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गुजरात के संत ने कहा- अब शाहरुख खान के ‘पठान’ का बहिष्कार करो सनातनियों, सर तन से जुदा करने की मिली धमकी

गुजरात के संत और हिन्दू युवा वाहिनी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष योगी देवनाथ को सोशल मीडिया पर ‘सिर तन से जुदा’ की धमकी मिली है। धमकी देने वाले हैंडल का नाम सलीम अली है जो खुद को SRK (शाहरुख़ खान) का फैन लिखता है। धमकाने वाले ने अपनी प्रोफ़ाइल फोटो भी शाहरुख़ खान और उनके बेटे आर्यन खान की लगा रखी है। धमकी 11 अगस्त 2022 (गुरुवार) को दी गई है। योगी देवनाथ ने इसकी शिकायत गुजरात पुलिस से की है।

योगी देवनाथ द्वारा शेयर किए गए स्क्रीनशॉट में एक व्यक्ति अपने एक हाथ में प्रतिकात्मक पर योगी देवनाथ के कटे सिर का फोटो लिए हुए हैं। उसी व्यक्ति के दूसरे हाथ में बंदूक है। धमकी योगी देवनाथ के ट्वीट पर रिप्लाई के तौर पर मिली है। सलीम अली (@saleem8268) नाम के इस ट्विटर हैंडल पर इस फोटो को शेयर करते हुए हँसने की इमोजी बनाई गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक धमकी देने वाला योगी देवनाथ द्वारा शाहरुख़ खान की फिल्म पठान का विरोध करने से नाराज था। सलीम अली नाम के हैंडल से मिली धमकी के स्क्रीनशॉट को शेयर करते हुए योगी देवनाथ ने लिखा, “सिर तन से जुदा करने वाली गैंग सक्रिय हो चुकी है। गुजरात पुलिस संज्ञान ले।” योगी देवनाथ ने अपने ट्वीट में आरोपित का लिंक भी शेयर किया है। फिलहाल वायरल होता देख कर आरोपित ने अपने ट्वीट डिलीट कर लिया है और ट्विटर हैंडल को बंद कर दिया है।”

सलीम का बंद किया गया ट्विटर हैंडल

बता दें कि आरोपित सलीम खुद को शाहरुख़ खान का बड़ा फैन बताता है। उसने प्रोफ़ाइल फोटो के अलावा कवर फोटो में भी शाहरुख़ खान की पठान फिल्म का पोस्टर लगा रखा है। सलीम के मुताबिक शाहरुख़ खान सिर्फ स्टार नहीं बल्कि उसकी दुनिया है। फिलहाल साध्वी प्राची सहित कई अन्य यूजर भी सलीम के स्क्रीनशॉट को शेयर करते हुए उसकी गिरफ्तारी और योगी देवनाथ को सुरक्षा देने की माँग कर रहे हैं।

गौरतलब है कि पिछले कुछ दिनों से देश के अलग-अलग हिस्सों में गुस्ताख़-ए-नबी के नारे के साथ कई लोगों को जान से मार देने की धमकियाँ आईं हैं। इसी के साथ 28 जून 2022 को उदयपुर में कन्हैयालाल नाम के व्यक्ति की निर्ममता से हत्या भी कर दी गई थी। फिलहाल फिल्म के बहिष्कार पर जान से मार देने की धमकी का ये पहला मामला है।

अरबों का घाटा फिर भी सैलरी भारत में ‘सबसे ज्यादा’: पेटीएम के विजय शेखर शर्मा का IiAS क्यों कर रही विरोध, पढ़ें पूरी रिपोर्ट

भारतीय ई-कॉमर्स शॉपिंग वेबसाइट पेटीएम (Paytm) को पिछले कुछ समय में अरबों का घाटा हुआ है। इसके बावजूद भी कंपनी ने एक बार फिर से विजय शेखर शर्मा को ही सीईओ नियुक्त कर दिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार ऑनलाइन मनी ट्रांजेक्शन के लिए प्रसिद्ध कंपनी पेटीएम के एक फैसले के खिलाफ प्रॉक्सी एडवाइजरी फर्म इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर एडवाइजरी सर्विसेज इंडिया (Institutional Investor Advisory Services India) यानी IiAS ने मोर्चा खोल लिया है। IiAS ने पेटीएम की पैरेंट कंपनी वन 97 कम्युनिकेशंस (One97 Communications) के शेयरधारकों को फर्म के पाँच प्रस्तावों के खिलाफ वोट करने की सलाह दी है।

आपको बताते चलें कि इन 5 प्रस्तावों में विजय शेखर शर्मा को प्रबंध निदेशक (Managing Director) के रूप में फिर से नियुक्त करना भी शामिल है। बताया जा रहा है कि हाल ही में वन 97 कम्युनिकेशंस ने विजय शेखर शर्मा को 19 दिसंबर 2022 से पाँच साल के लिए प्रबंध निदेशक और सीईओ (Managing Director & CEO) के रूप में फिर से नियुक्त करने की माँग की थी।

अरबों के घाटे के कारण IiAS कर रहा विरोध

अब इस प्रस्ताव के खिलाफ एडवाइजरी फर्म IiAS खड़ी हो गई है। IiAS का कहना है कि कंपनी की लिस्टिंग के बाद से ही इसके शेयर की कीमत 63.6% गिर गई है। इस कारण से शेयरधारकों को घाटा झेलना पड़ा।

वित्तीय वर्ष 2021-2022 में कंपनी ने 1200 करोड़ रुपए के नकद नुकसान की सूचना दी थी। साथ ही वित्तीय वर्ष 2022-23 की पहली तिमाही में भी घाटा अधिक था। विजय शेखर शर्मा ने कंपनी को लाभदायक बनाने के लिए अतीत में कई वादे किए थे, जोकि पूरा नहीं किया गया। ऐसे में IiAS का मानना ​​है कि पेटीएम की पैरेंट कंपनी वन 97 कम्युनिकेशंस के बोर्ड को प्रबंधन को पेशेवर बनाने पर विचार करना चाहिए।

विजय शेखर शर्मा को मिलने वाली सैलरी और फायदे को लेकर भी इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर एडवाइजरी सर्विसेज इंडिया (IiAS) ने शेयरधारकों से उनके खिलाफ मतदान करने को कहा है। IiAS के अनुसार विजय शेखर शर्मा को मिलने वाली कुल सैलरी और फायदे (कुल पारिश्रमिक) एसएंडपी बीएसई सेंसेक्स (S&P BSE Sensex) वाली बाकी सभी कंपनियों के सीईओ से ज्यादा है। यह हाल तब है, जबकि बाकी सभी कंपनियाँ फायदे में हैं।

IiAS का मानना है कि वित्तीय वर्ष 2022-23 में विजय शेखर शर्मा को कुल पारिश्रमिक 796.28 करोड़ रुपए मिलेंगे। इसमें सबसे आश्चर्यजनक बात यह है कि भले ही पेटीएम (Paytm) कंपनी घाटे में रहे, न्यूनतम पारिश्रमिक के रूप में शर्मा को कुल पारिश्रमिक 796.28 करोड़ रुपए मिलेंगे ही।

इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर एडवाइजरी सर्विसेज इंडिया (IiAS) ने कंपनी को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए कहा,

“कंपनी में डायरेक्टर या फिर सीनियर मैनजरों की उत्तराधिकारी को लेकर बोर्ड के दावे पर हमें शक नहीं है। हम यह भी मानते हैं कि इसके लिए आपके पास एक प्लान होगा। लेकिन हमारी चिंता यह है कि वो (विजय शेखर शर्मा) रोटेशन के अनुसार रिटायर नहीं होंगे। मैनेजिंग डायरेक्टर के पोस्ट के बाद अगर उन्हें गैर-कार्यकारी पद पर बनाए रखा गया तो हमें ऐसा लगता है कि उनको ‘बोर्ड में स्थायी सदस्यता’ मिल जाएगी।”

कौन हैं पेटीएम के सीईओ विजय शेखर शर्मा

प्राप्त जानकारियों के मुताबिक विजय शेखर शर्मा एक भारतीय उद्यमी है, जिनका जन्म 15 जुलाई 1978 को उत्तरप्रदेश के अलीगढ़ ज़िले में हुआ था। इन्होंने अपनी मातृ शिक्षा दिल्ली के इंजीनियरिंग कॉलेज से पूर्ण की। विजय शेखर शर्मा ने ही अगस्त 2010 में वन 97 कम्युनिकेशंस से करार करके नोएडा में पेटीएम की शुरुआत की थी, पेटीएम के फॉउंडर का क्रेडिट शर्मा को ही दिया जाता है। तब से लेकर अभी तक पेटीएम का मुख्यालय नोएडा में ही है।

‘सिखों को हमेशा कमजोर करना चाहते हैं मुस्लिम’: आमिर खान की ‘लाल सिंह चड्ढा’ पर बरसा इंग्लैंड का पूर्व क्रिकेटर, फिल्म को बताया भारतीय सेना का अपमान

देश के साथ अब विदेश में भी आमिर खान (Aamir Khan) की फिल्म ‘लाल सिंह चड्ढा’ (Lal Singh Chaddha) के बायकॉट की माँग की जा रही है। इसी बीच इंग्लैंड के पूर्व क्रिकेटर मोंटी पनेसर ने आमिर खान की फिल्म को लेकर सोशल मीडिया पर अपना गुस्सा जाहिर किया है। उन्होंने दावा किया है कि ये फिल्म भारतीय सेना और सिखों का अपमान करती है। मोंटी ने इस फिल्म के बायकॉट की माँग भी की है।

मोंटी ने फिल्म के रिलीज होने के बाद गुरुवार (11 अगस्त 2022) को सिलसिलेवार कई ट्वीट्स करते हुए आमिर खान की फिल्म की कड़ी निन्दा की। उन्होंने अपने पहले ट्वीट में लिखा, “फॉरेस्ट गंप (Forrest Gump) अमेरिकी सेना पर फिट बैठती है, क्योंकि अमेरिका उस दौर में वियतनाम वार के लिए सेना को भरने के लिए कम आईक्यू वाले लोगों की भर्ती भी कर रहा था। पर ये फिल्म भारतीय सशस्त्र बलों, भारतीय सेना और सिखों का अपमान करती है। अपमानजनक शर्मनाक।”

इंग्लैंड के पूर्व क्रिकेटर ने अपने दूसरे ट्वीट में आमिर खान को आड़े हाथों लेते हुए तीखी टिप्पणी की है। मोंटी ने लिखा, “‘लाल सिंह चड्ढा में आमिर ने एक मंदबुद्धि इंसान का किरदार निभाया है। फॉरेस्ट गंप भी एक मंदबुद्धि इंसान था। अपमानजनक और शर्मनाक है।”

इसके बाद मोंटी ने एक और ट्वीट किया। इसमें उन्होंने फिल्म को बॉयकॉट करने की अपील की है। पनेसर ने अपने ट्वीट में कुछ आँकड़े भी दिए हैं। इनमें लिखा है, “एक पद्मविभूषण, एक पद्मभूषण, 21 इंडियन ऑर्डर ऑफ मेरिट्स, 14 विक्टोरिया क्रॉस, दो परम वीर चक्र, चार अशोक चक्र, आठ महावीर चक्र, 24 कीर्ति चक्र, 64 वीर चक्र, 55 शौर्य चक्र, 375 सेना मेडल।”

यही नहीं उन्होंने मोहम्मद आदिल नाम के यूजर को रिप्लाई करते हुए लिखा, “मुस्लिम हमेशा से सिखों को कमजोर करना चाहते हैं। इस फिल्म का बहिष्कार करें।”

बता दें कि आमिर खान की फिल्म ‘लाल सिंह चड्ढा’ हॉलीवुड स्टार टॉम हैंक्स की फिल्म ‘फॉरेस्ट गंप’ का हिंदी रीमेक है। वहीं कमाल आर खान उर्फ केआरके ने आमिर खान की फिल्म ‘लाल सिंह चड्डा’ का का मजाक उड़ाते हुए अभिनेता को पागल, बेवकूफ और मेंटल बताया है। उन्होंने फिल्म के डायलॉग्स को बेहद खराब बताया है। केआरके ने फिल्म की लीड एक्ट्रेस करीना कपूर खान (Kareena Kapoor Khan) को ‘आंटी’ बताया है। केआरके ने कहा, “फिल्म बहुत स्लो और बोरिंग है। ट्रेन में बैठा आमिर खान पागलों जैसी हरकतें कर रहा है। मैं आमिर खान से सिर्फ इतना पूछना चाहता हूँ कि जब आपको फिल्म में पागल का ही रोल करना था फिर आपका सरदार बनना जरूरी क्यों था। क्या आप ये साबित करना चाहते हैं कि सरदार पागल होते हैं।”

गाय का मुँह बाँध लाठियों से पीटा, फिर पैर बाँध नदी में फेंका : छत्तीसगढ़ में क्रूरता की हदें पार, Video वायरल होने के बाद 2 गिरफ्तार

छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा में एक गोवंश के साथ कुछ लोगों की बेरहमी का वीडियो वायरल हुआ है। इस वीडियो में गाय का मुँह बोरी से बाँध कर उसको बुरी तरह से पीटा गया है। बाद में उस गाय को अधमरी हालत में चारों पैर बाँध कर नदी में फेंक दिया गया। इस घटना का वीडियो आरोपितों ने खुद ही बनाया था जिनके खिलाफ मंदिर हसौद थाने में FIR दर्ज हुई है। इस घटना में पुलिस ने 3 नामजद आरोपितों के खिलाफ FIR दर्ज कर के 2 आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। घटना गुरुवार (11 अगस्त 2022) सुबह की बताई जा रही है।

वायरल वीडियो में नदी में फेंका गया गौवंश कुछ देर तैरने का प्रयास करता है लेकिन पैर बँधे होने के कारण बाद में वह डूब गया। वीडियो में घटनास्थल पर लगभग 10 आरोपित दिखाई दे रहे हैं। उनके हाथों में डंडे भी दिखाई दे रहे हैं। घटना एक सड़क पर बने पुल की है जिस से लोग आ जा रहे हैं।

वहीं इस वीडियो के वायरल होने के बाद भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा ने आरोपितों के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई। शिकायत के मुताबिक, “गाँव लालमाटी से बहने वाली सोन नदी में आपराधिक तत्वों ने गौ माता के चारों पैरों को रस्सी और मुँह को बोरे से बाँध कर जीवित ही फेंक दिया। इसमें घटना में राहुल खुंटे, कमल किशेर खुंटे, किरन जाटवर और कुलदीप आदि मुख्य रूप से शामिल हैं। आरोपितों ने लोगों में डर फैलाने के लिए इसका वीडियो भी बना डाला।”

शिकायत कॉपी

शिकायत में पुलिस ने सभी आरोपितों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की माँग की गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस शिकायत पर हसौद थाने पर FIR दर्ज हो गई है। पुलिस ने किरण जाटवर, कमल किशोर और राहुल कुट्टे के खिलाफ IPC की धारा 429, छत्तीसगढ़ पशु संरक्षण अधिनियम 2044 की धारा 4/10/11 और पशु क्रूरता अधिनियम की धारा 11 के तहत FIR दर्ज किया है।

पुलिस में शिकायत दर्ज करवाते BJYM कार्यकर्ता

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक आरोपित किरण जाटवर और राहुल खुटे को गिरफ्तार कर लिया गया है। वहीं फरार आरोपित कमल किशोर खुटे की तलाश की जा रही है। पुलिस के मुताबिक वीडियो में दिख रहे बाकी अन्य आरोपित भी चिन्हित किए जा रहे हैं। पुलिस के मुताबिक आरोपितों ने गायों द्वारा अपनी फसलों को खाने से नाराज हो कर इस घटना को अंजाम दिया था।

बुजुर्ग माँ-बाप का इकलौता बेटा, ‘इच्छा मृत्यु’ के लिए जाना चाहता है स्विट्जरलैंडः दोस्त ने हाई कोर्ट से लगाई गुहार, कहा- रोकिए इसे

बेंगलुरु की एक महिला ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर इच्छा-मृत्यु के लिए स्विट्जरलैंड जा रहे अपने एक दोस्त को रोकने का आग्रह किया है। अगले सप्ताह इस पर कोर्ट सुनवाई करेगा। कहा जा रहा है कि अपनी स्वास्थ्य समस्याओं की वजह से वह व्यक्ति इच्छा-मृत्यु (Euthanasia) चाहता है।

कोर्ट में याचिका देने वाली 49 वर्षीय महिला का कहना है कि नोएडा का रहने वाला 48 वर्षीय उसका दोस्त साल 2014 से क्रोनिक फटिग सिंड्रोम (हमेशा थकान बने रहने) की बीमारी से पीड़ित है। अगर उसे रोका नहीं गया तो उसके परिवार को अपूरणीय क्षति होगी, क्योंकि वह अपनी माता-पिता की इकलौती संतान है।

याचिका दाखिल करने वाली महिला ने खुद को पीड़ित व्यक्ति का दोस्त बताया है। उसने कहा कि उसका दोस्त इसके लिए स्विट्जरलैंड जाने की योजना बना रहा है, ताकि वहाँ कानूनी रूप से डॉक्टरों की मदद से इच्छा-मृत्यु हासिल कर सके। बता दें कि इच्छा-मृत्यु का विकल्प भारत में एक ऐसे किसी व्यक्ति के लिए उपलब्ध नहीं है, जो असाध्य रूप से बीमार न हो।

याचिका में कहा गया है कि नोएडा निवासी व्यक्ति एम्स में फेकल माइक्रोबायोटा ट्रांसप्लांटेशन से गुजर रहा था, लेकिन डोनर नहीं होने के कारण कोरोना काल में उसका इलाज जारी नहीं रह सका। इससे उसकी हालत गंभीर हो गई और वह बिस्तर पर पड़े रहने को मजबूर है।

महिला का कहना है कि साल 2014 में शुरू हुई इस बीमारी के बाद पिछले 8 वर्षों में उसकी हालत खराब हो गई है। वह घर में दो-तीन कदम चल सकता है। इतने में ही उतने थकान हो जाती है और वह बिस्तर पकड़ने के लिए बाध्य हो जाता है।

दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर करने वाली महिला के अनुसार, “वह व्यक्ति अपने माता-पिता का इकलौता बेटा है। उसके माता-पिता अपनी उम्र के 70 के दशक में हैं। उसकी एक बहन भी है।” याचिका में कहा गया कि उसे भारत या विदेश में उपचार कराने में कोई वित्तीय बाधा नहीं है, लेकिन वह अब इच्छा-मृत्यु पर अडिग है।

याचिकाकर्ता के मुताबिक, रोगी ने बेल्जियम की एक क्लिनिक में अपना इलाज कराने की झूठी जानकारी देकर शेंगेन वीजा (Schengen Visa) हासिल किया था। इस वीजा के जरिए यूरोप के 26 देशों की यात्रा की जा सकती है। याचिका में कहा गया है कि उस उसने वास्तव में स्विट्जरलैंड की ज्यूरिख की यात्रा की थी और इच्छा-मृत्यु के लिए अपना मनोवैज्ञानिक जाँच कराया था।

महिला का यह भी दावा है कि ज्यूरिख स्थित संगठन डिग्निटास (Dignitas) के माध्यम से वह इच्छा-मृत्यु अपनाने का फैसला किया है। यह संगठन विदेशी नागरिकों को इच्छा-मृत्यु में सहायता देता है।याचिका में कहा गया है कि संगठन ने उसके आवेदन को स्वीकार कर लिया है। उसके पहले मूल्यांकन को मंजूरी भी मिल चुकी है। इस प्रक्रिया में आगे बढ़ने के लिए अब संगठन को अगस्त 2022 के अंत तक व्यक्ति के अंतिम निर्णय की प्रतीक्षा है।

भारत में इच्छा-मृत्यु

साल 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने असाध्य रोग से पीड़ित ऐसे व्यक्तियों के लिए पैसिव यूथेनेशिया (Passive Euthanasia) को कानूनी मान्यता दी थी, जिसमें वह पूर्ण रूप से निष्क्रिय हो जाता है। असाध्य रोग से पीड़ित जो व्यक्ति कोमा में चले गए हैं और लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर हैं, उनके परिजनों की अनुमति से डॉक्टर धीरे-धीरे करके मरीज के लाइफ सपोर्ट को कम कर मृत्यु दे सकते हैं।

भारत में इच्छा-मृत्यु देने का पहला मामला अरुणा शानबाग का है, जिन्हें साल 2015 में परिवार की सहमति से इच्छा-मृत्यु दी गई थी। अस्पताल की नर्स अरुणा को वहीं के एक वॉर्ड बॉय ने बर्बर तरीके से बलात्कार किया था। इसके बाद वह 42 वर्षों तक अस्पताल की बिस्तर पर लाइफ सपोर्ट सिस्टम के सहारे पड़ी रही थीं।

साल 2011 में लेखक और सामाजिक कार्यकर्ता पिंकी विरानी की अरुणा को इच्छा-मृत्यु की माँग देने की अपील करते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की थी। हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को ठुकरा दिया था। विरानी ने कहा था कि अरुणा शानबाग के लाइफ सपोर्ट सिस्टम को हटाकर उन्हें मृत्यु देकर ऐसे जीवन से मुक्त किया जाए।

आत्महत्या भारत में अपराध

बता दें कि भारत में आत्महत्या IPC की धारा 309 के तहत दंडनीय अपराध है। वहीं, मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम की धारा 115 (1) में इस दंड को परिभाषित किया गया है। इसमें कहा गया है कि जब कोई आत्महत्या का प्रयास करता है (जब तक कि अन्यथा साबित न हो) तो माना जाएगा कि वह गंभीर तनाव में था। इसके लिए उसे IPC की धारा 309 के तहत दंडित नहीं किया जाएगा।

पहलवान दिव्या काकरान पर AAP के दावे में झोल, हरियाणा का खिलाड़ी बजरंग पुनिया और रवि दहिया को नकद पुरस्कार दे चुकी है केजरीवाल सरकार

दिव्या काकरान (Divya Kakran) कॉमनवेल्थ गेम्स (CWG 2022) में कुश्ती का कांस्य पदक जीता है। उनके साथ सौतेले व्यवहार को लेकर दिल्ली की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार सवालों के घेरे में है। दिव्या को उत्तर प्रदेश का खिलाड़ी बता आप मदद नहीं देने के आरोपों से पल्ला झाड़ने की कोशिश में है। इसके बाद एक बार फिर भारत की महिला पहलवान ने इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देने के लिए आप को घेरा है।

काकरान ने एक तस्वीर ट्विटर पर साझा की है। इसमें मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल उन्हें गुलदस्ता भेंट कर रहे हैं। इस तस्वीर के साथ काकरान ने लिखा है, “एक खिलाड़ी को कोई भी सम्मानित कर सकता है, चाहे वे लोग किसी भी पार्टी के हों या किसी भी राज्य से हों। इसको राजनीतिक मुद्दा बनाने की ज़रूरत नहीं।”

‘आप’ के नेता महिला खिलाड़ी को बदनाम करने और उनके आरोपों के पीछे राजनीतिक मंशा बता रहे हैं। दिल्ली से आप विधायक नरेश बालियान ने ने उत्तर प्रदेश की एक तस्वीर शेयर की है। इसमें बीजेपी चुनाव कार्यालय में काकरान को सम्मानित किया जा रहा है। इसके जरिए काकरान को घेरने की कोशिश करते हुए उन्होंने लिखा है, तो पूरा खेल यहाँ से हो रहा था। तभी तो सोचूँ की अचानक से एक UP की खिलाड़ी अरविंद केजरीवाल को क्यूँ घेर रही है।”

AAP के एक अन्य विधायक सौरभ भारद्वाज भी काकरान के आरोपों को लेकर दिल्ली सरकार का बचाव कर रहे हैं। उन्होंने गुरुवार (11 अगस्त 2022) को कहा कि उन्हें नकद पुरस्कार नहीं दिया जा सकता क्योंकि वह उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व करती हैं। भारद्वाज ने कहा, “खिलाड़ी दिल्ली में रहती हैं। लेकिन उन्होंने केवल 2016-17 तक ही प्रदेश के लिए खेला है। जहाँ तक सम्मान की बात है तो सीएम ने उन्हें 2018 में सम्मानपूर्वक बुलाया था। हम उन्हें नकद पुरस्कार नहीं दे सकते, क्योंकि वह यूपी का प्रतिनिधित्व करती हैं, लेकिन हमने हमेशा उनका सम्मान किया है।”

AAP सरकार ने बजरंग पुनिया, रवि दहिया को नकद पुरस्कार देकर सम्मानित किया

आपको बता दें कि दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने अप्रैल 2022 में ओलंपिक में पदक जीतने वाले बजरंग पुनिया को 1 करोड़ रुपए का नकद इनाम देने की घोषणा की थी, जो हरियाणा का प्रतिनिधित्व करने वाले पहलवान हैं। इसी तरह नवंबर 2021 में दिल्ली में अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली आप सरकार ने टोक्यो ओलंपिक स्टार रवि दहिया को 2 करोड़ रुपए की सम्मान राशि दी थी। पुनिया की तरह दहिया भी हरियाणा का प्रतिनिधित्व करते हैं और कभी दिल्ली के लिए नहीं खेले हैं। फिर भी, दिल्ली सरकार ने उन्हें पिछले साल टोक्यो ओलंपिक में उनके शानदार प्रदर्शन के लिए 2 करोड़ रुपए की राशि से सम्मानित किया।

केजरीवाल ने रवि दहिया और पुनिया को दिल्ली सरकार द्वारा दिए गए पुरस्कारों को लेकर ट्वीट भी किया था। यह ‘आप’ विधायक सौरभ भारद्वाज के दावों को खारिज करता है कि दिल्ली सरकार अन्य राज्यों से संबंधित एथलीटों को नकद पुरस्कार नहीं दे सकती है।

दिव्या काकरान ने 11 अगस्त को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए खुलासा किया था कि वह 2001 में दिल्ली आई थीं और 2006 में पहलवानी शुरू की थी। उनका परिवार ईस्ट दिल्ली के गोकुलपुरी इलाके में पिछले 20 साल से किराए के घर में रह रहा है। वह 2017 तक दिल्ली को 58 मेडल दे चुकी थीं। इसमें कई सारे गोल्ड और ब्रॉन्ज मेडल शामिल हैं। लेकिन दिल्ली सरकार की ओर से न तो कोई उनके घर पर आया और न ही दिल्ली सरकार ने उनकी कोई मदद की। इसके बाद उन्होंने 2018 से उत्तर प्रदेश के लिए खेलने का फैसला किया।

उन्होंने कहा, “मैं इतने लंबे समय से कुश्ती लड़ रही हूँ। 2017 तक मैंने दिल्ली को 58 पदक दिए। मेरे पास यात्रा के लिए पैसे नहीं हुआ करते थे, मैं अखाड़े जाती थी तो रास्ते में घंटों जाम लगा रहता था। दिल्ली सरकार ने कभी हमारी मदद नहीं की।”

दुनिया के सबसे ‘अमीर’ आदमी की नाव के लिए तोड़ा जा रहा था ऐतिहासिक पुल, लोकल लोगों ने दिखाई औकात

ऑनलाइन शॉपिंग कंपनी अमेजन के संस्थापक जेफ बेजोस (Jeff Bezos) दुनिया के दूसरे सबसे अमीर व्यक्ति हैं। बेजोस बेहद आलीशान जिंदगी जीते हैं और आए दिन किसी न किसी बड़ी वजह से चर्चा में बने रहते हैं। फिलहाल उनकी सुपरयॉट (Superyacht of Jeff Bezos) की खबरें मीडिया में चल रही हैं। इन सबसे जुड़ा है नीदरलैंड का रॉटरडैम (Rotterdam) शहर।

जेफ बेजोस दुनिया की सबसे बड़ी नौका (Superyacht) बनवा रहे हैं। रॉटरडैम में बन रही इस नौका का निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है। नीदरलैंड में बनने वाले जहाजों से जुड़ी जानकारी कवर करने वाले यूट्यूब चैनल ‘डच यॉटिंग’ द्वारा एक वीडियो रविवार को अपलोड किया गया है। इस वीडियो में जेफ बेजोस के इस यॉट को बेहद करीब से दिखाया गया है।

बता दें कि जेफ बेजोस एक ऐसी सुपरयॉट का निर्माण करा रहे हैं, जिसके बारे में कहा जा रहा है कि यह अंतरिक्ष से भी दिखाई देगी। जेफ बेजोस की इस यॉट का नाम Y721 है। इसे नीदरलैंड के अल्‍बलास्‍सेरडम स्थित शिपयार्ड में मशहूर शिप निर्माता कंपनी ओशनको (Oceanco) द्वारा बनाया जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार इस आलीशान यॉट की लंबाई 417 फुट है और इसे बनाने में करीब 43.65 अरब रुपए का खर्च आ रहा है।

गौरतलब है कि जेफ बेजोस का यह सुपरयॉट सबसे पहले तब चर्चा में आया था, जब पिछले साल अक्टूबर में इसकी कुछ तस्वीरें सामने आईं थीं। हालाँकि, इसके बाद यह लगातार चर्चा में तब रहा, जब यह खबर सामने आई कि इस सुपरयॉट को शिपयार्ड से होते हुए समुद्र में जाने के लिए एक ऐतिहासिक पुल को तोड़ दिया जाएगा। इससे स्थानीय लोग गुस्से में आ गए। कोनिंग्सहेवन पुल (Koningshaven Bridge) या स्थानीय डच भाषा में कहें तो डी हेफ (De Hef) के ऐतिहासिक ब्रिज के कारण जेफ बेजोस के इस सुपरयॉट को विरोध-प्रदर्शन का भी सामना करना पड़ा।

यह यॉट आधुनिक जहाजों के जैसा न होकर पाल आधारित बनाया गया है। इस कारण से इसकी ऊँचाई अपेक्षाकृत बहुत अधिक हो गई है। वास्तव में, इस यॉट की ऊँचाई 127 फीट के आसपास है। इसका सीधा अर्थ यह था कि इस यॉट का कोनिंग्सहेवन पुल या डी हेफ ब्रिज के नीचे से निकलना असंभव था। इसलिए, शिपयार्ड से समुद्र में ले जाने के लिए इस पुल को तोड़े जाने की बात कही जा रही थी।

इस दौरान यह कहा गया था कि डी हेफ ब्रिज को तोड़ने और बनवाने का पूरा खर्च जेफ बेजोस ही वहन करेंगे लेकिन रॉटरडैम के लोगों ने लगातार इसका विरोध किया था। यहाँ के निवासियों ने साफ तौर पर कहा था कि यदि इस पुल को तोड़ा जाएगा तो वह यहाँ से निकलने पर इस सुपरयॉट पर अंडे फेंक कर इसका विरोध दर्ज करेंगे।

कोनिंग्सहेवन पुल (Koningshaven Bridge) या डी हेफ (De Hef) ब्रिज

कोनिंग्सहेवन या डी हेफ ब्रिज का महत्व

नीदरलैंड के रॉटरडैम (Rotterdam) शहर और यहाँ के स्थानीय लोगों के लिए डी हेफ (De Hef) ब्रिज का ऐतिहासिक महत्व है। इस ब्रिज का निर्माण साल 1927 में किया गया था। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान हुई बमबारी में यह पूरी तरह से नष्ट हो गया था। लेकिन इसके बाद इसका पुनर्निर्माण करा कर फिर से तैयार किया गया था। यही नहीं, साल 2017 में भी इसका जीर्णोद्धार कराया गया था, जिसके बाद रॉटरडैम की नगर परिषद ने यहाँ के लोगों से वादा किया था कि यह ब्रिज हमेशा के लिए सुरक्षित रहेगा।

सलमान खान का शिकार हुआ जो चिंकारा, उसका 800 किलो का स्टैच्यू तैयार; सींग असली: जोधपुर में 7 बीघे में फैला होगा स्मारक

राजस्थान के जोधपुर में काले हिरण (चिंकारा) का स्मारक बनाया जा रहा है। यह स्मारक उस चिंकारे की याद में है जो बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान का शिकार बना था। चिंकारा का स्टैच्यू तैयार हो चुका है। जल्दी ही इसे स्मारक वाली जगह स्थापित किया जाएगा। स्मारक उस जगह पर बन रहा जहाँ अक्टूबर 1998 में सलमान खान का शिकार बने चिंकारे को दफनाया गया था। इस मंदिरनुमा स्मारक का निर्माण तेजी से चल रहा है।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक स्टैच्यू का वजन 800 किलो है। इसे लोहे और सीमेंट से बनाया गया है। लेकिन इसके सींग असली हैं। स्टैच्यू जोधपुर के ही कारीगर शंकर ने तैयार किया है। उन्होंने इसे महज 15 दिन में बनाकर तैयार कर दिया। शंकर ने बताया कि मूर्ति बनाने के पहले उन्होंने चिंकारा की हर एंगल से फोटो एकत्र की और फिर चॉक से स्केच बनाया। इसके बाद उन्होंने लोहे के सरियों को जोड़कर पिंजर तैयार किया। पिंजर को प्लास्टिक कट्‌टे से बाँधा। इसके बाद उसके चारो तरफ ढाँचे में सीमेंट भर दी। जब सीमेंट सूख गया तब उस पर पानी की तराई की। फिर सीमेंट पकाकर उस पर पेंट किया।

यहाँ मूर्ति लगाने का उद्देश्य काले हिरणों को सरंक्षण (Protection of Black Bucks) प्रदान करना है, ताकि लोग शिकार नहीं करें। क्योंकि किसी समय में पूरे इलाके में काले हिरण के झुंड नजर आते थे, लेकिन कड़ी कार्रवाई नहीं होने और शिकार की घटनाएँ बढ़ने से इनकी संख्या कम हो रही है। काले हिरण का स्मारक करीब 7 बीघा जमीन पर फैला होगा।

बता दें कि 1998 सितंबर में सलमान खान फिल्म ‘हम साथ साथ हैं’ की शूटिंग के लिए जोधपुर आए थे। उस दौरान उन पर शिकार का आरोप (Salman Khan Black Buck Poaching Case) लगा था। अभिनेता सैफ अली खान, तब्बू और नीलम भी आरोपित थे। सलमान पर आरोप था कि उन्होंने जोधपुर के घोड़ा फार्म हाउस और भवाद गाँव में 27-28 सितंबर व 1 अक्टूबर 1998 की रात को कांकाणी में दो काले हिरण का शिकार किया था।

इसके बाद सलमान खान की गिरफ्तार भी हुई थी। 20 साल की सुनवाई के बाद जोधपुर कोर्ट ने उन्हें 5 साल की सजा सुनाई थी। अन्य अभिनेता-अभिनेत्री बरी कर दिए गए थे। फिलहाल सलमान खान जमानत पर हैं।

अब खंडवा में मुहर्रम के जुलूस में लगे ‘सिर तन से जुदा’ के नारे, वीडियो वायरल: MP पुलिस ने 25 कट्टरपंथी मुस्लिमों के खिलाफ दर्ज की FIR

मध्य प्रदेश के खंडवा में मोहर्रम के जुलूस के दौरान ‘सिर तन से जुदा’ के नारे लगाने का वीडियो वायरल हुआ है। इस वीडियो पर हिन्दू संगठनों ने नाराजगी जताई है। पुलिस ने वीडियो का संज्ञान लेते हुए लगभग 25 लोगों पर FIR दर्ज कर ली है। घटना 10 अगस्त 2022 (बुधवार) की बताई जा रही है। पुलिस के मुताबिक आरोपितों की पहचान कर के उनकी गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं।

वायरल हो रहे आपत्तिजनक वीडियो में शाम का समय है और मौके पर भारी पुलिस फ़ोर्स जमा है। भीड़ द्वारा नारेबाजी के समय बरसात हो रही है। इस दौरान भीड़ से आवाज आती सुनाई दी, “गुस्ताख़-ए-नबी का सिर चाहिए।” पीछे से एक और आवाज सुनाई दी, “गुस्ताख़-ए-नबी की एक सजा, सिर तन से जुदा- सिर तन से जुदा।” यह पूरी नारेबाजी पुलिस के आगे की गई जिसका वीडियो कुछ दूर से किसी ने बनाया है।

इस वीडियो का संज्ञान लेते हुए खंडवा के SP ने कहा, “वीडियो 10 अगस्त का है जब मुहर्रम का जुलूस निकला था। हमें अगले दिन वीडियो मिला और हमने इस मामले में लगभग 25 अज्ञात लोगों पर FIR दर्ज करवाई। वीडियो के आधार पर आरोपितों की पहचान करवाई जा रही है।”

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक हिन्दू संगठनों ने न सिर्फ जुलूस में नारेबाजी करने वालों बल्कि उनके नेताओं पर भी कार्रवाई की माँग की है। पुलिस ने यह केस धारा 188 के तहत दर्ज किया है।

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले में भी 9 अगस्त को मुहर्रम के जुलूस में भी ‘सिर तन से जुदा‘ के नारे लगाए गए थे। यह घटना मीरगंज थाना क्षेत्र के करियाँव बाजार की थी। वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने FIR दर्ज करके मोहम्मद शकील, मोहम्मद अब्दुल, मोहम्मद जीशान और मोहम्मद हारिस को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।

दलित लड़के के साथ लिव-इन में रहती थी मुस्लिम लड़की, प्यार नहीं हुआ बर्दाश्त तो मुहर्रम पर कर दिया बवाल: 2 की मौत, हिरासत में 25

कर्नाटक के कोप्पल जिले में दलित लड़के और मुस्लिम लड़की के बीच प्रेम प्रसंग को लेकर हुई साम्प्रदायिक हिंसा में 2 लोगों की मौत के मामले में पुलिस ने 25 लोगों को हिरासत में लिया है। गुरुवार को हुई इस घटना में 6 लोग घायल भी हैं, जिनमें से दो की हालत नाजुक बताई जा रही है। हालात को देखते हुए इलाके में धारा 144 लागू है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कोप्पल जिले के हुलिहैदर गाँव के रहने वाले प्रेेमी जोड़े बालिग बताए जा रहे हैं। इसके पहले मीडिया में इनके नाबालिग होने की खबर आई थी। लड़का बाल्मीकि समाज से ताल्लुक रखता है और लड़की मुस्लिम समुदाय से।

मीडिया रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि दोनों गाँव छोड़कर चले गए थे और आपसी सहमति से लिव इन रिलेशनशिप में रहते थे। बाद में स्थानीय लोगों ने दोनों को खोजकर उन्हें उनके माता-पिता को सौंप दिया था। कुछ दिनों बाद लड़की अपने अम्मी-अब्बू को छोड़कर लड़के के साथ फिर से रहने चली आई। इसके बाद दोनों पक्षों में तनाव बढ़ गया था।

इसके पहले खबर आई थी कि लड़का मुहर्रम के दिन लड़की से मिलने पहुँचा था, जो विवाद की वजह बना। वहीं, कुछ रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि घटना के दिन बाईक सवार मुस्लिम पक्ष के कुछ लोगों ने लड़के के घर के सामने हंगामा किया था, जिसके बाद विवाद शुरू हुआ था।

इसके बाद विवाद मारपीट में बदल गया। दोनों पक्षों ने लाठी-डंडे निकाल लिए और जमकर पत्थरबाजी की। इसमें 60 साल के येनकप्पा तलावड़ और 22 साल के पशा वली की मौत हो गई। इस घटना में 6 अन्य लोग घायल हैं, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इनमें से दो की हालत बेहद गंभीर है।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुँची। जिले के पुलिस अधीक्षक के मुताबिक, “इलाके में 7 दिनों के लिए धारा 144 लागू कर दी गई है। अब तक 25 लोगों को हिरासत में लिया गया है और घायलों को अस्पताल भेजा गया है। मामले की जाँच की जा रही है। किसी भी टकराव को रोकने के लिए मौके पर पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया है।”

गौरतलब है कि इससे पहले हैदराबाद में मुस्लिम लड़की से शादी करने वाले दलित युवक नागराजू को लड़की के परिवार वालों ने मार डाला था। नागराजू की हत्या बीच सड़क पर की गई थी, जिसके लिए धारदार हथियारों का प्रयोग किया गया था।