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कन्हैया लाल के हत्यारों को 5 km खदेड़ कर गिरफ्तार कराया, धमकी के बावजूद डटे रहे शक्ति सिंह और प्रह्लाद सिंह: राजस्थान पुलिस ने भी माना लोहा

राजस्थान के उदयपुर में टेलर कन्हैयालाल के कातिलों को गिरफ्तार करवाने में पुलिस के मददगार राजसमंद के 2 युवकों की बहादुरी की तारीफ हो रही है। इनके नाम शक्ति सिंह और प्रह्लाद सिंह हैं। बताया जा रहा है कि इन दोनों ने आरोपित रियाज और मोहम्मद गौस का लगातार बाइक से पीछा किया और पुलिस को उनकी लोकेशन बताई। राजस्थान के भीम विधानसभा से कॉन्ग्रेस विधायक सुदर्शन सिंह रावत ने भी 28 जू,न 2022 को शक्ति और प्रह्लाद की प्रशंसा की है।

कॉन्ग्रेस विधायक ने लिखा, “उदयपुर की घटना जघन्य और बर्बर है। क्रूरता के साथ हत्या करना और उसे खुद ही प्रसारित करना किसी भी मानव सभ्यता में अस्वीकार्य है। इसे क़तई बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। भीम देवगढ़ निवासी प्रह्लाद सिंह व शक्ति सिंह ने आरोपियों का लगातार पीछा किया व यहाँ की जागरूक जनता की मदद से भीम देवगढ़ पुलिस ने आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। प्रशासन से अनुरोध है कि बर्बरता करने वाले आरोपियों पर कड़ी से कड़ी कार्यवाही सुनिश्चित करे व इन्हें फाँसी की सजा दिलाए।”

दैनिक भास्कर के मुताबिक विधायक सुदर्शन सिंह रावत ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को चिट्ठी लिख कर शक्ति और प्रह्लाद को सम्मानित करने की माँग की है। साथ ही राजसमंद पुलिस के SP शिवलाल बैरवा ने कहा, “आरोपितों की गिरफ्तारी में 2 युवकों का सहयोग रहा जिन्होंने आरोपितों का पीछा करते हुए पुलिस को सूचना दी।”

दैनिक भास्कर से बात करते हुए शक्ति सिंह ने कहा, “हमें सोशल मीडिया से कन्हैयालाल की हत्या की सूचना मिली थी। हमें हमारे ही क्षेत्र के एक पुलिसकर्मी की कॉल आई थी जिसमें आरोपितों के बाइक के नंबर बता कर भीलवाड़ा-देवगढ़ मार्ग से भागने की जानकारी दी गई। इस जानकारी पर हम बाइक से निकले तभी आरोपितों की शक्ल से मिलते-जुलते 2 लोग निकले। उस बाइक का नंबर भी 2611 था। हमने पुलिस बुलाई तो वो दूर थी। हम आरोपितों का पीछा करते रहे। इस दौरान हमें धमकाया भी गया लेकिन हम उनके पीछे लगे रहे। आख़िरकार 5 किलोमीटर बाद दोनों आरोपितों को पुलिस ने पकड़ लिया।”

राजपूत करणी सेना के महिपाल सिंह ने शक्ति और प्रह्लाद सिंह की तारीफ करते हुए उनके लिए राष्ट्रपति पुरस्कार की माँग की है।

बाइबिल देकर कह रहे थे ईसाई बन जाओ, मना करने पर बकी गालियाँ: चंगाई सभा के नाम पर दलितों के धर्मांतरण का प्रयास, यूपी में 3 गिरफ्तार

UP के फतेहपुर जिले में ईसाई धर्मान्तरण के प्रयास का मामला सामने आया है। यहाँ पर चंगाई सभा के नाम पर लोगों के धर्म परिवर्तन के प्रयास की शिकायत पर हिन्दू संगठनों ने गाँव में हंगामा किया। इस सभा का विरोध करने वाले एक युवक के साथ गाली-गलौज का भी आरोप है। पुलिस ने घटनास्थल पर पहुँच कर मामले को शांत करवाया और 3 आरोपितों को गिरफ्तार कर के जेल भेज दिया है। घटना 2 जुलाई, 2022 (शनिवार) की है।

यह घटना खागा थानाक्षेत्र के गाँव सुजरही की है। मामले में शिकायतकर्ता ‘बजरंग दल’ कार्यकर्ता राहुल विश्वकर्मा हैं। राहुल के मुताबिक, “2 जुलाई को मैं दिन में 11 बजे सुजरही गाँव में घूमने गया था। वहाँ पर संजय पासवान और रामचंद्र नाम के 2 व्यक्ति और नीरमती नाम की एक महिला भीड़ के साथ दिखीं। इस दौरान ये सभी बिना अनुमति ईसाई धर्म का प्रचार करते हुए लोगों को ईसाई बनने के लिए प्रेरित कर रहे थे। इस मौके पर ईसाई धर्म से संबंधित किताबें भी बाँटी जा रहीं थीं।”

शिकायत कॉपी

राहुल ने शिकायत में आगे लिखा, “तीनों आरोपितों ने मुझे भी ईसाई धर्म से संबंधित एक बाइबिल दी और मुझे ईसाई बन जाने के लिए कहा। मैंने उन्हें खुद के हिन्दू होने और हिन्दू ही रहने का जवाब दिया। यह जवाब सुन कर इन तीनों ने मुझे गालियाँ दी। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान मेरे 2 दोस्त मौजूद थे।” राहुल ने पुलिस से कार्रवाई की माँग की है।

राहुल की शिकायत पर पुलिस ने धारा 188, 295- A, 504 और उत्तर प्रदेश धर्मान्तरण निरोधक धारा 3/5 (1) के तहत FIR दर्ज कर ली। मौके से तीनों आरोपितों रामचंद्र, संजय और नीरमती को गिरफ्तार कर के अदालत भेज दिया गया। अदालत ने तीनों आरोपितों को 3 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। पुलिस जाँच अधिकारी सब इंस्पेक्टर कृष्ण स्वरूप इस मामले में जाँच कर रहे हैं।

FIR Copy

ऑपइंडिया ने इस घटना की जानकारी शिकायतकर्ता राहुल विश्वकर्मा से ली। उन्होंने बताया, “जब हम मौके पर गए तो भीड़ दिखी। बाद में पुलिस भी आई। पुलिस देखते ही एक आरोपित रामचंद्र भूसे के ढेर में छिप गया था। भीड़ में अधिकतर दलित समुदाय के लोग थे जिनके धर्मान्तरण का प्रयास चल रहा था। मैं घर का अकेला हूँ। तमाम प्रकार के डर रहते हैं लेकिन संगठन से जुड़ा हूँ इसलिए इन कामों में पीछे नहीं रहता। जिला फतेहपुर में धर्मान्तरण बहुत तेजी से हो रहा है। एक हफ्ते पहले भी एक मामले का हमने शिकारपुर क्षेत्र में पर्दाफाश किया था। आज भी एक घटना की जानकारी मिली है लेकिन अकेले कितना दौड़ सकता हूँ। शायद मैं भी निशाने पर आ जाऊँ।”

जो संत बने RRR की प्रेरणा उनके बलिदान को PM मोदी ने किया नमन: अंग्रेजों ने पेड़ से बॉंध भून दिया, जानिए अल्लूरी सीताराम को क्यों कहते थे ‘जंगलों का नायक’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज (4 जुलाई 2022) प्रसिद्ध क्रांतिकारी अल्लूरी सीताराम राजू की 125वीं जयंती पर आंध्र प्रदेश के भीमावरम पहुँचकर वहाँ की जनता को संबोधित किया। यहाँ उन्हें महान क्रांतिकारी की 30 फीट ऊँची प्रतिमा का अनावरण भी किया। उन्होंने इस अवसर पर संत अल्लूरी सीताराम के बलिदान को नमन करते हुए बताया कि संयोग से इसी साल रम्पा क्रांति के 100 साल पूरे हो रहे हैं।

उन्होंने अल्लूरी सीताराम को भारत की सांस्कृतिक और आदिवासी पहचान का प्रतीक बताते हुए कहा, “अल्लूरी सीताराम राजू गारू की 125वीं जन्म जयंती और रम्पा क्रांति की 100वीं वर्षगाँठ को पूरे वर्ष मनाया जाएगा। पंडरंगी में उनके जन्मस्थान का जीर्णोद्धार, चिंतापल्ली थाने का जीर्णोद्धार, मोगल्लू में अल्लूरी ध्यान मंदिर का निर्माण, ये कार्य हमारी अमृत भावना के प्रतीक हैं।”

RRR फिल्म के निर्देशक ने अल्लूरी सीताराम से ली थी फिल्म के लिए प्रेरण

बीते दिनों साउथ की जो फिल्म आरआरआर ने बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचाया और खासी चर्चा का विषय रही, उस फिल्म में राजू और राम की दोस्ती की कहानी के लिए निर्देशक ने प्रसिद्ध क्रांतिकारी अल्लूरी सीताराम राजू और कोमाराम भीम के जीवन से ही प्रेरण ली थी। निर्देशक राजमौली ने कहा था कि इन क्रांतिकारियों के जीवन के बारे में बहुत अधिक ज्ञात नहीं है, लेकिन इस काल्पनिक कहानी के जरिए ये दिखाने का प्रयास किया गया है कि उनके जीवन में क्या हुआ था और अगर दोनों एक साथ मिल गए होते तो क्या होता।

अल्लूरी सीताराम राजू का संक्षिप्त परिचय

अल्लूरी सीताराम राजू एक भारतीय क्रांतिकारी थे, जिन्होंने भारत में ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के खिलाफ एक सशस्त्र अभियान चलाया। उनका जन्म 1897 में विशाखापटनम में हुआ था। उनका असली नाम श्रीरामराजू था, जो कि उनके नाना के नाम पर था। वह छोटी उम्र में ही संत बन गए थे। सीताराम राजू वर्ष 1882 के मद्रास वन अधिनियम के खिलाफ ब्रिटिश विरोधी गतिविधियों में शामिल हो गए। भारत की ब्रिटिश सरकार ने मद्रास फॉरेस्ट एक्ट पास कर स्थानीय आदिवासियों को जंगल में जाने पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसी को लेकर उन्होंने आदिवासियों के लिए लड़ाई लड़ी और औपनिवेशिक ताकतों के खिलाफ सशस्त्र विद्रोह का आह्वान किया।

महज 27 साल की उम्र में वह सीमित संसाधनों के साथ सशस्त्र विद्रोह को बढ़ावा देने और गरीबों, अंग्रेजों के खिलाफ अनपढ़ आदिवासी को प्रेरित करने में कामयाब रहे। अंग्रेजों के प्रति बढ़ते असंतोष ने 1922 के रम्पा विद्रोह (Rampa Rebellion) को जन्म दिया, जिसमें अल्लूरी सीताराम राजू ने एक नेतृत्वकर्त्ता के रूप में एक प्रमुख भूमिका निभाई। 1922 से 1924 के बीच हुए इस विद्रोह में अल्लूरी ने ब्रिटिशर्स के खिलाफ विद्रोह करने के लिए विशाखापट्टनम और पूर्वी गोदावरी जिलों के आदिवासी लोगों को संगठित किया। इस विद्रोह के दौरान कई पुलिस थानों और अंग्रेजी अधिकारियों पर हमला करके लड़ाई के लिए हथियार जमा किए गए।

उनके वीरतापूर्ण कारनामों का ही नतीजा था कि स्थानीयों ने उन्हें ‘मान्यम वीरुडू’ (जंगलों का नायक) उपनाम दे दिया था। साल 1924 में अल्लूरी सीताराम राजू का विद्रोह जब चरम पर था तो पुलिस उनका पता लगाने के लिए आदिवासियों को सताने लगी। ऐसे में जब राजू को इस बात का पता चला तो उनका दिल पिघल गया। उन्होंने आत्मसमर्पण का निर्णय लिया और खुद अपनी जानकारी देकर पुलिस को कहा कि वो कोइयूर में हैं। आकर उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाए।

ब्रिटिश पुलिस ने बिन समय को गवाए उन्हें अपनी हिरासत में लिया और बाद में उनके साथ विश्वासघात करते हुए उन्हें एक पेड़ में बाँधा, फिर सार्वजनिक रूप से उन्हें गोलियों से भून दिया गया। उनकी हत्या क्रूरता से हुई मगर आदिवासियों के लिए वह नायक बन गए। वहीं सुभाष चंद्र बोस ने कहा कि भारतीय युवाओं को अल्लूरी सीताराम राजू से प्रेरणा लेनी चाहिए।

मिश्रा भाइयों पर फैजल ने 8 साथियों के साथ बोला हमला, चाकू लेकर आए थे: लात-घूसों से पीटा, अश्लील गाली-गलौज

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में 2 छात्रों पर हमला हुआ है। पीड़ितों के नाम ओमकुमार मिश्रा और जयकुमार मिश्रा हैं। दोनों घायलों का इलाज चल रहा है। मुख्य आरोपित फैज़ल है जिस पर बाइक सवार 8 साथियों के साथ हमले का आरोप है। पुलिस ने FIR दर्ज कर के आरोपितों की तलाश शुरू कर दी है। घटना 3 जुलाई 2022 (रविवार) की है।

घटना की FIR पीड़ित जयकुमार मिश्रा ने दर्ज करवाई है। जयकुमार के मुताबिक, “मैं कोनी शासकीय इजीनियरिंग कालेज गेट पास रह कर गुरु घासीदास विश्‍वविद्यालय (GGU) में BSC प्रथम वर्ष की पढाई कर रहा हूँ। 3 जुलाई की शाम लगभग 7 बजे मैं अपने भाई ओम कुमार मिश्रा के साथ पैदल बाजार जा रहा था। तभी 3 बाइक से 8 लड़के आए। उसमें से एक का नाम फैज़ल है। हमलावरों में से एक के हाथ में चाकू था। वो हमसे गाली-गलौज करने लगे।”

शिकायत की कॉपी

शिकायत में आगे लिखा गया, “कुछ देर बाद हमलावर मुझे और मेरे भाई को लात-घूसों से पीटने लगे। इस बीच मेरे भाई ओमकुमार के सिर पर चाकू से वार किया गया। मेरे भाई ओमकुमार मिश्र के बाएँ हाथ और दाएँ कँधे पर भी चोट लगी है। मौके पर मौजूद आस-पास के कई लोगों ने इस घटना को देखा है।”

FIR

पीड़ितों की शिकायत पर बिलासपुर की थाना कोनी पुलिस ने धारा 147, 148, 307, 294 और 323 के तहत केस दर्ज कर लिया है। पुलिस ने नामजद फैज़ल को और उसके 8 साथियों को अज्ञात में आरोपित बनाया है। ऑपइंडिया ने इस मामले में SHO कोनी से बात की। उन्होंने बताया, “अभी इस मामले में पुलिस की जाँच चल रही है। कोई नया अपडेट जाँच के बाद ही बता पाएँगे।” घटना में अब तक किसी की गिरफ्तारी के सवाल को उन्होंने टाल दिया।

फ्लोर टेस्ट में भी एकनाथ शिंदे पास, सरकार के पक्ष में 164 वोट पड़े: वोटिंग से पहले भी उद्धव के MLA ने बदला पाला

महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में बनी शिवसेना-बीजेपी की सरकार ने सोमवार (4 जुलाई 2022) को बहुमत हासिल कर लिया। विधानसभा में बहुमत परीक्षण के दौरान सरकार के पक्ष में 164 वोट पड़े। वहीं विरोध में महज 99 विधायकों ने वोट किया। बता दें कि 288 सदस्यीय महाराष्ट्र विधानसभा में फिलहाल एक पद रिक्त है। ऐसे में शिंदे सरकार को बहुमत साबित करने के लिए 144 विधायकों के समर्थन की जरूरत थी।

राहुल नार्वेकर के स्पीकर चुने जाने के बाद ही यह साफ हो गया था कि शिंदे सरकार आसानी से बहुमत हासिल कर लेगी। लेकिन सोमवार को इसके विरोध में पड़े वोट चौंकाने वाले हैं। क्योंकि स्पीकर के चुनाव में उद्धव खेमे के उम्मीदवार राहुल साल्वे के पक्ष में 107 वोट पड़े थे। इसका कारण विपक्ष के कई विधायकों का मतदान के दौरान गैर हाजिर रहना बताया जा रहा है।

पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को फ्लोर टेस्ट से पहले एक और झटका लगा। एक और विधायक श्यामसुंदर शिंदे बहुमत परीक्षण से ठीक पहले एकनाथ शिंदे गुट में शामिल हो गए हैं। बता दें कि कल से शिवसेना के दो विधायक पाला बदल चुके हैं। शिवसेना के नए बागी विधायक संतोष बांगड ने शिंदे के समर्थन में वोट किया है।

इधर शिंदे व उद्धव गुट के बीच व्हिप विवाद सुप्रीम कोर्ट पहुँच गया है। शिवसेना की तरफ से वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने महाराष्ट्र विधानसभा स्पीकर की तरफ से एकनाथ शिंदे गुट की ओर से जारी व्हिप को मान्यता देने का मामला उठाया। उन्होंने कहा कि स्पीकर को यह अधिकारी नहीं है, क्योंकि पार्टी अभी भी उद्धव गुट की है। सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर भी 11 जुलाई को सुनवाई करेगा। 

उल्लेखनीय है कि एकनाथ शिंदे-भाजपा सरकार के महत्वपूर्ण विश्वास मत से एक दिन पहले उद्धव ठाकरे गुट को बड़ा झटका लगा था। रविवार (3 जुलाई 2022) रात महाराष्ट्र विधानसभा के नवनियुक्त अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने उद्धव गुट के अजय चौधरी को शिवसेना विधायक दल का नेता और सुनील प्रभु को चीफ व्हिप के तौर पर मान्यता देने से इनकार कर दिया था। स्पीकर ने शिंदे को शिवसेना विधायक दल के नेता के रूप में शिंदे और चीफ व्हिप के रूप में भरत गोगावाले को मान्यता दे दी थी।

विराट कोहली के लिए सहवाग ने कहा- छमिया नाच रही है, भड़के फैंस बोले- मैनरलेस, घमंडी, जबान को लगाम दो…

भारत के पूर्व सलामी बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग अपनी अलग अंदाज की कमेंट्री के लिए जाने जाते हैं। सोशल मीडिया में भी आए दिन उनकी वन लाइनर चर्चा में रहती है। लेकिन, रविवार (3 जुलाई 2022) को भारत-इंग्लैंड के बीच एजबेस्टन में खेले जा रहे टेस्ट मैच की कमेंट्री के दौरान यह उन्हें भारी पड़ गया। सहवाग ने पूर्व कप्तान विराट कोहली के लिए ‘छमिया’ शब्द का इस्तेमाल किया, जिसको लेकर सोशल मीडिया में उनकी किरकिरी हो रही है। उन्हें कमेंट्री से हटाने की माँग की जा रही है।

दरअसल, मैच के तीसरे दिन इंग्लैंड की पहली पारी के दौरान सैम बिलिंग्स का जब विकेट गिरा तो विराट कोहली खुशी में नाचने लगे। विराट दोनों हाथ ऊपर उठा कर अपने ही स्टाइल में विकेट का जश्न मनाते हुए नजर आए। इसी दौरान कमेंट्री कर रहे वीरेंद्र सहवाग ने पूर्व भारतीय कप्तान के लिए कहा- देखो छमिया नाच रही है।

इसके बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने सहवाग की जमकर क्लास लगाई है। लोगों ने सहवाग की आलोचना करते हुए कहा कि यह किस तरह की कमेंट्री है। सहवाग को अपनी भाषा पर ध्यान देनी चाहिए। 

एक ट्विटर यूजर ने लिखा, “सहवाग की कमेंट्री औसत दर्जे से भी खराब है। उन्हें नहीं पता कि क्या और कैसे अपनी बात कहनी चाहिए। एक मैनरलेस घमंडी शख्स।”

वहीं एक अन्य यूजर ने कहा, “मुझे समझ नहीं आ रहा है कि वीरू को कमेंट्री टीम में रखते ही क्यों है। स्टार वालों ने अच्छा निकाला है इसको।”

तनु नाम के यूजर ने लिखा, “ढंग का कमेंटेटर नहीं रख पा रहे ये लोग। हिंदी कमेंट्री का स्तर गिरता जा रहा है।”

परितोषा झा ने लिखा, “सहवाग भाई जरा जबान को लगाम दो। आपसे तो नहीं हो पाया नाच। जो मैच को फुल एंजॉय कर रहा है उसके बारे में ऐसा बोलने का आपको हक नहीं है। इससे आपका स्टैंडर्ड पता चलता है कि आप कितना घटिया सोचते हो।”

एक अन्य यूजर ने लिखा कि यही वजह है कि लोगों ने हिंदी कमेंट्री सुननी बंद कर दी है।

वहीं एक अन्य यूजर ने लिखा, “अच्छा खिलाड़ी होना अलग बात। जरूरी नहीं वो अच्छा कमेंटेटर हो। जबान पर कुछ कंट्रोल करो, यह भी देखो तुम किसके खिलाफ बोल रहे हो।”

एक यूजर ने लिखा, वीरेंद्र सहवाग, आप बैट्समैन अच्छे थे मगर आपकी सोच और जुबान घटिया छमिया जैसी है। BCCI कृपया किसी अच्छे लोगों को कमेंट्री में रखें।

एजबेस्टन टेस्ट में टीम इंडिया की मजबूत स्थिति

इंग्लैंड के खिलाफ एजबेस्टन टेस्ट में टीम इंडिया ने पहली पारी में 416 रनों का बड़ा स्कोर बनाया। इसके बाद इंग्लैंड को 284 रनों पर ऑलआउट किया। इस तरह पहली पारी में भारतीय टीम को 132 रनों की बढ़त मिली। दूसरी पारी में टीम इंडिया ने तीसरे दिन का खेल खत्म होने तक 125 रन बनाए। ऐसे में कुल बढ़त 257 रनों की हो चुकी है।

उमेश की तरह 3 और लोगों को दी गई थी हत्या की धमकी, 2 ने Video जारी कर माँगी माफी: CCTV से खुलासा- मौलाना कर रहा था केमिस्ट की रेकी

अमरावती में केमिस्ट उमेश कोल्हे की हत्या मामले में गिरफ्तार हुए उनके पुराने दोस्त युसूफ और अन्य आरोपितों से पूछताछ में कई खुलासे हुए हैं। पहले पता चला था कि इसी युसूफ ने उमेश द्वारा फॉर्वर्ड मैसेज अपने कट्टरपंथियों के ग्रुप में भेजा और फिर इरफान शेख ने उनकी हत्या का षड्यंत्र रचा। हालाँकि अब खबर है कि उमेश की तरह ही कम से कम तीन अन्य लोगों ने भी नुपूर शर्मा के समर्थन वाले पोस्ट को सोशल मीडिया पर शेयर किया था जिन्हें बाद में धमकी मिली और उनमें से दो को वीडियो जारी करके माफी माँगनी पड़ी।

इनमें एक डॉक्टर गोपाल राठी भी है। राठी ने वीडियो में कहा था, “मैंने नूपुर शर्मा के सम्बन्ध में स्टेटस लगाया था। इसके पीछे किसी धर्म या जाति या किसी भी व्यक्ति का दिल दुखाने का मेरा कोई मकसद नहीं था। लेकिन, फिर भी किसी का दिल दुखा हो तो मैं अपने दिल से उनसे माफ़ी माँगता हूँ। साथ ही वादा करता हूँ कि आगे ऐसी कोई गलती नहीं होगी।”

सामने आई तस्वीरों में देख सकते हैं कि गोपाल राठी को डॉ जीशान का संदेश आया था। डॉक्टर जीशान ने उन्हें धमकी दी थी कि वो जो डॉ गोपाल राठी को मरीज रेफर करते हैं, वो अब करना बंद कर देंगे। सोशल मीडिया पर ये चैट की तस्वीर शेयर हो रही है।

अब पुलिस ने इस संबंध में धमकी पाने वाले लोगों से शिकायत देकर मामले की जाँच को शुरू किया है। कोल्हे के परिजनों का कहना है कि उन्हें नहीं मालूम था कि कोल्हे को एक ऐसे संदेश के लिए धमकियाँ मिल रही हैं जिसे युसूफ द्वारा कट्टरपंथियों के ग्रुप में डाला गया।

कोल्हे की हत्या की साजिश

उमेश कोल्हे की हत्या मामले में अब तक 7 गिरफ्तारियाँ हुई हैं। इनमें एक कोल्हे का पुराना दोस्त डॉ युसूफ है और दूसरा मुख्य साजिशकर्ता इरफान है। इरफान से पूछचाछ में ये बात सामने आई है कि वो एक रहबरिया नाम से एक एनजीओ चलाता था जिसे पाकिस्तान और अरब देशों से फंडिंग मिलती थी। हत्या के आरोपित इसी एनजीओ से जुड़कर काम कर रहे थे।

प्रमुख साजिशकर्ता इरफान पर ये भी आरोप है कि उसने पहले मौलाना मुदस्सिर अहमद से उमेश की रेकी करवाई। फिर वेल्डिंग करने वाले शेख इरफान ने मजदूरों को प्लॉन में शामिल करके, उन्हें पैसे देकर हत्या को अंजाम तक पहुँचाया। इस शेख इरफान पर कथिततौर पर दूसरे धर्म की लड़की को अपने साथ भगाने का आरोप है। उसके घर के आसपास वाले लोग बताते हैं कि वो काफी मजहबी किस्म का था और कोल्हे की पोस्ट मिलने के बाद उसने इस पूरे षड्यंत्र को रचा। पुलिस ने केस से जुड़े साक्ष्य जुटाने के बाद 7 जुलाई तक पुलिस हिरासत में भेजा है। वहीं बाकी आरोपित की हिरासत 4 जुलाई तक की है।

कोल्हे की हत्या पर भ्रमित करने का प्रयास

बता दें कि उमेश कोल्हे की हत्या के बाद महाराष्ट्र पुलिस ने इस मामले को डकैती का केस बताकर रफा-दफा करना चाहा था। हालाँकि बाद में पता चला कि हत्या करने वालों ने उमेश को मारने के बाद उनके पास से कुछ नहीं चुराया। 12 दिन बाद इस मामले में कार्रवाई शुरू हुई और सीसीटीवी फुटेज से रेकी से लेकर हत्या के लिए निकले आरोपितों की मूवमेंट सामने आई। ये भी पता चला चला कि खंजर शारुख और आतिब ने घोंपा था।

बाद में कहा गया कि उमेश का सिर्फ गला रेता गया था, फिर सब वहाँ से फरार हो गए। पोस्टमार्टम हुआ तो हत्या की बर्बरता का पता चला। इसमें सामने आया कि उनके गले पर जो वार हुआ वो 5 इंच चौड़ा, 7 इंच लंबा और 5 इंच गहरा था। उनकी सांस लेने वाली, भोजन निगलने वाली नली और आँखों की नसों पर भी धारधार हथियार से वार हुए थे।

शिवसेना विधायक दल के शिंदे ही ‘एक-नाथ’: बहुमत परीक्षण से पहले उद्धव गुट को महाराष्ट्र विधानसभा के स्पीकर ने दिया झटका

एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में बनी महाराष्ट्र की नई सरकार सोमवार (4 जुलाई 2022) को विधानसभा में बहुमत साबित करेगी। उससे पहले विधानसभा के स्पीकर राहुल नार्वेकर ने पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के गुट वाली शिवसेना को तगड़ा झटका दिया है। उन्होंने शिंदे को शिवसेना विधायक दल के नेता के तौर पर मान्यता दे दी है।

नार्वेकर ने रविवार को ठाकरे गुट को यह झटका दिया है। उन्होंने शिवसेना विधायक दल के नेता के तौर पर अजय चौधरी और चीफ व्हिप सुनील प्रभु को मान्यता देने की अर्जी ठुकरा दी। चीफ व्हिप के तौर पर शिंदे गुट के भरत गोगावले को मान्यता दी गई है। शिवसेना के मुख्य प्रवक्ता और सांसद अरविंद सावंत ने विधानसभा अध्यक्ष के फैसले को असंवैधानिक बताया है। उन्होंने कहा है कि इस फैसले को अदालत में चुनौती दी जाएगी।

नार्वेकर के स्पीकर चुने जाने के बाद शिवसेना के दोनों गुटों की ओर से व्हिप का उल्लंघन करने पर विधायकों को अयोग्य करार देने की माँग भी की गई है। एक ओर शिंदे गुट के चीफ व्हिप भरत गोगावले ने ठाकरे गुट के 16 विधायकों की सदस्यता रद्द करना की माँग की है तो वहीं ठाकरे गुट की और से सुनील प्रभु ने शिंदे गुट के 39 विधायकों की सदस्यता रद्द करने की माँग करते हुए लेटर सौंपा है।

नार्वेकर को मिले थे 164 वोट

बता दें कि महाराष्ट्र विधानसभा में रविवार को स्पीकर का चुनाव हुआ था, जिसमें शिंदे गुट और बीजेपी के संयुक्त उम्मीदवार राहुल नार्वेकर ने बाजी मारी थी। उन्हें 164 वोट मिले थे। इनमें भाजपा के 104, शिंदे गुट के 39, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना का 1, बच्चू काडू की प्रहार जनशक्ति पार्टी से 2, राष्ट्रीय समाज पक्ष से 1, बहुजन विकास अघाड़ी से 3 और जन स्वराज्य शक्ति के 1 विधायक शामिल हैं। इसके अलावा उन्हें 13 निर्दलीय का भी समर्थन मिला था। वही उद्धव खेमे के उम्मीदवार राहुल साल्वे के पक्ष में 107 वोट ही पड़े थे।

288 सदस्यीय महाराष्ट्र विधानसभा में फिलहाल एक पद रिक्त है। ऐसे में शिंदे सरकार को बहुमत साबित करने के लिए 144 विधायकों के समर्थन की जरूरत होगी। जिस तरह स्पीकर पद के लिए चुनाव में इस पक्ष को 164 वोट मिले हैं, उससे लगता है कि बहुमत परीक्षण में भी विपक्ष कोई चुनौती पेश करने में नाकाम रहेगा।

डेनमार्क के सबसे बड़े मॉल में अंधाधुंध फायरिंग, 3 की मौत, कई घायल: संदिग्ध की गिरफ्तारी के बाद पुलिस कर रही आंतकी एंगल की जाँच

डेनमार्क की राजधानी कोपनहेगन के एक शॉपिंग मॉल में रविवार (4 जुलाई 2022) देर रात अंधाधुंध फायरिंग की घटना प्रकाश में आई है। बताया जा रहा है कि इस गोलीबारी में कई लोग घायल हुए हैं जबकि 3 लोगों की इस घटना में मौत हो गई है। पुलिस ने इस संबंध में 22 साल के संदिग्ध व्यक्ति को गिरफ्तार किया है।

घटना कोपेनहेगन के बाहरी इलाके में सबवे लाइन के पास स्थित सबसे बड़े ‘फील्ड्स’ शॉपिंग मॉल की है। रविवार को छुट्टी की वजह से वहाँ ज्यादा लोग मौजूद थे। जैसी ही आरोपित ने गोलियाँ चलानी शुरू कीं मॉल में काफी भगदड़ मच गई। लोग चीखते-चिल्लाते मॉल से बाहर निकलने लगे। सामने आई तस्वीरों में भी कुछ लोग अपने बच्चों के साथ मॉल से हड़बड़ी में बाहर आते दिख रहे हैं।

चश्मदीदों का कहना है कि उन्होंने पहले मॉल से बाहर भागते हुए कुछ लोगों को देखा और उसके फौरन बाद अंदर धमाकों की आवाज सुनी। इसके बाद मॉल में सब भागने लगे। हमलावर की गोली लगने के कारण कई लोग घायल हैं।

कोपेनहेगन पुलिस ऑपरेशन यूनिट के प्रमुख सोरेन थॉमसन ने घटना की जानकारी देते हुए बताया कि इस पूरी घटना में आतंकी मंसूबों की आशंका को खारिज नहीं किया जा सकता। लेकिन फिलहाल ये पता नहीं चल पाया है कि इस घटना में संदिग्ध व्यक्ति के अलावा और कौन शामिल है। पुलिस इसकी जाँच कर रही है।

जानकारी के मुताबिक, ये हमला इस साल की टूर डी फ्रांस साइकलिंग प्रतियोगिता के राजधानी में शुरू होने के दो दिन बाद हुआ। टूर के आयोजकों ने पीड़ितों के लिए सहानुभूति भी व्यक्त की है। वहीं पुलिस ने घटना के बाद पूरे शॉपिंग मॉल की सुरक्षा को और बढ़ा दिया है।

बता दें कि डेनमार्क दुनिया के सबसे सुरक्षित व कम क्राइम रेट वाले देशों में एक गिना जाता है। अमेरिकी नेत्री लॉरेन बोबर्ट ने इसे गोलीबारी की जानकारी देते हुए गन लॉ पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि डेनमार्क उन देशों में से एक हैं जहाँ गन लॉ सख्ती से लागू है। अब ये बात मान लेनी होगी कि गन लॉ इतने पर्याप्त नहीं है कि वो लोगों पर होने वाली गोलीबारी की घटनाओं को रोक सकें।

AG के पास पहुँचा TMC वाला साकेत गोखले, हमारे खिलाफ चलाना चाहता है अदालत की अवमानना का मामला: हम अपने शब्दों पर अब भी कायम

देश-विदेश से मिल रही रेप और हत्याओं की धमकियों के बीच 1 जुलाई 2022 को भाजपा की निलंबित प्रवक्ता नुपूर शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाकर गुहार लगाई थी कि उनकी सारी एफआईआर दिल्ली में ट्रांस्फर करवा दी जाए।

उन्होंने ये नहीं कहा था कि एफआईआर को खारिज किया जाए या फिर वो जाँच में सहयोग नहीं करेंगी। लेकिन फिर भी कोर्ट में उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायाधीशों ने हैरान करने वाली टिप्पणियाँ कीं और उनपर तंज कसे।

अजीब बात ये थी कि सुनवाई के दौरान की गई टिप्पणियाँ लिखित आदेश में सम्मिलित नहीं की गई जिसके बाद लोगों ने इसे सर्वोच्च न्यायालय की नहीं, बल्कि जजों की निजी राय मानते हुए अपनी प्रतिक्रियाएँ दीं।

ऑपइंडिया की संपादक नुपूर शर्मा ने भी इसी क्रम में अपने विचार प्रस्तुत किए और पूछा कि क्या जैसे भाजपा की पूर्व प्रवक्ता नुपूर शर्मा की ‘बेलगाम जुबान’ को इस्लामी हिंसा का कारण बताया जा रहा है। क्या वैसे ही अन्य मामले जिसमें कोर्ट के फैसलों के बाद कट्टरपंथी सड़क पर उतरे, उन मामलों में भी कोर्ट के जजों को जिम्मेदार कहा जाएगा क्या।

रिपोर्ट में सवाल किया गया था कि जब एक ओर जजों के फैसला देने के बाद उन्हें मिल रही धमकियों के मद्देनजर उन्हें सुरक्षा मुहैया कराई जा रही थी, तो फिर नुपूर शर्मा को मिल रही धमकियों को नजरअंदाज कैसे किया जा सकता है।

अब इन्हीं सवालों के पूछे जाने के बाद तृणमल कॉन्ग्रेस के नेता साकेत गोखले ने अटॉर्नी जनरल को पत्र लिखकर ऑपइंडिया और उसकी एडिटर-इन-चीफ नुपूर शर्मा के खिलाफ अदालत की अवमानना का केस शुरू करने की अपील की। इस पत्र में कहा गया कि ऑपइंडिया के खिलाफ ये कार्रवाई हो क्योंकि मामले से संबंधित लेखों ने सुप्रीम कोर्ट की साख को नुकसान पहुँचाया है।

साकेत गोखले ने कहा कि हमने सुप्रीम कोर्ट के बयान से छेड़छाड़ की। जाहिर है वो साबित करना चाहते थे कि अगर सुप्रीम कोर्ट के जज उनके पक्ष में फैसला सुनाएँ तो फिर उनकी आलोचना किसी कीमत पर नहीं की जानी चाहिए।

ऑपइंडिया एडिटर नुपूर शर्मा ने तृणमूल के साकेत गोखले की माँग पर कहा, “ऐसे समय में जब हमें अवमानना कार्रवाई को लेकर चिंतित होना चाहिए कि अगर एजी ने इस माँग को स्वीकार लिया तो क्या होगा। मैं ये पूरे विश्वास के साथ ये लिखती हूँ- हमने कुछ गलत नहीं कहा। हम अब भी अपने शब्दों पर कायम हैं।”

गौरतलब है कि जिन सवालों को उठाने पर ऑपइंडिया के विरुद्ध साकेत गोखले ने अवमानना का केस चलाने की माँग की है, वैसे ही सवाल दिल्ली हाईकोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस एसएन ढींगरा भी मीडिया में आकर उठाए हैं। उन्होंने साफ साफ सुप्रीम कोर्ट के जजों की टिप्पणी को न केवल गैर-जिम्मेदाराना कहा है, बल्कि उसे गैरकानूनी भी बताया है।

उन्होंने ये भी पूछा था कि अगर जजों की बातें जायज थीं तो आखिर लिखित आदेश में ये सब बातें क्यों नहीं कही गई। इसके अलावा एसएन ढींगरा ने ये भी कहा था कि अगर जजों को बिन प्रक्रिया को अपनाए किसी को दोषी देना है तो उन्हें बताना होगा कि उन्होंने ये कैसे कहा। अगर इसी तरह सुप्रीम कोर्ट के जज मौखिक टिप्पणी करके याचिकाकर्ता को दोषी बताते रहे तो ये कोर्ट का स्तर गिरना होगा।

इसके अलावा सामान्य यूजर्स भी सुप्रीम कोर्ट के जजों की टिप्पणियों पर सवाल पूछ रहे हैं। उन्हें दुख हो रहा है कि महिला गुहार लेकर गई कि उसे रेप कि धमकियाँ मिल रही है और बदले में उसके ऊपर इस्लामी कट्टरपंथियों के कृत्य का ठीकरा फोड़ दिया गया।

नोट: यह पूरा लेख ऑपइंडिया की एडिटर-इन-चीफ नुपूर शर्मा की प्रतिक्रिया पर आधारित है जिसे उन्होंने अंग्रेजी में लिखा है। आप उस पूरे लेख को इस लिंक पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं।