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रवीश कुमार+स्वरा भास्कर की मजबूरी भारी: मन कहे- राहुल गाँधी से न हो पाएगा, जुबान फिर भी करे जी-हुज़ूरी

कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी इन दिनों ‘भारत जोड़ो यात्रा’ निकाल रहे हैं, लेकिन पार्टी की उम्मीद के मुताबिक मीडिया की फुटेज उन्हें मिल नहीं रही। ऐसे में अब अभिनेत्री स्वरा भास्कर राहुल गाँधी के महिमामंडन के लिए आगे आई हैं। इसके जरिया बना है – रवीश कुमार का वीडियो। दोनों को लगता है कि राहुल गाँधी को वोट नहीं मिलने वाले, लेकिन खुलेआम कैसे स्वीकारें? इसीलिए, अब वो ‘दिल जीतने’ वाला प्रोपेगंडा लेकर आए।

अक्सर ऐसा होता है कि दो तीनों के मैच के बाद हारने वाली टीम को ‘दिल जीतने वाला’ बता दिया जाता है। यहाँ राहुल गाँधी के समर्थकों को पता है उन्हें हार ही मिलनी है चाहे वो कुछ भी कर लें, इसीलिए जो बात बाद मेंबोलनी है, अभी से ही बोल रहे। NDTV पर रवीश कुमार का एक वीडियो शेयर कर के राहुल गाँधी को महान दिखाने की कोशिश की। वैसे स्वरा भास्कर पहले भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विरोधियों को बिन माँगे समर्थन देती रही हैं।

स्वरा भास्कर ने ट्विटर पर लिखा, “इसका श्रेय उन्हें दिया जाना बाकी था। चुनावी विफलताओं, ट्रॉलिंग, व्यक्तिगत हमलों और उन्हें अयोग्य बताते हुए लगातार हो रही आलोचना के बावजूद राहुल गाँधी ने सांप्रदायिक भाषणबाजी के सामने घुटने नहीं टेके। न ही उन्होंने सनसनीबाजी वाली राजनीति के सामने हार मानी। इस देश की जैसी स्थिति है, उसमें ‘भारत जोड़ो यात्रा’ जैसा प्रयास सराहनीय है।” साथ ही उन्होंने 2 मिनट 20 सेकेण्ड का एक क्लिप शेयर किया, जो NDTV के ‘प्राइम टाइम’ शो का है।

इसमें रवीश कुमार कहते दिख रहे हैं कि राजनीति के पास कोई और भाषा नहीं बची है, लेकिन इतने चुनाव हारने के बावजूद राहुल गाँधी ने धर्म का सहारा नहीं लिया और 3000 किलोमीटर की पदयात्रा निकाल ली। इस दौरान वो ये भी कहते दिखे कि कई लोग कह रहे इससे वोट नहीं मिलेगा, लेकिन इसके बावजूद राहुल गाँधी ने भाषा की शालीनता नहीं छोड़ी और अपने पिता-नाना के अपमान का रोना नहीं रोया। उन्होंने कहा कि राहुल गाँधी ने देवी-देवताओं की तस्वीरें नहीं लगाई।

रवीश कुमार इस वीडियो इससे नाराज़ दिखते हैं कि चैनलों में उनकी इस यात्रा को कवर नहीं किया जा रहा और अख़बारों में इसके बारे में नहीं छप रहा। रवीश कुमार ने दावा किया कि राहुल गाँधी धर्म की राजनीति के खिलाफ आवाज़ उठाते हुए मछुआरों की आवाज़ उठा रहे हैं। रवीश कुमार ने हमेशा की तरह उद्योगपतियों को भी आड़े हाथों लिया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर राजनीति को ‘धर्म के उत्सव’ में बदलने का आरोप लगाया।

इतना ही नहीं, वो करेंसी नोटों पर लक्ष्मी-गणेश की तस्वीरों की माँग करने वाले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के प्रति भी नाराज़गी दिखाई। वैसे, रवीश कुमार हमेशा की तरह इस बार भी झूठ बोल रहे हैं। राहुल गाँधी ने ‘भारत जोड़ो यात्रा’ में भी टीका लगाया गया। उन्होंने कर्नाटक के मैसूर में लिंगायत मठ का दौरा किया, आंध्र के अडोनी में गंगा मंदिर गए। चर्च और मस्जिदों में भी गए, ऐसे में क्या इसे धर्म की राजनीति नहीं मानते रवीश कुमार? और हाँ, राहुल गाँधी अपने पिता और दादी के मारे जाने का रोना भी रो चुके हैं।

‘मेरे पिता को मार दिया, मेरी दादी को मार दिया’ – ये किसके शब्द थे? रवीश कुमार ने नया यूट्यूब चैनल बना लिया है, शायद उन्हें डर है कि NDTV अब अडानी को बिक गया है तो उन्हें कभी भी निकाला जा सकता है। इसीलिए, अब वो टीवी और यूट्यूब, दोनों से प्रोपेगंडा चला रहे हैं। असली बात तो ये है कि ‘भारत जोड़ो यात्रा’ में सारे तिकड़म आजमाए जा रहे हैं, लेकिन जब नेता ही जनता को पसंद नहीं हो तो भला वोट कैसे मिलेंगे? धर्म नहीं, लेकिन मजहब की राजनीति तो खूब की है कॉन्ग्रेस ने।

‘मैं अपनी टेस्ला की पेमेंट कैसे दूँगा’: खुद को ट्विटर कर्मचारी बता दो युवकों ने CNBC को बनाया बेवकूफ, कहा- लोकतंत्र की चिंता हो रही है

ट्विटर का मालिक बदलने के बाद से लगातार उससे जुड़ी खबरें तेजी से दिखाने के चक्कर में अमेरिकी न्यूज चैनल CNBC एक प्रैंक का शिकार हो गया। न्यूज चैनल ने हड़बड़ी में दो ऐसे अंजान लोगों को ट्विटर के एक्स कर्मचारी बनाकर पेश कर दिया जिनका कंपनी से कोई लेना-देना ही नहीं था। बस वो दोनों उन्हें ट्विटर के बाहर दिखे और चैनल तुरंत अपने सवाल पूछने लगा।

अपना नाम डेनियल जॉनसन बताने वाले शख्स ने कहा, “मैं डेटा इंजीनियर हूँ। हमें बहुत परेशानियाँ हो रहीं थीं। फिर एलन आए और टीम को निकाल दिया।” डेनियल ने वीडियो में दावा किया कि वो ट्विटर में 6 साल से काम कर रहा था। उसने कहा, “मैं एलन मस्क की इज्जत करता हूँ, लेकिन हाल में उन्होंने जैसी बातें की वह चिंताजनक हैं। मैंने टेस्ला गाड़ी खरीद रखी है। मैं कार का भुगतान कैसे करूँगा।”

आगे डेनियल ने ट्विटर की फ्री स्पीच पर चिंता दिखाई और सीएनबीसी के साथ खेल करते हुए कहा कि मस्क के आ जाने से नाजी लोग ताकतवर होंगे जिन्हें ट्रांसजेंडर्स से नफरत है। इसके बाद डेनियल अपनी बात कहकर चले गए। वहीं डेनियल के साथ जो उनका दूसरा साथी था वो इस प्रैंक को आगे बढ़ाने लगा। उसने खुद की पहचान एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर बताई। जब पत्रकार ने उससे उसका नाम पूछा तो उसने अपना नाम राहुल लिगमा बताया। उसने कहा कि उसे इस तरह किसी बाहरी का आना ठीक नहीं लग रहा। वह लोकतंत्र को लेकर चिंतिंत हैं।

इन दोनों लोगों की बातों के आधार पर सीएनबीसी की टेक चेक जर्नलिस्ट डिएड्रे बोसा ने दावा किया कि कैसे ट्विटर से इंजीनियर्स का सफाया हो रहा है। ये केवल दो थे। आगे उन्होंने कहा, “देख सकते हैं कि कैसे ये लोग सदमे में हैं। डेनियल ने हमें बताया कि उसने टेस्ला खरीद रखी है और उसे नहीं मालूम कि वो उसका भुगतान कैसे करेगा। साफ कहूँ तो मुझे नहीं लगता उसके दिमाग में टेस्ला थी उसके दिमाग में एलन मस्क होगा।”

अपनी सारी बात कहने के बाद पत्रकार ने यह भी कहा कि उनकी टीम इस बात की पुष्टि नहीं करती कि जिन लोगों से उन्होंने बात की वो ट्विटर कर्मचारी थे भी या नहीं।

सीएनबीसी की इस रिपोर्ट के बाद एलन मस्क ने भी उनसे मजे लिए। वहीं अन्य यूजर्स ने बताया कि कैसे सीएनबीसी ने कुछ अंजान लोगों को ट्विटर कर्मचारी बनाकर पेश कर दिया जबकि वो दोनों केवल हाथ में बॉक्स लेकर जा रहे थे। एलन मस्क ने इसका मजाक उड़ाते हुए कहा- सर्वश्रेष्ठ रिपोर्टिंग।

‘ईसा मसीह को मानो, दीपावली पर घरों में घुस फाड़ी देवी-देवताओं की तस्वीर’: मेरठ में ‘मदद’ के नाम पर 400 लोगों को बनाया ईसाई

उत्तर प्रदेश के मेरठ में 400 से अधिक गरीब लोगों को सहायता के नाम पर ईसाई में धर्मांतरण कराने की साजिश का मामला सामने आया है। इन लोगों का कहना है कि कोरोना महामारी के दौरान कुछ लोगों ने उनकी मदद की थी। वही लोग धोखे से उनका मतांतरण कर दिए और अब उनसे घरों में रखी देवी-देवताओं की मूर्तियों को बाहर करने का दबाव डाल रहे हैं। इस साजिश के तार दिल्ली से जुड़ रहे हैं।

मेरठ के मंगरपुरम स्थित ब्रह्मपुरम थाना क्षेत्र के मलिन बस्ती में रहने वाले गरीब लोगों का कहना है कि कोरोना महामारी के दौरान लॉकडाउन की वजह से उनके काम-धंधे पर असर पड़ा था। इसके कारण उन्हें खाने के लिए मोहताज होना पड़ा था। इस दौरान ईसाई समाज के कुछ लोगों ने उनके लिए खाने-पीने का इंतजाम करके उनकी मदद की थी। इन लोगों ने पैसों से भी इनकी मदद की थी।

इस मदद के कारण ये लोग ईसाई समाज के उन लोगों पर विश्वास करने लगे। इसके बाद ईसाई धर्म से जुड़े लोगों ने इन लोगों पर हिंदू धर्म के अनुसार पूजा-पाठ नहीं करने का दबाव बनाया। इससे तंग आकर इन लोगों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत की कॉपी ऑपइंडिया के पास उपलब्ध है।

दी गई शिकायत में कहा गया है, “कोरोना के दौरान हमारी मदद करने के बाद ये लोग (ईसाई) कहने लगे कि ईश्वर एक है और वह ईसा मसीह है। तुम चर्च में आओ और प्रार्थना करो। हमलोग चर्च जाने लगे। कुछ दिन बाद इन लोगों ने कहा कि तुम अपने भगवानों की पूजा छोड़कर ईसा मसीह की पूजा करो। इसके बाद ये लोग आधार कार्ड पर भी नाम बदलवाने का दबाव बनाने लगे।”

अपनी शिकायत में पीड़ितों ने आगे कहा, “हम दीपावली के दिन अपनी घरों में पूजा कर रहे थे तो ये लोग हमारी झुग्गी-झोपड़ियों में घुसकर हमारे भगवानों की तस्वीरें फाड़ दीं और बोले कि तुम लोगों ने अपना धर्म बदल लिया है और ईसाई बन गए हो। अब ईसा मसीह को मानो। ये लोग हमसे दो-दो लाख रुपए माँगने लगे। जब हमने विरोध किया तो ये लोग घरों से चाकू, डंडे लेकर आए और शिकायत करने पर जान से मारने की धमकी दी।”

पीड़ितों का कहना है कि ये सनातन धर्म को मानने वाले लोग हैं और धोखा देकर इनका धर्मांतरण करा दिया गया है। उन्होंने प्रशासन से जाँच करके मामले में अविलंब कार्रवाई करने की माँग की है। एसपी सिटी का कहना है कि आरोपितों के खिलाफ FIR दर्ज कर ली गई है। यूपी के गैरकानूनी धर्म परिवर्तन निषेध अधिनियम के 9 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई।

जिन लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है, उनके नाम हैं छबीली उर्फ शिवा, बिनवा, अनिल, सरदार, निक्कू, बसंत, प्रेमा, तितली और रीना हैं।

कहा जा रहा है कि धर्मांतरण की इस साजिश को दिल्ली में रचा गया था। कहा जा रहा है कि दिल्ली के पास्टर महेश ने पूरी प्लानिंग से इन लोगों का मतांतरण कराया है। बेटियों की शादी और बच्चों की पढ़ाई का भी खर्च महेश उठा रहा था। इस पूरे मामले की निगरानी रेलवे रोड निवासी अनिल कर रहा था।

जाँच के दौरान अस्थायी चर्च से कुछ रजिस्टर मिले हैं, जिनमें मतांतरण कराए गए सभी लोगों के नाम लिखे हैं। उन लोगों को पैसे कैसे दिए जाते थे, इसका भी उल्लेख किया गया है। इस मामले में पुलिस ने कुछ लोगों को हिरासत में लिया है, जबकि पास्टर महेश और अनिल की तलाश की जा रही है। अब तक जाँच से सामने आया है कि मंगतपुरम में 550 लोग रहते हैं, जिनमें 400 लोगों का धर्मांतरण करा दिया गया है।

पास्टर महेश ने मंगतपुरम के धर्मांतरित लोगों की बेटियों की शादी और उनके बच्चों की पढ़ाई का खर्चा उठाने का जिम्मा लिया था। इनमें से कुछ लोगों की बेटियों की शादी भी ईसाई समुदाय के युवकों से कराई गई है। यहाँ के बच्चों को भी उनकी संस्था द्वारा ही पढ़ाया जा रहा है।

कोयम्बटूर में मंदिर उड़ाना चाहता था आत्मघाती हमलावर, ईस्टर सीरियल ब्लास्ट के आतंकियों से मुलाकात भी फिरोज इस्माइल ने कबूली: रिपोर्ट्स

तमिलनाडु के कोयम्बटूर कार ब्लास्ट (Coimbatore Car Blast) की जाँच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार आत्मघाती हमलावर मंदिर उड़ाने की फिराक में था। इस मामले में गिरफ्तार किए गए छह लोगों में से एक फिरोज इस्माइल ने पूछताछ में श्रीलंका में ईस्टर पर हुए सीरियल ब्लास्ट में संलिप्त आतंकियों से मुलाकात की बात भी मानी है। राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने इस मामले में पहली एफआईआर भी दर्ज कर ली है।

कोयम्बटूर के कोट्टई ईश्वरम मंदिर के 23 अक्टूबर 2022 की सुबह करीब 4 बजे ब्लास्ट हुआ था। इस ब्लास्ट में 25 साल का जमिशा मुबीन मारा गया था। NIA ने मुबीन के आत्मघाती हमलावर होने की आशंका जताई है। उसके घर से बड़ी मात्रा में विस्फोटक भी बरामद हुआ था। माना जा रहा है कि विस्फोटकों के इस्तेमाल में नौसिखिया रहने के कारण वह अपने मिशन को अंजाम देने में सफल नहीं हो पाया।

इस मामले की जाँच कर रहे अधिकारियों ने बताया कि हमले से एक दिन पहले यानी 22 अक्टूबर 2022 को मुबिन और उसके दो साथियों मोहम्मद अजहरुद्दीन और अफसर खान को सीसीटीवी फुटेज में कार में दो एलपीजी सिलेंडर के साथ पोटेशियम नाइट्रेट से भरे तीन स्टील के ड्रम, एल्युमिनियम पाउडर, सल्फर, चारकोल और कीलें इत्यादि रखते हुए देखा गया था। एक अन्य फुटेज में मुबिन और उसके साथी हमले से पहले रेकी करते हुए भी दिख रहे है। तीनों ने बिग बाजार गली स्थित कोनियम्मन मंदिर और पुलियाकुलम मुंधी विनयागर मंदिर की भी रेकी की थी।

इस मामले में गिरफ्तार आरोपितों ने पूछताछ में बताया है कि मुबिन ने सोचा था कि उसके सुसाइड बॉम्बिंग मिशन से इलाके में 50 से 100 मीटर के दायरे में तबाही मच जाएगी और मंदिर समेत कुछ घर भी इसकी जद में आएँगे। फिरोज इस्माइल ने पूछताछ के दौरान यह बात भी कबूल की है कि वह आईएस आतंकी मोहम्मद अजहरुद्दीन और राशिद अली से मिला था। दोनों श्रीलंका में ईस्टर पर हुए सीरियल ब्लास्ट में शामिल थे और केरल की जेल में बंद हैं।

बता दें कि ब्लास्ट के अगले दिन ही पुलिस ने पाँच लोगों को को गिरफ्तार किया था। इनकी पहचान मोहम्मद थलका (25), मोहम्मद असरुद्दीन (25), मोहम्मद रियाज (27), फिरोज इस्माइल (27) और मोहम्मद नवाज इस्माइल (27) के रूप में हुई थी। वहीं मुबीन के रिश्तेदार अफसर खान को 27 अक्टूबर को गिरफ्तार किया गया था।

NIA ने अपनी एफआईआर में कहा, ”मृतक जमिज़ा मुबीन के परिसरों की तलाशी में 109 वस्तुएँ जब्त की गईं, जिनमें पोटेशियम नाइट्रेट, काला पाउडर, नाइट्रोग्लिसरीन, पीईटीएन पाउडर, एल्युमिनियम पाउडर, सल्फर पाउडर, स्टेराइल सर्जिकल, जिहाद के बारे में विवरण के साथ नोटबुक आदि शामिल हैं।”

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार कोयम्बटूर में 1998 में हुए सीरियल ब्लास्ट से भी इसके लिंक मिल रहे हैं। कार ब्लास्ट के बाद पकड़े गए लोगों में मोहम्मद थलका भी शामिल है। वह नवाब खान का बेटा है, जो 1998 सीरियल ब्लास्ट में जेल में बंद है। सीरियल ब्लास्ट के लिए जिम्मेदार आतंकी संगठन अल-उमाह का मुखिया उसका चाचा सैयद अहमद बाशा ही है।

साहेबंगज में माँ काली के विसर्जन जुलूस पर मुस्लिम बहुल इलाके में पथराव: घरों और छतों से किए गए हमले में कई लोग घायल, पुलिस बल इलाके में तैनात

झारखंड इस्लामी कट्टरपंथियों का चारागाह बन चुका है। आए दिन यहाँ से लव जिहाद से लेकर देश विरोधी और समाज गतिविधियों की खबर आती रहती है। शुक्रवार (28 अक्टूबर 2022) को प्रदेश के साहेबगंज में कट्टरपंथियों की भीड़ ने माँ काली की शोभायात्रा पर पथराव कर दिया, जिसमें कई लोगों को गंभीर चोट आई है।

हालात को देखते हुए पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा और वाटर कैनन का इस्तेमाल कर भीड़ को तितर-बितर करना पड़ा। हालाँकि, मामला अभी शांत है, लेकिन तनाव बना हुआ है। इसको देखते हुए इलाके में भारी पुलिस बल तैनात है।

लोगों का कहना है कि शुक्रवार (28 अक्टूबर 2022) की रात को बम काली की प्रतिमा का विसर्जन गंगा नदी के बिजली घाट करने के लिए लेकर जा रहे थे। जैसे ही महिलाओं और पुरुषों की शोभायात्रा मुस्लिम बहुल इलाके एलसी रोड के बादशाह चौक पर पहुँचा, आसपास के घरों की छतों से जुलूस पर पथराव कर दिया गया।

इतना ही नहीं, इस दौरान महिलाओं को अपशब्द कहे जाने की बात कही जा रही है। इस पथराव में कई लोगों को गंभीर रूप से चोट लगी है। इनमें महिलाएँ भी शामिल हैं। उन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

घटना की जानकारी मिलते ही कई थानों की पुलिस मौके पर पहुँची और वाटर कैनन का इस्तेमाल कर भीड़ को तितर-बितर किया है और स्थिति को संभाला। इसके बाद पुलिस की उपस्थिति में जुलूस वहाँ से आगे बढ़ा और विसर्जन के लिए गया। लॉकडाउन से पहले विसर्जन जुलूस में भी इसी स्थान पर पथराव किया गया था।

एसडीओ राहुल आनंद ने बताया कि दो गुटों में किसी बात को लेकर विवाद हो गया था। विवाद बढ़ा तो मारपीट होने लगी। युवकों का दूसरा गुट एलसी रोड इलाके का ही था। उसके पक्ष में कुछ अन्य लोग भी आ गए थे। लोगों को समझाकर शांत किया गया है।

वहीं, कोतवाली थाने के पुलिस अधिकारी रुपल कुमार ने ऑपइंडिया को बताया कि मामला दो समुदायों के बीच का है। पथराव के बाद बिगड़े हालात को नियंत्रित कर लिया गया है। उन्होंने कहा कि इस मामले में किसी गिरफ्तारी नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि घटना में शामिल लोगों के पहचान की कोशिश की जा रही है।

न अंग्रेजी आती है, न टैटू है-न गर्लफ्रेंड… हार के बाद वायरल हुआ पाकिस्तानी का दर्द: Video देख नेटिजन्स ले रहे Pak क्रिकेट टीम के मजे

टी-20 वर्ल्ड कप में भारत और जिम्बाब्वे से हारने के बाद पाकिस्तानी खिलाड़ियों को अपने ही लोगों की आलोचना झेलनी पड़ रही है। इसी बीच एक वीडियो सामने आई है जिसमें पाकिस्तानी युवक ये बता रहा है कि आखिर उनके क्रिकेटर मैच में क्यों हार जाते हैं।

युवक कहता है, “हमारे जो लड़के हैं न, बाकी टीमें खेलती हैं आईपीएल, बीबीएल और सब बोलते हैं आपस में अंग्रेजी। उनकी आपस में बातचीत होती है। मैक्सवेल और हार्दिक पांड्या आपस में दोस्त हैं क्योंकि उन्हें अंग्रेजी बोलनी आती है, उनके हाथ में टैटू है, वो लड़कियों से बात करते हैं, आपस में पार्टी करते हैं।”

युवक आगे कहता है, “साड्डे लौंडे, न उन्हें किसी से गल (बात) करनी आती है, न उन्हें अंग्रेजी आती है, न उनके कोई टैटू है, न उन्हें पार्टी करनी आती है, तो जब दुनिया के सारे खिलाड़ी इकट्ठा होते हैं, चिलिंग कर रहे होते हैं, तब हमारे लड़के इनसिक्योर हो जाते हैं, उन्हें अंग्रेजी बोलनी नहीं आती। इंडिया का बच्चा-बच्चा अंग्रेजी बोल रहा है। अब हमारा बंदा जाता है पिच पर। देखता है कि उसके तो टैटू भी है, ग्राउंड में चार गर्लफ्रेंड भी है, उसने तो बाली भी लगाई हुई है, अंग्रेजी भी बोल रहा है। हमारे चूजे- हेलो ब्वॉय डिड वेरी वेल, सर वेरी गुड, आई एम ओके।”

उल्लेखनीय है कि ये वीडियो कब की है, इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है। लेकिन मेजर सुरेंद्र पुनिया द्वारा इसे शेयर किए जाने के बाद लोग इस पर जमकर प्रतिक्रिया दे रहे हैं। पाकिस्तानी युवक की यह वीडियो सोशल मीडिया पर खूब शेयर की जा रही है। लोग युवक की बातें सुनकर कह रहे हैं कि इसका मतलब पाकिस्तान की हार के पीछे खिलाड़ियों का गवार होना है। कोई कह रहा है कि अंग्रेजी कितनी जरूरी है ये बात सुन लो।

दिलचस्प बात ये है कि इस पाकिस्तानी का रिएक्शन सुनने के बाद जहाँ एक तरह कुछ यूजर ये कह रहे हैं कि क्रिकेटर होने के लिए ये सब जरूरी नहीं, तो वहीं कुछ यूजर्स ऐसे भी है जो इस पाकिस्तानी की बातें सुन कह रहे हैं कि इसे तो एक्सपर्ट होना चाहिए था। एक यूजर ने कहा कि यानी कि टैटू, अंग्रेजी बोलना, 4-4 गर्लफ्रेंड बनाना ही एक खिलाड़ी को महान क्रिकेटर बनाता है।

वहीं कुछ यूजर कह रहे हैं कि अगर इसी तरह मजहबी स्कूलों में लड़कों को पढ़ाया जाएगा तो वो अंग्रेजी कहाँ से सीखेंगे। लड़कों के दिमाग में गलत बातें भरकर उन्हें आतंकवाद की राह में ढकेल दिया जाता है। 

नौकरी गई पर ट्विटर से खाली हाथ नहीं जाएँगे पराग, गड्डा और सेगल: मिलेंगे ₹1004 करोड़, शेयर के लिए एलन मस्क को अलग से देने होंगे ₹535 करोड़

ट्विटर के अधिग्रहण की अंतिम घोषणा के साथ ही सोशल मीडिया साइट ट्विटर के नए मालिक एलन मस्क ने इसके शीर्ष तीन अधिकारियों को उनके पद से हटा दिया है। अब इन अधिकारियों को मुआवजे के रूप में $12.20 करोड़ (लगभग 1004 करोड़ रुपए या 10.04 अरब रुपए) देना होगा।

एलन मस्क ने शुक्रवार (28 अक्टूबर 2022) को कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) पराग अग्रवाल, मुख्य वित्त अधिकारी (CFO) नेड सेगल और नीति एवं कानूनी मामलों की प्रमुख गड्डे को कंपनी से हटा दिया था। मस्क ने इन लोगों पर ट्विटर प्लेटफॉर्म पर फर्जी अकाउंट की संख्या को लेकर उन्हें और निवेशकों को गुमराह करने का आरोप लगाया था।

एजीक्यूटिव के पैकेज और मुआवजे पर शोध करने के लिए विख्यात कंपनी इक्विलर (Equilar) ने पराग अग्रवाल का ‘गोल्डन पैराशूट’ मूल्यांकन $57.40 मिलियन (472.5 करोड़ रुपए), सेगल का $44.5 मिलियन (लगभग 366.18 करोड़ रुपए) और गड्डे का $20 मिलियन (लगभग 165 करोड़ रुपए) है।

‘गोल्डन पैराशूट’ कंपनी और शीर्ष अधिकारियों के बीच एक एग्रीमेंट होता है, जिसमें उन्हें कंपनी से हटने के लिए मजबूर करने पर मुआवजे के तौर पर बड़ी राशि का भुगतान करने की जानकारी दी जाती है। इसके तहत को कंपनी से निकाले जाने वाले अधिकारी को कम-से-कम एक साल के वेतन का हकदार माना जाता है।

अंतरराष्ट्रीय न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, इस पे आउट में एक कार्यकारी के वार्षिक मूल वेतन का 100%, स्वास्थ्य बीमा का प्रीमियम और इक्विटी शामिल है। इक्विटी हिस्सेदारी के रूप में पराग अग्रवाल, सेगल और गड्डे को $65 मिलियन (लगभग 535 करोड़ रुपए) ट्विटर में उनके शेयर के बदले दिए जाएँगे।

इसमें गड्डे का हिस्सा सबसे अधिक $34.8 मिलियन (लगभग 286.36 करोड़ रुपए) है। उसके बाद का $22 मिलियन (लगभग 181 करोड़ रुपए) और सबसे कम पराग अग्रवाल का $8.4 मिलियन (करीब 69.12 करोड़ रुपए) है।

बता दें कि पिछले साल नवंबर में जैक डोर्सी के इस्तीफे के बाद पराग अग्रवाल कंपनी का CEO बने थे। राजस्थान के अजमेर के रहने वाले पराग CEO बनने से पहले ट्विटर के चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर थे। साल 2021 में उन्हें सैलरी और दूसरे भत्तों के रूप में 3.04 करोड़ डॉलर मिले थे। CEO के रूप में अग्रवाल का वेतन सालाना 1 मिलियन डॉलर यानी 9 करोड़ 24 लाख रुपए बताया गया था।

अलवर के मंदिर में घुसे 4 मुस्लिम लड़के, तोड़फोड़ कर गोवर्धन पूजा का प्रसाद फेंका: कॉन्ग्रेस MLA पर आरोपितों को बचाने का आरोप

राजस्थान के अलवर के भिवाड़ी जिले से गोवर्धन पूजा वाले दिन मंदिर में तोड़फोड़ करने का मामला प्रकाश में आया है। खबर है कि वहाँ शेखपुरा थाना क्षेत्र स्थित हमीराका गाँव के शिव मंदिर में दलित समाज के लोग अन्नकूट प्रसाद वितरण कार्यक्रम कर रहे थे, तभी मुस्लिम समुदाय के 4 लड़कों ने आकर मंदिर पर हमला किया और तोड़फोड़ के बाद सारा प्रसाद फेंक दिया। जिन लोगों ने इन्हें ऐसा करने से रोका उनके साथ मारपीट भी की गई। 

जानकारी के मुताबिक पूरी घटना 26 अक्टूबर की है। दलित समाज के लोग गोवर्धन पूजा वाले दिन अन्नकूट प्रसाद वितरण का काम कर रहे थे कि तभी वहाँ मुबारिक, मुफीद, तालिम, जोम खान आए और तोड़फोड़ करने के बाद प्रसाद जमीन में गिरा दिया। मंदिर में मौजूद अन्य लोग जब उन्हें रोकने आगे बढ़े तो उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई और मंदिर में आरती तक नहीं होने दी। पीड़ित पक्ष अपनी शिकायतें लेकर शेखपुर थाने गया। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

नाराज भीड़ ने थाने के बाहर प्रदर्शन किया। इस दौरान भिवाड़ी नगर परिषद के पूर्व चेयरमैन संदीप दायमा, पूर्व विधायक ममन सिंह यादव, भाजयुमो जिला अध्यक्ष अभय सिंह सहित कई भाजपा नेता व कार्यकर्ता भी मामले की जानकारी होने पर मौके पर पहुँचे। पुलिस ने मामला की गंभीरता देख कई अधिकारियों को शेखपुरा भेजा। जिसके बाद तुरंत कार्रवाई करते हुए दो लोग गिरफ्तार किए गए। एएसपी विपिन शर्मा ने बचे आरोपितों को 24 घंटे में गिरफ्तार करने का आश्वासन दिया।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट बताती है कि इस पूरी घटना के बाद जब प्रदर्शनकारी आरोपितों की गिरफ्तारी की माँग कर रहे थे, तब वहाँ तिजारा विधायक संदीप यादव भी पहुँच गए। उन्हें देख भाजपा कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि वो आरोपित पक्ष को बचाने आए हैं। इसके बाद विधायकों के समर्थकों और बीजेपी के लोगों के बीच बहस हुई। बात हाथा-पाई तक पहुँच गई। पुलिस ने किसी तरह दोनों पक्षों को समझाकर मामला शांत कराया। 

उल्लेखनीय है कि राजस्थान में सिर्फ गोवर्धन पूजा वाले दिन हिंदू समुदाय के लोगों पर मुस्लिम समुदाय ने हमला नहीं किया। दीवाली वाले दिन में कैथवाड़ा में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने हिंदुओं के पटाखा फोड़ने पर आपत्ति जताते हुए उनसे मारपीट की थी। घटना में एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया था। लेकिन भरतपुर पुलिस ने पटाखे फोड़ने की वजह से मारपीट को साफ नकार दिया था।

‘मुझे बदनाम करने के लिए रची थी आपराधिक साजिश’: द वायर की मेटा रिपोर्ट पर BJP नेता का बयान, कहा- उन पत्रकारों पर FIR करवाऊँगा

‘द वायर’ (The Wire) ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय (Amit Malviya) को मेटा (Meta) से ताकतवर बताने वाली र‍िपोर्ट छापी थी, जिसे भारी फजीहत होने के बाद कंपनी ने अपनी वेबसाइट से हटा लिया है। इसके बाद उसने देश की छवि को बदनाम करने के बाद माफी माँगने का दिखावा कर नौटंकी भी की। हालाँकि, अब इस मामले में अमित मालवीय ने कहा है कि वह ‘द वायर’, उसके मैनेजमेंट और पत्रकारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराते हुए कानूनी कार्यवाही करेंगे।

अमित मालवीय ने कहा है कि वह द वायर के खिलाफ जालसाजी, धोखाधड़ी की साजिश, प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचाने के लिए साजिश रचने, मानहानि और आपराधिक साजिश सहित अन्य संबंधित धाराओं के अंतर्गत एफआईआर दर्ज कराएँगे। इसके अलावा, वह द वायर और उसके सहयोगियों द्वारा उन्हें हुए नुकसान के लिए दीवानी कार्रवाई भी करेंगे।

‘द वायर’ द्वारा मेटा से अधिक ताकतवर बताए जाने और तमाम तरह के आरोप लगाए जाने के बाद अमित मालवीय ने इस मुद्दे पर खुलकर बोलते हुए कहा कि यह स्पष्ट है कि द वायर और कुछ अज्ञात व्यक्ति उनकी प्रतिष्ठा को धूमिल करने के इरादे से आपराधिक साजिश में शामिल थे।

उल्लेखनीय है कि द वायर ने अपनी ‘फेक’ रिपोर्ट के लिए अपने पाठकों से माफी माँग ली है, लेकिन अभी तक मेटा, अमित मालवीय और अन्य लोगों से माफी नहीं माँगी है। इस बारे में अमित मालवीय ने कहा, “स्टोरी वापस लेने के बाद भी द वायर ने मेरी प्रतिष्ठा को खराब करने और मेरे पेशेवर करियर को गंभीर नुकसान पहुँचाने के बावजूद मुझसे माफी नहीं माँगी है।” 

मालवीय ने कहा, “द वायर की मेटा स्टोरी ने माहौल को खराब कर दिया है और मेरी जिम्मेदारी के कार्यों को पूरा करने के लिए वर्षों से बनाए गए रिश्तों और विश्वास को बुरी तरह से प्रभावित किया है।” उन्होंने यह भी कहा है कि इस बारे में उनके पास द वायर और उसके प्रबंधन/रिपोर्टरों के खिलाफ उचित कानूनी करने अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।

‘द वायर’ ने मेटा पर अम‍ित मालवीय के इशारे पर काम करने का आरोप लगाया था

वामपंथी वेबपोर्टल ने एक रिपोर्ट प्रकाशित किया, जिसमें दावा किया था कि अमित मालवीय इतने शक्तिशाली हैं कि फेसबुक या इंस्टाग्राम पर कोई पोस्ट अच्छा न लगने पर उसे तुरंत हटवा सकते हैं। हालाँक‍ि, ‘Meta’ के कम्युनिकेशंस हेड एंडी स्टोन ने इस पूरी खबर को बनावटी करार दिया था।

उन्होंने कहा था कि बनावटी दस्तावेजों के आधार पर ‘The Wire’ ने इस रिपोर्ट को तैयार किया है। एक अज्ञात सूत्र के आधार पर ‘The Wire’ ने दावा किया था कि अमित मालवीय ने सोशल मीडिया से 705 पोस्ट्स हटवाएँ थे।

भारी फजीहत के बाद स्‍टोरी हटाई

‘द वायर’ ने भारी फजीहत के बाद स्‍टोरी को वेबसाइट से हटाने के बाद कहा था कि वो अब मेटा के खिलाफ रिपोर्ट बनाने के लिए इस्तेमाल हुए हर दस्तावेज और सूत्र की आंतरिक समीक्षा करेगा। इसमें दस्तावेजों, सूचनाओं, स्रोत सामग्री, तकनीक और क्रॉस-चेक की जाँच की जाएगी।

डोमेन एक्सपर्ट्स और इंडिपेंडेंट रिसर्चर्स ने स्टोरी खारिज की

वामपंथी वेबसाइट ने अपने संस्थापक संपादक सिद्धार्थ वरदराजन की बाइलान वाली इस स्टोरी पर ऐसा एक्शन तब लिया, जब डोमेन एक्सपर्ट्स और इंडिपेंडेंट रिसर्चर ने उसकी स्टोरी को खारिज कर दिया। इसके साथ ही ये भी बताया कि शायद इस स्टोरी को गढ़ने के लिए फर्जी दस्तावेजों का प्रयोग हुआ है।

एक्सपर्ट्स के ऐसे दावे के बाद ही वायर ने अपने प्लेटफॉर्म से स्टोरी हटाई और आंतरिक समीक्षा की बात कहकर अप्रत्यक्ष रूप से मान लिया कि मेटा पर की गई उसकी स्टोरी कितनी गलत थी। इस दौरान उसने पाठकों से माफी माँगने का ढोंग भी किया।

प्राइवेसी र‍िसर्चर ने द वायर पर लगाया फर्जीवाड़े का आरोप

वी आनंद नाम के एक प्राइवेसी र‍िसर्चर ने 20 अक्टूबर को ट्विटर पर इस दावे को खारिज कर दिया था कि उन्होंने मेटा विवाद में ‘द वायर’ के देवेश कुमार के काम का समर्थन किया था। उन्होंने कहा था, “मैं वास्तव में लगातार धोखाधड़ी से थक गया हूँ। यह वास्तव में हतप्रभ करने वाला है कि ये सब अब स्पष्ट रूप से एक मृत कहानी पर विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए हो रहा है। इस बारे में सिद्धार्थ वरदराजन को सूचित कर दिया है।”

माहौल बिगाड़ने के लिए वो बन सकते हैं किराएदार: बम धमकियों के बीच मुंबई में मकान मालिकों के लिए पुलिस ने जारी किया आदेश, 15 दिन धारा 144 लागू रहेगी

मुंबई पुलिस ने शुक्रवार (28 अक्टूबर 2022) को आदेश जारी कर सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए सभी मकान मालिकों को नए किराएदारों की जानकारी पुलिस के साथ शेयर करने को कहा है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, मुंबई पुलिस ने पुलिस ने इस आदेश में कहा है कि कानून व्यवस्था बिगाड़ने के लिए कुछ लोग किराए पर घर ले सकते हैं। इसलिए, नए किराएदारों की जानकारी देना आवश्यक है।

नए किराएदारों की जानकारी पुलिस के साथ शेयर करने और मकान मालिकों के काम को आसान बनाने के लिए मुंबई पुलिस ने एक लिंक भी शेयर किया है। जिसमें मकान मालिक किराएदारों की जानकारी आसानी से अपलोड कर सकते हैं।

बता दें, इससे पहले मुंबई पुलिस ने शुक्रवार (21 अक्टूबर 2022) को 1 नवंबर से 15 नवंबर तक पूरे शहर में धारा 144 लागू करने का आदेश जारी किया था। शहर में कानून-व्यवस्था की स्थिति के लिए संभावित खतरे के मद्देनजर यह निर्णय लिया गया था।

मुंबई पुलिस का आदेश (फोटो क्रेडिट-टाइम्स नाउ)

भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 144 के तहत सार्वजनिक स्थानों पर पाँच से अधिक लोगों के समूह को इकट्ठा होने की इजाजत नहीं होती है। धारा 144 लागू करने का आदेश महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम, 1951 की धारा 10 (2), 37 (3) के तहत जारी किया गया था।

पुलिस कमिश्नर ने आदेश में कहा था, ”हमें शहर की कानून-व्यवस्था की स्थिति के लिए संभावित खतरे के मद्देनजर कुछ जानकारियाँ मिली है, जिसके परिणामस्वरूप सार्वजनिक संपत्ति और मानव जीवन का नुकसान हो सकता है।”

पाँच से अधिक लोगों के सार्वजनिक समारोहों को प्रतिबंधित करने के अलावा, आदेश में यह भी कहा गया है कि शहर में जुलूस निकालने और पटाखों को जलाने पर प्रतिबंध रहेगा।

मुंबई पुलिस का आदेश (फोटो क्रेडिट-टाइम्स नाउ)

हालाँकि, मुंबई पुलिस ने शादी समारोहों और अंतिम संस्कार के अवसर पर लोगों के इकट्ठा होने की अनुमति दी है। प्रतिबंध से शैक्षणिक स्थानों, कार्यालय की बैठकों, सामान्य समाज की बैठकों, सिनेमा हॉल और व्यापारिक गतिविधियों बाहर रखा गया है। जुलूस के दौरान लाउडस्पीकर और संगीत बैंड के उपयोग पर भी प्रतिबंध रहेगा।

आदेश के अनुसार, ”अगर कोई भी इन आदेशों का उल्लंघन करता हुआ पाया जाएगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।”

महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम, 1951 की धारा 2 (6), 10 (2), और 37 (1) के तहत जारी एक अन्य आदेश में, कमिश्नर ने 3 नवंबर से 2 दिसंबर तक तक किसी भी हथियार के उपयोग या परिवहन पर रोक लगा दी है।

आदेश के अनुसार, ”कोई व्यक्ति पुलिस की पूर्व मंजूरी के बिना किसी भी हथियार, गोला-बारूद या विस्फोटक का भंडारण या परिवहन नहीं कर सकता है।”

मुंबई पुलिस आयुक्त का आदेश (फोटो क्रेडिट-फ्री प्रेस जनरल)

यह आदेश लोगों कोआग्नेयास्त्रों को प्रक्षेपित करने में सक्षम पत्थरों या अन्य वस्तुओं को इकट्ठा करने, परिवहन करने या रखने से भी रोकता है। आदेश के अनुसार पुतलों के प्रदर्शन या उसे जलाने के कार्य को भी गैरकानूनी घोषित किया गया है। ऐसी किसी भी स्थिति को उत्‍पन्‍न करने की मनाही है, जिससे राज्‍य में कानून-व्‍यवस्‍था की स्‍थ‍ित‍ि बिगड़े।

मुंबई पुलिस को मिली बम धमाके की धमकी

उल्लेखनीय है बीते दिनों मुंबई पुलिस को एक धमकी आई थी। इस धमकी में कहा गया था कि मुंबई में बम धमाके होने वाले हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, मुंबई पुलिस के कंट्रोल रूम में धमकी भरा फोन कॉल आया था। जिसमें अंधेरी के इनफिनिटी मॉल, जुहू के पीवीआर और सांताक्रुज स्थित सहारा के 5 सितारा होटल को बम से उड़ाने की धमकी दी गई थी। यह धमकी भरा कॉल आते ही शहर की पुलिस अलर्ट हो गई थी और सभी जगह सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी।