वायनाड लोकसभा क्षेत्र से कॉन्ग्रेस सांसद राहुल गाँधी ने ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के दौरान गुरुवार (22 सितंबर 2022) को मीडिया संस्थान एनडीटीवी की एक महिला पत्रकार का अपमान किया। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब सांसद से अध्यक्ष पद को लेकर पत्रकार ने सवाल किया तो उन्होंने कहा, “मुझे विश्वास है कि आपके पास एक नया मालिक है।”
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार 22 सितंबर 2022 को कॉन्ग्रेस सांसद राहुल गाँधी केरल के एर्नाकुलम में भारत जोड़ो यात्रा के दौरान मीडिया से रूबरू हुए। इसी दौरान एनडीटीवी की एक महिला पत्रकार ने उनसे पूछा कि जब वे भारत जोड़ो यात्रा का नेतृत्व कर रहे हैं, तो कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष पद हेतु अपनी दावेदारी क्यों नहीं रखते?
आज प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राहुल गांधी उद्योगपतियों की मशहूर जोड़ी के बारे में बात कर रहे थे। जब एक चैनल की पत्रकार ने उन्हें टोका तो सुनिये उन्होंने क्या कहा? pic.twitter.com/Ab5DmY0RGU
इस सवाल के बाद राहुल गाँधी ने जवाब देने के बजाए मुस्कुराना शुरू कर दिया। वे मुस्कुराते हुए बोले, “मुझे विश्वास है कि आपके पास एक नया मालिक है।” उनकी इस बात को नजरअंदाज करते हुए पत्रकार ने अपना सवाल दोबारा पूछा। फिर भी राहुल गाँधी उनसे एक ही बात पूछते रहे, “आपके पास एक नया मालिक है?”
आगे राहुल गाँधी ने अपनी बात संभालते हुए कहा, कि स्वामित्व बिल्कुल भी मायने नहीं रखता है। सांसद के मुताबिक समाचार पत्रों का स्वामित्व परिभाषित करता है कि समाचार पत्र क्या करते हैं। इसके साथ-साथ उन्होंने इस बात की तरफ भी इशारा किया कि अडानी ग्रुप द्वारा एनडीटीवी को खरीदा जाने के बाद एनडीटीवी का संपादकीय रुख बदल जाएगा।
राहुल गाँधी ने कहा, “यह यात्रा कॉन्ग्रेस के लाखों कार्यकर्ताओं की है और वह सिर्फ इसका एक हिस्सा हैं। मगर उनके जैसे पत्रकार सिर्फ उन्हीं पर फोकस कर रहे हैं।” इस कॉन्फ्रेंस के दौरान राहुल गाँधी ने एनडीटीवी के पत्रकार पर भारत जोड़ो यात्रा से ध्यान हटाने की कोशिश करने का आरोप लगाया।
सांसद राहुल गाँधी ने कहा, “मैं उम्मीदवार हूँ या नहीं, इस बारे में आपका सवाल कि हम जो कर रहे हैं उसे ध्यान भटकाने के लिए बनाया गया है। और मैं उस जाल में नहीं पड़ने वाला।” इसके बाद कॉन्ग्रेस के एक अन्य नेता ने तमाम पत्रकारों से पार्टी अध्यक्ष पद के बारे में कोई भी सवाल नहीं करने की बात कही।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की एक टीम ने चेन्नई के पास से 12,000 साल पुरानी कलाकृतियाँ और कुछ प्राचीन पत्थर के औजार खुदाई से निकाले हैं। आश्चर्य यह कि इसी जगह से चार अलग-अलग सभ्यताओं के निशान मिले हैं। ASI का मानना है कि ये चारों सभ्यता एक-दूसरे से सैकड़ों वर्ष पुराने हैं।
प्राप्त जानकारियों के मुताबिक ASI की टीम को चेन्नई के बाहरी इलाके ओरगदम (Oragadam) से 5 किलोमीटर दूर वडक्कुपट्टू (Vadakkupattu) गाँव में कई प्राचीन पत्थर और धार्मिक कलाकृतियाँ मिली हैं। बताया जा रहा है कि इन कलाकृतियों में हाथ वाली कुल्हाड़ी, खरोंचने वाले औजार, फोड़ने वाले औजार और छुरी के आकार के काटने लायक औराज भी शामिल हैं।
पत्थर के औजार से लेकर सोने के गहने और भगवान की मूर्तियाँ भी (फोटो साभार: टाइम्स ऑफ इंडिया)
इस खोज में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की टीम ने 10mx10m के एक गड्ढे की ऊपरी परत से संगम युग (2000 वर्ष से भी पहले) की कलाकृतियों को निकाला। इसमें नक्काशी किए गए बर्तन, दुहत्थी रोमन सुराही के टुकड़े और काँच की मोतियाँ भी मिलीं। इससे साबित होता है कि उस समय रोमन साम्राज्य के साथ यहाँ के व्यापारिक रिश्ते थे।
इनके अलावा ASI की टीम को सोने के गहने, टेराकोटा के खिलौने, मोती, चूड़ियों के टुकड़े, बर्तन के टुकड़े और सिक्के भी मिले। इसी जगह के आस-पास के क्षेत्र में जमीन की ऊपरी सतह पर ASI की टीम ने पल्लव युग की शुरुआत (275 ईसवी) से पल्लव वंश के आखिरी राजाओं (897 ईसवी) तक की मूर्तियों को भी खोजा है।
एक ही जगह 4 अलग-अलग सभ्याताओं के निशान(फोटो साभार: टाइम्स ऑफ इंडिया)
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की टीम ने वडक्कुपट्टू (Vadakkupattu) गाँव में जब खुदाई शुरू की तो जमीन से कुछ ही सेंटीमीटर नीचे सोने के गहने, टेराकोटा के खिलौने, मोती, चूड़ियों के टुकड़े, बर्तन के टुकड़े और सिक्के आदि मिले। इससे थोड़ी और खुदाई के बाद नक्काशी किए गए बर्तन, दुहत्थी रोमन सुराही के टुकड़े और काँच की मोतियाँ मिलीं। इसके बाद जमीनी सतह से करीब 75 सेंटीमीटर नीचे दबे मिले पत्थरों वाले औजार – हाथ वाली कुल्हाड़ी, खरोंचने वाले औजार, फोड़ने वाले औजार और छुरी के आकार के काटने लायक औराज।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण टीम के एक सदस्य का कहना है कि यह एक ऐसी जगह की तरह दिखता है, जहाँ प्राचीन लोग शिकार करने वालों के लिए पत्थर के औजार बनाते थे। आपको बता दें कि वडक्कुपट्टू गाँव से 1 किलोमीटर दूर एक गाँव है – गुरुवनमेदु। यहाँ एक प्राचीन स्थल है, जो पहले के जमाने में मृतकों को दफनाने के काम आती थी। उस जगह की पहचान पुरातत्वविदों ने 1922 में की थी।
राज्य पुरातत्व विभाग से सेवानिवृत्त हुए पुरातत्वविद के श्रीधरन ने मीडिया को बताया कि इस खोज से ऐसा प्रतीत होता है कि वडक्कुपट्टू (Vadakkupattu) गाँव में कई हजार वर्षों से निरंतर इंसानों का निवास रहा है। यहाँ मिले नए प्रमाणों से यह भी पता चलता है कि यह एक सांस्कृतिक और पुरातात्विक रूप से महत्वपूर्ण स्थल भी है।
राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई में पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के कई लोग गिरफ्तार होने के बाद अब उनके समर्थक सड़कों पर हंगामा कर कर रहे हैं।
कहीं सार्वजनिक वाहनों को जलाया जा रहा है, तो कहीं पुलिसकर्मियों पर हमला हो रहा है। इस बीच भाजपा कार्यालय और आरएसएस दफ्तर में भी बम फेंके जाने की खबर हैं। हालात इतने बेकाबू हैं कि छात्रों की परीक्षाएँ स्थगित हो चुकी हैं, पुलिसकर्मी घायल हो रहे हैं।
बता दें कि टेरर फंडिंग मामले में हुई ताबड़तोड़ छापेमारी के खिलाफ PFI के लोगों ने शुक्रवार (23 सितंबर 2022) सुबह 6 बजे से लेकर शाम 6 तक ‘केरल बंद’ का आह्वान किया था। इसी बीच ये लोग जगह-जगह उपद्रव कर रहे हैं।
Thiruvananthapuram, Kerala | One auto-rickshaw and a car were damaged allegedly by people supporting the state-wise bandh called today by the Popular Front of India over NIA raids pic.twitter.com/k305OP83jW
केरल बंद के ऐलान के बीच राज्य के विभिन्न हिस्सों से पथराव और हिंसा की घटनाएँ सामने आई हैं। तिरुवनंतपुरम, कोट्टम में बंद का समर्थन कर रहे PFI के उपद्रवियों ने तोड़फोड़ की और सरकारी बसों, ऑटो-रिक्शा और एक कार को क्षतिग्रस्त कर दिया।
अलाप्पुझा में केरल राज्य सड़क परिवहन निगम (KSRTC) की दो बसों और दो लॉरियों के शीशे तोड़ दिए गए। कोल्लम, पठानमथिट्टा, अलाप्पुझा, एर्नाकुलम, कोझीकोड और वायनाड जिलों में भी वाहनों पर पथराव किया गया।
कोझीकोड सिविल स्टेशन के पास KSRTC बस पर पथराव के दौरान उसके ड्राइवर की आँख में चोट लग गई, जिसके बाद उसे अस्पताल ले जाया गया है।
PFI’s Kerala bandh tuns violent: Protestors pelt stones at buses, vehicles; 2 policemen injured in Kollam
तमिलनाडु के कोयंबटूर में भाजपा कार्यालय में तोड़फोड़ की घटना घटी है। वहाँ कुछ लोगों ने ऑफिस में पेट्रोल बम भी फेंके। इनके अलावा कन्नूर के मट्टनूर में दो लोगों द्वारा आरएसएस के ऑफिस पर पेट्रोल बम फेंकने की खबर आई है।
Kannur, Kerala | During the strike protesting the arrest of the Popular Front of India's leaders by NIA, a petrol bomb was hurled by two persons at the RSS office in Mattannur; police probe underway pic.twitter.com/3FQCSUgAgS
केरल विश्वविद्यालय, एमजी विश्वविद्यालय और कन्नूर विश्वविद्यालय ने हड़ताल के कारण शुक्रवार को होने वाली सभी परीक्षाओं को स्थगित कर दिया है। केरल यूनिवर्सिटी ने बीएड स्पॉट अलॉटमेंट को 25 सितंबर तक के लिए टाल दिया है।
2 पुलिसकर्मियों पर हमला
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कोल्लम में बाइक सवार PFI आतंकियों ने 2 पुलिसकर्मियों पर भी हमला किया। उनका इलाज चल रहा है। PFI के प्रदर्शन को देखते हुए राज्य सरकार ने पुलिस बलों की अतिरिक्त तैनाती की है। केरल हाई कोर्ट ने राज्य में बंद का आह्वान करने के लिए पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के नेताओं के खिलाफ स्वत: संज्ञान लिया है। हाई कोर्ट के आदेश के अनुसार, कोई भी राज्य में बिना अनुमति के बंद का आह्वान नहीं कर सकता है।
Kerala High Court initiates suo motu case against the leaders of Popular Front of India (PFI) for calling a one-day statewide bandh in Kerala.
As per a Kerala HC order, nobody can call for a bandh in the state without permission.
इस पूरे घटनाक्रम के बीच, पीएफआई के खिलाफ NIA के एक्शन पर समाजवादी पार्टी के सांसद शफीकुर्रहमान बर्क का बयान सामने आया है। शफीकुर्रहमान बर्क ने PFI के खिलाफ कार्रवाई जुल्म बताया है। बर्क ने कहा,
“पीएफआई (पापुलर फ्रंट आफ इंडिया) एक संस्था है। एनआईए छापेमारी करके उन पर जुल्म कर रही है। उनका क्या जुर्म है, वह मुस्लिमों के मसीहा हैं।। वह एक पार्टी है, जो एक संस्था चला रहे हैं। उनका पैसा और पार्टियाँ उनका प्रोग्राम चलाती हैं तो उनका जुर्म क्या है। उनको क्यों गिरफ्तार किया जा रहा है?”
उल्लेखनीय है कि 22 सितंबर 2022 को पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) का राष्ट्रीय अध्यक्ष ओएमएस सलाम और इसी संगठन के दिल्ली अध्यक्ष परवेज अहमद को राष्ट्रीय जाँच एजेंसी ने गिरफ्तार किया था। पीएफआई के लोग छापेमारी के खिलाफ देश के कई हिस्सों में विरोध-प्रदर्शन करने उतर गए। इसको देखते हुए दिल्ली में एनआईए ऑफिस की सुरक्षा बढ़ा दी गई है।
कोलकाता में इस बार श्रीभूमि दुर्गा पूजा पंडाल ‘वेटिकन सिटी’ के थीम के मुताबिक आयोजित हो रहा है। इसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर सामने आई हैं। पूरे पंडाल को बिलकुल उसी ढंग में बनाया गया है। बाहर से ये किसी चर्च जैसा लग रहा है। अंदर जीसस की तस्वीरें, मदर मेरी की फोटो लगी हुई हैं। बीच में जाकर दुर्गा माँ की मूर्ति लगाई गई हैं।
West Bengal | Kolkata’s Sree Bhumi Puja Pandal, has this year been designed on the theme of ‘Vatican City’ ahead of Durga Pooja festival pic.twitter.com/4TWW2RtJla
ये तस्वीरें देखने के बाद लोगों में नाराजगी है। उनका पूछना है कि आखिर दुर्गा पंडाल को इस तरह सजाने का क्या अर्थ? क्या कभी वेटिकन में क्रिसमस का त्योहार दुर्गा पूजा थीम पर मनाया जाता है?
एक यूजर ने गुस्से में लिखा है, “ये कुछ भी नहीं है। इससे ज्यादा का इंतजार करो। शायद काबा के हिसाब से पूजा पंडाल लगे और चंडीपाठ की जगह आजान सुनाई दे। वोक बंगाल में हर चीज संभव हैं खासकर कोलकाता में। ये लोग अखंडता दिखाने के लिए माँ दुर्गा को हिजाब पहना सकते हैं। बात जब कोलकाता के बंगालियों की आती है तो कुछ भी हैरान नहीं करता।”
This is nothing. Wait for more, maybe a kaba type puja pandal with azan blaring instead of chandipath. Everything is possible in woke Bengal especially Kolkata. They mught even put Ma in a hizab to show solidarity. When it comes to kolkata bengalis nothing shocks anymore.
कीर्ति कुमार कासत लिखते हैं, “ये क्या है? अपने आपको सेकुलर दिखाने के लिए इतनी जद्दोजहद क्यों? वेटिकन का आर्किटेक्ट समझ लूँ एक बार पर फिर ये ईसाई धर्म की तस्वीरें क्यों? क्रिसमस पर चर्च चले जाओ। वहाँ भी तुम्हें हिंदू से ईसाई बना व्यक्ति बताने लगेगा कि जीसस ही असल रक्षक हैं।”
Ye kya hai bhai? Apne aap ko secular dikhane ki itni jaddojehad kyun? Vatican ka architecture samajh lu ek baar par phir ye Christian faith ki pictures kyu? Go to a church on Xmas and you will find a Hindu turned Christian guying telling how Jesus is the true saviour! https://t.co/kkK3onxj1g
बता दें कि इससे पहले साल 2021 में श्रीभूमि दुर्गा पूजा पंडाल बुर्ज खलीफा की थीम पर आयोजित हुआ था। बुर्ज खलीफा दुनिया की सबसी ऊँची इमारत है। भारी तादाद में लोग उस पंडाल को देखने आए थे। इसमें इतनी लेजर लाइट थी कि इसके खिलाफ पॉयलटों ने शिकायत की थी कि उन्हें उड़ान भरने में समस्या हैं।
अब वाला पंडाल वैसा नहीं है लेकिन इस बार विवाद इसलिए हो रहा है क्योंकि पूजा स्थल के भीतर ईसाई धर्म से जुड़ी तस्वीरें हैं। टीवी 9 की खबर के मुताबिक श्रीभूमि स्पोर्टिंग क्लब 50 साल से पूजा पंडाल लगा रहा है। इस बार स्वर्ण जयंती है इसलिए इसका थीम वेटिकन सिटी रखा गया है। इसके आयोजकों में राज्य के दमकल मंत्री और टीएमसी के विधायक सुजित बसु हैं। खुद ममता बनर्जी ने पंडाल का उद्घाटन किया है।
उत्तर प्रदेश के अयोध्या से जबरन धर्मांतरण (Religious Conversion) का मामला सामने आया है। यहाँ शाहनवाजपुर हलकारा का पुरवा निवासी जगबीर कोरी को इस्लाम कबूल ना करने पर सिर कलम कर देने की धमकियाँ मिल रही हैं। उन्होंने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और पुलिस महानिरीक्षक से इसकी शिकायत की। कार्रवाई न होने पर उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से न्याय की गुहार लगाई है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अयोध्या निवासी जगबीर कोरी के एक रिश्तेदार को 12 वर्ष पहले रेलवे स्टेशन पर एक लड़की रोती हुई मिली थी। उस लड़की ने नाम पूजा बताया था। जिसके बाद परिवारवालों ने जगबीर कोरी से उसकी शादी करवा दी। 9 वर्षों तक सब कुछ ठीक रहा, लेकिन इतने सालों बाद उसे पता चला कि जिसे वह अपनी हिंदू पत्नी समझ कर उसके साथ रह रहा था, वह पूजा नहीं, बल्कि हसीना बानो है।
इस बात का खुलासा तब हुआ, जब लड़की के रिश्तेदार बन कर आए राजू ने जगबीर कोरी के परिवार में प्रवेश किया। कुछ दिनों तक सब कुछ ठीक चलता रहा, लेकिन बाद में पता चला कि खुद को ठाकुर बताने वाला राजू हिंदू नहीं मुस्लिम है। उसका नाम निसार है।
इसके बाद अचानक लड़की के अम्मी-अब्बू भी जगबीर के घर पर आ गए और उन्होंने धीरे-धीरे उस पर इस्लाम कबूल करने के लिए दबाव बनाना शुरू कर दिया। उन्होंने इस्लाम अपनाने से इनकार करने पर उसे सिर कलम करने की भी धमकी दी।
एक अन्य मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, विरोध करने पर मुस्लिम पत्नी पक्ष के सभी लोग हमलावर हो गए और उसे गलियाँ दीं। उन्होंने उससे कहा कि वह अपनी जमीन और मकान बेचकर सारे पैसे उनकी बेटी को देकर उन लोगों के साथ भेज दे, नहीं तो उनके मजहब के लोग उसका (जगबीर कोरी) सिर कलम कर देंगे। इसके बाद सभी लोगों ने उससे कीमती सामान, बैंक कागजात आदि छीन लिए।
पत्नी के मुस्लिम घर वालों के जाने के बाद जब जगबीर कोरी ने घर में रखे बक्से की तलाशी ली, तो उसमें पुराने कागज मिले। इन मिले कागजात में उसकी पत्नी का नाम पूजा नहीं, बल्कि हसीना बानो पुत्री अमानतुल्ला निवासी बुढ़नपुर जिला आजमगढ़ लिखा हुआ था।
जगबीर कोरी के मुताबिक, उनका एक बेटा और एक बेटी है। उन लोगों ने जबरन उसके बेटे को इस्लाम कबूल करवा कर उसका खतना करवा दिया है। अब पूजा उर्फ हसीना बानो के परिजन जगबीर कोरी को लगातार परेशान कर रहे हैं, जिसकी शिकायत जगबीर ने पुलिस में की है। बीते दिनों निसार उर्फ राजू को पुलिस ने मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया है।
राना अयूब (Rana Ayyub) को मुस्लिमों ने इस्लाम से खारिज कर दिया है… कम से कम सोशल मीडिया वाले मुस्लिमों ने तो जरूर। चौंकिए मत। नीचे सारे प्रमाण हैं। हुआ यह कि वो हिजाब या बुरके को लेकर ज्ञान बाँट रही थीं। ट्विटर पर मौजूद मुस्लिमों ने कुरान का हवाला देकर राना अयूब की बत्ती लगा दी।
वित्तीय धोखाधड़ी की आरोपित और वाशिंगटन पोस्ट में लेख लिख कर पैसे कमाने वाली राना अयूब ने बुधवार (22 सितंबर 2022) को सूरा बकराह की आयत का मतलब अंग्रेजी में ट्वीट किया। उन्होंने लिखा, “मजहब में कोई मजबूरी नहीं है।” दरअसल यह ईरान में चल रहे हिजाब या बुरके के विरोध-प्रदर्शन से संबंधित था।
इस तरह का ट्वीट लिख राना अयूब यह दिखाना चाह रही थी कि वो विकासशील मानसिकता की महिला है। ट्विटर पर मौजूद मुस्लिम यूजरों ने उनको अच्छे ढंग से समझा दिया कि विकासशील मानसिकता अपनी जगह है, कुरान की अपनी जगह।
राना अय्यूब का ट्वीट
इस ट्वीट को लेकर हिंदुओं का मजाक उड़ाने वाली राना अयूब सोशल मीडिया पर मुस्लिम यूजर्स के निशाने पर आ गईं। बिंट नूह नाम के यूजर ने लिखा:
“मुखौटा उतर चुका है, हकीकत सबके सामने है। इसके बावजूद बड़े हैंडल राना अय्यूब पर अभी भी चुप क्यों हैं… जाहिर है कि वह आयत से जुड़े संदर्भ को जानती हैं, बावजूद इसमें कोई संदेह नहीं है कि गुस्ताख लोगों के भले की कामना करने वाली यह महिला इस्लाम के कट्टर दुश्मनों में से एक है। हमें उन लोगों को समझना-जानना होगा, जो अभी भी इस्लामी विरोधी नैरेटिव में इस महिला का समर्थन करते हैं। राना अय्यूब एक फिल्टर है!”
बिंट नूह का ट्वीट
सनिफ सुल्तान लिखते हैं, “यह आयत गैर-मुस्लिमों के लिए है। मुस्लिमों को मजहब के तौर पर इस्लाम का अनुसरण करने और चुनने की आजादी नहीं है। अपने दोहरे मापदंड के लिए संदर्भ से बाहर इस आयत का इस्तेमाल एक मुस्लिम नहीं कर सकता।”
सनिफ सुल्तान का ट्वीट
एक और मुस्लिम यूजर ने राना अय्यूब को आड़े हाथों लेते हुए कहा, “यह पूरी आयत है (सूरा बकराह, आयत-256, कुरान)। देश भर में और विश्व स्तर पर हाल की घटनाओं को ध्यान में रखते हुए, मुझे लगता है कि मुस्लिमों को कुरान का हवाला देते समय सावधान रहना चाहिए।”
ZAyesha का ट्वीट
इसके अलावा कई मुस्लिम यूजर्स ने राना को ट्विटर पर जमकर लताड़ा है। एक ने लिखा, “मुशरिक के ओपिनियन की जरूरत नहीं।” एक ने उन पर तंज कसते हुए कहा, “ये मुस्लिमों की संरक्षक है।”
3 अलग-अलग ट्विटर यूजर्स का राणा अयूब को जवाब
नयमारा नाम की यूजर ने भी अपने ट्विटर हैंडल पर राना के ट्वीट का स्क्रीनशॉट शेयर हुए उन्हें इस्लाम, अल्लाह और कुरान के बारे में जानकारी दी। उन्होंने सवाल किया, “क्या तुम कुरान की आयत को नकार रही हो? क्या तुम मुस्लिम भी हो।”
नयमारा नाम की ट्विटर यूजर ने धोया राणा अयूब को
राना अयूब (Rana Ayyub) को लताड़ने वाले सभी ट्वीट सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं।
झूठ पर 4 मिनट कायम नहीं रह पाईं
इससे पहले राना अयूब ने अपने एक इंटरव्यू में इतने झूठ बोले कि वो खुद आँकड़ों में कन्फ्यूज हो गईं थी। उन्होंने इंटरव्यू में शुरुआत में कहा था कि 100 हिंदुओं ने एक मुस्लिम लड़की को घेरा और इंटरव्यू के आखिर में वो बोलती नजर आईं कि ये संख्या 200 थी। उन्होंने कहा था, “ये वो भारत नहीं है, जिस पर हमें कभी गर्व होता था। ये दक्षिणपंथी आतंकियों का भारत है।”
धोखाधड़ी करने पर जब्त हुई 1.77 करोड़ रुपए की संपत्ति
बता दें कि झूठ फैलाने में माहिर राना अयूब वित्तीय धोखाधड़ी की आरोपित हैं। उनकी 1.77 करोड़ रुपए की संपत्ति ईडी द्वारा जब्त की गई थी। कथित तौर पर ये सारा पैसा उन्होंने कीटो पर फंड इकट्ठा करने का नाम पर एकत्रित किया था। मगर, सारे पैसे का इस्तेमाल किए बिना उन पैसों को अयूब ने अपने अकॉउंट में रखे रखा। जब विवाद बढ़ा तो उन्होंने खुद को बेगुनाह बताया।
राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA ) और आतंकवाद रोधी दस्ते (ATS) ने गुरुवार (22 सितंबर 2022) को कट्टरपंथी इस्लामी संगठन PFI के कई ठिकानों पर छापेमारी की। इस छापेमारी अभियान में संगठन के कुछ पदाधिकारियों को भी गिरफ्तार किया गया, जिसके बाद अब सपा सांसद शफीकुर्रहमान बर्क ने इस पर आपत्ति जताई है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार समाजवादी पार्टी (SP) के सांसद शफीकुर्रहमान बर्क (Shafiqur-Rahman Burke) पीएफआई के पक्ष में आ खड़े हुए हैं। बर्क ने मीडिया के सामने कट्टरपंथी संगठन पर हो रही कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए और इस मामले में कई गंभीर आरोप भी लगाए।
Samajwadi Party MP Shafiqur Rahman Barq questions multi-agency raids against PFI, asks what is their crime and why people associated with it are being arrested
मीडिया से बातचीत करते हुए बर्क ने कहा कि आखिर उसका (PFI) जुर्म क्या है। वह देश की तमाम संस्थाओं की तरह एक संस्था है, जैसे दूसरी संस्थाएँ अपने कार्यक्रम चलाती हैं, वैसे ही पीएफआई भी अपने कार्यक्रम संचालित करता रहता है। बर्क ने यह भी कहा कि यह संस्था देश के मुसलमानों की समस्याओं से लड़ रही है।
PFI के लोगों की गिरफ़्तारी जारी
गुरुवार (22 सितंबर 2022) को राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने भारत के कुल 15 राज्यों में कट्टरपंथी संगठन के ठिकानों पर छापेमारी की हैं।
NIA ने गुरुवार पीएफआई के 93 स्थानों पर रेड मारी। इसमें से केरल में 39, तमिलनाडु में 16, कर्नाटक में 12, आंध्र प्रदेश में 7, तेलंगाना में 1, उत्तर प्रदेश में 2, राजस्थान में 4, दिल्ली में 2, असम में 1, मध्य प्रदेश में 1, महाराष्ट्र में 4, गोवा में 1, पश्चिम बंगाल में 1, बिहार में 1 और मणिपुर में 1 स्थान पर रेड मारे जाने की खबर है।
बताया जा रहा है कि इन राज्यों से अभी तक कुल 106 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। कट्टरपंथी संगठन PFI और उससे जुड़े लोगों के ऊपर टेरर फंडिंग, आतंकी ट्रेनिंग गतिविधियों और लोगों को संगठन से जोड़ने के आरोप हैं।
प्राप्त जानकारियों के हवाले से बताया यह भी जा रहा है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Union Home Minister Amit Shah) ने पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) पर राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA ) की रेड को लेकर NSA, गृह सचिव, डीजी एनआईए सहित अधिकारियों के साथ बैठक भी की है।
दिल्ली अध्यक्ष परवेज अहमद को किया गिरफ्तार
रेड के दौरान पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) का राष्ट्रीय अध्यक्ष ओएमएस सलाम (OMS Salam) और इसी संगठन का दिल्ली अध्यक्ष परवेज अहमद (Parvez Ahmed) को राष्ट्रीय जाँच एजेंसी ने गिरफ्तार किया। इस बीच PFI के लोग छापेमारी के खिलाफ देश के कई हिस्सों में विरोध-प्रदर्शन करने पर उतर आए। इसको देखते हुए दिल्ली में एनआईए ऑफिस की सुरक्षा भी बढ़ा दी गई।
मुस्लिम महिलाओं के कपड़ों पर विवादित टिप्पणी करने वाले मौलाना जरजिस को वाराणसी की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने बलात्कार के एक मामले में 10 साल सख्त सजा सुनाई है। इसके साथ-साथ मौलाना पर 10 हजार रुपए तक का जुर्माना भी लगाया गया है। वहीं मौलाना के अधिवक्ता ने हाई कोर्ट जाने की बात कही है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार मौलाना जरजिस को एक महिला को निकाह का झाँसा देकर के उसके साथ बलात्कार करने के मामले में कोर्ट ने ये सजा सुनाई है। मौलाना को वाराणसी की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने बुधवार (21 सितंबर 2022) को दोषी माना। उस पर आरोप था कि उसने महिला के साथ बलात्कार किया और उसके बाद उसकी वीडियो बनाकर उसे धमकी दी।
ये है पूरा मामला
पीड़ित महिला जैतपुरा थाना क्षेत्र की रहने वाली हैं। उसने मौलाना जरजिस के खिलाफ आरोप लगाया था कि साढ़े छह साल मौलाना ने महिला को निकाह का झाँसा देकर उसका दुष्कर्म किया और बाद में उसे धमकियाँ देने लगा। महिला ने बताया कि मौलाना ने बलात्कार के दौरान उसके अश्लील वीडियो भी बना लिए थे और उसी के आधार पर उसे ब्लैकमेल भी करता था।
पूरी घटना की जानकारी देते हुए महिला ने कहा कि मौलाना जरजिस हमेशा बनारस में तकरीर करने के लिए आता रहता था। उसी दौरान वह एक होटल में रुकता था। एक तकरीर के दौरान ही महिला का परिचय वर्ष 2013 में मौलाना से हुआ था। उसके बाद कई बार उससे मुलाकात हुई। इसके बाद जब भी मौलाना जरजिस बनारस आता तो महिला को होटल में बुलाता था।
पीड़िता के अनुसार निकाह के झाँसे के कारण वह होटल भी चली जाती थी। मौलाना ने महिला को कई बार होटल में बुलाकर बलात्कार किया और उसका अश्लील वीडियो भी बनाया। महिला ने बताया कि वीडियो के बाद तो वह जब भी बनारस आता तो वीडियो वायरल करने की धमकी देकर बलात्कार करता। यही नहीं 19 नवंबर 2015 को मौलाना महिला के घर जा पहुँचा और उसे एक कमरे में ले जाकर उसके साथ बलात्कार किया।
उसकी धमकियों से परेशान होकर आखिरकार पीड़िता ने मौलाना जरजिस के खिलाफ दिसंबर 2015 को जैतपुरा थाने में शिकायत दर्ज कराई।
बता दें कोर्ट में पेशी के दौरान मौलाना हँसता हुए अदालत परिसर में दिखाई दिया था, लेकिन सजा के बाद उसके चेहरे से हँसी गायब हो गई और मायूस होकर बैठ गया।
चेहरा दिखाने वाली लड़कियों पर फूटा था गुस्सा
गौरतलब है कि मौलाना जरजिस ने पिछले साल एक संबोधन दौरान चेहरा नहीं ढकने वाली लड़कियों के खिलाफ जहर उगला था। उसने इस दौरान लड़कियों के बेपर्दा घूमने पर पूरी कौम को मरा हुआ और आईसीयू में पड़ा बता रहा है। मौलाना के इसी संबोधन का एक वीडियो भी सामने आया था। इस वीडियो में मौलाना ने पीएम मोदी और सीएम योगी पर भी विवादित टिप्पणी की।
जिसमें मौलाना कहता है कि जलसों में लड़कियाँ ऐसे सज-धज के आती हैं, जैसे इनकी शादी हो और लड़के इसलिए आते हैं कि पसंद कर सकें किससे शादी करेंगे। मौलाना ने कहा कि ये सब देख उसे ऐसा लगता है, जैसे एक कु%$ के पीछे दस दस कु%& लगे हों। उसने कहा कि कितनी बार बताया जाए कि जिसकी बेटी, जिसकी बहन जिसकी माँ बेपर्दा घूमती है वह भड़** है।
हाल में कई रिपोर्टें आई हैं जो बताती हैं कि नेपाल भारत बॉर्डर पर तेजी से डेमोग्राफी में बदलाव हो रहा है। मस्जिद-मदरसों की संख्या लगातार बढ़ रही है। जमीनी हालात का जायजा लेने के लिए 20 से 27 अगस्त 2022 तक ऑपइंडिया की टीम ने सीमा से सटे इलाकों का दौरा किया। हमने जो कुछ देखा, वह सिलसिलेवार तरीके से आपको बता रहे हैं। इस कड़ी की 20वीं रिपोर्ट:
नेपाल और भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों में जनसंख्या और इबादतगाहों की संख्या में बढ़ोत्तरी के मुद्दे पर हमने बलरामपुर जिले में आस्था के प्रमुख केंद्र हनुमान गढ़ी मंदिर के महंत महेंद्र दास से बात की। यह मंदिर हनुमान गढ़ी नाम से है, जिसके वर्तमान महंत महेंद्र दास हैं। उन्होंने हमें अपना जवाब अपने आधिकारिक लेटर हेड पर लिख कर दे दिया। उन्होंने खुद के मंदिर के एक हिस्से को बदरुद्दीन नाम के एक अवैध कब्जेदार के कब्ज़े में बताया।
यह रिपोर्ट एक सीरीज के तौर पर है। इस पूरी सीरीज को एक साथ पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
रामजन्मभूमि ट्रस्ट के अध्यक्ष का मंदिर भी लैंड जिहाद का शिकार
ऑपइंडिया से बात करते हुए हनुमान गढ़ी मंदिर, वीर विनय चौराहा बलरामपुर के प्रबंधक नरेश कुमार ने बताया कि यह मंदिर श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट के महंत नृत्यगोपाल दास का मंदिर है। नरेश के मुताबिक वर्तमान में यहाँ के महंत महेंद्र दास है। उन्होंने बताया कि इस मंदिर के बड़ी हिस्से पर कुछ मुस्लिमों ने कब्ज़ा कर रखा है, जिसको वो लोग थोड़ा-थोड़ा करके कई वर्षों से छुड़वा रहे हैं।
मंदिर से सटी वो जमीन, जिस पर है बदरुद्दीन द्वारा कब्ज़े का आरोप
अदालतों का आदेश… फिर भी पुलिस-प्रशासन बेबस
महंत महेंद्र दास द्वारा ऑपइंडिया को दिए लिखित जवाब में कहा गया है कि नेपाल सीमा से सटे बलरामपुर में अवैध कब्जेदार कोर्ट का भी आदेश नहीं मानते। इस नाफरमानी के पीछे महेंद्र दास ने प्रशासन के कुछ अधिकारियों को भी जिम्मेदार बताया।
उन्होंने लिखा कि हिन्दू मंदिर के महंत होने के नाते इस बात का वो स्वयं गवाह और भुक्तभोगी हैं कि इसी मंदिर की जमीन पर कुछ मुस्लिमों द्वारा अवैध कब्ज़ा हुआ है, जिसे कोर्ट के आदेश के बाद भी प्रशासन नहीं हटा पा रहा।
महंत नृत्य गोपाल दास द्वारा कब्जेदारी के विरोध में दायर केस
जमीनों पर कब्ज़े के लिए फिलिस्तीनी मॉडल
महंत महेंद्र दास के मुताबिक उनके मंदिर की जमीन पर कब्ज़ा कायम रखने के लिए फिलिस्तीनी मॉडल अपनाया गया है। उन्होंने बताया कि जिस प्रकार से फिलिस्तीन में औरतों और बच्चों को आगे कर दिया जाता है, वैसे ही मंदिर की जमीन पर कब्जा बनाए रखने के लिए फिलिस्तीनी सिस्टम अपनाया गया।
हनुमान गढ़ी मंदिर के महंत महेंद्र दास ने लिखित तौर पर बताया कि जब कई वर्षों की कागजी और कानूनी लड़ाई के बावजूद मुस्लिम पक्ष मंदिर की जमीन पर कब्ज़ा नहीं कर पाए, कोर्ट में हार गए तो उसी जगह पर औरतें और बच्चों को बिठा दिया। इसके पीछे इनका मकसद वही है – बच्चों से हत्या करवा कर नाबालिग कार्ड खेला जाए या औरतों से चारित्रिक लाँछन लगवा दिए जाएँ। नतीजतन मंदिर की जमीन पर मंदिर का पूर्ण कब्जा अभी तक नहीं हो पाया है।
महंत महेंद्र दास द्वारा ऑपइंडिया को भेजा गया पत्र
कब्जेदारी के फिलस्तीनी मॉडल में पत्रकार और प्रशासनिक लोग शामिल
महंत महेंद्र दास ने हमें बताया कि बलरामपुर में जमीनों पर कब्ज़े के फिलिस्तीनी मॉडल में औरतों और बच्चों के पीछे कुछ पत्रकार और प्रशासनिक लोग भी खड़े हैं। हमें दिए पत्र में उन्होंने लिखा है कि नेपाल बॉर्डर पर श्रावस्ती लोकसभा क्षेत्र में अवैध कब्ज़े में जितनी भी इबादतगाहें मौजूद हैं, वो उन्हें मुक्त करवाने का अभियान चलाएँगे। उन्होंने यहाँ तक कहा कि इस कार्य के लिए भले ही कोई भी कीमत क्यों न चुकानी पड़े।
बलरामपुर पुलिस ने दिया था कोर्ट के आदेश पर कार्रवाई का भरोसा
महंत महेंद्र दास ने हमें बताया कि ऑपइंडिया की ही पिछली प्रकाशित एक खबर में बलरामपुर पुलिस ने आधिकारिक ट्वीट करके कहा था कि अवैध कब्ज़ों पर कोर्ट के आदेशों का पालन करवाया जाएगा। उन्होंने सवालिया लहजे में पूछा कि ऐसे में नेपाल सीमा से कुछ ही दूरी पर मौजूद मंदिर पर दशकों से अवैध कब्ज़े को हटाने के मामले में वो इतनी टाल मटोल क्यों कर रही है?
बलरामपुर में हनुमानगढ़ी मंदिर का प्रबंधन देखने वाले नरेश कुमार ने ऑपइंडिया को बताया कि कोर्ट में केस जीतने के बाद खुद महंत नृत्य गोपाल दास ने बलरामपुर प्रशासन से मंदिर की जमीन पर अवैध कब्ज़े को हटवाने की माँग की। नरेश कुमार सहरावत के अनुसार इस माँग पर उच्चाधिकारीयों ने अधीनस्थों को निर्देश भी दिया।
इसके बाद नरेश ने हैरानी जताते हुए कहा कि जिस पत्र पर प्रशासनिक अधिकारी 17 सितम्बर 2022 को कब्ज़ा हटाने पर कार्रवाई को लेकर दस्तखत करते हैं, उसी के 2 दिन बाद उस कब्ज़े वाली जगह पर कई औरतों और बच्चों को शाहीन बाग़ जैसे अंदाज़ में बिठा दिया जाता है।
अवैध कब्ज़े पर कार्रवाई का पत्र
नरेश कुमार ने शक जताया कि प्रशासन के ही अंदर के किसी व्यक्ति ने कार्रवाई की ये सभी सूचना बदरुद्दीन पक्ष को लीक की होगी।
‘पिछली सरकारों में हुए कब्ज़े, हम करवाएँगे कार्रवाई’
ऑपइंडिया ने बलरामपुर शहर और नेपाल सीमा पर अवैध कब्ज़ों की शिकायत के मामले में बलरामपुर शहर के भाजपा विधायक पलटूराम से बात की। उन्होंने बताया कि जो भी अवैध कब्ज़े दिखाई दे रहे हैं, वो पिछली सरकारों की तुष्टिकरण की नीतियों के चलते हुए हैं। उनके अनुसार वर्तमान सरकार संजीदगी से कार्रवाई करवा रही है।
उन्होंने हमें बताया कि वो नेपाल सीमा के हालातों की जानकारी को शासन और प्रशासन तक अपने स्तर से पहुँचाऐगे और जल्द से जल्द इसके समाधान की दिशा में आगे बढ़ेंगे। विधायक पलटू राम ने मीडिया में नेपाल सीमा से आ रही रिपोर्टों को चिंताजनक बताया।
गुजरात से आम आदमी पार्टी के एक नेता जगमाल वाला की वीडियो वायरल हो रही है। इस वीडियो में वह मंच पर खड़े होकर दारू की बातें कर रहे हैं। गुजरातियों को AAP नेता बता रहे हैं कि दारू कोई बुरी बात नहीं है। अगर शरीर में ताकत है तो इसे पी लेना चाहिए।
दारू का बखान करने वाले जगमाल वाला आम आदमी पार्टी की ओर से सोमनाथ विधानसभा सीट के प्रत्याशी बताए गए हैं। उनकी यह वीडियो बुधवार (21 सितंबर 2022) को हुई एक जनसभा की है जो 22 सितंबर तक वायरल हो गई।
वीडियो में वह गुजरातियों को कहते हैं कि दारू तो बड़े-बड़े डॉक्टर, आईएएस-आईपीएस अफसर भी पीते हैं। इनके अलावा इसका आनंद पूरी दुनिया उठाती है। सिर्फ गुजरातियों पर ही प्रतिबंध लगा दिया गया है।
वायरल क्लिप में उन्हें कहते सुना जा सकता है,
“दुनिया में 800 करोड़ लोग हैं और 196 देश हैं। 196 देशों में शराब बेचने की अनुमति है। भारत में भी 130-140 करोड़ लोग हैं। उन्हें दारू पीने की अनुमति है। ये शराबबंदी सिर्फ गुजरात में हैं जहाँ की आबादी 6.5 करोड़ हैं। इससे साबित होता है कि शराब बुरी चीज नहीं है। दिक्कत बस ये है कि शराब हमें न पीए। अगर हम शराब को पीएँ तो ये गलत नहीं है। लेकिन शराब हमको पीए तो ये गलत है। अगर आपमें ताकत है तो शराब पियो। ये बिलकुल गलत नहीं है। बड़े-बड़े डॉक्टर, आईपीएस अधिकारी, आईएएस अधिकारी शराब पीते हैं।”
जगमाल के ऐसे बयान के बाद भाजपा ने इस पर सवाल खड़े किए हैं और आम आदमी पार्टी नेता से माफी माँगने को कहा है। भाजपा की माँग है कि ऐसे गुजरात को बदनाम न करें और दारू को बढ़ावा न दें।