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3 साल से कर रहा था पीछा, घर में घुस लड़की को जलाया: 5 बार थाने पहुॅंची पर पुलिस ने नहीं सुनी

बिहार के मुजफ्फरपुर में बीते शनिवार को एक प्रॉपर्टी डीलर के बेटे ने एक लड़की के घर में घुसकर उसके साथ दुष्कर्म करने का प्रयास किया। लड़की के विरोध के कारण जब वह अपने मनसूबों में नाकाम रहा तो उसने लड़की पर केरोसिन डालकर उसे जला दिया। पूरे वाकये में लड़की 85% जल गई। इसके बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ फिलहाल वह कोमा में हैं। डॉक्टरों का कहना है कि पीड़िता की हालत गंभीर है और उसका बचना मुश्किल है।

पूरे मामले में लड़की के घरवालों की शिकायत के आधार पर आरोपित को पकड़ लिया गया है। उसकी पहचान राजा राय के रूप में हुई है। पीड़िता की माँ ने बताया कि आरोपित 3 साल से उनकी बेटी का पीछा कर रहा था। इस संबंध में 5 बार वे अहियापुर थाने में शिकायत दर्ज कराने भी गए थे, लेकिन पुलिस ने रिपोर्ट नहीं लिखी। छठ के दिन भी राजा ने घर में घुसकर उनकी बेटी से छेड़खानी की। बावजूद इसके पुलिस ने शिकायत नहीं दर्ज की। धीरे-धीरे लड़की के भीतर इतना खौफ बैठ गया था कि उसने कोचिंग जाना भी छोड़ दिया।

पीड़िता की माँ के मुताबिक जिस समय यह घटना घटी, उस समय तक वह नाइट ड्यूटी की वजह से साढ़े पांँच बजे कटरा पीएचसी चली गई थी और घर में छाेटी बेटी (पीड़िता) अकेली थी। इसी दाैरान आरोपित राजा उनके घर में घुसा और उसने उनकी बेटी के साथ मारपीट शुरू कर दी। माेहल्ले में ही रहने वाली दूसरी बेटी की बेटी (नातिन) ने उन्हें फोन करके मामले की जानकारी दी। मगर, रात हाे जाने के कारण कटरा से आने के लिए उन्हें काेई सवारी नहीं मिली। वो वापस आने के लिए कोई और साधन खोज पाती इससे पहले उनकी नातिन का दोबारा फोन आ गया। उसने बताया कि राजा ने उनकी बेटी को जला दिया।

घटना को अंजाम देने के बाद राजा खुद को निर्दोष साबित करने के लिए लड़की को एक निजी अस्पताल ले गया, ताकि लोगों को यकीन दिला सके कि इस घटना में उसका हाथ नहीं हैं। लड़की के घरवालों का कहना है कि इस मामले को दबाने के लिए उन पर दबाव बनाया जा रहा है। साथ ही पुलिस भी इसमें ढिलाई बरत रही है। उनके मुताबिक अस्पताल के इन्फाॅर्मेशन स्लिप को थाने में रात 10.05 मिनट पर रिसीव किया गया। शनिवार रात करीब 11 बजे अहियापुर थाने की पुलिस अस्पताल भी पहुँची।

पुलिसकर्मी भर्ती युवती को देख कर लौट गए। अगले दिन रविवार दोपहर 3:30 बजे तक युवती इसी अस्पताल में रही, लेकिन पुलिस दोबारा नहीं आई। मरीज को ट्रॉमा सेंटर से परिजन एसकेएमसीएच ले गए। फिर रात 8 बजे अहियापुर थाने की पुलिस ने युवती की माँ के बयान को दर्ज किया और जहाँ आईसीयू में पीड़िता ने भी मजिस्ट्रेट ललिता कुमारी के समक्ष बयान दिए।

घरवालों के अनुसार इस मामले में पुलिस की बड़ी लापरवाही एक बहुत बड़ा कारण है। लड़का तीन साल से छेड़खानी कर रहा था, अगर पुलिस द्वारा उसी समय एक्शन लिया जाता तो शायद ऐसा नहीं होता। इसके अलावा शिकायत के बाद भी पुलिस ने राजा के ख़िलाफ़ दर्ज एफआईआर में 307, व 326 और अपराध में कई लोगों की संलिप्तता की धारा 34 लगाई है। लेकिन धारा 376 को इसमें नहीं जोड़ा गया है।

इतना ही नहीं, पीड़िता के घरवालों का ये भी आरोप है कि पुलिस की तैनाती के बाद भी एक सफेदपोश आदमी लड़की के भाई और बहनोई से मिला। जहाँ उसने उन पर केस मैनेज करने का दबाव बनाया। हालाँकि, युवती के भाई ने उस सफेदपोश की तस्वीर ली और नगर डीएसपी रामनरेश पासवान को दिखाते हुए शिकायत की। लड़की के भाई का आरोप है कि वो आदमी उसकी बहन को दिलासा देने के बहाने आया था, लेकिन उनसे कहकर गया कि वे जिस परिवार से उलझे हैं, उससे बैर करना ठीक नहीं, इसलिए समझौता कर लेने में ही भलाई है।

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CAB पास होते ही खुशी से उछल पड़े पाकिस्तान से आए हिंदू शरणार्थी, लगाए मोदी जिंदाबाद के नारे

लोकसभा से नागरिकता संशोधन विधेयक पास हो चुका है। इसके साथ ही दिल्ली के मजनू का टीला इलाके में रह रहे पाकिस्तान से आए हिंदू शरणार्थियों में खुशी की लहर है। हिंदू शरणार्थियों को उम्मीद है कि बिल जल्द ही राज्यसभा से भी पास हो जाएगा और लंबे संघर्ष के बाद उन्हें नागरिकता मिल जाएगी। हिंदू शरणार्थियों ने नाच-गाकर और ढोल बजाकर जश्न मनाया।

मजनू का टीला में पाकिस्तान से आए हिन्दू शरणार्थियों की बस्ती है। सोमवार (दिसंबर 9, 2019) को लोकसभा में नागरिकता संशोधन बिल पास होने के बाद पाकिस्तान से आए हिंदू शरणार्थियों में खुशी की लहर दौड़ गई। दिल्ली में बसे पाकिस्तान से आए हिन्दू शरणार्थियों ने जमकर जश्न मनाया। इन लोगों ने पीएम नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह जिंदाबाद के नारे लगाए। ‘जय श्री राम’ के नारे भी लगाए।

इस दौरान शरणार्थियों की खुशी देखते ही बन रही थी। मजनू का टीला की शरणार्थियों की बस्ती में मिठाइयाँ बाँटी गई। घरों की दीवारों पर पीएम मोदी की तस्वीर लगी है। महिला,बच्चे और पुरुष सभी खासे उत्साह में नज़र आ रहे थे। पाकिस्तान में धार्मिक आधार पर भेदभाव का शिकार हुए ये पीड़ित शरणार्थी भारत के नागरिक बनने के लिए उत्सुक हैं।

पाकिस्तान से आए इन हिंदुओं को उम्मीद है कि जल्द ही उन्हें भारत की नागरिकता मिल जाएगी और उनकी शरणार्थी पहचान खत्म हो जाएगी। इनमें से ज्यादातर शरणार्थियों का कहना है कि पाकिस्तान में अपना घर छोड़ने का फैसला इनके लिए आसान नहीं था। लेकिन उनके पास कोई दूसरा रास्ता नहीं था। धार्मिक उन्माद के कारण इन पाकिस्तानी हिंदुओं को अपना देश छोड़ना पड़ा।

गौरतलब है कि लोकसभा में गहन चर्चा के बाद 80 के मुकाबले 311 मतों से नागरिकता संशोधन विधेयक को मंजूरी दे दी है, जिसमें पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से शरणार्थी के तौर पर 31 दिसंबर 2014 तक भारत आए उन गैर-मुस्लिमों को नागरिकता देने का प्रावधान है, जिन्हें धार्मिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ा हो। विधेयक के कानून बन जाने पर ऐसे शरणार्थियों को अवैध प्रवासी नहीं माना जाएगा।

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केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह द्वारा लोकसभा में नागरिकता संशोधन विधेयक पेश किए जाने से पहले, उस दौरान और अब आधी रात को वहाँ से पास होने के बाद से लेकर अब तक आम जनता के मन में इस विधेयक को लेकर जबरन भ्रम फैलाया जा रहा है। यह काम कर रहे हैं कुछ वामपंथी पत्रकार, कुछ मीडिया गिरोह और उनके चेले-चपाड़े। सोशल मीडिया पर ऐसे भ्रम तेजी से फैलते हैं और इसी का फायदा ये लोग उठा रहे हैं। इन धूर्त लोगों के जाल में आप न फँसे, इसलिए ऑपइंडिया ऐसे सभी सवालों को एक साथ जवाब सहित लेकर आया है, ताकि इनके प्रोपेगेंडा को शुरू होने से पहले ही धराशाई किया जा सके।

गृहमंत्री अमित शाह ने लोकसभा में नागरिकता संशोधन विधेयक को पेश करते हुए हर मुमकिन प्रयास किया कि वे सभी सवालों का जवाब दें लेकिन ओवैसी जैसे विपक्षी नेताओं के कारण पूरे सदन का माहौल गर्म रहा। इस बीच मीडिया गिरोह से जुड़े कुछ लोगों ने और धर्मनिरपेक्षता के नाम पर विधेयक का विरोध करने वाले वामपंथी तबके ने सोशल मीडिया पर लोगों में खूब भ्रम फैलाने की कोशिश की। अलग-अलग तर्क देकर इसके ख़िलाफ़ लोगों को बरगलाया गया।

लेकिन सवाल है कि क्या उन लोगों के तर्क उचित थे? क्या नागरिकता संशोधन विधेयक (CAB, कैब) पर विरोधियों द्वारा दर्शायी गई छवि वाकई इस विधेयक के उद्देश्यों का प्रतिबिंब थी? या ये सब केवल एक अजेंडा था, जिसे सेकुलरिज्म की आड़ में रचा-गढ़ा गया ताकि राष्ट्रहित में उठाए गए मोदी सरकार के कदम को जबरदस्ती ‘भगवा’ रूप दिया जा सके।

इन्हीं अनर्गल प्रयासों में निहित प्रोपगेंडा को तोड़ने के लिए हम नागरिकता संशोधन विधेयक संबंधित कुछ मूल सवालों के जवाब आपको बताने जा रहे हैं। ताकि सोशल मीडिया पर पसरे झूठ से देश का कोई नागरिक विचलित न हो और इस विधेयक को लेकर गलत समझ निर्मित न करे।

प्रश्न 1: क्या कैब के कानून बन जाने के बाद भारतीय मुस्लिमों को भारत छोड़ना पड़ेगा?
उत्तर- नहीं, ऐसा बिलकुल नहीं है। कैब केवल अवैध अप्रवासियों के ख़िलाफ़ काम करेगा।

प्रश्न 2: क्या कैब भारतीय मुस्लिमों के ख़िलाफ़ है?
उत्तर- नहीं। कैब भारत में रह रहे मुस्लिमों के ख़िलाफ़ नहीं हैं। ये केवल दूसरे देशों से आए अवैध प्रवासियों के ख़िलाफ़ है। गृहमंत्री ने इसे पेश करते हुए स्पष्ट कहा, “बिल से इस देश के किसी भी मुस्लिम का कोई लेना देना नहीं है। यहाँ का मुस्लिम सम्मान से जिएगा। मोदी के पीएम रहते हुए देश का संविधान ही हमारा धर्म है।”

प्रश्न 3: कैब का उद्देश्य केवल पाकिस्तान के हिंदुओं को नागरिकता देना है?
उत्तर- नहीं। इस विधेयक का उद्देश्य पड़ोसी देशों (पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान) में धार्मिक आधार पर सताए गए गैर-मुस्लिम शरणार्थियों को भारत की नागरिकता देना है। बिल में वहाँ रहने वाले अल्पसंख्यक धर्मों (हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, ईसाई तथा पारसी) के लोगों को कुछ शर्तों के साथ नागरिकता देने का प्रस्ताव किया गया है।

प्रश्न 4: क्या कैब संविधान के विरुद्ध है?
उत्तर- नहीं। कैब पूर्ण रूप से संविधान का अनुसरण करता है। इस विधेयक में संविधान का कोई अनुच्छेद या खण्ड कमजोर नहीं किया गया है, CAB को उसी तर्ज पर लागू किया गया है जैसे कि राष्ट्र के अल्पसंख्यकों को विशेष विशेषाधिकार दिए जाते हैं।

प्रश्न 5: क्या कैब में आर्टिकल 14 (समानता का अधिकार) का उल्लंघन हुआ है?
उत्तर- बिलकुल नहीं। कॉन्ग्रेस द्वारा ऐसा सवाल उठाए जाने पर स्वयं गृहमंत्री कल सदन में इसका जवाब दे चुके हैं। जहाँ उन्होंने दावा किया कि CAB से अल्पसंख्यकों पर कोई असर नहीं होगा। यह बिल अल्पसंख्यकों के खिलाफ नहीं है। अपनी बात को सिद्ध करने के लिए उन्होंने इंदिरा गाँधी द्वारा लिए फैसले का भी उदाहरण दिया। उन्होंने कहा, “ऐसा नहीं है कि पहली बार सरकार नागरिकता के लिए कुछ कर रही है। कुछ सदस्यों को लगता है कि समानता का आधार इससे आहत होता है। इंदिरा गांधी ने बांग्लादेश से आए लोगों को नागिरकता देने का निर्णय किया था। पाकिस्तान से आए लोगों को नागरिकता क्यों नहीं दी गई, आर्टिकल 14 की ही बात है तो केवल बांग्लादेश से आने वालों को क्यों नागरिकता दी गई।”

प्रश्न 6: कैब के अंतर्गत नागरिकता पाने वालों के लिए लिए डेडलाइन क्या है?
उत्तर- दिसंबर 2014। नागरिकता (संशोधन) विधेयक, 2019 के मुताबिक पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में धार्मिक उत्पीड़न की वजह से 31 दिसम्बर 2014 तक भारत आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के लोगों को अवैध शरणार्थी नहीं माना जाएगा। इन लोगों को भारतीय नागरिकता दी जाएगी।

प्रश्न 7: क्या ये विधेयक हिंदुओं का समर्थन करता है, मुस्लिमों का नहीं?
उत्तर- ऐसा बिलकुल भी नहीं है कि ये विधेयक केवल ‘हिंदुओं’ के मद्देनजर ही तैयार किया गया है। बहुत से श्रीलंका के तमिल हिंदू हैं, जो इसका विरोध कर रहे हैं। क्योंकि श्रीलंका में वे अल्पसंख्यक नहीं हैं। इसलिए ये कहना झूठ है कि धर्म के आधार पर मुस्लिमों को इसमें बाहर का रास्ता दिखाया गया है। ये विधेयक केवल पड़ोसी देशों में धर्म के नाम पर सताए अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने पर आधारित है।

प्रश्न 8: क्या किसी भी देश के हिंदू को भारतीय नागरिकता प्रदान की जाएगी और क्या किसी भी देश के मुस्लिम को भारतीय नागरिकता नहीं मिलेगी?
उत्तर- सबसे पहले तो ये जानना जरूरी है कि यह कानून सिर्फ़ पाकिस्तान, अफ्गानिस्तान, बांग्लादेश से आए अल्पसंख्यकों (धर्म के नाम पर सताए गए 6 समुदाय- हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, ईसाई तथा पारसी) के लिए लाया गया है। जिसके मुताबिक अन्य ‘किसी ‘भी देश के ‘हिंदू’ का अभी तक इस बिल से सरोकार नहीं है। और न ही, इन तीनों देशों में मुस्लिम अल्पसंख्यक हैं।

प्रश्न 9: क्या भारत से बाहर के कोई भी मुस्लिम यहाँ की नागरिकता ले सकते हैं?
उत्तर- बिल्कुल ले सकते हैं। इस मामले में केस-टू-केस बेसिस मतलब हर इंसान के आवेदन पर सुनवाई कर और जाँच-प्रक्रिया से गुजार कर उन्हें नागरिकता प्रदान की जाती है और आगे भी यही प्रक्रिया जारी रहेगी।

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मेक इन इंडिया बन रहा रेप इन इंडिया: अधीर रंजन चौधरी ने लोकसभा में फिर की बदजुबानी

अधीर रंजन चौधरी लोकसभा में कॉन्ग्रेस संसदीय दल के नेता हैं। मोदी सरकार को नीचा दिखाने की कोशिश में देश को शर्मसार करने वाले बयान वे कई बार दे चुके हैं। इसका सिलसिला इस लोकसभा के पहले ही सत्र में कश्मीर पर उनके विवादित बयान से शुरू हुआ था। इसी कड़ी में आज (मंगलवार, 10 दिसंबर 2019) उन्होंने लोकसभा में कहा कि भारत ‘मेक इन इंडिया’ से ‘रेप इन इंडिया’ की तरफ़ बढ़ रहा है।

उन्होंने कहा, “यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि प्रधानमंत्री, जो हर मुद्दे पर बोलते रहते हैं, इस मुद्दे (महिलाओं के साथ अपराध) पर शांत हैं। ‘मेक इन इंडिया’ से भारत धीरे-धीरे ‘रेप इन इंडिया’ की तरफ़ बढ़ रहा है।” जैसा कि कोई भी अंदाज़ा लगा सकता है, चौधरी का यह बेतुका बयान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ही निशाना बनाने के चक्कर में निकला है

अधीर रंजन चौधरी यह भूल गए कि इसी फेर में पिछले दिनों वे वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से माफ़ी माँगने पर मजबूर हुए थे। उन्होंने वित्त मंत्री के नाम को तोड़ते-मरोड़ते हुए उन्हें “निर्बला” कहा था। इसके बाद चारों ओर से आलोचनाओं में घिरने के बाद उन्हें कहना पड़ा था, “निर्मला जी मेरी बहन जैसी हैं और मैं उनके भाई की तरह हूँ।”

अधीर रंजन चौधरी का बयान अरुचिपूर्ण तो है ही तथ्यों और आँकड़ों के आलोक में भी कहीं नहीं टिकता। जिस भारत को वो ‘रेप इन इंडिया’ बता रहे हैं, वह एक सालाना सर्वे में 117 देशों में बलात्कार के मामलों में 94वें नंबर पर है। सर्वे के अनुसार भारत में जहाँ 10 लाख में केवल 18 महिलाओं के साथ बलात्कार की घटना सामने आती है, वहीं इस सर्वे की चोटी पर काबिज़ दक्षिण अफ़्रीका में 10 लाख पर यही आँकड़ा 1324 का है।

यही नहीं, बड़े और वैश्विक पटल पर प्रभावशाली देशों में भारत में पुरुषों को अदालत में सज़ा मिलने की दर दुनिया में कदाचित सबसे अधिक है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के आँकड़ों के अनुसार भारत में बलात्कार दोष सिद्धि दर (रेप कन्विक्शन रेट) 32 से 35% है, जिसे हमेशा भारत को नीचा देखने की कोशिश में लगे रहने वाला बीबीसी भी दुनिया में सबसे अधिक में गिनने पर मजबूर होता है। इसका अर्थ यह है कि अगर 100 महिलाएँ अपने साथ बलात्कार का मुकदमा दायर करेंगी, तो भारत में 35% मामलों में अदालतें महिला के आरोप को सही ठहराते हुए पुरुष को बलात्कारी मानते हुए सजा देंगी। वहीं अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी और रूस में यही दर क्रमशः 1.5%, 3.3%, 8% और 2.7% है।

यानी, अधीर रंजन चौधरी का बयान न उनके पद और पार्टी की गरिमा के अनुरूप है और न ही आँकड़ों के आधार पर इसे किसी भी तरह से जायज़ ठहराया जा सकता है। यह केवल हर बात में प्रधानमंत्री मोदी को घसीटने, नीचा दिखाने और उन पर (या उनके कार्यक्रमों पर) कीचड़ उछालने की कोशिश है।

नरेंद्र मोदी-अमित शाह खुद घुसपैठिए हैं, घर गुजरात है और आ गए दिल्ली: कॉन्ग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी

चिदंबरम का क्या बड़ा हो गया है? अधीर रंजन ने प्रयोग किया ‘लीगल शब्द’ तो सोशल मीडिया ने पूछे सवाल

कॉन्ग्रेस नेता संसद में हुए ‘अधीर’: PM मोदी और अभिनंदन पर की आपत्तिजनक टिप्पणी

कॉन्ग्रेस ने फारूक अब्‍दुल्‍ला के पिता को 11 साल जेल में रखा, हम वैसा नहीं करेंगे: अमित शाह

लोकसभा में मंगलवार (दिसंबर 10, 2019) को प्रश्नकाल के दौरान जम्मू-कश्मीर के ताजा हालात का मुद्दा उठाया गया। विपक्ष ने सरकार को घेरने की कोशिश करते हुए जमकर हंगामा किया। कॉन्ग्रेस संसदीय दल के नेता अधीर रंजन चौधरी ने पूछा कि हिरासत में लिए गए नेताओं को कब छोड़ा जाएगा? वहाँ की स्थिति कब सामान्य होगी?

जवाब में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने याद दिलाया कि आज फारूक अब्दुल्ला के हिरासत पर चिंता जताने वाली कॉन्ग्रेस ने उनके पिता शेख अब्दुल्ला को 11 साल जेल में रखा था। साथ ही कहा कि मौजूदा सरकार का ऐसा कोई इरादा नहीं है। सही समय आते ही इनकी रिहाई हो जाएगी।

शाह ने कहा, “हम जम्मू-कश्मीर के राजनेताओं को एक अतिरिक्त दिन भी जेल में नहीं रखना चाहते। जब प्रशासन को लगेगा कि सही समय आ गया है, राजनीतिक नेताओं को रिहा कर दिया जाएगा। फारूक अब्दुल्ला के पिता को कांग्रेस ने 11 साल जेल में रखा था। हम उनका अनुसरण नहीं करना चाहते। जैसे ही प्रशासन तय करेगा, उन्हें छोड़ दिया जाएगा।”

वहीं जम्मू-कश्मीर के हालात पर अधीर रंजन को जवाब देते हुए कहा, “वहाँ पर हालात सामान्य है। मैं कॉन्ग्रेस की स्थिति को सामान्य नहीं बना सकता, क्योंकि उसने अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के बाद खून-खराबे की भविष्यवाणी की थी। मगर उस तरह का कुछ नहीं हुआ, एक गोली नहीं चली।”

साथ ही गृह मंत्री ने कहा, “आर्टिकल 370 हटने के बाद कश्मीर में 99.5 प्रतिशत छात्रों ने परीक्षा में हिस्सा लिया। 7 लाख मरीजों का इलाज किया गया। सभी थाने सही से काम कर रहे हैं। धारा 144 भी हटा ली गई है। लेकिन अधीर जी के लिए केवल सामान्य स्थिति का पैरामीटर राजनीतिक गतिविधि है। स्थानीय निकाय चुनावों का क्या?”

फारूक अब्दुल्ला को सुप्रीम झटका: हिरासत के खिलाफ याचिका खारिज, जज ने कहा- इसमें विचार करने को कुछ भी नहीं

शेख अब्दुल्ला ने लकड़ी तस्करों के लिए बनाया कानून, फॅंस गए बेटे फारूक अब्दुल्ला

J&K: हिरासत में हॉलीवुड मूवी देख रहे उमर अब्दुल्ला तो महबूबा मुफ़्ती पढ़ रहीं किताबें

CAB पर बौखलाए इमरान खान: कहा- RSS के हिंदू राष्ट्र का एजेंडा लागू कर रही फासीवादी मोदी सरकार

जम्मू-कश्मीर से अनुच्‍छेद 370 हटाए जाने का रोना रोने वाले पाकिस्‍तान ने नागरिकता संशोधन विधेयक पर भी अपनी आपत्ति दर्ज की है। इस विधेयक को उसने भेदभावपूर्ण कानून करार दिया है। पाकिस्‍तान ने कहा कि यह दोनों पड़ोसियों के बीच विभिन्‍न द्विपक्षीय समझौतों का भी पूर्ण उल्‍लंघन है। खासकर संबंधित देशों में अल्‍पसंख्‍यकों की सुरक्षा और अधिकारों से जुड़ा मामला है।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने ट्वीट कर मोदी सरकार और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर निशाना साधा है। इमरान ने आरोप लगाया कि ये बिल दोनों देशों के बीच हुए समझौते के खिलाफ है। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान ने ट्वीट कर लिखा, “भारत की लोकसभा द्वारा जो नागरिकता बिल पास किया गया है, उसका हम विरोध करते हैं। ये कानून पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय समझौते और मानवाधिकार कानून का उल्लंघन करता है। ये आरएसएस के हिंदू राष्ट्र का एजेंडा है जिसे अब फासीवादी मोदी सरकार लागू कर रही है।”

पाकिस्‍तान के विदेश कार्यालय ने अपने बयान में कहा है कि भारत का यह नवीनतम कानून धर्म और विश्‍वास पर आधार‍ित है। यह कानून अंतरराष्‍ट्रीय कानून एवं मानवाधिकारों का सरासर उल्‍लंघन है। पाकिस्‍तान ने कहा कि इस कानून ने एक बार फिर भारतीय धर्मनिरपेक्षता और लोकतंत्र के दावों के खोखलेपन को उजागर किया है।  

बयान में आगे कहा गया है कि लोकसभा द्वारा पारित नागरिकता से जुड़े संशोधित बिल में पाकिस्तान और दो अन्य दक्षिण एशियाई देशों के मुस्लिमों को छोड़कर सभी धर्मों के शरणार्थियों को नागरिकता देने का प्रावधान करता है जो कि पूरी तरह गलत है। यह धर्म के आधार पर भेदभाव का विरोध करने वाले तमाम अंतरराष्ट्रीय समझौतों का उल्लंघन है।

अब इमरान खान अपने ट्वीट के लिए ट्रोल भी हो रहे हैं। ट्विटर यूजर उन्हें तरह-तरह के सुझाव के साथ ही आपत्तिजनक बातें भी कह रहे हैं। हालाँकि हम यहाँ पर आपत्तिजनक बातों को नहीं लिख सकते हैं। लेकिन ट्विटर यूजर द्वारा दिए गए कुछ प्रतिक्रियाओं का हम यहाँ पर जिक्र कर रहे हैं।

बीजेपी नेता कपिल मिश्रा ने इमरान खान के ट्वीट पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, “भारत में डर महसूस करने वालों के लिए पाकिस्तान को भी इसी तरह का बिल लाना चाहिए।”

इमरान खान द्वारा नागरिकता संशोधन विधेयक को पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय समझौते का उल्लंघन बताने पर निशाना साधते हुए यशवंत देशमुख ने लिखा, “भाई कन्फर्म करो, वापस आने का मूड नहीं तो बन गया है खान साहब का? आश्चर्य होगा कि अगर वे “अखंड भारत” की अवधारणा को आरएसएस की तुलना में अधिक गंभीरता से ले रहे हैं।”

वहीं प्रतीक जैन नाम के एक यूजर ने लिखा, “जब-जब भारत में ऐतिहासिक बिल पास होता है, पाकिस्तान ज़रूर रोता है यानी सही हुआ है।” एक ने लिखा, “अरे बेवकूफ, अगर तुम लोग अपने अल्पसंख्यकों को ठीक से रखते, तो ये बिल की जरूरत ही नहीं पड़ती।” वहीं एक यूजर ने उन्हें उनके देश में हो रहे जबरन धर्मांतरण को रोकने और इंसानियत बचाने की सलाह दी है।

एक ने उन्हें दाऊद इब्राहिम और मुल्ला उमर के परिवार को सँभालने के साथ ही रोटी-नान और टमाटर के बारे में चिंता करने के लिए कहा है। उनका कहना है कि अगर वो ऐसा नहीं करेंगे तो पाकिस्तान में अगला युद्ध रोटी के लिए ही होगा। इसके अलावा एक यूजर ने लिखा, “इंडिया में कुछ भी होता है, इनकी चलती जरूर है।”

बता दें कि भारत सरकार जो नागरिकता संशोधन बिल लाई है, उसके तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आने वाले हिंदू, बौद्ध, जैन, पारसी, सिख, ईसाई शरणार्थियों को भारत की नागरिकता मिलने में आसानी होगी। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की ओर से कहा गया है कि पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान कानूनन इस्लामी देश हैं। वहाँ के मुस्लिम अल्पसंख्यक नहीं हैं। इसलिए उन्हें इस बिल में शामिल नहीं किया गया है।

वैसे ऐसा पहली बार नहीं है जब पाकिस्तान की ओर से भारत के किसी फैसले पर इस प्रकार की आपत्ति हुई है। नागरिकता संशोधन बिल से पहले भारत की संसद ने अनुच्छेद 370 को हटाने का फैसला किया था, तब भी पाकिस्तान को आपत्ति हुई थी। पाकिस्तान ने अनुच्छेद 370 के मसले को अमेरिका, संयुक्त राष्ट्र तक उठाया था, हालाँकि कूटनीतिक मोर्चे पर पाकिस्तान को हर जगह मुँह की ही खानी पड़ी थी।

निर्भया के हत्यारों को फाँसी देने का तख्त तैयार: 100 किलो की डमी के साथ ‘लटकाने’ का ट्रायल शुरू

निर्भया गैंगरेप केस के चारों दोषियों को फाँसी पर लटकाने की तैयारी शुरू हो चुकी है। बताया जा रहा है कि 16 दिसंबर को फाँसी दी जा सकती है। इसलिए तिहाड़ जेल प्रशासन ने तख्त तैयार करके एक डमी का ट्रायल किया है। हालाँकि अभी तक फाँसी देने को लेकर जेल प्रशासन के पास कोई लेटर नहीं आया है।

सात साल पहले 16 दिसंबर 2012 को निर्भया के साथ छह दरिंदों ने चलती बस में गैंगरेप किया था। 6 में से एक दोषी नाबालिग था, जो जुवेनाइल एक्ट के तहत अब छूट चुका है। वहीं एक आरोपित रामसिंह ने तिहाड़ में ही आत्महत्या कर ली थी। खबरों के अनुसार बाकी बचे इन चार दरिंदों को भी 16 दिसंबर को ही फाँसी के फंदे पर लटकाया जा सकता है। इसके लिए जेल प्रशासन तैयारी में जुट चुका है और तिहाड़ जेल प्रशासन ने अपनी तैयारियों का जायजा लेने के लिए एक डमी में 100 किलो बालू-रेत भरकर ट्रायल किया। डमी को एक घंटे तक फाँसी के तख्ते पर लटकाए रखा गया।

इसका मकसद यह था कि अगर दोषियों को फाँसी दी जाती है तो कहीं फाँसी देने वाली वो स्पेशल रस्सी इनके वजन से टूट तो नहीं जाएगी। दरअसल जेल प्रशासन फाँसी देते वक्त कोई रिस्क नहीं लेना चाहता है। इसलिए पहले से ही तैयारी दुरूस्त की जा रही है। जेल प्रशासन इसलिए भी चौकन्ना है, क्योंकि 9 फरवरी, 2013 को जब संसद हमले के दोषी आतंकवादी अफजल को फाँसी पर लटकाया गया था, तब उससे पहले भी उसके वजन की डमी को फाँसी देकर ट्रायल किया गया था। उस ट्रायल में रस्सी टूट गई थी। चूँकि इस बार मामला चार कैदियों का है, इसी वजह से जेल प्रशासन फाँसी देते वक्त कोई रिस्क नहीं लेना चाहता।

बता दें कि मंडोली जेल से एक आरोपित विनय शर्मा को तिहाड़ जेल शिफ्ट किया गया है। जबकि तीन दोषी मुकेश, पवन और अक्षय पहले से ही तिहाड़ में बंद हैं। जघन्य अपराध के जुर्म में चारों को निचली अदालत ने फाँसी की सजा सुनाई थी, जिसे ऊपरी अदालतों ने भी कायम रखा था।  

चारों दोषियों को फाँसी के फंदे पर लटकाने के लिए गंगा नदी के किनारे स्थित बक्सर सेंट्रल जेल से रस्सियाँ मँगवाई जा रही है। बक्सर जेल के सुप्रिटेंडेंट विजय कुमार अरोड़ा ने कहा कि उनके सीनियर ने 10 रस्सियाँ तैयार करने के लिए कहा है। जिसके बाद बक्सर जेल में बंद कुछ अपराधी आजकल ओवरटाइम काम कर रहे हैं। दिल्ली निर्भया गैंगरेप व हत्या के गुनहगारों को फाँसी के फंदे पर चढ़ाने के लिए इन्हीं रस्सियों का इस्तेमाल किया जाएगा। बक्सर सेंट्रल जेल इस मामले में हमेशा से आगे बढ़ कर पहल करता रहा है। फ़रवरी 9, 2013 को जब आतंकी अफजल गुरू फाँसी के फंदे पर झूला था, तब तिहाड़ जेल ने बक्सर जेल से ही रस्सियाँ मँगाई थीं।

वहीं तिहाड़ जेल के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि ऐसा नहीं है कि फाँसी देने के लिए सारी रस्सी बक्सर से ही मँगाई जाएँगी। हमारे पास पाँच रस्सी अभी भी हैं। लेकिन हम बक्सर प्रशासन से संपर्क कर रहे हैं। इन्हें जल्द मँगा लिया जाएगा। क्योंकि अगर इन चारों को फाँसी दी जाती है तो तिहाड़ जेल के पास जो पाँच रस्सियाँ हैं। वह कम पड़ जाएँगी। इनमें से एक-दो रस्सी से ट्रायल भी किया जाना है।

गौरतलब है कि निर्भया के परिवार की ओर से भी माँग की गई थी कि उनकी बेटी के मामले को सात साल से अधिक हो गया है लेकिन अभी तक इंसाफ नहीं हुआ है। निर्भया की माँ की मांग थी कि दोषियों को तुरंत फाँसी दी जाए।

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इसी मजहबी उन्माद में जला था भोला, 8-70 साल की 200 हिंदू महिलाओं से हुआ था रेप

नागरिकता संशोधन कानून यानी CAA के विरोध में जिस तरह का मजहबी उन्माद, हिंसा और नारे सुनाई पड़ रहे हैं, ऐसे ही हालात में पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के साथ बर्बर घटनाओं को अंजाम दिया जाता है। ऐसी ही एक घटना में 8-70 साल की करीब 200 हिंदू म​हिलाओं से रेप हुआ था। उस मजहबी उन्माद को सत्ता का संरक्षण भी हासिल था। इस घटना का जिक्र 9 दिसंबर को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में भी किया था।

नागरिकता संशोधन विधेयक पर 9 दिसंबर को लोकसभा ने मुहर लगाई थी। विधेयक के पक्ष में 311 और विरोध में 80 वोट पड़े। यह विधेयक पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आने वाले हिंदू, जैन, सिख, बौद्ध, पारसी और ईसाई समुदाय के शरणार्थियों को नागरिकता का मार्ग प्रशस्त करने के लिए लाया गया था। अब यह कानून बन चुका है।

लोकसभा में इस बिल पर हुई बहस का जवाब देते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आँकड़ों के जरिए बताया कि कैसे यह बिल लाखों-करोड़ों लोगों को यातना से मुक्ति दिलाएगा। उन्होंने कहा कि 1947 में पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की आबादी 23 फीसदी थी, जो 2011 में 3.7 फीसदी रह गई। बांग्लादेश में 1947 में 22 फीसदी अल्पसंख्यक थे, जो 2011 में घटकर 7.8 फीसदी हो गए। उन्होंने पूछा, आखिर ये लोग कहाँ चले गए? इसी दौरान शाह ने भोला का जिक्र किया और कहा- भोला में एक सुनियोजित हमले में 200 अल्पसंख्यक महिलाओं के साथ बलात्कार किया गया।

जिस भोला में हिंदुओं के साथ इतने बड़े पैमाने पर बर्बरता हुई वह धार्मिक अल्पसंख्यकों पर अत्याचार के लिए कुख्यात पाकिस्तान में नहीं है। यह पाकिस्तान से टूट कर बने बांग्लादेश में है। शाह जिस घटना का जिक्र कर रहे थे वह 2001 की है। जब बांग्लादेश के आम चुनावों में जीत के बाद बांग्लादेश नेशनल पार्टी (BNP) और जमात-ए-इस्लामी के कार्यकर्ताओं ने पूरे देश में हिंदुओं पर कहर ढा दिया था। सुनियोजित तरीके से हिंदुओं को निशाना बनाया गया। खासकर, बागेरहाट, बारिसल, भोला, बोगरा, ब्राह्मणबारिया, चिटगॉंव, फेनी, गाजीपुर, जेसोर, खुलना, मुंशीगंज, नारायणगंज, सिराजगंज जैसे जिलों में।

अक्टूबर 2001 में भोला के लालमोहन उपजिला में हिंदुओं के घर पर हमला हुआ। महिलाओं और बच्चों के साथ रेप किया गया। हमलावरों ने घर का हरेक समान लूट लिया। यहाँ तक कि हिंदुओं के पेड़ तक काट दिए गए। विकिपीडिया के अनुसार भोला के चर फासून (Char Fasson) उपजिला में करीब 200 हिंदू महिलाओं के साथ बीएनपी कार्यकर्ताओं ने बलात्कार किया। सबसे कम उम्र की पीड़िता 8 साल की तो सबसे बुजुर्ग 70 साल की थी।

एशियन ट्रिब्यून की रिपोर्ट का अंश

बांग्लादेश के दक्षिणी-मध्य हिस्से में पड़ने वाला भोला देश का सबसे बड़ा द्वीप है। इसके दक्षिण में बंगाल की खाड़ी है। 2011 की जनगणना के अनुसार इस जिले की आबादी करीब 20 लाख है। करीब 96 फीसदी आबादी समुदाय विशेष की है। हिंदू 4.24 फीसदी हैं। भोला में 2001 ही नहीं, 1992 में भी हिंदुओं को चुन-चुन कर निशाना बनाया गया था। इस साल अक्टूबर में भी यह जिला इसी वजह से सुर्खियों में था। बिप्लव चंद्र नामक एक हिंदू का फेसबुक अकाउंट हैक कर पहले तो ईश निंदा का पोस्ट किया गया फिर समुदाय विशेष ने इसके बहाने जमकर उत्पात मचाया। ढाका ट्रिब्यून की खबर के अनुसार बिप्लव 18 अक्टूबर को थाने में अपना फेसबुक अकाउंट हैक करने की शिकायत लेकर पहुॅंचा। जिस वक्त वह शिकायत दर्ज करवा रहा था उसी दौरान उसके पास हैकर्स का फोन आया और उन्होंने उससे रुपयों की मॉंग की। द डेली स्टार की रिपोर्ट के अनुसार इस पोस्ट के बहाने 20 अक्टूबर को मजहब विशेष ने भोला के बोहरानुद्दीन उपजिला में हिंदुओं के 12 घरों को आग के हवाले कर दिया। इसके बाद डर के मारे भोला के हिंदुओं ने काफी समय तक घर से निकलना बंद कर दिया था।

मंदिरों पर हमलों का सिलसिला भी पुराना है, साभार: बांग्लादेश माइनॉरिटी काउंसिल, 2017 की रिपोर्ट

बांग्लादेश माइनॉरिटी काउंसिल, 2017 की रिपोर्ट

बांग्लादेश माइनॉरिटी काउंसिल की पूरी रिपोर्ट पढ़ने के लिए क्लिक करें

आज भोला में हिंदुओं की संख्या कुछेक हजार ही है। लेकिन, द डेली स्टार की इसी साल की अक्टूबर की रिपोर्ट में बांग्लादेश हिंदू बौद्ध क्रि​श्चयन ओइकिया परिषद के भोला चैप्टर के अध्यक्ष अबिनाश नंदी के हवाले से बताया गया है कि कभी इस जिले में हिंदुओं की आबादी 2.8-3 लाख के बीच थी। उन्होंने बताया कि ताजा घटना के बाद ज्यादातर हिंदू घरों में कैद हो गए थे। हिंदू बच्चों ने स्कूल-कॉलेज जाना छोड़ दिया था। इस घटना ने लोगों के जेहन में 1992 और 2001 की हिंसा की याद ताजा कर दी थी, जब हिंदुओं के साथ बड़े पैमाने पर अत्याचार हुआ था। इस बार भी जब हिंसा भड़की तो लोगों ने पुलिसकर्मियों तक को बंधक बना लिया था। लेकिन हिंदुओं के लिए राहत की बात यह थी कि इस बार सत्ता में बीएनपी न होकर शेख हसीना की अवामी लीग थी और हालात पर काबू पाने के लिए बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश की तैनाती कर दी गई थी।

बांग्लादेश में हिंदू लड़कियों को अगवा कर धर्मांतरण की घटनाएँ भी आम है, साभार: बांग्लादेश माइनॉरिटी काउंसिल, 2017 की रिपोर्ट

बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यकों की हालत का अंदाजा इसी साल मई में ओइकिया परिषद की प्रेस कॉन्फ्रेंस से लगाया जा सकता है। इसमें बताया गया था कि इस साल के पहले चार महीनों में ही अल्पसंख्यकों को निशाना बनाकर गैंगरेप और मर्डर सहित 250 हिंसक घटनाएँ हुई थी। अप्रैल तक कम से कम 29 मंदिरों पर इस साल हमले की घटना भी सामने आ चुकी थी।

कसाब और याकूब मेमन को जो फाँसी से बचाना चाहता था, वो IAS बनेगा मुस्लिम, CAB से हुआ नाराज

यूपीए कार्यकाल में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को सलाह देने के लिहाज से गठित की गई नेशनल एडवाइजरी काउंसिल के पूर्व सदस्य हर्ष मंदर ने नागरिकता संशोधन विधेयक (CAB) के विरोध में अपनी आवाज उठाई है। उन्होंने कहा है कि अगर कैब पास हुआ तो वो ‘सविनय अवज्ञा’ की राह पर चलेंगे और खुद को आधिकारिक रूप से मुस्लिम पंजीकृत करवा लेंगे। इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी कहा कि वो एनआरसी को कोई भी दस्तावेज जमा करने से मना कर देंगे।

खुद को लेखक, स्तंभकार, शोधकर्ता, शिक्षक के अलावा स्वघोषित मानवाधिकार कार्यकर्ता बताने वाले हर्ष मंदर ने ये बात खुद ट्वीट कर कही है। उन्होंने कहा है कि अगर नागरिकता संशोधन विधेयक पास होता है तो ये उनका सविनय अवज्ञा होगा कि वे पहले खुद को आधिकारिक रूप से मुस्लिम पंजीकृत करवा लेंगे और फिर एनआरसी को कोई भी दस्तावेज जमा करने से मना कर देंगे। वो यहीं नहीं रुके। बल्कि लिखते-लिखते जोश में यह भी लिख गए कि इसके बाद वह अपने लिए किसी अज्ञात जगह पर नजरबंद किए जाने से लेकर नागरिकता वापस लेने जैसी सजा की भी माँग करेंगे। ठीक वैसी ही सजा जैसे किसी मुस्लिम को मिलती है, जिनके पास जरूरी दस्तावेज नहीं होते। इसके बाद मंदर ने ट्विटर पर अपने फॉलोवर्स से गुहार भी लगाई है कि वे भी कैब के विरोध में इस सविनय अवज्ञा से जुड़ें।

हालाँकि, इस ट्वीट के आने के बाद सोशल मीडिया पर कुछ लोग हर्ष मंदर को उनकी इस पहल के लिए बधाई देने में जुटे हुए हैं, लेकिन कुछ ऐसे लोग भी हैं जो उनके इस ट्वीट के लिए उन्हें जमकर ट्रोल कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि इस फैसले से भी बेहतर है कि पाकिस्तान और बांग्लादेश चले जाएँ।

कुछ यूजर हर्ष मंदर से जुड़ी पुरानी बातों का भी उल्लेख करने से नहीं चूक रहे। एक यूजर ने लिखा है कि विभिन्न न्यूज वेबसाइटों के अनुसार हर्ष मंदर वही शख्स है, जिसने अजमल कसाब और याकूब मेमन जैसे आतंकियों के लिए दया याचिका दायर की थी।

यहाँ बता दें कि जिस कैब के विरोध में हर्ष ने सविनय अवज्ञा की बात की है, उस नागरिकता संशोधन बिलको लेकर विपक्ष ने लोकसभा में अपना पुरजोर विरोध दर्ज कराया था। लेकिन 7 घंटे तक चली तीखी बहस के बाद आखिरकार ये पास हो गया। बिल के पक्ष में 311 और विपक्ष में 80 वोट पड़े। अब लोकसभा के बाद राज्यभा में बिल का पास होना बाकी है। नागरिकता संशोधन बिल का पास होना मोदी सरकार की बड़ी जीत मानी जा रही है।

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चिली एयरफोर्स का विमान क्रैश: 17 क्रू मेंबर्स और 21 पैसेंजर्स हैं प्लेन में, सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

चिली एयरफोर्स का एक प्‍लेन जिस पर 38 लोग सवार थे, जिस समय वह अंर्टाकटिका के रास्‍ते में था रडार से गायब हो गया। अब खबर आ रही है कि विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया है। हालाँकि अभी तक इस विमान को कोई मलबा नहीं मिला है। वहाँ की सेना व प्रशासन द्वारा सर्च एंड रेस्‍क्‍यू ऑपरेशन शुरू कर दिया गया है।

एक स्‍थानीय अधिकारी की तरफ से इस बात की जानकारी दी गई है। बता दें कि जो एयरक्राफ्ट गायब हुआ है वह सी-130 हरक्यिूलस था और उसने सर्दन चिली के पुंटा एरिनास से स्थानीय समयानुसार शाम 4:55 मिनट पर सोमवार को टेक ऑफ (उड़ान भरा) किया था।

वहाँ की एयरफोर्स ने अपने बयान में कहा है, “एयक्राफ्ट लॉजिस्टिकल सपोर्ट को लेकर जा रहा था, इसके साथ ही यह विमान इलाके में राष्‍ट्रीय सुविधाओं से जुड़े कुछ और कामों को पूरा करने के मकसद से रवाना हुआ था।” अधिकारियों ने कहा कि विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया है क्योंकि दोपहर 12:40 बजे तक विमान का कोई संकेत नहीं मिला, उस समय विमान ईंधन का ईंधन खत्म हो गया होगा। सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है।

विमान में सवार लोगों की पहचान पर फिलहाल कुछ नहीं कहा गया है, लेकिन माना जा रहा है कि ज्यादातर या सभी लोग चिली के नागरिक हैं। विमान में सवार 21 यात्रियों में से 15 वायु सेना के सदस्य हैं, 3 सेना के सदस्य हैं, और 3 नागरिक हैं। इसमें INPROSER के 2 कर्मचारी और Magallanes यूनिवर्सिटी का 1 कर्मचारी भी हैं।

जानकारी के अनुसार शाम 6:13 मिनट पर रडार से एयरक्राफ्ट से उस समय संपर्क टूट गया, जब वह ड्रेक पैसेज के ऊपर से गुजर रहा था। यह वह जगह है, जो प्रशांत महासागर और अटलांटिक महासागर को आपस में जोड़ती है। चिली एयरफोर्स की तरफ से इस पर आधिकारिक बयान जारी किया गया है। चिली की एयरफोर्स का कहना है कि विमान में 38 लोग सवार थे, जिसमें से 17 क्रू मेंबर्स और 21 पैसेंजर्स हैं।