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पांडवों ने पाकिस्तान नहीं बनने दिया, धारा-370 नहीं लगाई, वर्शिप एक्ट लेकर नहीं आए: राहुल गाँधी की ‘महाभारत से भारत जोड़ो यात्रा’, दाढ़ी बढ़ने से कम होती है महँगाई

भारत में यात्राओं का लंबा इतिहास रहा है, या यूँ कहिए कि भारत का बहुत सारा इतिहास यात्राओं में छुपा हुआ है। जब चर्च और इस्लाम के संस्थापकों का जन्म भी नहीं हुआ था तब से कई विदेशी यात्री भारत की महान प्राचीनतम सभ्यता को जानने के लिए भारत की यात्रा करते रहे हैं। ईसा मसीह के जन्म से भी लगभग 300 वर्ष पहले, अर्थात आज से लगभग 2500 साल पहले यूनान के इतिहासकार मेगास्थनीज ने 302 से 298 ईसा पूर्व के बीच भारत की यात्रा की और इंडिका नामक पुस्तक में भारत के बारे में अपनी यात्रा का वर्णन लिखा।

इसके अलावा भी टॉल्मी (ग्रीस यात्री, 130 ईसवी), फाह्यान (चीन, 405 से 411 ईसवी), ह्वेनसांग (चीन, 630 से 645 ईसवी), इत्सिंग (चीन, 671 से 695 ईसवी), अलबरूनी (उज़्बेकिस्तान, 24 से 530 ईसवी) इब्नबतूता (मोरक्को, 1333 से 1347 ईस्वी) आदि अनेक यात्री कुछ न कुछ जानने की इच्छा लेकर भारत आते रहे। भारत को विश्व गुरु ऐसे ही नहीं कहा जाता, उसके पीछे एक समृद्ध विरासत है। मगर विडंबना देखिए कितनी आसानी से लिख दिया गया कि 1498 में वास्को ‘डी’ गामा ने भारत की खोज की थी।

यदि वास्कोडिगामा ने 1498 में भारत की खोज की थी तो ढाई हजार साल पहले मेगास्थनीज ने कौन से भारत की यात्रा की थी यह बात समझ से परे है। और भी क्या-क्या इतिहास के नाम पर पढ़ा दिया गया होगा यह शोध का विषय है। खैर छोड़िए, यह काम हम इतिहासकारों के लिए छोड़ दें। हम तो यात्रा की बात करते हैं। एक यात्रा अभी अभी खत्म हुई है। इसका नाम आप जानते ही हैं। पर मेरे अनुसार इस यात्रा का नाम ‘महाभारत से भारत जोड़ो’ यात्रा होना चाहिए। क्योंकि इस यात्रा से महाभारत के बारे में कई ऐसी बातें पता चलीं जो हम पहले नहीं जाते थे।

जैसे – पांडवों ने नोटबंदी नहीं की थी। पांडवों ने जीएसटी भी नहीं लगाया था। लगभग 5000 साल पहले पांडवों के साथ पता नहीं कौन से धर्म के पर सभी धर्मों के लोग रहते थे। यह सब बातें जानने के बाद ध्यान में आया कि पांडवों ने और भी बहुत सारे काम नहीं किए थे। जैसे पांडवों ने पाकिस्तान नहीं बनने दिया, बांग्लादेश नहीं बनने दिया, पांडवों ने धारा 370 भी नहीं लगाई, पांडवों ने पूजा स्थल कानून (Places of worship act 1991) भी नहीं बनाया जिससे हजारों मंदिरों पर अवैध कब्जा वैध हो गया, पांडवों ने संविधान में संशोधन करके ‘सेकुलर’ शब्द भी नहीं जोड़ा था।

लेकिन कोई बात नहीं, बाद में कुछ लोगों ने इन कामों को भी पूरा कर दिया। इस यात्रा से आपको और भी बहुत सी ज्ञान की बातें मिल सकती हैं। जैसे-कोरोना काल में कोरोना योद्धाओं पर फूल बरसाने से कोरोना नहीं भागता लेकिन टी शर्ट पहन कर भागने से बेरोजगारी कम हो जाती है। ताली-थाली बजाने से किसी का उत्साहवर्धन हो या ना हो लेकिन दाढ़ी बढ़ाने से महँगाई का बढ़ना बंद हो सकता है। दीपक जलाने से प्रकाश फैले या ना फैले लेकिन RSS को कोसने से नफरत फैलना बंद हो जाती है।

इस यात्रा के नेताओं ने बताया कि इस यात्रा में कुत्ते, सूअर, इंसान सभी आए किंतु कहीं कोई नफरत नहीं दिखाई दी। सही बात है कुत्ते, सूअर, इंसान सभी आए लेकिन गाय दिखाई नहीं दी। शायद उसके आने से नफरत फैल सकती थी या उसके गोबर से गंदगी फैल सकती थी। हो सकता है कि सेकुलरिज्म खतरे में पड़ जाता। लेकिन बीच सड़क पर बीफ (गौमांस) पार्टी करने वालों के साथ चलने से प्यार फैलता है। धर्मनिरपेक्षता बढ़ती है।

इस यात्रा के बहुत से सकारात्मक पहलू हैं। इस यात्रा से संदेश गया कि कन्याकुमारी से लेकर कश्मीर तक भारत एक है। अच्छा हुआ धारा 370 को इस यात्रा से पहले ही हटा दिया गया था नहीं तो यह यात्रा कन्याकुमारी से जम्मू तक ही हो पाती। क्योंकि जिस स्थान पर तिरंगा फहरा कर इस यात्रा का सफलतापूर्वक समापन हो गया उस कश्मीर में तिरंगा फहराने के लिए मुखर्जी को अपना बलिदान देना पड़ा था। जब 370 समाप्त हुई तो कुछ लोगों ने मजाक में कहा कि कौन-कौन कश्मीर में प्लॉट लेगा अरे कोई प्लॉट ले या ना ले लेकिन लोग तिरंगा फहराने तो जा ही रहे हैं।

कम से कम गंदगी तो साफ हो रही है। काश देश समय रहते जागरूक होता तो यात्रा कन्याकुमारी से लाहौर तक होती, लेकिन तब हम अहिंसा की पूजा में व्यस्त थे। कुछ और पहले यात्रा होती तो शायद कन्याकुमारी से कंधार तक होती, लेकिन तब हम जातिवाद में व्यस्त थे। समय रहते यात्रा होती तो कन्याकुमारी से कैलाश मानसरोवर तक होती। लेकिन तब हम हिंदी चीनी भाई भाई के नारे में मग्न थे और कैलाश मानसरोवर पर चीन का कब्जा हो गया।

इस यात्रा से हमारी बहुत सारी भ्रांतियाँ दूर हुईं। जैसे- ‘अखंड भारत’ कहना सांप्रदायिकता है। ‘भारत जोड़ो’ कहना धर्मनिरपेक्षता है। जय श्री राम कहने से हिंसा फैल सकती है इसके स्थान पर जय सियाराम कहिए इससे गरीबी, बेरोजगारी, और महंगाई नियंत्रित होती है। खैर देर आए दुरुस्त आए। यात्रा सफलतापूर्वक संपन्न हुई। और देश को बहुत लाभ हुआ। बहुत-बहुत धन्यवाद! जय श्री राम

जिसने कारगिल युद्ध में गँवाए दोनों हाथ, उसकी भतीजी थी निक्की: डाटा केबल से गला घोंटा, 35 किमी लाश लेकर घूमता रहा साहिल

दिल्ली के निक्की मर्डर मामले में मुख्य आरोपित ने गुनाह कबूल कर लिया है। आरोपित साहिल की शादी की बात सुनकर उसकी लिव-इन पार्टनर निक्की ने उस पर शादी तोड़ने का दबाव बनाया था। इसको लेकर दोनों के बीच बहस हुई थी। इसके बाद साहिल ने निक्की की हत्या की प्लानिंग की।

साहिल ने निक्की को घूमाने के बहाने अपने कार में बैठाया और 9-10 फरवरी की रात उसने रास्ते में निक्की की हत्या कर दी। हत्या के बाद लाश को 35 किलोमीटर लेकर घूमता रहा था साहिल। अंत में उसने लाश को नजफगढ़ स्थित अपने ढाबे में छिपा दिया। उधर, निक्की के पिता सुनील यादव लगातार कोशिश के बाद भी अपनी बेटी से संपर्क नहीं कर पा रहे थे।

सुनील यादव अपने दोस्तों से पता करते हुए आरोपित साहिल के घर तक पहुँचे थे। वहाँ भी उन्हें अपनी बेटी का सुराग नहीं मिला। इसके बाद निक्की के पिता सुनील ने दिल्ली पुलिस के क्राइम ब्रांच में अपने दोस्त से मदद माँगी। इसके बाद निक्की की लाश साहिल के ढाबे से बरामद की गई।

पूछताछ में साहिल ने पुलिस को बताया कि उसकी शादी घरवालों ने कहीं और तय कर दी थी, लेकिन निक्की चाहती थी कि वह यह शादी तोड़ दे। इसके लिए निक्की ने साहिल को मनाने की भी कोशिश की। हालाँकि, साहिल इसके लिए तैयार नहीं हुआ। इसके बाद दोनों के बीच झगड़ा भी हुआ।

सगाई के बाद 9 फरवरी की रात साहिल ने निक्की को घूमाने के बहाने अपने कार में बैठाया और कश्मीरी गेट की तरफ निकल गया। कार में भी शादी को लेकर निक्की और साहिल के बीच बहस भी हुई। निक्की ने साहिल से कहा था कि परिवार द्वारा तय रिश्ता तोड़कर मुझसे शादी उससे शादी कर ले। अगर इतना नहीं कर सकते तो साहिल उसके साथ जान दे दे।

साहिल इनमें से कुछ भी मानने को तैयार नहीं था। साहिल ने निक्की को रास्ते से हटाने के लिए गाड़ी में रखे मोबाइल डेटा केबल से गला घोंट कर हत्या कर दी। हत्या के बाद निक्की की लाश को बगल की सीट पर रखकर वह नजफगढ़ पहुँचा। जहाँ उसने लाश को फ्रिज में छिपा दिया। अगले दिन 10 फरवरी को साहिल ने घरवालों की पसंद की लड़की से शादी कर ली।

इधर बेटी से संपर्क नहीं हो पाने के कारण पिता सुनील परेशान थे। पिता ने निक्की की सहेली को फोन किया। निक्की की दोस्त ने उन्हें साहिल के बारे में जानकारी दी। साहिल ने उनसे कहा कि निक्की छुट्टियाँ मनाने मसूरी गई है। हालाँकि सुनील नहीं माने और आरोपित के घर पहुँच गए। आरोपित के घरवालों ने मदद का भरोसा देकर उन्हें घर भेज दिया।

बेटी की गुमशुदगी से चिंतित पिता ने क्राइम ब्रांच में काम करने वाले अपने एक दोस्त से मदद माँगी। निक्की का नंबर सर्विलांस पर लगाया गया, जिसके बाद उन्हें नजफगढ़ के मित्रांव गाँव के पास स्थित एक ढाबे का लोकेशन मिला। यहीं, से निक्की की लाश बरामद हुई। इस तरह हत्या के चार दिन बाद 14 फरवरी को निक्की मर्डर केस का खुलासा हुआ।

पुलिस ने हत्या में इस्तेमाल सफेद कार को भी बरामद कर लिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपित साहिल ने अपना गुनाह कबूल लिया है। दिल्ली पुलिस ने आरोपित साहिल के खिलाफ आईपीसी की धारा 302, 201 के तहत मामला दर्ज किया है। निक्की के पिता ने सुनील ने आरोपित को फाँसी की सजा देने की माँग की है।

निक्की के चाचा प्रवीण यादव कारगिल युद्ध में लड़े थे। पाकिस्तान के साथ हुई जंग में उन्होंने अपने दोनों हाथ गंवा दिए थे। इसके अलावा, उनकी दाईं टांग भी ठीक से काम नहीं करती है। इसके कारण उन्हें चलने में परेशानी होती है। अपनी भतीजी की मौत पर वे बेहद दुखी हैं।

पारसी लड़कियों को कहा ‘वेश्या’, बच्चियों के Boobs पर बातें, बच्चों के रेप को बढ़ावा: हिंदूफोबिक ही नहीं, कामांध भी है तन्मय भट्ट

हमारे देश में बच्चों के हितों की देखभाल के लिए, या यूँ कहें कि उनके साथ होने वाले अपराधों के मामले में न्याय सुनिश्चित करने के लिए और अनाथों के रहन-सहन की व्यवस्था सुनिश्चित कराने के लिए ‘केंद्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR)’ नामक एक संस्था काम करती है। उसी देश में अगर कोई कॉमेडियन बच्चियों के बलात्कार की बात करे और बच्चों को लेक अश्लीलता फैलाए, क्या इसे बर्दाश्त किया जा सकता है?

खुद को कॉमेडियन बताने वाला तन्मय भट्ट, जो गालीबाजों के समूह ‘ऑल इंडिया बकचोद (AIB)’ का हिस्सा भी रहा है, उसे हाल ही में ‘कोटक महिंद्रा बैंक’ के एक विज्ञापन में देखा गया। जिस देश में कई खेल खेले जाते हों और फ़िल्में/वेब सीरीज बनते हों, महिलाओं से लेकर पुरुषों तक ने मनोरंजन से लेकर खेल तक के क्षेत्र में झंडा फहरा कर सेलेब्रिटी का स्टेटस हासिल किया हो, वहाँ ‘Child Rape’ को बढ़ावा देने वाला एक व्यक्ति ही ब्रांड एम्बेसडर के रूप में मिलता है?

इतना ही नहीं, इन सबके बावजूद कुछ ऐसे लोग भी हैं जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और हिन्दू धर्म के अंध-विरोध में पागल होकर उसका समर्थन भी करते हैं। ऐसा ही एक नाम कुणाल कामरा का है, जो उलटी-सीधी कॉमेडी के नाम पर सुप्रीम कोर्ट का मजाक उड़ाता है और विमान में बदतमीजी करता है। उसने तन्मय भट्ट का समर्थन किया। लेकिन, चूँकि ये लोग लिबरल गिरोह के हैं – ये बच्चियों के बलात्कार को बढ़ावा दें फिर भी क्षम्य है।

इस देश में तो ऐसा ही चल रहा है। तन्मय भट्ट ने हिन्दू धर्म को गाली दी, उस संबंध में तो चर्चा हो रही है लेकिन ‘Child Abuse’ पर उसने जो-जो कहा था, उसे छिपाने में मीडिया का भी अच्छा-खासा योगदान है। तन्मय भट्ट की सोच का नमूना उसके इस ट्वीट में देखिए, जो उसने 23 मई, 2012 को किया था, “आपको कैसे पता है कि बच्चों को बलात्कार पसंद नहीं है?” आप खुद विचार कीजिए, ‘बच्चों के बलात्कार’ की बात करने वाला व्यक्ति कितना घिनौना हो सकता है।

उसका एक और ट्वीट देखिए, “अभी-अभी मैंने सुना है कि पारसी समुदाय को 2015 में जनजातीय समाज का दर्जा मिल जाएगा। मुझे लगता है कि ये सही समय है जब पारसी लड़कियों को वेश्याओं की तरफ व्यवहार करना चाहिए और थोड़ा ज़्यादा Fuck करना चाहिए।” सोचिए, ये व्यक्ति एक अल्पसंख्यक समाज की बच्चियों के लिए ‘Slut It Up’ और ‘Fuck’ जैसे शब्दों का प्रयोग करता है, लेकिन इस पर कोई Outrage नहीं होता।

वामपंथी गिरोह भी शांत रहता है। इतना ही नहीं, तन्मय भट्ट का ये ट्वीट भी देखिए, “जब भी मैं लड़कियों के बचपन की नंगी तस्वीरें देखता हूँ तो मुझे वास्तव में ये बड़ा अजीब लगता है। मेरे मन में ये चलता है कि हाहा, मैंने तुम्हारे बूब्स देख लिए। हाहा।” यानी, इसने खुलेआम बच्चियों के प्राइवेट पार्ट्स को लेकर अश्लील बातें की हैं। तब भी इसके कारनामे वामपंथी-लिबरल-सेक्युलर गैंग के लिए जायज हैं। क्या ये कॉमेडी है? क्या इसे चुटकुलों की श्रेणी में डाला जा सकता है?

इतना ही नहीं, तन्मय भट्ट ‘Me Too’ का भी आरोपित है। महिमा कुकरेजा ने जब तन्मय के साथी उत्सव चक्रवर्ती के के खिलाफ ‘Me Too’ के आरोप लगाए थे, तब ये भी सामने आया था कि तन्मय भट्ट को अपने साथी द्वारा शोषण और यौन छेड़छाड़ के बारे में मालूम था, लेकिन उसने अपने साथी का समर्थन करना पसंद किया। AIB के टूटने के बाद उसने खुद के अवसाद में जाने की बात कर के ‘विक्टिम कार्ड’ खेला, जिसके बाद कॉमेडियन अदिति मित्तल ने उसे लताड़ा था

कानपुर में जहाँ जल मरी माँ-बेटी, वहाँ सबसे पहले शिवलिंग तोड़े जाने का दावा: डिप्टी CM के भरोसे पर अंतिम संस्कार को माने परिजन

उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात (Kanpur, Uttar Pradesh) जिले में प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में जलकर हुई माँ-बेटी की मौत के मामले में परिजन अंतिम संस्कार के लिए तैयार हो गए हैं। दरअसल, प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने पीड़ित परिवार की माँगों को मानने का भरोसा दिया। जानकारी के अनुसार, घटना में मृत लड़की नेहा दीक्षित की शादी कुछ समय बाद होने वाली थी।

दैनिक भास्कर के मुताबिक, मृतक नेहा परिवार में इकलौती लड़की थी। 2 साल पहले उसके भाई शिवम की शादी हुई थी। इसके बाद अब नेहा की शादी की तैयारियाँ कर रहे थे। हादसे की शिकार नेहा और उसकी माँ को पड़ोसी ने बेहद शांत स्वभाव की महिला बताते हैं। घटना वाले दिन प्रमिला का गुस्सा लोगों के लिए अप्रत्याशित था। जैसे ही आग लगी, उसके बाद घर में रखे जेनरेटर की टंकी फट गई थी और डीजल फैल जाने के बाद आग बेकाबू हो गई थी।

वर्तमान व पूर्व सैनिक की केमिस्ट्री

ऑपइंडिया से बात करते हुए शिवम ने इस घटना के मास्टरमाइंड के तौर पर गौरव दीक्षित का नाम लिया था। बताया जा रहा है कि उसे गाँव में गोरे नाम से बुलाया जाता है। भारतीय सेना में सेवा दे रहा गौरव दीक्षित फिलहाल जम्मू में पोस्टेड है। वहीं इस केस में नामजद लेखपाल अशोक भी पूर्व सैनिक बताया जा रहा है।

मृतक के पड़ोसी राजीव के अनुसार, पूर्व व वर्तमान सैनिक की दोस्ती पिछले काफी समय से न सिर्फ मृतक के परिजनों, बल्कि गाँव के कई अन्य लोगों को भी जमीन से जुड़े मामले में परेशान कर रही थी। राजीव ने इस जोड़ी पर जमीनों को हड़पने का भी आरोप लगाया। मड़ौली के ग्राम प्रधान मान सिंह ने भी लेखपाल अशोक की कार्यशैली बेहद विवादित बताई है।

सबसे पहले शिवलिंग तोड़ा

ऑपइंडिया से बात करते हुए शिवम ने बताया कि उनके परिवार ने शिवलिंग की स्थापना करवाई थी, जिसे SDM के आदेश पर तोड़ दिया गया। शिवम का दावा है कि धर्मस्थल तोड़ने में SDM के साथ SHO, लेखपाल और कानूनगो की भी सहमति थी। उन्होंने कहा कि इस तोड़फोड़ का बाकायदा वीडियो भी बनाया गया था।

बिठूर में होगा अंतिम संस्कार

ऑपइंडिया से बात करते हुए शिवम ने बताया कि उनकी माँ और बहन का अंतिम संस्कार बिठूर में चल रहा है। यह जगह उनके घर से कुछ ही दूरी पर है। हिन्दू धर्म में अंतिम संस्कार के लिए गंगा नदी को सबसे उचित स्थान बताते हुए शिवम ने बिठूर गंगा तट को चुने जाने की वजह बताई।

दैनिक जागरण के मुताबिक, जिले के SP और डिप्टी SP ने मृतकों के शव को कंधा दिया था। शिवम ने हमें बताया कि उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने उनकी तमाम माँगे मान ली हैं और आरोपितों को भी कड़ी सजा दिलाने का भरोसा दिया है।

WPL में सानिया मिर्जा की एंट्री, RCB ने बनाया मेंटोर: आई मीम की बाढ़, नेटिजन्स बोले- क्रिकेट टीम में टेनिस खिलाड़ी का क्या काम

रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर (RCB) ने टेनिस खिलाड़ी सानिया मिर्जा को आगामी महिला प्रीमियर लीग (WPL) 2023 के लिए टीम का मेंटोर नियुक्त किया है। रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर बुधवार (15 फरवरी 2023) एक पोस्ट शेयर कर सानिया मिर्जा को मेंटोर नियुक्त करने की घोषणा की। हाल ही में 36 वर्षीय टेनिस खिलाड़ी ने रोहन बोपन्ना के साथ ऑस्ट्रेलियन ओपन मिश्रित युगल के फाइनल में जगह बनाई थी।

आरसीबी ने ट्वीट किया, “जब हमारा कोचिंग स्‍टाफ क्रिकेट से जुड़ी चीजों को सँभालेगा, उस समय हम अपनी महिला क्रिकेटर्स पर बढ़ते दबाव कम करने और बेहतर मार्गदर्शन के बारे में नहीं सोच सकते हैं। इसलिए हमारी महिला टीम की मेंटोर, एक चैंपियन एथलीट और मार्गदर्शक का स्‍वागत करने के लिए हमारे साथ जुड़‍िए। नमस्‍कार सानिया मिर्जा।”

इसके बाद आरसीबी ने सानिया मिर्जा का एक वीडियो शेयर करते हुए लिखा, “महिला खिलाड़ियों की प्रेरणा, पद्म भूषण और अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित एक युवा आइकन, जिसने अपने पूरे करियर में कई शानदार पारियाँ खेली हैं उस सानिया मिर्जा का महिला क्रिकेट टीम की मेंटोर के रूप में आरसीबी को स्वागत करते हुए गर्व महसूस हो रहा है।” आरसीबी महिला टीम की मेंटर बनने पर सानिया मिर्जा ने कहा, “आरसीबी महिला टीम के साथ बतौर मेंटर के रूप में जुड़ने से खुश हूँ। भारतीय महिला क्रिकेट टीम महिला प्रीमियर लीग के साथ बदलाव देखेगी और मैं इस पिच का हिस्‍सा बनने पर ध्‍यान दे रही हूँ।”

वहीं, सोशल मीडिया पर सानिया मिर्जा को आरसीबी द्वारा मेंटोर घोषित किए जाने के बाद से मीम की बाढ़ आ गई है। एक यूजर ने ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ सीरियल में दयाबेन का किरदार निभाने वाली दिशा वकानी की तस्वीर शेयर की है। इसमें उन्होंने उल्टा बैट पकड़ा हुआ है। साथ में कैप्शन में लिखा, “सानिया मिर्जा एक मेंटर के रूप में।”

इसके अलावा आरसीबी अपने ट्विटर हैंडल पर शेयर की गई वीडियो में सानिया मिर्जा को SHE की जगह बार-बार ‘HE’ कहने पर निशाने पर आ गई है। पाकिस्तान के पत्रकार फरीद खान ने लिखा कि सानिया मिर्जा को SHE की जगह बार-बार ‘HE’ कहना अपमानजनक है। कृपया इसे ​एडिट करके हटाया दिया जाना चाहिए।

सिद्धार्थ नाम के यूजर ने पूछा कि ये शोएब मलिक से डाइवोर्स हो गया क्या, इसकी अफवाह तो उड़ रही थी। फिर वह आगे सानिया का मजाक उड़ाते हुए लिखता है कि मान लो अगर हो गया तो शोएब के पास तो आटा भी नहीं है सानिया को देने के लिए।

एक और यूजर ने ​सवाल किया क्रिकेट टीम में एक टेनिस खिलाड़ी क्या काम।

बता दें कि 13 फरवरी 2023 को महिला आईपीएल की सबसे पहली बोली भारत की स्टार बल्लेबाज स्मृति मंधाना पर लगी। मंधाना के लिए रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर और मुंबई इंडियंस की टीम ने जमकर बोलियाँ लगाईं। लेकिन अंत में आरसीबी की टीम ने मंधाना पर 3.4 करोड़ की बड़ी बोली लगाकर भारतीय ओपनर को अपनी टीम में शामिल किया। फ्रेंचाइजी ने स्‍मृति मंधाना के अलावा ऑस्‍ट्रेलियाई की ऑलराउंडर ऐलिसा पेरी, इंग्‍लैंड की कप्‍तान हीथर नाइट, न्‍यूजीलैंड की कप्‍तान सोफी डेविन और अन्‍य खिलाड़‍ियों को भी खरीदा है। रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर महिला प्रीमियर लीग में 5 मार्च 2023 को मुंबई में दिल्ली कैपिटल्‍स के खिलाफ मैदान में उतरेगी।

जम्मू कश्मीर में भारत-पाकिस्तान सीमा पर छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा, महाराष्ट्र से LOC जाएगी उनके पदचिह्नों वाली मिट्टी: जवानों को मिलेगी प्रेरणा

छत्रपति शिवाजी महाराज (Chhatrapati Shivaji Maharaj) पूरे देश का गौरव हैं और इन्हें देखकर न जाने कितने वीर-योद्धाओं ने प्रेरणा ली है। इसी को देखते हुए एक एनजीओ ‘आम्ही पुणेकर (वी पुणेकर) ने भारत-पाकिस्तान नियंत्रण रेखा (India-Pakistan line of control) के पास शिवाजी महाराज की प्रतिमा स्थापित करने का फैसला किया है। बकौल एनजीओ, इसके पीछे मकसद यह सुनिश्चित करना है कि दुश्मनों से लड़ने वाले सैनिक छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा को देखकर उनके आदर्श और नैतिक मूल्यों से प्रेरित हों।

इसके साथ ही सैनिक हिंदू राजा की बहादुरी को याद करें और दुश्मनों से लड़ने की प्रेरणा प्राप्त करें।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार कश्मीर की किरेण (Kiran) और तंगधार-टिटवाल (Tangdhar-Titwal) घाटियों में दो स्थानों पर नियंत्रण रेखा के पास छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा स्थापित की जाएगी। कश्मीर में कुपवाड़ा के जिलाधिकारी डॉक्टर सागर दत्तात्रेय डोईफोडे (Dr Sagar Dattatreya Doiphode) की अनुमति से प्रतिमा स्थापित की जाएगी। छत्रपति शिवाजी महाराज अटकेपर स्मारक समिति (Chhatrapati Shivaji Maharaj Atakepar Smarak Samiti) के प्रमुख अभयराज शिरोले और ‘वी पुणेकर’ एनजीओ के अध्यक्ष हेमंत जाधव ने इस पहल की योजना बनाई है।

हेमंत जाधव ने बताया, “प्रतिमा स्थापना कार्य के लिए भूमि पूजन मार्च के अंत तक होगा। शिवाजी के पदचिह्नों से पवित्र हुए रायगढ़, तोराना, शिवनेरी, राजगढ़ और प्रतापगढ़ किलों की मिट्टी और पानी को भूमि पूजन के लिए कश्मीर ले जाया जाएगा। ‘आम्ही पुणेकर (Amhi Punekar)’ इस कार्य को करेगी।”

अभयराज शिरोले ने कहा, ”छत्रपति शिवाजी महाराज ने अपनी रणनीति और साहसिक कार्यों से दुश्मनों को खदेड़ दिया था। दुनिया भर के विभिन्न देश उनकी गुरिल्ला युद्ध तकनीकों को मानते हैं। शिवाजी के आदर्शों और प्रतिमा के माध्यम से सीमा पर भारतीय सैनिकों को प्रेरणा देने के लिए भारत-पाकिस्तान सीमा पर छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा स्थापित की जा रही है।”

उल्लेखनीय है कि मराठा रेजीमेंट द्वारा जनवरी 2022 में जम्मू-कश्मीर में छत्रपति शिवाजी महाराज की दो प्रतिमाओं की स्थापना की गई थी। इनमें से एक प्रतिमा को समुद्र तल से 14800 फीट की ऊँचाई पर एलओसी के पास स्थापित किया गया है। अब, पुणे स्थित गैर सरकारी संगठनों द्वारा दो और प्रतिमाओं का निर्माण किया जाएगा।

‘ईसामसीह सब भगवान से बड़े…’ : जौनपुर में लालच देकर हिंदुओं को ईसाई बनाने का आरोप, सेंट जेवियर्स स्कूल के मैनेजर सहित कई पर FIR

उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले में ईसाई धर्मान्तरण के एक रैकेट का पर्दाफाश हुआ है। इसका सरगना बदलापुर के सेंट जेवियर्स स्कूल का प्रबंधक थॉमस जोसेफ है। FIR में थॉमस और 8 अन्य लोगों को नामजद किया गया है। इन पर लालच देकर हिंदुओं को धर्मांतरित करने का आरोप है। मामला रविवार (12 फरवरी 2023) को सामने आया।

यह मामला जौनपुर के बदलापुर थाना क्षेत्र के गाँव मुरादपुर कोटिला का है। मामले की शिकायत प्रमोद शर्मा ने की है। उन्होंने बताया कि 12 फरवरी को दोपहर लगभग 12:30 पर उन्हें मुरादपुर कोटिला गाँव में हिन्दुओं के धर्म परिवर्तन की सूचना मिली। यह काम सेंट जेवियर्स स्कूल के प्रबंधक थॉमस जोसेफ द्वारा करवाया जा रहा था। इसमें सहयोगी दिनेश कुमार मौर्या था, जो एक पादरी बताया जा रहा है। आरोप है कि इस दौरान सभा बुलाकर हिंदुओं को ईसाई बनने का लालच दिया जा रहा था। कथित तौर पर उनसे कहा गया कि ईसामसीह सब भगवान से बड़े हैं। जो काम भगवान नहीं करते, वह ईसामसीह की कृपा से हो जाती है।

​शिकायत में कहा गया है कि सभा के आयोजकों में शिव प्रसाद, समर बहादुर, दुर्गा प्रसाद, कमलेश, राम अजोर, आशीष कुमार और संजय कुमार भी शामिल थे। इनके साथ कई महिलाएँ भी मौजूद थीं जो खुद को ईसामसीह का वालेंटियर बता रहीं थीं। शिकायतकर्ता ने सनातन के विरुद्ध साजिश रचने वालों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है।

इस शिकायत में आरोपित के तौर पर कई अन्य अज्ञात लोग भी बताए गए हैं। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है। पुलिस ने FIR दर्ज कर सभी नामजद आरोपितों को हिरासत में ले लिया है। इन सभी पर उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म सम्परिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम 2021 की धारा 3/5 (1) के तहत कार्रवाई की गई है। पुलिस के मुताबिक इस मामले में जाँच कर जरूरी कार्रवाई की जा रही है।

छोड़ दिया गया थॉमस

ऑपइंडिया ने मामले के शिकायतकर्ता प्रमोद शर्मा से बात की। प्रमोद ने हमें बताया कि मुख्य आरोपित थॉमस को थाने से छोड़ दिया गया है। इसकी शिकायत वे पुलिस के उच्चअधिकारियों से करने जा रहे हैं। प्रमोद के मुताबिक थॉमस मूल रूप से केरल का रहने वाला। उसके स्कूल में सैकड़ों हिन्दू बच्चे पढ़ते हैं। बकौल प्रमोद ये बच्चे इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी करते-करते मानसिक तौर पर ईसाई बन चुके होते हैं।

प्रमोद ने ऑपइंडिया को इस घटना के वीडियो भेजे। वीडियो में सभा में कई महिलाएँ और पुरुष दिख रहे हैं। एक मंच सजा है जिस पर कुछ लड़कियाँ एक जैसा ड्रेस पहने बैठीं दिखी रही हैं। पुलिस बल को भी मौके पर देखा जा सकता है। एक अन्य वीडियो में थॉमस पुलिस और हिन्दू संगठन के लोगों से बहस करते देखा जा सकता है।

BBC के दफ्तरों में जारी है आयकर सर्वे, बार-बार नोटिस के बावजूद नहीं दे रही थी जवाब: नियमों की जानबूझकर अनदेखी का आरोप

पूर्वाग्रह से ग्रस्त अपने रिपोर्ट के कुख्यात ब्रिटेन की मीडिया एजेंसी बीबीसी (BBC) के दिल्ली और मुंबई स्थित कार्यालय पर आयकर विभाग (Income Tax Department) ने दूसरे दिन बुधवार (15 फरवरी 2023) को भी ‘सर्वे’ की। बीबीसी ने अपने कर्मचारियों को मेल भेजकर अधिकारियों के साथ सहयोग करने के लिए कहा है।

विदेशी मीडिया हाउस में यह सर्वे अर्जित किए गए लाभ को विदेश भेजने और ट्रांसफर प्राइसिंग रूल्स के उल्लंघन के कारण आयकर विभाग ने यह एक्शन लिया है। इसके पहले अधिकारियों ने इससे संबंधित बीबीसी को कई बार नोटिस भेजा था, लेकिन वहाँ से कोई जवाब नहीं आया।

आयकर विभाग का कहना है कि हस्तांतरण मूल्य निर्धारण नियमों (Transfer Pricing Rules) को जानबूझकर नजरअंदाज करने और विशाल लाभ को विदेश भेजने के मामले में सर्वे किया। अधिकारियों का यह भी कहना है कि यह छापेमारी या तलाशी नहीं है। आयकर नियमों के तहत इस तरह के सर्वे नियमित रूप से किए जाते हैं।

इन नियमों की अनदेखी के कारण आयकर विभाग ने बीबीसी को कई नोटिस भेजे थे, लेकिन बीबीसी ने जानबूझकर उनका जवाब नहीं दिया। बीबीसी कार्यालय में सर्वे का मुख्य कारण सूत्रों टैक्स का फायदा सहित अनधिकृत लाभों में हेरफेर है।

बता दें कि आयकर विभाग ने मंगलवार (14 फरवरी 2023) को बीबीसी के दफ्तर पर छापेमारी की थी। कहा जाता है कि उस दौरान अधिकारियों ने कर्मचारियों के मोबाइल और लैपटॉप रखवा लिया था। इसके साथ ही वहाँ के कर्मचारियों को सहयोग करने के लिए कहा था।

बीबीसी ने मंगलवार की शाम को कहा था, “आयकर अधिकारी नई दिल्ली और मुंबई में बीबीसी कार्यालयों में हैं। कई कर्मचारियों ने अब इमारत छोड़ दी है, लेकिन कुछ को वहाँ मौजूद रहने के लिए कहा गया है। वे पूछताछ में सहयोग कर रहे हैं।”

बुधवार को बीबीसी ने अपने कर्मचारियों को ईमेल कर कहा, “दफ्तर में जारी आयकर सर्वे में सभी कर्मचारी सहयोग करें। सभी कर्मचारी आयकर अधिकारियों को सहयोग करें और उनके सवालों का विस्तृत जवाब दें।” इसके साथ ही बीबीसी ने कर्मचारियों को वेतन से संबंधित जानकारी नहीं देने के लिए कहा है।

इस सर्वे को लेकर सरकार के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है। सरकार और भारत विरोधी तत्वों का कहना है कि बीबीसी ने हाल में एक ही डॉक्यूमेंट्री रिलीज की थी, जिसमें गुजरात दंगों के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भूमिका को लेकर सवाल उठाया गया था। हालाँकि, जो लोग इस बात। को समझ रहे हैं, वे इससे सहमत नहीं है।

अमेरिका ने इस सर्वे को लेकर बयान दिया है। अमेरिका का कहना है कि वह आयकर विभाग के इस सर्वे से वाकिफ है, लेकिन फिलहाल निर्णय देने की स्थिति में नहीं है। हालाँकि, ब्रिटेन की तरफ कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।

तमिलनाडु, कर्नाटक और तेलंगाना में 60+ ठिकानों पर NIA की छापेमारी: कोयंबटूर में मंदिर के सामने हुआ था ब्लास्ट, ISIS से जुड़ा था कनेक्शन

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने दक्षिण भरत के अलग-अलग प्रदेशों में 60 से अधिक स्थानों पर दबिश दी है। ये छापेमारी केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु में की गई है। छापेमारी का मकसद कोयंबटूर जिले में एक मंदिर के आगे कार में हुए विस्फोट से जुड़े संदिग्धों की धरपकड़ है। इन संदिग्धों का कनेक्शन अंतर्राष्ट्रीय आतंकी समूह ISIS से भी बताया जा रहा है। ये कार्रवाई बुधवार (15 जनवरी, 2023) को हुई है जो अब तक जारी बताई जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, छापेमारी के लिए सबसे अधिक स्थान कर्नाटक में चिह्नित किए गए हैं। यहाँ एक साथ 45 से ज्यादा जगहों पर NIA की टीम पहुँची है। हालाँकि, इस मामले में अभी तक हुई गिरफ्तारियों या बरामदगी का खुलासा नहीं किया गया है।

अक्टूबर 2022 में हुआ था कोयंबटूर ब्लास्ट

गौरतलब है कि 23 अक्टूबर 2022 को कोयंबटूर के कोट्टई ईश्वरम मंदिर के सामने एक कार में सिलिंडर ब्लास्ट हुआ था। इस ब्लास्ट में जमिज़ा मुबीन नाम का संदिग्ध आतंकी मारा गया था। 25 वर्षीय मुबीन इंजीनियरिंग ग्रेजुएट था। कुछ समय बाद इसकी जाँच NIA को सौंप दी गई थी। NIA ने अपनी जाँच के दौरान इस करतूत के पीछे ISIS की विचारधारा से जुड़े लोगों का हाथ पाया था। इस ब्लास्ट की साजिश में शामिल एक आतंकी मोहम्मद अजहरुद्दीन का कनेक्शन श्रीलंका में ईस्टर के मौके पर हुए सीरियल ब्लास्ट से भी मिला था।

बताते चलें कि पिछले कुछ वर्षों में NIA दक्षिण भारत के कई राज्यों में सक्रिय रही है। जनवरी 2023 में केरल के कोल्लम जिले से प्रतिबंधित कट्टरपंथी इस्लामी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) का मोहम्मद सादिक नाम का ‘रिपोर्टर’ पकड़ा गया था। वह ‘हिट स्क्वॉड’ के लिए गैर-मुस्लिमों (काफिरों) की पहचान कर उनके बारे में जानकारी जुटाता था। दिसंबर 2022 में NIA ने केरल से ही एक मोहम्मद मुबारक नाम के एक वकील को पकड़ा था जो PFI के चरमपंथियों को गला काटने की ट्रेनिंग दे रहा था।

जुलाई 2019 में NIA ने तमिलनाडु में छापेमारी करते हुए वाहदत-ए-इस्लामी हिंद नाम के चरमपंथी संगठन का पर्दाफाश करते हुए 14 संदिग्धों को गिरफ्तार किया था। यह सगंठन भारत को इस्लामी मुल्क बनाना चाहता था।

राम मंदिर पर लिखे भारत विरोधी नारे, PM मोदी के खिलाफ उगला जहर: कनाडा में एक और हिंदू मंदिर खालिस्तानी घृणा का बना शिकार

कनाडा में खालिस्तानियों ने फिर से एक हिंदू मंदिर को निशाना बनाया है। मिसिसॉगा स्थित राम मंदिर की दीवारों पर भारत विरोधी नारे लिखे जाने की तस्वीरें सोशल मीडिया में वायरल है। इस घटना को लेकर कनाडा में रह रहे हिंदू रोष में हैं। टोरंटो में भारत के महावाणिज्य दूतावास (Consulate General of India) ने इस घटना पर नाराजगी जाहिर करते हुए सख्त कार्रवाई करने का आह्वान किया है।

दूतावास ने एक बयान में कहा है, “हम मिसिसॉगा (Missisauga) में राम मंदिर (Ram Mandir) को भारत विरोधी नारों से विरूपित करने की कड़ी निंदा करते हैं। हमने कनाडा के अधिकारियों से घटना की जाँच करने और अपराधियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई करने का अनुरोध किया है।” मंदिर की दीवारों पर मोदी को आतंकवादी घोषित करो, हिंदुस्तान मुर्दाबाद और संत भिंडरांवाले शहीद हैं जैसे नारे लिखे गए थे।

एक रिपोर्ट के अनुसार, घटना की जिम्मेदारी प्रतिबंधित आतंकी संगठन ‘सिख फॉर जस्टिस (Sikh For Justice)’ ने ली है। ब्रैम्पटन के मेयर पैट्रिक ब्राउन ने इसकी निंदा करते हुए कहा है, “मिसिसॉगा में राम मंदिर मंदिर में नफरत से प्रेरित बर्बरता के बारे में सुनकर मुझे दुख हुआ है। अज्ञात संदिग्धों ने मंदिर के पिछले हिस्से की दीवारों पर स्प्रे पेंट कर दिया है। इस प्रकार की नफरत के लिए यहाँ कोई जगह नहीं है।”

यह पहली बार नहीं है जब कनाडा में किसी हिंदू मंदिर को निशाना बनाया गया है। इससे पहले ब्रैम्पटन शहर में 29 जनवरी 2023 की रात को गौरी-शंकर मंदिर की दीवारों पर भारत विरोधी नारे लिखने की घटना सामने आई थी। इसके पीछे भी खालिस्तानी आतंकी संगठन सिख फॉर जस्टिस (SFJ) का हाथ होने का शक जताया गया था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गौरी-शंकर मंदिर की दीवारों पर खालिस्तान समर्थकों ने ‘खालिस्तान जिंदाबाद’ ‘हिंदुस्तान मुर्दाबाद’ के नारे लिख दिए थे।

उससे पहले सितंबर 2022 में कनाडा के टोरंटो में स्थित बीबीएस स्वामी नारायण मंदिर में खालिस्तानी आतंकियों ने तोड़फोड़ की थी। इसके बाद मंदिर की दीवारों पर ‘खालिस्तान जिंदाबाद’, ‘हिंदुस्तान मुर्दाबाद’ के नारे लिखे थे। फरवरी 2022 में भी टोरंटो में छह मंदिरों पर हमला किया गया था। यहाँ तक कि उपद्रवी दान पेटियों से नकदी, भगवान की मूर्तियाँ और उन्हें चढ़ाए गए आभूषण भी चोरी करके ले गए थे। ऐसी ही घटना 15 जनवरी 2022 को जीटीए शहर के ब्रैम्पटन में श्री हनुमान मंदिर में हुई थी। यही नहीं, उपद्रवियों ने 25 जनवरी, 2022 को ब्रैम्पटन में माँ चिंतपूर्णी के मंदिर को भी तोड़ दिया था।