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‘मेरे लिए पार्टी से पहले धर्म रक्षा जरूरी’: BJP से निलंबित MLA टी राजा सिंह बोले- हमेशा मोदी का विश्वस्त रहूँगा, बेल दिलाने वाले वकील को भी मिल रही धमकी

हैदराबाद में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के निलंबित विधायक टी राजा सिंह बेल मिलने के बाद रिहा हैं। कट्टरपंथी दोबारा वीडियो के आधार पर उनकी गिरफ्तारी की माँग कर रहे हैं। वहीं इस बीच उनका कहना है कि उन्होंने कुछ भी गलत नहीं कहा। वह हमेशा नरेंद्र मोदी और अमित शाह के सच्चे सैनिक रहेंगे। लेकिन उनके लिए धर्म की रक्षा पहले है।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा, “मेरे लिए पार्टी से ज्यादा, धर्म को बचाना जरूरी है।” उन्होंने विवादित वीडियो के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से हटाए जाने पर कहा कि वो उस वीडियो का पार्ट-2 भी लेकर आएँगे जिसमें और भी बातें होंगी।

टी राजा सिंह की वीडियो, गिरफ्तारी और बेल

बता दें कि टी राजा सिंह पहले मुनव्वर फारूकी के शो के विरोध में आवाज उठा रहे थे। इसी क्रम में उन्होंने अपनी वीडियो बनाई और उसमें इस्लाम व बुजुर्ग व्यक्ति के बारे में बात करने लगे। इसी वीडियो को देख मुस्लिमों ने आरोप लगाया कि उन्होंने पैगंबर मोहम्मद पर अपमानजनक टिप्पणी की। इसके बाद वह सभी सैंकड़ों की भीड़ जुटाकर सड़कों पर आ गए।

टी राजा सिंह के खिलाफ दबीरापुरा और मंगलहाट पुलिस थानों में अलग-अलग केस दर्ज हुआ। उनपर दो संप्रदाय को भड़काने के आरोप लगे। मंगलवार की सुबह उनकी गिरफ्तारी हुई, दोपहर में बीजेपी ने उन्हें पार्टी से निलंबित किया और फिर कोर्ट ने उन्हें 14 दिन न्यायिक हिरासत में भेजा।

मंगलवार की शाम में ही राजा सिंह के वकील ने उनकी रिहाई के लिए बेल याचिका दी। इसमें बताया गया कि कैसे उनको बिन नोटिस दिए गिरफ्तार किया गया है। कोर्ट ने दलील को स्वीकारा और बेल मंजूर की।

टी राजा सिंह के रिहा होने के बाद राज्य में बवाल, वकील को भी UAE से धमकी मिली

राजा सिंह के रिहा होते ही हैदराबाद में चारों ओर दोबारा विरोध शुरू हो गया। कट्टरपंथी बाहर सड़कों पर आए और दोबारा हर जगह ‘सर तन से जुदा गूँजने लगा।’ इसी दौरान राजा सिंह के वकील को यूएई के नंबरों से 3 बार जान से मारने की धमकी आई।

हैदराबाद के शालीबांदा में तो पुलिस के साथ प्रदर्शनकारियों की हिंसक झड़प की घटना घटी। पुलिस वैन में भी कथिततौर पर प्रदर्शनकारियों ने तोड़फोड़ की। इसके अलावा बाजारों से दुकानें जबरन बंद कराने की, राजा सिंह के पोस्टर्स पर चप्पल मारने की, उनका पुतला जलाने की घटना भी प्रकाश में आई।

‘इतिहास में जनजातीय वीरों का नहीं किया गया ठीक से वर्णन’: 125 विश्वविद्यालयों में NCST के कार्यक्रम, बताया जा रहा जनजातीय नायकों का योगदान

स्वतंत्रता संग्राम में जनजातीय नायकों के योगदान पर छत्तीसगढ़ के बस्तर स्थित शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय से कार्यक्रमों की शुरुआत हुई। देश भर के 125 विश्विद्यालयों में इसके तहत कार्यक्रम आयोजित किए जाने का निर्णय लिया गया है। ‘राष्‍ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST)’ आजादी के अमृत महोत्सव के अंतर्गत ऐसे कार्यक्रम आयोजित कर रहा है। बस्तर में हुए कार्यक्रम में 300 से ज्‍यादा छात्रों ने हिस्सा लिया।

कई विद्वानों, प्रोफेसरों और जनजातीय विषयों के इतिहासकार व बुद्धिजीवी इसमें शामिल हुए। ‘आजादी के अमृत महोत्‍सव’ के तहत ‘राष्‍ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग’ देश भर के 125 विश्वविद्यालयों के साथ मिल कर स्‍वतंत्रता संग्राम में जनजातीय नायकों के योगदान पर कार्यक्रम आयोजित कर रहा है। इस श्रृंखला के तहत मंगलवार (23 अगस्त, 2022) से बस्‍तर स्थित शहीद महेंद्र कर्मा विश्‍व‍विद्यालय में कार्यक्रम की शुरुआत हुई।

यूनिवर्सिटी के ‘स्‍वामी आत्‍मानंद सभागार’ में हुए कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर आमंत्रित राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के सदस्य अनंत नायक ने स्‍वतंत्रता संग्राम में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाने वाले जनजातीय योद्धाओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज से आने वाले हमारे नायकों के बारे में इतिहास में न्याय नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि सिद्धू कान्हू, बुद्धु भगत, शंकर शाह और तिलका माँझी जैसे वीरों ने अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ी, लेकिन इतिहास में जिस तरह से उसका वर्णन किया जाना चाहिए था वैसा नहीं किया गया।

उन्होंने आरोप लगाया कि अंग्रेजों ने साजिश के तहत जनजाति समाज की गौरवशाली परंपरा को झुठला कर उन्हें आपराधिक जनजाति घोषि‍त कर दिया। उन्होंने कहा, “दरअसल ऐसा इसलिए था, क्‍योंकि जनजातीय समाज ने कभी उनकी गुलामी को स्‍वीकार ही नहीं किया। वि‍श्‍वविद्यालयों के साथ मिलकर ऐसे कार्यक्रमों को करने का उद्देश्य भी यही है कि समाज को स्वतंत्रता संग्राम में जनजातीय समाज के योगदान का पता चल सके।

साथ ही विश्वविद्यालयों में जनजातीय विषयों से जुड़े विषयों पर अनुसंधान को बढ़ावा मिले और जनजाति समाज से आने वाले छात्र भी ज्यादा से ज्यादा अनुसंधान में शामिल हों, ये भी इसका उद्देश्य है। कार्यक्रम में विश्‍व‍विद्यालय के कुलपति प्रोफेसर शैलेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि ‘आजादी के अमृत महोत्सव’ के तहत NCST ने स्वतंत्रता संग्राम में जनजातीय नायकों के योगदान पर कार्यक्रमों की जो श्रृंखला शुरू की है, उसकी शुरुआत हमारे विश्‍व‍विद्यालय से हो रही है – यह हमारे लिए गौरव की बात है।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में हमारे विश्‍व‍विद्यालय से इस तरह के कार्यक्रम की शुरुआत होने से देश भर में एक सकारात्‍मक संदेश जाएगा। कार्यक्रम में मुख्य वक्त के तौर पर आमंत्रित नागपुर के RTMN विश्वविद्यालय में इतिहास के प्रोफेसर श्‍यामराव कुरेटी ने जनजातीय नायकों के इतिहास पर प्रकाश डाला। उन्होंने छत्तीसगढ़ के जनजातीय समाज के क्रांतिकारियों वीर नारायण सिंह, वीर गुण्डाधुर आदि के बारे में लोगों को जानकारी दी।

राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग में उप-निदेशक राकेश दुबे ने सभागार में मौजूद लोगों को आयोग द्वारा किए जाने वाले कार्यों, आयोग की शक्तियों व जनजातीय समाज के लिए आयोग कैसे काम करता है, इसकी जानकारी दी।

‘महिला दलित है, कौन उसे छुएगा’ कहकर यौन शोषण के आरोपित को जमानत देने वाले केरल के जज का लेबर कोर्ट में तबादला, कपड़ों पर भी की थी आपत्तिजनक टिप्पणी

यौन शोषण के दो मामलों में एक आरोपित को जमानत देते हुए विवादास्पद टिप्पणी करने वाले केरल के कोझीकोड जिला एवं सत्र न्यायालय के जज एस कृष्णकुमार का तबादला कोल्लम की लेबर कोर्ट में पीठासीन अधिकारी नियुक्त किया गया है। उन्होंने यौन उत्पीड़न के मामलों के आरोपित को जमानत देते हुए अपनी टिप्पणी में कहा था कि महिला अनुसूचित जाति की है कौन उसे छुएगा।

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, केरल हाई कोर्ट की ओर से जारी ट्रांसफर आदेश के अनुसार, मंजरी के जिला एवं सत्र न्यायाधीश मुरली कृष्ण एस, कोझिकोड के नए जिला एवं सत्र न्यायाधीश होंगे। बता दें कि जज कृष्ण कुमार की विवादित टिप्पणियों व फैसले के खिलाफ केरल सरकार हाईकोर्ट गई थी। वहीं हाईकोर्ट द्वारा जारी तबादला आदेश में कहा गया है कि ये तबादले नियमित प्रक्रिया के तहत किए गए हैं। क्योंकि दो अन्य जजों के भी तबादले किए गए हैं।

बता दें कि यौन शोषण के दो मामलों में आरोपित सिविक चंद्रन की अग्रिम जमानत याचिकाओं पर पीड़िताओं के संबंध में कृष्ण कुमार की ओर से की गई टिप्पणी से विवाद पैदा हो गया था। लेखक और सोशल एक्टिविस्ट चंद्रन पर एक दलित महिला के यौन शोषण का आरोप है।

सेशन कोर्ट द्वारा चंद्रन को दी गई अग्रिम जमानत खारिज करने का अनुरोध करते हुए केरल सरकार ने हाई कोर्ट का रुख किया है। सरकार ने दलील दी है कि निचली अदालत का फैसला अवैध और त्रुटिपूर्ण है तथा हाईकोर्ट को इसमें हस्तक्षेप करना चाहिए।

गौरतलब है कि पीड़िता के कपड़ों पर भी जज ने आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। आरोपित चंद्रन को जमानत देते हुए न्यायाधीश कृष्ण कुमार ने दो अगस्त को सुनाए फैसले में कहा था कि आरोपित समाज सुधारक है और जातिप्रथा का विरोधी है इसलिए यह मानना कठिन है कि उसने अनुसूचित जाति की पीड़िता का यौन शोषण किया होगा। उन्होंने कहा था कि जातीय व्यवस्था को देखते हुए यह अविश्वसनीय है कि वह अनुसूचित जाति की महिला को छु भी सकता है।

वहीं चंद्रन को जमानत देते हुए जज ने पीड़िता के कपड़ों पर भी टिप्पणी करते हुए कहा था कि महिला ने खुद ऐसे कपड़े पहने थे जो यौन उत्तेजक थे। बता दें कि चंद्रन ने जमानत याचिका के साथ महिला की तस्वीरें भी अदालत में पेश की थीं। जिला कोर्ट ने जमानत आदेश में कहा था कि जमानत याचिका के साथ पेश की गई तस्वीरों से पता चलता है कि शिकायतकर्ता खुद ऐसे कपड़े पहने हुए थी, जो उत्तेजक थे। इसलिए आरोपित के खिलाफ धारा-354 A का केस नहीं बनता।

आमिर खान बनने वाले थे ‘मुग़ल’, लेकिन ‘लाल सिंह चड्ढा’ का हश्र देख T-Series ने बंद कर दी फिल्म: फिलहाल हाथ में नहीं है कोई फिल्म

देश की सबसे बड़ी म्यूजिक कंपनी टी-सीरीज को स्थापित करने वाले गुलशन कुमार की बायोपिक ‘मुगल’ (Mogul) बंद हो गई है। आमिर खान की फिल्म ‘लाल सिंह चड्ढा’ का हश्र देखने के बाद ‘मुगल’ को बंद करने का फैसला लिया गया है। फिल्म में गुलशन कुमार (Gulshan Kumar) का किरदार आमिर खान निभाने वाले थे। लेकिन, ‘लाल सिंह चड्ढा’ (Laal Singh Chaddha) के बॉक्स ऑफिस पर धराशायी होने के बाद ‘मुगल’ के निर्देशक सुभाष कपूर ने अपनी अगली फिल्म ‘जॉली एलएलबी 3’ शुरू करने का मन बना लिया है।

दरअसल, टी-सीरीज के संस्थापक गुलशन कुमार के बेटे भूषण कुमार अपने पिता के म्यूजिक मुगल बनने की कहानी पूरी दुनिया को दिखाना चाहते थे। बताया जाता है कि गुलशन कुमार भी खुद को म्यूजिक मुगल कहलाना पसंद करते थे। इस बायोपिक की स्क्रिप्ट डायरेक्टर सुभाष कपूर ने तैयार की है। वह इस फिल्म में सबसे पहले अक्षय कुमार को लेकर आए। फिल्म का पहला पोस्टर 15 मार्च, 2017 को जारी किया गया था।

‘अमर उजाला‘ के मुताबिक, फिल्म ‘मुगल’ के प्रोफिट के बँटवारे को लेकर अक्षय और भूषण के बीच बात नहीं बन पाई। इसके बाद अक्षय कुमार (Akshay Kumar) ने ‘मुगल’ में काम करने से इनकार कर दिया। उस वक्त यह बात भूषण कुमार को काफी बुरी लगी, इसलिए उन्होंने इस फिल्म में अक्षय कुमार से बड़े सितारे को लेने की ठानी। इसके बाद फिल्म में गुलशन कुमार के किरदार के लिए आमिर खान (Aamir Khan) ने भी हामी भर दी।

फिल्म को लेकर आमिर की टीम का कहना था कि वह ‘लाल सिंह चड्ढा’ का काम खत्म करने के बाद ‘मुगल’ पर काम शुरू करने वाले थे। लेकिन, इस फिल्म में पैसा लगा रही कंपनी टी-सीरीज ने इसकी शूटिंग अनिश्चित काल के लिए टाल दी है। मालूम हो कि देश में ‘लाल सिंह चड्ढा’ के बायकॉट के आह्वान के बाद बॉक्स ऑफिस पर फिल्म का बहुत बुरा हाल हुआ। थिएटर में लोगों की अनुपस्थिति को देखते हुए देश भर के कई सिनेमाघर में शुक्रवार के लिए इसके 1300 शो को रद्द कर दिए गए थे।

बता दें कि टी-सीरीज के संस्थापक गुलशन कुमार की बायोपिक को लेकर कंपनी का उत्साह अब खत्म हो चुका है। इस साल और अगले साल की टी-सीरीज की फिल्मों की स्लेट से ‘मुगल’ का नाम भी हटा दिया गया है।

नेशनल हाइवे से हटाए जाएँगे टोल प्लाजा, कैमरे रिकॉर्ड करेंगे गाड़ियों के नंबर और खाते से कटेंगे पैसे: नितिन गडकरी ने बताया मोदी सरकार का फ्यूचर प्लान

देश भर के राष्ट्रीय राजमार्गों पर बने टोल प्लाजा को हटाया जाएगा। हालाँकि, टोल टैक्स में किसी तरह की राहत नहीं मिलेगी। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार नेशनल हाईवे (NHAI) से टोल हटाकर ऑटोमेटिक नंबर प्लेट रिकॉनाइजेशन कैमरे से टोल वसूली होगी। ये कैमरे गाड़ियों के नंबर रिकॉर्ड करेंगे और गाड़ी के मालिक के खाते से टैक्स के पैसे कट जाएँगे।

केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि इसका पायलट प्रोजेक्ट जारी है। उन्होंने यह भी कहा इसे सुविधाजनक बनाने के लिए कानूनी संशोधन की जरूरत है। हालाँकि, इसके इसको लेकर अभी भी कई तरह की शंकाएँ हैं, जिनका निवारण केंद्र को करना है।

गडकरी ने कहा कि साल 2019 में एक नियम बनाया गया था कि कारें कंपनी द्वारा फिट की हुई नंबर प्लेटों के साथ आएँगी। पिछले चार वर्षों में जो भी गाड़ियाँ आई हैं, वे इसी नंबर प्लेट के साथ आई हैं। उन्होंने कहा कि अब टोल प्लाजा हटाकर कैमरे लगाने की योजना है। कैमरे इन नंबर प्लेट को आसानी से पढ़ लेगा और सीधे खाते से टोल काट लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि जिन गाड़ियों में यह नंबर प्लेट नहीं है, उन्हें इसे लगवाना होगा।

गडकरी ने कहा कि अभी एक दिक्कत जो सामने आ रही है, वह है कि टोल नहीं देने वाले को दंडित कैसे किया जाए। वाहन मालिक को दंडित करने का कोई प्रावधान नहीं है। उन्होंने कहा कि इसे कानूनी दायरे में लाने की जरूरत है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि देश में सड़कों और राजमार्गों को बेहतर बनाने के लिए लगातार काम किए जा रहे हैं। ऐसे एक्सप्रेस बनाए जा रहे हैं, जिनमें सफर के दौरान समय की बचत हो। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार साल 2024 तक देश में 26 ग्रीन एक्सप्रेस-वे का निर्माण करेगी, जिनसे प्रमुख शहरों के बीच का यात्रा समय घट जाएगा।

बता दें कि इस समय लगभग 40,000 करोड़ रुपए टोल टैक्स के रुप में इकट्ठा किए जाते हैं, जिनमें 97 प्रतिशत के आसपास FASTag के माध्यम से होता है। FASTag वाले एक वाहन से टोल टैक्स वसूलने में लगभग 47 सेकेंड का समय लगता है। इस एक घंटे में मैनुअल तरीके से 112 वाहनों के टोल टैक्स किए जाते हैं, वहीं इलेक्ट्रॉनिक इलेक्ट्रॉनिक तरीके से 260 से अधिक वाहनों से टोल वसूल किए जाते हैं।

BJP के नाम पर अपने विधायकों को खुद कॉल करवा ब्लैकमेल करती है AAP: योगेंद्र यादव बोले यह पूरी तरह सच, मनीष सिसोदिया ने किया था ऑफर मिलने का दावा

दिल्ली में आम आदमी पार्टी के नेताओं से जुड़े भ्रष्टाचार को लेकर नित नए खुलासे हो रहे हैं। ऐसे में योगेंद्र यादव ने भी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व पर निशाना साधा है। योगेंद्र यादव ने बताया कि पार्टी की आदत है वे अपने ही विधायकों को भाजपा के नाम पर फर्जी कॉल करवाकर ब्लैकमेल करती है।

योगेंद्र यादव ने अपना यह बयान आजतक द्वारा शेयर एक वीडियो पर दिया, जिसमें पूर्व AAP नेता परमजीत कात्याल बता रहे हैं कि कैसे 2013 में दिल्ली की आम आदमी पार्टी ने उनसे कहा था कि वह पार्टी नेताओं को कॉल करें और उन्हें पैसों का लालच दें।

परमजीत कात्याल को वीडियो में कहते सुना जा सकता है,

“साल 2011अन्ना आंदोलन से लेकर 2015 तक, लगभग हर दिन मैं अरविंद के साथ रहा। 24 घंटों में 18 घंटे उनके साथ रहा। मेरी जो वीडियो वायरल हो रही है वो 2019 की है। मनीष रायजादा, जो कि पार्टी के लिए चंदा इकट्ठा करते थे। उन्होंने ‘चंदा चोर’ नाम से डॉक्यूमेंट्री बनाई, जिसमें मेरा, योगेंद्र, प्रशांत, शाजिया का इंटरव्यू था, उसमें से क्लिप वायरल है।

परमजीत कात्याल ने बताया, “शुरू-शुरू में जब पार्टी की 28 सीटें आई थीं तब ये सुनने में आया कि कुछ लोग पार्टी छोड़ सकते हैं। उस समय हम भी देश बदलने की राह पर चले हुए थे। हमें भी इन छल-कपट का नहीं पता था। उस समय केवल हमें कहा गया था कि कुछ विधायक पार्टी छोड़ सकते हैं, आपको पता करना है कि ऐसा है या नहीं।“

कात्याल आगे कहते हैं, “ 28 सीट जीतने के एक दिन बाद ही शाम के करीब 5 बजे मुझको अरविंद का कॉल आया कि आप अपनी पूरी टीम के साथ दिल्ली आओ। हम गए। दिल्ली बॉर्डर से कुछ दूर पहले एक आदमी आया और हमें दो इंटरनेशनल सिम देकर गया। हमें कहा गया कि हम पता लगाएँ कि कौन बीजेपी से पैसे लेने को तैयार है। एक लिस्ट मिली और जीते हुए विधायकों को कॉल करने को कहा गया। हमने अंजाने में ये काम कर भी दिया। हमने नितिन गडकरी-अरुण जेटली के कार्यालयों का नाम ले लेकर 35-35 लाख रुपए के ऑफर उनको दिए थे।“

कात्याल बताते हैं कि उस समय अरविंद केजरीवाल ने खुद ये प्लॉन बनाया था कि अपने ही विधायकों को फेक कॉल करें।

दिलचस्प बात ये है कि कात्याल का खुलासा ऐसा है जो पार्टी की दो तरह की राजनीति की पोल पट्टी खोलता है। एक वो जो उन्होंने अपने विधायकों के साथ खेली और दूसरी वो जो उन्होंने मीडिया में ये बताकर खेली कि भाजपा उनके विधायकों को खरीदना चाहती है।

योगेंद्र यादव ने साधा अरविंद केजरीवाल पर निशाना

परमजीत कात्याल के बयान को सुनने के बाद योगेंद्र यादव ने ट्वीट में लिखा, “परमजीत ने 7 साल पहले इस घटना के बारे में मुझे जानकारी दी थी। तब मैंने पूछताछ की और पाया कि उनकी बात पूरी तरह सच है। अरविंद केजरीवाल के आदेश पर दिसंबर 2013 में अपने ही MLA को बीजेपी के नाम पर फोन करवाए गए थे। ऐसी करतूतों के कारण हम लोगों का AAP नेतृत्व से मोहभंग हुआ था।”

मनीष सिसोदिया का दावा

उल्लेखनीय है कि इन दिनों जब दिल्ली के उप मुख्यमंत्री के खिलाफ सीबीआई ताबड़तोड़ रेड मार रही है। ऐसे में मनीष सिसोदिया ने दावा किया है कि भाजपा उनको अपने साथ मिलाने के लिए ऑफर दे रही है। हालाँकि उन्होंने इससे मना कर दिया है। कुछ यूजर्स ने ऐसा दावा सुन ये भी कहा कि शायद सिसोदिया ने प्रैंक कॉल को गंभीरता से ले लिया है।

‘वो गली का गुंडा है, हाथापाई कर मेरी आवाज़ दबाने की कोशिश की थी’: केरल के राज्यपाल ने वामपंथी इतिहासकार को लताड़ा

केरल (Kerala) के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान (Arif Mohammad Khan) ने तथाकथित इतिहासकार इरफान हबीब (Irfan Habib) पर निशाना साधा है। उन्होंने हबीब को ‘गली का गुंडा’ बताते हुए आरोप लगाया कि उसने हाथापाई करके उनकी आवाज दबाने की कोशिश की थी।

राज्यपाल ने नई दिल्ली में मंगलवार (23 अगस्त, 2022) को दिसंबर 2019 में हुई उस घटना का उल्लेख किया, जब वह कन्नूर विश्वविद्यालय (Kannur University) द्वारा आयोजित भारतीय इतिहास कॉन्ग्रेस का उद्घाटन करने गए थे। वहाँ इरफ़ान हबीब भी एक वक्ता थे। खान ने आरोप लगाया कि इतिहासकार सीधे उनके पास हाथापाई करने पहुँच गया था। जब इस कार्यक्रम में राज्यपाल अपना संबोधन शुरू करने वाले थे, उस वक्त ज्यादातर प्रतिनिधि अपनी सीट से खड़े हो गए थे और नागरिकता संशोधन कानून (CAA) पर उनके रुख के खिलाफ अपना विरोध जताने लगे थे, जो उस समय एक ज्वलंत मुद्दा था।

दरअसल, केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने नई दिल्ली में मीडिया के एक सवाल के जवाब में यह बातें कही। उन्होंने कहा, “क्या किसी अकादमिक विद्वान का काम झगड़ना है। इरफान हबीब ‘गली का गुंडा’ है। जब मैंने जवाब देने की कोशिश की तब उन्होंने हाथापाई करके मेरी आवाज दबाने की कोशिश।” बीते दिनों खान ने इस मुद्दे पर कन्नूर विश्वविद्यालय के कुलपति गोपीनाथ रवींद्रन की भी तीखी आलोचना की थी और उन्हें अपराधी करार दिया था।

राज्यपाल ने आरोप लगाया था कि कुलपति ने 90 वर्षीय हबीब और अन्य को उनकी आलोचना करते हुए भाषण देने के लिए लंबा वक्त दिया, लेकिन जब वह सवालों का जवाब देने के लिए खड़े हुए तब उन पर हमला करने का प्रयास किया गया। कुलपति पर ‘अपराधी’ वाली टिप्पणी को लेकर खान ने कहा, “आप सभी ने देखा कि कैसे मेरे एडीसी (Aide-de-camp) साथ धक्का-मुक्की की गई। उनकी कमीज फाड़ दी गई। हबीब सीधे मेरे पास भिड़ने आ गए।” राज्यपाल के आरोपों पर हबीब की ओर से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने आगे यह भी कहा, “कुलपति रवींद्रन भी मुझ पर हमला करने वालों की साजिश का हिस्सा थे। वह राजनीतिक कारणों से कुलपति के पद पर हैं। मुझे कुलपति ने 21 अगस्त को वहाँ आमंत्रित किया था। जब मुझ पर हमला किया गया, तो उनका कर्तव्य क्या था? क्या उन्हें इसकी रिपोर्ट पुलिस को नहीं करनी चाहिए थी? लेकिन उसने ऐसा नहीं किया।”

लालू के करीबी सहित कई राजद नेताओं के ठिकानों पर CBI की छापेमारी, नौकरी के बदले जमीन घोटाले का मामला: स्पीकर के इस्तीफे से अटका बहुमत परीक्षण

केंद्रीय जाँच एजेंसी (CBI) ने बुधवार (24 अगस्त, 2022) की सुबह बिहार की राजधानी पटना में नौकरी के बदले जमीन घोटाले में राजद नेता अशफाक करीम, सुनील सिंह, सुबोध राय और फैयाज अहमद के आवास पर रेड मारी। राजद विधान पार्षद और बिस्कोमान (कोऑपरेटिव संस्था) पटना के अध्यक्ष सुनील सिंह ने अपने आवास पर सीबीआई की छापेमारी पर कहा, “यह जानबूझकर किया जा रहा है। इसका कोई मतलब नहीं है। वे यह सोचकर ऐसा कर रहे हैं कि डर से विधायक उनके पक्ष में आ जाएँगे।”

सुनील सिंह लालू प्रसाद यादव के करीबी नेताओं में में से एक हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, नौकरी के बदले जमीन घोटाले के सिलसिले में पटना में राजद के पूर्व एमएलसी सुबोध राय और राजद सांसद फैयाज अहमद के आवास पर भी सीबीआई की छापेमारी चल रही है।

वहीं, बिहार विधानसभा का दो दिवसीय विशेष सत्र आज (24 अगस्‍त, 2022) से शुरू होने जा रहा है। विधानसभा में फ्लोर टेस्ट का काउंटडाउन शुरू हो गया है। सत्ता पक्ष के अनुरोध पर विधानसभा स्पीकर विजय सिन्हा ने आज सुबह 11 बजे सदन का विशेष सत्र बुलाया था। इस दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की महागठबंधन सरकार का बहुमत परीक्षण भी होना है। दूसरी तरफ, विधानसभा अध्‍यक्ष विजय सिन्‍हा (Vijay Sinha) ने सत्र बुलाने के बाद इस्तीफा दे दिया है। इससे पहले उन्होंने कहा था कि उन्हें जो नोटिस दिया गया है, वह नियमों और प्रावधान के खिलाफ है।

इससे पहले विधानसभा सचिवालय की तरफ से जो नोटिस भेजा गया, उसे विजय सिन्हा ने लेने से इनकार कर दिया था। अब उन्होंने कहा है कि बहुमत का सम्मान करते हुए वो इस्तीफा दे रहे हैं। इसके बाद उपाध्यक्ष महेश्वर हजारी अध्यक्ष वाली कुर्सी पर बैठे।

गौरतलब है कि केंद्रीय जाँच एजेंसी (CBI) ने पिछले महीने (27 जुलाई, 2022) बड़ी कार्रवाई करते हुए राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के प्रमुख और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के पूर्व OSD भोला यादव को गिरफ्तार किया था। ये गिरफ्तारी रेलवे में नौकरी के बदले जमीन घोटाले को लेकर हुई थी। भोला यादव इस मामले में आरोपित था। वह 2004 से 2009 तक लालू यादव के ओएसडी रहे। लालू यादव उस वक्त केंद्रीय रेल मंत्री थे। उसी समय रेलवे भर्ती घोटाला हुआ था। आरोप है कि भोला यादव ही घोटाले का कथित सरगना है। भोला राजद से विधायक और विधान पार्षद भी रह चुका है।

झूठे निकले ओपीइंडिया के सूत्र, रवीश कुमार ने इस्तीफे से मना किया: जीरो टीआरपी एंकर ने कहा- अडानी की नौकरी मुझे मंजूर

भारत की मेनस्ट्रीम मीडिया के सूत्र जन्म से झूठे रहे हैं। ओपीइंडिया के भी सूत्र झूठे ही निकले हैं। एनडीटीवी (NDTV) वाले रवीश कुमार (Ravish Kumar) ने इस्तीफा नहीं दिया है। यह बात उन्होंने खुद ही कही। ट्वीट भी किया और फेसबुक पोस्ट भी। इसे आप नीचे पढ़ सकते हैं। हमने ट्वीट एम्बेड कर दिया है।

आश्चर्यजनक बात यह है कि इस बार जीरो टीआरपी एंकर का 3 लाइन की पोस्ट में ही दम फूल गया है। शायद कंपनी के नए पप्पा अडानी के 29 टका का असर हो। पिछली बार ‘इस्तीफा नहीं दिया है’ इस पर शोध-पत्र लिखने में काफी मेहनत की गई थी। नीचे उसका भी स्क्रीनशॉट लगा है। लंबाई-चौड़ाई आप नाप लीजिए।

रवीश कुमार के इस्तीफे पर उनका ‘शोध-पत्र’

सोशल मीडिया में यह भी दावा है कि रवीश कुमार ने इस्तीफा देने से इनकार कर दिया है। उन्होंने कहा है कि उन्हें अडानी की नौकरी भी मंजूर है। इससे पहले सोशल मीडिया में यह दावा किया जा रहा था कि प्रणब और राधिका रॉय से उनका पंगा हो गया है और उन्हें धक्के मारकर बाहर निकालते हुए अर्चना कॉम्प्लेक्स के गार्ड ने अपनी नंगी आँखों से देखा है।

लेकिन ये दावे भी प्राइम टाइम की तरह ढकोसले ही साबित हुए हैं। पहले खबर आई कि राधिका और प्रणब रॉय को खबर भी नहीं लगी और अडानी ने 29 टका ले लिया। अब रवीश कुमार इस्तीफा देने से मना कर रहे हैं।

NDTV-अडानी डील के बाद इस्तीफे पर 3 लाइन में हाँफे रवीश

हमने उनके इस्तीफे की अफवाह फैलाने वाले सूत्र का पता लगाने के लिए आपीइंडिया के एडिटर को फोन किया। उन्होंने फोन नहीं उठाया। हमने मेल किया। उन्होंने जवाब नहीं दिया। हमने भी जिद ठानी कि सच्चाई पता लगाकर ही रहेंगे। हमने फॉल्टन्यूज वाले मदरसा छाप जुब्बू फैक्टचेकर से संपर्क किया। उसने रातभर लेंस जूम इन, जूम आउट किया। सुबह बताया कि सूत्र ने टोपी पहन रखी है। हाथ से कान छिपा रखा है। ऐसा हार्डकोर आतंकी ही करते हैं। सूत्र कुवैत का भी हो सकता है।

आखिर में सच्चाई का पता हमें अनारकली ऑफ आरा से चला। उन्होंने हमें एक एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में बताया है, “मुझे पता नहीं यह तुलना सही है या नहीं। लेकिन रवीश कुमार के साथ भी राहुल गाँधी जैसा ही हुआ है। जैसे राहुल गाँधी को पप्पू-पप्पू बोल उनका ‘पप्पूकरण’ किया गया, वैसे ही इस्तीफा-इस्तीफा बोल रवीश कुमार का ‘इस्तीफाकरण’ किया गया। मैं रवीश कुमार से मिली हूँ। वे बड़े ढीठ हैं। अपना ही थूका वे भले एक बार चाट लें, लेकिन इस्तीफा कभी नहीं दे सकते।”

जिनको खोजी पत्रकारिता की चुल हो उनके लिए खास खबर यह है कि रवीश कुमार के इस्तीफे की तरह यह भी सटायर ही है।

चप्पल मारी, पुतले फूँके, लगे ‘सर तन से जुदा’ के नारे: हैदराबाद में टी राजा सिंह को बेल मिलते ही कट्टरपंथी भड़के, 4 पुलिसकर्मी घायल, गाड़ी में भी तोड़फोड़

हैदराबाद में भाजपा के निलंबित विधायक टी राजा सिंह को बेल मिलने से कट्टरपंथी भड़क गए हैं। उन्होंने इसके विरोध में पूरी रात प्रदर्शन किया। हर जगह ‘सर तन से जुदा’ के नारे गूँजते रहे। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की, लेकिन खबर है कि इन सबके बीच में सब इंस्पेक्टर समेत 4 पुलिसकर्मी घायल हो गए।

बता दें कि टी राजा सिंह के वकील ने बेल याचिका में दलील दी थी कि विधायक को सीआरपीसी की धारा 41 (ए) के तहत कोई नोटिस नहीं दिया गया। कोर्ट ने वकील की यह दलील मानी और टी राजा सिंह को बेल दे दी। इसके बाद राज्य भर में प्रदर्शन चालू हो गए। भीड़ और नारेबाजी इतनी बढ़ गई कि पुलिस को लाठी चार्ज करके, आँसू गोले छोड़कर भीड़ को तितर-बितर करना पड़ा।

खबरों के अनुसार अंबरपेट, तल्लबकट्‌टा, मोगलपुरा, खिलवत, बहादुरपुरा और चंचलगुडा में राजा सिंह के विरोध में प्रदर्शन हुए हैं। वहीं बरकस से चंद्रयानगुट्टा तक सैंकड़ों प्रदर्शनकारियों ने मार्च किया।

हैदराबाद के शालीबांदा में तो पुलिस के साथ प्रदर्शनकारियों की हिंसक झड़प की घटना घटी। पुलिस वैन में भी कथिततौर पर प्रदर्शनकारियों ने तोड़फोड़ की। इसके अलावा बाजारों से दुकानें जबरन बंद कराने की, राजा सिंह के पोस्टर्स पर चप्पल मारने की, उनका पुतला जलाने की घटना भी प्रकाश में आई है।

हैदराबाद में टी राजा सिंह के बयान के बाद बवाल

उल्लेखनीय है कि सोमवार को राजा सिंह ने मुनव्वर फारूकी के विरुद्ध एक वीडियो बनाया था। इसमें उन्होंने इस्लाम पर बात करते हुए एक बुजुर्ग पर बात की थी, जिस पर मुस्लिमों ने कहा कि वो पैगंबर पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणी है। हालाँकि, राजा सिंह ने उसे मजाक बताया। इसके बाद शहर भर में प्रदर्शन हुए। मंगलवार सुबह पुलिस ने टी राजा को गिरफ्तार किया। दोपहर में बीजेपी ने उन्हें पार्टी से सस्पेंड किया और फिर कोर्ट ने उन्हें 14 दिन न्यायिक हिरासत में भेजा।

भाजपा ने टी राजा सिंह को निलंबित किया।

इस बीच मुस्लिम संगठन जहाँ टी राजा सिंह की टिप्पणी को शर्मनाक, हैरान करने, दंगे भड़काने वाला बताते रहे। वहीं टी राजा के समर्थकों ने उनकी रिहाई की माँग की। देर रात कोर्ट ने उनकी बेल याचिका मंजूर की। लेकिन इसके बाद फिर शहर का माहौल बिगड़ गया। कट्टरपंथी भारी तादाद में सड़क पर आ गए। अब राज्य में तनाव की स्थिति बनी हुई है। लगातार निलंबित भाजपा विधायक पर कार्रवाई की माँग हो रही है। सर तन से जुदा के नारे लग रहे हैं।