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संत की आत्मदाह कोशिश के बाद जागी राजस्थान की कॉन्ग्रेस सरकार: आदिबद्री और कनकांचल पर्वत घोषित होगा वनक्षेत्र, 550 दिन पुराना आंदोलन खत्म

राजस्थान (Rajasthan) में भरतपुर जिले के डीग क्षेत्र में आदिबद्री और कनकांचल क्षेत्र में अवैध खनन (Illegal Mining) को लेकर 550 दिनों से जारी साधु-संतों का आंदोलन खत्म हो गया है। राज्य के मंत्री ने विश्वेंद्र नाथ सिंह के आग्रह पर संतों ने अपना आंदोलन समाप्त किया।

बुधवार (20 जुलाई 2022) को 65 वर्षीय बाबा विजयदास द्वारा आत्मदाह की कोशिश करने के बाद राज्य सरकार के कैबिनेट मंत्री विश्वेंद्र नाथ सिंह ने आंदोलनकारी संतों से जाकर बात की। विश्वेंद्र नाथ सिंह ने आदिबद्री और कनकांचल को लेकर साधु-संतों की माँगों को 15 दिनों में पूरा करने का आश्वासन दिया।

रिपोर्ट के मुताबिक, 10 दिन पहले बाबा हरिबोलदास ने आदिबद्री और कनकांचल पर्वत को खनन मुक्त कराने की माँग को लेकर 19 जुलाई को मुख्यमंत्री आवास के सामने आत्मदाह की चेतावनी दी थी। बाद में प्रशासन ने आंदोलनकारी संतों से बात कर उनसे समय की माँग की थी। इसके बाद इसे टाल दिया गया था।

हालाँकि, 19 जुलाई को ही पसोपा गाँव में बाबा नारायणदास मोबाइल टॉवर पर चढ़ गए। इसके बाद वहाँ बड़ी संख्या में साधु-संत जुटने लगे। उसके अगले दिन यानी 20 जुलाई को बाबा विजयदास ने केरोसीन डालकर आत्मदाह की कोशिश की। संत के इस कदम ने प्रशासन को हिलाकर रख दिया।

घटना की गंभीरता को देखते हुए जिले के कलेक्टर आलोक रंजन, आईजी गौरव श्रीवास्तव, एसपी श्याम सिंह, जोनल कमिश्नर सांवरमल वर्मा समेत कई अन्य उच्चाधिकारी मौके पर पहुँचे और साधु-संतों से मान मनौवल कर सबसे पहले बाबा नारायणदास को मोबाइल टॉवर से नीचे उतरवाया। बाद में कैबिनेट मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने पसोपा गाँव जाकर प्रदर्शनकारी साधु संतों से बात की।

इस बीच बाबा विजयदास को लेकर कलेक्टर आलोक रंजन ने अपडेट दिया है। उन्होंने कहा, “डीग में साधु विजयदास (जिन्होंने खुद को आग लगा ली) की हालत अब स्थिर है। साधुओं ने अपना विरोध (पत्थर खनन पर) समाप्त कर दिया है। राज्य सरकार अगले 15 दिनों में इसे वन क्षेत्र घोषित करने के लिए एक अधिसूचना जारी करेगी। यहाँ पर पुरानी खदानें स्थित हैं। इन खदानों को स्थानांतरित किया जाएगा और लगभग 2,500 लोग जो बेरोजगार होंगे, उन्हें कहीं और रोजगार दिया जाएगा। राज्य सरकार इसे (पत्थर खनन क्षेत्र) एक धार्मिक पर्यटन स्थल बनाना चाहती है।”

गौरतलब है कि भरतपुर जिले के डीग क्षेत्र में आदिबद्री और कनकांचल में अवैध खनन के विरोध में साधु-संतों का आंदोलन करीब 550 दिनों से चल रहा था। अवैध खनन के विरोध में यह आंदोलन 16 जनवरी 2021 से शुरू हुआ था। 6 अप्रैल 2021 को साधु-संतों का एक प्रतिनिधिमंडल सीएम अशोक गहलोत से भी मिला था। हालाँकि, उसका कोई फायदा नहीं हुआ था। बहरहाल, संत के आत्मदाह की कोशिश के बाद अब प्रदेश सरकार मान गई है।

अब झारखंड के गुमला में ट्रक से पुलिसकर्मियों को रौंदने की कोशिश, 41 गोवंश लदे थे: राँची में पशु तस्करों ने ही महिला SI को कुचला था

राँची में महिला दरोगा संध्या टोपनो को वाहन से कुचलकर मार डालने के बाद अब झारखंड के गुमला में भी पशु तस्करों ने पुलिसकर्मियों को कुचलने की कोशिश की। हालाँकि, पुलिसकर्मी तत्परता दिखाते हुए मौके से पीछे हट गए, जिसकी वजह से वह बाल-बाल बच गए। लेकिन एएसआई प्रसिद्ध तिवारी के पैर में चोट आ गई।

जानकारी के मुताबिक गुमला की रायडीह थाना पुलिस को सूचना मिली थी कि तस्कर ट्रक से गोवंशीय पशु को ले जा रहे हैं। शंख मोड़ माझाटोली में पुलिस टीम तैनात हो गई। एक मालवाहक ट्रक और बोलेरो को रोकने की कोशिश की गई। लेकिन इन गाड़ियों ने रुकने के बजाय पुलिसकर्मियों को रौंदने का प्रयास किया और फिर आगे निकल गए। पुलिस टीम ने किसी तरह पीछे हटकर अपनी जान बचाई।

इसके बाद तत्काल वायरलेस पर अलर्ट जारी किया गया और पुलिस टीम तस्करों का पीछा करने लगी। भागने के प्रयास में बोलेरो दुर्घटनाग्रस्त हो गई, लेकिन चालक भाग निकला। वहीं ट्रक को रायडीह में थाना गेट के पास बैरियर लगाकर रोकने का प्रयास किया गया। यहाँ भी ट्रक ने पुलिसकर्मियों को रौंदने की कोशिश की और बैरियर तोड़ आगे बढ़ गया। पुलिस टीम ने यहाँ भी किसी तरह अपनी जान बचाई। जान बचाने में एएसआई प्रसिद्ध तिवारी के पैर के एक अँगूठे में चोट आई है। सिलम बाईपास सड़क के पास चालक ट्रक खड़ा कर फरार हो गया।

पुलिस ने दोनों वाहनों को जब्त कर लिया है। इन पर लदे 41 गोवंशीय पशुओं को पुलिस ने ग्रामीणों को बाँट दिया। इस संबंध में रायडीह थाना में मवेशी तस्कर मोहम्मद दानिश कुरैशी, चालक मोहम्मद मोजाहिद अंसारी और वाहन मालिकों के विरुद्ध झारखंड पशु क्रूरता अधिनियम समेत अन्य धाराओं के तहत FIR दर्ज की गई है। जल्द ही आरोपित तस्करों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

गौरतलब है कि इससे पहले राँची में महिला दरोगा संध्या टोपनो को वाहन से कुचलकर मार डालने का मामला सामने आया था। उन्होंने देर रात जानवरों की अवैध तस्करी की सूचना मिलने पर एक वाहन को चेकिंग के लिए रोका। लेकिन तस्करों ने उनकी सुनने की बजाय उन पर पूरी वैन चढ़ा दी। घटना की सूचना मिलते ही मौके पर थाना प्रभारी समेत कई पुलिसकर्मी पहुँचे। उन्होंने संध्या को रिम्स अस्पताल में भर्ती कराया। मगर बुरी तरह कुचले जाने के कारण उन्होंने दम तोड़ दिया। संध्या टोपनो 2018 बैच की दरोगा थीं और वर्तमान में तुपुदाना ओपी के प्रभारी पद पर तैनात थीं।

‘हिंसक हिंदू राष्ट्रवाद को बढ़ावा देती है RRR’: राजामौली की फिल्म को ब्रिटिश प्रोफेसर ने बताया ‘झूठी कहानी’, लोगों ने याद दिलाए अंग्रेजों के अत्याचार

​सितारों से सजी एसएस राजामौली (SS Rajamouli) की फिल्म ‘आरआरआर’ (RRR) ने सिनेमाघरों में जबरदस्त कारोबार किया। इसके बाद फिल्म को हिंदी में ​नेटफ्लिक्स (Netflix) पर स्ट्रीम कर दिया गया। राम चरण तेजा और जूनियर एनटीआर की फिल्म ने ओटीटी पर आते ही यहाँ पर भी धमाल मचाया। आरआरआर को लेकर विदेशी दर्शकों में क्रेज के चलते यह दुनियाभर में सबसे अधिक देखी जाने वाली भारतीय फिल्म बन गई है। नेटफ्लिक्स ने 22 जून को सोशल मीडिया पर खुद इसकी आधिकारिक घोषणा की है।

हालाँकि, ब्रिटिश मूल के इतिहासकार रॉबर्ट टॉम्ब्स दुनिया भर में ‘आरआरआर’ की सफलता से खुश नहीं हैं। कैम्ब्रिज यूनिवर्सिट में फ्रांसीसी इतिहास के प्रोफेसर रॉबर्ट टॉम्ब्स ने 19 जुलाई को ‘द स्पेक्टेटर’ में लेख लिखकर इस फिल्म की आलोचना की। उन्होंने फिल्म में ब्रिटिश उपनिवेशवाद की भयावहता और अंग्रेजों के क्रूर चित्रण को सिरे से नकार दिया। उन्होंने फिल्म में दिखाए गए दृश्यों को मूर्खतापूर्ण और अज्ञानता से परिपूर्ण बताया है।

‘द स्पेक्टेटर‘ में रॉबर्ट टॉम्ब्स ने आरआरआर का रिव्यू करते हुए लिखा, “हमने पिछली कुछ शताब्दियों में दुनिया भर में अहम भूमिका निभाई है, जिससे हमने दोस्तों के साथ-साथ काफी दुश्मन भी कमाए हैं। कई देशों ने खुद की झूठी वीरता की कहानियाँ गढ़ते हुए हमें खलनायक की भूमिका में दिखाया है।”

रॉबर्ट टॉम्ब ने नेटफ्लिक्स को कहा कि आपको इस फिल्म को बढ़ावा देने पर शर्म आनी चाहिए। आरआरआर हिंसक हिंदू राष्ट्रवाद को बढ़ावा देता है, जो भारतीय संस्कृति और राजनीति पर हावी हो रहा है, जिसे मौजूदा सरकार ने हवा दी है। उन्होंने कहा, “फिल्म में ब्रिटिश अधिकारियों और सैनिकों को पूरे देश में घूमते और अपराध करते दिखाया गया, जो कि झूठ और सत्य से परे है। आरआरआर इतिहास के बारे में कुछ नहीं बताती, वो केवल सिंथेटिक भावनाओं को भड़काने की कोशिश करती है।”

सुपरहिट फिल्म ‘RRR’ को हिंसक ‘हिंदू राष्ट्रवादी’ फिल्म बताने पर सोशल मीडिया पर भारतीयों ने ब्रिटिश प्रोफेसर की क्लास लगाई है। लक्ष्मण सागर नाम के यूजर ने ‘द स्पेक्टेटर’ और रॉबर्ट टॉम्ब्स को आइना दिखाते हुए ट्विटर पर एक पोस्ट किया है, जिसमें ब्रिटिश राज के दौरान भारत की क्या दुर्दशा थी उसका जिक्र है। वह लिखते हैं, “इतिहास से जुड़ी कुछ चीजें शेयर कर रहा हूँ, जो आपके शासनकाल की सच्चाई को बयाँ कर रहा है। इसका सामना करें।”

एक यूजर ने कहा कि हमारे देश के लोगों को ब्रिटिश राज में कैसे सताया गया यह किसी से छिपा नहीं है। ब्रिटिश शासन में क्या हुआ अगर सब कुछ दिखा फिल्म में, तो तुम शर्म से गड़ जाओगे।

लेखिका सावित्री मुमुक्षु ने ब्रिटिश शासन में होने वाले अत्याचारों को लेकर सिलसिलेवार कई ट्वीट कर रॉबर्ट टॉम्ब्स की धज्जियाँ उड़ा दी। उन्होंने लिखा, “भारत के खिलाफ ब्रिटिश साम्राज्य के अपराधों की सूची बहुत लंबी है। इसमें गुलामी, जातिवाद, धार्मिक असहिष्णुता, लूट और बहुत कुछ शामिल है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि अंग्रेजों ने हजारों भारतीय महिलाओं को अपने सैनिकों के लिए वेश्यावृत्ति की आड़ में सेक्स स्लेव बनने के लिए मजबूर किया?”

Periodistán en India ट्विटर हैंडल ने भी लगातार कई ट्वीट कर 1876 में ब्रिटिश राज में भारत के लोगों के साथ कैसा व्यवहार किया जाता था, उसे सबके सामने लाया। इसमें बताया गया है कि कैसे लोग गरीबी, भुखमरी से परेशान थे। अंग्रेज उनसे उगाही करते थे।

बता दें कि एसएस राजामौली की फिल्म ‘आरआरआर’ की तारीफ विदेशी दर्शक ही नहीं, हॉलीवुड इंडस्ट्री से जुड़े कई लोग भी कर चुके हैं। ‘ग्रेमलिन्स’ फिल्म डायरेक्टर जो डांटे ने फिल्म की तारीफ करते हुए बीते दिनों कहा कि यह फिल्म न केवल बढ़िया विजुअल्स दिखाती है, बल्कि ब्रिटिश उपनिवेश की भयावहता की झलक भी पेश करती है, जिसे दर्शकों ने पहले कभी नहीं देखा होगा। डांटे ने लिखा, “आरआरआर बॉलीवुड की सबसे अच्छी फिल्म है, जिसे मैंने देखा है। इसमें ब्रिटिश उपनिवेशवाद की भयावहता का क्रूर चित्रण दिखाया गया है, अगर मैं इसे नहीं देखता तो ये सब मिस कर देता।”

गौरतलब है कि 25 मार्च 2022 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई RRR फिल्म में राम चरण (Ram Charan) और जूनियर एनटीआर (Jr NTR) ने प्रमुख भूमिका निभाई है। कहा जाता है कि यह फिल्म रियल लाइफ के दो हीरो प्रसिद्ध क्रांतिकारी अल्लूरी सीताराम राजू और कोमाराम भीम की जिंदगी पर आधारितपर आधारित, जिन्होंने ब्रिटिश हुकुमत के दौरान अंग्रेजों के नाको-चने चबवा दिए थे।

खुद के नाम इस्लामी, पिता के हिंदू नाम: अयोध्या में सिंदूर बेच रहे लड़कों की क्या है असली पहचान, Video से उठे सवाल

उत्तर प्रदेश (UP) के अयोध्या (Ayodhya) जिले में हनुमान गढ़ी इलाके का एक वीडियो वायरल हो रहा है। इस वीडियो में सिन्दूर बेचने वाला एक व्यक्ति अपना नाम सलमान और पिता का नाम देशराज बता रहा है। युवक के साथ कुछ अन्य लोग भी हैं, जो अपना पता कभी कानपुर तो कभी बाराबंकी बता रहे हैं। वीडियो में दिखाई दे रहे संदिग्ध खुद को सिन्दूर बेचने वाला बता रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वायरल वीडियो रामकोट इलाके का है। यह वही इलाका है, जहाँ श्रीराम मंदिर बन रहा है। जिस स्थान पर वीडियो बनाया गया है, वह अतिसुरक्षित येलो ज़ोन में आता है। यहाँ पर भारी संख्या में तैनात पुलिस का सख्त पहरा रहता है। वीडियो स्थानीय लोगों द्वारा बनाया गया है।

संदिग्ध युवक मुस्लिम समुदाय से बताए जा रहे हैं। कहा जाता रहा है कि इनकी संख्या दर्जनों में है, जो इलाके में इस तरह का काम कर रहे हैं। सभी युवक अपना असली नाम-पता बताने में कतरा रहे थे। जिस जगह ये सभी संदिग्ध सिन्दूर बेचते दिखाई दिए।

वीडियो में एक युवक ने अपना नाम मुस्लिम और पिता का नाम हिंदू बताया। उसने खुद को सलमान बताते हुए कहा कि उसके पिता का नाम देशराज है। उसने अपना घर यूपी के बाराबंकी जिले के मसौली थाना क्षेत्र के अंतर्गत जमालपुर गाँव बताया।

इस इलाके में स्थानीय निवासियों को भी आने-जाने के लिए सुरक्षा जाँच से गुजरना पड़ता है। उस क्षेत्र में वाहनों का आना प्रतिबंधित है। वहीं, ये संदिग्ध लोग दिन भर सिंदूर आदि बेचते हैं और रात में भी इसी अतिसुरक्षित इलाके में रहते हैं। लोगों का आरोप है कि इन संदिग्धों की मौजूदगी से पुलिस व खुफिया विभाग भी अनजान है।

इस पूरे घटनाक्रम को हनुमान गढ़ी के महंत राजूदास ने अयोध्या की सुरक्षा से जोड़ा है। उन्होंने कहा, “मैं प्रशासन से ऐसी चीजों की जाँच की अपील करता हूँ। ऐसे लोग न आएँ। व्यापार करना अच्छी बात है। मैं किसी पंथ या मजहब के खिलाफ नहीं बोल रहा, लेकिन ये वो कौम है जिस पर विश्वास करने लायक नहीं है। इस रामजन्मभूमि परिसर में कई बार बम धमाके हो चुके हैं। यहाँ बम भी बरामद हुए हैं और कई आतंकी भी पकड़े जा चुके हैं।”

महंत राजूदास ने आगे कहा, “मैं अभी वीडियो में सुन रहा था, जिसमें वो 5 लोग हैं और उनके पास ID प्रूफ नहीं है। यहाँ का प्रशासन इतना सख्त है कि हम लोगों को भी आने-जाने के लिए रूकना पड़ता है, जबकि हमारे पास PASS भी होता है। वहीं, ये लोग अंदर घूम रहे हैं और तमाम चीजें बेच रहे हैं।”

ISI जासूस नुसरत मिर्जा का मनमोहन सिंह से भी मिलने का दावा: बोला- मुस्लिम होने के कारण टारगेट पर हामिद अंसारी, भारत पहुँचते ही पाकिस्तान ने दिया था सिम

पाकिस्तानी पत्रकार नुसरत मिर्जा (Nusrat Mirza) ने एक नया दावा किया है। इसके मुताबिक वह भारत यात्रा के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मिला था। साथ ही पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी को लेकर किए उसके दावों में भी नरमी आ गई है। अब उसका कहना है कि अंसारी से उसकी ‘निजी तौर’ पर कोई मुलाकात नहीं हुई थी।

दैनिक भास्कर ने मिर्जा का इंटरव्यू किया है। इसमें वह अंसारी का बचाव कर रहा है। उसने कहा है कि अंसारी मुस्लिम हैं। कॉन्ग्रेसी हैं। यही कारण है कि बीजेपी उन्हें निशाना बना रही है। इतना ही नहीं अब उसका दावा है कि उसने आईएसआई को जो दस्तावेज दिए थे, उसका भारत से कोई संबंध नहीं था।

उसने इस इंटरव्यू में कहा है, “मैं तीन बातें साफ करता हूँ। न ही मैं व्यक्तिगत तौर पर हामिद अंसारी से मिला। न मेरी उनसे किसी तरह की कोई बात हुई। जब मैं आया था तब मेरी उनसे सिर्फ दुआ-सलाम हुई थी। उस दौरे पर मनमोहन सिंह जी से जरूर मेरी मुलाकात हुई थी। उन्होंने मेरी खैरियत भी पूछी थी। हामिद अंसारी से तो कोई बात भी नहीं हुई थी, न उन्होंने मेरा हालचाल पूछा था। वे सीधे मंच पर चले गए थे। मुझे इस बात का बुरा भी लगा था।”

मिर्जा ने यह भी बताया है कि भारत आते ही उसे पाकिस्तान के दूतावास से एक सिम कार्ड मिला था। उसे यह भी बताया गया था कि उस पर नजर रखी जा रही है। मिर्जा ने दैनिक भास्कर की पत्रकार पूनम कौशल से कहा, “मैंने कहा कि रखने दो नजर। मैं दोस्त बनाने आया हूँ। दोस्त बनाकर चला जाऊँगा। जब मुझे भारत का वीजा दिया गया था, तब उन्हें भी पता था कि मैं कौन हूँ और मुझे भी पता था मुझ पर नजर रखी जा सकती है।”

नुसरत मिर्जा ने पहले क्या कहा था

नुसरत मिर्जा ने YouTuber शकील चौधरी को 10 जुलाई 2022 को एक इंटरव्यू दिया था। इसमें दावा किया था कि उसने 2005 से 2011 के बीच भारत दौरे के दौरान पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) के लिए कई जानकारियाँ एकत्र की थीं। उसे पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी और ‘मिल्‍ली गैजेट’ अखबार के मालिक जफरुल इस्लाम खान ने भारत में आमंत्रित किया था।

उसने कहा था, “2010 में मुझे पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने आतंकवाद पर हुए एक सेमिनार में आमंत्रित किया था। हालाँकि मैं मानता हूँ कि हम भी बहुत बड़े एक्सपर्ट नहीं हैं, लेकिन हम मुगल हैं। हमने सदियों तक भारत पर राज किया है। मैं उनकी संस्कृति को समझता हूँ। हम वहाँ के हालात से अच्छी तरह वाकिफ हैं। हम उनकी कमजोरियों के बारे में भी जानते हैं, लेकिन मसला ये है कि मैंने भारत के बारे में जो भी जानकारी इकट्ठा की थीं, उसका इस्तेमाल पाकिस्तान में अच्छे नेतृत्व की कमी के कारण नहीं हो रहा है। पाकिस्तान में ऐसा कोई शख्स नहीं है, जो मेरे तर्जुबे से इत्‍तेफाक रखे।”

मिर्जा ने ये भी खुलासा किया था कि तत्कालीन केंद्रीय विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने उसे वीजा दिलवाया था। इस खुलासे के बाद अंसारी ने मिर्जा को जानने से इनकार किया था। इसके बाद ऑल इंडिया बार एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. आदिश अग्रवाल ने एक विस्तृत बयान जारी कर अंसारी पर जानकारी छिपाने और झूठ बोलने का आरोप लगाया था। आतंकवाद के मसले पर जामा मस्जिद यूनाइटेड फोरम द्वारा 27 अक्टूबर 2009 को दिल्ली के ओबेरॉय होटल में आयोजित एक सम्मेलन की तस्वीर भी शेयर की थी। इसमें अंसारी और मिर्जा एक साथ मंच साझा करते दिखे थे। अग्रवाल ने यह भी बताया था कि अंसारी के कार्यालय से मिर्जा को आमंत्रित करने का उनसे आग्रह किया गया था। इसे ठुकराए जाने के बाद तत्कालीन उपराष्ट्रपति नाराज भी हो गए थे।

दिल्ली सरकार की हेल्थ नहीं दुरुस्त: CM केजरीवाल और उनके मंत्रियों ने परिवार संग इलाज पर सरकारी खजाने से खर्चे ₹76 लाख, RTI से खुलासा

आम आदमी पार्टी (Aam Aadami Party) के गठन से पहले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल (Delhi CM Arvind Kejriwal) ने बड़े-बड़े दावे किये थे। उन्होंने कहा था कि वे जनता के सेवक हैं और उनकी पार्टी VIP कल्चर को बढ़ावा नहीं देगी। हालाँकि, अब उनकी कथनी और करनी में बहुत बड़ा अंतर दिख रहा है। 

11 जून 2022 को लेखक द्वारा एक ऑनलाइन आरटीआई आवेदन दिल्ली सरकार के जनरल एडमिनिस्ट्रेशन डिपार्टमेंट को दाखिल की गई थी। इसमें वर्ष 2015 से लेकर वर्ष 2022 के मध्य मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल एवं उनके मंत्रीमंडल 6 अन्य मंत्रियों के इलाज पर खर्च किए गए सरकारी धन की जानकारी माँगी गई थी।

RTI में मिली जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल एवं उनके मंत्रीमंडल ने अपने और अपने परिवार के इलाज पर वर्ष 2015-22 के मध्य 76,39,938 रुपए खर्च कर दिए। अरविन्द केजरीवाल एवं उनके परिवार के इलाज पर इस दौरान 15,78,102 रुपए खर्च किए गए।

सीएम केजरीवाल और उनके परिवार पर वर्ष 2015-16 में 2,91,931 रुपए, वर्ष 2016-17 में 4,37,848 रुपए, वर्ष 2017-18 में 4,12,573 रुपए खर्च किए गए, जबकि वर्ष 2018-19 में कोई खर्च नहीं हुआ। वहीं, वर्ष 2019-20 में 3,750 रुपए, वर्ष 2020-21 में शून्य रुपए और वर्ष 2021-22 में 4,32,000 रुपए खर्च किए गए।

इन आँकड़ों में गौर करने वाली बात यह है कि क्या मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल के पास 3,750 रुपए भी खुद की जेब से खर्च करने के लिए नहीं थे, जो इसका भुगतान भी करदाताओं के पैसों से करना पड़ा? अब यह सवाल हम सभी को केजरीवाल जी से पूछना चाहिए। 

खर्चों के आँकड़े देखे तो मुख्यमंत्री केजरीवाल से कहीं आगे दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया (Deputy CM Manish Sisodia) हैं। वर्ष 2015 से 2022 के मध्य उनके एवं उनके परिवार के इलाज पर कुल 24,84,074 रुपए खर्च कर दिए गए।

उप-मुख्यमंत्री और उनके परिवार के इलाज पर वर्ष 2015-16 में 25,104 रुपए, वर्ष 2016-17 में 3,41,005 रुपए, वर्ष 2017-18 में 3,81,000 रुपए, वर्ष 2018-19 में 3,82,000 रुपए, वर्ष 2019-20 में 3,56,403 रुपए, वर्ष 2020-21 में 5,88,519 रुपए और वर्ष 2021-22 में 4,10,043 रुपए खर्च किए गए।

दिल्ली सरकार के हेल्थ मिनिस्टर सत्येंद्र जैन (Health Minister Satyendra Jain) ने वर्ष 2015 से 2022 के मध्य खुद पर अपने परिवार के इलाज पर कुल 3,00,187 रुपए खर्च किए। इसमें मुख्यतः कोरोना काल में हेल्थ मिनिस्टर सत्येंद्र के इलाज पर खर्च किया गया, जिस पर मेरे द्वारा पहले भी एक आरटीआईसे से मिली सूचना के आधार पर बताया गया था।

सरकारी धन के खर्च के मामले में सबसे आगे गोपाल राय (Gopal Rai) हैं, जो दिल्ली सरकार में पर्यावरण, वन एवं वन्यजीव, विकास और सामान्य प्रशासन मंत्री हैं। आरटीआई में मिली जानकारी के अनुसार, गोपाल राय एवं उनके परिवार के इलाज पर वर्ष 2015 से 2022 के मध्य 26,74,132 रुपए खर्च कर दिए गए।

गोपाल राय और उनके परिवार के इलाज पर वर्ष 2015-16 में 2,39,845 रुपए, वर्ष 2016-17 में 2,06,529 रुपए, वर्ष 2017-18 में 1,56,635 रुपए, वर्ष 2018-19 में 1,07,000 रुपए, वर्ष 2019-20 में 12,549 रुपए, वर्ष 2020-21 में 5,80,001 रुपए और वर्ष 2021-22 में 13,71,573 रुपए खर्च किए गए।

दिल्ली सरकार में खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति और चुनाव मंत्री इमरान हुसैन (Imran Hussain) और उनके परिवार के इलाज पर वर्ष 2015 से 2022 के मध्य 5,75,937 रुपए खर्च किए गए। वहीं, कैलाश गहलोत (Kailash Gehlot) के द्वारा 27,506 रुपए खर्च किये गए। राजेंद्र पाल गौतम ने सरकार का एक भी रुपया उपयोग नहीं किया और उनका मेडिकल बिल इस दौरान शून्य रहा।

ऑटो ड्राइवर रहमत ने गुड्डू बन हिन्दू युवती से किया निकाह, फिर उसके 2 साल के बच्चे का जबरन करवाया खतना

उत्तर प्रदेश (UP) के गाजियाबाद जिले में एक महिला ने एक मुस्लिम ऑटो ड्राइवर पर हिन्दू नाम रख कर जबरन निकाह और अपने बेटे के धर्मान्तरण का आरोप लगाया है। पीड़िता के मुताबिक सबलू जो कि रहमत का घर का नाम है उसे ‘गुड्डू” नाम से मिला था और बाद में उसके 2 साल के हिन्दू बच्चे का खतना करा दिया। पुलिस ने आरोपित रहमत हसन उर्फ सबलू को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया है। घटना की FIR 19 जुलाई 2022 (मंगलवार) को दर्ज हुई थी।

पुलिस को दी गई शिकायत में पीड़िता ने लिखा, “मेरे पास रहने का कोई सहारा नहीं था क्योंकि मेरा पति मुझे छोड़ कर चला गया था। इस दौरान 10 माह पहले मोहन नगर चौराहे पर मुझे गुड्डू नाम का व्यक्ति मिला जिसने मुझे सहारा देने और मेरी नौकरी लगवाने का भरोसा दिया। मैं उसके साथ प्रहलाद गढ़ी में रहने लगी। 7-8 दिनों बाद गुड्डू मुझे अपने पीलीभीत जिले के गाँव पूरनपुर ले गया। वहाँ उसके घर वालों के साथ रहते हुए मुझे उसके मुस्लिम होने की जानकारी हुई।”

शिकायत कॉपी

शिकायत में पीड़िता ने आगे लिखा, “पीलीभीत में गुड्डू ने खुद का नाम सबलू और अपने पिता का नाम मसीउल्लाह बताया। यहीं पर उसने मुझसे निकाह किया और हम वहीं रहने लगे। 15-20 दिनों के बाद गुड्डू मेरे 2 साल के बच्चे (पहले पति से) को अपने साथ बहन के घर ले गया। वह मेरे बेटे का खतना करवा कर लौटा और उसको मुसलमान बना दिया। मेरा बेटा काफी तड़प रहा था। जब मैंने इसका विरोध किया तब मुझे और मेरे बेटे को गुड्डू ने बहुत मारा-पीटा और मुझे वहीं पूरनपुर छोड़ कर दिल्ली लौट गया।”

पीड़िता ने आगे लिखा, “गुड्डू के दिल्ली जाने के बाद मैं भी मौका पा कर किसी से पैसे उधार लेते हुए गाजियाबाद आ गई। यहाँ गुड्डू उर्फ़ सबलू फिर मुझे मिला और झंडापुर इलाके में कमरा किराए पर ले कर रहने लगा। यहाँ भी उसने मुझे मारना-पीटना शुरू किया और मुझे खर्च देना बंद कर दिया। 10 जुलाई 2022 को सबलू मुझे ले कर लोनी गया और मुझे वहीं छोड़ दिया। वो मेरे बेटे को छीन कर ये कहते हुए ले गया कि इसको मैंने मुसलमान बनाया है और ये मेरा बेटा है। बाद में मैंने गुड्डू से अपना बेटा वापस ले लिया।”

FIR Copy

दैनिक जागरण की रिपोर्ट्स के मुताबिक इस घटना की सूचना पर पहुँची साहिबाबाद पुलिस ने आरोपित और उसके साथियों पर शांति भंग की कार्रवाई की थी। पीड़िता ने अपनी बहन से मदद माँगी थी। इस घटना की जानकारी हिन्दू युवा वाहिनी को हुई तो उसके कार्यकर्ताओं ने आरोपित कार्रवाई की माँग की। बाद में पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने आरोपित गुड्डू उर्फ़ सबलू के खिलाफ IPC की धारा 323, 326, 295- A के साथ उत्तर प्रदेश धर्म परिवर्तन अधिनियम की धारा 3/5(1)/75/80 के तहत केस दर्ज किया है।

आरोपित को गिरफ्तार कर लिया गया है। ऑपइंडिया से बात करते हुए पीड़िता ने कहा, “हम हिन्दुओं में कश्यप (धीमर) जाति से हैं। खतने के बाद मेरे बेटे का नया नाम समीर रखा गया। सबलू को गाँव के लोग रहमत के नाम से भी बुलाते थे।”

क्या अंतिम संस्कार पर 18% GST वसूल रही मोदी सरकार, जानिए लिबरल गिरोह के दावों की हकीकत क्या है

भारत सरकार ने बुधवार (20 जुलाई 2022) को स्पष्ट किया कि श्मशान सेवाओं पर 18 प्रतिशत जीएसटी की घोषणा का दावा करने वाली रिपोर्ट फर्जी है।

प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) की फैक्ट-चेकिंग साइट ने बताया कि श्मशान सेवाओं पर 18 फीसदी जीएसटी लगाने का दावा भ्रामक है। पीआईबी ने कहा कि अंतिम संस्कार, दफनाने, श्मशान या मुर्दाघर सेवाओं पर जीएसटी लागू नहीं है। यह केवल श्मशान से संबंधित होने वाले कामों के कॉन्ट्रैक्ट पर लागू होता है। इसका मतलब है कि श्मशान के निर्माण और रखरखाव से संबंधित सेवाओं पर जीएसटी लागू होगा।

उल्लेखनीय है कि 47वीं जीएसटी परिषद की बैठक के बाद यह घोषणा की गई थी कि सड़कों, पुलों, रेलवे, मेट्रो, एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट, श्मशान आदि के निर्माण कॉन्ट्रैक्टों पर लागू जीएसटी को 12 फीसदी से बढ़ाकर 18 फीसदी कर दिया गया है।

कुछ समाचार पोर्टलों और विपक्षी नेताओं ने घोषणा को अपने तरीके से दिखाया और दावा किया कि श्मशान सेवाओं पर 18 प्रतिशत जीएसटी की घोषणा की गई। newzviewz.com के एडिटर डॉ. धीमंत पुरोहित ने कहा, “श्मशान सेवाओं पर 18% जीएसटी।” पीआईबी ने भी फैक्ट चेक के दौरान उनके इस ट्वीट का हवाला दिया था।

धीमंत पुरोहित के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

कॉन्ग्रेस के राष्ट्रीय मीडिया कोऑर्डिनेटर शैलेंद्र चौधरी ने लोगों से सवाल किया कि वे श्मशान सेवाओं पर जीएसटी के बारे में क्या सोचते हैं? उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा, “शमशान पर 18 प्रतिशत जीएसटी टैक्स को आप क्या कहेंगे? आपदा में अवसर, निर्दयी सरकार या दोनों?”

शैलेंद्र चौधरी के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

डेक्कन हेराल्ड के पत्रकार रशीद कप्पन ने लिखा, “श्मशान घाट पर 18% जीएसटी। मानो लोग टैक्स देने के लिए मर रहे हैं!”

रशीद कप्पन के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

तेलंगाना टुडे के संपादक श्रीनिवास के रेड्डी ने ग्राउंड ज़ीरो इंडिया को कोट करते हुए कहा, “यहाँ के अस्पतालों में, रोगी जो बच जाता है, वह बेड के लिए भारी GST का भुगतान करता है। मरने वाले मरीज को श्मशान घाट के लिए भारी GST चुकाना पड़ता है। कुछ भी हो, सभी पर मोदी सरकार का बोझ है।” दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने एनडीटीवी की रिपोर्ट का एक स्क्रीनशॉट भी साझा किया, जिसमें स्पष्ट रूप से “श्मशान के लिए वर्क कॉन्ट्रैक्ट” का उल्लेख किया गया था।

श्रीनिवास के रेड्डी के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

चित्तपुर के पूर्व कॉन्ग्रेस विधायक प्रियांक खड़गे ने लिखा, “भाजपा सरकार आपको चैन से मरने भी नहीं देगी। श्मशान घाट पर 18% जीएसटी। ना…… ना मरने दूँगा।” उन्होंने बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट का एक स्क्रीनशॉट भी साझा किया, जिसमें स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया था कि यह केवल वर्क कॉन्ट्रैक्ट पर लागू है।

प्रियांक खड़गे के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

श्मशान घाट और अन्य सेवाओं को GST से छूट

GST अधिनियम 2017 की अनुसूची III की धारा 7 (4) के अनुसार, मृतक के परिवहन सहित अंतिम संस्कार, दफन, श्मशान या मुर्दाघर की सेवाओं को जीएसटी से छूट दी गई है।

फोटो साभार: वित्त मंत्रालय

इससे पहले, श्मशान घाट के वर्क कॉन्ट्रैक्ट पर केवल 12 प्रतिशत जीएसटी था, जिसे 47वीं जीएसटी परिषद की बैठक के दौरान गैर-एनडीए / भाजपा शासन वाले राज्यों सहित सभी राज्यों के प्रतिनिधियों की मंजूरी के साथ बढ़ाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है।

निष्कर्ष: श्मशान सेवाओं पर 18 प्रतिशत जीएसटी लागू होने का दावा गलत है।

नेशनल हेराल्ड केस में ED के सामने हाजिर हुईं सोनिया गाँधी, सदन से सड़क तक हुड़दंग पर उतरे कॉन्ग्रेसी

नेशनल हेराल्ड (National Herald) मनी लॉन्ड्रिंग (Money Laundering) मामले में पूछताछ के लिए कॉन्ग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी (Soniya Gandhi) आज (21 जुलाई) प्रवर्तन निदेशालय (ED) के सामने पेश होना है। वह ED कार्यालय पहुँच गई हैं। उनके साथ प्रियंका गाँधी (Priyanka Gandhi) भी हैं।

इंडिया टुडे के मुताबिक, ED अधिकारियों ने बताया है कि अगर पूछताछ के दौरान सोनिया गाँधी की तबीयत खराब होती है तो उन्हें वापस जाने दिया जाएगा। वहीं, उनके स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए दूसरे कमरे में एक मेडिकल ऑफिसर को बैठाया जाएगा। वहाँ प्रियंका गाँधी भी मौजूद रहेंगी। पूछताछ के दौरान सोनिया गाँधी के साथ उनके वकील को मौजूद रहने की अनुमति नहीं है।

इधर ED से पूछताछ को लेकर कॉन्ग्रेस नेताओं ने संसद से लेकर सड़क तक बवाल किया है। लोकसभा में भारी हंगामे के बाद सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी है। वहीं, देश भर में कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ता ED द्वारा सोनिया गाँधी से पूछताछ का विरोध करते हुए सड़कों पर उतर आए हैं। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को पुलिस ने विरोध के कारण हिरासत में ले लिया है।

विपक्ष की ओर से राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार यशवंत सिन्हा ने कहा है कि ED नेताओं को परेशान कर रही है। उन्होंने कहा कि ED के अधिकारियों को सोनिया गाँधी से पूछताछ के लिए उनके घर जाना चाहिए था। उधर लोकसभा में केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने विरोध प्रदर्शन पर सवाल उठाते हुए कहा, “कानून के समक्ष सब बराबर है। क्या कॉन्ग्रेस अध्यक्ष कोई महामानव हैं?” कॉन्ग्रेसियों ने संसद परिसर में भी पूछताछ का विरोध किया।

सोनिया गाँधी से पूछताछ के विरोध में कॉन्ग्रेस नेता मनिकम टैगोर (Manickam Tagore) ने 20 जुलाई की रात ट्वीट किया, “अकबर रोड स्थित कॉन्ग्रेस मुख्यालय को शाह पुलिस ने बंद कर दिया है। ऐसा इसलिए किया गया, क्योंकि वे कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं की ताकत और उनकी प्रतिबद्धता से वाकिफ हैं।”

पुलिस ने अकबर रोड पर बैरिकेडिंग कर दी है। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेता और सांसद पहले से ही दिल्ली में मौजूद हैं। कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने बुधवार (20 जुलाई 2022) शाम को राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर बैठक की।

अशोक गहलोत ने ट्वीट किया, “सीनियर कॉन्ग्रेस लीडर, राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे जी के निवास पर मीटिंग हुई, जिसमें किस तरह विपक्ष की आवाज को कुचला जा रहा है, ईडी निशाना बना रही है उसके खिलाफ सभी ने रोष प्रकट किया और गुरुवार को कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी जी के साथ पूरी कॉन्ग्रेस एकजुट होकर खड़ी रहेगी।”

कॉन्ग्रेस महासचिव जयराम रमेश बुधवार को ट्वीट किया था, “मोदी-शाह की जोड़ी द्वारा हमारे शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ जिस प्रकार से राजनीतिक प्रतिशोध जारी है, उसके विरुद्ध कॉन्ग्रेस पार्टी अपनी नेता श्रीमती सोनिया गाँधी के साथ सामूहिक एकजुटता व्यक्त करते हुए कल देश भर में प्रदर्शन करेगी।”

जयराम रमेश ने गुरुवार को कहा, “हम समझते हैं कि सरकार कॉन्ग्रेस को महँगाई, बेरोजगारी जैसे जरूरी मुद्दों पर जनता की आवाज उठाने से रोकने के लिए ED का इस्तेमाल कर रही है, पर हम बिना डरे और झुके देश की जनता द्वारा सरकार से कड़े सवाल पूछने के कर्तव्य को निभाते रहेंगे।”

उन्होंने कहा, “मीडिया को कॉन्ग्रेस कार्यालय में आने से रोका जा रहा है। किसी भी अन्याय के खिलाफ अहिंसात्मक गाँधीवादी ‘सत्याग्रह’ हर भारतीय का संवैधानिक अधिकार है, लेकिन सत्ता के अहंकार में मोदी सरकार यह हक़ भी हमसे छीनने की कोशिश कर रही है। यह कॉन्ग्रेस पर नहीं भारत के महान लोकतंत्र पर हमला है।”

फोटो साभार: जयराम रमेश का ट्विटर हैंडल

गौरतलब है कि इससे पहले राहुल गाँधी से ईडी की पूछताछ के वक्त कॉन्ग्रेस पार्टी ने दिल्ली की सड़कों पर विरोध प्रदर्शन किया था। दिल्ली की सड़कों को बंद करके कॉन्ग्रेसियों ने राहुल के समर्थन में नारेबाजी की थी और सड़क पर खूब हल्ला किया था। इसके बाद दिल्ली पुलिस द्वारा उन्हें हिरासत में ले लिया गया था।

हरियाणा पुलिस की 10 टीम, 30 जगहों पर दबिश: पकड़ा गया नूँह में DSP को डंपर से कुचलने वाला शब्बीर, बार-बार बदल रहा था ठिकाने

हरियाणा में पत्थर भरे डंपर से कुचल कर DSP सुरेंद्र सिंह बिश्नोई की हत्या करने के मामले का मुख्य आरोपित शब्बीर पकड़ा गया है। DSP की हत्या 19 जुलाई 2022 को मेवात के नूँह में की गई थी, जो इस्लामी कट्टरवाद और रोहिंग्या बस्तियों के लिए कुख्यात रहा है।

डंपर ड्राइवर शब्बीर उर्फ़ पित्तर को पुलिस ने 20 जुलाई 2022 (बुधवार) को राजस्थान के भरतपुर से पकड़ा। मुठभेड़ में उसको गोली लगी है। पुलिस ने शब्बीर की तलाश में 30 से अधिक स्थानों पर छापेमारी की थी। शब्बीर के साथी इकरार को घटना के कुछ घंटों बाद ही पुलिस ने मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक शब्बीर की गिरफ़्तारी भरतपुर जिले के गाँव गंगोरा से हुई। उसको पकड़ने के लिए पुलिस की 10 टीमें लगातार छापेमारी कर रही थी।

नूँह के SP वरुण सिंगला के मुताबिक, “शब्बीर का कस्टडी रिमांड हासिल करने के बाद पुलिस उससे उसके सहयोगियों के बारे में सवाल-जवाब करेगी। उसके फरार होने और छिपने में साथ देने वालों पर भी कानून का शिकंजा कसा जाएगा। फरारी के दौरान शब्बीर लगातार अपनी लोकेशन बदल रहा था, जिसके चलते उसकी गिरफ्तारी में समय लगी।”

मौत की होगी न्यायिक जाँच

DSP तावडू सुरेंद्र सिंह की हत्या के बाद हरियाणा के गृहमंत्री अनिज विज ने मेवात क्षेत्र में सक्रिय खनन माफियाओं की न्यायिक जाँच करवाने की घोषणा की है। उन्होंने कहा, “हरियाणा सरकार ने DSP की मौत की न्यायिक जाँच करवाने का निर्णय लिया है। इस जाँच में क्षेत्र में होने वाले अवैध खनन की गहनता से जाँच की जाएगी।”

मेवात में पहले भी हुए हैं पुलिस पर हमले

DSP सुरेंद्र सिंह की हत्या से पहले भी मेवात क्षेत्र में पुलिस पर हमले हो चुके हैं। जून 2021 में जुनैद नाम के आरोपित की कस्टडी में मौत के बाद मेवात में भीड़ ने पुलिस पर पथराव किया था। इस हमले में पुलिस वाहन में आग लगा दी गई थी। एक अन्य मामले में जनवरी 2022 को ATM लुटरे तस्लीम को पकड़ने गई गुरुग्राम पुलिस पर मेवात में हमला हुआ था, जिसमें महिला पुलिसकर्मी की वर्दी फाड़ दी गई थी। इसी साल फरवरी 2022 में गौ तस्करों को पकड़ने गई मध्य प्रदेश पुलिस टीम पर पलवल के अंदरौला गाँव में हमला हुआ था।