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महुआ मोइत्रा के खिलाफ BJP ने दर्ज कराई शिकायत, कहा था- मेरे लिए काली मांस भक्षी, शराब वाली देवी: ट्विटर पर पार्टी से TMC सांसद ने किया किनारा

डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘काली’ को लेकर दिए बयान पर जारी विवाद के बीच तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) सांसद महुआ मोइत्रा ने ट्विटर पर पार्टी से दूरी बना ली है। खबर है कि उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर पर टीएमसी को अनफॉलो कर दिया है। उन्होंने यह कदम पार्टी द्वारा उनके बयान से किनारा करने के बाद उठाया है। वहीं बीजेपी ने पार्टी के पल्ला झाड़ने पर घेरने की कोशिश की है। वहीं बीजेपी ने सांसद महुआ मोइत्रा के खिलाफ शिकायत दर्ज कराते हुए गिरफ्तारी की माँग की है।

बीजेपी ने टीएमसी पर माँ काली का अपमान करने का लगाया है। महुआ मोइत्रा के बयान पर आपत्ति जताते हुए बीजेपी नेता राजर्षि लहिरी ने कोलकाता के रबिंद्र सरोबर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई है। साथ ही बीजेपी ने टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा को तुरंत गिरफ्तार करने की माँग की है। उनका कहना है कि महुआ मोइत्रा का बयान व्यावहारिक रूप से धर्म के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देता है। ऐसे में महुआ के खिलाफ 153A and 295A के तहत तहत मामला दर्ज किया जाना चाहिए।

बता दें कि महुआ मोइत्रा के द्वारा देवी काली के लेकर की गई टिप्पणी को लेकर बीजेपी ने सख्त ऐतराज जताया है वहीं उनकी गिरफ्तारी की माँग की है। पश्चिम बंगाल भाजपा प्रमुख सुकांत मजूमदार ने इसकी जानकारी देते हुए कहा, ”हमारी महिला मोर्चा धरना देगी। पुलिस स्टेशन जाएगी और महुआ मोइत्रा की गिरफ्तारी की माँग करेगी।”

सुकांत मजूमदार टीएमसी के अपने सांसद के बयान से पल्ला झाड़ने पर कहा, ”महुआ मोइत्रा की टिप्पणियों से टीएमसी खुद को अलग नहीं कर सकती है। यदि टीएमसी वास्तव में इसका समर्थन नहीं करती है तो उसे कार्रवाई करनी चाहिए। उन्हें या तो उन्हें निष्कासित करना चाहिए या उन्हें कुछ दिनों के लिए पार्टी से निलंबित कर देना चाहिए।”

हालाँकि, महुआ के ट्विटर अकाउंट के मुताबिक वह पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को फॉलो कर रही हैं।

फोटो साभार: ममता बनर्जी ट्विटर

बता दें कि हाल ही में टीएमसी ने मोइत्रा की तरफ से देवी काली को लेकर दिए गए बयान से पल्ला झाड़ लिया था। डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘काली’ पोस्टर को लेकर विवाद पर बयान देते हुए महुआ ने कहा था कि उनके लिए काली मांस खाने वाली और शराब को स्वीकार करने वाली देवी हैं। उन्होंने दावा किया कि कई जगहों पर देवी-देवताओं को व्हिस्की चढ़ाई जाती है। महुआ का कहना था कि हमारे पास इसकी स्वतंत्रता है कि हम हमारे देवी-देवताओं को किसी भी रूप में सोच सकते हैं।

उन्होंने कहा था, “जब आप सिक्किम जाएँगे तो आपके देखेंगे कि वे देवी काली को व्हिस्की चढ़ाते हैं। लेकिन अगर आप उत्तर प्रदेश जाएँगे और अगर आप कहेंगे कि आप प्रसाद के तौर पर देवी को व्हिस्की चढ़ाते हैं, तो वे इसे ईशनिंदा कहेंगे।” महुआ ने ‘इंडिया टुडे कॉन्क्लेव ईस्ट 2022’ में बोलते हुए ये बातें कहीं थी।

हालाँकि, उनके इस बयान से TMC से किनारा कर लिया था। पार्टी ने कहा था कि महुआ मोइत्रा द्वारा दिए गए बयान और माँ काली को लेकर उनके द्वारा अभिव्यक्त किए गए विचार उनके निजी हैं और पार्टी किसी भी सूरत में या किसी भी रूप में इसका समर्थन नहीं करती। साथ ही पार्टी के आधिकारिक बयान में ये भी कहा गया कि ‘ऑल इंडिया तृणमूल कॉन्ग्रेस (AITC)’ ऐसे किसी भी बयान की पुरजोर निंदा करता है।

वहीं टीएमसी द्वारा नाराजगी जताने के बाद महुआ मोइत्रा ने भी ट्वीट कर सफाई दी थी। उन्होंने मंगलवार (5 जुलाई 2022) को इस विवाद के बाद कहा था, “आप सभी संघियों का झूठ आपको बेहतर हिंदू साबित नहीं कर सकता। मैंने कभी किसी फिल्म या पोस्टर का समर्थन नहीं किया या कहीं भी धूम्रपान शब्द का उल्लेख नहीं किया। मेरा सुझाव है कि आप तारापीठ में मेरी माँ काली के पास जाएँ, यह देखने के लिए कि भोग के रूप में उन्हें क्या खाना-पीना दिया जाता है। जय माँ तारा।”

गौरतलब है कि विवादित डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘काली’ लीना मणिमेकलई ने बनाई है। इसका पोस्टर जारी होते ही फिल्म विवाद में घिर गई। इस पोस्टर में माँ काली को सिगरेट पीते दिखाया गया था। उनके एक हाथ में LGBTQ का झंडा भी दिखाया गया था। जिसके बाद लीना मणिमेकलई के खिलाफ यूपी पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है। इससे पहले दिल्ली में एक वकील ने लीना के खिलाफ शिकायत देकर एफआईआर की माँग की थी जिसके बाद दिल्ली की आईएफएसओ यूनिट ने भी लीना के खिलाफ मामला दर्ज किया। इसके अलावा ‘काली’ के पोस्टर पर भारत की आपत्ति के बाद कनाडा की आगा खान म्यूजियम (Aga Khan Museum) ने माफी माँगी है। बता दें कि इसी म्यूजियम में ‘काली’ दिखाई गई थी।

रईस ने 20-30 लोगों के साथ युवक और चाय दुकानदार को पीटा, नूपुर शर्मा पर पोस्ट से थे नाराज़: दुकान में भी तोड़फोड़, छावनी में तब्दील हुआ इलाका

पैगंबर मोहम्मद पर भाजपा की पूर्व प्रवक्ता नुपूर शर्मा की टिप्पणी का समर्थन करने को लेकर देश भर में बवाल अभी भी जारी है। अब मामला बिहार से सामने आया है। यहाँ के भोजपुर जिले के आरा थाना क्षेत्र में नुपूर शर्मा के समर्थन में फेसबुक पोस्ट को लेकर दो युवकों में विवाद हो गया और देखते ही देखते मारपीट शुरू हो गई।

पुलिस ने बताया कि मामला आरा के राम गढ़िया मोहल्ले का है। यहाँ एक चाय की दुकान पर कुछ लोग चाय पी रहे थे। इसी बीच नुपूर शर्मा के समर्थन में एक पोस्ट को लेकर दो युवकों में बहस शुरू हो गई।

जानकारी के मुताबिक दीपक नाम के शख्स ने कुछ दिनों पहले नुपूर शर्मा के समर्थन में पोस्ट शेयर किया था। जिस पर रईस नाम के शख्स ने विवादित टिप्पणी की थी। मंगलवार (5 जुलाई 2022) की शाम रईस और दीपक एक चाय की दुकान पर चाय पी रहे थे। इसी बीच फेसबुक पोस्ट को लेकर विवाद होने लगा। दोनों के बीच जमकर मारपीट हुई। फिर रईस अपने साथ करीब 20 से 30 लोगों को ले आया। सभी ने दीपक की पिटाई शुरू कर दी। उनलोगों ने लात-घूँसों से जमकर दीपक को पीटा। उनलोगों ने चाय की दुकान में तोड़फोड़ के साथ दुकानदार सोनू के साथ भी मारपीट की।

मामले की सूचना मिलते ही एसडीएम ज्योतिनाथ सहदेव और सहायक पुलिस अधीक्षक  (ASP) हिमांशु कुमार सैकड़ों पुलिस अधिकारियों की टीम के साथ मौके पर पहुँचे। पुलिस ने आश्वासन दिया कि मामला शांत हो गया है और फिलहाल स्थिति सामान्य है। पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया गया है और इलाके में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।

पत्रकारों से बात करते हुए भोजपुर एएसपी हिमांशु कुमार ने कहा, ”चाय बेचने वाले को पीटे जाने का मामला सामने आया है। अब स्थिति नियंत्रण में है। यहाँ अधिकारी मौजूद हैं। अगर FIR दर्ज करवाई जाती हैं तो गिरफ्तारियाँ भी होंगी। सोशल मीडिया पोस्ट के कारण अगर कुछ होता है, तो यह जाँच का विषय है। जाँच के दौरान सब कुछ सामने आ जाएगा।”

वहीं आरा के डीएम राजकुमार ने कहा, “कुछ लोग एक दुकान में चाय पी रहे थे। एक फेसबुक पोस्ट के कारण दो समूहों के बीच लड़ाई हुई। हिंसा हुई और अब स्थिति नियंत्रण में है।”

नुपूर शर्मा के समर्थन में पोस्ट करने पर उमेश कोल्हे और कन्हैया लाल की हुई थी हत्या 

गौरतलब है कि इससे पहले महाराष्ट्र के अमरावती में 22 जून को केमिस्ट उमेश कोल्हे की हत्या कर दी गई थी। उन्होंने नुपुर शर्मा के समर्थन में फेसबुक पोस्ट किया था। इससे दूसरे समुदाय के लोग नाराज थे। इसके अलावा उदयपुर से भी ऐसा ही मामला सामने आया था। यहाँ फेसबुक पोस्ट को लेकर 28 जून को कन्हैया लाल की गला रेत कर हत्या कर दी गई थी। 

IAS सैयद रियाज अहमद गिरफ्तार, कोर्ट ने भेजा जेल: स्टडी टूर पर झारखंड आई IIT छात्रा से माँगा था चुम्मा, पिलाई थी शराब

आईएएस अधिकारी सैयद रियाज अहमद (Sayeed Riyaz Ahemad) को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। झारखंड के खूँटी जिले में एसडीएम अहमद पर यह कार्रवाई आईआईटी छात्रा के यौन शोषण के आरोप में हुई है। गिरफ्तारी के बाद उन्हें कोर्ट में पेश किया गया। जहाँ से उन्हें ज्युडिशियल कस्टडी में भेज दिया गया।

अहमद पर इंटर्नशिप के लिए आई छात्रा को किस करने की कोशिश, शराब पिलाने का आरोप है। खूँटी के जिलाधिकारी ने उनकी गिरफ्तारी की जानकारी कार्मिक विभाग को भेज दी है। ऐसे में अब उन्हें उनके पद से निलंबित भी किया जा सकता है।

क्या है पूरा मामला

हिमाचल प्रदेश के मंडी स्थित आईआईटी में ‘रूरल डेवलपमेंट’ की पढ़ाई कर रही नाबालिग छात्रा समर वैकेशन में इंटर्नशिप करने के लिए खूँटी आई थी। जिस पार्टी को लेकर ये आरोप लगाए गए हैं, वो शुक्रवार (1 जुलाई, 2022) को आयोजित की गई थी। आरोप है कि उस पार्टी में छेड़खानी करते हुए SDM सैयद रियाज अहमद ने छात्रा को किस करने का प्रयास किया। साथ ही वो गलत नज़र से भी उसे घूर रहे थे। 4 जुलाई की देर शाम इस मामले में FIR दर्ज कराई गई थी। सैयद रियाज अहमद 2018 बैच के IAS अधिकारी हैं।

शिकायत के बाद खूँटी स्थित CJM की अदालत में हिमाचल प्रदेश की छात्रा का 164 का बयान दर्ज कराया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, पीड़िता ने शिकायत में कहा कि आरोपित एसडीएम ने उसे अपना आवास दिखाने के बहाने बुलाया था। लेकिन जब वो अश्लील हरकतें करने लगे तो पीड़िता वहाँ से भाग निकली। इसके बाद वो लगातार उसके दोस्तों को फोन कर अपने आवास पर आने के लिए दबाव बनाते रहे। सैयद रियाज अहमद मूल रूप से महाराष्ट्र के नासिक के रहने वाले हैं।

उल्लेखनीय है कि आरोपित आईएएस के खिलाफ उक्त पार्टी IPC की धाराओं 376D (एक या उससे अधिक व्यक्ति द्वारा किसी स्त्री के साथ यौन दुर्व्यवहार), 376A (बिना सहमति के स्त्री के साथ शारीरिक सम्बन्ध बनाना), 323 (जानबूझ कर चोट पहुँचाना), 504 (शांति भंग करने के इरादे से अपमान), 506 (धमकी देना), 34 (समान इरादे से आपराधिक कृत्य) और POCSO एक्ट (यौन अधिकार से बच्चों का संरक्षण अधिनियम) के तहत केस दर्ज किया गया है।

अब बिजनौर के जाकिर सदाबहार होटल में थूक लगाकर रोटियाँ बनाने का वीडियो वायरल, यूपी पुलिस ने अरबाज को गिरफ्तार कर भेजा जेल

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के बिजनौर जिले में एक होटल में थूक लगाकर रोटियाँ बनाने का मामला सामने आया है। जिसका वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने आरोपित अरबाज़ को गिरफ्तार कर लिया है। मामला बिजनौर के जलालाबाद चौक स्थित ज़ाकिर सदाबहार नाम के होटल का है। रोटी पर थूक लगाने वाला वायरल वीडियो भी इसी होटल का बताया जा रहा है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने इस पर संज्ञान लेते हुए मामले की जाँच की। इस दौरान होटल के कर्मचारियों को पूछताछ के लिए बुलाया गया। वीडियो की पुष्टि होने के बाद पुलिस ने आरोपित अरबाज के खिलाफ आईपीसी की धारा 269/270 के तहत मुकदमा दर्ज करते हुए उसे गिरफ्तार कर लिया है और अब उसे जेल भेजा जा रहा है। पुलिस ने बताया कि महामारी एक्ट की धाराओं में युवक के खिलाफ केस दर्ज किया गया है।

वहीं दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, होटल के मालिक जाकिर ने कहा, “यह वीडियो जिस कर्मचारी अरबाज का है। वह इसी तरीके से हिल-हिल कर काम करता है। हम उसको मना भी कर चुके हैं। लेकिन यह उसकी स्टाइल है। हमारे होटल में 8 कैमरे लगे हैं। सब कुछ लाइव देखा जाता है।”

हालाँकि, यह पहला मामला नहीं है जब रोटी पर थूक लगाने का वीडियो वायरल हुआ हो और उसके बाद गिरफ्तारी हुई हो। बीते दिनों बागपत (Baghpat) जिले के औरंगाबाद मोहल्ले के शेखपुरा इलाके में स्थित एक होटल का भी वीडियो वायरल हुआ था। उस वायरल वीडियो में एक मुस्लिम व्यक्ति को ‘थूक’ लगाकर तंदूरी रोटी (Spitting On Bread) सेंकते हुए देखा गया था। इस मामले में हिंदू जागरण मंच (Hindu Jagran Manch) की शिकायत के बाद पुलिस ने होटल मालिक समेत तीन लोगों को हिरासत में ले लिया था।

इसके अलावा भी उत्तर प्रदेश में इससे पहले भी थूक लगाकर रोटी बनाने के ​कई मामले सामने आ चुके हैं। 12 जनवरी 2022 को लखनऊ में थूक लगाकर रोटी बनाते हुए एक वीडियो वायरल हुआ था। जिसके बाद होटल मालिक याकूब, कर्मचारी दानिश, हाफिज मुख्तार फिरोज और अनवर समेत अन्य लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया थी।

इसी तरह दिसंबर 2021 में मेरठ के कंकरखेड़ा क्षेत्र में आंबेडकर रोड स्थित लक्ष्मीनगर में सगाई समारोह के दौरान थूक लगाकर रोटी बनाने का वीडियो वायरल हुआ था। वायरल वीडियो में नौशाद नाम का युवक रोटी बना रहा है। वह रोटी पर बार-बार थूक लगा रहा था, तभी एक बच्चे ने उसका वीडियो बनाकर वायरल कर दिया था।

मेरठ में तो थूक लगाकर रोटी बनाने के कई मामले सामने आ चुके हैं। इससे पहले फरवरी 2021 में एक शादी समारोह में थूक लगा कर रोटी बनाने वाले एक शख्स को गिरफ्तार किया गया था। उस आरोपित का नाम नौशाद उर्फ़ सुहैल था। इस मामले में ‘हिन्दू जागरण मंच’ के सचिन सिरोही ने पुलिस में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी।

1 ही दिन में उदयपुर में 3 का काटा जाना था गला, जानवर काटने वाले 6 खंजर लाए थे: 2 से कन्हैया को मारा, 4 मोहसिन मुर्गेवाला की दुकान से मिले

उदयपुर में कन्हैया लाल के हत्यारे रियाज अख्तरी और गौस मोहम्मद से पूछताछ के बाद सामने आया है कि ये लोग इस हत्या के जरिए देश की जनता को आतंकित करना चाहते थे। इन्होंने हत्या के लिए बकरीद पर इस्तेमाल होने वाले खंजरों का प्रयोग किया था। इनका मकसद था कि ये लगातार कन्हैया की तरह 1 दिन में तीन लोगों को मारते और उनका वीडियो वायरल करते।

टाइम्स नाऊ की रिपोर्ट के अनुसार, NIA ने पड़ताल के बाद अपनी एफआईआर में खुलासा किया कि कन्हैया लाल की हत्या करके वीडियो को सोशल मीडिया पर डालने के पीछे का कारण लोगों में डर पैदा करना था। यह लोग मजहबी आधार पर लोगों में दुश्मनी को बढ़ावा देना व आतंक फैलाना चाहते थे।

NIA ने आतंकी एंगल की जाँच के बाद इनके ऊपर आईपीसी की धारा 452, 302, 153 ए, 153 बी, 295ए और 34 के तहत दोबारा केस दर्ज किया है। इसके अलावा यूएपीए की धारा 16, 18 और 20 भी इनके ऊपर लगाई गई है।

पूछताछ में ही ये सामने आया है कि ये लोग सिलसिलेवार ढंग से तीन लोगों की निर्मम हत्या करना चाहते थे और सबकी वीडियो बनाकर इन्हें उनको वायरल करना था। रियाज अख्तरी ने कानपुर से बकरीद में इस्तेमाल होने वाले छह खास खंजर मँगवाए थे जिन्हें उसने खुद उदयपुर के ए के इंजीनियरिंग फैक्ट्री में धार दी थी और उन्हीं में से 2 का इस्तेमाल कन्हैया को मारने के लिए किया गया था। बाकी बचे चार चाकू पुलिस को मोहसिन मुर्गेवाला नाम के कसाई की दुकान पर बरामद हुए।

रिपोर्ट्स बताती हैं कि कन्हैया के अलावा जिन लोगों की जान इन्हें लेनी थी उसे ये लोग इसलिए अंजाम नहीं दे पाए क्योंकि एक तोउनकी रेकी पूरी नहीं हुई थी और दूसरा कारण था कि कन्हैयालाल की हत्या के बाद हंगाम बढ़ गया था।

संबंधित रिपोर्ट का स्क्रीनशॉट

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट खुलासा करती है कि उदयपुर में हत्याओं को अंजाम देने के लिए साजिश 10 दिन पहले ही शुरू हो गई थी। 17 जून को सभी साजिशकर्ताओं ने एक बैठक की थी। इसके बाद 20 जून को भी एक बैठक हुई और 6 लोगों को हत्याओं को अंजाम देने का जिम्मा सौंपा गया। इन्हीं 6 में से 2 रियाज और गौस थे। इनके अलावा 2 हत्या करने का काम जिन 4 लोगों को दिया गया उन्हें भी पुलिस पकड़ चुकी है। साजिशकर्ताओं की बैठक में आखिरी चर्चा इसी बात को लेकर थी कि इन्हें किस तरह अंजाम दिया जाए।

बता दें कि गौस मोहम्मद और रियाज दावत-ए-इस्लाम से जुड़े बताए जा रहे हैं। गौस को लेकर तो ये जानकारी भी सामने आई है कि उसने कराची स्थित इसके हेडक्वार्टर को भी विजिट किया था जहाँ उसकी मुलाकात सरगना इलियास कादरी से हुई थी। इसके अलावा गौस दो बार अरब भी जा चुका था। पुलिस अब दावत-ए-इस्लामी व्हॉट्सएप ग्रुप चैट की छानबीन कर रही है। पता लगाया जा रहा है कि हत्या की साजिश स्थानीय स्तर पर बनी या फिर पाकिस्तान से इसका कनेक्शन है।

एकनाथ शिंदे ने बताया क्यों BJP ने उन्हें बनाया महाराष्ट्र का CM, पीएम मोदी ने दिया क्या ‘मंत्र’: हिंदुत्‍व पर चुप्पी-दाऊद पर नरमी को लेकर उद्धव को घेरा भी

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद से एकनाथ शिंदे लगातार उन मुद्दों पर मुखर है, जिनकी वजह से उनके समर्थक शिवसेना विधायकों को उद्धव ठाकरे गुट से अलग लाइन लेनी पड़ी। शिंदे की माने तो उद्धव के नेतृत्व वाली महाविकास अघाड़ी में शिवसैनिकों को हिंदुत्व, वीर सावरकर पर बोलने की आजादी तक नहीं। दाऊद इब्राहिम से जुड़े लोगों पर कार्रवाई नहीं हो रही थी।

शिंदे के अनुसार शिवसेना का मुख्यमंत्री होने के बावजूद पार्टी को कोई फायदा नहीं हो पा रहा था। उन्होंने कहा, “हमने उद्धव ठाकरे के साथ कई बार चर्चा की कि हमें महाविकास अघाड़ी से कोई लाभ नहीं मिल रहा है। हमारी पार्टी के सीएम के बावजूद, हम नगर पंचायत चुनाव में नंबर 4 पर आ गए हैं। हमने उन्हें समझाने की काफी कोशिश की, लेकिन हम सफल नहीं हो पाए।”

शिंदे ने उद्धव ठाकरे के बयान पर भी पलटवार किया है। उन्होंने कहा, “मैंने कहा है कि रिक्शा ने मर्सिडीज को पीछे छोड़ दिया, क्योंकि ये सरकार सर्वसामान्य लोगों के लिए सरकार है। ये समाज के हर घटक को न्याय दिलाने वाली सरकार है और देखिएगा हमलोग ऐसा काम करेंगे कि हरेक घटक, हरेक व्यक्ति को लगे कि ये मेरे लिए काम कर रही है, ये मेरी सरकार है। ये फर्क है।”

बता दें कि मंगलवार (5 जुलाई 2022) को सेना भवन में शिवसेना की महिला विंग की एक बैठक को संबोधित करते हुए, उद्धव ठाकरे ने परोक्ष रूप से शिंदे पर तंज कसा था, जो कभी ऑटो रिक्शा चलाते थे। उन्होंने कहा था, “डिप्टी सीएम शिंदे को रुकने को कह रहे थे, लेकिन ऑटो रिक्शा का ब्रेक फेल हो गया था, यह कैसे रुकेगा? पहले भाजपा एमवीए सरकार को तिपहिया सरकार कहती थी, अब तिपहिया चलाने वाला सरकार चला रहा है।”

शिंदे ने कहा, “लोगों को लगता था कि भाजपा सत्ता के लिए कुछ भी करती है। लेकिन उन्होंने सभी देशवासियों को बता दिया है कि इन 50 लोगों ने हिंदुत्व की भूमिका ली है, एक वैचारिक भूमिका ली है। इनका एजेंडा हिंदुत्व का है, विकास का है, इनका समर्थन करना चाहिए। उनके पास ज्यादा संख्या और ज्यादा विधायक होने के बावजूद उन्होंने हमें मुख्यमंत्री पद के लिए समर्थन किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुझसे राज्य को विकास के पथ पर आगे ले जाने के लिए कहा। यह भी कहा कि केंद्र सरकार और वह खुद पूरी ताकत से पीछे खड़े हैं। यह सबसे बड़ी बात है। हमलोगों ने कोई गैरकानूनी काम नहीं किया है, क्योंकि चुनाव से पहले शिवसेना के साथ जिस पार्टी का गठबंधन था हम उसी के साथ गठबंधन कर रहे हैं।”

उन्होंने कहा कि बाला साहेब ठाकरे का हिंदुत्व का जो मुद्दा है, हिंदुत्व के जो विचार हैं, उनकी जो भूमिका है, उसे आगे ले जाने का फैसला हमने किया है। सीएम ने कहा कि 2019 में शिवसेना-भाजपा ने एक साथ चुनाव लड़ा था और सरकार बन गई कॉन्ग्रेस-NCP के साथ। इसकी वजह से जब भी हिंदुत्व का, सावरकर का, दाऊद का, मुंबई बम ब्लास्ट का और भी कई मुद्दे आए, तब वह कोई भी निर्णय नहीं ले पा रहे थे। शिंदे ने आगे कहा, “इसके अलावा हमारे विधायकों को अपने निर्वाचन क्षेत्रों में काम करने में कठिनाई का सामना करना पड़ता था, क्योंकि सहयोगी दल उन लोगों का ताकत बढ़ाने की कोशिश कर रहे थे जो उनसे हार गए थे। फंड की कमी के कारण हमारे विधायक विकास कार्य नहीं कर पा रहे थे। हमने वरिष्ठों से बात की लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। तो हमारे 40-50 विधायकों ने ऐसा किया।”

इससे पहले विधानसभा में बोलते हुए भी एकनाथ शिंदे ने कहा था कि शिव सैनिक हिंदुत्व के लिए आवाज नहीं उठा सकते थे और वीर सावरकर के बारे में भी नहीं बोल सकते थे, क्योंकि शिवसेना कॉन्ग्रेस और NCP के साथ गठबंधन में थी। इसके अलावा दाऊद के साथ संबंध रखने वाले मंत्रियों के खिलाफ भी कार्रवाई करने से रोक दिया गया।

छत्तीसगढ़: रेप के बाद 55 साल की महिला के गुप्तांग में लोहे के तवे का मूठ डाला, छाती पर चढ़ इतना मारा कि फेफड़े फट गए… घर में मिला था अर्धनग्न शव

छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा से दिल दहलाने वाला मामला सामने आया है। यहाँ 55 वर्षीय महिला के साथ रेप के बाद भीषण दरिंदगी की गई। घर से उसका अर्धनग्न शव मिलने के बाद पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सूरज भोई ने पहले महिला के साथ दुष्कर्म किया। फिर घर में रखे लोहे के तवे से उसके गुप्तांग पर कई वार किए। इसके बाद उसने महिला के प्राइवेट पार्ट में तवे का मूठ डाल दिया। उसने महिला के सीने पर चढ़कर उसकी गर्दन को अपने दोनों हाथ से दबाया। जब वह छटपटाने तो उसके गले को अपने पैर से दबा दिया, जिससे उसकी मौत हो गई। घटना के बाद आरोपित महिला के हाथ में पहने चाँदी के 4 नग जड़ी चूड़ी लेकर फरार हो गया। 

पुलिस अधीक्षक विजय अग्रवाल ने बताया कि अकलतरा थाना क्षेत्र के पोड़ीभाठा में एक 55 वर्षीय महिला का शव उसके घर में अर्धनग्न अवस्था में पड़ा मिला था। महिला के पति की करीब 3 साल पहले ही मौत हो गई थी। उसका कोई बच्चा भी नहीं था। वह घर पर अकेले ही रहती थी और दूसरों के घरों में काम करती थी। 3 जुलाई की सुबह जब महिला काफी देर तक घर से बाहर नहीं निकली, तो पड़ोसी उसे देखने के लिए पहुँचे। वहाँ उन्हें कमरे के दरवाजे के पास ही महिला का अर्धनग्न शव पड़ा मिला।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पाया गया कि महिला के साथ दुष्कर्म किया गया है। साथ ही उसके प्राइवेट पार्ट में काफी चोटें आई हैं। इतना ही नहीं गले और सीने की हड्डी टूटने और फेफड़े फटने से उसकी मौत हो गई। थाना प्रभारी लखेश केंवट के मुताबिक, आरोपित सूरज भोई पेशेवर अपराधी है। वह इससे पहले भी अलग-अलग अपराधों में कई बार जेल जा चुका है। 4 जुलाई को उसे कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया है।

आरोपित ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है। उसने बताया कि दरवाजा खुला देखकर वह घर के अंदर घुस गया और डरा-धमकाकर महिला के साथ दुष्कर्म किया। वह दोबारा भी उसके साथ दुष्कर्म करना चाहता था, लेकिन महिला उसके चंगुल से छूटकर बाहर आकर चिल्लाने लगी, जिसके बाद उसने महिला के बाल पकड़कर उसे अंदर खींचा और उसकी हत्या कर दी।

वह हिस्ट्रीशीटर है, नूपुर शर्मा की गर्दन माँग रहा… फिर भी ‘नशे की हालत’ में क्यों अटकी है राजस्थान पुलिस: अजमेर दरगाह का खादिम गिरफ्तार

अजमेर के हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह का खादिम सलमान चिश्ती गिरफ्तार कर लिया गया है। उसका एक वीडियो सामने आया था, जिसमें वह बीजेपी की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा की हत्या के लिए उकसा रहा था। दिलचस्प यह है कि वीडियो सामने आने के बाद और उसकी गिरफ्तारी के बाद भी राजस्थान पुलिस उसके नशे की हालत में होने पर जोर दे रही है। सनद रहे कि कॉन्ग्रेस शासित राजस्थान की पुलिस पर तुष्टिकरण के आरोप लगते रहे हैं।

ऐसा भी नहीं है कि सलमान चिश्ती का दामन पाक-साफ रहा हो। वह हिस्ट्रीशीटर है। उसके खिलाफ 13 से ज्यादा मामले दर्ज हैं। इनमें हत्या और हत्या के प्रयास जैसे गंभीर आरोप भी हैं। नूपुर शर्मा की हत्या के लिए उकसाने वाला वीडियो वायरल होने के बाद से ही उस पर कार्रवाई की माँग हो रही थी।

आखिरकार अजमेर पुलिस ने मंगलवार (5 जुलाई 2022) रात उसे उसके घर से गिरफ्तार कर लिया। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) विकास सांगवान ने भड़काऊ बयान देने के आरोप में उसकी गिरफ्तारी की पुष्टि की है। उन्होंने न्यूज एजेंसी एएनआई को बताया कि आपत्तिजनक वीडियो सामने आने के बाद उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज किया गया था। गिरफ्तारी के बाद उससे पूछताछ की जा रही है। उन्होंने कहा, “ऐसा लगता है कि वीडियो बनाते समय वह नशे की हालत में था।”

उल्लेखनीय है कि वीडियो वायरल होने के बाद सलमान चिश्ती के खिलाफ अजमेर के अलवर गेट थाने में मुकदमा दर्ज किया था। इसके बाद एएसपी विकास सांगवान ने कहा था कि उसकी तलाश की जा रही है। कश्मीर में उसका लोकेशन मिलने की बात कही जा रही है। एफआईआर के बाद भी एएसपी ने कहा था, “वीडियो में सलमान चिश्ती नशे की हालत में नजर आ रहा है।”

वायरल वीडियो में सलमान चिश्ती ने कहा था, “कसम है मुझे पैदा करने वाली मेरी माँ की, मैं उसे सरेआम गोली मार देता। मुझे मेरे बच्चों की कसम, मैं उसे गोली मार देता और आज भी सीना ठोक कर कहता हूँ जो भी नुपुर शर्मा की गर्दन लाएगा, मैं उसे अपना घर दे दूँगा और रास्ते पर निकल जाऊँगा। ये वादा करता है सलमान।” इसके अलावा, उसने खुद को ‘ख्वाजा का सच्चा सिपाही’ बताते हुए मुस्लिमों को भड़काने की कोशिश की थी।

कनाडा के जिस म्यूजियम ने दिखाई ‘काली’, उसने हिंदू आस्था को ठेस पहुँचाने पर माँगी माफी: भारतीय दूतावास ने भड़काऊ कंटेंट्स हटाने को कहा था

लीना मणिमेकलई (Leena Manimekalai) की डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘काली’ के पोस्टर पर भारत की आपत्ति के बाद कनाडा की आगा खान म्यूजियम (Aga Khan Museum) ने माफी माँगी है। म्यूजियम ने हिंदुओं की आस्था को अनजाने में ठेस पहुँचाने के लिए खेद व्यक्त किया है।

आगा खान म्यूजियम ने बयान जारी कर कहा है, “टोरंटो मेट्रोपॉलिटन यूनिवर्सिटी का प्रोजेक्ट प्रेजेंटेशन (Project Presentation) आगा खान म्यूजियम में आयोजित किया गया था। ‘अंडर द टेंट’ प्रोजेक्ट के तहत म्यूजियम में 18 शॉर्ट वीडियो में से एक और इसके साथ जुड़ी सोशल मीडिया पोस्ट ने अनजाने में हिंदुओं और अन्य लोगों को ठेस पहुँचाई है। अब इस फिल्म को म्यूजियम में नहीं दिखाया जाएगा। म्यूजियम का मिशन कला के माध्यम से अलग-अलग सांस्कृतियों के बीच समझ और संवाद को बढ़ावा देना है। विविध धार्मिक अभिव्यक्तियों और आस्था का सम्मान मिशन का एक अभिन्न अंग है।”

इससे पहले भारतीय दूतावास ने ‘काली’ से जुड़ी सभी आपत्तिजनक सामग्री हटाने की अपील की थी। ओटावा में स्थित भारतीय दूतावास ने 4 जुलाई को अपने बयान में कहा था, “हमें हिन्दू समुदाय के नेताओं की तरफ से एक फिल्म के पोस्टर में हिन्दू देवी-देवताओं को अपमानजनक तरीके से प्रदर्शित किए जाने की शिकायतें मिली हैं। इस फिल्म को टोरंटो स्थित ‘आगा खान म्यूजियम’ में ‘अंडर द टेंट’ प्रोजेक्ट के तहत दिखाया जा रहा है। टोरंटो में हमारे काउंसलेट जनरल ने इस कार्यक्रम के आयोजकों के समक्ष इन चिंताओं को रखा है।” भारतीय दूतावास ने ये भी जानकारी दी थी कि कई हिन्दू संगठनों ने कनाडा के प्रशासन से भी संपर्क किया और इस फिल्म को दिखाए जाने के खिलाफ कार्रवाई करने की माँग की है।

लीना मणिमेकलई ने 2 जुलाई को अपनी डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘काली’ का पोस्टर ट्विटर पर रिलीज किया था। इस पोस्टर में एक्ट्रेस को ‘काली’ के रूप में दिखाया गया है। इसमें उसने एक हाथ में त्रिशूल और दूसरे हाथ में LGBT समुदाय का झंडा पकड़ा हुआ। साथ ही उसे सिगरेट पीते हुए भी दिखाया गया है। पोस्टर रिलीज होने के बाद से सोशल मीडिया पर इस फिल्म का विरोध किया जा रहा है।

वहीं विरोध के बाद फिल्म की निर्देशक लीना ने कहा, था “मेरे पास खोने के लिए कुछ नहीं है। मैं एक ऐसी आवाज के साथ रहना चाहती हूँ जो बिना किसी डर के बोले जब तक वह है। अगर इसकी कीमत मेरी जान है तो मैं दे दूँगी। ये फिल्म एक ऐसी शाम पर है जब काली प्रकट होती हैं और टोरंटो की सड़कों पर घूमती हैं।” बता दें कि लीना ने साल 2002 में शॉर्ट डॉक्यूमेंट्री ‘मथम्मा’ से अपने करियर की शुरुआत की थी। काली के अलावा उनकी पिछली कई फिल्में जैसे ‘सेंगडल’, ‘पराई’, ‘व्हाइट वैन स्टोरीज’ भी विवादों का हिस्सा रह चुकी है।

SC के जस्टिस सूर्यकांत और परदीवाला पर महाभियोग चलाने को लेकर कैंपेन, हर सेकेंड जुड़ रहे लोग: नूपुर शर्मा के गले डाल दी थी कन्हैया लाल की बर्बर हत्या

भारतीय जनता पार्टी की निलंबित प्रवक्ता नुपूर शर्मा के केस में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बाद सामान्य जन न्यायधीशों द्वारा की गई टिप्पणी से खासे नाराज हैं। अभी तक जहाँ सोशल मीडिया पर इस वजह से केवल उनकी निंदा हो रही थी। वहीं अब उनके खिलाफ महाभियोग चलाने की माँग की जा रही है। इस संबंध में सोशल मीडिया पर हस्ताक्षर अभियान भी चला हुआ है।

हिंदू आईटी सेल के विकास पांडे ने अपने ट्वीट में इसकी जानकारी देते हुए कहा, “मैंने एक याचिका बनाई है जो सांसदों को दी जाएगी। ये जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जे.बी परदीवाला के खिलाफ महाभियोग कार्रवाई शुरू करवाने की ओर एक कदम है। याचिका पर हस्ताक्षर करें!”

बता दें कि www.change.org प्लेटफॉर्म पर चलाई जा रही इस याचिका को खबर लिखने तक करीब 10 हजार लोगों द्वारा साइन किया जा चुका है। इसके भीतर सांसदों को संबोधित करते हुए कहा गया, “सभी सांसदों, ये जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जेबी परदीवाला के विरुद्ध महाभियोग चलवाने के लिए शुरुआत है।”

याचिका में देश के हालातों पर चिंता व्यक्त करते हुए नुपूर शर्मा का केस उठाया गया। इसमें कहा गया कि कैसे जान का खतरा होने के कारण विभिन्न राज्यों में हो रही शिकायतों को एक जगह क्लब करने के लिए नुपूर ने देश के सबसे सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। लेकिन जब सुनवाई की बारी आई तो न्यायधीशों ने मामला सुने बिना ही उन्हें देश में हिंसा भड़काने और उदयपुर में हुई कन्हैयालाल की हत्या का अकेला जिम्मेदार ठहरा दिया।

याचिका में कहा गया कि ऐसे मामलों में सिर्फ इस्लामी कट्टरपंथी और तालिबान जैसी भारत विरेधी ताकतों को शह मिलती है और हिंदुओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया के जरिए बुरा दिखाया जाता है। सुप्रीम कोर्ट ने गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार दिखाया। साथ ही बिन किसी तथ्य के इस तरह गैरकानूनी टिप्पणी की। ये देश के मूल्यों और नैतिकता के खिलाफ है। इसलिए दोनों जस्टिसों पर महाभियोग चलाने की माँग इस याचिका में की गई है।

बता दें कि इस याचिका को मिल रहा समर्थन दिखा रहा है कि कैसे लोगों में सुप्रीम कोर्ट के जजों की टिप्पणी से नाराजगी है। वह लोग इस अभियान को समर्थन दे रहे हैं और पूछ रहे हैं कि क्यों आखिर तालिबान तक ने सुप्रीम कोर्ट को समर्थन दे दिया है और क्यों कोर्ट आतंकियों के लिए रात में खुलने लगा है? लोगों में गुस्सा है कि इस तरह एक महिला की याचिका पर टिप्पणी कर न्यायपालिका का मजाक बनाया गया है।

महाभियोग से क्या होगा?

उल्लेखनीय है सुप्रीम कोर्ट के न्यायधीशों के खिलाफ कार्रवाई के लिए महाभियोग ही वह प्रक्रिया है जिसका अनुसरण करके फैसला लिया जाता है। मौजूदा जानकारी बताती है कि सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट के न्यायाधीशों पर महाभियोग चलाने का जिक्र संविधान के अनुच्छेद 124 (4) में है। इसमें कहा गया है कि सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय के किसी जस्टिस पर कदाचार और अक्षमता के लिए महाभियोग का प्रस्ताव लाया जा सकता है। अनुच्छेद 124 में में जजों को उनके पद से हटाए जाने का भी प्रावधान है।