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जिस अभिनेत्री के साथ आमिर खान के तीसरे निकाह की थी चर्चा, उसे पड़ते हैं मिर्गी के दौरे: बदबूदार जूता भी सूँघाया गया, दवाइयों के हो गए साइड इफ़ेक्ट

बॉलीवुड अभिनेता आमिर खान (Aamir khan) के किरन राव से तलाक के बाद जिस अभिनेत्री के साथ तीसरे की निकाह चर्चा हो रही थी, वह इन दिनों एपिलेप्सी (मिर्गी) की बीमारी से जूझ रही हैं। दरअसल, ‘दंगल’ फिल्म की एक्ट्रेस फातिमा सना शेख (Fatima Sana Shaikh) दवाइयों और वर्कआउट के जरिए खुद को ठीक करने की कोशिश कर रही हैं। इस बात का खुलासा फातिमा सना शेख ने इंस्टाग्राम पर अपने फैंस से बातचीत के दौरान किया।

इसके साथ ही उन्होंने बताया कि किस तरह एपिलेप्सी की बीमारी ने उनकी पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ को प्रभावित किया है। उन्होंने सोमवार (14 नवंबर, 2022) अपने इंस्टाग्राम पर एपिलेप्सी से जुड़े कई सवालों के जवाब दिए। फातिमा सना शेख ने पहलवार महावीर सिंह फोगट और उनकी बेटियों पर बनी फिल्म ‘दंगल’ में आमिर खान की बेटी का किरदार अदा कर के शोहरत बटोरी थी। उन्होंने रेसलर गीता फोगट का रोल अदा किया था।

फातिमा से पूछा गया कैसे एपिलेप्सी ने उन्हें प्रोफेशनली इफेक्ट किया है? जवाब में फातिमा कहती हैं कि बाकी लोगों की तुलना में उन्हें थोड़ा :धीमा चलना पड़ता है, लेकिन वह सब कुछ कर सकती हैं। कुछ अजीब और मुश्किल दिन होते हैं, उन्हें इस दौरान स्लो कर देते हैं। हालाँकि, सना खुद को खुशकिस्मत मानती हैं कि वह उन लोगों के साथ काम कर पा रही हैं, जिनके साथ वह काम करना चाहती थीं। उन्होंने कहा, “इसने मेरे जूनून को कम नहीं किया है और ना ही कभी मुझे मेरा बेस्ट देने से रोका है। वास्तव में इसने मुझे और मेहनत करने के लिए उत्साहित भी किया है। फातिमा ने बताया कि उनका डॉगी बिजली उनके लिए थेरेपी की तरह है।”

फोटो साभार: फातिमा का इंस्टाग्राम

उनसे सवाल किया गया कि एपिलेप्सी के मरीजों को बदबूदार जूता सूँघने के लिए मजबूर किया जाता है। इस बात को गलत ठहराते हुए एक्ट्रेस ने कहा, “ये मिथ है। प्लीज ऐसा मत करना। इससे बाहर निकलना वैसे भी इतना भयानक है। सबसे आखिरी चीज जो आप चाहोगे वो है बदबूदार जूता सूँघना। हाहाहा। लोगों ने ये मेरे साथ किया था। ये भयावह था।” फातिमा सना शेख ने आगे बताया कि वो इस बीमारी को कंट्रोल रखने के लिए वर्कआउट करती हैं। दवाइयों की वजह से साइड इफेक्ट भी हुए थे, लेकिन अब वो नॉर्मल और स्टेबल हैं।”

फोटो साभार: फातिमा का इंस्टाग्राम

बता दें कि फातिमा ने फिल्म ‘दंगल’ से बॉलीवुड में अपना डेब्यू किया था। इस फिल्म में उन्होंने आमिर खान की बेटी का किरदार निभाया था। लेकिन, इस साल जुलाई में आमिर खान और उनकी दूसरी बीवी किरण राव का तलाक होने के बाद सोशल मीडिया पर ‘दंगल’ फेम अभिनेत्री फातिमा सना शेख ट्रेंड होने लगीं। लोग आमिर खान के साथ उनका नाम जोड़ने लगे। लोगों ने तो फातिमा सना शेख को आमिर खान और किरण राव की तलाक की वजह तक बता दिया।

वहीं एक सोशल मीडिया यूजर ने तो फातिमा सना शेख और आमिर खान को बधाई देते हुए ये कामना तक कर डाली थी कि उनका रिश्ता लंबा चलेगा।

Yes I killed her: अंग्रेजी में गुनाह कबूल रहा है आफताब, श्रद्धा मर्डर केस में 7 चौंकाने वाले खुलासे; जंगल से मिले 10 बॉडी पार्ट्स

दिल्ली पुलिस श्रद्धा वाकर (Shraddha Walker) के शव के अवशेषों की तलाश में जुटी है। इसके लिए वह आफताब अमीन पूनावाला (Aftab Amin Poonawalla) को उस जंगल में लेकर गई थी, जहाँ शव के टुकड़े फेंके गए थे। हत्या के बाद श्रद्धा के शव के 35 टुकड़े करने वाले आफताब के चेहरे पर कोई पछतावा नहीं दिख रहा।

पुलिस ने बताया है कि आफताब पूछे गए सवाल का जवाब अंग्रेजी में देता है। उसने हत्या की बात कबूल करते हुए कहा- यस आई किल्ड हर (Yes i killed her)। पुलिस की जाँच में हत्याकांड से जुड़ी कई बड़ी बातें सामने आई हैं। जानते हैं अब तक इस मामले से जुड़े 7 बड़े खुलासे क्या हैं;

1. हत्या के बाद दूसरी महिला को कमरे पर लाया था आफताब

मिली जानकारी के मुताबिक, श्रद्धा वाकर की हत्या के बाद आफताब ने अपनी एक अन्य गर्लफ्रेंड को कमरे पर लेकर आया था। हैरत की बात यह है कि इसी कमरे में आफताब ने श्रद्धा वाकर के शवों के टुकड़ों को फ्रिज में छिपाकर रखा था।

2. हत्या के बाद रोज देखता था श्रद्धा का चेहरा

श्रद्धा हत्याकांड में एक चौंकाने वाली जानकारी यह भी मिली है कि आफताब उसी कमरे में सोता था, जहाँ उसने श्रद्धा की हत्या कर शव को टुकड़ों में काटा था। फ्रीज में रखने के बाद वह उसका चेहरा रोज देखता था। हर रात वह उसके एक-एक अंग को ठिकाने लगाता था।

3. 18 दिनों तक फ्रिज में रखे थे शरीर के टुकड़े

आफताब ने शरीर के अंगों को ठिकाने लगाने के बाद फ्रिज की सफाई भी की थी। वह लगभग 18 दिनों तक इन टुकड़ों के साथ रहा। हैरान करने वाली बात यह है कि आफताब उसी फ्रिज से ही खाने-पीने का सामान भी निकालता और रखता था, जिसमें श्रद्धा की लाश के टुकड़े थे।

4. दिल्ली पहुँचने के 10 दिन बाद ही क़त्ल

आफताब और श्रद्धा मुंबई से दिल्ली 8 मई 2022 को आए थे। उन्होंने महरौली के जंगल के पास फ्लैट लिया था। दिल्ली पहुँचने के 10 दिन बाद यानी 18 मई को आफताब ने श्रद्धा का मर्डर कर दिया।

5. फ्लैट दिलाने वाला गिरफ्तार

श्रद्धा हत्याकांड में बद्री नाम के शख्स की एंट्री हुई है। यही वो शख्स है, जिसने आफताब को महरौली इलाके में फ्लैट दिलाया। पुलिस अब उससे पूछताछ कर रही है।

6. आफताब मुझे मार डालेगा

महाराष्ट्र के पालघर की रहने वाले श्रद्धा के दोस्तों का कहना है कि शुरुआत में यह जोड़ा खुशी-खुशी रहता था। लेकिन कुछ ही दिनों में उनके बीच बातें बिगड़ गईं और श्रद्धा रिश्ता तोड़ना चाहती थी। एक बार हालात इतने बिगड़ गए थे कि श्रद्धा ने अपने एक दोस्त को फोन करके कहा था कि ‘मुझे यहाँ से ले जाओ वरना आफताब मुझे मार डालेगा।’

7. श्रद्दा के साथ मारपीट करता था आफताब

एक और दोस्त के मुताबिक, आफताब उसे लगातार मारता था। वह उसे छोड़ना चाहती थी, लेकिन ऐसा नहीं कर सकी। आफताब उसे मारता था फिर भी उसे छोड़ नहीं पा रही थी।

आफताब के साथ महरौली के जंगल पहुँची पुलिस

मामले की जाँच कर रही दिल्ली पुलिस मंगलवार को श्रद्धा मर्डर केस के आरोपित आफताब अमीन पूनावाला को लेकर महरौली के जंगल पहुँची। पुलिस श्रद्धा के शरीर के टुकड़ों की तलाश कर रही है। जानकारी के मुताबिक अब तक 10 बॉडी पार्ट्स मिलने की बात सामने आई है। जो बॉडी पार्ट्स मिले हैं उसकी फोरेंसिक जाँच की जाएगी और DNA टेस्ट होगा।

जिस संगठन का टारगेट हर साल भारत में 25000 ईसाई बनाना, उसे फंडिंग कर रहा Amazon: आर्गेनाइजर का दावा, कंपनी ने किया खंडन

‘राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS)’ की पत्रिका ‘द ऑर्गनाइजर’ (The Organiser)’ ने ई-कॉमर्स कंपनी अमेजन (Amazon) पर देश में धर्मांतरण को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है। पत्रिका ने दावा किया है कि अमेजन ‘अमेरिकन बैप्टिस्ट चर्च’ नामक संगठन को फंडिंग कर रहा है। आरोप है कि यह संगठन पूर्वोत्तर भारत में 25,000 से अधिक लोगों का धर्मांतरण चुका है। हालाँकि, अमेजन ने इन आरोपों को खारिज किया है।

दरअसल, ‘द ऑर्गनाइजर’ ने एक कवर स्टोरी की है, जिसे ‘अमेजिंग क्रॉस कनेक्शन’ टाइटल दिया गया है। इस कवर स्टोरी में कहा गया है कि अमेजन द्वारा ‘अमेरिकी बैप्टिस्ट चर्च’ (ABM) द्वारा चलाए जा रहे क्रिश्चन कनवर्जन मॉड्यूल को फंडिंग किया जा रहा है। इसके अलावा, ‘अमेरिकन बैप्टिस्ट चर्च’ भारत में ऑल इंडिया मिशन (AIM) नामक एक कार्यक्रम चला रहा है। इसकी वेबसाइट में खुले तौर पर यह दावा किया गया है कि उसने पूर्वोत्तर भारत में 25 हजार लोगों को धर्मांतरित कर ईसाई बनाया है।

‘द ऑर्गनाइजर’ ने कहा है, “ई-कॉमर्स की दिग्गज कंपनी अमेजन ‘अमेरिकन बैपटिस्ट चर्च (ABM)’ द्वारा संचालित ‘ईसाई धर्मांतरण मॉड्यूल’ को फंडिंग कर रही है। भारत के बड़े मिशनरी धर्मांतरण मिशन को फंडिंग करने के लिए बहुराष्ट्रीय कंपनियों और एबीएम द्वारा मनी लॉन्ड्रिंग रिंग चलाए जाने की आशंका भी है।”

पत्रिका में यह भी दावा किया गया है, “यह उसका मुखौटा संगठन है, जिसने अपनी वेबसाइट पर खुले तौर पर दावा किया है कि उसने पूर्वोत्तर भारत में 25 हजार लोगों को ईसाई मजहब में परिवर्तित किया है। अमेजन एक भारतीय द्वारा प्रत्येक खरीद पर पैसे दान करके ऑल इंडिया मिशन के धर्मांतरण मॉड्यूल का समर्थन कर रहा है।”

हालाँकि, ऑपइंडिया ने जब ‘ऑल इंडिया मिशन’ के बारे में खँगाला तो इसका वेबसाइट नहीं मिला। लेकिन, इसके ‘लिंक्डइन’ अकाउंट में कहा गया है, “ऑल इंडिया मिशन में हमारा विजन हर साल 25,000 लोगों को येशु मसीह की ओर ले जाना है।” इसका सीधा मतलब है कि यह ईसाई संगठन हिंदुस्तान में बड़े पैमाने पर धर्मांतरण के मिशन से काम कर रहा है।

(फोटो साभार: ऑल इंडिया मिशन के लिंक्डइन अकाउंट का स्क्रीनशॉट)

हालाँकि, इस मामले में ‘टाइम्स नाउ नवभारत’ ने अमेजन के प्रवक्ता के हवाले से कहा है कि कंपनी इन सभी आरोपों का खंडन करती है। अमेजन के एक प्रवक्ता ने कहा है कि अमेजन इंडिया का ‘ऑल इंडिया मिशन’ के साथ कोई संबंध नहीं है। प्रवक्ता ने कहा, “अमेज़ॅन इंडिया का ऑल इंडिया मिशन या उसके सहयोगियों के साथ कोई संबंध नहीं है और न ही अमेजन स्माइल (AmazonSmile) कार्यक्रम, अमेजन इंडिया मार्केटप्लेस पर काम करता है।

कंपनी ने कहा कि जहाँ यह कार्यक्रम चल रहा है वहाँ लोग इस बात का चुनाव स्वयं कर सकते हैं कि वह किसे दान कर रहे हैं। साथ ही दावा किया कि ‘अमेजन स्माइल’, इसमें भाग लेने वाले किसी भी चैरिटी के विचारों का समर्थन नहीं करता है।

द ऑर्गनाइजर ने यह भी दावा किया है कि ‘राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR)’ ने भी उनकी एक रिपोर्ट पर संज्ञान लेते कार्रवाई की बात कही थी। इस मामले में NCPCR के अध्यक्ष प्रियांक कानूनगो का कहना है कि उन्हें सितंबर में अरुणाचल प्रदेश के कुछ अनाथालयों के माध्यम से धर्मांतरण होने की शिकायत मिली थी। इस शिकायत पर उन्होंने संज्ञान लिया और अमेजन को नोटिस भेजा था।

इसके बाद, 1 नवंबर को अमेजन के तीन प्रतिनिधि NCPCR के कार्यालय आए थे और दावा किया था कि ‘ऑल इंडिया मिशन’ को फंडिंग अमेजन अमेरिका द्वारा दी जाती है। उन्होंने कहा कि आयोग द्वारा माँगी गई जानकारियाँ अमेजन इंडिया के पास उपलब्ध नहीं हैं। अमेरिका से आवश्यक जानकारी उपलब्ध करवाने हेतु उनके निवेदन को स्वीकार कर 10 दिन का समय दिया गया है।

‘शाहिद अंसारी दोस्तों के साथ आया, जबरन मेरी बेटी ले गया’: हजारीबाग से अगवा हिंदू लड़की बेंगलुरु में मिली, निकाह-धर्मांतरण का आरोप

झारखंड के हजारीबाग से अगवा नाबालिग हिंदू लड़की बेंगलुरु से बरामद हुई है। लड़की की माँ ने जबरन निकाह और धर्मांतरण की नीयत से अपनी बेटी को अगवा करने का आरोप लगाया था।

पीड़ित माँ ने पुलिस को दी शिकायत में शाहिद अंसारी, अरबाज अंसारी और मुस्लिम अंजुमन कमेटी के सदस्य का नाम लिया था। महिला ने कहा था कि 6 महीने पहले उसकी बेटी का अपहरण की धमकी दी थी। पीड़ित माँ के अनुसार, “4 नवंबर 2022 को शाहिद अंसारी अपने दोस्तों के साथ आया और हमको डराने, धमकाने लगा। अरबाज और शाहिद अंसारी जबरन मेरी बेटी को मोटरसाइकिल पर बैठाकर ले गए।” रिपोर्ट के मुताबिक महिला का कहना था कि आरोपित छह महीने से उसकी बेटी को अगवा करने की धमकी दे रहे थे।

पुलिस ने बेंगलुरु से लड़की को बरामद किया है। यह जानकारी हजारीबाग के पुलिस अधीक्षक मनोज रतन चौथे ने दी है। पुलिस अधीक्षक ने कहा है कि लड़की के हजारीबाग पहुँचने और न्यायालय में उसका बयान दर्ज होने के बाद मामले से जुड़ी अन्य जानकारी साझा की जाएगी। उन्होंने बताया कि लड़की 6 माह पूर्व भी घर से चली गई थी। थाने में शिकायत के बाद लड़की को वापस लाया गया था। उस समय लड़की ने यह नहीं बताया कि वह किसके साथ गई थी।

वहीं हजारीबाग सदर के भाजपा विधायक मनीष जायसवाल ने राज्य सरकार पर तुष्टिकरण का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि हिंदू समुदाय की बहन-बेटियों के साथ लगातार ऐसी घटनाएँ सामने आ रही है। लेकिन सरकार कार्रवाई के नाम पर केवल दिखावा कर रही है। हिंदू संगठनों का कहना है कि लड़की जब तक परिजनों नहीं सौंपी जाती है आमरण अनशन जारी रहेगा। 

आफताब को कोई शिकन नहीं, जेल में भी ली चैन की नींद: जिस फ्लैट में हुए श्रद्धा के 35 टुकड़े, वहाँ के लोग बोले- लिव इन जिम्मेदार

दिल्ली के श्रद्धा हत्याकांड ने पूरे देश को हिला कर रख दिया है। श्रद्धा ने जिस आफ़ताब से प्यार किया, उस पर विश्वास किया और यहाँ तक कि जिसके लिए अपने रिश्तेदारों से भी नाता तोड़ लिया, उसी ने हत्या कर निर्ममता से उसके शव के 35 टुकड़े कर दिए। यह बात सोचकर ही सभी स्तब्ध हैं, ऐसे में उसके परिजनों की हालत का अंदाजा लगाना भी मुश्किल है।

पत्रकार सोनू कुमार ने आरोपित आफ़ताब का चौंकाने वाला वीडियो शेयर किया है, जिसमें वह आराम से सोता नजर आ रहा है। ये वीडियो देख कर लोग कह रहे हैं कि आफताब को इस निर्मम कृत्य का जरा भी पछतावा नहीं है।

इस हत्याकांड के बाद रोज नए चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। आरोपित ने बड़े ही शातिर ढंग से हत्या कर बच निकालने की कोशिश की थी। इतना ही नहीं, फ्रिज में श्रद्धा के कटे अंग होने के बावजूद वह अपनी अन्य किसी महिला मित्र से उसी कमरे में मिलता था। बहरहाल, आरोपित जहाँ महरौली में रहता था, वहाँ आसपास के लोग भी घटना से आश्चर्यचकित हैं। उन्होंने घटना को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार ने लिव-इन रिलेशनशिप का जो नियम बनाया है, उसकी वजह से इस तरह की हत्याएँ हो रही हैं। लोगों को कहना है कि सरकार ने यह समझ के नियम बनाया था कि रेप और हत्या की घटनाएँ नहीं होंगी, लेकिन इसके बाद भी इस तरह की घटनाएँ बदस्तूर जारी है।

वहीं पुलिस का कहना है कि श्रद्धा के शरीर के अंगों को काटने के लिए सिर्फ एक हथियार का इस्तेमाल किया गया था। आफताब ने शरीर के अंगों को काटने के लिए मिनी आरी का इस्तेमाल किया था। मिनी आरी अभी तक बरामद नहीं हुई है। अब तक की जांच में पता चला है कि आरोपी आफ़ताब महरौली के मकान में पहले 15 मई को खुद शिफ्ट हुआ, फिर अगले दिन श्रद्धा को मकान पर लाया और 18 मई को उसकी हत्या कर दी।

उसने 18 मई को श्रद्धा के शव को बाथरूम में रख दिया। अगले दिन वह बाजार गया और बड़ा वाला फ्रिज, चापड़, पाउडर, फ्रेशनर और अन्य सामान लेकर आया। अगले दिन, यानी 19 मई को उसने श्रद्धा के शव के टुकड़े करने शुरू किए। पुलिस ने मामले में एक और खुलासा किया है। पुलिस का कहना है कि श्रद्धा की हत्या के बाद आफताब श्रद्धा के इंस्टाग्राम अकाउंट से उसके कुछ दोस्तों से बातचीत करता था। जून तक उसने श्रद्धा का इंस्टाग्राम यूज किया।

दरअसल वह यह दिखाना चाहता था कि श्रद्धा जिंदा है। फिलहाल पुलिस इस एंगल पर आफताब से और पूछताछ करेगी।

भगवान बिरसा मुंडा के गाँव में पहली बार राष्ट्रपति, बोलीं द्रौपदी मुर्मू- यह मेरे लिए तीर्थयात्रा समान: उलिहातु को बदहाली दूर होने की उम्मीद

‘जनजातीय गौरव दिवस’ के अवसर पर मंगलवार (15 नवंबर 2022) को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू भगवान बिरसा मुंडा की जन्मस्थली ‘उलिहातु’ पहुँची। झारखंड के इस गाँव में पहुँचने वाली वे पहली राष्ट्रपति हैं। इस दौरान उन्होंने भगवान बिरसा मुंडा के परिजनों से भी मुलाकात की।

2021 में मोदी सरकार ने बिरसा मुंडा की जयंती को ‘जनजातीय गौरव दिवस’ के तौर पर मनाने का फैसला किया था। वैसे तो ‘उलिहातु’ में मूलभूत सुविधाओं की कमी है। लेकिन राष्ट्रपति के अगवानी में यह पूरी तरह सजधज कर तैयार था। ग्रामीणों को उम्मीद है कि इस यात्रा से उनके दिन बदल जाएँगे।

राष्ट्रपति ने ट्वीट कर कहा है, “भगवान बिरसा मुंडा के गाँव उलिहातू में जाकर उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित करने का आज मुझे सौभाग्य मिला। भगवान बिरसा की जयंती के दिन, उनकी प्रतिमा का दर्शन करके, मैं स्वयं को धन्य महसूस कर रही हूँ। उनके जन्म और कर्म से जुड़े स्थानों पर जाना मेरे लिए तीर्थयात्रा के समान है।”

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक उलिहातू के ग्रामीण बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। इन्हें पक्का मकान, शिक्षा और बिजली नसीब नहीं हुई है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू उनके रहने के लिए घर और पीने के पानी का इंतजाम करवाएँगी।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट का स्क्रीनशॉट

‘गाँव में पीने का पानी भी नहीं ‘

रिपोर्ट के अनुसार, उलिहातु की स्थिति बदतर है। यहाँ बिजली, पानी, सिंचाई, स्वास्थ्य और सरकारी योजनाओं की हालत खस्ता है। 5 साल पहले यानी 2017 में उलिहातु के विकास के लिए शहीद ग्राम विकास योजना की शुरुआत की गई थी। उस वक्त भाजपा के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने शिलान्यास किया था। इस गाँव में 164 पक्के मकान बनने थे, पर अब तक एक भी नहीं बना।

‘सड़क पर मिड डे मील खाने को मजबूर’

बिरसा मुंडा के गाँव में शुद्ध पेयजल, बिजली, शिक्षा और आधारभूत संरचना का पूरा विकास होना था, लेकिन 5 साल बाद भी यहाँ कोई बदलाव देखने को नहीं मिल रहा है। स्कूलों में पानी नहीं है। बच्चे सड़क पर मिड डे मील खाने को मजबूर हैं। प्राचार्य कार्तिक सिंह मुंडा कहते हैं, “स्कूल में पानी का संकट है। एक साल में दो बोरिंग फेल हो गया है। चापाकल सूख गया है। बच्चों को बाहर से पानी लाना पड़ता है।”

बिरसा के वंशज खपरैल के मकान में रह रहे

बिरसा मुंडा के पोते सुखराम मुंडा के अनुसार, उनका परिवार खपरैल के मकान में रहता है। सुखराम मुंडा ने कहा, “शहीद ग्राम विकास योजना के तहत गाँव में सबका मकान पक्का बनना है, लेकिन मेरे पास उतनी जमीन ही नहीं है। मेरी बेटी जौनी कुमारी खूंटी कॉलेज से पीजी कर रही है। बेटी को नौकरी मिले, इसके लिए राष्ट्रपति से बोलूँगा।”

गौरतलब है कि भगवान बिरसा मुंडा के परिजनों की बदहाली को लेकर पहली बार ऐसी खबरें सामने नहीं आई हैं। इससे पहले भी कई रिपोर्ट्स सामने आ चुकी हैं, जिसमें उनकी हालत के बारे में बताया गया है। राँची का उलिहातु जो बिरसा मुंडा का जन्मस्थान है वहाँ आज भी उनका परिवार कुएँ का पानी पीने को मजबूर है। उनके परपोते की बहू गांगी मुंडा बताती है कि नल से पानी नहीं आता। बिरसा मुंडा की परपोती गांव की बदतर हालत के लिए सीएम को खुला पत्र भी लिख चुकी हैं।

पानी के टब में सिर, गमछे से बँधे पाँव… चेले के घर में मिला भोजपुरी गीतकार का शव: राष्ट्रपति ने किया था सम्मानित, शारदा सिन्हा ने दी थी आवाज

पटना में भोजपुरी लोकगायक व लेखक ब्रज किशोर दुबे की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है। उनका शव पाटलिपुत्र थाना क्षेत्र के केसरीनगर स्थित अंजना कालोनी के एक मकान के बाथरूम में मिला। उनका सिर पानी भरे टब में था और शरीर का आधा हिस्सा कुर्सी पर था। उनके दोनों पैर तीन से चार गमछों से बँधे थे। जिस मकान में ब्रज किशोर दुबे की लाश मिली है, वहाँ ब्रज किशोर अपने शिष्य रवींद्र कुमार मिश्रा के साथ ‘संगीताश्रम’ चलाते थे।

मकान किराए पर लिया गया था। रिपोर्ट्स के अनुसार, ब्रज किशोर खुद अपनी पत्नी और बच्चों (एक बेटी और एक बेटा) के साथ दीघा के पोल्सन रोड स्थित एलएच मेंसन अपार्टमेंट के एक फ्लैट में रहते थे। लोकगायिका शारदा सिन्हा के कई चर्चित गीत भी ब्रज किशोर दुबे ने लिखे हैं।

रवींद्र से ली थी मकान की चाबी

बताया जा रहा है कि ब्रज किशोर दुबे ने एकांत में गीत लिखने की बात कह कर अपने शिष्य रवींद्र से मकान की चाबी ली थी। चाबी देने के बाद रवींद्र सोनपुर चले गए। शनिवार (12 नवंबर, 2022) को ही ब्रज किशोर रवींद्र के घर पहुँचे। हालाँकि, अगले दिन रविवार को ब्रज किशोर अपने घर लौटे और भोजन करने के बाद दोबारा अंजना कालोनी स्थित रवींद्र के किराए के मकान में पहुँचे। परिजनों के अनुसार, ब्रज किशोर से उनका अंतिम संपर्क रविवार की रात को हुआ था।

फोन पर हुई बातचीत के दौरान ब्रज किशोर दुबे ने घर न लौट पाने की बात कही थी। अगले दिन सुबह (सोमवार) परिवार वालों ने उनके मोबाइल पर व्हाट्सएप मैसेज भेजा, जो सीन तो हुआ लेकिन प्रतिउत्तर नहीं मिला। थोड़ी देर बाद जब परिवार वालों ने कॉल किया तो कॉल भी किसी ने रिसीव नहीं किया और बाद में मोबाइल स्विच ऑफ हो गया। बहुत देर तक जब उनका फोन नहीं आया और वह घर नहीं पहुँचे तो परिजनों ने शिष्य रवींद्र कुमार मिश्रा को फोन किया। उन्होंने कहा कि वो सोनपुर में हैं और आ रहे हैं।

इसके बाद परिवार के लोग रवींद्र कुमार मिश्रा के साथ उसी मकान में पहुँचे। काफी देर तक दरवाजा खटखटाने के बाद भी जब दरवाजा नहीं खुला तो दरवाजा तोड़ दिया गया। बाथरूम में उनकी लाश मिली।

परिवार वालों को हत्या की आशंका

ब्रज किशोर दुबे की मौत की सूचना मिलते ही डीएसपी (लॉ एंड ऑर्डर) संजय कुमार और स्थानीय पुलिस की टीम मौके पर पहुँची। कमरे की तलाशी के दौरान एक सुसाइड नोट मिलने की बात भी कही जा रही है, जिसमें लिखा हुआ है – “मेरी मौत में रवींद्र कुमार मिश्रा का कोई हाथ नहीं है, मैं खुद से आत्महत्या कर रहा हूँ।” हालाँकि, परिवार वाले आत्महत्या वाली बात मानने से इनकार कर रहे हैं। उन्होंने पुलिस के सामने हत्या की आशंका जाहिर की है और मामले की सीबीआई जाँच कराने की अपील की है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने गहनता से जाँच की बात कही है। डीएसपी ने जाँच के लिए एफएसएल की टीम भी बुलायी। टीम ने कमरे से गमछा, बाल्टी, सुसाइड नोट और मोबाइल को कब्जे में ले लिया है। कमरे के दीवारों और फर्श से भी सैंपल लिए गए हैं। डीएसपी संजय कुमार स्थानीय मीडिया को जानकारी दी कि मामले की हर पहलू से जाँच की जा रही है, शुरुआती इन्वेस्टीगेशन में यह आत्महत्या का मामला लग रहा है। उन्होंने कहा कि तहकीकात पूरी होने के बाद ही पूरी जानकारी सामने आ सकेगी।

राष्ट्रपति द्वारा मिला था संगीत नाटक अकादमी सम्मान

ब्रज किशोर दुबे मूल रूप से रोहतास जिला के रहने वाले थे। जो परिवार के साथ दीघा के पोल्सन मोड स्थित एलएच मेंसन अपार्टमेंट में रह रहे थे। ब्रज किशोर लोक गायक होने के साथ ही गीत भी लिखा करते थे। उन्होंने ‘बिहारी बाबू’ और ‘माई’ जैसी कई भोजपुरी फिल्मों के लिए गीत भी लिखा था। ब्रज किशोर दुबे को लोक संगीत बिहार के क्षेत्र में योगदान के लिए 2017 में राष्ट्रपति द्वारा संगीत नाटक अकादमी अवार्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है। ब्रज किशोर भोजपुरी अकादमी में सहायक निदेशक पद पर भी रहे।

‘परिवार के साथ गुजारूँगा समय’: ‘लाल सिंह चड्ढा’ के धड़ाम होने के बाद आमिर खान ने एक्टिंग से लिया ब्रेक, ‘चैंपियंस’ में भी नहीं करेंगे काम

बॉलीवुड अभिनेता आमिर खान (Aamir Khan) ने ‘लाल सिंह चड्ढा’ फिल्म के फ्लॉप होने के बाद एक्टिंग से ब्रेक लेने का फैसला किया है। दिल्ली में सोमवार (15 नवंबर, 2022) को हुए एक कार्यक्रम के दौरान आमिर खान ने खुलासा किया कि वह एक्टिंग से ब्रेक क्यों ले रहे हैं। अभिनेता ने कहा कि एक एक्टर के रूप में वो जब भी कोई फिल्म कर रहे होते हैं, तो उसमें इतना खो जाते हैं कि उन्हें ये भी पता नहीं होता कि उनकी लाइफ में क्या हो रहा है।

उन्होंने बताया, “‘लाल सिंह चड्ढा’ के बाद भी मैं एक फिल्म करने की सोच रहा था, जिसका नाम ‘चैंपियंस’ है। फिल्म की स्क्रिप्ट काफी शानदार है, अच्छी स्टोरी और एक बेहतर फिल्म है। लेकिन, मुझे लगता है कि अब ब्रेक ले लेना चाहिए। मैं अपनी फैमिली, बच्चों और अम्मी के साथ समय बिताना चाहता हूँ।”

आमिर खान ने आगे कहा, “मैं लगभग 35 सालों से कम कर रहा हूँ और मेरा फोकस हमेशा से मेरे काम पर ही रहा है। मुझे लगता है कि जो लोग मेरे करीब हैं यह उनके लिए ठीक नहीं है। मुझे लगता है कि कुछ समय के लिए एक्टिंग से दूर जाने का यही सही समय है। मैं अलग तरीके से लाइफ का एक्सपीरियंस लेना चाहता हूँ। मैं अगले डेढ़ साल तक एक अभिनेता के रूप में काम नहीं करूँगा।”

इसके सा​थ ही ‘लाल सिंह चड्डा’ के अभिनेता ने यह भी साफ कर दिया है कि वह ‘चैंपियंस’ फिल्म में काम नहीं करेंगे। हालाँकि, वो बतौर निर्माता इस फिल्म से जुड़े रहेंगे। आमिर खान ने बताया कि वो लाइफ की उस स्टेज पर खड़े हैं, जहाँ वो अपने रिलेशनशिप्स को इन्जॉय करना चाहते हैं।

बता दें कि आमिर खान ने ‘लाल सिंह चड्ढा’ के जरिए 5 साल बाद बड़े पर्दे पर वापसी की थी और उन्हें इस फिल्म से काफी उम्मीदें थी। हालाँकि, सोशल मीडिया पर बॉयकॉट के बाद उनकी यह फिल्म औंधे मुँह गिर गई। ‘लाल सिंह चड्ढा’ हॉलीवुड की ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘फॉरेस्ट गंप’ की रीमेक थी। ‘चैंपियन्स’ फिल्म की रीमेक पर जनवरी 2023 से काम शुरू हो जाएगा। फिल्म का निर्देशन आरएस प्रसन्ना करेंगे। प्रसन्ना ‘शुभ मंगल सावधान’ का निर्देशन कर चुके हैं। वहीं, इसके संगीत पर शंकर-एहसान-लॉय काम करेंगे।

‘पारसी है आफताब, मुस्लिमों को बदनाम मत करो’: दलित श्रद्धा के 35 टुकड़े करने वाले के मजहब पर क्यों डाला जा रहा पर्दा

दिल्ली पुलिस ने शनिवार (12 नवंबर, 2022) को श्रद्धा नाम की दलित लड़की की हत्या और लाश के 35 टुकड़े करने के आरोप में आफ़ताब को गिरफ्तार किया है। दोनों लिव इन रिलेशनशिप में रह रहे थे। इस खबर के वायरल होते ही सोशल मीडिया के एक खास वर्ग ने आफताब के मज़हब को छिपाने की कोशिश शुरू कर दी। उस समूह ने यह अफवाह उड़ानी शुरू कर दी कि श्रद्धा का कातिल आफताब मुस्लिम नहीं बल्कि पारसी है।

इस नैरेटिव को भी सेट किया जाने लगा कि आफ़ताब को इस्लाम मजहब से जुड़ा बता कर मुस्लिमों को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है।

भ्रम फैलाने की कोशिश

‘मियाँ ज़ालिक (@XunizXan)’ नाम के हैंडल ने भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला के ट्वीट को Quote करते हुए लिखा, “वो तेरी बिरादरी का है।” बता दें कि शहजाद भी मुस्लिम समुदाय से ही आते हैं।

लगभग इसी प्रकार का कमेंट सईद मोहम्मद ने भी @Syed5056 नाम के हैंडल से किया है। उन्होंने लिखा, “लड़के का नाम आफ़ताब पूनावाला है जो पारसी है न कि मुस्लिम। इसे कुछ लोग हिन्दू-मुस्लिम का रंग दे रहे हैं, जबकि ऐसा नहीं है।”

एक अन्य यूजर मोहम्मद मीराज ने भी आफ़ताब के पारसी होने का दावा किया है।

आफ़ताब ने ही खुद को बताया था मुस्लिम

अक्सर ये देखने को मिलता है कि मुस्लिम समुदाय के लोग आरोपित के अपने मज़हब और पीड़ित के हिन्दू होने के मौकों पर मामले को उलझाने का प्रयास करते हैं। जबकि, सच्चाई इस से थोड़ा अलग होती है। आफ़ताब की ही साल 2014 में की गई एक पोस्ट में उसने खुद के मुस्लिम होने की बात कबूली है। आफताब का इंस्टाग्राम प्रोफ़ाइल ‘@thehungrychokro’ नाम से है।

इंस्टाग्राम पर ‘@zloymom’ नाम के हैंडल ने साल 2014 में आफताब का मज़हब पूछा था। उस पोस्ट के जवाब में भी आफताब ने खुद को मुस्लिम बताया था।

चित्र साभार- आफताब के इंस्टाग्राम कमेंट

ऊपर दिए तमाम सबूतों से जाहिर है कि श्रद्धा का कातिल आफताब इस्लाम मजहब का है। इसके अतिरिक्त मृतका के पिता द्वारा पुलिस में दर्ज FIR में भी आरोपित को मुस्लिम मज़हब का बताया गया है।

FIR Copy

क्या है पूरा मामला

गौरतलब है कि साल 2019 में मुंबई के कॉल सेंटर में एक साथ काम करने के दौरान आफ़ताब और श्रद्धा लिव इन रिलेशन में रहना शुरू कर दिए थे। बाद में श्रद्धा ने आफताब पर शादी का दबाव बनाया। हालंकि इसके लिए मृतका के परिजन तैयार नहीं थे। बाद में सबको छोड़ कर श्रद्धा आफताब के साथ दिल्ली में रहने चली आई। यहाँ आफताब ने 18 मई 2022 को श्रद्धा का गला दबा कर मार डाला और लाश के 35 टुकड़े कर के 18 दिनों में ठिकाने लगा दिया। नवम्बर 2022 में श्रद्धा के पिता की शिकायत पर दिल्ली पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है।

जनजातीय गौरव दिवस: जो ईसाई मिशनरी, अंग्रेज, इस्लामी आक्रांता… सबसे लड़े, 12 नायकों की गाथा एक साथ पढ़िए

भगवान बिरसा मुंडा की जयंती ‘जनजातीय गौरव दिवस’ के तौर पर मनाया जाता है। यह दिन उन नायकों को याद करने का है, जिन्होंने राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान दिया। वे ईसाई मिशनरियों की धर्मांतरण की साजिशों से लड़े। अंग्रेजों से लड़े। इस्लामी आक्रांताओं से लड़े।

सबसे पहले बात भगवान बिरसा मुंडा की। युवावस्था में ही बिरसा मुंडा अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह में नायक बन कर उभरे और जनजातीय समूह ने उन्हें अपना नेता माना। 25 से भी कम उम्र में उन्होंने देश के लिए बलिदान दे दिया। उनका जन्म छोटानागपुर पठार क्षेत्र में 1875 ईस्वी में हुआ था। ईसाइयों द्वारा संचालित एक विद्यालय में कुछ दिन पढ़ने के दौरान उन्हें जनजातीय वर्ग के धर्मांतरण की साजिशों का पता चला।

उन्होंने मुंडा और उराँव समुदाय को एकजुट किया। 1886-90 में वो चाईबासा के विद्रोह में शामिल रहे। 3 मार्च, 1900 को चन्द्रक्रधरपुर के जम्कोपाई जंगलों में जब वे अपने साथियों के साथ सो रहे थे, तभी अग्रेजों ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। उनके संघर्ष और दबाव का ही नतीजा था कि ब्रिटिश सरकार को जनजातीय समुदाय के जमीन के अधिकारों के संरक्षण के लिए कानून बनाना पड़ा।

अकाल पीड़ित जनता की सहायता के लिए उन्हें ‘धरती बाबा’ की उपाधि लोगों ने दी। 1897-1900 के बीच अंग्रेजों से उनका समाज का कई बार युद्ध हुआ। 1897 में उन्होंने तीर-कमान और तलवार से लैस साथियों के साथ खूँटी थाने पर हमला किया था। 1898 में तांगा नदी के किनारे संघर्ष हुआ। 1900 में डोमबाड़ी पहाड़ी पर संघर्ष हुआ। इस दौरान अंग्रेजों ने काफी क्रूरता की।

रघुनाथ शाह और शंकर शाह : मध्य प्रदेश का गोंडवाना, जिसे वर्तमान में जबलपुर के नाम से जाना जाता है, वहाँ के राजा शंकर शाह और उनके बेटे कुँवर रघुनाथ शाह ने अंग्रेजों से लड़ते हुए बलिदान दे दिया था। सितंबर 2021 में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने इन जनजातीय नायकों के सम्मान में ‘जनजातीय गौरव समारोह’ में शिरकत की थी। 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में अंग्रेजी हुकूमत ने दोनों को तोपों से बाँधकर उनकी निर्मम हत्या कर दी थी। दोनों ने अपने आसपास के राजाओं को अंग्रेजों के खिलाफ एकजुट किया था। उनकी कविताओं ने शहरवासियों में विद्रोह की अग्नि सुलगा दी थी। हालाँकि, एक गद्दार के कारण इन दोनों को अंग्रेजों ने पकड़ लिया था।

खाज्या नायक : ये जनजातीय नायक गुमा नायक नाम के एक चौकीदार के बेटे थे। अंग्रेजों से लोहा लेते हुए ये बलिदान हुए थे। अंग्रेजों की भील-गोंड पलटन में सिपाही रहे खाज्या नायक सेंधवा-जामली चौकी से सिरपुर तक 24 मील लम्बे मार्ग की निगरानी का कार्य सौंपा गया था। 1831-51 तक नौकरी के बाद उन्होंने एक लुटेरे को एक व्यक्ति को लूटते देखा तो उस पर हमला किया। उसकी मौत हो गई तो इन्हें नौकरी से निकाल कर जेल भेज दिया गया। 1857 के युद्ध में उन्हें वापस बुलाया गया, लेकिन कैप्टन बर्च नाम के एक अंग्रेज अधिकारी ने उनके जाति-समुदाय और रंग-रूप पर भद्दी टिप्पणियाँ की। उन्होंने अपने साथियों के साथ अंग्रेजों को लूटा और कइयों को मार गिराया। बाद में 1860 में एक मुठभेड़ में वो बलिदान हुए। बड़वानी में उनका बड़ा प्रभाव था।

सीताराम कँवर : 1857 की क्रांति के दौरान उन्होंने बड़वानी राज्य के नर्मदा पार के क्षेत्र (जिनमें आज का निमाड़ क्षेत्र सम्मिलित है) में ब्रिटिश शासन के खिलाफ एक बड़े विद्रोह का नेतृत्व किया था। सतपुरा श्रेणी के भीलों में उन्होंने आज़ादी की अलख जगाई। तांत्या टोपे के साथ उनके संपर्क थे। 9 अक्टूबर, 1958 को उनका बलिदान हुआ था। उन्होंने एक साथ कई जगहों पर विद्रोह किया। होल्कर के राजा ने अंग्रेजों के साथ मिल कर इन्हें मारने का कुचक्र रचा। दिलशेर खान को एक बड़ी सेना के साथ भेजा गया था। गाँव वालों को बचाने के लिए ये अंग्रेजी सेना से भिड़ गए। उस युद्ध में 20 जनजातीय स्वतंत्रता सेनानी बलिदान हुए थे।

भीमा नायक : इन्हें ‘निमाड़ का रॉबिनहुड’ भी कहा जाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2019 लोकसभा चुनाव के दौरान भी कहा था कि जैसे मेरठ में मंगल पांडेय थे, वैसे ही मध्य प्रदेश में भीमा नायक। जनजातीय लोगों को एकजुट कर 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में अंग्रेजों से भिड़ने वाले भीमा नायक की कोई तस्वीर/स्केच तक अंग्रेजों के हाथ नहीं लग पाई। बड़वानी रियासत से लेकर महाराष्ट्र के खानदेश तक उनका प्रभाव था। 1857 के अम्बापानी युद्ध में उन्होंने बड़ी भूमिका निभाई थी। तात्या टोपे ने निमाड़ में उनसे मुलाकात की थी। 29 दिसम्बर, 1876 को पोर्टब्लेयर में उन्होंने अंतिम साँस ली। एक गद्दार की मुखबिरी के कारण उन्हें पकड़ा गया था।

रघुनाथ सिंह मंडलोई : ये खरगोन के जनजातीय समाज के ग्राम टांडाबरुड़ के रहने वाले थे। वो भिलाला जनजाति के नायक थे। अक्टूबर 1858 में बीजागढ़ के किले में अंग्रेजों ने उन्हें घेर लिया था। इसी दौरान उन्हें बंदी भी बना लिया गया था। उन्होंने अंग्रेजों के विरुद्ध विद्रोह का बिगुल फूँका हुआ था।

सुरेंद्र साय: मात्र 18 वर्ष की उम्र से ही इन्होने अंग्रेजों के विरुद्ध हथियार उठा लिया था। इनका जन्म 23 जनवरी, 1809 को संभलपुर के पास खिंडा में हुआ था। उन्होंने गोंड और बिंझल जनजातीय समुदाय के लोगों के हक़ की आवाज़ उठाई। 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में उन्होंने देश के लिए योगदान दिया। इसके 5 वर्षों बाद उन्हें अंग्रेजों ने पकड़ लिया। मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले के असीरगढ़ किले में उन्हें कैद कर के रखा गया था। 23 मई, 1884 को उनका निधन हुआ। ये जनजातीय राजवंश के थे, लेकिन अंग्रेजों ने इन्हें नज़रअंदाज़ कर के राजा के निधन के बाद रानी को सत्ता सौंप दी और रिमोट से शासन चलाने लगे। डेबरीगढ़ में भी उन पर अग्रेजों ने जानलेवा हमला किया था, लेकिन वो वहाँ से किसी तरह बच निकले थे।

टंट्या भील: अंग्रेज इन्हें डकैत मानते थे, लेकिन ये एक स्वतंत्रता सेनानी थे। वो अंग्रेजों का धन लूट लेते थे और इसे गरीबों में बाँट देते थे। 19 अक्टूबर, 1889 को इन्हें अंग्रेजों ने मौत की सज़ा दे दी थी। इन्हें फाँसी से लटका दिया गया था। इनका जन्म बरदा तहसीन के पंधाना में 1840 के करीब में हुआ था। अंग्रेजों ने इनका साथ छल किया था। इन्हें माफ़ी देने के नाम पर पकड़ लिया गया था। 12 वर्षों तक इन्होने आक्रांता अग्रेजों की नाक में दम कर रखा था। जनता भी इनका साथ देती थी। सभी उम्र के लोग प्यार से उन्हें ‘मामा’ कहते थे। गुरिल्ला युद्ध में पारंगत रहे टंट्या भील ने कई बार जेल तोड़ डाली थी। उनकी बहन के पति ने ही गद्दारी कर के उन्हें पकड़वा दिया था।

मंशु ओझा : ये इन जनजातीय योद्धाओं से कुछ पीढ़ी आगे के नायक हैं। 1942 के ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ के दौरान इन्होने अंग्रेजों की नाक में दम किया था। नवंबर 1942 में अंग्रेजों ने इन्हें गिरफ्तार कर लिया था। नरसिंहपुर जेल में इन्हें कैद कर दिया गया। कड़ी यातनाएँ दी गईं। लेकिन, इन्होंने अपने सपनों का आज़ाद भारत देखा। 28 अगस्त, 1981 को इनका निधन हुआ। रातामाटी में इनका जन्म हुआ था, लेकिन परिवार बाद में घोड़ाडोंगरी के बैतूल में रहने लगा। निर्धनता थी ही, शिक्षा-दीक्षा भी नहीं हो पाई थी। देशभक्ति गीत गाते हुए इन्होंने अपने साथियों के साथ मिल कर रेल की पटरियाँ उखाड़ी थीं। इनके पिता का नाम उमराव ओझा था।

रानी दुर्गावती: इनका जन्म 5 अक्टूबर, 1524 ईस्वी को हुआ था। ये अंग्रेजों के शासन से कई 3 सदी पहले की वीरांगना थीं। मध्य प्रदेश के गोंडवाना में उनका शासन था। जिस गढ़मंडला राज्य पर उनका शासन था, उसका केंद्र जबलपुर में था। उनके पति गौड़ राजा दलपत शाह की असामयिक मृत्यु हो गई थी। रानी दुर्गावती ने अपने नाबालिग

अपने नाबालिग बेटे वीर नारायण को गद्दी पर बिठाया। हालाँकि, शासन और राजकाज वही संभाला करती थीं। इलाहाबाद के मुग़ल आक्रांता आसफ खान के साथ इनका युद्ध हुआ। इनका शसन 1550-1564 तक चला था। अकबर के आदेश पर जब मुगलों ने उन पर आक्रमण किया, तब उन्होंने होने दीवान से कहा था कि गुलाम रहने से बेहतर है युद्ध के मैदान में सम्मान से मरना। युद्ध में इन्होंने मैदान छोड़ने या दुश्मन के हाथों मरने से अच्छा खुद की जान लेना उचित समझा।

मुड्डे बाई : मध्य प्रदेश के जनजातीय लोगों के लिए 9 अक्टूबर का दिन काफी खास रहता है, क्योंकि इस दिन 1930 में अंग्रेजों के विरुद्ध 400 आदिवासियों ने मिल कर जंगल सत्याग्रह आरंभ किया था।ग्रामीणों के इस सत्याग्रह से बौखलाए अंग्रेजों द्वारा मुड्डे बाई, रेनो बाई, देभो बाई और बिरजू भोई की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस गोलीकांड ने अंग्रेजों की क्रूरता का नया अध्याय लिखा। अंग्रेजों ने जंगल पर जनजातीय लोगों के अधिकार को कुचलते हुए उनके लकड़ी काटने तक पर प्रतिबंध लगा रखा था।