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ज्ञानवापी में मिले शिवलिंग का जारी रहेगा संरक्षण: सुप्रीम कोर्ट ने पुराने निर्देश को आगे बढ़ाते हुए कहा- कोई छुएगा नहीं शिवलिंग

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने वाराणसी के ज्ञानवापी परिसर में मिले ‘शिवलिंग’ और उसके आसपास के क्षेत्र को संरक्षित रखने का आदेश दिया है। इससे पहले 17 मई को हुई सुनवाई में कोर्ट ने इस क्षेत्र को 12 नवंबर (8 सप्ताह) तक संरक्षित करने का आदेश दिया था। चूँकि, यह अवधि शनिवार को पूरी हो रही थी। इसलिए, हिंदू पक्ष की याचिका पर पुनः सुनवाई हुई।

शुक्रवार (11 नवंबर 2022) को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस पीएस नरसिम्हा की बेंच ने कहा, “हम निर्देश देते हैं कि अगले आदेश के लंबित रहने तक 17 मई का अंतरिम आदेश लागू रहेगा।” इसका मतलब यह है कि ज्ञानवापी ढाँचे का वजूखाना अगले आदेश तक पूरी तरह सील रहेगा और शिवलिंग को कोई छूएगा नहीं।

इससे संबंधित अलग-अलग याचिकाओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को छूट दी है कि वे जिला कोर्ट जाकर अपनी दलील जिला जज के सामने रख सकते हैं। कोर्ट ने कहा है कि जिला जज तय करेंगे कि सभी याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई हो या नहीं। साथ ही कोर्ट ने हिंदू पक्ष को अपना पक्ष रखने के लिए 3 सप्ताह का समय भी दिया है।

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने हिंदू पक्ष की याचिका की सुनवाई को चुनौती देने वाली मस्जिद समिति ‘अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद’ की याचिका के बारे में पूछा। इस पर हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन ने जवाब दिया कि निचली अदालत ने इसे खारिज कर दिया था और इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक अपील लंबित है।

हिंदू पक्ष की ओर से पेश वरिष्ठ अन्य वकील रंजीत कुमार ने कहा, “मस्जिद कमिटी ने मई में जो याचिका दाखिल की थी वह अब ‘अर्थहीन’ हो चुकी है।मस्जिद समिति ‘अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद’ ने परिसर की जाँच के लिए कोर्ट की तरफ से कमिश्नर नियुक्त किए जाने को चुनौती दी थी, लेकिन कमिटी के लोग खुद ही कमिश्नर के सामने पेश होकर अपनी बात रख चुके हैं।”

इससे पहले 14 अक्टूबर 2022 को हुई सुनवाई में वाराणसी की जिला अदालत ने हिंदू पक्ष द्वारा शिवलिंग के कार्बन डेटिंग कराने की याचिका को खारिज कर दिया था। हिंदू पक्ष ने यह याचिका इसलिए दायर की गई थी, ताकि यह पता लगाया जा सके कि ज्ञानवापी परिसर में मिली वस्तु शिवलिंग है या फव्वारा।

इस मामले की सुनवाई में कोर्ट ने कहा था कि किसी भी वैज्ञानिक जाँच की अनुमति नहीं दी जा सकती है, क्योंकि शिवलिंग को क्षति पहुँचने से सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन होगा और लोगों की धार्मिक भावनाएँ भी आहत हो सकती हैं।

जिस AAP नेता ने दी हिंदू धर्म को गाली, वो केजरीवाल के लिए लिए स्टार प्रचारक: दिल्ली में MCD चुनाव से पहले पार्टी ने जारी की लिस्ट, 30 लोगों के नाम

आम आदमी पार्टी (AAP) ने दिल्ली नगर निगम चुनाव (MCD) के लिए शुक्रवार (11 सितंबर 2022) को 30 स्टार प्रचारकों की सूची जारी की। AAP के इस स्टार प्रचारकों की लिस्ट में पूर्व मंत्री राजेंद्र पाल गौतम का भी नाम है। गौतम हिंदुओं के धर्मांतरण वाले कार्यक्रम में शामिल हुए थे और हिंदू विरोधी शपथ लेते दिखे थे। कार्यक्रम की वीडियो आने के बाद उनका भारी विरोध हुआ, जिसके कारण उनको मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था। अब स्टार प्रचारकों की सूची के 22वें नंबर पर उनका नाम दिख रहा है।

इस लिस्ट में शराब घोटाले में लगातार ईडी के शिकंजे में फँसे उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, पत्रकार को गाली देने के कारण कोर्ट से सजा पा चुके पूर्व कानून मंत्री सोमनाथ भारती और पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह का भी नाम है।

आप नेता झंडेवालान में आयोजित जिस कार्यक्रम में शामिल हुए थे उसमें 10 हजार हिंदुओं का धर्मांतणरण हुआ था। शपथ में कहते सुना गया था, ”मैं इस बात को नहीं मानता और न ही मानूँगा कि भगवान बुद्ध विष्णु के अवतार थे। मैं इसे केवल पागलपन और झूठा प्रचार मानता हूँ। मैं श्राद्ध नहीं करूँगा और न ही पिंडदान करूँगा।”

शपथ में कहा गया था, ”मैं ब्राह्मणों द्वारा किसी भी समारोह को करने की अनुमति नहीं दूँगा। मैं हिंदू धर्म का त्याग करता हूँ, जो मानवता के लिए हानिकारक और उनके विकास में बाधक है, क्योंकि यह असमानता पर आधारित है। मैं बौद्ध धर्म को अपना धर्म स्वीकार करता हूँ।”

कार्यक्रम के दौरान राजेंद्र पाल गौतम इन विवादास्पद लाइनों को दोहराते हुए और मंच साझा करते हुए दिखाई दिए थे। हालाँकि सफाई में पूर्व मंत्री ने कहा था कि वो जिस कार्यक्रम का हिस्सा बने थे, वह उनका व्यक्तिगत मामला था इससे पार्टी का या उनके मंत्री होने का कोई लेना देना नहीं है।

केंद्र ने बिहार को भेजी PFI सदस्यों की लिस्ट, UAPA के तहत होगी कार्रवाई: मुंबई निवासी का सीतामढ़ी में बैंक खाता, अब होगा फ्रीज

केंद्र सरकार ने बिहार सरकार से प्रतिबंधित चरमपंथी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) पर UAPA के तहत कार्रवाई करने के लिए कहा है। इसके साथ ही PFI के 7 लोगों के नामों की सूची भी राज्य सरकार को भेजी गई है। इन लोगों का बैंक खाता बिहार के 3 शहरों में हैं

केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा भेजी गई सूची में जिन लोगों के नाम शामिल हैं, उनमें एक अररिया, चार दरभंगा, एक सीतामढ़ी तो एक मुंबई का रहने वाला है। इनका बैंक अकाउंट भी इन्हीं जिलों में है। सूची में शामिल महबूब आलम मुंबई का रहने वाला है और नागपाड़ा का PFI जिलाध्यक्ष बताया जा रहा है।

सबसे चौंकाने वाली बात महबूब आलम का बिहार कनेक्शन है। इसका ताल्लुक बिहार के सीतामढ़ी जिले से मिला है, जबकि इसका बैंक अकाउंट दरभंगा शहर के SBI ब्राँच में है। इस ब्रांच में इसने सीतामढ़ी के घरवारा के रूप में अपना पता दिया है।

सूची के अनुसार, एहसान परवेज CWTPP0853M 50100047528841 HDFC बैंक अररिया, स्टेट सेक्रेटरी नुरुद्दीन जंगी AAHPZ8048A 397399136967 SBI दरभंगा, लीगल हेड PFI 0069114000919103 HDFC बैंक दरभंगा, महबूब आलम BAAPA9416A 005510110007970 है। एक अन्य संदिग्ध का खाता संख्या 0772010108046 UBI, सीतामढ़ी है। 

केंद्र सरकार के विवरण के आधार पर बिहार के गृह मंत्रालय के विशेष सचिव केएस अनुपम ने सभी संबंधित जिलों के जिलाधिकारियों को मामले में कार्रवाई करने का आदेश दे दिया है। इसके बाद इन खातों को फ्रीज कर दिया जाएगा।

बता दें कि राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के सदस्यों के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर रही है। पिछले कुछ महीनों में देश के कई राज्यों में छापेमारी कर इसके दर्जनों सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है। सरकार अब इनके आर्थिक लिंक को काटने में लगी है।

‘हरे रंग की पुताई, दीवारों पर ममता बनर्जी की फोटो’: रवीन्द्रनाथ टैगोर की पैतृक ‘धरोहर’ को TMC ने बनाया कार्यालय, HC की फटकार के बाद हटा बैनर, पार्टी ने आरोपों को नकारा

नोबेल पुरस्कार विजेता रवीन्द्रनाथ टैगोर के पैतृक घर ‘जोरासांको ठाकुरबारी’ के एक हिस्से को तृणमूल शिक्षाबंधु समिति के कार्यालय के रूप में अवैध रूप से तैयार करने का मामला सामने आया है। जानकारी के मुताबिक जिस कमरे में रवीन्द्रनाथ टैगोर और बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने पहली बार बातचीत की थी, उसे पूरी तरह से नया रूप दिया गया है।

बंगाली पुनर्जागरण के साक्षी रहे महर्षि भवन की दीवारों को हरे रंग से रंगा गया है। दरवाजे और खिड़की, फर्श से भी सत्ताधारी दल से जुड़े समिति द्वारा छेड़छाड़ की गई है।

ऐसा माना जाता है कि भारतीय राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ के गीतकार बंकिम चंद्र चटर्जी और टैगोर पहली बार उसी कमरे में मिले थे। आज उन्हीं दीवारों को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी की दो विशाल आकार की तस्वीरों से ‘सजाया’ गया है।

टीएमसी राजनेताओं की दो तस्वीरों के बीच रवीन्द्रनाथ टैगोर का एक छोटा चित्र रखा गया है। महर्षि भवन को ‘ग्रेड 1 विरासत’ भवन के रूप में वर्गीकृत करने के बावजूद कमरे को फिर से तैयार किया गया।

हालाँकि इस विवादास्पद कदम का तृणमूल शिक्षाबंधु समिति के इकाई अध्यक्ष सुबोध दत्ता चौधरी ने बचाव किया। आनंदबाजार पत्रिका से बात करते हुए उन्होंने दावा किया, ”हम सिर्फ अपने सदस्यों के बैठने के लिए जगह देना चाहते थे।”

उन्होंने कहा, ”मैंने विश्वविद्यालय के सचिव से लिखित अनुमति ली है। कोई अतिरिक्त निर्माण नहीं किया गया है। कमरे को अभी साफ किया गया था। चौधरी ने आगे दावा किया कि महर्षि भवन का इस्तेमाल पश्चिम बंगाल में वाम दलों के शासनकाल के दौरान एक केंद्रीय कार्यालय के रूप में भी किया जाता था।”

चौधरी ने कहा, ”रवीन्द्रनाथ टैगोर हमारे सिर के ऊपर हैं, ममता हमारे दिल में हैं।” हालाँकि विश्वविद्यालय के अधिकारियों के अनुसार, तृणमूल शिक्षाबंधु समिति ने परिसर के ठेकेदार को महर्षि भवन को फिर से तैयार करने के लिए मजबूर किया था।

जनहित याचिका और कलकत्ता उच्च न्यायालय का हस्तक्षेप

स्वदेश मजूमदार नाम के एक याचिकाकर्ता ने अपने वकील श्रीजीव चक्रवर्ती के माध्यम से कलकत्ता उच्च न्यायालय के समक्ष एक जनहित याचिका (PIL) दायर की थी। PIL के अनुसार, ”जिस कमरे में रवीन्द्रनाथ टैगोर और बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने पहली बार बातचीत की, उसे पूरी तरह से फिर से तैयार किया गया है। अब दीवार पर ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी की तस्वीरें टंगी हैं।”

महर्षि भवन उस इमारत का हिस्सा है जहाँ रवीन्द्रनाथ टैगोर ने अपना बचपन बिताया था। इसपर अवैध रूप से सत्तारूढ़ तृणमूल कॉन्ग्रेस द्वारा संचालित विश्वविद्यालय के कार्यकर्ता विंग द्वारा कब्जा कर लिया गया है। यह मामला न्यायमूर्ति आर भारद्वाज और मुख्य न्यायाधीश प्रकाश श्रीवास्तव की खंडपीठ के समक्ष आया था। कलकत्ता उच्च न्यायालय ने रवीन्द्र भारती विश्वविद्यालय के प्रशासन और पश्चिम बंगाल सरकार को हेरिटेज बिल्डिंग को छेड़छाड़ से बचाने का निर्देश दिया।

कोर्ट के निर्देश के बाद TV9 बांग्ला ने जानकारी दी कि ‘तृणमूल शिक्षाबंधु समिति’ का बैनर हटा दिया गया है। हालाँकि हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद पार्टी से जुड़े कार्यकर्ताओं का जमावड़ा नहीं रुका।

विश्वविद्यालय और विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया

रवींद्र भारती विश्वविद्यालय के कुलपति सब्यसाची बसु राय चौधरी ने इस मामले पर बात करते हुए निर्माण कार्य के लिए किसी भी तरह की अनुमति देने से इनकार किया। उन्होंने कहा, ”कार्य (तृणमूल शिक्षाबंधु समिति द्वारा) अत्यधिक निंदनीय है। अब हाईकोर्ट ने दखल दिया है। हमने इसे दो-तीन महीने पहले देखा था। मैंने इसे रोकने की कोशिश की, लेकिन मुझे बताया गया कि जो लोग इसमें शामिल हैं वे सत्ताधारी पार्टी के समर्थक हैं।”

चौधरी ने अफसोस जताया कि राजनीतिक दबाव की वजह से कुछ नहीं किया गया। कई अधिकारी और मैं दबाव में थे। हमारे लिए काम करना मुश्किल था। वहीं भाजपा नेता अग्निमित्र पॉल ने ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल सरकार सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने ट्वीट किया, “ममता बनर्जी के कार्यकर्ताओं ने जोरासांको ठाकुरबाड़ी में न केवल कार्यालय बनाया, बल्कि दीवार का रंग भी बदला, कमरों को तोड़ा और सीएम की तस्वीरें टांग दीं।”

उन्होंने कहा, “आप हेरिटेज बिल्डिंग को कैसे छू सकते हैं मैम? कोबी गुरु (रवीन्द्रनाथ टैगोर) हमारी भावना, प्रेम, जीवन है। इसके साथ खेलने की हिम्मत मत करो !”

टीएमसी ने विवाद से दूरी बनाने कोशिश की

दिलचस्प बात यह है कि सत्तारूढ़ तृणमूल ने दावा किया कि उसका शिक्षाबंधु समिति से कोई संबंध नहीं है। टीएमसी विधायक शांतनु सेन ने दावा किया, ”हमारी पार्टी का सारा बांग्ला तृणमूल शिक्षा बंधु समिति नाम के किसी भी संगठन से कोई संबंध नहीं है। हमारी पार्टी इसके खिलाफ जरूरी कार्रवाई करेगी।”

टीएमसी का यह आरोप यह इस तथ्य के बावजूद है कि इंडिया टुडे ने ‘सारा बांग्ला तृणमूल शिक्षा बंधु समिति’ के लेटरहेड को देखा है, जिसमें मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की छवि थी।

‘सोनिया गाँधी के विचार से पार्टी नहीं सहमत’: राजीव गाँधी के हत्यारों को SC द्वारा छोड़ने पर भड़की कॉन्ग्रेस; राहुल-प्रियंका भी कर चुके हैं माफ

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी की हत्या मामले में सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (11 नवंबर 2022) सारे दोषियों को रिहा करने का निर्णय लिया है। कोर्ट ने मुख्य आरोपित की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि अगर दोषियों पर किसी और मामले में आरोप न हों तो सारे दोषियों को रिहा किया जाता है। कोर्ट के इस निर्णय पर अब कॉन्ग्रेस ने सवाल खड़ा किया है।

कॉन्ग्रेस के कम्युनिकेशंस इंचार्ज और महासचिव जयराम रमेश (Jairam Ramesh) ने कहा, “पूर्व पीएम राजीव गाँधी के हत्यारों को मुक्त करने का सुप्रीम कोर्ट का निर्णय अस्वीकार्य और पूरी तरह से गलत है। पार्टी इसकी आलोचना करती है और इसे अक्षम्य मानती है। दुर्भाग्यपूर्ण है कि सुप्रीम कोर्ट ने भारत की भावना के अनुरूप काम नहीं किया।”

उधर, कॉन्ग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, “इस मामले में जो केंद्र सरकार का स्टैंड है, वही पार्टी का है। पार्टी सोनिया गाँधी के विचार से सहमत नहीं है।” सिंघवी ने कहा कि पार्टी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ कानूनी विकल्प पर विचार करेगी। राजीव गाँधी की हत्या आम अपराध की तरह नहीं था। उन्होंने कहा कि वे अपने स्टैंड पर कायम रहे हैं। यह संस्थागत मामला है। एक पूर्व प्रधानमंत्री की हत्या देश की एकता, अखंडता और पहचान से जुड़ा ममला है।

बता दें कि दिवंगत राजीव गाँधी की पत्नी और कॉन्ग्रेस की तत्कालीन अध्यक्ष सोनिया गाँधी (Sonia Gandhi), बेटे राहुल गाँधी (Rahul Gandhi) और बेटी प्रियंका गाँधी (Priyanka Gandhi) ने पूर्व प्रधानमंत्री के इन हत्यारों को माफ करने की बात कही थी। इनमें से एक आरोपित नलिनी को जब गिरफ्तार किया था, तब वह गर्भवती थी।

राजीव गाँधी की हत्या की एक महिला नलिनी श्रीहरण सहित चार दोषियों को अदालत ने फाँसी की सजा सुनाई थी। इसके बाद सोनिया गाँधी साल 1999 में तत्कालीन राष्ट्रपति केआर नारायणन को पत्र लिखकर चारों दोषियों को माफी देने की अपील की थी। इसके साथ ही उन्होंने अदालत से नलिनी के प्रति नरमी बरतने की अपील की थी। इसके बाद कोर्ट ने साल 2000 में नलिनी की फाँसी की सजा को उम्रकैद में तब्दील कर दिया था।

इसके बाद साल 2008 में प्रियंका गाँधी अपने पिता की हत्यारिन नलिनी से तमिलनाडु के वेल्लोर स्थित जेल में मुलाकात की थी। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रियंका गाँधी नलिनी को काफी देर तक देखती रही थीं। इसके बाद रोते हुए उससे पूछा था कि ‘मेरे पिता बहुत अच्छे इंसान थे। उन्हें तुमने क्यों मार दिया। अगर कोई दिक्कत थी, तो बातचीत से मामला सुलझा सकती थीं। लेकिन मारने की क्या जरूरत थी’। प्रियंका ने कहा था कि उन्होंने नलिनी को दिल से माफ कर दिया है।

ऐसी ही बात राहुल गाँधी ने भी कही थी। साल 2021 में राहुल गाँधी ने कहा था कि उनके पिता की हत्या से उन्हें गहरा आघात लगा और काफी दुख हुआ, लेकिन अब उनके मन में कोई गुस्सा या घृणा नहीं है। राहुल ने कहा था, “मुझे किसी के प्रति गुस्सा या नफरत नहीं है। बेशक, मैंने अपने पिता को खो दिया और मेरे लिए यह बहुत कठिन समय था। इसका मुझे बेहद दुख हुआ, लेकिन मुझे नफरत या कोई गुस्सा नहीं है। मैं क्षमा करता हूँ।”

सोनिया गाँधी की 2014 में 6 अन्य हत्यारों की सजा को उम्रकैद में तब्दील कर दिया था। तमिलनाडु की तत्कालीन मुख्यमंत्री जयललिता ने इन लोगों को रिहा कराने की कोशिशें शुरू कर दी थीं। सुप्रीम कोर्ट ने भी एजी पेरारिवेलन को इस साल रिहा कर दिया था। इसके बाद नलिनी ने अपनी और अन्य हत्यारों की रिहाई के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दी थी।

बता दें कि राजीव गाँधी की हत्या 21 मई 1991 को तमिलनाडु के श्रीपेरंबुदूर में एक चुनावी रैली के दौरान धनु नाम के लिट्टे आत्मघाती हमलावर ने की थी। वह राजीव गाँधी को फूलों का हार पहनाने के बाद उनके पैर छूने के बहाने आगे आया और झुककर उसने कमर पर बंधे विस्फोटक को ब्लास्ट कर दिया। धमाके में राजीव गाँधी समेत कई लोगों की मौत हुई थी।

1999 में इस मामले में 26 लोगों को मृत्युदंड दिया गया। इनमें से 19 को पहले ही बरी कर दिया गया जबकि बाकी 7 सजा काटते रहे और इनकी सजा उम्रकैद कर दी गई। इनमें से नलिनी गर्भवती थीं जिन्हें सोनिया गाँधी ने ये कहकर माफ किया कि उनकी गलती की सजा उनके बच्चे को नहीं दी जा सकती जो अभी जन्मा ही नहीं है।

NCP नेता रोकने पहुँचे ‘हर-हर महादेव’ की स्क्रीनिंग, समर्थकों ने दर्शक को पीटा: केस दर्ज होने के बाद गिरफ्तार, पीड़ित को पैसे देकर चुप कराने की Video वायरल

महाराष्ट्र की ठाणे पुलिस ने शुक्रवार (11 नवंबर 2022) को राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (NCP) के नेता जितेंद्र आव्हाड (Jitendra Awhad) को गिरफ्तार किया। महाराष्ट्र के पूर्व कैबिनेट मंत्री पर मराठी फिल्म ‘हर हर महादेव’ की स्क्रीनिंग को जबरन रोकने और दर्शक को पीटने का आरोप है। यह घटना ठाणे के विवियाना मॉल की है।

ठाणे पुलिस (Thane police) ने बताया, “NCP विधायक जितेंद्र आव्हाड और उनके 100 समर्थकों के खिलाफ ठाणे के वर्तक नगर पुलिस स्टेशन में फिल्म ‘हर हर महादेव’ के शो को जबरन बंद करने और दर्शकों के साथ मारपीट करने के मामले में IPC की धारा 141, 143, 146, 149, 323, 504 और Bombay Police Act की धारा 37/135 के तहत केस दर्ज किया गया है।”

समाचार ऐजेंसी ANI के अनुसार, सोमवार (7 नवंबर 2022) रात को आव्हाड अपने समर्थकों के साथ ठाणे के विवियाना मॉल के मल्टीप्लेक्स में घुस गए और मराठी फिल्म ‘हर हर महादेव’ (Har Har Mahadev) की स्क्रीनिंग को जबरन रोक दिया। इस दौरान जब एक दर्शक ने उनका विरोध किया तो उन्होंने उसके साथ मारपीट की। इसके बाद पुलिस ने जितेंद्र आव्हाड समेत उनके 100 समर्थकों के खिलाफ मामला दर्ज किया।

ANI के इस वीडियो में आप देख सकते हैं जब समर्थकों ने उस दर्शक को पीटा तो उसके तुरंत बाद एनसीपी नेता मामले को संभालने की कोशिश करते नजर आए। वे पीड़ित को पैसे देते हुए दिख रहे हैं। पीड़ित ने बोला- “मैं यह पैसे नहीं लूँगा।” इसके बाद वह कुछ और बोल पाता, नेता ने अपने होठों पर उँगली रखकर उसे चुप रहने का इशारा किया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, उसी दिन महाराष्ट्र के एक अन्य मल्टीप्लेक्स में भी फिल्म के खिलाफ प्रदर्शन किया गया। राष्ट्रवादी युवा कॉन्ग्रेस (एनवाइसी) के कार्यकर्ता नासिक-पुणे हाईवे पर स्थित मल्टीप्लेक्स में अपने कार्यकर्ताओं के साथ पहुँचे और वहाँ भी फिल्म की स्क्रीनिंग को जबरन रुकवाया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी की और मल्टीप्लेक्स मैनेजमेंट को धमकी दी कि अगर उन्होंने फिल्म दोबारा दिखाई गई तो इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।

वहीं इस पूरे विवाद पर महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा, “मैंने फिल्म नहीं देखी है और मुझे विवाद की जानकारी नहीं है। लोगों को लोकतांत्रिक तरीके से अपना विरोध दर्ज करने की अनुमति है, लेकिन दर्शकों की पिटाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”

मानसिक गुलामी से निकलता भारत, तिलमिलाता लिबरल गिरोह: देश के लिए 7 चुनौतियों पर जयपुर डायलॉग में चर्चा

जयपुर में भारत की आजादी के अमृत काल के तहत दो दिवसीय जयपुर डायलॉग फोरम आयोजित किया गया। पिछले हफ्ते (5-6 नवंबर 2022) हुए इस फोरम में विभिन्न क्षेत्रों के नामचीन हस्तियों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर यहाँ चर्चा की। देश का इतिहास कैसा रहा, वर्तमान किन परिस्थितियों से गुजर रहा है, भविष्य में क्या-क्या चुनौतियाँ आ सकती हैं, इन बिंदुओं पर भी तरह-तरह के मत रखे गए।

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी, आनंद रंगनाथन, अंबर जैदी, ओमेंद्र रत्नू, नीरज अत्री, गुरु प्रकाश, कपिल मिश्रा, आर जगन्नाथन, शाजिया इल्मी, विक्रम संपत, सुशांत सरीन – ये कुछ चंद बड़े नाम हैं, जिन्होंने जयपुर डायलॉग फोरम में विभिन्न सत्रों में विचार मंथन को धार दिया। बहुत सारी बातें और चर्चाओं के बीच यहीं पर देश के लिए 7 चुनौतियों पर भी चर्चा हुई।

देवी-देवताओं का अपमान, देश को बनाते मजाक का पात्र

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि देश अब मानसिक गुलामी के दौर से निकल रहा है। 2014 में आया परिवर्तन का दौर निरंतर जारी है। साथ ही उन्होंने चेताया कि एक समूह के द्वारा देश को मजाक का पात्र बनाया जा रहा है। यहाँ तक कि देवी-देवताओं का अपमान करने से नहीं चूक रहे लोग।

सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि पिछले 50 वर्षों में फिल्मों में सिखों और सेना के जवानों का खुला उपहास किया गया, जो आज भी जारी है। उन्होंने कहा, “जहाँ भी दुनिया में लेफ्ट लिबरल है, वहाँ उदारता नहीं है। वो हमारे दिमाग में बड़े सटीक नैरेटिव भरते हैं। युवा पीढ़ी को इसे समझना होगा।” उन्होंने कहा, “जैसे ही नेरेटिव वाला विष निकलेगा, हमारी शक्ति सामने आ जाएगी।”

‘सभी धर्म एक समान’ सिर्फ दिखावा, एक खास धर्म पर चर्चा भी असंभव

आनंद रंगनाथन ने कथित लिबरलों और वामपंथ पर प्रहार करते हुए कहा कि वे ‘सभी धर्म एक समान’ का ढोल पीटते हैं लेकिन व्यवहार में ऐसा नहीं मानते। इसी मामले पर भरत गुप्त ने कहा कि इस्लाम का इतिहास बताने वाली बहुत अधिक पुस्तकें नहीं हैं। ऐसे में जो उपलब्ध है, उसकी ही ठीक-ठीक व्याख्या होनी चाहिए।

अजय चुंगरू ने इस मामले की तह में जाते हुए कहा कि सभी धर्मों में सवाल उठाने की स्वतंत्रता नहीं है। यहाँ तक कि नास्तिक बनने की स्वतंत्रता भी नहीं है। उन्होंने बताया कि 13 इस्लामिक देश ऐसे हैं, जहाँ नास्तिकों को मार दिया जाता है। जबकि हिंदू धर्म में नास्तिक को भी अभिव्यक्ति की आजादी है।

हिंदुत्व को नीचा दिखाने के लिए इतिहास से खेल

इतिहासकार विक्रम संपत ने तरह-तरह के उदाहरण देकर समझाया कि कैसे देश में विभिन्न तरीकों से हिन्दुत्व का विरोध किया गया… जो मुगल काल से आजादी के बाद भी जारी रहा। उन्होंने जोर देकर कहा कि अब नए इतिहास पर ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि फिल्मों में हिन्दुस्तान की बेटी-महिलाओं की नीलामी के दृश्य दिखाकर देश-विदेश में हमारी संस्कृति को नष्ट करने का प्रयास किया गया।

‘भारत- भूत, वर्तमान और भविष्य’ विषय पर चर्चा करते हुए ओमेंद्र रत्नू ने कहा कि हिंदू समाज का गौरवशाली इतिहास रहा है। दूसरे धर्म के या कथित लिबरल इतिहासकारों ने लेकिन इसकी गलत जानकारी देकर भ्रमित किया।

इस पर चर्चा को आगे बढ़ाते हुए तुफैल चतुर्वेदी ने कहा कि दूसरे धर्म के लोग भारत में राज और कारोबार करने नहीं, बल्कि धर्म का प्रचार-प्रसार करने आए थे। उन्होंने यह भी बताया कि भारत की खोज करने वाले भी पादरी ही थे।

आतंक और जिहाद के साए में कश्मीरी हिंदू

‘धारा 370 हटाने के बाद 3 साल का मूल्यांकन’ – जयपुर डायलॉग फोरम में यह भी एक विषय था। इस पर अजय चुंगरू ने कहा कि कश्मीर से धारा 370 हटा दी गई लेकिन पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान ने इसका सम्मान नहीं किया। भारत ने इसे विकास से जोड़ जरूर दिया बावजूद कश्मीरी सत्ता की सीढ़ी गिने-चुने मुस्लिमों तक सीमित करने के प्रयास होते रहे।

इसी विषय पर गुरु प्रकाश ने कहा कि 5 अगस्त 2019 को आर्टिकल 370 और 35a हटाने से पहले कश्मीर में संवैधानिक फ्रॉड जारी था। सुशील पंडित ने इस मामले को आगे बढ़ाते हुए आरोप लगाया कि अब घाटी में पर्यटन के नाम पर जेहाद के लिए फंडिंग की जा रही है।

धर्मांतरण

इस मामले पर पत्रकार अंबर जैदी ने चिंता जताते हुए कहा कि कश्मीर और केरल में व्यापक स्तर पर धर्म परिवर्तन किया जा रहा है। लड़कियों को सेक्स टॉय बनाकर देश के बाहर भेजा जा रहा है, लेकिन कोई कथित लिबरल उस पर सवाल खड़ा नहीं कर रहा है।

जय आहूजा ने कहा कि देश में मेवात एक ऐसा क्षेत्र है, जहाँ के ढाई सौ गाँव हिंदू-विहीन हो चुके हैं। जिस गाँव में मुस्लिम आबादी अधिक है, वहाँ भारतीय कानून के बजाय शरिया लागू हो चुका है। मुस्लिम-बहुल आबादी वाले क्षेत्रों की समस्या पर उन्होंने याद दिलाया कि धारा 370 हटाने पर भी कश्मीर के कानूनों में बदलाव नहीं आ पाया है।

लोकतंत्र के कमजोर होते खंभे

‘लोकतंत्र या वोट खरीद’ विषय पर चर्चा वाले सत्र में महाराष्ट्र के वरिष्ठ पत्रकार भाऊ तोरसेकर ने कहा कि लोकलुभावन नारे, बातें, उपहार, शराब, नकदी आदि ने लोकतंत्र को चोट पहुँचाई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि लोकतंत्र में भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए सत्ताधारी को जिम्मेदार बनाना होगा।

कपिल मिश्रा ने इस विषय पर चर्चा में कहा कि भारत दुनिया का सबसे सशक्त लोकतांत्रिक व्यवस्था का देश है। लेकिन न्यायपालिका, मीडिया और ब्यूरोक्रेसी ने अपना धर्म नहीं निभाया और इस कारण से विधायिका पथभ्रष्ट हो गई।

ओमकार चौधरी ने कहा कि लोकतंत्र में मुफ्त की बंदरबाँट पर राज्यों पर कई लाख करोड़ रुपए का कर्ज हो गया है। भारत दुनिया की पाँचवीं सशक्त अर्थव्यवस्था घोषित हुई है, लेकिन अभी इसे दुरुस्त किया जाना चाहिए।

हिंदुओं का शोषण, मंदिरों पर नियंत्रण

आनंद रंगनाथन ने ‘जिसका साथ उसका विकास’ नारा देते कहा कि भारत में हिंदू 9वें नागरिक हैं। उन्होंने बताया कि जेएनयू में कहा जाता है कि भारत हिंदू राष्ट्र बन गया है जबकि सच्चाई यह है कि भारत में हिंदुओं का निरंतर शोषण हो रहा है। सरकार मंदिरों का नियंत्रण कर रही है। पंडित और पूजा के अधिकार बदल दिए गए हैं। यहाँ तक की दान-दक्षिणा भी सरकारी खजाने में जमा हो रही है। उनके अनुसार हिंदुओं की दुर्दशा का कारण अल्पसंख्यकों का ताकतवर होना नहीं बल्कि बहुसंख्यकों का लगातार कमजोर होना है।

इस चर्चा को आगे बढ़ाते हुए सुप्रीम कोर्ट के वकील विष्णु जैन ने कहा कि समाज की संस्कृति निरंतर प्रदूषित हो रही है। यौन हिंसा बढ़ रही है। सनातन संस्कृति को मजबूत करने से ही देश फिर विश्व गुरु बनेगा।

पंडित सतीश शर्मा ने कहा कि हिंदू विरोधी तंत्र को तोड़ने के लिए अभिमन्यु की बजाए अर्जुन बनना होगा। धार्मिक मामले और न्यायपालिका पर बात करते हुए पत्रकार आर जगन्नाथन ने कहा कि धर्म और आस्था के मामलों में अदालत को निजी राय नहीं देनी चाहिए।

‘जयपुर डायलॉग-2022’ को संबोधित करने, चर्चा में भाग लेने आए सभी वक्ताओं, विद्वानों का पूर्व आईएएस व जयपुर डायलॉग के चेयरमैन संजय दीक्षित और अध्यक्ष सुनील कोठारी ने आभार जताया।

‘साधुओं ने बदमाशी की तो सरकार निपटेगी’: राजस्थान में पवित्र स्थल पर अवैध खनन के खिलाफ 3000 संतों ने दिया धरना, कॉन्ग्रेसी मंत्री ने धमकाया

राजस्थान के भरतपुर जिले के पसोपा गाँव में अवैध खनन पर रोक लगाने में सरकार की नाकामी के खिलाफ साधु बाबा विजयदास ने आत्मदाह कर बलिदान दिया था। अशोक गहलोत की अगुवाई वाली कॉन्ग्रेस सरकार ने तभी आनन-फानन में आदिबद्री और कनकांचल क्षेत्र में अवैध खनन (Illegal Mining) रोकने का वादा तो कर दिया था, लेकिन न तो खनन रुका और न ही क्रेशर हटे।

इसी के विरोध में पसोपा में 3000 साधु-संत जुट गए और विरोध-प्रदर्शन किया, लेकिन कॉन्ग्रेस सरकार के पर्यटन मंत्री विश्वेंद्र सिंह उलटे संत समाज को ही धमकी देने लगे। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारी बदमाशी करेंगे तो सरकार अपने तरीके से निपटेगी।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, संरक्षण समिति के महासचिव ब्रज दास ने कहा, “सबकी भावनाओं को देखते हुए हम यह घोषणा करते हैं कि क्रेशरों को हटाने के लिए साधु-संतों, ग्रामवासियों, कृष्ण भक्तों की ओर से एक दिसंबर से एक बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा।” पसोपा में जुटे संतों ने करीब डेढ़ घंटे तक धरना दिया फिर आंदोलन की चेतावनी देकर करीब 10:30 बजे केदारनाथ की ओर कूच कर गए।

श्री मान मंदिर सेवा संस्थान, गहवर वन बरसाना से शुरू चौरासी कोस की यात्रा पसोपा में रुकी थी। इसमें करीब 3000 साधु-संत शामिल थे। श्री मान मंदिर, पसोपा ट्रस्ट के कार्यकारी अध्यक्ष राधा कृष्ण शास्त्री ने डीग के एसडीएम हेमंत कुमार को ज्ञापन सौंपा। इसमें ब्रज क्षेत्र से संपूर्ण क्रेशर को हटाने की माँग की गई।

शास्त्री ने कहा अवैध तरीके से चल रहे क्रेशरों को नहीं हटाया गया तो वह आंदोलन करेंगेl इस दौरान किसी तरह की जनहानि होती है सरकार व प्रशासन की जिम्मेदारी होगीl उनका कहना है, “अभी हमने नवंबर तक आंदोलन को स्थगित कर दिया है।”

पर्यटन मंत्री ने दी धमकी

इस बीच संतों के धरने-प्रदर्शन और आंदोलन की चेतावनी पर पर्यटन मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने संत समाज को धमकाते हुए कहा, ”आदिबद्री पर्वत को खनन मुक्त करा दिया गया, वह सरकार का वादा था। क्रेशर प्लांटों को भी सरकार बंद कराए, यह वादा नहीं है। वे लाइसेंस लेकर क्रेशर चला रहे हैं तो क्रेशर चलेंगे ही। अगर साधु-बाबाओं ने ज्यादा बदमाशी करने की कोशिश की तो फिर सरकार अपना काम करेगी।”

अवैध खनन पर रोक लगाने में सरकार की नाकामी के विरोध में आत्मदाह करने वाले साधु बाबा विजयदास की दिल्ली के एक अस्पताल में 23 जुलाई को निधन हो गया था। उन्होंने 20 जुलाई को केरोसिन डालकर खुद के शरीर में आग लगा ली थी। संतों ने राज्य सरकार को क्षेत्र में खनन पर रोक लगाने के लिए मनाने का हर संभव कोशिश की थी। हालाँकि, 500 से अधिक दिनों के इंतजार और कई खोखले वादों के बाद संतों ने मामले को आगे बढ़ाने का फैसला किया। अब फिर से कॉन्ग्रेस सरकार वही कर रही है।

उल्लेखनीय है कि ब्रज के पहाड़ पूजे जाते हैं, उनकी परिक्रमा की जाती है। इन पहाड़ों को खनन से बचाने के लिए सालों साल आंदोलन चल रहा है। माना जाता है कि ये पहाड़ भगवान कृष्ण के आह्वान पर अवतरित हुए थे। इनका उतना ही महत्व है, जितना बद्रीनाथ धाम और केदारनाथ धाम का है।

दक्षिण भारत में PM मोदी: साउथ को दिया पहला वंदे भारत ट्रेन, ₹500 करोड़ वाला एयरपोर्ट टर्मिनल और ‘स्टैच्यू ऑफ प्रोस्परिटी’ भी सौंपा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Pm Narendra Modi) शुक्रवार (11 नवंबर 2022) को कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के दौरे पर हैं। दक्षिण भारत के दो दिवसीय इस दौरे के दौरान प्रधानमंत्री कई परियोजनाओं का उद्धाटन किया। पीएम ने तमिलनाडु में एक संस्थान के दीक्षांत समारोह को भी संबोधित किया।

अपने दौरे के पहले पहले दिन पीएम मोदी ने बेंगलुरु के कैम्पागौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के टर्मिनल का उद्घाटन किया और 25,000 करोड़ रुपए से अधिक की विकास परियोजनाओं को लॉन्च किया। इस दौरान उन्होंने बेंगुलरु में ‘वंदे भारत एक्सप्रेस’ को भी हरी झंडी दिखाई। यह दक्षिण भारत की पहली वंदे भारत एक्सप्रेस है।

प्रधानमंत्री के दौरे का पहला पड़ाव कर्नाटक रहा। उन्होंने शुक्रवार की सुबह बेंगलुरु में राज्य सचिवालय विधान सौध में संत-कवि कनक दास और महर्षि वाल्मीकि की प्रतिमाओं पर पुष्पांजलि अर्पित कर अपने कार्यक्रम की शुरुआत की। इसके बाद वे क्रांतिवीर संगोली रायन्ना (KCR) रेलवे स्टेशन गए और वहाँ मैसूर-चेन्नई वंदे भारत एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाई। यह देश की पाँचवीं वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन है और दक्षिण भारत में पहली ट्रेन है।

इस दौरान प्रधानमंत्री ने ‘भारत गौरव काशी दर्शन’ ट्रेन को भी हरी झंडी दिखाकर शुभारंभ किया। इस तरह भारत गौरव योजना के तहत इस ट्रेन को चलाने वाला कर्नाटक पहला राज्य बन गया है। इस योजना के तहत तीर्थ यात्रियों को काशी का दर्शन कराने के लिए कर्नाटक सरकार और रेल मंत्रालय मिलकर काम कर रहे हैं।

इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी ने बेंगलुरु शहर के संस्थापक कहे जाने वाले नादप्रभु कैम्पेगौड़ा की 108 फीट ऊँची कांस्य प्रतिमा का अनावरण किया। इस प्रतिमा को ‘स्टैच्यू ऑफ प्रोस्परिटी’ का नाम दिया गया है। प्रधानमंत्री ने प्रतिमा की तस्वीर ट्वीट करते हुए लिखा, “बेंगलुरु के निर्माण में श्री नादप्रभु केम्पेगौड़ा की भूमिका अद्वितीय है। उन्हें एक दूरदर्शी के रूप में याद किया जाता है, जो हमेशा लोगों के कल्याण को हर चीज से ऊपर रखते हैं। बेंगलुरू में ‘स्टैच्यू ऑफ प्रोस्परिटी’ का उद्घाटन कर सम्मानित हुआ।”

इसके बाद प्रधानमंत्री ने बेंगलुरु के कैम्पागौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर 5000 करोड़ रुपए की लागत से बने टर्मिनल-2 का उद्घाटन किया। टर्मिनल-2 को बेंगलुरु के गार्डन सिटी के लिए एक श्रद्धांजलि के रूप में डिज़ाइन किया गया है। यहाँ से होकर गुजरने वाले यात्रियों को ‘बगीचे में चलना’ अनुभव मिलेगा। यात्री 10,000 वर्ग मीटर से अधिक की हरी दीवारों, लटकते बगीचों और बाहरी गार्डन से होकर गुजरेंगे। इस गार्डन को बनाने में स्वदेशी तकनीक का उपयोग किया गया है।

इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमिलनाडु पहुँचे, जहाँ मुख्यमंत्री एमके स्टालिन उनका स्वागत किया। पीएम मोदी ने गाँधीग्राम ग्रामीण संस्थान के 36वें दीक्षांत समारोह को संबोधित किया। पीएम मोदी ने कहा कि गाँधीग्राम का उद्घाटन खुद महात्मा गाँधी ने किया था। ग्रामीण विकास के उनके विचारों की भावना को यहाँ देखा जा सकता है।

बेचैनी थी फिर भी जिम गए, वर्कआउट के दौरान आया हार्ट अटैक: TV के मशहूर एक्टर सिद्धांत वीर सूर्यवंशी का 46 की उम्र में निधन

टीवी के जाने-माने एक्टर सिद्धांत वीर सूर्यवंशी (Siddhaanth Vir Surryavanshi) का निधन हो गया है। वह 46 वर्ष के थे। अभिनेता जय भानुशाली ने अपनी इंस्टा स्टोरी में इस खबर की पुष्टि की है। उन्होंने सिद्धांत वीर सूर्यवंशी की फोटो शेयर करते हुए लिखा, “भाई, तुम बहुत जल्दी चले गए।” बताया जा रहा है कि जिम में वर्कआउट के दौरान हार्ट अटैक आने की वजह से उनकी मौत हुई है।

फोटो साभार: जय भानुशाली का इंस्टाग्राम

रिपोर्ट्स के मुताबिक, सिद्धांत को शुक्रवार (11 नवंबर 2022) सुबह से ही बेचैनी महसूस हो रही थी। इसके बाद भी वह जिम में वर्कआउट करने गए। वर्कआउट के दौरान वो काफी तनाव में थे। जिम में हार्ट अटैक आने के बाद सिद्धांत का ट्रेनर उनको अस्पताल लेकर गया। यहाँ डॉक्टरों की टीम ने काफी देर तक उनका इलाज किया और उन्हें ठीक करने की कोशिश की, लेकिन वे उन्हें बचाने में नाकाम रहे।

वे (सिद्धांत वीर सूर्यवंशी) कुसुम, वारिस, सूफियाना इश्क मेरा, ज़िद्दी दिल माने ना, सात फेरे: सलोनी का सफर, कसौटी जिन्दगी की जैसे कई शो में नजर आ चुके थे। ‘सूर्यपुत्र करण’ सीरियल में काम करके वह काफी मशहूर हुए थे। उन्हें आखिरी बार जी टीवी के शो ‘क्यों रिश्तों में कट्टी बत्ती’ में देखा गया था। सिद्धांत वीर अपने पीछे पत्नी अलीसिया राउत और दो बच्चों को छोड़ गए हैं। वह अपनी फिटनेस को लेकर काफी सतर्क रहते थे।

राजू श्रीवास्तव को भी आया था हार्ट अटैक

इस साल जिम में वर्क आउट के दौरान हार्ट अटैक आने से कई कलाकारों की मौत हो चुकी है। सितंबर 2022 में दिल्ली के एम्स अस्पताल में मशहूर कॉमेडियन राजू श्रीवास्तव (Raju Shrivastav) ने अंतिम साँस ली। राजू श्रीवास्तव 10 अगस्त 2022 की सुबह एक्सरसाइज करते वक्त बेहोश होकर गिर गए थे। इसके बाद उन्हें एम्स लाया गया था। वहाँ डॉक्टरों ने बताया कि उन्हें हार्ट अटैक आया है। इसके कारण उनका ब्रेन डैमेज हो गया और उन्हें एंजियोप्लास्टी करनी पड़ी।

दीपेश भान जिम से लौटकर क्रिकेट खेलने गए थे

पॉपुलर टीवी शो ‘भाभी जी घर पर हैं’ में मलखान सिंह का किरदार निभाने वाले दीपेश भान का भी इस साल 23 जुलाई को क्रिकेट खेलने के दौरान निधन हो गया था। बताया गया था कि दीपेश जिम से लौटकर क्रिकेट खेलने गए थे। वहीं उनकी नाक से खून निकलने लगा और फिर वो एकदम से जमीन पर गिर गए। उनके दोस्त उन्हें अस्पताल लेकर भागे, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया था।