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‘मस्जिद-मदरसे-मजार हैं ठिकाने, बाहरी लोगों से भरे पड़े’ : भारत-नेपाल बॉर्डर के 5 Km दोनों तरफ साजिश की पट्टी – OpIndia Ground Report

हाल में कई रिपोर्टें आई हैं जो बताती हैं कि नेपाल भारत बॉर्डर पर तेजी से डेमोग्राफी में बदलाव हो रहा है। मस्जिद-मदरसों की संख्या लगातार बढ़ रही है। जमीनी हालात का जायजा लेने के लिए 20 से 27 अगस्त 2022 तक ऑपइंडिया की टीम ने सीमा से सटे इलाकों का दौरा किया। हमने जो कुछ देखा, वह सिलसिलेवार तरीके से आपको बता रहे हैं। इस कड़ी की 21वीं रिपोर्ट:

भारत नेपाल बॉर्डर पर हमें राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की सीमा जागरण मंच शाखा से जुड़े कुछ लोग मिले। हमने उनसे बॉर्डर के इस पार और उस पार के हालातों पर बात की। डेमोग्राफी बदलाव और इससे उपजी समस्याओं के विभिन्न मुद्दों पर हमने प्रान्त युवा प्रमुख विद्याभूषण और बलरामपुर जिलाध्यक्ष ओम प्रकाश से बात की।

यह रिपोर्ट एक सीरीज के तौर पर है। इस पूरी सीरीज को एक साथ पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।

विद्याभूषण और ओम प्रकाश दोनों ने सामूहिक रूप से स्वीकार किया कि नेपाल-भारत सीमा पर न सिर्फ मस्जिद, मदरसे और इबादतगाहों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है बल्कि एकतरफा मुस्लिम जनसंख्या भी तेजी से बढ़ी है।

नेपाल बॉर्डर पर अधिकतर गाँव मुस्लिम बहुल

प्रान्त युवा प्रमुख विद्याभूषण ने हमसे बात करते हुए कहा कि नेपाल बॉर्डर पर अधिकतर गाँव मुस्लिम बहुल हैं। इस लिस्ट में उन्होंने टंडवा, बालापुर, कनईडीह, रनियापुर, मोहकमपुर, चैनपुर का नाम लिया।

हवाला से आ रहे पैसे

विद्याभूषण ने बताया कि बॉर्डर इलाकों में हवाला के जरिए पैसे आ रहे हैं, जिसका एक बड़ा हिस्सा अपराध में लग रहा। उन्होंने बताया कि इससे जो हिस्सा बच जाता है, वो नल (UAE के मुहर लगी हुई) लगवाने जैसे समाजिक कार्यों में अपराधों को दबाने और छिपाने के लिए किया जा रहा है। विद्याभूषण के मुताबिक इस इलाके के लोग सऊदी ही नहीं बल्कि ईराक और ईरान में भी कमाने गए हैं।

5 KM भारत और इतने ही नेपाल के अंदर साजिश की पट्टी

भारत की सीमा से 5 किलोमीटर अंदर और इतना ही नेपाल का इलाका एक खास साजिश का शिकार हो रहा है – विद्याभूषण ने ही हमें इसके बारे में बताया। उन्होंने कहा कि इसी 10 किलोमीटर में मुस्लिम आबादी बढ़ रही है। मदरसों, मस्जिदों और मज़ारों को विद्याभूषण ने ठिकानों के तौर पर सम्बोधित किया। उन्होंने ये माना कि यहाँ के मदरसों में बाहरी लोग भी भरे पड़े हैं।

बॉर्डर पर साजिश, प्रशासन मौन

विद्याभूषण के अनुसार जब कोई बाहरी व्यक्ति यहाँ आता है, तो बाकायदा साजिश के साथ उनके ID और अन्य कागजात बनवा दिए जाते हैं। उन्होंने इसको साजिश करार देते हुए ऐसे मामलों में प्रशासन की भूमिका मौन रहने वाली बताई।

विद्याभूषण के अनुसार प्रशासन तभी जागता है, जब कोई घटना घट जाती है। उन्होंने बताया कि अगर कोई प्रशासनिक अधिकारी बॉर्डर पर सब सही और सामान्य होना बता रहा, इसका मतलब है कि वो सच नहीं बोल रहा।

देश भर के अपराधियों का शेल्टर

विद्याभूषण ने हमें बताया कि देश के किसी भी हिस्से में अपराध करने वालों को नेपाल सीमा पर अक्सर शरण मिल जाती है। उन्होंने कहा कि ऐसा इसलिए भी होता है कि विषम हालात में वो सीमा पार करके नेपाल में घुस जाते हैं। विद्याभूषण ने दावा किया कि दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े शहरों में अपराध करने वाले कई अपराधी नेपाल सीमा पर शरण लिए हुए हैं।

सरकार एक्टिव न हो इसलिए ख़ामोशी

नेपाल सीमा पर साम्प्रदायिक तनाव न के बराबर होने का कारण विद्याभूषण ने एजेंसियों को उस तरफ से दूर रखने की साजिश बताया। उन्होंने कहा कि बॉर्डर पर छिपे असामाजिक तत्व इसलिए ख़ामोशी से पड़े हैं क्योंकि वो नहीं चाहते कि उन पर किसी सुरक्षा एजेंसी की नजर जाए। विद्याभूषण ने कहा कि वो जानते हैं कि जैसे ही कोई बड़ा कांड करेंगे, वैसे ही इस तरफ सरकार की नजर चली जाएगी और उनका भांडा फूट जाएगा।

मुस्लिम बाहुल्य होने की कगार पर बलरामपुर

विद्याभूषण के अनुसार जनसंख्या के पुराने रिकॉर्ड चेक किए जा सकते हैं कि कैसे इस पूरे इलाके में मुस्लिम आबादी तेजी से बढ़ रही है। पड़ोसी जिले सिद्धार्थ नगर को विद्याभूषण ने मुस्लिम बाहुल्य बताया। इसी के साथ उन्होंने कहा कि जिला बलरामपुर भी लगभग मुस्लिम बाहुल्य होने की कगार पर हैं।

विद्याभूषण

20 वर्षों से नगर निगम चुनाव का विजेता मुस्लिम

विद्याभूषण ने हमें आगे बताया कि अगर किसी को जमीनी स्तर पर मुस्लिम आबादी बढ़ने की जानकारी लेनी हो तो वो बलरामपुर नगर निगम के चुनावों से ले सकता है। उन्होंने 20 वर्ष पहले का उदाहरण देते हुए बताया कि कभी यहाँ हिन्दू विजेता हुआ करता था लेकिन पिछले 20 वर्षों से यहाँ नगर निगम का चुनाव केवल मुस्लिम ही जीत रहा।

लव जिहाद और मानव तस्करी

विद्याभूषण ने हमें बताया कि अगर सुरक्षा और ख़ुफ़िया एजेंसियाँ ठीक से जाँच करेंगी तो बॉर्डर इलाकों से बहुत कुछ निकल कर सामने आएगा। उन्होंने कहा कि हिन्दुओं और ख़ास कर सीमा पर बसे थारू समुदाय की लड़कियों के साथ मानव तस्करी का अपराध चल रहा है।

विद्याभूषण के अनुसार तस्करी की शिकार होने वाली अधिकतर लड़कियाँ लव जिहाद से तस्करों के हाथों में फँस कर बाहरी देशों में बिक रहीं हैं। उन्होंने जानकारी दी कि इसके अलावा पशुओं को नेपाल के रास्ते बांग्लादेश तक कटाई के लिए भेजा जा रहा है।

SSB के दम पर रुके सीमापार के कई अपराध

विद्याभूषण और एक अन्य स्थानीय नागरिक ने हमें बताया कि SSB और स्थानीय पुलिस की कार्यशैली में जमीन-आसमान का अंतर है। उन्होंने कहा कि SSB की तैनाती के बाद से सीमापार के कई अपराध रुके हैं। इसी के साथ उन सभी ने SSB का अपने प्रति व्यवहार मिलनसार और पारिवारिक जैसा बताया।

अधिकतर इबादतगाहें मानकों के विपरीत

विद्याभूषण ने हमें बताया कि बॉर्डर पर बन रहीं तमाम नई इबादतगाहें प्रशासनिक अधिकारियों की नजर में हैं लेकिन वो उन पर कोई कार्रवाई नहीं करते। उनका दावा है कि अधिकतर इबादतगाहें मानकों के विपरीत हैं और उनका नक्शा आदि पास ही नहीं हुआ है। विद्याभूषण ने सरकार से अवैध निर्माणों पर बुलडोजर चलने की आशा जताई।

संकट काल के लिए साजिश हैं इबादतगाहें

विद्याभूषण ने दावा किया कि बॉर्डर पर बन रहीं नई इबादतगाहों के पीछे भविष्य की बहुत बड़ी साजिश है। उन्होंने कहा कि साजिशकर्ताओं को भविष्य में देश के अंदर किसी गृहयुद्ध की उम्मीद है। उन्होंने ये भी बताया कि रेलवे स्टेशन के पास तक बनी मज़ारों से ये साजिशकर्ता भविष्य में किसी संकट काल में यातायात के संसाधनों पर हमला कर सकते हैं, जिसमें रेलवे स्टेशन को बम से उड़ाने जैसी साजिश भी हो सकती है।

इसी के साथ उन्होंने रोडवेज बस अड्डे के पास भी ऐसे साजिशकर्ताओं को सक्रिय बताया। विद्याभूषण के मुताबिक हाइवे के पुलों के पास बने अवैध इबादतगाह भविष्य में संकट काल में आवागमन रोकने की साजिश हैं।

पिछली सरकारों में तेजी से हुआ असंतुलन

सीमा जागरण मंच के जिलाध्यक्ष ओम प्रकाश ने ऑपइंडिया से बात करते हुए कहा कि पिछली सरकारों की नीतियाँ काफी हद तक जिम्मेदार रहीं हैं सीमा के वर्तमान हालातों के लिए। उन्होंने कहा कि सीमा जागरण मंच का दायित्व देखते हुए वो प्रयास कर रहे हैं कि नेपाल सीमा पर मौजूद हिन्दू समाज को और सशक्त और सामर्थ्यवान बनाया जाए।

ओम प्रकाश ने हमें आगे बताया कि वो लोग सीमा पर रहने वाली थारू जनजाति को सेना और पुलिस में भर्ती करवाने के लिए विशेष ट्रेनिंग भी दिला रहे हैं।

ओम प्रकाश

ओम प्रकाश और विद्याभूषण ने कहा कि सरकार को नेपाल बॉर्डर पर हो रही हरकतों पर विशेष चौकसी बरतनी चाहिए। उन्होंने इतिहास के कुछ उदारहण दिए कि कैसे वहाँ पर मिर्जा दिलशाद बेग और रिज़वान ज़हीर जैसे अपराधी पनप गए थे और मंगरे सिंह जैसे हिंदूवादी नेता कत्ल कर दिए गए।

दोनों ने हालाँकि यह भी माना कि योगी सरकार के आने के बाद काफी कुछ बदला है लेकिन उन्होंने सुरक्षा के लिहाज से और अधिक सक्रियता की आशा जताई। इन दोनों के अलावे इनके आस-पास मौजूद स्थानीय लोगों ने भी कहा कि वर्तमान सरकार में चीजें बदली हैं लेकिन और सुधार की जरूरत है।

पढ़ें पहली रिपोर्ट : कभी था हिंदू बहुल गाँव, अब स्वस्तिक चिह्न वाले घर पर 786 का निशान: भारत के उस पार भी डेमोग्राफी चेंज, नेपाल में घुसते ही मस्जिद, मदरसा और इस्लाम – OpIndia Ground Report

पढ़ें दूसरी रिपोर्ट : घरों पर चाँद-तारे वाले हरे झंडे, मस्जिद-मदरसे, कारोबार में भी दखल: मुस्लिम आबादी बढ़ने के साथ ही नेपाल में कपिलवस्तु के ‘कृष्णा नगर’ पर गाढ़ा हुआ इस्लामी रंग – OpIndia Ground Report

पढ़ें तीसरी रिपोर्ट : नेपाल में लव जिहाद: बढ़ती मुस्लिम आबादी और नेपाली लड़कियों से निकाह के खेल में ‘दिल्ली कनेक्शन’, तस्कर-गिरोह भारतीय सीमा पर खतरा – OpIndia Ground Report

पढ़ें चौथी रिपोर्ट : बौद्ध आस्था के केंद्र हों या तालाब… हर जगह मजार: श्रावस्ती में घरों की छत पर लहरा रहे इस्लामी झंडे, OpIndia Ground Report

पढ़ें पाँचवीं रिपोर्ट : महाराणा प्रताप के साथ लड़ी थारू जनजाति बहुल गाँव में 3 मस्जिद, 1 मदरसा: भारत-नेपाल सीमा पर बढ़ती मुस्लिम आबादी का ये है ‘पैटर्न’ – OpIndia Ground Report

पढ़ें छठी रिपोर्ट : बौद्ध-जैन मंदिरों के बीच दरगाह बनाई, जिस मजार को पुलिस ने किया ध्वस्त… वो फिर चकमकाई: नेपाल सीमा पर बढ़ती मुस्लिम आबादी – OpIndia Ground Report

पढ़ें सातवीं रिपोर्ट : हनुमान गढ़ी की जमीन पर कब्जा, झारखंडी मंदिर सरोवर में ताजिया: नेपाल सीमा पर बढ़ती मुस्लिम आबादी, असर UP के बलरामपुर में – OpIndia Ground Report

पढ़ें आठवीं रिपोर्ट : पुरातत्व विभाग से संरक्षित जो जगह, वहाँ वक्फ की दरगाह-मजार: नेपाल सीमा पर बढ़ती मुस्लिम आबादी, मुसीबत में बौद्ध धर्मस्थल – OpIndia Ground Report

पढ़ें नौवीं रिपोर्ट : 2 मीनारों वाली मस्जिदें लोकल, 1 मीनार वाली अरबी पैसे से… लगभग हर गाँव में मदरसे: नेपाल बॉर्डर के मौलाना ने बताया इसमें कमीशन का खेल – OpIndia Ground Report

पढ़ें दसवीं रिपोर्ट : SSB बेस कैंप हो या सड़क, गाँव हो या खेत-सुनसान… हर जगह मस्जिद-मदरसे-मजार: UP के बलरामपुर से नेपाल के जरवा बॉर्डर तक OpIndia Ground Report

पढ़ें 11वीं रिपोर्ट : हिंदू बच्चों का खतना, मंदिर में शादी के बाद लव जिहाद और आबादी असंतुलन के साथ बढ़ते पॉक्सो मामले: नेपाल बॉर्डर पर बलरामपुर जिले में OpIndia Ground Report

पढ़ें 12वीं रिपोर्ट : गाँवों में अरबी-उर्दू लिखे हुए नल, UAE के नाम की मुहर: ज्यादा दाम देकर जमीनें खरीद रहे नेपाली मुस्लिम – OpIndia Ground Report

पढ़ें 13वीं रिपोर्ट : नए बने ओवरब्रिज के नीचे मज़ार-कर्बला, सड़क किनारे मस्जिद-मदरसे-दरगाह: नेपाल के बढ़नी बॉर्डर हाइवे पर ‘हरा रंग’ हावी – OpIndia Ground Report

पढ़ें 14वीं रिपोर्ट : 4 और 14 वाली नीति से एकतरफा बढ़ रही आबादी… उस गाँव में मस्जिद बनाने की कोशिश, जहाँ नहीं एक भी मुस्लिम’ : UP-नेपाल बॉर्डर से OpIndia Ground Report

पढ़ें 15वीं रिपोर्ट: फ़ारसी में ‘गरीब नवाज स्कूल’ का बोर्ड, उस पर बने चाँद-तारे… घरों-दुकानों में लहरा रहे इस्लामी झंडे, सड़क से सटी हुई मजारें: UP-नेपाल बॉर्डर से OpIndia Ground Report

पढ़ें 16वीं रिपोर्ट: ’10 km में 20 गाँव मुस्लिम बहुल, हिन्दू दब कर मनाते हैं अपने त्योहार’: नेपाल सीमा के ग्राम प्रधान ने बताया – गरीब दिखने वाले मुस्लिमों के पास भी बहुत पैसे: UP-नेपाल बॉर्डर से OpIndia Ground Report

पढ़ें 17वीं रिपोर्ट: 150 मदरसे, 200 मस्जिदें… नेपाल सीमा से 15 km के दायरे का हाल, जानिए बॉर्डर के उन गाँवों की स्थिति जो बन गए हैं मुस्लिम बहुल: UP-नेपाल बॉर्डर से OpIndia Ground Report

पढ़ें 18वीं रिपोर्ट: ‘संयुक्त अरब अमीरात एसोसिएशन’ के नल से UP-नेपाल बॉर्डर पर पानी, सिद्धार्थनगर का मुस्लिम बहुल बाजार डुमरियागंज है सप्लायर: OpIndia Ground Report

पढ़ें 19वीं रिपोर्ट: ‘नेपाल से अपराधी को पकड़ कर लाना Pak से लाने के बराबर’: सीमा पर तैनात रहे DSP ने बताया – नेपाल पुलिस नहीं दिखाती हमारे जैसी सक्रियता – OpIndia Ground Report

पढ़ें 20वीं रिपोर्ट: रामजन्मभूमि ट्रस्ट के अध्यक्ष का मंदिर लैंड जिहाद का शिकार: बॉर्डर UP-नेपाल का… लेकिन जमीन कब्जा के लिए फिलिस्तीनी मॉडल – OpIndia Ground Report

ऑस्कर जीत चुके हॉलीवुड हीरो की कॉपी कर रहा था पाकिस्तानी एक्टर, हो गई किडनी खराब: 10 दिन अस्पताल में भर्ती

पाकिस्तानी एक्टर फवाद खान (Fawad Khan) अपनी आगामी फिल्म ‘द लीजेंड ऑफ मौला जट्ट’ के प्रमोशन में जुटे हुए हैं। फवाद ने हाल ही में एक इंटरव्यू में खुलासा किया है कि वह क्रिश्चियन बेल (Christian Bale) और आमिर खान (Aamir Khan) को कॉपी कर बॉडी ट्रांसफॉर्मेशन (शारीरिक बदलाव) करना चाह रहे थे। हालाँकि, ऐसा करना उन्हें बहुत भारी पड़ा और उन्हें हॉस्पिटल तक में भर्ती होना पड़ा।

समथिंग हॉत (Something Haute) को दिए एक इंटरव्यू में फवाद ने खुलासा किया कि बॉडी ट्रांसफॉर्मेशन ने उन्हें उनकी आगामी फ़िल्म ‘द लीजेंड ऑफ मौला जट्ट’ में काफी मदद की। लेकिन, अब वह दोबारा कभी भी इस बारे में नहीं सोचेंगे। उन्होंने कहा, “मैंने अपने साथ जो किया वह सही नहीं था। अब मैं कभी भी ऐसा नहीं करूँगा। मैंने कुछ ऐसी चीजें कीं जिनका मुझ पर बुरा प्रभाव पड़ा।”

उन्होंने यह भी कहा, “लोगों को पता होना चाहिए जब कोई भी बॉडी ट्रांसफॉर्मेशन करने का प्रयास करता है तब इसके साइड इफेक्ट्स होते हैं। मेरे साथ भी ऐसा ही हुआ। मेरी किडनी ने काम करना बंद कर दिया था। जिसके बाद मुझे 10 दिन के लिए हॉस्पिटल में भर्ती होना पड़ा।”

फवाद ने यह भी बताया है कि उन्हें हॉस्पिटल से जल्दी ही छुट्टी मिल गई थी। लेकिन, पूरी तरह ठीक होने में उन्हें 3 महीने लग गए थे। उन्होंने यह भी कहा, “मुझे डायबिटीज था इसलिए वजन बढ़ाने की मेरी प्लानिंग ने मुझे बुरी तरह से बीमार कर दिया। फिल्म से पहले मेरा वजन लगभग 73-75 किलोग्राम था लेकिन फिर मेरा वजन 100 किलोग्राम हो गया था।”

फवाद का मानना है कि जो कुछ भी हुआ उसके पीछे उनकी सोच थी। वह क्रिश्चियन बेल और आमिर खान की नकल करना चाहते थे। जिस तरह दोनों स्टार्स अपनी फिल्म के लिए बॉडी ट्रांसफॉर्मेशन करते हैं वैसा ही फवाद भी करना चाह रहे थे। लेकिन, उनका यह सोचना उन पर भारी पड़ गया।

उन्होंने आगे कहा, “मुझे कम चलने और टेंशन फ्री रहने के लिए कहा गया था। जिस तरह से मैंने किया वह सही तरीका नहीं था। चूँकि मेरे पास टाइम बहुत कम था इसलिए जो कुछ भी हुआ परिस्थितियों के कारण हुआ। मैं क्रिश्चियन बेल या आमिर खान नहीं हूँ। लेकिन मैंने कोशिश की है कि उन्होंने जैसा किया वैसा मैं भी करूँ। जैसा मैंने किया है इस तरह किसी को भी नहीं करना चाहिए।”

गौरतलब है कि, ब्रिटिश एक्टर क्रिश्चियन बेल ने अपनी फिल्म ‘वाइस’ में डिक चेनी का रोल निभाने के लिए करीब 18 किलो (40 पाउंड) वजन बढ़ाया था। यही नहीं, वह अपने रोल के लिए मेकअप रूम में घंटों वयस्त रहते थे। इस फिल्म में उनकी बेहतरीन एक्टिंग के लिए उन्हें ऑस्कर अवार्ड दिया गया था। वहीं, आमिर खान ने ‘दंगल’ के लिए 30 किलोग्राम वजन बढ़ाया था।

भ्रष्टाचार के खिलाफ कॉन्ग्रेस ने चलाया अभियान… फोटो ‘चोरी’ कर खुद ही कर दिया भ्रष्टाचार: हीरो ने कहा – ‘करूँगा कानूनी कार्रवाई’

एक्टर अखिल अय्यर (Akhil Iyer) ने कॉन्ग्रेस पार्टी के ‘राजनीतिक स्वार्थ’ के लिए उनकी फोटो का उपयोग किए जाने पर नाराजगी जताई है। साथ ही, उन्होंने कहा है कि वह कॉन्ग्रेस के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेंगे। दरअसल, कॉन्ग्रेस कर्नाटक में भाजपा सरकार के खिलाफ ‘40% सरकार’ अभियान चला रही है। इसी अभियान के लिए जारी पोस्टर में कॉन्ग्रेस ने अखिल अय्यर की फोटो का उपयोग किया है।

अखिल अय्यर ने कॉन्ग्रेस द्वारा उनकी फोटो का उपयोग करने पर विरोध जताते हुए ट्वीट किया, “मैं यह देखकर हैरान हूँ कि मेरे चेहरे का उपयोग गैर-कानूनी तरीके और मेरी अनुमति के बिना ‘40% सरकार’ के लिए किया जा रहा है। कॉन्ग्रेस के इस अभियान से मेरा कोई लेना-देना नहीं है। मैं इसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करूंगा।”

इसके साथ ही उन्होंने, राहुल गाँधी, सिद्धारमैया और कर्नाटक कॉन्ग्रेस के ट्विटर हैंडल को टैग करते हुए इस पोस्टर को देखने के लिए कहा है।

कॉन्ग्रेस द्वारा जारी किए गए अखिल अय्यर की तस्वीर वाले इस पोस्टर में लिखा है, “40% सरकार की लालच ने 54,000 से अधिक युवाओं के करियर को खराब कर दिया है।” इस पोस्टर में ‘40% सरकार’ अभियान से जुड़ने और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने को भी कहा गया है।

अखिल अय्यर की जिस तस्वीर को कॉन्ग्रेस ने उनकी अनुमति के बिना अपने पोस्टर में उपयोग किया है, उस तस्वीर को अखिल के फेसबुक पेज से लिया गया है। अखिल ने इस फोटो को जुलाई 2014 में अपलोड किया था। चूँकि, यह फोटो अखिल अय्यर की है, इसलिए किसी भी राजनीतिक कार्य या प्रचार में उपयोग करने से पहले उनसे अनुमति लेनी चाहिए थी। कॉन्ग्रेस तो लेकिन कॉन्ग्रेस है, अनुमति लेना उचित नहीं समझा।

बता दें कि कर्नाटक कॉन्ग्रेस ने इस महीने की शुरुआत में बसवराज बोम्मई सरकार के खिलाफ राज्य में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए ‘40% सरकार’ कैम्पेन शुरू किया था। इस दौरान, कॉन्ग्रेस नेता सिद्धारमैया ने राज्य सरकार को “लुटेरों और घोटालेबाजों” से भरी ‘40% सरकार’ करार दिया था।

इस कैम्पेन के लिए कॉन्ग्रेस पार्टी की ओर से एक वेबसाइट 40percentsarkara.com भी लॉन्च की गई है। साथ ही, राज्य के लोगों को भ्रष्टाचार के खिलाफ शिकायत दर्ज करने के लिए कहा है। इसके अलावा, उन्होंने भ्रष्टाचार के बारे में सूचित करने के लिए फोन नंबर 8447704040 भी लॉन्च किया है।

गौरतलब है कि कॉन्ग्रेस सरकार का ‘40% सरकार’ अभियान विवादों से घिरा रहा है। इससे पहले कॉन्ग्रेस ने अपने पोस्टर में मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई की फोटो के साथ ‘PayCM’ लिखे हुए पोस्टर चिपकाए थे। इस पोस्टर में सीएम बोम्मई की फोटो QR कोड (क्यूआर) के रूप में दिखाई गई। इस क्यूआर कोड को स्कैन करने के बाद यूजर 40percentsarkara.com वेबसाइट पर पहुँच जाता है। पोस्टर में PayCM शब्द ऑनलाइन पेमेंट वॉलेट Paytm के लोगो (Logo) की तरह लिखा गया है। पोस्टर सामने आने के बाद कर्नाटक के सीएम बसवराज बोम्मई ने इसे लेकर जाँच के आदेश भी दिए हैं।

बेंगलुरु नगर निगम ने इन पोस्टरों के संबंध में बेंगलुरु पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। इसके बाद अज्ञात लोगों के खिलाफ पोस्टर लगाने के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई है। PayCM पोस्टर्स को लेकर मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने कहा है कि कॉन्ग्रेस का उद्देश्य उनकी और राज्य की छवि खराब करना है।

लड़की का छीनते रहे दुपट्टा, चिपक कर Video बनवाई: मासूक, वसीक, जिकारिया पर केस दर्ज – UP पुलिस ने एक को दबोचा

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज के गंगापार इलाके से एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। वीडियो में कुछ बदमाशों को एक युवती के साथ जबरन छेड़छाड़ करते देखा गया। वीडियो वायरल होते ही क्षेत्र के एसएसपी ने फौरन इस वीडियो की जाँच के आदेश दिए। पड़ताल के बाद पुलिस ने आरोपितों का पता लगाया।

कथिततौर पर, छेड़छाड़ का यह वीडियो 2 दिन पहले सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। वीडियो में एक युवती अपने होने वाले पति के साथ कहीं जा रही थीं, लेकिन बीच में कुछ बदमाशों ने उन्हें रोक लिया और युवती के साथ अश्लील हरकतें करने लगे।

वीडियो में दिखाई दे रहा है कि सुनसान जगह पर युवती से जब ये बदमाश छेड़छाड़ कर रहे थे, तब उसका मंगेतर बदमाशों के पैरों में गिरकर अपनी होने वाली पत्नी के लिए भीख माँग रहा है। फिर भी मनचले नहीं माने। युवती भी अपने आप को छुड़ाने के लिए भीख माँगती दिखाई दे रही हैं। तभी एक बदमाश युवती के दुपट्टे को छीनने लगता है।

युवती की हो चुकी है सगाई

बताया जा रहा है कि युवती मऊआइमा थाना क्षेत्र की रहने वाली है और उसकी सगाई सोरांव के रहने वाले युवक के साथ हुई है। इंटरनेट पर वायरल हो रहे वीडियो में भी युवती बदमाशों से कहती हैं, “हमारी सगाई हो चुकी है, चाहे घर में पता कर लो…” लेकिन ये सुनने के बाद भी मनचलों युवती से बदतमीजी करते रहे।

वसीक, जिकरिया और मासूक हैं आरोपित

पुलिस ने इस मामले में महिला से अभद्रता करने का केस दर्ज किया है। वहीं एसपी गंगापार अभिषेक अग्रवाल ने बताया कि केस दर्ज करने के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए अभियुक्तों की पहचान कर ली हैं। आरोपितों के नाम वसीक, जिकरिया और मासूक हैं।

पुलिस का मानना है कि इस मामले में एक आरोपित शायद मुंबई भाग गया है। उसके अलावा 1 अन्य आरोपित अभी फरार है। 1 को पकड़ लिया गया है उसका नाम मासूक है। पुलिस मामले की जाँच में सक्रिय है और लगातार छानबीन कर रही हैं। एसपी गंगापार अभिषेक अग्रवाल ने बताया कि किसी भी सूरत में आरोपितों को बख्शा नहीं जाएगा और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई भी की जाएगी।

कॉन्ग्रेस को चाहिए हिंदू वोट… इसलिए राहुल गाँधी की रैली मुस्लिम एरिया से नहीं गुजरी, दिख जाते टोपी वाले: पत्रकार का खुलासा, वीडियो वायरल

गुजरात में 2022 के अंत में विधानसभा का चुनाव होना वाला है। इससे पहले पत्रकार मौसमी सिंह का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस वीडियो में कॉन्ग्रेस पार्टी के सॉफ्ट हिंदुत्व की रणनीति का खुलासा किया गया है।

वीडियो में इंडिया टुडे की पत्रकार को यह कहते हुए सुना जा सकता है, “मुझे याद है कि एक बार राहुल गाँधी का गुजरात में रोड शो था और उस समय, कॉन्ग्रेस खुद को एक ‘सॉफ्ट हिंदुत्व’ पार्टी के रूप में पेश करने की कोशिश कर रही थी।”

मौसमी सिंह ने इसके बाद जो कहा, वो मजेदार है, कॉन्ग्रेस के असल चरित्र को दर्शाता है:

“उनके (राहुल गाँधी के) रोड शो को डायवर्ट किया गया, उसे मुस्लिम बहुल इलाके से नहीं गुजारा गया। क्योंकि यह पहले से ही तय किया गया था कि राहुल गाँधी का अभी हिंदुत्व वाला प्रोग्राम चल रहा है, ऐसे में मुस्लिम बहुल क्षेत्र से जाएँगे तो टोपी वाले नजर आ जाएँगे।”

मौसमी सिंह ने इस साल 27 अगस्त को लल्लनटॉप के एंकर सौरव द्विवेदी के साथ बातचीत के दौरान कहा था कि यह पहले से तय होता है कि किसे इंटरव्यू देना है और किसे नहीं या फिर कौन सा पत्रकार इंटरव्यू लेगा। उनके मुताबिक, कॉन्ग्रेस हिंदुत्व पर विशेष ध्यान और अपनी मुस्लिम तुष्टिकरण पहचान से छुटकारा पाना चाहती थी।

इंडिया टुडे की पत्रकार के अनुसार, मुस्लिम-बहुल क्षेत्रों में जानबूझकर न जाने की रणनीति राहुल गाँधी की सुरक्षा टीम का हिस्सा रहे केबी बायजू ने बनाई थी। कथित तौर पर, बायजू पहले स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (SPG) का हिस्सा थे, जो राहुल गाँधी के महासचिव बनने के बाद उनकी टीम में शामिल हो गए।

बायजू के पास कॉन्ग्रेस में कोई औपचारिक पद नहीं है, लेकिन पार्टी में उनका कद लगातार बढ़ता गया। पार्टी के पूर्व नेता गुलाम नबी आजाद ने अपने इस्तीफे में उनका जिक्र तक किया था। आजाद ने कहा था कि अब सोनिया गाँधी नाममात्र की नेता रह गई हैं, क्योंकि फैसले राहुल गाँधी के ‘सिक्योरिटी गार्ड और निजी सहायक’ लेते हैं।

राहुल गाँधी और उनका मंदिर जाना

नवंबर 2017 में, कॉन्ग्रेस पार्टी ने एक घोषणा की थी। क्या? यही कि राहुल गाँधी ‘जनेऊ धारी’ हिंदू हैं।

आउटलुक की रिपोर्ट का स्क्रीनशॉट

कॉन्ग्रेस के इस दावे पर सोशल मीडिया यूजर्स ने सवाल उठाए थे। तब लोगों ने कॉन्ग्रेस के वंशज के संभावित कैथोलिक मूल की ओर इशारा किया था। एक साल बाद राहुल गाँधी ने पुष्कर में एक पुजारी से कहा था कि वह ‘कश्मीरी ब्राह्मण’ हैं और उनका गोत्र ‘दत्तात्रेय’ है।

ET की रिपोर्ट का Screengrab

पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इसको लेकर कॉन्ग्रेस पर निशाना साधा था। उन्होंने कहा था, “बीजेपी को हमेशा हिंदुत्व समर्थक पार्टी के रूप में देखा गया है और अगर कोई हमारी नकल करना चाहता है, तो मुझे कोई शिकायत नहीं है।”

बता दें कि यूपी और लोकसभा चुनावों के दौरान खुद को ब्राह्मण बताकर राहुल गाँधी बाह्मण वोट को साधना चाहते थे। आजादी के बाद से एक दशक पहले तक ब्राह्मणों और दलितों के समीकरण पर सत्ता-सुख भोगने के बावजूद कॉन्ग्रेस को इन चुनावों में कुछ खास लाभ नहीं हुआ।

अब, कर्नाटक में विधानसभा चुनाव देखकर राहुल गाँधी ब्राह्मण से लिंगायत में दीक्षित हो गए हैं। वे इस समुदाय के संस्थापक बसवन्ना को फॉलो कर रहे हैं और उनके बारे में पढ़ रहे हैं, जिन्होंने ब्राह्मणों का विरोध किया था।

खूंखार पिटबुल ने अब गाय के जबड़े पर मारा झपट्टा, लहूलुहान करके छोड़ा: जो मालिक सैर कराने लाया, उससे भी नहीं हुआ कंट्रोल; Video वायरल

बीते दिनों कई जगहों से ऐसी घटनाएँ सामने आई थीं जब पिटबुल डॉग ने कभी अपने मालिक की माँ तो कभी पार्क में खेलते बच्चे पर हमला किया। कई जगह लोग सिर्फ घायल हुए तो कहीं इन हमलों के चलते मौत भी हो गई। अब इसी क्रम में कानपुर के सरसैया घाट से एक वीडियो और सामने आई है। इस वीडियो में खूंखार पिटबुल डॉग एक गाय पर हमला कर रहा है।

वीडियो में आप देख सकते हैं कि कैसे एक पिटबुल डॉग ने गाय पर जानलेवा हमला किया। डॉग ने अपने मुँह से गाय का जबड़ा दबोच लिया, जिससे वह दर्द से कराह गई। उसने खुद को कुत्ते से बचाने की काफी कोशिश की, लेकिन पिटबुल ने गाय का जबड़ा नहीं छोड़ा। इसके बाद घाट के किनारे मौजूद लोगों ने मिलकर गाय को डॉग के चंगुल छुड़ाया। हालाँकि, इस दौरान गाय लहूलुहान हो गई।

हैरानी इस बात की है कि कुत्ते का मालिक जो उसे घाट किनारे सैर कराने लाया था, वो खुद भी कुत्ते को कंट्रोल नहीं कर पाया। गाय को छुड़ाने में कुत्ते के मालिक को काफी मशक्कत करनी पड़ी। अंत में कुत्ते को लोहे की रॉड से पीटा गया, जिसके बाद उसने गाय को छोड़ा।

पिटबुल के हमले से जुड़ा यह पहला मामला नहीं है, जब किसी पालतू कुत्ते ने हमला किया हो। इस महीने की शुरुआत में (3 सितंबर 2022) गाजियाबाद से पालतू कुत्तों के हमले के दो मामले सामने आए थे। पहला मामला पार्क का था। यहाँ एक लड़की अपने पालतू कुत्ते को घुमाने लाई थी, लेकिन वह उसके हाथ से अपना पट्टा छुड़ाकर वहाँ खेल रहे बच्चे के पास गया और उन्हें काट लिया। कुत्ते के इस हमले में 10 साल का मासूम बच्चा घायल हो गया था। उसके शरीर पर 150 टाँके लगे थे।

दूसरा मामला गाजियाबाद की एक सोसाइटी का है। सोसाइटी की लिफ्ट में एक पालतू कुत्ते ने एक बच्चे को काट लिया था। इस घटना का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया था, जिसमें देखा गया था कि कुत्ते के काटने के बाद पीड़ित बच्चा काफी देर तक लिफ्ट में ही रोता रहा, लेकिन कुत्ते की मालकिन चुपचाप वहीं खड़ी देखती रही।

इस घटना को देखने के बाद गाज‍ियाबाद नगर निगम ने पालतू कुत्‍तों को ल‍िफ्ट में लाने- ले जाने को लेकर सख्‍त आदेश जारी क‍िए थे। साथ ही कुत्ते की मालकिन पूनम चंदोक पर 5 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया था। लखनऊ नगर निगम भी अब एक घर में दो से ज्‍यादा पालतू कुत्ते पालने पर रोक लगाने की योजना बना रहा है। इसके साथ ही निगम पालतू कुत्तों का लाइसेंस शुल्क भी बढ़ाने की तैयारी है। 

बता दें कि इन दोनों घटनाओं से पहले इस साल जुलाई में लखनऊ से ऐसी ही घटना सामने आई थी। लखनऊ में एक जिम ट्रेनर के पालतू पिटबुल कुत्ते ने उसकी माँ को नोच कर मार डाला था।

‘PFI को बैन कर दो, ये ISIS के लिए आतंकी भर्ती करता है ‘ : NIA की ताबड़तोड़ कार्रवाई का मुस्लिम संगठनों ने किया समर्थन, PM मोदी को पत्र भेज उठाई माँग

पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया के खिलाफ गुरुवार (22 सितंबर 2022) को हुई ताबड़तोड़ कार्रवाई का तमाम मुस्लिम संगठनों ने भी समर्थन किया है। इन संगठनों में सूफी खानकाह एसोसिएशन व ऑल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज भी शामिल हैं। सूफी खानकाह एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष कौसर हसन मजीदी ने तो पीएम मोदी को पत्र लिखकर PFI को बैन करने की माँग की है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, सूफी खानकाह के राष्ट्रीय अध्यक्ष कौसर हसन मजीदी के पत्र में पीएम मोदी से कहा गया कि पीएफआई देश विरोधी गतिविधियों में संलिप्त है इसलिए उसे बैन कर देना चाहिए। उन्होंने, आरोप लगाते हुए कहा है पीएफआई देश के नौजवानों को भटका कर आतंकी बना रहा है और पिछले दो सालों से देश के खिलाफ युद्ध लड़ने के लिए ISIS (आईएसआईएस) के लिए लड़ाकों की भर्ती कर रहा है।

कौसर हसन मजीदी ने यह भी कहा कि PFI (पीएफआई) की विचारधारा देशहित में नहीं है। यह लगातार देश में जहर घोलने का काम कर रहा है। जिस संगठन की विचारधारा देश के खिलाफ हो उसे बैन कर देना ही अच्छा है। उन्होंने यह भी कहा, बैन करना पुरानी माँग रही है लेकिन केवल बैन करने से कुछ नहीं होगा बल्कि ऐसी विचारधारा के खिलाफ कुछ ठोस कदम उठाए जाने चाहिए। जब तक ऐसी विचारधारा के खिलाफ ठोस कदम नहीं उठाए जाएँगे तब तक ऐसे संगठन सामने आते रहेंगे।

वहीं, ऑल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष परवेज हनीफ ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा, “भारत सरकार की राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी ने पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) की संदिग्ध गतिविधियों के आधार पर ही उसके खिलाफ मामला दर्ज किया है और इसके कई कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया है। ऑल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज छापा मारने के सरकार के फैसले से सहमत है। यह मानते हुए कि यह देश के सर्वोत्तम हित में है। हमारा संगठन भारतीय संविधान का पूर्ण समर्थन करता है।”

प्रेस विज्ञप्ति में यह भी कहा है “पीएफआई खुद को इस्लाम के रक्षक के रूप में पेश करके देश को गुमराह करने की कोशिश कर रहा है। हमने उसकी नीतियों का बार-बार विरोध किया है और उस पर प्रतिबंध लगाने का अनुरोध किया है।”

गौरतलब है कट्टरपंथी इस्लामी संगठन पीएफआई पर टेरर फंडिंग, आतंकियों को ट्रेंड करने, दंगा भड़काने समेत कई प्रकार की देश विरोधी गतिविधियों में संलिप्त होने का आरोप लगता रहा है। इसी सिलसिले में एनआईए और ईडी ने 93 जगहों पर छापेमारी करते हुए पीएफआई के 106 सक्रिय कार्यकर्ताओं व नेताओं को गिरफ्तार किया है। इससे पहले रविवार (18 सितंबर 2022) को भी एनआईए ने पीएफआई के 23 ठिकानों में छापेमारी करते हुए 4 लोगों को गिरफ्तार किया था।

ऐसी आशंका जताई जा रही है कि गत रविवार व उससे पहले एनआईए द्वारा गिरफ्तार किए गए पीएफआई के नेताओं से पूछताछ में मिली जानकारी के आधार पर देश भर में एक साथ छापेमारी की है। इस छापेमारी को जाँच एजेंसियों के लिए बड़ी सफलता कहा जा रहा है।

शाकाहारी डॉक्टरों को धोखे से पिलाया नॉन-वेज सूप, सच खुलने पर हंगामा: मोहम्मद आजम पर गंभीर आरोप, होटल ने माफी माँगी

यूपी के बरेली में स्वर्ण टावर होटल के भीतर खाना खाने गए शाकाहारी डॉक्टरों को धोखे से नॉनवेज सूप पिलाने का मामला सामने आया है। डॉक्टरों ने इस पूरी लापरवाही के लिए होटल में फूड सर्व देख रहे मोहम्मद आजम को जिम्मेदार ठहराया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार कुछ डॉक्टर्स इस होटल में सेलिब्रेशन करने आए थे, लेकिन खाने के बाद जब सूप मँगवाया गया तो कुछ शाकाहारी डॉक्टरों को भी नॉनवेज सूप परोसा गया। सूप पी लेने के बाद डॉक्टरों को इस बात का पता चला, जिसके बाद तमाम डॉक्टर्स ने वहाँ हंगामा किया और घटना का एक वीडियो भी बनाकर उसे वायरल कर दिया।

इस वीडियो को इंडो-एशियन न्यूज़ सर्विस के सहायक संपादक अतुल कृष्ण ने अपने ट्विटर हैंडल से शेयर किया। उन्होंने लिखा, “बरेली के स्वर्ण टॉवर होटल में डॉक्टर फैमिली को वेजिटेबल की जगह नॉनवेज सूप पिलाया। इसका पता चलने पर हंगामा। फूड सर्व देख रहे मोहम्मद आजम पर गंभीर आरोप हैं। होटल प्रबंधन ने माफी माँगी।”

वीडियो में डॉक्टर्स होटल के लोगों से सवाल करते दिखाई दे रहे हैं। इनमें से वीडियो बना रहे एक व्यक्ति ने बताया कि यहाँ पर एक सूप रखा गया और उसको लेकर यह नहीं बताया गया कि ये एक नॉनवेज सूप है। जो शाकाहारी हैं, उन्हें भी वेजिटेरियन सूप बताकर इसे परोसा गया। सबने उसको पी भी लिया।

वीडियो में दिख रहे व्यक्ति ने कहा कि सूप पीने के बाद पता चलता है कि ये सूप नॉनवेज है। उन्होंने आगे कहा कि क्या आप सोच सकते हैं? जो लोग 40-50 सालों से कभी भी नोनवेज टेस्ट तक नहीं किया है, वो लोग भी अब ये नॉनवेज सूप पी लिए हैं। उन्होंने बताया कि यहाँ हर जगह पर टैग है वेज और नॉनवेज का, लेकिन सिर्फ सूप पर नहीं है।

गौरतलब है कि डॉक्टर्स ने अभी तक इस मामले में कोई FIR दर्ज नहीं करवाई है। डॉक्टरों का यह भी कहना है कि इस घटना के लिए जिम्मेदार लोगों को सबक सिखाया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटना दोबारा किसी होटल या रेस्टोरेंट में न हो। डॉक्टरों ने पूछा कि किसी के धर्म या आस्था से इस तरह खिलवाड़ कैसे बर्दाश्त किया जा सकता है?

बताया जा रहा है कि इस घटना के बाद कई डॉक्टर्स तो शर्मिंदगी के कारण खुलकर सामने भी नहीं आ पा रहे हैं कि उन्होंने गलती से नॉनवेज सूप पी लिया है। डॉक्टरों ने कहा कि सिर्फ माफी माँग लेने से बात खत्म नहीं हो जाती। बता दें स्वर्ण टॉवर होटल बरेली का एक मशहूर होटल है।

‘जिस जमीन पर हों मजहबी काम, उन्हें वक्फ के नाम कर दो’ : योगी सरकार ने रद्द किया कॉन्ग्रेस का 33 साल पुराना आदेश, संपत्तियों के सर्वे का दिया आदेश

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने वक्फ बोर्ड से जुड़े राजस्व विभाग के 33 साल पुराने (7 अप्रैल 1989 के) आदेश को रद्द कर दिया। इस आदेश के साथ ही, सरकार ने वक्फ बोर्ड की संपत्तियों का सर्वे कर एक महीने के अंदर रिकॉर्ड मेंटेन (राजस्व अभिलेखों में दर्ज) करने का भी आदेश दिया।

दरअसल, अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने तत्कलीन सरकार द्वारा साल 1989 में जारी किए गए आदेश पर आपत्ति दर्ज करते हुए इसे निरस्त करने का एक प्रतिवेदन भेजा था। इस प्रतिवेदन को स्वीकार करते हुए प्रदेश सरकार ने एक नया आदेश जारी किया है।

उत्तर प्रदेश सरकार ने अपने नए आदेश में कहा है कि 7 अप्रैल 1989 से लेकर अब तक वक्फ बोर्ड की जो बंजर, ऊसर या अन्य जमीन जिनका रिकॉर्ड नहीं दर्ज है उनकी जानकारी जुटाई जाएगी। साथ ही, उत्तर प्रदेश वक्फ अधिनियम 1960 को लागू करते हुए वक्फ बोर्ड की सभी संपत्तियों को रजिस्टर्ड किया जाएगा।

वास्तव में, सरकार यह जानना चाहती है कि वक्फ संपत्तियों के रिकॉर्ड में कब्रिस्तान, मस्जिद, ईदगाह जैसी संपत्तियाँ सही स्थिति में दर्ज हैं या नहीं।

कॉन्ग्रेस सरकार का आदेश

उत्तर प्रदेश की तत्कलीन कॉन्ग्रेस सरकार ने 7 अप्रैल 1989 को आदेश जारी कर कहा था कि यदि राज्य में सामान्य संपत्ति बंजर, भीटा, ऊसर आदि जमीन का इस्तेमाल वक्फ (मस्जिद, कब्रिस्तान, ईदगाह इत्यादि) के रूप में किया जा रहा हो तो उसे वक्फ संपत्ति के रूप में ही दर्ज कर दिया जाए। इसके बाद, उसका सीमांकन किया जाए।

कॉन्ग्रेस सरकार के इस आदेश के चलते ही उत्तर प्रदेश की लाखों हेक्टेयर बंजर, भीटा, ऊसर जमीन वक्फ संपत्ति के रूप में दर्ज की गई थी। यानी कि कॉन्ग्रेस सरकार के आदेश ने करोड़ों रुपए की सरकारी जमीन को सीधे वक्फ बोर्ड के नाम कर दिया गया था।

आदेश के बाद क्या आई दिक्कत

गौरतलब है कि वक्फ बोर्ड देश का तीसरा सबसे बड़ा जमीन का मालिक है। उत्तर प्रदेश समेत देश के हर राज्य में हजारों एकड़ जमीन समेत करोड़ों की संपत्तियाँ वक्फ बोर्ड के कब्जे में हैं। इनमें से कई ऐसी संपत्तियाँ भी हैं जिनमें गैर कानूनी तरीके से कब्जा किया गया है।

यही नहीं, ऐसी भी शिकायतें सामने आई हैं कि कॉन्ग्रेस सरकार के 33 साल पुराने इस आदेश के चलते पहले सरकारी जमीनों को वक्फ बोर्ड के नाम पर दर्ज करवाया गया। इसके बाद, इन जमीनों को बेचकर आवासीय कॉलोनी तक विकसित कर दीं गईं।

1989 से लेकर अब तक की सभी वक्फ संपत्तियों का सर्वे

अब चूंकि, उत्तर प्रदेश में साल 1989 से लेकर अब तक की सभी वक्फ संपत्तियों का सर्वे किया जाना है। ऐसे में, इस बात की उम्मीद जताई जा रही है कि यदि इस सर्वे में किसी जमीन पर गैर कानूनी कब्जा या फिर वक्फ बोर्ड के नाम पर रजिस्टर कराने के बाद जमीन को बेचने की बात सामने आती है तो फिर उस पर योगी सरकार कार्रवाई कर सकती है।

राज्य सरकार के इस फैसले पर अल्पसंख्यक कल्याण राज्य मंत्री दानिश आजाद अंसारी ने कहा है कि यह एक सामान्य विभागीय प्रक्रिया है। इस सर्वे का अन्य वक्फ संपत्तियों से कोई लेना-देना नहीं है।

‘हिंदुओं, तुम्हारे टुकड़े-टुकड़े कर देंगे’ : UK के जिस पत्रकार ने खोली ‘लेस्टर के कट्टरपंथियों’ की सच्चाई, ट्विटर ने उसके ट्वीट डिलीट किए

इंग्लैंड के लेस्टर (Leicester) शहर में इस्लामी कट्टरपंथियों द्वारा हिंदुओं और उनके मंदिरों पर किए गए हमले मामले में अब तक कुल 50 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। एक हफ्ते पहले शुक्रवार (16 सितंबर 2022) को कट्टरपंथियों ने अल्लाह-हू-अकबर का नारा लगाते हुए हिंदुओ पर हमले की शुरुआत की थी।

कट्टरपंथियों की भीड़ इतनी बेकाबू थी कि वो लाठी, डंडों, काँच की बोतल जैसी चीजों से हमला कर रहे थे। संपत्तियों को पूरा नष्ट किया जा रहा था। इन्हीं हमलों की कुछ वीडियोज लंदन के एक पत्रकार वसीक अपने ट्विटर हैंडल पर शेयर किए थे। इसमें उन्होंने हिंदुओं के खिलाफ जहर उगलने वालों का पर्दाफाश किया था। लोग इसे देख लेस्टर की जमीनी हकीकत जान पा रहे थे, लेकिन ट्विटर ने इन वीडियोज को डिलीट कर दिया।

पत्रकार वसीक वसीक (ट्विटर हैंडल @WasiqUK) के ट्विटर पर ऐसे तमाम वीडियोज थे जो कट्टरपंथी हमलों की पुष्टि कर रहे थे। उनसे पता चल रहा था कि कैसे इस्लामवादियों द्वारा हिंदुओं के खिलाफ जहर उगला गया, भड़काऊ स्पीच दी गई और हिंसा के लिए लोगों को उकसाया गया। वसीक की पोस्ट की सहायता से स्थानीय पुलिस आरोपितों को पकड़ने की कोशिश कर रही थी, लेकिन तभी ट्विटर ने अपनी कार्रवाई की।

गुरुवार (22 सितंबर 2022) को वसीक ने हिंदुओं के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करने वाला एक और वीडियो साझा किया, जिसमें एक व्यक्ति कह रहा था, “हर शाकाहारी, शाकाहारी हिंदू के लिए। तुम इस्लाम की एकता नहीं जानते। हम तुम्हें तोड़कर तुम्हारे टुकड़े-टुकड़े कर देंगे।”

फोटो साभार: वसीक का ट्विटर

देख सकते है कि ये ट्वीट केवल हिंदुओं के खिलाफ हिंसा भड़काने वालों, नफरत फैलाने वालों और जहर उगलने वालों को बेनकाब कर रहा है। लेकिन ट्विटर ने इसे अपने सामुदायिक दिशानिर्देशों का उल्लंघन बताया और वीडियो को हटा दिया। संभव है कि इनका ट्विटर को लॉक भी किया गया हो, लेकिन ऑपइंडिया इसकी पुष्टि नहीं करता है।

ट्विटर की ऐसे एक्शन को जानने के बाद लोग हैरान हैं कि ऐसी वीडियोज जिससे पुलिस हिंसा के लिए जिम्मेदार लोगों का पता लगा रही थी उसे ट्वीट ने डिलीट कैसे और क्यों कर दिया।

भारतीय उच्चायोग ने की कड़ी कार्रवाई की माँग

लंदन में भारतीय उच्चायोग (Indian High Commission in London) ने भी 19 सितंबर 2022 को लेस्टर में हिंदुओं खिलाफ हुई हिंसा की कड़ी निंदा की थी। उन्होंने अपने बयान में हिंदुओं और मन्दिरों में तोड़फोड़ की ओर भी इशारा किया था। इसके साथ ही यूके के अधिकारियों से हमलों में शामिल कट्टरपंथियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की थी।

लेस्टर में हिंदू विरोधी हिंसा

बता दें कि इंग्लैंड के लेस्टर (Leicester) में इस्लामी कट्टरपंथियों द्वारा हिंदू लोगों पर हमला करने के मामले में एडम यूसुफ (Adam Yusuf) नाम के शख्स को एक साल की सजा सुनाई गई है। 18 सितंबर 2022 को लेस्टर में हिंदू लोगों पर हमले (मेनस्ट्रीम मीडिया इसे प्रदर्शन बता रही) में चाकू ले जाने का जुर्म कबूल करने के बाद लेस्टर मजिस्ट्रेट कोर्ट ने उसे एक साल की जेल की सजा दी है। इससे पहले 20 वर्षीय ऐमॉस नोरोन्हा (Amos Noronha) को प्रतिबंधित हथियार रखने का दोषी पाया गया था। ऐमॉस नोरोन्हा को सोमवार (20 सितंबर 2022) को 10 महीने जेल की सजा सुनाई गई थी।