Home Blog Page 2569

साल में 133 छुट्टियाँ, 38% जजों के ‘कनेक्शन’… लेकिन संपत्ति का ब्यौरा दिए सिर्फ 4 जज: जो ज्ञान दूसरों को, उस पर खुद अमल करें सुप्रीम कोर्ट के माननीय

माननीय सुप्रीम कोर्ट। अक्सर नेता-अधिकारी या कोई भी देश की सर्वोच्च न्यायालय का नाम लेते समय ‘माननीय’ या ‘Honourable’ ज़रूर लगाते हैं। जजों के नाम से पहले ‘न्यायमूर्ति’ लगाया जाता है। इतना ‘माननीय’ राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के नाम के भी आगे नहीं लगाया जाता। जबकि कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका संविधान के 3 स्तंभ हैं। बस उनके कार्य बाँटे हुए हैं। लेकिन, जब कार्यपालिका और विधायिका से रोज हजार सवाल पूछे जाते हैं कि भला न्यायपालिका से कोई महीने में एक सवाल भी ना पूछे?

‘सिर्फ और सिर्फ’ नूपुर शर्मा जिम्मेदार? ये कैसा लॉजिक है?

नूपुर शर्मा पर कई राज्यों में हुए FIR के बाद वो राहत के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुँची थीं। एक महिला न्याय माँगने गई थीं नियम के तहत, क्योंकि भारत का कानून ही कहता है कि किसी को एक ही अपराध के लिए एक से अधिक सज़ाएँ नहीं सुनाई जा सकतीं। बदले में सुप्रीम कोर्ट ने कह दिया कि आज देश में जो भी हो रहा है, उसके लिए सिर्फ और सिर्फ नूपुर शर्मा जिम्मेदार हैं। जबकि उस बहस में बार-बार हिन्दू देवी-देवताओं पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले और मजाक बनाने वाले तस्लीम रहमानी को लेकर इन जजों ने चूँ तक न किया।

सबसे बड़ी बात कि ये बातें जजमेंट का हिस्सा नहीं थीं। अगर हम यही लॉजिक लगाते हैं तो क्या वाराणसी में ज्ञानवापी मस्जिद में सर्वे की अनुमति देने वाले जज रवि दिवाकर को धमकी दिए जाने के लिए भी कोर्ट ही ‘सिर्फ और सिर्फ’ जिम्मेदार हुआ, क्योंकि उसने कानून और संविधान के हिसाब से फैसला सुनाया? कर्नाटक में हिजाब मामले में फैसला देने वाले उच्च न्यायालय के जजों को धमकी के लिए भी अदालत को जिम्मेदार माना जाएगा इस लॉजिक से?

ऐसे में तो आप हत्यारों और अपराधियों को राहत दे रहे हैं। कश्मीर में कत्लेआम मचा रहे आतंकी कहते हैं कि भारत सरकार कश्मीरियों पर जुल्म कर रही है, इसीलिए वो इसे ‘आज़ाद’ कराना चाहते हैं। फिर क्या इन निर्मम हत्याओं के लिए ‘सिर्फ और सिर्फ’ भारत सरकार और यहाँ की जनता को जिम्मेदार मान लेना चाहिए? ‘माननीय’ को समझना चाहिए कि किसी एक चैंबर में बैठ किसी के कुछ सोचने से उस हिसाब से दुनिया नहीं चलती।

हमारा कहना यह है कि जिन मुद्दों पर सुप्रीम कोर्ट दूसरों को डाँटता है और ज्ञान देता है, उन्हीं मुद्दों पर वो खुद अपनी ही कही बातों का पालन क्यों नहीं करता? नूपुर शर्मा के मामले में हम नहीं कह रहे हैं कि सुप्रीम कोर्ट ने गलती की है, ये तो 117 पूर्व न्यायाधीश, सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी एवं रिटायर्ड ब्यूरोक्रेट्स ने भी कहा है कि दोनों जजों (सूर्यकान्त और जेबी पारदीवाला) ने ‘लक्ष्मण रेखा’ लाँघी है और एक नागरिक को न्याय से वंचित किया है, ये न्यायपालिका के इतिहास में एक ‘धब्बे’ की तरह है।

क्या आपने कभी सुना है कि प्रधानमंत्री की किसी ने आलोचना की हो और उसे PMO में तलब कर लिया गया हो? सुप्रीम कोर्ट की आलोचना को ‘न्यायपालिका की अवमानना’ बता कर लोगों को तलब किया जाता रहा है और उन पर मुक़दमे भी चले हैं। वो अलग बात है कि प्रशांत भूषण जैसों के लिए इसकी कीमत एक रुपए लगाई जाती है। क्या जज आलोचना से परे हैं? फिर सांसदों-विधायकों की आलोचना क्यों? डीएम-एसपी की क्यों? फ्री स्पीच की सबसे ज्यादा वकालत तो अदालत ही करती है, तो फिर वो खुद को इस दायरे में क्यों नहीं रखती?

कॉलेजियम सिस्टम कब हटेगा? परिवारवाद के अलावा प्रतिभाओं की अनदेखी के भी आरोप

क्या आपको पता है कि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में जजों की नियुक्ति कैसे होती है? ‘कॉलेजियम सिस्टम’ से। इसी सिस्टम के तहत जजों की नियुक्ति और स्थानांतरण किया जाता है। अव्वल तो ये कि ये सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों से ही आया है, न संसद और न ही संविधान ने ऐसा कोई प्रावधान बनाया। 1981 में ‘First Judges Case (गुप्ता केस)’ में कहा गया कि भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) की राय जजों की नियुक्ति-ट्रांसफर में सर्वोपरि नहीं है।

1993 में सुप्रीम कोर्ट ‘कॉलेजियम सिस्टम’ लेकर आया। इसमें CJI के साथ-साथ कमिटी में 2 वरिष्ठतम जजों को डाला गया। 1998 में समिति की संख्या 5 कर दी गई, जिसमें CJI के साथ-साथ सुप्रीम कोर्ट के 4 सबसे वरिष्ठ जज होते हैं। इसी तरह सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट्स में कॉलेजियम के तहत ऐसी ही समितियाँ हैं। रिटायर हो रहा CJI खुद अपने उत्तराधिकारी की अनुशंसा करता है। हालाँकि, 70 के दशक में हुए कुछ विवादों के बाद वरिष्ठता के आधार पर ही ये पद दिया जाता है।

सुप्रीम कोर्ट के जजों की नियुक्ति के मामले में कॉलेजियम पहले केंद्रीय कानून मंत्री को अपनी अनुशंसा भेजता है, जहाँ से इसे प्रधानमंत्री को भेजा जाता है और फिर केंद्र सरकार की सलाह पर राष्ट्रपति इस पर मुहर लगाते हैं। इस सिस्टम की आलोचना होती है क्योंकि इसमें कोई पारदर्शिता नहीं है, नेपोटिज्म का बोलबाला है और कई प्रतिभावान जूनियर जज-वकील पीछे रह जाते हैं। जब 2014 में ‘नेशनल जुडिशल अपॉइंटमेंट्स कमिशन’ आया तो अगले साल कोर्ट ने इसे किनारे रख दिया और कहा कि इससे न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर फर्क पड़ेगा।

फिलहाल, नेपोटिज्म की स्थिति ये है कि सुप्रीम कोर्ट के 38% जजों के परिवार का न्यायपालिका ये सरकार में पहले से कनेक्शन है। 32 में से 12 जज ऐसे हैं। क्या कॉलेजियम सिस्टम से प्रतिभाओं को अनदेखा नहीं किया जा रहा? भारत की हर एक संस्था जनता की सेवा के लिए है। ऐसे में जनता को ही नहीं पता नियुक्तियाँ-प्रोमोशंस कैसे हो रहे। ब्यूरोक्रेसी के लिए परीक्षा होती है, विधायिका को सीधे जनता चुनती है, लेकिन न्यायपालिका में जज, जज को चुनते हैं और किसी को कुछ खबर तक नहीं होती कि पैमाना क्या है, चरणबद्ध प्रक्रिया क्या है?

ये वही सुप्रीम कोर्ट है, जिसने चुनावी प्रक्रिया की शुचिता को बनाए रखने और देश की लोकतांत्रिक संरचना की सत्यनिष्ठा को अक्षुण्ण रखने की बातें कर के चुनाव लड़ने वाले नेताओं और उनके पति-पत्नी को भी अपनी संपत्ति का ब्यौरा सार्वजनिक करने का आदेश दिया था। 4 जुलाई, 2022 के डिक्लेरेशन की बात करें तो 32 में से मात्र 4 सुप्रीम कोर्ट जजों ने अपनी संपत्ति का ब्यौरा वेबसाइट पर डाला है। माननीय, दूसरों से इतनी उम्मीदें रख कर फैसले देते हैं और खुद उसका पालन क्यों नहीं करते?

जज साहब, दूसरों को टास्क देते हैं तो जरा अपने पेंडिंग केसेज पर भी नजर डाल लीजिए

अदालत दूसरों के लिए समयसीमा तय करती है। फलाँ तारीख़ तक ये चीज हो जानी चाहिए, चिलाँ तारीख़ तक ये फैसला लागू हो जाना चाहिए – इस तरह के आदेश आते हैं। लेकिन, समयसीमा जजों के लिए क्यों नहीं तय की जाती? कोरोना काल में भी सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को फटकार लगाई कि मृतकों के मृत्यु प्रमाण-पत्र बनाने में देर क्यों हो रही है? 2015 में जस्टिस जोसफ कुरियन के ताजमहल दौरे के बाद अचानक से सुप्रीम कोर्ट की नजर वहाँ की सड़क पर पड़ गई और यूपी सरकार को सड़क निर्माण के लिए फटकारा गया

क्या आपको पता है कि सुप्रीम कोर्ट में कितने मामले लंबित हैं? 70,852 केस। जी हाँ, 32 जज मिल कर ये केस कितने दिन में निपटा पाएँगे, आप खुद समझ लीजिए। भारतीय न्यायपालिका व्यवस्था में सुप्रीम कोर्ट और उसके अंतर्गत आने वाली अदालतों में 4.7 करोड़ से भी अधिक मामले पेंडिंग पड़े हुए हैं। ये वही सुप्रीम कोर्ट है, जो 2022 में 83 दिन छुट्टियों पर रहा। 50 दिन रविवार के भी जोड़ दीजिए तो ये 133 दिन हो जाता है, साल के 36% दिन इन्होंने छुट्टियाँ ही मनाई।

अमेरिका में ऐसा नहीं होता। वहाँ की सुप्रीम कोर्ट एक साल में मुश्किल से 10 दिन छुट्टियों पर रहता है। जस्टिस जेबी पारदीवाला ने हाल ही में संसद को सोशल मीडिया पर नकेल कसने की सलाह दे डाली। शायद उन्हें जजों की आलोचना बर्दाश्त नहीं हुई। अब लाखों लोग अपनी राय रखेंगे तो सबको ये जेल में भेजने का रिस्क भी नहीं ले सकते। सुप्रीम कोर्ट सहमति-असहमति और लोकतंत्र में फ्री स्पीच पर ज्ञान देता है तो खुद को जनता की आलोचना से परे क्यों मानता है?

आलोचना तो होगी, क्योंकि इस देश में जितने भी अधिकारी-नेता-जज हैं, जनता से ऊपर नहीं है। लोकतंत्र में जनता सर्वोपरि है। अगर देश को लोकतंत्र के हिसाब से चलना है तो कॉलेजियम सिस्टम की जगह प्रतिभा की जाँच के बाद जजों की नियुक्ति होनी चाहिए, ‘Contempt Of Court’ जैसे नियम पूर्णरूपेण हटने चाहिए और लंबित मामलों के निपटारे के लिए समयसीमा तय होनी चाहिए। वरना आपकी आलोचना होती रहेगी, आप किस-किस को जेल में बंद करेंगे?

जब सुप्रीम कोर्ट के CJI या कोई जज ये कहता है कि वो सिर्फ और सिर्फ संविधान के प्रति उत्तरदायी है, तो सवाल उठता है कि गलती करने पर संविधान ने कब किसे टोका है? संविधान एक पुस्तक है, कोई जीवित वस्तु तो नहीं। 10 लाख की जनसंख्या पर जहाँ मात्र 20 जज हों और 21% नय्यापलिका के पद खाली हों, वहाँ संविधान को इसका जवाब क्यों नहीं देते जज साहब? 1.82 लाख मामले 30 साल या उससे अधिक से चल रहे हैं और 2.44 लाख मुक़दमे बलात्कार और बाल यौन शोषण के हैं, इन्हें न्याय कब मिलेगा? 76% कैदियों को जेल में बिना सज़ा सुनाए रखा गया है, सुनवाई के दौरान ही।

बकरीद की नमाज के बाद मस्जिद से निकला गालिब, ताबड़तोड़ की गोलीबारी: लाइसेंसी बंदूक जब्त, यूपी पुलिस ने जेल भेजा

उत्तर प्रदेश में आजमगढ़ से बकरीद के मौके पर हर्ष फायरिंग किए जाने का मामला प्रकाश में आया है। रविवार (10 जुलाई, 2022) को बकरीद की नमाज के बाद मस्जिद से बाहर निकले गालिब ने फायरिंग कर दी, जिससे अफरातफरी मच गई। मौके पर मौजूद पुलिस वालों ने उसे गिरफ्तार कर लिया।

घटना आजमगढ़ के चिवहटी गाँव का बताई जा रही है। चिवहटी में स्थित मस्जिद में बकरीद की नमाज अदा करने के लिए मुस्लिम समुदाय के लोग इकट्ठा हुए। नमाज के बाद जैसे ही लोग वहाँ से निकले तो लाल मोहम्मद के बेटे मोहम्मद गालिब ने अपनी खुशी का इजहार करते हुए अपनी लायसेंसी रायफल से फायरिंग शुरू कर दी। जिस वक्त गालिब ने ये सब किया उस दौरान वहाँ पर काफी लोग थे। किसी को भी गोली लग सकती थी। हालाँकि, अच्छी बात यह रही कि ऐसा कुछ नहीं हुआ।

घटना के बाद पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर लिया। मस्जिद के बाहर मौजूद पुलिस के जवानों ने तुरंत इसकी जानकारी विभाग के उच्चाधिकारियों को दी। अधिकारियों के आदेश के बाद गालिब को उसके असलहे समेत गिरफ्तार कर लिया गया। घटना के बाद सदर इलाके की सीओ सौम्या सिंह, गंभीरपुर थाने के प्रभारी रामप्रसाद बिंद भी घटनास्थल पर पहुँचे।

इस घटना को लेकर इंस्पेक्टर बिंद ने कहा कि आरोपित को जेल भेज दिया गया है और उसके शस्त्र लायसेंस को कैंसिल करने के लिए सीनियर अधिकारियों को पत्र भेजा जाएगा। फिलहाल बंदूक को जब्त कर लिया गया है। पुलिस अधिकारी ने कहा कि ईदगाह वाली जगह से आरोपित का घर केवल 200 मीटर की ही दूरी पर स्थित है।

गौरतलब है कि हालिया घटनाओं को देखते हुए इस्लामिक त्योहार बकरीद पर उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने किसी भी अनहोनी से निपटने के लिए सुरक्षा व्यवस्था को चाक चौबंद कर रखा है। इसके लिए वरिष्ठ अधिकारियों को सड़क पर उतार दिया गया है।

तौफीक-दानिश ने वायरल किया फर्जी स्क्रीनशॉट, राजस्थान पुलिस ने बेकसूर दलित को जेल में रखा: अंजुमन कमिटी की FIR, SDM के स्टाफ कफील का दबाव

राजस्थान के भीलवाड़ा में पुलिस द्वारा फर्जी स्क्रीनशॉट की वजह से एक दलित युवक को जेल भेजे जाने की खबर है। पीड़ित युवक 23 साल का विशाल खटीक है। उसके सोशल मीडिया का फर्जी स्क्रीनशॉट बनाने वाले आरोपितों के नाम तौफीक और दानिश हैं। पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर के जेल भेज दिया है। वहीं बेकसूर विशाल को 7 दिन जेल में रहना पड़ा। जेल से छूटने के बाद अब विशाल को धमकियाँ मिल रही हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पीड़ित युवक विशाल को सुरक्षा के लिए पुलिस के 2 जवान दिए गए हैं। एडिशनल SP शाहपुरा चंचल मिश्रा के मुताबिक, 7 जुलाई को विशाल की शिकायत पर जहाजपुर के तौफीक और देशवाली के दानिश को गिरफ्तार किया गया था। इन दोनों पर विशाल के फर्जी स्क्रीनशॉट को वायरल करने का आरोप था। जाँच के दौरान तौफीक और विशाल में कोई पुरानी दुश्मनी निकल कर आई थी जिसके चलते तौफीक ने विशाल को फँसाने के लिए ये कदम उठाया था।

विशाल ने बताया कि उदयपुर की घटना से वो काफी डरा हुआ है। 20 जून 2022 की रात उसे थाना जहाजपुर की पुलिस ने पकड़ लिया था। उसने SHO से बार-बार खुद को बेगुनाह बताया लेकिन उसकी किसी ने भी नहीं सुनी। आखिरकार उसे जेल भेज दिया गया। विशाल के फर्जी स्क्रीनशॉट में अपने ही मज़हब के खिलाफ खुद तौफीक और दानिश ऐसी बातें लिखीं थी जिस से आस-पास तनाव फ़ैल गया था।

दैनिक भास्कर के अनुसार, पुलिस ने इसी केस में 15 अन्य आरोपितों पर भी केस दर्ज किया है। स्क्रीनशॉट वायरल होने के चलते विशाल को कत्ल करने की धमकियाँ आने लगी थी। अब पुलिस के खुलासे के बाद भी कई चरमपंथी उसे जान से मारने की धमकी दिए जा रहे हैं। खुद विशाल का कहना है कि उसे उस अपराध में जेल भेजा गया जो उसने किया भी नहीं था और मुझे अभी भी अपनी बेगुनाही की सफाई देनी पड़ रही है।

पांचजन्य के मुताबिक विशाल की स्क्रीनशॉट वायरल होने के बाद अंजुमन कमेटी ने उस पर केस दर्ज करवाया। बाद में SDM ऑफिस के स्टाफ मोहम्मद कलीम ने मुज पर जबदरस्ती आरोप कबूल करने का दबाव बनाया। वही बाहर भीड़ विशाल को खुद के हवाले करने और उन्मादी नारे लगा रही थी जिसे सुन कर भी थाना प्रभारी चुप थे। अब विशाल ने केस के जाँच अधिकारी पर मानहानि का केस दर्ज करने का फैसला किया है। सर्व समाज ने विशाल के खिलाफ उन्मादी नारे लगाने वाली भीड़ पर FIR दर्ज करने की माँग की है।

‘पब्लिसिटी की भूखी, फोटो की दुकान’: हज की तस्वीरें शेयर करने पर ट्रोल हुईं सना खान, कट्टरपंथियों ने लगाया मुफ्ती को बर्बाद करने का इल्जाम

बॉलीवुड में अच्छे खासे करियर को अल्लाह की बंदगी के नाम पर छोड़ने वाली एक्ट्रेस सना खान (Sana Khan) अपने शौहर के साथ मक्का हज के लिए गई हैं। मक्का से सना खान ने अपने शौहर के साथ हज की तस्वीरों को सोशल मीडिया पर शेयर किया है। इसके बाद से नेटिजन्स उन्हें लगातार ट्रोल कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि फिल्म इंडस्ट्री छोड़ दी, लेकिन कैमरे का शौक अभी भी नहीं छूटा।

इसी क्रम में रहमान नाम के एक ट्विटर यूजर ने सना की पोस्ट पर तंज कसते हुए कहा, “9 चूहे खाकर बिल्ली हज को चली।”

सरफराज जौहर नाम के एक इस्लामवादी ने कहा, “अच्छे खासे मुफ्ती को तुमने बर्बाद कर दिया। इस्लाम दिखावा नहीं चाहता। ऐसा लगता है कि मुफ्ती साहब भी अब आपकी तरबियत में आ गए हैं।”

वहीं अहसान नाम के यूजर ने सना की पोस्ट पर तंज कसते हुए उन्हें फोटो की दुकान करार दे दिया।

Hashimalhanfi नाम के यूजर ने सना को पब्लिसिटी की भूखी करार दिया। यूजर ने कहा, “पब्लिसिटी की भूख आपको कुछ भी अच्छा नहीं करने देगी। यह ग्लैमर लाइफ की लत है। आप खुद को कैमरे से दूर नहीं रख सकते।”

अरमान उपाध्याय ने कहा, “कितनी अच्छी सेलिब्रिटी थी, क्या से क्या हो गई।”

वहीं इम्मी नाम के यूजर ने सना खान को सलाह दी कि वो एक बार पहले फातिमा रिझी अन के बारे में पढ़े। यूजर ने तंज कसा कि सना ने अपने चक्कर में अनस को भी मॉडल बना दिया।

@akepilinggi नाम की यूजर ने सना पर तंज कसते हुए उन्हें ‘हूरों की सरदारनी’ करार दिया। उल्लेखनीय है कि मुस्लिमों को अक्सर 72 हूरों का लालच दिया जाता है।

इस बीच कन्वर्टेड मुस्लिम नाम के यूजर ने सना से सवाल किया, “ये मौलाना लोग लोगों का ब्रेनवॉश करने के लिए किस तरह की ट्रिक का इस्तेमाल करते हैं? कोई मारने को भी तैयार हो जाता है और इस तरह की भी चीजें देखने को मिलती हैं।”

गौरतलब है कि बिग बॉस के सीजन 6 का हिस्सा रही सना खान ने दो साल पहले 2020 में बॉलीवुड को छोड़ने का ऐलान कर दिया था। इसके बाद उन्होंने सूरत के मौलवी अनस से निकाह कर लिया था।

पाकिस्तानी मंत्री को रेस्टोरेंट में देख लोगों ने लगाए ‘चोर-चोर’ के नारे: मदीना की मस्जिद-ए-नबावी में सुनना पड़ा था ‘भिखारी-भिखारी’

इमरान खान (Imran Khan) की जगह शहबाज शरीफ (Pakistan PM Shahbaz Sharif) के प्रधानमंत्री बनने के बावजूद पाकिस्तान के मंत्रियों पर छींटाकशी का सिलसिला थम नहीं रहा है। शरीफ सरकार में योजना मंत्री अहसान इकबाल (Ashan Iqbal) का एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें किसी रेस्त्रां में एक परिवार उनसे उलझकर ‘चोर-चोर’ कहता है।

पाकिस्तान की स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इकबाल इस्लामाबाद-लाहौर हाईवे पर स्थित रेस्त्रां में गए थे। वहाँ किसी बात पर एक ही परिवार के कुछ लोग उनसे उलझ गए। बात आगे बढ़ी तो परिवार के सदस्य मंत्री को ‘चोर-चोर’ कहकर बुलाने लगे।

अहसान इकबाल ने इस घटना का जिक्र अपने सोशल मीडिया साइट पर किया है। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि वे परिवार पर किसी तरह का आपराधिक मुकदमा नहीं दर्ज कराएँगे, क्योंकि इमरान खान नफरत की राजनीति कर रहे हैं और उन्होंने अपने फॉलोअरों के दिमाग में जहर भर दिया है।

इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) की रावलपिंडी जिला ईकाई ने इस इस घटना का वीडियो अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से पोस्ट किया है। इस घटना की पीछे की वजह सामने नहीं आई है।

कहा जाता है कि इस वीडियो को सबसे पहले PTI झेलम के जिला महासचिव फराज चौधरी ने शेयर किया था। उन्होंने ट्वीट कर लिखा था, “इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि अदालतें अहसान इकबाल जैसे लोगों को हिसाब देंगी या नहीं, जनता उन्हें हर शहर के चौक पर हिसाब देगी।”

इससे पहले अप्रैल 2022 में प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के नेतृत्व वाले प्रतिनिधिमंडल को अपनी तीन दिवसीय सऊदी अरब (Saudi Arabia) की यात्रा के दौरान भारी शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा। मदीना में मस्जिद-ए-नबावी से गुजर रहे प्रतिनिधिमंडल को देखते ही सैकड़ों तीर्थयात्रियों ने ‘चोर-चोर, भिखारी-भिखारी’ चिल्लाना शुरू कर दिया था।

इसके बाद राजधानी इस्लामाबाद में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान (Ex-PM Imran Khan) के समर्थक और पूर्व डिप्टी स्पीकर कासिम सूरी को पीट दिया गया था। शहबाज शरीफ की पार्टी PML-N के समर्थकों का कहना था कि मदीना में जो कुछ हुआ, वो इमरान खान की पार्टी के इशारे पर किया गया था।

बता दें कि इमरान खान शहबाज शरीफ की सरकार के खिलाफ अभियान छेड़ रखा है और उसे वह ‘चोर सरकार’ कहते हुए बयान करते हैं। इमरान शुरू से ही आरोप लगाते रहे हैं कि शहबाज शरीफ विदेशी ताकतों की मदद से उन्हें सत्ता से बेदखल प्रधानमंत्री बने हैं।

 

‘मैं शर्मिंदा हूँ कि हमारी सरकार रहते बैदुल्ला खान घुस आया’ : असम CM ने AAP नेता के बेटे की मौत पर खुद माँगी माफी, पुलिस को फटकारा

असम के डिब्रूगढ़ में पशु अधिकारों के लिए काम करने वाले विनीत बागड़िया की आत्महत्या मामले में मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने परिजनों से माफी माँगी है। उन्होंने परिवार के सामने पुलिस को फटकारते हुए कहा कि जो कुछ हुआ वह उसके लिए शर्मिंदा हैं। सीएम ने मुलाकात के दौरान आरोपितों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया।

समाचार एजेंसी एएनआई द्वारा साझा की गई वीडियो में सुन सकते हैं कि सीएम सरमा पुलिस को फटकारते हुए कह रहे हैं कि क्या सरकार इतनी कमजोर हो गई कि बैदुल्ला खान यहाँ तक आ गया। उन्होंने बोला कि वह आज जितना शर्मिंदा हुए हैं उससे ज्यादा वह कभी नहीं हो सकते थे।

उन्होंने पुलिस से पूछा, “माफिया (बैदुल्ला खान) आपके रहते हुए (पुलिस/प्रशासन) यहाँ आया और इन्हें परेशान किया मगर आपको इसकी भनक तक नहीं लगी। क्या इस तरह से प्रशासन चलेगा? आप वर्दी पहनते हो लेकिन उसके हिसाब से काम नहीं करते…यह सरासर डिब्रूगढ़ जिला प्रशासन की नाकामी है। मैं ये क्या सुन रहा हूँ? ये लोग क्या बोल रहे हैं, मेरा दिमाग ही काम नहीं कर रहा है। शायद ऐसा तो कश्मीर- श्रीनगर में भी नहीं हुआ होगा। मैं आज जितना शर्मिंदा हूँ उससे ज्यादा शर्मिंदा कभी नहीं हुआ।”

उन्होंने कहा, “ये घटना तब हुई है जब मैं मुख्यमंत्री के रूप में सेवा कर रहा हूँ। मुझे घटना पर दुख है इसलिए मैं बागड़िया के माता-पिता और राज्य के लोगों से माफी माँगता हूँ।”

बता दें कि पशु अधिकार कार्यकर्ता विनीत बागड़िया ने गुरुवार (7 जुलाई 2022) को डिब्रूगढ़ के शनि मंदिर मार्ग पर स्थित अपने घर पर फाँसी लगाकर आत्महत्या की थी। उन्होंने खुद की जान लेने से पहले एक वीडियो रिकॉर्ड किया था और बताया था कि कैसे बैदुल्ला खान नाम के व्यक्ति ने और संजय शर्मा, निशांत शर्मा ने उनका शारीरिक उत्पीड़न किया। उन्होंने कहा कि एक किराए की जमीन मामले पर उन्हें और उनके परिवार को लंबे समय से तंग किया जा रहा था।

बैदुल्ला को किराए पर जमीन देकर पछताया बागड़िया परिवार

सामने आई जानकारी के अनुसार, विनीत बागड़िया के परिवार का बैदुल्ला से कई सालों से विवाद था। विनीत के पिता कैलाश ने अपने घर के ग्राउंड फ्लोर पर संजय को बिजनेस के लिए किराए पर जगह दी थी। इसके बाद संजय ने वो जगह बैदुल्ला को किराए के लिए दे दी। उसने उस जगह मोटरसाइकिल के स्पेयर पार्ट्स बेचने की दुकान खोल ली।

जब विनीत के घरवालों ने उस जमीन को खाली कराना चाहा तो दूसरे पक्ष ने जगह खाली करने से मना कर दिया। इतना ही नहीं कैलाश के मुताबिक बैदुल्ला दुकान का किराया भी नहीं देता था और दुकान भी नहीं छोड़ता था। बहुत विवाद बढ़ने पर केस कोर्ट में पहुँचा। मगर बैदुल्ला का बागड़िया परिवार को सताना बंद नहीं हुआ। अंत में तंग आकर विनीत ने कुछ दिन पहले आत्महत्या कर ली और तब प्रशासन का ध्यान इस केस पर गया।

AAP नेता के बेटे थे विनीत बागड़िया

अब पुलिस बैदुल्ला को गिरफ्तार कर चुकी है जबकि एक इजाज खान नाम का आरोपित अभी फरार है। गुरुवार को विनीत का शव उनके घर पर मिला था। वह एनिमल वेलफेयर पीपुल नाम से एनजीओ का संचालन करते थे। पशु अधिकारों के लिए आवाज के कारण वह डिब्रूगढ़ के प्रसिद्ध नाम थे। उनके पिता कैलाश कुमार भी सीए थे। साथ ही आम आदमी पार्टी के नेता भी। जिन्होंने आप की ओर से निकाय के चुनाव लड़े थे। उन्होंने ही अपने बेटे की आत्महत्या के लिए तीन लोगों को जिम्मेदार बताया था। जिसके बाद बैदुल्ला खान और निशांत को अगले ही दिन पुलिस ने अरेस्ट कर लिया।

हर माह ₹1.5 करोड़, जेल में मस्ती की कीमत: बॉलीवुड हिरोइन जैकलीन के कनेक्शन वाले महाठग की कहानी, तिहाड़ के 82 कर्मचारियों पर FIR

ठगी के आरोप में जेल काट रहे सुकेश चंद्रशेखर को जेल में VVIP सुविधाएँ मुहैया करवाने के आरोप में दिल्ली की रोहिणी जेल के 82 स्टाफ के विरुद्ध FIR दर्ज हुई है। आरोप है कि बेहतरीन सुविधाओं की एवज में ये अधिकारी सुकेश से डेढ़ करोड़ रुपए प्रतिमाह घूस लेते थे। इन सुविधाओं में जेल के अंदर मोबाइल फोन का प्रयोग और अच्छी बैरक में रहने की अनुमति शामिल है। यह मुकदमा 15 जून, 2022 को दर्ज हुआ है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, FIR दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) द्वारा दर्ज करवाया गया है। सुकेश चंद्रशेखर रोहिणी के जेल नंबर 10 के वार्ड नंबर 3 में बैरक संख्या 204 में बंद था। इस से पहले उसे सुविधाएँ मुहैया करवाने वाले 7 जेल स्टाफ़ गिरफ्तार किए जा चुके था।

एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक जिन 82 जेलकर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है जिसमें 10 असिस्टेंट सुपरिंटेंडेंट रैंक के अधिकारी हैं। इनके नाम जसवंत सिंह, विकास डागर, नवीन दहिया, प्रकाश चंद, अशोक मल्होत्रा, धर्मबीर सिंह, सनी चंद्र, मोहित, योगेश और मोहित अंतिल हैं। इसके अलावा अन्य आरोपितों में वॉर्डन व हेड वॉर्डन शामिल हैं।

FIR में दर्ज अन्य आरोपित जेल स्टाफ (चित्र साभार- न्यूज़रूम पोस्ट)

बताया जा रहा है कि कुछ ही दिन पहले एक CCTV फुटेज में सुकेश चंद्रशेखर जेल के बाहर संदेश भिजवाते पकड़ा गया था। यह संदेश तिहाड़ जेल के ही एक स्टाफ के द्वारा भेजा जा रहा था। संदेश ले जाने वाला स्टाफ नर्सिंग विभाग से था जिस पर तिहाड़ जेल प्रशासन ने दिल्ली पुलिस से कड़ी कार्रवाई की माँग की थी।

गौरतलब है कि रेनबैक्सी के मालिक की पत्नी से 200 करोड़ की उगाही करने वाला सुकेश कभी खुद को PMO तो कभी गृह मंत्रालय का अधिकारी बता कर लोगों से बात किया करता था। उसका नाम बॉलीवुड के कुछ लोगों से भी जुड़ा है, जिसमें जैकलीन फर्नांडीज, नोरा फतेही, शिल्पा शेट्टी, श्रद्धा कपूर आदि हैं। दिसम्बर 2021 में सुकेश ने तिहाड़ जेल के कर्मचारियों पर जबरन वसूली के भी आरोप लगा कर जाँच की माँग की थी। जैकलीन फर्नांडिस को चुम्मा लेते हुए उसकी तस्वीर भी वायरल हुई थी।

अब गोवा कॉन्ग्रेस में फूट, मीडिया रिपोर्ट्स में दावा – 11 में से 9 विधायक छोड़ सकते हैं पार्टी, कॉन्ग्रेस ने बताया अफवाह

महाराष्ट्र (Maharashtra) के बाद अब गोवा (Goa)में भी कॉन्ग्रेस (Congress) की मुश्किलें बढ़नी शुरू हो गई हैं। मीडिया रिपोर्ट्स में ऐसी खबरें आ रही हैं कि राज्य में पार्टी के 9 विधायक बीजेपी में शामिल हो सकते हैं। राज्य में कॉन्ग्रेस के 11 विधायक हैं। सूत्रों के हवाले से रिपब्लिक टीवी ने दावा किया है कि रविवार (10 जुलाई, 2022) को ही कॉन्ग्रेस नेता माइकल लोबो फिर से बीजेपी का दामन थाम सकते हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, पणजी स्थित एक होटल में पार्टी की मीटिंग भी हुई। इस मामले को लेकर कॉन्ग्रेस के विधायक एलेक्सो सिकेरा ने कहा कि उन्हें इसमें शामिल होने के लिए बुलाया ही नहीं गया। उन्होंने कहा, “वहाँ 7 विधायक हैं। मुझे पार्टी आलाकमान ने शिष्टाचार मुलाकात तक के लिए नहीं बुलाया। क्या करना है इसको लेकर अफवाहें अब खत्म हो गई हैं। मैं अपनी बात कर सकता हूँ, लेकिन किसी और के बारे में कुछ नहीं कह सकता।”

इसी मसले पर शनिवार (9 जुलाई 2022) को गोवा कॉन्ग्रेस के प्रभारी गुंडू राव ने पणजी में पार्टी के 11 विधायकों के साथ एक बैठक की और विधायकों के दलबदल को उन्होंने महज एक अफवाह करार दिया।

वहीं गोवा कॉन्ग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अमित पाटकर ने भाजपा पर अफवाह फैलाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा, “हमारे 11 में से आठ विधायक नए हैं। आज (सदन में) फ्लोर मैनेजमेंट पर एक बैठक हुई थी। हमारे वरिष्ठ विधायकों ने नए विधायकों के साथ चर्चा की थी, और मुझे उम्मीद है कि सोमवार से आप कॉन्ग्रेस को जनता के मुद्दों को सरकार के खिलाफ उठाते देखेंगे। भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार लोगों के बीच केवल अफवाह और भ्रम पैदा करती है।”

कैसे शुरू हुई ये अफवाह

गौरतलब है कि प्रदेश कॉन्ग्रेस के कुछ विधायकों के तब से बीजेपी में शामिल होने की अटकलें चल रही हैं, जब भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव और पार्टी के राज्य प्रभारी सी टी रवि ने इसी साल मई में कहा था कि भाजपा के पास वर्तमान में 20 विधायक हैं, इसके अलावा उसके पास राष्ट्रवादी गोमांतक और निर्दलीयों समेत कुल 25 विधायकों का समर्थन है। ऐसे में अगर पार्टी की तरफ से इजाजत मिलती है तो जल्द ही ये विधायक बढ़कर 30 हो जाएँगे।

बहरहाल कॉन्ग्रेस से जिन विधायकों के पार्टी छोड़ने की चर्चा है, उनमें पूर्व मुख्यमंत्री दिगंबर कामत, यूरी अलेमाओ संकल्प अमोलकर, माइलकल लोबो, एलेक्सो सिक्केरो, डिलाइला लोबो, राजेश फलदाई और केदार नायक शामिल हैं।

‘माँ काली का असीमित और असीम आशीर्वाद हमेशा भारत के साथ’: बोले PM मोदी – आस्था जब पवित्र हो, शक्ति साक्षात् करती है पथ प्रदर्शन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार (10 जुलाई, 2022) को ‘रामकृष्ण मिशन’ के अध्यक्ष रहे स्वामी आत्मस्थानंद की जन्म शताब्दी कार्यक्रम को सम्बोधित किया। इस दौरान उन्होंने स्वामी रामकृष्ण परमहंस को याद करते हुए कहा कि वो एक ऐसे संत थे जिन्होंने माँ काली का स्पष्ट साक्षात्कार किया था और उनके चरणों में अपना सर्वस्व समर्पित कर दिया था। वो कहते थे कि ये संपूर्ण जगत, ये चराचर – ये सब कुछ माँ की चेतना से व्याप्त था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि यही चेतना पश्चिम बंगाल की काली पूजा और पूरे भारत की आस्था में दिखती है। उन्होंने कहा कि इसी चेतना और शक्ति-पूंज को स्वामी विवेकानंद जैसे युगपुरुषों के रूप में स्वामी रामकृष्ण परमहंस ने प्रदीप्त किया था। पीएम मोदी ने कहा कि रामकृष्ण परमहंस को माँ काली की जो अनुभूति और आध्यात्मिक दर्शन हुए, उसने उनके भीतर असाधारण ऊर्जा और सामर्थ्य का संचार किया था।

प्रधानमंत्री ने कहा, “स्वामी विवेकानंद जैसा ओजस्वी व्यक्तित्व, इतना विराट चरित्र, लेकिन जगन्माता काली की स्मृति में, उनकी भक्ति में एक छोटे बच्चे के समान विह्वल हो जाते थे। भक्ति की ऐसी ही निश्चलता और शक्ति साधना का ऐसा ही सामर्थ्य मैं हमेशा आत्मस्थानंद के रूप में देखता था। उनकी बातों में भी माँ काली की चर्चा होती रहती थी। जब भी बेलूर मठ जाना हो और गंगा किनारे बैठ कर माँ काली का मंदिर दिखता था तो एक लगाव बन जाता था।”

उन्होंने कहा कि जब आस्था इतनी पवित्र होती है तो शक्ति साक्षात् हमारा पथ प्रदर्शित करती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि माँ काली का वो असीमित और असीम आशीर्वाद हमेशा भारत के साथ है और देश इसी आध्यात्मिक ऊर्जा को लेकर आज विश्व कल्याण की भावना से आगे बढ़ रहा है। बता दें कि 21 मई, 1919 को दिनाजपुर में जन्मे स्वामी आत्मस्थानंद म्यांमार में भी अस्पताल बनवाया था। भारत, नेपाल और बांग्लादेश में उन्होंने कई राहत व पुनर्मुक्ति अभियान चलाए।

पीएम मोदी द्वारा माँ काली का जिक्र करना महत्वपूर्ण है, क्योंकि माँ काली के एक फिल्म पोस्टर को लेकर देश भर में विवाद छिड़ा हुआ है, जिसमें देवी को सिगरेट और LGBTQ झंडे के साथ दिखाया गया है। TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने लीना मणिमेकलई की इस फिल्म का समर्थन करते हुए माँ काली को मांस खाने वाली और शराब पीने वाली बता दिया, जिस बयान से तृणमूल कॉन्ग्रेस ने खुद को अलग कर लिया। शशि थरूर ने उनका समर्थन किया। इधर लीना ने माफ़ी माँगने की बजाए उल्टा माँ काली को समलैंगिक बताते हुए कह दिया कि वो पितृसत्ता में थूकती है और हिंदुत्व का विनाश करती है।

श्रीलंका में राजपक्षे के ऑफिस में मिली करोड़ों की नकदी, उनका पैतृक आवास फूँका: राष्ट्रपति भवन में मस्ती करते और IMF का मजाक बनाते नजर आए लोग

श्रीलंका में आर्थिक संकट को लेकर लोगों में उपजे असंतोष के बाद राष्ट्रपति भवन पर प्रदर्शनकारियों के कब्जे के पास एक से एक हैरतअंगेज खुलासे हो रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि राष्ट्रपति भवन में रखी गोटबाया राजपक्षे की करोड़ों रुपए की नकदी प्रदर्शनकारियों के हाथ लगी है।

इसका एक वीडियो भी वायरल हो रहा है। वीडियो में देखा जा सकता है राष्ट्रपति भवन पर कब्जा करने वाले प्रदर्शनकारियों में से एक नोटों की गड्डियाँ गिन रहा है। वहीं एक प्रदर्शनकारी नोटों का बंडल दिखा रहा है।

स्थानीय अखबार डेली मिरर के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे के बंगले से मिले करोड़ों रुपए को सुरक्षा बलों को सौंप दिया है। वहीं, सुरक्षा इकाइयों का कहना है कि प्राथमिक जाँच के बाद इसके बारे में उठाए गए कदमों की जानकारी देंगे।

वहीं, श्रीलंका के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल शैवेंद्र सिल्वा ने देश के सभी नागरिकों से शांति बनाए रखने और आर्मी, सशस्त्र बलों एवं पुलिस को अपना समर्थन देने का आग्रह किया। सिल्वा ने कहा कि इस संकट की घड़ी में देश में स्थापित करना पहली प्राथमिकता है।

उधर राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे और उनके बड़े भाई एवं देश के पूर्व प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे का हंबनटोटा में स्थित पैतृक घर को सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों के एक समूह ने आग के हवाले कर दी। इस मामले में पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया है।

इसके पहले प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे के घर में प्रदर्शनकारियों ने तोड़फोड़ और आगजनी की थी। हालाँकि, प्रदर्शनकारियों द्वारा नेताओं के निजी घरों को आग लगाने पर चारों तरफ आलोचना की जा रही है।

प्रदर्शकारियों ने विक्रमसिंघे के घर में आग लगाने की घोषणा तब तक, जब वे प्रधानमंत्री पद छोड़ने की घोषणा सार्वजनिक तौर पर कर चुके थे और सर्वदलीय सरकार बनाने के लिए अपनी इच्छा के बारे में बता चुके थे।

विक्रमसिंघे की इस्तीफे की घोषणा के बाद पर्यटन एवं भूमि मंत्री हरिन फर्नांडो और श्रम एवं विदेश रोजगार मंत्री मानुषा नानायकारा ने भी तुरंत इस्तीफा दे दिया था। वहीं, निवेश संवर्धन मंत्री धम्मिका परेरा ने भी रविवार (10 जुलाई 2022) को अपने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया।

बता दें कि शुक्रवार (8 जुलाई 2022) को देश के कोने-कोने से रेलगाड़ियों और विभिन्न वाहनों में कोलंबो पहुँचे प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति भवन पर कब्जा कर लिया था। इसके बाद राष्ट्रपति वहाँ से भाग गए। कहा जाता है कि वे नौसेना के जहाज में सवार हो कर कोलंबो से बाहर निकल गए हैं।

वहीं, हजारों प्रदर्शनकारी राष्ट्रपति भवन में डटे हुए हैं। वे वहाँ प्रेसिडेंशियल सुइट का जमकर आनंद उठा रहे हैं। दर्जनों लोगों के स्वीमिंग पुल में तैरते हुए वीडियो सामने आया है। प्रदर्शनकारी पुल में अठखेलियाँ कर रहे हैं। वहीं, कुछ शॉवर में नहा रहे हैं।

राष्ट्रपति भवन में प्रदर्शनकारी पियानो बजाते भी नजर आए। राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे का चुनावी अभियान गीत ‘द हीरो दैट वर्क्स’ को प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति कार्यालय में बजाया और गाया। इस दौरान वे मस्ती करते नजर आए।

इतना ही नहीं, इस दौरान प्रदर्शनकारी अंतरराष्ट्रीय मुद्रा फंड का भी मजाक उड़ाते नजर आए।

इसके अलावा, कुछ प्रदर्शनकारियों को सोफे पर लेटे हुए तो कुछ विदेशी राष्ट्राध्यक्षों के बैठने वाली कुर्सी पर बैठे नजर आ रहे हैं। प्रदर्शनकारी लंबे संघर्ष के बाद अपनी थकान मिटाते तथा मस्ती के मूड में नजर आ रहे हैं।

उधर इंडियन ऑयल कंपनी की सहायक कंपनी लंका इंडियन ऑयल कंपनी (LIOC) ने कहा कि उसने आज 10 जुलाई 2022 से ईंधन वितरण फिर से शुरू कर दिया है। कंपनी ने कहा कि त्रिंकोमाली टर्मिनल 24 घंटे काम कर रहा है।