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झारखंड के लोहरदगा में सरकारी प्राइमरी स्कूल को बना दिया उर्दू हाई स्कूल, बीजेपी सांसद की शिकायत पर शिक्षा विभाग ने दिए जाँच के आदेश

झारखंड के लोहदरगा का राजकीय उत्क्रमित उर्दू उच्च विद्यालय अब विवादों से घिर गया है। मामला जिले के किस्को प्रखंड के एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय का नाम बदल कर उर्दू उच्च विद्यालय कर देने का है। जिसपर विवाद बढ़ने से अब शिक्षा विभाग ने जाँच का आदेश दिया है।

दरअसल, वर्ष 1976 में इस विद्यालय से पढ़कर निकले धनेश्वर पांडे ने आरोप लगाया है कि जब उन्हें यहाँ से सर्टिफिकेट दिए गए थे तब उसपर उर्दू विद्यालय का कोई जिक्र नहीं था। लेकिन अब इस विद्यालय का नाम उर्दू उच्च विद्यालय हो गया है। उन्होंने षडयंत्र का आरोप लगते हुए इसकी जाँच के साथ विद्यालय को पहले की तरह संचालित करने की माँग की है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस विवाद के सामने आने के बाद राज्य के शिक्षा विभाग ने मामले की जाँच के आदेश दिए हैं। इस बात की जानकारी देते हुए लोहदरगा के उपायुक्त डॉ. वाघमेरे प्रसाद कृष्णा ने बताया है कि मामले की जाँच के लिए आदेश जारी किए जा चुके हैं।

बता दें कि प्राथमिक विद्यालय का नाम बदलकर उर्दू उच्च विद्यालय करने के मामले पर बीजेपी सांसद सुदर्शन भगत ने शिक्षा विभाग से इसकी जाँच कराने की बात कही थी। उन्होंने ग्रामीणों और अभिभावकों के हवाले से बताया है कि यह सामान्य विद्यालय था। इसलिए शिक्षा विभाग को मामले की जाँच करानी चाहिए। रिपोर्ट के मुताबिक स्कूल के पूर्व छात्र रहे धनेश्वर पांडेय ने सांसद को अपनी 31 दिसंबर 1976 में पांचवीं पास करने की मार्कशीट दिखाई थी। इसमें विद्यालय के नाम के साथ उर्दू शब्द का जिक्र नहीं था।

बीजेपी सांसद का कहना है कि यह सामान्य विद्यालय था, लेकिन अचानक कैसे यह स्कूल उर्दू उच्च विद्याालय में बदल गया। हमने शिक्षा विभाग को कहा है कि मामले की जाँच होनी चाहिए। जब सरकारी स्कूल राज्य सरकार का है तो निश्चित रूप से विभाग के संज्ञान में ये बात है कि नहीं सवाल यह भी है।

द्वारका और श्रीकृष्ण पर फिल्म लेकर आ रहा साउथ का धाकड़ हीरो: कहा- बॉलीवुड ने हमारी संस्कृति को नीचा दिखाया, PM मोदी सबके लिए प्रेरणा

तेलुगु में एक फिल्म आ रही है, ‘कार्तिकेय 2’, जिसका हिंदी टीजर हाल ही में वृन्दावन के इस्कॉन मंदिर में रिलीज किया गया। बॉलीवुड में ऐसा नहीं होता, इसीलिए आप चौंक गए होंगे। किसी मंदिर में या तीर्थ स्थल पर फिल्म का टीजर लॉन्च? इसके पीछे कारण है। बॉलीवुड में हमारी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासतों पर फ़िल्में भी तो नहीं बनतीं। ‘कार्तिकेय 2’ के लीड हीरो निखिल सिद्धार्थ हैं, जो तेलुगु सिनेमा के उभरते युवा कलाकारों में से एक हैं।

ये फिल्म द्वारका और भगवान श्रीकृष्ण के रहस्यों से पर्दा उठाती हैं। इसके निर्माता अभिषेक अग्रवाल हैं, जो ‘द कश्मीर फाइल्स’ के निर्माता भी थे। अब वो रवि तेजा की पैन-इंडिया फिल्म ‘टाइगर नागेश्वर राव’ को प्रोड्यूस कर रहे हैं। ‘कार्तिकेय 2‘ के निर्देशक चंदू मोंडेति हैं, वहीं फिल्म में मुख्य अभिनेत्री अनुपमा परमेश्वरन हैं। अनुपम खेर भी एक किरदार में दिखाई देंगे। हमने निखिल सिद्धार्थ से इस फिल्म और विभिन्न विषयों पर एक्सक्लूसिव बातचीत की, जिसे हम हूबहू आपके सामने नीचे पेश कर रहे हैं।

‘कार्तिकेय 2’ के हीरो निखिल सिद्धार्थ का इंटरव्यू: बॉलीवुड और हिंदी भाषा से लेकर PM मोदी और ‘द कश्मीर फाइल्स’ तक पर की बात

सवाल: आपकी आने वाली फिल्म ‘कार्तिकेय 2’ समुद्र में डूबी द्वारका नगरी के इर्दगिर्द घूमती है। इस थीम को चुनने का क्या कारण था? आपको इसमें रुचि कहाँ से आई?

जवाब: ये देख कर काफी हैरानी होती है कि हमारी कुछ सांस्कृतिक विरासतों को मिथक और कल्पना बता कर उन्हें नकार दिया गया, जबकि उन्हें लेकर हमारे पास वास्तविक सबूत हैं, वास्तुकला एवं स्थापत्य के रूप में। द्वारका और राम सेतु का अस्तित्व वास्तव में है, और हमें इस अस्तित्व का सम्मान करने की ज़रूरत है। मैंने इस थीम को इसीलिए चुना, क्योंकि इतिहास/माइथोलॉजी मुझे शुरू से उत्तेजित करता रहा है, जब मैं बच्चा था तभी से। श्रीराम, शिव और कृष्ण भगवान की कहानियों ने हमेशा मुझे मुग्ध किया है।

सवाल: असल जीवन में आप खुद को भगवान श्रीकृष्ण से कैसे जुड़ा हुआ पाते हैं? हाल ही में आपने इस्कॉन मंदिर का दौरा किया और इसके पदाधिकारी राधा रमण दास से मुलाकात की। इस सम्बन्ध में आप अपने अनुभव साझा करें।

जवाब: मैं यादव समुदाय से आता हूँ, ऐसे में मेरा परिवार हमेशा से कृष्णाष्टमी (श्रीकृष्ण जन्माष्टमी) एक बड़े स्तर और मनाता रहा है। ये हमेशा से हमारे परिवार का सबसे मुख्य उत्सव रहा है। वृन्दावन इस्कॉन मंदिर में राधा रमण दास जी से मिलना और मंदिर परिसर से आ रही सकारात्मक ऊर्जा ने मुझे ‘कृष्ण तत्व’ के साथ प्रेम में डाल दिया।

सवाल: ‘कार्तिकेय 2’ को लेकर उत्तर भारतीयों के लिए आपका कोई सन्देश है? वो इस फिल्म को देखें, इसके लिए आप उन्हें क्या कहना चाहेंगे? हाल ही में ‘RRR’, ‘KGF 2’ और ‘पुष्पा’ जैसी फ़िल्में हिंदी बेट में बड़ी हिट बन कर गई हैं।लेकिन, ये सभी एक्शन फ़िल्में थीं। जबकि, आपने जो जॉर्न चुना है वो अलग है।

जवाब: मैं ‘एक भारत और एक फिल्म इंडस्ट्री’ की धारणा में मजबूती से विश्वास रखता हूँ। उपर्युक्त तीनों ही फ़िल्में एक्शन से भरपूर थीं और यहाँ तक कि ‘कार्तिकेय 2’ में भी कुछ जोश भर देने वाले एक्शन दृश्य हैं और शानदार VFX हैं, जो फिल्म देखने के अनुभव को उच्च-स्तर पर लेकर जाएँगे। हम जिस जॉनर की बात कर रहे हैं, वो है – भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से जुड़े रहस्य और राज़, और वो वास्तव में थे कौन – जिसे आज तक कवर नहीं किया गया।

सवाल: क्या आपको लगता है कि भारतीय फिल्म इंडस्ट्री, खासकर बॉलीवुड हमारी प्राचीन संस्कृति और आर्कियोलॉजी के बारे में दिखाने में पीछे रह गई? हमारे ऐतिहासिक और आध्यात्मिक विषयों पर फ़िल्में नहीं बनीं, इसके पीछे आप क्या कारण मानते हैं?

जवाब: मैं खुद हिंदी फ़िल्में देखते हुए बड़ा हुआ हूँ। शाहरुख़ खान मेरे पसंदीदा अभिनेता हुआ करते थे और मैं स्कूल में या रोजाना के जीवन में बड़े होते हुए उनकी नक़ल उतारा करता था। हालाँकि, पिछले कुछ समय में बॉलीवुड के निर्देशकों की कुछ फ़िल्में हमारी संस्कृति को नीचा दिखाने और राष्ट्र की भावनाओं को आहत करने की तरफ मुड़ गईं। ये एक सही रास्ता नहीं है और इसका अनुसरण करना ठीक नहीं है। लेकिन, मैं फिर भी मेनस्ट्रीम बॉलीवुड फ़िल्में देखना पसंद करता हूँ और हाल ही में मैंने ‘भूल भुलैया 2’ और ‘द कश्मीर फाइल्स’ को थिएटर में देखा।

सवाल: हाल ही में महेश बाबू ने कहा कि हिंदी फिल्म इंडस्ट्री उन्हें अफॉर्ड नहीं कर सकती। वहीं अल्लू अर्जुन ने कहा कि अगर बॉलीवुड में काम करने की ज़रूरत आती है तो वो इसके लिए सब कुछ झोंक देंगे। आप इनमें से किनसे सहमत हैं? या फिर बॉलीवुड में काम करने को लेकर आप अलग राय रखते हैं?

जवाब: महेश बाबू एक डेमीगॉड की तरह हैं और उनके फैंस वस्तुतः उनकी पूजा करते हैं। उन्होंने मजाक में एक बात कही, जिसे सन्दर्भ से हट कर ले लिया गया। ये हर अभिनेता का सपना होता है कि वो ज्यादा से ज्यादा दर्शकों तक पहुँचे। सही सन्देश देने वाली मेरी फ़िल्में अधिकतम दर्शकों तक पहुँचे, इसके लिए मैं अपना सब कुछ झोंक दूँगा। जैसे कि मैं चाहता हूँ कि अधिक से अधिक दर्शक ‘कार्तिकेय 2’ की कहानी का आनंद लें। ये हमारे सनातन धर्म और भगवान श्रीकृष्ण की कहानी है।

सवाल: ‘कार्तिकेय 2’ के निर्माता अभिषेक अग्रवाल हैं। ये वही शख्स हैं, जिन्होंने ‘द कश्मीर फाइल्स’ का निर्माण किया था। ये एक ब्लॉकबस्टर फिल्म साबित हुई। कश्मीरी पंडितों की दुर्दशा को लेकर आपके क्या विचार हैं?

जवाब: नरसंहार एक शर्मनाक चीज है। ‘द कश्मीर फाइल्स’ एक ऐसी फिल्म हैं, जो पूरे साहसपूर्वक उन डरावनी घटनाओं का चित्रण करती है, ताकि कश्मीरी पंडितों को अंततः न्याय मिले। साथ ही इसे लेकर जागरूकता फैले, ताकि इस तरह की भयानक चीजें दोबारा न हों। अभिषेक अग्रवाल जी के पास ‘द कश्मीर फाइल्स’ को बनाने के लिए वो हिम्मत और हृदय था। मैं खुश हूँ कि उन्होंने हमारी फिल्म ‘कार्तिकेय 2’ का बीड़ा उठाया, जो हमारे देवी-देवताओं, राष्ट्रीय विरासत एवं हिंदी वस्तु-कला चमत्कार सम्बंधित एक अन्य दबा दिए गए मुद्दे को उठाती है।

सवाल: तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम और हिंदी भाषा में आपके प्रिय अभिनेता कौन-कौन से हैं?

जवाब: इस सवाल का जवाब देना कठिन है, लेकिन तेलुगु में पवन कल्याण, तमिल में विजय सर, मलयालम में मोहनलाल सर, कन्नड़ में दिवंगत पुनीत राजकुमार और हिंदी में हमेशा के लिए शाहरुख़ खान।

सवाल: हाल ही में किच्चा सुदीप और अजय देवगन के बीच एक विवाद देखने को मिला। जहाँ एक ने कहा कि हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा नहीं है तो दूसरे ने पूछ दिया कि फिर आप अपनी फ़िल्में हिंदी में डब ही क्यों करते हो? भाषा के इस संघर्ष में आपकी राय क्या है? आपके हिसाब से भारत को कौन सी भाषा एक कर सकती है?

जवाब: हमारे देश की सबसे खास सुंदरता विविधता में एकता और कई अलग-अलग भाषाएँ भी हैं। किसी भी एक भाषा को कभी राष्ट्रभाषा नहीं बनाया जा सकता। लेकिन, मैं इस तथ्य से सहमत हूँ कि मैंने अपनी पहली भाषा के रूप में हिंदी ही सीखी थी, ताकि बड़ी संख्या में लोगों से संवाद बनाए रखने में आसानी हो। ठीक इसी तरह, हर भाषा का सम्मान किया जाना चाहिए और हमारे भविष्य की पीढ़ियों के लिए इसे सहेज कर रखा जाना चाहिए।

सवाल: क्या हम आपके आने वाले प्रोजेक्ट्स के बारे में जान सकते हैं? वो फ़िल्में जो आप शूट कर रहे हैं या जिन्हें लेकर बातचीत कर रही हो।

जवाब: मैं प्रतिष्ठित प्रोडक्शन हाउस ‘गीता आर्ट्स’ के साथ ’18 Pages’ नामक फिल्म कर रहा हूँ। इसके अलावा एक एक्शन एक्सट्रावगांजा ‘SPY’ में भी मैं दिखाई दूँगा, जिसका निर्माण ‘ED Entertainments’ कर रही है। ये फिर से एक मल्टी-लैंग्वेज फिल्म होगी।

सवाल: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई बार हमारी राष्ट्रीय विरासतों को अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रिय बनाने का लगातार प्रयास किया है। जैसे कि उन्होंने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग को तमिलनाडु के मल्ल्पुरम में आमंत्रित किया, वहीं हाल ही में उन्होंने तेलंगाना के मुचिंतल में संत रामानुजाचार्य की ‘Statue Of Equality’ का उद्घाटन किया। आप उनके प्रयासों को किस तरह देखते हैं? पीएम मोदी को लेकर आप क्या सोचते हैं?

जवाब: नरेंद्र मोदी हर किसी के लिए प्रेरणा हैं। चाय बेचने वाला एक सीधा-सादा व्यक्ति भी विश्व के सबसे मजबूत शख्शियतों में से एक बन सकता है। ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ को लेकर उनके सभी प्रयास अद्भुत उपक्रम हैं। हालाँकि, मैं सबसे ज्यादा खुश तब होऊँगा जब सरकार राम सेतु और द्वारका को सहेज कर रखने के मुद्दों पर काम करेगी और इन्हें ताजमहल की तरह से ‘विश्व का सांस्कृतिक अचंभा’ वाला आकर्षण बनाएगी।

गुजरात में वाहन चालक ने पुलिसकर्मी किरण राज को कुचलकर मारा: 24 घंटे में झारखंड और हरियाणा के बाद यह तीसरी घटना

गुजरात के आणंद (Anand, Gujarat) जिले के बोरसाड में एक गश्त पर निकले एक पुलिसवाले को एक ट्रक ड्राइवर ने कुचल कर मार डाला। पिछले 24 घंटे में यह ऐसी तीसरी घटना है। मृतक पुलिसकर्मी की पहचान किरण राज के रूप में हुई है।

खबरों के मुताबिक, यह घटना बुधवार (20 जुलाई 2022) की रात लगभग 1 बजे हुई। कॉन्स्टेबल किरण राज ने गश्त के दौरान राजस्थान के नंबर प्लेट वाले एक संदिग्ध ट्रक को आते हुए देखा तो उसे रोकने की कोशिश की। चालक ने रूकने के बजाय ट्रक को पुलिसकर्मी पर चढ़ा दिया और घटनास्थल से भाग गया। किरण राज को तुरंत करमसाड अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।

इस घटना में ड्यूटी पर तैनात एक होमगार्ड जवान को भी हल्की चोटें आई हैं। आणंद के SP अजीत राजियन के अनुसार, ट्रक में इंडस्ट्रियल कंटेनर था, जो भरूच से हरियाणा माल ले जाने और ले आने का काम करता था। वहीं, कहा जा रहा है कि उसमें इंडस्ट्रियल पाउडर भरा हुआ था।

पुलिसकर्मी को कुचलने के बाद ट्रक ड्राइवर गाड़ी छोड़कर भागने छोड़कर भाग गया। पुलिस ने आरोपित की पहचान कर ली है और उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी कर रही है। पुलिस इस बात की जाँच कर रही है कि आरोपित ने ड्राइवर ने पुलिसकर्मी पर जानबूझकर कुचला या फिर यह हादसा मात्र है। पुलिस ने गाड़ी जब्त कर ली है।

राँची में पशु तस्करों ने SI संध्या टोपनो को कुचलकर मारा

झारखंड के राँची में भी बुधवार की सुबह तीन बजे के आसपास पशु तस्करों ने संध्या टोपनो नाम की SI पर गाड़ी चढ़ाकर उनकी हत्या कर दी। दरअसल, संध्या को जानवरों की अवैध तस्करी की सूचना मिली थी, इसके बाद वह वाहनों की चेकिंग कर रही थीं। इसी दौरान उन्होंने एक वाहन को रूकने के लिए कहा, लेकिन तस्करों ने उन पर वैन चढ़ा दी।

राँची के एसएसपी किशोर कौसल ने कहा है कि जिस वक्त गाड़ी ने संध्या टोपनों को टक्कर मारी थी। उस दौरान उसमें निगार खान नाम का एक अन्य आरोपित भी सवार था। उसी ने सरकार काम में बाधा डालने की कोशिश की थी।

हरियाणा के नूँह में DSP सुरेंद्र सिंह की कुचलकर हत्या

हरियाणा के नूँह में पत्थर से भरे डंपर से कुचल अवैध खनन माफियाओं ने DSP सुरेंद्र सिंह की हत्या की कर दी है। इस मामले में पुलिस ने एनकाउंटर के बाद इकरार नामक आरोपित को गिरफ्तार किया है। इकरार के पाँव में गोली लगी है। नूँह इस्लामी कट्टरवाद और रोहिंग्या बस्तियों के लिए पहले से कुख्यात रहा है।

साउथ रेंज रेवाड़ी के ADGP डॉ एम रवि किरण ने बताया कि DSP गुप्त सूचना मिलने के बाद औचक निरीक्षण के लिए गए थे। उनके पास बैकअप फोर्स नहीं रही होगी या इसके लिए उन्हें समय नहीं मिला होगा। पुलिस ने अपनी 8 टीमों को आरोपितों की धर-पकड़ में लगाया था।

‘कान खोलकर सुन लो, मैं सुसाइड नहीं करूँगी’: तनुश्री दत्ता ने बताया ‘मरते-मरते बची’, बॉलीवुड माफिया-महाराष्ट्र के पुराने पॉलिटिकल सर्किल पर बरसी

बॉलीवुड अभिनेत्री तनुश्री दत्ता ने अपने इंस्टाग्राम पोस्ट के जरिए आरोप लगाया है कि उन्हें बीते कुछ दिनों से टारगेट किया जा रहा है। अपने पोस्ट में उन्होंने कहा है कि न केवल उनके खाने पीने में बीते दिनो छेड़छाड़ हुई बल्कि घर से बाहर निकलने पर उनकी गाड़ी में भी तोड़फोड़ की गई।

अपने पोस्ट में उन्होंने लिखा,

“मुझे बहुत बुरी तरह से परेशान किया जा रहा है और निशाना बनाया जा रहा है। पहले मेरा बॉलीवुड करियर एक साल से ठीक नहीं चल रहा था। फिर मेरी काम वाली के जरिए मेरे खाने-पीने में गड़बड़ी करके मुझे स्टेरॉयड देने की कोशिश की गई। इससे मुझे कई तरह की गंभीर स्वास्थ्य दिक्कतें हुईं, इसके बाद जब मैं मई में उज्जैन गई थी तो मेरे कार के ब्रेक के साथ दो बार छेड़छाड़ की गई, जिसके कारण मैं दो बार दुर्घटना का शिकार हुई, लेकिन मरते-मरते बच गई और करीब 40 दिनों के बाद मुंबई लौटी हूँ। अब मेरे फ्लैट के बाहर मेरे घर में अजीबोगरीब घिनौना सामान मिला है।”

उन्होंने अपना गुस्सा जाहिर करते हुए उन लोगों को संदेश दिया जो उन्हें सताना चाहते हैं। उन्होंने कहा, “मुझे परेशान करने वाले ये कान खोलकर सुन लें, मैं आत्महत्या नहीं करने जा रही हूँ और न ही मैं कहीं और जा रहीं हूँ, मैं यहाँ रहूँगी और अपने करियर को पहले से कहीं अधिक ऊँचाइयों तक लेकर जाऊँगी।”

उन्होंने खुद के साथ हो रही घटनाओं को लेकर बॉलीवुड माफियाओं पर निशाना साधा। वह बोलीं, “बॉलीवुड माफिया, महाराष्ट्र का पुराना राजनीतिक सर्किट (जो अभी भी यहाँ प्रभाव में है) और नापाक राष्ट्रविरोधी आपराधिक तत्व आम तौर पर लोगों को परेशान करने के लिए इस तरह काम करते हैं। मुझे पूरा यकीन है कि जिन #metoo अपराधियों और एनजीओ का मैंने खुलासा किया है, वे इस सब के पीछे हैं वरना मुझे इस तरह क्यों कोई निशाना बनाएगा या तंग करेगा?”

उन्होंने पूछा कि आखिर ये कौन सी जगह है जहाँ अन्याय के विरुद्ध खड़े होने पर लड़के-लड़कियाँ मारे जाएँ। उन्होंने अपनी इच्छा जाहिर करते हुए कहा, “मैं चाहती हूँ कि महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लगे और केंद्र सरकार पूररा कंट्रोल लेले। यहाँ चीजें हाथ से निकल रही हैं। मैं लगातार इन चीजों से गुजर रही हैं। अगर आज मेरे साथ कुछ गलत हुआ तो कल आपके साथ भी हो सकता है।”

उन्होंने अपने पोस्ट में ‘साधना’ के जरिए खुद को भीतर से अधिक मजबूत बनाकर अपने बिजनेस और काम में आगे बढ़ने की बात की। साथ ही मदद माँगते हुए ये भी कहा कि उस शहर में कोई कानून-व्यवस्था नहीं रह गई हैं जो कभी सिंगल महिलाओं और कलाकारों के लिए सुरक्षित होता था।

बता दें कि तनुश्री दत्ता साल 2005 में इमरान हाशमी के साथ ‘आशिक बनाया आपने’ फिल्म से चर्चा में आई थीं। फिर उन्होंने भागमभाग, ढोल, गुड ब्वॉय बैड ब्वॉय जैसी फिल्मों में काम किया। इसके बाद वह बॉलीवुड से गायब हो गईं। 2018 में जब मीटू अभियान चला तो उस समय तनुश्री ने भी एक इंटरव्यू में आरोप लगाया कि उनका हॉर्न ओके प्लीज के सेट पर यौन शोषण हुआ था, उन्हें मानसिक रूप से तंग किया गया था। तनु के इस आरोप के बाद बॉलीवुड को दो हिस्सों में बँटा देखा गया था। एक वो जो तनुश्री के पक्ष में आए थे और दूसरे वे जिन्होंने अभिनेता नाना पाटेकर, कोरियोग्राफर गणेश आचार्य आदि को समर्थन दिया था।

पब्लिक से पहले कॉन्ग्रेस देखना चाहती है ‘इमरजेंसी’: कंगना को बताया BJP का एजेंट, इंदिरा गाँधी बनने का किया विरोध

बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत की अपकमिंग फिल्म इमरजेंसी (Emergency) पर कॉन्ग्रेस ने आपत्ति जताई है। कॉन्ग्रेस ने फिल्म के निर्माता-निर्देशक से इमरजेंसी के रिलीज से पहले उन्हें दिखाने की माँग की है। कॉन्ग्रेस का मानना है कि इस फिल्म में पूर्व प्रधानमंत्री की छवि खराब करने की कोशिश की गई है। मध्य प्रदेश कॉन्ग्रेस मीडिया विभाग की उपाध्यक्ष संगीता शर्मा ने तो कंगना रनौत को बीजेपी का एजेंट तक कह डाला। इसको लेकर भाजपा ने कथित तौर पर कहा कि कॉन्ग्रेस ने फिल्म पर इसलिए आपत्ति जताई है, क्योंकि वे घबराए हुए हैं।

कंगना रनौत (Kangana Ranaut) इमरजेंसी फिल्म में इंदिरा गाँधी की भूमिका निभाते नजर आएँगी। यह फिल्म 1975 में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी (Indira Gandhi) द्वारा देश में आपातकाल घोषित करने पर आधारित है। भारत में 25 जून 1975 से 21 मार्च 1977 तक यानी 21 महीने तक आपातकाल था।

हाल ही में कंगना ने फिल्म ‘इमरजेंसी’ (Emergency) का फर्स्ट लुक और टीजर जारी किया। फिल्म ‘इमरजेंसी’ (Emergency) के फर्स्ट लुक में कंगना रनौत हूबहू इंदिरा गाँधी जैसी दिख रही हैं। कंगना फिल्म में एक्टिंग के साथ इसको प्रोड्यूस भी कर रही हैं। इतना ही नहीं, फिल्म की डायरेक्टर भी वही हैं। यह फिल्म उनके प्रोडक्शन हाउस ‘मणिकर्णिका फिल्म्स’ के बैनर तले ही बन रही है। खास बात यह है कि फिल्म ‘इमरजेंसी’ को खुद कंगना ने लिखा भी है। कुल मिलकर इसे कंगना की फिल्म कहें तो गलत नहीं होगा।

गौरतलब है कि 25 जून, 1975 की रात को देशवासियों पर अचानक और अकारण ही आपातकाल थोप दिया गया था। निश्चय ही, इस दुर्घटना को भारतीय लोकतंत्र का काला अध्याय कहा जा सकता है। आपातकाल के दौरान पूरे देश को एक बहुत बड़े जेलखाने में तब्दील कर दिया गया था। 25 जून, 1975 की सुबह ऑल इंडिया रेडियो पर तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी की आवाज में जो संदेश प्रसारित हुआ, उसे पूरे देश ने सुना। इस संदेश में इंदिरा गाँधी ने कहा ​था “भाइयो और बहनो! राष्ट्रपति जी ने आपातकाल की घोषणा की है। लेकिन इससे सामान्य लोगों को डरने की जरूरत नहीं है।”

श्रीलंका के संकट का अंत नहीं: संसद ने रानिल विक्रमसिंघे को चुना राष्ट्रपति, विरोध में सड़क पर पब्लिक; गो रानिल गो के लग रहे नारे

आर्थिक और राजनीतिक संकट का सामना कर रहे श्रीलंका में बुधवार (20 जुलाई, 2022) को सांसदों ने पीएम रानिल विक्रमसिंघे को अगला राष्ट्रपति चुन लिया। श्रीलंका की संसद में 44 वर्षों में पहली बार अस्थिरता के बीच हुए त्रिकोणीय राष्ट्रपति चुनाव में रानिल विक्रमसिंघे को 134 सांसदों का समर्थन मिला है। उनके प्रतिद्वंदी दुल्लास अल्हाप्पेरुमा को 82 वोट ही मिले। तीसरे उम्मीदवार अनुरा कुमारा दिसानायके को सिर्फ तीन वोट ही मिले। बताया जा रहा है कि रानिल अब नवंबर, 2024 तक पूर्णकालिक राष्ट्रपति रहेंगे और इसके बाद फिर से राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव होंगे।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, श्रीलंका की मुख्य विपक्षी पार्टी के नेता सजिथ प्रेमदासा ने मंगलवार को ही राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी से अपना नाम वापस ले लिया था। उन्होंने कहा कि वह इस पद के लिए प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवार डलास का समर्थन कर रहे हैं। जो कि अब चुनाव हार चुके हैं। बता दें कि श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे के देश छोड़कर भाग जाने के बाद यह चुनाव हुआ है। गोटाबाया देश छोड़कर पहले मालदीव और फिर सिंगापुर गए। सिंगापुर पहुँचने के बाद उन्होंने राष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया था।

वहीं अब विक्रमसिंघे के कंधों पर अब श्रीलंका को अपूतपूर्व राजनीतिक एवं आर्थिक संकट से बाहर निकालने की जिम्मेदारी होगी। हालाँकि, उनके राष्ट्रपति चुने जाने के बाद भी उनके खिलाफ लोग सड़क पर उतर कर प्रदर्शन कर रहे हैं। पहले के प्रदर्शनों में भी लोगों में उनके खिलाफ गुस्सा देखने को मिला है। रिपोर्ट के अनुसार, प्रदर्शनकारियों का कहना है कि राष्ट्रपति के रूप में रानिल उन्हें मंजूर नहीं हैं। उनके खिलाफ ‘गो रानिल गो’ के नारे लग रहे हैं।

बता दें कि रानिल विक्रमसिंघे को राजनीति का लंबा अनुभव है। वे श्रीलंका के पाँच बार प्रधानमंत्री रह चुके हैं। रानिल राजनीति में आने से पहले एक पत्रकार और वकील भी रह चुके हैं। वे 1977 में पहली बार आम चुनाव जीतकर संसद सदस्‍य बने थे। जबकि वह 1993 में पहली बार पीएम बने थे। इसके अलावा राजपक्षे के राष्ट्रपति पद से इस्तीफा देने और देश छोड़ कर भागने के बाद वह कार्यवाहक राष्ट्रपति की जिम्मेदारी भी संभाल रहे थे।

गौरतलब है कि आर्थिक हालात बिगड़ जाने पर श्रीलंका ने खुद को दिवालिया घोषित कर दिया है। देश में महँगाई बहुत ज़्यादा बढ़ गई है। यहाँ तक कि खाने-पीने की चीजें, दवाएँ, पेट्रोल-डीजल आम आदमी की पहुँच से बाहर हैं। बता दें कि श्रीलंका में विरोध-प्रदर्शन शुरू होने के बाद इसी साल मई में रानिल विक्रमसिंघे को देश का पीएम चुना गया था। पीएम चुने जाने पर उन्होंने देश की संसद को संबोधित करते हुए कहा था कि श्रीलंका बहुत ही कठिन हालात का सामना कर रहा है और आगे अभी बहुत सारी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।

अटारी बॉर्डर पर चल रहा एनकाउंटर, मूसेवाला का एक हत्यारा ढेर-बाकी घिरे: क्या पाकिस्तान भागने की फिराक में थे

पंजाबी गायब सिद्धू मूसेवाला (Sidhu Moosewala) की हत्या में शामिल गैंगस्टरों को पुलिस ने पाकिस्तान (Pakistan) सीमा के पास घेर कर एनकाउंटर किया है। इनमें से एक गैंगस्टर मारा गया, जबकि बाकियों के साथ एनकाउंटर जारी है। इस कार्रवाई में तीन पुलिस वाले भी घायल हुए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान सीमा से सटे अटारी बॉर्डर से महज 10 किलोमीटर दूर अमृतसर जिले में 3 घंटे से एनकाउंटर जारी है। चिचा भकना के गाँव होशियार नगर में जिन तीन गैंगस्टरों को पुलिस ने घेरा हैं, उनमें एक मनप्रीत मन्नू कुस्सा और दूसरा जगरूप रूपा है। तीसरे गैंगस्टर की पहचान अभी नहीं हो पाई है। वहीं, कौन गैंगस्टर मारा गया है, इसकी भी अभी पुष्टि नहीं हुई है।

इस ऑपरेशन में एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स, स्पेशल ऑपरेशन सेल, ऑर्गनाइज्ड क्राइम कंट्रोल यूनिट के अलावा अमृतसर पुलिस भी शामिल है। पुलिस के बेहतरीन शूटर और क्विक रिएक्शन टीम भी मौके पर मौजूद है। पुलिस ने पूरे इलाके को सील कर दिया है और लोगों से अपने घरों में रहने के लिए कहा है।

इन अपराधियों के पास एके-47 हैं। इन्हीं से ये पुलिस पर गोलियाँ चला रहे हैं। पुलिस का कहना है कि मूसेवाला के कत्ल में इस्तेमाल हुए हथियार इन्हीं के पास हैं। बताया जा रहा है कि ये गैंगस्टर गाँव की पुरानी हवेली में छिपे हैं। दरअसल, पंजाब पुलिस को जानकारी मिली थी कि सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड से जुड़े गैंगस्टर गाँव में छिपे हो सकते हैं। इसके बाद यह कार्रवाई की गई।

इससे पहले पुलिस ने बिश्नोई गैंग के एक शार्प शूटर अंकित सिरसा को गिरफ्तार किया गया था। अंकित सिरसा से पहले प्रियव्रत को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। यह बात भी सामने आई थी कि सचिन भिवानी ने सिद्धू मूसेवाला की हत्या से जुड़े चार शूटरों को पनाह दी थी। इसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया था।

दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल की की जाँच में इस मामले से जुड़े गिरफ्तार शूटर्स ने कई खुलासे किये थे। गोल्डी बराड़ और लॉरेश बिश्नोई का वफादार और सबसे खतरनाक शूटर मनप्रीत उर्फ मानू तरनतारन जिले के खुसा गाँव का रहने वाला है। मूसेवाला की हत्या के दौरान मनप्रीत ने ही ही एके-47 से पहली गोली चलाई थी। इसके बाद बाकी शूटर्स ने मूसेवाला पर ताबड़तोड़ फायरिंग की थी।

पुलिस जाँच में यह बात भी सामने आई थी कि मूसेवाला की हत्या करने वाले मनप्रीत मन्नू कुस्सा और जगरूप रूपा घटना को अंजाम देने के बाद पंजाब में ही घूमते रहे। कहा जा रहा है कि जून के अंत तक वे तरनतारन के एक गाँव में छिपे रहे। रूपा इसी इलाके का रहने वाला है। यहाँ तूफान नाम के एक गैंगस्टर ने उन्हें अपने फार्म हाउस में छिपा रखा था। इनके साथ गैंगस्टर रईया भी मौजूद था।

शार्पशूटर मनप्रीत और रूपा को 21 जून को मोगा के समालसर में चोरी की बाइक पर जाते हुए देखा गया था। CCTV कैमरे में इनकी तस्वीर देखी गई थी। बता दें कि मूसेवाला की हत्या 29 मई को हुई थी। हालाँकि, हत्या के बाद पंजाब में ही रहने के बावजूद पुलिस इन्हें नहीं पकड़ सकी थी।

कहा जाता है कि गोल्डी बराड़ ने पहली गोली चलाने का आदेश मनप्रीत को दिया था। मनप्रीत लकी पटियाला गैंग से बदला लेना चाहता था, इसलिए मुसेवाला की हत्या की साजिश में उसे सबसे पहले शामिल किया गया था। बता दें कि मनप्रीत की जेल में पिटाई का एक वीडियो वायरल किया गया था।

मनप्रीत को शक था कि बंबीहा गैंग ने उसे पिटवाकर बदनामी कराई। इस गैंग का सबसे खतरनाक गैंगस्टर सुखप्रीत सिंह बुड्डा को यूरोपीय देश रोमानिया से 12 अगस्त 2019 को गिरफ्तार किया था। सीबीआई की इनपुट पर इंटरपोल ने उसे गिरफ्तार किया था।

गाड़ी में बैठा निगार खान, सब इंस्पेक्टर संध्या की कुचल कर हत्या: झारखंड में भी नूँह जैसी घटना, CBI जाँच की माँग

झारखंड पुलिस की महिला सब इंस्पेक्टर संध्या टोपनों को गाड़ी कुचलकर मारने के मामले में राँची पुलिस ने बयान जारी किया है। राँची के एसएसपी किशोर कौसल ने कहा है कि जिस वक्त गाड़ी ने संध्या टोपनों को टक्कर मारी थी। उस दौरान उसमें निगार खान नाम का एक अन्य आरोपित भी सवार था। उसी ने सरकार काम में बाधा डालने की कोशिश की थी।

एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक राँची एसएसपी ने कहा, “तुदुपना ओपी क्षेत्र से सूचना मिली थी कि गुमला से आ रही एक संदिग्ध गाड़ी राँची में घुसने वाली है। इसके बाद इलाके की सब इंस्पेक्टर संध्या टोपनो के नेतृत्व में पुलिस को चेकिंग के लिए तैनात किया गया था। लेकिन सिक्योरिटी चेकिंग के दौरान संदिग्ध गाड़ी ने महिला उप-निरीक्षक को कुचल दिया। दरअसल, जैसे ही गाड़ी वहाँ पहुँची तो एसआई टोपनो ने उसे रोकने की कोशिश की। हालाँकि, ड्रायवर गाड़ी रोकने की जगह उनपर चढ़ाकर आगे निकल गया। गंभीर रूप से घायल हालत में तत्काल उन्हें हॉस्पिटल ले जाया गया, जहाँ उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। फिलहाल, ड्रायवर को गिरफ्तार कर गाड़ी को सीज कर दिया गया है।

एसएसपी कौशल ने कहा कि गाड़ी के अंदर एक और व्यक्ति मौजूद था, जिसकी तलाश जारी है। कोशिश होगी कि जल्द से जल्द जाँच पूरी कर दोषियों को जल्द से जल्द सजा दिलवाई जाए। आरोपी निगार खान ने भी सरकारी कामों में सेंध लगाने की कोशिश की है।

इस बीच मृतक एसआई संध्या टोपनो के मामा निमेश तिर्की ने संध्या को शहीद का दर्जा देने और मामले की सीबीआई जाँच की माँग की है। उन्होंने बताया कि अक्सर फोन पर बातचीत के दौरान उनकी भांजी काम के बोझ को लेकर बातें करती थी और बताती थीं कि बहुत दबाव में हूँ।

कब हुई ये घटना

गौरतलब है कि ये वारदात आज (20 जुलाई, 2022) तड़के 3 बजे के करीब की है। तुदुपना में पुलिस विभाग एंटी क्राइम चेकिंग अभियान चला रहा है। इसी के तहत एसआई संध्या टोपने को ड्यूटी पर लगाया गया था। संध्या टोपनो 2018 बैच की अधिकारी थीं। इससे पहले मंगलवार को हरियाणा के नूँह में पत्थर से भरे डंपर से डीएसपी सुरेंद्र सिंह बिश्नोई को कुचले जाने का मामला प्रकाश में आया था। पुलिस ने इस केस में इकरार नाम के व्यक्ति को गिरफ्तार किया था।

ठीक इसी तरह की एक अन्य घटना गुजरात में भी घटी है। डीएसपी अजीत राय ने कहा कि बोरसाड में राजस्थान से आ रहे एक ट्रक को रोकने की कोशिश कर रहे एक पुलिस कॉन्स्टेबल किरण पर ट्रक चढ़ा दिया गया। इस हमले में घायल गंभीर रूप से घायल पुलिसकर्मी की इलाज के दौरान मौत हो गई। वहीं ट्रक चालकर फरार हो गया।

जहाँ इस्लाम छोड़ने वाले एक्स मुस्लिमों को मिला मंच, वामपंथियों की धुलाई: प्रदीप भंडारी के शो ने पूरे किए 1 साल, कहा – राष्ट्र और सनातन की सेवा जारी रखेंगे

‘जन की बात’ के संस्थापक प्रदीप भंडारी के शो ‘जनता का मुकदमा’ ने एक वर्ष पूरे कर लिए हैं। ये शो ‘इंडिया न्यूज़’ पर आता है। इस एक साल में इस शो में राष्ट्रवाद से जुड़े कई मुद्दों को कवर किया गया और देशद्रोहियों की पोल खोली गई। आतंकवाद और वामपंथ के विरुद्ध हमेशा मुखर रहने वाले प्रदीप भंडारी ने इस शो के माध्यम से लगातार देशहित के मुद्दों पर आवाज़ उठाई और इस्लामी कट्टरपंथ की बार-बार जनता के सामने पोल खोली।

चीन में बिहार के जिस छात्र अमन नागसेन की हत्या हो गई थी, उसकी डेड बॉडी वापस लाने के लिए प्रदीप भंडारी ने इस शो के माध्यम से अभियान चलाया, जिसके बाद गया में उसका अंतिम-संस्कार हुआ। पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली TMC की जीत के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं के खिलाफ हुई हिंसा पर भी उन्होंने आवाज़ उठाई। वामपंथी नेता कविता कृष्णन के हिन्दू विरोध को लेकर खुलासे किए।

साथ ही ‘डिस्मैंटलिंग ग्लोबल हिंदुत्व’ के पाकिस्तानी कनेक्शन का भी खुलासा किया। इस शो में कश्मीरी घाटी में राष्ट्रवादियों की सुरक्षा, ओवैसी के भड़काऊ भाषणों को लेकर मुकदमा दर्ज करने, नरेंद्र गिरी हत्याकांड में न्याय के लिए, पंजाब में ईसाई धर्मांतरण के खिलाफ, गुरुग्राम में सार्वजनिक नमाज के खिलाफ, दीवाली में पटाखों को प्रतिबंधित करने के फैसले के खिलाफ, पंजाब पीएम मोदी की सुरक्षा में सेंध में खालिस्तान का हाथ होने के खुलासे के बाद उसके खिलाफ, माँ श्रृंगार गौरी की पूजा-अर्चना – इन सभी मुद्दों पर अभियान चलाया।

साथ ही प्रदीप भंडारी ने ‘इंडिया न्यूज़’ के शो ‘जनता का मुकदमा’ के माध्यम से जम्मू कश्मीर टेरर फंडिंग को लकेर भी आवाज उठाई। साथ ही ज्ञानवापी ढाँचे में मिले शिवलिंग की पूछ-अर्चना के लिए अभियान चलाया। नवाब मलिक ने ED के सामने स्वीकार किया था कि हसीं पार्कर का बॉडीगार्ड सलीम NCP कार्यकर्ता था – ये ब्रेकिंग भी इसी शो में चलाया गया। उन्होंने इस मौके कहा है कि हम भारत राष्ट्र और सनातन धर्म की सेवा करना जारी रखेंगे।

एक शो में प्रदीप भंडारी ने इस्लाम मजहब छोड़ चुके एक्स मुस्लिमों को भी बुलाया और उनकी बात सुनी। उन्होंने इस शो से कट्टरपंथियों को आईना दिखाया। इन पूर्व मुस्लिमों ने बताया कि उन्हें इस्लाम छोड़ने की प्रेरणा कहाँ से मिली और इस्लाम छोड़ने के पीछे वजह क्या थी।

राजस्थान में एक संत ने की आत्मदाह की कोशिश, दूसरे दो दिन से टावर पर: अवैध खनन के खिलाफ 550 दिनों से आंदोलन, फिर भी सोई है कॉन्ग्रेस सरकार

राजस्थान (Rajasthan) में अपराधियों के सामने अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) के नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेस सरकार (Congress Government) के घुटने टेकने के बाद साधु-संतों को सामने आना पड़ा है।

अवैध खनन के खिलाफ संतों के जारी आंदोलन के दौरान 65 वर्षीय बाबा विजयदास ने बुधवार (20 जुलाई 2022) को शरीर पर किरोसीन डालकर आत्मदाह करने की कोशिश की। गंभीर रूप से झुलसने के बाद बाबा को ईलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

दरअसल, भरतपुर जिले के डीग क्षेत्र में आदिबद्री धाम और कनकांचल में अवैध खनन के विरोध में साधु-संतों का करीब 550 दिनों से गाँव पसोपा में आंदोलन चल रहा है। इधर बाबा नारायणदास मंगलवार (19 जुलाई 2022) को विरोध में टावर पर चढ़ गए और पूरी रात उन्होंने वहीं गुजारी। इस दौरान बाबा को टावर पर ही ग्लूकोज और अन्य सामग्री पहुँचाई गई।

बुधवार को भी आंदोलन स्थल पर बड़ी संख्या में साधु-संत इकट्ठा हो गए। विरोध के दौरान ही सुबह करीब 11.30 बजे विजयसदास नाम के एक संत ने धरनास्थल के पीछे जाकर ज्वलनशील पदार्थ अपने शरीर पर छिड़ककर आग लगा ली। 

संत को आत्मदाह करता देख वहाँ मौजूद पुलिसकर्मियों और अन्य संतों ने तुरंत आग बुझाई। संत विजयदास को डीग के स्थानीय अस्पताल ले जाया गया, जहाँ प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें आरबीएम जिला अस्पताल रेफर किया गया है। अस्पताल के बाहर भी संतों का जमावड़ा लगा हुआ है।

संत विजयदास गाँव पासोपा के मंदिर पर ही रहते हैं। उधर बाबा नारायण दास अभी टावर पर ही बैठे हैं। मौके पर तैनात भारी पुलिस बल उन्हें मनाकर उतारने का प्रयास कर रही है। हालाँकि, बाबा नारायणदास खनन के खिलाफ अपने विरोध पर अडिग हैं। बुधवार को भरतपुर के संभागीय आयुक्त कार्यालय में साधु-संतों के साथ वार्ता की बात कही जा रही है।

गौरतलब है कि अवैध खनन के विरोध में 16 जनवरी 2021 से शुरू हुआ यह विरोध प्रदर्शन अब भी जारी है। 6 अप्रैल 2021 को साधु-संतों का एक प्रतिनिधिमंडल ने सीएम अशोक गहलोत से मुलाकात की थी।

11 जुलाई 2022 को बाबा हरिबोल दास ने अलीपुर में आयोजित सभा के दौरान कफन पहनकर आत्मदाह करने का ऐलान किया था। इस दौरान उन्होंने कफन यात्रा निकाली थी और 19 जुलाई 2021 को आत्मदाह करने की घोषणा की थी।

वहीं, मान मंदिर के कार्यकारी अध्यक्ष राधाकांत शास्त्री के नेतृत्व में 11 सितंबर 2021 को एक प्रतिनिधिमंडल कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी से भी मुलाकात की थी। प्रियंका गाँधी ने प्रतिनिधिमंडल से अवैध खनन को लेकर सरकार की ओर से आवश्यक कदम उठाने का आश्वासन दिया था, लेकिन यह आश्वासन ही रह गया। 

संतों का कहना है कि अवैध खनन को लेकर अब 100 से भी अधिक अधिकारियों और सैकड़ों विधायक एवं मंत्रियों को 350 से भी ज्यादा ज्ञापन दिए गए, लेकिन उनकी माँगें पूरी नहीं की गईं।

अवैध खनन के खिलाफ साधु-संतों ने आसपास के गाँवों में कई बार जनसंपर्क अभियान, पदयात्रा, धरना-प्रदर्शन, ट्रैक्टर रैली, सड़क जाम, आमरण अनशन, क्रांति यात्रा आदि तक की, लेकिन आदिबद्री-कनकांचल पर्वतों पर खनन नहीं रूका। इसके बाद संतों में आक्रोश फैल गया। 

यहाँ बताना आवश्यक है कि वर्ष 2009 में भी भरतपुर के डीग व कामां तहसील में पड़ रहे ब्रज के धार्मिक पर्वतों को संरक्षित वनक्षेत्र घोषित किया गया था। उस समय तहसील में अंतर होने से ब्रज के प्रमुख पर्वत कनकांचल और आदिबद्री का कुछ हिस्सा संरक्षित वन क्षेत्र होने से छूट गया था। इसके कारण वहाँ खनन जारी है।

यदि कनकांचल और आदिबद्री पर्वत के क्षेत्र को वन संरक्षित क्षेत्र का दर्जा दे दिया जाता है तो वहाँ खनन नहीं हो पाएगा। इससे तत्कालीन जिला कलक्टर डॉ. हिमांशु गुप्ता ने प्रस्ताव तैयार कर राज्य सरकार को भेजा था। बता दें कि 1996 में सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के अनुसार वन संरक्षित क्षेत्र में खनन प्रतिबंधित है।

बता दें कि कि अवैध खनन राजस्थान मेें भ्रष्टाचार का एक प्रमुख कारण है। खनन को लेकर आए दिन हत्याएँ होती रहती हैं। पिछले साल खनन घोटाला भी सामने आया था। खनन घोटाला के कारण राज्य को लगभग 1000 करोड़ रुपए के नुकसान का अनुमान लगाया गया है।

दरअसल, लाइमस्टोन (चूना पत्थर) की माइंस को मार्बल की श्रेणी में डाल कर ‘RDSA माइनिंग’ को आवंटित कर दिया गया। बता दें कि लाइमस्टोन मेजर मिनरल की श्रेणी में आता है, जिसकी नीलामी केंद्र द्वारा तय नियमों के अनुसार होती है।

राजस्थान के खनन विभाग ने प्रतापगढ़ के पिपलखूँट तहसील के दाँता में 74.249 हेक्टेयर और केला-मेला में 10.4162 हेक्टेयर के क्षेत्र में फैले लाइमस्टोन (सीमेंट बनाने में इसका उपयोग होता है) को मार्बल (संगमरमर) दिखा दिया।

मार्बल माइनर मिनरल में आता है, इसीलिए इसकी नीलामी में राज्य की ही भूमिका होती है। इस तरह श्रेणी बदल कर दोनों ब्लॉक का आवंटन किया गया। खनन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव सुबोध अग्रवाल और खान निदेशक केबी पांड्या इस मामले में निशाने पर हैं।