नूपुर शर्मा का समर्थन करने के कारण बजरंग दल के एक नेता पर जानलेवा हमले का मामला मध्य प्रदेश से सामने आया है। घटना आगर-मालवा जिले का है। आगर के उज्जैन रोड पर बुधवार (20 जुलाई 2022) को 26 साल के आयुष को घेरकर धारदार हथियारों से हमला किया गया। उनको गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। पुलिस ने अभी तक 13 आरोपितों के खिलाफ केस दर्ज किया है। दो की गिरफ्तारी की भी खबर है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बजरंग दल के प्रखंड संयोजक पीड़ित आयुष ने नूपुर शर्मा के समर्थन में बयान दिया था। कट्टरपंथी इससे नाराज थे। पुलिस को दी गई शिकायत के मुताबिक घटना के दिन आयुष बाइक पर सवार हो उज्जैन रोड से गुजर रहे थे। इसी दौरान हथियारों से लैस समूह ने उनका रास्ता रोका और नूपुर शर्मा का समर्थक बताते हुए सिर काटने की धमकी दी।
आगर-मालवा मे हिन्दू युवक का उदयपुर के कन्हैयालाल की तरह ही गला काटने का प्रयास
— विश्व संवाद केंद्र, मालवा (@vskmalwa) July 20, 2022
दैनिक भास्कर ने पीड़ित के हवाले से बताया है, “मैं बाइक से जा रहा था। 8-10 लड़कों ने मुझे हाथ दिखाकर रुकवाया। मेरा नाम और बजरंग दल का संयोजक होने के बारे में पूछा। मैंने हाँ कहा तो उन्होंने पूछा कि क्या नुपूर शर्मा के बारे में बाइट दी थी। मेरे हाँ कहते ही उन्होंने हमला कर दिया। वे कह रहे थे गला काट दो इसका। जान से मार दो इसे। उनके हाथ में जो था उन्होंने उससे मुझे मारा। उनके हाथ में तलवार थी, धारदार हथियार था, टांगी थी, उन्होंने पत्थर से भी मुझे मारा। 10-12 लोग थे वो।”
हमलावरों के नाम अमल, अरबाज, आसिफ, सरफराज, चिकी, अम्मू मेवाती, अमन, सोहेल, मुन्ना मेवाती, सलमान, फिरदौस, समीर और साजिद बताए जा रहे हैं। हमले के दौरान आसपास भीड़ जमा हो गई और पुलिस भी मौके पर पहुँच गई। आयुध का इलाज उज्जैन के सिविल अस्पताल में चल रहा है, जहाँ उनकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है।
मप्र के आगर मालवा में एक बजरंग दल कार्यकर्ता पर हमला हो गया,आरोप है कि #नुपुर_शर्मा का समर्थन करने की वजह से ये हमला हुआ है,मामले में 13 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है जिनमें से दो को गिरफ्तार कर लिया गया है, घटना के बाद शहर में तनाव की स्थिति बन गई है @ndtv@ndtvindiapic.twitter.com/wRD1vT39PH
घटना की जानकारी होते ही हिन्दू संगठनों ने हमलावरों की तत्काल गिरफ्तारी की माँग करते हुए प्रदर्शन किया। पुलिस ने पीड़ित युवक के पिता की तहरीर पर आरोपितों के विरुद्ध हत्या के प्रयास, बलवा सहित मारपीट की अन्य धाराओं में FIR दर्ज कर 2 आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। अन्य फरार आरोपितों की तलाश की जा रही है। SP राकेश सागर के मुताबिक जिले में लॉ एन्ड आर्डर सामान्य रखने के लिए पर्याप्त फ़ोर्स की तैनाती की गई है।
महाराष्ट्र में सत्ता गँवाने के बाद उद्धव ठाकरे को एक और झटका लग सकता है और इस बार शिवेसना पर उनका दावा ही हाथ से निकलने की सम्भावना नजर आ रही है। दरअसल, शिंदे गुट ने पार्टी चुनाव चिह्न पर अपना दावा पेश किया है। एकनाथ शिंदे समूह ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर शिवसेना के धनुष-बाण चुनाव चिह्न को आवंटित करने की माँग की है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयोग को भेजे एक पत्र में शिंदे गुट ने असली शिवसेना होने का दावा किया है और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर द्वारा दी गई मान्यता का हवाला दिया है।
बता दें कि एकनाथ शिंदे ने मंगलवार (19 जुलाई) को लोकसभा में राहुल शेवाले को पार्टी के फ्लोर लीडर और भावना गवली को मुख्य सचेतक बनाने की घोषणा की थी। लोकसभा अध्यक्ष ने राहुल शेवाले को संसद के लोकसभा में शिवसेना के नेता के रूप में मान्यता भी प्रदान कर दी।
हालाँकि, जिस तरह शिवसेना के एकनाथ शिंदे गुट ने अलग होकर महाराष्ट्र में बीजेपी के साथ सरकार बना ली थी। और खुद को संख्या के आधार पर असली शिवसेना घोषित किया था तभी से ये चर्चा सियासी गलियारों में हो रही थी कि क्या शिव सेना के असली नाम और चुनाव चिन्ह पर शिंदे गुट का कब्जा हो जाएगा?
वहीं अब जिस तरह से शिवसेना के लोकसभा में मौजूद 19 सांसदों में से 12 सांसद, 55 में से 40 विधायक और सैकड़ो पार्षद उद्धव ठाकरे गुट को छोड़कर शिंदे गुट का हिस्सा हैं महाराष्ट्र की सियासत का पूरा दृश्य बदल चुका है। लोकसभा में स्पीकर ने भी उन्हें अलग गुट की मान्यता दे दी है। ऐसे में ठाकरे परिवार के हाथों से शिवसेना की कमान खिसक सकती है क्योंकि पार्टी का नाम और चिह्न शिंदे गुट को मिल सकता है। इस पर अब उनका दावा मजबूत लगता है।
गौरतलब है कि इस समय चुनाव चिन्ह पर दावा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को महाराष्ट्र राज्य चुनाव आयोग को स्थानीय निकायों के चुनावों को दो सप्ताह के भीतर अधिसूचित करने का निर्देश दिया है। ऐसे में जब महाराष्ट्र में BMC सहित कई नगर निकायों में चुनाव होने वाले हैं तो चुनाव चिह्न पर अधिकार जरुरी हो जाता है।
सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने अपने फैसले में ऑल्ट न्यूज (AltNews) के को-फाउंडर मोहम्मद जुबैर (Mohammad Zubair) को तत्काल रिहा करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही कोर्ट ने जुबैर पर दर्ज सभी मामलों को क्लब करने का आदेश दिया है।
जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की बेंच ने जुबैर के खिलाफ उत्तर प्रदेश में दर्ज सभी 6 मामलों में अंतरिम जमानत दी है। साथ ही उस पर दर्ज सभी मामलों को क्लब कर दिल्ली पुलिस (Delhi Police) को ट्रांसफर करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने जुबैर पर जमानत के लिए शर्तों करने की माँग को भी खारिज कर दिया।
जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा, “हम एक पत्रकार को कैसे बता सकते हैं कि वे क्या लिखे?” उधर कोर्ट में UP पुलिस ने कहा कि जुबैर कोई पत्रकार नहीं है, वो एक फैक्ट चेकर है। जुबैर ऐसा ट्वीट पोस्ट करता जो, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो। जो ट्वीट सबसे ज्यादा वायरल होता है, उसका पैसा अधिक मिलता है।
सुप्रीम कोर्ट के इस तमाम दलीलों को इंडिया टुडे के पत्रकार शिव अरूर ने अपने शो में रखा। शिव अरूर ने बताया कि जब नूपुर शर्मा का मामला कोर्ट पहुँचा तो कोर्ट ने क्या और जब जुबैर के मामले में कोर्ट ने क्या कहा। हालाँकि, उन्होंने स्पष्ट कहा कि उनका उद्देश्य कोर्ट के फैसले पर सवाल उठाना नहीं, बल्कि उसे जस का तस लोगों तक पहुँचाना है।
शिव अरूर ने अपने शो में बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने नूपुर शर्मा में मामले कहा था कि शर्मा को टिप्पणी करने की जरूरत क्या थी। वहीं, जुबैर के मामले में उसी सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जुबैर को ट्वीट करने से रोका नहीं जा सकता। यहाँ जानना जरूरी है कि नूपुर शर्मा ने जो हदीस में बातें लिखी गई हैं, उसे टीवी में बहस के दौरान बताया था, जिसे ईशनिंदा करार दिया गया था। वहीं, जुबैर पर हिंदू धर्म के लोगों की भावनाएँ आहत करने का आरोप है।
नूपुर शर्मा के मामले में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा का उनका बयान लोगों (मुस्लिमों) को भड़काने के लिए दिया गया था। वहीं, जुबैर के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उसकी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अप्रत्याशित रूप से रोक नहीं लगाई जा सकती।
उसी सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नूपुर शर्मा की याचिका में अहंकार की बू आ रही है, जबकि जुबैर मामले में यह पुलिस द्वारा उचित एवं निष्पक्ष जाँच का विषय है। सुप्रीम कोर्ट ने यहाँ तक कह दिया था कि देश में जो कुछ भी हो रहा है, उसके लिए सिर्फ और सिर्फ नूपुर शर्मा जिम्मेदार हैं। वहीं, जुबैर मामले में उसी कोर्ट ने कहा कि उसे लगातार हिरासत में रखना उचित नहीं है।
शिव अरूर ने अपने शो में आगे बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान के उदयपुर में कन्हैया लाल की गला काटकर हत्या के लिए नूपुर शर्मा को जिम्मेदार बताया था, जबकि जुबैर के मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उसे स्वतंत्रता से वंचित रहने का कोई कारण नहीं है।
वहीं, नूपुर शर्मा के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि उनकी टिप्पणी उनके अहंकार को दिखाता है, जबकि जुबैर के मामले में कोर्ट ने कहा कि जुबैर कानून के तहत जवाबदेह है। सुप्रीम कोर्ट ने नूपुर शर्मा के मामले में कहा था कि उन्हें टीवी पर आकर पूरे देश से माफी माँगनी चाहिए। जुबैर के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह यह नहीं कह सकता कि वह आगे ट्वीट नहीं करेगा।
एक ही तरह के दो मामलों ने सुप्रीम कोर्ट ने किस तरह की टिप्पणी ये ऊपर दिए गए बातों से स्पष्ट है।
बॉलीवुड अभिनेत्री जाह्नवी कपूर ने कहा है कि वो अपने कपड़ों को लेकर हमेशा ध्यान रखना काफी थकाने वाला है, चाहे वो सामान्य जगह पर हों या फिर जिम के बाहर उनके फोटोग्राफ्स लिए जा रहे हों। जाह्नवी कपूर ने ‘डर’ जताया कि उनकी तस्वीरों को इस तरह से लिया जाता है कि लोग उसे वल्गर समझ लें। दिवंगत श्रीदेवी की बेटी ने कहा कि उन्हें ड्रेस अप होना काफी पसंद है और उन पर हमेशा हॉट दिखने का कोई दबाव नहीं होता।
उन्होंने कहा, “कुछ खास कारणों से जिम ही वैसी जगह है जहाँ लोग मुझे सबसे ज्यादा देखते हैं। कुछ दिन मैं बस कम्फर्टेबल दिखना चाहती हूँ और इसकी परवाह नहीं करती कि अगर एक खास एंगल से तस्वीर ली गई तो ये ये वल्गर हो जाएगा। इससे मुझे परेशानी होती है। मुझे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि कोई सोचे ये काफी हॉट है, लेकिन कोई वल्गर बोलता है तो मुझे फर्क पड़ता है। मुझे नहीं लगता कि कोई भी लड़की वल्गर दिखने के इरादे से बाहर निकलती है। ”
उन्होंने दावा किया कि कभी-कभी उस एंगल से तस्वीरें ले ली जाती हैं कि लोग वल्गर समझने लगते हैं और फिर कैरेक्टर पर सवाल उठाते हैं। उन्होंने कहा कि ये सब तब होता है, जब आपकी चॉइसेज आपके कम्फर्ट पर आधारित हैं। बकौल जाह्नवी कपूर, उन्हें इससे परेशानी होती है। बता दें कि जाह्नवी कपूर ने 2018 में ‘धड़क’ फिल्म से बॉलीवुड में कदम रखा था। उनकी आने वाली फिल्म ‘गुड लक जैरी’ है। वरुण धवन के साथ वो ‘बवाल’ फिल्म में भी दिखाई देंगी।
हाल ही में ‘कॉफी विद करण’ के 7वें सीजन के दूसरे एपिसोड में करण जौहर ने जाह्नवी कपूर से पूर्व ब्वॉयफ्रेंड के साथ सेक्स को लेकर सवाल किया, जिस पर उन्होंने कहा कि वो पीछे मुड़कर देखना नहीं चाहेंगी। वहीं सारा अली खान ने कहा, सही जवाब है नहीं, सही जवाब है शायद। जाह्नवी कपूर ने खुलासा किया कि केदारनाथ की ट्रिप के दौरान वो मौत के करीब पहुँच गई थीं। उन्होंने बताया कि रोड ब्लॉक हो गया था, जिस कारण से उन लोगों ने भैरवनाथ के रास्ते से जाने का फैसला किया।
अभिनेता सोनू सूद ने मंगलवार (19 जुलाई, 2022) को सनसनीखेज दावा किया कि डॉक्टरों के हार मानने के बाद उनकी टीम कोमा में पड़े एक व्यक्ति को फिर से जान बचाने में सफल रही।
सूद ने एक थ्रेड में कई ट्वीट करते हुए एक ऐसे व्यक्ति की कहानी साझा की, जिसे डॉक्टरों द्वारा हार मान लेने के बाद उनकी टीम द्वारा उसे जीवन दिया गया था, अन्यथा उसे बचाया नहीं जा सकता था।
सूद ने कहा कि राम प्रसाद भंडारी नाम का एक व्यक्ति और उसकी बेटी तेलंगाना से पूरे रास्ते गाड़ी से निकले और हाल ही में उनके दरवाजे पर आए। अभिनेता ने उनकी एक तस्वीर भी साझा की जिसमें उन्हें एक छोटी लड़की और आंध्र प्रदेश में पंजीकृत बाइक पर बैठे एक व्यक्ति के साथ देखा जा सकता है।
A man named Ram Prasad Bhandari and his little daughter showed up at my doorstep recently, all the way from Telangana, I was left feeling really humbled after meeting them.
सोनू सूद ने बाद के ट्वीट में कहा कि वह आदमी कुछ समय पहले कोमा में था और सभी डॉक्टरों ने उम्मीद छोड़ दिया था। तभी उनकी टीम ने इस मामले में कदम रखा और उस व्यक्ति की जान बचाई जा सकी।
सोनू सूद ने आगे कहा, “लड़की की आँखों खुशी थी, उसे खुश और स्वस्थ देखना मेरे लिए अद्भुत था, इस तरह के क्षण मुझे अपने उद्देश्य के लिए और अधिक मेहनत करने के लिए प्रेरित करते हैं, ये आशीर्वाद है जो एहसास कराते हैं कि एक छोटा सा काम कितने बड़े प्रभाव पैदा कर सकता है।”
सोनू सूद की कहानी पर लोगों ने घेरा
एक ट्विटर यूजर @BefittingFacts ने इस बात का खुलासा किया कि बाइक का नंबर किसी भी वाहन के लिए पंजीकृत नहीं है और बाइक का नंबर भी एडिट किया गया है।
Hello @APPOLICE100@MTPHereToHelp, This Bike is not registered in any motor vehicle and the bike’s number plate in this photo is also edited. Please check and take necessary steps against this fraud Messiah. https://t.co/0gxSPqdVC3
एक अन्य ट्विटर यूज़र ने आंध्र प्रदेश पुलिस, तेलंगाना पुलिस और भारत के गृह मंत्रालय को टैग करते हुए सोनू सूद के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए कहा, जो एक ऐसे व्यक्ति की कहानी साझा कर रहे जो ऐसी बाइक चला रहा है जिसका आरटीओ पंजीकरण में कहीं कोई रिकॉर्ड ही नहीं है।
वहीं एक अन्य सोशल मीडिया यूजर ने सूद के ट्वीट का जवाब देते हुए इसे धोखाधड़ी बताया और एक तस्वीर साझा की जिसमें दिखाया गया है कि बाइक का पंजीकरण नंबर आधिकारिक रिकॉर्ड में मौजूद नहीं है।
हालाँकि, यह पहली बार नहीं है जब सोनू सूद पर धोखाधड़ी करने या खुद को मसीहा के रूप में स्थापित करने लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया गया है। सोशल मीडिया पर अभिनेता सोनू सूद का ऐसा अभिनय भी कोई नई घटना नहीं है। जब से कोरोनावायरस महामारी आया है तभी से अभिनेता ने अपना अधिकांश समय खुद को एक प्रकार के मसीहा के रूप में पेश करने में बिताया है।
लेकिन, कई मौकों पर, सोशल मीडिया यूजर्स ने इस बात का खुलासा किया है कि कैसे सूद का संकट में ‘मरीजों’ की मदद करने का दावा एक मसीहा होने के इमेज बिल्डिंग के अलावा और कुछ नहीं था। मई 2021 में जब मेडिकल ऑक्सीजन की डिमांड अपने चरम पर थी, तो उनकी टीम ने बीजेपी नेता तेजस्वी सूर्या के कार्यालय से मदद ली, लेकिन एक बयान जारी करते हुए, ऑक्सीजन की व्यवस्था का सारा श्रेय खुद लेने का प्रयास किया। सितंबर 2021 में आईटी विभाग ने सूद से जुड़े कई ठिकानों पर छापेमारी की थी। लगातार तीन दिनों तक तलाशी लेने के बाद, आईटी विभाग ने कहा कि सूद ने 20 करोड़ रुपए से अधिक की कर चोरी की थी।
इजरायल का एक पत्रकार छोरी-छिपे मक्का पहुँच गया, जिसका खुलासा होने के बाद मुस्लिमों में उबाल है। उसने वहाँ का अपना वीडियो भी शेयर किया है। बता दें कि हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बायडेन ने इजरायल और सऊदी के तटवर्ती शहर जेद्दाह का दौरा किया है। मक्का में गैर-मुस्लिमों का प्रवेश वहाँ की सरकार ने प्रतिबंधित कर रखा है। उक्त पत्रकार का नाम गिल तमारी है, जो ‘चैनल 13’ के वर्ल्ड एडिटर के रूप में कार्यरत है।
उक्त पत्रकार ने जिस वीडियो को शेयर किया, उसमें वो मक्का के भव्य दरवाजों से होकर गुजर रहा है और साथ ही वो ‘ग्रैंड मस्जिद’ से होकर भी गुजरता है, जहाँ काबा स्थापित है। इस्लाम में ये सबसे पवित्र जगह माना जाता है। इस दौरान पत्रकार ने ड्राइवर के चेहरे को ब्लर कर दिया। उसके टीवी नेटवर्क ने भी इस वीडियो को साझा किया है। पत्रकार ने मक्का से 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित माउंट अराफात का भी दौरा किया।
हज यात्रा के दौरान यहीं बड़ी संख्या में मुस्लिम जमा होते हैं। बता दें कि हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति की यात्रा को कवर करने के लिए कई इजरायली पत्रकार सऊदी अरब पहुँचे थे। इजरायल और सऊदी अरब के रिश्ते हाल के दिनों में ठीक हुए हैं। हल ही में इजरायल का एक बिजनेस डेलीगेशन भी वहाँ गया था। 1948 में सऊदी अरब ने यहूदी राष्ट्र की मान्यता को नकार दिया था और फिलिस्तीन का पक्ष लिया था। लेकिन, हाल के दिनों में राजनयिक और सुरक्षा वाले संवाद के कारण इस रुख में बदलाव आया है।
מכה היא העיר הכי קדושה לאיסלאם ומוקפת בכניסתה במצלמות משוכללות כדי למנוע כניסה למי שאינו מוסלמי. גיל תמרי היה לכתב הישראלי הראשון שהצליח להיכנס ולצאת למסע בעיר. ומה קרה כשחשדו בו? הכתבה המלאה – הערב במהדורה המרכזית@tamarygilpic.twitter.com/BzYKXP06P0
गिल तमारी ने मक्का में घूमते हुए न सिर्फ वीडियो बनाया, बल्कि वहाँ के महत्वपूर्ण जगहों के बारे में भी बताते रहे। मक्का गेट के अंदर किसी भी गैर-मुस्लिम का प्रवेश बैन है। उन्होंने माउंट अराफत पर सेल्फी भी ली। सोशल मीडिया उन्हें गालियाँ पड़ रही हैं और मुस्लिम कह रहे हैं कि इजरायल ने मुस्लिमों को जेल में रखा है, जबकि एक यहूदी खुलेआम मक्का में घूम रहा। पत्रकार ने कहा है कि उनका ये दौरा मुस्लिमों को आहत करने के लिए नहीं था, वो माफ़ी माँगते हैं। उन्होंने कहा कि वो मक्का की सुंदरता को दिखा रहे थे।
बता दें कि एक बार जब मक्का पर कब्ज़ा हो गया था तो कुछ फ़्रांस के सैनिकों की मदद ली गई थी। चूँकि वहाँ गैर-मुस्लिमों की एंट्री वर्जित है, इसीलिए एक छोटे से समारोह में फ़्रांस के सैनिकों का धर्मांतरण करा के तब उन्हें अंदर लाया गया था। 7 साल पहले नवम्बर के महीने में इस्लामिक आतंकी हमला झेलकर फ्रांस ने 44 साल पहले मक्का की मस्जिद बचाने, और इसके अलावा अयातोल्ला खोमैनी को शरण देने की कीमत भर चुकाई थी।
राजस्थान के भीलवाड़ा के कोतवाली क्षेत्र में एक मोबाइल नेटवर्क कंपनी के मैनेजर ने अपना मजहब बदलकर और मनीष नाम से फेक आईडी बनाकर पहले कॉलेज की हिन्दू छात्रा से दोस्ती की। बाद में नशीला पदार्थ पिलाकर अश्लील तस्वीरें खींचकर ब्लैकमेल करने का मामला सामने आया है।
छात्रा को जब पता चला कि यह मनीष नहीं बल्कि शाहिद खान है तो उसने पूरे मामले में छेड़छाड़ और ब्लैकमेल करने के आरोप में भीलवाड़ा के कोतवाली थाना क्षेत्र में शिकायत दर्ज कराई।
वहीं इस मामले में जानकारी देते हुए NBT की रिपोर्ट के अनुसार, कोतवाली थाना प्रभारी मुकेश कुमार वर्मा ने बताया, “कॉलेज छात्रा ने एक मुकदमा दर्ज करवाया है। साथ ही पूरे मामले की जानकारी दी है। पीड़िता का कहना है युवक उसे ब्लैकमेल कर रहा है। धमकी दे रहा है कि उसने उसका अश्लील फोटो खींच ली है। युवती ने बताया कि इस धमकी का आधार पर ही वो उसे जबरन अपने कमरे में ले गया था। यहाँ उसे पता चला कि वह लड़का मनीष नहीं बल्कि शाहिद खान है। युवती ने यह सारी बात अपने परिजनों को बताकर पुलिस में एफआईआर दर्ज करवाई है। इसके बाद कोतवाली पुलिस ने शाहिद को गिरफ्तार कर लिया है।”
गिरफ़्तारी के बाद पुलिस पूछताछ में आरोपित का नाम शाहिद खान निकलकर सामने आया। उसने मनीष सेन के नाम से सोशल मीडिया पर फर्जी आईडी बनाने की बात स्वीकार ली है। इस आईडी के जरिए उसने लड़की से दोस्ती की। वहीं पुलिस अब इस बात की भी जाँच कर रही है कहीं आरोपित ने और भी युवतियों को तो नहीं फँसा रखा है।
ऐसे खुला भेद
पीड़िता ने पुलिस को बताया कि उसे उसके असली नाम के बारे में तब पता चला जब वो भीलवाड़ा के पंचवटी स्थित मकान पर उसे लेकर गया। इसने मनीष के नाम से कमरा किराए पर ले रखा था। लेकिन मकान मालिक ने उससे ID देने को कहा तो वह टालमटोल करने लगा। इसी दौरान उसके असली नाम का खुलासा हुआ।
सावन के महीने में आपने सड़क पर शांति से काँवड़ लेकर जाते भक्तों को देखा होगा, जिन्हें काँवड़िया भी कहते हैं। नदी से जल भरने से लेकर शिवलिंग पर अर्पित करने तक, ये काँवड़िए रास्ते भर बाबा का ध्यान करते रहते हैं, उसी सोच में मगन रहते हैं। इनकी संख्या हजारों में हो, फिर भी ये बिना किसी को परेशान किए अपनी राह चलते जाते हैं। तभी इनके स्वागत में जगह-जगह लोग इनकी सेवा के लिए लगे रहते हैं। यही तो है हिन्दू धर्म की महानता!
काँवड़, इसमें एक डंडे के सहारे दो पात्र दोनों तरफ लटके होते हैं, जिनमें जल होता है। डंडे वाले हिस्से को कंधे पर रखा जाता है। सजावट के लिए काँवड़ में फूल और रंगीन कपड़े भी लगे होते हैं। प्राचीन काल से ही काँवड़ यात्रा चली आ रही है। भगवान शिव की जब से पूजा हो रही है, जब से उन्हें जल चढ़ाया जा रहा है, तभी से इस यात्रा का अस्तित्व है। 12 ज्योतिर्लिंगों ही नहीं, शिव के हजारों अन्य मंदिरों तक काँवड़ यात्रा निकाली जाती है। भगवान परशुराम को पहला काँवड़िया माना गया है।
उदाहरण के लिए झारखंड के वैद्यनाथ धाम को ले लीजिए। बिहार और झारखंड के अधिकतर लोग यहीं जल चढाने आते हैं। आपको कई काँवड़िए तो ऐसे मिलेंगे, जो कई दशकों से लगातार जल चढ़ाने आ रहे हैं, किसी भी वर्ष गैप किए बिना। कोई कुछ प्रार्थना लेकर आता है, तो किसी की प्रार्थना पूरी हो जाती है तो बाबा के यहाँ हर वर्ष उपस्थिति दर्ज कराता है। कई निःस्वार्थ भाव से जाते हैं। कइयों के पास घूम-घूम कर तीर्थाटन के लिए धन या समय नहीं होता, वो भी एक बार काँवड़ यात्रा में समय देकर धन्य पाता है खुद को।
बाबा वैद्यनाथ को जल अर्पित करने के लिए काँवड़िए सबसे पहले गंगा नदी के दक्षिण में स्थित और भागलपुर शहर से 25 किलोमीटर पश्चिम में स्थित सुल्तानगंज में पहुँचते हैं। इसके लिए वो बस, ट्रेन, कार या किसी भी माध्यम का इस्तेमाल कर सकते हैं। फिर यहाँ से वो 111 किलोमीटर की यात्रा पर निकलते हैं, देवघर के लिए। केवल सावन महीने में कम से कम 10-15 लाख काँवड़िए अकेले बाबाधाम पहुँचते हैं।बाकी ज्योतिर्लिंगों के लिए भी यात्री पहुँचते हैं। ये यात्रा धैर्य की है, अनुशासन की है, साथ की है।
श्रावणी मेला इस दौरान आकर्षण का मुख्य केंद्र होता है। इनमें से अधिकतर बातें आपको पता हैं। लेकिन, क्या आपने गौर किया कि सावन महीने में काँवड़ यात्रा में कैसे जाति से लेकर लिंग और अमीर-गरीब तक का फर्क मिट जाता है और बाबा के सामने सब समान हो जाते हैं, एक-दूसरे से समान व्यवहार करते है। सब एक-दूसरे को यात्रा के दौरान ‘बम’ कह कर ही पुकारते हैं। ना किसी का कोई उपनाम होता है, ना कोई जाति।
जब गाँव से काँवड़ियों का जत्था निकलता है, तो उसमें सभी जाति के लोग होते हैं। इस दौरान स्वतः ही सब एक-दूसरे के नाम मर ‘बम’ लगा कर पुकारते हैं। ‘अरे वो अभिषेक बम किधर गया?’, ‘फलाँ गाँव वाले बम कितने बजे निकले?’ – इस तरह के सवाल आपको भोजपुरी, मैथिलि और मगही में सुनाई देंगे। कौन नाई है, कौन धोबी है, कौन ब्राह्मण है, कौन चर्मकार है, कौन क्षत्रिय है, कौन वैश्य है – इस दौरान सब ये भूल जाते हैं।
सबके कपड़े समान रहते हैं। अगर आपने काँवड़ियों के कपड़ों पर गौर किया तो पाएँगे तो सभी भगवा वस्त्र ही धारण किए होते हैं। कोई हाफ पैंट तो किसी ने धोती पहन रखी होती है। ऐसा नहीं कि कोई अमीर है तो वो सूट-बूट में चल रहा होता है और बेचारा गरीब है तो उसने धोती पहन रखी है। यहाँ बाबा के दरबार में हाजिरी लगाने के लिए सबके तन पर उसी प्रकार का वस्त्र होते हैं। हाँ, थोड़ी-बहुत भिन्नता डिजाइन या प्रकार में हो सकती है, लेकिन वो नगण्य ही।
इस दौरान बहुतेरे महिला-पुरुष का भी ऊँच-नीच वाला भेद नहीं रहता, महिलाएँ भी ‘बम’ ही होती हैं। अक्सर काँवड़ियों के किसी एक गाँव या रिश्तेदारी के समूह का नेतृत्व करने वाले को ‘सरदार बम’ कह दिया जाता है तो जो रुपए-पैसों के खर्च को देख रहा हो, वो ‘खजांची बम’ हो गया। बच्चे ‘बाल बम’ हो जाते हैं। इस दौरान बुजुर्ग ‘बमों’ का खास ध्यान रखा जाता है और गाँव में किसी से मतलब न रखने वाले लोग भी यहाँ आकर सामाजिक हो जाते हैं।
किसी को नायक उसकी जाति या रुतबा देख कर नहीं बना दिया जाता, बल्कि उसके अनुभव और कितनी बार उसने काँवड़ यात्रा की है, ये मायने रखता है। नियम-कायदे किसी अमीर के लिए भी होते हैं, जो किसी गरीब के लिए। रास्ते में भोजन-पानी से लेकर सब कुछ समान होता है। सुल्तानगंज से बाबाधाम की दूसरी सबके लिए वही है, सबको साथ जाना है। एक ही प्रकार के वस्त्र में सभी जाति और सभी हैसियत वाले लोग एक-दूसरे की कदर करते हुए आगे बढ़ते हैं।
तभी तो रास्ते में जगह-जगह उनके स्वागत के लिए लोगों ने टेंट लगाए होते हैं। उनके पाँव धोए जाते हैं। उन्हें खाने को थमाया जाता है। रास्ते के स्थानीय लोग खुद ये पहल करते हैं, जिसमें बच्चों से लेकर युवाओं तक हिस्सा लेते हैं। शीतल जल देकर काँवड़ियों का थकान मिटाया जाता है। ये यात्रा नहीं कर रहे होते हैं तो काँवड़ यात्रियों की सेवा कर के ही उस फल को प्राप्त कर लेते हैं। किसी की सेवा करते समय जाति या संपत्ति का ब्यौरा नहीं पूछा जाता, काँवड़ यात्री होना ही काफी है।
कोई ज्योतिर्लिंग ही क्यों, छोटी-छोटी काँवड़ यात्राएँ भी होती हैं। जैसे मैं बिहार के मोतिहारी से हूँ तो वहाँ से कुछ ही दूरी पर स्थित अरेराज के सोमेश्वर महादेव तक भी लोग काँवड़ लेकर जाते हैं, जिनके पास दूर जाने का समय नहीं है। या उम्र के कारण जो दूर नहीं जा पा रहे। मुजफ्फरपुर में बाबा गरीबनाथ तक भी काँवड़ यात्रा जाती है। पूरे भारत में ऐसे सैकड़ों शिवालय हैं और ज्योतिर्लिंगों तक न जा पाने वाले लोग यहाँ ख़ुशी से लेकर महादेव को जल अर्पित करते हैं।
उज्जैन में त्रिवेणी घाट से महाकालेश्वर मंदिर तक काँवड़ यात्रा निकलती है। उत्तराखंड के हरिद्वार और फिर गोमुख और गंगोत्री तक भी काँवड़ यात्रा जाती है। इसी तरह हर मंदिर के लिए जल भरने का स्थान और यात्रा का रूट पहले से तय होता है। हाँ, रास्ते में असामाजिक तत्व कभी-कभी उन्हें ज़रूर परेशान करते हैं, ऐसे सीलमपुर के मुस्लिम बहुल इलाके में उन पर मांस फेंक दिया गया। लेकिन, जाति-धन के भेद को मिटाती ये काँवड़ यात्रा सनातन काल से जारी है, सतत चलती रहेगी।
केरल हाईकोर्ट (Kerala High Court) ने एक फैसले में कहा है कि मुस्लिमों की कोई भी जमात, किसी भी मस्जिद में नमाज पढ़ सकती है और किसी भी कब्रिस्तान में लाशों को दफना सकता है। ऐसा करने से कोई उन्हें रोक नहीं सकता।
न्यायमूर्ति एसवी भट्टी और न्यायमूर्ति बसंत बालाजी की खंडपीठ ने यह फैसला वक्फ ट्रिब्यूनल के एक मामले में सुनवाई के दौरान दी। अदालत एर्नाकुलम में वक्फ ट्रिब्यूनल द्वारा जारी एक आदेश के खिलाफ जमात द्वारा दायर एक पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
ट्रिब्यूनल (तत्काल में प्रतिवादी) के समक्ष मूल मुकदमे में वादी उक्त जमात (जमा-आठ) के सदस्य थे, लेकिन केरल नदावुथुल मुजाहिदीन संप्रदाय द्वारा आयोजित एक धार्मिक प्रवचन में भाग लेने के कारण उन्हें बहिष्कृत कर दिया गया था।
इसके बाद ट्रिब्यूनल ने वादी के पक्ष में फैसला सुनाया और कहा कि वादी को समान रूप से प्रतिवादी की मस्जिद में नमाज पढ़ने और परिवार के सदस्यों के लाशों को कब्रिस्तान में दफनाने का अधिकार है। इसके बाद इस मामले को हाईकोर्ट में लाया गया।
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, “मस्जिद इबादत की जगह होती है और हर मुस्लिम मस्जिद में नमाज अता करता है। पहले प्रतिवादी (जामा-आठ) को जमात के सदस्य या किसी अन्य मुस्लिम को नमाज़ पढ़ने से रोकने का कोई अधिकार नहीं है। लाशों को दफनाना भी एक नागरिक अधिकार है। वादी अनुसूची संपत्ति में स्थित कब्रिस्तान एक सार्वजनिक कब्रिस्तान है। प्रत्येक मुस्लिम नागरिक अधिकारों के अनुसार सभ्य तरीके से दफन होने का हकदार है।”
पुनरीक्षण याचिकाकर्ता की ओर से उच्च न्यायालय के समक्ष पेश हुए अधिवक्ता पी जयराम ने कहा कि जमात और मुजाहिदीन संप्रदाय की धार्मिक मान्यताएँ और प्रथाएँ कई मामलों में भिन्न हैं। उन्होंने कहा कि ट्रिब्यूनल के आदेश से सार्वजनिक व्यवस्था बिगड़ेगी। उन्होंने इसे संविधान के अनुच्छेद 15 और 25 उल्लंघन भी बताया।
दूसरी ओर, वादी की ओर से पेश अधिवक्ता अब्दुल अज़ीज़ ने तर्क दिया कि वादी को नमाज़ अदा करने या अपने मृतकों को दफनाने से रोकना, केवल इसलिए कि वे मुजाहिदीन संप्रदाय के एक तकरीर में शामिल हुए थे, अवैध था।
करोड़ों की धोखाधड़ी की आरोपित राणा अयूब (Rana Ayyub) ने हाल ही में दिल्ली पुलिस द्वारा ऑल्ट न्यूज के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर की गिरफ्तारी को लेकर दुष्प्रचार किया। उन्होंने बीजेपी की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा के खिलाफ इस्लामवादियों को भड़काने वाले जुबैर को अपने कुतर्कों से सही ठहराने की कोशिश की।
उन्होंने कहा, “देश में व्यापक अशांति फैली और हिंसा की घटनाएँ हुईं, जिसके कारण कन्हैया लाल और उमेश कोल्हे की हत्या कर दी गई।” धोखाधड़ी मामले की आरोपित ने दावा किया, “मेरे एक दोस्त मोहम्मद जुबैर को दिल्ली पुलिस ने भारत की फेक खबरों का फैक्ट चेक करने पर गिरफ्तार कर लिया।”
अयूब ने Amanpour and Company को दिए इंटरव्यू में मोहम्मद जुबैर (Mohammed Zubair) की गिरफ्तारी की निंदा करते हुए कहा, “हम उस दौर में जी रहे हैं, जहाँ भारत में पत्रकारों को दुश्मन समझा जाता है, जबकि दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र पुलिस स्टेट में बदल रहा है।” हालाँकि, अयूब चाहती हैं कि दुनिया उन पर विश्वास करे, लेकिन सच उनके कुतर्कों के उलट है।
क्यों झूठीं हुईं राणा अयूब?
दिल्ली पुलिस ने 27 जून को मोहम्मद जुबैर को धार्मिक भावनाओं को आहत करने के आरोप में गिरफ्तार किया था। दिल्ली पुलिस ने AltNews के सह-संस्थापक पर IPC (भारतीय दंड संहिता) की धारा-153 (ऐसे कृत्य जिससे दंगे और उपद्रव होने की आशंका हो) और धारा-295 (किसी समाज द्वारा पवित्र मानी जाने वाली वस्तु का अपमान करना) लगाई गई थी। मोहम्मद जुबैर फेक न्यूज फैलाने के लिए कुख्यात है और उनका मीडिया पोर्टल भी हिन्दू विरोधी खबरों के लिए ही जाना जाता है। खुद को फैक्ट-चेकर बताने वाले मोहम्मद जुबैर के समर्थन में कविता कृष्णन जैसों वामपंथी गिरोह के लोगों ने भी दिल्ली पुलिस को भला-बुरा कहा था।
मोहम्मद जुबैर की पुरानी हिंदूफोबिक पोस्ट
फैक्टचेक के नाम पर प्रोपेगेंडा वेबसाइट चला रहे ऑल्ट न्यूज के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर ने पिछले महीने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से दर्जनों ट्वीट डिलीट कर दिए थे। जुबैर ने अपने हैंडल पर ये बदलाव ठीक उसी समय किया जब उसके हिंदूफोबिक ट्वीट सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे थे। 13-14 जून को कई नेटीजन्स ने जुबैर के कुछ पोस्ट देखकर उसके ऊपर हिंदू देवी-देवताओं को निशाना बनाने का आरोप लगाया था।
उसके पुराने पोस्ट में भगवान श्रीराम से लेकर शिवलिंग तक का मजाक उड़ाया गया था। जुबैर के फेसबुक डिलीट की सूचना सबसे पहले द हॉक आई ट्विटर यूजर ने दी थी। उन्होंने जुबैर के कई पोस्ट के स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए लिखा था, “दूसरों के भगवान, धर्म, संस्कृति और शास्त्रों का मजाक बनाना आसान है, क्योंकि इसका कोई अंजाम देखने को नहीं मिलता है।”
Its easy to make fun of other’s god, religion, culture & scriptures, because there is no consequences.
Ironically its coming from same person who triggered an event that took entire nation on ransom, and the violent mayhem is still on..
द हॉक आई द्वारा शेयर किए गए एक ट्वीट में, जुबैर शिवलिंग का मज़ाक उड़ाते हुए और वेटिकन सिटी के टॉप व्यू से इसकी तुलना करते हुए दिखाई दे रहा है। इसी तरह फेसबुक पेज ‘अनऑफिशियल मोहम्मद जुबैर’ पर एक पोस्ट में भगवान राम पर कटाक्ष करने के लिए अरुण गोविल का मजाक उड़ाया गया था। इसमें उसने कहा है कि ISRO को अरुण गोविल से परामर्श करना चाहिए, क्योंकि वह रॉकेटरी/विमान के बारे में अधिक जानते हैं।
‘अनऑफिशियल मोहम्मद जुबैर’ की एक अन्य पोस्ट में पानी के नीचे के हवाई जहाज को कैप्शन के साथ दिखाया गया है। जिसमें लिखा गया है, “ब्रेकिंग: रावण द्वारा 5000 साल पहले इस्तेमाल किया गया अंडरवाटर पुष्पक विमान हिंद महासागर में पाया गया।”
इसके अलावा हिंदू देवी देवताओं का मजाक उड़ाने के लिए जुबैर ने हिंदू मान्यताओं का भी मजाक उड़ाया है और संस्कृत पर कटाक्ष किया है। संस्कृत को हिंदू धर्म की सबसे महत्वपूर्ण भाषाओं में से एक माना जाता है और हिंदू देवताओं के बातचीत का माध्यम माना जाता है।
जुबैर ने अकॉउंट किया था डिएक्टिवेट?
गौरतलब है कि मोहम्मद जुबैर (Mohammed Zubair) ने हिंदू घृणा से सने अपने पोस्ट सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल होने के बाद 13 जून 2022 को अपना फेसबुक अकाउंट डिएक्टिवेट कर लिया था। कुछ दिनों बाद, दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने ‘हनीमून-हनुमान’ वाले ट्वीट मामले में मोहम्मद जुबैर को 50 हजार रुपए के निजी मुचलके पर जमानत दे दी। हालाँकि इसके बाद भी ज़ुबैर की रिहाई नहीं हो पाई, क्योंकि उस पर यूपी में कई मामलों में केस दर्ज है। एक मामला सुदर्शन न्यूज के पत्रकार द्वारा दायर की गई शिकायत से संबंधित है। बता दें कि सितंबर 2021 में पत्रकार ने लखीमपुर खीरी में ऑल्ट न्यूज के सह-संस्थापक के खिलाफ उसके चैनल को बदनाम करने के लिए शिकायत दर्ज कराई थी।