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10वीं के टेस्ट पेपर में बच्चों को ‘आज़ाद कश्मीर’ चिह्नित करने को कहा: बंगाल में WBBSE का कारनामा, भाजपा ने बताया TMC की जिहादी साजिश

;पश्चिम बंगाल माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (West Bengal Board Of Secondary Education)’ की तरफ से 10वीं के छात्रों के लिए जारी टेस्ट पेपर में नक्शे पर ‘आजाद कश्मीर’ चिह्नित करने के लिए कहा गया है। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर को आजाद कश्मीर लिखे जाने को लेकर भाजपा ने पश्चिम बंगाल के टीएमसी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और इसे जिहादी साजिश करार दिया है। टेस्ट पेपर के पेज नंबर 132 का स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रहा है।

बवाल मचने के बाद केंद्र सरकार ने राज्य सरकार से मामले की जाँच के लिए कहा है। राज्य सरकार ने कहा है कि मामले की जाँच जारी है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

पश्चिम बंगाल माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (WBBSE) हर साल बोर्ड की परीक्षा से पहले छात्रों की प्रैक्टिस के लिए टेस्ट पेपर का संग्रह जारी करता है। इसमें अलग-अलग स्कूलों द्वारा तैयार किए गए कक्षा 10 के लिए प्रश्न होते हैं। इस संग्रह के वायरल हो रहे पेज नंबर 132 के उपविभाग संख्या 2.4 में 4 स्थानों को मानचित्र पर दिखाने के लिए कहा गया है। सबसे पहले संख्या 2.4.1 पर आजाद कश्मीर को चिह्नित करने के लिए कहा गया है।

उसके बाद क्रमशः मोपला विद्रोह का स्थान, गाँधी जी के नेतृत्व में शुरू किए गए पहले सत्याग्रह स्थल और अंत में चटग्राम को मानचित्र में दिखाने के लिए कहा गया है। टेस्ट पेपर का विवादास्पद प्रश्न मालदा के रामकृष्ण मिशन विवेकानंद विद्यामंदिर का बताया जा रहा है।

इसे राज्य की भाजपा इकाई ने बड़ा मसला करार दिया है। भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और मेदिनीपुर से सांसद दिलीप घोष ने 17 जनवरी को ट्विटर पर ममता सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने लिखा, “ममता सरकार अलगाववादियों की समर्थक है। मध्यमिक टेस्ट पेपर 2023 के पृष्ठ 132 पर इतिहास के प्रश्न पत्र के चिह्नित हिस्से को देखें। छात्रों को पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के हिस्से को आज़ाद कश्मीर के रूप में पहचानने के लिए कहा गया है। राज्य सरकार न सिर्फ उग्रवादियों का समर्थन कर रही है, बल्कि छात्रों में भारत विरोधी मानसिकता पैदा करने की भी कोशिश कर रही है।”

केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री डॉक्टर सुभाष सरकार ने प्रश्न पत्र बनाने वालों को राष्ट्र द्रोही करार दिया। उन्होंने कहा कि इस तरह के प्रश्नों के जरिए आतंकवाद को बढ़ावा दिया जा रहा है। राज्य सरकार के शिक्षा मंत्री को टेस्ट पेपर की बिक्री बंद कर के उन्हें पत्र लिखना चाहिए, साथ ही मामले की जाँच होनी चाहिए।

‘भारतीय जनता पार्टी (BJP)’ के प्रदेश अध्यक्ष डॉक्टर सुकान्त मजूमदार ने ट्विटर पर लिखा, “छात्रों से माध्यमिक परीक्षा के पेपर में ‘आजाद कश्मीर’ को मार्क करने के लिए कहा गया है। क्या मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ऐसे विचारों का समर्थन करती हैं?” उन्होंने टीएमसी पर तुष्टिकरण का आरोप लगाते हुए दोषियों पर सख्त कार्रवाई की माँग की। बीजेपी नेता राहुल सिन्हा ने मामले की उच्च स्तरीय जाँच की माँग की। उन्होंने कहा इस घटना से साबित होता है कि राज्य सरकार अपने वोट बैंक को खुश करने के लिए जिहादी विचारों को बढ़ावा देती है।

दूसरी तरफ पश्चिम बंगाल सरकार ने इसे भूल करार दिया है। टीएमसी प्रवक्ता कुणाल घोष ने भाजपा के आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए कहा कि यदि किसी ने गलती से इस तरह का सवाल पूछा है तो यह गलत किया है। उन्होंने कहा कि हम ऐसे कृत्यों का समर्थन नहीं करते हैं। टीएमसी एक धर्मनिरपेक्ष पार्टी है जो किसी समुदाय विशेष को खुश करने में विश्वास नहीं रखती है। उन्होंने दावा किया किभाजपा द्वारा हमारी पार्टी के खिलाफ निराधार टिप्पणी की जा रही है।

वहीं, पश्चिम बंगाल के शिक्षा मंत्री ब्रत्य बसु ने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिलाया है। पश्चिम बंगाल माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष रामानुज गंगोपाध्याय ने कहा कि हम लोग प्रश्न पत्र तैयार करने वालों और इसे संपादित करने वालों से बात करेंगे और दोषियों पर कार्रवाई भी की जाएगी। उन्होंने जानकारी दी कि बोर्ड की वेबसाइट पर संशोधित प्रश्न पत्र जारी किया जा रहा है।

500km की पदयात्रा-357 दीक्षा, 9 साल की देवांशी ने लिया संन्यास: हीरा कारोबारी की बेटी पर कभी नहीं देखा TV

गुजरात के सूरत में 9 साल की देवांशी ने संन्यास ग्रहण किया है। वह हीरा कारोबारी संघवी मोहन भाई की पोती और धनेश-अमी बेन की बेटी हैं। उन्होंने जैनाचार्य कीर्तियशसूरीश्वर महाराज से दीक्षा प्राप्त की है। देवांशी का दीक्षा महोत्सव शनिवार (14 जनवरी 2023) को शुरू हुआ था। आज बुधवार (18 जनवरी 2023) को पूरा हुआ।

देवांशी के संन्यास लेने से पहले दीक्षा महोत्सव के अवसर पर सूरत में वर्षीदान यात्रा निकाली गई थी। इसमें 4 हाथी, 11 ऊँट और 20 घोड़ों को शामिल किया गया था। यात्रा में हजारों की संख्या में लोग शामिल थे। देवांशी के दीक्षा ग्रहण करने कार्यक्रम में करीब 35 हजार लोग शामिल हुए।

देवांशी के घरवालों का कहना है कि बचपन से ही उनकी रुचि धार्मिक क्रियाओं में थी। उन्होंने आज तक कभी टीवी नहीं देखा है। यही नहीं, वह इस छोटी से उम्र में ही 357 दीक्षा प्राप्त कर चुकी हैं। साथ ही करीब 500 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर विहार और जैन समुदाय से जुड़े रीति-रिवाजों को समझा है।

देवांशी 5 भाषाओं की जानकार हैं। देवांशी के घरवाले कहते हैं कि उन्होंने हमेशा ही जैन समुदाय से जुड़े कार्य ही किए हैं। कभी भी ऐसा कोई काम नहीं किया जो जैन समुदाय में प्रतिबंधित हो। यहाँ तक कि देवांशी ने कभी भी अक्षर लिखे हुए कपड़े तक नहीं पहने हैं। इसके अलावा, देवांशी ने धार्मिक शिक्षा में आयोजित क्विज में गोल्ड मेडल हासिल किया था। वह संगीत, स्केटिंग, मेंटल मैथ्स और भरतनाट्यम में भी एक्सपर्ट हैं। देवांशी को जैन समुदाय से जुड़े वैराग्य शतक और तत्वार्थ के अध्याय जैसे महाग्रंथ कंठस्थ हैं।

देवांशी की माँ अमी बेन धनेश भाई संघवी कहतीं हैं कि उनकी बेटी जब महज 25 दिन की थी, तब से उसने नवकारसी का पच्चखाण लेना किया। देवांशी जब 4 महीने की हुई तब से ही शाम के बाद भोजन करना बंद कर दिया। जब वह 8 महीने की थी तो रोज त्रिकाल पूजन करती थी। 1 साल की हुई तब से प्रतिदिन नवकार मंत्र का जाप कर रही है। 2 साल और 1 माह की माह से गुरुओं से धार्मिक शिक्षा लेनी की शुरुआत की। देवांशी के जीवन का सबसे बड़ा बदलाव तब आया जब उसने 4 साल और 3 माह की उम्र से गुरुओं के साथ रहना शुरू किया।

बता दें कि देवांशी की दीक्षा से पहले उनके परिवार ने यूरोपीय देश बेल्जियम में भी सूरत की ही तरह जुलूस निकाला था। देवांशी का परिवार संघवी एंड संस कंपनी चलाता है। यह कंपनी हीरा का कारोबार करने वाली सबसे पुरानी कंपनियों में से एक है। संघवी एंड संस हर साल करोड़ों का कारोबार करती है। देवांशी के पिता धनेश संघवी अपने पिता मोहन संघवी के इकलौते बेटे हैं। देवांशी अपने परिवार की बड़ी बेटी हैं। उनकी छोटी बहन काव्या अभी 5 साल की है।

‘यदि हम पागल हुए तो कौन जिम्मेदार होगा’: SET Max को लिखी चिट्ठी, कहा- कितनी बार दिखाओगे सूर्यवंशम, हम हीरा ठाकुर के परिवार को जान चुके

बॉलीवुड अभिनेता अमिताभ बच्चन (Amitabh Bachchan) की फैमिली ड्रामा फिल्म ‘सूर्यवंशम’ (Sooryavansham) टीवी पर सबसे ज्यादा दिखाई जाने वाली फिल्मों में से एक है। सोनी टीवी के चैनल सेट मैक्स (अब सोनी मैक्स) पर इसका बार बार प्रसारण होता है। इससे परेशान एक व्यक्ति ने सेट मैक्स को पत्र लिखा है। पत्र में उसने खुद को ‘सूर्यवंशम पीड़ित’ बताया है। सोशल मीडिया पर ‘सूर्यवंशम’ पीड़ित का यह पत्र खूब वायरल हो रहा है।

पत्र में लिखा है, “आपके चैनल को ‘सूर्यवंशम’ फिल्म के प्रसारण का ठेका प्राप्त हुआ है। आपकी कृपा से हम और हमारा परिवार हीरा ठाकुर (अमिताभ बच्चन के किरदार का नाम) और उसके परिवार (राधा, गौरी व अन्य) को अच्छे से जान चुके हैं। हम लोगों को ‘सूर्यवंशम’ नामक फिल्म की एक्स्ट्रा इनिंग देख-देख कंठस्थ हो चुकी है।”

सूर्यवंशम पीड़ित ने अपनी मानसिक स्थिति का जिक्र करते हुए आगे लिखा, “मैं आपके चैनल से यह जानना चाहता हूँ कि आपका चैनल अब तक कितनी बार इस फिल्म का प्रसारण कर चुका है? भविष्य में कितनी बार और इस फिल्म का प्रसारण किया जाएगा? यदि हमारी मानसिक स्थिति पर इसका विपरीत असर (पागलपन) पड़ता है, तो इसका जिम्मेदार कौन होगा? कृपया सूचना देने का कष्ट करें।” सूर्यवंशम पीड़ित का नाम डीके पांडेय है। उन्होंने अपने फेसबुक पर यह लेटर शेयर किया है।

सोशल मीडिया पर यह लेटर वायरल होने के बाद यूजर्स जमकर मजे ले रहे हैं। निधि तिवारी इसका स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए लिखती हैं कि बेचारा जहर वाली खीर देख-देख के परेशान हो गया।

नीरज कुमार चतुर्वेदी लिखते हैं, “आखिरकार सूर्यवंशम फिल्म से प्रताड़ित होकर पांडेय जी ने चिट्ठी लिख ही दी। अब मत दिखाओ बे सोनी वालों।”

कुछ यूजर्स पूछ रहे हैं कि क्या ये सवाल आपका भी है?

बता दें कि ‘सूर्यवंशम’ तमिल फिल्म की हिन्दी रीमेक है। इस फिल्म को 21 मई 1999 को रिलीज किया गया था। उसी साल मैक्स चैनल को भी लॉन्च किया गया था। यानी फिल्म और चैनल दोनों एक ही साल में आए थे। चैनल ने बिग बी के डबल रोल वाली इस फिल्म के 100 साल के राइट्स खरीद रखे हैं।

यही कारण है कि यह फिल्म इस चैनल पर बार-बार दिखाई जाती है। अब सैट मैक्स चैनल सोनी मैक्स में बदल चुका है। टीवी पर ‘सूर्यवंशम’ के बार-बार टेलीकास्ट होने की वजह से इससे पहले भी इस पर कई मीम्स बन चुके हैं।

हिजाब में हो महिला पत्रकार, नहीं तो कर देंगे बैन: तालिबान का फरमान, पुतलों को भी पहना चुका है नकाब

अफगानिस्तान (Afghanistan) पर कब्जा करने के बाद तालिबान (Taliban) ने महिलाओं पर कई प्रतिबंध लगा दिए हैं। तालिबान ने अब मीडिया को चेतावनी दी है। तालिबान ने कहा है कि यदि मीडिया संस्थानों में महिला कर्मचारी हिजाब नहीं पहनतीं और पुरुषों के साथ घुलती-मिलती हैं तो मीडिया को बैन किया जाएगा। यही नहीं, अब अफगानिस्तान में महिलाओं के पुतलों का चेहरा ढँकना भी जरूरी हो गया है।

अफगान पत्रकार नातिक मलिकजादा ने एक वीडियो शेयर किया है। इस वीडियो में तालिबानी नेता ने कहा है कि उन्होंने मीडिया संस्थानों को हिजाब का पालन करने के लिए सख्त आदेश जारी किया है। मीडिया में काम करने वाली महिला कर्मचारियों को अच्छे ढंग से हिजाब बनना होगा। साथ ही, ऑफिस में काम करने वाले पुरुष कर्मचारियों के साथ महिलाएँ घुल-मिल भी नहीं सकतीं।

तालिबान ने चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि मीडिया इन नियमों का पालन नहीं करती है तो उस पर बैन लगाया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा है कि हर चीज की एक सीमा होती है। जो चीजें खराब हैं और युवाओं को बर्बाद करने का कारण बन सकती हैं उनके बारे में चुप नहीं रहा जा सकता। इसलिए, मीडिया को खुद ही इस मामले में जरूरी फैसले लेने की जरूरत है।

पुतलों पर नकाब

अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे के बाद नकाब और हिजाब वाले पुतले वहाँ की पहचान बनते जा रहे हैं। दरअसल, तालिबान ने पुतलों को लेकर फरमान जारी किया था। इस फरमान में पुतलों को हटाने या फिर उनका गला काटने की बात कही गई थी।

इसके बाद दुकानदारों ने गुजारिश करते हुए कहा था कि यदि पुतले हट जाएँगे तो उन्हें कपड़े बेचने में समस्या होगी। इसलिए अब तालिबान ने कहा है कि सभी पुतलों पर नकाब होना चाहिए। इस आदेश के बाद दुकानदारों ने पुतलों के चेहरे को प्लास्टिक या एल्युमिनियम फाइल से ढँक दिया है।

तालिबान के इस फैसले से पीड़ित दुकानदार अजीज ने कहा, “तालिबान के सदाचार मंत्रालय के एजेंट नियमित रूप से दुकानों और मॉल में गश्त करते हैं। एजेंट यह देखते हैं कि पुतलों के सिर पर नकाब है या नहीं।” उन्होंने यह भी कहा, “हर कोई जानता है कि पुतले मूर्ति नहीं हैं। यहाँ कोई भी पुतलों की पूजा करने वाला नहीं है। सभी इस्लामी देशों में कपड़े बेचने लिए पुतलों का इस्तेमाल होता है।”

प्रतिबंधों के बोझ तले दबी अफगान महिलाएँ

साल 2021 में अफगानिस्तान पर कब्जा करने के बाद तालिबान ने कहा था कि वह महिलाओं के अधिकारों की बात करेगा। हालाँकि, सत्ता में काबिज होने के बाद तालिबान ने महिलाओं के अधिकारों का लगातार हनन किया है।

अफगानिस्तान में महिलाओं पर लगे प्रतिबंधों की लंबी फेहरिस्त है। अफगान महिलाओं को अकेले घर से बाहर निकलने की मनाही है। साथ ही, यदि कोई महिला सार्वजनिक स्थानों पर बिना हिजाब के देखी जाती है तो उसके अभिभावक को जुर्माना और जेल की सजा होगी।

तालिबान ने हमेशा ही महिलाओं को शिक्षा से दूर रहने की वकालत की है। इसलिए, वहाँ स्कूल और यूनिवर्सिटी में महिलाओं के प्रवेश को पूरी तरह से प्रतिबंधित किया गया है। इसके अलावा, एनजीओ या किसी अन्य संस्थान में महिलाओं की नौकरी पर भी कई तरह के प्रतिबंध लगाए हैं।

इंडिया गेट पर ‘व्हाट्सएप्प ज्ञान’ बाँटते पकड़े गए बिहार के शिक्षा मंत्री: रामचरितमानस का किया था अपमान, इस्लाम का करते हैं गुणगान

हाल ही में बिहार के शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर यादव ने तुलसीदास कृत रामचरितमानस को घृणा फैलाने वाला ग्रन्थ करार दिया था। उन्होंने पटना में आयोजित ‘नालंदा ओपन यूनिवर्सिटी’ के दीक्षांत समारोह में भाषण देते हुए ये बात कही थी, जिसके बाद उनकी आलोचना करते हुए हिन्दू संगठनों ने आपत्ति जताई थी। वहीं अब बिहार के शिक्षा मंत्री, जो कि प्रोफेसर भी हैं, उनका दिल्ली स्थित इंडिया गेट को लेकर गलत दावा वायरल हो रहा है।

RJD नेता ने 20 अप्रैल, 2020 को ट्विटर पर इंडिया गेट की तस्वीर शेयर करते हुए लिखा था, “संघियों एवं मनुवादियों के देश में योगदान की क्रोनोलॉजी – इंडिया गेट, दिल्ली के शिलापट्ट पर फिरंगियों के खिलाफ जंग में आहूति देने वाले 95,395 अमर बलिदानियों में 61395 मुस्लिम, 8050 सिख, 14480 पिछड़े, 10777 दलित, 598 सवर्ण, 00 (शून्य) संघी। मनुवादी संघियो को ढूँढें।” उन्होंने जो तस्वीर शेयर की, उस पर भी ये आँकड़े लिखे थे।

साथ ही तस्वीर में ये भी दावा किया गया था कि इंडिया गेट पर स्वतंत्रता सेनानियों के नाम लिखे हैं। इस तस्वीर को देखने से ही ऐसा लग रहा है कि किसी ने उन्हें व्हाट्सएप्प पर भेजा था और उन्होंने उसे वैसे ही उठा कर शेयर कर दिया। रामचरितमानस को घृणा फैलाने वाला ग्रन्थ बताने वाले चंद्रशेखर यादव इस्लाम को प्यार का सन्देश देने वाला मजहब बताते रहे हैं, ऐसे में उनकी हिन्दू विरोधी मानसिकता को लेकर कोई शक तो नहीं ही है।

बिहार के शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर यादव द्वारा किया गया ट्वीट

अब हम आपको बताते हैं कि सच्चाई क्या है। असल में इसमें स्वतंत्रता सेनानियों के नाम लिखे ही नहीं है। इस पर प्रथम विश्व युद्ध (1914-18) और तीसरे एंग्लो-अफगान युद्ध (1919) में मृत ‘ब्रिटिश इंडिया आर्मी’ के सैनिकों के नाम लिखे हैं। ये एक वॉर मेमोरियल है, जिस पर 13,000 से भी अधिक सैनिकों के नाम लिखे हैं। ये ‘ब्रिटिश इंडियन आर्मी’ के उन सभी 70,000 सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित करता है, जो इन युद्धों में मारे गए थे।

दिसंबर 1917 में गठित ‘इम्पीरियल वॉर ग्रेव्स कमीशन’ के अंतर्गत इसे बनाया गया था। 10 फरवरी, 1921 को इसका शिलान्यास हुआ था और 2 फरवरी, 1931 को इसका उद्घाटन किया गया था। जबकि भारत 1947 में आज़ाद हुआ। आज़ादी से 16 वर्ष पहले ही बन कर तैयार हुए इस स्मारक में स्वतंत्रता सेनानियों के नाम हैं ही नहीं। इसीलिए, इस पर 61,000 मुस्लिम सैनिकों के नाम होने की बात झूठी है। कई बार ये दावा शेयर होता रहा है।

पुलिस की 17 साल की नौकरी में 24 रेप, 12 महिलाओं को बनाया सेक्स स्लेव: पीड़िताओं पर करता था पेशाब, नंगा कर घर साफ करवाता

इंग्लैंड की राजधानी लंदन (London, England) में ब्रिटिश पुलिस डिपार्टमेंट ने डेविड कैरिक नाम के अपने अधिकारी को बर्खास्त कर दिया है। डेविड पर 12 महिलाओं के साथ रेप का दोष सिद्ध हुआ है। बर्खास्त पुलिस अधिकारी पर साल 2003 से 2023 के बीच बलात्कार के 24 मामलों सहित कुल 49 केस दर्ज हुए थे। अब डेविड को ब्रिटेन के सबसे बड़े सेक्स अपराधियों में गिना जा रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बर्खास्त 48 वर्षीय पुलिस अधिकारी डेविड कैरिक लंदन की मेट्रोपॉलिटन पुलिस में साल 2001 से तैनात हुआ था। साल 2009 से वह संसदीय और राजनीतिक सुरक्षा कमान में काम कर रहा था। पुलिस में आने से पहले डेविड ब्रिटिश फ़ौज में पोस्टेड था। रेप के आरोपों के बाद साल 2021 में डेविड को गिरफ्तार किया गया था। उसके बाद से वह जेल में है। उसे पुलिस फोर्स से टर्मिनेट कर दिया गया है।

डेविड का सबसे पहले भंडाफोड़ उसकी गर्लफ्रेंड ने किया था। अदालत में डेविड ने कुल 49 यौन अपराध कबूल किए। इनमें से 24 अपराध रेप के हैं। हालाँकि, अलग-अलग रिपोर्ट में डेविड द्वारा कबूल किए गए गुनाहों की संख्या अलग-अलग हैं। कुछ जगहों पर उसके द्वारा किए गए यौन अपराधों की संख्या 80 से भी अधिक बताई जा रही है। इस खुलासे के बाद ब्रिटिश पुलिस सवालों के घेरे में आ गई है।

डेविड महिलाओं को सोशल डेटिंग ऐप के साथ-साथ सोशल गेदरिंग में फँसाता था। वह महिलाओं को लुभाने के लिए अपने पद का इस्तेमाल करता था। जब महिलाओं उसके जाल में फँस जाती थीं तो वह उन्हें सेक्सुअली प्रताड़ित करता था। इतना ही नहीं, उन्हें चुप कराने के लिए भी वह अपने पद का डर दिखाता था। डेविड पीड़िताओं को यह कह चुप करा देता था कि वह एक पुलिसकर्मी है और पीड़िताओं की बातों पर कोई विश्वास नहीं करेगा।

डेविड महिलाओं को ‘सेक्स स्लेव’ (यौन गुलाम) की तरह ट्रीट करता था। वह महिलाओं को अपमानित करता था और उन्हें गुलाम कहता था। डेविड ने कुछ पीड़ितों को सीढ़ियों के नीचे एक छोटी अलमारी में 10 घंटे तक बिना खाना दिए रखा। वहीं, कुछ महिलाओं को उसने बेल्ट से पीटा और उसके घर को नंगा होकर साफ करने को मजबूर किया।

डेविड पर कई तरह आपराधिक मामले होने के बाद भी उसे एलिट आर्म्ड यूनिट और संसदीय एवं कूटनीतिक आर्म्ड कमांड ने तैनात किया गया। पिछले साल दिसंबर में उसकी शुरुआती दोष सिद्ध होने के बाद कोर्ट ने डेविड का वेतन रोकने का आदेश दिया था। अब उसे बर्खास्त कर दिया गया है।

इंग्लैंड के महिला संगठनों ने दोषी डेविड कैरिक के साथियों और सीनियरों पर सब कुछ जानते हुए उसे बचाने का आरोप लगाया है। महिला संगठनों ने पुलिस को ‘संकट संस्थान’ कहा है। मामलों के उजागर होने पर अब ब्रिटेन का पुलिस बल अन्य यौन अपराधों की गंभीरता से जाँच कर रहा है।

बताया जा रहा है कि 1000 शिकायतों में लगभग 800 अधिकारी आरोपित हैं, जिन पर जल्द ही फैसला लिया जाएगा। डेविड कैरिक की करतूत पर ब्रिटिश प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने भी दुःख जताया है। उन्होंने कहा कि ऐसे व्यक्ति को पुलिस में होना ही नहीं चाहिए था।

प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने स्वीकार किया है कि डेविड की हरकत से आम लोगों का पुलिस में विश्वास कम हो गया है। लंदन की मेट्रोपॉलिटन पुलिस के कमिश्नर मार्क राउली ने भी डेविड की करतूत उजागर होने के बाद आम लोगों से माफी माँगी है।

नेपाल से सरकारी खर्च पर आएगा UP के 4 युवकों का पार्थिव शरीर, CM योगी ने परिजनों को ₹5 लाख देने का किया ऐलान: विमान हादसे में हुई थी मौत

नेपाल विमान हादसे में उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में रहने वाले 4 युवकों की मौत हो गई थी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हादसे का शिकार हुए युवकों के परिजनों को 5-5 लाख रुपए की आर्थिक सहायता का ऐलान किया।

मृतकों के परिजनों को आर्थिक सहायता देने के संबंध में जारी बयान में कहा गया है, “मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ महाराज ने नेपाल में हुई विमान दुर्घटना में जनपद गाजीपुर के सभी दिवंगतों के आश्रितों को 5-5 लाख रुपए की सहायता राशि प्रदान करने के निर्देश दिए हैं। महाराज जी ने कहा है कि सभी पार्थिव शरीरों को आश्रितों के घर तक पहुँचाने का खर्च भी उत्तर प्रदेश सरकार स्वयं वहन करेगी।”

दरअसल, रविवार (15 जनवरी, 2023) को नेपाल के पोखरा में यात्री विमान क्रैश हो गया था। इस विमान में सवार सभी 72 लोगों की मौत हो गई। इसमें गाजीपुर के अलावपुर सिपाह और धरवा गाँव के रहने वाले 4 युवकों की मौत हो गई थी। मृतकों की पहचान अभिषेक कुशवाहा, सोनू जायसवाल, विशाल शर्मा और अनिल कुमार राजभर के रूप में हुई।

बता दें कि मृतकों के शव लेने के लिए प्रशासन ने सोमवार (16 जनवरी, 2023) को परिजनों को सड़क मार्ग से रवाना किया था। इस संबंध में जानकारी देते हुए गाजीपुर की जिलाधिकारी आर्यका अखौरी ने कहा था कि नेपाल विमान दुर्घटना का शिकार हुए 4 युवकों के परिजनों और ग्राम प्रधान को प्रशासन ने सड़क मार्ग से नेपाल भेजा है। आवश्यक कार्रवाई के बाद शव परिजनों को सौंपे जाएँगे। शवों को सड़क मार्ग से जिले में लाया जाएगा। इसमें 2-3 दिन का समय लग सकता है।

उन्होंने यह भी कहा है कि भारत-नेपाल सीमा पर परमिट के लिए पीड़ित परिवारों के साथ जिला प्रशासन के दो अधिकारियों को भी भेजा गया है। नेपाल में स्थित भारतीय दूतावास के अधिकारी भी इसमें सहयोग कर रहे हैं। मृतकों के शवों को काठमांडू ले जाया जा रहा है। जरूरत पड़ने पर उनकी पहचान के लिए डीएनए टेस्ट भी होगा। मृतकों के परिजनों को मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष व अन्य सरकारी योजनाओं के अंतर्गत उचित सहायता दी जाएगी।

‘मुल्ला जी ने बगल में बिठाया और छूने लगा छाती’: जिसने ट्रेन में पिटाई को ‘जय श्रीराम’ से जोड़ा, उसकी करतूत पीड़िता ने बताई; गिरफ्तार हुआ आसिम हुसैन

ट्रेन में छेड़खानी करने पर हुई पिटाई को ‘जय श्रीराम’ से जोड़ने वाला आसिम हुसैन गिरफ्तार कर लिया गया है। पीड़ित लड़की ने अपनी शिकायत में बताया है कि हुसैन ने ट्रेन में उसे अपने पास बैठने को जगह दी और फिर उसकी छाती को छूने लगा था। इसके बाद यात्रियों ने उसकी पिटाई की थी। घटना 12 जनवरी 2023 को पद्मावत एक्सप्रेस में हुई थी।

पीड़ित लड़की शाहजहाँपुर की है। नोएडा में अपने परिवार के साथ रहती है। 12 जनवरी की रात वह शाहजहाँपुर जाने के लिए पद्मावत एक्सप्रेस के जनरल डब्बे में गाजियाबद से अपने भाई के साथ सवार हुई थी। लड़की ने शिकायत में कहा है कि डिब्बे में काफी भीड़ थी। बैठने की जगह नहीं थी। वह डिब्बे की गैलरी में खड़ी थी। इसी दौरान उसे पास वाली सीट पर बैठे हुसैन ने जगह दी थी।

लड़की ने बताया है, “पास वाली सीट पर एक दाढ़ी वाले मुल्ला जी बैठे थे। उन्होंने कहा कि यहाँ मेरे पास बैठ जाओ। उन्होंने थोड़ी जगह देकर मुझे अपनी पास बैठा लिया था। यात्रा के दौरान मुल्ला जी मुझे छेड़ने लगा। उसकी हरकतें बढ़ने लगी और उसने मेरा सीना पकड़ना शुरू कर दिया।” पीड़िता के मुताबिक 40-45 साल के मुल्ला जी की इस ​​हरकत से उसे रोना आ गया था। इसके बाद युवकों ने हुसैन की पिटाई की थी।

14 जनवरी AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी और कॉन्ग्रेस नेता इमरान प्रतापगढी ने हुसैन का वीडियो शेयर कर दावा किया था कि ‘जय श्रीराम’ न बोलने के चलते मुस्लिम कारोबारी की पिटाई की गई। मुरादाबाद के रेल पुलिस उपाधीक्षक ने इन दावों को खारिज करते हुए बताया था कि ट्रेन में छेड़छाड़ करने पर लोगों ने हुसैन की पिटाई की थी।

पुलिस को दी शिकायत

पुलिस के मुताबिक आमिर हुसैन की हरकतें सामने बैठे दो युवक भी देख रहे थे। उन्होंने आसिम की पिटाई कर दी। इस दौरान आसिम ने माफी भी माँगी। ट्रेन से उतरने के बाद आमिर हुसैन 24 घंटे बाद AIMIM कार्यकर्ताओं के साथ मुरादाबाद GRP थाने आया और ‘जय श्रीराम’ नहीं बोलने पर पिटाई की शिकायत दर्ज कराई। उसने पैसे लूटने का भी आरोप लगाया। मिल्लत टाइम्स और ABP न्यूज़ जैसी मीडिया संस्थानों ने भी उसके दावों को हवा देने का काम किया।

पुलिस ने हुसैन की पिटाई करने वाले दोनों युवकों का चालान करते हुए पहले ही दिन इस मामले में धार्मिक एंगल को खारिज कर दिया था। बाद में छेड़छाड़ की पीड़िता ने शाहजहाँपुर से आकर GRP मुरादाबाद में आमिर हुसैन के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई। इसके बाद हुसैन को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस उसे पीटने वाले युवकों की भी तलाश कर रही है।

तो यह भारत जोड़ो यात्रा पर ‘रैप’ नहीं, राहुल गाँधी को ‘ट्रोल’ कर रही अनम अली: बताया- ट्वीट करती रही पर किसी कॉन्ग्रेसी ने नहीं दिया जवाब

‘भारत जोड़ो यात्रा’ (Bharat Jodo Yatra) पर रैप ने अनम अली (Anam Ali) को सोशल मीडिया में ‘कुख्यात’ कर दिया है। अब अपने रैप पर मिली प्रतिक्रियाओं को लेकर उन्होंने निराशा जताई है। साथ ही एक वीडियो संदेश में बताया है कि वह कॉन्ग्रेसी हैं। कॉन्ग्रेस शासित छत्तीसगढ़ की रहने वाली हैं। लेकिन जब छत्तीसगढ़ की एक यूनिवर्सिटी से उनका आंसर शीट गायब हो गया तो राहुल गाँधी (Rahul Gandhi) सहित किसी कॉन्ग्रेसी ने उनकी सुध नहीं ली। वे ट्वीट करते-करते थक गईं, लेकिन किसी ने जवाब नहीं दिया।

अनम ने मंगलवार (17 जनवरी 2023) को ‘ट्रोलर्स के लिए मेरा मैसेज’ कैप्शन के साथ एक वीडियो संदेश ट्वीट किया है। इसमें वह कह रहीं हैं, “मेरा नाम अनम अली है। मैं रायपुर छत्तीसगढ़ से हूँ। मैंने राहुल गाँधी सर के लिए जो लिखा उसे न तो स्पीच कहा जा सकता है और ना ही गाना। वो ‘भारत जोड़ो यात्रा’ रैप ही है। मैंने अपनी वीडियो में कई बार यह बताया है कि न तो मैं टेक्निकल सिंगर हूँ और न ही कोई टेक्निकल रैपर।”

उन्होंने आगे कहा है, “मैंने कभी भी किसी की बुराई नहीं की। वो काम तो आप लोगों का है। कुछ रचनात्मक काम करिए। आप लोग मेरी बुराई करेंगे तो मैं बुरी नहीं दिखूँगी। आप लोग ही बुरे दिखेंगे। आप लोग मेरे बारे में गूगल सर्च कर सकते हैं। मैं हिंदू लॉ गोल्ड मेडलिस्ट हूँ। जब मेरी आंसर शीट पंडित रविशंकर शुल्क यूनिवर्सिटी वालों ने गुमा दी थी। तब, मैंने कुछ RTI के माध्यम से बड़ी मुश्किल से कुछ आंसर शीट निलकवाईं थीं। लेकिन, यूनिवर्सिटी वालों ने उनकी जाँच भी नहीं की।”

अनस ने यह भी कहा है, “मैं शुरू से कॉन्ग्रेसी हूँ। इसलिए, इस मैटर को लेकर मैंने राहुल गाँधी सर और कई कॉन्ग्रेस लीडर्स को कई ट्वीट किए। लेकिन कभी किसी ने कोई रिप्लाई नहीं किया। फिर भी, भारत जोड़ो यात्रा पर मैंने चार लाइन क्या लिख दीं, आप लोग मुझे ट्रोल करने लगे।”

इस वीडियो में उन्होंने आगे कहा है, “इंडिया टीवी को मैं इतना कहना चाहूँगी कि आप लोगों का इतना पुराना चैनल है। इसके बाद आप भी लोगों ने इस तरह की न्यूज लिखी और उसे पब्लिश भी कर दिया। आप लोग उल्टा मुझे ही ट्रोल करने लग गए। आप लोगों को अगर कुछ न्यूज लिखनी है तो उसके बारे में पहले मेरे से पूछना चाहिए था। आप लोग अपने मन से कुछ भी लिख दिए।”

अनस ने यह भी कहा है, “आप लोगों की भी बहन-बेटियाँ होगीं। ट्रोल करने के पहले सोचा करिए। आप लोगों को प्रॉब्लम है कि मैं अम्बेडकरवादी हूँ। आप लोगों को यह भी प्रॉब्लम है कि मैं मुस्लिम हूँ। लेकिन मेरे मन में आप लोगों के लिए कोई नफरत नहीं है। आप लोगों का दिमाग बहुत छोटा है। थोड़ा समझदार बनिए। जिन लोगों ने मेरे ‘भारत जोड़ो’ रैप की तारीफ की उन्हें मेरा धन्यवाद।”

इससे पहले उन्होंने ‘भारत जोड़ो यात्रा’ पर रैप जारी किया था, जिसने नेटिजन्स को ढिंचैक पूजा की याद दिला दी थी। मंगलवार की सुबह अपलोड किए इस वीडियो में वह बिना किसी लय के रैप को बस पढ़ती नजर आईं थी। इसके बाद वह ट्रोल होने लगीं। देखते-देखते उनके कमेंट बॉक्स में मीम्स और मजाकिया कमेंट्स की बाढ़ सी आ गई। कुछ यूजर्स ने ऐसे मीम शेयर किए जैसे अनम का रैप सुनकर उनकी कानों से खून आ रहा है। कुछ ने उल्टी आने वाले इमोजी को शेयर करके अपनी प्रतिक्रिया दी।

अनम अली ने अपने प्रोफाइल में भी खुद को कॉन्ग्रेस समर्थक बताया है। वह खुद को आंबेडकरवादी भी बताती हैं। छत्तीसगढ़ के रायपुर की रहने वाली अनम सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय हैं और लगातार वीडियो अपलोड करती रहती हैं। 6 दिसंबर 2022 को बाबा साहेब आंबेडकर पर भी रैप अपलोड किया था।

अब ‘ट्रोलर्स के लिए संदेश’ वाले वीडियो में उन्होंने जिस तरह आंसर शीट गायब होने के मामले में कॉन्ग्रेसियों की उपेक्षा का जिक्र किया है, उससे तो यही लगता है कि ‘भारत जोड़ो यात्रा’ पर ‘कान से खून, मुँह से उलटी…’ उन्होंने यूँ ही नहीं करवाया है। शायद इसलिए बिना तैयारी गाए रैप को जारी करने के बाद उन्होंने उसे अधिक से अधिक शेयर करने और राहुल गाँधी तक पहुँचाने की अपील की। यह अनम अली की ‘कुख्यात’ होने की मंशा कम, राहुल गाँधी को ट्रोल करने, उन्हें उनकी करनी याद दिलाने की मंशा अधिक दिखती है।

दूसरी बार माँ बनने पर इंक्रीमेंट, तीसरे बच्चे पर डबल इंक्रीमेंट, IVF प्रेगनेंसी पर ₹3 लाख: जनसंख्या बढ़ाने के लिए भारत का एक राज्य ऐसे कर रहा प्रोत्साहित

1961 के बाद पहली बार चीन की जनसंख्या में कमी दर्ज की गई है। भारत के जल्द ही दुनिया के सर्वाधिक आबादी वाला देश बनने की उम्मीद है। देश में जनसंख्या नियंत्रण पर चर्चा हो रही है। लेकिन एक राज्य ऐसा भी है जो प्रजनन दर घटने से चिंतित है। आबादी बढ़ाने के लिए लोग प्रोत्साहित हों इसके लिए स्कीम लागू कर रही है। यह राज्य है सिक्किम।

सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग लोगों को अधिक बच्चे पैदा करने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। राज्य सरकार की तरफ से इसके लिए एक स्कीम भी तैयार की गई है। इसके तहत स्थानीय समुदाय के लोगों को आबादी बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। सीएम तमांग की तरफ से की गई घोषणा के तहत माँ बनने वाली सरकारी महिला कर्मचारियों को इंक्रीमेंट दिया जाएगा। आम लोगों को भी आर्थिक सहायता दी जाएगी। सिक्किम में पहले से ही माता-पिता बनने वाले दंपती को अतिरिक्त अवकाश प्राप्त है।

सिक्किम के जोरथांग में रविवार (15 जनवरी 2023) को माघे संक्रांति (मकर संक्रांति) समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग ने सिक्किम में स्थानीय जातीय समुदायों की कम होती आबादी पर चिंता प्रकट की। उन्होंने कहा कि हमें महिलाओं सहित स्थानीय लोगों को अधिक बच्चे पैदा करने के लिए प्रोत्साहित कर कम होती प्रजनन दर को रोकने की जरूरत है। इस दौरान उन्होंने राज्य सरकार की तरफ से तैयार किए गए एक प्रस्ताव का जिक्र किया। प्रस्ताव के अनुसार दूसरी बार माँ बनने पर राज्य सरकार की महिला कर्मचारियों को इंक्रीमेंट मिलेगा। तीसरे बच्चे के जन्म पर डबल इंक्रीमेंट दिया जाएगा।

सीएम ने कहा कि जातीय समुदाय के आम लोगों को भी बच्चे पैदा करने पर आर्थिक मदद मिलेगी। स्वास्थ्य विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा तैयार किए गए विवरण के आधार पर उन्हें वित्तीय मदद दी जाएगी। वहीं, प्राकृतिक रूप से गर्भ धारण करने में असमर्थ महिलाओं की मदद के लिए अस्पतालों में आईवीएफ (IVF) सुविधा दी जा रही है। सीएम ने कहा कि आईवीएफ के जरिए माँ बनने वाली महिलाओं को 3 लाख रुपए दिए जाएँगे।

सीएम तमांग ने बताया कि आईवीएफ तकनीक से राज्य में अब तक 38 महिलाएँ गर्भधारण कर चुकी हैं। इनमें से कुछ माँ भी बन चुकी हैं। सीएम ने जानकारी दी कि उनकी सरकार पहले से ही माँ बनने वाली महिलाओं को 365 दिन का मातृत्व अवकाश और पुरुष कर्मचारियों को 30 दिन का पितृत्व अवकाश दे रही है। बता दें कि वर्तमान में सिक्किम की जनसंख्या सात लाख से भी कम है। 80 प्रतिशत आबादी जातीय समुदायों की है। लेकिन पिछले कुछ सालों में उनकी संख्या लगातार कम होती जा रही है।