Homeरिपोर्टअंतरराष्ट्रीयईरान के हिजाब विरोध में शामिल हुए मशहूर शेफ की निर्मम हत्या: फोर्स ने...

ईरान के हिजाब विरोध में शामिल हुए मशहूर शेफ की निर्मम हत्या: फोर्स ने पीट-पीटकर मारा, परिवार को कहा- सबको हार्ट अटैक बताना

शाहिदी की मौत सिर दिमाग पर चोट आने से हुई। परिवार का कहना है कि उन पर ये कहने के लिए दबाव बनाया गया कि उनका लड़का हार्ट अटैक से मरा है।

ईरान के हिजाब विवाद के बीच वहाँ एक सेलेब्रिटी शेफ महरशाद शाहिदी की हत्या का मामला प्रकाश में आया है। खबरों के मुताबिक उन्हें कुछ दिन पहले हिजाब के विरुद्ध किए जा रहे प्रदर्शन में शामिल होने पर गिरफ्तार किया गया था। इसते बाद खबर आई कि वहाँ कि रेवोल्यूशनरी गार्ड फोर्स ने उन्हें पीट-पीट कर मार डाला। कथिततौर पर शाहिदी की हत्या उनकी 20वें जन्मदिन से एक दिन पहले हुई।

घटना से नाराज सैंकड़ों लोग सड़कों पर आए और शाहिदी की अंतिम यात्रा में शामिल हुए। रिपोर्ट्स के अनुसार, शाहिदी ईरान में बहुत मशहूर शेफ थे। उन्हें ईरान का जेमी ओलिवर कहा जाता था। लेकिन कुछ दिन पहले उन्हें एक प्रदर्शन में शामिल होने पर पकड़ा गया और फिर उनके ऊपर ताबड़तोड़ लाठियाँ चलाई गईं।

रिपोर्ट्स की मानें तो शाहिदी की मौत सिर दिमाग पर चोट आने से हुई। परिवार का कहना है कि उन पर ये कहने के लिए दबाव बनाया गया कि उनका लड़का हार्ट अटैक से मरा है। ईरानी टीवी पर दिए इंटरव्यू में महरशाद के परिजन ने कहा, “हमारे बेटे ने सिर पर चोट आने के कारण अपनी जिंदगी खो दी। लेकिन हम पर दबाव बनाया गया कि वो हार्ट अटैक से मरा है।”

ईरानी प्रशासन का शेफ की मौत में अपना हाथ होने से साफ मना किया है। उनका कहना है कि उसके हाथ, पाँव, दिमाग में कोई फ्रैक्चर नहीं था। जबकि सामान्य जन इस घटना के लिए ईरानी प्रशासन को ही कोस रहे हैं। सैंकड़ों शाहिदी के लिए सड़कों पर हैं। हिजाब उतारकर आजादी के नारे लग रहे हैं।

शेफ की मौत पर ईरानी अमेरिकी लेखक डॉ नीना अंसारी ने कहा, “वह एक प्रतिभाशाली शेफ थे। उन्हें ईरान की सेना ने निर्ममता से मारा। अगले दिन उसका जन्मदिन था। हम ये न कभी भूलेंगे और न ही कभी माफ करेंगे।”

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

‘यहाँ मस्जिद थी, है और रहेगी’: संभल दंगे की न्यायिक जाँच आयोग रिपोर्ट में सपा सांसद जिया-उर-रहमान बर्क का जिक्र 100+ बार, 199 साक्षियों...

संभल दंगों की न्यायिक जाँच आयोग की रिपोर्ट में सांसद जिया-उर-रहमान बर्क का 100 बार से भी अधिक बार जिक्र। वो भी सबूतों के साथ।

100 नाराज़ ≠ 100 वोट: भारतीय राजनीति में सिर्फ़ ‘नाराज़गी’ का फ़ैक्टर कभी निर्णायक क्यों नहीं रहा

SC/ST Act, आरक्षण, Caste census, सरकारी नौकरियों में हिस्सेदारी, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और सामाजिक न्याय की राजनीति जैसे मुद्दे निश्चित रूप से सवर्णों में असंतोष पैदा कर सकते हैं। इन प्रश्नों को खारिज करना भी राजनीतिक मूर्खता होगी।
- विज्ञापन -