शिक्षण संस्थानों में हिजाब पर प्रतिबंध को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है। बुर्का पक्ष के वकीलों में से एक निज़ाम पाशा भी हैं। अब निज़ाम पाशा का एक पुराना ट्वीट सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। अपने ट्वीट में पाशा ने दावा किया है कि हिजाब मुस्लिम महिलाओं की पहचान बता कर छेड़छाड़ करने वालों से उन्हें बचाने में सहायक साबित होता है। इसके लिए पाशा ने बाकायदा कुरान की आयतों का भी हवाला दिया है। यह ट्वीट उन्होंने फरवरी 2022 में किया था।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, निज़ाम पाशा ने कुरान के 33.59 का हवाला देते हुए लिखा था कि मुस्लिम महिलाओं को हिजाब अपनाना चाहिए, ताकि उनकी पहचान मुस्लिम के तौर पर साबित हो। उन्होंने अपने ट्वीट में आगे लिखा है कि हिजाब छेड़छाड़ करने वालों को यह बताता है कि इसे पहनने वाली एक मजबूत महिला है और उसके पीछे उसका पूरा समुदाय मजबूती से खड़ा हुआ है।
निज़ाम पाशा
निज़ाम पाशा का ये भी आरोप है कि हिजाब पर बैन लगाने के लिए हाईकोर्ट ने कुरान को गलत तरीके से पेश किया है। सितम्बर के पहले सप्ताह में पाशा ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि हिजाब पर बैन लगाने के लिए कर्नाटक हाईकोर्ट ने कुरान के तो तथ्य दिए वो सही नहीं थे। पाशा हाईकोर्ट की इस टिप्पणी से सहमत नहीं थे कि कुरान के हिजाब को इस्लाम का अनिवार्य अंग नहीं मानता।
कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट में सवाल खड़े करते हुए पाशा ने आगे कहा था कि उच्च न्यायालय ने कुरान के अनुवादक की सलाह का जिक्र किया है, न कि कुरान के पाठ का। इस मौके पर पाशा ने हाईकोर्ट द्वारा उल्लेख की गई एक कविता का भी जिक्र किया था, जिसमें कहा गया था कि किसी को भी इस्लाम में धर्मांतरित होने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। पाशा ने हाईकोर्ट में बोली गई कविता को ‘जिलाबाब’ से संबंधित बताया, जो कि पूरे शरीर को ढँकता है, जबकि हिजाब केवल सिर और छाती को ढँकता है। पाशा ने कहा कि उच्च न्यायालय द्वारा बोली गई कविता के अनुसार, जिलाबाब अनिवार्य नहीं था न कि हिजाब।
निज़ाम पाशा के अलावा हिजाब समर्थक एक अन्य वकील दुष्यंत दवे ने यूनिवर्सिटी से जुड़े संस्थानों में हेडस्कार्फ बैन के हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए बेहद बेतुके तर्क दिए। इस दौरान उन्होंने ब्राह्मणों द्वारा भारत पर कथित तौर पर कब्ज़ा करने और जैन और बौद्धों को बाहरी लोगों के रूप में साबित करने के लिए डॉ अम्बेडकर की बातों को अपने हिसाब से पेश किया।
कर्नाटक बुर्का विवाद
गौरतलब है कि जनवरी 2022 में कर्नाटक के उडुप्पी में क्लास के अंदर हिजाब बैन करने के आदेश के बाद विवाद खड़ा हो गया था। PFI से समर्थित कुछ मुस्लिम छात्राओं ने इस आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की थी। इस अपील के जवाब में कर्नाटक हाईकोर्ट ने 15 मार्च को फैसला देते हुए बताया कि हिजाब इस्लाम का अनिवार्य अंग नहीं है।
इंग्लैंड के लेस्टर (Leicester) शहर में इस्लामी कट्टरपंथियों द्वारा हिंदू लोगों पर हमले का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ कि बर्मिंघम के स्मेथविक से दुर्गा मंदिर के बाहर हंगामे की खबर आई है। जानकारी के मुताबिक, इंग्लैंड के वेस्ट मिडलैंड्स के स्मेथविक शहर में मंगलवार (20 सितंबर 2022) को स्पॉनलेन में स्थित मंदिर के बाहर करीब 200 कट्टरपंथी मुस्लिम इकट्ठा हो गए।
इंग्लैंड पुलिस की मौजूदगी में दुर्गा भवन को इस्लामी कट्टरपंथियों ने घेर लिया। इस दौरान उन्होंने जमकर हंगामा किया। कुछ तो मंदिर की दीवार पर भी चढ़ गए। मंदिर और मंदिर जाने वाले लोगों में खौफ पैदा करने के लिए इन लोगों ने ‘अल्लाह-हु-अकबर’ के नारे लगाए। साथ ही मंदिर की ओर मुँह करके हस्तमैथुन जैसे इशारे किए।
Look at this ?
First Leicester, now Smethwick. Where next?
Around 200 people marching towards the Durga Bhawan Hindu Centre.
It is clearly intimidating and frightening for local Hindus.
सोशल मीडिया पर इसका वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में आप इस्लामी कट्टरपंथी भीड़ को स्पॉनलेन स्थित दुर्गा भवन हिंदू सेंटर की ओर बढ़ते और कई लोगों को ‘अल्लाह-हू-अकबर’ के नारे लगाते हुए देख-सुन सकते हैं।
UPDATE: Tensions have risen, as the group of around 200 approach the exterior fencing of the Hindu centre. Police swiftly move them back to other side of road @SkyNews pic.twitter.com/t6220CjYqI
इंग्लैंड की पुलिस स्थिति को नियंत्रित करने को वहाँ मौके पर पहुँची। हालाँकि वो कुछ ज्यादा नहीं कर पाए। उनकी मौजूदगी में ही भीड़ में कुछ कट्टरपंथी मुस्लिम मंदिर की दीवारों पर चढ़ गए। इतना ही नहीं, “फक यू” और हस्तमैथुन करने जैसे इशारे करके उन्होंने हिंदुओं को डराने का भी काम किया।
बर्मिंघम वर्ल्ड की एक रिपोर्ट के अनुसार, ‘अपना मुस्लिम’ नाम के एक सोशल मीडिया अकाउंट ने मंगलवार को दुर्गा भवन मंदिर के बाहर ‘शांतिपूर्ण विरोध’ के लिए भीड़ को बुलाया था। मंदिर की दीवार पर चढ़ना अगर शांतिपूर्ण विरोध है, मंदिर के सामने हस्तमैथुन जैसे इशारे अगर शांतिपूर्ण विरोध है तो आतंकी हरकत किसे कहते हैं?
स्काई न्यूज के मुताबिक, मंदिर के बाहर करीब 200 लोग (इस्लामी कट्टरपंथी भीड़) एकत्र हो गई थी। इनमें में से किसी ने बोतलें भी फेंकी। इससे हालात काफी संवेदनशील हो गया।
लेस्टर (Leicester) में हिंदुओं पर हमला
बर्मिंघम के स्मेथविक से दुर्गा मंदिर के बाहर हंगामे की खबर से पहले लेस्टर में हिंदुओं पर हमला किया गया। इसकी शुरुआत एशिया कप 2022 में भारत-पाकिस्तान क्रिकेट मैच के बाद से हुई थी। पाकिस्तान के हारने के बाद हिंदुओं के समूह पर इस्लामी कट्टरपंथियों ने हमला कर दिया था।
लेस्टर में 18 सितंबर, 2022 को हिंदुओं के समूह पर इस्लामी कट्टरपंथियों ने हमला कर दिया था। इस दौरान ‘अल्लाह-हू-अकबर’ का नारा लगाते हुए मंदिर पर भी अटैक हुआ और उसके ऊपर लगे भगवा ध्वज को भी तोड़कर नीचे गिरा दिया गया। हिंदुओं के समूह पर इस्लामी कट्टरपंथियों द्वारा किए गए हमले में पुलिस अब तक 47 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। लेस्टर पुलिस ने 19 सितंबर 2022 को ट्वीट कर यह जानकारी दी थी।
लेस्टर पुलिस के अनुसार, शहर में फैली अशांति के मामले में 20 वर्षीय एक युवक को प्रतिबंधित हथियार रखने का दोषी पाया गया। ऐमॉस नोरोन्हा (Amos Noronha) नाम के इस शख्स को 10 महीने जेल की सजा सुनाई गई है।
दिल्ली के एम्स अस्पताल में मशहूर कॉमेडियन राजू श्रीवास्तव (Raju Shrivastav) ने आज अंतिम साँस ली। उनके परिवार ने इस खबर को कन्फर्म कर दिया है। पत्रकार विकास भदौरिया ने भी ट्वीट कर इस खबर की पुष्टि की है। उन्होंने लिखा, “एम्स से बुरी खबर आ रही है, राजू श्रीवास्तव का निधन हो गया है। प्रभु उन्हें श्रीचरणों में स्थान दे। ॐ शांति शांति शांति।”
एम्स से बुरी खबर आ रही है, राजू श्रीवास्तव का निधन, प्रभु उन्हें श्रीचरणों में स्थान दे. ॐ शांति शांति शांति
बता दें कि 10 अगस्त 2022 की सुबह एक्सरसाइज करते वक्त राजू श्रीवास्तव बेहोश होकर गिर गए थे। इसके बाद उन्हें एम्स लाया गया था। वहाँ डॉक्टरों ने बताया कि उन्हें हार्ट अटैक आया था। इसके कारण उनका ब्रेन डैमेज हो गया और उन्हें एंजियोप्लास्टी करनी पड़ी।
पिछले 10 साल में उनकी 3 बार एंजियोप्लास्टी हो चुकी थी। इसके बाद सोशल मीडिया पर उनके निधन के खबरें वायरल हुई थीं। इसको देखते हुए उनके परिजन और बॉलीवुड के पूर्व अभिनेता एवं महाभारत में भीष्म पितामह का किरदार निभाने वाले मुकेश खन्ना ने तब इसका खंडन किया था। इतने दिनों तक मौत से लड़ने के बाद आज वो हार गए। सबको हँसाने वाले आज बहुतों को रुला गए।
तमिलनाडु के चेन्नई में बाथरूम में कैमरा लगा कर नहाती महिलाओं का आपत्तिजनक वीडियो बनाने के आरोप में पुलिस ने 2 लोगों को गिरफ्तार किया है। दोनों ने महिला का वीडियो उनके बाथरूम में कैमरे लगा कर बनाया था। ये कैमरे बिल्डिंग के बाहर से सेट किए गए थे। दोनों आरोपितों के पास मिले कई वीडियो को पुलिस ने सीज कर लिया है। यह गिरफ्तारी मंगलवार (20 सितम्बर 2022) को हुई है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक दोनों आरोपित वेलचेली के रहने वाले हैं। दोनों दिहाड़ी मजदूर हैं। दोनों आरोपित वेलचेली क्षेत्र के नर्मदा स्ट्रीट पर घूम कर वहाँ रहने वाले लोगों के बाथरूम में कैमरे लगाने की फिराक में थे। स्थानीय निवासियों को दोनों की हरकतें संदिग्ध लगीं तो उनसे पूछताछ की। शुरू में दोनों आरोपितों ने लोगों को गुमराह करने की पूरी कोशिश की। इसके बाद लोगों ने दोनों के मोबाइल ले लिए।
बताया जा रहा है कि दोनों आरोपितों ने अपने मोबाइल को लोगों से छीन कर उसमें मौजूद वीडियो को डिलीट करने की कोशिश की। इस दौरान दोनों संदेहास्पद जवाब देते रहे, जिससे स्थानीय निवासियों का शक उन पर और गहरा होता चला गया। दोनों को पकड़ने वाले लोगों ने पाया कि कई वीडियो मोबाइल की गैलरी से डिलीट कर दी गई हैं। इसके बाद लोगों ने पुलिस बुलाई और दोनों आरोपितों को उनकी कस्टडी में दे दिया।
पुलिस ने जब उन दोनों के मोबाइल की सॉफ्टवेयर से उसकी रिकवरी की, तब उसमें बेहद आपत्तिजनक वीडियो पाए गए। बताया जा रहा है कि उन दोनों के मोबाइल में कई अलग-अलग जगहों के बाथरूम में बने वीडियो मौजूद थे।
पुलिस के मुताबिक दोनों आरोपित बाथरूम के बाहरी हिस्से में अपने मोबाइल को फिट कर दिया करते थे। पुलिस का ये भी मानना है कि जिस बाथरूम में वीडियो बनाए गए, वो कॉमन थे इसलिए उनकी इंट्री पर कोई शक नहीं करता था। जाँच अधिकारी का ये कहना है कि आरोपित सुबह अपने मोबाइल को सेट किया करते थे और कुछ घंटों बाद उसे निकाल लेते थे।
पूछताछ में पकड़े गए आरोपितों ने पुलिस को बताया कि वो अपने बनाए गए वीडियो को खुद देखते थे। हालाँकि पुलिस इस बात की भी जाँच कर रही है कि क्या दोनों ने वो वीडियो किसी और को भी फॉरवर्ड किया है।
पुलिस ने अब तक की जाँच में यह भी पाया है कि दोनों के खिलाफ किसी महिला द्वारा अभी तक शिकायत भी नहीं की गई है। दोनों ने बताया कि वो इस काम को पिछले 6 महीने से कर रहे हैं। फिलहाल दोनों को गिरफ्तार करके न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया है।
कर्नाटक पुलिस ने राज्य के शिवमोगा से खूँखार वैश्विक आतंकी संगठन ISIS के 3 संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार किया है। बताया जा रहा है कि ये लोग कर्नाटक में किसी बड़े बम ब्लास्ट की तैयारी में थे। गिरफ्तार किए संदिग्धों का नाम शारिक, माज़ी और सैयद यासीन बताया जा रहा है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार तीनों आतंकियों के खिलाफ कर्नाटक पुलिस ने आईपीसी की विभिन्न धाराओं और ‘गैर-कानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (UAPA)’ के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए तीनों संदिग्ध आतंकी आईएसआईएस (ISIS) के लिए देश विरोधी गतिविधियों को अंजाम देने का काम करते हैं।
एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि ये आतंकी संगठन ISIS के कहने पर कर्नाटक में बड़ा विस्फोट करने की साजिश भी रच रहे थे। इसके लिए इन तीनों आतंकियों ने प्रशिक्षण भी लिया था। इससे पहले कि वो अपने नापाक इरादों में कामयाब हो पाते, पुलिस की टीम ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। बताया जा रहा है कि तीनों शिवमोगा और तीर्थहल्ली के रहने वाले हैं और उनका संबंध मंगलुरु से है।
इसके साथ-साथ बताया जा रहा है कि आतंकियों के लीडर और पेशे से इलेक्ट्रिक इंजीनियर यासीन को गिरफ्तार किया गया है। इस मामले में राज्य सरकार के गृहमंत्री अरागा जनेंद्र ने बताया कि पुलिस ने सूत्रों से मिली जानकारी के बाद छापेमारी की थी। इस दौरान पुलिस ने आतंकी संगठन ISIS से जुड़े दो संदिग्धों को गिरफ्तार कर लिया। इनसे पूछताछ कर पुलिस ने तीसरे और आतंकी को भी गिरफ्तार कर लिया गया।
पहले हुआ था तिरंगे का अपमान
गौरतलब है कि कर्नाटक का शिवमोगा पिछले महीने में भी चर्चा में आया था। बताया गया था कि 15 अगस्त के मौके पर यहाँ वीर सावरकर के पोस्टर फाड़े गए वहाँ पर तिरंगे का भी अपमान हुआ। कथित तौर पर सावरकर की तस्वीर फाड़ने वाले उस जगह टीपू सुल्तान और मोहम्मद अली जिन्ना के पोस्टर लगाना चाहते थे। वहीं प्रेम सिंह नामक एक व्यक्ति को चाकू मारने वालों को लेकर यह बताया गया कि हमलावरों ने प्रेम के माथे पर टीका देख कर अटैक किया था।
ये सब शिवमोगा के तुमकुरु में घटित हुआ। इस मामले में तुमकुरु के एसपी राहुल कुमार ने बताया था, “वीर दामोदर सावरकर का एक पोस्टर तुमकुरु में अशोका रोड पर लगा था जिसे 15 कुछ अज्ञात लोगों ने माहौल बिगाड़ने की नीयत से फाड़ दिया।”
भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, लेकिन यहाँ के कुछ राजा-महाराजाओं का भी जनता से ऐसा जुड़ाव रहा कि आज भी लोग उन्हें याद करते हैं। आज हम हम बात कर रहे हैं छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले के लोगों के बारे में, जहाँ के लोग आज भी अपने राजा प्रवीर चंद्र भंज देव को भूले नहीं है और उन्हें भगवान के समान पूजते भी हैं।
बस्तर के राजा रहे प्रवीर चंद्र भंज देव पर विवेक कुमार द्वारा निमित-निर्देशित एक शॉर्ट फिल्म भी ऑपइंडिया के यूट्यूब चैनल पर रिलीज हुई है, जिसे देखने के बाद आपको पता चलेगा कि उनके बारे में लोग आज भी क्या-क्या सोचते हैं और उन्हें क्यों महान माना जाता है। इस फिल्म में उनके बारे में आपको और भी बहुत कुछ जानने को मिलेगा। यह एक शॉर्ट फिल्म हैं, जिसका नाम ‘आइ प्रवीर द आदिवासी गॉड (I Pravir the Adivasi God)’ है। इस फिल्म को अब आप ऑपइंडिया पर एक्सक्लूसिव देख सकते हैं।
राजा प्रवीर चंद्र भंज देव की हत्या साल 1966 में कर दी गई थी। तब वो अपनी प्रजा के लिए तत्कालीन सरकार से लड़ रहे थे। बस्तर के आदिवासी लोगों के लिए वो आज भी भगवान हैं और उनको लोग इसी रूप में पूजते भी हैं।
इस फिल्म में बस्तर की आदिवासी जनता अपने राजा प्रवीर चंद्र भंजदेव को याद करते हुए बताती है कि आज बेशक भारत में लोकतांत्रिक व्यवस्था है, लेकिन राजा अपने लोगों और उनकी आकांक्षाओं को आज के नेताओं से अधिक समझते थे। आदिवासी समाज के लोगों ने कहा कि इस लोकतांत्रिक व्यवस्था में जरूर विकास हुआ होगा, लेकिन इस विकास का जितना लाभ आदिवासियों को होना चाहिए उतना नहीं हो सका।
लोगों का यहाँ तक कहना है कि राजा आदिवासियों के हितों और जरूरतों के बारे में ज्यादा सोचते और समझते थे। आज भी बस्तर के लोगों के घरों में राजा प्रवीर चंद्र भंज देव फोटो लगी हुई मिलती है। फिल्म में आप देख सकते हैं कि कैसे आदिवासी समाज के स्थानीय व्यक्ति ने बताया कि यदि पुलिस की गोलीबारी में राजा प्रवीर चंद्र की मौत न हुई होती तो बस्तर में नक्सली संघर्ष की शुरुआत भी नहीं होती।
एक अन्य आदिवासी समाज के व्यक्ति ने बताया कि उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उनका पार्थिव शरीर तक भी यहाँ के लोगों को नहीं मिला था, सिर्फ उनके कपड़े मिले थे। बाद में उसी वस्त्र को रख कर उनकी समाधि बनाई गई। एक व्यक्ति ने बताया कि लोहा खदान के संघर्ष के कारण उनकी हत्या की गई थी। राजा का मानना था कि बस्तर के प्राकृतिक संसाधनों पर स्थानीय आदिवासियों का सबसे ज्यादा हक बनता है।
राजा प्रवीर चंद्र भंज देव अविभाजित मध्य प्रदेश में जगदलपुर विधानसभा सीट से विधायक भी थे। वे आदिवासियों के हितों को लेकर मुखर भी थे और उनका यह मानना था कि जिले के प्राकृतिक संसाधनों पर स्थानीय आदिवासियों का हक़ सबसे अधिक है। आदिवासियों के इन्हीं हितों के लिए वे तत्कालीन कॉन्ग्रेस सरकार के विरुद्ध खड़े हुए थे। तत्कालीन सरकार के साथ अपनी लड़ाई के दौरान ही 25 मार्च 1966 की रात पुलिस फायरिंग में उनके ही महल में उनकी मृत्य हो गई थी।
इस फिल्म के शुरुआती दृश्यों में बस्तर जिले के शानदार प्राकृतिक नजारों को दिखाया गया है, जिसमें स्वच्छ नदी और झरनों के रूप में आप बस्तर की खूबसूरती का आनंद लेते हुए इतिहास को देख-समझ सकते हैं। फिल्म में बस्तर के आदिवासी संस्कृति को भी दिखाया गया है, जिसमें नृत्य और अन्य कला प्रदर्शन को भी शामिल किया गया है।
हालाँकि, फिल्म में ये कड़वी सच्चाई भी है कि कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो आज राजा को पूरी तरह से भूल गए हैं और उनकी तस्वीर तक को नहीं पहचानते। इसके विपरीत कुछ स्थानीय लोगों का तो यहाँ तक कहना है कि आज बस्तर जो कुछ भी है, वो राजा की ही बदौलत है। लोगों का यह भी कहना है कि राजा प्रवीर चंद्र भंज देव ने हमेशा लोगों को दिया ही है। फिल्म में बस्तर के आधुनिक विकास कार्यों के बारे में भी दिखाया गया है।
समाजवादी पार्टी के नेता और उत्तर प्रदेश के रामपुर से विधायक आजम खान की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रहीं हैं। मंगलवार (20 सितंबर, 2022) को जौहर यूनिवर्सिटी में हुई खुदाई के दौरान ओरिएंटल इंटर कॉलेज से चोरी हुई पुस्तकें बरामद हुई हैं। इससे पहले सोमवार (19 सितंबर) को जब यूनिवर्सिटी में खुदाई की गई थी तब करोड़ों रुपए की ऑटोमैटिक स्वीपिंग मशीन बरामद की गई थी।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आजम खान की जौहर यूनिवर्सिटी में खुदाई की जा रही है। इस दौरान यूनिवर्सिटी के लिफ्ट शॉफ्ट में दबाकर रखी गईं बेहद कीमती पुस्तकों का जखीरा बरामद हुआ है। ये सभी किताबें राजकीय ओरिएंटल कॉलेज के लाइब्रेरी से चोरी की गई थीं। इस कॉलेज की स्थापना साल 1774 में रामपुर के नवाब ने की थी। जिसे पहले आलिया मदरसा के नाम से जाना जाता था। चोरी के इस मामले में, साल 2019 में एफआईआर की गई थी।
कैसे मिली किताबें और मशीन
आजम खान के बेटे और सपा विधायक अब्दुल्ला आजम के दोस्त सालिम और अनवर का जुआ खेलते हुए का एक वीडियो वायरल हुआ था। इस वीडियो के आधार पर पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया था। इसके बाद पुलिस ने इन दोनों से कड़ी पूछताछकी थी। इस पूछताछ में सामने आई जानकारी और निशानदेही के आधार पर जौहर यूनिवर्सिटी में खुदाई की गई थी। इस खुदाई में ही ये किताबें बरामद हुई हैं।
इस मामले में अपर पुलिस अधीक्षक संसार सिंह का कहना है, सलीम और अनवर को 2 दिन पहले गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी के बाद इन दोनों से कड़ी पूछताछ की गई थी। इसी दौरान एक स्थानीय व्यक्ति बाकर खान द्वारा एक और मुकदमा दर्ज कराया गया था।
संसार सिंह का कहना है कि मुकदमा दर्ज कराते हुए बाकर खान ने बताया था कि पालिका द्वारा सफाई करने के लिए कुछ मशीनें मँगाई गई थीं। इन मशीनों को जौहर यूनिवर्सिटी ने अपने कैंपस में मँगा ली थीं। आजम खान, अब्दुल्लाह आजम खान और रामनगर पालिका तत्कालीन चेयरमैन अजहर अहमद खान की मिलीभगत से सफाई मशीनों को यूनिवर्सिटी पहुँचाया गया था। इसके बाद जब सरकार बदली और प्रशासन ने मशीनों का पता करने की कोशिश की तो इन मशीनों को काट कर यूनिवर्सिटी कैंपस में ही दबा दिया गया।
मशीन चोरी के मामले में पुलिस ने IPC की धारा 409, 120-B और सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम धारा 2 और 3 के तहत एफआईआर दर्ज की है। इस एफआईआर में आजम खान उनके पुत्र अब्दुल्ला आजम समेत 7 लोगों को आरोपित दर्शाया गया है।
हाल में कई रिपोर्टें आई हैं जो बताती हैं कि नेपाल भारत बॉर्डर पर तेजी से डेमोग्राफी में बदलाव हो रहा है। मस्जिद-मदरसों की संख्या लगातार बढ़ रही है। जमीनी हालात का जायजा लेने के लिए 20 से 27 अगस्त 2022 तक ऑपइंडिया की टीम ने सीमा से सटे इलाकों का दौरा किया। हमने जो कुछ देखा, वह सिलसिलेवार तरीके से आपको बता रहे हैं। इस कड़ी की 18वीं रिपोर्ट:
श्रावस्ती और बलरामपुर जिलों में मुस्लिम आबादी के साथ इबादतगाहों पर रिपोर्ट के बाद हमने अपना रुख नेपाल सीमा से सटे सिद्धार्थनगर जिले की तरफ किया। सिद्धार्थनगर में हमने बलरामपुर जिले के पचपेड़वा मार्ग से प्रवेश किया।
यह रिपोर्ट एक सीरीज के तौर पर है। इस पूरी सीरीज को एक साथ पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
सिद्धार्थनगर जिले में भी हमें सड़क पर और बाजारों में दिखने वाली इबादतगाहों की संख्या कमोबेश श्रावस्ती और बलरामपुर जिलों जैसी ही लगी। इस रिपोर्ट में हम सिद्धार्थनगर जिले की उन सड़कों और बाजारों की चर्चा कर रहे हैं, जो नेपाल सीमा से लगती हैं।
सिद्धार्थनगर में घुसते ही इबादतगाह
बलरामपुर जिले के पचपेड़वा से जैसे ही हमने सिद्धार्थनगर में प्रवेश किया, वैसे ही हम मलगाहिया गाँव में पहुँचे। यह गाँव नेपाल बॉर्डर से लगभग सटा हुआ है और सीमा को छूती हुई सड़क के किनारे बसा हुआ है। इस गाँव में सड़क से ही 2 इबादतगाहों को साफ़-साफ देखा जा सकता है। दोनों इबादतगाहें सफेद रंग की हैं, जिनकी मीनारें काफी दूर से दिखाई देती हैं। स्थानीय लोगों ने इस गाँव में मदरसा चलने की भी जानकारी दी।
मालगाहिया गाँव में 2 मस्जिदें
अभी हम मालगाहिया गाँव से अधिकतम 2 किलोमीटर ही चले होंगे कि हमें जियाभारी नाम की बाजार दिखी। ज़ियाभारी बाज़ार में हमने सड़क से कुछ ही दूरी पर पेड़ों और दुकानों के पीछे एक और इबादतगाह देखी। यह इबादतगाह सफेद रंग की थी।
ज़ियाभारी में इबादतगाह
बॉर्डर पर गंदगी और नो मैन्स लैंड में पालतू बकरियाँ
जियाभारी के बाद बीच में कई अन्य मज़ारें और छोटी-बड़ी इबादतगाहें छोड़ कर हम नेपाल सीमा के बढ़नी बाज़ार पहुँचे। यहाँ हमें सीमा पर कूड़े और गंदगी का ढेर दिखा। बॉर्डर के नो मैन्स लैंड एरिया में पालतू बकरियाँ चर रही थीं। बॉर्डर पर सिद्धार्थनगर की तरफ हमें अहमद बूट हाउस, मक़सूद शू सेंटर, सलीम की जूते की दुकान आदि दिखाई पड़ीं।
नो मैन्स लैंड में कचरे का अम्बार
पहले की सरकारों में ठीक से नहीं मना पाते थे त्यौहार
बढ़नी बॉर्डर पर सिद्धार्थनगर जिले में एक स्कूल के बोर्ड पर लिखे वेदमंत्रों ने हमारा ध्यान अपनी तरफ खींच लिया। यह स्कूल भारतीय सीमा का अंतिम स्कूल है, जिसका नाम ‘दयानंद लघु माध्यमिक विद्यालय’ है। यहाँ छुट्टी हो चुकी थी लेकिन हमने यहाँ मौजूद महिला प्रिंसिपल से बात की।
‘दयानंद लघु माध्यमिक विद्यालय’ की महिला प्रिंसिपल ने हमें बताया कि पहले की सरकारों में 12 बजे दुर्गापूजा की मूर्ति उठाने का आदेश मिल जाता था लेकिन इस सरकार में यहाँ के लोग काफी हद तक सुरक्षित महसूस करते हैं। महिला प्रिंसिपल ने खुद को लगभग डेढ़ दशक से उसी स्कूल में पोस्टेड बताया। इसी स्कूल का एक हिस्सा आर्यकन्या विद्यालय भी है।
दयानन्द और आर्यकन्या स्कूल
कभी बॉर्डर पर थी दयानन्द विद्यालय की सबसे ज्यादा जमीन
बॉर्डर पर मौजूद दयानन्द विद्यालय की बॉउंड्री से सट कर ‘जय माँ अन्नपूर्णा गिरी गैस चूल्हा रिपेयर’ नाम से दुकान चला रहे बुजुर्ग व्यक्ति ने हमें बताया कि कभी बढ़नी बॉर्डर पर सबसे ज्यादा जमीन इसी दयानन्द स्कूल के प्रिंसिपल तिवारी जी की हुआ करती थी। उन्होंने हमें आगे बताया कि धीरे-धीरे कई लोगों ने उनकी जमीनें खरीद डालीं और अब तिवारी जी का एकमात्र स्कूल बचा हुआ है।
बॉर्डर पर मौजूद दुकानदार
बढ़नी में थोक भाव में मिलते हैं नकाब
सिद्धार्थनगर के बढ़नी बाजार में हमें जो बेहद ख़ास बात दिखी, वो थी नकाब सेंटर। हमने बढ़नी रेलवे स्टेशन के कुछ ही दूर पर नकाब की दुकान देखी, जिसका नाम ‘उमर नकाब सेंटर’ है। इस दुकान के बोर्ड पर बाकायदा हिजाब और बुर्का पहने महिलाओं को दिखाया गया है।
‘उमर नकाब सेंटर’ के बोर्ड के ऊपर अरबी भाषा में कुछ लिखा हुआ था। इस जगह पर ईरानी चादर भी बनाई जाती है। इस दुकान से नकाब खरीद कर ले जा रहे एक व्यक्ति ने हमें बताया कि यहाँ हिजाब की अच्छी बिक्री होती है।
उमर नकाब सेंटर
गौरतलब है कि इसी सिद्धार्थनगर जिले में डुमरियागंज नाम की बाज़ार भी है, जहाँ विगत विधानसभा चुनाव होने के बाद सपा की महिला मुस्लिम प्रत्याशी सैयदा खातून के समर्थन में आपत्तिजनक नारेबाजी हुई थी। उस केस में पुलिस ने नव निर्वाचित महिला विधायक और उनके कई समर्थकों पर भी FIR दर्ज की थी। डुमरियागंज बाजार भी मुस्लिम बहुल मानी जाती है।
नेपाल बॉर्डर पर बढ़ती मुस्लिम आबादी और पनपते मस्जिद-मदरसों वाली सीरीज में ही सिद्धार्थनगर जिले के डुमरियागंज पर हमने पहले भी एक रिपोर्ट की है। डुमरियागंज ही वो जगह है, जहाँ की ‘खैर टेक्निकल सोसाइटी’ के द्वारा उर्दू और अरबी नेमप्लेट वाले नल भारत-नेपाल बॉर्डर पर जगह-जगह लगाए गए हैं। इन नलों पर अरबी भाषा में ‘संयुक्त अरब अमीरात एसोसिएशन’ और इंग्लिश में ‘खैर टेक्निकल सोसाइटी इंडिया’ लिखा मिला था। स्थानीय लोगों ने इस रिपोर्ट में बताया था कि ऐसे नल ‘जकात’ के पैसे से लगाया गया है।
बॉर्डर के पास सैकड़ों मस्जिद-मदरसे
ऑपइंडिया ने सिद्धार्थनगर जिले में भी नेपाल बॉर्डर पर मौजूद मस्जिदें और मदरसों की जानकारी जुटाई। हमारे द्वारा जुटाई गई जानकारी के मुताबिक सिद्धार्थनगर में नेपाल बॉर्डर से 15 किलोमीटर क्षेत्र में लगभग 260 मस्जिदें, 175 मदरसे और 20 ऐसी मस्जिदें हैं, जिसमें साथ में मदरसा भी संचालित है।
सिद्धार्थनगर जिले में मज़ारों की गिनती इन इबादतगाहों से अलग है। हालाँकि ये आँकड़े सिद्धार्थनगर की पूरी नेपाल से लगी सीमा के नहीं हैं। स्थानीय लोगों ने कैमरे पर न आने की शर्त पर हमें बताया कि मस्जिद और मदरसों की अनुमानित संख्या इससे भी ज्यादा है।
मैगजीन ‘Playboy’ के संस्थापक ह्यूग हेफ़नर अमेरिकी मनोरंजन इंडस्ट्री में एक बड़ा नाम रहे हैं, खासकर फैशन और मॉडलिंग की दुनिया में। उनकी ‘हवेली’ (Mansion) की कहानियाँ 2017 में 91 वर्ष की आयु में उनकी मौत के बाद भी चर्चा का विषय बनी रहती है। उम्र ढलने के बाद भी कई लड़कियों के साथ उनके अफेयर और विलासिता के चर्चा कम नहीं हुए। अपनी मृत्यु से 5 साल पहले उन्होंने तीसरी शादी की थी। अब उनके बारे में नया खुलासा हुआ है।
ह्यूग हेफ़नर के साथ समय व्यतीत करने वाली दो महिलाओं ने बताया है कि वो सेक्स करने के लिए ‘Baby Oil (बच्चों वाले तेल)’ का इस्तेमाल करते थे। 44 वर्षीय होली मैडिसन और 48 वर्षीय ब्रिजेट मरकार्डत ने ये आरोप लगाए। साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि इसे Lubricants के रूप में प्रयोग में लाने से संक्रमण का खतरा बना रहता है। 2000 के दशक की शुरुआत में ह्यूग हेफनर की तीन प्रमुख गर्लफ्रेंड्स में ये दोनों शामिल थीं।
उनकी पूर्व गर्लफ्रेंड्स ने कहा कि सेक्स के लिए बच्चों वाले तेल का गुप्तांग पर इस्तेमाल करने को लेकर ह्यूग हेफ़नर की क्या सनक थी, ये समझ से परे है। उन्होंने कहा कि ये काफी घिनौना था। उन्होंने कहा कि उन्हें लुब्रीकेंट के रूप में ये पसंद नहीं था, क्योंकि इससे महिलाओं को इन्फेक्शन हो जाता था। इसके लिए उन्हें डॉक्टर की सलाह भी लेनी पड़ी थी। मैडिसन ने कहा, “मैं उनसे कहती थीं। सिर्फ स्किन तक ही रखो। इसे वहाँ मत डालो।” एक अन्य महिला ने बताया था कि युवतियाँ बेडरूम में ह्यूग हेफ़नर को ‘डैडी’ कहती थीं और कई लोगों के सामने उनसे सेक्स करना पड़ता था।
उन्होंने बताया कि अन्य महिलाओं ने उन्हें बताया था कि ह्यूग हेफ़नर उन्हें पीठ के बल लिटा देते थे और फिर इस तेल का इस्तेमाल करते थे। उन्होंने कहा कि इसे सोच कर वो आज भी गुस्सा होती हैं और ये उनकी मर्जी के बिना किया जाता था। उन्होंने कहा कि ‘Playboy Mansion’ में रहने वाली लड़कियाँ जल्द से जल्द ह्यूग हेफ़नर के साथ सेक्स की प्रक्रिया को निपटना चाहती थी, जो उनके लिए रूटीन बन गया था। ह्यूग हेफ़नर एक ‘ब्लैक बुक’ में अपने साथ सोई लड़कियों की सूची रखते थे।
भारत की तरफ से ऑस्कर 2023 के लिए फिल्म छेल्लो शो (Last Film Show) को बेस्ट इंटरनेशनल फीचर फिल्म केटेगरी के लिए भेजा गया है। फिल्म छेल्लो शो (Chhello Show) एक गुजराती फिल्म है जिसे पान नलिन ने लिखा और डायरेक्ट किया है। अंग्रेजी में इसका नाम लास्ट फिल्म शो (Last Film Show) है।
पान नलिन, सिद्धार्थ रॉय कपूर, धीर मोमाया और मार्क ड्यूले द्वारा निर्मित फिल्म ‘छेल्लो शो’ को ऑस्कर अवार्ड्स के लिए नॉमिनेट किए जाने के बाद निश्चित तौर पर कई फ़िल्मी विश्लेषकों को हैरानी हुई है। वास्तव में ऐसे कयास लगाए जा रहे थे कि ऑस्कर के लिए RRR या ‘द कश्मीर फाइल्स’ को भारत की तरफ से एंट्री के रूप में भेजा जाएगा। हालाँकि, ‘फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया’ ने रविवार (20 सितंबर, 2022) को ऑस्कर 2023 के लिए भारत की तरफ से ‘छेल्लो शो’ को भेजे जाने की आधिकारिक घोषणा की है।
गौरतलब है कि पान नलिन को एंग्री इंडियन गॉडेस, वेली ऑफ फ्लॉवर्स, फेथ कनेक्शन जैसी अवॉर्ड विनिंग फिल्मों के निर्देशन के लिए जाना जाता है। ऐसी ही फिल्म ‘छेल्लो शो (लास्ट फिल्म शो)’ भी है। इस फिल्म में गाँव के एक ऐसे छोटे बच्चे समय की कहानी है, जिसे फिल्मों से प्यार होता है। गुजरात के छलाला गाँव में यह बच्चा फिल्म देखने के लिए प्रोजेक्शन रूम में एक सिनेमा प्रोजेक्टर टेक्नीशियन की मदद से पहुँच जाता है और वहाँ कई फिल्में देखता है। फिल्में देखते हुए उसकी जिंदगी पूरी तरह बदल जाती है। फिल्म में सिंगल स्क्रीन सिनेमा के कल्चर को बखूबी दिखाया गया है।
ऑस्कर 2023 के लिए आधिकारिक एंट्री हासिल करने के बाद छेल्लो शो के डायरेक्टर पान नलिन ने कहा, “मैंने कभी नहीं सोचा था कि ऐसा भी दिन आएगा और खुशियों का उत्सव लाएगा। ‘छेल्लो शो’ को दुनिया भर से प्यार मिला है। लेकिन, मेरे दिल में एक दर्द था कि मैं इसे भारत में कैसे प्रदर्शित करूँ। अब मैं फिर से साँस ले सकता हूँ और सिनेमा में विश्वास कर सकता हूँ जो मनोरंजन करता है और प्रेरणा देता है। धन्यवाद FFI, धन्यवाद जूरी।”
OMG! What a night this going to be! Gratitude to Film Federation of India and thank you FFI jury members. Thank you for believing in Chhello Show. Now I can breathe again and believe in cinema that entertains, inspires and enlightens! @LastFilmShow1#ChhelloShow#Oscars
इस फिल्म के प्रोड्यूसर सिद्धार्थ रॉय कपूर ने कहा, “हम रोमांचित और सम्मानित महसूस कर रहे हैं कि हमारी फिल्म, ‘लास्ट फिल्म शो’ को अकादमी पुरस्कारों में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए चुना गया है। सिनेमा के जादू और चमत्कार के एक्सपीरियंस का जश्न मनाने वाली इस तरह की फिल्म के लिए इससे अधिक बेहतर समय नहीं हो सकता है।”
उन्होंने कहा कि जब महामारी के कारण दुनिया भर के सिनेमाघर बंद हो गए थे, तब यह फिल्म दर्शकों को एक अंधेरे सिनेमा हॉल में फिल्म देखने के अनुभव के साथ पहली बार प्यार में पड़ने की याद दिलाती है। उन्होंने कहा कि इस फिल्म के साथ अपने देश का प्रतिनिधित्व करना हमारे लिए बहुत गर्व की बात है।
बता दें कि दुनिया भर के आलोचकों और दर्शकों के दिलों को जीतने के बाद ‘द छेल्लो शो (लास्ट फिल्म शो)’ को आगामी 14 अक्टूबर को भारत के कुछ चुनिंदा सिनेमाघरों में रिलीज किया जाएगा। हालाँकि, अब ऑस्कर के लिए इसे एंट्री के रूप में भेजे जाने के बाद इस बात की उम्मीद जताई जा रही है कि दर्शक इस फिल्म की स्क्रीन बढ़ाने की माँग करेंगे, जिससे इस फिल्म के देश के कई बड़े-छोटे सिनेमाघरों में भी दिखाया जा सके।