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राष्ट्रपति पुतिन के काफिले पर आत्मघाती हमला, कार के पास ही हुआ बम विस्फोट, कई गिरफ्तार: मीडिया रिपोर्ट्स

देश और दुनिया के तमाम बड़े मीडिया संस्थान अपनी रिपोर्ट्स में रूस के राष्ट्रपति पुतिन पर हुए जानलेवा हमले की बात बता रहे है। हालाँकि, इसकी अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इन रिपोर्ट्स के अनुसार पुतिन के काफिले को पहले एक एम्बुलेंस ने रोका और उसके बाद उनकी कार के पास बम का जोरदार धमाका हुआ।

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर जानलेवा हमले की खबर का ‘द मिरर’ समेत कई अन्य मीडिया रिपोर्ट्स ने दावा किया है। इनमें कहा जा रहा है कि राष्ट्रपति पुतिन की लिमोजिन कार के ठीक पास में बम धमाका हुआ, इस हमले में पुतिन बाल-बाल बच गए हैं। वहीं पुतिन को हमले के बाद सुरक्षित स्थान पर भी ले जाया गया।

हमले के इन दावों में बताया जा रहा है कि पुतिन की कार के बाएँ तरफ के छोर में जोरदार धमाका हुआ था और उसके बाद वहाँ पर धमाके के कारण बहुत धुआँ भी फैला। यह हमला कब और कहाँ हुआ है, इसकी जानकारी अभी स्पष्ट तौर पर सामने नहीं आई है।

कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार यह भी कहा जा रहा है कि वे जब अपने निवास स्थान की तरफ लौट रहे थे, उस दौरान उन पर हमला हुआ। हमले के बाद पुतिन की गाड़ी को बमनिरोधक और बुलेटप्रुफ सुरक्षाकर्मियों ने हर तरफ से घेर लिया और फिर आसपास फैले धुआँ को हटाने का प्रयास किया गया। यह एक आत्मघाती हमला था। राष्ट्रपति की सुरक्षा में तैनात कुछ लोगों को भी हमले के बाद गिरफ्तार किया गया है।

गौरतलब है कि बीते दिनों पुतिन के ‘युद्ध मास्टरमाइंड’ एलेक्जेंडर डुगिन की बेटी दारिया डुगिन की मृत्यु भी इसी तरह के एक कार बम धमाके में हो गई थी, जबकि उस हमले में दरिया के पिता बाल-बाल बचे थे। यह हमला रूस की राजधानी मॉस्को में शनिवार (20 अगस्त 2022) को हुआ था। हमले में मरने वाली दारिया पेशे से एक पत्रकार थीं। वहीं इस हमले में यूक्रेन का हाथ होने की आशंका जताई जा रही है। साथ ही रूस के भीतर मौजूद पुतिन विरोधी भी शक के दायरे में हैं। रूसी जाँच एजेंसियों की मानें तो इस हमले में विस्फोटक ड्राइवर की सीट की तरफ से कार के नीचे लगाया गया था और इसमें टारगेट अलेक्जेंडर था, जबकि जान उनकी बेटी की चली गईं।

जाति पर खेलना चाहती थीं सबा नकवी, जुनैद-सोहैल का मजहब देख चुप हो गईं: लखीमपुर खीरी घटना पर प्रोपेगेंडा शुरू होने से पहले फेल, नेटीजन्स ने पूछा- ‘अब कहाँ गायब हो’

लखीमपुर खीरी में दो दलित नाबालिग बहनों की रेप के बाद हुई हत्या की घटना के बाद एक ओर आरोपितों के लिए सख्त से सख्त सजा की माँग की जा रही है। वहीं दूसरी ओर मीडिया गिरोह के लोग इस पर कुछ भी बोलने से बच रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि ये चुप्पी आरोपितों का नाम सामने आने के बाद साधी गई है वरना गिरफ्तारी से पहले इस घटना को जाति का एंगल देने की कोशिश शुरू हो गई थी।

लखीमपुर खीरी की घटना के बाद आप सबा नकवी का यह ट्वीट देखिए। उन्होंने एनडीटीवी की खबर को शेयर करके ये ज्ञान दिया कि खबर में कम से कम ‘जाति’ का उल्लेख तो करना चाहिए था। उन्होंने लिखा, “रिपोर्ट में जाति का जिक्र नहीं है जबकि ये बेहद जरूरी है। 2 नाबालिग लड़कियाँ, बहनें यूपी के लखीमपुर में पेड़ से लटकी मिली हैं।”

नकवी का यह ट्वीट बुधवार को 11:38 पर किया गया था और गुरुवार को यूपी पुलिस ने इस केस में कार्रवाई करते हुए 6 आरोपितों को धर दबोचा। आरोपितों की पहचान जुनैद, सोहैल, आरिफ, हाफिज, छोटे और करीमुद्दीन के तौर पर हुई।

पुलिस ने बताया कि ये लोग दोनों बहनों को बहला कर खेत में ले गए और उसके बाद वहाँ इन्होंने पहले रेप किया और उसके बाद उनकी हत्या करके उन्हें पेड़ पर लटका दिया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से भी यही बात सामने आई है।

नकवी को नेटीजन्स ने लताड़ा

अब सोशल मीडिया यूजर्स ने नकवी के पोस्ट पर उन्हें बताना शुरू किया कि कल तक उन्हें रिपोर्ट में जाति का जिक्र चाहिए था। अब तो आरोपितों का मजहब भी पता चला गया, फिर आखिर वे क्यों चुप हैं।

अंशुल सक्सेना ने इस पोस्ट का स्क्रीनशॉट शेयर करके कहा, “दो नाबालिग लड़कियाँ लखीमपुर खीरी में पेड़ से लटकी मिलीं। कल पत्रकार सबा नकवी कह रही थी कि जाति लिखना जरूरी है। आज 6 लोग पकड़े गए हैं। लेकिन अब वह कुछ भी नहीं कह रहीं कि आरोपितों का जाति या मजहब लिखना चाहिए क्योंकि शायद ये उनके एजेंडे को सूट नहीं करता।”

रश्मि लिखती हैं, “कल तक तो सबा नकवी जैसे लोगों को आरोपितों की जाति भी पता करनी थी। आज रेपिस्टों का कोई धर्म नहीं होता।”

एक यूजर ने लिखा, “सबा नकवी हिंदू जाति को दोषी दिखाने के लिए एक जघन्य अपराध को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही थीं। लेकिन दुर्भाग्य से उनके आरोपितों का नाम छोटू, जुनैद, सोहैल, करीमुद्दीन और आरिफ जुनैद है।”

शशांक शेखर झा ने उन्हें कहा, “तुम्हारे तर्क के मुताबिक तो अब आरोपितों का जाति और मजहब बताओ।”

एक यूजर ने सबा से पूछा कि आप तो रेप क्राइम में जाति ढूँढ रही थीं लेकिन रिपोर्ट के बाद चुप क्यों हो गई हों, क्योंकि इसमें मजहब आ गया। वहीं कई यूजर्स ने सबा नकवी से पूछा कि जैसे उन्होंने जाति जानने के लिए उत्सुकता दिखाई। लेकिन मजहब जानकर वो कहाँ गायब हो गई हैं।

सबा नकवी की हिपोक्रेसी

गौरतलब है कि सबा नकवी के ट्वीट पर नेटीजन्स द्वारा आई प्रतिक्रिया के बीच ऐसा नहीं है कि उन्होंने घटना संबंधी कोई जानकारी साझा नहीं की। उनके अकॉउंट पर ऐसे रीट्वीट हैं जिसमें आरोपितों के नाम हैं, लेकिन इस रीट्वीट के साथ उनका कोई कमेंट तक नहीं है। यही हिपोक्रेसी देख लोगों में गुस्सा है और उनका पूछना है कि जब सबा रेप जैसे घृणित अपराध को जाति ढूँढ सकती हैं तो मजहब पर क्यों चुप हैं।

‘स्कूलों को अपना यूनिफॉर्म तय करने का अधिकार, हिजाब इससे अलग है’: कर्नाटक बुर्का विवाद पर SC की टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक के शैक्षणिक संस्थानों में हिजाब पर प्रतिबंध मामले की सुनवाई के दौरान गुरुवार (15 सितंबर 2022) को मौखिक रूप से कहा कि किसी स्कूल को अपने यहाँ यूनिफॉर्म तय करने का अधिकार है और इससे इनकार नहीं किया जा सकता। इसके बाद माना जा रहा है कि मुस्लिम पक्ष को झटका लग सकता है।

मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता और न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की पीठ ने की। इस दौरान वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने कोर्ट में दलील दी कि सरकारी संस्थानों में ड्रेस कोड नहीं लागू किया जा सकता।

इस पर न्यायमूर्ति गुप्ता ने कहा प्रशांत भूषण से पूछा कि क्या सरकारी स्कूलों में यूनिफॉर्म नहीं हो सकती? इस पर प्रशांत भूषण ने कि हो सकता है, लेकिन हिजाब पर रोक नहीं लगाया जा सकता। इसके बाद जस्टिस धूलिया ने कहा कि स्कूलों को ड्रेस कोड निर्धारित करने का अधिकार है।

उन्होंने मौखिक रूप से कहा, “नियम कहते हैं कि उनके पास यनिफॉर्म तय करने की शक्ति है। हिजाब अलग है। देखें कि किसी विशेष वर्दी को ठीक करने के लिए एक स्कूल की शक्ति से इनकार नहीं किया जा सकता है।” इस मामले में अगली सुनवाई 19 सितंबर को होगी।

वरिष्ठ अधिवक्ता डॉक्टर कॉलिन गोंजाल्विस ने कहा, “सवाल यह नहीं पूछा जाना चाहिए कि क्या लड़कियाँ इसे पहनती हैं या नहीं। सवाल यह है कि क्या हिजाब इस्लाम का अनिवार्य अंग है तो हाँ है। लाखों लड़कियाँ इसे पहनती हैं।”

इस बीच न्यायमूर्ति गुप्ता ने कहा, “न्यायालय स्थापित मानकों के आधार पर फैसला करता है। मामला यह था कि क्या हिजाब आवश्यक धार्मिक प्रथा है। उच्च न्यायालय उस तथ्य के आधार पर फैसला दिया। सवाल यह है कि इस विवाद से पहले ये लड़कियाँ क्या हिजाब पहनती थीं।”

इस पर वरिष्ठ अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा ने कहा, “दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा धर्म इस्लाम है। दूसरे देशों में इस्लाम अपने धार्मिक और सांस्कृतिक रीति-रिवाजों के तहत हिजाब को मान्यता देता है। संयुक्त राष्ट्र समिति ने पाया है कि हिजाब पर प्रतिबंध कन्वेंशन का उल्लंघन है।”

J&K में ‘हाइब्रिड आतंकी’ जफर इकबाल गिरफ्तार, ठिकाने से बरामद हुआ गोला-बारूद का ढेर: पुलिस बोली- एक बड़ा हमला टला है

जम्मू-कश्मीर में गुरुवार (15 सितंबर 2022) को जवानों ने आतंकियों की एक बड़ी साजिश को नाकाम कर दिया। खबर है कि सुरक्षाबलों ने रियासी जिले में एक ‘हाइब्रिड आतंकवादी’ को गिरफ्तार किया है। वहीं, आतंकी के ठिकाने से जवानों ने भारी मात्रा में गोला-बारूद और नकदी बरामद की है। ये किसी हमले को अंजाम देने की कोशिश कर रहा था।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गुरुवार को सुरक्षा बलों ने बल-अंगराला के निवासी जफर इकबाल नामक ‘हाइब्रिड आतंकवादी’ को गिरफ्तार कर एक बड़ी आतंकी साजिश को नाकाम कर दिया। इसकी गिरफ़्तारी की जानकारी जम्मू-कश्मीर पुलिस ने साझा की है। पुलिस ने बताया कि पकड़ा गया आतंकी सुरक्षा बलों के हाथों राजौरी जिले में मारे गए लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादी मोहम्मद इसहाक का भाई है।

पुलिस के मुताबिक, सुरक्षा बलों ने आतंकी जफर इकबाल के ठिकाने से हथियार, गोला-बारूद और 1,81,000 रुपये की नगदी भी जब्त की हैं, जिसका इस्तेमाल ‘हाइब्रिड आतंकवादी’ इकबाल आतंकवादी गतिविधियों के लिए करने वाला था। बता दें कि “हाइब्रिड आतंकवादी” गैर-सूचीबद्ध कट्टरपंथी लोग होते हैं, जो स्लीपर सेल की तरह काम करते हैं और हमलों को अंजाम देकर आम जीवन में घुल-मिल जाते हैं।

जम्मू-कश्मीर पुलिस ने यह भी बताया कि महोर थाने को सूचना मिली थी कि जफर इकबाल पाकिस्तान में बैठे आतंकवादियों के लीडर के संपर्क में है। इस सूचना के आधार पर स्टेट पुलिस, राष्ट्रीय राइफल्स और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की टीमों ने अंगराला जंगल में एक संयुक्त अभियान शुरू किया था। वहीं इस अभियान के दौरान सुरक्षा बलों को इलाके में एक ठिकाने से दो पिस्तौल, चार मैगजीन, 22 कारतूस, एक ग्रेनेड और 1.81 लाख रुपए बरामद किया गया है।

इस मामले में रियासी के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) अमित गुप्ता ने कहा कि रियासी जिले के शांति-प्रिय लोग पहले से ही आतंकवाद को खारिज चुके हैं और इस क्षेत्र में आतंकियों की कोई भी कोशिश कामयाब नहीं होने वाली है। उन्होंने बताया कि रियासी का रहने वाला इकबाल का एक रिश्तेदार पाकिस्तान में रहता है। इसका नाम अब्दुल राशिद बताया जा रहा है और आतंकवादी समूहों के साथ वो काम भी करता है।

‘सोच रहा हूँ राजनीति से जुड़ जाऊँ’ : जेल से छूटने के बाद बदले KRK के तेवर, कहा- सुरक्षित रहने के लिए अभिनेता नहीं, नेता होना जरूरी

जेल से बाहर आने के बाद अभिनेता व फिल्म समीक्षक कमाल आर खान (Kamaal R. Khan) उर्फ केआरके अलग ही मूड में नजर आ रहे हैं। वह सोशल मीडिया पर हैरान कर देने वाले पोस्ट साझा कर रहे हैं। उनके ट्वीट से ऐसा लग रहा है, जैसे वह अभिनेता से नेता बनने पर विचार कर रहे हैं।

KRK ने गुरुवार (15 सितंबर 2022) को ट्वीट किया, “मैं जल्द ही राजनीतिक पार्टी जॉइन करने की सोच रहा हूँ। क्योंकि देश में सुरक्षित रहने के लिए, नेता होना जरूरी है, अभिनेता नहीं।”

केआरके के इस ट्वीट पर एक यूजर ने लिखा, “सच,सच, सच कह डालो केआरके। क्या क्या हुआ है? किस किसने किया है।”

इससे पहले 11 सितंबर 2022 को केआरके ने ट्वीट किया था, “मैं बदला लेने के लिए वापस आ गया हूँ।” हालाँकि, कुछ देर बाद ही उन्होंने इस ट्वीट को डिलीट कर दिया था और अपने नए पोस्ट में लिखा था, “मीडिया नई कहानियाँ गढ़ रही है। मैं वापस आ गया हूँ और अपने घर पर सुरक्षित हूँ। मुझे किसी से बदला लेने की जरूरत नहीं है। मेरे साथ जो भी बुरा हुआ, मैं उसे भूल गया हूँ। मुझे विश्वास है, यह मेरे भाग्य में लिखा गया था।”

फोटो साभार: ट्विटर

बता दें कि एक विवादित ट्वीट को लेकर मुंबई पुलिस ने केआरके को 30 अगस्त 2022 को गिरफ्तार किया था। जिसके बाद उन्हें 9 दिन जेल में बिताने पड़े थे। फिलहाल, अब वह जमानत पर हैं। केआरके (KRK) को जेल से रिहा किए जाने से पहले उनके बेटे फैसल कमाल ने अपने अब्बा के ट्विटर अकाउंट से दो ट्वीट किए थे।

इस ट्वीट में फैसल ने लिखा था, “मैं केआरके का बेटा फैसल कमाल हूँ। मुंबई में मेरे पिता को मारने के लिए कुछ लोग प्रताड़ित कर रहे हैं। मैं अभी 23 साल का हूँ और लंदन में रह रहा हूँ। मुझे नहीं पता कि मैं अपने पिता की मदद कैसे करूँ। मैं अभिषेक बच्चन, रितेश देशमुख और देवेन्द्र फडणवीस जी से मेरे पिता की जान बचाने का अनुरोध करता हूँ। मैं और मेरी बहन उनके बिना मर जाएँगे।”

सलमान खान की पनवेल फार्महाउस पर करनी थी हत्या, शूटर 2 बार हमले से चूके: बिश्नोई गैंग के प्लॉन-B का खुलासा, पुलिस को बताया- ‘हम रेकी पूरी कर चुके थे’

बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान (Salman Khan) की हत्या करने के लिए कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई (Gangster Lawrence Bishnoi) ने एक और प्लान बनाया था। पंजाब पुलिस ने इसका खुलासा किया है कि बिश्नोई गैंग ने सलमान खान के पनवेल फार्महाउस पर उन पर हमला करने के लिए प्लान-B तैयार किया था।

बताया जा रहा है कि मुंबई के वाजे इलाके के पनवेल में सलमान खान के फार्महाउस के पास कपिल पंडित, संतोष जाधव और दीपक मुंडी और अन्य शूटर्स उनकी रेकी करने के लिए एक कमरा लेकर रुके हुए थे। इन्होने यहाँ करीब डेढ़ महीने तक रुक कर अभिनेता की रेकी की थी।

पुलिस की पूछताछ में पता चला है कि शूटर्स ने इस दौरान सलमान के बारे में हर जानकारी इकट्ठा कर ली थी। जैसे वो अपने बॉडीगार्ड शेरा के साथ वहाँ कब आते हैं, कब जाते हैं। मेन रोड से फार्महाउस कितनी दूरी पर है। मेन रोड से फार्महाउस तक जाने के लिए 25 किमी तक रास्ते में काफी गड्ढे हैं। इस दौरान सलमान की गाड़ी की स्पीड बेहद कम हो जाती है। ऐसे में उन्हें गाड़ी में ही आसानी से टारगेट किया जा सकता था। हालाँकि, रेकी के दौरान दो बार सलमान खान अपने फार्महाउस पर गए भी थे, लेकिन लॉरेंस के शूटर्स अटैक करने से चूक गए थे।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला मर्डर (Sidhu Moosewala Murder) से पहले ही उनकी हत्या की साजिश रची गई थी। सलमान खान की हत्या करने के लिए बिश्नोई ने गोल्डी बराड़ (Goldy Brar) को चुना था। वही इस साजिश को अंजाम देने के लिए गैंगस्टर की टीम को लीड कर रहा था।

सिद्धू मूसेवाला की तरह ही सलमान की हत्या की पूरी साजिश रची गई थी। इसका खुलासा हाल में पकड़े गए लॉरेंस बिश्नोई गैंग के शूटर कपिल पंडित की गिरफ्तारी के बाद हुआ है।

गौरतलब है कि पंजाब पुलिस ने 11 सितंबर 2022 को मूसेवाला हत्याकांड में गिरफ्तार किए गए आरोपितों के बारे में जानकारी दी थी। उन्होंने खुलासा किया था कि गिरफ्तार आरोपितों से शुरुआती पूछताछ में पता चला है कि वे सलमान खान (Salman Khan) पर जानलेवा हमला करने की योजना बना रहे थे।

चंडीगढ़ पुलिस ने इस मामले में फरार चल रहे छठे शूटर दीपक मुंडी (Deepak Mundi) को उसके दो सहयोगियों कपिल पंडित और राजिंदर के साथ 11 सितंबर को पश्चिम बंगाल-नेपाल सीमा के पास से गिरफ्तार किया था। तीनों को मानसा कोर्ट ने 7 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया था।

बदायूं का हुक्का बार, टारगेट पर हिंदू लड़कियाँ: वीडियो वायरल होने के बाद लव जिहाद से लेकर ब्लैकमेलिंग का आरोप

उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। यह शहर के ही एक हुक्का बार के अंदर का वीडियो है। सोशल मीडिया पर इस वीडियो के साथ दावा इस बात का भी किया जा रहा है कि यहाँ पर अरबाज़ नाम का व्यक्ति लड़कियों के फोटो खींच कर और उनके आपत्तिजनक वीडियो बना कर उन्हें ब्लैकमेल किया करता था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह वीडियो मंगलवार (13 सितम्बर 2022) को वायरल हुआ है। वायरल वीडियो में तेज आवाज में म्यूजिक सुनाई दे रही है। म्यूजिक के साथ कुछ लड़के-लड़कियों को हुक्का पीते हुए और डांस करते आप इस वीडियो में देख सकते हैं।

ऊपर के दोनों ट्वीट पत्रकार के हैं। एक पत्रकार ANI के हैं, जबकि दूसरे Zee_हिंदुस्तान के। इनके अलावा न्यूज़ नेशन के पत्रकार राहुल सिसोदिया के मुताबिक इस हुक्का बार में लव जिहाद को बढ़ावा देने की शिकायतें भी मिली हैं।

इस वायरल वीडियो में सफेद रंग की शर्ट पहने एक युवक भी दिख रहा है। टीनेज दिखती एक लड़की पर हुक्के का धुआँ सफेद रंग की शर्ट पहने युवक ही छोड़ रहा है। एक अन्य वीडियो में एक लड़का एक लड़की को गोद में उठा कर डांस कर रहा है। लड़की हालाँकि उसकी हरकत का विरोध नहीं कर रही है।

इसी बार के अलग-अलग वीडियो वायरल हो रहे हैं। इनमें लकड़ियों की संख्या एक से अधिक है। इस बार का उद्घाटन स्थानीय विधायक महेश चंद्र गुप्ता से करवाया गया था। उन्होंने बयान देते हुए कहा है कि उद्घाटन औपचारिकता के चलते किया था और बाद में होने वाले कारनामों की उन्हें कोई जानकारी नहीं है।

बदायूं का हुक्का बार, टारगेट पर हिंदू लड़कियाँ

ऑपइंडिया ने इस मामले को जानने के लिए स्थानीय लोगों से बात की। राजपूत करणी सेना बदायूं के जिला संगठन मंत्री सचिन चौहान ने ऑपइंडिया से बात करते हुए बताया कि रेस्टोरेंट के नाम पर शुरू किया गया यह ठिकाना दरअसल हुक्का बार ही था।

सचिन चौहान के अनुसार इस हुक्का बार की आड़ में पहले ही दिन से गहरी साजिश है और यहाँ पर हिंदू लड़कियों को टारगेट किया जा रहा था। उन्होंने बताया कि करणी सेना को फिलहाल इन दावों के पुख्ता सबूत नहीं मिल पाए थे, इसीलिए उन्होंने इस मामले में अभी तक कोई ज्ञापन आदि नहीं दिया था।

बदायूं पुलिस ने आज गुरुवार (15 सितम्बर 2022) को इस मामले में अब तक फैज़, लालू, अयाज़, वरुण और अब्दुल कादिर उर्फ़ जिलानी को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस इस बात की भी जाँच कर रही है कि वायरल वीडियो बार सील होने के बाद का है या उससे पहले का (इसे 12 सितम्बर 2022 को ही सील कर दिया गया था)। पुलिस के मुताबिक आगे की जाँच की जा रही है।

बताया जा रहा है कि ये बार एक रेस्टोरेंट की आड़ में चल रहा था। एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक हुक्का बार नई सराय कच्ची लीग का है। इसे सोमवार (12 सितम्बर 2022) को सील किया गया था। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में सफेद शर्ट में दिख रहा व्यक्ति ही बार का असली मालिक बताया जा रहा है, जिसका नाम अरबाज़ है। इस मामले में पुलिस जाँच के बाद कार्रवाई की बात कह रही है।

वो वीडियो वायरल हो रहे हैं, उससे संबंधित बदायूं का यह बार सुबह 10 बजे से खुल कर देर रात तक चलता था। इसी बार के अंदर आने वाले कुछ युवकों की तस्वीरें हथियारों के साथ भी वायरल हो रही हैं।

‘ठाकुर केशव देव जी मंदिर परिसर से हटाई जाए मुगलकालीन मीना मस्जिद’: मथुरा की अदालत में एक और याचिका, ईदगाह मस्जिद को लेकर पहले से चल रहा मामला

उत्तर प्रदेश के मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि परिसर से मीना मस्जिद को हटाने के लिए कोर्ट में याचिका दायर की गई है। कहा जा रहा है कि यह मस्जिद मुगल काल की है। याचिकाकर्ता ने कहा है कि ‘ठाकुर केशव देव जी’ के मंदिर के एक हिस्से के ऊपर मस्जिद बनाई गई है। यह मस्जिद श्रीकृष्ण जन्मभूमि परिसर के पूर्वी हिस्से में स्थित है।

अखिल भारत हिंदू महासभा के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष दिनेश शर्मा ने मीना मस्जिद को हटाने के लिए याचिका दायर की है। भगवान श्रीकृष्ण के भक्त शर्मा ने यह याचिका भगवान के ‘वाद मित्र’ के रूप में दायर की है। याचिका पर सिविल जज (सीनियर डिवीजन) मथुरा ज्योति सिंह की अदालत में मुकदमा दायर किया गया है।

याचिकाकर्ता के वकील दीपक शर्मा ने बताया कि कोर्ट 26 अक्टूबर को मामले की सुनवाई करेगा। मथुरा में करीब एक दर्जन मामलों में श्रीकृष्ण जन्मभूमि की ओर से पेश याचिकाकर्ताओं ने श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संघ और शाही ईदगाह मस्जिद के बीच 12 अक्टूबर 1968 को हुए समझौते को चुनौती दी थी। ये समझौते 1967 के सूट नंबर 43 का हिस्सा हैं।

यह याचिका वाराणसी में जिला न्यायालय द्वारा ज्ञानवापी-शृंगार गौरी मामले में मुकदमा चलाने में अनुमति देने के बाद दायर की गई थी। अदालत ने मामले की स्थिरता को चुनौती देने वाली मुस्लिम पक्ष की याचिका को खारिज कर दिया था।

श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़ी कई याचिकाएँ मथुरा की विभिन्न अदालतों में पहले ही दायर की जा चुकी हैं। इससे पहले की एक याचिका में शाही ईदगाह मस्जिद को हिंदू संपत्ति से स्थानांतरित करने का अनुरोध किया गया था। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि शाही मस्जिद ईदगाह को हटा दिया जाना चाहिए, क्योंकि यह ‘भगवान कृष्ण के जन्मस्थान’ पर बनाई गई है।

दिनेश शर्मा का दावा है कि उन्होंने ठाकुर केशव देव जी महाराज की संपत्ति की रक्षा के लिए यह याचिका दायर की है। ठाकुर केशव जी महाराज मथुरा शहर में 13.37 एकड़ जमीन के मालिक हैं, उनकी जमीन पर श्रीकृष्ण जन्मभूमि स्थित है। ऐसे में अब देवता की जमीन पर बनी मीना मस्जिद को हटाने की माँग की जा रही है। शर्मा के मुताबिक, उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड लखनऊ, इंतेजामिया कमेटी, मीना मस्जिद (डीग गेट) के अध्यक्ष एवं सचिव को नए मामले में प्रतिवादी बनाया गया है।

‘गद्दार, गिरगिट, झूठा’ : गुलाम नबी आजाद के ‘आर्टिकल 370’ वाले बयान के बाद भड़का आतंकी संगठन TRF, पोस्टर जारी कर दी धमकी

जम्मू और कश्मीर की राजनीति के सबसे चर्चित चेहरों में से एक गुलाम नबी आजाद को एक आतंकवादी संगठन द्वारा कथित तौर पर धमकी देने की बात सामने आई है। यह धमकी लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े समूह रेसिसटेंस फ्रंट टेरर (TRF) ने दी है। बताया जा रहा है कि इस धमकी में आतंकी समूह ने भारत के गृह मंत्री अमित शाह का भी जी जिक्र किया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पूर्व कॉन्ग्रेसी नेता गुलाम नबी आजाद जम्मू और कश्मीर में नई पार्टी के गठन की तैयारी में लगे हुए हैं। वह मिशन कश्मीर के हिस्से के रूप में रैलियाँ निकालने वाले हैं, लेकिन इससे पहले ही उन्हें आतंकवादियों द्वारा धमकी दी जा रही है। लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े समूह रेसिसटेंस फ्रंट टेरर ने सोशल मीडिया पर पोस्टर जारी कर आजाद को धमकाया है।

एक रिपोर्ट के मुताबिक इस धमकी भरे पोस्टर में लिखा गया है, “गद्दार के दिल में कोई वफादारी नहीं होती, केवल खुद को भरोसेमंद दिखाने का झूठा नाटक होता है।” वहीं इस पोस्टर के माध्यम से गुलाम नबी आजाद को ‘राजनीतिक गिरगिट’ भी बताया गया है। इसके अलावा पोस्टर में यह भी दावा किया गया है कि जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद ने पहले केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से भी मुलाकात की थी।

अनुच्छेद 370 पर दिया था बयान

गौरलतब है की हाल ही में गुलाम नबी आजाद ने वर्ष 2019 में केंद्र सरकार द्वारा हटाए गए अनुच्छेद 370 पर एक बड़ा बयान जारी किया था। उन्होंने कहा, “मैं या कॉन्ग्रेस पार्टी या तीन क्षेत्रीय दल आपको अनुच्छेद 370 वापस नहीं दे सकते न ही ममता बनर्जी, न ही डीएमके और न ही शरद पवार।” उनके मुताबिक वे तो क्या कोई भी आर्टिकल 370 को वापस नहीं दिला सकता है।

बता दें उन्होंने यह बयान रविवार (11 सितंबर 2022) को उत्तरी कश्मीर के बारामूला में एक जनसभा को संबोधित करते हुए दिया था। गुलाम ने कहा, “कुछ लोग कह रहे हैं कि मैं अनुच्छेद 370 के बारे में बात नहीं करता हूँ। मैं उन्हें बताना चाहता हूँ कि आजाद चुनावी फायदे के लिए लोगों को बेवकूफ नहीं बनाते हैं। अनुच्छेद 370 को बहाल करने के लिए लोकसभा में लगभग 350 वोटों की आवश्यकता होगी, जबकि राज्यसभा में 175 वोटों की आवश्यकता होगी। यह एक संख्या है जो किसी भी राजनीतिक दल के पास नहीं है या कभी भी मिलने की संभावना नहीं है।”

‘₹10 करोड़ लगाए ₹150 करोड़ कमाए’: शराब घोटाले में बुरी फँसी AAP, 9वें आरोपित का दावा- धंधे के लिए केजरीवाल को भेजे गए पैसे

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की नेतृत्व वाली दिल्ली की आम आदमी पार्टी की सरकार पर लगे शराब घोटाले में सनसनीखेज खुलासा हुआ है। भाजपा ने इस घोटाले के आरोपित नंबर 9 अमित अरोड़ा का एक वीडियो जारी है। भाजपा इसे स्टिंग ऑपरेशन बता रही है, जिसमें आरोपित शराब घोटाले के बारे में लोगों को बता रहा है।

इस आरोपित सामने वाले शख्स को बता रहा है कि दिल्ली सरकार की शराब पॉलिसी से किन-किन लोगों को लाभ पहुँचाने की कोशिश की गई और यह कैसे-कैसे अंजाम दिया गया। इसमें शख्स ने विस्तार से बताया है। उसने बताया कि इसमें आम आदमी पार्टी के नेताओं को कई सौ करोड़ रुपए का लाभ पहुँचा है। शख्स ने कहा कि जिनको फायदा पहुँचा है, उन सभी ने अरविंद केजरीवाल को पैसे दिए हैं। किसी ने 100 करोड़ दिए, किसी ने 60 करोड़ दिए तो किसी ने 30 करोड़।

वीडियो मे अमित अरोड़ा बताया जा रहा शख्स कहता है, “देखो जी ऐसा है, इंडो स्पिरिट वाला तो 100 करोड़ रुपए एडवांस देकर बैठे थे। वो तो कहते थे कि 100 रुपए की ज्वॉइनिंग की है। वो सबको बोलते थे कि सबसे बड़ा धंधा उसी के पास था। अब 100 रुपए की ज्वॉइनिंग में भी एक ये भी ब्लैक एंड ह्वाइट करने का धंधा है। भाई आज आप 100 रुपया किसी को एडवांस में किसी को दे दो और जब वापस मिलेगा तो सब ह्वाइट में। जो कैश दे रहा है वो तो ब्लैक को ह्वाइट ही कर रहा है। मैंने कैश दे दिया और आपने फिक्स मार्जिन दे दिया। उसके बाद अमन डल जो 60-70 करोड़ मार्केट में है, वो उसने दिए। क्योंकि, हर आदमी बोलता था कि हमें भी धंधा दे दो। वो इतने में दे देंगे किसी को। इतने पैसे देने की किसी की हिम्मत नहीं है। अब हमारे पास कहाँ से आ जाएँगे इतने पैसे?”

वीडियो में दिख रहा शख्स आगे कहता है, “ऐसे ही ये महादेव लिक्वर है। महादेव लिक्वर ने भी इतने ही पैसे दिए, 50 करोड़ रुपए। इसके बिना धंधा नहीं मिल सकता। वैसे ही वो दिवांस स्पिरिट है। उसका धंधा इनसे थोड़ा सा था तो उसने 30 करोड़ रुपए दिए। अमन डल और अनंत वाइन्स, दो आदमियों को 10,000 करोड़ रुपए का धंधा दिया गया। ये दो आदमियों को ही क्यों दिए गए? कंप्टीशन तो कस्टमर के अच्छी बात है। आज की डेट में अमन डल, प्रिंटको और अनंत पंजाब में किसी का धंधा बंद करवा सकते हैं। जिसको ये माल ना दें, उसकी दुकान बंद हो जाएगी। वो बेचारा पैसे देकर मर जाएगा।”

शख्स आगे कहता है, “पंजाब के किसी भी रिटेलर से जो बताने की हिम्मत करेगा, उससे पूछ पूछ लो। इसमें मेरा नाम इसलिए क्योंकि मैं रिटेलर हूँ और मैं दिनेश अरोड़ा को जानता था। मेरे को लोग दिनेश अरोड़ा बोलते हैं, लेकिन मेरा नाम अमित अरोड़ा है। मुझे एक परसेंट का भी धंधा नहीं मिला। मेरे पास रिटेल का धंधा है, जो मुझे हाईकोर्ट से मिला है। अब मेरा नाम डाल दिया। जब मेरा नाम डाल दिया तो मैंने इन्क्वायरी ज्वॉइन कर ली। पॉलिसी बनाने में सारा काम विजय नायर का था, समीर महेंद्रू का था, अमन डल का था, मैडम चड्ढा का था और एक अरुण पिल्लई थे।”

इस घोटाले में शामिल लोगों के नाम लेते हुए वह शख्स आगे कहता है, “ये जो अमन डल है वो ब्रिंडको का है और जो समीर महेंद्रू है वो इंडो स्पिरिट है, मैडम चड्ढा महादेव लिक्वर है। अगर कोई बंदा ड्रग्स भी बेचे तो इतना धंधा ना कमा पाए। 10 करोड़ रुपए लगाए हैं और 150-150 करोड़ रुपए कमाए हैं अभी तक। ये सिर्फ पैसा कमाने का तरीका नहीं था, ये एक और तरीका था। क्या किया का 100 करोड़ रुपए एडवांस दे दिया कैश में। इन्होंने 100 करोड़ रुपए लगा दिए इलेक्शन में कहीं भी। अब वो पैसा जब वापस आ रहा है तो… पहली पॉलिसी ऐसी है जिसके अंदर लिखा है कि इस पैसे का आपको 12 परसेंट देना ही पड़ेगा। ऐसा धंधा तो मैंने जिंदगी में नहीं देखा।”

अमित अरोड़ा के अनुसार, “अगर ये चलता रहता तो ये हजारों करोड़ रुपए का फ्रॉड था। ये तो बीच में पता चल गया। ये इतना ओपन फ्रॉड था कि एक्साइज के चपरासी को भी पता था कि क्या हो रहा है। इन्होंने क्या कि दुनिया के सारे लोगों को मार दिया और कुछ लोगों को जिंदा कर दिया। सारे पुराने रिटेलर को मार दिए। पहले 10 लाख रुपए में होलसेल का लाइसेंस था। इन्होंने पाँच करोड़ का कर दिया। पूरे हिंदुस्तान में 5 करोड़ रुपए का लाइसेेंस कहीं भी नहीं है। क्यों कर दिया ऐसा, ताकि छोटा प्लेयर एक्जिस्ट ही ना करे। पूरा दिल्ली के लिक्वर का बिजनेस 15 हजार करोड़ रुपए का है और प्लान ये था कि सारा बिजनेस इन चारों के पास आ जाए।”

दिल्ली सरकार पर आरोप लगाते हुए वह शख्स कहता है, “इनको किसी रिटेलर से पैसे नहीं मिल रहे थे। इनको पैसे मिल रहे थे होलसेल से। ये चाहते थे बहुत सारे होलसेल। इन्होंने यहाँ फिक्स किया कि जितनी मर्जी दारू बेचो, कोई कोटा फिक्स नहीं। ये जो 12 परसेेंट का कमीशन था, इनमें इनको 6 परसेंट मिलता था। इन्होंने ओबेरॉय होटल में बैठ के, लोधी होटल में बैठ के इन सबने पॉलिसी बनाई। इसके बाद इन्होंने 6 परसेंट का गेम खेला। इसमें 4-5 सौ करोड़ रुपए तो बनाया ही गया होगा।”

भाजपा ने लगाया आरोप

वीडियो को लेकर भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु द्विवेदी ने गुरुवार (15 सितंबर 2022) को कहा कि नई राजनीति शुरू करने वालों की शराब पुरानी होने के साथ उनका असली चेहरा सामने आ रहा है। उन्होंने कहा कि इसके पहले भी एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें दिल्ली सरकार की पोल खोली गई थी।

वहीं, दिल्ली भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने कहा कि अरविंद केजरीवाल के प्रत्येक काम में भ्रष्टाचार और अपने लोगों को लाभ होता है। दिल्ली के राजस्व को हानि पहुँचाकर 15,000 करोड़ की शराब की बिक्री होती थी। 165 प्रतिशत राजस्व को घटाकर एक प्रतिशत कर दिया गया।

गुप्ता ने कहा कि इससे पहले स्टिंग में स्पष्ट था कि किस तरह से दो प्रतिशत से कमीशन बढ़ाकर 12 प्रतिशत कर दिया गया, ताकि 6 प्रतिशत आम आदमी पार्टी के नेताओं को मिले। उन्होंने कहा कि शराब के ठेके उन ठेकेदारों को दिए गए, जो काली सूची में शामिल हैं। दिल्ली के बाद पंजाब में भी यही मॉडल अपनाया गया। दो कंपनियों को पूरे राज्य का ठेका दिया गया।

भाजपा नेता मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने पूंजीपति मित्रों के लाभ के लिए होटल में बैठकर नई आबकारी नीति बनाई। ठेकेदारों से छह प्रतिशत कमीशन एडवांस ले लिया गया और उन्हें फायदा पहुँचाया गया। इतना ही नहीं, काले धंधे का पैसा सफेद किया गया।

आम आदमी पार्टी ने आरोपों को नकारा

भाजपा के आरोपों पर आम आदमी पार्टी ने प्रतिक्रिया दी है। पार्टी के प्रवक्ता ने कहा कि उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के घर, दफ्तर और पुश्तैनी घर समेत 30 से अधिक जगहों पर ED और CBI छापेमारी कर चुकी है। इन एजेंसियों को यहाँ कुछ नहीं मिला। अगर सबूत मिलता तो वह मनीष सिसोदिया को गिरफ्तार कर लेता।

आम आदमी पार्टी का कहना है कि गुजरात में पार्टी की लोकप्रियता से भाजपा घबरा गई है। इसलिए सरकारी एजेंसियों का दुरुपयोग करके आम आदमी पार्टी के नेताओं अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को परेशान किया जा रहा है।