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एकनाथ शिंदे ने बताया क्यों BJP ने उन्हें बनाया महाराष्ट्र का CM, पीएम मोदी ने दिया क्या ‘मंत्र’: हिंदुत्‍व पर चुप्पी-दाऊद पर नरमी को लेकर उद्धव को घेरा भी

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद से एकनाथ शिंदे लगातार उन मुद्दों पर मुखर है, जिनकी वजह से उनके समर्थक शिवसेना विधायकों को उद्धव ठाकरे गुट से अलग लाइन लेनी पड़ी। शिंदे की माने तो उद्धव के नेतृत्व वाली महाविकास अघाड़ी में शिवसैनिकों को हिंदुत्व, वीर सावरकर पर बोलने की आजादी तक नहीं। दाऊद इब्राहिम से जुड़े लोगों पर कार्रवाई नहीं हो रही थी।

शिंदे के अनुसार शिवसेना का मुख्यमंत्री होने के बावजूद पार्टी को कोई फायदा नहीं हो पा रहा था। उन्होंने कहा, “हमने उद्धव ठाकरे के साथ कई बार चर्चा की कि हमें महाविकास अघाड़ी से कोई लाभ नहीं मिल रहा है। हमारी पार्टी के सीएम के बावजूद, हम नगर पंचायत चुनाव में नंबर 4 पर आ गए हैं। हमने उन्हें समझाने की काफी कोशिश की, लेकिन हम सफल नहीं हो पाए।”

शिंदे ने उद्धव ठाकरे के बयान पर भी पलटवार किया है। उन्होंने कहा, “मैंने कहा है कि रिक्शा ने मर्सिडीज को पीछे छोड़ दिया, क्योंकि ये सरकार सर्वसामान्य लोगों के लिए सरकार है। ये समाज के हर घटक को न्याय दिलाने वाली सरकार है और देखिएगा हमलोग ऐसा काम करेंगे कि हरेक घटक, हरेक व्यक्ति को लगे कि ये मेरे लिए काम कर रही है, ये मेरी सरकार है। ये फर्क है।”

बता दें कि मंगलवार (5 जुलाई 2022) को सेना भवन में शिवसेना की महिला विंग की एक बैठक को संबोधित करते हुए, उद्धव ठाकरे ने परोक्ष रूप से शिंदे पर तंज कसा था, जो कभी ऑटो रिक्शा चलाते थे। उन्होंने कहा था, “डिप्टी सीएम शिंदे को रुकने को कह रहे थे, लेकिन ऑटो रिक्शा का ब्रेक फेल हो गया था, यह कैसे रुकेगा? पहले भाजपा एमवीए सरकार को तिपहिया सरकार कहती थी, अब तिपहिया चलाने वाला सरकार चला रहा है।”

शिंदे ने कहा, “लोगों को लगता था कि भाजपा सत्ता के लिए कुछ भी करती है। लेकिन उन्होंने सभी देशवासियों को बता दिया है कि इन 50 लोगों ने हिंदुत्व की भूमिका ली है, एक वैचारिक भूमिका ली है। इनका एजेंडा हिंदुत्व का है, विकास का है, इनका समर्थन करना चाहिए। उनके पास ज्यादा संख्या और ज्यादा विधायक होने के बावजूद उन्होंने हमें मुख्यमंत्री पद के लिए समर्थन किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुझसे राज्य को विकास के पथ पर आगे ले जाने के लिए कहा। यह भी कहा कि केंद्र सरकार और वह खुद पूरी ताकत से पीछे खड़े हैं। यह सबसे बड़ी बात है। हमलोगों ने कोई गैरकानूनी काम नहीं किया है, क्योंकि चुनाव से पहले शिवसेना के साथ जिस पार्टी का गठबंधन था हम उसी के साथ गठबंधन कर रहे हैं।”

उन्होंने कहा कि बाला साहेब ठाकरे का हिंदुत्व का जो मुद्दा है, हिंदुत्व के जो विचार हैं, उनकी जो भूमिका है, उसे आगे ले जाने का फैसला हमने किया है। सीएम ने कहा कि 2019 में शिवसेना-भाजपा ने एक साथ चुनाव लड़ा था और सरकार बन गई कॉन्ग्रेस-NCP के साथ। इसकी वजह से जब भी हिंदुत्व का, सावरकर का, दाऊद का, मुंबई बम ब्लास्ट का और भी कई मुद्दे आए, तब वह कोई भी निर्णय नहीं ले पा रहे थे। शिंदे ने आगे कहा, “इसके अलावा हमारे विधायकों को अपने निर्वाचन क्षेत्रों में काम करने में कठिनाई का सामना करना पड़ता था, क्योंकि सहयोगी दल उन लोगों का ताकत बढ़ाने की कोशिश कर रहे थे जो उनसे हार गए थे। फंड की कमी के कारण हमारे विधायक विकास कार्य नहीं कर पा रहे थे। हमने वरिष्ठों से बात की लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। तो हमारे 40-50 विधायकों ने ऐसा किया।”

इससे पहले विधानसभा में बोलते हुए भी एकनाथ शिंदे ने कहा था कि शिव सैनिक हिंदुत्व के लिए आवाज नहीं उठा सकते थे और वीर सावरकर के बारे में भी नहीं बोल सकते थे, क्योंकि शिवसेना कॉन्ग्रेस और NCP के साथ गठबंधन में थी। इसके अलावा दाऊद के साथ संबंध रखने वाले मंत्रियों के खिलाफ भी कार्रवाई करने से रोक दिया गया।

छत्तीसगढ़: रेप के बाद 55 साल की महिला के गुप्तांग में लोहे के तवे का मूठ डाला, छाती पर चढ़ इतना मारा कि फेफड़े फट गए… घर में मिला था अर्धनग्न शव

छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा से दिल दहलाने वाला मामला सामने आया है। यहाँ 55 वर्षीय महिला के साथ रेप के बाद भीषण दरिंदगी की गई। घर से उसका अर्धनग्न शव मिलने के बाद पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सूरज भोई ने पहले महिला के साथ दुष्कर्म किया। फिर घर में रखे लोहे के तवे से उसके गुप्तांग पर कई वार किए। इसके बाद उसने महिला के प्राइवेट पार्ट में तवे का मूठ डाल दिया। उसने महिला के सीने पर चढ़कर उसकी गर्दन को अपने दोनों हाथ से दबाया। जब वह छटपटाने तो उसके गले को अपने पैर से दबा दिया, जिससे उसकी मौत हो गई। घटना के बाद आरोपित महिला के हाथ में पहने चाँदी के 4 नग जड़ी चूड़ी लेकर फरार हो गया। 

पुलिस अधीक्षक विजय अग्रवाल ने बताया कि अकलतरा थाना क्षेत्र के पोड़ीभाठा में एक 55 वर्षीय महिला का शव उसके घर में अर्धनग्न अवस्था में पड़ा मिला था। महिला के पति की करीब 3 साल पहले ही मौत हो गई थी। उसका कोई बच्चा भी नहीं था। वह घर पर अकेले ही रहती थी और दूसरों के घरों में काम करती थी। 3 जुलाई की सुबह जब महिला काफी देर तक घर से बाहर नहीं निकली, तो पड़ोसी उसे देखने के लिए पहुँचे। वहाँ उन्हें कमरे के दरवाजे के पास ही महिला का अर्धनग्न शव पड़ा मिला।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पाया गया कि महिला के साथ दुष्कर्म किया गया है। साथ ही उसके प्राइवेट पार्ट में काफी चोटें आई हैं। इतना ही नहीं गले और सीने की हड्डी टूटने और फेफड़े फटने से उसकी मौत हो गई। थाना प्रभारी लखेश केंवट के मुताबिक, आरोपित सूरज भोई पेशेवर अपराधी है। वह इससे पहले भी अलग-अलग अपराधों में कई बार जेल जा चुका है। 4 जुलाई को उसे कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया है।

आरोपित ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है। उसने बताया कि दरवाजा खुला देखकर वह घर के अंदर घुस गया और डरा-धमकाकर महिला के साथ दुष्कर्म किया। वह दोबारा भी उसके साथ दुष्कर्म करना चाहता था, लेकिन महिला उसके चंगुल से छूटकर बाहर आकर चिल्लाने लगी, जिसके बाद उसने महिला के बाल पकड़कर उसे अंदर खींचा और उसकी हत्या कर दी।

वह हिस्ट्रीशीटर है, नूपुर शर्मा की गर्दन माँग रहा… फिर भी ‘नशे की हालत’ में क्यों अटकी है राजस्थान पुलिस: अजमेर दरगाह का खादिम गिरफ्तार

अजमेर के हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह का खादिम सलमान चिश्ती गिरफ्तार कर लिया गया है। उसका एक वीडियो सामने आया था, जिसमें वह बीजेपी की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा की हत्या के लिए उकसा रहा था। दिलचस्प यह है कि वीडियो सामने आने के बाद और उसकी गिरफ्तारी के बाद भी राजस्थान पुलिस उसके नशे की हालत में होने पर जोर दे रही है। सनद रहे कि कॉन्ग्रेस शासित राजस्थान की पुलिस पर तुष्टिकरण के आरोप लगते रहे हैं।

ऐसा भी नहीं है कि सलमान चिश्ती का दामन पाक-साफ रहा हो। वह हिस्ट्रीशीटर है। उसके खिलाफ 13 से ज्यादा मामले दर्ज हैं। इनमें हत्या और हत्या के प्रयास जैसे गंभीर आरोप भी हैं। नूपुर शर्मा की हत्या के लिए उकसाने वाला वीडियो वायरल होने के बाद से ही उस पर कार्रवाई की माँग हो रही थी।

आखिरकार अजमेर पुलिस ने मंगलवार (5 जुलाई 2022) रात उसे उसके घर से गिरफ्तार कर लिया। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) विकास सांगवान ने भड़काऊ बयान देने के आरोप में उसकी गिरफ्तारी की पुष्टि की है। उन्होंने न्यूज एजेंसी एएनआई को बताया कि आपत्तिजनक वीडियो सामने आने के बाद उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज किया गया था। गिरफ्तारी के बाद उससे पूछताछ की जा रही है। उन्होंने कहा, “ऐसा लगता है कि वीडियो बनाते समय वह नशे की हालत में था।”

उल्लेखनीय है कि वीडियो वायरल होने के बाद सलमान चिश्ती के खिलाफ अजमेर के अलवर गेट थाने में मुकदमा दर्ज किया था। इसके बाद एएसपी विकास सांगवान ने कहा था कि उसकी तलाश की जा रही है। कश्मीर में उसका लोकेशन मिलने की बात कही जा रही है। एफआईआर के बाद भी एएसपी ने कहा था, “वीडियो में सलमान चिश्ती नशे की हालत में नजर आ रहा है।”

वायरल वीडियो में सलमान चिश्ती ने कहा था, “कसम है मुझे पैदा करने वाली मेरी माँ की, मैं उसे सरेआम गोली मार देता। मुझे मेरे बच्चों की कसम, मैं उसे गोली मार देता और आज भी सीना ठोक कर कहता हूँ जो भी नुपुर शर्मा की गर्दन लाएगा, मैं उसे अपना घर दे दूँगा और रास्ते पर निकल जाऊँगा। ये वादा करता है सलमान।” इसके अलावा, उसने खुद को ‘ख्वाजा का सच्चा सिपाही’ बताते हुए मुस्लिमों को भड़काने की कोशिश की थी।

कनाडा के जिस म्यूजियम ने दिखाई ‘काली’, उसने हिंदू आस्था को ठेस पहुँचाने पर माँगी माफी: भारतीय दूतावास ने भड़काऊ कंटेंट्स हटाने को कहा था

लीना मणिमेकलई (Leena Manimekalai) की डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘काली’ के पोस्टर पर भारत की आपत्ति के बाद कनाडा की आगा खान म्यूजियम (Aga Khan Museum) ने माफी माँगी है। म्यूजियम ने हिंदुओं की आस्था को अनजाने में ठेस पहुँचाने के लिए खेद व्यक्त किया है।

आगा खान म्यूजियम ने बयान जारी कर कहा है, “टोरंटो मेट्रोपॉलिटन यूनिवर्सिटी का प्रोजेक्ट प्रेजेंटेशन (Project Presentation) आगा खान म्यूजियम में आयोजित किया गया था। ‘अंडर द टेंट’ प्रोजेक्ट के तहत म्यूजियम में 18 शॉर्ट वीडियो में से एक और इसके साथ जुड़ी सोशल मीडिया पोस्ट ने अनजाने में हिंदुओं और अन्य लोगों को ठेस पहुँचाई है। अब इस फिल्म को म्यूजियम में नहीं दिखाया जाएगा। म्यूजियम का मिशन कला के माध्यम से अलग-अलग सांस्कृतियों के बीच समझ और संवाद को बढ़ावा देना है। विविध धार्मिक अभिव्यक्तियों और आस्था का सम्मान मिशन का एक अभिन्न अंग है।”

इससे पहले भारतीय दूतावास ने ‘काली’ से जुड़ी सभी आपत्तिजनक सामग्री हटाने की अपील की थी। ओटावा में स्थित भारतीय दूतावास ने 4 जुलाई को अपने बयान में कहा था, “हमें हिन्दू समुदाय के नेताओं की तरफ से एक फिल्म के पोस्टर में हिन्दू देवी-देवताओं को अपमानजनक तरीके से प्रदर्शित किए जाने की शिकायतें मिली हैं। इस फिल्म को टोरंटो स्थित ‘आगा खान म्यूजियम’ में ‘अंडर द टेंट’ प्रोजेक्ट के तहत दिखाया जा रहा है। टोरंटो में हमारे काउंसलेट जनरल ने इस कार्यक्रम के आयोजकों के समक्ष इन चिंताओं को रखा है।” भारतीय दूतावास ने ये भी जानकारी दी थी कि कई हिन्दू संगठनों ने कनाडा के प्रशासन से भी संपर्क किया और इस फिल्म को दिखाए जाने के खिलाफ कार्रवाई करने की माँग की है।

लीना मणिमेकलई ने 2 जुलाई को अपनी डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘काली’ का पोस्टर ट्विटर पर रिलीज किया था। इस पोस्टर में एक्ट्रेस को ‘काली’ के रूप में दिखाया गया है। इसमें उसने एक हाथ में त्रिशूल और दूसरे हाथ में LGBT समुदाय का झंडा पकड़ा हुआ। साथ ही उसे सिगरेट पीते हुए भी दिखाया गया है। पोस्टर रिलीज होने के बाद से सोशल मीडिया पर इस फिल्म का विरोध किया जा रहा है।

वहीं विरोध के बाद फिल्म की निर्देशक लीना ने कहा, था “मेरे पास खोने के लिए कुछ नहीं है। मैं एक ऐसी आवाज के साथ रहना चाहती हूँ जो बिना किसी डर के बोले जब तक वह है। अगर इसकी कीमत मेरी जान है तो मैं दे दूँगी। ये फिल्म एक ऐसी शाम पर है जब काली प्रकट होती हैं और टोरंटो की सड़कों पर घूमती हैं।” बता दें कि लीना ने साल 2002 में शॉर्ट डॉक्यूमेंट्री ‘मथम्मा’ से अपने करियर की शुरुआत की थी। काली के अलावा उनकी पिछली कई फिल्में जैसे ‘सेंगडल’, ‘पराई’, ‘व्हाइट वैन स्टोरीज’ भी विवादों का हिस्सा रह चुकी है।

SC के जस्टिस सूर्यकांत और परदीवाला पर महाभियोग चलाने को लेकर कैंपेन, हर सेकेंड जुड़ रहे लोग: नूपुर शर्मा के गले डाल दी थी कन्हैया लाल की बर्बर हत्या

भारतीय जनता पार्टी की निलंबित प्रवक्ता नुपूर शर्मा के केस में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बाद सामान्य जन न्यायधीशों द्वारा की गई टिप्पणी से खासे नाराज हैं। अभी तक जहाँ सोशल मीडिया पर इस वजह से केवल उनकी निंदा हो रही थी। वहीं अब उनके खिलाफ महाभियोग चलाने की माँग की जा रही है। इस संबंध में सोशल मीडिया पर हस्ताक्षर अभियान भी चला हुआ है।

हिंदू आईटी सेल के विकास पांडे ने अपने ट्वीट में इसकी जानकारी देते हुए कहा, “मैंने एक याचिका बनाई है जो सांसदों को दी जाएगी। ये जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जे.बी परदीवाला के खिलाफ महाभियोग कार्रवाई शुरू करवाने की ओर एक कदम है। याचिका पर हस्ताक्षर करें!”

बता दें कि www.change.org प्लेटफॉर्म पर चलाई जा रही इस याचिका को खबर लिखने तक करीब 10 हजार लोगों द्वारा साइन किया जा चुका है। इसके भीतर सांसदों को संबोधित करते हुए कहा गया, “सभी सांसदों, ये जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जेबी परदीवाला के विरुद्ध महाभियोग चलवाने के लिए शुरुआत है।”

याचिका में देश के हालातों पर चिंता व्यक्त करते हुए नुपूर शर्मा का केस उठाया गया। इसमें कहा गया कि कैसे जान का खतरा होने के कारण विभिन्न राज्यों में हो रही शिकायतों को एक जगह क्लब करने के लिए नुपूर ने देश के सबसे सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। लेकिन जब सुनवाई की बारी आई तो न्यायधीशों ने मामला सुने बिना ही उन्हें देश में हिंसा भड़काने और उदयपुर में हुई कन्हैयालाल की हत्या का अकेला जिम्मेदार ठहरा दिया।

याचिका में कहा गया कि ऐसे मामलों में सिर्फ इस्लामी कट्टरपंथी और तालिबान जैसी भारत विरेधी ताकतों को शह मिलती है और हिंदुओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया के जरिए बुरा दिखाया जाता है। सुप्रीम कोर्ट ने गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार दिखाया। साथ ही बिन किसी तथ्य के इस तरह गैरकानूनी टिप्पणी की। ये देश के मूल्यों और नैतिकता के खिलाफ है। इसलिए दोनों जस्टिसों पर महाभियोग चलाने की माँग इस याचिका में की गई है।

बता दें कि इस याचिका को मिल रहा समर्थन दिखा रहा है कि कैसे लोगों में सुप्रीम कोर्ट के जजों की टिप्पणी से नाराजगी है। वह लोग इस अभियान को समर्थन दे रहे हैं और पूछ रहे हैं कि क्यों आखिर तालिबान तक ने सुप्रीम कोर्ट को समर्थन दे दिया है और क्यों कोर्ट आतंकियों के लिए रात में खुलने लगा है? लोगों में गुस्सा है कि इस तरह एक महिला की याचिका पर टिप्पणी कर न्यायपालिका का मजाक बनाया गया है।

महाभियोग से क्या होगा?

उल्लेखनीय है सुप्रीम कोर्ट के न्यायधीशों के खिलाफ कार्रवाई के लिए महाभियोग ही वह प्रक्रिया है जिसका अनुसरण करके फैसला लिया जाता है। मौजूदा जानकारी बताती है कि सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट के न्यायाधीशों पर महाभियोग चलाने का जिक्र संविधान के अनुच्छेद 124 (4) में है। इसमें कहा गया है कि सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय के किसी जस्टिस पर कदाचार और अक्षमता के लिए महाभियोग का प्रस्ताव लाया जा सकता है। अनुच्छेद 124 में में जजों को उनके पद से हटाए जाने का भी प्रावधान है।

‘अभिव्यक्ति की आज़ादी सिर्फ हिन्दू देवी-देवताओं के लिए क्यों?’: सत्ता जाने के बाद उद्धव गुट को याद आया हिंदुत्व, प्रियंका चतुर्वेदी ने सँभाली कमान

महाराष्ट्र में सत्ता जाते ही शिवसेना हिंदुत्व के मुद्दे पर वापस लौटते हुए नजर आ रही है। इसका ताजा उदाहरण शिवसेना सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने मंगलवार (5 जुलाई, 2022) को माँ काली के विवादित पोस्टर की आलोचना के रूप में पेश किया है। वरना लम्बे समय से शिवसेना ऐसे मुद्दों पर मौन साधे रहती थी। बता दें कि इस डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘काली’ के पोस्टर में देवी को धूम्रपान करते हुए दिखाया गया है। जिस पर विरोध जताते हुए शिवसेना सांसद ने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता हिंदू देवताओं के लिए रिजर्व नहीं हो सकती है।

डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘काली’ के पोस्टर पर प्रियंका चतुर्वेदी ने ऐतराज जताते हुए ट्विटर पर कहा, “अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता हिंदू देवी-देवताओं का मजाक उड़ाने के लिए नहीं है। जबकि बाकी सभी की धार्मिक संवेदनाओं का ख्याल रखा जाए। मैं माँ काली पर फिल्म के पोस्टर से आहत हूँ, सम्मान सभी के लिए समान होना चाहिए और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को जानबूझकर दूसरों को अपमानित करने का साधन नहीं बनना चाहिए।”

बता दें कि डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘काली’ में माँ काली को धूम्रपान करते और एलजीबीटीक्यू का झंडा पकड़े हुए दिखाया गया है, जिसके बाद फिल्म को लेकर विवाद शुरू हो गया है। फिल्म निर्माता लीना मणिमेकलाई पर धार्मिक भावनाओं को आहत करने का आरोप लगाया गया है। इस मामले में दिल्ली-यूपी सहित देश के कुछ हिस्सों में फिल्ममेकर के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज किया गया है। वहीं फिल्ममेकर लीना मणिमेकलई के खिलाफ एक्शन लेने की माँग की जा रही है।

गौरतलब है कि टोरंटो में रहने वाली फिल्मकार लीना मणिमेकलई ने शनिवार (2 जुलाई, 2022) को ट्विटर पर अपनी लघु फिल्म ‘काली’ का विवादित और हिन्दुओं की भावनाओं को आहत करने वाला पोस्टर साझा किया था। और कहा था कि यह फिल्म टोरंटो में आगा खान संग्रहालय में ‘रिदम्स ऑफ कनाडा’ सेगमेंट का हिस्सा है। इस पोस्टर के सामने आने के बाद मणिमेकलई पर हिन्दुओं की धार्मिक भावनाओं को आहत करने के आरोप लगने लगे। यही नहीं, सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ ‘अरेस्ट लीना मणिमेकलई’ हैशटैग भी ट्रेंड करने लगा था।

इससे पहले आज दिन में, काली पोस्टर विवाद के बारे में बोलते हुए टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा था कि काली उनके लिए मांस खाने वाली, शराब पीने वाली देवी है। इसके बाद भड़के विवाद पर जहाँ टीएमसी ने उनके बयान पर पल्ला झाड़ लिया है।

पश्चिम बंगाल के कृष्णानगर से सांसद महुआ मोइत्रा ने दावा किया कि कई जगहों पर देवी-देवताओं को व्हिस्की चढ़ाई जाती है। उन्होंने दावा किया कि हमारे पास इसकी स्वतंत्रता है कि हम हमारे देवी-देवताओं को किसी भी रूप में सोच सकते हैं। 2 दिवसीय ‘इंडिया टुडे कॉन्क्लेव ईस्ट 2022’ में बोलते हुए उन्होंने ये बातें कही। वहीं पश्चिम बंगाल भाजपा ने सीएम ममता बनर्जी पर सांसद के खिलाफ ऐक्शन लेने की माँग की है।

‘किसी और मजहब पर ऐसी फिल्म क्यों नहीं बनती?’: माँ काली का अपमान करने वालों पर MP में होगी कार्रवाई, बोले नरोत्तम मिश्रा – बर्दाश्त नहीं

लीना मणिमेकलाई की डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘काली’ के पोस्टर पर मध्य प्रदेश में भी विवाद गहरा गया है। प्रदेश के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने ट्वीट किया, “डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘काली’ में काली माता को सिगरेट पीते हुए दिखाना काफी आपत्तिजनक है। इस मामले में FIR करवाने के लिए बोलूँगा और फिल्म मध्य प्रदेश में कैसे बैन हो इस पर विचार किया जाएगा। माँ काली का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अगर तत्काल फिल्म के पोस्टर नहीं हटाए तो आगे कड़ी कानूनी कार्रवाई करेंगे।”

उन्होंने कहा, “मैं डायरेक्टर लीना मणिमेकलाई से पूछना चाहता हूँ कि आखिर हमारे देवी देवताओं पर ही फिल्म क्यों बनाई जाती है? किसी और धर्म के देवी देवताओं पर फिल्म बनाने की हिम्मत क्यों नहीं हो पाती है। यह बेहद आपत्तिजनक है। तत्काल पोस्टर नहीं हटाए, तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।”

लीना मणिमेकलई ने 2 जुलाई को अपनी डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘काली’ का पोस्टर ट्विटर पर रिलीज किया था। इस पोस्टर में एक्ट्रेस को ‘काली’ के रूप में दिखाया गया है। इसमें उसने एक हाथ में त्रिशूल और दूसरे हाथ में LGBT समुदाय का झंडा पकड़ा हुआ। इसके साथ ही उसे सिगरेट पीते हुए भी दिखाया गया है। पोस्टर रिलीज होने के बाद सोशल मीडिया पर इस फिल्म का विरोध किया जा रहा है।

विरोध के बाद फिल्म की निर्देशक लीना मणिमेकलाई ने कहा, था “मेरे पास खाने के लिए कुछ नहीं है। मैं एक ऐसी आवाज के साथ रहना चाहती हूँ जो बिना किसी डर के बोले जब तक वह है। अगर इसकी कीमत मेरी जान है तो मैं दे दूँगी। ये फिल्म एक ऐसी शाम पर है जब काली प्रकट होती हैं और टोरंटो की सड़कों पर घूमती हैं।

बता दें कि लीना ने साल 2002 में शॉर्ट डॉक्यूमेंट्री ‘मथम्मा’ से अपने करियर की शुरुआत की थी। काली के अलावा उनकी पिछली कई फिल्में जैसे ‘सेंगडल’, ‘पराई’, ‘व्हाइट वैन स्टोरीज’ भी विवादों का हिस्सा रह चुकी हैं। बावजूद इसके लीना को कई पुरस्कारों से नवाजा गया है।

कन्नड़ अभिनेत्री के साथ होटल के कमरे में पकड़े गए महेश बाबू के भाई, तीसरी पत्नी ने चप्पल से पीटा: वायरल हुआ वीडियो

टॉलीवुड फिल्म इंडस्ट्री में इन दिनों दिग्गज अभिनेता कृष्णा के बेटे और सुपरस्टार महेश बाबू के सौतेले भाई नरेश बाबू (Naresh Babu) के कन्नड़ अभिनेत्री पवित्रा लोकेश के साथ शादी की खबरें जोरों हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, नरेश बाबू चौथी बार पवित्रा लोकेश (Pavithra Lokesh) से शादी करने वाले हैं। इसी बीच नरेश की तीसरी पत्नी राम्या (Ramya Raghupati) का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। बताया जा रहा है कि राम्या ने मैसूर में पवित्रा लोकेश के होटल के कमरे के बाहर जाकर हंगामा किया। राम्या ने नरेश को चप्पलों से मारने की कोशिश की। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है। इस दौरान पुलिस भी बीच बचाव कराती दिखाई दे रही है।

कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी कहा जा रहा है कि नरेश की तीसरी पत्नी ने पवित्रा लोकेश को भी चप्पल से पीटने की कोशिश की, लेकिन वहाँ मौजूद पुलिस ने राम्या को रोका और काफी हंगामे के बाद उन्हें होटल से चलता किया। उधर, नरेश भी राम्या पर चिल्लाते नजर आए। अभिनेता की तीसरी पत्नी राम्या रघुपति ने आरोप लगाया है कि नरेश ने उसे तलाक के कागजात पर हस्ताक्षर करने की धमकी दी, लेकिन पवित्रा ने कहा कि नरेश एक सज्जन व्यक्ति हैं और दोनों के बीच अच्छे संबंध हैं। एक्ट्रेस पवित्रा लोकेश ने नरेश संग शादी की खबरों को भी झूठा बताया। वहीं, नरेश का कहना है कि उन्होंने अपनी पत्नी राम्या को तलाक का नोटिस भेजा था, जिसके बाद से वह उन्हें बदनाम करने के लिए झूठी खबरें फैला रही हैं।

बता दें कि 59 साल के नरेश दिवंगत एक्ट्रेस विजया निर्मला और उनके पहले पति के बेटे हैं। बाद में विजया ने महेश बाबू के पिता और एक्टर कृष्णा से शादी कर ली थी। नरेश भी साउथ के जानेमाने एक्टर हैं। राम्या उनकी तीसरी पत्नी हैं। बताया जाता ​है कि उन्होंने डांस मास्टर श्रीनू की बेटी से पहली शादी और रेखा शास्त्री से दूसरी शादी की है।

चित्रकूट में ‘कोदंड वन’ की स्थापना, CM योगी ने हरिशंकरी का पौधा लगाकर की शुरुआत: श्रीराम की तपोभूमि में लगेंगे 35 करोड़ पौधे

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सरकार के 100 दिन पूरे होने पर आज (5 जुलाई, 2022) को चित्रकूट में मानिकपुर के सेहरिन में वैदिक मंत्रों के बीच हरिशंकरी का पौधा रोपकर यूपी में वन महोत्सव का आगाज किया। सीएम योगी के साथ धर्मनगरी के साधु-संतों ने भी पौधरोपण किया। वहीं इस मौके पर सीएम योगी ने कहा कि मनुष्य का जीवन चक्र वनों पर आधारित है लेकिन वन काटकर मनुष्य ने स्वयं अपने आस्तित्व पर खतरा पैदा किया है।

आज इस अवसर पर उन्होंने सेहरिन में कोदंड वन विकसित करने को कहा। उन्होंने बताया कहा कि त्रेता में यहाँ वनों का बड़ा क्षेत्र रहा होगा लेकिन कटान से वन नष्ट हो गए और पर्यावरण संतुलन बिगड़ गया। कोदंड को उन्होंने राम के धनुष से जोड़ा और कहा कि कामदगिरि भी धनुषाकार है।

सीएम योगी आदित्यनाथ ने जनसभा को सम्बोधित करते हुए कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम को कोटि-कोटि प्रणाम। उन्होंने जनता को बताया कि आज पूरे प्रदेश में 25 करोड़ पौधे रोपे जा रहे हैं जबकि इस पूरे अभियान में 35 करोड़ पौधे लगाए जाने हैं। इसी कड़ी में 15 अगस्त को पाँच करोड़ पौधे रोपे जाएँगे। बुंदेलखंड में प्राकृतिक व बागवानी खेती को बढ़ावा दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि गंगा किनारे वाले जिलों में यह प्रयोग सफल रहा है। इसके अलावा गंगा के कनारे 5-5 किमी दायरे में बागवानी तैयार करने की मिशन भी शुरू किया जा रहा है। इसके साथ ही गाय के गोबर व गोमूत्र से कीटनाशक रसायन तैयार करेंगे। इसका प्रयोग भी खेती में होगा।

उन्होंने कहा कि जल संरक्षण की पुरातन विधियाँ हम भूल गए हैं इसलिए जल संकट की ओर बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज ग्लोबल वार्मिंग सबसे बड़ी समस्या है। इससे मानव जाति को बचाने के लिए पौधरोपण और प्रकृति की सुरक्षा ही सबसे बड़ा उपाय है। आज वृक्ष मित्र व प्रकृति मित्र बनने की जरूरत है। बारिश के पानी का संरक्षण कर बुंदेलखंड को हरा-भरा करने की बात उन्होंने कही।

बता दें कि आज के कार्यक्रम में सीएम योगी ने 124 करोड़ रुपए की 28 योजनाओं का शिलान्यास और 15 योजनाओं का लोकार्पण करते हुए यह भी कहा कि गोस्वामी तुलसीदास व महर्षि वाल्मीकि की धरती में धार्मिक व पर्यटन विकास में कोताही नहीं होगी। धर्मनगरी चित्रकूट के टाइगर रिजर्व क्षेत्र से टाइगर दहाड़ेगा तो भगवान श्रीराम का संदेश पूरे विश्व में जाएगा। उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड में घर-घर स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा। बुंदेलखंड को हवाई मार्ग और एक्सप्रेसवे से जोड़ दिया गया है।

गौरतलब है कि आज के कार्यक्रम से एक दिन पहले ही मुख्य वन संरक्षक पीपी सिंह ने इस क्षेत्र को कोदंड कहे जाने के बारे में बताते हुए कहा कि प्रभु श्रीराम वनवास के लिए निकलते समय धनुष बाण जन्मस्थली अयोध्या में छोड़ आए थे। तब उन्होंने सुरक्षा के लिए यहाँ बाँस से धनुष-तीर तैयार किए। प्रभु श्रीराम के इसी रूप को कोदंड कहते हैं। उन्होंने भी यह बताया कि उत्तर प्रदेश में पौधरोपण की शुरुआत वाले इस स्थान को कोदंड वन क्षेत्र के नाम से विकसित किया जाएगा।

‘सोशल मीडिया की जवाबदेही तय होगी’: मोदी सरकार के खिलाफ कोर्ट पहुँचा ट्विटर, नहीं हटा रहा भड़काऊ और झूठे कंटेंट्स

केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर को खरी-खरी सुनवाई है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया के बेहद ही शक्तिशाली माध्यम है और हमारे जीवन में इसका खासा प्रभाव है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया की जवाबदेही कैसे तय हो, ये सवाल दुनिया के कई हिस्सों में एक वैध प्रश्न बन चुका है। उन्होंने कहा कि दुनिया भर में देश-समाज इस दिशा में जा रही है कि सोशल मीडिया को उत्तरदायी बनाना ज़रूरी है।

अब सवाल ये है कि इसे किया कैसे जाएगा? इस पर केंद्रीय MeitY मंत्री ने कहा कि सेल्फ-रेगुलेशन महत्वपूर्ण है, जिसके तहत इन्हें समाज में नकारात्मक प्रभाव डालने वाले कंटेंट्स को खुद ही दूर कर देना चाहिए। उन्होंने आगे इंडस्ट्री रेगुलेशन और फिर सरकारी रेगुलेशन की बात की। उन्होंने बताया कि दुनिया भर में एक ऐसा इकोसिस्टम या थॉट प्रोसेस बन रहा है कि सोशल मीडिया को जवाबदेह बनाया जाना चाहिए और जैसे पत्रकार इतनी मेहनत कर के कंटेंट क्रिएट करते हैं तो इसका फायदा आपको भी मिलना चाहिए।

उन्होंने कहा कि अगर फेसबुक से इससे राजस्व आ रहा है तो आपको भी इसका हिस्सा मिलना चाहिए। उन्होंने इस प्रक्रिया में सभी को भागीदार बनाने की भी बात की। बता दें कि ट्विटर ने मोदी सरकार के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ने का फैसला लिया है और भड़काऊ कंटेंट्स नहीं हटा रहा है। कंपनी का कहना है कि कुछ अधिकारी नियमों का गलत इस्तेमाल कर रहे, ऐसे में इनकी न्यायिक समीक्षा होनी चाहिए। ट्विटर को आईटी मंत्रालय द्वारा चेतावनी भी दी जा चुकी है कि बात न मानने की स्थिति में उसके विरुद्ध आपराधिक मामला दर्ज किया जा सकता है।

केंद्र सरकार ने खालिस्तानी समर्थक हैंडल्स पर कार्रवाई के लिए ट्विटर को कहा था। ‘किसान आंदोलन’ के समय अफवाहों का बाजार गर्म करने के लिए झूठी सूचनाएँ जम कर प्रसारित की गई थीं, ऐसे में इन कंटेंट्स को हटाने को भी कहा गया था। साथ ही कोरोना को लेकर भड़काऊ और झूठे कंटेंट्स फ़ैलाने वाले हैंडल्स पर कार्रवाई को कहा गया था। ट्विटर ने इन्हें ‘अभिव्यक्ति की आज़ादी’ मान कर इनके खिलाफ कार्रवाई नहीं की और सरकार से ही भिड़ गया।

ट्विटर को भड़काऊ और अफवाहों वाले कंटेंट्स हटाने के लिए 4 जुलाई तक का समय दिया गया था। ट्विटर ने कई हैंडल्स पर कार्रवाई की भी, लेकिन अब वो इसकी समीक्षा पर उतर आया है। कर्नाटक हाईकोर्ट में ट्विटर ने सरकार के आदेशों को चुनौती दे दी है। नए आईटी नियमों को मानने में भी सोशल मीडिया कंपनी ने खासी आनाकानी की थी। वो लद्दाख को चीन का हिस्सा दिखा चुका है, B.1.617 को कोरोना का भारतीय वेरिएंट बताने को आगे बढ़ा चुका है और भाजपा नेताओं के कंटेंट्स पर ‘भ्रामक मीडिया’ का टैग लगा चुका है।