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किनके पैसों से नेपाल से लगे UP के इलाकों में चल रहे मदरसे? जकात-चंदा देने वालों का पता नहीं, फंडिंग की जाँच के आदेश

नेपाल से सटे उत्तर प्रदेश के जिलों में कुकुरमुत्ते की तरह उग आए अवैध मदरसों को लेकर पिछले दिनों ऑपइंडिया ने ग्राउंड रिपोर्टिंग की थी। इसका असर अब दिखने लगा है। यूपी की योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) की सरकार ने इन मदरसों की जाँच के आदेश दिए हैं।

राज्य सरकार ने सीमावर्ती जिलों के जिलाधिकारियों से कहा है कि वे उन गैर-मान्यता प्राप्त मदरसों के वित्त पोषण के स्रोतों की जाँच करें, जिन्होंने अपने संस्थानों को चलाने के लिए जकात (दान से पैसा) को अपना प्राथमिक स्रोत घोषित किया है।

बता दें कि इससे पहले योगी सरकार ने राज्य में गैर मान्यता प्राप्त मदरसों की पहचान करने के लिए पिछले साल सर्वेक्षण कराया था। लगभग दो महीने तक मदरसों के इस सर्वेक्षण की रिपोर्ट 15 नवंबर 2022 को सरकार को सौंपी गई थी।

यूपी के अल्पसंख्यक कल्याण, मुस्लिम वक्फ और हज मामलों के कैबिनेट मंत्री धर्मपाल सिंह ने कहा, “नेपाल सीमा के क्षेत्रों में कई मदरसे हैं, जिन्होंने जकात (दान) को अपने धन के स्रोत के रूप में बताया है, लेकिन सर्वे टीमों ने पाया कि इन इलाकों में रहने वाले लोग गरीब हैं और जकात देने में सक्षम नहीं हैं।”

इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए यूपी के मंत्री धर्मपाल सिंह ने कहा कि ऐसे मदरसों की पहचान की गई है और उनके धन के स्रोत की जाँच के लिए निर्देश जारी किए गए हैं। ये मदरसे उन लोगों के नाम का खुलासा नहीं कर रहे हैं जो उन्हें जकात और दान देते हैं।

धर्मपाल ने कहा, “ऐसे मदरसे बड़ी संख्या में हैं। ऐसा लगता है कि इन मदरसों को बाहर से पैसा मिल रहा है। कोई बाहर से उन्हें फंड क्यों देगा? हम नहीं चाहते कि हमारे बच्चों का गलत इस्तेमाल हो। इसकी संभावनाएँ हैं। इसलिए उनके धन के स्रोत की फिर से जांच की जा रही है।”

नेपाल की सीमा से लगे उत्तर प्रदेश के जिन जिलों में ऐसे मदरसे स्थित हैं, उनमें सिद्धार्थ नगर, बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर, महराजगंज आदि जिले शामिल हैं। बता दें कि 30 अगस्त 2022 को राज्य में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने गैर-मान्यता प्राप्त मदरसों का सर्वेक्षण करने का निर्देश दिया था।

10 सितंबर 2022 से शुरू होकर लगभग दो महीने तक चले सर्वेक्षण के दौरान यूपी राज्य मदरसा शिक्षा बोर्ड द्वारा बिना मान्यता लिए कुल 8,449 मदरसे संचालित हो रहे थे। गैर-मान्यता प्राप्त मदरसों की अधिकतम संख्या 550 मुरादाबाद जिले में पाई गई। इसके बाद सिद्धार्थ नगर (525) और बहराइच (500) का स्थान है।

पूरे उत्तर प्रदेश में 25,000 से अधिक मदरसे हैं और उनमें से 16,513 से अधिक को यूपी बोर्ड ऑफ मदरसा एजुकेशन द्वारा मान्यता प्राप्त हैं। इन मान्यता प्राप्त मदरसों में 19 लाख से अधिक छात्र नामांकित हैं।

बता दें कि नेपाल सीमा से सटे यूपी के जिलों में तेजी से डेमोग्राफिक बदलाव हो रहे हैं। इसके साथ ही इन क्षत्रों में मस्जिदों और मजारों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। ऐसा नहीं है कि ये सिर्फ भारत में हो रहा है, ऐसे क्षेत्रों से लगते नेपाल वाले हिस्सों में भी ऐसा ही हो रहा है। नेपाल के कई गाँव अब मुस्लिम बहुल बन चुके हैं।

भाजपा की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा को दिल्ली पुलिस से मिला हथियार का लाइसेंस, इस्लामी कट्टरपंथियों से है जान को खतरा

इस्लाम के पैगंबर मुहम्मद (Prophet Muhammad) को लेकर दिए बयान को लेकर इस्लामी कट्टरपंथियों के निशाने पर आईं भाजपा की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा (Nupur Sharma) को हथियार का लाइसेंस दिया गया है। पुलिस (Delhi Police) ने हथियार का यह लाइसेंस उन्हें आत्मरक्षा के लिए जारी किया है।

बता दें कि पैगंबर मुहम्मद को आधार बनाकर पिछल साल देश भर में बड़े पैमाने पर हिंसा को अंजाम दिया गया था। नूपुर शर्मा को भी इस्लामवादियों द्वारा लगातार जान से मारने की धमकियाँ दी जाती रही हैं। इससे पहले कट्टरपंथियों ने कई हत्याओं को अंजाम भी दिया है।

नूपुर शर्मा का समर्थन करने के लिए राजस्थान के उदयपुर में दो इस्लामी कट्टरपंथियों ने दर्जी कन्हैया लाल की गला रेतकर हत्या कर दी थी। ये दोनों कट्टरपंथी ग्राहक बनकर उनके दुकान में घुसे थे। वहीं, अमरावती में उमेश कोल्हे नाम के उनके मुस्लिम जानकार यूसुफ ने साजिश रचकर उनकी हत्या कर दी थी। ऐसे कई मामले पूरे देश भर आए थे।

टीवी डिबेट के दौरान नूपुर शर्मा ने एक मुस्लिम शख्स द्वारा हिंदू देवता को लेकर की गई टिप्पणी के बाद नूपुर शर्मा ने यह टिप्पणी की थी। नूपुर शर्मा ने पैगंबर मुहम्मद और उनकी तीसरी पत्नी, आयशा को लेकर टिप्पणी की थी।

नूपुर शर्मा ने जो कहा था वह इस्लाम की धार्मिक किताबों में भी है और इस्लामी प्रचारक अपनी तकरीरों में भी वहीं बताते रहे हैं। नूपुर शर्मा ने कहा था कि पैगंबर मुहम्मद के बारे में उनकी टिप्पणी ‘भगवान शिव का अपमान’ किए जाने की प्रतिक्रिया के रूप में थी, क्योंकि वह इसे बर्दाश्त नहीं कर सकीं। इसके बावजूद भारत को बदनाम करने के लिए कट्टरपंथियों ने हिंसा की।

हालाँकि, मामला बढ़ने के बाद भाजपा ने उन्हें पार्टी से निलंबित कर दिया। नूपुर शर्मा ने अपनी टिप्पणी के लिए माफी भी माँ ली थी। इसके बावजूद कट्टरपंथी उन्हें लगातार जान से मारने की धमकी दे रहे थे। पूर्व बीजेपी प्रवक्ता के खिलाफ मुंबई, हैदराबाद और पुणे में धार्मिक भावनाएँ भड़काने के आरोप में मामले दर्ज किए गए हैं।

कथित ईशनिंदा के मामले में पाकिस्तान के पाकिस्तान के आतंकी संगठन TLP के समर्थकों द्वारा 50 लाख रुपए का इनाम घोषित करने के बाद, हैदराबाद स्थित AIMIM (इंकलाब) के एक सदस्य ने शर्मा की हत्या करने पर इनाम घोषित किया था।

हैदराबाद स्थित एक स्थानीय पार्टी AIMIM (इंकलाब) ने कथित तौर पर नूपुर शर्मा की हत्या करने वाले को 1,00,00,000 रुपए का इनाम देने का ऐलान किया था। लोकल पार्टी के नेता कवी अब्बासी का नूपुर शर्मा को धमकी देते हुए और हिन्दू धर्म को लेकर अपमानजनक टिप्पणी करते हुए वीडियो सामने आया था। इसमें वो बीजेपी और शर्मा को ‘सफेदपोश वेश्या’ करार दे रहा था।

खतरे को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने नूपुर शर्मा के खिलाफ दर्ज मामलों को एक साथ क्लब कर दिया था और उसकी सुनवाई दिल्ली में करने का आदेश दिया था। इतना ही नहीं, उच्चतम न्यायालय ने उन्हें गिरफ्तार से भी अंतरिम सुरक्षा दी थी। दिल्ली पुलिस भी उन्हें और उनके परिवार को सुरक्षा दे रही है।

‘उसके कहने पर कबूला इस्लाम, मौलाना ने निकाह कराया’ : आदिल के इनकार से टूटीं राखी सावंत, बताया- ‘मैंने खुद फोटो वायरल की’

बॉलीवुड अभिनेत्री और बिग बॉस की कंटेस्टेंट रह चुकी राखी सावंत एक बार फिर से सुर्ख़ियों में है। बुधवार (11 जनवरी 2023) को सोशल मीडिया पर राखी और उनके ब्वॉयफ्रेंड आदिल खान दुर्रानी की निकाह की तस्वीर वायरल हुई थी। बाद में राखी ने दावा किया कि उन्होंने ही निकाह की फोटो वायरल की थी, क्योंकि आदिल इस निकाह से इनकार कर रहा था। राखी ने एक यूट्यूब चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा कि उन्होंने हराम न करके हलाल किया। उन्होंने कहा कि फिर भी आदिल क्यों निकाह से इनकार कर रहा है, उन्हें समझ नहीं आ रहा है।

वीडियो में आदिल के निकाह से इनकार करने के बारे में पूछे जाने पर राखी कहती हैं, ”क्या वो पागल हैं। मैंने निकाह के, कोर्ट के सारे प्रूफ दे दिए हैं। मौलाना ने शादी कराई है, ये भी प्रूफ दे दिए हैं। इससे ज्यादा और क्या प्रूफ दे सकती हूँ। मैंने अपना सबकुछ छोड़छाड़ कर उसपर भरोसा करके उससे शादी की है। मुझसे आदिल ने एक साल तक निकाह के बारे में चुप रहने को कहा था। मैं सात महीने तक चुप रही, लेकिन मेरे बिग बॉस जाने के बाद कुछ ऐसा हुआ जो मेरे बर्दाश्त के बाहर था। इसलिए मैंने फोटो वायरल कर दिया। मैं बहुत ज्यादा डर गई थी। नहीं चाहती थी कि उस तरह के केस हो, जो आजकल बहुत सारे हो रहे हैं।” 

वह आगे कहती हैं, ”आदिल मुझसे प्यार करता है लेकिन उसे उसकी फैमिली और न जाने कहाँ-कहाँ से दबाव आ रहा है। लेकिन इसमें मेरा क्या कसूर है। मैंने अपना नाम बदला। मैंने हराम न करके हलाल किया। हराम हर कोई करता है। मुझे हराम नहीं करना था। मैंने हलाल किया। मैं कहा गलत हूँ। जो हराम करे, एक-एक को छोड़ दे, वो चलेगा। लेकिन जो हलाल करे, वो गुनाहगार है क्या। मेरे घर में शादी हुई है और भारतीय कानून के हिसाब से शादी हुई है। BMC के अधिकारी ने आकर खुद पेपर पर साइन किए थे।”

राखी आगे कहती हैं, “एक तरफ मेरी माँ को ब्रेन कैंसर है और वह अस्पताल में भर्ती हैं दूसरी तरफ आदिल हमारी शादी से इनकार कर रहा है।” बकौल राखी, उन्होंने आदिल के कहने पर ही इस्लाम धर्म अपनाया। लेकिन अब वह शादी से इनकार कर रहा है। राखी ने कहा कि फोन करने पर वह इस बारे में कुछ भी बोलने से इनकार कर देते हैं।

वहीं इससे पहले बुधवार (11 जनवरी 2023) को बॉलीवुड के फोटोग्राफर ‘विरल भयानी’ ने राखी सावंत और आदिल की फोटो इंस्टाग्राम पर डाली थी और दोनों को शादी की बधाई दी थी। इसके साथ ही उन्होंने फोटो के कैप्शन में लिखा था कि दोनों ने गुपचुप तरीके से शादी कर ली है। हालाँकि बुधवार को ही बाद में पता चला कि ये फोटोज राखी ने ही वायरल किए थे। वायरल हुई तस्वीरों में शादी का प्रमाण पत्र भी दिख रहा है, जिसमे दोनों की शादी की तारीख 2 जुलाई, 2022 है। साथ ही इसमें राखी सावंत का नाम ‘फातिमा’ लिखा हुआ है।

सील हो सकता है AAP का ऑफिस: 10 दिन में ₹164 करोड़ जमा करने का निर्देश, सरकारी पैसे से राजनीतिक प्रचार का मामला

दिल्ली में सरकार चला रही आम आदमी पार्टी (AAP) के सामने दफ्तर सील होने का खतरा पैदा हो गया है। सूचना और प्रचार निदेशालय (DIP) ने करीब 164 रुपए जमा करने का निर्देश पार्टी को दिया है। सूत्रों के अनुसार इसके लिए आप को 10 दिनों का समय दिया गया है। ऐसा नहीं होने पर दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है। यह मामला सरकारी पैसे से राजनीतिक प्रचार करने से जुड़ा है।

दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने दिसंबर 2022 में 97 करोड़ रुपए आप से वसूलने के निर्देश दिए थे। इसे देखते हुए डीआईपी ने 163.62 करोड़ रुपए जमा करने का आदेश दिया है। बताया जा रहा है कि इसमें से 99.31 करोड़ रुपए मार्च 2017 तक का मूलधन है। 64.31 करोड़ रुपए इस पर ब्याज लगाया गया है।

रिपोर्ट्स की मानें तो यदि आम आदमी पार्टी ने तय वक्त पर राशि का भुगतान नहीं किया तो उन पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है। कार्रवाई के तहत AAP की संपत्तियाँ कुर्क हो सकती हैं। यहाँ तक कि दिल्ली स्थित आम आदमी पार्टी का मुख्यालय भी सील किया जा सकता है।

सूचना और प्रचार निदेशालय ने 2017 में आम आदमी पार्टी को 42.26 करोड़ रुपए सरकारी खजाने को तुरंत जमा करने और 54.87 करोड़ रुपए की बकाया राशि विज्ञापन एजेंसियों या संबंधित प्रकाशनों को 30 दिनों के भीतर सीधे भुगतान करने का निर्देश दिया था। लेकिन, AAP ने आदेशों का पालन नहीं किया।

इसके बाद उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने मुख्य सचिव को निर्देश दिए थे कि वे सितंबर 2016 के बाद के सभी विज्ञापनों को कमेटी ऑन कंटेंट रेग्युलेशन इन गर्वनमेंट एडवरटाइजिंग (CCRGA) के पास जाँच के लिए भेजें। साथ ही यह भी सुनिश्चित करने को कहा था कि सभी विज्ञापन सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुरूप हैं या नहीं।

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देशों के बाद CCRGA का गठन हुआ था। उसने आम आदमी पार्टी को 97 करोड़ 14 लाख रुपए ब्याज के साथ सरकारी खजाने में जमा करने का आदेश दिया था। कमिटी ने अपने आदेश में कहा था कि राजनीतिक विज्ञापनों को सरकारी विज्ञापन के तौर पर प्रकाशित किया गया, जिससे एक राजनीतिक दल को लाभ मिला। यह सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के आदेशों की अवमानना है।

विश्व एक व्यायामशाला है, जहाँ हम खुद को मजबूत बनाने के लिए आते हैं: स्वामी विवेकानंद

भारतवर्ष के महानतम व्यक्तित्वों में से एक, जो गुरु बनने से पहले एक कर्तव्यनिष्ठ शिष्य थे, एक महान विचारक, सेवक, समाज सुधारक होने के साथ सनातन धर्म के आधुनिक विश्लेषक तथा ध्वजवाहक भी थे, और ऐसे तमाम अन्य विशेषणों से सुसज्जित जीवन के स्वामी जो आगे चलकर सभी के प्रिय स्वामी विवेकानंद कहलाए। वह भारतीय ज्ञान परंपरा के वो मील के पत्थर हैं, जहाँ पहुचने के बाद जीवन के सारे द्वंद्वों का उत्तर अपने आप स्पष्ट हो जाता है। उनका अनुकरण करने पर जीवन, धर्म और न्याय का अर्थ अपनी पूरे सापेक्षता के साथ स्पष्ट हो जाता है।

स्वामी विवेकानंद को सनातन धर्म और उसके आधुनिक स्वरूप का परस्पर ज्ञान था। उन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन नैतिक और मानव कल्याणकारी विचारों के प्रचार-प्रसार में व्यतीत किया। उनके उन्नत प्रयासों के बदौलत भारत और भारतीयता का वैश्विक संवर्धन तो हुआ ही, साथ ही साथ विश्व पटल पर उचित स्थापत्य भी प्राप्त हुआ।

आज भी हर भारतीय के मन-मस्तिष्क में 11 सितंबर सन् 1893 में अमेरिका में आयोजित विश्व धर्म संसद में उनके द्वारा दिया गया ओजस्वी भाषण जीवित है। स्वामी विवेकानंद ने विश्व धर्म संसद में सनातन धर्म का प्रतिनिधित्व करते हुए भारत के हिंदू धर्म और उसके गौरवशाली इतिहास से पूरे विश्व समुदाय को परिचित करवाया था। उन्होंने अपने ऐतिहासिक भाषण की शुरुआत ही हिंदी में “अमेरिका के भाइयों और बहनों” से की थी और कहा,

“मुझे ऐसे धर्म पर गर्व है, जिसने दुनिया को सहिष्णुता और सार्वभौमिक स्वीकृति दोनों सिखाया है। हम न केवल सार्वभौम सहिष्णुता में विश्वास करते हैं, बल्कि हम सभी धर्मों को सच मानते हैं।”

उनके इस प्रेरणादायक भाषण पर आर्ट इंस्टीट्यूट ऑफ शिकागो में पूरे दो मिनट तक तालियाँ बजती रहीं। स्वामी विवेकानंद के उस व्याख्यान को सुनकर पश्चिम के लोग भारतीय धर्म और संस्कृति की तरफ काफी आकर्षित हुए। उनको यह दृढ़ विश्वास था कि “अध्यात्म-विद्या और भारतीय दर्शन के बिना यह विश्व अनाथ हो जाएगा।”

अगर हम आज के परिप्रेक्ष्य में भारत के बढ़ते कद और उसके प्रभाव की बात करें तो इसमें स्वामी विवेकानंद के द्वारा दर्शायी गई अध्यात्म-विद्या एक प्रमुख भूमिका में नज़र आती है। विश्व के हर कोने से आज लोग आध्यात्मिक ज्ञान के लिए भारत की धरती पर आ रहे हैं। आज का यह नया भारत या कह लें कि ‘न्यू इंडिया’ विश्व शांति और भाईचारा का एकमात्र ध्वजवाहक है। जहाँ एक तरफ विश्व आज कोरोना महामारी के साथ-साथ अनेक तरह के संघर्षों से जूझ रहा है, वहीं भारत विश्व कल्याण की भावना के साथ आगे बढ़ रहा है। वर्ष 2020 से लेकर अब तक भारत ने परंपरागत रूप से अपने पड़ोसी देशों तत्पश्चात संपूर्ण विश्व में कोरोना की दवाइयाँ एवं ‘वैक्सीन मैत्री’ पहल के अंतर्गत कोरोना वैक्सीन भेजकर पूरी दुनिया को विश्व बंधुत्व का संदेश दिया। भारत के द्वारा इन निर्णायक घड़ियों में भेजी गई मदद की पूरे विश्व में सराहना हुई और भारत को एक संकटमोचक के रूप में जाना गया।

जैसा कि हम सब जानते हैं, भारत अपने आजादी के अमृतकाल में G20 2023 की अध्यक्षता कर रहा है, जिसका विषय “वसुधैव कुटुम्बकम” (पूरी पृथ्वी ही एक परिवार है) या “एक पृथ्वी – एक कुटुंब – एक भविष्य” है। भारत के द्वारा इस सम्मेलन के विषय का चुनाव कोई संयोग नहीं है। यह विषय भारत की एक समृद्ध, समावेशी और विकसित विश्व समाज की परिकल्पना का परिचायक है।

ऐसा माना जाता है कि भारतीय संस्कृति के मूल मंत्र ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की प्रासंगिकता से सर्वप्रथम स्वामी विवेकानंद ने ही पूरे विश्व को परिचित कराया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने इस मूल मंत्र का और सुदृढ़ तरीके से प्रचार-प्रसार किया। वर्तमान मे चले रहे रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उज्बेकिस्तान की राजधानी समरकंद में हुई एससीओ (SCO) की बैठक में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को स्पष्ट शब्दो में कहा था कि यह दौर युद्ध का नहीं है। आपसी मतभेदों को बातचीत और कूटनीति के माध्यम से सुलझाया जा सकता हैं। पूरे विश्व मे उनके इस कथन की सराहना हुई और वैश्विक राजनीति में भारत के बढ़ते प्रभाव की भी चर्चा हुई।

हम ऐसा भी कह सकते हैं कि आज के इस नए भारत की परिकल्पना स्वामी विवेकानंद जैसे दिव्यदर्शी ने दशकों पहले ही कर ली थी। उन्होंने कहा था कि भारत का विश्व गुरु बनना केवल भारत ही नहीं, अपितु समस्त विश्व के हित में है। उनके इन्हीं विचारों को प्रतिबिम्बित करती ‘रामकृष्ण मिशन’ संस्था जिसकी स्थापना उन्होंने सन् 1897 में की, वह आज पूरे विश्व भर में मानवता की सेवा एवं परोपकार के साथ-साथ भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म का जोर शोर से प्रचार-प्रसार कर रही है। वर्तमान में इस संस्था की संयुक्त राज्य अमेरिका सहित कई अन्य पश्चिमी देशों में शाखाएँ हैं। अनेक देशों के विद्वानों ने विवेकानंद के सानिध्य में रहकर आध्यात्मिक शिक्षा ग्रहण की और सनातन धर्म को प्रसन्नता के साथ अपनाया।

अगर हम भारत में स्वामी विवेकानंद की लोकप्रियता की बात करें तो कमोबेश हर भारतीय उनके विचारों से प्रभावित है। गौरतलब है कि उनके विचारों के समसामयिक प्रासंगिकता के कारण भारत के युवाओं में उनकी एक अलग छवि और पहचान है। इसका प्रमुख उदाहरण, देश के युवाओं को समर्पित ‘राष्ट्रीय युवा दिवस’ है, जो प्रत्येक वर्ष 12 जनवरी को उनकी जन्मतिथि पर मनाया जाता है। यह दिन न केवल स्वामी विवेकानंद जैसे महापुरुष के जन्म को अंकित करता है बल्कि युवाओं को दिए गए उनके मूलमंत्रों का भी स्मरण कराता है।

स्वामी विवेकानंद का दर्शन, आदर्श और काम करने का तरीका हमेशा से ही भारतीय युवाओं के लिए प्रेरणा का एक बड़ा स्रोत रहा है। उन्होंने युवाओं को धैर्य, व्यवहार में शुद्ध‍ता रखने, आपस में न लड़ने, पक्षपात न करने और हमेशा संघर्षरत रहने का संदेश दिया। उनके अनमोल विचारों ने युवाओं को आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्हें युवा पीढ़ी की क्षमता, परिवर्तनकारी शक्ति एवं कुशलता पर अटल विश्वास था। इसलिए उन्होंने युवाओं को एक सशक्त सामाजिक प्रभाव निर्माण करने के लिए सदैव प्रेरित किया। स्वामी विवेकानंद युवाओं को संदेश देते हुए कहते हैं:

“विश्व एक व्यायामशाला है, जहाँ हम खुद को मजबूत बनाने के लिए आते हैं।”

आज के इस परिदृश्य में हम सभी युवाओं का यह दायित्व बनता है कि हम एकजुट होकर स्वामी विवेकानंद के मूल्यों पर खरे उतरने की हर वो कोशिश करें, जिससे कि एक सशक्त समाज का निर्माण हो सके और हमारा राष्ट्र नई ऊँचाइयों को छु सके। ऐसे ही राष्ट्रभक्तों की टोलियों पर विवेकानंद ने कहा है कि देशभक्त बनो। जिस राष्ट्र ने अतीत में हमारे लिए इतने बड़े-बड़े काम किए हैं, उसे प्राणों से भी प्यारा समझो। इन विचारों से युक्त विश्वासी युवा देशभक्तों की आज समस्त भारत को आवश्यकता है।

‘जीभ काटने पर ₹10 करोड़ दूँगा’: बि​हार के शिक्षा मंत्री पर भड़के परमहंस आचार्य-BJP ने भी घेरा, कहा था- नफरत फैलाता है रामचरितमानस

रामचरितमानस को नफरत फैलाने वाला बताकर बिहार के शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर चौतरफा घिर गए हैं। बीजेपी ने इसे राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की तुष्टिकरण और वोट बैंक की राजनीति का हिस्सा बताया है। वहीं अयोध्या के महंत जगतगुरु परमहंस आचार्य ने चंद्रशेखर के जीभ काट कर लाने वाले को 10 करोड़ रुपए देने की बात कही है।

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने एक वीडियो ट्वीट कर कहा है, “बिहार के शिक्षा मंत्री कहते हैं कि रामचरितमानस नफरत फैलाने वाला ग्रन्थ है। कुछ दिन पहले जगदानंद सिंह ने राम जन्मभूमि को ‘नफरत की जमीन’ बताया था। यह संयोग नहीं यह वोट बैंक का उद्योग है। हिंदू आस्था पर करो चोट ताकि मिले वोट। SIMI और PFI की पैरवी की। हिंदू आस्था पर चोट क्या कार्यवाही होगी?”

पूनावाला ने कहा है, “यह संयोग नहीं, वोट बैंक का सबसे घिनौना उद्योग है। कुछ दिन पहले राजद के बिहार अध्यक्ष ने राम जन्मभूमि को नफरत की जमीन बताया था। प्रभु श्रीराम को लेकर टिप्पणियाँ की थी। अब उन्हीं की देखादेखी बिहार के शिक्षा मंत्री और राजद नेता कहते हैं कि रामचरितमानस नफरत फैलाने वाला ग्रंथ है। ये वही राजद है जिसे SIMI और PFI में कोई आतंकवादी नजर नहीं आता। ये वही इको सिस्टम है जो बार-बार हिन्दू आस्था पर चोट करता है। राजद नेता बार-बार हिन्दुओं का अपमान करते हैं। क्या राजद के नेता हालिया बयान पर माफी माँगेंगे।”

वहीं अयोध्या के महंत जगतगुरु परमहंस आचार्य ने चंद्रशेखर के बयान पर कड़ा एतराज जताया है। उन्होंने कहा है कि बिहार के शिक्षा मंत्री का बयान सनातनियों का घोर अपमान है। मैं माँग करता हूँ कि शिक्षा मंत्री को एक सप्ताह के अंदर उनके पद से हटाया जाए और उन्हें माफी माँगनी चाहिए। अगर ऐसा नहीं होता है तो मैं फिर बिहार के शिक्षा मंत्री का जीभ काट कर लाने वाले को 10 करोड़ रुपए का पुरस्कार दूँगा। साथ ही उन्होंने कहा कि रामचरितमानस तोड़ने वाला नहीं, जोड़ने वाला ग्रंथ है।

उल्लेखनीय है कि ‘नालंदा ओपन यूनिवर्सिटी’ के दीक्षांत समारोह में छात्रों को संबोधित करते हुए बिहार के शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर ने रामचरितमानस को समाज को बाँटने वाला ग्रंथ बता दिया था। उन्होंने कहा था कि रामचरितमानस दलितों-पिछड़ों को शिक्षा ग्रहण करने से रोकता है। संबोधन के बाद मीडिया के सामने भी बिहार के शिक्षा मंत्री अपने बयान पर कायम नजर आए थे।

मंदिर में घुसा मोहम्मद चाँद, मूर्तियाँ खंडित की-तालाब में फेंकी, पूजा सामग्रियों में लगा दी आग: दरभंगा की घटना

बिहार के दरभंगा से एक मं​दिर में तोड़फोड़ की घटना सामने आई है। यह मंदिर विश्वविद्यालय थाना क्षेत्र के आजम नगर मोहल्ले में है। आरोपित की पहचान मोहम्मद चाँद के तौर पर हुई है। स्थानीय लोगों के प्रदर्शन के बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है। घटना बुधवार (11 जनवरी 2023) की है।

मिली जानकारी के अनुसार आजम नगर मोहल्ले में स्थित ब्रह्म स्थान मंदिर में कोई दरवाजा नहीं है। मोहम्मद चाँद मौका देखकर मंदिर में घुस गया। राजा शैलेश की मूर्ति तोड़ दी। देवी-देवताओं की प्रतिमाओं को नुकसान पहुँचाया और तालाब में फेंक दिया। उसने मंदिर में रखे गए पूजन सामग्री को आग के हवाले कर दिया।

इस घटना से स्थानीय हिंदू आक्रोशित हो गए। उन्होंने प्रदर्शन किया। मौके पर पहुँची पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर लिया। थानाध्यक्ष सत्यप्रकाश झा ने आक्रोशित लोगों को शांत कराया और दोषी को कड़ी सजा दिलाने की बात कही। पुलिस ने मूर्तियों को तालाब से निकलवाकर मंदिर परिसर में रखवाया।

पुलिस की तरफ से जानकारी दी गई है कि मंदिर के रास्ते को लेकर विवाद चल रहा है। इसी वजह से मंदिर का गेट नहीं बन पाया है। मंदिर में मूर्तियों को खंडित किए जाने की घटना से आहत स्थानीय लोगों ने मंदिर में गेट लगाने की माँग की है। दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों ने मिलकर मंदिर में एक अस्थायी गेट लगा दिया है। परिषद के जिला सहमंत्री मधुकर ने विवाद के निपटारे के लिए जिला प्रशासन से मंदिर और तालाब का सीमांकन कराने की माँग की है।

कुछ साल पहले दरभंगा के आजमनगर में ही दुर्गा मंदिर के पास जोरदार विस्फोट हुआ था। जून 2020 में हुए इस धमाके में मोहम्मद नजीर के घर की दीवार और छत ध्वस्त हो थी। लोगों का कहना था कि धमाके की आवाज तकरीबन एक किलोमीटर के इलाके तक सुनाई पड़ी थी।

जातिगत भेदभाव हमारी सबसे बड़ी दुर्बलता, संगठित होना इस काल की आवश्यकता: स्वामी विवेकानंद

सन् 1857 के प्रथम स्वाधीनता संग्राम से पराधीनता और गुलामी को अस्वीकार करने की जो ज्वाला जागृत हुई, वह लगभग 100 वर्ष बाद, अनेकों बलिदानियों के कारण 15 अगस्त 1947 को स्वाधीनता के रूप में फलित हुई। 2022 में भारत ने अपनी स्वाधीनता के 75 वर्ष पूर्ण किए हैं। एक तरफ जहाँ पिछले 75 वर्ष में एक राष्ट्र के तौर पर हमने शिक्षा, उद्योग, वाणिज्य, ज्ञान, विज्ञान, कृषि, कला, खेल, चिकित्सा, इत्यादि क्षेत्रों में विश्व स्तरीय उपलब्धियाँ हासिल की हैं, वहीं आने वाले काल में हर क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर तीव्रता और प्रबलता से अग्रसर होना एक चुनौती के रूप में हमारे सामने है। आने वाले 25 वर्ष में नए भारत के निर्माण के लिए कमर कसने का समय आ गया है, जहाँ सैकड़ों चुनौतियाँ भी हैं और अवसर भी। इस काल में हमें एक ऐसे व्यक्तित्व के अनुसरण करने की आवश्यकता है, जिनके जीवन में निरंतरता हो, विचार में समग्रता और चिंतन में भारत हो। यह खोज स्वामी विवेकानंद पर आकर रूकती है। भगिनी निवेदिता अपनी पुस्तक ‘दी मास्टर एज आई सॉ हिम’ में लिखती हैं, “स्वामीजी के लिए भारत का चिंतन करना श्वास लेने जैसा था।”

सहस्त्रों वर्षों के विदेशी आक्रांताओं द्वारा किए गए दमन और गुलामी के कारण जब सामान्य भारतवासी अपना आत्म-सम्मान, आत्म-गौरव और आत्मविश्वास खो चुका था, उस अंधकार के वातावरण में, उस काल में जन्में, उन्नीसवीं शताब्दी के महान योगी स्वामी विवेकानंद पथ प्रदर्शक के तौर पर सामने आए। यदि नेताजी सुभाष चंद्र बोस के शब्दों में वर्णन करूँ तो “भारत की नवसन्तति में अपने अतीत के प्रति गर्व, भविष्य के प्रति विश्वास और स्वयं में आत्मविश्वास तथा आत्मसम्मान की भावना फूँकने का प्रयत्न किया।”

1887 में एक परिव्राजक संन्यासी के रूप में जब स्वामी विवेकानंद भारत भ्रमण पर निकले तो उन्होंने आने वाले पाँच वर्षों तक भारत को बहुत निकटता से देखा। उनको यह स्पष्ट आभास हुआ कि भारत का आम जनमानस वर्षों की गुलामी के कारण आत्मविश्वास खो बैठा है। इससे उनको अपना कार्य स्पष्ट हो गया था। वह राष्ट्र निर्माण में सहभागी होने वाली सबसे मौलिक इकाई (भारतीय नागरिक) के अंदर विश्वास और आत्मनिष्ठा जागृत करने के कार्य में जुट गए। इस कार्य के लिए ही वह शिकागो (अमेरिका) में आयोजित विश्व धर्म महासभा में सहभागी होने गए थे। 11 सितम्बर 1893 का उनका ऐतिहासिक भाषण, जिसने भारतीय संस्कृति, जीवन दर्शन और मूल्यों का विश्व भर में डंका बजा दिया था।

जनवरी 1897 में वे भारत वापस आए तो रामनाद से रावलपिंडी, कश्मीर से कन्याकुमारी और देहरादून से ढाका तक भारतीय नवसन्तति में स्वराज की चेतना जागृत करने का कार्य किया। उनके अनेकों भाषणों में हमें नए भारत का आधार स्पष्ट होता है, जिसमें ‘मेरी क्रन्तिकारी योजना’, ‘भारत के महापुरुष, ‘हमारा प्रस्तुत कार्य’, ‘भारत का भविष्य’, ‘वेदांत’ और ‘हिन्दू धर्म के सामान्य आधार’ मुख्य है।

स्वामी विवेकानंद के ओजस्वी विचारों का इतना प्रभाव था कि बाल गंगाधर तिलक, महात्मा गाँधी, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, बिपिन चंद्र पाल, योगी अरविंद और पता नहीं कितने स्वतंत्रता सेनानी प्रभावित हुए। जमशेद जी टाटा ने इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ साइंस की स्थापना उनसे प्रेरणा पाकर की, तो बाबा साहब आंबेडकर ने उनको सबसे महान भारतीय की संज्ञा दी।

विवेकानंद कोई भविष्यवक्ता नहीं थे, लेकिन भारतीय तरुणाई पर उनको इतनी निष्ठा थी कि अमेरिका में स्थित मिशिगन विश्वविद्यालय में पत्रकारों को सम्बोधित करते हुए उन्होंने कहा था: “यह आपकी सदी है, लेकिन इक्कीसवीं सदी भारत की होगी।“ इसलिए अमृत काल हर युवा के लिए अवसर है, जहाँ स्वामी विवेकानंद का सन्देश चट्टान की तरह उनके अंदर निर्भीकता, चरित्र निर्माण, संकल्प शक्ति, निष्ठां, नेतृत्व, स्वाभिमान, विवेक, आत्म-नियंत्रण प्रकटित करने का कार्य करेगा। भारत जागेगा तो वह मानव कल्याण के लिए विश्व को जगाएगा।

राष्ट्र निर्माण के लिए मार्ग और अनेकों सावधानियों से स्वामी विवेकानंद ने हमें अवगत किया है। वो पश्चिम के अंधे अनुकरण से बचने के लिए कहते हैं। वह स्वयं अपने जीवन काल में लगभग एक दर्जन देशों का प्रवास करने के बाद कहते हैं:

“हे भारत! यह तुम्हारे लिए सबसे भयंकर खतरा है। पश्चिम के अन्धानुकरण का जादू तुम्हारे ऊपर इतनी बुरी तरह सवार होता जा रहा है कि क्या अच्छा है और क्या बुरा, इसका निर्णय अब तर्क, बुद्धि, न्याय, हिताहित, ज्ञान अथवा शास्त्रों के आधार पर नहीं किया जा रहा है।”

इसलिए हम अच्छाइयाँ जरूर ग्रहण करें लेकिन अँधानुकरण नहीं। इसके अलावा स्वामी विवेकानंद ने शिक्षा के प्रसार को रामबाण समाधान बताया था। उनके अनुसार शिक्षा से अद्भुत आत्मविश्वास जागृत होता है। भारत में भारतीय परम्परा और पद्धति पर आधारित शिक्षा हो, जो अपने अतीत के प्रति गर्व भी विकसित करे और भविष्य के प्रति विश्वास भी।

स्वामी विवेकानंद का विशेष ध्यान स्त्री शिक्षा के ऊपर भी था, जिसके लिए उन्होंने भगिनी निवेदिता को भारत आने का आह्वान किया था और फिर बाद में दोनों के अथक प्रयासों से नवंबर 1898 में प्रथम विद्यालय शुरू भी किया गया था, जो आज तक ‘रामकृष्ण शारदा मिशन सिस्टर निवेदिता गर्ल्स स्कूल’ के नाम से स्त्री शिक्षा के क्षेत्र में कार्यरत है। इसलिए वर्षों की गुलामी के कारण स्त्री शिक्षा के क्षेत्र में जो गिरावट आई थी, उसके पुनरुत्थान का कार्य उन्होंने किया था। संस्कृत के प्रचार-प्रसार और संगठित होने की आवश्यकता पर भी वो जोर देते थे।

वह मानते थे कि ईर्ष्या होने के कारण हम संगठित नहीं हो पाते, जो हमारी ताकत को विभाजित कर देती है। संगठित होना इस काल की आवश्यकता है। जातिगत भेदभाव को भी हमारी एक बड़ी दुर्बलता मानते थे स्वामी विवेकानंद। उनके अनुसार हर मनुष्य के अंदर ईश्वर विद्यमान है। मनुष्य-मनुष्य में भेद एक राष्ट के तौर पर हमको कमजोर करता है। वह मानव सेवा को ही ईश्वर सेवा मानते थे। (विवेकानन्द साहित्य, 3.345) में वो कहते हैं:

“जब तक करोड़ों भूखे और अशिक्षित रहेंगे, तब तक मैं प्रत्येक उस आदमी को विश्वासघातक समझूँगा, जो उनके खर्च पर शिक्षित हुआ है, परन्तु जो उन पर तनिक भी ध्यान नहीं देता!”

जहाँ आज़ादी के पूर्व के काल में विवेकानंद क्रांतिकारियों के लिए ‘आधुनिक राष्ट्रवादी आंदोलन के आध्यात्मिक पिता’ थे, वहीं इस अमृत काल में वह राष्ट्र निर्माण के लिए प्रेरणास्त्रोत हैं। अगर हम सब ठान लें तो अमृत काल स्वर्णिम काल सिद्ध होगा, जहाँ स्वामी विवेकानंद के सपनों का भारत प्रगटित होगा। लेकिन यह कार्य इतना सरल नहीं है। इसके लिए लाखों युवाओं को निस्वार्थ भाव से अपने को राष्ट्र निर्माण के कार्य में न्योछावर होना होगा। वो कहते हैं, “त्याग के बिना कोई भी महान कार्य होना संभव नहीं है।” इस कार्य के लिए स्वामी विवेकानंद का जीवन और दर्शन, प्रेरणास्त्रोत के रूप में हमारे साथ चट्टान की तरह खड़ा है।

PM मोदी दिखाने वाले हैं हरी झंडी, उससे पहले पत्थरबाजी कर क्षतिग्रस्त कर दी ‘वंदे भारत’ ट्रेन: बिहार-बंगाल के बाद आंध्र के विशाखापत्तनम में घटना

आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में ‘वंदे भारत’ ट्रेन पर पत्थरबाजी की घटना सामने आई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार (19 जनवरी, 2022) को यहाँ ‘वंदे भारत एक्सप्रेस’ को हरी झंडी दिखाने वाले हैं। इससे पहले ही ट्रेन पर पथराव कर इसे क्षतिग्रस्त कर दिया गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह हादसा मेंटेनेंस के दौरान हुआ।

‘वंदे भारत एक्सप्रेस’ पर पत्थरबाजी को लेकर डीआरएम ने जानकारी दी है कि विशाखापत्तनम के कांचरापलेम के पास ट्रेन पर पत्थर फेंके गए। पत्थरबाजी की वजह से ट्रेन के एक कोच का शीशा टूट गया। पथराव करने वालों का पता लगाया जा रहा है।

आए दिन कहीं न कहीं से ट्रेन पर पथराव की सूचना आ रही है। रविवार (8 जनवरी, 2023) को न्यू जलपाईगुड़ी से हावड़ा जाने वाली वंदे भारत ट्रेन पर पथराव किया गया था। ट्रेन बिहार के बारसोई इलाके में थी कि तभी ट्रेन पर पथराव कर दिया गया। इस पत्थरबाजी में ट्रेन या किसी यात्री को किसी भी तरह का नुकसान नहीं हुआ। इससे पहले हावड़ा से न्यू जलपाईगुड़ी के लिए शुरू की गई ‘वंदे भारत’ एक्सप्रेस ट्रेन पर पत्थरबाजी करने के आरोप में पुलिस ने बिहार के किशनगंज से तीन नाबालिग लड़कों को पकड़ा था।

आपको बता दें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार (30 दिसंबर, 2022) को पश्चिम बंगाल को पहली ‘वंदे भारत’ एक्सप्रेस की सौगात दी थी। इसके बाद से लगातार ट्रेन पर पत्थरबाजी की घटना सामने आई। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सोमवार (2 जनवरी, 2023) शाम हावड़ा लौट रही वंदे भारत एक्सप्रेस पर मालदा जिले के कुमारगंज के पास अज्ञात लोगों ने पत्थर फेंके। पथराव के कारण ट्रेन के कोच सी-13 का दरवाजे को नुकसान हुआ और साथ ही विंडो में दरार आ गई।

‘नफरत फैलाने वाला ग्रन्थ है तुलसीदास का रामचरितमानस’: यूनिवर्सिटी के छात्रों को बिहार के RJD वाले शिक्षा मंत्री का ‘ज्ञान’, बाहर निकल फिर दोहराई अपनी बात

बिहार के शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर ने रामचरितमानस को नफरत फैलाने वाला ग्रंथ करार दिया है। ‘नालंदा ओपन यूनिवर्सिटी’ के दीक्षांत समारोह में छात्रों को संबोधित करते हुए RJD नेता रामचरितमानस को समाज को बाँटने वाला ग्रंथ बता दिया। उन्होंने कहा कि रामचरितमानस दलितों-पिछड़ों को शिक्षा ग्रहण करने से रोकता है। संबोधन के बाद मीडिया के सामने भी बिहार के शिक्षा मंत्री अपने बयान पर कायम नजर आए।

पटना ज्ञान भवन में नालंदा ओपन यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में चंद्रशेखर ने छात्र छात्राओं को संबोधित किया। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने रामचरितमानस के एक दोहे “अधम जाति में विद्या पाए, भयहु यथा अहि दूध पिलाए” का जिक्र करते हुए कहा कि यह समाज में नफरत फैलानेवाला ग्रंथ है। उन्होंने कहा कि दोहे में अधम का अर्थ नीच होता है जिसे उन्होंने जाति से जोड़ते हुए कहा कि इस दोहे के अनुसार नीच जाति अर्थात दलितों-पिछड़ों और महिलाओं को शिक्षा ग्रहण करने का अधिकार नहीं था।

अपने संबोधन की शुरुआत में बिहार के शिक्षा मंत्री ने सभागार में उपस्थित बच्चों से पूछा कि भारत को ताकतवर नफरत से बनाएँगे या मोहब्बत से? सभागार में उपस्थित बच्चों ने ‘मोहब्बत से’ जवाब दिया। शिक्षा मंत्री ने अपने भाषण को जारी रखा। फिर उन्होंने कहा कि देश में कुछ विचार ऐसे चले हैं जो नफरत फैलाना चाहते हैं और यह विचार आज के नहीं हैं बल्कि तीन हजार साल पहले जब मनुस्मृति लिखी गई, यह विचार वहीं से आए हैं।

संबोधन के बाद पत्रकारों के सवाल का जवाब देते हुए भी उन्होंने अपनी बात दोहराई। उन्होंने कहा कि किसी जमाने में मनुस्मृति ने समाज में नफरत का बीज बोया, उसके बाद रामचरितमानस ने समाज में नफरत पैदा की। बकौल चंद्रशेखर, आज के समय में गुरु गोलवलकर के विचार समाज में नफरत फैलाने का काम कर रहे हैं। उन्होंने ये भी कहा कि समाज में जितनी जातियाँ हैं, उतनी ही नफरत की दीवारें हैं। जब तक यह दीवारें समाज में मौजूद रहेंगी, भारत विश्वगुरु नहीं बन सकता है।