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राष्ट्रपति भवन में रखी गई ‘पठान’ की स्पेशल स्क्रीनिंग? – मीडिया में चल रही खबरों का जानिए सच, The Kashmir Files थी आखिरी फिल्म

मीडिया की कई खबरों में चलाया जा रहा है कि नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में ‘पठान’ की स्पेशल स्क्रीनिंग हुई है। एपीजे अब्दुल कलाम के राष्ट्रपति रहते उनके प्रेस सेक्रेटरी रहे एसएम खान के एक ट्वीट के बाद मीडिया में ये खबर वायरल हुई। उन्होंने कुछ तस्वीरें साझा करते हुए दावा किया कि वो राष्ट्रपति भवन में ‘पठान’ की स्पेशल स्क्रीनिंग में गए थे। उन्होंने शाहरुख़ खान और उनकी मैनेजर पूजा डडलानी को टैग भी किया।

‘ABP न्यूज़’ ने अपने शीर्षक में लिखा, ‘राष्ट्रपति भवन के कल्चरल सेंटर में रखी गई शाहरुख खान की ‘पठान’ का स्क्रीनिंग, सामने आईं ये तस्वीरें’। ‘DNA india’ ने भी अंग्रेजी शीर्षक में लिखा, “शाहरुख़ खान की ‘पठान’ की राष्ट्रपति भवन के कल्चरल सेंटर में स्पेशल स्क्रीनिंग हुई, पूर्व प्रेस सेक्रेटरी ने शेयर की तस्वीरें”। ‘Free Press Journal’ ने भी ऐसा ही दावा किया। ‘अमर उजाला’ ने तो इसे ‘पठान’ का जलवा भी करार दिया।

मीडिया ने चलाया – राष्ट्रपति भवन में ‘पठान’ फिल्म की स्पेशल स्क्रीनिंग

बंगाली और मराठी भाषा में भी मीडिया संस्थानों ने इसे शेयर किया। इस खबर को लेकर सोशल मीडिया पर दक्षिणपंथियों में भी दो फाड़ देखने को मिला और नाराज़ भाजपा समर्थकों ने पूछा कि क्या इस तरह की फिल्म जिसमें पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी ISI का महिमामंडन किया गया है और RAW अधिकारी को गद्दार दिखाया गया है, उसकी राष्ट्रपति भवन में स्पेशल स्क्रीनिंग कैसे हुई? लोगों ने कहा कि एक तरफ इसके बॉयकॉट की माँग की जा रही थी, एक तरफ राष्ट्रपति भवन में इसे दिखाया जा रहा है।

एसएम खान के ट्वीट के आधार पर कई मीडिया संस्थानों ने ये खबर चलाई। सोशल मीडिया पर कई लोगों ने इसकी काट के रूप में दावा किया कि राष्ट्रपति भवन का कल्चरल सेंटर बंद हो गया है। कई शाहरुख़ खान के फैंस ने तो इसे लेकर अभिनेता का महिमामंडन किया और अपना एजेंडा आगे बढ़ाया। कइयों ने भाजपा समर्थकों पर तंज कसा। फिर हमने इसकी सच्चाई की तहकीकात शुरू की, क्योंकि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की ऐसी किसी स्क्रीनिंग में जाने की कोई खबर सामने नहीं आई थी।

हमने इस सम्बन्ध में अधिक जानकारी के लिए भाजपा नेता सुधांशु मित्तल से बातचीत की, जिसके बाद ये मामला कुछ और ही निकला। उन्होंने ऑपइंडिया को बताया कि राष्ट्रपति भवन के मौजूदा एवं सेवानिवृत्त कर्मचारियों का एक क्लब है, जहाँ हर सप्ताह शनिवार को एक फिल्म की स्क्रीनिंग होती रही हैं। वहीं पर ‘पठान’ फिल्म दिखाई गई, जिसे राष्ट्रपति भवन में हुई ‘स्पेशल स्क्रीनिंग’ बता कर सोशल मीडिया और मीडिया में दुष्प्रचारित किया जा रहा है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति भवन में ‘पठान’ की कोई स्पेशल स्क्रीनिंग नहीं हुई है और अगर ये स्पेशल स्क्रीनिंग होती तो उसमें राष्ट्रपति ज़रूर मौजूद रहतीं। ऑपइंडिया ने फिर राष्ट्रपति सचिवालय के एक वरिष्ठ अधिकारी से भी बात की, जिन्होंने इस बात की पुष्टि की। उन्होंने कहा:

“फिल्मों की इस तरह की नियमित स्क्रीनिंग को ‘विशेष स्क्रीनिंग/स्पेशल स्क्रीनिंग’ या राष्ट्रपति भवन द्वारा किसी प्रकार का आधिकारिक कार्यक्रम कहना पूरी तरह से गलत होगा। इस तरह की स्क्रीनिंग एक नियमित मामला है। किसी फिल्म की विशेष स्क्रीनिंग एक तकनीकी शब्द है, जहाँ माननीय राष्ट्रपति को आमंत्रित किया जाता है, और राष्ट्रपति ऐसी स्क्रीनिंग में भाग भी लेते हैं। राष्ट्रपति पठान की स्क्रीनिंग में शामिल ही नहीं हुए। वास्तव में, अधिकांश वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल नहीं हुए थे।”

बता दें कि इस स्क्रीनिंग में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू नहीं थीं। क्या क्लब में किसी फिल्म की स्क्रीनिंग के लिए राष्ट्रपति के सचिव या राष्ट्रपति भवन के प्रशासन की मंजूरी अनिवार्य है? इसका जवाब सुधांशु मित्तल ने ‘ना’ में दिया। उन्होंने कहा कि क्लब में ही ये निर्णय ले लिया जाता है कि कौन सी फिल्म दिखाई जानी है।

इस दौरान उन्होंने एक बड़ी जानकारी देते हुए बताया कि पिछली बार राष्ट्रपति भवन में अगर किसी फिल्म की स्क्रीनिंग हुई थी तो वो ‘द कश्मीर फाइल्स’ है। ‘द कश्मीर फाइल्स’ घाटी में नब्बे के दशक में इस्लामवादियों द्वारा कश्मीरी पंडितों के नरसंहार और उनके पलायन की कहानी कहती है। ‘वर्ल्ड इंटेलेक्चुअल फाउंडेशन’ के संस्थापक सुधांशु मित्तल ने कहा कि एसएम खान झूठ बोल रहे हैं। ये क्लब भले ही राष्ट्रपति भवन के परिसर में हो, लेकिन ये कोई ‘स्पेशल स्क्रीनिंग’ नहीं है।

साधु के वेश में माँग रहे थे भीख, निकले मुस्लिम: बिहार में 6 युवकों की धुनाई के बाद ग्रामीणों ने पुलिस को सौंपा, दावा – तलाशी में चाकू-छुरे भी मिले

बिहार के नवादा जिले में साधु का वेश धारण किए 6 मुस्लिमों को पुलिस ने गिरफ्तार किया। ये सभी भीख माँग रहे थे। ग्रामीणों को इन पर शक हुआ कि ये हिंदू नहीं हैं। इसके बाद उनसे पूछताछ की गई। पूछताछ में सामने आया कि सभी मुस्लिम हैं। इसके बाद ग्रामीणों ने पिटाई करने के बाद पुलिस को सौंप दिया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मामला नवादा जिले के अकबरपुर थाना क्षेत्र के चातर गाँव का है। यहाँ मुस्लिम युवक साधु की वेशभूषा में घूमकर भीख माँग रहा था। इस दौरान ग्रामीणों ने पकड़कर पूछताछ की। पूछताछ में उसके मुँह से इस्लामी शब्द निकल गया। इसके बाद उससे अन्य लोगों के बारे में पूछताछ की गई। फिर एक के बाद एक 6 लोग पकड़े गए।

इससे जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इसमें, पकड़ा गया व्यक्ति खुद को उत्तर प्रदेश का मुस्लिम बता रहा है। साथ ही, अपने साथ 15-20 लोगों के होने का भी दावा कर रहा है। पकड़े गए आरोपितों के नाम कलीम अहमद, राशिद, नवाब अली, अमजद खान और सुभान अली हैे।

इन आरोपितों में से एक व्यक्ति को ग्रामीणों ने किसी अन्य स्थान से पकड़ा है। पकड़ने के बाद ग्रामीणों ने उसके साथ जमकर मारपीट की। पिटाई का वीडियो भी वायरल हो रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि इन आरोपितों के पास से चाकू-छुरे भी मिले हैं। ये लोग वेश बदलकर चोरी, लूट और बच्चे चुराने की घटना को भी अंजाम देते है।

इस मामले में एसपी अम्बरीष राहुल ने कहा है कि चातर हॉल्ट पर 6 लोग गेरुआ व अन्य कपड़े पहनकर उतरे थे। ये सभी मुस्लिम हैं। स्थानीय ग्रामीणों ने साधु का वेश धारण करने के आरोप में उन्हें बंधक बना लिया। सूचना मिलने पर अकबरपुर थाना की पुलिस घटना स्थल पर पहुँची।

उन्होंने यह भी कहा है कि पकड़े गए सभी आरोपितों को थाने लाकर पूछताछ की जा रही है। प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया है कि ये सभी उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के रहने वाले हैं। पारंपरिक रूप से इसी वेशभूषा में भीख माँग कर अपना जीवन यापन करते हैं। चातर हॉल्ट पर ये भीख माँगने के लिए उतरे थे। स्थानीय लोगो ने इन्हें पकड़ लिया। फिलहाल सभी से पूछताछ की जा रही है।

बता दें कि मुस्लिमों के साधु के वेश में घूमने की यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले दिसंबर 2022 में मध्य प्रदेश के इंदौर में मोहम्मद राशिद ने साधु का चोला धारण कर महिला के साथ अश्लील हरकत की थी। महिला ने आरोप लगाया था कि ज्योतिषी के भेष में राशिद ने उसे बुरी नीयत से छुआ। महिला के शोर मचाने के बाद जब लोगों ने उसे पकड़ा तो उसकी सच्चाई सामने आई। वह कोई ज्योतिषी नहीं बल्कि मोहम्मद राशिद नाम का मनचला निकला।

इसके अलावा, अक्टूबर 2022 में छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के गुरूर में भगवा चोला पहन कर घूम रहे दो मुस्लिमों को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। मुसाफिर जोगी और याद अली नाम के दोनों ‘योगियों’ की गतिविधियों को संदिग्ध पाने पर लोगों ने उनसे पूछताछ की। इसके बाद पुलिस ने उनसे गायत्री मंत्र और महामृत्युंजय मंत्र सुनाने को कहा तो वे हड़बड़ा गए। जब पुलिस ने उनसे सख्ती से पूछताछ की तो दोनों ने माना कि वे मुस्लिम हैं। उसमें एक ने अपनी पहचान झगरू पिता मुसाफिर जोगी और दूसरे ने याद अली उर्फ माले सज्जन बताई।

आतंकी मुर्तजा अब्बासी को फाँसी की सजा: ‘अल्लाह-हू-अकबर’ चिल्लाते हुए गोरखनाथ मंदिर में किया था हमला, विक्षिप्त बताकर बचाने के हुए थे प्रयास

गोरखपुर के गोरखनाथ मंदिर पर हमला करने वाले आतंकी अहमद मुर्तजा अब्बासी को फाँसी की सजा सुनाई है। एटीएस-एनआईए कोर्ट ने सोमवार (30 जनवरी 2022) को उसे सजा सुनाई। ‘अल्लाह-हू-अकबर’ चिल्लाते हुए उसने 4 अप्रैल 2022 को मंदिर में घुसने की कोशिश की थी। सुरक्षा में तैनात PAC जवानों पर धारदार हथियार से हमला किया था। हमले के बाद विक्षिप्त बताकर मुर्तजा को बचाने के प्रयास भी हुए थे, जिसे डॉक्टरों ने खारिज कर दिया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मुर्तजा अब्बासी केस की सुनवाई गोरखपुर के NIA/ATS कोर्ट में हुई। मुर्तजा पर देश के खिलाफ जंग छेड़ने की धारा (UAPA) और पुलिस वालों पर जानलेवा हमले की धारा 307 IPC के तहत केस दर्ज हुआ था। न्यायाधीश विवेकानंद ने ATS द्वारा पेश किए गए दावों को सजा के लिए पर्याप्त बताया। बताया जा रहा है कि कोर्ट ने अहमद मुर्तजा को जो वकील उपलब्ध करवाया था आरोपित ने उनके साथ भी सहयोग नहीं किया। सुनवाई के दौरान मुर्तजा बार-बार मानसिक बीमारी की दुहाई भी देता रहा।

लेकिन मुर्तजा अपनी मानसिक बीमारी को साबित करने का कोई प्रमाण कोर्ट में पेश नहीं कर पाया। ATS ने कोर्ट में मुर्तजा के हमले को लोन वुल्फ अटैक बताया था। ऐसे हमलों में कोई व्यक्ति अपने टारगेट पर अकेले ही घात लगा कर हमला करता है। बताया जा रहा है कि ATS की जाँच में यह बात भी निकल कर आई कि मुर्तजा भारत को इस्लामिक मुल्क बनाने के साथ अन्य धर्म के लोगों को अधिक से अधिक नुकसान पहुँचाने की फ़िराक में था।

क्या था पूरा मामला

मुर्तजा ने 4 अप्रैल 2022 को गोरखपुर के गोरखनाथ मंदिर में अकेले ही धारदार हथियार से हमला किया था। इस हमले को रोकने का प्रयास कर रहे PAC के 2 जवानों को गंभीर चोटें आईं थीं। मुर्तजा ने पुलिसकर्मियों के हथियार भी छीनने की कोशिश की थी। हालाँकि उसे मौके पर ही पकड़ लिया गया था।

पुलिस ने मुर्तजा की करतूत को आतंकी हमला बताया था और मामले की जाँच आतंकवाद निरोधक दस्ते (ATS) को सौंप दी गई थी। पुलिस ने अपनी जाँच में मुर्तजा को ISIS की विचारधारा से प्रेरित पाया था जो ज़ाकिर नाइक के वीडियो देखा करता था। इस बीच मानसिक बीमारी का बहाना बता कर उसके परिजनों ने उसकी हरकत पर पर्दा डालने की बहुत कोशिश की थी। अभियोजन पक्ष ने इस मामले में दलील देते हुए मुर्तजा अब्बासी के मनोरोगी होने के दावों को नकारते हुए उसे उच्च शिक्षित बताया और उसकी हरकत को जानबूझकर किया गया आतंकी हमला बताया।

भीख में गेहूँ-तेल माँगते हैं, पीने का पानी तक नहीं है… जब दिलीप कुमार ने नेहरू के सामने ही उनकी बेटी की कर दी थी बोलती बंद, वीडियो से समझिए क्या थे देश के हालात

बॉलीवुड के ‘ट्रेजडी किंग’ के नाम से मशहूर दिवंगत अभिनेता दिलीप कुमार (Dilip Kumar) का सोशल मीडिया पर एक वीडियो खूब वायरल हो रहा है। इस वीडियो में, दिलीप कुमार भारत के पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और उनकी बेटी इंदिरा गाँधी के साथ हुई एक मुलाकात को याद करते हुए लोगों के समक्ष उस दौरान हुई बातों का जिक्र करते हुए नजर आ रहे हैं। इसमें वह बताते हैं कि किस तरह इंदिरा गाँधी (Indira Gandhi) ने उनके सामने बॉलीवुड फिल्मों की तुलना अन्य देशों की फिल्मों से की और भारतीय सिनेमा को कमतर आँका।

भारतीय फिल्म इंडस्ट्री के सबसे बड़े स्टार में से एक ने उस वाकया को याद करते हुए कहा था, “एक बार मैं जवाहरलाल नेहरू के साथ नाश्ता कर रहा था। उस समय हमारी चर्चा में इंदिरा गाँधी ने हस्तक्षेप किया और मुझे पूछा कि आप लोग कैसी फिल्में बनाते हैं? मैं पेरिस में थी, मास्को गई, मैंने लंदन के सिम्फोनिक आर्केस्ट्रा सुने है, नाटक देखे, वहाँ की फिल्में देखीं। वो कितनी खूबसूरत और उम्दा हैं, ये आपकी हिंदुस्तानी पिक्चरों को क्या होता है? ये हिंदुस्तानी फिल्में इतनी पीछे क्यों हैं?”

इस पर अभिनेता ने कहा था कि हमारे प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के इतने बड़ी शख्सियत होने के बावजूद उनकी बेटी अपनी हद से आगे बढ़ रही थी। कहती है कि तुम्हारी हिंदुस्तानी पिक्चरों में हिंदुस्तानियत ही नहीं है। ये किस किस्म की इंडस्ट्री है। पूछ डाला था कि भारतीय सिनेमा इतना पीछे क्यों है? दिलीप कुमार ने कहा कि उन्होंने करीब 10-15 मिनट तक उनकी बातों को सुना। इसके बाद उन्होंने इंदिरा गाँधी की आलोचनाओं का सटीक जवाब देना जरूरी समझा।

‘नया दौर’ फिल्म के अभिनेता ने इंदिरा से कहा था, “10-15 मिनट तक आपने बहुत कुछ कहा, जो वाकई सच था। उससे इनकार करना एक हिमाकत होगी। बेवकूफी होगी कि अगर हम कहें कि हमारा इंडियन सिनेमा उम्दा है, बहुत अच्छा है, बड़ी तरक्की कर रहा है। मैं आपसे यह कहना चाहता हूँ कि आप कह रही हैं कि हमारी फिल्मों में हिंदुस्तानियत नहीं है, लेकिन आप जो 12 मिनट से गुफ्तगू कर रही हैं उसमें एक लफ्ज भी हिंदुस्तानी जबान का नहीं है। आप अंग्रेजी में बोल रही हैं। आज सड़कों को सुधारने की जरूरत है। आज हम अपनी सड़कें, सिंचाई, शिक्षा, अस्पताल आदि का विकास कर रहे हैं। अन्य देशों से अपने अच्छे संबंध बनाने की कोशिश कर रहे हैं।”

‘ट्रेजेडी किंग’ कहे जाने वाले दिलीप कुमार ने उनसे (इंदिरा) आगे कहा, “हम हर साल भीख माँगने के लिए दामन फैलाकर निकल जाते हैं, कभी गल्ले के लिए, कभी गेहूँ के लिए, कभी चावल के लिए, कभी तेल के लिए कभी सूखा पड़ता है। अभी तक हमारे लोगों के पास पीने के लिए साफ पानी नहीं है। हमारे पास अच्छी शिक्षा नहीं है। हाँ, हमारी फिल्में खराब हैं। लेकिन केवल हमारी फिल्म इंडस्ट्री ही खराब नहीं है, बल्कि हमारे पास खराब शिक्षा भी है। हमारी सड़कें भी बदतर हैं। मैं आपको बता दूँ, आपके शासन में भी बहुत सारी चीजें भद्दी और कमजोर हैं।”

दिलीप कुमार ने आगे कहा कि पहले उन्होंने सोचा कि जवाहरलाल नेहरू उनकी इन बातों से नाराज होंगे, लेकिन कुछ पल की चुप्पी के बाद वह (नेहरू) कहते हैं कि अगर वो उनकी (अभिनेता) जगह होते तो इतने विनम्र नहीं होते।

दिवंगत अभिनेता का यह भाषण बताता है कि भारत के स्वतंत्रता होने बाद के पहले कुछ दशकों में कॉन्ग्रेस शासन के दौरान बनी फिल्मों में गरीबी को क्यों उजागर किया गया था। जैसा कि दिलीप कुमार ने बताया, इसका मुख्य कारण यह है कि उन दिनों भारत में जीवन के हर क्षेत्र में व्याप्त गरीबी थी। यह आज नए भारत के बिल्कुल विपरीत थी, जहाँ बुनियादी ढाँचे और उद्योगों पर सरकार विशेष ध्यान दे रही है। जन धन योजना, उज्ज्वला योजना, स्वच्छ भारत मिशन, सभी के लिए शौचालय, और जल जीवन योजना जैसी योजनाएँ हर भारतीय की बुनियादी आवश्कताओं पूरा कर रही हैं, जिससे वे अब तक वंचित थे। यही नहीं आज की फिल्में भी उस दौर में बनी फिल्मों से कहीं अधिक प्रभावशाली हैं।

अब्दुल की गाड़ी से टक्कर में मर गया गो तस्कर वारिस, गो रक्षकों की पिटाई से मौत कहकर कर रहे प्रचारित: पुलिस ने भी बताया एक्सीडेंट

हरियाणा के मेवात में सड़क हादसे में एक गो तस्कर की मौत हो गई। उसके दो साथी घायल हो गए। लेकिन कुछ लोग इस मामले को गो रक्षकों की पिटाई से मौत के तौर पर प्रचारित कर रहे हैं। पुलिस ने भी इसका खंडन किया है और बताया है कि मौत एक्सीडेंट में हुई है।

मरने वाले गो तस्कर की पहचान वारिस के तौर पर हुई है। उसके जख्मी साथी नफीस और शौकीन हैं। शनिवार (28 जनवरी 2023) को एक कार में गोवंश को ठूँसकर ये ले जा रहे थे। पुलिस से डरकर भागते वक्त इनकी कार अब्दुल करीम के टाटा एस टेंपो से भिड़ गई। दुर्घटना में कार सवार गो तस्कर गंभीर रूप से घायल हो गए और बाद में वारिस की मौत हो गई।

परिजनों ने लगाया हत्या का आरोप

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना भिवाड़ी-तावडू मार्ग पर मौजूद खोरी कलां गाँव की है। लेकिन वारिस की मौत के बाद उसके परिजनों ने हादसे को हत्या बताना शुरू कर दिया। इस दौरान मृतक के परिजनों ने मोनू मानेसर नाम के एक गोरक्षक पर वारिस की पिटाई का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की माँग की।

इसके बाद सोशल मीडिया में इस घटना का हत्या के तौर पर प्रचार किया जाने लगा। मेवात में वारिस के परिजनों ने प्रदर्शन भी किया। प्रदर्शन में शामिल लोग एक वीडियो की चर्चा कर रहे थे, जिसमें वारिस से कुछ लोग पूछताछ कर रहे थे। हालाँकि वह वीडियो कब का है, किसने बनाया और कहाँ का है इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हो पाई है।

सोशल मीडिया पर इस मामले को ज़ाकिर अली त्यागी, मिल्लत टाइम्स, मोहम्मद सैफी, मोहम्मद तनवीर जैसे कई अन्य लोग तूल देते नजर आए।

जिसकी गाड़ी से हुई टक्कर उसने भी मारपीट को किया खारिज

जिस टाटा ऐस से वारिस की कार भिड़ी थी, उसका मालिक अब्दुल करीम है। करीम ने पुलिस को बताया है कि घटना के दिन वह अपने बेटे के साथ वाहन से मंडी में सब्ज़ी लेने जा रहा था। तभी सामने से आ रही सेंट्रो कार से गाड़ी की भिंड़त हो गई। करीम ने घटना की वजह कार चालकों की लापरवाही बताया है। अब्दुल करीम द्वारा पुलिस में दी गई शिकायत में बताया गया है कि सेंट्रो में गाय बेरहमी से ठूँसी हुई थी। शिकायत के मुताबिक घटना के कुछ देर बाद पुलिस और गोरक्षक मौके पर पहुँचे थे। बाद में तीनों गोतस्करों को इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया।

जिस वाहन से मृतक वारिस की सेंट्रो टकराई थी, उसमें सवार रहीस ने ऑपइंडिया से बात की। रहीस ने हमें बताया कि उनके आगे किसी भी प्रकार की कोई मारपीट नहीं हुई थी और पुलिस ने लगभग 15 मिनट बाद पहुँच कर तीनों कार सवारों को अपनी कस्टडी में लिया था।

पुलिस ने अब्दुल करीम की शिकायत पर वारिस, शौक़ीन और नफीस पर IPC की धारा 279, 337, 304 A, 427, 429 के साथ पशु क्रूरता अधिनियम की धारा 11 और गोवंश संरक्ष्ण व संवर्धन अधिनियम की धारा 13 (2) के तहत FIR दर्ज कर ली। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है। फ़िलहाल शौक़ीन और नफीस का पुलिस कस्टडी में इलाज चल रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक नूंह जिले के पुलिस अधीक्षक IPS वरुण सिंगला ने वारिस की मौत की वजह एक्सीडेंट में घायल होना बताया है। SP नूंह के अनुसार दुर्घटना में कार की हैंडल वारिस के पेट और छाती में धँस गई थी। इससे उसे गंभीर आंतरिक चोटें आईं थीं। सिंगला के अनुसार इलाज में देरी की वजह से उसकी जान चली गई।

गोरक्षा के कारण साजिश

इस मामले में मृतक के परिजनों के आरोपों का सामना कर रहे गोरक्षक मोनू ने ऑपइंडिया से बात की। मोनू ने हमें बताया कि उन पर लगाए जा रहे आरोप निराधार और झूठे हैं। मोनू के मुताबिक वो इलाके में तस्करों से अक्सर गायों की रक्षा करते रहते हैं और यही वजह है कि वे निशाने पर हैं।

मस्जिद में जमा थे 400 पाकिस्तानी, आत्मघाती हमलावर ने खुद को उड़ाया: पेशावर की घटना, तालिबान ने ली जिम्मेदारी

पाकिस्तान के पेशावर में एक मस्जिद में सोमवार (30 जनवरी 2023) को आत्मघाती धमाका हुआ। खबर लिखे जाने तक 28 लोगों की मौत की जानकारी सामने आई थी। करीब 150 लोग घायल बताए जा रहे हैं। घायलों में कई की हालत गंभीर है। मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका है। तहरीक-ए-तालिबान (TTP) ने हमले की जिम्मेदारी ली है।

जिस मस्जिद में धमाका हुआ वह पुलिस लाइन के अंदर है। डॉन की रिपोर्ट के अनुसार धमाके वक्त में मस्जिद में तीन से चार सौ लोग मौजूद थे। सीबीएस न्यूज ने बताया है कि इनमें ज्यादातर पुलिसकर्मी थे। जियो टीवी की रिपोर्ट में सुरक्षा अधिकारियों के हवाले से बताया गया है, “आत्मघाती हमलावर नमाज़ के दौरान अग्रिम पंक्ति में मौजूद था और उसने खुद को उड़ा लिया। घायलों को पेशावर के लेडी रीडिंग अस्पताल में भर्ती कराया गया है।”

अस्पताल के डॉक्टरों का कहना है कि 30 से अधिक घायलों की हालत गंभीर बनी हुई है। अस्पताल ने नागरिकों से पीड़ितों के लिए रक्तदान करने की अपील की है। धमाका इतना जोरदार था कि मस्जिद की एक तरफ की दीवार ढह गई। सोशल मीडिया पर कई यूजर्स घटना के बाद मस्जिद का वीडियो शेयर कर रहे हैं। वीडियो में साफ़ देखा जा सकता है कि आत्मघाती विस्फोट से मस्जिद की एक तरफ की दीवार ढह चुकी है और मस्जिद में अफरातफरी मची हुई है। लोग इधर-उधर भाग रहे हैं।

एक प्रत्यक्षदर्शी ने मीडिया को बताया कि जब धमाका हुआ तो वह मस्जिद जा रहा था। उसने कहा, “यह एक शक्तिशाली विस्फोट था। विस्फोट के बाद हर जगह सिर्फ धुआँ था। यह एक आत्मघाती विस्फोट था क्योंकि हमलावर मस्जिद के भीतर था। विस्फोट के समय नमाज़ शुरू ही हुई थी। घायलों में ज्यादातर पुलिसकर्मी हैं।”

वहीं प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने एक बयान जारी कर कहा है कि इस घटना के जिम्मेदार लोगों का ‘इस्लाम से कोई लेना-देना’ नहीं है। उन्होंने कहा, “आतंकवादी उन लोगों को निशाना बनाकर डर पैदा करना चाहते हैं जो पाकिस्तान की रक्षा करने का कर्तव्य निभाते हैं। पूरा देश आतंकवाद के खतरे के खिलाफ एकजुट खड़ा है।” प्रधानमंत्री ने मृतकों को श्रद्धांजलि अर्पित की और वादा किया कि उनकी शहादत व्यर्थ नहीं जाएगी।

वहीं पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान ने ट्वीट का कहा, “पेशावर की पुलिस लाइन मस्जिद में नमाज के दौरान हुए आतंकी आत्मघाती हमले की कड़ी निंदा करता हूँ। मेरी प्रार्थना और संवेदना पीड़ित परिवारों के साथ हैं। यह जरूरी है कि हम अपनी खुफिया जानकारी जुटाने में सुधार करें और आतंकवाद के बढ़ते खतरे से निपटने के लिए अपने पुलिस बलों को उचित रूप से तैयार करें।”

पहले सुनाई MP की 3 लड़कियाँ, अब वे हो गए कन्याकुमारी के कुछ बच्चे: कश्मीर की बर्फबारी में राहुल गाँधी का मेमोरी लॉस

अपने अजीबोगरीब बयानों से सुर्खियाँ बटोरने वाले कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी (Rahul Gandhi) की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ सोमवार (30 जनवरी, 2023) को श्रीनगर में खत्म हो गई। इस दौरान वह जैकेट पहने हुए नजर आए। उन्होंने कहा, “जब मैं कन्याकुमारी से आगे बढ़ रहा था, तब मुझे ठंड लग रही थी। मैंने कुछ बच्चे देखे। वे गरीब थे, उन्हें ठंड लग रही थी, वे मजदूरी कर रहे थे और काँप रहे थे। मैंने सोचा ठंड में ये बच्चे स्वेटर-जैकेट नहीं पहन पा रहे हैं तो मुझे भी नहीं पहनना चाहिए।”

इसके बाद उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह पर हमला बोला। उन्होंने ​कहा कि पीएम मोदी, अमित शाह और आरएसएस के लोगों ने हिंसा नहीं देखी है, वे डरते हैं। बकौल राहुल गाँधी, भाजपा का कोई नेता यहाँ पैदल ऐसे नहीं चल सकता, इसलिए नहीं कि जम्मू-कश्मीर के लोग उन्हें चलने नहीं देंगे, बल्कि इसलिए क्योंकि वो डरते हैं।

वायनाड से कॉन्ग्रेस सांसद के श्रीनगर में दिए गए बयान के बाद सोशल मीडिया पर उनका पुराना बयान वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने ठंड में टी-शर्ट पहनने और स्वेटर नहीं पहनने का कारण केरल की तीन लड़कियों को बताया था। यह वीडियो 9 जनवरी 2023 का है।

इसमें वह कहते हैं, “सब लोग मेरी टी-शर्ट के पीछे पड़ गए। इनको अभी तक ये बात समझ नहीं आ रही है। कह रहे हैं कि टी-शर्ट क्यों पहना है? ये सफेद टी-शर्ट क्यों पहना है? इसको सर्दी नहीं लगती। सबसे पहले में आपको ये बता दूँ कि मैं टी-शर्ट क्यों पहनता हूँ। यात्रा शुरू हुई। केरल में भयंकर गर्मी, ऐसा लग रहा था कि टी-शर्ट उतार दो। उस वक्त पसीने आ रहे थे। ह्यूमिडिटी अधिक थी। केरल में काफी गर्मी लगी। फिर हम मध्य प्रदेश की ओर बढ़े, वहाँ ठंड लगने लगी।”

राहुल गाँधी ने अपनी बात को जारी रखते हुए आगे कहा, “सुबह-सुबह 6 बजे, जब हम यात्रा के लिए निकलते हैं, तीन गरीब बच्चे मेरे पास आ गए। फटी हुई टी-शर्ट थी और जब मैंने उन्हें पकड़ा, हाथ लगाया फोटो के लिए, क्योंकि वो फोटो लेना चाहते थे। वो लड़कियाँ थीं। एक इस साइड और एक उस साइड। जैसे मैंने उनको पकड़ा वो ठंड से काँप रही थीं। मैंने उन्हें देखा तो उन्होंने पतली सी टी-शर्ट पहनी हुई थी। उस दिन मैंने निर्णय ले लिया कि जब तक मैं नहीं कापूँगा, तब तक मैं टी-शर्ट नहीं पहनूँगा। जब काँपना शुरू हो जाएगा, जब जबरदस्त कठिनाई होगी, तब जाकर मैं स्वेटर पहनने का सोचूँगा, मगर उससे पहले नहीं करूँगा। मैं उन तीन लड़कियों को मैसेज देना चाहता हूँ कि आपको ठंड लग रही है, तो फिर राहुल गाँधी को भी ठंड लग रही है। जिस दिन आपने स्वेटर पहन लिया, उस दिन राहुल गाँधी ने भी स्वेटर पहन लिया।”

गौरतलब है कि कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी 7 सितंबर, 2022 से ही भारत जोड़ो यात्रा पर हैं। इस दौरान राहुल ज्यादातर समय टी-शर्ट में ही दिखे हैं। यहाँ तक कि ठंड के दौरान भी वह टी-शर्ट पहने हुए दिखाई दिए। पहले कॉन्ग्रेस वालों ने इसके लिए उन्हें ‘महामानव’ प्रदर्शित किया, उसके बाद जब पत्रकारों ने सवाल पूछा तो वायनाड के सांसद ने उलटे पूछ दिया कि आपने स्वेटर क्यों पहना है? जब पत्रकार ने ठंड को कारण बताया तो राहुल गाँधी बोले, “नहीं, इसका कारण यह नहीं है कि सर्दी है। इसका कारण यह है कि आप सर्दी से डरते हो। मैं सर्दी से डरता नहीं हूँ।”

गोवा के होटल में शूट किया नहाने का वीडियो, मंगेतर को भेज दिया… शादी टूटने के बाद सुशांत सिंह राजपूत की दोस्त ने की थी आत्महत्या, एक्स बॉयफ्रेंड की बीवी भी आरोपित

टीवी एक्ट्रेस वैशाली ठक्कर (Vaishali Thakkar) की आत्महत्या मामले में नया खुलासा हुआ है। मामले में पहले से ही आरोपित राहुल नवलानी की वजह से ही वैशाली यह कदम उठाने को मजबूर हुई थी। पुलिस की चार्जशीट के मुताबिक, राहुल ने गोवा में छुट्टियों के दौरान वैशाली की आपत्तिजनक वीडियो शूट कर ली थी और इस वीडियो को उसने वैशाली के मंगेतर को भेज दिया था। इस वजह से उसकी शादी टूट गई थी। शादी टूटने की वजह से वैशाली काफी डिप्रेशन में थी और उसने आत्महत्या कर ली।

एक रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने अपनी चार्जशीट में बताया कि वैशाली अपने दोस्त राहुल के साथ अगस्त 2021 में गोवा में छुट्टियाँ मनाने गई थीं। दोनों 23 अगस्त से 25 अगस्त, 2023 तक गोवा के कासा बुटीक होटल के रूम नंबर 9 में रुके थे। दोनों इस दौरान काफी नजदीक आ गए और एक-दूसरे से शादी के वादे भी किए। चार्जशीट के मुताबिक, इस बीच राहुल ने चुपके से वैशाली का नहाने का वीडियो शूट कर लिया और आपत्तिजनक फोटो खींच लिया।

रिपोर्ट के मुताबिक, राहुल ने वैशाली से शादी नहीं की और जब वह वर्ष 2022 में किसी दूसरे लड़के से शादी करने की तैयारी करने लगी तो राहुल उसे परेशान करने लगा। इतना ही नहीं, राहुल पर आरोप है कि उसने वैशाली के अमेरिका में रहने वाले मंगेतर मितेश को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम से उसकी आपत्तिजनक वीडियो भेज दी। इसके बाद मितेश ने कथित तौर पर यह शादी तोड़ दी ।

वहीं पुलिस ने इस बाबत कैलिफोर्निया में रहने वाले मितेश से संपर्क किया। मितेश ने पुलिस को इंस्टाग्राम से भेजे गए वीडियो, बातचीत के स्क्रीनशॉट और तस्वीर को भेज दिया। आरोपित राहुल को जमानत मिल चुकी है और राहुल की पत्नी और मामले में सह-आरोपित दिशा पहले से ही जमानत पर है। वहीं राहुल के वकील का कहना है कि पुलिस बस काल्पनिक कहानी बना रही है। उनका कहना है कि 90 दिन बीत गए और अब तक फॉरेंसिक लैब से जब्त किए गए मोबाइल, लैपटॉप का डाटा भी रिकवर नहीं हुआ है। 

उल्लेखनीय है कि टीवी सीरियल की मशहूर एक्ट्रेस वैशाली ठक्कर ने रविवार (16 अक्टूबर, 2022) को मध्य प्रदेश के इंदौर स्थित अपने घर में आत्महत्या कर ली थी। पुलिस को वैशाली की डायरी में सुसाइड नोट भी मिला था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वैशाली ने सुसाइड नोट में राहुल नवलानी और उसकी पत्नी दिशा नवलानी पर मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का आरोप लगाया था। 

आपको बता दें कि वैशाली ठक्कर दिवंगत एक्टर सुशांत सिंह राजपूत (Sushant Singh Rajput) की अच्छी दोस्त थीं। जब सुशांत सिंह के आत्महत्या की बात सामने आई थी, तब वैशाली ने आवाज उठाई थी और इसे मर्डर बताया था। वैशाली ने कहा था कि सुशांत के असली हत्यारे रिया चक्रवर्ती के पीछे छुपे हुए हैं।

‘मन की बात’ सुन घर लौट रहे लोगों पर बंगाल में TMC गुंडों का हमला, बीजेपी MLA ने कहा- गाजी, अब्दुल… की अगुआई में रॉड-डंडों से अटैक

पश्चिम बंगाल (West Bengal) में तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) से जुड़े गुंडों ने कथित तौर पर रविवार (29 जनवरी 2023) को भाजपा कार्यकर्ताओं पर हमला किया। भाजपा कार्यकर्ताओं पर यह हमला तब किया गया, जब वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) के ‘मन की बात (Mann Ki Baat)’ कार्यक्रम के 97 वें एपिसोड को सुनने के बाद अपने घर लौट रहे थे।

घटना पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के कुलतली ब्लॉक के किसोरी मोहनपुर इलाके की है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भाजपा कार्यकर्ता रविवार (29 जनवरी 2023)  को परेश दास नाम के व्यक्ति के घर पर प्रधानमंत्री के मासिक रेडियो कार्यक्रम को सुनने इकट्ठा हुए थे। घर लौटते समय पंचमठ जंक्शन पर तृणमूल कॉन्ग्रेस से जुड़े गुंडों ने घेरकर उन पर हमला कर दिया

भाजपा विधायक (आसनसोल दक्षिण) अग्निमित्रा पॉल (Agnimitra Paul) के अनुसार, रेजाउल गाजी, अब्दुल ढाली और जुदैल मोल्ला के नेतृत्व में TMC के गुंडों ने भाजपा कार्यकर्ताओं पर लोहे की छड़ों और डंडों से हमला किया। पॉल द्वारा साझा किए गए एक वीडियो में दो भाजपा कार्यकर्ताओं को सड़क पर घायल अवस्था में देखा जा सकता है। उनमें से एक की पहचान बहादुर दास के रूप में हुई है। वहीं एक व्यक्ति को मदद माँगते और घायल को पानी पिलाने के लिए कहते हुए सुना जा सकता है।

एक अन्य व्यक्ति को वीडियो में यह कहते सुना जा सकता है कि पुलिस ने मौके पर आने के बाद TMC के गुंडों से पैसे लिए और आरोपितों को जाने दिया। इस बीच, तृणमूल कॉन्ग्रेस ने भाजपा पर जवाबी कार्रवाई के रूप में उनकी पार्टी के दो कार्यकर्ताओं की पिटाई करने का आरोप लगाया है। घटना के बारे में बोलते हुए भाजपा के जयनगर जिला सचिव विकास सरदार ने कहा, ”पुलिस ने तृणमूल कॉन्ग्रेस को अपना जमीर बेच दिया है। यहाँ कोई कानून का राज नहीं है।”

बिगड़ती कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए इलाके में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। बरुईपुर एसडीपीओ आतिश विश्वास ने कहा कि मामले की जाँच शुरू कर दी गई है। इस महीने की शुरुआत में, स्थानीय TMC नेता शिवम रॉय भाजपा के मंडल अध्यक्ष सागर बिस्वास को थप्पड़ मारते हुए कैमरे में कैद हुए थे। घटना के समय पश्चिम बंगाल के खाद्य मंत्री रथीन घोष (Rathin Ghosh) मौजूद थे।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, घोष ग्रामीणों की शिकायतों को सुन रहे थे, तभी भाजपा के सागर बिस्वास एक आम ग्रामीण के रूप में आए और मंत्री को अपनी शिकायत बताईं। रॉय ने फिर अज्ञात कारणों से बिस्वास को थप्पड़ मार दिया।

‘The Hindu’ के पत्रकार को हिंदू घृणा पर लताड़: जयशंकर को टारगेट करने में हिंदुओं को दिखाया नीचा, श्रीकृष्ण और हनुमान का किया अपमान

‘द हिंदू’ मीडिया ग्रुप की चेयरपर्सन मालिनी पार्थसारथी (Malini Parthasarathy) ने विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर पर तंज कसने के लिए भगवान श्री कृष्ण और हनुमान जी का मजाक उड़ाने वाले अपने पत्रकार एस आनंदन को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर पर फटकार लगाई है।

मालिनी पार्थसारथी के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

‘द हिंदू’ के पत्रकार एस. आनंदन ने रविवार (29 जनवरी 2023) को ट्वीट कर डॉ. जयशंकर के बयान का मजाक उड़ाया, जिसमें विदेश मंत्री ने कहा था कैसे उन्होंने हिंदू महाकाव्य महाभारत और रामायण से विदेश नीति के गुण सीखे। एस जयशंकर ने दुनिया का सबसे बड़ा डिप्लोमेट भगवान श्री कृष्ण और हनुमान जी (Hanumanji) को बताया था।सोशल मीडिया पर इसका वीडियो भी वायरल हुआ था।

इसमें उन्होंने कहा था, “दुनिया में सबसे बड़े डिप्लोमेट एक भगवान श्री कृष्ण थे और दूसरे हनुमान जी थे। मैं ​आपको बहुत सीरियस उत्तर दे रहा हूँ। अगर आप उनको कूटनीति के परिप्रेक्ष्य से देखें कि वो किस सिचुएशन में थे, उन्हें क्या मिशन दिया गया था, किस तरीके से उन्होंने इसे हैंडल किया था। हनुमान जी तो खुद की इंटेलिजेंस का परिचय देते हुए टारगेट से आगे बढ़ गए और सीता जी से मिले फिर लंका को भी जला दिया।”

एस जयशंकर ने यह भी कहा था, “हनुमान जी तो मल्टी-पर्पस डिप्लोमेट थे। इतना ही नहीं, मैं आपसे कहूँगा कि दुनिया के 10 स्ट्रैटिजिक कॉन्सेप्ट आज के जो हैं, मैं उसका महाभारत से एक-एक उदाहरण दे सकता हूँ।”

इस बयान के बाद ‘द हिंदू’ के पत्रकार एस. आनंदन ने डॉ जयशंकर का अपमान करने के लिए उनसे ट्विटर पर पूछा था कि ‘आईएफएस के किस बैच से ये हिंदू देवता रहे हैं सर? इसके बाद एस. आनंदन के ट्​वीट का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए पार्थसारथी ने सोमवार (30 जनवरी, 2023) को कहा कि इस अपमानजनक ट्वीट का ‘द हिंदू’ समर्थन नहीं करता है।

आप इस लिंक पर क्लिक करके हिंदू महाकाव्यों से ली गई प्रेरणा पर डॉ. जयशंकर द्वारा लिखी गई पुस्तक के बारे में और अधिक पढ़ सकते हैं।