भविष्य को खराब करें। वे हमेशा उनके लिए बेस्ट चाहते हैं। आज मैं जो कुछ भी कमा रहा हूँ, वह मेरे दोनों बच्चों के लिए है और इसे कोई नहीं बदल सकता। मुझे शोरा और यानी से प्यार है और मैं उनकी भलाई और उनके भविष्य को सुरक्षित करने के लिए किसी भी हद तक जा सकता हूँ। मैंने अब तक सभी केस जीते हैं और न्यायपालिका में मेरा विश्वास बना रहेगा।”

बता दें कि नवाजुद्दीन सिद्दीकी की बीवी आलिया ने बीते दिनों एक वीडियो शेयर कर बच्चों और उन्हें घर में ना घुसने देने का आरोप लगाया था। आलिया ने कहा था कि नवाज ने उन्हें सड़क पर छोड़ दिया है। वीडियो में वह अपने बच्चों के साथ रोते हुए नजर आई थीं।

मोहम्मद अशफाक, शाहीन फिरदौस, फरहत खान, इफ्तखारुद्दीन… सरकारी मशीनरी में मध्ययुगीन विध्वंसक कलपुर्जे

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विकलांगों को दिव्यांग कहने का नया चलन एक नई दृष्टि विकसित करने के लिए किया। उन्हीं की पहल पर मानसिक रोगियों के पुनर्वास के लिए देश के पहले राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य पुनर्वास संस्थान (NIMHR) की कल्पना की गई। तीन साल पहले 25 एकड़ भूमि पर 181 करोड़ की लागत से इसे बनाने के लिए मध्य प्रदेश में भोपाल से सटे सीहोर जिले को चुना गया। चार साल बाद यह संस्थान एक विचित्र कारण से विवाद में है, जिसकी शिकायत स्वयं प्रधानमंत्री तक गई और जाँच शुरू हुई।

विवाद के मूल में है प्रोबेशन पर यहाँ नियुक्त हुए डिप्टी रजिस्ट्रार मोहम्मद अशफाक, जिनके कारनामे केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय में चर्चा में हैं। दिल्ली से दूर केंद्र सरकार का यह संस्थान एक प्रकार से लावारिस पाकर अशफाक ने अपने ढंग से चलाना शुरू किया। उसका काम केवल कार्यालयीन प्रबंधन का था, लेकिन वह तीन कोर्स की क्लासों में नियमित पढ़ाने लगा। उसकी दिव्य दृष्टि में ‘महाभारत’ विकलांगों की महागाथा है, जिसमें धृतराष्ट्र अंधा है और रानी ने अंधत्व ओढ़ लिया है। शकुनी तो विकलांग है ही। द्रौपदी ने चीरहरण के समय प्रतिकार न करके यह बताया कि वह मंदबुद्धि है। जब अति हुई तो विद्यार्थियों ने सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री वीरेंद्र खटीक को एक पत्र के माध्यम से इस महाज्ञान के विषय में अवगत कराया। अशफाक की कार्यशैली पर कई प्रश्न खड़े किए और बताया कि वह एक मदरसे की तरह इस महत्वपूर्ण संस्थान को चला रहा है। उसका हुलिया तबलीगी है और कार्यालय में ही नमाज चल रही है। पीएफआई या किसी जमात से उसके संबंधों की जाँच की माँग की गई।

जाँच हुई तो उसकी बहादुरी के कई और कारनामे उजागर हुए। वह निजी सीसीटीवी कैमरों से निगरानी करता हुआ मिला। मनमाने भुगतान खुद को ही करता रहा। विद्यार्थियों ने बताया कि उसके आने के बाद विशेष प्रकार के समुदाय के लोगों की आवक आश्चर्यजनक रूप से बढ़ गई। ऐसा क्या हुआ कि अचानक समुदाय विशेष में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ी? मध्य प्रदेश के मुख्य धारा के मीडिया में यह विषय लगभग गायब है। अशफाक को हटाया नहीं गया है। NIMHR केंद्र का निदेशक एक आईएएस अफसर होता है, जिसने कभी आकर देखा तक नहीं कि यहाँ चल क्या रहा है? अपनी नाकामी को छिपाने के लिए अब जाँच के नाम पर लीपापोती जारी है।

दो सीएम राइज स्कूल के ऐसे ही प्रकरण इन्हीं दिनों विवादों में आए। विदिशा जिले के एक स्कूल में प्राचार्य शाहीन फिरदौस ने स्कूल प्रांगण में मजार बनवा दी, जबकि वहाँ कोई दफन नहीं है। जाँच में पता चला कि स्कूल की दो बीघा जमीन पर बगल के कब्रिस्तान का कब्जा होने दिया और नपती होने पर भी फेंसिंग नहीं कराई। उसे केवल निलंबित करके बचा लिया गया। शिक्षा विभाग कब्रिस्तान के माईबापों से वक्फ बोर्ड में उलझा हुआ है। राजधानी भोपाल के ही एक सीएम राइज स्कूल के बारे में दैनिक भास्कर के रिपोर्टर अनूप दुबोलिया की फ्रंट पेज खबर है कि वर्ग विशेष के आचार्य क्लास रूम में ही नमाज फरमा रहे हैं और किसी विवाद में उलझने की बजाए ‘नेत्रहीन’ प्राचार्य का कथन है कि उसने तो कभी देखा ही नहीं! कुछ ही महीनों पहले भोपाल के सेंट्रल स्कूल में कब्र बनाकर नाजायज कब्जे का विवाद सामने चुका है।

पुरातत्व विभाग ने एक ऐतिहासिक संकुल के कुछ केयरटेकर्स को पिछले साल हटाया है। पता यह चला कि इनमें से एक पुरानी मस्जिद पर नियुक्त केयरटेकर कोई और नहीं, देवबंद से निकला एक मौलवी है जो बिला नागा पाँचों वक्त की नमाज के इंतजाम करता है। वह समझता है कि उसे इसी काम का वेतन मिलता है। इस संकुल में सवा करोड़ रुपए शासन ने कुछ वर्षों में स्वीकृत किए थे। इसमें से आधी से ज्यादा राशि केवल इसी मस्जिद परिसर को चमकाने में फूँक दी गई, जबकि वहाँ पर्यटकों की चहलपहल न के बराबर थी। यह शुभ कार्य भी ऐसे ही किसी मोहम्मद अशफाक या शाहीन फिरदौस जैसे एक सज्जन की कृपा से चलता रहा।

इंदौर के शासकीय नवीन विधि कॉलेज में फरहत खान की किताब को लेकर प्राचार्य इनामुर्रहमान, प्रो. मोजिज बेग और प्रकाशक पर केस दर्ज हुआ था। फरहत फरारी में कहीं इलाज कराते हुए पुणे में पाई गई थीं। ऐसा लगता है कि किसी ने बिना पढ़े-देखे ही किताब कॉलेज में लगा दी थी।

उत्तर प्रदेश में कमिश्नर के पद पर पहुँचे एक आईएएस अफसर का वीडियो पूरे देश ने देखा था कि वह किस तरह सरकारी बंगले पर जमाती मुखिया की तरह मीटिंग ले रहा है। मीडिया में उसका नाम इफ्तिखारुद्दीन बताया गया था। वह बड़े उत्साह से अपने गुर्गों को प्रेरित कर रहा था कि दीन के काम में किस तेजी से लगना चाहिए और किस तरह लोगों को नए रंग में रंगना चाहिए? वह धर्मांतरण के लिए प्रेरक तैयार कर रहा था। एक वीडियाे ने उसके मिशन का लोकार्पण कर दिया था। हम नहीं जानते कि लोकसेवा में आने के बाद से अपनी 25 साल की सेवाओं के दौरान वह किस-किस प्रकार से दीन की खिदमत करता रहा होगा!

निश्चित ही ऐसे मामले अन्य राज्यों में भी होंगे। जम्मू-कश्मीर में तो सरकारी परिसरों में ही पाँच वक्त की नमाजों के लिए इंतजाम कर लिए गए थे। पुलिस समेत कई विभागों के कर्मचारी राडार पर आए, जो दीन की ‘धमाकेदार खिदमत’ करने वालों के साथ मिले हुए थे।

जब मीडिया में विवाद प्रकाशित होते हैं, तब संभवत: इन पर समग्र दृष्टि नहीं जाती। वह हर दिन होने वाली सड़क दुर्घटनाओं जैसी सामान्य कवरेज लगती है। लेकिन दुर्घटनाएँ यह तो बताती ही हैं कि देश की सड़कें चरमराई हुई हैं। यातायात प्रबंधन कबाड़ हो चुका है। क्या सरकारी पदों पर बैठे ‘विशेष प्रकार के वर्ग’ का यह आचरण किसी ट्रेंड विशेष को स्पष्ट नहीं करता? क्या यह भारत के इस्लामीकरण के अनेक स्तरों पर जारी प्रयासों की ही एक सामान्य झलक है, जिसमें सारी कड़ियाँ आपस में जुड़ी हुई रही हैं और राजनीति, प्रशासन, खेल, सिनेमा, साहित्य, मीडिया तक ये विस्तृत हैं। क्या जैश और लश्कर समेत सारी जमातें, हुर्रियतें और लीगें मिलकर बचे-खुचे भारत को खरोंचने-खींचने-खसोटने में लगे हैं? क्या ऐसे लोककसेवक सेवा के योग्य हैं?

मोहम्मद अशफाक, शाहीन फिरदौस, फरहत खान, इफ्तिखारुद्दीन या इनामुर्रहमान को यह भान भी नहीं होगा कि वे अपने आचरण से स्वयं को विध्वंसक विचार की मध्ययुगीन मेगा मशीन के गंदे कलपुर्जे बनाए हुए हैं!

जेल में गीता पढ़ेंगे मनीष सिसोदिया, कोठरी में लगाएँगे ध्यान: कोर्ट ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा, 10 मार्च को बेल पर सुनवाई

दिल्ली के पूर्व उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की होली तिहाड़ जेल में मनेगी। कोर्ट ने 7 दिन की सीबीआई हिरासत के बाद सिसोदिया को 20 मार्च 2023 तक के लिए न्यायिक हिरासत में भेजा है। सीबीआई के वकील ने सिसोदिया की रिमांड की माँग नहीं की थी। हालाँकि यह कहा था कि जरूरत पड़ने पर 15 दिनों में फिर से रिमांड की माँग कर सकते है।

दिल्ली के शराब घोटाला मामले में CBI द्वारा गिरफ्तार किए गए मनीष सिसोदिया शनिवार (4 मार्च 2023) को 2 दिनों की रिमांड पर भेजे गए थे। उनकी यह रिमांड सोमवार (6 मार्च 2023) को खत्म हो रही थी। ऐसे में सीबीआई ने उन्हें दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश किया। इस दौरान सीबीआई के वकील ने कोर्ट में कहा कि वह मनीष सिसोदिया की रिमांड की माँग नहीं कर रहे हैं। लेकिन जरूरत पड़ने पर अगले 15 दिनों में फिर से रिमांड की माँग कर सकते हैं।

सीबीआई के वकील की इस बात को सुनने के बाद कोर्ट ने मनीष सिसोदिया को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। अब उन्हें आगामी 20 मार्च तक जेल में रहना होगा। इसके अलावा मनीष सिसोदिया के आवेदन पर कोर्ट ने उन्हें जेल के अंदर चश्मा, भगवद गीता, डायरी, पेन तथा एमएलसी द्वारा निर्धारित दवाएँ रखने की अनुमति दी है। साथ ही, जेल अधीक्षक को मनीष सिसोदिया की मेडिटेशन सेल में रखने की अपील पर विचार करने का निर्देश दिया है। उनकी जमानत याचिका पर 10 मार्च को सुनवाई की जाएगी

मनीष सिसोदिया गिरफ्तारी

बता दें कि सीबीआई ने 26 फरवरी 2023 को मनीष सिसोदिया से करीब 8 घण्टे पूछताछ की थी। पूछताछ में सहयोग न करने के कारण सीबीआई ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया था। इसके बाद 27 फरवरी 2023 को उन्हें कोर्ट में पेश किया था। जहाँ से कोर्ट ने सिसोदिया को 5 दिनों की रिमांड में भेजा था। इसके बाद 28 फरवरी को कॉन्ग्रेस नेता और वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने फौरन सुनवाई की माँग करते हुए सिसोदिया की गिरफ्तारी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी।

कोर्ट ने सिंघवी की याचिका को स्वीकार कर लिया था। 28 फरवरी को सुनवाई के दौरान CJI जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस पीएस नरसिम्हा की बेंच ने याचिका खारिज कर दी थी। कोर्ट ने सिसोदिया को फटकार लगाते हुए पहले हाईकोर्ट जाने की सलाह दी थी।

फिर शुक्रवार (03 मार्च 2023) को पूर्व डिप्टी सीएम सिसोदिया ने निचली अदालत में जमानत याचिका दायर की थी। याचिका में सिसोदिया ने CBI की पूछताछ में सहयोग का हवाला देकर जमानत माँगी। सिसोदिया की तरफ से कहा गया कि पूछताछ के लिए जब भी उन्हें बुलाया जाएगा वे हाजिर हो जाएँगे। उन्होंने कहा कि उन्हें कस्टडी में रखने की कोई वजह नहीं है। इस जमानत याचिका पर कोर्ट 10 मार्च 2023 को फैसला सुनाएगा।

उमेश पाल पर गोली चलाते CCTV में दिखा उस्मान, एनकाउंटर के बाद पत्नी कह रही- नाम विजय चौधरी तो मुसलमान कैसे हुए, अतीक अहमद को नहीं जानते

उमेश पाल मर्डर केस के बाद यूपी पुलिस के एनकाउंटर में मरने वाला उस्मान चौधरी उर्फ विजय चौधरी अतीक का खास शूटर था। वारदात के दिन उसी ने दुकान से निकलकर सबसे पहली गोली उमेश को मारी थी। उसकी फोटो-वीडियो सब सीसीटीवी में कैद हुई थी। हालाँकि इन सबके बावजूद उस्मान की पत्नी मीडिया में आकर कह रही है कि ये एनकाउंटर गलत हुआ है। उनके पति का हत्या से कोई लेना-देना नहीं है।

सामने आए बयान में उस्मान की पत्नी को कहते सुना जा सकता है, “मेरे पति को कहीं अलग से नहीं पकड़ा। पुलिस चू&^%$ बना रही है। वो लोग- वाले सारी रात यहीं थे, सुबह 7 बजे गए हैं। हमसे पुलिस ने कहा कि तुम अपने पति को आवाज दो, बुलाओ। हम जानते थे कि हमारे पति को ये लोग (एनकाउंटर) कर देंगे। हमें सब पता था लेकिन हमारे पति ऐसे नहीं थे। हमारे पति घोरपुर में गाड़ी चलाते थे। 24 तारीख को हमारे पति घर आए थे। इसका (उमेश पाल के मर्डर का) हमें नहीं पता है। लेकिन वो घर आए थे।”

पत्रकार ने जब कहा कि क्या वो दिन भर घर पर था? इस पर उस्मान की बीवी ने कहा, “हाँ वो पूरा दिन घर पर थे। हमारे भैया भी जेल में है। उनका केस सतना भेजा गया है। हमारे पति वहीं गए थे। 26 फरवरी से 2 मार्च तक वो वहीं थे।” मीडिया ने जब इनसे पूछा कि क्या पुलिस झूठ बोल रही है, तो पीछे से आवाज हाँ में आवाज आई।

उस्मान चौधरी की पत्नी ने मीडिया में कहा, “हम लोग हिंदू हैं पर हमें मुसलमान बताया जा रहा है। हम लोग अतीक अहमद को जानते तक नहीं हैं। पुलिस मुझे भी एनकाउंटर में मार डाले क्‍योंकि मेरे आगे पीछे कोई नहीं है, मैं किसके सहारे अपनी जिंदगी जिऊँगी। मेरे पति का नाम सिर्फ विजय चौधरी है पर उसे उस्‍मान चौधरी के नाम से बताया जा रहा है।”

बता दें कि उस्मान चौधरी का बड़ा भाई राकेश चौधरी भी एक हिस्ट्रीशीटर है। उसका केस ही सतना में चल रहा था जिसकी पैरवी के लिए उस्मान भी वहाँ गया था। इसके अलावा उस्मान खुद अतीक का शार्प शूटर था जिसका धर्मांतरण खुद अतीक अहमद ने कराया था। अब पुलिस इस मामले में भी आगे जाँच कर रही है।

₹3000 बोला था, दिए बस ₹1000… कॉन्ग्रेस मुखपत्र के लिए काम करने वाली संजुक्ता बसु ने बयाँ किया दर्द, राहुल गाँधी के लिए आर्टिकल लिखने का बताया भाव

कॉन्ग्रेस के मुखपत्र नेशनल हेराल्ड (National Herald) ने अपनी पूर्व संपादकीय सलाहकार संजुक्ता बसु (Sanjukta Basu) को कथित तौर पर राहुल गाँधी के पक्ष में लेख लिखने के लिए 3000 रुपए का भुगतान करने का वादा किया था। लेकिन उन्हें केवल 1000 रुपए प्रति लेख का ही भुगतान किया गया।

संजुक्ता बसु ​के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

संजुक्ता बसु ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर खुद इसकी जानकारी दी है। उन्होंने दावा किया कि उनकी पब्लिक इमेज से भले से लोगों को ऐसा लगता है कि वह लाखों रुपए कमा रही हैं। लेकिन यह सच नहीं है। उन्होंने खुलासा किया कि वह नेशनल हेराल्ड में एक संपादकीय सलाहकार थी। लेकिन राहुल गाँधी के समर्थन में लेख लिखने के लिए उन्हें कभी लाखों रुपए नहीं दिए गए। बल्कि उन्हें 3000 रुपए देने का वादा करके केवल 1000 रुपए थमा दिए गए। पूरे पैसे भी कभी नहीं दिए गए।

उन्होंने सोमवार (6 मार्च 2023) को ट्वीट किया, “यह बेहद चौंकाने वाला है कि मैंने कभी भी पैसे न दिए जाने के बारे में खुलकर नहीं बोला है। मेरी पब्लिक इमेज से भले ही ट्रोल्स को ऐसा लगता हो कि मैं लाखों कमा रही हूँ। नेशनल हेराल्ड ने मुझे राहुल गाँधी के समर्थन में लेख लिखने के लिए लाखों रुपए दिए हो। लेकिन उन्होंने तो मुझे पूरे पैसे भी नहीं दिए। 3000 रुपए का वादा करके केवल 1000 रुपए का ही भुगतान किया।”

इसके बाद उन्होंने लिखा, “लेकिन जो चीज मुझे जीवंत महसूस कराती है, जो मुझे मेरा MOJO देती है। वह मेरी पब्लिक इमेज है। मुझे इससे बहुत प्यार है। मैं इसके लिए ही पैदा हुई थी। मैं देखने और सुनने के लिए पैदा हुई थी। लेकिन जो चीजें मैं करती हूँ, लिखती हूँ, कहती हूँ, जरूरी नहीं कि उसके लिए पैसा ही मिले।” इसके बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर यूजर्स के सवालों का जवाब देने के लिए भी कई ट्वीट किए।

गौरतलब है कि नेशनल हेराल्ड द एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड द्वारा प्रकाशित किया जाता है। इसका स्वामित्व राहुल गाँधी और सोनिया गाँधी के स्वामित्व वाली कंपनी यंग इंडियंन के पास है। ‘नेशनल हेराल्ड’ की स्थापना 1937 में हुई थी। AJL तब उर्दू में ‘कौमी आवाज़’ और हिंदी में ‘नवजीवन’ नामक अख़बार निकालता था। नेहरू के लेख इसमें अक्सर आया करते थे। अंग्रेज सरकार ने इसे 1942 में बैन कर दिया था। नेहरू स्वतंत्रता के बाद इसके बोर्ड के अध्यक्ष पद से तो हट गए, लेकिन अख़बार कॉन्ग्रेस से ही चलता रहा।

1963 में इसके सिल्वर जुबली कार्यक्रम में नेहरू ने सन्देश जारी किया। 2016 में इसे फिर से डिजिटल प्लेटफॉर्म के रूप में लॉन्च किया गया।

मंदिर में मौलवी ने कराया निकाह: गुस्साए लोगों ने कहा- मंदिरों को बैंक्वेट हॉल मत बनाओ, कल को इफ्तार होगा और बीफ पकेगा?

हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले के रामपुर में स्थित सत्य नारायण मंदिर में निकाह करने की खबर सामने आई है। मंदिर के अंदर रविवार (5 मार्च, 2023) को मौलवी ने निकाह करवाया। इस दौरान यहाँ मौलवी और गवाहों के अलावा एक वकील भी मौजूद रहा।

दुल्हन के पिता महेंद्र सिंह मलिक ने कहा कि बेटी की शादी रामपुर के सत्यनारायण मंदिर परिसर में हुई है। शहर के लोगों ने चाहे विश्व हिंदू परिषद हो या मंदिर ट्रस्ट, सकारात्मक और सक्रिय रूप से हमारा सहयोग किया है।

ठाकुर सत्य नारायण मंदिर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और विश्व हिंदू परिषद (VHP) का जिला कार्यालय है। सत्यनारायण मंदिर ट्रस्ट रामपुर के महासचिव विनय शर्मा ने न्यूज एजेंसी ANI से कहा कि विश्व हिंदू परिषद और आरएसएस पर अक्सर मुस्लिम विरोधी होने का आरोप लगाया जाता है। हमारी मौजूदगी में यहाँ निकाह संपन्न हुआ। सनातन धर्म हमेशा सबको साथ लेकर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।

वहीं, सोशल मीडिया पर निकाह की तस्वीर वायरल होने के बाद यूजर्स काफी आक्रोशित हैं। जहाँ कुछ लोग इसे सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल बता रहे हैं। वहीं, कुछ लोग इस निकाह को इस्लाम में हराम बता रहे हैं। एक यूजर लिखता है कि विशुद्ध चू#यापा है ये। मंदिरों को बैंक्वेट हॉल मत बनाओ। कल को इफ्तार पार्टी देना और फिर वहीं बीफ पकाने लगना। शिमला के लोग इस मंदिर के पुजारी को पूछें कि धर्म में कहाँ ऐसे प्रावधान हैं? हाँ, ये लोग हिन्दू बनकर, हिन्दू रीति से विवाह करें तो समस्या नहीं। दुर्भाग्य।

विवेक मिश्र ने लिखा, “जैसे ही कॉन्ग्रेस की सरकार किसी राज्य में बनती है, ऐसी घटनाएँ प्रारंभ हो जाती हैं। क्या यह कोई साजिश है, सनातनियों के खिलाफ?”

एक और ने लिखा कि शादी हुई है तो खाना भी हुआ होगा और खाने में नाॅनवेज भी रहा होगा? धन्य है उस मंदिर के कर्ताधर्ता।

रोहन ने लिखा, “कभी मस्जिद में भी सात फेरे लेने का मौका दो।”

सरगना नाम की यूजर ने हिंदू मंदिर में निकाह करने पर कहा, “ये इस्लाम में हराम है।”

राहुल लिखते हैं, “हिंदू रीति रिवाज से होना चाहिए था….हिंदू मंदिर में कुरान पढ़ाकर निकाह शर्मनाक।”

साकेत ने लिखा कि दिखावटी भाईचारे के सारे चु#@#यापे हिंदुओ के मंदिरों में ही क्यों होते हैं? कभी इस भाईचारे को निभाने के लिए मस्जिदों का उपयोग क्यों नहीं होता है? 10 जगह पत्थर फेंककर एक जगह ऐसा ड्रामा क्यों? पहले सर तन जुदा करो फिर ह्यूमन चेन बनाकर चु-*#@#या बनाओ? बहुत धूल झोंक दी बस अब नहीं।

रेप के बाद गर्भवती हुई 15 साल की लड़की, यूट्यूब वीडियो देख घर में ही बच्ची को दिया जन्म, फिर मारकर डिब्बे में कर दिया पैक

महाराष्ट्र के नागपुर में 15 साल की एक लड़की ने यूट्यूब वीडियो देखकर डिलिवरी करना सीखा। फिर अपने घर में ही एक बच्ची को जन्म दिया। जन्म के बाद उस बच्ची की हत्या कर दी। शव को एक डिब्बे में पैक कर छिपा दिया। रिपोर्टों के अनुसार सोशल मीडिया के जरिए संपर्क में आए एक युवक के रेप करने से लड़की गर्भवती थी। उसने गर्भवती होने से लेकर बच्ची की डिलिवरी तक की बात अपनी माँ से छिपा रखी थी।

लड़की की माँ एक मॉल में काम करती है। गुरुवार की रात (2 मार्च 2023) जब वह काम से घर लौटी तो पूरे मामले का खुलासा हुआ। घर में खून के धब्बे देख माँ ने बेटी से पूछा तो उसने पहले पीरियड की बात कहकर गुमराह करने की कोशिश। लेकिन बाद में उसने पूरा घटनाक्रम माँ को बता दिया।

पुलिस ने रविवार (5 मार्च 2023) को मामले की जानकारी दी। पुलिस का कहना है कि नागपुर के अंबाझरी इलाके में रहने वाली इस लड़की की सोशल मीडिया के जरिए एक युवक से दोस्ती हुई थी। इसी युवक ने उसका यौन शोषण किया था। इससे वह गर्भवती हो गई। लेकिन लड़की ने इसकी सच्चाई अपनी माँ से छिपाते हुए कहा कि वह बीमार है, इसलिए उसके पेट में समस्या हो गई है।

गर्भवती होने के बाद उसने इस मामले को पूरी तरह से छिपाने की कोशिश की। इसी दौरान उसे घर में ही बच्ची को जन्म देने का विचार आया। इसके लिए उसने यूट्यूब वीडियो देखने शुरू किए। वीडियो देखते हुए उसने बच्चे को जन्म देने का तरीका समझा। गुरुवार को माँ के काम पर जाने के बाद उसने घर में ही बच्ची को जन्म दिया।

बच्ची के जन्म के बाद भी वह इसे छिपाना चाहती थी। इसलिए उसने नवजात बच्ची को गला दबाकर मार डाला। इसके बाद उसने उसे एक डिब्बे में छिपाकर रख दिया। जब लड़की की माँ वापस घर आई तो उसकी हालत और घर में खून के धब्बे देख उसकी तबीयत के बारे में पूछा। शुरुआत में गुमराह करने के बाद लड़की ने अपनी माँ को पूरी घटना की जानकारी दी। फिर माँ उसे लेकर हॉस्पिटल गई, जहाँ उसका इलाज चल रहा है। फिलहाल, लड़की की हालत नाजुक बताई जा रही है।

वहीं, पुलिस ने नवजात के शव को कब्जे में लेते हुए पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस ने यौन शोषण के आरोपित युवक के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धाराओं तथा यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो) एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस का कहना है कि नवजात की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के आधार पर लड़की के खिलाफ हत्या की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाएगा।