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रामायण को सेक्युलर बनाना चाहते थे राजदीप के ससुर, उस समय थे दूरदर्शन के हेड: रामानंद सागर ने लिखा था – कॉन्ग्रेस राज में हिन्दू भयभीत

दूरदर्शन का लोकप्रिय सीरियल रामायण (Ramayana) एक बार फिर चर्चा में है। 1987 में आए रामायण सीरियल के निर्माता रामानंद सागर के बेटे प्रेम सागर द्वारा लिखी गई उनकी बायोग्राफी का हवाला देते हुए कॉलमनिस्‍ट शेफाली वैद्य ने कहा, “जिस वक्त रामायण का प्रसारण शुरू हुआ पत्रकार सागरिका घोष के पिता और राजदीप सरदेसाई के ससुर भास्कर घोष, जो उस वक्त दूरदर्शन के हेड थे वह इसे दिखाए जाने के पक्ष में नहीं थे। घोष को ये लगता था कि रामायण का प्रसारण इस देश के सेक्युलर चरित्र को बदल देगा और हिंदुत्व की अवधारणा को बढ़ाएगा।” लेखिका ने ट्वीट के साथ तीन स्क्रीनशॉट साझा किए हैं।

दरअसल, पश्चिम बंगाल कैडर के आईएएस अधिकारी रहे घोष रामायण को उस रंग-रूप में बिल्कुल नहीं दिखाना चाहते थे, जैसा रामानंद सागर कर रहे थे। भास्कर घोष को उस वक्त दर्शकों पर किए गए शोध से ये पता चला था कि रामायण को देखने वाला अकेला हिंदू समाज ही नहीं था, बल्कि मुस्लिम भी बड़ी तादाद में उसे देखते थे, क्योंकि सीरियल का निर्माण उस समय के स्डैंडर्ड के हिसाब से किया गया था। रामायण सिर्फ मनोरंजन ही नहीं था, बल्कि इसमें आदर्शों और मूल्यों की बात भी की गई थी। ऐसे में वह अल्पसंख्यकों को खुश करने के लिए रामायण को धर्मनिरपेक्ष बनाना चाहते थे। हालाँकि राजीव गाँधी सरकार में ऐसे कई मामले देखने को मिले जब हिंदू और मुस्लिम तुष्टिकरण के लिए राजनीति की गई।

रामानंद सागर की बायोग्राफी के पेज नंबर 273 में लिखा गया है, “भारत के इतिहास में पहली बार कॉन्ग्रेस के राज में हिंदू भयभीत महसूस कर रहे थे। धर्मनिरपेक्षता के नाम पर कॉन्ग्रेस ने अल्पसंख्यकों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था। वह भावनाओं में बहकर हर कार्य कर रहे थे। उस दौरान एक कट्टर हिंदू नेता की आवश्यकता थी, जो हिन्दुओं की रक्षा के लिए आगे आ सके और जिसमें कॉन्ग्रेस पार्टी का विरोध करने की क्षमता हो।”

प्रेम सागर के मुताबिक, “एन वक्त पर भाजपा ने मोर्चा संभाला और एलके आडवाणी ने इसके खिलाफ कड़ा रुख अख्तियार किया। उन्होंने पार्टी के संसाधनों और जनशक्ति का इस्तेमाल जमीनी स्तर पर पार्टी के कार्यकर्ताओं के माध्यम से देश के कोने-कोने में इस बारे में जागरूकता फैलाने और अपने पक्ष में समर्थन हासिल करने के लिए किया। यह भाजपा के उदय और हिंदुत्व आंदोलन की पुरजोर शुरुआत थी।”

बताया गया है कि उस वक्त जब हिंदू कॉन्ग्रेस से आक्रोशित थे, भाजपा अपनी जमीनी स्थिति मजबूत करने में जी जान से जुटी हुई थी। इसको लेकर राजीव गाँधी काफी डर गए थे, उन्होंने भांप लिया था कि इस बार हिंदू उन्हें चुनाव में वोट नहीं करेंगे। इस स्थिति में उन्होंने संभावित विकल्पों को तलाशना शुरू कर दिया था। अयोध्या विवाद, जो तीस साल से अधिक समय से चला आ रहा था, हिन्दुओं के धैर्य की परीक्षा लेने लगा था। हिंदू विवादित ढाँचे बाबरी मस्जिद के द्वार खोलने और यहाँ पूजा करने की माँग कर रहे थे। यह मामला न्यायपालिका के दायरे में था, लेकिन राजीव गाँधी ने हिंदुओं को खुश करने के लिए इसमें हस्तक्षेप किया और दरवाजे खोलने के लिए अपील दायर की गई।

इस मामले में सरकार और न्यायपालिका ने जिस तेजी से काम किया उसने सभी को हैरान कर दिया था। बिना समय बर्बाद किए, राजीव गाँधी सरकार ने गवाही दी कि पूजा के लिए द्वार खोलना सुरक्षित होगा (अर्थात, कानून व्यवस्था को प्रभावित नहीं करेगा) और फैसले के कुछ घंटों के भीतर ही द्वार खोल दिए गए।

यह विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के लिए एक ऐतिहासिक क्षण था, जिसने दशकों के विरोध और धैर्य के बाद अपनी लड़ाई जीती थी। साथ ही, इसने भाजपा को अपना अगला जनसमूह शुरू करने के लिए एक मंच प्रदान किया। इस तरह, राजीव गाँधी की हिंदू तुष्टिकरण की रणनीति ने भाजपा के विकास के लिए एक मंच तैयार किया था।

‘मैं पागल हूँ क्या जो ये व्रत करूँगी?’: नसीरुद्दीन शाह की बीवी ने ‘करवा चौथ’ पर उगला जहर, ज्योतिष-वास्तु का भी बनाया मजाक

बॉलीवुड अभिनेता नसीरुद्दीन शाह की बीवी और एक्ट्रेस रत्ना पाठक शाह (Ratna Pathak Shah) ने हिंदू त्योहार पर विवादित बयान दिया है। उन्होंने करवा चौथ को महिलाओं की गुलामी और अंधविश्वास का प्रतीक बताते हुए इसे मनाने वाली महिलाओं का मजाक उड़ाया है। रत्ना पाठक शाह ने कहा कि देश में औरतों के लिए अभी भी कुछ नहीं बदला है। देश रूढ़िवादी होता जा रहा है। क्या हम सऊदी अरब जैसा देश बनना चाहते हैं?

हाल ही एंटरटेनमेंट वेबसाइट ‘पिंकविला‘ को एक दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि 40 वर्षों में पहली बार उनसे पिछले साल पूछा गया था कि क्या वह अपने शौहर अभिनेता नसीरुद्दीन शाह की सलामती के लिए करवा चौथ का व्रत रखती हैं? इस पर उन्होंने कहा, “क्या मैं पागल हूँ, जो ऐसा करूँगी?” उन्होंने आगे कहा, “हमारे देश में औरतें अभी भी सदियों पुरानी प्रथाओं और रीति-रिवाजों को फॉलो करती आ रही हैं। पूरा समाज रूढ़िवादी होता जा रहा है। क्या यह भयावह नहीं है कि पढ़ी-लिखी आधुनिक महिलाएँ भी करवा चौथ का व्रत करती हैं। अपने पति की लंबी उम्र के लिए प्रार्थना करती हैं, जिससे उन्हें विधवा होने का कोप न झेलना पड़े।”

‘साराभाई वर्सेस साराभाई’ की अभिनेत्री ने कहा, “हम रूढ़िवादी हो रहे हैं। कुंडली दिखो, वास्तु कराओ, अपने ज्योतिषी को दिखाओ के विज्ञापनों की संख्या देखें। नित्यानंद की तरह फनी लोगों को देखिए, जिन्हें कहीं एक जगह मिल गई है। हर जगह एक मूर्ख, बूढ़ा गुरु बनकर बैठा हुआ है और हर कोई उनके पास जाता है। क्या यह आधुनिक समाज की निशानी है। यहाँ दाभोलकर जैसे तर्कवादी दिनदहाड़े मार दिए जाते हैं। उसका मुकदमा अभी चल रहा है और इसके बारे में कुछ नहीं किया जाएगा।”

रत्ना पाठक शाह ने बातचीत में यह भी कहा, “समाज रूढ़िवादी होने पर सबसे पहले औरतों पर शिकंजा कसता है। दुनिया की जितने भी रूढ़िवादी समाज हैं, सब पर नजर डाल लीजिए। आप देखेंगे कि औरतें ही हैं जो सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। आज भी औरतों के लिए कुछ भी नहीं बदला है और अगर बदलाव हुआ भी है तो वह बेहद मामूली है। लोग अब अंधविश्वासी होते जा रहे हैं। उन्हें धर्म को स्वीकार कर उसे अपनी जिंदगी का अहम हिस्सा बनाने के लिए मजबूर किया जा रहा है।”

बता दें कि रत्ना शाह पाठक अक्सर अपने विवादित बयानों के लिए चर्चा में रही हैं। उन्होंने करीब 40 साल पहले नसीरुद्दीन शाह से निकाह किया था। उनके दो बेटे हैं, जिनके नाम इमाद और विवान शाह हैं। उन्हें आखिरी बार यशराज फिल्म की ‘जयेशभाई जोरदार’ में देखा गया था। उन्होंने ‘लिपिस्टिक अंडर माई बुर्का’ ‘खूबसूरत’, ‘कपूर एंड संस’ के अलावा हिट टीवी शो ‘साराभाई वर्सेज साराभाई’ जैसे कई प्रोजेक्ट में काम किया है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के लिए कॉन्ग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने किया अपमानजनक शब्द का इस्तेमाल, कहा – माफ़ी नहीं माँगूँगा

कॉन्ग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी द्वारा राष्ट्रपति पर दिए बयान को लेकर बीजेपी ने लोकसभा में जोरदार तरीके से विरोध किया। बीजेपी ने कहा कि कॉन्ग्रेस आदिवासी और गरीब, महिला विरोधी है। हंगामे के चलते लोकसभा को दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया है।

भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने इसे देश का अपमान बताया है। स्मृति ईरानी ने कहा कि जब से द्रौपदी मुर्मू का नाम राष्ट्रपति के उम्मीदवार के रूप में घोषित हुआ तब से ही द्रौपदी मुर्मू कॉन्ग्रेस पार्टी की घृणा और उपहास का शिकार बनीं। राष्ट्रपति के रूप में चुने जाने के बाद भी उनके खिलाफ हमले रुकते नहीं दिख रहे हैं। 

उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस नेता जानते थे कि भारत के राष्ट्रपति को संबोधित करने का यह तरीका न केवल उनके संवैधानिक पद बल्कि समृद्ध आदिवासी विरासत का भी प्रतिनिधित्व करता है। वह जानते थे कि राष्ट्रपति को इस तरह से नीचा दिखाना हमारे देश में महिलाओं की क्षमता को कम करना है।

स्मृति ईरानी ने कहा कि सोनिया गाँधी के नेतृत्व में कॉन्ग्रेसी संवैधानिक पदों पर महिलाओं को नीचा दिखाते रहे हैं। देश के पहले आदिवासी राष्ट्रपति को नीचा दिखाने वाली कॉन्ग्रेस को संसद में और भारत की सड़कों पर माफी माँगनी चाहिए। अधीर रंजन चौधरी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को ‘राष्ट्रपत्नी’ के रूप में संबोधित किया, यह जानते हुए भी कि यह उस सर्वोच्च संवैधानिक पद की गरिमा को अपमानित करता है। देश जानता है कि कॉन्ग्रेस आदिवासी विरोधी, दलित विरोधी और महिला विरोधी है।

इधर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के खिलाफ ‘राष्ट्रपत्नी’ वाली टिप्पणी पर अधीर रंजन चौधरी के खिलाफ वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण समेत भारतीय जनता पार्टी की कई महिला सांसदों ने संसद भवन में विरोध-प्रदर्शन किया। बैनर के साथ महिला सांसदों ने कॉन्ग्रेस पार्टी से माफी की माँग की है। अधीर रंजन के इस बयान के विरोध में भारतीय जनता पार्टी के सांसदों ने महात्मा गाँधी की प्रतिमा के सामने प्रदर्शन भी किया। 

दूसरी ओर, बीजेपी की ओर से विवादित टिप्पणी को लेकर माफी माँगने के बीच कॉन्ग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी ने कहा, “माफी माँगने का सवाल ही नहीं है। मैंने गलती से ‘राष्ट्रपत्नी’ कह दिया था। अब अगर आप मुझे इसके लिए फाँसी देना चाहते हैं, तो आप ऐसा कर सकते हैं। सत्ताधारी दल जानबूझकर राई का पहाड़ बनाने की कोशिश कर रहा है।”

वहीं कॉन्ग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी का कहना है कि अधीर रंजन चौधरी ने अपने इस बयान के लिए माफी माँग ली है।

ये थे अधीर रंजन चौधरी के बेतुके बोल

संसद भवन परिसर में कॉन्ग्रेस का प्रदर्शन चल रहा था, तभी पत्रकारों के सवाल पर जवाब देते हुए कॉन्ग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने राष्ट्रपति के लिए ‘राष्ट्रपत्नी’ शब्द का इस्तेमाल किया। एक पत्रकार ने पूछा था कि कल आप राष्ट्रपति भवन जा रहे थे, जाने नहीं दिया गया। इसके जवाब में कॉन्ग्रेस नेता ने कहा कि आज भी जाने की कोशिश करेंगे। इसके बाद चौधरी ने कहा कि हिंदुस्तान की राष्ट्रपति सबके लिए है। हिंदुस्तान की ‘राष्ट्रपत्नी’ सबके लिए है। हमारे लिए क्यों नहीं। अब इसी को लेकर भाजपा अब हमलावर है।

बकरीद पर गोहत्या के बाद धरना दे रहे थे हिन्दू, राजस्थान पुलिस ने 35 को हिरासत में लिया: महिलाओं को पीटने के भी आरोप

राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले में गौ हत्या की घटना से तनाव की खबर है। यहाँ 4 दिनों से धरना दे रहे लोगों को पुलिस ने जबरन उठाने का प्रयास किया तो पथराव शुरू हो गया। पुलिस ने इस घटना में अब तक 35 लोगों को हिरासत में लिया है। मामला बुधवार (27 जुलाई, 2022) का बताया जा रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, स्थानीय लोग चिड़ियागाँधी इलाके में गोकशी के विरोध में धरने पर बैठे थे। उनका आरोप था कि बकरीद पर गौ हत्या हुई है जिसे जिला प्रशासन नहीं मान रहा था। बाद में मिले मांस को प्रयोगशाला में भेजा गया तो उसके गौमांस होने की पुष्टि हुई। पुलिस ने इस केस में फारुख, अनवर, अमीन खान और सिकंदर खान पर गौ हत्या व अन्य धाराएँ लगा कर जेल भेज दिया। तब से क्षेत्र में हालात तनावपूर्ण थे।

बताया जा रहा है कि इस गौ हत्या के विरोध में स्थानीय लोग व कुछ हिन्दू संगठन पिछले 4 दिनों से धरना दे रहे थे। मंगलवार (26 जुलाई) को पुलिस ने उन्हें हटा दिया और कुछ लोगों को गिरफ्तार कर लिया। अगले दिन इसके विरोध में भारी संख्या में ग्रामीण जमा हो गए और प्रदर्शन करने लगे। इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिलाएँ भी शामिल थीं।

पुलिस ने इन्हे भी बलपूर्वक हटाने की कोशिश की तो घटनास्थल पर ही झड़प हो गई। आरोप है कि पुलिस पर पत्थर भी फेंके गए जिस से कुछ पुलिसकर्मी घायल हो गए। हालत तनावपूर्ण देखते हुए गाँधीबड़ी और चिड़यागाँधी क्षेत्र में कर्फ्यू भी लगा दिया गया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया आँसू गैस के गोले भी छोड़े। एहतियात के तौर पर क्षेत्र में इंटरनेट भी बंद कर दिया गया है। क्षेत्र में भारी पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है।

इस घटना का दावा कर के वायरल हो रहे वीडियो में कुछ पुरुष पुलिसकर्मी एक महिला को पकड़ने की कोशिश करते दिखाई दे रहे हैं। ऊपर छत से कुछ महिलाएँ शोर मचा रही हैं। बीच में एक पुलिसकर्मी हाथ में पत्थर ले कर वीडियो बना रही महिलाओं को मारने की धमकी भी दे रहा है। आख़िरकार पुलिसकर्मी उस महिला को अपने साथ ले जाते हैं। वहीं दूसरे वीडियो में कई पुलिसकर्मियों ने एक व्यक्ति का कॉलर पकड़ रखा है। हालाँकि ऑपइंडिया इस वीडियो की पुष्टि नहीं करता।

‘हमें किसी और जेल में ले चलो’: कैदियों द्वारा पिटाई के बाद उमेश कोल्हे के हत्यारों ने अपनी जान को बताया खतरा, NIA कोर्ट से लगाई गुहार

महाराष्ट्र के अमरावती में दवा व्यापारी उमेश कोल्हे की हत्या के आरोपितों ने खुद को मुंबई की आर्थर रोड जेल से कहीं और शिफ्ट करने की माँग की है। इस बाबत उन्होंने NIA कोर्ट में एप्लिकेशन भी दिया है। प्रार्थना पत्र में आरोपितों ने आर्थर रोड जेल में अपनी जान का खतरा बताया है। दावा है कि इस माँग पर NIA व जेल प्रशासन को कोई आपत्ति नहीं है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उमेश कोल्हे की हत्या करने के आरोप में इस समय आर्थर रोड जेल में 7 आरोपित बंद हैं। इनके नाम 22 वर्षीय मुदस्सिर अहमद उर्फ़ सोनू रज़ा, 25 वर्षीय शाहरुख़ पठान उर्फ़ बादशाह खान, 24 वर्षीय अब्दुल तौफीक उर्फ़ नानू शेख, 22 वर्षीय शोएब खान उर्फ़ भुंया खान, 22 वर्षीय आतिब रशीद, 44 वर्षीय युसूफ खान, 35 वर्षीय इरफ़ान शेख हैं। इरफ़ान शेख को ही इस हत्याकांड का मुख्य सूत्रधार माना जाता है, जो उमेश कोल्हे का पुराना दोस्त बताया जा रहा है। इसकी उमेश ने कई मौकों पर मदद भी की थी।

गौरतलब है कि एक दिन पहले 27 जुलाई को शाहरुख़ पठान नाम के आरोपित पर जेल में हमला हुआ था। बताया जा रहा है कि वो जेल के अंदर उमेश कोल्हे की हत्या पर अन्य कैदियों के आगे शेखी बघार रहा था। इस बात से नाराज हो कर कल्पेश पटेल, हेमंत मनेरिया, अरविंद यादव, श्रवण अवान और संदीप जाधव नाम के 5 कैदियों ने शाहरुख़ की पिटाई कर दी। पिटाई करने वाले उन सभी पर IPC की धारा 143, 147, 149, 323 के तहत जोशीमार्ग पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज कर ली गई है।

अमरावती के दवा व्यापारी उमेश कोल्हे की 22 जून, 2022 को हत्या कर दी गई थी। सभी आरोपित उमेश कोल्हे द्वारा नूपुर शर्मा की एक पोस्ट व्हाट्सएप ग्रुप में शेयर किए जाने से नाराज बताए गए थे। उमेश की गर्दन पर चाकू से वार किए गए थे। उनके परिवार के अन्य सदस्य उन्हें बचाने दौड़े तब तक हमलावर भाग चुके थे। मुंबई पुलिस पर शुरुआत में इस केस को गंभीरता से न लेने के भी आरोप लगे थे।

‘वो हमारा इकलौता बेटा था, अब हमारे लिए घर कौन बनाएगा’: मृत BJYM नेता की माँ का छलका दर्द, पिता हैं दिल के मरीज

कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ जिले के बेल्लारे में BJP नेता प्रवीण नेत्तारू की मंगलवार (26 जुलाई, 2022) को कुल्हाड़ी से काटकर हत्या कर दी गई। इसके बाद कई जगहों पर तनाव व्याप्त हो गया। उग्र भीड़ द्वारा पथराव किया गया, जिसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज किया। अब इस मामले में प्रवीण की माँ का दर्द छलक कर सामने आया है।

उन्होंने समाचार एजेंसी ANI से बात करते हुए कहा, “मेरी तबीयत ठीक नहीं है। उसके (प्रवीण) पिता भी दिल के मरीज हैं। वह हमारा इकलौता बेटा था और उसने हमारे लिए एक घर बनाने की प्लानिंग की थी। अब हमारा घर कौन बनाएगा? दोषियों को दंडित किया जाना चाहिए, जिसने भी ऐसा किया है, उसे फाँसी दी जानी चाहिए।”

इससे पहले मृतक की पत्नी ने कहा था, “मुझे नहीं पता कि उन्होंने मेरे पति को क्यों मारा। जब वह दुकान बंद कर घर वापस आ रहे होते थे, तब मैं हर दिन वहाँ होती थी, लेकिन उस दिन मैं वहाँ नहीं थी। अगर मैं वहाँ होती तो ऐसा नहीं होता।”

इधर कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने गुरुवार (28 जुलाई, 2022) को अपनी सरकार के एक साल पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित कई कार्यक्रमों को रद्द कर दिया। बोम्मई का फैसला मंगलवार को दक्षिण कन्नड़ में भाजपा युवा मोर्चा के सदस्य प्रवीण नेत्तारू की हत्या के बाद आया है।

मुख्यमंत्री ने प्रवीण की हत्या को अमानवीय बताते हुए कहा, “घटना की जानकारी मिलने के बाद मैंने तत्काल कार्रवाई के आदेश दिए थे। मेरा मन शांत नहीं था। बजरंग दल कार्यकर्ता की हत्या के कुछ समय बाद ही यह घटना हुई है। किसी भी आरोपित को छोड़ा नहीं जाएगा।” 

गौरतलब है कि प्रवीण की हत्या के पीछे PFI और SDPI का हाथ होने की आशंका जताई जा रही है। कुछ मीडिया रिपोर्ट में कहा गया कि पुलिस को संदेह है कि हत्या बेल्लारी के मुस्लिम युवक मसूद की हत्या के बदले में की गई होगी, क्योंकि कुछ दिनों पहले एक युवक की हत्या हुई थी। मामले में अब तक 8 लोगों को हिरासत में लिए जाने की सूचना है। 

ऐसा बताया जा रहा है कि उदयपुर में कन्हैया लाल की हत्या के विरोध में प्रवीण ने फेसबुक पर किया पोस्ट था, जिसके कारण उन्हें निशाना बनाया गया। हालाँकि हत्या की वजह आधिकारिक तौर पर अभी सामने नहीं आई है। बता दें कि 29 जून 2022 को राजस्थान के उदयपुर में नूपुर शर्मा के पैगंबर मुहम्मद वाले कथित बयान का समर्थन करने पर हिन्दू टेलर कन्हैया लाल की हत्या कर दी गई थी।

राज्य के गृहमंत्री आरागा ज्ञानेंद्र ने बताया कि जिस इलाके में ये वारदात हुई है, वो जगह केरल की सीमा से सटी हुई है, ऐसे में केरल के सीनियर अधिकारियों से संपर्क कर आरोपितों को गिरफ्तार करने की कोशिश की जा रही है। इससे पहले एक रिपोर्ट में बताया गया था कि जिन लोगों ने प्रवीण पर हमला किया वह केरल के रजिस्ट्रेशन नंबर वाली बाइक से आए थे। 

इधर भाजपा कार्यकर्ता प्रवीण नेत्तारू की हत्या के बाद भाजपा युवा मोर्चा (BJYM) के सदस्यों ने कर्नाटक के कई हिस्सों में इस्तीफा देने का अभियान शुरू कर दिया है। ये लोग हमलों के विरोध में कर्नाटक में सत्तारूढ़ भाजपा सरकार के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराने के लिए यह अभियान चलाया है।

₹29 करोड़ कैश, 5 किलो सोना… अर्पिता मुखर्जी के दूसरे घर में भी मिला खजाना: जानिए बंगाल में शिक्षक भर्ती घोटाले से कैसे बने ‘मिनी बैंक’

अर्पिता मुखर्जी के एक और घर से करोड़ों रुपए मिले हैं। वह शिक्षक भर्ती घोटाले में घिरे पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार के मंत्री की पार्थ चटर्जी की करीबी हैं। बुधवार (27 जुलाई 2022) को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अर्पिता मुखर्जी के दूसरे फ्लैट पर छापा मारा। यहाँ से ईडी को करीब 28.90 करोड़ रुपए कैश और 5 किलो सोना मिला। यह छापेमारी गुरुवार (28 जुलाई 2022) सुबह 4 बजे तक चली।

अर्पिता मुखर्जी के फ्लैट में यह रकम टॉयलेट में छुपाकर रखी गई थी। इस रकम को गिनने के लिए ईडी के अधिकारियों को नोट गिनने की 3 मशीनें मँगवानी पड़ी। समाचार एजेंसी ANI ने बताया है कि अर्पिता मुखर्जी के बेलघरिया स्थितआवास से लगभग 29 करोड़ रुपए की नकदी मिली। इसे 10 ट्रंक में भरकर एजेंसी साथ ले गई।  

अर्पिता मुखर्जी के आवास से अब तक करीब 50 करोड़ रुपए नकद बरामद हो चुके हैं। इससे पहले 23 जुलाई को अर्पिता के एक अन्य घर से ED ने 21 करोड़ रुपए कैश बरामद किए थे।

अर्पिता मुखर्जी का कहना है कि पार्थ चटर्जी उनके घर को ‘मिनी बैंक’ की तरह इस्तेमाल करते थे। अर्पिता ने बताया कि पार्थ चटर्जी उनके घर में ही पैसा रखा करते थे। बुधवार को सुबह से ही ईडी ने अर्पिता के चार ठिकानों पर छापामारी शुरू की थी। जब एक टीम दोपहर को बेलघरिया के रथतला स्थित अर्पिता के फ्लैट पर पहुँची, तो ताला बंद था। काफी समय तक ईडी ने इंतजार किया। अंत में ईडी फ्लैट का दरवाजा तोड़कर अंदर घुसी। जैसे ही अर्पिता मुखर्जी के फ्लैट का ताला तोड़कर ईडी के अधिकारी अंदर गए और जाँच शुरू की तो पैसों का पहाड़ देखकर उनके होश उड़ गए। 

उल्लेखनीय है कि पार्थ चटर्जी और अर्पिता मुखर्जी फिलहाल 3 अगस्त तक ईडी की हिरासत में हैं। उनसे लगातार शिक्षा भर्ती घोटाले को लेकर पूछताछ की जा रही है। उन्हें 23 जुलाई को गिरफ्तार किया गया था।

बता दें कि पश्चिम बंगाल शिक्षा घोटाले की जाँच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) कर रही है। केंद्रीय एजेंसी ने पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग की सिफारिशों पर सरकार द्वारा प्रायोजित व सहायता प्राप्त स्कूलों में समूह ‘सी’ और ‘डी’ के कर्मचारियों व शिक्षकों की भर्ती में हुई कथित अनियमितताओं की जाँच शुरू की है। ममता बनर्जी सरकार में मौजूदा उद्योग मंत्री पार्थ चटर्जी उस समय शिक्षा मंत्री थे, जब घोटाला हुआ था। सीबीआई दो बार उनसे पूछताछ कर चुकी है। पहली बार पूछताछ 25 अप्रैल, जबकि दूसरी बार 18 मई को की गई थी।

BJYM नेता की हत्या के बाद ‘जनोत्सव’ रद्द, कमांडो टास्क फोर्स बनेगाः जानिए NIA जाँच पर क्या बोले कर्नाटक के CM

भाजयुमो (BJYM) नेता प्रवीण नेट्टारू की निर्मम हत्या के बाद ‘जनोत्सव’ कार्यक्रम रद्द कर दिया गया है। मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने बुधवार (27 जुलाई 2022) देर रात इसकी घोषणा की। उनकी सरकार के एक साल पूरे होने पर यह कार्यक्रम होना था। साथ ही मुख्यमंत्री ने ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कमांडो टास्क फोर्स का गठन करने की बात भी कही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मुख्यमंत्री ने कहा, “अपनी सरकार के एक साल पूरे होने पर हम 28 जुलाई को ‘जनोत्सव’ नाम से डोड्डाबल्लापुरा में कार्यक्रम आयोजित करने वाले थे। लेकिन अब हमने इसे रद्द कर दिया है।” मुख्यमंत्री ने प्रवीण की हत्या को अमानवीय बताते हुए कहा, “घटना की जानकारी मिलने के बाद मैंने तत्काल कार्रवाई के आदेश दिए थे। मेरा मन शांत नहीं था। बजरंग दल कार्यकर्ता की हत्या के कुछ समय बाद ही यह घटना हुई है। किसी भी आरोपित को छोड़ा नहीं जाएगा।”

उन्होंने कहा, “यह हत्या केरल सीमा पर हुई है। उनके सम्पर्क में कर्नाटक पुलिस है।” हत्या की जाँच NIA को सौंपे जाने के सवाल पर CM बोम्मई ने कहा, “पुलिस जरूरी सूचनाएँ जुटा रही है। NIA को केस सौंपने के लिए कुछ औपचारिकताएँ होती हैं, जिसे हम बाद में तय करेंगे।”

गौरतलब है कि प्रवीण नेट्टारू पर 26 जुलाई 2022 की रात दक्षिण कन्नड़ जिले की बेल्लारे में कुल्हाड़ी से हमला हुआ था, जिसमें उनकी मौत हो गई थी। हत्या के पीछे PFI और SDPI का हाथ होने की आशंका जताई जा रही है। अब तक 8 लोगों को हिरासत में लिए जाने की सूचना है। ऐसा बताया जा रहा है कि उदयपुर में कन्हैया लाल की हत्या के विरोध में प्रवीण ने फेसबुक पर किया पोस्ट था, जिसके कारण उन्हें निशाना बनाया गया। हालाँकि हत्या की वजह आधिकारिक तौर पर अभी सामने नहीं आई है।

बता दें कि इस घटना के खिलाफ बीजेपी कार्यकर्ताओं ने बुधवार 27 जुलाई को कुछ हिस्सों में बंद का आह्वान किया था लेकिन पुत्तूर प्रशासन ने उन इलाकों में 28 जुलाई की मध्यरात्रि तक कर्फ्यू लगा दिया है। वहीं जब नेत्तारू का शव उनके गाँव लाया गया, तो इलाके में तनाव बढ़ गया है। इस बीच बेल्लारी में प्रदर्शन कर रहे बीजेपी युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं पर पुलिस ने लाठी चार्ज किया और उन्हें खदेड़ दिया।

‘रोज मैं उनके साथ होती थी, उस दिन होती तो वो बच जाते’: BJYM नेता की पत्नी ने बयाँ किया दर्द, कर्नाटक के गृह मंत्री बोले- केरल भागे होंगे अपराधी

कर्नाटक के मंगलूरु के दक्षिण कन्नड़ जिले के बेल्लारे में मंगलवार (26 जुलाई 2022) रात भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा के जिला सचिव प्रवीण नेत्तारू की हत्या कर दी गई। हालाँकि, परिजनों को अभी भी पता नहीं है कि प्रवीण को क्यों मारा गया। वहीं, राज्य के गृह मंत्री अरागा ज्ञानेंद्र ने आशंका व्यक्त की है कि प्रवीण के हत्यारे केरल से आकर घटना को अंजाम दिए और वापस भाग गए।

इस बीच हत्या के विरोध में प्रदर्शन के दौरान हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं ने बुधवार (27 जुलाई 2022) के दौरान जमकर प्रदर्शन किया और भाजपा नेताओं के खिलाफ ही अपना आक्रोश निकाला। मृतक के परिजनों से मिलने गए प्रदेश भाजपा अध्यक्ष एवं स्थानीय सांसद नलिन कुमार कटील की कार को कार्यकर्ताओं ने घेर लिया। इसके बाद कुछ लोगों ने कार की पहिया का हवा निकालने और वाहन को पलटने की कोशिश भी की।

कर्नाटक के गृह मंत्री ज्ञानेंद्र ने रिपब्लिक टीवी से कहा, “कर्नाटक के इस हिस्से में, जो तटीय इलाका है और केरल की सीमा से लगता है, कई ऐसे मामले सामने आए हैं। ऐसे कई मामलों में हत्यारों ने अपराध किया है और केरल भाग गए।” बता दें कि जिन लोगों ने प्रवीण पर हमला किया था, वे केरल के रजिस्ट्रेशन नंबर वाली बाइक से आए थे। घटना भी केरल के बॉर्डर के नजदीक वाले इलाके की है।

मृतक की पत्नी ने कहा, “मुझे नहीं पता कि उन्होंने मेरे पति को क्यों मारा। जब वह दुकान बंद कर घर वापस आ रहे होते थे, तब मैं हर दिन वहाँ होती थी, लेकिन उस दिन मैं वहाँ नहीं थी। अगर मैं वहाँ होती तो ऐसा नहीं होता।” बता दें कि इस मामले में पुलिस ने 10 संदिग्धों को हिरासत में लिया है। कुछ मीडिया रिपोर्ट में हिरासत में लोगों की संख्या 15 बताई जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रवीण ने राजस्थान के उदयपुर में कन्हैया लाल साहू की गला काट कर हुई दिन दहाड़े हत्या पर 29 जून को पोस्ट किया था। अपने पोस्ट में प्रवीण ने लिखा था कि इन लोगों ने गरीब टेलर को मार डाला है। यही नहीं, ये सब हमारे पीएम को टारगेट करने की बात कर रहे हैं।

बता दें कि मंगलवार की रात को प्रवीण बेल्लारे स्थित अपनी पॉल्ट्री की दुकान पर थे। जब रात में उनके घर जाने का समय हुआ तो वहाँ 9 बजे के करीब कुछ बाइक सवार हमलावर आए और उनके ऊपर कुल्हाड़ी से हमला कर दिया। प्रवीण भाजपा युवा मोर्चा के सदस्य थे और साथ ही सोशल व पॉलिटिकल सर्कल में काफी सक्रिय थे।

प्रवीण की हत्या के मामले में PFI और SDPI पर संदेह जताया गया है। कुछ मीडिया रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि पुलिस को संदेह है कि हत्या बेल्लारी के मुस्लिम युवक मसूद की हत्या के बदले में की गई होगी, क्योंकि कुछ दिनों पहले एक युवक की हत्या हुई थी। कर्नाटक पुलिस ने भी मामले की जाँच के लिए 5 स्पेशल टीम का गठन किया है। इनमें से तीन टीमें केरल, मदिकेरी और हसन गईं हैं। बेल्लारे में सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

इस मामले में केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता प्रह्लाद जोशी ने कहा, “प्रारंभिक रिपोर्ट और कुछ मीडिया रिपोर्ट SDPI और PFI लिंक की तरफ इशारा करती हैं। उन्हें केरल में बढ़ावा दिया जा रहा है। कर्नाटक में कॉन्ग्रेस उन्हें प्रोत्साहित कर रही है। कर्नाटक में हमारी सरकार कार्रवाई करेगी और दोषियों को सजा देगी।”

वहीं, भाजपा कार्यकर्ता प्रवीण नेट्टारू की हत्या के बाद भाजपा युवा मोर्चा (BJYM) के सदस्यों ने कर्नाटक के कई हिस्सों में इस्तीफा देने का अभियान शुरू कर दिया है। ये लोग हमलों के विरोध में कर्नाटक में सत्तारूढ़ भाजपा सरकार के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराने के लिए यह अभियान चलाया है।

शाहनवाज़ ने सुमित यादव बन सिख लड़की को फाँसा, बच्चे के गर्दन पर चाकू रख इस्लाम कबूलने और वेश्यावृत्ति का बनाया दबाव: FIR दर्ज

उत्तर प्रदेश के गाजियाबद से पिछले महीने लव-जिहाद का सनसनीखेज मामला सामने आया था। जहाँ एक मुस्लिम व्यक्ति शाहनवाज ने हिन्दू नाम सुमित रखकर एक सिख लड़की को अपने प्रेमजाल में फँसा लिया। पीड़िता ने थाने में दी गई शिकायत में बताया कि शाहनवाज ने उसे प्रेमजाल में फँसाकर जबरन देह व्यापार कराने का दबाव बनाया। यही नहीं उस पर इस्लाम कबूलने के लिए भी दबाव बनाया गया। आज बुधवार (27 जुलाई, 2022) को शिकायत के लगभग एक पखवाड़े के बाद हिन्दू संगठनों की मदद से आरोपित शाहनवाज सहित 4 आरोपितों के खिलाफ FIR दर्ज कर ली गई है।

शाहनवाज के खिलाफ दर्ज FIR

यह मामला 10 जुलाई, 2022 को सामने आया था वहीं अब इस मामले में शाहनवाज, उसके जीजा, अरशद और एक अज्ञात व्यक्ति के नाम FIR दर्ज की गई है। इसके बारें में जानकारी देते हुए गाजियाबाद पुलिस ने भी ट्वीट किया, “महिला द्वारा दी गयी तहरीर के आधार पर थाना इंदिरापुरम पर सुसंगत धाराओं में अभियोग पंजीकृत कर विवेचना प्रचलित है, तथ्यों के आधार पर अग्रिम विधिक कार्यवाही की जाएगी, कृपया बिना पुष्टि के भ्रामक खबरें न फैलाएँ!”

क्या है मामला

UP के गाजियाबाद में सिख समुदाय की एक लड़की ने शाहनवाज नाम के व्यक्ति पर अपने साथ रेप, धर्मांतरण के दबाव, धोखाधड़ी और जबरन देह व्यापार कराए जाने का आरोप लगाते हुए इसकी शिकायत पुलिस में की थी। यहाँ आरोपित शाहनवाज ने पीड़िता को अपने जाल में फँसाने के लिए अपना नाम सुमित बताया था। पीड़िता ने शिकायत में शाहनवाज द्वारा अपने लाखों रुपए हड़पने की भी जानकारी दी थी। यह शिकायत 11 अप्रैल 2022 को दी गई थी जिस पर आज हिन्दू संगठनों के दबाव के बाद इंदिरापुरम थाने में FIR दर्ज कर ली गई है।

बता दें कि पीड़िता ने DM को दी गई शिकायत में लिखा, “मुझे शाहनवाज लगभग 7-8 साल पहले सुमित यादव नाम से मिला था। कुछ दिनों बाद उसने मुझ से जबरन शारीरिक संबंध बना लिए। शादी की बात पर वह मुझे टालता रहा। इस बीच मेरे 29 दिसम्बर, 2018 में एक बेटा हुआ। उस अस्पताल में शाहनवाज ने अपना नाम कवीन्द्र लिखवाया। वो मेरे बेटे का मुस्लिम नाम ‘अरमान’ रखना चाहता था जिसका मैंने विरोध किया। कुछ समय बाद शाहनवाज मुझे भी इस्लाम में आने की जिद करने लगा। इसके लिए वो मेरे को ले कर 3-4 दिन गायब भी हो गया था। यही नहीं शाहनवाज इससे पहले भी एक हिन्दू लड़की को भगाकर लाया था।”

शिकायत में पीड़िता ने आगे कहा था, “शाहनवाज मुझे आए दिन मारने-पीटने लगा। मैंने घर खरीदने के लिए 8 लाख रुपए रखे थे वो उसे भी हड़प गया। 17 फरवरी 2022 को उसने इस्लाम न कबूलने पर मुझे इतना मारा कि मेरे मुँह और नाक पर गंभीर चोटें आईं। इस दौरान शाहनवाज मुझे अधमरा छोड़ कर अपने बिहार के अररिया जिले के गाँव थपोड़ चला गया। वहाँ उसने बहाने से मुझे भी बुलाया। वहाँ मुझे पता चला कि शाहनवाज एक हिन्दू लड़की को पहले भी भगा कर ला चुका है। इस दौरान उसके गाँव में उसके जीजा के इशारे पर कुछ लोगों ने मुझ पर हमला किया जिससे मैं जैसे-तैसे बच पाई।”

पीड़िता ने ऑपइंडिया को बताई आपबीती

पीड़िता ने ऑपइंडिया से बात करते हुए कहा, “शाहनवाज ने मुझे एहसास ही नहीं होने दिया कि वो मुस्लिम है। वो साथ कई बार दिल्ली के गुरुद्वारा बंगला साहिब गया। वो मुझे हरिद्वार भी ले गया था जहाँ उसने मेरी माँग में सिन्दूर भर दिया था। शाहनवाज ने मुझ से जबरन वेश्यावृत्ति का भी दबाव बनाया लेकिन मैं लगातार मना करती रही। इसके लिए वो मुझे अपने पैसे खत्म होने की बात कहते हुए इमोशनल भी करता था तो कभी मारता-पीटता भी था। एक दिन मैंने इसकी शिकायत पुलिस से करने का मन बनाया तो उसने मेरे बच्चे की गर्दन पर चाकू रख कर मुझे धमकी दी थी।”

वेश्यावृत्ति करवाने का बनाया दबाव

पीड़िता ने आगे ऑपइंडिया को बताया था, “मेरे पिता का कपड़ों का व्यापार था। उसमें घाटा हो गया इसलिए मुझे नौकरी करनी पड़ी। वहीं से लौटते हुए शाहनवाज मेरा पीछा करता था। शाहनवाज के तार वेश्यावृत्ति करवाने वालों से भी जुड़े हैं। उसकी बहन एक बार मुझसे मिलने आई तो अपना नाम सुनीता बताया और उसके जीजा खुद को प्रधान कहते थे। शाहनवाज का भाई भी उनकी ही तरह चालबाज है। मैं शाहनवाज के लिए सजा चाहती हूँ।”