Sunday, July 14, 2024
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कपटपूर्ण धर्मांतरण को सुप्रीम कोर्ट ने माना गंभीर मामला, अटॉर्नी जनरल से माँगी राय: तमिलनाडु सरकार के विरोध पर लगाई फटकार, कहा- राजनीतिक रंग ना दें

कोर्ट ने AG से कहा "बल, प्रलोभन या किसी अन्य चीज द्वारा धर्म परिवर्तन आदि … ये आरोप हैं। हम इस बात पर विचार नहीं कर रहे हैं कि यह वास्तव में हुआ है या नहीं। यदि वास्तव में ऐसा हो रहा है, क्योंकि धर्म की स्वतंत्रता के अधिकार और धर्मांतरण के अधिकार के बीच अंतर है। इसके तरीके या लालच से अगर ऐसा कुछ हो रहा है तो कब क्या किया जाना चाहिए? सुधारात्मक उपाय क्या हैं?"

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (9 जनवरी। 2023) को जबरन और धोखे से धर्मांतरण के खिलाफ कदम उठाने की माँग वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए इसे गंभीर मुद्दा बताया। इसके साथ कोर्ट ने इस मुद्दे को राजनीतिक रंग ना देने की अपील करते हुए इस पर भारत के अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी की सहायता माँगी है।

जस्टिस एमआर शाह और सीटी रविकुमार की पीठ ने तंजावुर में एक छात्र की मौत की NIA जाँच की माँग के मामले में एक नई याचिका के खिलाफ तमिलनाडु सरकार के विरोध को भी खारिज कर दिया। तमिलनाडु सरकार के वकील पी विल्सन ने कहा कि नई याचिका निराधार है और अदालत को इस पर विचार नहीं करना चाहिए।

वरिष्ठ अधिवक्ता विल्सन ने कहा, “यह राजनीति से प्रेरित जनहित याचिका है। तमिलनाडु में इस तरह के धर्मांतरण का कोई सवाल ही नहीं है। विधायिका को इस तरह की चीजों का फैसला करने दें।” हालाँकि, कोर्ट ने राज्य सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि वह इस मुद्दे को गंभीर मानता है और उसने पहले ही इस मुद्दे की जाँच करने का फैसला कर लिया है।

न्यायमूर्ति शाह ने कहा, “हम पूरे देश, सभी राज्यों के लिए चिंतित हैं। यदि यह आपके राज्य में हो रहा है तो यह बुरा है। यदि नहीं हो रहा है तो अच्छा है। इसे एक राज्य को निशाना बनाने के रूप में न देखें। इसे राजनीतिक न बनाएँ।” पीठ ने कहा कि वह याचिका में कुछ अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ की गई टिप्पणियों को हटाएगी नहीं।

पिछली बार की सुनवाई के दौरान कुछ अल्पसंख्यक धार्मिक निकायों की ओर से पेश वरिष्ठ वकील दुष्यंत दवे कोर्ट में पेश हुए थे। उन्होंने कोर्ट में कहा था कि याचिका में अल्पसंख्यक धर्मों के खिलाफ कुछ अपमानजनक आरोप लगाए गए हैं। हालाँकि, कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि कुछ भी हटाया नहीं जाएगा।

दरअसल, भाजपा नेता और अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय की जनहित याचिका में जबरन धर्मांतरण से निपटने के लिए कड़े कदम उठाने की माँग की गई है। इसमें कहा गया है कि देश भर में कपटपूर्ण धर्म परिवर्तन बड़े पैमाने पर हो रहा है और केंद्र सरकार इसके खतरे को नियंत्रित करने में विफल रही है।

उधर, केंद्र सरकार ने अपने हलफनामा में कहा है कि संविधान के तहत किसी भी धर्म को मानने और उसका प्रचार करने के मौलिक अधिकार में लोगों को धर्मांतरण करने का अधिकार शामिल नहीं है। आज की सुनवाई में कोर्ट ने अटॉर्नी जनरल से सहायता करने के लिए कहा है।

कोर्ट ने AG से कहा “हम भारत के अटॉर्नी जनरल के रूप में आपकी सहायता चाहते हैं। बल, प्रलोभन या किसी अन्य चीज द्वारा धर्म परिवर्तन आदि … ये आरोप हैं। हम इस बात पर विचार नहीं कर रहे हैं कि यह वास्तव में हुआ है या नहीं। यदि वास्तव में ऐसा हो रहा है, क्योंकि धर्म की स्वतंत्रता के अधिकार और धर्मांतरण के अधिकार के बीच अंतर है। इसके तरीके या लालच से अगर ऐसा कुछ हो रहा है तो कब क्या किया जाना चाहिए? सुधारात्मक उपाय क्या हैं?”

खंडपीठ को अटॉर्नी जनरल ने सहायता करने का आश्वासन दिया और कहा कि वे इस मामले के रिकॉर्ड की जाँच करने के बाद कोर्ट को सूचित करेंगे। इस मामले में अब अगली सुनवाई 7 फरवरी 2023 को होगी।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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