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‘भाई तो कार से निपटा देते, बंदूक की क्या जरूरत’: सलमान को ‘गन लाइसेंस’ मिलने पर नेटीजन्स का तंज, बोले- अब जानवरों के अंडरग्राउंड होने का समय आ गया है

मुंबई पुलिस ने बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान को हथियार रखने का लाइसेंस दे दिया है। बता दें कि कुछ समय पहले कथित तौर पर लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने अभिनेता को ‘मूसेवाला जैसा हाल’ करने देने की धमकी दी थी। जिसके बाद सलमान खान ने 22 जुलाई को मुंबई पुलिस आयुक्त विवेक फणसाळकर से मुलाकात कर आत्मसुरक्षा का हवाला देते हुए हथियार रखने का लाइसेंस माँगा था।

एक आईपीएस अधिकारी ने हिंदुस्तान टाइम्स से बात करते हुए इसकी पुष्टि की। उन्होंने कहा, “हमने सभी औपचारिकताएँ पूरी करने के बाद अभिनेता को हथियारों का लाइसेंस जारी किया।” हथियारों का लाइसेंस मुंबई पुलिस ने सलमान खान के एक प्रतिनिधि को सौंपा था।

सलमान खान को हथियार रखने का लाइसेंस मिलने के बाद  सोशल मीडिया यूजर्स ने उन पर कटाक्ष करने का मौका नहीं छोड़ा। एक यूजर ने 1998 के काले हिरण के शिकार मामले का जिक्र करते हुए लिखा, “मुझे उम्मीद है कि वह काले हिरण पर इसका इस्तेमाल नहीं करेंगे।”

सलमान खान के 2002 के हिट एंड रन मामले का जिक्र करते हुए एक अन्य यूजर ने टिप्पणी की, “इसका भी वही परिणाम होगा जो कार लाइसेंस मिलने का हुआ था।”

इसी मामले का जिक्र करते हुए एक और यूजर ने लिखा, “भाई के हाथ में गाड़ी देना कितना खतरनाक था, अब गन भी दे दी।”

अजय शंकर पांडेय ने लिखा, “सलमान खान को हथियार का लाइसेंस मिला। भाई तो कार के लाइसेंस से ही निपटा देता था। अब भाई को बंदूक का लाइसेंस भी मिल गया है।”

एक अन्य यूजर ने इस पर टिप्पणी करते हुए लिखा, “मतलब अब फुटपाथ पर सो रहे लोगों के अलावा सड़क पर घूम रहे जानवर भी सुरक्षित नहीं हैं।”

एक यूजर ने लिखा, “अब यह साबित हो गया कि हिरण को मैंने नहीं मारा था, क्योंकि मेरे पास बंदूक अब आएगी। उस टाइम लाइसेंस नहीं था। हिरण ने आत्महत्या की थी: सलमान खान।”

साहिल डोगरा ने लिखा, “हथियार का क्या काम जब गाड़ी है?”

एक काले हिरण की तस्वीर पोस्ट करते हुए एक ट्विटर यूजर ने लिखा कि अब जानवरों के अंडरग्राउंड होने का समय आ गया है।

5 जून को गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई से धमकी भरा पत्र मिलने के बाद सलमान खान ने बंदूक लाइसेंस के लिए आवेदन किया था। 2016 के शस्त्र नियम के अनुसार, उन व्यक्तियों को बंदूक लाइसेंस जारी किया जा सकता है जो अपनी प्रसिद्धि और धन के कारण हमलावरों के निशाने पर हैं।

यह देखते हुए कि अभिनेता इस श्रेणी में आते हैं, उन्हें पुलिस उपायुक्त के कार्यालय द्वारा सत्यापन के बाद बंदूक लाइसेंस जारी किया गया। सलमान खान ने इससे पहले इस मामले पर चर्चा करने के लिए मुंबई के पुलिस कमिश्नर विवेक फणसाळकर से मुलाकात की थी। मुंबई पुलिस ने तब सूचित किया था, “अभिनेता सलमान खान ने हाल ही में एक धमकी पत्र प्राप्त करने के बाद, मुंबई पुलिस में आत्मरक्षा के लिए हथियार लाइसेंस के लिए आवेदन किया था।” धमकी भरे पत्र में चेतावनी दी गई थी कि खान का भी वही हश्र होगा जो गायक सिद्धू मूसेवाला का हुआ, जिसे लॉरेंस बिश्नोई के गिरोह के सदस्यों ने मार दिया था।

यह धमकी भरा पत्र अभिनेता के आवास के बाहर बांद्रा बैंडस्टैंड सैरगाह के पास पाया गया था। कथित तौर पर, अभिनेता के पिता सलीम खान इलाके में सुबह की सैर के लिए जाते हैं। टहलने के दौरान अक्सर जिस बेंच पर वह बैठा करते थे, वहीं पर उन्हें यह लेटर रखा हुआ मिला था। मामला सामने आने के बाद मुंबई पुलिस ने अभिनेता के आवास के बाहर अतिरिक्त सुरक्षा मुहैया कराई।

1998 के काला हिरण शिकार मामले में शामिल होने के लिए सलमान खान को 2018 में लॉरेंस बिश्नोई से धमकियाँ मिली थीं। काला हिरण (चिंकारा) बिश्नोइयों के लिए पवित्र माना जाता है, जिस समुदाय से खूँखार गैंगस्टर आता है।

अक्टूबर 1998 में दो काले हिरणों की हत्या के लिए अभिनेता को जोधपुर की एक अदालत ने अप्रैल 2018 में पाँच साल जेल की सजा सुनाई थी। खान को पहले मामले के सिलसिले में जोधपुर जेल में हिरासत में लिया गया था, लेकिन बाद में भरतपुर जेल में ट्रांसफर कर दिया गया था।

यह ‘डर’ अच्छा है आमिर खान, बॉलीवुड की हिंदू घृणा-राष्ट्र विरोधी एजेंडे की कमाई है ‘लाल सिंह चड्ढा’ की दुर्गति: खुद की लगाई आग में जल रहा ‘उर्दूवुड’

सोशल मीडिया पर आमिर खान और करीना कपूर की फिल्म ‘लाल सिंह चड्ढा’ के बहिष्कार की अपील की जा रही है। बॉयकॉट के इस अभियान के लिए लोगों के पास वाजिब कारण हैं। इसमें सबसे प्रमुख है बॉलीवुड की हिन्दू घृणा। जिस तरह से बॉलीवुड ने हिन्दू देवी-देवताओं का मजाक बनाने से लेकर ब्राह्मणों को गुंडे और जिक्र के रूप में पेश किया, उससे लोग नाराज हैं। दशकों से चला आ रहा प्रोपेगंडा उनकी समझ में आ गया है।

सुशांत सिंह राजपूत की संदिग्ध मौत के बाद जिस तरह बॉलीवुड में ड्रग्स के जाल का खुलासा हुआ और जिस तरह की प्रतिक्रियाएँ सामने आईं, उसने भी लोगों के सामने इसकी सच्चाई रखी। इस्लाम को अच्छा दिखाने से लेकर हिन्दू धर्म को बदनाम करने तक, ऐसे अनगिनत दृश्य लोगों के ध्यान में आए। नसीरुद्दीन शाह जैसों के हिन्दू विरोधी बयान हों या शाहरुख़ खान द्वारा असहिष्णुता बढ़ने की बातें करना, लोगों को बॉलीवुड का एजेंडा समझ आने लगा।

आमिर खान का कहना है कि कुछ लोगों को लगता है कि उन्हें इस देश से प्यार नहीं है। ‘लाल सिंह चड्ढा’ के बहिष्कार के लिए सोशल मीडिया में चल रहे अभियान ने शायद उन्हें डरा दिया है, इसीलिए वो अब फिल्म के साथ कई लोगों के इमोशंस जुड़े होने की दुहाई देते हुए कह रहे हैं कि इसमें बहुत लोगों की मेहनत लगी होती है, सिर्फ एक अभिनेता की नहीं। उन्होंने कहा कि फिल्म देखने के बाद इसे पसंद या नापसंद करने का अधिकार लोगों को है।

आमिर खान को पता होना चाहिए कि फिर किसी भी फिल्म का ट्रेलर क्यों रिलीज किया जाता है। ट्रेलर देख कर लोग एक अंदाज़ा लगाते हैं कि फिल्म कैसी होगी और हॉलीवुड क्लासिक ‘फॉरेस्ट गम्प’ की रीमेक ‘लाल सिंह चड्ढा’ उन्हें अच्छी नहीं लग रही है तो उन्हें बोलने का पूरा अधिकार है। लोगों को फिल्म बिना देखे भी अंदाज़ा लगाने का अधिकार है कि ये अच्छी होगी या बुरी, इसीलिए तो फिल्म से पहले उसके ट्रेलर और गाने रिलीज किए जाते हैं।

आमिर खान को अब बहिष्कार के अभियान से दुःख हो रहा है। उनका कहना है कि ये चीजें उन्हें हर्ट कर रही हैं। उन्होंने इस सोच को गलत बताया कि उन्हें इस मुल्क से प्यार नहीं है। साथ ही कहा कि उन्हें इस देश और यहाँ के लोगों से प्यार है। वैसे फिल्म की रिलीज से पहले इस तरह के प्यार का उमड़ना स्वाभाविक है। उन्होंने लोगों से गुजारिश की है कि वो थिएटर में जाकर ‘लाल सिंह चड्ढा’ देखें, इसका बॉयकॉट न करें। उन्होंने कहा कि OTT से अच्छा सिनेमाघरों में जाकर लोग इस फिल्म को देखें।

आमिर खान इससे पहले किस तरह के बयान दे चुके हैं और कैसी हरकतें कर चुके हैं, ये भी बताना आवश्यक है। उन्होंने ही तो कहा था कि उनकी पत्नी किरण राव को इस देश में डर लगने लगा है। अब उनका और किरण राव का तलाक हो चुका है। अब आमिर खान इससे नाराज़ हैं कि लोग ऐसा क्यों कह रहे हैं कि उन्हें देश से प्यार नहीं। देश में जिसे डर लगता हो, वो देश से कैसे प्यार कर सकता है? आमिर खान ने अपने उस बयान को बार-बार सही ठहराया।

इसी तरह आप दिसंबर 2014 में आई फिल्म ‘PK’ को ले लीजिए। आमिर खान की इस फिल्म में किस तरह भगवान शिव का मजाक बनाया गया था, ये हम सबने देखा। भगवान शिव बने एक व्यक्ति को बाथरूम में दिखाया गया और आमिर खान उसका पीछा करते हैं। उसे भागते हुए मजाकिया ढंग से पेश किया गया। कहीं वो कुर्सियों के नीचे जाकर छिप रहा होता है तो कहीं त्रिशूल से अजीब हरकतें कर रहा होता है। इस दृश्य का आशय क्या था भला?

‘PK’ में क्या नहीं था भला? एक हिन्दू लड़की का सरफराज नाम के मुस्लिम लड़के से प्यार करना। ‘सरफराज’ कभी धोखा नहीं दे सकता – ये नैरेटिव गढ़ा गया। इसके बाद एक हिन्दू संत का अपमान। हिन्दू संत को मक्कार और समाज विरोधी दिखाया गया। पूजा-पाठ करने वाले हिन्दुओं को बेवकूफ दिखाया गया। भगवान की मूर्ति किसी काम नहीं आती, ये बताया गया। लेकिन कहीं भी इस्लाम या इसमें जो पैगंबर या गॉड हैं, उन्हें लेकर कुछ नहीं कहा गया।

देश में हिन्दुओं के बलबूते सुपरस्टार बने आमिर खान जब बदले में उन्हीं हिन्दुओं को ‘PK’ जैसी फिल्म देते हैं तो क्या उनकी आलोचना न हो? असल में लोगों का गुस्सा आमिर खान या उनकी फिल्म से नहीं है। किसी एक सितारे या मूवी से नहीं, बल्कि पूरी हिंदी फिल्म इंडस्ट्री से है। किस तरह से इस इंडस्ट्री ने हिन्दू संस्कृति को बदनाम किया, इससे है। लोगों को दिक्कत है कि फिल्मों में आतंकियों के महिमामंडन से लेकर अपराधियों तक को नायक की तरह क्यों पेश किया जाता है?

आमिर खान ने भारत विरोधी तुर्की में जाकर किस तरह वहाँ के राष्ट्रपति से मुलाकात की और वहाँ के पर्यटन को प्रमोट किया, इससे भी उनके अंतरराष्ट्रीय इस्लामी एजेंडे को समझा जा सकता है। पाकिस्तान का यार तुर्की अक्सर कश्मीर राग अलापता है और भारत के मुस्लिमों को भड़काता है। तुर्की की प्रथम महिला एमीन एर्दोगन से आमिर खान 15 अगस्त, 2020 को मिले थे। ‘लाल सिंह चड्ढा’ की शूटिंग वहाँ हुई। आमिर खान की पूर्व पत्नी के संगठन के पाँव वहाँ जमाने को लेकर बातें हुईं।

ऊपर से इनका अहंकार, जो बार-बार सामने आता है। फिल्म की रिलीज से पहले भले ही इनके सुर बदले-बदले लग रहे हों, लेकिन याद कीजिए बरखा दत्त से बात करते हुए करीना कपूर ने क्या कहा था। वही करीना कपूर, जो ‘लाल सिंह चड्ढा’ की मुख्य अभिनेत्री हैं। उन्होंने कहा था, “वही लोग जो हम पर उँगलियाँ उठा रहे हैं, वही नेपोटिज्म वाले स्टार पैदा कर रहे हैं। आप जा रहे हो ना फिल्म देखने? मत जाओ। किसी ने आप पर दबाव नहीं डाला।”

जब दर्शक इनकी फिल्म देखते हैं तो वो उनके लिए सही हैं, लेकिन जब वही दर्शक इनकी आलोचना करे तो वो उसे भला-बुरा कहने लगते हैं। हाल ही में संजय दत्त ने ‘शमशेरा’ के फ्लॉप होने के बाद ऐसा ही किया। ऑडिएंस पर ही ठीकरा फोड़ दिया। फिल्म में उन्हें क्रूर बनाने के लिए त्रिपुण्ड तिलक और शिखा वाला लुक दिया गया था। साथ ही क्रूरता वाले दृश्यों में बैकग्राउंड में संस्कृत श्लोक बजते हैं। ऊपर से जनजातीय समाज बनाम सवर्ण वाली जातिवादी लड़ाई को बढ़ावा दिया गया है। इन सबके बावजूद ये चाहते हैं कि लोग इस फिल्म को देखें?

अगर ये नहीं सुधरेंगे तो जनता इन्हें इनकी औकात बताती रहेगी। दक्षिण भारत की डब फिल्मों का कारोबार कई गुना बढ़ता चला जाएगा और बॉलीवुड का नामोनिशान मिट जाएगा। देश के आम लोगों ने ही उन्हें स्टार बनाया और सब वही उनसे नाराज़ हैं, तो गलत जनता नहीं बल्कि ये स्टार हैं। ये इंडस्ट्री गलत है। तभी उन्हें सफाई देनी पड़ रही है बार-बार। तभी इस इंडस्ट्री को ‘ड्रगीवुड, बुलीवुड और उर्दूवुड’ कहा जा रहा है। कट्टर इस्लामी एजेंडे को हवा देना और नए कलाकारों को किनारे कर स्टार किड्स को आगे बढ़ाने वाली इस इंडस्ट्री को क्या सुधार की ज़रूरत नहीं?

कानपुर में हिंदू बच्चों को पढ़ाया जा रहा कलमा, अभिभावकों के विरोध के बाद FIR दर्ज

उत्तर प्रदेश के कानपुर (Kanpur) में फ्लोरेट्स इंटरनेशनल स्कूल (Florets International School ) में हिंदू छात्रों को कलमा पढ़ाने का मामला सामने आया है। अभिभावकों और हिन्दू संगठनों के हंगामे के बाद मौके पर कमिश्नरेट पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी स्कूल पहुँचे। इस मामले में कानपुर डीएम ने पुलिस की प्राथमिक रिपोर्ट के आधार पर जाँच के आदेश दिए हैं। वहीं स्कूल प्रबंधन ने भी अब प्रार्थना नहीं कराने की बात कही है। लेकिन हिंदू संगठन स्कूल के शुद्धिकरण और तालाबंदी के जिद पर अड़ गए हैं।

इस दौरान पार्षद महेंद्र शुक्ला स्कूल के ऊपर गंगाजल का छिड़काव करते नजर आए। सोशल मीडिया पर इसका वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। पार्षद महेंद्र शुक्ला ने कहा, “यहाँ जन गण मन तो होता नहीं है, कलमा पढ़ाया जाता है। इनके PFI से संबंध हैं, यहाँ बच्चों को रोज कलमा पढ़ाया जाता है, हम मामले की जाँच कराएँगे, स्कूल के ऊपर गंगाजल छिड़का है।”

पत्रकार अभिषेक कुमार लिखते हैं, “यूपी में कानपुर के एक प्राइवेट स्कूल में हिंदू बच्चों को कलमा पढ़ाने का वीडियो वायरल हो रहा है। हिंदूवादी संगठनों ने मामले को लेकर स्कूल प्रबंधन के खिलाफ विरोध जताया है। उनका कहना है कि स्कूल प्रबंधन जब तक अपनी इस गलती की माफी नहीं माँगेगा, तब तक स्कूल नहीं चलने दिया जाएगा।”

इसके साथ ही अभिषेक ने वीडियो में स्कूल में पढ़ाई जाने वाली किताब के उस पृष्ठ को भी साझा किया है, जिसमें दुआ के नीचे लिखा है, “ला इलाहा इल्लल्लाह मोहम्मदूर रसूल अल्लाह।” अभिषेक मिश्रा नाम से बने अकाउंट से मुख्यमंत्री योगी अदित्यनाथ, यूपी पुलिस और कमिश्नरेट पुलिस को टैग करते हुए यह वीडियो साझा किया गया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, स्कूल मैनेजर ने सफाई देते हुए कहा कि उनके स्कूल में हिंदू, मुस्लिम, सिख और इसाई चारों धर्मों की प्रार्थना 12-13 सालों से की जा रही है। कभी किसी ने विरोध नहीं किया। चार दिन पहले एक अभिभावक की ओर से इसे लेकर आपत्ति जताई गई थी। आपत्ति के मद्देनजर उन्होंने पूर्व में ही यह आदेश दे दिया है कि अब कोई धार्मिक प्रार्थना नहीं कराई जाएगी। अब सोमवार से स्कूल में केवल राष्ट्रगान होगा।

वहीं, जिलाधिकारी विशाख का इस मामले पर कहना है कि पुलिस की रिपोर्ट के आधार पर मामले में जाँच का आदेश दिया गया है। सोमवार को स्कूल खुलने के बाद स्कूल प्रबंधन, छात्र-छात्राओं, अभिभावकों आदि से बात कर मामले की जाँच की जाएगी।

‘हर घर तिरंगा’ अभियान से 20 करोड़ घरों में फहरेगा राष्ट्रीय ध्वज, 15 दिन में ₹200 करोड़ का कारोबार संभव: ध्यान रखें चंद बातें

भारतीय झंडा संहिता में मोदी सरकार द्वारा संशोधन किए जाने के बाद अब देश भर में ‘हर घर तिरंगा’ अभियान जोर-शोर से चल रहा है। देश के सर्वोच्च पद पर बैठे लोगों से लेकर सामान्य जन तक इसे लेकर उत्साहित हैं। अभियान का पहला मकसद है कि देश की जनता के दिलों में देशभक्ति की भावना जागे और दूसरा राष्ट्रीय ध्वज की महत्ता पर लोगों को जागरूक किया जाए। हाल में इसी देशभक्ति का प्रमाण देते हुए समुद्र में अंडरवाटर तिरंगा फहराए जाने की तस्वीर सामने आई थी। वहीं दुकानदारों ने भी बताया कि अचानक बाजार में झंडों की बिक्री बहुत बढ़ गई है।

क्या है ‘हर घर तिरंगा’ का उद्देश्य?

जैसा कि ऊपर बताया ‘हर घर तिरंगा’ देश की जनता में राष्ट्रभक्ति को जगाने का एक अभियान है। भारत सरकार द्वारा हाल में भारतीय झंडा संहिता में किए गए संशोधन के बाद इस अभियान को देश भर में चलाया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने पिछले दिनों अपील की थी कि देश की जनता 13 अगस्त से 15 अगस्त तक अपने घरों में दिन-रात झंडे को फहराएँ ताकि राष्ट्र ध्वज के साथ हमारा जुड़ाव गहरा हो। साथ ही जनभागीदारी की भावना से आजादी का अमृत महोत्व मनाया जा सके।

सरकार ने लिया हर घर तिरंगा फहरवाने का जिम्मा

अनुमान है कि इस अभियान से आजादी के 75 वर्ष पूरे होने के दिन 20 करोड़ घरों में तिरंगा लहराता दिखेगा। सरकारी और निजी संस्थान भी इस अभियान का हिस्सा बनेंगे। प्रशासन की ओर से जोर-शोर से इसकी तैयारियाँ हो रही हैं। प्रिंट से लेकर डिजिटल मीडिया तक में इस प्रचार हो रहा है।

तीन आकार के मिलेंगे झंडे

अभियान को कामयाब बनाने के लिए नोडल अधिकारियों की नियुक्ति हुई है। केंद्र सरकार ने तीन तरह के झंडों के उत्पादन की व्यवस्था की है। एक आकार 20*30 का होगा। दूसरा 16*24 का और तीसरा 6*9 का होगा। ये तीनों आकार डाकघर में उपलब्ध होंगे। लोग चाहें तो इन्हें ऑनलाइन भी खरीद पाएँगे।

लघु उद्यमियों के लिए अवसर

अभियान को सफल बनाने के लिए 25 करोड़ झंडों की जरूरत पड़ने वाली है। लेकिन फिलहाल देश में केवल 4-5 करोड़ झंडे उपलब्ध हैं। ऐसे में लघु उद्यमियों के बीच भी इस अभियान को लेकर उत्साह है क्योंकि झंडों की जरूरत पूरा करके वह अपने कारोबार का विस्तार भी कर सकते हैं। जानकारी के मुताबिक एक झंडा बनाने में 10-12 रुपए लगते हैं। ऐसे में मात्र दिन में 200 करोड़ का कारोबार संभव है।

‘हर घर तिरंगा’ अभियान में भी रखें ध्यान

भारत इस वर्ष आजादी के 75 साल पूरे कर रहा है। ऐसे में ‘हर घर तिरंगा अभियान’ का शुभारंभ जनता के दिलों में राष्ट्रभक्ति की भावना जगाने के लिए है। मोदी सरकार द्वारा किए गए संशोधन के बाद देश का हर नागरिक इस चीज के लिए आजाद है कि वो अपने घर में दिन रात झंडा फहराए। बस उसे तिरंगे को लहराते समय ये ध्यान देना होगा कि उसका प्रयोग व्यावसायिक उद्देश्य के लिए न किया जाए, किसी व्यक्ति या वस्तु को सलामी देने के लिए तिरंगे को न झुकाया जाए, झंडे को वर्दी या पोषाक बनाकर न ओढ़ा जाए, उसे किसी भवन में पर्दे की तरह न लगाया जाए, किसी गाड़ी में उसका प्रयोग चीजों को ढकने में न लाया जाए या किसी अन्य झंडे को उससे ऊपर न फहराया जाए।

कॉमनवेल्थ गेम्स के स्वर्ण पदक विजेता अचिंता शुली के भाई ने की पश्चिम बंगाल सरकार की आलोचना, जीत की उपेक्षा पर कहा- ‘खेल मंत्री भी सपोर्ट नहीं करते’

कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में वेटलिफ्टर अचिंता शुली ने रविवार (31 जुलाई, 2022) को पुरुषों के 73 किग्रा भारोत्तोलन वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर एक शानदार शुरुआत की। बर्मिंघम में हो रहे राष्ट्रमंडल खेल 2022 में यह भारत का तीसरा स्वर्ण पदक था। अचिंता से पहले मीराबाई चानू और जेरेमी लालरिनुंगा ने गोल्ड मेडल अपने नाम किया। ऐसे में जहाँ पूरा देश राष्ट्रमंडल खेलों में अचिंता शुली की सफलता का जश्न मना रहा है, वहीं उनके बड़े भाई आलोक शुली ने पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार द्वारा अचिंता शुली की उपेक्षा किए जाने और किसी तरह की प्रोत्साहन राशि की घोषणा न करने की वजह से आलोचना की है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, हावड़ा जिले के पश्चिम बंगाल के देउलपुर गाँव की रहने वाली अचिंता शुली ने अपने बड़े भाई आलोक शुली के अथक समर्थन और प्रयास की बदौलत आज खेलों में स्वर्ण पदक जीतकर कामयाबी अपने नाम की है। अचिंता ने रविवार को अपने भाई को जीवन के हर दौर में साथ देने और सफलता के इस मुकाम तक पहुँचाने के लिए स्वर्ण पदक समर्पित किया।

इस बीच, उनके भाई आलोक शुली ने अपने छोटे भाई की खेल में स्वर्णिम सफलता की उपेक्षा के लिए पश्चिम बंगाल सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए कहा, “2020 में, राज्य सरकार ने एक पुरस्कार दिया, कोई नहीं जानता कि हमारे गॉँव के एक लड़के ने राष्ट्रमंडल खेलों में भाग लिया। यहाँ तक ​​कि राज्य के खेल मंत्री भी अज्ञानी लगते हैं, हमें सरकारी समर्थन की आवश्यकता है। जबकि दूसरे राज्यों में एथलीटों को नकद पैसा दिया जाता है, लेकिन हमें अभी तक कुछ नहीं पता कि वो क्या करेंगे। वे इसके लिए कितना पैसा देंगे।”

गौरतलब है कि बेशक बर्मिंघम में राष्ट्रमंडल खेलों में अपने पहले अभियान में एक ऐतिहासिक स्वर्ण पदक जीतने के बाद बंगाल सरकार अपने खिलाड़ी की सफलता से दूर हो लेकिन रविवार को पश्चिम बंगाल के अचिंता के गाँव में जमकर जश्न मनाया गया।

बता दें कि भारोत्तोलन में स्वर्ण पदक जीतने के साथ ही अचिंता शुली ने राष्ट्रमंडल खेलों के पुराने रिकॉर्ड को भी तोड़ा है। शुली ने कुल 313 किग्रा भार उठाकर स्वर्ण पदक जीता। अचिंता ने स्नैच राउंड में 143 किलो वजन उठाया जबकि क्लीन एंड जर्क में उन्होंने 170 किलो वजन उठाकर गोल्ड मेडल सुनिश्चित कर लिया। अचिंता शुली ने 73 किलो भार वर्ग में कुल 313 किलो का वजन उठाते हुए कॉमनवेल्थ गेम्स का रिकॉर्ड बनाया।

हालाँकि, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी 20 वर्षीय वेटलिफ्टर को उनकी सफलता के लिए ट्वीट कर बधाई दी। लेकिन किसी तरह की प्रोत्साहन राशि की घोषणा नहीं की।

वहीं रविवार को दो स्वर्ण पदकों के बाद, भारत अब राष्ट्रमंडल खेलों 2022 पदक तालिका में पांचवें स्थान पर पहुँच गया है। जेरेमी ने भारोत्तोलन में स्वर्ण पदक जीता, उसके बाद अचिंता शुली ने भी रविवार को दूसरा स्वर्ण हासिल किया। मीराबाई चानू के ऐतिहासिक राष्ट्रमंडल खेलों के स्वर्ण पदक जितने के 24 घंटे से भी कम समय में भारत ने दोहरा स्वर्ण पदक हासिल कर इतिहास रच दिया।

शाहरुख खान ‘दरियादिल’, वडोदरा रेलवे स्टेशन पर RO प्लांट के लिए ‘दान’ किए ₹23 लाखः वायरल दावे की हकीकत क्या

बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान को लेकर रविवार (31 जुलाई 2022) को कई ट्वीट वायरल हुए। इनमें दावा किया जा रहा था कि अभिनेता ने गुजरात के वडोदरा रेलवे स्टेशन पर RO (Reverse 0smosis) प्लांट के लिए 23 लाख रुपए ‘दान’ दिए हैं। इस वायरल दावे को कई वेरिफाइड ट्विटर अकाउंट से भी ट्वीट किया गया।

टाइम्स ग्रुप के बॉम्बे टाइम्स ने सबसे पहले ट्वीट किया था कि शाहरुख खान ने वडोदरा रेलवे स्टेशन पर RO प्लांट के लिए 23 लाख रुपए खर्च किए हैं। इसके बाद देखते ही देखते कई लोगों ने इसे ट्वीट करना शुरू किया और दावा किया कि खान ने पैसे ‘दान’ किए हैं।

एक ट्वीट में दावा किया गया शाहरुख ने RO प्लांट के लिए 23 लाख रुपए ‘दान’ किए

राहुल कुमार पांडे ने अपने वेरिफाइड ट्विटर हैंडल ने ट्वीट करते हुए बताया कि किस तरह से खान वडोदरा में अधिकारियों के संपर्क में आए और जब उन्हें ‘पानी की कमी’ के बारे में पता चला तो उन्होंने रेलवे स्टेशन पर एक RO प्लांट दान करने का फैसला किया। शाहरुख खान के अन्य प्रशंसकों ने भी इसे बढ़-चढ़कर ट्वीट किया।

इसमें उनके पाकिस्तान के फैन्स भी शामिल हो गए।

हालाँकि मामला कुछ और लग रहा है।

दरअसल 23 जनवरी 2017 को शाहरुख खान ट्रेन से फिल्म ‘रईस’ का प्रमोशन करने गुजरात पहुँचे थे। इसी दौरान वडोदरा स्टेशन पर शाहरुख को देखने के लिए हजारों की भीड़ जमा हो गई। जैसे ही ट्रेन रुकी, शाहरुख ने भीड़ में एक टी-शर्ट और एक गेंद फेंक दी। इससे भगदड़ मच गई।

ट्रेन यहाँ पर 10 मिनट रुकी थी। भीड़ उस समय बेकाबू हो गई जब ट्रेन स्टेशन से रवाना होने लगी। शाहरुख को देखने की कोशिश कर रहे लोग एक-दूसरे के ऊपर गिरने लगे। भीड़ को काबू करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। जैसे-जैसे ट्रेन आगे बढ़ रही थी लोग भी उसके साथ चल रहे थे। भीड़ बेकाबू होने से एक शख्स की मौत हो गई। वहीं भीड़ को नियंत्रित करने में दो पुलिसकर्मी भी घायल हो गए।

इसके बाद वडोदरा कोर्ट में एक शिकायत दर्ज कराई गई थी। इसमें आरोप लगाया गया था कि इस घटना के लिए शाहरुख खान जिम्मेदार हैं। अदालत ने उन्हें रेलवे अधिनियम के तहत जल्दबाजी और लापरवाही बरतने के लिए समन भी जारी किया था। इसके बाद शाहरुख ने अपने खिलाफ दर्ज FIR रद्द करने के लिए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हाई कोर्ट ने इस मामले में एफआईआर और मजिस्ट्रेट कोर्ट से जारी समन रद्द करते हुए शाहरुख खान के वकील से पूछा था कि क्या वह स्टेशन पर एक आरओ प्लांट लगा सकते हैं जिससे आने वाले समय में लोगों की मदद कर सकता है। शाहरुख की तरफ से उनके वकील ने इसके लिए रजामंदी जताई थी।

हालाँकि अभी तक, यह अभी तक स्पष्ट नहीं है कि अदालत ने जो RO प्लांट लगाने की बात कही थी, वह वडोदरा रेलवे स्टेशन पर चालू है या नहीं। लेकिन ऐसा तो नहीं लग रहा कि शाहरुख खान ने नेकदिली/दरियादिली का परिचय देते हुए RO प्लांट के लिए ‘दान’ दिया है, क्योंकि कोर्ट ने उनसे ऐसा करने के लिए कहा था।

112 दिन बाद पकड़ा गया खरगोन का मुख्य दंगाई समीर उल्ला, गैंग में हैं 150 अपराधी: मांस का कारोबार, सरकार को चूना लगा कर चलाते हैं अवैध वाहन

मध्य प्रदेश पुलिस ने के खरगोन जिले में 10 अप्रैल 2022 की रामनवमी पर हुए दंगे के मुख्य आरोपित समीर उल्ला और उसके भाई वली उल्ला को 112 दिनों के बाद गिरफ्तार कर लिया है। आरोपित समीर उल्ला पर रासुका (NSA) के तहत कार्रवाई की गई है। समीर उल्ला पर प्रशासन की तरफ से 10 हजार रुपए का इनाम भी घोषित था। वह पेशेवर अपराधी था जो साल 2016 से अपराध में सक्रिय था। यह गिरफ्तारी रविवार (31 जुलाई 2022) को हुई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक समीर उल्ला ने रामनवमी पर मुस्लिमों की भीड़ को जमा किया था। इसी के साथ उसी ने पथराव की शुरुआत की भी थी। वह खरगोन के मोहन टाकीज क्षेत्र का रहने वाला है। साल 2016 से वह लगातार अपनी गैंग बना कर साम्प्रदायिक तनाव फैलाने की फिराक में रहता था। आरोपित पर कुल 11 केस पहले से दर्ज बताए जा रहे हैं। खरगोन थाने की गुंडा लिस्ट में भी उसका नाम है और 13 अक्टूबर, 2021 में उसको प्रशासन द्वारा जिला बदर भी किया गया था।

एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक आरोपित समीर उल्ला की गिरफ्तारी आगरा मुंबई नेशनल हाईवे पर खलटाका बालसमुद के बीच में हुई है। उसका इलाके में नाम भाई साहब था। उसकी गैंग का नाम ‘मिम’ था जिसमें उसका भाई वसी उल्ला भी शामिल था। उसकी भी गिरफ्तारी रविवार को ही की गई है। वली उल्ला को शरण देने वाले इंदौर निवासी सादिक शेख नाम के व्यक्ति की भी गिरफ्तारी हुई है।

समीर उल्ला की मिम गैंग में लगभग 150 अपराधी शामिल थे। ये सभी मांस के अवैध कारोबार के साथ रोडवेज को चूना लगा कर अवैध रूप से वाहन भी चलवाते थे। पुलिस ने आरोपित को इंदौर जेल भेजा है। पुलिस के मुताबिक उसका रिमांड ले कर उसके बाकी काले धंधों की जानकारी जुटाई जाएगी। पुलिस के मुताबिक रामनवमी हिंसा में नामजद किए गए कुल 450 नामजद आरोपितों में से अब तक 300 की गिरफ्तारी की जा चुकी है। बाकी फरार आरोपितों की तलाश में टीमें काम कर रही हैं।

गौरतलब है कि 10 अप्रैल 2022 को खरगोन में रामनवमी के दिन हिंसा भड़क गई थी। इस हिंसा में न सिर्फ हिन्दुओं की शोभा यात्रा पर पथराव हुआ था बल्कि कई हिन्दुओं के घरों में आगजनी और लूटपाट की गई थी। मामले को नियंत्रित कर रहे जिले के पुलिस अधीक्षक के पैर में भी दंगाइयों ने गोली मार दी थी।

‘काजी के पास जाओ और मुस्लिम बन जाओ’: हाई कोर्ट जज का वायरल Video, जानिए क्या है मामला

सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें एक जस्टिस एक मुस्लिम लड़की के हिन्दू बनने पर काफी नाराजगी जता रहे हैं। इसी वीडियो में जज साहब लड़के के मुस्लिम बनने की सलाह दे रहे हैं। वीडियो में उन्होंने लड़की के हिन्दू बनने को ‘फ्रॉड’ बताया और इसे खुद स्वीकार करने पर ‘समाज का क्या होगा’ जैसी टिप्पणी की है।

लेखिका शेफाली वैद्य ने 30 जुलाई 2022 को इस वीडियो को शेयर किया है। उन्होंने लिखा, “पहले मुझे लगा कि यह किसी फिल्म का सीन है लेकिन यह असली निकला। मुझे बताया गया कि ये मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के जस्टिस रोहित आर्य है।” शेफाली ने लोगों से अपनी बातों की पुष्टि करने के लिए भी कहा है।

शेफाली वैद्य के अलावा स्वाति गोयल शर्मा, रितु सत्य साधक, योगी योगेश अग्रवाल, रितेश झा आदि ने अपने-अपने ट्विटर हैंडलों से इसे शेयर किया है। इस वीडियो में 2 न्यायाधीश एक साथ बैठे दिखाई दे रहे है। उनमें से एक ने कहा, “ये तमाशा हम स्वीकार नहीं करेंगे। ये अभी जेल जाएगा। तुम काजी के पास जाओ और मुस्लिम बन जाओ। वही ज्यादा अच्छा है। फ्रॉड कर के उसका धर्मांतरण कर दिया, ये कोई तरीका है? किसी मुस्लिम को हिन्दू बना रहे हो, मज़ाक बात है?”

यह सुनवाई मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर पीठ में 18 जनवरी 2022 हो हुई थी। इस बहस का मूल आधार मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले की एक मुस्लिम लड़की को आर्य समाज मंदिर में हिन्दू धर्म स्वीकार करवाने को ले कर था। जस्टिस रोहित आर्य ने तब आर्य समाज मंदिरों द्वारा कराए जाने वाले वाले धर्म परिवर्तन पर सवाल खड़े किए थे। मामले की जवाबदेही तय करने के लिए गाजियाबाद स्थित आर्य समाज मंदिर को नोटिस भी जारी हुआ था। वीडियो में दिखाई दे रहे दूसरे न्यायाधीश का नाम जस्टिस राजीव कुमार श्रीवास्तव है।

ग्वालियर हाईकोर्ट का फैसला

जब ऑपइंडिया ने इस वीडियो की पड़ताल की, तब यह वीडियो 2 हिस्सों में लगभग 27 मिनट का मिला। इसे 19 और 20 जून 2022 को ‘Be a Judge’ नाम के फेसबुक पेज पर शेयर किया है।

पहले वीडियो में जस्टिस रोहित आर्य ने दिल्ली से आए एक वकील को पहले बोलने पर टोका। इस वीडियो में हुई बहस के मुताबिक, केस एक मध्य प्रदेश की मुस्लिम लड़की के अपहरण का था जिसका आरोप एक हिन्दू लड़के पर था। लड़की को पुलिस ने बरामद कर लिया था, जिसने अपने अम्मी-अब्बू के साथ जाने से मना कर दिया था। लड़की लगातार उस लड़के के साथ जाने की जिद पर अड़ी थी, जिस पर उसके अपहरण का आरोप था।

लड़की ने बाद में गाजियाबाद के आर्य समाज मंदिर में धर्म परिवर्तन कर लिया। इसे लड़की के परिजनों ने अवैध धर्मांतरण बता कर लड़की को लड़के के घर जाने से रोकने की माँग की थी। इस बहस में जस्टिस रोहित आर्य को एक बार कहते सुना गया कि ‘बिलकुल सही बात है।’

इसी बहस के बीच में 5:30वें मिनट पर जस्टिस रोहित आर्य ने SSP को कुल पुलिस फ़ोर्स उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मामले में कुछ फ्रॉड की आशंका दिखाई दे रही है। इसी क्रम में उन्होंने लड़की को हिन्दू बनाने वाले गाजियाबाद के आर्य समाज मंदिर को मात्र एक ट्रस्ट डीड बना कर रखने वाला बताया। जज ने आर्य समाज मंदिर के वकील से पहले मंदिर की प्रमाणिकता साबित करने को कहा।

वीडियो के 9वें मिनट में हिन्दू युवक के वकील ने लड़की को सरकारी नारी निकेतन से खुद के हवाले करने की माँग की, तब जज रोहित आर्य ने लड़के को मुस्लिम बनने की सलाह दी। लड़के के वकील ने सवाल भी किया कि लड़की बालिग है और लड़का मुस्लिम बन कर क्या करेगा तब जज ने कहा, “जो तुम समझो। इसमें हम काजी को भी बुलवाएँगे। ये मामूली बात नहीं है।” इसके बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

इसके बाद की बहस वीडियो के दूसरे पार्ट में है:

वीडियो के शुरुआत में आर्य समाज मंदिर के वकील ने कहा, “लड़की का धर्म हमने नहीं बदलवाया। ऐसा उसने खुद से किया है। लड़की खुद आर्य समाजी बनी है।” इस पर जज रोहित आर्य ने कहा, “ऐसे नहीं होता। कल आप ऐसे ही हिन्दू को मुस्लिम भी बनाने का काम शुरू कर दोगे। ये गोरखधंधा बंद करो।” आर्य समाज मंदिर के वकील ने कहा कि अगर कोर्ट इसे गैर कानूनी कह दे तो हम इसे बंद कर देंगे। इसके जवाब में जज रोहित आर्य ने इसे 100% गैर कानूनी बताया। जज रोहित आर्य ने कहा, “आप कोई भी धर्म पालन करो, उसके अपने भी कुछ नियम होते हैं।”

बहस के चौथे मिनट पर जज रोहित आर्य ने धर्म परिवर्तन के मामले में मुस्लिम कानूनों की नियमावली भी तलब करवाई। उन्होंने आर्य समाज मंदिर के कागजातों की जाँच करने के भी आदेश दिए। जज रोहित आर्य ने बहस के अंत में इस मामले में एक सीनियर वकील फैज़ल को नियुक्त किया। जज के मुताबिक “फैज़ल इस केस की सुनवाई में ‘पवित्र कुरान’ के नजरिए से सहयोग करेंगे।”

‘भाई संजय राउत जेल आ रहे हो तो मेरे लिए 4 कच्छे लेते आना’: शिवसेना MP की गिरफ्तारी पर नवाब मलिक का ट्वीट, जानिए सच

शिवसेना प्रवक्ता और सांसद संजय राउत को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने रविवार (31 जुलाई 2022) को पात्रा चॉल घोटाले में गिरफ्तार किया। उनकी गिरफ्तारी के कुछ घंटों बाद नवाब मलिक के नाम से एक ट्वीट वायरल होने लगा। इसमें एनसीपी नेता ने कथित तौर पर संजय राउत से अपने लिए अंडरवियर लेकर जेल आने की गुहार लगाई हैं।

एनसीपी नेता मलिक के नाम से वायरल ट्वीट के स्क्रीनशॉट में लिखा है, “भाई संजय राउत अगर आर्थर रोड जेल आ रहे हो तो, मेरे लिए जॉकी के XXL साइज के चार कच्छे ले आना।” स्क्रीनशॉट में ट्वीट की तारीख 31 जुलाई 2022 और समय शाम के सात बजकर 50 मिनट बताई गई है।

वायरल हो रहे ट्वीट का स्क्रीनशॉट

सच्चाई का पता लगाने के लिए हमने नवाब मलिक के ट्विटर आईडी के यूजरनेम का इस्तेमाल कर माइक्रो-ब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म पर कीवर्ड और ट्विटर हैंडल के यूजरनेम (<कीवर्ड> (From: <ट्विटर हैंडल का यूजरनेम>) से सर्च किया। हालाँकि हमें इस सर्च से कोई रिजल्ट नहीं मिला। 

सर्च करने पर हमें यह रिजल्ट मिला

नवाब मलिक के कथित ट्वीट को राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (NCP) के किसी अन्य राजनेता ने भी शेयर नहीं किया। यहाँ यह भी उल्लेखनीय है कि मलिक कुछ समय से जेल में हैं। इस दौरान शायद उन्हें अपना फोन इस्तेमाल करने की भी इजाजत नहीं होगी। ऐसे में मलिक इस तरह का अनुरोध संजय राउत से करें, यह संभव नहीं दिखता। इसकी भी संभावना नहीं है कि जेल अधिकारी कैदियों को अंडरवियर शेयर करने की अनुमति दें।

नवाब मलिक के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से आखिरी ट्वीट 23 फरवरी 2022 को किया गया था। इसी दिन एनसीपी नेता को प्रवर्तन निदेशालय ने गिरफ्तार किया था। फिलहाल वह आर्थर रोड जेल में बंद हैं। उन पर दाऊद इब्राहिम के करीबी से संपत्ति खरीदने का आरोप हैं। इसके अलावा मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले की भी ईडी जाँच कर रही है। ईडी की टीम ने 23 फरवरी की सुबह उनके घर पर छापेमारी की थी और फिर उन्हें अपने साथ ले आई थी। यहाँ पूछताछ के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था। ये गिरफ्तारी ‘मनी लॉन्ड्रिंग मामले में और दाऊद से कनेक्शन’ पर चली 8 घंटे की पूछताछ के बाद हुई थी। दूसरी तरफ शिवसेना नेता संजय राउत को पात्रा चाल घोटाला मामले में उनकी कथित संलिप्तता के आरोप में 31 जुलाई को गिरफ्तार किया गया था।

निष्कर्ष: स्क्रीनशॉट फर्जी है।

पक्के का सपना दिखा 672 परिवारों के सिर से टीन का भी छत छीना, 9 बिल्डर को 47 एकड़ जमीन बेच ₹1034 करोड़ बनाए: पात्रा चॉल स्कैम में संजय राउत क्यों गिरफ्तार

शिवसेना सांसद संजय राउत के कारण पात्रा चॉल केस लंबे समय से काफी चर्चा में बना हुआ है। 1034 करोड़ रुपए से ज्यादा के घोटाले मामले में राउत की गिरफ्तारी को देख लोग जानना चाह रहे हैं कि आखिर ये स्कैम था क्या और कब इसे अंजाम दिया गया था। इसके अलावा जो सबसे बड़ा सवाल है वो ये कि इस केस में संजय राउत की संलिप्ता कैसे है?

तो, आइए आज इन्हीं प्रश्नों के उत्तर जानते हैं और समझते हैं कि किस तरह निजी संस्था की धोखाधड़ी से इतना बड़ा घोटाला हुआ और उसमें गरीबों के सिर से छत छीन कर उसे अमीरों में दे दी गई।

पात्रा चॉल जमीन घोटाला क्या है?

इस घोटाले की शुरुआत साल 2007 में हुई थी। तब, महाराष्ट्र हाउसिंग एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (MHADA) की 47 एकड़ जमीन पर 672 किराएदार रहते थे। इन्हीं 672 किराएदारों के पुनर्वास के लिए पात्रा चॉल परियोजना के तहत चॉल के विकास का काम प्रवीण राउत की कंपनी गुरु आशीष कंस्ट्रक्शन और हाउसिंग डेवलपमेंट एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड को सौंपा गया।

कॉन्ट्रैक्ट में कहा गया था कि 47 एकड़ पर जो बिल्डिंग बनेगी उसके 672 फ्लैट चॉल के किराएदारों को देने होंगे और तीन हजार फ्लैट एमएचडीए को हैंडओवर करने होंगे। बाद में जो जमीन बचेगी उसे बेचने और विकसित करने के लिए भी अनुमति जरूरी होगी। अब चॉल विकास के कॉन्ट्रैक्ट में सब चीजें तय थीं। लेकिन घोटाले की शुरुआत तब हुई जब कंपनी ने न तो इस जगह का विकास किया और न किराएदारों को मकान दिए और न ही MHADA को फ्लैट हैंडओवर किए।

प्राइवेट कंपनी पर आरोप है कि उन्होंने 47 एकड़ जमीन पर गरीबों के लिए फ्लैट बनाने की बजाए उसे 9 अलग-अलग बिल्डरों को बेचा और खासा पैसा कमाया। जब म्हाडा को इसकी सूचना हुई तो उन्होंने 2018 में जाकर उनके विरुद्ध एफआईआर करवाई और केस अपराध विंग के पास गया। इसके बाद 2020 में प्रवीण राउत की गिरफ्तारी हुई और यही से शुरु हुआ संजय राउत का इस केस से कनेक्शन।

संजय राउत और पत्नी वर्षा राउत की भूमिका

संजय राउत और प्रवीण राउत एक दूसरे के करीबी हैं। प्रवीण घोटाला करने वाली कंपनी में सारंग वधावन और राकेश वधावन के साथ डायरेक्टर थे। ये लोग पीएमसी बैंक घोटाले के भी आरोपित हैं। इसलिए 2020 में राउत की गिरफ्तारी के बाद जब कोर्ट से उन्हें जमानत मिली तो ईडी ने उन्हें दूसरे केस में पकड़े रखा। पूछताछ चलती रही। धीरे-धीरे सुजीत पाटकर का नाम सामने आया। ईडी ने पाटकर के ठिकाने पर छापा मारा तो कई दस्तावेज मिले।

ईडी की जाँच में सामने आया कि प्रवीण राउत की पत्नी माधुरी राउत ने संजय राउत की पत्नी वर्षा राउत को 55 लाख रुपए का लोन दिया था जोकि बैंक से पास नहीं हुआ। इन्हीं पैसों से संजय राउत की पत्नी ने दादर का फ्लैट खरीदा था।

अब ये लोन जाँच का कारण इसलिए थी क्योंकि ईडी अधिकारियों ने कुछ समय पहले बताया था कि 2010 में, प्रवीण राउत ने इक्विटी सेल और भूमि सौदों की आड़ में अपने बैंक खाते में 95 करोड़ रुपए प्राप्त किए थे, हालाँकि कंपनी प्रोजेक्ट को पूरा नहीं कर सकी और उनकी कोई कमाई नहीं हुई।

प्रवीण पर एजेंसी ने आरोप मढ़ा कि एचडीआईएल कंपनी से प्रवीण राउत के खाते में 100 करोड़ ट्रांस्फर किए गए। इसके बाद उसने ये पैसा अपने करीबियों व परिजनों के अकॉउंट में डाल दिया।वर्षा के पास जो रकम माधुरी के जरिए आई वो इसी अपराध से जुड़ी रकम थी। ईडी का आरोप ये भी था कि खिम बीच के पास जो 8 प्लॉट थे वो भी वर्षा राउत और स्वप्ना पाटकर के नाम पर थे। इन्हें ईडी अपनी पिछली कार्रवाई में जब्त कर चुकी है।

संजय राउत ने घोटाले की संलिप्ता से किया इनकार

बता दें कि संजय राउत अपने ऊपर लगे हर इल्जाम को झूठा बता रहे हैं। उनका कहना है कि वो किसी घोटाले में शामिल नहीं है। ईडी उनके विरुद्ध गलत जानकारी के आधार पर कार्रवाई कर रही है। अपने आप को बेगुनाह बताने के लिए राउत ने बालासाहेब की कसम भी खाई। उन्होंने कहा कि वो न तो खुद को सरेंडर करेंगे और न शिवसेना को छोड़ेंगे।

फिलहाल, राउत ईडी की गिरफ्त में हैं। आज उन्हें पीएमएलए कोर्ट में पेश किया जाना है। यहाँ से उनकी हिरासत ईडी को दी जाएगी। कल करीबन 17 घंटे की पड़ताल के बाद राउत गिरफ्तार हुए थे।