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अब भारत में बनेगी मंकीपॉक्स की वैक्सीन, मोदी सरकार ने निकाला टेंडर: 101 देशों को कोरोना वैक्सीन की 24 करोड़ खुराक दे चुका है भारत

दुनियाभर में कहर मचा रहे मंकीपॉक्स ने भारत में भी दस्तक दे दी है। ऐसे में इसकी गंभीरता को देखते हुए बुधवार (27 जुलाई 2022) को केंद्र सरकार ने वैक्सीन निर्माताओं से इस वायरस के लिए वैक्सीन बनाने को कहा है। इसके साथ ही डायग्नोस्टिक किट निर्माताओं को भी बीमारी के लिए डायग्नोस्टिक किट का निर्माण करने के लिए निर्देश दिए गए हैं।

इससे पहले एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने खुलासा किया था कि भारत ने मंकीपॉक्स वैक्सीन विकसित करने के लिए वैक्सीन निर्माताओं के साथ चर्चा शुरू कर दी है, क्योंकि वैश्विक स्तर पर मामले बढ़ गए हैं। ईओआई दस्तावेजों में कहा गया है कि इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) अनुसंधान और विकास सत्यापन के लिए मंकीपॉक्स वायरस स्ट्रेन/आइसोलेट्स उपलब्ध कराने को तैयार है। दरअसल, ICMR ने मंकीपॉक्स के खिलाफ वैक्सीन उम्मीदवार और संक्रमण के लिए डायग्नोस्टिक किट के विकास में संयुक्त सहयोग के लिए अनुभवी वैक्सीन निर्माताओं, फार्मा कंपनियों, अनुसंधान और विकास संस्थानों और इन-विट्रो डायग्नोस्टिक (IVD) किट निर्माताओं से EOI को भी आमंत्रित किया।

ब्लूमबर्ग ने सरकारी थिंक टैंक NITI Aayog के सदस्य और कोविड -19 पर राष्ट्रीय टास्क फोर्स के प्रमुख विनोद कुमार पॉल के हवाले से कहा, “हम पहले से ही संभावित खिलाड़ियों के साथ जुड़ रहे हैं।” थिंक टैंक के मुताबिक, “जैसा कि आप जानते हैं हमारे पास अपनी वैक्सीन क्षमता की एक मजबूत उपस्थिति है, इसलिए यह भी सरकार के सक्रिय विचार के अधीन है।”

गौरतलब है कि भारत में अब तक मंकीपॉक्स के 4 कन्फर्म और एक 1 संदिग्ध मामले सामने आए हैं। हालात को देखते हुए सरकार ने मंकीपॉक्स के निदान के लिए 15 प्रयोगशालाओं को नामित किया है और दो चरणों में आरटी पीसीआर परीक्षण करने के लिए पर्याप्त उपकरण हैं।

उल्लेखनीय है कि शुक्रवार को सदन में सरकार ने बताया था कि भारत ने 101 देशों को 23.9 करोड़ कोरोना की वैक्सीन खुराक की आपूर्ति की है। इसके साथ ही इसके तहत UN संस्थाओं को अनुदान, वाणिज्यिक निर्यात किया गया। ये निर्यात 15 जुलाई 2022 तक किए गए। इस सवाल के जबाव में स्वास्थ्य राज्य मंत्री भारती प्रवीण पवार ने आगे कहा कि 19 जुलाई तक कुल 200.34 करोड़ कोरोना वैक्सीन की खुराक 12 साल से अधिक उम्र की आबादी को दी गई है।

कुछ राज्यों में कोरोना के मामलों में बढ़ोतरी के पर टिप्पणी करते हुए पवार ने आगे कहा कि हालाँकि, इन राज्यों में COVID-19 मामलों में वृद्धि देखी जा रही है, लेकिन देश में टीकाकरण कवरेज में वृद्धि के कारण मृत्यु दर और अस्पताल में भर्ती होना नियंत्रण में है। मंत्री ने आगे कहा कि केंद्र सरकार द्वारा हर घर दस्तक 2.0 अभियान की शुरुआत 1 से 31 जुलाई के बीच की गई है, ताकि 60 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों तक पहुँच बनाई जा सके।

ED ने झारखंड में ₹30 करोड़ के शिप को जब्त किया: अवैध खनन में इस्तेमाल, CM सोरेन के प्रतिनिधि के इशारे पर होता था काम

झारखंड में अवैध खनन को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक शिप को जब्त किया है। यह शिप राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन (CM Hemant Soren) के के विधायक प्रतिनिधि पंकज मिश्रा (Pankaj Mishra) के आदेश पर इस्तेमाल किया जा रहा था।

बता दें कि अवैध खनन के मामले में ED ने पंकज मिश्रा को पहले ही गिरफ्तार कर लिया है। मंगलवार (26 जुलाई 2022) को जिस शिप को पकड़ी गई है, उसका नाम MV Infralink- III है। इस शिप पश्चिम बंगाल में पंजीकृत है और इसका रजिस्ट्रेशन नंबर WB 1809 है। इसकी कीमत 30 करोड़ रुपए बताई जा रही है।

इस मामले में झारखंड पुलिस ने दो अलग-अलग मामले दर्ज किए हैं। एक शिप के मालिक के खिलाफ दर्ज किया गया है और दूसरा मामला खनन से जुड़ा है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस शिप का इस्तेमाल अवैध खनन को अवैध तरीके से झारखंड से बाहर ले जाने के लिए किया जाता था।

पश्चिम बंगाल में रजिस्टर्ड होने के कारण इस शिप को झारखंड में चलाने की इजाजत नहीं है, लेकिन पंकज मिश्रा के कहने पर इसे अवैध रूप से राज्य में चलाया जा रहा था। इस जहाज को पंकज मिश्रा के करीबी राजेश यादव उर्फ दाहू यादव के आदमी अवैध खनन को ट्रांसपोर्ट करने के लिए इस्तेमाल कर रहे थे।

हेमंत सोरेन प्रतिनिधि पंकज मिश्रा गिरफ्तार

हेमंत सोरेन के प्रतिनिधि पंकज मिश्रा को ED ने 19 जुलाई को ही गिरफ्तार कर लिया था। मिश्रा 1 अगस्त तक ईडी की हिरासत में हैं। गिरफ्तारी से पहले ED ने मनी लॉन्ड्रिंग कानून के तहत पंकज मिश्रा, दाहू यादव और उनके सहयोगियों के खातों की जाँच की थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामले में एजेंसी ने 8 जुलाई को झारखंड में 21 जगहों पर छापेमारी कर 50 बैंक खातों की जाँच की जाँच की थी। इन खातों से लगभग 13 करोड़ रुपए और 5.34 करोड़ नकद जब्त किए थे। इसके बाद ही मिश्रा को गिरफ्तार कर लिया गया था।

पंकज मिश्रा झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के बेहद खास हैं और उनके विधानसभा क्षेत्र में विधायक प्रतिनिधि हैं। इतना ही नहीं, मिश्रा सोरेन की पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की केंद्रीय कमिटी के सदस्य भी हैं।

क्रशर और ट्रक हो चुका है जब्त

दरअसल, ED अवैध खनन मामले को लेकर जाँच कर रही थी। एजेंसी ने साहेबगंज के मौजा सिमारिया इलाके और डेंबा इलाके में अवैध माइनिंग का पता लगाया था। इस अवैध खनन को बिष्णु यादव और उसके आदमी कर रहे थे।

इससे पहले ED ने अवैध खनन में शामिल दो स्टोन क्रशर को जब्त किया था। ये दोनों स्टोन क्रशर माँ अंबा स्टोन वर्क्स के मालिक विष्णु यादव और पवित्र यादव के हैं। इसके अलावा, बिना माइनिंग चालान के अवैध खनन में शामिल तीन HYVA ट्रक को भी जब्त किया गया था।

‘मेरे जिस्म पर कुछ तो था, आपके पति के जिस्म पर क्या है?’: शर्लिन चोपड़ा ने दीपिका पादुकोण को सुनाया, याद दिलाई घूरने वाली घटना

बॉलीवुड एक्टर रणवीर सिंह आजकल पब्लिक न्यूडिटी को लेकर विवादों में हैं। कुछ लोग उनका सपोर्ट कर रहे हैं, तो कुछ उनका विरोध। रणवीर सिंह की न्यूड तस्वीरों के सामने आने के बाद अब एक्ट्रेस शर्लिंन चोपड़ा ने दीपिका पादुकोण पर निशाना साधा है। उन्होंने दीपिका पादुकोण को कहा कि जब उन्होंने एक अंतरराष्ट्रीय मैग्जीन के लिए बोल्ड फोटो शूट करवाया था तो उस वक्त उनके ऊपर कीचड़ उछाले गए थे और उन्हें कैरेक्टरलेस कहा गया था। अब रणवीर सिंह के मामले में ये दोगलापन क्यों?

शर्लिन ने कहा कि जब मैने न्यूड फोटोशूट करवाया था तो मेरे शरीर पर कपड़े थे। एक्ट्रेस कहती है कि अब ये मत कहिए कि हो गया। ये तो चलता है। उन्होंने दीपिका पादुकोण को संबोधित कर कहा, “अब ये मत कहिए कि ये तो चलता है। हम इसे क्यों इतना बड़ा मुद्दा बना रहे हैं। यही एक मुद्दा है, जिस तरीके से दीपिका पादुकोण ने मुझे देखा था। मैं बताना चाहती हूँ कि कैमरे पर वो लुक कैसा था, ऐसे ऊपर से नीचे जिस्म पर एक छोटा सा टॉप था। गनीमत है कुछ तो था, जिस्म पर। लेकिन आपके पति के जिस्म पर क्या है मैडम?”

दरअसल, इससे पहले रणवीर के न्यूड फोटोशूट पर शर्लिन ने उन लोगों को घेरा था, जिन्होंने उनके फोटो शूट पर उनपर सवाल खड़े किए थे। शर्लिन का कहना था कि उस वक्त तो मीडिया और लोगों ने उन्हें चरित्रहीन, जलील और क्या-क्या कहा था। लेकिन अब जब ये जनाब वैसा ही कर रहे हैं तो ये उर्दूवु़ड मीडिया इनकी प्रशंसा कर रहा है।

गौरतलब है कि न्यूड फोटो शूट के मामले में एक्टर के खिलाफ महिलाओं की भावनाओें को आहत करने के मामले में मुंबई के एक एनजीओ ने केस दर्ज कराया है। पेपर मैगज़ीन के लिए न्यूड शूट के लिए उन पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 509, 292 और 294 और आईटी एक्ट की धारा 67 ए के तहत मामला दर्ज किया गया था।

45 साल की करोड़पति महिला ने 14 साल के लड़के के साथ दिन में 4 बार किया सेक्स, शराब के नशे में थी: ₹80 लाख लेकर कोर्ट ने दिया जमानत

ऑस्ट्रेलिया की एक 45 साल की करोड़पति महिला ने एक 14 साल के बच्चे के साथ दिन में 4 बार सेक्स किया, जिसके बाद वो कानूनी कार्रवाई का सामना कर रही हैं। इतना ही नहीं, इसके बाद उस महिला ने अपने रुतबे का इस्तेमाल करते हुए उस लड़के और उसके परिवार को चुप कराने की कोशिश भी की। आरोपित सवाना डेजली एक स्वास्थ्य सम्बंधित कंपनी चलाती है। साथ ही सवाना डेजली का घोड़ों का भी व्यापार है।

सोमवार (25 जुलाई, 2022) को महिला को डाउनिंग स्ट्रीट स्थित अदालत में पेश किया गया। ये मामला जून 2022 का है। 27 जून को ही उक्त महिला को ‘चाइल्ड एब्यूज यूनिट’ ने गिरफ्तार कर लिया था, जिसके बाद से उसे कस्टडी में रखा गया है। महिला के वकील ने इस दलील पर जमानत माँगी कि आरोपित का मानसिक स्वास्थ्य लगातार गिर रहा है और वो 1 लाख डॉलर (80 लाख रुपए) का बॉन्ड भरने के लिए तैयार हैं।

आरोपित महिला ऑस्ट्रेलिया के जाने-मने घोड़े के कारोबारी रॉस डेजली की बेटी है। अदालत में बताया गया कि 14 साल के बच्चे के साथ सेक्स करते समय आरोपित महिला काफी नशे में मदहोश थी। एक फ़ोन कन्वर्सेशन से खुलासा हुआ कि वो अपने अपराध को मान भी रही है। साथ ही पुलिस ने बताया कि ये कोई अचानक हुई घटना नहीं थी, बल्कि आरोपित महिला ने अपने इरादों को लेकर पहले भी बताया था। इसके बाद उस लड़के को डराया-धमकाया भी।

अदालत में पुलिस ने बताया कि सवाना डेजली ने पहले ये साबित करने की कोशिश की कि ये चीज दोनों तरफ से हुई थी। हालाँकि, अदालत ने उसे जमानत दे दी है। इस घटना के बाद उस लड़के ने अपनी माँ को सब कुछ बताया था, जिसके बाद इसका खुलासा हुआ था। उस समय महिला ने शराब पी रखी थी। इंस्टाग्राम पर वो सेलेब्रिटी ‘वेट लॉस कोच’ है। उसके प्रोडक्ट्स पूरे ऑस्ट्रेलिया में बिकते हैं। साथ ही वो 80 करोड़ के एक बंगले में रहती है।

‘वो किस करने लगे तो मैंने विरोध नहीं किया, इससे मैं अपराधी नहीं हो गई’: शिल्पा शेट्टी की कोर्ट में दलील, अश्लीलता मामले में 15 साल बाद राहत

शिल्पा शेट्टी के जीवन में कई विवाद सामने आते रहे हैं। एक ऐसा ही मामला हॉलीवुड स्टार रिचर्ड गेरे से जुड़ा है जब एक्ट्रेस को स्टेज पर सबके सामने किस करना और शिल्पा का उन्हें सपोर्ट करना सुर्खियाँ बना था। साल 2007 के इसी मामले में एक्ट्रेस ने अश्लीलता फैलाने का आरोप मामले में राहत मिली है। शिल्पा शेट्टी ने अपने खिलाफ दायर याचिका को खारिज करने की माँग करते हुए अदालत का रुख किया था। इस याचिका में शिल्पा को केस से बरी करने के मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट के आदेश को अलवर पुलिस द्वारा चुनौती दी गई थी।

लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले में शिल्पा शेट्टी ने याचिका में दावा किया है कि उनके खिलाफ एकमात्र आरोप ये है कि जब रिचर्ड गेरे (Richard Gere) ने उन्हें किस किया तो उन्होंने विरोध नहीं किया और इसलिए ये उन्हें साजिशकर्ता नहीं बनाता है।

वहीं टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, वकील प्रशांत पाटिल की तरफ से दिए गए जवाब में कहा गया है, “प्रतिवादी (शिल्पा शेट्टी कुंद्रा) मूल शिकायतकर्ता के हाथों दुर्भावनापूर्ण कार्रवाई और उत्पीड़न का शिकार हैं। प्रतिवादी एक फेमस एक्ट्रेस हैं और हमेशा पब्लिक और पर्सनल लाइफ में जिम्मेदारी से काम किया है।”

बता दें कि जनवरी, 2022 में मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट केतकी चव्हाण ने शिल्पा शेट्टी को इस मामले से बरी कर दिया था। इसके बाद कोर्ट ने न सिर्फ उन्हें ‘पीड़ित’ कहा, बल्कि उन्हें क्लीन चिट भी दे दी। कोर्ट ने फैसला देते हुए टिप्पणी की थी, “मैं संतुष्ट हूँ कि वर्तमान आरोपित यानी शिल्पा शेट्टी के खिलाफ आरोप निराधार हैं।”

कोर्ट ने आगे कहा कि शिल्पा शेट्टी आरोपित नंबर एक यानी रिचर्ड गेरे की हरकत की विक्टिम थीं। और ऐसा एक भी सबूत नहीं है कि शिल्पा इसमें अपनी तरफ से शामिल थीं। मजिस्ट्रेट केतकी चव्हाण ने कहा कि वीडियो में साफ दिखता है कि रिचर्ड गेरे के किस करने के बाद शिल्पा भी उस हरकत पर हक्की-बक्की थीं और उन्होंने कहा था कि यह कुछ ज्यादा नहीं हो गया। आखिरकार 15 साल बाद शिल्पा को कोर्ट ने राहत देते हुए इन आरोपों से बरी कर दिया।

गौरतलब है कि साल 2007 में आयोजित AIDS अवेयरनेस प्रोग्राम में शिल्पा शेट्टी के साथ रिचर्ड गेरे भी शामिल थे। उस दौरान रिचर्ड ने स्टेज पर ही शिल्पा को बार-बार गले लगाया और किस भी किया। जिसके बाद हर-तरफ हंगामा मच गया। तब रिचर्ड और शिल्पा शेट्टी दोनों पर ही अश्लीलता फैलाने का आरोप लगाया गया और केस कर दिया गया। वहीं इस मामले में फैसला आने में करीब 15 साल लग गए।

बता दें कि वर्ष 2007 में शिल्पा के खिलाफ अश्लीलता फैलाने के आरोप में राजस्थान में 2 और गाजियाबाद में एक मामला दर्ज करवाया गया था। घटना के बाद, शेट्टी और गेरे दोनों पर आईपीसी की धारा 292, 293, 294, 120-बी, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 67 के तहत मामला दर्ज किया गया था। 2017 में उनकी याचिका पर यह केस सुप्रीम कोर्ट ने मुंबई में ट्रांसफर करने की अनुमति दी थी, जिस पर अब मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट ने अपना फैसला सुनाया है।

₹84,330 करोड़ की संपत्ति के साथ ये हैं भारत की सबसे अमीर महिला, पिता RSS के मंच पर लगा चुके हैं हाजिरी: शिक्षा के क्षेत्र में कर रहीं बड़ा काम

एचसीएल टेक्नॉलिजी की चेयरपर्सन रोशनी नाडर मल्होत्रा (40) सबसे अमीर महिला बिजनेसमैन हैं। इसके साथ ही वो भारत की पहली ऐसी महिला हैं, जिन्होंने किसी आईटी कंपनी की कमान को संभाला है। रोशनी नाडर की कुल संपत्ति 84,330 करोड़ रुपए है। इस बात का खुलासा कोटक प्राइवेट हुरुन की लिस्ट के मुताबिक, रोशनी नाडर बिजनेसमैन शिव नाडर की बेटी हैं। शिव नाडर 2016 में RSS के कार्यक्रम में सरसंघचालक मोहन भागवत के साथ मंच पर दिखे थे।

इससे पहले साल 2019 में वो फोर्ब्स की दुनिया की 100 सबसे ताकतवर महिलाओं की लिस्ट में 54वें स्थान पर काबिज रहीं थीं। बुधवार (27 जुलाई, 2022) को जारी की गई लिस्ट के मुताबिक, 59 साल की फाल्गुनी नायर (ब्यूटी प्रोडक्ट कंपनी नायकी की चेयरपर्सन) इस मामले में दूसरे स्थान पर काबिज हैं। उनकी कुल संपत्ति 57,520 करोड़ रुपए आँकी गई है।

कौन हैं रोशनी नाडर मल्होत्रा

गौरतलब है कि रोशनी नाडर एचसीएल टेक्नॉलॉजीस के फाउंडर शिव नाडर की बेटी हैं। रोशनी ने दिल्ली के वसंत वैली स्कूल में पढ़ाई की और नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी, इवान्स्टन, इलिनोइस से रेडियो/टीवी/फिल्म में कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन किया औऱ फिर केलॉग स्कूल ऑफ मैनेजमेंट से एमबीए भी किया। इसके बाद उन्होंने 2009 में स्काई न्यूज यूके और सीएनएन अमेरिका में न्यूज प्रोड्यूसर के तौर पर काम किया और एक साल के अंदर ही वो 27 साल की उम्र में कार्यकारी निदेशक और फिर सीईओ बनीं।

रोशनी ने 2010 में एचसीएल हेल्थकेयर के वाइस चेयरमैन शिखर मल्होत्रा ​​से शादी की। उनके दो बेटे अरमान और जहान हैं। उन्होंने 2018 में द हैबिट्स ट्रस्ट की स्थापना की जो भारत के प्राकृतिक आवासों और इसकी स्वदेशी प्रजातियों की रक्षा करने की दिशा में काम करता है। इसके अलावा उन्होंने शिव नाडर फाउंडेशन के ट्रस्टी के रूप में शिक्षा के क्षेत्र में परिवर्तनकारी प्रयासों को आगे बढ़ाया। उल्लेखनीय है कि रोशनी नाडर साल 2020 में एचसीएल टेक्नॉलीजीस की चेयरपर्सन बनी थीं।

यही नहीं वह लगातार 2017, 2018, और 2019 में फोर्ब्स द्वारा संकलित और जारी की गई दुनिया की 100 सबसे शक्तिशाली महिलाओं की सूची में शामिल हुईं। उन्हें 2017 में बाबसन कॉलेज द्वारा लुईस इंस्टीट्यूट कम्युनिटी चेंजमेकर अवार्ड से भी सम्मानित किया गया था और उन्हें फेमस अंतरराष्ट्रीय थिंक टैंक होरासिस द्वारा इंडियन बिजनेस लीडर ऑफ द ईयर 2019 के रूप में मान्यता दी गई थी।

अर्पिता मुखर्जी के एक और घर से बड़ी मात्रा में मिला कैश, गिनने के लिए ED ने मँगाई 4 मशीनें: काउंटिंग में लग सकती है पूरी रात

पश्चिम बंगाल के मंत्री पार्था चटर्जी की करीबी अर्पिता मुखर्जी के आवास से एक बार फिर ED को बड़ी मात्रा में कैश मिला है। ED के अधिकारियों ने इस कैश को गिनने के लिए मशीन मँगवा ली है। इस प्रक्रिया में रात भर का समय भी लग सकता है। बुधवार (27 जुलाई, 2022) को दोपहर से ही अर्पिता मुखर्जी के इस अपार्टमेंट में तलाशी ली जा रही थी। बता दें कि उनके यहाँ से पहले ही 21 करोड़ रुपए और 76 लाख रुपए के गहने बरामद किए जा चुके हैं।

उधर एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अर्पिता मुखर्जी ने ED की पूछताछ में बताया है कि मंत्री पार्था चटर्जी उनके घर का इस्तेमाल ‘मिनी बैंक’ के रूप में करते थे। अर्पिता मुखर्जी के वकील अदालत में ED के दावों को नकारने की योजना बना रहे हैं और इसके लिए वो दलील देंगे कि ED की कार्रवाइयों में सज़ा की दर कम रही है। अर्पिता मुखर्जी के घर से तस्वीरें और सूचनाएँ भी लीक होने से ED नाराज है। एक अन्य महिला ने भी बताया है कि पार्था चटर्जी उसके घर में कितने रुपए रखवाते थे, ये उसे भी नहीं बताया जाता था।

अर्पिता मुखर्जी के जिस घर से नया कैश मिला है, वो कोलकाता में स्थित है। कैश गिनने के लिए 4 मशीनें मँगाई गई हैं। कोलकाता स्थित SBI के क्षेत्रीय मुख्यालय से ये मशीनें लाई गई हैं। बताया जा रहा है कि ये रकम पिछली बार की बरामदगी से ज्यादा हो सकती है। कैश के अलावा सोने के गहने, सोने के बिस्किट और संपत्ति के दस्तावेज भी बरामद किए गए हैं। कई संपत्ति गलत पते पर रजिस्टर्ड होने की बात भी पता चली है। नॉर्थ 24 परगना स्थित अर्पिता के पैतृक आवास में भी छापेमारी हुई।

अर्पिता मुखर्जी के बारे में बता दें कि वो 2008-14 के बीच बंगाल-उड़िया फिल्म इंडस्ट्री में सक्रिय थीं और एक मॉडल भी रही हैं। उत्तरी कोलकाता के बेलघोरिया के एक मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मी अर्पिता काफी विलासमय जीवन जी रही थीं। पिता की मौत के बाद उनकी शादी झाड़ग्राम के एक कारोबारी से हुई थी, लेकिन उनके कोलकाता लौटने के बाद इस शादी का क्या हुआ, इस बारे में किसी को कुछ नहीं पता। अर्पिता मुखर्जी का अपना प्रोडक्शन हाउस भी है। पिता सरकारी नौकरी में थे, ऐसे में उनकी मौत के बाद भी अर्पिता ने सरकार नौकरी ठुकरा दी थी।

कहीं सरेआम उतारी गई आबरू, तो कहीं जानलेवा हमला: वो 10 मामले, जब स्कूल में ‘हिजाब’ के कारण शिक्षकों ने देखा कट्टरपंथियों का खौफनाक चेहरा

पश्चिम बंगाल के एक स्कूल से कुछ दिन पहले एक मामला सामने आया था जिसमें एक टीचर को कट्टरपंथी भीड़ स्टाफ रूम में घुसकर मार रही थी। टीचर की गलती बस इतनी थी कि उन्होंने क्लास के दौरान बाहर घूम रही हिजाबी छात्रा के कान खींच उसे डाँट लगा दी थी और इसी दौरान उसका हिजाब नीचे सरक गया था। स्कूल के माहौल के लिहाज से देखें तो बात इतनी बड़ी नहीं थी। लेकिन उस छात्रा ने इस बात को अपने अभिभावकों के सामने ऐसे पेश किया जैसे ये मुद्दा ‘हिजाब’ को लेकर हुआ विवाद था। फिर क्या… कुछ ही देर में भीड़ स्कूल में आई और महिला शिक्षिका को बुरी तरह मारना शुरू कर दिया।

शिक्षिका से मारपीट और हिजाब के बदले उनके कपड़े खींचने की वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई। लोगों ने इसकी निंदा की। हेडमास्टर ने टीचर के साथ जाकर शिकायत दी और कुछ लोग गिरफ्तार भी हुए। लेकिन, इस घटना के बाद एक बार फिर सवाल उठे कि क्या हिजाब इतना बड़ा मुद्दा है कि सारी नैतिकता और नियम की बातें दरकिनार कर दी जाएँ। न शिक्षक के पास छात्रों को डाँटने का अधिकार रहे और न छात्रों के मन में अपने शिक्षक लिए सम्मान हो।

इस साल फरवरी-मार्च में कर्नाटक के एक कॉलेज से शुरू हुआ हिजाब विवाद तो आपको याद ही होगा। विवाद इतना बड़ा बना दिया गया था कि विदेशों से इस्लामी उलेमा माँग कर रहे थे कि भारत के स्कूलों में लड़कियों को हिजाब पहनकर आने की अनुमति दी जाए। हालाँकि भारत में लोकतांत्रिक व्यवस्था के चलते कट्टरपंथियों की ज्यादा नहीं चली और कोर्ट ने कहा कि स्कूल में यूनिफॉर्म के लिए बनाए गए नियम ही फॉलो किए जाएँ। 

कोर्ट के आदेशों के बाद और उससे पहले भी जगह-जगह कट्टरपंथी अपनी मनामानी करते दिखते हैं और जो इसे देख आपत्ति जताते हैं उनपर बंगाल की तरह ही हमला होता है। ये केवल भारत की दशा नहीं है। हर जगह जहाँ कट्टरपंथियों को लगा कि हिजाब पर उँगली उठ रही है वहाँ-वहाँ इनका उपद्रव देखने को मिला।

आज हम ऐसे ही 8-9 मामले आपको बताने जा रहे हैं जब केवल भारत में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी शिक्षक इसलिए हिंसा का शिकार हुए क्योंकि या तो उन्होंने हिजाब पर आपत्ति जता दी थी या फिर हिजाबी छात्रा से कुछ कह दिया था।

बंगाल में कट्टरपंथियों ने की तोड़फोड़

साल 2022 के फरवरी में जब कर्नाटक से  हिजाब विवाद उठा तब कई राज्यों में इसका असर देखने को मिला। बंगाल उन्हीं में से एक था। 12 फरवरी की खबर के अनुसार, मुर्शिदाबाद के एक स्कूल की एक छात्रा ने अपने परिजनों को बताया कि जब वह स्कूल में हिजाब पहनकर गई तो उसकी टीचर ने उसे स्कूल के अंदर जाने से रोक दिया और कहा कि ऐसे स्कूल में नहीं आना। आरोप सच थे या झूठ, इनका पता लगाए बिना छात्रा के परिजन भड़क गए और स्थानीयों के साथ स्कूल में तोड़फोड़ कर डाली। स्कूल प्रशासन लाचार बना भीड़ का उपद्रव देखता रहा और बाद में स्पष्ट कहा कि जिस आरोप के कारण ये सब हुआ वैसा असल में हुआ ही नहीं था।

हिजाब को लेकर मढ़े गए झूठे आरोपों की वजह से बांग्लादेश में शिक्षकों पर हमला

बंगाल की तरह बांग्लादेश में भी हिजाब के लिए कट्टरपंथी हमला करने को अक्सर तत्पर रहते हैं। घटना इसी मार्च में गोपालगंज उपजिला की है। वहाँ एक हिंदू शिक्षक को एक महीने तक छिप-छिप कर जीना पड़ा क्योंकि उनके विरुद्ध कट्टरपंथी अभियान चल रहे थे। उन पर आरोप लगा था कि उन्होंने एक छात्रा का हिजाब हटवा दिया जबकि सच ये था कि सुनील चंद्र नाम के टीचर ने फेस मास्क का इस्तेमाल सिखाने के दौरान बच्चों को गहरी साँस लेने को कहा था।

उन्हीं बच्चों में वह छात्रा भी थी जिसने नकाब पहना था। टीचर की बात सुनने की बजाय उसने आपत्ति जताई। हालाँकि टीचर ने कहा कि शिक्षा, माता-पिता जैसे होते हैं। जिसके बाद उसने नकाब हटाकर एक्टिविटी की भी। मगर घर जाकर उसने न जाने क्या कहानी सुनाई कि उसके परिजन व अन्य कट्टरपंथी भड़क गए और टीचर को सजा देने की माँग लेकर अभियान चला दिया। बाद में बहुत बात बढ़ने पर टीचर ने बच्ची के घर जाकर सारी बात बताई और मामला शांत हुआ।

जहाँ मौजूद भी नहीं छात्रा, वहाँ को लेकर बोला झूठ

इसी तरह 29 मार्च के आसपास प्रकाश में आए एक मामले में भी ये सामने आया था कि चित्तगौंग के मीरसराय स्थित स्कूल में एक बच्ची ने पीटी पीरियड के दौरान टीचर पर हिजाब हटवाने का आरोप लगाया था। बाद में बात इतनी बढ़ गई थी कि जोरारगंज बौद्ध हाई स्कूल के हेडमास्टर तुषार कांत बरुआ को स्कूल समिति के निर्देशों के चलते स्थाई त्याग पत्र देना पड़ा था। हालाँकि जब जाँच हुई तो सामने आया कि बच्ची ने जिस जगह को लेकर दावा किया था कि वहाँ उससे हिजाब हटवाया गया, वो वहाँ थी ही नहीं।

हिजाब के अपमान का झूठा इल्जाम

इसके बाद नौगाँव में भी एक हिंदू महिला शिक्षिका पर कुछ छात्रों ने इल्जाम लगा दिया था कि उस टीचर ने उनके हिजाब का अपमान किया जबकि हकीकत बात ये थी कि हिंदू छात्रा सहित कुछ विद्यार्थियों को अनुशासनहीनता के कारण डाँट लगाई गई थी। घटना दौल बर्बाकपुर हाई स्कूल की थी। 5-6 अप्रैल को वहाँ 100-150 लोगों ने हमला किया था। स्कूल में तोड़फोड़ की घटना भी सामने आई थी

हिजाब के विरुद्ध आवाज उठाने पर हत्या

बांग्लादेश में हिजाब के नाम पर टीचर की हत्या तक के केस देखने को मिलचुके हैं। बांग्लादेश के चित्तौंग में साल 2015 में नर्सिंग पढ़ाने वाली एक हिंदू महिला टीचर अंजलि देबी चौधरी को निर्मम ढंग से मौत के घाट उतारा गया था। उनकी गलती इतनी थी कि उन्होंने नर्सिंग छात्रों के लिए हिजाब कंपल्सरी किए जाने पर आवाज उठाई थी। उनकी इसी बेबाकी के कारण जमात-ए-इस्लामी बांग्लादेशी की छात्र विंग ने उन्हें मौत के घाट उतार दिया था। उनकी लाश उनके पति को खून से लथपथ हाल में मिली थे।

फ्रांस में कानून होने के बावजूद टीचर को कट्टरपंथियों की धमकी

अगला मामला फ्रांस का है। वहाँ पर कानून होने के बावजूद कट्टरपंथी अपनी हरकतों से बाज नहीं आते। 22 जून 2022 की खबर के अनुसार पेरिस के चार्लमैग्ने हाई स्कूल में एग्जाम के समय कुछ छात्राएँ मुँह ढक कर पेपर देने जा रही थीं कि तभी एक शिक्षक ने उन्हें रोका और नकाब हटाने को कहा। ये छोटी सी बात धीरे-धीरे इतनी फैली की टीचर को कई जगह से जान से मारने की धमकियाँ आने लगीं और जब छात्रा से सवाल पूछे गए तो उसने कहा कि वो टीचर की बात मान लेती लेकिन उनके टीचर उनके ऊपर गुस्सा करने लगे थे। इसे देख उसने कोई बात नहीं सुनी।

कैथॉलिक स्कूल पर मुस्लिम समुदाय का हमला

28 अक्टूबर 2020 की रिपोर्ट के अनुसार, पूर्वी मालवी में कैथोलिक प्राइमरी स्कूल के प्रिंसिपल ने कुछ महिलाओं को हिजाब पहनने से मना कर दिया था। इसके बाद स्थानीय मुस्लिमों ने इस निर्णय पर आपत्ति जताई थी और देखते ही देखते Mpiri कैथॉलिक स्कूल के उस टीचर के ऑफिस को आग के हवाले कर दिया गया था । घटना मचिंगा इलाके थी जहाँ पूरे मालवी के सबसे मुस्लिम समुदाय के लोग रहते थे।

वीडियो जारी कर शिक्षकों पर लगाए गए इल्जाम

भारत की राजधानी दिल्ली में भी इस वर्ष हिजाब विवाद के कारण शिक्षकों को बदनाम होते देखा गया था। सरकारी स्कूलों के नियम जानने के बावजूद दिल्ली के मुस्तफाबाद स्कूल में कुछ लड़कियों ने कर्नाटक हिजाब विवाद के बीच हिजाब पहनने की बात कही और जब स्कूल ने मना किया तो वीडियो जारी कर आरोप लगाया कि शिक्षकों ने उसे अपमानित कर दिया है। दिल्ली में ये हाल तब देखने को मिला जब दशकों से ये नियम रहे हैं कि अगर कोई लड़की हेड स्कार्फ पहनकर आती हैं तो स्कूल परिसर में प्रवेश के बाद उसे हटाना ही होगा।

जब कट्टरपंथी छात्रों ने शिक्षिका को बुर्के के लिए नौकरी से निकलवाया

बता दें कि शिक्षकों को केवल इसलिए निशाना नहीं बनाया जाता क्योंकि वह हिजाब पहनने से रोकते हैं बल्कि कट्टरपंथी उन्हें इसलिए भी निशाना बनाते हैं क्योंकि कई बार वो हिजाब पहनने की बात नहीं मानते। घटना साल 2010 की है। कोलकाता के आलिया यूनिवर्सिटी में 8 टीचरों पर बुर्का पहनने के लिए दबाव बनाया गया था। इनमें 7 महिला टीचरें थीं जिन्होंने नौकरी के लिए ये शर्त मान ली थी, लेकिन इनमें एक ने इसका विरोध किया था। उसका कहना था कि अगर बुर्का पहनना होगा तो वो मर्जी से पहनेगी जबरदस्ती से नहीं। लेकिन कट्टरपंथी दबाव के चलते इस 1 महिला टीचर को उस कॉलेज परिसर से ही बाहर कर दिया गया था।

कट्टरपंथी हिंसा अलग-अलग

गौरतलब है कि इस खबर में शिक्षकों पर ‘हिजाब के कारण’ हुए कुल 10 मामलों का जिक्र आपको पढ़ने को मिलेगा। लेकिन, ध्यान रहे ये सूची यही नहीं खत्म होती और न ही ऐसी हिंसा सिर्फ ‘हिजाब’ के बहाने अंजाम दी जाती है। कट्टरपंथियों के लिए मुद्दे अलग-अलग होते हैं और वो हर बार सिर्फ मजहब की आड़ में खुद को जस्टिफाई करते हैं। पिछले दिनों हमने देखा था कि कैसे बांग्लादेश में कहीं एक हिंदू छात्र का समर्थन करने पर एक हिंदू टीचर के गले में जूते की माला डाली गई थी। वहीं फ्रांस में एक छोटे से झूठ की वजह से टीचर को फ्रांस में मौत के घाट उतारा गया था।

BJYM नेता की हत्या का विरोध कर रहे लोगों को पुलिस ने दौड़ा-दौड़ा कर पीटा, ताबड़तोड़ बरसाई लाठियाँ: कई वीडियो आए सामने

कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ जिले के बेल्लारे में भाजपा युवा मोर्चा के कार्यकर्ता प्रवीण नेट्टारू की कुल्हाड़ी से काटकर हत्या को लेकर भारी तनाव है। बता दें कि 26 जुलाई की रात 32 वर्षीय नेत्तारू की हत्या कर दी गई थी। उसके बाद से ही राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। पुलिस मामले की जाँच कर रही है। वहीं सरकार से नाराज प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर उतरकर अपने गुस्से का इजहार किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने दक्षिण कन्नड़ सांसद नलिनकुमार कतील की कार को घेर लिया। जिसके बाद प्रदर्शनकारियों पर पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया।

ANI ने पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज का वीडियो साझा किया है। वीडियो में पुलिस प्रदर्शनकारियों पर ताबड़तोड़ लाठी चलाती दिख रही हैं।

बता दें कि इस घटना के खिलाफ बीजेपी कार्यकर्ताओं ने बुधवार 27 जुलाई को कुछ हिस्सों में बंद का आह्वान किया था लेकिन पुत्तूर प्रशासन ने उन इलाकों में 28 जुलाई की मध्यरात्रि तक कर्फ्यू लगा दिया है। वहीं जब नेत्तारू का शव उनके गाँव लाया गया, तो इलाके में तनाव बढ़ गया है। इस बीच बेल्लारी में प्रदर्शन कर रहे बीजेपी युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं पर पुलिस ने लाठी चार्ज किया और उन्हें खदेड़ दिया।

गौरतलब है कि मंगलवार रात 9 बजे बीजेपी युवा मोर्चा के कार्यकर्ता प्रवीण नेट्टारू की हत्या कर दी गई थी। बताया जा रहा है कि बाइक पर सवार कुछ लोगों ने उन पर तलवार और कुल्हाड़ी से हमला किया। घटना के वक्त नेट्टारू देर शाम अपने घर लौट रहे थे, तभी उन पर हमला किया गया। हमले के बाद हमलावर फरार हो गए।

हालाँकि, प्रवीण नेट्टारू की हत्या की वजह फिलहाल साफ नहीं हो पाई है। लेकिन इस मर्डर केस को लेकर कई तरह की खबरें सामने आ रही हैं। मनोरमा ऑनलाइन की एक रिपोर्ट के अनुसार, प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि हमलावर केरल के रजिस्टर्ड नंबर वाली एक बाइक पर आए थे। बता दें कि घटनास्थल केरल सीमा के बेहद करीब है।

बता दें कि प्रवीण नेट्टारू बेल्लारी में एक पोल्ट्री की दुकान चलाते थे। रात में जब दुकान बंद करके घर लौट रहे थे, तभी पीछे से बाइक पर आए तीन हमलावरों ने उनपर कुल्हाड़ी से हमला कर दिया। इस मामले पर मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने भी दुख जताया है और आश्वासन दिया है कि इस घटना को अंजाम देने वाले हत्यारों को जल्द गिरफ्तार किया जाएगा। साथ ही उन्हें कानून के तहत सख्त सजा दी जाएगी।

शुरूआती जाँच के आधार पर यह मामला भी नूपुर शर्मा के समर्थन से जुड़ रहा है। जिस तरह से राजस्थान के उदयपुर में कन्हैयालाल की हत्या की गई, ठीक उसी तरह से दक्षिण कन्नड़ जिले में भारतीय जनता युवा मोर्चा के नेता प्रवीण नेत्तारू की हत्या की गई है। कुल्हाड़ी और तलवार से काटकर हत्या की गई। इस घटना के बाद से कर्नाटक में भारी बवाल मचा हुआ है। अब इस मामले में दावा किया जा रहा है कि प्रवीण नेट्टारू की हत्या केवल इसलिए की गई, क्योंकि कथित तौर पर उन्होंने नूपुर शर्मा का समर्थन किया था।

वहीं इस मामले में केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता प्रह्लाद जोशी ने कहा, “प्रारंभिक रिपोर्ट और कुछ मीडिया रिपोर्ट एसडीपीआई और पीएफआई लिंक की तरफ इशारा करती हैं। उन्हें केरल में बढ़ावा दिया जा रहा है। कर्नाटक में कॉन्ग्रेस उन्हें प्रोत्साहित कर रही है। कर्नाटक में हमारी सरकार कार्रवाई करेगी और दोषियों को सजा देगी।”

काशी कॉरिडोर का कमाल, बाबा विश्वनाथ के दर्शन को इस सावन मात्र 13 दिनों में पहुँचे 27 लाख श्रद्धालु: भक्तों से अर्थव्यवस्था ने भी पकड़ी रफ़्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) की महत्वाकांक्षी श्रीकाशी विश्वनाथ कॉरिडोर के निर्माण के बाद बनारस की भव्यता बढ़ गई है। इस वर्ष सावन के महीने में बाबा भोलेनाथ का दर्शन करने आने वाले श्रद्धालुओं ने भी रिकॉर्ड तोड़ दिया है।

सावन महीने के 13 दिनों में बाबा विश्वनाथ का दर्शन करने 27 लाख से ज्यादा श्रद्धालु आ चुके हैं। सावन के पहले सोमवार को 5 लाख से ज्यादा भक्त आए, वहीं, दूसरे सोमवार को 6 लाख से ज्यादा लोगों ने बाबा विश्वनाथ का दर्शन किया था।

दैनिक भास्कर के अनुसार, आजकल सामान्य दिनों में भी औसतन डेढ़ से 3 लाख श्रद्धालु दर्शन-पूजन के लिए बाबा विश्वनाथ के दरबार में आ रहे हैं। मंदिर प्रशासन का कहना है कि सावन में आज तक इतने श्रद्धालु कभी नहीं आए। यह अपने आप में एक रिकॉर्ड है।

श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर के CEO सुनील वर्मा के अनुसार, “काशी के अधिपति के नव-भव्य धाम को अब हर कोई देखना चाहता है। 50,000 वर्ग मीटर क्षेत्रफल से ज्यादा वाले विश्वनाथ धाम में इस बार दर्शन के लिए श्रद्धालुओं को धक्का-मुक्की भी नहीं करनी पड़ रही है।”

वर्मा ने बताया कि श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिर में हर तरह की व्यवस्था की गई है। गर्मी से बचाने के लिए कूलर-पंखे लगाए गए हैं। उन्हें से धूप से बचाने के लिए व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही पीने का पानी और साफ-सफाई का विशेष प्रबंध किया गया है। इसके अलावा, श्रद्धालुओं की मदद के लिए वॉलेंटियर्स भी तैनात किए गए हैं।

बता दें कि प्रधानमंत्री मोदी ने काशी विश्वनाथ कॉरिडोर को 13 दिसंबर 2021 को समर्पित किया था। इस दौरान देश की विभिन्न नदियों से लाए गए जल को गंगाजल में मिलाकर लगभग 20 मिनट तक विधि-विधान से पूजा की गई थी।

काशी कॉरिडोर के विकास के लिए मंदिर के आसपास के मकानों-दुकानों का अधिग्रहण किया था और इस इलाके को नई तरीके से विकसित कर भव्यता प्रदान की थी। जीवनदायिनी गंगा तट के ‘ललिता घाट’ से जल लेकर विश्वनाथ मंदिर तक सीधा प्रवेश मार्ग है।

ललिता घाट और विश्वनाथ मंदिर परिसर के बीच वाले कॉरिडोर के हिस्से को ‘मंदिर चौक’ का नाम दिया गया है। यह कॉरिडोर 5.2 लाख वर्ग फीट में फैला हुआ है। इसमें 33,075 वर्ग फीट में काशी विश्वनाथ मंदिर का परिसर है। इस कॉरिडोर में एक साथ 02 लाख लोग जमा हो सकते हैं।