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आतंकियों ने पाकिस्तान के वित्त मंत्री का ही कर लिया अपहरण, माँगें मानने के लिए 10 दिन का दिया अल्टीमेटम: इस्लामी कानून लागू करने और खेल में महिलाओं पर प्रतिबंध की माँग

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के नेता और वित्त मंत्री अबैदुल्ला बेग को आतंकियों ने शुक्रवार (7 अक्टूबर, 2022) दोपहर अगवा करने के बाद शनिवार (8 अक्टूबर) सुबह रिहा कर दिया है। आतंकियों ने सभी लोगों को रिहा करने के लिए अपने सहयोगी आतंकियों को जेल से रिहा करने की माँग को थी। आतंकियों ने अब इस माँग को पूरा करने के लिए 10 दिन का समय दिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आतंकियों ने पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा को गिलगिट-बाल्टिस्तान से जोड़ने वाली प्रमुख सड़क को घेर लिया था। इसके बाद, अबैदुल्ला बेग समेत 2 टूरिस्टों को अगवा कर लिया था। दावा किया जा रहा है कि इस अपहरण को तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान ने अंजाम दिया था। पाकिस्तान के वित्तमंत्री अबैदुल्ला बेग दो अन्य लोगों के साथ इस्लामाबाद से गिलगित जा रहे थे। इसी दौरान उनका अपहरण किया गया था। किडनैपर्स ने जिन आतंकियों की रिहाई की माँग की है, उन्होंने नंगा पर्वत क्षेत्र में विदेशी नागरिकों की भीषण हत्या की थी। इसके अलावा ये आतंकी डायमेर में अन्य आतंकी गतिविधियों में भी शामिल रहे हैं।

सोशल मीडिया पर शुक्रवार को एक ऑडियो क्लिप भी वायरल किया गया था। इस ऑडियो क्लिप में अबैदुल्ला बेग को कथित तौर पर यह कहते हुए सुना जा सकता है कि इस्लामाबाद से गिलगित की तरफ जाते समय उन्हें अगवा किया गया है। आतंकवादियों ने अपने साथियों को जेल से रिहा कराने के लिए अधिकारियों पर दबाव बनाने के उद्देश्य से सड़क को जाम कर रखा है।

पाकिस्तानी समाचार पत्र डॉन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, आतंकियों ने अपने सहयोगी आतंकियों की रिहाई के अलावा, पाकिस्तान में इस्लामी कानून लागू करने और महिलाओं को खेल से दूर रखने की माँग की थी। हालाँकि, अब इस माँग को पूरा करने के लिए 10 दिन का समय दिया है। गौरतलब है कि जिस समय पाकिस्तान के वित्तमंत्री अबैदुल्ला बेग आतंकवादियों के कब्जे में थे उस समय गिलगित-बाल्टिस्तान सरकार के पूर्व प्रवक्ता फैजुल्ला ने कहा था कि उन्होंने अबैदुल्ला बेग से बात की है और उनकी रिहाई के लिए बातचीत चल रही थी।

बता दें यह घटना तब सामने हुई है जब शुक्रवार को पाकिस्तान के सीनेटरों ने प्रतिबंधित संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) की आतंकवादी गतिविधियों में वृद्धि के बारे में बात की थी। यही नहीं, हाल ही में एक सीनेटर ने आतंकियों की गतिविधियों को लेकर जानकारी की भी माँग की थी।

₹300 करोड़ रिश्वत मामले में सत्यपाल मलिक से CBI ने की पूछताछ, राज्यपाल पद से हो चुके हैं रिटायर: 2024 चुनाव में सपा को खुले समर्थन का ऐलान

300 करोड़ रुपए के रिश्वत से जुड़े मामले में CBI ने मेघालय के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक से पूछताछ की है। मामला तब का है, जब वो जम्मू कश्मीर के राज्यपाल हुआ करते थे। उसके बाद उन्हें गोवा में भी भेजा गया था। किसानों को भड़काने के लिए अपनी बयानबाजी के कारण विवादों में रहने वाले सत्यपाल मलिक से ‘केंद्रीय जाँच एजेंसी’ ने राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली स्थित अपने मुख्यालय में पूछताछ की। उधर उन्होंने अखिलेश यादव को खुला समर्थन का ऐलान किया है।

दरअसल, पिछले वर्ष एक समारोह में बोलते हुए सत्यपाल मलिक ने कहा था, “मैं श्रीनगर के दो मामलों के लिए प्रधानमंत्री के पास गया था। दोनों गलत थे, कैंसिल कर दिए। मुझे डेढ़-डेढ़ सौ करोड़ रुपए रिश्वत की पेशकश की गई थी। मुझे कुछ नहीं चाहिए। मैं 5 कुर्ते-पायजामे में आया था, उसी में चला जाऊँगा।” 17 अक्टूबर, 2021 को राजस्थान के झुंझनूं में ये कार्यक्रम हुआ था। सत्यपाल मलिक हाल ही में राज्यपाल पद से रिटायर हुए हैं।

उन्हें इस पद पर कोई एक्सटेंशन नहीं दिया गया और उनका कार्यकाल भी पूरा हो गया। इसके बाद उन्होंने खुद को फकीर बताते हुए कहा था कि उनके खिलाफ कोई जाँच नहीं हो सकती है, न कोई मुकदमा चल सकता है। सत्यपाल मलिक ने पहले आरोप लगाया था कि महबूबा मुफ़्ती-भाजपा सरकार में मंत्री रहे एक RSS से जुड़े शख्स की फाइल और अंबानी से जुड़ी एक फ़ाइल क्लियर करने के लिए उन्हें 300 करोड़ रुपए रिश्वत की पेशकश की गई थी।

उन्होंने ‘राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ’ के उक्त नेता को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का करीबी करार दिया था। उनका कहना था कि दोनों मामलों में घोटाला था, इसीलिए उन्होंने ये फाइलें क्लियर नहीं की। हालाँकि, उस वक्त उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ़ करते हुए कहा था कि उन्होंने उनसे भ्रष्टाचार से कोई समझौता न करने को कहा था। हाल ही में सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव का हालचाल जानने मेदांता पहुँचे सत्यपाल मलिक ने 2024 लोकसभा चुनाव में सपा-रालोद गठबंधन के समर्थन का ऐलान करते हुए मोदी सरकार को किसान विरोधी बताया।

नशे में धुत लड़कियों ने गार्ड को पीटा, गिरेबान पकड़ कर दी गंदी-गंदी गालियाँ: देखती रही पुलिस, वीडियो वायरल होने के बाद गिरफ़्तारी

उत्तर प्रदेश के नोएडा में गार्ड्स के साथ बदसलूकी के मामले बढ़ते जा रहे हैं। हाल ही में, नोएडा के सेक्टर 121 की अजनारा होम्स हाउसिंग सोसायटी (Ajnara Homes Housing Society) में सरेआम गार्ड से बदसलूकी का मामला सामने आया है। अजनारा होम्स हाउसिंग सोसायटी के गार्ड को पीटने वाली लड़कियाँ नशे में धुत थीं। बड़ी बात यह है कि जब गार्ड के साथ अभद्रता हो रही थी, तब वहाँ खड़ी पुलिस मूकदर्शक बनी हुई थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नोएडा के फेज-3 अंतर्गत सेक्टर 121 स्थित अजनारा होम्स हाउसिंग सोसायटी के गेट पर पंकज नामक गार्ड ड्यूटी कर रहा था। इस दौरान, देर रात सोसायटी की ही तीन लड़कियाँ नशे की हालत में वहाँ पहुँची। गार्ड ने उनकी गाड़ी पर स्टिकर न होने के कारण उन्हें रोका तो वह भड़क गईं। इसके बाद, नशे में धुत लड़कियों ने गार्ड का गिरेबान पकड़ लिया और उसके साथ बदसलूकी करने लगीं।

इस दौरान, जब वहाँ मौजूद अन्य गार्ड्स ने लड़कियों को रोकने की कोशिश की तो वह और भड़क गईं और सोसायटी के गेट पर ही बवाल करने लग गईं। यही नहीं, लड़कियों ने गार्ड को गंदी-गंदी गालियाँ भी दी हैं। इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया में तेजी से वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में एक लड़की गार्ड की कॉलर पकड़े हुए दिखाई दे रही है।

इस घटना का वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने तीनों लड़कियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। हालाँकि, अब तक सिर्फ दो लड़कियों को ही गिरफ्तार कर धारा 151 के तहत चालान किया गया है। जबकि एक लड़की फरार बताई जा रही है। इस मामले में सेंट्रल नोएडा के एडिशनल डीसीपी साद मियाँ का कहना है कि अजनारा होम्स सोसायटी में कुछ महिलाओं द्वारा देर रात नशे की हालत में गार्ड के साथ बदसलूकी की गई थी। शिकायत के आधार पर महिलाओं के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।

सिक्यॉरिटी गार्ड्स के साथ आए दिन हो रही है हिंसा

हाल ही में, सिक्यॉरिटी गार्ड्स के साथ हुई हिंसा की कई घटनाएँ सामने आई हैं। बीते माह 2 सितंबर को मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से सिक्योरिटी गार्ड्स की हत्या के आरोप में शिवप्रसाद नामक सीरियल किलर को गिरफ्तार किया गया। इस सीरियल किलर को सिक्यॉरिटी गार्ड्स का सोना पसंद नहीं था, इसलिए उसने 6 सिक्यॉरिटी गार्ड्स को मौत के घाट उतार दिया था।

इसके अलावा, गत महीने उत्तर प्रदेश नोएडा से ही सिक्यॉरिटी गार्ड्स के साथ बदसलूकी और हिंसा की दो खबरें सामने आई थीं। पहली घटना, नोएडा के फेज-3 के क्लियो काउंटी सोसायटी का है। जहाँ, महिला प्रोफेसर ने सिक्यॉरिटी गार्ड को लगातार तमाचे जड़ते हुए गंदी-गंदी गालियाँ दीं थीं। इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया में वायरल हुआ था।

नोएडा की दूसरी घटना सेक्टर-126 के जेपी सोसायटी की है। जहाँ, एक महिला वकील गालीबाज महिला वकील भव्या रॉय ने गेट खोलने में हुई देरी के चलते सिक्यॉरिटी गार्ड को गालियाँ देते हुए मारपीट की थी। इस मामले में, पुलिस ने गालीबाज महिला के खिलाफ IPC (भारतीय दंड संहिता) की धाराओं 153-A (भाषा/नस्ल को लेकर अपमानजनक टिप्पणी), 323 (किसी को स्वेच्छा से चोट पहुँचाना), 504 (उकसाना), 505(2) (विभिन्न समुदायों में वैमनस्य पैदा करना) और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत मामला दर्ज करते हुए गिरफ्तार किया गया था।

मात्र 48 घंटे में 100 करोड़ मिनट देखा गया ‘कार्तिकेय 2’: थिएटरों में 50 दिन पूरे करने और ₹120 करोड़ के कलेक्शन के बाद OTT पर भी रचा इतिहास

सिनेमाघरों में 50 दिन पूरे करने के बाद अब निखिल सिद्धार्थ की फिल्म ‘कार्तिकेय 2’ ने OTT पर ‘100 करोड़’ वाला कीर्तिमान स्थापित कर दिया है। असल में अभिषेक अग्रवाल द्वारा निर्मित इस फिल्म ने ‘ZEE5’ स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म पर रिलीज होने के बाद 100 करोड़ वॉच मिनट्स पूरे कर लिए हैं। अर्थात, इस फिल्म को 100 करोड़ मिनट/1.66 करोड़ घंटे लोगों द्वारा देखा जा चुका है। हाल ही में फिल्म की टीम ने थिएटरों में 50 दिन पूरे होने का जश्न मनाया था।

वरिष्ठ अभिनेता अनुपम खेर भी इस फिल्म का एक अहम हिस्सा हैं। फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर दुनिया भर में 120 करोड़ रुपए से भी अधिक का कारोबार किया। कम बजट में बनी इस फिल्म को भगवान श्रीकृष्ण और द्वारका के रहस्यों पर आधारित रखा गया था। चंदू मोंडेति द्वारा निर्देशित ‘कार्तिकेय 2’ के हिंदी वर्जन ने भी 30 करोड़ रुपए की नेट कमाई का आँकड़ा पार किया। इस तरह हिंदी भाषा में फिल्म न 566% से भी अधिक का मुनाफा कमाया।

इसे बुधवार (5 अक्टूबर, 2022) को ‘ZEE5’ पर रिलीज किया गया था। ये निखिल सिद्धार्थ के करियर की भी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बन गई है। सभी भाषाओं को मिला दें तो इसका मुनाफा 300% से भी अधिक रहा। इसके डिजिटल राइट्स भी अच्छे-खासे दाम में बिके थे। इस फिल्म का संगीत काल भैरव ने दिया था। जहाँ निर्माता अभिषेक अग्रवाल अब रवि तेजा अभिनीत ‘टाइगर नागेश्वर राव’ में व्यस्त हो गए हैं, वहीं निखिल सिद्धार्थ की दो बड़ी फ़िल्में आने वाली हैं।

निखिल सिद्धार्थ ने कहा कि इस जमाने में किसी फिल्म द्वारा 50 दिन पूरा करने की बात काफी दुर्लभ है, लेकिन लोगों ने ‘कार्तिकेय 2’ को इस ऊँचाई तक पहुँचाया। उन्होंने कहा कि वो उम्मीदों को बरकरार रखने के लिए और ज्यादा मेहनत करेंगे। उनका मानना है कि इस फिल्म ने उन्हें नए ऑडिएंस तक पहुँचाया। वो खुद को इतिहास का भी फैन बताते हैं। उन्होंने बताया कि कैसे इसने हिंदी बेल्ट में 50 शो से शुरू होकर 4000 को पार किया। ये इस साल की सबसे सफल तेलुगु फिल्मों में से एक है।

‘… तो पंजाब छोड़ कहीं और चला जाऊँगा’: शहनाज़ गिल के पिता को हत्या की धमकी, बोले – हिन्दू संगठनों से जुड़ा हूँ, इसीलिए हो रहे हत्या के प्रयास

शुक्रवार (7 अक्टूबर, 2022) को ‘बिग बॉस 13’ की फाइनलिस्ट और अभिनेत्री शहनाज गिल के पिता को जान से मारने की धमकी मिली है। यह धमकी उन्हें एक विदेशी फोन कॉल के माध्यम से मिली है। शहनाज के पिता संतोक सिंह सुख को धमकी देने वाले शख्स ने पहले तो फोन पर जमकर गालियाँ दीं और फिर दीवाली से पहले घर में घुसकर मारने की धमकी दी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शहनाज गिल को यह धमकी तब मिली है जब वह ब्यास से तरनतारन जा रहे थे। इस दौरान उन्हें एक कॉल आया, जिसमें एक युवक गालियाँ दे रहा था। इसके बाद उसने कहा कि उसका नाम हैप्पी है और वह दीवाली से पहले उन्हें घर में घुसकर जान से मार देगा।

इस धमकी को लेकर संतोक सिंह सुख ने अमृतसर ग्रामीण के एसएसपी के पास शिकायत दर्ज कराई है। इस शिकायत में उन्होंने कहा है कि उन्हें लगातार जान से मारने की धमकी मिल रही है। उन्होंने पुलिस अधिकारियों से इस मामले की जाँच कर कार्रवाई करने की माँग की है। उन्होंने यह भी कहा है, वह हिन्दू संगठनों से जुड़े हुए हैं इसलिए उन्हें धमकी दी जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि इस मामले की जाँच नहीं की जाएगी तो वह पंजाब छोड़कर कहीं और रहने चले जाएँगे।

इससे पहले भी शहनाज गिल के पिता संतोक सिंह सुख को जान से मारने की कोशिश की जा चुकी है। साल 2021 में जब उन्होंने भाजपा जॉइन किया था, इसके बाद उन पर 25 दिसंबर को दो अज्ञात बाइक सवारों ने हमला कर दिया था। इस हमले में उन पर कई राउंड फायरिंग की गई थी। चूँकि वह कार में सवार थे, इसलिए उन्हें गोलियाँ नहीं लगीं थीं।

रिपोर्ट के अनुसार, संतोक सिंह सुख तब किसी कार्यक्रम में जा रहे थे। उस दौरान उनके ड्राइवर ने गाड़ी को एक ढाबे के पास पार्क किया था। इसके बाद ड्राइवर और उनका बॉडीगार्ड ढाबे में चले गए थे। तब दो बाइक सवारों ने उन पर हमला किया था। बाद में उनके बॉडीगार्ड ने हमलावरों पर पत्थर फेंककर उनकी जान बचाई थी।

शहनाज गिल ‘बिग बॉस 13’ में आने के बाद से लगातार चर्चा में बनी हुई हैं। उस सीजन शहनाज फाइनलिस्ट थीं। उनके फाइनल में पहुँचने से अधिक चर्चा सीजन के विनर सिद्धार्थ शुक्ला के साथ उनके संबंधों को लेकर होती थी। शहनाज गिल फिलहाल बॉलीवुड में एंट्री करने को तैयार हैं। वह सलमान खान और साउथ इंडियन सुपर स्टार दग्गुबाती वेंकटेश स्टारर फिल्म ‘किसी का भाई किसी की जान’ में नजर आने वाली हैं। यह फिल्म इस साल के अंत में यानी 30 दिसंबर 2022 को रिलीज होगी। इससे पहले वह पंजाबी फिल्म ‘हौसला रख’ में भी नजर आई थीं।

मुंबई में कारोबारी इरफ़ान ने SUV से 5 लोगों को रौंदा, मरता छोड़ कर हो गया फरार: कोलकाता में बबलू खान ने श्रद्धालुओं पर चढ़ा दी थी बस

मुंबई में तेज गति से कार से पाँच लोगों की हत्या और कई लोगों को जख्मी करने वाले की पहचान बिजनेसमैन इरफान अब्दुल बिल्किया के रूप में हुई है। मुंबई पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है। जाँच के दौरान पता चला कि कई तरह के ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने के आरोप में उसकी गाड़ी पर 36,800 रुपए का जुर्माना है, जिसे इरफान ने अभी तक भरा नहीं है।

जाँच के दौरान पुलिस को यह भी पता चला कि बांद्रा-वर्ली सी लिंक रोड पर अपनी तेज स्पीड कार से घटना को अंजाम देने के बाद वह एक एंबुलेंस से मौके से फरार हो गया था। दरअसल, घटनास्थल पर आई एंबुलेंस में खुश को जख्मी बताकर सवार हो गया और बिना नाम बताए वह वहाँ से फरार हो गया। इस दौरान उसने ने पुलिस को अपना नाम ही बताया और ना ही घायलों की मदद के लिए रूका।

पुलिस ने बताया कि इरफान बुधवार की तड़के जोगेश्वरी से SUV में सवार होकर दक्षिण मुंबई स्थित अपने घर जा रहा था। वह जोगेश्वरी में अपने अपने चचेरे भाई से मिलने गया था। यह गाड़ी उसके भाई आसिफ की थी।

आरोपित के वकील ने बताया कि इरफान चार लेन वाली सड़क के वह दूसरी लेन में गाड़ी चला रहा था। इसी दौरान उसने अपने मोबाइल को चार्ज करने के लिए चार्जर को सॉकेट में लगाने की कोशिश कर रहा था। इससे उसका कार पर से नियंत्रण खत्म हो गया और यह दुर्घटना हो गई।

आरोपित की लापरवाही के कारण उसकी SUV कार कई गाड़ियों को टक्कर मारती हुई दूसरी लेन से चौथी लेन में आ गई। इस दौरान जिन गाड़ियों में से उसकी कार से टक्कर हुई, उसमें सवार कई लोग मारे गए और कई गंभीर रूप से घायल हो गए।

घटना के बाद मौके पर कई वाहन पहुँच गए, जिनमें पुलिस की गाड़ी और एंबुलेंस भी थी। इस दौरान इरफान ने ना ही किसी की मदद की और ना ही पुलिस को अपने बारे में जानकारी दी और एक एंबुलेंस में घायलों के साथ सवार होकर वह वहाँ से भाग गया।

एंबुलेंस ने घायलों के नायर अस्पताल में इलाज के लिए उतारना शुरू किया तो इरफान वहाँ नहीं उतरा और एंबुलेंस के ड्राइवर से सैफी हॉस्पिटल ले चलने का आग्रह करने लगा। इसके बाद ड्राइवर उसे लेकर सैफी अस्पताल में छोड़ दिया।

वहाँ डॉक्टर ने प्राथमिक इलाज के बाद उसे MRI कराने के लिए कहा, लेकिन उसने यह कहते हुए मना कर दिया कि वह बाद में करा लेगा। इसके बाद इरफान ने फोन कर अपने चचेरे भाई कादर को अस्पताल बुलाया और उसके साथ घर चला गया।

पुलिस को आशंका है कि यह घटना तेज स्पीड के कारण हुई है। सी लिंक पर गाड़ी की अधिकतम स्पीड 80 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित है। वाहनों की चेकिंग के लिए एंट्री और एक्जिट पॉइंट पर स्पीडिंग कैमरे लगाए गए हैं। पुलिस को शक है कि एंट्री करने के बाद सी लिंक पर इरफान ने निर्धारित स्पीड से तेज गति में गाड़ी को चलाया, जिसके कारण दुर्घटना हुई।

बता दें कि कोलकाता के सियालदह फ्लाइओवर पर भी एक बस ने दुर्गा पूजा का पंडाल देखने जा रहे लोगों को टक्कर मार दी। घटना में एक ही परिवार के 3 लोगों की मौत हो गई, जबकि 3 अन्य घायल हो गए। बताया जा रहा है कि बस मे बैठे ड्राइवर बबलू खान को लोगों ने बार-बार हाथ देकर गाड़ी धीरे करने को भी कहा था, लेकिन उसने किसी की नहीं सुनी।

अब इस मामले में तीन लोग गिरफ्तार हुए हैं- इनकी पहचान ड्राइवर बबलू खान, कंडक्टर नूरूद्दीन खान और हेल्पर अरमान खान के तौर पर हुई है। इनके विरुद्ध गैर-जमानती धाराओं में केस दर्ज हुआ है। कुछ रिपोर्ट्स बता रही हैं कि ड्राइवर ने नियंत्रण खोया, लेकिन जाँच अधिकारी को इस पर विश्वास नहीं है।

60 फॉरेस्ट गार्ड, 40 CCTV, 5 वैन, 2 ट्रैक्टर…बिहार में बाघ को पकड़ने हैदराबाद से आई खास टीम, 26 दिन बाद ‘आदमखोर’ मरा, 9 लोगों की ली जान

बिहार के पश्चिमी चंपारण जिले में बसे बगहा में शनिवार (8 अक्टूबर 2022) को शूटर्स ने एक आदमखोर बाघ को मार गिराया। इस बाघ ने बीते 9 महीनों में 10 लोगों पर हमला किया था, जिसमें से 9 लोगों की मौत हो गई थी। आदमखोर बाघ के डर से स्थानीय लोग अपने घर से निकलने में कतरा रहे थे। शनिवार (8 अक्टूबर) सुबह भी बाघ ने माँ-बेटे को अपना शिकार बनाया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (VTR) के इस आदमखोर बाघ की तलाश बीते 26 दिनों से की जा रही थी। चूँकि, यह बाघ लोगों पर लगातार हमले किए जा रहा था इसलिए शुक्रवार को इसे मारने के आदेश जारी किए गए थे।

इसके बाद से इसकी सर्चिंग तेज कर दी गई थी। कई स्थानों पर बाघ के पैरों के निशान मिल रहे थे। जिसके बाद एक्सपर्ट टीम की पुष्टि के बाद उसका पीछा किया जा रहा था। बाद में, एक्सपर्ट ने शूटर्स की टीम को बाघ के पैरों के हिसाब से बताया कि वह गन्ने के खेत मे छिपा हुआ है।

जानकारी मिलने पर, इस खेत के चारों ओर जाल फैलाकर घेराबंदी की गई। और फिर, शूटर्स की टीम हाथी पर सवार होकर गन्ने के खेत में पहुँची। जहाँ, शूटर्स की नजर बाघ पर पड़ी और शूटर्स ने बाघ को 4 गोलियाँ मारी। इनमें से दो गोली उसे लगी और बाघ ने मौके पर ही दम तोड़ दिया।

इस आदमखोर बाघ को पकड़ने के लिए हैदराबाद से खास टीम भी बुलाई गई थी। इस टीम में एक्सपर्ट के साथ डॉक्टर भी बाघ को पकड़ने में लगे हुए थे। रिपोर्ट के अनुसार, बाघ को पकड़ने के लिए 60 फॉरेस्ट गार्ड, पाँच वैन, चार बड़े जाल, दो ट्रैंकुलाइजर गन, दो ट्रैक्टर, 40 सीसीटीवी कैमरे और एक ड्रोन कैमरा लगाया गया था।

बाघ के बढ़ते आतंक और आदमखोर होने के चलते गत 13 सितंबर को इसे पकड़ने के आदेश जारी किए गए थे। हालाँकि, वन विभाग की टीम के लगातार प्रयास के बाद भी यह बाघ पकड़ा नहीं जा सका था। इस दौरान, 5-6 अक्टूबर को दो दिन में ही बाघ ने दो लोगों को अपना शिकार बनाया था। इसके बाद 7 अक्टूबर को उसे मारने का आदेश जारी किया गया था।

‘हमें सिखाया जा रहा अपनी ही संस्कृति से नफरत करना, धर्म पर शर्मसार होना’: बोले ‘हिंदुत्व’ के हीरो – वक्फ सबसे बड़ा फर्जीवाड़ा, बॉलीवुड हुआ पथभ्रष्ट

आशीष शर्मा टीवी की दुनिया में जाना-पहचाना नाम हैं, जिनकी फिल्म ‘हिंदुत्व चैप्टर वन’ सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। इस फिल्म का निर्देशक करण राजदान ने किया है। ‘हिंदुत्व’ फिल्म को लेकर इसके मुख्य अभिनेता आशीष शर्मा ने ऑपइंडिया से बात करते हुए विभिन्न मुद्दों पर अपनी राय रखी। कई ऐतिहासिक किरदारों को छोटे पर्दे पर निभा चुके आशीष शर्मा ने ‘बॉयकॉट बॉलीवुड’ से लेकर लिबरल गिरोह द्वारा हिन्दू धर्म को बदनाम किए जाने जैसे मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखी।

‘हिंदुत्व’ फिल्म के मुख्य अभिनेता आशीष शर्मा का इंटरव्यू

प्रश्न: आप ‘सिया के राम’ हैं या ‘चन्द्रगुप्त मौर्य’ हैं? खुद को आप किस रूप में देखते हैं?
जवाब: दोनों हूँ मैं। देखिए, दोनों के अंश हैं मेरे अंदर और हमारे अंदर होने भी चाहिए। अगर हमें नेतृत्व करना है तो इन दोनों के गुण होने चाहिए। श्रीरामचन्द्र हों या चन्द्रगुप्त मौर्य, कार्य दोनों ने एक ही किया था और वो है भारतवर्ष को एक करने का।

प्रश्न: एक अभिनेता रूप में आप काफी ऐतिहासिक किरदारों को निभा चुके हैं, चाहे वो ‘चन्द्रगुप्त मौर्य (2011-12)’ हो, ‘सिया के राम (2015-16)’ हो या फिर ‘पृथ्वी वल्लभ (2018)’ हो। इन किरदारों को निभाने की प्रेरणा आपको कहाँ से मिलती है? आखिर क्या कारण है कि ऐसे किरदार घूम-फिर कर आपके पास ही पहुँचते हैं?
जवाब: वो होता है ना, जब आप अंदर से जो भी होते हैं उन्हीं चीजों को आकर्षित करने लगते हैं। मैं बचपन से इन्हीं किताबों को पढ़ते हुए पला-बढ़ा हूँ। कहीं न कहीं बचपन में ये किरदार ही मेरे रोल मॉडल रहे हैं। साहित्य में मेरी बचपन से रुचि रही है, खासकर हिंदी साहित्य। आज भी इन्हें मैं पढ़ता हूँ। शुरुआत में मैंने इन किरदारों को आकर्षित किया, जिसके बाद एक कड़ी जुड़ती चली गई। एक अभिनेता के तौर पर इन किरदारों को करने के बाद निर्माताओं को आपके ऊपर एक भरोसा आने लगता है कि आप इन किरदारों को अच्छे से निभा सकते हैं। ऐतिहासिक जो किरदार हैं, उन्हें निभाने के लिए भाषा पर पकड़ और स्क्रीन प्रेजेंस के अलावा उनकी साइक्लोजी और फिलॉसफी भी समझ में आनी चाहिए।

प्रश्न: बात ‘हिंदुत्व’ फिल्म की करें तो आपने क्या सोच कर इस फिल्म को हाँ कहा? आपका मन कैसे बना कि इसे करनी चाहिए?
जवाब: जब करण राज़दान (फिल्म के निर्माता-निर्देशक) ने मुझे बुलाया और उनसे मुलाकात हुई तो उन्होंने पहले ही शब्द में कह दिया कि वो ‘हिंदुत्व’ फिल्म बना रहे हैं। ये सुनते ही मेरे कान खड़े हो गए। पहले तो मैंने उनके साहस की दाद दी कि एक ऐसा फिल्ममेकर इस विषय पर मूवी बना रहा है, जिसे देखते हुए हमलोग बड़े हुए हैं। मुझे बड़ी ख़ुशी हुई। फिर उन्होंने मुझे कहानी सुनाई और मुझे ये अच्छी लगी। मैं व्यक्तिगत तौर पर काफी चीजें समझता-पढ़ता-देखता हूँ। इस समय देश-दुनिया में जो चल रहा है न, या यूँ कह लीजिए कि आज हमें दिखाई दे रहा है – हमलोग पाश्चात्य संस्कृति से प्रभावित हो गए हैं। इसका जो असर है, हम वेस्ट को देख कर खुद को धर्मनिरपेक्ष बनाने की कोशिश कह रहे हैं, जबकि हमें खुद इसका मतलब पता हैं। हिन्दुओं को सेक्युलर होने का मतलब पता नहीं। किसी और के प्रभाव में आकर हिन्दू खुद को सेक्युलर बताने लगे हैं, जबकि उन्हें नहीं पता है कि कैसे उन्हें योजनाबद्ध तरीके से अपने ही धर्म, संस्कृति और रीति-रिवाजों से अलग किया जा रहा है। मैंने व्यक्तिगत तौर पर ये महसूस किया और इस फिल्म के जरिए इसे युवाओं तक पहुँचाना ज़रूरी है। हिंदुत्व को लेकर योजनाबद्ध तरीके से एक नैरेटिव बनाया गया है, जिसके चक्कर में पड़ कर हम अपने धर्म को भूल गए हैं।

प्रश्न: क्या आपको लगता है कि ‘हिंदुत्व’ फिल्म एक ऐसा माध्यम बनेगा, जिससे युवा अपने धर्म को समझेंगे?
जवाब: सबसे ज्यादा ज़रूरी है कि युवा हिंदुत्व के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझें, जो उनका अधिकार भी है। वो न सिर्फ हिन्दू धर्म को अपनाएँ, बल्कि इसे बचाएँ और अपनी आने वाली पीढ़ियों को बताएँ। जब बाकी दुनिया विकसित नहीं हुई थी, हम यहाँ किताबें लिख रहे थे, वेद-पुराण लिख रहे थे। विज्ञान को हमने उसी समय समझा। तब वैज्ञानिकों का धरती प अता-पता ही नहीं था। हमारा धर्म सबसे पुरातन है और ये आज तक टिका हुआ है, इसका कारण है कि ये खुद को बार-बार नए तरीके से विकसित करती है, हर दौर में, हर दशक में। जो घट रही हैं, उस हिसाब से अपने आपको अनुकूल बनाती चली जाती है। इतनी खूबसूरत संस्कृति पर हमें योजनाबद्ध तरीके से शर्म करना सिखाया जा रहा है। हम हिंदी में बात करें तो हमें तुच्छ समझा जाए, कुर्ता-पजामा पहन रहे हैं तो ‘कूल’ नहीं हैं और हमने पूजा-पाठ कर लिया या तिलक लगा लिया तब हम रूढ़िवादी हो गए। हमें कट्टरवादी बता दिया गया। हिंदुत्व को इससे जोड़ दिया गया। अगर एक मुस्लिम पाँच वक्त नमाज पढ़ता है, सिर पर टोपी रखता है और रोजा रखता है तो कहा जाता है कि वो अपने मजहब का पालन कर रहा। लेकिन, अगर मैं नवरात्र कर लूँ, मंगल का व्रत कर लूँ या शिव की पूजा-आराधना कर लूँ तो ‘कट्टरवादी’ हो गया। जबकि हमारी पूजा-पाठ की समाप्ति के समय ‘विश्व का कल्याण हो’ कहा जाता है। ध्यान दीजिए, निजी कल्याण की नहीं, सबकी भलाई की बात की जाती है। ऐसे करने में हमें अपने ही धर्म पर शर्मशार होना सिखाया जाता है।

प्रश्न: ‘हिंदुत्व’ शब्द को काफी बदनाम कर दिया गया है। हिन्दुओं पर हमले होते हैं, तब भी उन्हें आरोपित बताया जाता है। क्या ये एक सोची-समझी साजिश है?

जवाब: बिलकुल, ऐसा ही है। और सालों से ऐसा नैरेटिव बनाने की कोशिश की जा रही है। अगर आप इतिहास उठा कर देखेंगे तो जब मुगलों ने हम पर आक्रमण किया, उस समय भी उन्हें पता था कि उनके विरुद्ध लड़ रहे राजाओं पर वो शौर्य में विजय प्राप्त नहीं कर सकते। इसीलिए, उन्होंने हिन्दुओं को एक-दूसरे से लड़ाना शुरू किया। हमारे हिन्दू राजा हारे भी तब, जब कोई ‘जयचंद’ निकला। इसी ‘तरह Divide And Rule’ के तहत एक हिन्दू को दूसरे के खिलाफ खड़ा कर के हमें हराया गया। जब-जब हम इकट्ठे हुए, हमें कोई नहीं हरा पाया। अंग्रेज भी आए, उनकी भी ‘फूट डालो, राज करो’ वाली नीति थी। आज भी यही कोशिश हो रही है। हिन्दुओं को सिखाया जा रहा है कि असली हिन्दू सेक्युलर होता है, ‘कट्टर’ नहीं होता। लेकिन, बाकी सरे मजहब कट्टरपंथ पर भी उतर आएँ तब हम कहते हैं कि उनकी एकता काफी अच्छी है। एक छोटा सा उदाहरण समझिए। जब फिलिस्तीन में कुछ होता है, तो हमारे यहाँ के ‘Woke’ और सेक्युलर किस्म के लोग नारे लगाते है, ऑनलाइन ट्रेंड चलाते हैं और प्लाकार्ड लेकर खड़े हो जाते हैं। काफी सारे सेलेब्रिटी भी ऐसा करते हैं। विरोध व्यक्त किया जाता है, कड़ी निंदा की जाती है। लेकिन, जब लेस्टर और बर्मिंघम में हिन्दुओं पर हमला होता है और मंदिरों को निशाना बनाया जाता है, तब ये सब चुप हो जाते हैं और उनकी आवाज़ नहीं निकलती। ये ‘सेलेक्टिव आउटरेज’ है। इसीलिए, हमें ‘सेक्युलर’ होने बोल कर मूर्ख बनाया जा रहा है। जबकि, हमें सुदृढ़ बनने की ज़रूरत है। पुणे में PFI की रैली में देश विरोधी नारे लगाए गए। इस पर ये लोग क्यों नहीं बोल रहे? जो नहीं बोल रहे, वो राष्ट्र के हित में नहीं हैं। हिन्दू धर्म में ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ की धारणा है, अर्थात पूरा विश्व एक परिवार है। हमारा धर्म सबसे पहले पहले राष्ट्रवाद सिखाता है। हम इसी वसुधा की बात करते हैं और अगर इसकी भलाई नहीं कर सकते तो हमें न तो हिन्दू कहलाने का अधिकार है और न ही राष्ट्रवादी।

प्रश्न: ‘हिंदुत्व’ फिल्म में ‘लव जिहाद’ पर भी चोट की गई है। क्या आपको लगता है कि ये असली में एक समस्या है, क्योंकि लिबरल गिरोह अक्सर इसे बनावटी बताता है।
जवाब: आप एक ऐसी घटना दिखा दीजिए, जहाँ किसी हिन्दू लड़की से शादी कर के कोई मुस्लिम लड़का हिन्दू धर्म को अपना ले। ऐसी कितनी घटनाएँ आती हैं? मेरी शादी एक ईसाई लड़की से हुई हैं। मेरी पत्नी एक रोमन कैथोलिक हैं, लेकिन वो महाराष्ट्रियन हैं। उनकी पिछली कुछ पीढ़ियाँ ईसाई रही होंगी। लेकिन, वो अपना धर्म निभाती हैं और उतनी ही शिद्दत से मेरा धर्म भी निभाती हैं। वो करवा चौथ का व्रत करती हैं और हवन भी करती हैं, लेकिन मैंने उनसे कभी नहीं कहा कि आप धर्म-परिवर्तन कर लो। लेकिन, ऐसा नहीं है कि वो मेरे धर्म को नीचा देखती हैं। ये होती है धर्मनिरपेक्षता, जहाँ किसी को नीचा नहीं दिखाया जाता। धर्मनिरपेक्षता ये नहीं है कि अंतर्धार्मिक विवाह की आज़ादी तो चाहिए लेकिन लड़की को हमारे मजहब में आना ही पड़ेगा। ये प्रेम नहीं है। प्रेम के अंदर सौदेबाजी नहीं होती। प्रेम का अर्थ है कि जो जो हैं, उन्हें वो रहने दीजिए। लड़की को ही जब धर्म-परिवर्तन करना पड़े हमेशा, तो ये दोगलापन है।

प्रश्न: आपकी फिल्म ‘हिंदुत्व’ में छात्र राजनीति को भी उभारा गया है। ‘द कश्मीर फाइल्स’ में भी छात्र राजनीति के कई पहलू दिखाए गए थे। क्या आप कोई तुलना देखते हैं?
जवाब: मैं ‘द कश्मीर फाइल्स’ से कोई तुलना नहीं करना चाहता, क्योंकि वो वास्तविक घटनाओं पर आधारित फिल्म है। जो घटनाएँ घटीं, उन्हें उन्होंने उसी पीड़ा के साथ हूबहू ईमानदारी से सामने रखा, उसे डॉक्यूमेंट किया। वो डोक्यू-ड्रामा थी, जबकि हमारी फिक्शनल फिल्म है। ये सत्य घटनाओं पर आधारित है। हमारे देश की राजनीतिक और सामाजिक घटनाओं पर आधारित इस फिल्म में दो दोस्तों की कहानी है। ये दोनों भारत का प्रतिनिधित्व करते हैं। भारत आज की तारीख़ में जो देश है, वो विभाजन की नींव पर बना था। जो चीजें विभाजन पर आती हैं, उन्हें जोड़ कर रखने की आवश्यकता होती है। ये फिल्म इसी जोड़ की बात करती है। इसके चक्कर में एक पलड़े को भारी और एक को कम नहीं कर सकते, समानता होनी चाहिए। ‘हम अल्पसंख्यक हैं, हमने अपने कानून बना लिए’ – ये सही नहीं है। ‘वक्फ बोर्ड’ कितना बड़ा फर्जीवाड़ा है। कानून से अधिकार पाकर वो किसी भी जमीन पर दावा कर के उसे ले लेते हैं। जबकि मंदिरों के मामले में उनकी पूरी कमाई सरकार के पास जाती है। समानता दोनों तरफ से होनी चाहिए, वरना इनमें पड़ने का कोई फायदा नहीं है।

प्रश्न: आजकल ‘बॉयकॉट बॉलीवुड’ का ट्रेंड भी चल रहा है। ‘शमशेरा’ में हिन्दू धर्म का अपमान होने के कारण इसका बहिष्कार किया गया और ये फ्लॉप हुआ। आमिर खान की ‘लाल सिंह चड्ढा’ जैसी बड़ी फिल्म नहीं चली। आपको क्या लगता है, बॉलीवुड कहाँ चूक रहा है?
जवाब: पिछले कुछ ज़माने से बॉलीवुड थोड़ा सा पथभ्रष्ट हो गया है। असल में वो यही काम कर रहे हैं, जो वो करते हैं। वो पूरी शिद्दत से कहानी कह रहे हैं। ऐसा नहीं है कि कलाकारी ये मेहनत में। फर्क ये नजर आया है कि जनता ने उन्हें कह दिया है कि हमें वो नहीं देखना जो आप बना रहे हैं और आप वो बनाइए, जो हम देखेंगे। पहले हमलोग जो भी बनता था, जाकर देख लेते हैं। मैं भी उसी में था। अब जनता ने पहली बार बोला है और टिकट खिड़की पर इसे साबित भी कर दिया है। नकारना या स्वीकारना ऑडिएंस का अधिकार है। फिल्मकारों को समझना पड़ेगा कि ऑडिएंस को क्या देखना है। उनकी बात माननी पड़ेगी। बॉयकॉट से बेहतर है कि आप जिसे देखना चाहते हैं, उसका समर्थन कर दें। ‘द कश्मीर फाइल्स’ को देख लीजिए, न तो समीक्षकों ने उसका रिव्यू किया और न ही मीडिया ने कवर किया। ज़रूरत ही नहीं पड़ी। जनता ने रिव्यू दे दिए, जनता ने कवर किया, जनता ने टिकट खरीदा और इसे ब्लॉकबस्टर बनाया। आजकल पैसे देकर समीक्षा भी करवाई जाती है। कितने स्टार्स देने के कितने पैसे मिलते हैं, ये जगजाहिर है। दिनकर ने – ‘सिंहासन खाली करो, कि जनता आती है।’

प्रश्न: दक्षिण भारतीय फिल्मों को हिंदी बेल्ट के दर्शकों द्वारा इतना प्यार दिए जाने के पीछे आप क्या कारण मानते हैं? बाहुबली सीरीज के अलावा ‘पुष्पा’, KGF और RRR जैसे फ़िल्में भी उत्तर भारत में ब्लॉकबस्टर हुई हैं। इसका कारण आप क्या मानते हैं?
जवाब: मैं तो एक जमाने से साउथ की फ़िल्में देखता हूँ और सिर्फ उनकी कमर्शियल ही नहीं बल्कि और भी फ़िल्में देखता रहा हूँ। मेरे हिसाब से मलयालम में भारत की बेहतरीन फ़िल्में बनती हैं। काफी खूबसूरत और जमीन से जुड़ी हुई मानवीय कहानियाँ वो कहते हैं, जहाँ आपको भारतीयता, भारत का परिवेश और हिंदुस्तानी नागरिक नजर आता है। उसमें पाश्चात्य प्रभाव नहीं दिखता। वो अपनी छोटी-छोटी मानवीय मुद्दों पर फ़िल्में बनाते हैं, जिनमें आसपास के लोगों की कहानी होती है। साउथ के फिल्मों की कहानी और किरदार जमीनी होते हैं। वो ‘लार्जर दैन लाइफ’ भी बनाते हैं तो वो प्रेरणा देते हैं और भारतीयता को महत्व देते हैं। आपको देख कर लगेगा कि मैं भी इसके जैसा बन सकता हूँ। इसका कारण ये भी है कि वहाँ के अभिनेता-अभिनेत्री भी जमीन से जुड़े रहते हैं। वो अपनी संस्कृति से जुड़े हुए लोग हैं, इसीलिए वो इतनी शिद्दत से ये किरदार निभाते हैं। जबकि बॉलीवुड में अधिकतर लोग पाश्चात्य प्रभाव में बड़े हुए हैं। माहौल वेस्टर्नाइज बन गया है, इसीलिए उनकी सोच-समझ भी ऐसी हो गई है। उनके लिए हिंदी बोलना-समझना भी मुश्किल है। किसी छोटे शहर में किसी युवक की तकलीफ को वो कैसे समझेंगे, जब आपने वो ज़िन्दगी जी ही नहीं। आप रिसर्च कर के उसके करीब पहुँच जाएँगे, लेकिन उसे अपने अंदर नहीं उतार पाएँगे। या तो आपने वो जिया न हो या करीब से देखा न हो, तब तक इसे निभाना संभव नहीं। आजकल जो आधुनिक लेखक हैं, वो भी हमारे समाज, संस्कृति और सभ्यता से जुड़े हुए नहीं हैं। इसका कारण ये भी है कि वो हिंदी साहित्य पढ़ते ही नहीं हैं। आजकल लिखे ही नहीं जाते। हमें हमारे बच्चों को अपनी सभ्यता और संस्कृति से जोड़ना होगा, तभी बड़े होकर वो उसी हिसाब से काम करेंगे।

प्रश्न: आप अपने संघर्ष और शुरुआती दिनों के बारे में बताइए, ताकि नए अभिनेताओं और अभिनय का शौक रखने वालों को भी इससे प्रेरणा मिले।
जवाब: मैं ये कहूँ कि मैं रेलवे प्लेटफॉर्म पर सोया और बड़ापाव खाया तो मैं ये नहीं कहूँगा। मेरी शुरुआत फिल्मों से ही हुई। दिवाकर बनर्जी की ‘लव, सेक्स और धोखा’ (2010) काफी क्रिटिकली एक्लेम्ड रही, लेकिन मुझे नाम टीवी से मिला। टीवी ने मुझे घर-घर तक पहुँचाया, नाम और पैसा दिया। साथ ही इस लायक बनाया कि मैं चीजों को ना बोल सकूँ। उन चीजों को नकार सकूँ, जो मुझे नहीं करना है। इसका कारण ये है कि मैंने अपने ज़रूरतों और आवश्यकताओं को नियंत्रण में रखा। मैंने Need और Want को कंट्रोल में रखा। आपको ज्यादा चीजों की आवश्यकता नहीं पड़ती। मुझे आज भी कम चीजों की ही ज़रूरत पड़ती है। टीवी ने मुझे इस लायक बनाया कि मैं अपना काम खुद बना सकूँ, कंटेंट क्रिएट सर सकूँ। मेरी प्रोडक्शन कंपनी भी है। उसके तहत मैं ऐसी ही कहानियाँ बना रही हूँ। एक फिल्म मैं बना चुका हूँ। एक सीरीज बन चुकी है। दो फ़िल्में फ्लोर पर हैं। मैंने OTT या फिल्मों की तरफ रुख किया, लेकिन हमारे लिए वहाँ ‘बासी’ शब्द का प्रयोग करते हुए कहा जाता है कि ‘टीवी के बड़े कलाकारों’ को 10 साल से लोग देख रहे हैं, अब उन्हें कौन देखना चाहता है। मेरा मानना है कि दर्शक मुझे नहीं देख रहे, किरदार को देख रहे। अमिताभ बच्चन दशकों से काम कर रहे हैं, लेकिन क्या वो बासी हो गए? वो आज भी इतने ही फ्रेश हैं और शिद्दत से काम करते हैं। इस सोच से मुझे लड़ना है। वो इज्जत से आपको बैठाएँगे, चाय-पानी पिलाएँगे, लेकिन काम नहीं देंगे। इज्जत से तिरस्कार करेंगे। इस पर आप रो सकते हैं या इससे लड़ सकते हैं। छाती पीट कर हाय-हाय करने की जगह आप अपनी जगह खुद बनाना शुरू करते हैं, जो मैं कर रहा। तकलीफें आती हैं, लेकिन अड़चनों के अंदर मौका खोजना चाहिए। मैं यही कर रहा हूँ।

आशीष शर्मा ने इस इंटरव्यू में ये भी बताया कि उनकी प्रोडक्शन कंपनी कई नए प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही है। वो खुद एक और फिल्म कर रहे हैं। उनका कहना है कि फिल्मों के जरिए मनोरंजन के साथ-साथ एक सन्देश छोड़ जाना भी उनका उद्देश्य है। उनकी अगली फिल्म बड़े-बुजुर्गों के प्रति युवाओं की जिम्मेदारी की बात करेगी। उनका मानना है कि कलाकारों की स्वीकार्यता काम से नहीं, नाम से होनी चाहिए। ‘हिंदुत्व’ फिल्म को दर्शकों से अच्छी प्रतिक्रिया मिली है।

आदिपुरुष में भगवान राम और हनुमान जी का गलत चित्रण…फिल्म रिलीज पर लगे बैन: दिल्ली कोर्ट में दायर हुई याचिका, लखनऊ में शिकायत दर्ज

आदिपुरुष को रिलीज होने से रोकने के लिए दिल्ली की एक अदालत में याचिका दायर हुई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि फिल्म में भगवान राम और भहवान हनुमान को गलत ढंग से दिखाया गया।

समाचारा एजेंसी एएनआई के मुताबिक, दिल्ली की एक अदालत में फिल्म ‘आदिपुरुष’ की रिलीज पर रोक लगाने की माँग को लेकर याचिका दर्ज की गई है। याचिका में ये आरोप लगाया गया है कि भगवान राम और हनुमान को चमड़े की पट्टियाँ पहनाकर एक अनुचित और गलत कैरेक्टर में दिखाया गया। वहीं रावण का चित्रण भी गलत ढंग से किया गया है।

बता दें कि इससे पहले यूपी के लखनऊ में इस फिल्म के खिलाफ शिकायत दर्ज हुई थी। कलाकारों और निर्माताओं के खिलाफ कार्रवाई की माँग वकील प्रमोद पांडे ने की थी। उनकी माँग थी किं हिंदू देवी-देवताओं को गलत ढंग से कैरेक्टराइज करने के लिए फिल्म निर्माताओं के साथ कलाकारों के खिलाफ सीआरपीसी की धारा 153 ए के तहत केस होना चाहिए।

उल्लेखनीय है कि आदिपुरुष का टीजर रिलीज होने के बाद से उसके बॉयकॉट की माँग सोशल मीडिया पर चल रही है। लोगों में इस बात का गुस्सा है कि 500 करोड़ में इतने घटिया वीएफएक्स वाली फिल्म को तैयार किया गया है। वहीं आरोप यह भी है कि आखिर कैसे फिल्म निर्माताओं ने राम भगवान और हनुमान जी का किरदार निभाने वाले कलाकारों को चमड़े की बेल्ट पहनाकर पेश किया। वहीं रावण के बालों के हेयरस्टाइल पर भी सवाल उठ रहे हैं।

‘सिर तन से जुदा’ चिल्लाते हुए दिनदहाड़े नोएडा में भागे 12 कट्टरपंथी, नूपुर शर्मा की चर्चा सुन BJYM नेता को मारने आए थे: Video में सुनें पीड़ित की आपबीती

कट्टरपंथियों के सिर से ‘सर तन से जुदा’ का जुनून नहीं उतर रहा है। उत्तर प्रदेश के नोएडा में भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) के नेता अभिषेक सिंह राठौड़ (Abhishek Singh Rathaur) को पार्टी से निष्कासित प्रवक्ता नूपुर शर्मा (Nupur Sharma) के बारे में चर्चा पर मुस्लिम समुदाय के बदमाशों ने उन पर हमला कर दिया। इस मामले में नोएडा पुलिस ने मामला दर्ज किया है।

मामला नोएडा के सेक्टर-44 के मार्केट का है। वहाँ BJYM नेता अभिषेक सिंह राठौड़ अपने दोस्तों के साथ पार्टी की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा द्वारा इस्लाम के पैगंबर मुहम्मद पर दिए गए बयान के समर्थन में चर्चा कर रहे थे। इसी दौरान पीछे खड़े मुस्लिम समुदाय के लोगों ने सुन लिया और उन पर जानलेवा हमला कर दिया।

अभिषेक राठौड़ पर हमला करने वाले बदमाशों की संख्या 10-12 थी। इस दौरान हमलावरों ने सिर तन से जुदा के नारे भी लगाए। इस हमले में उन्हें गंभीर रूप से चोट आई है और वे लहूलुहान हो गए। घायल अवस्था में उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहाँ उनका इलाज चल रहा है।

अभिषेक राठौड़ ने बताया कि जब हमलावर बाइक पर सवार होकर भागने लगे तो बार-बार ‘सर तन से जुदा’ के नारे लगा रहे थे। उन्होंने बताया कि हमलावरों में से दो के नाम उन्हें याद हैं, क्योंकि मारपीट के दौरान दोनों नाम उन्होंने सुना था। उनके नाम अमजद एवं राशिद हैं।

अभिषेक राठौड़ ने बताया कि हमले के दौरान उनके कुछ दोस्त वहाँ आ गए। इसके बाद हमलावर भाग गए और वे जिंदा बच गए। उन्होंने कहा कि उनकी हत्या करने की साजिश के तहत बदमाश पहले से ही घात लगाकर वहाँ बैठे हुए थे। उन्होंने वीडियो ट्वीट कर यूपी पुलिस से न्याय की गुहार लगाई। इसके बाद नोएडा के ACP रजनीश ने संपर्क किया।

बता दें कि नूपुर शर्मा के बयान को लेकर यह पहला हमला नहीं है। इससे पहले उदयपुर में दो कट्टरपंथियों ने कन्हैयालाल की दुकान में ग्राहक बनकर जाने के बाद चाकू से गला रेतकर उनकी हत्या कर दी थी। वहीं, महाराष्ट्र के अमरावती में उमेश कोल्हे की और कर्नाटक के प्रवीण नेट्टारू की इसी तरह हत्या कर दी गई थी। इसके अलावा भी कई हत्याओं को कट्टरपंथियों ने अंजाम दिया।