Home Blog Page 2464

साका-जौहर: भस्म हुआ बर्बर इस्लामी शक्तियों के साथ सह-अस्तित्व, सभी जाति-वर्गों की स्त्रियों का था बलिदान

आज हम बात करेंगे इतिहास की उस घटना की, जब चित्तौड़ का पहला साका-जौहर हुआ था। 18 अगस्त 1303 ईस्वी, चित्तौड़ का पहला साका-जौहर। जब टिड्डीदल की भाँति बहुत बड़ी संख्या में इस्लामी फ़ौज किसी छोटे राज्य पर आक्रमण करती थी तब अपने धर्म, अपने मंदिर, अपने आराध्य की रक्षा के लिए मुट्ठीभर हिन्दू सैनिक शत्रु-संख्या की परवाह किए बगैर मरने और मारने के उद्देश्य से उन पर टूट पड़ते थे, उस शौर्य को साका कहा जाता है। पुरुष योद्धा निश्चिंत होकर युद्ध कर सकें और यदि वे वीरगति को प्राप्त हो जाएँ तो जीते-जी स्वयं की पवित्रता बनाए रखने व हिन्दू बने रह कर ही पंचतत्व में विलीन होने की प्रतिज्ञा, जौहर आधार था।

इसमें स्त्रियाँ स्वयं के शरीर को पवित्र अग्नि को समर्पित कर देती थी। चूँकि मेवाड़ इस्लामी सत्ता के विरोध का सबसे बड़ा केंद्र था, इसलिए सबसे अधिक साका-जौहर राजस्थान में हुए। वरन् मध्यकालीन इतिहास पूरे भारतवर्ष के ऐसे साका-जौहरों से भरा पड़ा है। भारत में इस्लाम के आक्रमण के साथ ही बलपूर्वक धर्म बदलने, गुलाम बनाने व स्त्रियों के शीलभंग करने की प्रथा ने प्रवेश किया। साका-जौहर मुस्लिम फ़ौज के उन अमानवीय कृत्यों के विरुद्ध हिन्दुओं का एक प्रमुख शस्त्र था।

गज़नी के महमूद ने जब सोमनाथ पर आक्रमण करने के लिए कूच किया, तब भीमदेव सोलंकी से पहले उसका सामना राजस्थान की गोगागढ़ रियासत के चौहानों से हुआ। कन्हैयलाल माणिकलाल मुंशी ने अपने प्रसिद्ध उपन्यास ‘जय सोमनाथ’ में उस समय हुए साका-जौहर का उल्लेख किया है।

‘गोगाराणा की यशगाथा’ अध्याय में वे लिखते हैं कि केसरिया पगड़ी बाँध कर जब गोगारणा गज़नी की सेना से युद्ध करने चले तब झरोखों में कुंकुम-अक्षत लिए खड़ी वीरांगनाओं को उन्होंने सम्बोधित किया – “क्यों लड़कियों! हमारे साथ कैलाश आने की हिम्मत है या नहीं? और वे हँसे, मानो विवाह मंडप में कुटुम्बियों को निमंत्रित कर रहे हों!”

वह कौन सा तत्व था जिसके कारण साका-जौहर करते समय मृत्यु भी मानों एक उत्सव सी प्रतीत हो रही थी, इस प्रश्न पर ‘महाराणा: सहस्त्र वर्षों का धर्मयुद्ध’ पुस्तक के लेखक डॉ ओमेंद्र रत्नू बताते हैं:

“जो व्यक्ति या समाज स्वतंत्र रहने के लिए स्वयं की बलि देने को स्वीकार कर लेता है, वह भय से मुक्त हो जाता है। उसकी चेतना भौतिक जगत के नियमों का अतिक्रमण कर के मुक्त हो जाती है। मृत्यु ऐसे समाज के लिए बच्चों का खेल बनकर रह जाती है। यही घटना साका-जौहर का मूल आध्यात्मिक आधार थी। चित्तौड़ के हमारे महिमाशाली पूर्वज अपने गौरवशाली जीवन तथा उससे भी गौरवशाली मृत्यु के द्वारा हमें समझा गए कि स्वतंत्रता और आत्म सम्मान जीवन से कहीं अधिक मूल्यवान है।”

ओमेंद्र ने अपनी पुस्तक में चित्तौड़ के पहले साका-जौहर के साहस का वर्णन किया है। वे लिखते हैं, “मलेच्छों द्वारा बंदी बनाए जाने या अपवित्र किए जाने से बचने के लिए कोई विकल्प नहीं बचा था। भूमिगत सुरंग में बने अभेद्य कक्षों में इन ललनाओं ने प्रवेश किया, जहाँ प्रकाश की किरणें तक नहीं पहुँच सकती थीं।”

चित्तौड़ के रक्षक योद्धा अपना हृदय कठोर कर, पथराई आँखों से अपनी पत्नियों, माँओं, बहनों एवं पुत्रियों को एक जुलूस के रूप में, मोक्ष के पथ पर जाते हुए देख रहे थे। पतियों ने अपनी पत्नियों की माँग अंतिम बार भरी। जिन स्त्रियों के आलिंगन में प्रेम की चरम अनुभूतियाँ छुई थीं, उनसे अंतिम बार आँखें मिलीं। हर पुरुष असहाय भी था और निश्चिंत भी। असहाय, क्योंकि अपनी स्त्री को जलने भेज रहा था, निश्चिंत इसलिए कि अब कोई दुर्गंध से युक्त म्लेच्छ उसकी स्त्री को नहीं छू सकता था। 

बापों ने बेटियों के माथे चूमे होंगे! अंतिम बार अपनी लाडली के तन की सुगंध से अपनी आत्मा को तरंगित किया होगा! नन्हे बच्चों को माँओं से बाँधते समय झूठी दिलासा दी होगी कि मैं भी पीछे-पीछे आ रहा हूँ। पुरुषों व गुरुओं ने अपना हृदय पाषाण कर, सब संवेदनाओं से रिक्त कर लिया होगा कि यदि दुर्बलता की एक लकीर भी चेहरे पर दिखी तो हमारी नारियों की अंतिम यात्रा कष्टपूर्ण हो जाएगी। और यह सौ, दो सौ, पाँच सौ लोगों की नहीं, पूरे चित्तौड़ के सहस्त्रों लड़ाकों व उनके परिवारों की भावदशा थी। 

आत्मसम्मान की रक्षा व बर्बरता के प्रति अस्वीकार की हठ के सम्मुख जीवन, संबंध, करुणा, प्रेम, ममता… सब गौण व निरर्थक हो गया था। हमारे इन अद्भुत पूर्वजों से जो क्रूरतम शक्तियाँ भी नहीं छीन सकती थीं, वह था ‘आत्मगौरव’। उस दिन जौहर की उठती ज्वाला में जो अब सुरक्षित था। अग्नि की ज्वाला में अपना जीवित शरीर समर्पित कर देना किसी भी प्रकार से सरल नहीं है। काल व वार्धक्य से एक दिन जो शरीर चुक ही जाना था, हिन्दू वीरांगनाओं ने उस दिन स्वेच्छा से राख कर दिया।

सभी जातियों की महिलाएँ, चाहे वे किसी भी आयु की हों या उनके वस्त्र कैसे भी हों, सभी ने जौहर के उस गौरवशाली दिन, सिर उठा के, स्वेच्छा से स्वयं को अग्नि को समर्पित कर दिया। अत्यंत सुन्दर रानी पद्मिनी ने अपने सुन्दर शरीर, गौरवर्णी त्वचा को जलते हुए, फफोलों में बदलने का पीड़ादायक मार्ग चुना, क्योंकि अफ़ग़ानिस्तान से आए इन बर्बर, कामुक हत्यारों ने उनके पास कोई विकल्प नहीं छोड़ा था। जौहर, मेवाड़ की उन महान स्त्रियों के साहसी अस्वीकार का एक उदाहरण है, जिन्होंने तातारी आक्रमणकारियों के सामने किसी भी तरह के समर्पण से मना कर दिया। 

यह उन स्त्रियों का दृढ़ संकल्प ही था, जिसके कारण आक्रांता उन्हें छूना तो दूर, उनके शरीर को देख भी नहीं पाए। यही कारण है कि चित्तौड़ की महान रानी पद्मिनी ने, लगभग 20000 विश्वासपात्र दासियों, सखियों एवं चित्तौड़ की साधारण नारियों के साथ उन क्रूर व्यभिचारी आक्रांताओं के मुँह पर द्वार बंद कर दिया, जिनके आचार-विचार-व्यवहार में सुंदरता एवं शुचिता का कोई मूल्य नहीं था। हिन्दू स्त्री शक्ति ने मुस्लिम पुरुषों की कुरूप वासना को एक भयानक उपक्रम से अस्वीकार कर, तिरस्कृत कर दिया। 

जौहर की आत्माहुति से देवीस्वरूपा महारानी पद्मिनी ने भारतीय उपमहाद्वीप में हिन्दू-मुस्लिम संघर्ष को सदा के लिए जड़वत कर दिया। जौहर की ज्वाला से उड़ते अंगारों ने इन बर्बर शक्तियों के साथ सह अस्तित्व की सभी संभावनाओं को भस्म कर दिया। यह स्पष्ट हो गया था कि ये मतांध तातार हमें बलपूर्वक अपने अधीन करना चाहते हैं और हम यह होने नहीं देंगे।

उस पवित्र दिन हुए जौहर ने, आने वाली पीढ़ियों को भी यह संदेश दिया कि लुटेरों के इस झुण्ड से लड़ने के लिए उन्हें भी बलिदान देना होगा, जैसा महारानी पद्मिनी ने किया और सम्मान के साथ अमरत्व को प्राप्त हो गईं। चित्तौड़ की महारानी पद्मिनी इस देश के महान लोगों के हृदय में तब तक जीवित रहेंगी, जब तक आखिरी हिंदू जीवित है।

केजरीवाल सरकार ने रोहिंग्याओं के लिए माँगे थे 240 फ्लैट्स: बीजेपी ने खोली दिल्ली सरकार की पोल, गौतम गंभीर ने जारी किया AAP का ‘अर्जेंट’ पत्र

दिल्ली में रोहिंग्याओं को फ्लैट्स देने के मामले में केंद्र सरकार और केजरीवाल सरकार आमने-सामने आ गई हैं। इसी बीच भाजपा सांसद गौतम गंभीर ने AAP को एक्सपोज करते हुए एक पत्र की तस्वीर शेयर की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस पत्र के माध्यम से भाजपा ने केजरीवाल सरकार को एक्सपोज किया है। दरअसल, पत्र में पिछले साल ही रोहिंग्याओं को कुल 240 फ्लैट्स दिलाने का प्रस्ताव नई दिल्ली नगर परिषद (New Delhi Municipal Council) के सामने रखा था। वहीं इस पत्र के दाईं ओर ऊपर की तरफ ‘URGENT’ लिखकर उसे अंडर लाइन भी किया गया है, यानि कि आप सरकार इस काम को तत्काल प्रभाव से करवाना चाहती थी।

भाजपा सांसद गौतम गंभीर ने इसे शेयर करते हुए लिखा “आज दिल्ली के बेशर्म सीएम पूरी तरह बेनकाब हो गए हैं। उन्होंने रोहिंग्याओं के लिए बक्करवाल में फ्लैट माँगते हुए एक पत्र भेजा और अब वह वही कर रहे हैं जिसके लिए उन्हें जाना जाता है।” उन्होंने सीएम केजरीवाल को ‘गटर छाप राजनीति’ करने वाला मुख्यमंत्री भी बताया।

सांसद द्वारा जारी किए गए इस पत्र के मुताबिक दिल्ली सरकार ने NDMC को पिछले साल 23 जून को यह पत्र भेजा था। पत्र में केजरीवाल सरकार की ओर से कहा गया कि 11 बांग्लादेशी और 71 रोहिंग्याओं के लिए रिस्ट्रिक्शन सेंटर (restriction centre) बनाना है। इसके लिए EWS फ्लैट के साथ-साथ वहाँ मौजूद बारात घर (Community Centre) देने की माँग की गई थी। इस पत्र में सरकार ने बक्करवाल में मौजूद 240 EWS फ्लैट देने की बात भी कही।

भाजपा प्रवक्ता गौरव भाटिया भी लगा चुके हैं ‘AAP’ पर आरोप

गौरतलब है कि इसी मामले को भाजपा प्रवक्ता गौरव भाटिया ने मीडिया के सामने खोला था। उन्होंने बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा, “दिल्ली चीफ सेक्रेटरी ने NDMC को इसी साल 29 जुलाई को कहा था कि जल्द से जल्द 240 फ्लैट्स हैंडओवर किए जाएँ, ताकि ‘डिटेंशन सेंटर’ बनाया जा सके।” इस दौरान भाजपा प्रवक्ता ने सीएम केजरीवाल पर आरोप लगाते हुए कहा, “केजरीवाल का हाथ घुसपैठियों के साथ है। उन्हें दिल्ली के लोगों की चिंता नहीं है।”

उन्होंने इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “केंद्र की नीति स्पष्ट है कि राष्ट्रीय सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होगा और देश के संसाधन अपने नागरिकों के लिए हैं न कि अवैध प्रवासियों के लिए।” भाटिया ने कहा, “केजरीवाल जी, यह आपकी जिम्मेदारी थी कि जहाँ भी रोहिंग्या रह रहे हैं उस जगह को आपने कानून के तहत डिटेंशन सेंटर क्यों नहीं घोषित किया। केजरीवाल की नीयत में खोट है। रोहिंग्या भारत की सुरक्षा के लिए खतरा हैं और अरविंद केजरीवाल राष्ट्रीय सुरक्षा को ताक पर रख राजनीति कर रहे हैं। हमारे देश के लिए रोहिंग्या खतरा हैं।”

‘मैं ईसाई हूँ, तिरंगे को नहीं करूंगी सैल्यूट…’ : 15 अगस्त पर स्कूल की प्रिंसिपल की हरकत पर भड़के लोग, कर्नाटक की घटना

कर्नाटक से जहाँ स्वतंत्रता दिवस के मौके पर तिरंगे के अपमान का मामला सामने आया है, वहीं तमिलनाडु से ईसाई प्रिंसिपल द्वारा तिरंगे को सलामी नहीं देने के मुद्दे ने तूल पकड़ लिया है। उनका कहना है कि मैं ईसाई हूँ, तिरंगे को सलामी नहीं दूँगी। हमारा मजहब इस बात की इजाजत नहीं देता है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार यह मामला तमिलनाडु के धर्मपुरी जिले का बताया जा रहा है। जिले के एक सरकारी स्कूल की प्रिंसिपल ने स्वतंत्रता दिवस समारोह के अवसर पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने और ध्वज को सैल्यूट करने से इनकार कर दिया था। इसके पीछे का कारण जानकर आप हैरान रह जाएँगे और इस बात पर विचार करने पर विवश हो जाएँगे कि ऐसे भी लोग हैं।

आपको बताते चलें कि तिरंगे को सैल्यूट करने से इनकार करते हुए महिला ईसाई प्रिंसिपल ने यह कारण दिया कि उसका मजहब उसे उसके गॉड के अलावा किसी और को सैल्यूट करने से मना करता है। बता दें कि यह सारी घटना 15 अगस्त के दिन स्कूल में आयोजित हुए समारोह के दौरान की है। वहीं प्रिंसिपल के तिरंगा नहीं फहराने की वजह से सहायक प्रधानाध्यापक द्वारा तिरंगा फहराया गया।

ईसाई प्रिंसिपल ने तिरंगा फहराने से किया मना

जानकारी यह भी सामने आ रही है कि स्कूल की महिला ईसाई प्रिंसिपल प्रिंसिपल तमिलसेल्वी ने तिरंगे को फहराने से भी मना कर दिया। बताया जा रहा है महिला ने पिछले वर्ष भी इसी तरह तिरंगा फहराने से मना कर दिया था। बता दें वह इसी वर्ष सेवा से रिटायर भी होने जा रही हैं। वहीं अब इस मामले को लेकर धर्मपुरी के मुख्य शिक्षा अधिकारी (सीईओ) को शिकायत सौंपी गई है।

इस केस से जुड़े एक वायरल वीडियो में महिला ईसाई प्रिंसिपल यह तर्क देती भी नजर आ रही है कि उसका राष्ट्रीय ध्वज न फहराना या सलामी न देने के पीछे अनादर करना नहीं है। उसने कहा “हम केवल गॉड को सलाम करते हैं और किसी को नहीं। हम ध्वज का सम्मान करते हैं लेकिन हम केवल गॉड को सलाम करेंगे। इसलिए, हमने सहायक प्रधानाध्यापक को झंडा फहराने के लिए कहा।”

‘तालिबानी! सलमान रुश्दी को चाकू मरवाने में तेरा हाथ तो नहीं’: रोहिंग्या पर भिड़े AAP विधायक और प्रोपगेंडा पत्रकार, कहा- आओ मुस्लिमों का वोट लेने

प्रोपेगंडा पोर्टल ‘जनता का रिपोर्टर’ के संस्थापक रिफत जावेद ने रोहिंग्या मुस्लिमों को लेकर सवाल उठाने पर आम आदमी पार्टी के विधायक (AAP MLA) नरेश बाल्यान पर हमला बोला है। जावेद ने कहा कि आम आदमी पार्टी को वोट देने से बेहतर है कि दिल्ली में मुस्लिम भाजपा को जीतने दें।

जावेद के इस ट्वीट पर दिल्ली के उत्तम नगर से आम आदमी पार्टी के विधायक नरेश बाल्यान उखड़ हो गए जावेद को ‘तालिबानी’ बता दिया। उन्होंने रिफत जावेद से सवाल पूछ लिया कि प्रसिद्ध लेखक सलमान रुश्दी की हाल में अमेरिका पर हुए हमले में कहीं उनका हाथ तो नहीं।

दरअसल, ये मामला तब शुरू हुआ, जब रिफत जावेद ने बाल्यान के ट्वीट्स के स्क्रीनशॉट को शेयर करते हुए उन्हें ‘संघी’ बता दिया। इसके साथ ही जावेद ने आम आदमी पार्टी को वोट देने के लिए मुस्लिमों को लताड़ा।

जावेद ने लिखा, “अगले चुनाव आओ। यह संघी मुस्लिमों से वोट माँगेगा, लेकिन इस्लामोफोब (मुस्लिमों से घृणा करने वाला) के इस घृणित ट्वीट को देखिए। दिल्ली के प्यारे मुस्लिमों, आप केजरीवाल के नेतृत्व में नफरत फैलाने वालों की सरकार के ही लायक हैं। आपके लिए कोई सहानुभूति नहीं।”

दरअसल, नरेश बाल्यान ने केंद्र सरकार को घेरने के लिए रोहिंग्या शरणार्थियों पर ट्वीट किए थे। बाल्यान के एक ट्वीट में लिखा है, “बीजेपी के भक्त कश्मीर फाइल्स के पोस्टर ही चिपकाते रह गए। उधर मोदी सरकार ने रोहिंग्या शरणार्थियों को 250 पक्के मकान, राशन और सिक्योरिटी भी दे दिया।” उन्होंने भाजपा पर हमला बोलते हुए पूछा कि इन फ्लैट्स में रहने वाले रोहिंग्या मुस्लिमों के घरों से कचरा कौन उठाएगा। उन्होंने तजिंदरपाल सिंह बग्गा और संबित पात्रा का नाम लेकर कटाक्ष किया।

वहीं, जावेद द्वारा बाल्यान ने एक अन्य ट्वीट में लिखा है, “केजरीवाल जी ने तो कम से कम अपने देश की जनता को रेवड़ी दी। ये भाजपाई तो रोहिंग्या को ही दिल्ली में 148 करोड़ रुपए का 250 फ्लैट कर दिया। कितने बड़े गद्दार हैं भाजपाई?” इसके बाद उन्होंने भाजपा पर सवाल उठाया।

ये दोनों ट्वीट नरेश बाल्यान ने 17 अगस्त को किए। रिफत इन्हीं रोहिंग्या को फ्लैट देने की बात AAP विधायक द्वारा उठाने पर चिढ़ गए। इसी आधार पर उन्होंने मुस्लिमों को कोसते हुए आम आदमी पार्टी को वोट देने के लिए लताड़ा।

रिफत ने एक अन्य ट्वीट में लिखा, “दिल्ली के मेरे मुस्लिम दोस्तों ने अक्सर तर्क दिया कि अगर वे AAP को वोट नहीं देेते तो बीजेपी जीत जाती। मैंने तब उनसे कहा था और अब दोहरा रहा हूँ कि ‘AAP को वोट देने से बेहतर है कि बीजेपी को जीतने दिया जाए’।”

इस पर नरेश बाल्यान ने लिखा, “और तालिबानी? तूम भी लंदन में और सलमान रसदी भी लंदन में। अमरीका में चाकू मरवाने में तुम्हारा तो हाथ नही कहीं?”

बता दें कि आम आदमी पार्टी के नेता रोहिंग्या को लेकर भाजपा पर जो आरोप लगा रहे हैं, उसका केंद्रीय गृह मंत्रालय ने खंडन किया है। बुधवार (17 अगस्त 2022) को गृह मंत्रालय ने कहा कि उसने रोहिंग्या मुस्लिमों को फ्लैट देने का निर्देश नहीं दिया है। मंत्रालय का कहना है कि वापस भेजने तक रोहिंग्या को डिटेंशन सेंटर में ही रखा जाएगा।

गौरतलब है कि ये वही रिफत जावेद हैं, जिन्होंने पिछले साल अक्टूबर में एक किस्सा सुनाया था। अपने किस्से में उन्होंने बताया था कि उनका राजेश नाम का एक दोस्त था, जिसका परिवार उन्हें अपने घर पर नमाज पढ़ने के लिए प्रोत्साहित करता था। जब वे नमाज पढ़ते थे तो वे देवी-देवताओं की मूर्तियों को ढंक देते थे।

रिफत ने बताया था कि वो पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में एक विश्वविद्यालय छात्र हुआ करते थे, तब वो अपने दोस्त राजेश के यहाँ अक्सर पढ़ने जाया करते थे, जिसका घर बड़ा बाजार में था। रिफत जावेद की मानें तो राजेश के दादाजी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का हिस्सा थे।

BBC के साथ 12 वर्षों तक काम कर चुके रिफत जावेद ने आगे लिखा था, “मेरे दोस्त राजेश का परिवार हमेशा मुझे अपने घर पर नमाज पढ़ने के लिए प्रोत्साहित करता था। इसके लिए वो हिन्दू देवी-देवताओं की तस्वीरें ढक देते थे। अब ये नया भारत मुझे पहचान में ही नहीं आ रहा है।”

हालाँकि, रिफत ने आज तक ऐसी कोई स्टोरी नहीं बताई, जिसमें उन्होंने अपने किसी हिंदू दोस्त को अपने घर पर बुलाया हो और उसे वहाँ पूजा-पाठ करने के लिए प्रेरित किया हो। रिफत एकतरफा लिबर्टी चाहते हैं। शायद यही कारण है कि रोहिंग्या की बात उठाने पर वे नरेश बाल्यान ने खफा हो गए।

‘अरब की औरतें मोटी’ वाली रिपोर्ट में छापी जिस हिरोइन की तस्वीर वह भड़कीं, ‘द इकोनॉमिस्ट’ पर करेंगी केसः कहा- यह निजता का उल्लंघन, तस्वीर से छेड़छाड़ भी की

लंदन के जाने माने समाचार पत्र ‘द इकोनॉमिस्ट’ ने हाल ही में अरब की औरतों को ‘मोटी’ बताते हुए एक लेख छापा था। इस लेख में पुरुषों और महिलाओं के बीच मोटापे का अंतर समझाने के लिए एक इराकी अभिनेत्री की तस्वीर छापी गई थी। लेख का शीर्षक था ‘अरब जगत में पुरुषों की तुलना में महिलाएँ मोटी क्यों हैं?’

इस लेख में जिस इराकी अभिनेत्री की तस्वीर छापी गई थी उन्होंने इसे लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। साथ ही 42 वर्षीय अभिनेत्री ने कहा है कि वो ‘द इकोनॉमिस्ट’ के खिलाफ मानहानि का केस दर्ज करेंगी। तालेब को ‘द इकोनॉमिस्ट’ के लेख का शीर्षक द्वेषपूर्ण लगा। लेख में ये भी लिखा गया कि इराकी लोग एक्ट्रेस एनास तालेब के कर्व को सुंदरता के आदर्श के रूप में देखते हैं।

इस लेख के प्रकाशित होने के बाद बलसम मुस्तफा ने ट्विटर पर आर्टिकल में प्रयोग की गई महिला कलाकार की तस्वीर पर आपत्ति जताई थी। उन्होंने कहा कि जो महिला तस्वीर में दिख रही है वो बहुत छोटेपन से हर टैबू को तोड़ती आई है। उसे तो सम्मान दिया जाना चाहिए, न कि उसे या किसी और अरब महिला को बॉडी शेम करना चाहिए।

बता दें कि इस लेख की जबरदस्त आलोचना हुई थी। कई लेखकों ने इस लेख को अरब महिलाओं के बारे में अपमानजनक रूढ़िवादिता के रूप में दर्शाया। इस लेख का निष्कर्ष था कि अरब में औरतें ज्यादातर घर में रहती हैं इसलिए वो मोटी होती हैं। लेख के अनुसार वहाँ औरतों को घर से बाहर खेलने कूदने का मौका नहीं मिलता जिसके कारण वो मोटी हो जाती हैं। जबकि मर्द घर से बाहर जाते हैं, काम करते हैं, मजदूरी करते हैं।

इस लेख को लेकर सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा फूटा था। उन्होंने इसे तथ्यों से परे बताया था। अरब से जुड़े लोगों ने ‘द इकोनॉमिस्ट’ की जमकर आलोचना की थी। उन्होंने ये भी पूछा कि आखिर इस समाचार पत्र को उनसे क्या दिक्कत है। एक के बाद एक घटिया लेख उनके बारे में क्यों लिखे जाते हैं। इसी तरह अन्य यूजर्स भी ‘द इकोनॉमिस्ट’ पर गुस्सा उतारते हुए दिखे। कुछ ने आरोप लगाया कि ये विदेशी अखबर अरब वालों से चिढ़ता है क्योंकि वहाँ की औरतों के पास ज्यादा अधिकार हैं। अगर वहाँ उन्हें कोई परेशान करता है तो सीधे जेल में होगा।

नूपुर शर्मा पर फिदायीन हमले की योजना, PDF पढ़वाने देवबंद जाता था आतंकी नदीम; 3 महीने में 18 बार मिली मदरसे में लोकेशन: ATS खंगाल रही कुंडली

उत्तर प्रदेश पुलिस (Uttar Pradesh Police) की आतंकवाद निरोधक दस्ते (ATS) द्वारा हाल ही में गिरफ्तार किए जैश-ए-मोहम्मद (Jaish-E-Mohammad) के आतंकी मोहम्मद नदीम को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। नदीम पाकिस्तान (Pakistan) से उर्दू (Urdu) में आए फिदायीन हमलों से संबंधित PDF फाइल को पढ़वाने के लिए मदरसे तक आता था।

इस PDF में फिदायीन हमलों के बारे में जानकारी दी गई होती थी। इसी में भाजपा (BJP) की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा (Nupur Sharma) की हत्या का जिक्र था। नदीम अंग्रेजी और उर्दू भाषा नहीं जानता था। इसलिए वह मदरसे तक आता था। एजेंसियों को शंका है कि वह यहाँ आतंकवाद के लिए भी लोगों को उकसाता था।

सूत्रों के हवाले ने दैनिक भास्कर ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि यही कारण है कि पिछले 3 महीने में उसकी लोकेशन 18 बार मदरसे में मिली है। पुलिस इस बात की भी जाँच कर रही है कि वह यहाँ किन-किन लोगों के संपर्क में था। रिपोर्ट के मुताबिक, नदीम उत्तर प्रदेश-बिहार सहित कई राज्यों के युवकों को झाँसे में लेकर आतंकी संगठनों में शामिल होने का दबाव बनाता था।

नदीम आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के साथ-साथ तहरीक-ए-तालिबान (TeT) और पाकिस्तान के TTP के भी संपर्क में था। वह फदायीन हमलों की ट्रेनिंग लेने के लिए पाकिस्तान जाने वाला था। उसके मोबाइल से फिदायीन हमले का PDF पुलिस को मिला है। बता दें कि कि ATS ने नदीम को कोर्ट में पेश किया था, जहाँ से उसे 12 दिन की रिमांड पर भेजा गया है।

ATS ने हाल ही में फतेहपुर से हबीबुल को गिरफ्तार किया था। वह फिदायीन हमले की तैयारी कर रहा था। इसके साथ ही वह मुस्लिम युवकों को दीन के नाम पर बहकाकर उन्हें आतंकी गतिविधियों के लिए तैयार कर रहा था।

बता दें कि नदीम ने मदरसे से शिक्षा ली है। सहारनपुर गंगोह इलाके के गाँव कुंडाकला के रहने वाले नदीम की रिश्तेदारी पाकिस्तान में है। वह रात में जाग कर नूपुर शर्मा के हत्या की रूपरेखा बना रहा था।

NSA अजीत डोवाल की सुरक्षा में चूक पर एक्शन, 3 कमांडो बर्खास्त, DIG और कमांडेंट का ट्रांसफर: जानिए क्या है पूरा मामला

भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल (Ajit Doval) की सुरक्षा में हुई चूक के मामले में केंद्र ने अब सख्त कार्रवाई करते हुए 3 कमांडो को निलंबित कर दिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार यानि NSA अजीत डोवाल की सुरक्षा में हुई चूक से जुड़े एक मामले में कार्रवाई करते हुए केंद्र सरकार (Central Government) ने 3 कमांडो को नौकरी से हमेशा के लिए बर्खास्त कर दिया है। बताया जा रहा है कि ये तीनों कमांडो उस वक्त ड्यूटी कर रहे थे, जब डोवाल के सरकारी बंगले तक एक संदिग्ध गाड़ी पहुँच गई थीं।

वहीं इस मामले में VIP सुरक्षा से जुड़े DIG और कमांडेंट का ट्रांसफर किया गया है। बता दें कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल (National Security Advisor Ajit Doval) की सुरक्षा में चूक का मामला ज्यादा पुराना नहीं है। बल्कि इसी साल फरवरी महीने का है, इस मामले में तब एक व्यक्ति को हिरासत में भी लिया गया था।

अजीत डोवाल की सुरक्षा में हुई चूक का पूरा मामला

16 फरवरी 2022 को NSA अजीत के दिल्ली स्थित सरकारी बंगले के गेट तक एक अनजान व्यक्ति कार लेकर पहुँच गया था। उसकी इस हरकत के बाद सुरक्षा बल के जवानों ने उसे धर-दबोचा। बता दें कि यह व्यक्ति लाल रंग की एसयूवी कार लेकर डोवाल के घर तक आया था। तब उस व्यक्ति ने दिल्ली पुलिस की स्पेशल टीम को बताया कि उसकी बॉडी में चिप लगा दिया गया है और उसे रिमोट कंट्रोल से नियंत्रित किया जा रहा है।

उल्लेखनीय है कि जाँच में उसके शरीर से कोई भी चिप नहीं पाई गई थी। उसने पूछताछ में यह भी माना कि वह कर्नाटक का रहने वाला है और किराए की कार चला रहा था। वहीं उसकी पहचान बेंगलुरु के शांतनु रेड्डी के तौर पर हुई थी। पुलिस ने भी अपनी आधिकारिक स्टेटमेंट में यह बताया कि वह व्यक्ति मानसिक रूप से कमजोर है।

गौरतलब है कि अजीत डोवाल आजाद भारत के पाँचवें राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हैं और वे 30 मई 2014 से इस पद पर नियुक्त हैं। वहीं उनका सरकारी आवास दिल्ली के सबसे सुरक्षित इलाके लुटियंस जोन के 5 जनपथ में स्थित हैं। बता दें कि उनसे पहले पहले पूर्व प्रधानमंत्री इंद्र कुमार गुजराल यहीं रहते थे। डोवाल को Z+ कैटेगरी की सुरक्षा मिली है और उनकी सुरक्षा CISF के कमांडो करते हैं।

रूस में 10 बच्चे पैदा करने वाली माँ को मिलेगा सम्मानः यूक्रेन से युद्ध के बीच पुतिन का ऐलान, स्टालिन जमाने का ‘मदर हिरोइन’ अवॉर्ड लौटा

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने 10 या इससे ज्यादा बच्चे पैदा करने वाली महिलाओं को सम्मानित करने का फैसला लिया है। 10 या उससे ज्यादा बच्चों को पैदा करके पालने वाली महिला को ‘मदर हीरोइन’ (Mother Heroin) अवॉर्ड से सम्मानित किया जाएगा। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच तेजी से गिरती जनसंख्या को देखते हुए ये फैसला लिया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस पुरस्कार के साथ माताओं को 16,138 डॉलर यानी एक मिलियन रूबल की एकमुश्त राशि दी जाएगी। 10 या उससे ज्यादा बच्चे पैदा करने वाली माँ का रूसी संघ की नागरिक होना जरूरी है। जिनका 10वाँ बच्चा एक साल की उम्र पूरी कर लेगा वो माताएँ भी इस पुरस्कार की हकदार होंगी। इसके अलावा युद्ध, आतंकवादी हमले या किसी आपात स्थिति में अगर माँ अपना बच्चा खो देती है तो भी वो इस अवॉर्ड की हकदार होंगी।

कब और क्यों हुई थी ‘मदर हीरोइन’ अवॉर्ड की शुरुआत

दरअसल, “मदर हीरोइन” अवॉर्ड की शुरुआत पहली बार 1944 में पूर्व सोवियत नेता जोसेफ स्टालिन ने की थी। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान एक बड़ी आबादी के मारे जाने के कारण इसकी घोषणा की गई थी। हालाँकि, 1991 में सोवियत संघ के पतन के साथ ही इस अवॉर्ड से माताओं को सम्मानित किया जाना भी बंद कर दिया गया था।

मदर हीरोइन अवॉर्ड को ‘हीरो ऑफ रूस और ‘हीरो ऑफ लेबर’ जैसी उपाधियों के बराबर ही प्रतिष्ठित माना जाता है। रूस के बाल दिवस समारोह से एक दिन पहले 1 जून को, पुतिन ने मूल रूप से मदर हीरोइन की उपाधि की घोषणा करने का सुझाव दिया था।

बता दें कि हाल के दशकों में, रूस की जनसंख्या में लगातार गिरावट देखी गई है। 2022 की शुरुआत में 400,000 लोगों की गिरावट के बाद यहाँ कुल जनसंख्या गिरकर 145.1 मिलियन हो गई। इसी कारण से जनसंख्या को एक बार फिर से बढ़ाने के लिए रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने ‘मदर हीरोइन’ अवॉर्ड की शुरुआत की है। जिससे महिलाओं को अधिक से अधिक बच्चे पैदा करने के लिए प्रेरित किया जा सके।

एक बिरादरी के मुस्लिम नहीं थे सानिया और वसीम, इसलिए भाई-बाप ने मिलकर गर्दन काट दी: मेरठ में मिली लड़की की सिर कटी लाश की गुत्थी सुलझी

मेरठ में जिस लड़की की सिर कटी लाश मिली थी, उसकी पहचान सानिया के तौर पर हुई है। उसकी हत्या उसके बाप और भाई ने मिलकर की थी। वजह गैर बिरादरी के मुस्लिम वसीम से उसका प्रेम करना था।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार पुलिस ने सानिया के अब्बा शाहिद कुरैशी के साथ उसकी अम्मी और भाई को हिरासत में लिया है। रिपोर्ट के अनुसार 18 साल की सानिया का वसीम से अफेयर चल रहा था। वह उसके साथ ही निकाह करना चाहती थी। लेकिन उसके परिजन इस रिश्ते के लिए तैयार नहीं थे।

सानिया जब वसीम के साथ ही निकाह करने के लिए अड़ गई तो अब्बू और भाई ने मिलकर उसकी हत्या कर दी। इसके बाद उसका धड़ लक्खीपुरा नाले और सिर अंजुम पैलेस के पास नाले में फेंक दिया। पत्रकार सचिन गुप्ता ने ट्वीट कर बताया है कि पुलिस सिर की तलाश अभी भी कर रही है।

लड़की की सिर कटी लाश 12 अगस्त 2022 को मिला था। बदन पर काले रंग का पैंट और नीले रंग की छींट वाला टॉप था। सोशल मीडिया पर घटना का वीडियो भी वायरल हुआ था। रिपोर्ट के अनुसार शाहिद ने अपने बयान में कहा है कि कुछ साल पहले वह मेरठ की शहजाद कॉलोनी में परिवार के साथ रहता था। वसीम का घर उसके पड़ोस में ही था। इसी दौरान जान-पहचान हुई थी। लेकिन वसीम सैफी बिरादरी से है, जबकि शाहिद कुरैशी बिरादरी से आते हैं। उन्हें जब इस रिश्ते की भनक लगी तो परिवार ने सानिया को पहले काफी समझाया। फिर भी वह वसीम से छिपकर मिलती रही। एक बार छत से कूदकर आत्महत्या की कोशिश भी की।

शाहिद ने हत्या की बात कबूलते हुए कहा, “सानिया सो रही थी। उसी समय अजीम (सानिया का भाई) ने उसे कसकर पकड़ लिया। मैंने जानवर काटने वाले चाकू से एक ही वार में उसका सिर काट दिया।” लाश को फेंकने के बाद बाप-बेटे घर में आकर सो गए थे। जब परिवार के लोगों ने सानिया की खोज की तो शाहिद ने उसे बुआ के घर भेजने की बात कही थी।

लिसाड़ी गेट इलाके के लक्खीपुरा में गली नंबर 28 के पास सुबह 4 बजे के आसपास जब कुछ लोग मॉर्निंग वॉक पर निकले तो उन्होंने सिर कटी लाश देखी थी। लाश चादर की गठरी में बाँधी गई थी। गठरी कब्रिस्तान की बाउंड्री के पास रखी हुई थी। गठरी से खून निकलता देख लोगों ने पुलिस को खबर दी थी। ऑपइंडिया से बात करते हुए मेरठ के DSP अरविन्द चौरसिया ने कहा था कि शायद लाश को कब्रिस्तान में फेंकने का प्रयास किया गया होगा, लेकिन बाउंड्री से टकरा कर वह बाहर ही रह गई।

अब फुटबॉल क्लब मैनचेस्टर यूनाइटेड खरीद रहे हैं एलन मस्क? ट्वीट से फिर मचाया हड़कंप: जानें क्या है सच्चाई

दुनिया के सबसे अमीर शख्स टेस्ला के मालिक एलन मस्क ने एक बार फिर से अपने ट्वीट से सबको चौंका दिया है। इस बार उन्होंने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से बुधवार (17 अगस्त 2022) सुबह ट्वीट कर लिखा कि वो ब्रिटिश फुटबॉल क्लब मैनचेस्टर यूनाइटेड (Manchester United) को खरीद रहे हैं। इससे ठीक वैसे ही हलचल मची जैसे ट्विटर खरीदने के समय हुई थी।

हालाँकि, इसके बाद जल्द ही वे अपनी बात से पलट गए। उन्होंने कहा कि वो मजाक कर रहे थे। जब यूजर ने उनसे पूछा कि क्या वो सच में मैनचेस्टर यूनाइटेड खरीद रहे हैं तो उन्होंने इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि ये ट्विटर पर लंबे समय से चला आ रहा एक मजाक है। वो कोई भी स्पोर्ट्स टीम नहीं खरीद रहे हैं। इस प्रकार के मजाक वो अक्सर करते रहे हैं। इससे पहले उन्होंने कोका कोला की कंपनी खरीदने की बात कही थी। तब उन्होंने ट्वीट कर कहा था कि वो इस कोल्ड ड्रिंक में कोकीन मिलाकर बेचेंगे।

जब एलन मस्क ने मजाक में पूछी थी ट्विटर की कीमत

एलन मस्क के मजाक को कई बार समझना मुश्किल हो जाता है। वो मजाक में कही बात को कई बार सत्य भी कर देते हैं। उदाहरण के तौर पर 2017 में उन्होंने मजाक में ही पूछा था कि ट्विटर कितने का होगा? इसके बाद उन्होंने सच में इस सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को खरीदने की तैयारी कर ली थी। इस दौरान उन्होंने खूब सुर्खियाँ भी बटोरी थी। हालाँकि, बाद में डील पूरी न हो सकी।

वहीं टेस्ला कंपनी के सीईओ एलन मस्क ने अपने एक ट्वीट में ये भी कहा कि स्पष्ट तौर पर, मैं रिपब्लिकन पार्टी के आधे बाएँ और डेमोक्रेटिक पार्टी के आधे दाहिने हिस्से का समर्थन करता हूँ।

क्या है मैनचेस्टर यूनाइटेड

गौरतलब है कि मैनचेस्टर यूनाइटेड विश्व के सबसे फेमस फुटबाल क्लबों में से एक है। पुर्तगाल के स्टार प्लेयर क्रिस्टियानो रोनाल्डो भी इसी क्लब से खेलते हैं। इस क्लब का मालिकाना हक अमेरिका की ग्लेजर फैमिली के पास है। इन्होंने इसे साल 2005 में खरीदा था।