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खुद की मूवी हो गई सुपर फ्लॉप, SRK के करियर के लिए दुःखी तापसी पन्नू: कहा – 5 साल से कोई फिल्म नहीं आई, लेकिन…

बॉलीवुड अभिनेत्री तापसी पन्नू (Taapsee Pannu) ने हाल ही में शाहरुख खान (Shah Rukh Khan) को ‘सुपरस्टार’ बताया और कहा कि उनकी जीत या हार पर्सनल है यही रीयल स्टारडम है। एक इंटरव्यू में तापसी ने बताया कि शाहरुख हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में अपनी जर्नी शुरू करने वाले हर आउटसाइडर के लिए बेंचमार्क हैं।

एंटरटेनमेंट वेबसाइट पिंकविला को दिए इंटरव्यू में तापसी ने कहा, “मैंने उनसे कहा है कि वह हर उस इंसान के लिए बेंचमार्क हैं, जो इंडस्ट्री में बाहर से आ रहा है। मैं सुपरस्टार नहीं हूँ, लेकिन वह सुपरस्टार हैं। जब आप उनके जैसे इंसान या सुपरस्टार के साथ काम करते हैं तो आपको एहसास होता है कि स्टारडम या स्टार शब्द का सही मतलब क्या है। उनकी पाँच साल से कोई फिल्म नहीं आई है, लेकिन उनका एक कदम हर जगह तूफान खड़ा कर देता है। उनकी जीत और हार पर्सनल होती है।”

वहीं, इन दिनों तापसी पन्नू अपनी फिल्म ‘शाबाश मिठू’ को लेकर भी चर्चा में हैं। यह फिल्म भारत की सबसे मशहूर महिला क्रिकेटरों में से एक मिताली राज के करियर के उतार-चढ़ाव पर बेस्ड है, लेकिन इस फिल्म को दर्शकों ने सिरे से नकार दिया है। डायरेक्टर श्रीजीत मुखर्जी की फिल्म 15 जुलाई को रिलीज हुई, लेकिन अभी तक फिल्म बॉक्स ऑफिस पर 2 करोड़ रुपए भी नहीं कमा पाई है। शाबाश मिठू का ओपनिंग कलेक्शन लगभग 40 लाख रुपए रहा। दूसरे दिन, फिल्म ने 60 से 65 लाख रुपए के बीच कमाई। वहीं, तीसरे दिन इस फिल्म ने रविवार (17 जुलाई, 2022) को टिकट खिड़की पर सिर्फ 60 लाख रुपए ही कमाए। फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर अब तक कुल कलेक्शन 1.65 करोड़ रुपए ही कमाए हैं।

बता दें कि राजकुमार हिरानी (Rajkumar Hirani) की फिल्म ‘डंकी’ (Dunky) में तापसी पन्नू पहली बार शाहरुख खान के साथ नजर आएँगी। जिओ स्टूडियोज, रेड चिलीज एंटरटेनमेंट और राजकुमार हिरानी मिलकर इस फिल्म को प्रोड्यूस कर रहे हैं। वहीं फिल्म की कहानी अभिजात जोशी और कनिका ढिल्लों ने लिखी है। ‘डंकी’ अगले साल 22 दिसंबर को सिनेमाघरों में रिलीज होगी।

‘PM या किसी भी नागरिक को गाली देना अभिव्यक्ति की आज़ादी नहीं’: FIR रद्द करने से HC का इनकार, मोदी-शाह को दी गई थी गाली

इलाहाबाद हाई कोर्ट (Allahabad High Court) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय मंत्रियों के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने के आरोपित मुमताज मंसूरी नामक व्यक्ति की याचिका खारिज कर दी। आरोपित मंसूरी ने अपने खिलाफ दर्ज FIR को रद्द करने का अनुरोध किया था। 

न्यायमूर्ति अश्विनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति राजेंद्र कुमार की पीठ ने याचिका खारिज करते हुए कहा, “इस देश का संविधान हर नागरिक को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार देता है, लेकिन इस अधिकार के तहत कोई व्यक्ति किसी नागरिक को गाली नहीं दे सकता या उसके खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी नहीं कर सकता। प्रधानमंत्री या अन्य मंत्रियों के खिलाफ भी नहीं।”

कोर्ट ने न सिर्फ FIR को रद्द करने से मना कर दिया बल्कि मामले को लेकर अधिकारियों को कार्रवाई करने के लिए भी कहा। यह आदेश जस्टिस अश्वनी कुमार और जस्टिस राजेंद्र कुमार चतुर्थ की खंडपीठ ने मुमताज मंसूरी की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है।

पीएम और गृह मंत्री के खिलाफ मंसूरी ने की थी अपमानजनक टिप्पणी

बता दें कि ये मामला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह सहित अन्य मंत्रियों को अपशब्द बोलने का है। मुमताज मंसूरी ने फेसबुक पोस्ट में पीएम मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और अन्य केंद्रीय मंत्रियों को ‘कुत्ता’ कहा था। इसके बाद 2020 में मंसूरी के खिलाफ आईपीसी की धारा 504 और आईटी एक्ट की धारा 67 के तहत मामला दर्ज किया गया। एफआईआर दर्ज करने को चुनौती देते हुए उन्होंने इसे रद्द करने की माँग को लेकर हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

अदालत ने FIR रद्द करने से इनकार करते हुए कहा, “उस FIR से स्पष्ट तौर पर संज्ञेय अपराध प्रदर्शित होता है। हमें मौजूदा रिट याचिका में हस्तक्षेप करने का कोई उचित आधार नजर नहीं आता। अधिकारी इस मामले में कानून के मुताबिक कार्रवाई करने और जल्द से जल्द जाँच पूरी करने के लिए स्वतंत्र हैं।”

NSE को-लोकेशन घोटाला मामले में आया सुचेता दलाल का नाम, ED ने की पूछताछ: हजारों करोड़ का है स्कैम, CBI और SEBI भी कर रही जाँच

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सोमवार (18 जुलाई 2022) को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) को-लोकेशन घोटाला मामले में पत्रकार सुचेता दलाल का बयान दर्ज किया है। जाँच के दौरान उनका नाम सामने आने के बाद उन्हें पूछताछ के लिए बुलाया गया था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईडी के दिल्ली स्थित मुख्यालय में सुचेता दलाल (Journalist Sucheta Dalal) से शनिवार (16 जुलाई 2022) को लंबी पूछताछ की गई। उन्होंने जाँच एजेंसी के सभी जवाबों का जवाब दिया। हालाँकि, ईडी के किसी भी अधिकारी ने अभी तक इस मामले पर कोई भी टिप्पणी नहीं की है। दलाल का कहना है कि वह समन मिलने के बाद नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) को-लोकेशन घोटाले के सिलसिले में ईडी की जाँच में शामिल हुईं।

दलाल ने कहा, “नई दिल्ली की बैठक से ठीक पहले, मुझे बताया गया था कि वे पुष्पल पॉल के सामने मेरा बयान दर्ज करना चाहते हैं। एसपी सीबीआई अभिनव खरे से पूछने पर उन्होंने मुझे बताया था कि यह ‘केन फोंग’ के बारे में है। यह नाम व्हिसलब्लोअर द्वारा इस्तेमाल किया किया गया था।”

दरअसल, सीबीआई द्वारा पूछे गए ज्यादातर सवाल केन फोंग के चार पत्रों को लेकर थे। मैं केन फोंग द्वारा दो अलग-अलग देशों से पोस्ट किए गए सभी चार पत्रों को ले गई थी और सेबी (SEBI) को मेरे ई-मेल की सीबीआई प्रतियाँ दिखाई थीं। दलाल ने अपने बयान में कहा, “पूछा गया कि क्या मैं जानती हूँ कि केन फोंग कौन हैं? इस पर मैंने कहा कि मुझे नहीं पता कि वह कौन है। मुझसे उस प्रक्रिया के बारे में भी पूछा गया जिसका हमने लेख लिखने से पहले पालन किया और इसे प्रकाशित करने का निर्णय लिया। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या मैंने लेख लिखने से पहले एनएसई जाने के लिए कहा था।”

उनसे पूछा गया कि क्या वह पूर्व पुलिस आयुक्त संजय पांडे को जानती हैं, जिनकी फर्म आईसेक सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड जाँच के दायरे में है। इसके जवाब में उन्होंने कहा कि संजय पांडे के साथ उनका कोई लिंक नहीं है और ना ही उसके व्यवसाय से कोई लेना-देना है। उनसे यह भी पूछा गया कि क्या वह एनएसई के पूर्व प्रबंध निदेशक रवि नारायण (Ravi Narain) को जानती हैं। दलाल ने कहा कि वह उसे जानती हैं। उन्होंने जाँच करने वाले अधिकारियों को बताया कि उन्हें ठीक से याद नहीं है कि उन्होंने पांडे को नारायण से मिलवाया था या नहीं।

दलाल ने आगे कहा, “मैंने कहा कि एनएसई या रवि नारायण को मुझसे सिफारिश की आवश्यकता क्यों होगी, जब भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने पांडे को 2005 में नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (एनएसडीएल) की जाँच करने के लिए कहा था। एनएसडीएल एक एनएसई की सहायक कंपनी है। बाद में, एनएसई ने खुद उन्हें एक व्यापारिक गड़बड़ी के संबंध में एक जाँच समिति का हिस्सा बनने के लिए कहा था।”

कविता ने प्रेमी इरशाद के साथ मिल कर बुजुर्ग ससुर को मार डाला, ईद के लिए चाहिए था पैसा: दोस्त परवेज, नौशाद और साजिद ने दिया साथ

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के टीला मोड़ थाना क्षेत्र के पसौंडा गाँव में रहने वाले 75 वर्षीय बुजुर्ग जसवंत शर्मा की हत्या की गुत्थी पुलिस ने सुलझा ली है। जसवंत की हत्या उसकी बहू कविता ने अपने बॉयफ्रेंड इरशाद और उसके दोस्तों परवेज, नौशाद एवं साजिद के साथ मिलकर की थी। वह प्रॉपर्टी में हिस्सा नहीं मिलने से नाराज थी।

पुलिस ने रविवार (17 जुलाई 2022) को कविता और उसके प्रेमी इरशाद समेत 4 आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने इरशाद, नौशाद और साजिद को कोयल एन्क्लेव से गिरफ्तार किया था। 

एक और आरोपित परवेज को पुलिस ने सोमवार (18 जुलाई 2022) को गोलीबारी के बाद गिरफ्तार कर लिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, परवेज ने गिरफ्तारी से बचने की कोशिश करते हुए पुलिस पर फायरिंग की। पुलिस ने आत्मरक्षा में जवाबी फायरिंग की। इस दौरान परवेज के पैर में गोली लग गई। उसे इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इरशाद ने ईद मनाने के लिए कविता से पैसा माँगा था। इस पर कविता ने अपने पास पैसा न होने की बात कहकर उसे अपने ससुर को मारने का आइडिया दिया था।

साहिबाबाद के सहायक पुलिस अधीक्षक (ASP) अभिजीत आर शंकर ने कहा, “परवेज को सोमवार तड़के लोनी रोड के बंथला कैनाल कट के पास एक काले रंग की स्प्लेंडर प्लस मोटरसाइकिल पर देखा गया। जब उसे एक पुलिस चौकी पर रोका गया तो उसने गिरफ्तारी से बचने की कोशिश करते हुए गोलियाँ चलानी शुरू कर दी। अपनी जाँच में हमने पाया कि परवेज टीला मोड़ में हुई घटना के बाद मृतक के बेटे के नाम पर रजिस्टर्ड मोटरसाइकिल से फरार हो गया था।

एसपी सिटी ज्ञानेंद्र ने कहा कि जसवंत की हत्या संपत्ति के लिए की गई थी। वे जिस घर में रह रहे थे, उसकी कीमत एक करोड़ रुपए थी। घर में कई गोदाम थे जिन्हें जसवंत ने किराए पर दिया था।

‘जसवंत शर्मा की हत्या की साजिश उनकी बहू कविता ने रची थी’

पुलिस के मुताबिक कविता की शादी जसवंत शर्मा के बड़े बेटे से हुई थी। सात साल पहले उसके पति का देहांत हो गया था। वह शर्मा के दूसरे बेटे पंकज और उसके परिवार समेत अपने ससुराल के पसौदा के एक मकान में रह रही थी। एएसपी (सिटी-2) ज्ञानेंद्र कुमार सिंह ने कहा, “हमारी जाँच में सामने आया है कि मृतक की बड़ी बहू कविता ने अपने प्रेमी इरशाद के साथ मिलकर पूरी साजिश रची थी।”

कविता से पूछताछ करने पर कविता ने कबूल किया कि उसने अपने ससुर की हत्या की योजना बनाना और अपने प्रेमी इरशाद एवं परवेज की मदद से अपराध को अंजाम दिया। कविता ने पुलिस को आगे बताया कि उसके पति की मौत के बाद उसके ससुर का व्यवहार बदल गया था। वह इससे खुश नहीं थी। दो साल पहले उसकी मुलाकात एक टैक्सी ड्राइवर परवेज से हुई थी। मगर एक मामले में परवेज को जेल भेज दिया गया था। उस दौरान परवेज का मोबाइल इरशाद इस्तेमाल कर रहा था। कविता इस नंबर पर इरशाद से बात करने लगी और उसके प्यार में पड़ गई। वे 2 साल से अधिक समय से रिलेशनशिप में हैं।

जसवंत को जब कविता और इरशाद के बीच लगातार मुलाकातों के बारे में पता चला तो उन्होंने इसका विरोध किया। उसने दावा किया कि जसवंत ने उसे पैसा देने से इनकार कर दिया था और कहा था कि उसे पारिवारिक संपत्ति में कोई हिस्सा नहीं मिलेगा।

पुलिस ने अपनी जाँच में पाया कि 14 जुलाई और 15 जुलाई की रात को चारों युवक परवेज, इरशाद, नौशाद और साजिद जसवंत के घर पहुँचे, जहाँ कविता ने ताला खोलकर उन्हें अंदर घुसाया। जब जसवंत ने शोर मचाया, तो उन्होंने उसे बिस्तर से बाँध दिया और उसे पीट-पीट कर मार डाला। इतना ही नहीं, इसे लूटपाट का मामला दिखाने के लिए कविता ने अन्य आरोपितों से खुद को बँधवा लिया था। इसके बाद अन्य आरोपित लूटपाट कर घटनास्थल से फरार हो गए। पुलिस के अनुसार, कविता ने शुरू में आरोप लगाया कि जब वह उठी तो उसने देखा कि उसके हाथ और पैर बँधे हुए हैं। उसने कहा कि उसे नहीं पता कि जब वह सो रही थी तब क्या हुआ।

ट्राईसिटी टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक, कविता के बेटे तुषार ने पुलिस को बताया कि कुछ लुटेरे घर आए थे और उसे बंदूक की नोक पर दूसरे कमरे में ले गए। उन्होंने एक लाख के जेवर चुराए और 7500 रुपए नकद ले गए। एसएसपी मुनिराज ने बताया कि तुषार ने दोपहर करीब दो बजे 112 पर फोन किया था। पुलिस जब घटना स्थल पर पहुँची तो उन्हें जसवंत का शव मिला।

पंकज ने कविता के खिलाफ दर्ज कराया केस

जब घटना हुई उस वक्त जसवंत का छोटा बेटा पंकज घर पर नहीं था। कविता ने उसे फोन किया था और जल्द से जल्द लौटने को कहा था। जब पंकज वापस आया और पूरी बात सुनने के बाद उसने कविता के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई क्योंकि उसे उसके घटना में शामिल होने का संदेह था।

पंकज की शिकायत के आधार पर आरोपित के खिलाफ धारा 394 और 302 के तहत FIR दर्ज की गई थी। इसके अलावा, बाद में FIR में आईपीसी की धारा 457, 396, 120 बी, 34 और 412 को जोड़ा गया।

उसने अपनी शिकायत में कहा था कि कुछ अज्ञात लोग जबरदस्ती उसके घर में घुसे थे। उन्होंने जसवंत को बाँध दिया और बुरी तरह पीटा। पिटाई के दौरान लगी चोट के कारण जसवंत ने दम तोड़ दिया। घटना के समय कविता भी घर में मौजूद थी और उसने दावा किया कि उसके ससुर की हत्या करने वाले लोगों ने गहने और नकदी ले ली। हालाँकि, जाँच के दौरान, पुलिस ने पाया कि जबरन अंदर घुसने के कोई संकेत नहीं थे।

सिम कार्ड ने मामले को सुलझाने में पुलिस की मदद की

जाँच के दौरान पुलिस को कविता के कमरे में एक सिम कार्ड मिला। जब कविता से इस बारे में पूछा गया तो उसने इसके बारे में किसी तरह की जानकारी होने से इनकार कर दिया। इसके बाद पुलिस ने नंबर की कॉल डिटेल निकाली तो पाया कि घटना की रात एक नंबर पर कई बार कॉल किया गया था। इसी कॉल डिटेल हत्या में कविता की भूमिका का खुलासा हुआ।

गाजियाबाद पुलिस ने बताया कि आरोपितों के पास से चूड़ियाँ, बालियाँ, दो सोने के सिक्के, मंगलसूत्र, 5600 रुपए नकद, तीन मोबाइल फोन और एक मोटरसाइकिल बरामद की है। इसके अलावा पुलिस ने परवेज के पास से एक अवैध 315 बोर की पिस्तौल, जिंदा कारतूस, एक बाइक और कुछ जेवर भी बरामद किया है।

‘यहाँ पहले शाम में हिंदू ही हिंदू दिखते, अनाज-पैसा बाँटते, लेकिन अब…’: दिल्ली में निजामुद्दीन की दरगाह पर आने वाले हिंदू 60% तक हुए कम

यहाँ शाम होते ही हिंदू ही हिंदू दिखते थे। दो बजे से रात के 11 बजे तक हिंदू खूब आते थे। लेकिन अब कम आने लगे हैं। आप बाहर देखिए कोई नजर आ रहा है…

यह कहना है अली मूसा निजामी का। वे दिल्ली स्थित हजरत निजामुद्दीन औलिया की दरगाह के दीवान हैं। निजामी के अनुसार वे 84 साल के हैं और उन्होंने कई दौर देखे। पर ऐसा दौर नहीं देखा। उनके मुताबिक ये ‘नफरत’ अभी और बढ़ेगी। उनका दावा है कि इसी नफरत के प्रचार ने दरगाह पर आने वाले हिंदू कम कर दिए हैं।

निजामी के अनुसार निजामुद्दीन की दरगाह पर आने वाले हिंदुओं की संख्या में सालभर के भीतर करीब 60 फीसदी गिरावट आई है। वे बताते हैं कि पहले यहाँ खूब हिंदू आते थे। हर रोज। दोपहर के 2 बजे से रात के 11 बजे तक दरगाह पर आने वालों में खूब हिंदू होते थे। लेकिन अब इक्का-दुक्का हिंदू ही आते रहते हैं। उन्होंने बताया कि पहले यहाँ हिंदू भंडारे भी करते थे। करीब-करीब रोज। अन्न-पैसा बाँटते थे। लेकिन अब वैसी स्थिति नहीं रही।

निजामुद्दीन की गली से हिंदू गायब

निजामी जो बता रहे थे वह रविवार (17 जुलाई 2022) को जब ऑपइंडिया की टीम दरगाह पर गई तो दिख भी रहा था। मुख्य सड़क से उतरकर हमने जब दरगाह का रास्ता पकड़ा तो चहल-पहल थी। पर हिंदू नजर नहीं आ रहे थे। न रास्ते में, न दरगाह के भीतर। दरगाह में करीब 2 घंटे बिताने के बाद जब हम लौट रहे थे तब भी यही हाल था।

दीवान अली मूसा के अनुसार दरगाह पर आने वाले हिंदू सालभर में 60 फीसदी कम

हमें यह बताने वाले कई मिले कि रात के 2 बजे तक यहाँ इस तरह की चहल-पहल रहती है। लेकिन, कोई यह कैमरे पर कबूल करने को तैयार नहीं था कि अजमेर की दरगाह की तरह यहाँ आने वाले भी कम हुए हैं और उसका असर रोजी-रोजगार पर भी पड़ रहा। खुद निजामी भी शुरुआत में सूफीवाद की शान में कसीदे पढ़ते हुए हमें बताते रहे कि यहाँ हर कौम के लोग आते हैं। हिंदू-मुस्लिम, सरदार भी। लेकिन सवाल दर सवाल जब वे खुलने लगे तो यह सच स्वीकार कर लिया कि दरगाह पर आने वाले हिंदुओं की संख्या घटी है।

निजामी के अनुसार दरगाह पर आने वाले हिंदुओं की संख्या में गिरावट अचानक नहीं हुई है। करीब सालभर से ऐसा दिख रहा है। उनका कहना है कि हिंदुओं के बीच प्रचार किया जा रहा है कि ये कब्र है। यहाँ सजदा करने से कुछ नहीं होता। मंदिर जाओ (अपनी बात को वजनदार बनाने के लिए वे किसी दुबे जी का हवाला देते हैं। जो उनके अनुसार अमेरिका में रहते हैं। उनके मित्र हैं। दरगाह पर आते रहते हैं। ​दीवान के अनुसार उन्हें दुबे जी ने भी इस तरह के प्रचार की बातें बताई थी)।

कभी शाम होते ही दरगाह परिसर में हिंदू ही हिंदू आते थे नजर

निजामी आगे बताते हैं कि हिंदू भाई अच्छे लोग हैं, लेकिन ये जो प्रचार चल रहा वह उनमें नफरत पैदा कर रहा है। जब हमने उनसे नूपुर शर्मा को लेकर हुए हालिया विवाद, उदयपुर में कन्हैया लाल की निर्मम हत्या, अजमेर दरगाह से जुड़े लोगों की भड़काऊ बयानबाजी के असर को लेकर सवाल किया तो उनका कहना था कि ये सब होता रहता है। हमेशा मजहब को लड़ाने में लोग लगे रहते हैं। लेकिन, ये दरगाह अमन का पैगाम देता है। मोहब्बत का पैगाम देता है। इन जगहों पर हिंदुओं का आना इसलिए कम हुआ है कि काफी समय से उनके बीच नफरत का प्रचार हो रहा। दरगाह के रास्ते में ही तबलीगी जमात का वह​ मरकज है जो कोरोना काल में कुख्यात हुआ था। उस घटना के असर को भी निजामी नकार देते हैं। वे कहते हैं कि उसका असर नहीं है। मरकज में केवल मुस्लिम आते हैं। ये हर कौम के लोगों की जगह है। लेकिन, इसका भी गलत तरीके से प्रचार हो रहा है।

हमने निजामी से पूछा कि जब कभी यहाँ हिंदू इतनी तादाद में आते थे तो क्या दरगाह वाली गली में उनकी भी दुकानें हैं? क्या वे दुकानें आज भी चल रही हैं? हँसते हुए निजामी ने हमारे सवाल का जवाब तो नहीं दिया, लेकिन ये बताया- मेरा नौकर हिंदू है। यहाँ सेवा करने वाले कई हिंदू हैं।

ज़ुबैर की याचिका पर तत्काल सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, यूपी में दर्ज 6 FIR रद्द कराने पहुँचा था: बोली वकील- एक में बेल मिलते दूसरे में हो जाता है गिरफ्तार

ऑल्ट न्यूज के सह संस्थापक मोहम्मद जुबैर ने सुप्रीम कोर्ट में अपने खिलाफ उत्तर प्रदेश में में दायर 6 एफआईआर को रद्द करने की अपील की है। जिस पर सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एनवी रमना ने तत्काल सुनवाई से इनकार करते हुए कहा कि वह उस बेंच से तारीख माँगे जो पहले से ही इससे जुड़े मामलों की सुनवाई कर रही है।

लॉ बीट की रिपोर्ट के अनुसार, CJI एनवी रमना ने AltNews के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर द्वारा दायर याचिका को तत्काल सूचीबद्ध करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है, जिसमें यूपी पुलिस द्वारा दर्ज की गई 6 प्राथमिकी को रद्द करने के लिए निर्देश देने की माँग की गई है। वहीं एडवोकेट वृंदा ग्रोवर ने कहा कि एक में जमानत मिलते ही उन्हें दूसरे में गिरफ्तार कर लिया जाता है।

पीठ ने वकील से कहा है कि वह मामले को उस पीठ के समक्ष रखें जहाँ इसी तरह के अन्य मामले सूचीबद्ध हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इसी तरह के केस पर सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की बेंच सुनवाई कर रही है।

दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने जुबैर को आपत्तिजनक ट्वीट ‘हनुमान होटल’ के मामले में जमानत दे दी थी। अदालत ने जुबैर को 50 हजार रुपए के निजी मुचलके एवं इतने ही रुपए मूल्य के जमानती के आधार पर बेल मंजूर की थी। इससे पहले जुबैर को यूपी के सीतापुर मामले में सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम राहत मिली थी। कोर्ट ने कहा था, “यह जमानत सशर्त दी जा रही है, याचिकाकर्ता कोई भी ट्वीट नहीं करेगा और ना ही दिल्ली छोड़ेगा। बाकी की अन्य शर्तें सीतापुर डिस्ट्रिक्ट कोर्ट तय करेगा।” हालाँकि इसके बाद भी मोहम्मद ज़ुबैर की रिहाई नहीं हो पाएगी क्योंकि उन पर यूपी में कई मामलों में केस दर्ज है।

गौरतलब है कि मोहम्मद जुबैर को पिछले महीने दिल्ली पुलिस ने एक पुराने ट्वीट के आधार पर गिरफ्तार कर लिया था, उनपर धार्मिक भावनाओं को आहत करने का आरोप था। वहीं जुबैर के खिलाफ यूपी में 6 एफआईआर दर्ज हैं। दो केस हाथरस, एक-एक केस गाजियाबाद, मुजफ्फरनगर, लखीमपुर खीरी और सीतापुर में दर्ज किया गया है।

वहीं लखीमपुर खीरी मामले में कोर्ट ने शनिवार (16 जुलाई, 2022) को जुबैर की जमानत याचिका को खारिज कर दिया था। उनके खिलाफ 18 सितंबर 2021 में केस दर्ज किया गया था। जुबैर के खिलाफ यह केस सुदर्शन न्यूज चैनल को लेकर फैक्ट चेक ट्वीट को लेकर किया गया था। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि जुबैर ने लोगों को सुदर्शन चैनल के वीडियो के जरिए गुमराह करने की कोशिश की है। इस मामले में जुबैर को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था।

जबकि हाथरस पुलिस ने पिछले हफ्ते जुबैर की रिमांड के लिए चीफ ज्युडिशियल मजिस्ट्रेट के सामने याचिका दायर की थी। दिल्ली कोर्ट ने जुबैर से कहा है कि वह इस मामले में पूछताछ के लिए पेश हो, जब उनसे पेश होने के लिए कहा जाए, साथ ही वह बिना इजाजत दिल्ली छोड़कर बाहर ना जाए। कोर्ट ने कहा कि केस के तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए आरोपित से हिरासत में पूछताछ की कोई जरूरत नहीं है, लिहाजा आरोपित को जमानत दी जाती है।

बता दें कि दिल्ली पुलिस ने बीते माह 27 जून को मोहम्मद जुबैर को दुश्मनी को बढ़ावा देने और धार्मिक भावनाओं को आहत करने, सोशल मीडिया पर सांप्रदायिक अशांति फैलाने के आरोप में गिरफ्तार किया था। दिल्ली पुलिस ने जुबैर के खिलाफ आईपीसी की धारा 153/295 के तहत केस दर्ज किया था।

‘संजय राउत हाजिर हों’: मानहानि मामले में बढ़ी शिवसेना प्रवक्ता की मुश्किलें, अदालत का आदेश – पेश होकर बताएँ दोषी हैं या नहीं

मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट ने शिवसेना प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद संजय राउत को 6 अगस्त को अदालत में हाजिर होने का आदेश दिया है। उनके खिलाफ भाजपा नेता किरीट सोमैया की पत्नी ने मानहानि का मामला दर्ज कराया था। अब अदालत ने आदेश दिया है कि शिवसेना मुखपत्र ‘सामना’ के एग्जीक्यूटिव एडिटर 6 अगस्त, 2022 को कोर्ट में पेश होकर अपनी दलीलें रखें। उन्हें उपस्थित होकर अदालत को ये बताना होगा कि वो अपना दोष मानते हैं या नहीं, या फिर खुद को निर्दोष बताते हैं।

अगर संजय राउत खुद अपना दोष स्वीकार कर लेते हैं, इसके बाद अदालत पेनल्टी पर निर्णय लेगी। अगर वो खुद को निर्दोष बताते हैं तो इस मामले की सुनवाई आगे कैसे चलेगी, इस पर मजिस्ट्रेट निर्णय लेंगे। बता दें कि शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे के मुख्यमंत्री बनने और उद्धव ठाकरे के पद छोड़ने के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में काफी उथल-पुथल चल रही है। अब संजय राउत कह रहे हैं कि उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे एक हो जाते हैं तो शिवसेना के लिए ये एक नया सवेरा होगा और इसकी छवि भी अच्छी होगी।

हालाँकि, अभी भी संजय राउत केंद्र सरकार के खिलाफ ही खुन्नस पाल बैठे हैं। उन्होंने ‘सामना’ के एक लेख के जरिए आरोप लगाया कि केंद्र ने इसीलिए शिवसेना में टूट की साजिश रची, क्योंकि उसे डर था कि भविष्य में उद्धव ठाकरे राष्ट्रीय नेता बन कर उभर सकते हैं। उन्होंने दावा किया कि राजनीति में कुछ भी प्राकृतिक या अप्राकृतिक नहीं होता, क्योंकि भाजपा और अजीत पवार का गठबंधन भी अगर चल जाता तो क्या इस पर सवाल उठाए जाते?

जहाँ तक मानहानि वाले मामले की बात है, संजय राउत के खिलाफ जुलाई में जारी वॉरंट उनकी पेशी के बाद रद्द कर दिया गया था। याद हो कि संजय राउत ने किरीट सोमैया पर 100 करोड़ रुपए के टॉयलेट घोटाले का आरोप लगाया था, जिसके बाद अब सोमैया की पत्नी मेधा किरीट सोमैया ने मई 2022 में राउत के खिलाफ शिवड़ी सेशन कोर्ट में मानहानि की याचिका दायर की थी। अब इस मामले में उनकी मुश्किलें और बढ़ रही हैं।

महिला श्रद्धालुओं से छेड़खानी, पुलिस के सामने कटते हैं पशु: मुस्लिम बहुल इलाके के महंत का दर्द – CM योगी के आने पर ढक दिया जाता है अतिक्रमण

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में हरिद्वार रोड पर हापुड़ चुंगी के पास हिंडन विहार में एक मंदिर है, जिसका नाम ‘शिव मंदिर बालाजी धाम’ है। इस मंदिर के महंत मच्छेंद्र पुरी हैं। यह मंदिर महानिर्वाणी अखाड़े से सम्बंधित है। मंदिर कांवड़ यात्रा के मार्ग में लगभग 150 मीटर अंदर पड़ता है। हमारी नजर इस मंदिर पर गई तो हमने इसके महंत मछेन्द्र पुरी से 14 जुलाई, 2022 (गुरुवार) को मुलाकात की। उन्होंने बताया कि उस स्थान पर मुस्लिम आबादी अधिक होने के चलते उन्हें और वहाँ आने वाले श्रद्धालुओं को कई समस्याओं से रूबरू होना पड़ता है।

महिला श्रद्धालुओं के साथ होती है छेड़खानी

महंत मछेन्द्र पुरी ने ऑपइंडिया को बताया, “हमारे यहाँ हिन्दू आबादी न के बराबर होने के चलते मंदिर में दान और अन्य धार्मिक सहयोग काफी कम हो गया है। मंगलवार को परम्परा के मुताबिक यहाँ बाहर से कुछ स्त्री-पुरुष पूजा-पाठ के लिए आते हैं। लेकिन उसमें कई बार महिला श्रद्धालुओं के साथ यहाँ के स्थानीय मुस्लिम अभद्रता करते हैं। हमने इसकी कई बार पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। पुलिस आती है और उसके जाते ही फिर वही हालत हो जाते हैं। इस से यहाँ लोगों का आवागमन काफी कम हो गया है। जबकि इसी छोटे से क्षेत्र में 7-8 मस्जिदें हैं जिसमें बिलाल मस्जिद मुख्य है।”

24 जून 2022 को अरबाज नाम के आरोपित पर केस भी दर्ज हुआ था।

FIR Copy

बकरीद पर खुलेआम कटे गए बकरे

महंत मछेन्द्र पुरी ने आगे बताया, “मंदिर से कुछ ही दूर पर नूर ए इलाही मस्जिद के पास बकरीद में खुलेआम बकरे काटे गए थे जबकि CM योगी का आदेश था कि खुले में कुर्बानी नहीं होगी। कुर्बानी वाली जगह पर पुलिस मौजूद थी लेकिन उसने किसी को नहीं रोका। हमने एक वीडियो भी प्रशासन को टैग करते हुए ट्वीट करवाया था जिसमें एक कुत्ता बकरे का कटा सिर मुँह में लिए घूम रहा था लेकिन उस पर प्रशासन ने कोई ध्यान नहीं दिया।”

10 जुलाई को वीडियो के साथ हुआ ट्वीट:

क्षेत्र में होते हैं तमाम अवैध काम

हिंडन विहार का जिक्र करते हुए महंत मछेन्द्र पुरी ने कहा, “इस क्षेत्र में अधिकतर घर सरकारी जमीनों पर बसे हुए हैं। यहाँ तमाम प्रकार के अवैध काम होते हैं जो प्रशासन की जानकारी में हैं। किसी भी ब्रांड की कवर पॉलीथिन यहाँ मिल जाएगी। इसके अलावा जुआ और सट्टा भी यहाँ होता है। जब मैंने शुरू में इसका विरोध किया था तब एक महिला को भी मेरे खिलाफ चारित्रिक आरोप लगाने के लिए पैसे दे कर तैयार किया गया था। ईश्वर की दया से उस दिन मैं बाहर था और लांछन से बच गया। अब मैंने हर तरफ CCTV लगवा दिए हैं।”

हिंडन विहार में होने वाले तमाम अवैध कामों और श्रद्धालुओं से बदतमीजी के चलते महंत मछेन्द्र पुरी 9 जून 2022 को आत्मदाह की धमकी भी दे चुके हैं।

मोदी-योगी के दौरे पर ढक दिए जाते हैं अवैध अतिक्रमण

महंत ने आगे बताया, “सड़क के मुख्य मार्ग पर ग्रीन बेल्ट है जो सरकारी की जमीन है। उस पर न जाने कहाँ के मुस्लिमों ने डेरा डाल दिया है। उसमें से एक महिला कुछ समय पहले देह व्यापार भी करवाती पकड़ी गई थी। जब उस अवैध कब्ज़े के ठीक बगल से गुजरी मेट्रो का उद्घाटन करने प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री योगी एक साथ आए थे तब प्रशासन ने तिरपाल रख कर मुस्लिमों की उस अवैध बस्ती को ढक दिया था जिस से किसी की नजर न पड़े। जब क्षेत्र में बने अवैध निर्माण को हटाने की माँग की जाती है तब प्रशासन वाले एक हिन्दू के घर के आगे बुलडोजर ले कर पहुँच जाते हैं। तस्लीम नाम के व्यक्ति ने यहाँ कई सरकारी जमीनों पर अवैध इमारतें खड़ी की हैं लेकिन उसको टोकने वाला कोई नहीं।”

मुख्य सड़क से सटी और मेट्रो लाइन के बगल में बनी अवैध झुग्गियाँ

IPS सलमान ताज पाटिल ने हटा ली थी सुरक्षा

महंत मछेन्द्र पुरी का मंदिर नंदग्राम थानक्षेत्र में आता है। महंत ने आगे बताया, “भले ही सुरक्षा के लिए मंदिर में सिपाही तैनात किया गया है लेकिन यहाँ पर तो कई घटनाएँ पुलिस पर भी हाथ उठा देने की हुई हैं। तब हम लोगों ने जा कर वर्दी वालों को बचाया था। अखिलेश यादव की सरकार में यहाँ पर पोस्टेड एक पुलिस अधिकारी सलमान ताज पाटिल ने तो हमारे मंदिर की सुरक्षा भी हटा ली थी।”

मंदिर और वहाँ तैनात सुरक्षाकर्मी

हम पर ही बनाया जाता है दबाव

महंत मछेन्द्र पुरी ने आगे कहा, “मात्र 20 साल पहले यहाँ 98% हिन्दू थे जो अब पलायन कर गए हैं। मैं यहाँ से चला गया तो इस कॉलोनी के बचे लगभग 2% हिन्दू भी यहाँ से चले जाएँगे। इसलिए मैं न सिर्फ कट्टरपंथियों बल्कि भू माफियाओं की आँखों में भी खटकता हूँ। मैं आर्थिक रूप से कमजोर हूँ इसलिए मैं किसी को पैसे नहीं दे पाता। कई बार मुझ पर ही दबाव बनाया जाता है और प्रशासन के कुछ अधिकारियों ने मुझे ही कई बार गलत ठहरा दिया। मैंने सुना है कि अबकी किसी बवाल में मेरी हत्या की भी साजिश रची गई है लेकिन मैं अपना काम जारी रखूँगा।”

बचे ग्रीन बेल्ट को बचाए रखने के लिए महंत ने लगाए राष्ट्रध्वज

ऑपइंडिया ने इस पूरे मामले में पुलिस का पक्ष जानने के लिए गाजियाबाद के SSP मुनिराज को सम्पर्क किया तो फोन उनके जनसम्पर्क अधिकारी (PRO) ने उठाया। उन्होंने बताया, “सर अभी काफी व्यस्त हैं और भीड़ बहुत है। अभी उनका वर्जन नहीं मिल पाएगा।” पुलिस का वर्जन आने के बाद उसे खबर में अपडेट किया जाएगा।

4800 वोटर, 1086431 वोट: राष्ट्रपति चुनने के लिए हो रहा मतदान, यशवंत सिन्हा पर भारी है द्रौपदी मुर्मू का गणित

देश के 15वें राष्ट्रपति के चुनाव के लिए सोमवार (18 जुलाई 2022) को मतदान शुरू हो चुका है। वोटिंग शाम 5 बजे तक जारी रहेगी। चुनाव में NDA की तरफ से द्रौपदी मुर्मू (Draupadi Murmu) तो पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा (Yashwant Sinha) विपक्ष से साझा उम्मीदवार हैं। देश भर के करीब 4,800 विधायक और सांसद राष्ट्रपति चुनाव में वोट डालेंगे।

वोटों के गणित में पक्ष और विपक्ष के बीच बने बड़े फासले को देखते हुए राजग (NDA) उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू का देश की अगली राष्ट्रपति चुना जाना तय माना जा रहा है। अगर द्रौपदी मुर्मू जीतती हैं तो वह देश के शीर्ष संवैधानिक पद पर पहुँचने वाली पहली आदिवासी महिला होंगी।

मुर्मू को सत्ताधारी गठबंधन के अलावा बीजद, वाईएसआर कॉन्ग्रेस, अकाली दल ही नहीं विपक्षी खेमे के कई दलों जैसे जेडीएस, झामुमो, शिवसेना और तेदेपा का समर्थन भी मिला है। इससे साफ है कि द्रौपदी मुर्मू को करीब दो तिहाई मत मिलने की संभावना है। जबकि विपक्ष के साझा उम्मीदवार यशवंत सिन्हा के लिए स्थिति चुनौतीपूर्ण नजर आ रही है।

बताया जा रहा है कि मुर्मू की वोट हिस्सेदारी 60 प्रतिशत से ज्यादा हो सकती है। राजग की उम्मीदवार के पास अब कुल 10,86,431 मतों में से 6.67 लाख से अधिक वोट हैं। इनमें 3.08 लाख वोट सत्तारूढ़ भाजपा और उसके सहयोगी दलों के हैं। बीजू जनता दल के करीब 32,000 वोट हैं, जो कुल मतों का करीब 2.9 प्रतिशत है। लोकसभा में बीजद के 12 और राज्यसभा में 9 सदस्य हैं। मुर्मू को अन्नाद्रमुक (17,200 वोट), वाईएसआर-कॉन्ग्रेस पार्टी (करीब 44,000 वोट), तेलुगु देशम पार्टी (करीब 6,500 वोट), शिवसेना (25,000 वोट) और जनता दल (सेक्युलर) (करीब 5,600 वोट) का भी समर्थन मिल रहा है।

हाल में संपन्न राज्यसभा चुनावों के परिणाम के बाद उच्च सदन में भाजपा सदस्यों की संख्या 92 हो गई है। लोकसभा में उसके कुल 301 सदस्य हैं। उत्तर प्रदेश के प्रत्येक विधायक का राष्ट्रपति चुनाव में वोट वैल्यू अन्य किसी राज्य के विधायक से अधिक है। प्रदेश के 403 विधायकों में से प्रत्येक का वोट वैल्यू 208 है, यानी उनका कुल वैल्यू 83,824 है। तमिलनाडु और झारखंड के प्रत्येक विधायक का वोट वैल्यू 176 है। इसके बाद महाराष्ट्र का 175, बिहार का 173 और आंध्र प्रदेश के हरेक विधायक का वोट वैल्यू 159 है। सिक्किम के एक विधायक के वोट का वैल्यू केवल 7 है, जो पूरे देश में सबसे कम है।

सभी निर्वाचित विधायकों के वोटों की कुल वैल्यू (5,43,231) में अगर कुल सांसदों की संख्या (776) का भाग दें तो एक सांसद के वोट की वैल्यू 700 निकलती है। इस तरह सांसदों की कुल वोट वैल्यू 700×776 यानी 5,43,200 होगी। विधायकों और सांसदों के कुल वोट को मिलाकर ‘इलेक्टोरल कॉलेज’ कहा जाता है। यह संख्या 10,86,431 है। इस तरह जीत के लिए आधे से एक वोट ज्यादा की जरूरत होती है।

राष्ट्रपति चुनाव के नतीजे गुरुवार (21 जुलाई 2022) को आएँगे। वोटों की गिनती के बाद देश के नए राष्ट्रपति के निर्वाचन की घोषणा कर दी जाएगी। वर्तमान राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद का कार्यकाल 24 जुलाई को समाप्त हो रहा है। 25 जुलाई को नए राष्ट्रपति का शपथ ग्रहण होगा।

बाबा बिरयानी वाले मुख्तार के बेटे उमर ने बुलाए थे कानपुर हिंसा के लिए हथियारों से लैस गुंडे, बिल्डर वसी के साथ रची पूरी प्लानिंग: रिपोर्ट

उत्तर प्रदेश (UP) के कानपुर में 3 जून, 2022 को जुमे की नमाज के बाद हुई हिंसा के मामले में एक नया खुलासा हुआ है। इसके मुताबिक हिंसा की शुरुआत बेकनगंज से न होकर पेंचबाग़ से हुई थी। बाबा बिरयानी वाले मुख़्तार और बिल्डर हाजी वसी ने पूरी हिंसा की प्लानिंग की थी। हयात जफर और डीटू गैंग को इनसे ही निर्देश मिल रहे थे। हिंसा के बाद मुख़्तार और वसी गायब हो गए थे।

हिंदुस्तान की रिपोर्ट के मुताबिक यह खुलासा कोर्ट में इंस्पेक्टर जैनेन्द्र सिंह तोमर द्वारा पेश की गई केस डायरी से हुआ है। जैनेन्द्र सिंह तोमर फ़िलहाल चमनगंज थाने के SHO हैं। केस डायरी के मुताबिक पहले पेंचबाग़ में पथराव हुआ जो बाद में नई सड़क और दादामियां चौराहे तक फ़ैल गया। बाबा बिरयानी का मालिक मुख्तार बाबा और बिल्डर मोहम्मद वसी हिंसक भीड़ के पीछे से हालात पर नजर रखे हुए थे। इन्ही के इशारे पर हयात जफ़र ने पुलिस को शांति का झूठा आश्वासन दिया था।

केस डायरी में बताया गया है कि हयात जफ़र के साथ इस पूरी साजिश में मोहम्मद सूफियान, इखलाक, निजाम, मोहम्मद राहिल और मोहम्मद जावेद शामिल थे। पथराव का स्थान और समय सब पहले से ही तय था। मुख़्तार के बेटे उमर ने हिंसा को भड़काने के लिए भाड़े के गुंडे बुलाए थे। ये गुंडे हथियारों से लैस थे जिन्होंने न सिर्फ पत्थर फेंके, बल्कि पेट्रोल बम का भी इस्तेमाल किया। हिंसक भीड़ को अफजाल, बशीर और बाबर लीड कर रहे थे। अफ़ज़ाल की भूमिका गुंडों को बुलाने में भी थी।

ध्वस्त होंगी बिल्डर वसी की अवैध इमारतें

उधर कानपुर प्रशासन हिंसा के मास्टरमाइंड हाजी वसी की अवैध इमारतें गिराने की तैयारी कर रहा है। हालाँकि प्रशासन ने इस अभियान की तारीख का खुलासा नहीं किया है। कानपुर विकास प्राधिकरण के मुताबिक वसी की 16 अवैध इमारतों को गिराया जाएगा, जिसमें 10 दुकानें हैं। इन इमारतों में 5 और 7 मंजिला तक के मकान भी हैं। हाजी वसी के साथ उसके बेटे हमजा और सहयोगी आदिल को भी इस बावत प्रशासन द्वारा नोटिस जारी किया गया है।