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कॉलेजियम सिस्टम में केंद्र के प्रतिनिधि को भी शामिल करें: CJI को कानून मंत्री की चिट्ठी, कहा- इससे पारदर्शिता आएगी, जवाबदेही तय होगी

केंद्रीय कानून मंत्री किरण रिजिजू ने मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ को एक चिट्ठी लिखी है। इसमें सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम में केंद्र के प्रतिनिधियों को शामिल करने की सलाह दी है। कहा है कि इससे जजों की नियुक्ति की प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी। जनता की ओर जवाबदेही भी तय होगी।

केंद्रीय मंत्री के इस पत्र पर दिल्ली मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा, “ये बेहद खतरनाक है। न्यायपालिका में नियुक्ति में सरकार का कोई भी हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए।” उनके इस ट्वीट पर जवाब देते हुए किरण रिजिजू ने कहा,

आशा करता हूँ कि आप अदालत के निर्देश का सम्मान करेंगे! यह राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग अधिनियम (National Judicial Appointment Commission Act) को रद्द करते हुए सर्वोच्च न्यायालय की संविधान पीठ के निर्देश की फॉलो-अप कार्रवाई है। SC की संविधान पीठ ने कॉलेजियम प्रणाली के MoP (मेमोरेंडम ऑफ प्रोसीजर) को पुनर्गठित करने का निर्देश दिया था।

इससे पहले इस संबंध में उप राष्ट्रपति और लोकसभा स्पीकर भी अपनी राय दे चुके है। उनके अलावा सर्वोच्च न्यायालय की पूर्व जज रूमा पाल ने भी इस मुद्दे को उठाते हुए 2011 में कह दिया था कि कॉलेजियम प्रक्रिया ने ऐसी धारणा बनाई है- “आप मुझको बचाओ, मैं आपको बचाऊँ।”

कॉलेजियम सिसस्टम में सुधार का मुद्दा केंद्रीय कानून मंत्री किरण रिजिजू लगातार उठा रहे हैं। उन्होंने इस प्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि जजों की नियुक्ति में सरकार की बहुत सीमित भूमिका है जबकि जजों की नियुक्ति करना सरकार का अधिकार है। देश में 5 करोड़ से अधिक केस लंबित हैं। इसके पीछे मुख्य कारण जजों की नियुक्ति है।

2015 में NJAC असंवैधानिक करार

बता दें कि साल 2015 में नेशनल ज्यूडिशियल अपॉइंटमेंट कमीशन एक्ट (NJAC) लाया गया था। इसमें जजों की नियुक्ति को लेकर कई बदलावों की बात थी। इसके मुताबिक NJAC की अगुआई सीजेआई को करनी थी। इनके अलावा 2 सबसे वरिष्ठ जजों को रखा जाना था और साथ में कानून मंत्री और प्रतिष्ठित लोगों को इसमें शामिल करने का सिस्टम इस एक्ट में दिया गया था। 

ऐसे ही NJAC में प्रतिष्ठित लोगों का चयन प्रधानमंत्री, नेता विपक्ष और CJI के पैनल को करने की व्यवस्था थी। मगर अक्टूबर 2015 में सुप्रीम कोर्ट की 5 जजों ने इसे असंवैधानिक करार दे दिया। अब सीजेआई को लिखे गए पत्र को नए NJAC के तौर पर देखा जा रहा है।

मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम में 5 सदस्य होते हैं। मुख्य न्यायाधीश इसमें प्रमुख होते हैं। इनके अलावा 5 सबसे वरिष्ठ जज होते हैं। इस समय कॉलेजियम में जस्टिस डी.वाई. चंद्रचूड़, जस्टिस यूयू ललित, जस्टिस एसके कौल, जस्टिस एस अब्दुल नजीर और जस्टिस केएम जोसेफ शामिल हैं। 

‘हिंदी बोलता था, तिलक लगाता था, इसीलिए जारी कर दिया फतवा’: केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने कहा – ये मजहबी नहीं, राजनीतिक हथियार

केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने कहा है कि मजहबी कारणों से ‘फतवों’ का इस्तेमाल कभी नहीं किया जाता है। उन्होंने कहा कि ‘फतवों’ को राजनीतिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है।खान ने कहा कि कुरान में इस तरह की 200 आयतें हैं, जिसमें बताया गया है कि कोई भी इंसान यह तय नहीं कर सकता कि कौन सही है और कौन गलत।

आरिफ मोहम्मद खान ‘पाञ्चजन्य’ पत्रिका के 75 वर्ष पूरे होने पर 15 जनवरी, 2023 को आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहे थे। उनसे जब ‘मुस्लिम श्रेष्ठता’ और मौलाना वर्ग द्वारा इसे बढ़ावा देने के मामले पर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक रूप से देखा जाए तो पहला कुफ्र का फ़तवा किसी गैर-मुस्लिम के खिलाफ नहीं, बल्कि मुस्लिम के खिलाफ ही जारी किया गया था। सबसे पहला फ़तवा हजरत अली पर लगाया गया, जिनकी परवरिश पैगंबर साहब ने की थी। फतवे की वजह से उनका कत्ल कर दिया गया था।

उन्होंने आगे कहा, “फ़तवा कभी भी मजहबी कारणों से नहीं हो सकता है। कुरान में ऐसी 200 आयतें हैं, जिनमें कहा गया है कि दुनिया में तुम्हारे बीच मतभेद हो सकते हैं लेकिन जब मरने के बाद हमारे पास आओगे तो हम फैसला करेंगे कि कौन अच्छा है और कौन बुरा है। कुरान सही या गलत के बारे में फैसला करने का अधिकार पैगंबर को भी नहीं देता है।”

केरल के राज्यपाल ने कहा कि 1980 में भारत की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी के कहने पर उन्होंने कानपुर से चुनाव लड़ा था। बकौल खान, इंदिरा गाँधी ने उनसे कहा था कि उनकी हिंदी अच्छी है और 1952 से कॉन्ग्रेस ने उस सीट से चुनाव नहीं जीता है, इसलिए उन्हें चुनाव लड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि उस दौरान हिंदी के शब्द बोलने पर भी कुफ्र का फतवा जारी हो जाता था।

उन्होंने कहा, “मेरे खिलाफ यह बोलकर फतवा जारी किया गया था कि मैं हिंदी बोलता हूँ, तिलक लगाता हूँ, आरती करवाता हूँ। उन्हें तो मेरे नाम में भी समस्या नज़र आई थी। दारा शिकोह के खिलाफ भी कुफ्र का फ़तवा जारी किया गया था। फतवों का इस्तेमाल राजनीतिक हथियार के तौर पर किया जाता है।”

उल्लेखनीय है कि इससे पहले ‘पाञ्चजन्य‘ और ‘द ऑर्गेनाइजर’ को दिए साक्षात्कार में संघ प्रमुख मोहन भगवत ने कहा था कि मुस्लिमों को भारत में कोई खतरा नहीं है, लेकिन उन्हें श्रेष्ठता का भाव छोड़ना पड़ेगा। उन्होंने कहा था, “भारत में इस्लाम को कोई खतरा नहीं है। लेकिन, ‘हम बड़े’ हैं, हम पहले राजा थे, फिर से राजा बनेंगे’ – यह भाव छोड़ना पड़ेगा। ‘हम सही हैं, बाकी सब गलत हैं’ – इसे छोड़ना पड़ेगा। ‘हम अकेले रहते हैं और आगे भी अकेले रहेंगे’ – इस भाव को छोड़ना पड़ेगा।”

घर में घुसकर अफगानिस्तान की पूर्व महिला सांसद की हत्या, सत्ता पर तालिबान के कब्जे के बाद भी नहीं छोड़ा था देश

अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में पूर्व महिला सांसद मुर्सल नबीजादा और उनके बॉडीगार्ड की गोली मारकर हत्या कर दी गई। हमलावरों का अब तक पता नहीं चल पाया है। अफगानिस्तान में तालिबान का कब्जा होने के बाद मुर्सल नबीजादा घर छोड़कर नहीं गईं थीं। पुलिस मामले की जाँच कर रही है।

स्थानीय पुलिस के प्रमुख मोल्वी हमीदुल्लाह खालिद ने कहा है कि मुर्सल नबीजादा और उनके गार्ड की हत्या स्थानीय समयानुसार शनिवार (14 जनवरी, 2023) को सुबह 3 बजे हुई। इस हमले में, नबीजादा का भाई और एक अन्य गार्ड भी घायल हुआ है। वहीं, तीसरा सुरक्षाकर्मी रुपए और जेवरात लेकर मौके से फरार हो गया। खालिद ने यह भी कहा है कि नबीजादा अपने घर के फर्स्ट फ्लोर में मृत पाई गईं। इस फ्लोर को वह ऑफिस के रूप में उपयोग करतीं थीं। हालाँकि, जब खालिद से उनकी हत्या के संभावित कारणों को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने जवाब देने से इनकार कर दिया।

अफगानिस्तान की पूर्व सरकार में एक अधिकारी रहे अब्दुल्ला ने नबीजादा की मौत पर दुख जताते हुए उन्हें लोगों का प्रतिनिधि और सेवक बताया है। उन्होंने कहा है कि वह उम्मीद करते हैं, नबीजादा के हत्यारों को कड़ी सजा मिलेगी।

अफगानिस्तान की पूर्व सांसद मरियम सोलेमानखिल ने भी मुर्सल नबीजादा की मौत पर दुख जताया है। उन्होंने ट्वीट कर कहा, “वह एक सच्ची पथ-प्रदर्शक, एक मजबूत, मुखर महिला थीं। जो खतरे के बावजूद भी विश्वास के साथ खड़ी रहीं। अफगानिस्तान छोड़ने का मौका मिलने के बाद भी उन्होंने यहाँ रहने और अपने लोगों के लिए लड़ने का फैसला किया। हमने एक हीरा खो दिया है, लेकिन उसकी विरासत जीवित रहेगी। उनकी आत्मा को शांति मिले।”

यूरोपीय सांसद हन्ना न्यूमैन ने भी उनकी हत्या पर निराशा व्यक्त की। उन्होंने कहा है कि वह इस हत्या को लेकर दुखी और क्रोधित हैं और चाहते हैं कि यह बात पूरी दुनिया को पता चले। उन्होंने तालिबान सरकार को निशाने पर लेते हुए कहा है, “मुर्सल की हत्या रात के अंधेरे में की गई लेकिन तालिबान ने दिन के उजाले में ही लैंगिक रंगभेद की अपनी प्रणाली का निर्माण किया।”

गौरतलब है कि मुर्सल नबीजादा साल 2019 में काबुल से सांसद बनीं थीं। तालिबान द्वारा अफगानिस्तान में कब्जा करने से पहले तक वह अफगानिस्तान सरकार में संसदीय रक्षा आयोग की सदस्य थीं। उन्हें, अफगानिस्तान के लोगों के हित में खुलकर आवाज उठाने वालों के रूप में जाना जाता था।

बता दें कि अफगानिस्तान में कब्जा करने के बाद से तालिबान ने महिलाओं के काम करने, पढ़ाई करने समेत अनेक कामों में पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है। यहाँ तक कि महिलाओं को घर से बाहर निकलने में भी कई प्रकार की पाबंदी झेलने पड़ रही है।

हिजाब में नजर आईं राखी सावंत, आदिल के साथ बेडरूम का Video भी किया शेयर: यूजर बोले- लव जिहाद चार दिन की चाँदनी…

राखी सावंत (Rakhi Sawant) ने हिजाब वाला एक वीडियो शेयर किया है। इसमें वह अपने कथित शौहर आदिल खान दुर्रानी (Adil khan Durrani) के साथ दिख रहीं हैं। दोनों के बेडरूम का भी एक वीडियो आया है।

राखी ने पिछले दिनों आदिल से निकाह का दावा किया था। इसके प्रमाण भी दिए थे। निकाह के बाद उनके इस्लाम कबूलने और फातिमा नाम रखने की बात भी कही जा रही है। लेकिन आदिल ने निकाह से इनकार किया था। इसके बाद वह मीडिया के सामने रोती हुईं नजर आईं थी।

राखी सावंत ने रविवार (15 जनवरी 2023) को इंस्टाग्राम पर हिजाब वाला वीडियो शेयर किया। इसमें आदिल भी उनके साथ नजर आ रहा है। वह आदिल के साथ बिताए गए अच्छे पलों को याद करती हैं। कई जगह बेहद उदास नजर आती हैं। वीडियो के बैकग्राउंड में इमोशनल म्यूजिक चल रहा है। आवाज आ रही है, “मुझे भी किसी ने बनाया है। क्या मैं मजाक के लिए बना हूँ। मैं भी इंसान हूँ। मुझे भी चोट लगती है। मुझे भी दर्द होता है किसी की बात पर। मुझे भी वहाँ जाना है, जहाँ तुझे एक दिन जाना है। तू अकड़ के चल रहा है, मैं सिर छिपा कर चल रहा हूँ, क्योंकि तेरे पास दौलत है मेरे पास दौलत नहीं है। मैं लोगों की बातें सुनकर अपनी जिंदगी गुजार सकता हूँ।”

इसके बाद उन्होंने एक वीडियो अपने बेडरूम का शेयर किया है। इसमें वह आदिल के साथ नजर आ रही हैं। वीडियो में दोनों किस करते और एक-दूसरे पर जमकर प्यार बरसाते हुए नजर आ रहे हैं। इसके अलावा राखी ने इंस्टाग्राम पर आदिल के साथ अपनी कई और तस्वीरें भी शेयर की हैं।

राखी द्वारा शेयर की गई वीडियो और तस्वीरें देखने के बाद सोशल मीडिया पर कुछ लोग उनके इस्लाम कबूलने को सवाल उठा रहे हैं। कुछ लोगों ने उन्हें आदिल के साथ फोटो शेयर करने से मना करते हुए जीवन में आगे बढ़ने की सलाह दी है। एक यूजर ने तो यह तक कह दिया है कि आदिल ने फेमस होने के लिए तुम्हारा इस्तेमाल किया है।

फोटो साभार: राखी का इंस्टा

वीडियो पर कमेंट करते हुए एक यूजर ने लिखा, “कभी हँस रही हो, कभी रो रही हो। समझ नहीं आ रहा हो क्या रहा है?” दूसरे यूजर ने लिखा, “क्या फालतू का ड्रामा लगा रखा है।” राना विजय ने लिखा कि लव जिहाद चार दिन की चाँदनी फिर वही अँधेरी रात।

फोटो साभार: राखी का इंस्टा
फोटो साभार: राखी का इंस्टा

अदिति लिखती हैं, “राखी अब तुम आदिल की पोस्ट मत बिल्कुल भी मत डालो… सिर्फ खुद की पोस्ट शेयर करो। इस इंसान को खुद बोलने दो, तभी पोस्ट डालो। देखो खुद कभी ये अपनी प्रोफाइल पर डालता है ये सब या फिर नहीं।”

फोटो साभार: राखी का इंस्टा

सयैदा ने लिखा, “मैम अल्लाह सब्र करने वालों के साथ है। आप तो इतना सब्र करते आए हो अपनी जिंदगी में। इंशाअल्लाह सब अच्छा ही होगा आपका। आपकी मम्मी भी जल्दी ही ठीक हो, मैं अल्लाह से दुआ करूँगी। अल्लाह पाक आपकी तमाम तकलीफें दूर करें आमीन।”

फोटो साभार: राखी का इंस्टा

गौरलतब है कि 11 जनवरी 2023 को सोशल मीडिया पर राखी और आदिल खान दुर्रानी की निकाह की तस्वीर वायरल हुई थी। बाद में राखी ने दावा किया था कि उन्होंने ही निकाह की फोटो वायरल की थी, क्योंकि आदिल इस निकाह से इनकार कर रहा था। राखी ने एक यूट्यूब चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा था कि उन्होंने हराम न करके हलाल किया। फिर भी आदिल क्यों निकाह से इनकार कर रहा है, उन्हें समझ नहीं आ रहा है।

ये बॉलीवुड नहीं, तेलुगु फिल्म है… पश्चिमी मीडिया को SS राजामौली की दो टूक: ‘क्रिटिक्स चॉइस’ में भी ‘RRR’ को 2 बड़े अवॉर्ड, ‘अवतार’ के निर्देशक ने की तारीफ़

प्रतिष्ठित ‘गोल्डन ग्लोब्स’ में ‘RRR’ के गाने ‘नाटू-नाटू’ को सर्वश्रेष्ठ ऑरिजिनल गाने का अवॉर्ड मिला अब फिल्म को ‘क्रिटिक्स चॉइस अवॉर्ड्स’ ने ‘विदेशी भाषा की सर्वश्रेष्ठ फिल्म’ का ख़िताब दिया है। यहाँ भी MM कीरवानी द्वारा कंपोज किए गए गाने ‘नाटू-नाटू’ को बेस्ट सॉन्ग का ख़िताब दिया गया। इस तरह इस बड़े अवॉर्ड शो में ‘RRR’ ने दो सम्मान अपने नाम किया। निर्देशल एसएस राजामौली ने इस दौरान हॉलीवुड की कई बड़ी हस्तियों से मुलाकात भी की।

SS राजामौली ने जूनियर एनटीआर और राम चरण स्टारर ‘RRR’ के बारे में विदेशियों का कन्फ्यूजन दूर करते हुए स्पष्ट किया है कि ये बॉलीवुड फिल्म नहीं है। ‘डायरेक्टर्स गिल्ड फॉर अमेरिका थिएटर फॉर एकेडमी मेंबर्स’ में फिल्म की एक स्क्रीनिंग भी रखी गई थी। इस दौरान जब पश्चिमी मीडिया ने इसे ‘बॉलीवुड फिल्म’ बताया तो निर्देशक SS राजामौली ने स्पष्ट किया कि ये बॉलीवुड फिल्म नहीं, बल्कि भारत के दक्षिणी हिस्से की एक तेलुगु फिल्म है।

उन्होंने कहा कि वो भी भारत के दक्षिणी क्षेत्र से आते हैं। गाने को लेकर सवाल पर उन्होंने कहा कि वो गानों और संगीत को फिल्म की कहानी को आगे बढ़ाने के लिए इस्तेमाल में लाते हैं, न कि फिल्म को रोकने के लिए या नाचने के लिए एक मौका देने के लिए। उन्होंने कहा कि पूरी फिल्म देखने के बाद अगर कोई कहे कि उसे लगा ही नहीं कि फिल्म कब खत्म हो गई, तो इसे वो अपने लिए सम्मान मानते हैं। SS राजामौली की अगली फिल्म जंगल एडवेंचर है, जिसमें महेश बाबू हैं।

इधर ‘अवतार’ फिल्म सीरीज के निर्देशक जेम्स कैमरून ने भी एसएस राजामौली से मुलाकात की और ‘RRR’ के लिए उनकी तारीफ़ की। उन्होंने बताया कि ये फिल्म उन्हें इतनी अच्छी लगी कि उन्होंने अपनी पत्नी को इसे देखने के लिए कहा और फिर दोनों ने साथ बैठ कर देखा। ‘लॉस एंजेल्स फिल्म क्रिटिक्स एसोसिएशन (LAFSA)’ में भी अब फिल्म का दबदबा रहा है। हॉलीवुड के महान निर्देशक स्टीवन स्पीलबर्ग ने भी इस गाने की तारीफ़ की थी।

कोरिया का पादरी बदल रहा नेपाल का ‘धर्म’: बौद्धों-हिंदुओं का धर्मांतरण, कहा- मूर्तियाँ देख हैरान था, यीशु होने चाहिए

नेपाल में धर्मांतरण भले ही अवैध हो लेकिन ईसाई मिशनरियाँ अपने मिशन को कामयाब करने के लिए लगातार रिस्क ले रही हैं। गरीब हिंदुओं को तेजी से ईसाई बनाने का काम हो रहा है। कभी पैसों का लालच देकर उनका धर्म परिवर्तन किया जा रहा है तो कभी चमत्कार दिखाने के नाम पर।

बीबीसी ने नेपाल में हो रहे हिंदुओं और बौद्ध लोगों के धर्मांतरण पर एक रिपोर्ट की है। इसी रिपोर्ट में बताया गया है कि कैसे झारलांग के गाँव में एक चर्च बनाकर कोरियाई पादरी पांग-छांग ने इसे ‘यीशु की जीत’ बताया और धर्मांतरित लोगों से वहाँ प्रार्थना करवाई। इनमें ज्यादातर लोग लामा धर्म को मानने वाले तमांग समुदाय के गरीब और आध्यात्मिक हैं जिनके पूरे गाँव को मिशनरी द्वारा धर्मांतरित किया गया।

जानकारी के मुताबिक, पांग छांग नेपाल में पिछले करीबन 20 सालों से है। इस दौरान उसने नेपाल में 70 चर्च खुलवा दिए है जोकि ज्यादातर धाधिंग जिले में है। पांग के मुताबिक समुदाय के लोगों ने जमीन दान करके खुद ही चर्च बनवाने में मदद की है। पांग ने दावा किया है कि हर पहाड़ी इलाके के करीब चर्चों का निर्माण हो गया है।

बीबीसी की रिपोर्ट बताती है कि नेशनल क्रिश्चियन सर्वे के अनुसार, बुद्ध की जन्मभूमि व हिंदू बहुल देश में आज 7,758 चर्च खुल गए हैं और इस पूरे परिवर्तन के पीछे सबसे ज्यादा साउथ कोरिया का हाथ है, जोकि दुनिया में मिशनरी का काम तेजी से फैला रहा है। कोरियन वर्ल्ड मिशन एसोसिएशन के अनुसार करीबन 22000 मिशनरियों को विदेशों में तैनात किया गया है।

पांग छांग और उनकी बीवी ली जियोंग भी इसी मिशन के साथ नेपाल में हैं। दोनों पहले बैंकर थे। हालाँकि 2003 में वह यहाँ आए और अपना काम शुरू किया। मगर 2018 में आया धर्मांतरण विरोधी कानून इनके लिए एक बहुत बड़ा डर है।

पांग की पत्नी कहती हैं, “हम लोग हमेशा डर और घबराहट में काम करते हैं। लेकिन इस डर की वजह से हम जीसस की शिक्षा का प्रसार करना नहीं बंद कर सकते। हम आत्माओं को बचाना बंद नहीं करेंगे।”

पांग बताते हैं कि वो 2003 में आए थे जब देश में हिंदू शाही परिवार का राज था। वह कहते हैं, “मैं इतनी सारी भगवान की मूर्तियाँ देख हैरान था, मुझे लगा कि यहाँ ईशु की सीख का प्रचार-प्रसार बहुत ज्यादा जरूरी है।”

पांग के अनुसार जब 2008 में सिविल वार के बाद ये सेकुलर देश बना तो मिशनरी के कार्य के लिए ये स्वर्णिम युग था। रिपोर्ट के मुताबिक 300 कोरियन मिशनरियों के परिवार नेपाल में रह रहे हैं। ये लोग वहाँ व्यापार और पढ़ाई के वीजा के नाम आए हैं। कुछ रेस्ट्रां जैसे बिजनेस कर रहे हैं। पांग ने बीबीसी को अपनी मंशा के बारे में सब बताते हुए कहा, “मैं बिलकुल खुला बताता हूँ कि ईश्वर नेपाल में क्या कर रहे हैं।”

बता दें कि पांग इस काम को कानून विरोधी नहीं मानते क्योंकि वह लोग खुले में ये सब नहीं कर रहे। वह कहते हैं- “हमारा मिशनरी का काम सिर्फ हमारा नहीं है। ये ईश्वर का काम है। हम दिखाना चाहते हैं कि ईश्वर कैसे नेपाल में चमत्कार करते हैं।”

नेपाल में बढ़ रही ईसाइयों की संख्या

उल्लेखनीय है कि हिंदू बहुल नेपाल में ईसाइयों की तादाद फिलहाल 2 फीसद बताई जा रही है, लेकिन आँकड़े आने के बाद इनका सही पता चलेगा। 1951 में यहाँ एक ईसाई नहीं था। 1961 में 458 हुए और 2011 में इनकी गिनती 376000 हुँच गई। अनुमान है कि फिलहाल ये गिनती 545000 हो चुकी है। हर साल 2000 नेपाली छात्रों को कोरिया पढ़ने भेजा जाता है। नेपाल में भी बच्चों को ऐसी शिक्षा दी जाती है। जो लोग अपनी संस्कृति से जुड़ा रहना चाहते हैं उनके बच्चों को बरगलाया जाता है।

नेपाल में बढ़ रहे धर्मांतरण के मामले में ऐसा नहीं है कि लोग नहीं जानते। पूर्व उप प्रधानमंत्री कमल थामा कहते हैं कि ये काम जंगल में आग की तरह फैल रहा है। कोरियन मिशनरियाँ सांस्कृतिक पहचान पर हमला कर रही हैं। वह गरीबों और पिछड़े लोगों को ईसाई बना रहे हैं। कमल थापा कहते हैं कि राज्य में धर्मांतरण विरोधी कानून है लेकिन किसी को भी इसके तहत दोषी नहीं बनाया गया। लोग या तो अपील पर छूट जाते हैं या फिर सबूतों के अभाव में। पादरी भी खुद मानते हैं कि अन्य देशों में धर्मांतरण विरोधी कानून सच लगता है पर नेपाल में इसे देखने वाला कोई नहीं है।

बीबीसी की रिपोर्ट में कभी हिंदू पंडित का काम करने वाले पादरी दिल्ली राम का जिक्र है जो अब नेपाल क्रिश्चियन सोसायटी का अध्यक्ष है। उसे 2018 में लोगों को धर्मांतरित करने के इल्जाम में आरोपित बनाया गया था। हालाँकि बाद में आरोप हटा दिए गए। आज वो कहता है- “कभी हम पर लोगों को धर्मांतरित करने के इल्जाम लगे लेकिन अब सत्ता हमारे हाथ में है।”

ISI का K2 (कश्मीर+खालिस्तान) दे रहा था ऑर्डर, दिल्ली में हिंदू के किए टुकड़े; Video बना भेजा पाकिस्तान: आतंकियों के टारगेट थे पंजाब के हिंदू नेता

दिल्ली के भलस्वा डेरी क्षेत्र से गिरफ्तार आतंकियों जगजीत उर्फ याकूब और नौशाद को लेकर नए खुलासे हुए हैं। बताया जा रहा है कि दोनों पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI के K2 (कश्मीर-खालिस्तान) डेस्क के ऑर्डर पर काम कर रहे थे। इनके निशाने पर हिंदुवादी नेता थे। इन्होंने दिल्ली में एक हिंदू के टुकड़े-टुकड़े कर वीडियो बनाए थे। यह वीडियो पाकिस्तान में अपने आकाओं को भेजे भी थे।

रिपोर्ट के अनुसार इन दोनों आतंकियों को पंजाब में 4 हिंदुवादी नेताओं को खत्म करने का टारगेट दिया गया था। इनमें दो नेता शिवसेना के हैं। इन आतंकियों को K2 डेस्क कंट्रोल कर रहा था। कश्मीर के साथ-साथ पंजाब में आतंक फैलाने के इरादे से आईएसआई ने यह डेस्क बनाया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक गिरफ्तार आतंकियों से मिली जानकारी दिल्ली पुलिस अब पंजाब पुलिस से साझा करने जा रही है। जगजीत उर्फ याकूब और नौशाद द्वारा विदेशों और स्थानीय लोगों से हुई बातचीत की डिटेल भी निकाली जा रही है। पुलिस इन्हें हथियार मिलने के बारे में भी जानकारी जुटा रही है। यह भी बताया जा रहा है कि नौशाद करीब 1 महीने से स्पेशल सेल की निगरानी में था। बावजूद उसने उसने एक व्यक्ति की हत्या कैसे की, इसकी जानकारी जुटाई जा रही है।

एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार नौशाद और जगजीत ने अपने हैंडलर्स को जो वीडियो भेजा था, वह 37 सेकेंड का था। अपनी क्षमता बताने के लिए दोनों ने राजकुमार की हत्या कर यह वीडियो भेजा था। रिपोर्ट के अनुसार राजकुमार के 9 टुकड़े किए गए थे। वह जहाँगीरपुरी इलाके में फुटपाथ पर रहता था, इसलिए आतंकियों को वह आसान टारगेट लगा। 15 दिसंबर 2023 को वे राजकुमार को नशा कराने का झाँसा देकर भलस्वा डेयरी स्थित अपने घर ले गए। वहाँ उसका गला रेतने के बाद शव के टुकड़े-टुकड़े किए। पाकिस्तानी आकाओं को भेजने के लिए इसका वीडियो भी बनाया।

यह वीडियो नौशद के मोबाइल से मिला है। जिसे वीडियो भेजा गया उसका नाम सलमान बताया जा रहा है। दोनों को अन्य टारगेट के भी कत्ल के वीडियो बनाकर भेजने के निर्देश मिले थे। दोनों को देश में दंगे और साम्प्रदयिक तनाव फैलाने का आदेश दिया गया था।

इनका पाकिस्तान से कनेक्शन दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद आतंकी मोहम्मद आरिफ और लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी सोहैल ने करवाया था। मोहमद आरिफ लाल किले पर हमले का दोषी है। साल 2018 में सोहैल पाकिस्तान चला गया था। 2022 में जब नौशाद जेल से बाहर आया] तब उसने पाकिस्तान में सोहैल से सम्पर्क साधा था।

दोनों आतंकियों की गिरफ्तारी 12 जनवरी 2023 को हुई थी। 56 साल का नौशाद पाकिस्तानी आतंकी समूह हरकत-उल-अंसार से जुड़ा बताया जा रहा है। वह हत्या के 2 मामलों में उम्रकैद और विस्फोटक अधिनियम के एक केस में 10 साल की सजा भी काट चुका है। वहीं जगजीत सिंह के देविंदर बंबीहा गिरोह समूह से जुड़े होने का शक है। 29 साल के जगजीत के खालिस्तानी आतंकी अर्शदीप से भी संबंधों का शक है। जग्गा उत्तराखंड में दर्ज हत्या के एक मामले में पैरोल मिलने के बाद फरार हो गया था।

कोमेश से हुआ प्यार…तो शबनम बन गई नेहा पाठक: शादी के बाद खुद एटा के DM को दिया हिन्दू बनने के लिए प्रार्थना पत्र

उत्तर प्रदेश के एटा जिले में शबनम नाम की लड़की ने हिन्दू धर्म स्वीकार कर लिया है। अब वह नेहा पाठक नाम से जानी जाएँगी। शबनम ने कोमेश पाठक नाम के हिन्दू लड़के से शादी की है। दोनों के परिवारों को इस शादी पर ऐतराज था, जिसके बाद शबनम ने पहले हाईकोर्ट और बाद में जिला प्रशासन की मदद ली। 21 दिसंबर 2022 को एटा के ADM ने इस बाबत नोटिस भी जारी करके 21 दिनों के अंदर आपत्तियाँ माँगी थी। कोई आपत्ति न जाने पर अब जिला प्रशासन शबनम को हिन्दू बनने का सर्टिफिकेट जारी कर सकता है।

शबनम ने ग्रेजुएशन कर रखा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक शबनम मूल रूप से उत्तर प्रदेश के ही गाजीपुर की रहने वाली हैं। वह अपनी बड़ी बहन के साथ हरियाणा के मानेसर में रहती थीं। इसी जगह पर एटा का युवक कोमेश पाठक भी रह कर मेडिकल कम्पनी में नौकरी किया करता था। दोनों की मुलाकात मानेसर में ही हुई। धीरे-धीरे दोनों मिलने लगे और उनमे आपस में प्यार हो गया। कुछ समय बाद दोनों के परिवार को पता चला तो उन्होंने ऐतराज जताया। आख़िरकार शबनम और कोमेश ने शादी करने का फैसला कर लिया।

बताया जा रहा है कि शबनम काफी पहले से हिन्दू धर्म से प्रभावित थीं। वो दीपावली त्यौहार को काफी पसंद किया करती थीं। शादी के बाद शबनम ने हिन्दू धर्म अपनाने का फैसला किया। इस बाबत उन्होंने इलाहबाद हाईकोर्ट में याचिका भी लगाई। हाईकोर्ट ने इसे जिलाधिकारी (DM) से संबंधित बताया। वहाँ से आकर शबनम ने एटा के DM अंकित अग्रवाल के यहाँ हिन्दू धर्म अपनाने का प्रार्थना पत्र दिया। जिलाधिकारी के निर्देश पर एटा के ADM अलोक कुमार ने अपने नोटिस बोर्ड पर शबनम की माँग पर आपत्ति दर्ज करवाने वालों को 21 दिनों का समय देते हुए नोटिस चस्पा किया।

एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक 21 दिनों में कोई भी आपत्ति न आने पर अब जिला प्रशासन शबनम को हिन्दू होने का सर्टिफिकेट जारी कर सकता है। यह एटा जिले में आधिकारिक तौर पर स्वेच्छा से धर्मांतरण का पहला मामला होगा। फिलहाल नेहा और कोमेश एक ही साथ रह रहे हैं। दोनों परिवार भी आपस में सम्पर्क में बताए जा रहे हैं।

हवाई जहाज से आते, खंडहर में प्लान बनाकर डालते थे डाका: लखनऊ पुलिस ने असलम को पकड़ा, गैंग के दूसरे बांग्लादेशियों की तलाश

उत्तर प्रदेश की लखनऊ पुलिस ने 1 लाख रुपए के इनामी डकैत असलम को गिरफ्तार किया है। असलम एक बांग्लादेशी घुसपैठिया है जो भारत में हुए कई अपराधों में संलिप्त था। आरोपित की गैंग रेलवे लाइन के किनारे बने खंडहरों में छिप कर दिन में लोगों के घरों की रेकी किया करती थी और रात में डाका डालती थी। पुलिस उसकी गैंग में शामिल नासिर, नूर इस्लाम, सुमान और शाहीन नाम के अन्य बांग्लादेशियों की तलाश कर रही है। असलम के पास आधार कार्ड के अलावा हेल्थ कार्ड और कोविड वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट भी बरामद किया है। यह गिरफ्तारी शनिवार (14 जनवरी 2023) को हुई है।

लखनऊ पुलिस के मुताबिक असलम की लगभग 1 दर्जन डकैतों की गैंग है। ये रेलवे लाइन के बगल बने खंडहरनुमा मकानों में अपनी साजिश रचते थे। दिन में एक किसी मकान या दुकान को रेकी कर के डाका डालने के लिए चिन्हित कर लेते थे। रात में ये एक साथ धावा बोल कर वहाँ लूटपाट करते थे। इस दौरान घर या दुकान के मालिक को बंधक बना कर उसके साथ मारपीट और रेप तक की वारदात की जाती थी। पुलिस ने यह भी बताया है कि असलम और उसकी गैंग के बाकी सदस्य न सिर्फ शताब्दी और राजधानी जैसी ट्रेनों बल्कि फ्लाइट से भी सफर कर के अपनी जगह बदला करते थे।

लखनऊ पुलिस के मुताबिक ट्रेन से सफर के दौरान असलम की गैंग कुछ हिस्सों में बंट कर बीच-बीच में पड़ने वाले स्टेशनों पर रुक जाया करती थी। यहाँ ये लोग अपने-अपने टारगेट पर लग जाया करते थे। लूटपाट के बाद ये लोग किसी जगह पर फिर से एकजुट होते थे। पूछताछ के दौरान असलम ने पुलिस को बताया कि वो लखनऊ की जेल में बंद रबीउल और बिलाल नाम के अपने साथियों से मिलने आया था। बताया जा रहा है कि असलम इन दोनों की जमानत की व्यवस्था करवाने आया था। जेल में मुलाकात न हो पाने के बाद वह लखनऊ के चिनहट इलाके में ठहरने के लिए जगह तलाश रहा था लेकिन आख़िरकार पुलिस द्वारा पकड़ा गया।

असलम ने कहा कि उसने डाली गई डकैतियों में लूटे गए पैसों को खर्च कर दिया है। लगभग 36 वर्षीय असलम के अब्बा का नाम मुस्लिम खान है और वो बांग्लादेश के बुरसल जिले का रहने वाला है। उसकी तलाशी के दौरान पुलिस को श्रम कार्ड, आधार कार्ड, हेल्थ कार्ड, कोविड वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट और 2174 रुपए नकद बरामद हुए। साल 2020 में उस पर लखनऊ में ही डकैती और 2021 में विदेशी नागरिकता अधनियम के साथ हत्या के प्रयास का मुकदमा दर्ज हो चुका है। वाराणसी और लखनऊ मिला कर असलम पर अब तक कुछ 8 मुकदमों की जानकारी सामने आई है।

‘तिरंगा निकाला, पाकिस्तानी झंडे दिखाए, राष्ट्रभक्ति के सीन गायब’: जिसके किताब पर बॉलीवुड में बनी ‘राजी’, उसने कहा- मेघना गुलजार ने पीठ पर छुरा घोंपा

साल 2018 में पर्दे पर आई मेघना गुलजार की ‘राजी’ फिल्म हरिंदर सिक्का की किताब ‘कॉलिंग सहमत’ पर बनाई गई थी। अब उन्हीं हरिंदर सिक्का ने भोपाल लिटरेचर फेस्टिवल में बात करते हुए मेघना पर धोखा देने का आरोप लगाया है। उन्होंने ‘बॉक्स ऑफिस फ्रॉम बुक्स’ विषय पर चर्चा करते हुए कहा कि उन्होंने मेघना गुलजार को अपनी किताब (कॉलिंग सहमत) के राइट्स देकर सबसे बड़ी गलती की।

हरिंदर सिक्का को मेघना से शिकायत इस बात की है कि उन्होंने अपनी फिल्म राजी में सहमत के किरदार को बहुत डिप्रेस दिखाया। उन्होंने कहा कि फिल्म में डायरेक्टर ने एक हीरो को ऐसे दिखाया है, जैसे उसने देश के लिए लड़कर कोई गुनाह किया हो।

सिक्का के अनुसार, सहमत तिरंगे को पूजती थीं। मगर मेघना ने फिल्म से तिरंगे को ही निकाल दिया और फिल्म में पाकिस्तान के झंडे दिखाए। इसके अलावा फिल्म से राष्ट्रभक्ति के सीन ही हटा दिए गए, भारतीय एजेंट्स पर सवाल खड़ा किया गया और पाकिस्तानी आर्मी को नर्म दिल दिखाया, जबकि ऐसा नहीं है, वो लोग इसके उलट हैं।

लेखक ने कहा कि फिल्म में सहमत को ऐसे दिखाया गया जैसे वो एक डिप्रेस इंसान हों जबकि ऐसा नहीं था। जब सहमत लौटी थीं तो उन्होंने तिरंगे को सैल्यूट किया था। बैंड ‘जय भारती’ बजा रहा था, मगर वहाँ उन्होंने राष्ट्रगान बजवाया।

हरिंदर आरोप लगाते हैं कि इस फिल्म में नैरेटिव दिखाया गया कि कश्मीरी मुस्लिम देश के खिलाफ हैं, जिससे कराची और दुबई के लोग खुश हुए होंगे। इस किताब को 8 साल में पूरा करने वाला शख्स और सहमत की आत्मा खुश नहीं हैं।

उन्होंने अफसोस जताते हुए कहा कि मेघना को राइट्स बेचकर बहुत बड़ी गलती हो गई। वह बताते हैं, “मैंने गुलजार साहब को जबान दी थी। उन्होंने मुझसे गुजारिश की थी कि 4 साल से उसे किसी ने डायरेक्टर का काम नहीं दिया है। आप दे दो। मैंने बात रखने के लिए उसे डायरेक्टर बनाया। मगर उसने तो मेरी ही पीठ में छुरा घोंपा”

वह कहते हैं कि लेखक गुलजार ने तो उन्हें जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में जाने से मना कर दिया था। आयोजको से उन्होंने मना किया था। बाद में आर्मी परिवार के एक बेटे ने मुझे बुलिया। सिक्का के मुताबिक उनकी किताब को आइफा अवार्ड मिलने वाला था, लेकिन वो भी उन्हीं की वजह से नहीं मिला।

अपना दर्द साझा करते हुए उन्होंने कहा कि वो ये सब सिर्फ इसलिए बता रहे हैं ताकि कभी किसी और के साथ ये सब न हो। कॉलिंग सहमत 8 साल देकर लिखी गई थी। कोई ऐसी कहानियों को कम दाम पर लेता है और फिर उसके हाल राजी जैसे कर देता है। आगे किसी के साथ ऐसा नहीं होना चाहिए। उन्होंने जानकारी दी कि 8 साल में वह लगातार सहमत के घर जाकर उनसे मिलते। कभी 5 मिनट कभी 10 मिनट बात होती और इस तरह ये किताब लिखी गई। शुरुआत में सहमत ये सब बताने में सहज नहीं थीं, पर जोर देने पर वह तैयार हो गईं और किताब पूरी हो सकी। सिक्का की अगली किताब एक नेवी ऑफिसर के जीवन पर है। इस किताब का नाम गोविंद होगा।