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भारत को इस्लामी मुल्क बनाने वाले आरोपित PFI आतंकी सिर्फ 3 चैनल से करेंगे बात – BBC, NDTV, TheWire: देखें पोस्टर

बिहार के पटना में पुलिस ने इसी माह एक देशविरोधी गठजोड़ का पर्दाफाश किया था। यह गठजोड़ देश को साल 2047 तक इस्लामी राष्ट्र बनाना चाहता था। इसमें आरोपित नंबर 18 का नाम मंजर परवेज है, जो अतहर परवेज का भाई है। जब मीडियाकर्मियों ने अतहर परवेज का पक्ष जानना चाहा तो उनके घर के आगे एक पोस्टर चिपका दिखाई दिया। उस पोस्टर में परवेज के घर वालों ने केवल द वायर, NDTV और BBC के पत्रकारों से बात करने का एलान किया है।

17 जुलाई 2022 (रविवार) को ब्लॉगर रवि रंजन ने मंजर परवेज के घर की फोटो ट्वीट की है। रवि रंजन का दावा है कि भारत के एक नामी चैनल में उनके मित्र पत्रकार ने उस घर के आगे से वो फोटो खींच कर उन्हें भेजी है। रवि रंजन ने लिखा, “पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है लेकिन हैरानी की बात है कि वो (परवेज के परिजन) कुछ चैनलों के लिए काफी इच्छुक हैं। एक प्रसिद्ध चैनल में पत्रकार मेरे एक दोस्त ने परवेज के परिवार का वर्जन लेना चाहा तो वहाँ लगे इन पोस्टरों ने उन्हें खुद ही जवाब दे दिया।”

रवि रंजन ने आगे लिखा, “ये वो समय है जब सरकार सभी देश विरोधी तत्वों की तलाश कर रही है। सफेद रंग के इस पोस्टर पर हेडलाइन में ‘एलाउड’ लिखा है। उसके नीचे काले रंग की स्याही से क्रमशः NDTV, द वायर और BBC लिखा हुआ है। घर का नीले रंग का गेट बंद था और अंदर एक बाइक खड़ी हुई दिखाई दे रही थी।

ATS की मदरसे में छापेमारी

गौरतलब है कि PFI के देशव्यापी देशविरोधी लिंक की तलाश करते हुए पटना ATS ने फुलवारी शरीफ के एक मदरसे में छापेमारी की है। यह मदरसा मक्का जामा मस्जिद के बगल में है। मदरसे का नाम तालीम वो तरबियत है। यहाँ पर कुल 3 स्टाफ हैं। इस मदरसे में PFI से जुड़े लोगों को ट्रेनिंग दिए जाने का शक है। यहाँ पर तमिलनाडु और तेलंगाना से एक दर्जन लोगों के ट्रेनिंग लिए जाने का शक है।

पुलवामा में आतंकी हमला, CRPF जवान वीरगति को प्राप्त: सेब के बगीचे में छिप कर गोलीबारी, 5 दिन में दूसरा हमला

जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में आतंकियों ने एक बार फिर सुरक्षाबल पर हमला किया है। घटना गंगू क्रॉसिंग की है। हमले में एक सीआरपीएफ जवान के वीरगति प्राप्त करने की खबरें आ रही हैं। उनकी पहचान एएसआई विनोद कुमार के तौर पर हुई है। सुरक्षाबल ने इलाके की घेराबंदी शुरू कर दी है। आतंकियों की तलाश की जा रही है।

अभी तक की पड़ताल में सामने आया है कि सेब के बगीचे के नजदीक से चेकपोस्ट पर फायरिंग की गई जिसमें एएसआई विनोद बुरी तरह घायल हुए। मौके पर मौजूद उनके अन्य साथी उन्हें अस्पताल लेकर गए लेकिन वहाँ वह ज्यादा देर जीवित नहीं रह पाए।

एक अधिकारी ने बताया कि ये हमला रविवार दोपहर 2 बजकर 20 मिनट पर गंगू इलाके में पुलिस और सीआरपीएफ की संयुक्त नाका पार्टी पर अचानक हुआ।

बता दें कि जम्मू-कश्मीर में सुरक्षाबल पर आतंकियों का एक हफ्ते में ये दूसरा हमला है। इससे पहले 12 जुलाई 2022 को कश्मीर जोन पुलिस के ट्विटर हैंडल से किए गए ट्वीट में कहा गया था कि श्रीनगर शहर में आतंकियों ने लाल बाजार क्षेत्र में फायरिंग की। घटना में 3 पुलिसकर्मी जख्मी हो गए और उन्हें अस्पताल में भर्ती करवाया गया है।

हालाँकि बाद में खबर आई कि मंगलवार को हुए इस हमले में एएसआई मुश्ताक अहमद लोन वीरगति को प्राप्त हो गए। मुश्ताक उस समय लाल चौक ड्यूटी पर थे कि तभी आतंकियों ने फायरिंग शुरू कर दी। आतंकियों के जाने के बाद मुश्ताक को अस्पताल भी लेकर जाया गया, लेकिन उन्होंने दम तोड़ दिया। घटना की जिम्मेदारी आईएसआईएस द्वारा ली गई थी।

उल्लेखनीय है कुछ पाकिस्तानी पिछले दिनों पुलवामा जैसे हमलों को दोहराने की बात करते सोशल मीडिया पर करते हुए दिखे थे। खुलेआम भारतीय पत्रकार आदित्य राज कौल से कहा गया कि वो लोग बस पुलवामा और उरी स्ट्राइकों का इंतजार करें। ये ट्वीट 8 जुलाई का ही है।

इमाम ने मीट की बढ़ती कीमतों के लिए महिलाओं की जाँघों को बताया जिम्मेदार, कहा – नंगी होने से सस्ता हो जाता है महिलाओं का मांस

सोवियत संघ (USSR) टूटने के बाद अलग देश बने मुस्लिम बहुल किर्गिस्तान (Kyrgyzstan) में एक इमाम ने देश में मांस की आसमान छूती कीमतों के लिए महिलाओं को दोषी ठहराया है। इमाम का कहना है कि महिलाएँ अपनी बहुत अधिक देह दिखाकर खुद को ‘सस्ता’ ली हैं।

राजधानी बिश्केक में में इमाम सदाबकास डूलोव ने कहा, “क्या आप जानते हैं कि आपके शहर में मांस की कीमतें कब बढ़ जाती हैं? यह तब बढ़ जाता है जब महिलाओं का मांस सस्ता हो जाता है। महिला का मांस सस्ता हो जाता है जब वह अपनी त्वचा को नंगा करती है। अपनी जांघों को अंगूठे की तरह दिखाती है।”

एक इस्लामिक विश्वविद्यालय के प्रमुख के रूप में काम कर चुके और पुरस्कार प्राप्त कर चुके इस मुल्ला ने बुजुर्ग मर्दों से ‘इस अपमानजनक’ काम को समाप्त करने कहा था। उसने महिलाओं से कम और चिपके कपड़े नहीं पहनने का आह्वान किया।

53 वर्षीय डूलोव की इस टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर उनकी खूब आलोचना हो रही है। किर्गिस्तान के लोग इमाम पर महिलाओं का अपमान करने और उसके साथ भेदभाव करने का आरोप लगाते हुए उसके खिलाफ आपराधिक जाँच की माँग कर रहे हैं।

हालाँकि,मदेश की सर्वोच्च इस्लामी संस्था इमाम के साथ है और उसका कहना है कि उनकी टिप्पणियों ने कोई नियम नहीं तोड़ा है। सरकार समर्थित किर्गिस्तानी मुस्लिम आध्यात्मिक प्रशासन (DUMKE) ने डूलोव के विवादास्पद भाषण की जाँच शुरू की है।

DUMK ने कहा कि जाँच में पाया गया कि डूलोव की टिप्पणी ने किसी भी इस्लामी कानून का उल्लंघन नहीं किया और ना ही किसी का अपमान है। इसके अलावा राजनीति में हस्तक्षेप भी नहीं की गई है। डूलोव को साल 2020 में DUMK के प्रतिष्ठित आइकोल पदक से सम्मानित किया गया था। DUMK के अनुसार, डूलोव के भाषण को कई लोगों ने गलत समझा।

डूलोव का कहना है कि 30 मिनट के उनकी तकरीर के दौरान की गई टिप्पणियों को संदर्भ से बाहर लेकर आलोचकों द्वारा गलत व्याख्या की गई। उन्होंने कहा कि इससे उनका मतलब नैतिक मूल्यों से था। डूलोव ने कहा, “कुछ शब्द थे कि आप मांस की (उच्च) कीमतों के बारे में क्यों बात कर रहे हैं, लेकिन जब महिलाएँ अपने नग्न शरीर के साथ घूमती हैं तो आपका सम्मान खराब नहीं होता है।”

इमाम डूलोव ने कहा कि उनका इरादा महिलाओं को नीचा दिखाने का नहीं था। हालाँकि, लेकिन कई किर्गिज़ सोशल-मीडिया यूजर ने उन पर गलतफहमी, अज्ञानता और धर्म को गलत तरीके से प्रस्तुत करने का आरोप लगाया है। एक किर्गिज़ व्यक्ति ने लिखा है कि डूलोव की टिप्पणी चरमपंथी विचारों का प्रतिनिधित्व करती हैं।

वहीं, एक किर्गिज़ महिला ने कटाक्ष करते हुए कहा कि उसने छोटी स्कर्ट नहीं पहनी होती अगर उसे पता होता कि इसके इतने गंभीर परिणाम निकलेंगे। महिला ने लिखा, “आर्थिक संकट और खराब सड़कों के पीछे भी महिलाएँ ही हैं।”

कुछ लोगों ने कहा कि इमाम द्वारा इस्लाम की व्याख्या की भी जाँच की जानी चाहिए। कई अन्य लोगों ने चिंता व्यक्त की कि संदिग्ध विचारों वाला धार्मिक व्यक्ति आज के युवा पीढ़ी को इस्लाम सिखा रहा है।

कहा जाता है कि डूलोव ने 80-90 के दशक में पड़ोसी देश ताजिकिस्तान के मदरसे में धार्मिक शिक्षा प्राप्त की थी। वह दक्षिणी किर्गिस्तान में ओश स्टेट यूनिवर्सिटी में भाषाशास्त्र का भी अध्ययन किया। डूलोव ने किर्गिस्तान में कम से कम दो इस्लामिक स्कूलों के प्रमुख के रूप में काम किया था। वह वर्तमान में बिश्केक के स्वेर्दलोव जिले की एक मस्जिद में इमाम हैं।

‘वो सुपर रिच, पैसे की खातिर बिक गई?’: सुष्मिता सेन और ललित मोदी के रिश्ते पर बोलीं तसलीमा नसरीन – जिन्हें पैसों से प्यार, वो खो देते हैं आत्मसम्मान

बॉलीवुड एक्ट्रेस सुष्मिता सेन और ललित मोदी के अफेयर की खबरों के बीच प्रसिद्ध बांग्लादेशी लेखिका तसलीमा नसरीन ने एक्ट्रेस पर कटाक्ष किया है। उन्होंने कहा कि जिन्हें पैसों से प्यार हो जाता है वो बहुत ही जल्दी अपने आत्म सम्मान को भी खो देता है। हाल ही में ललित मोदी ने भी सुष्मिता सेन को अपना बेटर हाफ बताया था।

तसलीमा नसरीन ने दोनों के बीच नजदीकियों की खबरों को लेकर कहा, “मुझे सुष्मिता सेन का व्यक्तित्व बहुत अधिक पसंद आया था। उन्होंने कम उम्र में ही दो बेटियों को गोद ले लिया था। मुझे उनकी ईमानदारी, दृढ़ता, बहादुरी, सीधापन अच्छा लगा था। लेकिन, अब वो अलग-अलग अपराधों में शामिल एक व्यक्ति के साथ अपना जीवन बिता रही हैं। वह व्यक्ति बहुत ही अनाकर्षक है। क्या इसका मतलब ये है कि वो व्यक्ति सुपर रिच है? क्या वो पैसे की खातिर बिक गईं?”

लेखिका कहती हैं कि हो सकता है कि सुष्मिता सेन को उस व्यक्ति से प्यार हो, लेकिन मैं इस पर विश्वास नहीं कर सकती। पैसों से प्यार करने वाले मेरी नजरों में अपनी इज्जत खो देते हैं। पूर्व मिस यूनिवर्स के साथ अपनी मुलाकात को याद कर तसलीमा ने लिखा, “मैं सुष्मिता सेन से केवल एक बार मिली थी वो भी कोलकाता एयरपोर्ट पर। उन्होंने मुझे गले लगाया और ‘आई लव यू’ कहा। वो अच्छी-खासी लंबी हैं, इसलिए उनके बगल में खड़े होकर मुझे लगा कि मैं अचानक से छोटी हो गई हूँ। मैं उनकी सुंदरता को अपनी आँखों से आसानी से नहीं हटा पा रही थी।”

क्यों ट्रोल हो रही सुष्मिता सेन

गौरतलब है कि हाल ही में आईपीएल फिक्सिंग के आरोपित भगोड़े ललित मोदी ने एक ट्वीट किया था, जिसमें उन्होंने एक्ट्रेस को बेटर हाफ करार दिया था। बाद में ललित मोदी ने ये स्पष्ट किया कि वे दोनों एक दूसरे को डेट कर रहे हैं। ललित मोदी मौजूदा वक्त में एक व्यवसायी हैं। फिक्सिंग मामले में फंसने के बाद ललित मोदी लंदन भाग गए थे।

‘उर्दू नहीं बोल पाया तो 22 साल के चंदू को मार डाला’: कर्नाटक पुलिस की चार्जशीट में खुलासा, छुरा घोंप कर हुई थी हत्या

कर्नाटक पुलिस ने 5 अप्रैल 2022 को बेंगलुरु शहर में हुई चंदू नाम के हिन्दू युवक की हत्या के केस में कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी है। इस चार्जशीट के मुताबिक, चंदू को उर्दू न बोल पाने के चलते मारा गया था। इस केस में पुलिस ने मुस्लिम समुदाय के कुल 4 आरोपितों को गिरफ्तार किया था जिसमें एक नाबालिग भी था। चंदू की हत्या छुरा घोंप कर की गई थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कर्नाटक पुलिस के CID डिपार्टमेंट ने 171 पन्नों की चर्जशीट ACJM कोर्ट में दाखिल कर दी है। इस चार्जशीट में कुल 49 लोगों को गवाह बनाया गया है। पुलिस की चार्जशीट के मुताबिक, 22 साल का चंदू 5 अप्रैल को अपने दोस्त साइमन राज के साथ बाइक से जा रहा था। उसी दिन उसके दोस्त साइमन का जन्मदिन भी था। इसी बीच सड़क पर पैदल चल रहे शाहिद पाशा ने साइमन को गालियाँ देनी शुरू कर दी। दोनों ने पाशा से पूछताछ की तो उसने गाली देने के आरोप से इनकार कर दिया।”

चार्जशीट के मुताबिक, “थोड़ी देर बाद राजू और साइमन एक बेकरी की दुकान पर गए। वहाँ पर उन्हें आरोपितों में से एक अन्य मिला जिसने राजू और उसके दोस्त से बदतमीजी की। वाद-विवाद बढ़ा तो राजू और साइमन ने आरोपित को धक्का दे दिया था। कुछ देर बाद आरोपितों ने एक साथ जुट कर चंदू और उसके दोस्त पर चाकुओं से हमला कर दिया। इस हमले के बीच साइमन राज भाग निकला लेकिन चंदू की जाँघ में चाकू लग जाने के चलते वो भाग नहीं पाया। थोड़ी देर बाद साइमन फिर लौट कर वापस आया और स्थानीय लोगों की मदद से चंदू को अस्पताल में भर्ती करवाया। वहाँ अधिक खून बह जाने के चलते चंदू ने दम तोड़ दिया।”

एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक बेकरी पर शाहिद पाशा ने अपने साथियों को जमा कर लिया था। चंदू कन्नड़ बोल रहा था जिस पर शाहिद पाशा ने उसे उर्दू बोलने के लिए कहा। चंदू उर्दू नहीं बोल पाया और इस बीच हमलावरों ने उसकी हत्या कर दी। चंदू की हत्या के बाद बेंगलुरु के तत्कालीन पुलिस कमिश्नर कमल पंत ने इसमें किसी साम्प्रदायिक एंगल से इंकार किया था। तब उन्होंने घटना को महज रोड रेज बताया था। हालाँकि, राज्य के भाजपा नेताओं ने लगातार इस घटना को उर्दू न बोलने के चलते हुआ विवाद बताया था।

‘तो राबड़ी देवी क्या थीं?’: तेजस्वी यादव ने द्रौपदी मुर्मू को बता दिया ‘मूर्ति’ तो लोगों ने लपेटा, BJP का तंज- अपना बचपन याद कीजिए

राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की राष्ट्रपति प्रत्याशी और भाजपा नेता द्रौपदी मुर्मू (Draupadi Murmu) को बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता और राजद प्रमुख लालू यादव के बेटे तेजस्वी यादव ने टिप्पणी की है। इस टिप्पणी पर बवाल हो गया है। वहीं, सोशल मीडिया पर लोग उनकी माँ राबड़ी देवी की याद दिला रहे हैं, जब उन्हें बिहार का मुख्यमंत्री बनाया गया था।

तेजस्वी ने कहा, “राष्ट्रपति भवन में हमें कोई मूर्ति तो नहीं चाहिए। हम राष्ट्रपति का चुनाव कर रहे हैं। आपने यशवंत सिन्हा को हमेशा सुना होगा, लेकिन सत्ता पक्ष की राष्ट्रपति की उम्मीदवार को हमने कभी नहीं सुना है। वे जब से उम्मीदवार बनी हैं उन्होंने एक भी प्रेस वार्ता नहीं की है।”

तेजस्वी यादव की इस टिप्पणी को भाजपा (BJP) ने महिला विरोधी बताया है। बीजेपी नेता शाहजाद पूनावाला ने कहा कि तेजस्वी यादव अपने बयान के लिए माफी माँगनी चाहिए। पूनावाला ने ट्वीट किया, “पुडुचेरी कॉन्ग्रेस ने उन्हें ‘डमी’ कहा और अब आरजेडी उन्हें ‘मूर्ति’ बता रही है। तेजस्वी यादव का बयान आदिवासी विरोधी मानसिकता को दिखाता है।”

राबड़ी देवी को बिहार का मुख्यमंत्री की घटना की याद दिलाते हुए बिहार भाजपा के अध्यक्ष संजय जायसवाल ने कहा, “अब तेजस्वी यादव को अपना बचपन याद आ गया होगा कि किस तरह बिहार के तथाकथित समाजवाद नेता ने एक घरेलू महिला को अपना मुख्यमंत्री मानकर उसकी गुलामी का काम किया। इसलिए वह देश की सभी महिलाओं को वही महिला मुख्यमंत्री के रूप में ही पहचान कर पाते हैं।”

तेजस्वी यादव के बयान की सोशल मीडिया पर भी खूब आलोचना हो रही है। लोग उन्हें 1990 का दशक याद दिला रहे हैं, जब लालू यादव ने अपने पार्टी के दिग्गज नेताओं को दरकिनार को पत्नी राबड़ी देवी को अचानक ही बिहार का मुख्यमंत्री घोषित कर दिया था और पार्टी ने नेताओं ने चुपचाप इसे स्वीकार कर लिया था।

प्रशांत भारती नाम के एक ट्विटर यूजर ने लिखा, “द्रौपदी जी को तो हमने नहीं सुना। वैसे हमें तेजस्वी जैसे लोग चाहिए। आपने तो सुना ही होगा। जिसने नहीं सुना वो जाकर राबड़ी देवी के भाषण को सुनें, मंच पर भी पढ़ाने के लिए एक ट्यूटर सामने रहते थे।”

वीरेंद्र पाल नाम के एक यूजर ने लिखा, “द्रौपदी मुर्मू मूर्ति हैं तेजस्वी यादव। राबड़ी देवी क्या थीं? राबड़ी देवी को कोई राजनीतिक अनुभव था क्या? राबड़ी देवी को कोई शिक्षा प्राप्त थी क्या? राबड़ी देवी को कोई प्रशासनिक अनुभव था क्या? तेजस्वी खुद 6 मिनट के भाषण में 4 बार अटकते हैं। लिखे हुए को पढ़ नहीं पाते हैं।”

भाजपा नेता अतुल कुमार लिखते हैं, “बिहार के 9वीं पास तेजस्वी यादव ने कहा कि की माननीय द्रौपदी मुर्मू जी को आज तक बोलते नही सुना! राष्ट्रपति भवन में मूर्ति को बैठाया जा रहा है! महिलाओं का सम्मान करना सीखो और अपनी माँ राबड़ी देवी को भी याद करो! शर्म करो और थोड़ा भाषण भी सुन लो वो भी अंग्रेजी में!”

रवि रंजन गिरि नाम के एक यूजर ने कटाक्ष करते हुए लिखा, “सही बोले हैं तेजस्वी, अगर किसी महिला को ही राष्ट्रपति बनाना मजबूरी था तो देश की तेजतर्रार और जेएनयू की पूर्व प्रोफेसर डॉ. (श्रीमती) राबड़ी देवी में क्या कमी थी।”

राष्ट्रपति और PM के पद पर मुस्लिमों को देखना चाहते हैं ‘जय श्री राम’ से घृणा करने वाले ये लिबरल पत्रकार: जैन-पारसी अल्पसंख्यक नहीं? लोकतंत्र से नहीं चलेगा देश?

भारत में एक ओर जहाँ कट्टरपंथियों द्वारा देश को इस्लामी मुल्क बनाने की कोशिशें चल रही हैं, आए दिन बयान और दस्तावेज बरामद हो रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सेकुलर गिरोह इस चिंता में डूब रखा है कि क्या भारत में कभी कोई मुस्लिम दोबारा से राज कर पाएगा! 

पत्रकार प्रीतिश नंदी ने आज (17 जुलाई 2022) इस संबंध में एक ट्वीट किया है। इस ट्वीट में उन्होंने अपने फॉलोवर्स को समझाया है कि देखो विदेशों में भारतीयों को राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री तक बनाया जा रहा है जबकि भारत में भारतीय मुसलमानों को इन पदों के लिए कोई पूछ भी नहीं रहा।

प्रीतिश नंदी का दुख जाहिरतौर पर भारत में मुस्लिमों के भविष्य को लेकर है या कह सकते हैं कि उनके लिए भारतीयों का अर्थ ही मुस्लिम होना है।

अगर ऐसा नहीं होता तो शायद उनके ट्वीट में विदेश के साथ भारत की तुलना इतनी अटपटे ढंग से नहीं होती और तुलना का आधार ‘समान मानक’ होते। इसके अलावा उनके ट्वीट में अन्य अल्पसंख्यक समुदायों की भी चिंता दिखती।

लेकिन नहीं! ट्वीट को पढ़िए। इसमें खासतौर पर सिर्फ ‘मुस्लिम’ शब्द लिखा गया है। इसमें न पारसी है, न जैन है, न ईसाई है और न ही सिख हैं। जबकि इन लोगों की संख्या देश में मुस्लिमों से कम है।

अगर कोई वाकई अल्पसंख्यक समुदाय को लेकर चिंतित है तो पहले तो इन समुदायों के अधिकार की बात उठाई जानी चाहिए। मगर, एक समय में जय श्रीराम पर सवाल उठाने वाले प्रीतिश या उनके गिरोह वाले ऐसा नहीं करेंगे। वो जानते हैं कि उन्हें समााजिक कल्याण नहीं, एक तय एजेंडा को लेकर आगे बढ़ना है और ये तभी पूरा हो पाएगा जब विदेशों से भारत की तुलना गलत ढंग से करेंगे।

डॉ एपीजे अब्दुल कलाम से लेकर रामनाथ कोविंद तक

प्रीतिश ने अपने ट्वीट में लिखा है, “भारतीय मूल की महिला अमेरिका में उप-राष्ट्रपति है। एक भारतीय मूल का व्यक्ति ब्रिटेन का प्रधानमंत्री बनने जा रहा है। लेकिन क्या कभी भारत में दोबारा भारतीय मुस्लिम प्रधानमंत्री बन या राष्ट्रपति दोबारा बन पाएगा?”

लिबरल बुद्धिजीवी के इस ट्वीट में ‘मूल’ को आधार बनाकर विदेश की तारीफ की गई है और दूसरी ओर ‘मजहब’ को आधार बनाकर भारत को बदनाम किया गया है।

ये तुलना वाजिब कैसे हो सकती है जब न स्थिति एक जैसी है, न राजनीति और न ही मानक। नंदी की तुलना उचित तो तब होती न जब उन्होंने ये बताया होता कि भारतीय मुस्लिमों को अमेरिका और ब्रिटेन में राष्ट्रपति-प्रधानमंत्री बनाया जा रहा है जबकि भारत में ऐसा नहीं हो रहा है।

प्रीतिश भूल चुके हैं कि जिस मजहब के बूते वह देश को बदनाम करने की साजिश रच रहे हैं। उसी मजहब के डॉ एपीजे अब्दुल कलाम का नाम देश के सबसे पॉपुलर राष्ट्रपतियों की लिस्ट में शुमार है। अगर भारत की रणनीति भेदभाव वाली होती तो क्या कभी ऐसा संभव होता कि देश में वह राष्ट्रपति बनते या मनमोहन सिंह के तौर पर एक सिख को प्रधानमंत्री चुना जाता या फिर दलित रामनाथ कोविंद को देश के सर्वोच्च पद पर बिठाकर पूरे समुदाय का सम्मान किया जाता।

आज द्रौपदी मुर्मू राष्ट्रपति पद की सशक्त उम्मीदवार हैं। पूरा देश उन्हें समर्थन दे रहा है। इसकी वजह यही है कि जाति-धर्म से उठकर देश में पिछड़े तबकों का कल्याण प्राथमिकता है। मगर प्रीतिश जैसे लोगों का क्या किया जाए तो रह-रहकर देश को एक सिरे पर बाँधना चाहते हैं और सोचते हैं कि उसी सिरे से देश की चाल तय हो।

हिंदू बहुल देश में मुस्लिम समुदाय के व्यक्ति को पीएम और राष्ट्रपति बनाने की जो इच्छा जाहिर की जा रही है। वैसे इच्छाएँ कभी दूसरे देश जहाँ हिंदू अल्पसंख्यक हैं उन्हें लेकर क्यों नहीं होती?

आखिर क्यों जब आम आदमी पार्टी को पंजाब में राजनीति करनी होती है तो वो चेहरा भगवंत मान को बनाते हैं। क्यों गुजरात में जाकर कहा जाता है कि आखिर कोई मराठी गुजरातियों पर राज कैसे कर सकता है… क्या इन स्थितियों में भेदभाव की गंध नहीं आती। क्या तब सवाल नहीं बनता जब कॉन्ग्रेस दसियों पार्टी मीटिंग के बाद भी अध्यक्ष के तौर पर या तो सोनिया गाँधी को चुनती है या फिर राहुल गाँधी को अगला अध्यक्ष चाहती है।

लोकतांत्रिक प्रक्रिया से चुने जाते हैं राष्ट्रपति और पीएम

परिवारवाद पर सवाल न उठा पाने वाले पत्रकार ही हैं जिन्होंने देश का अर्थ केवल मुस्लिम समुदाय को आँक लिया है। वो भूल चुके हैं उस लोकतांत्रिक प्रक्रिया को, जिसके तहत देश में प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति का चुनाव होता है। ये सीधा इल्जाम देश की बहुसंख्यक जनता पर लगाते हैं। ऐसे दिखाया जाता है कि जैसे हिंदुओं ने किसी को पीएम और राष्ट्रपति बनने से रोक दिया हो।

संवैधानिक प्रक्रिया कहती है कि अगर किसी को प्रधानमंत्री बनना है तो उनके दल की लोकसभा चुनावों में जीत होनी चाहिए। इसी तरह अगर कोई दल चाहता है कि उनका प्रत्याशी राष्ट्रपति बने तो उसके साथ अन्य पार्टियों का समर्थन होना चाहिए। जैसे कल राष्ट्रपति चुनाव हैं और द्रौपदी मुर्मू के पास अभी से 60 फीसद से ज्यादा समर्थन आ गया है। लोग उन्हें इसलिए सपोर्ट नहीं कर रहे कि उन्हें एनडीए ने मैदान में उतारा है। उनका साथ इसलिए दिया जा रहा है क्योंकि वो जनजाति समुदाय से आती हैं और इस तरह उनके पद पर बैठने से संदेश समाज में जाएगा कि किसी समुदाय के साथ देश में भेदभाव नहीं हो रहा।

‘नबी की शान में ग़ुस्ताख़ी… गला काटना पड़ेगा’: नूपुर शर्मा की तस्वीर लगाने पर जीजा-साले को धमकी, बिलाल-शकील समेत 5 गिरफ्तार

पैगंबर मुहम्मद को लेकर नूपुर शर्मा के कथित बयान का समर्थन करने वाले व्यक्तियों को लगातार धमकियाँ दी जा रही है। इसी क्रम में राजस्थान के भीलवाड़ा में नूपुर शर्मा का समर्थन करने के मामले में जीजा-साले को सिर तन से जुदा वाली धमकियाँ दी गई हैं। शिकायत के बाद पाँच आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, घटना भीलवाड़ा जिले के गंगापुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले पोटला गाँव की है। पोटला कस्बे में अपने ननिहाल में रहने वाले आयुष सोनी ने अपने व्हाट्सएप स्टेटस के तौर पर नूपुर शर्मा की तस्वीर लगाई थी, जिसके बाद गाँव के ही रहने वाले पाँच मुस्लिमों ने इसे ‘नबी की शान में गुस्ताखी’ मान लिया। इसके बाद आशिक उर्फ बबरी, शकील शाह, बिलाल मोहम्मद, आरीफ मोहम्मद व मोहम्मद तालिम रंगरेज ने आयुष और उसके जीजा को धमकाना शुरू कर दिया। आयुष के जीजा को धमकी में कहा गया, “नबी की शान में गुस्ताखी बर्दाश्त नहीं, सिर कलम करवाना होगा।”

धमकियाँ मिलने के बाद आयुष के जीजा ने पुलिस में इसकी शिकायत की। इस मामले में तुरंत एक्शन लेते हुए पुलिस ने पाँचों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया। इस बीच इस्लामि धमकियों के विरोध में हिन्दू संगठन के आह्वान पर लोगों ने पोटला गाँव में बंद रखा। हालात को देखते हुए गाँव में पुलिस बलों की तैनाती की गई है। वहीं ग्रामीणों ने गंगापुर उपखंड के अधिकारी को ज्ञापन सौंपा है।

गौरतलब है कि इससे पहले राजस्थान के उदयपुर में 28 जून को कथित तौर पर सोशल मीडिया पर नूपुर शर्मा का समर्थन करने के आरोप में कन्हैयालाल दर्जी की हत्या कर दी गई थी। इसी तरह से महाराष्ट्र के अमरावती में भी उमेश कोल्हे नाम के हिन्दू की भी हत्या की गई थी। यहीं नहीं देशभर में जहाँ भी लोग नूपुर शर्मा का समर्थन करते हैं वहाँ उन्हें हत्या की धमकियाँ दी जाती हैं।

पाकिस्तान में पर्यटन स्थलों पर महिलाओं की एंट्री बैन, इस्लामी सम्मेलन में इसे बताया ‘अश्लील’: पुरुषों से कहा – औरतों को लेकर मत घूमो

पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रान्त के बाजौर में आयोजित एक जिरगा (सम्मेलन) में महिलाओं के पुरुषों के साथ पर्यटन स्थलों पर जाने पर रोक लगा दी गई है। जिरगा ने इसे अपनी संस्कृति बचाने वाला कदम बताते हुए महिला और पुरुषों द्वारा पर्यटन स्थलों पर अश्लीलता करने का आरोप लगाया है। इस फैसले को 17 जुलाई, 2022 (रविवार) तक हर हाल में कड़ाई से लागू करने के भी निर्देश दिए गए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस जिरगा में कई बुजुर्ग शामिल थे। यह सम्मेलन सलारजी तहसील में शनिवार (16 जुलाई, 2022) को आयोजित हुआ था। इस सम्मेलन में साफ़ कहा गया है कि अगर सरकार ने इस पर अमल नहीं किया तो जिरगा इसे खुद लागू करेगी। इस सम्मेलन का आयोजन पाकिस्तान की जमीयत उलेमा ए इस्लाम फ़ैज़ी (JUI-F) ने किया था।

DAWN के मुताबिक, इस सम्मेलन में JUI-F के जिलाध्यक्ष मौलाना अब्दुर रशीद और खार तहसील काउंसिल के चेयरमैन हाजी सईद बादशाह मुख्य वक्त रहे। इन सभी ने सामूहिक रूप से कहा, “बकरीद में हमने देखा कि कई महिलाएँ अपने शौहरों और कुछ तो अपने रिश्तेदारों के साथ कई टूरिस्ट स्थलों पर ऐसे घूम रही थी जैसे वो पिकनिक मनाने आई हों। इतना ही नहीं, उन सभी ये यहाँ गीत-संगीत के प्रोगाम किए और नाव की सवारी की। यह न सिर्फ हमारी स्थानीय परम्परा का अपमान है बल्कि इस्लामी कानूनों के भी खिलाफ है।”

जिरगा में एक स्वर में ऐसी हरकतों के लिए इस्लाम में कोई जगह न होने का एलान करते हुए आगे से ऐसा किसी भी हाल में रोकने का संकल्प लिया गया। इस सम्मेलन पर औरतों को उनके लिए इस्लाम में बनाए गए नियम और कानूनों की याद दिलाई गई। बाद में इस मुद्दे पर बोलते हुए मौलाना रशीद ने कहा, “हम पर्यटन स्थलों पर महिलाओं की किसी भी हाल में इंट्री के खिलाफ हैं, भले ही वो पति के साथ हो या अकेले ही। हम इस क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देना चाहते हैं लेकिन हम यहाँ महिलाओं के आने के सख्त खिलाफ हैं। अश्लीलता को पर्यटन के नाम पर कतई सहन नहीं किया जाएगा।”

रिपोर्ट में बताया गया है कि जिरगा ने बाजौर क्षेत्र के निवासियों से अपील की है कि वो अपने घर की महिलाओं किसी टूरिस्ट प्लेस पर न ले जाएँ। क्षेत्र के टूरिस्ट स्थलों की सुरक्षा के लिए भी बाहरी लोगों के बजाए स्थानीय लोगों को ही नियुक्त करने की अपील की गई। इस मामले में जिला प्रशासन या किसी अन्य अधिकारी ने अभी तक कोई बयान नहीं दिया है।

पटियाला के काली माता मंदिर के दीवार पर लिखे गए खालिस्तानी नारे: आतंकी पन्नू ने जारी किया वीडियो, अमरिंदर सिंह ने सख्त कार्रवाई की माँग की

पंजाब (Punjab) में फिर से माहौल खराब करने की कोशिश की जा रही है। पटियाला (Patiala) के श्री काली माता मंदिर की दीवार पर कुछ अज्ञात व्यक्तियों ने खालिस्तान का पोस्टर लगा दिया गया है। प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह (Amarinder Singh) ने इस पर सख्त कार्रवाई करने की माँग की है।

काली माता के मंदिर पर खालिस्तान का पोस्टर लगाए जाने की जानकारी शुक्रवार (15 जुलाई 2022) को सुबह मिली। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुँची और पोस्टर को फाड़ दिया। वहीं, इस मामले में पटियाला की पुलिस ने जाँच शुरू कर दी है। कहा जा रहा है कि सुबह पाँच तक वहाँ कोई पोस्टर नहीं था।

इससे पहले 29 अप्रैल 2022 को खालिस्तान समर्थकों ने इसी मंदिर पर हमला कर दिया था और श्रद्धालुओं के साथ मारपीट की थी। हमले के बाद पुलिस ने मंदिर के चारों ओर सुरक्षा को बढ़ा दिया था। पुलिस सुरक्षा के बाद भी असामाजिक तत्वों ने मंदिर की दीवार पर अलगाववादी पोस्टर लगा दिए।

बात दें कि सुरक्षा के हालात को देखते हुए पटियाला पुलिस ने मंदिर के मुख्य गेट के बाहर बैरीकेड लगाकर पुलिसकर्मी भी तैनात किए हैं। इसके अलावा मंदिर के सभी रास्तों पर पुलिस और पैरा मिलिट्री फोर्स का पहरा रहता है।

इस घटना के बाद सिख ऑर जस्टिस (Sikh For Justice) के अलगाववादी गुरपतवंत सिंह पन्नू (Gurpatwant Singh Pannu) ने एक वीडियो मैसेज जारी किया है। वहीं, इस घटना की पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने निंदा की है और कहा कि राज्य के माहौल को खराब करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की माँग की।

इसके पहले 30 जून 2022 को जालंधर में पंजाब आर्म्ड पुलिस (PAP) की दीवारों पर खालिस्तान समर्थक नारे ऑपरेशन ब्लू स्टार की तारीख लिख दी गई थी। इसके साथ ही 26 जनवरी को आजाद पंजाब की बात लिखी थी।

इस घटना के बाद भी विदेश में बैठे गुरपतवंत सिंह पन्नू ने वीडियो जारी कर पंजाब पुलिस को सीधा चैलेंज किया था और कहा था कि नारे लिखने वाले ने बढ़िया काम किया है।