जम्मू कश्मीर के अनंतनाग में आतंकियों ने एक पुलिसकर्मी को अचानक से गोली मार दी। उसे गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है। ये घटना ऐसे समय में हुई है, जब अमरनाथ यात्रा के कारण पूरे जम्मू कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। ये घटना रविवार (3 जुलाई, 2022) को देर शाम बिजबेहांड़ा में हुई। टांग में गोली लगने के बाद पुलिसकर्मी को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ उसकी हालत गंभीर बनी हुई है।
इस घटना के तुरंत बाद भारतीय सेना, जम्मू कश्मीर पुलिस और CRPF के जवानों ने पूरे क्षेत्र को घेर कर सघन तलाशी अभियान चलाना शुरू कर दिया। अभी तक हमलावर आतंकियों के बारे में कुछ पता नहीं चला है और न ही किसी आतंकी संगठन ने इस घटना की जिम्मेदारी ली है। गोली लगने के बाद कॉन्स्टेबल फिरदौस अहमद सड़क पर ही गिर गए थे, जिसके बाद आतंकी उन्हें मरा हुआ समझ कर वहाँ से फरार हो गए।
#UPDATE | Today at about 1930 hrs, SgCt Firdous Ahmad was shot at by terrorists at his residential house at Hugam Srigufwara area of Anantnag. Police lodged a case. Investigation is in progress. Meanwhile, area has been cordoned off and search in the area is going on: J&K Police
दक्षिण कश्मीर जिले के श्रीगुफवाड़ा में शाम साढ़े 7 बजे हुई इस वारदात के बाद घायल पुलिस कॉन्स्टेबल को श्रीनगर के सैन्य अस्पताल में रेफर किया गया है। माना जा रहा है कि आतंकी ज्यादा दूर नहीं भागे होंगे, ऐसे में उन्हें पकड़ा जा सकता है। आज ही कश्मीर के रियासी जिले से ग्रामीणों ने लश्कर के दो खूँखार आतंकियों को पकड़ कर उन्हें पुलिस को सौंप दिया। उनमें से एक मोस्ट वॉन्टेड था। उनके पास से हथियार और बम भी मिले हैं।
महाराष्ट्र के अमरावती में केमिस्ट उमेश कोल्हे की हत्या में मुख्य साजिशकर्ता इरफान खान को गिरफ्तार करने के बाद आज (3 जुलाई 2022) अदालत ने 7 जुलाई तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया। उसकी गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने उसके पाकिस्तान से कनेक्शन को उजागर किया। वहीं उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी इशारा किया कि इस समय विदेशी ताकतें देश में तनाव बढ़ाने का काम कर रही हैं।
कोल्हे की हत्या का मुख्य साजिशकर्ता इरफान और उसकी NGO
पड़ताल में सामने आया कि स्कूल ड्रॉप आउट इरफान खान अमरावती में पाकिस्तान और अरब देशों से फंडिंग पाकर रहबरिया फाउंडेशन चलाता था और मुस्लिम समुदाय के गरीब लोगों को वक्त पड़ने पर एंबुलेंस की सर्विस देने का काम करता था। उसकी एनजीओ वाली हेल्पलाइन से 21 लोग जुड़े होने की खबर है। कथिततौर पर हत्या में शामिल में अन्य लोग भी इस एनजीओ से जुड़े थे।
उस पर आरोप है कि उसी ने उमेश कोल्हे की हत्या के लिए अन्य आरोपितों को उकसाया। इससे पहले फ्रांस के राष्ट्रपति इम्मैनुएल मैक्रों की कट्टरपंथियों के विरुद्ध टिप्पणी सुनने के बाद उसने फ्रांसिसी सामानों पर प्रतिबंध की माँग लगाई थी।
रुपए देकर करवाई हत्या, कोल्हे का दोस्त युसूफ ने भी दिया साथ
राष्ट्रीय जाँच एजेंसी ने इस मामले में अपनी एफआईआर दर्ज करके बताया कि देश के एक वर्ग को निशाना बनाने का प्लान है। जाँच के बाद अभी और खुलासे होंगे। टीवी 9 की रिपोर्ट यह बताती है कि हत्याकांड के मास्टरमाइंड शेख इरफान ने ही बाकी आरोपितों को 10-10 हजार रुपए का लालच देकर हत्याएँ करवाई।
इस मामले में अब तक इरफान के अलावा 7 गिरफ्तारी हो चुकी हैं। इनकी पहचान मुदस्सिर अहमद (22), शाहरूख पठान (25), अब्दुल तौफिक (24), शोएब खान (22), अतिब रशीद (22) और युसूफ खान बहादुर खान (44) के रूप में हुई है। इन लोगों के ऊपर ऊपर आईपीसी की धारा 302, 120 और 109 के तहत केस को दर्ज किया गया है।
मृतक के घरवालों ने केस को फास्ट ट्रैक कोर्ट में डालने को कहा है। मृतक के भाई ने यह भी बताया कि जिस आरोपित को पुलिस ने पकड़ा है उनमें से एक वेटनरी डॉक्टर यूसुफ है और उसकी उमेश कोल्हे से अच्छी दोस्ती थी। घरवाले उसे 2006-07 से जानते थे। युसूफ पर आरोप है कि उसी ने कोल्हे का पोस्ट संदिग्ध व्हॉट्सग्रुप में शेयर किया था।
विदेशी कनेक्शन पर बोले डिप्टी सीएम फडणवीस
उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि अमरावती में केमिस्ट की हत्या मामले में पूछा कि इस मामले में कोई बाहर का कनेक्शन है? उन्होंने कहा कि ऐसा ध्यान में आ रहा है कि देश में तनाव बढ़वाने के लिए कुछ विदेशी ताकतें प्रयास कर रही हैं। इन सब जाँच होगी। शुरुआत में केस को डकैती क्यों दिखाई गई, इसकी भी जाँच की जाएगी। डिप्टी सीएम ने अमरावती की घटना को गंभीर बताते हुए कहा कि ये घटना बर्बर है। बहुत क्रूरता से उमेश को मारा गया। आरोपितों को पकड़ा गया एनआईए जाँच कर रही हैं। बता दें कि पुलिस ने भी इस मामले में कहा है कि अभी तक 7 लोग गिरफ्तार हुए हैं लेकिन ये संख्या आगे बढ़ भी सकती है।
बिहार के सुपौल में शिक्षक जाकिर हुसैन ने 7वीं कक्षा की लड़की के साथ छेड़छाड़ किया। छात्रा ने परिजनों को सारा वाकया सुनाया, जिसके बाद वो उसे थाने लेकर गए और मामला दर्ज कराया। इसके बाद पुलिस ने आरोपित शिक्षक को गिरफ्तार कर लिया है। FIR दर्ज करने के बाद पुलिस मामले की जाँच कर रही है। मामला सरायगढ़ के लौकहा पंचायत का है। जाकिर हुसैन यहीं के मिडिल स्कूल में बतौर सहायक शिक्षक कार्यरत है।
ठाध्यक्ष राघव शरण ने इस मामले के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि छात्र के पिता के आवेदन के बाद आरोपित के खिलाफ केस दर्ज करते हुए उसे जेल भेज दिया गया है। ये घटना शनिवार (2 जुलाई, 2022) की है, जब जाकिर हुसैन ने राइटिंग दिखाने के बहाने छात्र को क्लासरूम के पीछे ले जाकर उसका यौन शोषण किया। स्कूल में छुट्टी के बाद पीड़िता ने घर जाकर परिवार को इस बात की जानकारी दी। परिजनों की शिकायत पर शिक्षक को पुलिस ने मौके से ही गिरफ्तार कर लिया।
छात्रा ने ये भी बताया कि जब वो शौच के लिए गई थी, तब पीछे-पीछे पहुँचे शिक्षक मोहम्मद जाकिर हुसैन ने उसके साथ गलत हरकत की। मामला भपटियाही थाना क्षेत्र का है, जहाँ की हाजत में पहले शिक्षक को ले जाकर बंद किया गया। मोहम्मद जाकिर हुसैन छात्रा के पीछे-पीछे उसके घर भी पहुँच गया था। तब वो आक्रोशित होकर अपने माता-पिता को उसकी हरकतों की जानकारी देने जा रही थी। लोगों ने नाबालिग छात्र से छेड़छाड़ के आरोपित की पिटाई भी की।
लोगों ने शिक्षक को घेर लिया था। जब ये घटना हुई, तब माध्यमिक विद्यालय के सभी शिक्षक परिसर में ही मौजूद थे।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा संरक्षित इमारतों की कितनी दुर्दशा है, यह बात किसी से छिपी हुई नहीं है। ऐसी ही बिहार के रोहतास में एक अति प्राचीन किला है रोहतासगढ़ का किला, जिसके रख-रखाव के अभाव यह दिन-ब-दिन जर्जर होता रहा है और यहाँ सुअर जैसे जीव घुमते नजर आते हैं। राजा मान सिंह के काल में अपने वैभव पर रहा यह दुर्ग आजकल कूड़े का ढेर और गंदगी का अंबार हो गया है।
कहा जाता है कि यह दुर्ग त्रेतायुग का है और इसे सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र के पुत्र रोहिताश्व ने बनवाया था। तो आइए इसके बारे में विस्तार से जानने की कोशिश करते हैं कि यह दुर्ग कितना प्राचीन और कितने महत्व का है। इससे जुड़ी किवदंतियाँ और रहस्यों की भी हम बात करेंगे।
बिहार के रोहतास जिले में एक पहाड़ी बना रोहतासगढ़ किला मध्यकाल में सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण और बनावट में बेहद भव्य रहा है। इस कारण इस पर आधिपत्य को लेकर लंबी लड़ाइयाँ लड़ी गईं। आधुनिक भारत में अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई में भी इसका खासा महत्व रहा है।
ऐतिहासिक एवं पौराणिक महत्व किला होने के बावजूद ASI ने इस किले को कभी विश्व धरोहर की सूची में शामिल कराने की कोशिश नहीं की। हालाँकि, जिस जिस ASI के अधिकार में यह गंदगी से मुक्त नहीं हो सका उससे विश्व धरोहर की सूची में शामिल कराने की उम्मीद करना बेमानी है।
लेकिन, इससे महत्वपूर्ण बात यह है कि कभी किले पर अपना प्रभुत्व रखने वाले शेरशाह सूरी इससे बेहद प्रभावित था। उसने वर्तमान पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में झेलम नदी के किनारे रोहतासगढ़ की हूबहू नकल करने की कोशिश करते हुए ‘रोहतास किला’ का निर्माण कराया था। इस किले को 1997 में पाकिस्तान सरकार की पहल से UNESCO की विश्व धरोहर की सूची में शामिल किया गया है।
सासाराम का इतिहास
बिहार के रोहतास में स्थित सासाराम के आसपास नवपाषाणकालीन मानव ने अपनी बस्तियाँ बसाकर कृषि तथा पशुपालन का शुरू किया था। इनमें सेनुवारगढ़, सकासगढ़, कोटागढ़, अनंत टिला प्रमुख हैं।
वाल्मीकि रामायण के बालकांड में कहा गया है कि सिद्धाश्रम कैमूर की तलहटी में स्थित सहसराम में था। यहाँ पर भगवान् विष्णु ने एक हजार वर्ष तक तपस्या की थी। इसी धरती पर महर्षि कश्यप और पत्नी अदिति के गर्भ से वामन अवतार हुआ था।
सासाराम में मगध सम्राट् अशोक ने अपना लघु शिलालेख लिखवाया था। इसी शहर में अपने कारोबार का विस्तार देने वाले रौनियार वैश्य हेमचंद्र उर्फ हेमू ने दिल्ली की गद्दी पर बैठकर भारत पर शासन किया था। हेमू ने दिल्ली की गद्दी पर बैठने के बाद विक्रमादित्य की उपाधि धारण की थी।
राजा हरिश्चंद्र के पुत्र रोहिताश्व ने बनवाया दुर्ग
कहा जाता है कि रोहतासगढ़ दुर्ग त्रेता युग में बना था। इसे अयोध्या के महाराजा त्रिशंकु के पौत्र और सत्यवादी सम्राट महाराजा हरिश्चंद्र के पुत्र रोहिताश्व ने बनवाया था। जैसे महाराजा भरत के नाम पर देश का नाम भारत पड़ा, वैसे ही महाराजा रोहिताश्व के नाम पर ही जिले का नाम रोहतास पड़ा है। इस किले का वर्णन कई प्राचीन हरिवंश पुराण एवं ब्रह्मांड पुराण सहित कई शास्त्रों एवं पुराणों में है।
लाखों वर्ष बितने के बाद इसके प्रमाण आज मौजूद नहीं है, लेकिन दुर्ग से संबंधित सबसे पुराना ऐतिहासिक ऐतिहासिक अभिलेख एक शिलालेख है, जो 7वीं शताब्दी का है। इस अभिलेख के अनुसार, उस समय रोहतास पर महाराजा शशांक देव गौड़ का शासन था।
बिहार में स्थित रोहतासगढ़ दुर्ग (फोटो साभार: wayfarexp)
इतिहासकार डॉ. श्याम सुंदर तिवारी के अनुसार, यहाँ से शशांक देव की मुहर का साँचा भी मिला था। कालांतर में इस पर खरवार वंश के क्षत्रियों का शासन रहा। बाद में यह अफगान शासक शेरशाह सूरी और बाद में जगदीशपुर के राजा वीर कुँवर सिंह के अधिकार में भी यह दुर्ग रहा।
विंध्य पर्वत श्रृंखला की कैमूर पहाड़ी पर रोहतासगढ़ दुर्ग स्थित है। यतह समुद्र तल से लगभग 1,500 फीट की ऊँचाई पर स्थित है। इस दुर्ग पर चढ़ाई करने में डेढ़ से दो घंटे का समय लगता है। 28 वर्गमील क्षेत्र में फैले इस दुर्ग में 83 दरवाजे हैं।
रोहतास गढ़ का किला काफी भव्य है। 28 वर्गमील क्षेत्र में फैले इस दुर्ग के कुल 83 दरवाजों में मुख्य चारा हैं। इनके नाम हैं- घोड़ाघाट, राजघाट, कठौतिया घाट व मेढ़ा घाट है। इनके प्रवेश द्वारों पर निर्मित हाथी, दरवाजों के बुर्ज, दीवारों पर पेंटिंग अद्भुत हैं। यह किसी के भी मन को मोह लेने में सक्षम हैं।
रोहितेश्वर महादेव का मंदिर (फोटो साभार: rohtasdictrict)
इस दुर्ग में रंगमहल, शीश महल, पंचमहल, खूंटा महल, आइना महल, रानी का झरोखा, राजा मानसिंह की कचहरी सहित कई इमारतें आज भी मौजूद हैं। परिसर इनके अलावा, कई और इमारतें हैं, जिनकी भव्यता देखकर अंदाजा, लगाया जा सकता है कि जब यह आबाद रहा होगा तो इसकी शान-ओ-शौकत कैसी रही होगी।
मंदिर में आदिकाल से स्थित हैं रोहितेश्वर महादेव
दुर्ग के उत्तर-पूर्व में एक मील के बारे में दो मंदिरों के खंडहर हैं। यहाँ 28 फीट के एक विशाल शिलाखंड पर रोहतेश्वर महादेव नाम का मंदिर है, जो भगवान शिव को समर्पित है। माना जाता है कि यह मंदिर राजा हरिश्चंद्र के समय से अस्तित्व में है। यह भी कहा जाता है कि रोहिताश्व इस मंदिर में पूजा करते थे।
मंदिर के गर्भगृह में स्थित रोहितेश्वर महादेव शिवलिंग (फोटो साभार: सोशल मीडिया)
इस मंदिर में शिखर नहीं है। इसमें एक मुख्य भवन और 84 सीढ़ियाँ बची हैं। समय के समय यह नष्ट हो गया। इसके पुख्ता प्रमाण नहीं हैं कि किन वजहों से यह नष्ट हुआ। हालाँकि, 625 ईस्वी में बंगाल के राजा शशांक देव गौड़ द्वारा मंदिर का जीर्णोद्धार कराने का प्रमाण मिलता है।
इन सीढ़ियों के कारण इस मंदिर को चौरासन मंदिर भी कहा जाता है। इसके अलावा, इसे रोहितासन मंदिर भी कहा जाता है। सावन के महीने में यहाँ भारी भीड़ लगती है। दूर-दराज के इलाकों से लोग यहाँ जल चढ़ाने के लिए आते हैं।
इस मंदिर के नीचे एक देवी मंदिर है। मंदिर निर्माण नागर शैली में होने के कारण इसके 7वीं सदी में जीर्णोद्धार के संकेत मिलते हैं। मंदिर रोहतासगढ़ किला क्षेत्र में होने के कारण पुरातत्व विभाग के अधीन है, लेकिन उसकी तरफ से किसी प्रकार का विकास कार्य नहीं किया गया है।
किला परिसर में राजा मान सिंह के बनवाए महल के करीब आधे किलोमीटर की दूरी पर पश्चिम दिशा में भगवान गणेश का खूबसूरत मंदिर स्थित है। इस मंदिर को राजपूताना शैली में बनवाया गया है।
खरवार क्षत्रिय के अधिकार में रहा किला
प्राप्त शिलालेखों के अनुसार, 12वीं सदी यहाँ खरवार राजवंश के राजा महानृपति प्रताप धवल देव का शासन था। उनका शासनकाल 1162 ईस्वी का माना जाता है। माँ तुतला भवानी में इससे संबंधित पहला शिलालेख प्राप्त हुआ था, जिसे तुतराही शिलालेख भी कहते हैं। इसके बाद माँ चाराचंडी धाम और तिलौथू के फुलवरिया में भी इसके शिलालेख मिले हैं।
इन शिलालेखों को अंग्रेज पुरातत्वविद फ्रांसिस बुकानन ने खोजा था। इसके कुछ अंश पढ़े गए हैं, हालाँकि इस शिलालेख को अभी पूरी तरह पढ़ा नहीं जा सका है। बुकानन ने इस किले से संबंधित कुछ अन्य रहस्यों के बारे में भी लिखा है।
कुछ इतिहासकारों के अनुसार, राजा धवल प्रताप के वंश से यह दुर्ग सम्राट पृथ्वीराज चौहान के हाथों में चला गया। उसके बाद 1494 ईस्वी में दिल्ली के सुल्तान सिकंदर लोधी का इस पर अधिकार हो गया। उसके बाद शालीवाहन क्षत्रियों के हाथ में इसका अधिकार आ गया। 1592 ईस्वी में बाबर ने इस किले पर अधिकार कर लिया। हालाँकि, यह लंबे समय तक उसके अधिकार में नहीं रहा और फिर इस पर खरवार वंश के क्षत्रियों का अधिकार हो गया।
मंत्री चूड़ामणि के सहयोग से शेरशाह ने दुर्ग कब्जाया
कहा जाता है कि साल 1539 में बक्सर के निकट चौसा के युद्ध में शेरशाह सूरी की बाबर के बेटे हुमायूँ के बीच युद्ध की स्थिति आ गई। शेरशाह सासाराम में ही पला-बढ़ा था और वह रोहतासगढ़ दुर्ग के सामरिक महत्व को समझता था। इसलिए हुमायूँ से युद्ध करने से पहले उसने इस पर कब्जा करने की सोची।
शेरशाह ने खरवार राजा नृपति के ब्राह्मण मंत्री चुड़ामणि को स्वर्ण मुद्राएँ और कई तरह का लालच देकर खुद में मिला। इसके बाद शेरशाह राजा नृपति के पास अपनी महिलाओं की सुरक्षा के लिए आश्रय माँगने गया, लेकिन राजा नृपति मुस्लिमों के छल को समझते थे। इसलिए उन्होंने इस आग्रह को अस्वीकार कर दिया। इसके बाद चूड़ामणि ने राजा को कई तरह की बातें समझाकर इसके लिए तैयार। हालाँकि, नृपति ने शर्त रखा कि सिर्फ महिलाएँ ही दुर्ग में आएँगी कोई पुरुष नहीं।
महाकवि जय शंकर प्रसाद ने ‘ममता’ में इस घटना का उल्लेख करते हुए लिखा है कि चुड़ामणि स्वर्ण मुद्राएँ लेकर अपनी इकलौती संतान और विधवा बेटी ममता के पास गया और उसे देने लगा, लेकिन ममता ने चुड़ामणि को धिक्कारते हुए उस रिश्वत को रखने से मना कर दिया। जब वह जान गई कि उसके पिता शेरशाह की मदद कर रहे हैं तो वह दुर्ग छोड़कर बौद्ध विहार में रहने लगी।
इधर शेरशाह ने पालकियों में महिलाओं के साथ अपने सैनिकों को भी भेज दिया। वह भी अंतिम पालकी में बैठा था, जबकि शुरू की पालकियों में वृद्ध महिलाएँ थीं। बीच के पालकियों में उसने सैनिकों को स्त्री वेश में बैठा रखा था।
रोहतासगढ़ दुर्ग में जब शेरशाह की महिलाओं की पालकियाँ आने लगीं, तो उनकी जाँच हुईं, जिनमें स्त्रियाँ दिखीं, लेकिन जब अंतिम पालकी रोहतासगढ़ दुर्ग में पहुँची तब शेरशाह के सैनिक हमला कर दुर्ग पर अधिकार कर लिए। कहा जाता है कि शेरशाह ने दुर्ग पर अधिकार करने के बाद चुड़ामणि की वहीं हत्या कर दी।
इतिहास में इस बात का भी जिक्र आता है कि चौसा के युद्ध में हारने के बाद हुमायूँ उसी ममता के पास छिपने के लिए पहुँचा। ममता जानती थी कि वह कोई मुगल है, लेकिन आश्रय देना धर्म समझकर उसे आश्रय दे दिया। बाद में जब हुमायूँ बादशाह बना तो उसने वृद्ध ममता की झोपड़ी की जगह घर बनवाने का आदेश दिया। मुगल सैनिकों ने घर बनवाकर टाँग दिया कि यहाँ कभी बादशाह ठहरे थे।
शेरशाह इस किले से बेहद प्रभावित हुआ। इसने इसकी पहरेदारी में 10,000 सैनिक तैनात किए गया था। कुछ इतिहासकार यह भी मानते हैं कि किले की चारदीवारी का निर्माण शेरशाह ने सुरक्षा के दृष्टिकोण से कराया था, ताकि कोई किले पर हमला न कर सके।
रोहतासगढ़ के शेरशाह इतना प्रभावित था कि उसने अपने शासनकाल में पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में ‘रोहतास किला’ से एक विशाल किला बनवाया। रोहतास किला दरअसल रोहतासगढ़ का नकल ही था।
मुगल शासन के अधीन रोहतासगढ़ दुर्ग
कालांतर में यह दुर्ग शेरशाह के हाथ से निकल कर फिर से मुगलों के हाथ में आ गया। साल 1588 में इस किले पर राजा मान सिंह ने अधिकार कर लिया। राजा मान सिंह ने इस किले में एक शानदार महल बनवाया, जो आज भी मौजूद है।
इसके साथ ही उन्होंने किला परिसर में आइना महल और किले के द्वार के रूप में हथिया पोल का निर्माण करवाया था। अकबर के समय में राजा मानसिंह बिहार-बंगाल का शासन यहीं से चलाते थे और यही उस समय के संयुक्त प्रदेश की राजधानी थी।
कहा जाता है कि अकबर के पोते और जहाँगीर के बेटे मुगल बादशाह शाहजहाँ इस किले में अपनी बेगम सहित इस किले में कुछ समय तक रहे थे। शाहजहाँ और अरजुमंद बानो (मुमताज़ महल) के छोटे बेटे मुराद का जन्म इसी किले में हुआ था। मुराद औरंगजेब का भाई था।
शाहजहाँ जब सम्राट शाहजहाँ बना तो उसने औरंगज़ेब के अधीन इख़लास ख़ान की कमान में इस किले को रखा। इस बाद में जब औरंगजेब बादशाह बना तो उसने देशभर में हिंदू मंदिरों के ध्वस्त करने के आदेश के दौरान इस दुर्ग के अंदर निर्मित अति प्राचीन मंदिरों को भी ध्वस्त करवा दिया था। औरंगजेब इस किले का उपयोग शाही परिवार के लोगों को नजरबंद करने के रूप में करता था।
अंग्रेजी शासन के कब्जे में दुर्ग का विध्वंस
सन 1764 में बक्सर की लड़ाई में मीर कासिम को हराकर अंग्रेजों ने किले को अपने कब्जे में ले लिया। उसके बाद 1774 ईस्वी में अंग्रेज कप्तान थॉमस गोडार्ड ने रोहतासगढ़ को अपने कब्जे में ले लिया और उसने किले के कई हिस्सों को तबाह कर दिया।
इसके बाद सन 1957 में स्वतंत्रता संग्राम की पहली लड़ाई के समय वीर कुँवर सिंह के छोटे भाई अमर सिंह ने इस पर अधिकार कर लिया और यही अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह का संचालन किया था। कालांतर में देश की आजादी के बाद यह किला अपनी वैभव के गर्त को ढो रहा है।
दुर्ग के दीवारों से निकलती है खून और रात में सुनाई देती हैं चीखें
सन 1807 में इस किले के सर्वेक्षण का दायित्व फ्रांसिस बुकानन को सौंपा गया। वह सन 1812 में रोहतास आया और कई शिलालेख और पुरातात्विक जानकारियाँ हासिल कीं। सन 1881-82 में बीडब्ल्यू गैरिक ने इस क्षेत्र का पुरातात्विक सर्वेक्षण किया। उस दौरान भी कई शिलालेख और ताम्रपत्र आदि प्राप्त हासिल हुए।
फ्रांसिस बुकानन ने लगभग 200 साल पहले इस दुर्ग की यात्रा की थी। इसके बारे में उसने अपने दस्तावेजों में जिक्र किया है। उसने लिखा है कि इस दुर्ग के दीवारों से खून निकलते हैं। किले के आसपास रहने वाले लोग भी इसे सच बताते हैं।
लोगों का कहना है कि बहुत पहले रात में इस किले से आवाजें भी आती थीं। लोगों का मानना है कि वो संभवत: राजा रोहिताश्व के आत्मा की आवाज थी। हालाँकि, यह रहस्य आज भी बरकरार है और लोगों के मन छिपा हुआ है।
राजस्थान के उदयपुर में कन्हैया लाल तेली का सिर कलम किए जाने के बाद वहाँ का पर्यटन उद्योग लड़खड़ा गया है। इस्लामी आतंकवाद की इस करतूत के बाद जिले की अर्थव्यवस्था को भी धक्का लगा है, क्योंकि कई लोग अब एडवांड होटल बुकिंग कैंसल कर रहे हैं। अगले 2 महीने में आने वाले लोगों में से आधे से भी अधिक ने अपनी बुकिंग्स रद्द कर दी हैं। पर्यटन ही इस शहर में अधिकतर लोगों की आजीविका का स्रोत है और लोगों को डर है कि आगे भविष्य में भी उन पर इसका असर पड़ सकता है।
सितंबर से उदयपुर में पर्यटन का बड़ा सीजन शुरू होता है, जिस पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। होटल एसोसिएशन ने कहा कि लोगों ने एडवांस बुकिंग रद्द करनी शुरू कर दी है। जुलाई-अगस्त में मॉनसून का मौसम देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग आने वाले थे, लेकिन मात्र एक सप्ताह में 50% से अधिक बुकिंग रद्द होने से होटल संघ सदमे में है। कोरोना के कारण जूझ रहे उद्योग को इस घटना से नई मार पड़ी है। मालदासी गली के पास ही ये हत्याकांड हुआ था, जहाँ लोग घूमने आते हैं।
हस्तशिल्प व्यापारियों का कारोबार भी ठप्प होने की कगार पर पहुँच गया है। उधर राजस्थान की राजधानी जयपुर में ‘सर्व समाज’ की तरफ से स्टेचू सर्किल पर हनुमान चालीसा का पाठ रखा गया और कन्हैया लाल को श्रद्धांजलि दी गई, जिसमें हजारों लोग जुटे। 2000 से अधिक पुलिसकर्मी यहाँ तैनात थे और ड्रोन कैमरों से नज़र रखी गई थी। वक्ताओं के भाषण भी पुलिस ने रिकॉर्ड किए। VHP ने कई धर्मगुरुओं को भी यहाँ बुलाया था और सामाजिक प्रतिनिधियों ने अपनी बात रखी।
— Santosh Chauhan Sudarshan News (@Santosh_Stv) July 3, 2022
उधर चूरू के सादुलपुर में कन्हैया लाल की हत्या के कारण ‘बाजार बंद’ रखने के ‘बजरंग दल’ के ऐलान के बाद संगठन के कार्यकर्ता प्रवीण कुमार को फोन पर जान से मार डालने की धमकी मिली, जिसके बाद उन्हें एक सुरक्षाकर्मी पुलिस ने उपलब्ध कराया। वो राजगढ़ तहसील के सरदारपुरा गाँव के रहने वाले हैं। फोन करने वाले ने पूछा कि बाजार क्यों बंद करवाया और गोली मारने की बात की। डेढ़ वर्ष पूर्व विहिप कार्यकर्ताओं को जान से मार डालने की धमकी मिली थी और पुलिस में परिवाद दायर किया गया था।
उदयपुर में कन्हैया लाल की हत्या से पहले जिस मौलाना नदीम ने राजस्थान में भड़काऊ बयानबाजी की थी, उसे गिरफ्तारी के बाद सिर्फ 24 घंटों में जमानत मिलने की खबर है। मीडिया रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि मुफ्ती नदीम अख्तर सकाफी के साथ मौलाना मोहम्मद आलम गौरी को भी बेल पर रिहा किया गया है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, CJM कोर्ट ने दोनों मौलानाओं को 2-2 लाख के निजी मुचलके और 1-1 लाख की जमानत पर रिहा करने का फैसला सुनाया। इस फैसले के आते ही उन समर्थकों ने जश्न भी मनाया जो मुफ्ती के गिरफ्तार होने का विरोध कर रहे थे जबकि हिंदुओं ने इस खबर को साझा करते हुए कहा कि ये तो अनुमानित था कि मुफ्ती को बेल मिल जाएगी।
As expected ?
Maulana Mufti Nadeem who threatened to gouge eyes and kill for speaking on Mohammad, released on Bail in 24 hours of arrest. pic.twitter.com/EsfoDgYhhr
— $ H @ K T ! ? ?? Proud Hindu.. (@my_fukin_sanity) July 2, 2022
24 घंटे में मुफ्ती नदीम को मिली बेल
बता दें कि मुफ्ती नदीम की गिरफ्तारी 1 जुलाई को शुक्रवार के दिन हुई थी। नदीम के ऊपर आरोप था कि उसने नुपूर शर्मा केस में भड़काऊ बयानबाजी की। उसके वीडियो कन्हैया लाल की हत्या के बाद सोशल मीडिया पर खूब शेयर हुए थे। इसी के बाद राजस्थान पुलिस ने भड़काऊ बयान देने के 28 दिन बाद उसे गिरफ्तार किया था। लेकिन अब इस केस में पता चला है कि कोर्ट से उसे जमानत मिल गई है, जिसे सुन हिंदू पूछ रहे हैं कि क्या गहलोत सरकार ने इसका विरोध तक नहीं किया
उल्लेखनीय है कि मुफ्ती नदीम ने पुलिस थाने के सामने राजस्थान पुलिस के सामने कहा था,
“अगर तुमने एक्शन नहीं लिया तो मुसलमान रिएक्शन देगा। ये कोई गुजारिश नहीं बल्कि चेतावनी है। पूरी दुनिया का मुसलमान उठेगा। ये न सिर्फ यहाँ का प्रशासन बल्कि पूरे देश की हुकूमत सुन ले। अगर उन्होंने (नूपुर शर्मा) ने जो बोला है, वो कानूनी तौर पर सही है तो हम ऐसे कानून के भी खिलाफ जाएँगे। इतिहास उठा कर देख लो कि जिस भी कौम के खिलाफ मुसलमानों ने रिएक्शन दिया है, उनके लिए जमीन छोटी पड़ गई है। वो जगह-जगह भागते फिरे और उनको जमीन का टुकड़ा भी नसीब नहीं हुआ।”
मुफ़्ती ने आगे कहा,
“हम अपने आका की शान में की गई गुस्ताखी का बदला लेना जानते हैं। मेरे नबी की शान में एक लफ्ज भी बोला तो याद रखो कि जुबान काट ली जाएगी। हाथ उठाओगे तो हाथ काट लिए जाएँगे। ऊँगली उठाओगे तो ऊँगली काट ली जाएगी। अगर निगाहें भी उठीं तो निकाल कर बाहर फेंक देंगे। उसके बाद चाहे हम पर लाठी बरसाना या हमें जेल भेज देना।”
उत्तर प्रदेश के कौशाम्बी स्थित सराय अकिल में ‘लव जिहाद’ का मामला सामने आया है। एक लापता हिन्दू युवती (अब बरामद) के बारे में पता चला है कि एक मुस्लिम युवक ने उसका इस्लामी धर्मांतरण करा दिया। इसके बाद उसने उसके साथ निकाह भी कर डाला। युवती के पिता ने ये आरोप लगाते हुए पुलिस की कार्रवाई पर सवाल खड़े किए। साथ ही ‘समाधान दिवस’ पर डीएम से भी शिकायत की। युवती असल में सोमवार (27 जून, 2022) को अपने घर से बाहर भाई के साथ निकली थी।
इसके बाद युवती ने स्कूटी अपने भाई को दे दी। साथ ही बताया कि वो अपने दादा के घर जा रही है। थोड़ी देर में लौटने की बात कर कर वो निकली थी। देर शाम तक जब वो नहीं लौटी तो घर वालो ने खोजबीन शुरू की। कोई सुराग न मिलने पर परिजनों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। इसी बीच उन्हें एक मुस्लिम युवक द्वारा लड़की को भगा ले जाने की बात पता चली। परिजनों ने इस सूचना की जानकारी पुलिस को भी दी। 29 जून को सैकड़ों लोगों के साथ उन्होंने कोतवाली का घेराव किया।
उनकी माँग थी कि नई सूचना मिलने के बाद विवेचना बदली जाए और युवती को बरामद किया जाए। पुलिस ने युवती के अपहरण का मामला दर्ज किया और वरिष्ठ अधिकारियों ने जाँच अधिकारी को भी बदल दिया। तत्पश्चात पुलिस ने युवती को बरामद करने में सफलता पाई। युवती को उसके परिजनों को सौंप दिया गया है। परिजनों के आरोप है कि उसे प्रयागराज के करेली स्थित एक मदरसे में ले जाकर उसका इस्लामी धर्मांतरण कराया गया और फिर वहीं निकाह करा दिया गया था।
कौशाम्बी- डान्स क्लास गई युवती के गायब होने से सनसनी,परिजनों ने मामले की पुलिस से की शिकायत,कार्रवाई न होने पर सैकड़ों लोगों ने थाने का किया घेराव,कौशाम्बी के सराय अकिल थाना क्षेत्र का मामला.
पीड़िता के पिता ने कहा कि धर्म परिवर्तन से पहले प्रशासन को प्रार्थना पत्र देना होता है, लेकिन यहाँ ऐसा नहीं किया गया। 30 जून को युवती को बरामद किया गया था। इसके बाद अदालत में उसका बयान भी दर्ज कराया गया। ‘समाधान दिवस’ के मौके पर पिता ने डीएम को शिकायती पत्र दिया, जिसके बाद मामला प्रकाश में आया। उत्तर प्रदेश में ‘लव जिहाद’ के खिलाफ कानून भी है। पुलिस अब आगे की कार्रवाई कर रही है।
भारतीय फिल्म निर्मात्री लीना मणिमेकलई की डॉक्यूमेंट्री ‘काली’ के जारी पोस्टर को हिन्दू धर्म पर आघात बता कर सोशल मीडिया में विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि पोस्टर को जारी कर के माँ काली का अपमान किया गया है। कई नेटीजेंस ने तो पुलिस और केंद्रीय गृह मंत्रालय को टैग करते हुए इसे बनाने वालों पर कार्रवाई की माँग की है। विवादित पोस्टर 2 जून 2022 (शनिवार) को रिलीज हुआ है।
इस पोस्टर पर मेरी आपत्ति है और मुझे ठेस पहुंची, मेरी भावनाओं को आहत किया गया है मैं @PMOIndia@HMOIndia@MIB_India@PIBHomeAffairs से प्रार्थना करता हूँ कि इस पर जरूरी कार्यवाही की जाए।
इसका पोस्टर खुद लीना ने शेयर किया है। इस विवादित पोस्टर में माँ काली के चार भुजाओं के प्रतिरूप में एक महिला को दिखाया गया है। माथे पर तिलक लगा हुआ है और हाथों में त्रिशूल व अन्य अस्त्र हैं। वहीं एक हाथ में सिगरेट है जो मुँह से लगी हुई है। वहीं दूसरे हाथ में LGBTQ का झंडा है। इस डॉक्यूमटरी में एसोसिएट प्रोडूसर और मेकअप आशा पोन्नाचन द्वारा, एडिटिंग श्रवण द्वारा, कैमरा फ़ातिन चौधरी व ऋषभ कालरा द्वारा, ऑडियोग्राफ़ी तपस नायक द्वारा, इमेज ग्रेडिंग राजा रंजन द्वारा किया गया है। विवादित डाक्यूमेंट्री बनाने में में तमिल आर्ट कलेक्टिव और क्वीन समर इंस्टिट्यूट द्वारा भी सहयोग किया गया है।
नेजिजेन्स ने उठाई कार्रवाई की माँग
हालाँकि इसे शेयर करते हुए लीना ने इसके लिए खुद को बेहद उत्साहित बताया लेकिन डाक्यूमेंट्री का पोस्टर जारी होते ही यह विवादों में आ गया। प्रमोद चौधरी ने लीना को जेल भेजने की माँग की है।
चित्र साभार- @PramodK78850573
वरुण ने लीना से पूछा, “क्या तुम में ऐसा पोस्टर अल्लाह के लिए बनाने की हिम्मत है? शायद तुम्हारा सिर कलम हो जाए। इसी के साथ वरुण ने #StopMockingHinduGods नाम से हैशटैग भी दिया।
चित्र साभार- @varunkarnik
रितिका ने प्रधानमंत्री और गृहमंत्री के कार्यालय को टैग कर के सवाल किया है कि क्या वो लीना पर एक्शन ले रहे हैं?
चित्र साभार- @RitikaWali
रणबीर ने लिखा, “हिंदू देवी देवताओं का अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान” और प्रधानमंत्री व गृहमंत्री कार्यालय को टैग करते हुए #ArrestLeenaManimekalai नाम का हैशटैग भी दिया।
चित्र साभार- @Mr_Ranveer2615
संतोष झा ने UP पुलिस, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को टैग करते हुए लिखा, “मैं देश के प्रधानमंत्री से निवेदन इसके खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाए। ये हमारी अराध्य माँ काली का अपमान कर रही है।”
चित्र साभार- @jhask299
इसके अलावा लीना के कमेंट में कई यूजर्स ने अपना विरोध अलग-अलग भाव से प्रकट किया है।
चित्र साभार- @LeenaManimekali कमेंट
मोहम्मद जुबेर की समर्थक हैं लीना
इस डॉक्यूमेंट्री को बनाने वाली लीना दिल्ली पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए मोहम्मद जुबेर की रिहाई के समर्थन में अभियान चला चुकी हैं। 28 जून, 2022 को उनके द्वारा किए गए एक ट्वीट में भाजपा द्वारा पूरे देश को एक जेल बना देने के प्रयास के आरोप के साथ मोहम्मद जुबेर की तत्काल रिहाई माँगी गई थी।
Is BJP building new prisons? Or the plan is to turn the entire country into one large prison? Waking up to arrests of journalists and human rights activists everyday is horror to the power infinity.
— Leena Manimekalai (@LeenaManimekali) June 27, 2022
इसी के साथ लीना ने मोहम्मद जुबेर की रिहाई या उनके समर्थन में हुए कई अन्य लोगों के ट्वीट को रीट्वीट भी किया है। गौरतलब है कि मोहम्मद जुबेर पर भी हिन्दू देवी देवताओं के अपमान के साथ संतों को हेट मोंगर्स बोलने के आरोप में FIR दर्ज हुई है।
उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले में 28 जून 2022 को रामसुख नाम के व्यक्ति की 21 साल की बेटी और 45 साल की पत्नी की धारदार हथियार से हत्या कर दी गई थी। हत्या के लिए लोहे की रॉड का भी प्रयोग किया गया था। अब पुलिस ने इस घटना का खुलासा करते हुए 2 जुलाई 2022 (शनिवार) को इरफान, सदान और शहबाज नाम के आरोपितों को गिफ्तार किया है। आरोपित इरफान ने गिरफ्तारी के दौरान पुलिस पर भी गोली चलाई जिसकी जवाबी कार्रवाई में इरफान के पैर पर भी गोली लगी और वो घायल हो गया।
सुल्तानपुर पुलिस के मुताबिक मामला जिले के लम्भुआ स्टेशन रोड का है। घटना के बाद धारा 302, 120 बी के तहत केस दर्ज किया गया था। जाँच के दौरान पुलिस ने पाया कि रामसुख की 45 वर्षीया मृतका पत्नी से आरोपित इरफान के निजी संबंध थे। इसका रामसुख और मृतका की बेटी विरोध किया करते थे। इसी विरोध के कारण इरफान ने 2 सप्ताह पहले ही अपने साथियों के साथ मृतका की बेटी की हत्या का प्लान बना चुका था। इसके लिए उसने लोहे की रॉड और चापड़ (धारदार हथियार) पहले ही खरीद लिया था।
थाना लम्भुआ क्षेत्र अन्तर्गत हुई मां ,बेटी की हत्या की घटना का अनावरण किया गया । pic.twitter.com/N1nu70c3ak
पुलिस प्रेसनोट में आगे कहा गया कि 28 जून 2022 को तीनों आरोपित रामसुख के घर में विरोध करने वालों की हत्या करने की नियति से घुसे। उस समय उन्हें रामसुख की 21 वर्षीया बेटी घर में अकेली दिखी। तीनों ने मिल कर उसे मार डाला। इस दौरान रामसुख की पत्नी भी वहाँ आ गई। आरोपितों ने उन्हें भी मार डाला। इसके बाद तीनों फरार हो गए। पुलिस मामले की पड़ताल करते हुए आरोपितों तक पहुँच गई और तीनों को गिरफ्तार कर लिया।
इरफान ने पुलिस पर भी किया हमला
पुलिस के मुताबिक 2 जुलाई को जब तीनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया तब इरफान से घटना में प्रयोग किए गए हथियार को बरामद और आरोपितों द्वारा पहने गए कपड़े बरामद करवाने के लिए कहा गया। इस पर इरफान पुलिस को अपने घर ले गया। इस दौरान उसने एक जगह पर छिपाए गए 315 बोर के तमंचे से पुलिस पर ही फायर कर दिया। गोली लगने से एक हेड कांस्टेबल शैलेन्द्र सिंह घायल हो गए। मौका देख कर इरफान भागने लगा। पुलिस ने आत्मरक्षा में फायरिंग की जो इरफान के पैर में लगी।
पुलिस ने अपने घायल हेड कांस्टेबल और आरोपित इरफान को अस्पताल पहुँचाया। दोनों की हालत फ़िलहाल स्थिर है। इरफान से माँ-बेटी की हत्या में प्रयोग हुई लोहे की रॉड, धारदार हथियार चापड़, खून से सने कपड़े और पुलिस पर हमले में प्रयोग हुआ 315 बोर तमंचा 1 जिन्दा और 3 खाली खोखे के साथ बरामद हुआ। IG रेंज अयोध्या ने यह बहादुरी भरा कार्य करने वाली पुलिस टीम को इनाम भी दिया है। इसी के साथ पुलिस के सीनियर अधिकारियों ने मृतक के परिजनों से मिल कर उन्हें सांत्वना भी दी।
राहुल गाँधी के छवि निर्माण में उनके समर्थक सोशल मीडिया पर अक्सर तरह-तरह के दावे करके उन्हें सर्वेश्रेष्ठ नेता बनाने का अभियान चलाते रहते हैं। हाल में ऐसा ही काम पत्रकार दीपक शर्मा ने भी किया। दीपक ने मनगढ़ंत दावा करते हुए बताया कि अमेरिकी थिंक टैंक RAND कॉर्पोरेशन ने कहा है कि टेक्नॉलिजी और पॉलिसी के क्षेत्र में राहुल गाँधी आज दक्षिण एशिया के सबसे अपेडेट नेता हैं। लेकिन फिर भी पीएम मोदी जनता को समझाते हैं कि वो पप्पू हैं। गजब का प्रचार तंत्र है।
अमेरिकी थिंक टैंक RAND Corporation ने कहा है कि टैक्नोलोजी और पॉलिसी के क्षेत्र में राहुल गॉंधी आज दक्षिण एशिया मे सबसे अपडेटेड नेता हैं।
लेकिन साहेब ने तो जनता को ये समझाया है कि वो तो पप्पू है।
दीपक द्वारा दी गई इस फर्जी जानकारी के बाद सोशल मीडिया पर विभिन्न प्रतिक्रियाएँ आ रही है। कुछ लोग राहुल गाँधी की ये तारीफ सुन फूले नहीं समा रहे। वहीं कुछ लोगों ने राहुल गाँधी की तारीफ करने वाले RAND कॉर्पोरेशन को ट्रेंड करवा दिया है।
अब इस हैशटैग को देख लोग अलग-अलग तरह के मीम शेयर कर रहे हैं। कुछ तो यही पूछ रहे हैं कि ऐसा क्या हो गया कि भारत में RAND शब्द ट्रेंड करवाना पड़ा। लेकिन कुछ हैं जो इसे मजे लेने का अवसर मान कर बता रहे हैं कि ये अब तक का सबसे अच्छा ट्रेंड है।
स्वर्णिम भारत नाम से ट्विटर यूजर तो दीपक शर्मा का ट्वीट देख इस हैशटैग में कहता है, “कितने बेवकूफ समर्थक हैं। खुद ही खुलासा कर रहे हैं कि इनके नेता को CIA से फंड पाने वाली RAND कॉर्पोरेशन से सराहना मिलती है। रूस की हार पर अधिकतर फेक न्यूज RAND कॉर्पोरेशन ने ही फैलाई थी।”
??Such moron supporters. He exposes that his leader is praised by CIA funded Rand Corporation. Majority of fake news about Russia losing the war was pushed by think tankers of RAND Corporation. https://t.co/EQZ1J0vBmq
— Sanjay Chauhan ?? (@singhsanjaychau) July 3, 2022
बता दें कि सोशल मीडिया पर चले इस ट्रेंड में कुछ लोग अभद्र ट्वीट करके कुछ महिलाओं को निशाना बना रहे हैं जिसे देख ऐसे हैशटैग की निंदा की जा रही है। ऑपइंडिया उन अश्लील और महिला विरोधी ट्विट्स का समर्थन नहीं करता।
वास्तविकता में जो हैशटैग ट्रेंड है RAND कॉर्पोरेशन के नाम पर शुरू हुआ है। विकीपीडिया पर उपलब्ध जानकारी के मुताबिक ये एक नॉन प्रॉफिट ग्लोबल थिंक टैंक हैं जिसे 1948 में डगलस एयरक्राफ्ट कंपनी द्वारा बनाया गया था ताकि ये अमेरिकी सशस्त्र बलों को अनुसंधान और विश्लेषण दे सकें। ये थिंक टैंक अमेरिकी सरकार द्वारा वित्त पोषित है। दीपक शर्मा का दावा है कि इसी ने राहुल गाँधी को अपडेटेड नेता कहा है। हालाँकि ऐसा कब और कहाँ हुआ इसके बारे में वह आपको अपने ट्वीट में नहीं बताते और खोजने पर भी यह जानकारी कहीं नहीं मिलती।