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हिजाबी छात्रा को डाँटने पर भीड़ ने खुलेआम शिक्षिका का कपड़े उतारे, मारपीट भी की: बंगाल की घटना, 4 गिरफ्तार

पश्चिम बंगाल के एक स्कूल से गुरुवार (21 जुला,ई 2022) को हैरान करने वाली घटना सामने आई। दक्षिण दिन्जापुर के त्रिमोहिनी प्रताप चंद्र हाई सेकेंडरी स्कूल में पढ़ाने वाली एक शिक्षिका ने एक छात्रा को डाँट दिया। इसके बाद कुछ छात्रों के अभिभावकों की भीड़ ने महिला शिक्षक के साथ मारपीट की और उनके कपड़े उतार दिए। बंगाल पुलिस ने इस मामले में 4 आरोपितों की गिरफ़्तारी की बात कही है। पुलिस ने बताया 24 जुलाई को मामला दर्ज किया गया और जाँच जारी है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक गुरुवार को जब नौवीं की छात्रा जरनातुन खातून क्लास करने की बजाय स्कूल के बरामदे में घूम रही थी तो शिक्षिका चैताली चाकी ने खातून का कान पकड़कर उसे डाँटा था। जरनातुन का आरोप है कि शिक्षिका ने उसकी पीठ पर तमाचा भी मारा। इस दौरान उसका हिजाब उसके सिर से नीचे फिसल गया था।

जरनातुन ने घर पहुँच कर अपने माता-पिता को इस घटना के बारे में बताया। इसके बाद परिवार के सदस्य और इलाके के अन्य लोग स्कूल पहुँच गए। वे इस बात से नाराज थे कि शिक्षिका ने छात्रा को इस तरह से मारा जिससे कि उसका हिजाब नीचे गिर गया। वे स्कूल के स्टाफ रूम में घुसे और शिक्षिका के साथ मारपीट की। उन्होंने मारपीट के दौरान चैताली चाकी के कपड़े भी खींचकर लगभग उतार दिए। यह देख अन्य शिक्षक सहम गए लेकिन वे भीड़ को रोक नहीं पाए।

सोशल मीडिया इसका एक वीडियो भी सामने आया है। इसमें अभिभावकों को स्टाफ रूम के अंदर मारपीट और हँगामा करते हुए देखा जा सकता है। इनमें से कुछ अभिभावकों ने मुस्लिम टोपी पहन रखी थी। 

इस घटना से स्कूल और उसके आसपास भारी तनाव पैदा हो गया। किसी तरह की हिंसा की घटना को रोकने के लिए पुलिस बल तैनात कर दिया गया। अगले दिन संयुक्त बीडीओ और जिला विद्यालय निरीक्षक ने स्थिति का जायजा लेने स्कूल का दौरा किया था।

गौरतलब है कि घटना के एक दिन बाद शुक्रवार (22 जुलाई 2022) को स्कूल के प्रिंसिपल कमल कुमार जैन ने दावा किया था कि दोनों पक्षों के बीच समझौते के बाद मामला सुलझ गया है। हालाँकि फौरन ही इस दावे को गलत पाया गया, क्योंकि जब दोनों पक्षों के बीच एक बैठक हुई थी, तो कोई समझौता नहीं हुआ थी। बाद में मामले में केस दर्ज कराने के लिए प्रिंसिपल खुद शिक्षक चैताली चाकी के साथ थाने गए। शिकायत में फिरदौस मंडल, अफरूजा मंडल, जाकिर हुसैन, मसूद खातून और मफूजा खातून समेत कई लोगों को नामजद किया गया है।

दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की माँग को लेकर पूरे दक्षिण दिनापुर जिले में शनिवार (23 जुलाई 2022) को विरोध प्रदर्शन किया गया। इस संबंध में स्थानीय भाजपा नेताओं सहित कई लोगों और संगठनों द्वारा पुलिस में पहले ही कई शिकायतें दर्ज कराई जा चुकी हैं।

क्षेत्र के कई स्कूलों के छात्रों ने कल विरोध प्रदर्शन किया और राष्ट्रीय राजमार्ग 512 को ब्लॉक कर दिया। उनके साथ कई पूर्व छात्र और अभिभावक भी शामिल हुए। हालाँकि बाद में जाम की वजह से बड़ी संख्या में वाहन फँसने के बाद पुलिस ने उन्हें मौके से हटाकर सड़क को खाली कराया।

इसी तरह एक अन्य विरोध में, कई स्थानीय स्कूलों के शिक्षकों ने अपने चेहरे पर काला कपड़ा डालकर विरोध मार्च निकाला। उनके हाथों में घटना की निंदा करने वाली तख्तियाँ थी। वे त्वरित कार्रवाई की माँग कर रहे थे। इसके अलावा ऑल बंगाल टीचर्स एसोसिएशन ने भी हमले की निंदा करते हुए बालुरघाट में एक विरोध रैली निकाली।

सिख युवक के साथ शादी के लिए भाग गई थी मुस्लिम महिला, इसलिए ग्रंथी का गला काटने आए; केश काट छोड़ दियाः रिपोर्ट

पिछले दिनों राजस्थान के अलवर में गुरुद्वारे के एक ग्रंथी पर हमले की घटना सामने आई थी। अब यह बात सामने आई है कि एक सिख युवक के साथ शादी करने के लिए मुस्लिम लड़की के भाग जाने की घटना का बदला लेने के लिए इसे अंजाम दिया गया। पीड़ित ग्रंथी ने बताया था कि हमलावर फोन पर किसी ‘जुम्मा’ से निर्देश ले रहे थे। अंदेशा जताया जा रहा है कि यह व्यक्ति जुम्मा खान हो सकता है जो अलवाड़ा का सरपंच है।

स्वराज्य की रिपोर्ट के मुताबिक गुरुबख्श सिंह पर हमला करने वाले मुस्लिम बताए जा रहे हैं। अलवाड़ा गाँव के एक व्यक्ति ने स्वराज्य को फोन पर बताया कि अप्रैल में सिख समुदाय के एक व्यक्ति के साथ शादी करने के लिए एक मुस्लिम महिला भाग गई थी। दोनों वयस्क हैं और उनका अफेयर चल रहा था।

रिपोर्ट में कहा गया है, “मेव ने इसे अपने समुदाय के अपमान के तौर पर देखा। विरोध में प्रदर्शन हुआ। इसके बाद जुम्मा ने मामले में हस्तक्षेप कर पुलिस पर दबाव बनाया। पुलिस ने महिला को बरामद कर लिया। जुम्मा उसे जबरन घर ले आया, जबकि वह सिख व्यक्ति के साथ जाना चाहती थी। उसके बाद से ही वह सिख परिवार खतरे में जी रहा है। वे ज्यादा बाहर नहीं जा रहे।”

सूत्र ने मीडिया पोर्टल को बताया कि जुम्मा खान अलवाड़ा का सरपंच है। यहाँ पर सिखों के 400 वोट हैं, जबकि मुस्लिमों के 1500 वोट हैं। बता दें कि अलवर में मेव जाति के अधिकतर लोग धर्मांतरित हो मुस्लिम बन चुके हैं। समाचार एजेंसी पीटीआई ने अलवर के पुलिस अधीक्षक तेजस्वनी गौतम के हवाले से कहा है कि ऐसा लगता है कि सिंह को कथित प्रेम संबंधों को लेकर अलवाड़ा गाँव में सिखों और मेव मुस्लिमों के बीच पुरानी दुश्मनी के कारण निशाना बनाया गया था।

उल्लेखनीय है कि 21 जुलाई की शाम गुरुबख्श सिंह दवाएँ खरीदने अलवाड़ा गए थे। जब वे लौट रहे थे तो एक व्यक्ति ने उन्हें रुकने का इशारा करते हुए कहा कि एक सिख घायल पड़ा है। जैसे ही सिंह ने अपनी मोटरसाइकिल रोकी, उस व्यक्ति ने चार अन्य लोगों के साथ मिलकर उनकी गर्दन पकड़ उन्हें अपनी तरफ खींच लिया। उनमें से दो के पास चाकू था। उन्होंने उनकी आँखों में मिर्च पाउडर डाला और पट्टी बाँध दी।

गुरबख्श सिंह ने बताया था, “वे लोग मेरी गर्दन काटने की बात कर रहे थे। मैंने घबराकर कहा कि मुझे क्यों मार रहे हो? मैं तो गुरुद्वारे का पुजारी हूँ। तब उन्होंने किसी जुम्मा नाम के व्यक्ति को फोन किया। उसे बताया कि ये तो गुरुद्वारा का पुजारी है।” सिंह के अनुसार जुम्मा से बात होने के बाद हमलावरों ने आपस में बात करते हुए कहा कि गुरुद्वारे का आदमी है तो इसके केश ही काट दो। वही बहुत है।

मामले में रामगढ़ थाने में भारतीय दंड संहिता की धारा 323, 341, 307, 153 ए और 295A के तहत मामला दर्ज किया गया था। दैनिक जागरण के रिपोर्ट के अनुसार अब तक 22 लोग हिरासत में लिए गए हैं। हालाँकि किसी की भी गिरफ्तार नहीं हुई है।

वहीं रामगढ़ के प्रधान नसरू खान का कहना है कि गुरबख्श के साथ हुई घटना से मुस्लिम समाज कलंकित हुआ है। ऐसा कृत्य करने के वाले असामाजिक तत्व हैं। उन्होंने कहा कि मुस्लिम समाज ने तय किया है कि यदि आरोपित मुस्लिम निकले तो उनको बिरादरी से बाहर कर दिया जाएगा।

जोहार! देश की 15वीं राष्ट्रपति बनीं द्रौपदी मुर्मूः अब तक की सबसे कम उम्र की प्रथम नागरिक, स्वतंत्र भारत में पैदा हुईं पहली महामहिम

देश के 15वें राष्ट्रपति के तौर पर द्रौपदी मुर्मू ने आज (25 जुलाई 2022) सर्वोच्च पद की शपथ ग्रहण की। मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना द्वारा मुर्मू को संसद भवन कें सेंट्रल हॉल में यह शपथ ग्रहण करवाई गई। इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए उनके भाई भी दिल्ली आए। द्रौपदी देश की पहली जनजाति और दूसरी महिला राष्ट्रपति हैं। वह अब तक की सबसे कम उम्र की प्रथम नागरिक बनी हैं।

कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति वैंकया नायडू, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला, प्रधानमंत्री मोदी, कई प्रदेशों के राज्यपाल, कई मुख्यमंत्री, तीनों सेनाओं के प्रमुख और कई देशों के राजदूत मौजूद रहे। 21 टोपों की सलामी के बाद राष्ट्रपति मुर्मू ने देश को पहली बार संबोधित किया। उन्होंने ‘जोहार! नमस्कार!’ के साथ संबोधन आरंभ किया। उन्होंने कहा कि वह देश की पहली ऐसी राष्ट्रपति हैं जिन्होंने आजाद भारत में जन्म लिया।

इसके बाद वह राष्ट्रपति भवन के रवाना हुईं। वहाँ उन्हें एक इंटर सर्विस गार्ड ऑफ ऑनर दिया जाएगा।

बता दें कि शपथ ग्रहण करने के लिए संसद भवन पहुँचने से पहले द्रौपदी मुर्मू आज राजघाट गई थीं। वहाँ उन्होंने राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद राष्ट्रपति भवन के लिए रवाना हुईं। वहाँ उनका स्वागत निवर्तमान राष्ट्रपति कोविंद और उनकी पत्नी ने गुलदस्ता देकर किया।

गौरतलब है कि निवर्तमान राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का कार्यकाल 24 जुलाई 2022 को समाप्त हो गया है। उन्होंने कल रात आखिरी बार बतौर राष्ट्रपति देश को संबोधित किया था। उन्होंने संबोधन में देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था का आभार प्रकट करते हुए बताया था कि इन पाँच सालों में उनके सबसे यादगार पल वे थे जब वो राष्ट्रपति बन अपने गाँव गए और बुजुर्ग शिक्षकों के पाँव छुए।

बिजनौर की 3 मजारों में ‘मुस्लिम भाइयों’ ने लगाई आग, उपद्रव करते वक्त बाँध रखा था भगवा गमछा: UP पुलिस ने कमाल-आदिल को गिरफ्तार कर काँवड़ियों को बदनाम होने से बचाया

उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के शेरकोट थाना क्षेत्र में रविवार (24 जुलाई 2022) को तीन मजारों पर तोड़फोड़ और आगजनी करने का मामला प्रकाश में आया। पुलिस ने सूचना होने के बाद घटना में शामिल दो आरोपितों को समय रहते गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने कहा कि इस गिरफ्तारी से बड़ी सांप्रदायिक साजिश को अंजाम देने से रोका गया है।

दोनों आरोपित मुस्लिम समुदाय के हैं जिन्हें मजार क्षतिग्रस्त करते हुए पहले स्थानीयों ने देखा। फिर पुलिस में शिकायत दी। सूचना होने पर पुलिस मौके से पहुँची। मजहबी उलेमाओं के सामने घटनास्थल का मुआएना करने के बाद बताया गया कि मजहबी पुस्तकों को कोई नुकसान नहीं हुआ लेकिन मजार की चादर और पर्दे जलाकर खाक कर दिए गए हैं।

पुलिस की जाँच पड़ताल के बाद दोनों आरोपित पकड़े गए। इनकी पहचान कमाल और आदिल के तौर पर हुई है। ये दोनों सगे भाई हैं। इन्होंने सिर पर भगवा रंग का गमछा बाँध कर घटना को अंजाम दिया, जिसे देख अंदाजा लग रहा है कि काँवड़ियों को बदनाम करने के लिए ये सब किया गया।

पूछताछ में इन्होंने बताया कि इन लोगों ने न केवल जलाल शाह की मजार और भूरे शाह की मजार पर आगजनी की बल्कि कुतुब शाह की मजार को भी तोड़ा था। इसके अलावा ये यह भी कह रहे थे कि ये अभी और मजारों को भी तोड़ेंगे। इनका लोगों से कहना था कि ऐसी मजारों का कोई फायदा नहीं होता है, इसलिए इन्होंने ऐसा किया।

अब पुलिस इन्हें पकड़कर पूछताछ कर रही है। पता लगाया जा रहा है कि इनका इस तरह भगवा पहनकर मजार तोड़ने का क्या मकसद था। जरूरत पड़ने पर एटीएस भी जाँच में शामिल होगी।

समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, एडीजी कानून व्यवस्था प्रशांत कुमार ने घटना के संबंध में बताया,

“बिजनौर के अंतर्गत थाना शेरकोट में पुलिस को शाम 5 बजे सूचना मिली कि दो लोगों ने जलाल शाह की मजार पर तोड़फोड़ करके कुछ चादर जलाई हैं। जिसके बाद पुलिस वहाँ पहुँची, तभी सूचना मिली कि उसी थाना क्षेत्र के भूरे शाह की मजार पर भी आगजनी और तोड़फोड़ हुई है।”

पुलिस ने फौरन इस मामले में सक्रियता दिखाते हुए दो लोगों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के बाद एडीजी ने कहा कि शेरकोट में एक बड़ी सांप्रदायिक साजिश को होने से रोक लिया गया। मजहबी स्थलों में तोड़फोड़ करने के आरोप में दो आरोपित गिरफ्तार कर लिए गए हैं। जमीनी स्तर पर अधिकारियों को सतर्क रहने को कहा गया है और सोशल मीडिया पर निगरानी बनी हुई है।

एडीजी के मुताबिक, “अभियुक्तों ने बताया कि शेरकोट थाना में 11:30 बजे कुतुब शाह की मजार पर भी तोड़फोड़ की गई थी, जो संज्ञान में नहीं आई। घटना दर्शाती है कि काँवड़ यात्रा के दौरान माहौल खराब करने की कोशिश की जा रही है। सभी फील्ड अधिकारियों को सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं।”

स्मृति ईरानी ने कॉन्ग्रेस नेताओं जयराम रमेश और पवन खेड़ा को भेजा लीगल नोटिस, 18 साल की बेटी को लेकर कहा था – ‘गोवा में चलाती है बार’

केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने उनकी 18 साल की बेटी पर ‘बार’ चलाने का आरोप लगाने के मामले कॉन्ग्रेस नेता पवन खेड़ा, जयराम रमेश और नेट्टा डिसूजा को कानूनी नोटिस थमा दिया है। इसमें उन्होंने उनकी बेटी जोइश के खिलाफ कॉन्ग्रेसी नेताओं द्वारा फैलाई जा रही गलत, भ्रामक और अपमानजनक बातों पर रोक लगाने की बात कही है। ईरानी ने कॉन्ग्रेस से अनकी बेटी से लिखित में तुरंत माफी माँगने और आरोपों को वापस लेने के लिए कहा है।

इस बीच कॉन्ग्रेस ने एक और दावा किया है। कॉन्ग्रेस का दावा है कि गोवा के कोर्जुएम गाँव में स्मृति ईरानी के नाम से एक आलीसान बंगला बना हुआ है। कॉन्ग्रेस के ट्विटर हैंडल आईएनसी टीवी में एक दस्तावेज के जरिए दावा किया गया है कि कथित तौर पर ईरानी का उक्त घर सिली सोल्स बार से केवल 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इसके साथ ही एक तस्वीर में जुबिन ईरानी का नाम और 65 लाख रुपए के नंबर के साथ ही घर का पता भी लिखा है।

क्या है पूरा मामला

गौरतलब है कि कॉन्ग्रेस नेता पवन खेड़ा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया था कि स्मृति ईरानी की 18 साल की बेटी गोवा में बार चलाती हैं। खेड़ा ने कहा था कि ईरानी जिस पार्टी से जुड़ी हैं, उस हिसाब से उनकी बेटी बहुत संस्कारी होनी चाहिए, लेकिन वो गोवा में बार चला रही है।

इस पर केंद्रीय मंत्री ने भी एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बेटी के चरित्र का हनन करने के मामले में कॉन्ग्रेस को कोर्ट में घसीटने की चेतावनी दी थी। ईरानी ने कहा था, “18 साल की कॉलेज जाने वाली जिस बच्ची का कॉन्ग्रेस नेता ने कॉन्ग्रेस हेडक्वार्टर में चरित्र हनन किया। उस लड़की का दोष यह है कि उस लड़की की माँ ने 2014 और 2019 में अमेठी से राहुल गाँधी के खिलाफ चुनाव लड़ा। उस लड़की का दोष यह है कि उसकी माँ ने सोनिया गाँधी, राहुल गाँधी की 5,000 करोड़ की लूट के ऊपर प्रेसवार्ता की।”

उन्होंने कॉन्ग्रेस से पूछा था कि कॉन्ग्रेस नेता ने मीडिया में हँस-हँस कर जो कागज दिखाते हुए दावा कर रहे हैं क्या वो बता सकते हैं कि उनमें लिखा क्या हुआ था।

‘गाँव जाकर अपने शिक्षकों के पाँव छूना मेरे जीवन का सबसे यादगार पल’: बोले राष्ट्रपति कोविंद – अपनी पूरी क्षमता से निभाए दायित्व, देशवासियों का आभार

राष्ट्रपति के तौर पर रामनाथ कोविंद ने आज (24 जुलाई 2022) आखिरी बार देश को संबोधित किया। इस संबोधन में उन्होंने देशवासियों के प्रति और जन प्रतिनिधियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि कानपुर के गाँव से निकल यदि वो आज राष्ट्रपति के तौर पर देश को संबोधित कर पा रहे हैं तो इसके लिए वह लोकतांत्रिक व्यवस्था को नमन करते हैं।

उन्होंने कहा, “आज से 5 साल पहले, आप सबने मुझ पर अपार भरोसा जताया था और अपने निर्वाचित जन-प्रतिनिधियों के माध्यम से मुझे भारत के राष्ट्रपति के रूप में चुना था। मैं आप सभी देशवासियों के प्रति तथा आपके जन-प्रतिनिधियों के प्रति हार्दिक कृतज्ञता व्यक्त करता हूँ।”

अपनी पृष्ठभूमि को याद करते हुए और राष्ट्रपति पद तक पहुँचने के सफर को लेकर वह बोले, “कानपुर देहात जिले के परौंख गाँव के अति साधारण परिवार में पला-बढ़ा राम नाथ कोविंद आज आप सभी देशवासियों को संबोधित कर रहा है, इसके लिए मैं अपने देश की जीवंत लोकतांत्रिक व्यवस्था की शक्ति को शत-शत नमन करता हूँ।”

उन्होंने बताया कि इन 5 सालों के सफर में उनके सबसे यादगार पल वह थे जब उन्होंने अपने पैतृक गाँव का दौरा किया और कानपुर के विद्यालय में वयोवृद्ध शिक्षकों के पैर छूकर उनसे आशीर्वाद लिया। वह बोले, “अपनी जड़ों से जुड़े रहना भारतीय संस्कृति की विशेषता है। मैं युवा पीढ़ी से यह अनुरोध करूँगा कि अपने गाँव या नगर तथा अपने विद्यालयों तथा शिक्षकों से जुड़े रहने की इस परंपरा को आगे बढ़ाते रहें।”

अपने संबोधन में उन्होंने कहा, “19वीं शताब्दी के दौरान पूरे देश में पराधीनता के विरुद्ध अनेक विद्रोह हुए। देशवासियों में नई आशा का संचार करने वाले ऐसे विद्रोहों के अधिकांश नायकों के नाम भुला दिए गए थे। अब उनकी वीर-गाथाओं को आदर सहित याद किया जा रहा है।”

उन्होंने 20वीं सदी के जननायकों को याद करते हुए कहा कि 20वीं सदी की शुरुआत में जब रवींद्र नाथ टैगोर देशवासियों को सांस्कृतिक विरासतों से जोड़ रहे थे, वहीं बाबा साहेब समाज के समानता के आदर्श की पुरजोर वकालत कर रहे थे। तिलक और गोखले से लेकर भगत सिंह और नेताजी सुभाष चन्द्र बोस तक; जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल और श्यामा प्रसाद मुकर्जी से लेकर सरोजिनी नायडू और कमलादेवी चट्टोपाध्याय तक – ऐसी अनेक विभूतियों का केवल एक ही लक्ष्य के लिए तत्पर होना, मानवता के इतिहास में अन्यत्र नहीं देखा गया है।

उन्होंने संविधान सभा में पूरे देश का प्रतिनिधित्व करने वाली 15 महिलाओं का जिक्र किया। साथ ही कहा, “संविधान सभा के सदस्यों के अमूल्य योगदान से निर्मित भारत का संविधान, हमारा प्रकाश-स्तम्भ रहा है।”

आगे राष्ट्रपति कोविंद ने देश को पूर्वजों के पद चिह्नों पर चलने की सलाह दी और 21वीं सदी को लेकर कहा कि अब भारत सक्षम हो रहा है। वह बोले, “अपने कार्यकाल के 5 वर्षों के दौरान, मैंने अपनी पूरी योग्यता से अपने दायित्वों का निर्वहन किया है। मैं डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद, डॉक्टर एस. राधाकृष्णन और डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम जैसी महान विभूतियों का उत्तराधिकारी होने के नाते बहुत सचेत रहा हूँ।”

भाषण के अंत में उन्होंने बिगड़ती जलवायु, पर्यावरण पर चिंता जताई और इनके संरक्षण को कर्तव्य बताया। उन्होंने सभी देशवासियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए भारत माँ को नमन कर राष्ट्रपति के तौर पर अपने अंतिम भाषण को समाप्त किया।

40 में से 35 धरोहर हमारे, फिर धूर्त इतिहासकारों ने क्यों किया मुगलों का गुणगान? कुल्फी-समोसे से लेकर कुलचे तक का क्रेडिट, ‘काफिरों’ को मारने वाला अकबर ‘महान’

भारत में मुगलों को महान साबित करने के लिए वामपंथियों ने भारत के पूरे ताने-बाने को ही उधेड़ कर रख दिया। ये वामपंथी दरअसल, कौन थे/हैं और किस उद्देश्य से ऐसा करते रहे, ये अलग शोध का विषय है। इन वामपंथियों ने भारतीय खानपान से लेकर वास्तुकला तक को इस तरह पेश किया, जैसे मुगल भारत में नहीं आते तो 21वीं सदी में भी यहाँ के लोग जंगली की भाँति जीवन जी रहे होते।

पिछले दिनों ट्विटर पर किसी ब्लॉगर का एक वीडियो वायरल हो रहा था, जिसमें वह महिला अमृतसरी कुलचे बारे में बता रही थी। वीडियो में महिला कह रही है कि कुलचे मुगलों के समय से है और शाहजहाँ को यह इतना पसंद था कि उसने अपने खानसामे को कहा था कि उसे नाश्ते और खाने में कुलचे ही दिए जाएँ।

इसी तरह अकबर को अकबर को खुश करने के लिए कुल्फी बनाया गया था। ये किसी इतिहासकार ने नहीं बताया कि अकबर कुल्फी से खुश होगा, ये किस खामसामे को कैसे पता चला। आधुनिक दरबारी इतिहासकारों ने यहाँ तक लिख दिया है कि कुल्फी जमाने के लिए बर्फ को हिमाचल के चूर चंद्र धार (पता नहीं, ये कहाँ है। गूगल इसकी कोई जानकारी नहीं दे रहा।) से बर्फ मँगाए जाते थे और उसे लाने के लिए घुड़सवारों के बीच रेस रखी गई थी। 

इसी तरह यह भी बताया जाता है कि 14वीं शताब्दी में मोहम्मद बिन तुगलक के शासन में समोसा भारत में आया। चूँकि इब्नबतूता को दरबार में खाने के दौरान समोसा परोसा गया तो उसने अपनी किताब में इसका जिक्र कर दिया। अब उसके किताब में जिक्र है तो वामपंथियों को लग गया कि यह मोहम्मद बिन तुगलक का ही खोजा हुआ होगा। इसी तरह पराँठे और ना जाने किन-किन चीजों को मुगलों का शोध और खोज बताकर प्रचारित किया गया।

वामपंथी इतिहासकारों ने मुगलों के प्रति आम भारतीय जनमानस में सहानुभूति पैदा के लिए यहाँ तक लिख दिया कि बाबर सोमवार, गुरुवार और शुक्रवार को नहीं पीता था। इन दिनों वह क्यों नहीं पीता था, इसका स्पष्ट वर्णन नहीं है। इसी तरह अकबर गंगाजल और जहाँगीर यमुना के पानी के बिना रह नहीं सकते थे। उनका खाना भी इन्हीं नदियों के पानी से बनता था।

हो सकता है कि ये बात सच हो, लेकिन इसके पीछे ये वजह नहीं हो सकती है कि इन्हें गंगा और यमुना से असीम प्रेम था। ये हो सकता है कि उस दौर में इन नदियों का पानी इतना निर्मल और स्वच्छ होता था कि वे इसका पीने के लिए इस्तेमाल करते होंगे। हिंदू धर्मशास्त्रों में तो इन नदियों के पानी में आयुर्वेदिक गुणों के कारण इन्हें माँ का दर्जा दिया गया है। इसका मतलब ये नहीं है कि मुगल भी उन्हें माँ की तरह मानते हुए इनसे प्रेम करते थे।

इसी तरह वामपंथियों ने भारत के लोगों के मन में ठूँस ठूँस कर घुसाया कि मुगल शासन में जो प्रशासनिक सुधार हुए, इसके कारण भारत उस दौर में प्रगति के पथ पर रहा। इसमें भी बंदोबस्ती के सिवाए कोई खास और महत्वपूर्ण सुधार नहीं देते। बंदोबस्ती और मालगुजारी भी अकबर के शासन में एक हिंदू टोडरमल द्वारा लागू की गई थी। टोडरमल पहले शेरशाह सूरी के अंतर्गत काम करता था और उसने शेरशाह के कहने पर वर्तमान पाकिस्तान में रोहतास किले का निर्माण कराया था। यह बिहार के रोहतासगढ़ किले का नकल था।

इसी तरह दिल्ली का लाल किला, आगरा का ताजमहल, हुमायूँ का मकबरा, कुतुब मीनार आदि का ऐसे प्रचार-प्रसार किया गया मानो इनके अलावा भारत में कोई धरोहर हैं ही नहीं। अगर भारत में कुछ देखने लायक है तो वो भी मुगलों की ही देन है। वामपंथियों ने मुगलों के स्थापत्य कला के नाम पर ऐसा स्वांग रचा कि लगा उसके आगे हर कला-कौशल फीका-फीका सा लगने लगा।

अगर हम UNESCO की विश्व धरोहरों की सूची में शामिल भारतीय सांस्कृतिक विरासतों की सूची देखें तो हकीकत का पता चल जाएगा। वर्तमान में सांस्कृतिक विरासत के अंतर्गत भारत के 40 धरोहरों को UNESCO ने सूचीबद्ध किया है, जिनमें सिर्फ 5 मुगलों के शासन काल में बने बताए जाते हैं। इनमें भी ताजमहल, कुतुब मीनार और लाल किला के निर्माण को लेकर विवाद है।

UNESCO में सूचीबद्ध मुगलों की कथित इन इमारतों में आगरा का किला, फतेहपुर सिकरी, हुमायूँ का मकबरा, लाल किला और ताजमहल शामिल है। बाकी सांस्कृतिक विरासत हिंदू और बौद्ध धर्मों से जुड़े हैं। इनमें से कुछ ऐसे हैं, जो ईसा के जन्म के पूर्व के भी बताए जाते हैं। वहीं, सैकड़ों हिंदू-बौद्ध-जैन विरासत और धरोहर ऐसे हैं, जिन्हें इस सूची शामिल कराने के लिए सरकार की ओर से कभी प्रयास ही नहीं हुआ।

वामपंथी और धूर्त इतिहासकारों ने मुगलों के गुणगान में एक से बढ़कर एक कहानियाँ रचीं, जिनका स्पष्ट एवं मान्य प्रमाण नहीं है। मुगलों को हिंदुओं के प्रति सहिष्णु और अकबर को महान तक बता दिया गया, जबकि अकबर के मेवाड़ हमले के दौरान 20 हजार आम लोगों का कत्ल हुआ और 10 हजार के करीब क्षत्रिय योद्धा मारे गए थे। इसी दौरान 10,000 हिंदू स्त्रियों को जौहर के लिए मजबूर होना पड़ा था। अकबर ने कहा था जो भी काफिर दिखे उसे मौत के घाट उतार दो।

मुगल शासन काल में धार्मिक अत्याचार, उत्पीड़न और जजिया कर से हिंदू त्राहिमाम कर रहे थे। उस दौरान प्राकृतिक आपदाओं के बारे में भी कई जगह वर्णन मिलता है, लेकिन कहीं भी यह जिक्र नहीं मिलता कि मुगल शासकों ने प्रजा को राहत देने के लिए कर में कटौती, नहरों-तालाबों का निर्माण किया हो। किसी तरह के रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाने का भी उल्लेख नहीं है, जिससे प्रजा का भरण-पोषण हो सके।

जब 1660 ईस्वी के आसपास देश में भीषण अकाल पड़ा, उस वक्त महाराणा प्रताप के पोते और महाराणा अमर सिंह के बेटे महाराणा राज सिंह ने राजसमंद झील का निर्माण कराया था। इस तरह की प्राकृतिक आपदा से बचने के लिए तैयारी की गई और अकाल के दौरान लोगों को राजसमंद झील के निर्माण में काम देकर उनके पालन-पोषण का प्रबंध किया गया।

इसी तरह अंग्रेजों के शासन के दौरान अकालग्रस्त जोधपुर में उम्मेद पैलेस का निर्माण करवा कर लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार दिया गया। मध्य प्रदेश के कोरिया जिले के राजा की कहानी भी कुछ ऐसी ही हैं, जिन्होंने दुर्भिक्ष के दिनों में महल का निर्माण शुरू कराया, ताकि लोगों को रोजगार मिल सके।

ऐसी अनेकों कहानियाँ और घटनाएँ हैं, जो वामपंथी और धूर्त इतिहासकारों के लिए महत्वपूर्ण नहीं हैं। उन्हें बस मुगलों का गुणगान करना था और वे इस गुणगान में इतना खोए कि देश की संस्कृति, विरासत, परंपरा, खानपान और पहनावा तक भूल गए और याद रहा तो सिर्फ मुगल और जो दिखा वो मुगलों का दिया हुआ। यही भारत के इतिहासकारों की कहानी है।

अक्षय कुमार बने सबसे ज्यादा टैक्स भरने वाले एक्टर, IT विभाग ने सर्टिफिकेट देकर किया सम्मानित: फिल्मों की लगी हुई है लाइन

अमूमन आप आयकर विभाग के साथ किसी हस्ती का कनेक्शन खबरों में तभी पाते हैं जब कोई घोटाला हो या कोई हेर-फेर हो। लेकिन बॉलीवुड के अभिनेता अक्षय कुमार वो शख्सियत हैं जो आयकर विभाग से तारीफ मिलने के कारण चर्चा में आए है।

इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने अक्षय कुमार को सम्मान पत्र देकर सम्मानित किया है। विभाग ने बताया है कि वो बॉलीवुड में सबसे ज्यादा टैक्स देने वाले कलाकार हैं। सोशल मीडिया पर सामने आए सर्टिफिकेट में देख सकते हैं कि ये सम्मान 2020-2021 सत्र का है जिसे 24 जुलाई 2022 को उन्हें दिया गया।

सोशल मीडिया पर उनके चाहने वाले इस अवार्ड को साझा कर रहे हैं और जो लोग उन्हें ‘कनाडा कुमार’ जैसे शब्द कहते हैं उन्हें बता रहे हैं कि बॉलीवुड के असली सुपरस्टार अक्षय कुमार हैं। यही सम्मान उन्होंने बॉलीवुड में 30 साल देकर कमाया है।

इनकम टैक्स मुंबई के ट्विटर पर भी देख सकते हैं कि उन्होंने इनकम टैक्स दिवस के मौके पर सर्वाधिक टैक्स जमा कराने के लिए अक्षय कुमार भाटिया को सम्मान दिया जो कि उनके प्रतिनिधि द्वारा स्वीकारा गया।

गौरतलब है कि फिलहाल ये नहीं पता चल सका है कि कितना टैक्स भरने पर अक्षय को इस पत्र से सम्मानित किया गया। लेकिन ये सम्मान उन्हें मिला इसकी पुष्टि हो गई है। अक्षय कुमार को इनकम टैक्स की ओर से ऐसा खिताब दिए जाने के बाद लोग ये चर्चा भी कर रहे हैं कि अक्षय अकेले बॉलीवुड एक्टर हैं जो इतनी हिट फिल्में साल में देते हैं और बिन कोई हेर-फेर घोटाला किया टैक्स भी भरते हैं।

बीते दिनों उन्होंने सम्राट पृथ्वीराज रिलीज हुई और अब कुछ दिन बाद उनकी रक्षा बंधन फिल्म आने वाली है। वर्तमान में भी वह अपनी अगली फिल्म यानी कि जसवंत सिंह गिल की बायोपिक की शूटिंग में ही जुटे हैं। इंग्लैंड से लौटकर वह रक्षा बंधन को प्रमोट करेंगे। इसके अलावा उनकी सेल्फी, राम सेतु, ओह माई गॉड 2 और बड़े मियाँ छोटे मियाँ जैसी फिल्में भी आने वाली हैं।

ED अधिकारियों से गाली-गलौज कर रहे CM ममता के मंत्री, डॉन जैसा बर्ताव: 1 दिन की रिमांड पर भेजी गई करीबी अर्पिता

पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार के मंत्री पार्था चटर्जी की पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग (SSC)और पश्चिम बंगाल प्राथमिक शिक्षा बोर्ड घोटाले के मामले में मुश्किलें बढ़ सकती हैं। मामले की जाँच कर रहे प्रवर्तन निदेशालय ने आरोप लगाया है कि अस्पताल में भर्थी पार्था चटर्जी एक डॉन की तरह व्यवहार कर रहे हैं और जाँच में किसी भी तरह का सहयोग नहीं कर रहे हैं।

शिक्षा घोटाले के मामले में गिरफ्तार किए गए पार्थ चटर्जी की अचानक से तबीयत बिगड़ गई थी, जिसके बाद उन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वहाँ से उन्हें दूसरे अस्पताल में शिफ्ट किया जा रहा था। इसके विरोध में ईडी ने कोलकाता हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। ईडी की तरफ से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने कोर्ट को बताया कि शिक्षक भर्ती घोटाले से जुड़ा मामला होने के कारण रविवार को ही अपील करनी पड़ी।

ईडी ने कोर्ट से माँग की है कि कोर्ट ने पार्था को केवल 2 दिनों के लिए ईडी की कस्टडी दी है। चूँकि वो अस्पताल में भर्ती हैं ऐसे में अस्पताल के दिनों को उनके रिमांड के दिनों के तौर पर न गिनें। एसवी राजू ने कोर्ट को बताया कि पार्था चाहें तो इलाज के लिए दिल्ली या कल्याणी के एम्स में भर्ती हो सकते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्था को जबरन दूसरे अस्पताल में शिफ्ट किया गया है, जहाँ वो ईडी के अधिकारियों के साथ एक डॉन की तरह पेश आ रहे हैं और उनके साथ गाली-गलौच कर रहे हैं। एसजी ने इस मामले को भ्रष्टाचार का हाई लेवल मामला करार दिया है।

एक दिन के लिए ईडी की रिमाँड पर भेजी गई अर्पिता मुखर्जी

इस बीच रविवार को कोलकाता की बंकशाल कोर्ट ने पार्था चटर्जी की करीबी अर्पिता मुखर्जी को एक दिन के लिए प्रवर्तन निदेशालय की रिमाँड में भेज दिया गया है। गौरतलब है कि अर्पिता को ईडी ने 23 जुलाई को कस्टडी में ले लिया था। उससे पहले उनके घर पर ईडी ने छापेमारी कर 20 करोड़ रुपए का कैश बरामद किया था। वहीं इस मामले में पार्था को भी गिरफ्तार किया गया था।

‘इसकी फोटो खींचो’: अरमान मलिक को सैफ अली खान के बेटे इब्राहिम में दिखता है ‘अपकमिंग स्टार’, लोगों ने याद दिलाया ‘नेपोटिज्म’

बॉलीवुड स्टार सैफ अली खान और अमृता सिंह के बेटे इब्राहिम अली खान को गायक अरमान मलिक ने ‘अपकमिंग स्टार’ करार दिया है। दरअसल, इब्राहिम खान अपने सिंगर दोस्त अरमान मलिक के बर्थडे पार्टी में गए थे और इसी दौरान पत्रकारों ने उन्हें घेर लिया और उनकी फोटो खींचनी शुरू कर दी तो अरमान मलिक ने कहा कि इसकी फोटो खींचो ये ‘अपकमिंग स्टार’ है।

इसमें कोई दो राय नहीं है कि स्टार किड होने के कारण इब्राहिम खान आए दिन चर्चा में रहते हैं। अरमान मलिक और इब्राहिम खान का वो वीडियो भी वायरल हो रहा है, जिसमें सैफ के बेटे को अपकमिंग स्टार कहा गया है। वायरल हो रहे वीडियो में देखा जा सकता है कि अरमान मलिक तो कैमरे के सामने कंफर्टेबल थे, लेकिन इब्राहिम खान कैमरे के सामने आने पर शरमा रहे थे और उनके अंदर हिचकिचाहट भी साफ देखी जा सकती है।

इसमें ये भी देखा गया कि इब्राहिम अली खान जैकेट और नीली जींस के साथ काली टी-शर्ट पहने थे, जबकि बर्थडे बॉय अरमान को एक सफेद टी में देखा जा सकता है जिसे उन्होंने नीले रंग की जैकेट और पैंट के साथ मैच किया था। पहले तो जब मीडिया ने उनसे फोटो शूट करवाने को कहा तो इब्राहिम घबराए, लेकिन बाद में अरमान मलिक के कहने पर एक बार के लिए उन्होंने फोटो खिंचवाया।

हालाँकि, नेटिजन्स को इब्राहिम को ‘अपकमिंग स्टार’ कहना कुछ जमा नहीं। लोगों ने सैफ के बेटे की योग्यता पर सवाल खड़े किए। @kkm198507 नाम के यूजर ने कहा,”वह किसी के लिए अच्छा नहीं है। इनकी कोई व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है और कोई शैक्षिक उपलब्धि भी नहीं है, तो वह क्या करेगा। वह बॉलीवुड में शामिल होंगे क्योंकि, उनके पास पापा का पैसे का रेफरेंस है। भाई-भतीजावाद की जींस।”

एथीस्ट वर्ड नाम के यूजर ने कहा कि एक फ्लॉप व्यक्ति दूसरे फ्लॉप व्यक्ति (इब्राहिम) को पसंद कर रहा है।

इब्राहिम खान के काम की बात की जाय तो वे करण जौहर की आगामी फिल्म मोर्चे पर, इब्राहिम अली खान को कैमरे के पीछे उपयुक्त अनुभव मिलना शुरू हो गया है क्योंकि वह फिल्म ‘रॉकी और रानी की प्रेम कहानी’ में करण जौहर के सहायक के तौर पर काम कर रहे हैं। खबर ये भी है कि इब्राहिम मलयालम फिल्म हृदयम के हिंदी रीमेक में नजर आ सकते हैं।