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पत्नी से बदतमीजी कर रहा था SI, विरोध करने पर युवक को मारी गोली: बोले बग्गा- नागरिकों को इंसान नहीं समझती पंजाब पुलिस

पंजाब (Punjab) के डेराबस्सी में रविवार (26 जून 2022) की देर रात मुबारकपुर पुलिस थाना इंचार्ज SI बलविंदर सिंह ने कहासुनी के बाद एक महिला के पति को गोली मार दी। गोली उस शख्स के जाँघ में लगी है। वहीं, इस मामले में पुलिस ने अभी तक कोई FIR दर्ज नहीं की है।

दरअसल, रविवार की रात को बतपुर रोड पर गुलमोहर सिटी के बाहर SI बलविंदर सिंह चेकिंग कर रहे थे। यहीं पर दो बहनें और उनमें से एक का पति आइसक्रीम खा रहे थे। उसी दौरान पुलिस ने उन लोगों के साथ बदतमीजी कर दी। बात बढ़ने के बाद SI बलविंदर सिंह ने फायर कर दिया। पीड़ितों का आरोप है कि सभी पुलिसकर्मी नशे में थे।

तरनतारन निवासी अक्षय के अनुसार, रविवार की रात 9:30 बजे वह अपनी पत्नी पूजा और साली दिव्या के साथ आइसक्रीम खा रहे थे। इसी दौरान पुलिस की पेट्रोलिंग गाड़ी आई। उस गाड़ी में तीन लोग सवार थे। SI बलविंदर सिंह ने आकर उनकी पत्नी की बैग की तलाशी देने को कहा तो पत्नी पूजा ने विरोध किया।

अक्षय का कहना है कि इसके बाद पुलिस बदसलूकी करने लगी और उसे सड़क पर गिरा दिया। इसी दौरान उनके परिजन आ गए और विरोध करने लगे तो बलविंदर सिंह ने गोली चला दी, जो हितेश नाम के युवक की जाँघ में लगी। हितेश के अलावा उसकी बहन पूजा और दिव्या को भी चोटें आई हैं। घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

हितेश का कहना है कि उसकी बहन और जीजा को शक था कि पुलिस उन्हें झूठे केस में फँसा सकती है। इसलिए उन्होंने बैग चेक कराने से मना किया था। हितेश की बहन और जीजा ने आरोप लगाया कि गोली चलाने वाला मुबारिकपुर पुलिस चौकी का इंचार्ज बलविंदर सिंह घटना के समय नशे में था।

इस मामले में अभी तक कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई है। मोहाली के SSP विवेकशील सोनी के अनुसार, “घटना को लेकर किसी तरह की लिखित शिकायत दर्ज नहीं की गई है। इसके बावजूद SI को निलंबित कर दिया गया है और शिकायत मिलने के बाद कार्रवाई की जाएगी।”  

उधर डेराबस्सी थाने के एसएचओ जसकंवल सिंह का कहना है कि सीनियर अफसरों की अगुवाई में जाँच चल रही है। उसके बाद ही जो होगा, वो कार्रवाई की जाएगी। इसका एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें SI महिला को धक्का देते और उसे थप्पड़ मारता दिखता है। उसके बाद उसके परिजन पुलिस से भिड़ जाते हैं।

भाजपा नेता तजिंदर पाल सिंह बग्गा ने इस घटना का वीडियो ट्विटर पर शेयर करते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) से कार्रवाई की माँग की है।

बग्गा ने लिखा है, “डेराबस्सी में पंजाब पुलिस ने एक महिला के साथ हाथापाई की और जब उसके पति ने उसका विरोध किया तो उसको गोली मार दी। @ArvindKejriwal के सत्ता में आने के बाद पंजाब पुलिस ने पंजाब के नागरिकों को इंसान समझना बंद कर दिया है। इतने पुलिस वाले चाहते तो एक आदमी को पकड़ सकते थे, लेकिन गोली मार दी गई।”

अब AltNews वाला प्रतीक सिन्हा नपेगा? जिस ‘हनुमान भक्त’ के ट्वीट से मोहम्मद जुबैर की हुई गिरफ्तारी, वह ‘भगवान गणेश के अपमान’ पर भी हुआ एक्टिव

जिस ट्विटर यूजर के ट्वीट पर ऑल्ट न्यूज़ के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर की गिरफ्तारी हुई, उसने 28 जून 2022 (मंगलवार) को संस्थान के दूसरे सह-संस्थापक प्रतीक सिन्हा (Prateek Sinha) के खिलाफ भी कार्रवाई की माँग की।

बता दें कि मोहम्मद जुबैर (Mohammad Zubair) को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 295 (ए) और 153 के तहत दंगा भड़काने के इरादे से धार्मिक भावनाओं को आहत करने और उकसाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।

अपने ट्वीट में ट्विटर यूजर @balajikijaiin ने सिन्हा के ट्वीट का हवाला देते हुए कहा, “इसे आप क्या कहेंगे? यह व्यक्ति खुले तौर पर हिंदुओं की धार्मिक स्वतंत्रता को चोट पहुँचा रहा है। दिल्ली पुलिस, डीसीपी साइबर क्राइम सेल, कृपया कार्रवाई करें।”

सितंबर 2015 में सिन्हा ने भगवान गणेश का मज़ाक उड़ाया था और सवाल किया था कि क्या हाथी के सिर का कोई व्यक्ति हो सकता है। इसी ट्वीट का हवाला देकर ट्विटर यूजर ने प्रतीक सिन्हा के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए पुलिस से आग्रह किया है।

इससे पहले दिल्ली पुलिस ने एक बयान में कहा था कि उस यूजर का ट्वीट ही जुबैर की गिरफ्तारी का आधार बना है। दिल्ली पुलिस ने यूजर के उस ट्वीट का हवाला दिया था, जिसमें उसने अपनी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचने की बात कहते हुए जुबैर के खिलाफ कार्रवाई की माँग की थी।

पुलिस ने कहा था, “मोहम्मद जुबैर की उक्त पोस्ट, जिसमें एक विशेष धार्मिक समुदाय के खिलाफ तस्वीर और शब्द हैं, अत्यधिक उत्तेजक हैं और जानबूझकर किया गया है। यह लोगों के बीच नफरत को भड़काने के लिए पर्याप्त से अधिक है और सार्वजनिक शांति बनाए रखने के लिए हानिकारक हो सकता है।”

जुबैर के खिलाफ कार्रवाई की माँग करते हुए अपने ट्वीट में @balajikijaiin ने कहा था, “दिल्ली पुलिस, हमारे भगवान हनुमान जी को हनीमून से जोड़ना हिंदुओं का सीधा अपमान है क्योंकि वह ब्रह्मचारी थे। डीसीपी साइबर क्राइम सेल, कृपया इस आदमी के खिलाफ कार्रवाई करें।”

जुबैर के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए बालाजीकीजय का ट्वीट (साभार: सोशल मीडिया)

दिल्ली पुलिस ने 27 जून को धार्मिक भावनाओं को आहत करने और दंगा भड़काने के इरादे से लोगों को उकसाने के आरोप में मोहम्मद जुबैर को गिरफ्तार किया था। देर रात मजिस्ट्रेट ने उसे एक दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया। जुबैर को एक दिन की कस्टडी पूरी होने के बाद रेगुलर जज के कोर्ट में पेश किया जाएगा।

‘पवार’ पर 1 पोस्ट, 22 FIR ठोके- 40 दिन हिरोइन के जेल में बीते: अब कोर्ट में महाराष्ट्र पुलिस ने कहा- नहीं करेंगे गिरफ्तार

एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार के कथित अपमान से जुड़े मामलों में मराठी अभिनेत्री केतकी चितले को बड़ी राहत मिली है। महाराष्ट्र पुलिस उनकी गिरफ्तारी नहीं करेगी। यह बात पुलिस ने सोमवार (27 जून 2022) को बॉम्बे हाई कोर्ट (Bombay High Court) से कही। इसके अनुसार चितले के खिलाफ 21 FIR में अगले आदेश तक कार्रवाई नहीं होगी। मामले की अगली सुनवाई 12 जुलाई को होगी।

केतकी के खिलाफ महाराष्ट्र के अलग-अलग जगहों पर कुल 22 एफआईआर दर्ज किए गए थे। इनमें से एक मामले में उन्हें पहले ही जमानत मिल चुकी थी। लेकिन, उससे पहले उन्हें करीब 40 दिन जेल में बिताने पड़े थे।

सोमवार को चितले को महाराष्ट्र पुलिस द्वारा दर्ज 21 पेंडिंग FIR में भी अंतरिम राहत मिल गई। हाई कोर्ट ने पुलिस को उनके खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दिया। इससे पहले ठाणे की एक अदालत ने कलवा पुलिस स्टेशन में दर्ज एक मामले में उन्हें जमानत दी थी।

केतकी के वकीलों ने महाराष्ट्र की ठाणे सत्र अदालत को बताया था कि गिरफ्तारी से पहले उन्हें नोटिस नहीं भेजा गया था। जिसके बाद कोर्ट ने कहा था कि दस्तावेजों से पता चलता है कि महाराष्ट्र पुलिस ने केतकी को गिरफ्तार करते वक्त उचित कानूनी प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया था। अदालत ने कहा कि महाराष्ट्र पुलिस ने शुरू में चितले की जमानत याचिका का विरोध किया था, लेकिन बाद में अचानक से यूटर्न लेते हुए एक्ट्रेस की जमानत का विरोध नहीं करने का फैसला किया।

अब बॉम्बे हाई कोर्ट 12 जुलाई को चितले की उस याचिका पर सुनवाई करेगा, जिसमें उनके खिलाफ FIR रद्द करने की माँग की गई है। मुख्य लोक अभियोजक अरुणा पई ने कहा कि महाराष्ट्र पुलिस मामलों में सुनवाई की अगली तारीख तक चितले को गिरफ्तार नहीं करेगी

गौरतलब है कि चितले को 14 मई को 2022 को महाराष्ट्र पुलिस ने शरद पवार पर कमेंट करने को लेकर उठाया था। चितले ने अपने फेसबुक पोस्ट पर एक मराठी में लिखी कविता शेयर की थी। इसमें कथित तौर पर शरद पवार के लिए ‘नरक इंतजार कर रहा है’, ‘तुम ब्रह्मणों से नफरत करते हो’, ‘तुम्हारा मुँह टेढ़ा’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया था।

जाहिल, जिंदा लाशें… फिर बिगड़ी संजय राउत की जुबान: कोल्हापुर में उद्धव समर्थकों का पुलिस पर हमला, निशाने पर था शिंदे समर्थक मंत्री का दफ्तर

महाराष्ट्र में जारी राजनीतिक गतिरोध के बीच शिवसेना नेतृत्व की धमकी की असर सड़कों पर दिखने लगा है। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के समर्थकों ने कोल्हापुर में बागी मंत्री राजेंद्र पाटिल याद्रवकर के समर्थकों पर हमला कर दिया। जब पुलिस ने बीच बचाव करने की कोशिश की तो उस पर हमला किया गया।

पाटिल-याद्रवकर के समर्थक अपने कार्यालय के सामने इकट्ठा हुए थे। इसी दौरान जयसिंहपुर के क्रांति चौक के पास बागी नेताओं के खिलाफ शिवसेना के कार्यकर्ता प्रदर्शन कर रहे थे। पुलिस ने जब पाटिल-याद्रवकर के समर्थकों के स्थान से 100 मीटर पहले शिवसेना के कार्यकर्ताओं रोकने की कोशिश की। इसके बाद भीड़ ने पुलिस पर हमला कर दिया। इसमें दोनों तरफ के कई लोग घायल हुए हैं।

शिवसेना के जिला अध्यक्ष मुरलीधर जाधव का कहना है कि पाटिल-याद्रवकर दागी हैं और वे उन लोगों को कोल्हापुर में शांति से नहीं रहने देंगे।

इससे पहले शिवसेना के कार्यकर्ताओं ने पुणे में पार्टी के बागी विधायकों तानाजी सावंत के कार्यालय में तोड़फोड़ की थी और मुंबई के कुर्ला के नेहरूनगर इलाके में विधायक मंगेश कुदलकर के कार्यस्थल के बाहर बोर्ड को तोड़ दिया था।

बता दें कि ये बागी मंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में असम की राजधानी गुवाहाटी में डेरा डाले हुए हैं और उद्धव ठाकरे की सरकार से अलग होने की घोषणा कर चुके हैं। इसके बाद उद्धव ठाकरे के समर्थक सड़कों पर उतर आए हैं।

इससे पहले शिवसेना के प्रवक्ता संजय राउत ने कार्यकर्ताओं को भड़काने वाला बयान दिया था। राउत ने कहा था, “यह एक कानूनी लड़ाई और एक सड़क की लड़ाई है। यह होगा और पार्टी इसके लिए तैयार है।”

उधर, संजय राउत ने शिवसेना के बागी नेताओं को लेकर एक बार फिर ट्वीट किया है। ट्वीट में उन्होंने लिखा, “जहालत एक किस्म की मौत है और जाहिल लोग चलती-फिरती लाशें हैं।”

इससे पहले पार्टी के बागी नेताओं को जिंदा लाश कहा था। संजय राउत ने अपने ट्वीट में कहा था, “जो लोग 40-40 साल तक पार्टी में रहते हैं और फिर भाग जाते हैं। उनका जमीर मर गया है तो उसके बाद क्या बचता है? जिंदा लाश।”

इतना ही नहीं मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के बेटे और राज्य में कैबिनेट मंत्री आदित्य ठाकरे ने कहा था कि अच्छा हुआ कि शिवसेना की गंदगी निकल गई। उन्होंने दिलवाले फिल्म के डायलॉग इस्तेमाल करते हुए कहा था, “हम शरीफ क्या हुए, दुनिया बदमाश हो गई।”

उधर विद्रोही गुटों ने सोशल मीडिया पर कहा गया कि बालासाहेब ठाकरे की शिवसेना के शिव सैनिक राज्य से बाहर कदम रखने के कुछ ही घंटों में ‘खलनायक’ बन गए हैं। उन्हें ‘गंदे सूअर’ कहा जा रहा है और हर तरफ से ‘दुर्व्यवहार और हमला’ का सामना करना पड़ रहा है।

बॉलीवुड डायरेक्टर राम गोपाल वर्मा पर लखनऊ में FIR, NDA की राष्ट्रपति उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू को लेकर की थी ओछी टिप्पणी

बॉलीवुड डायरेक्टर राम गोपाल वर्मा के खिलाफ लखनऊ के हजरतगंज कोतवाली में एफआईआर दर्ज की गई है। उन पर एनडीए की राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू के खिलाफ अमर्यादित टिप्पणी का आरोप है। आईटी एक्ट सहित कई धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।

यह एफआईआर समाजसेवी मनोज कुमार सिंह के तहरीर के आधार पर की गई है। बता दें कि फिल्म डायरेक्टर राम गोपाल वर्मा ने द्रौपदी मुर्मू पर 22 जून 2022 को ट्वीट कर कहा था, “अगर द्रौपदी राष्ट्रपति है तो पांडव कौन हैं? इससे भी अधिक महत्वपूर्ण कौरव कौन हैं?” हालाँकि बाद में वर्मा ने इस ट्वीट को लेकर माफी माँग ली थी।

माफ़ी माँगते हुए उन्होंने ट्वीट किया, “यह सिर्फ एक मजाक में कहा गया था और कोई दूसरा इरादा नहीं था। ..महाभारत में द्रौपदी मेरी पसंदीदा चरित्र हैं, लेकिन चूँकि नाम इतना दुर्लभ है, इसलिए मुझे संबंधित पात्रों की याद आ गई और मैंने ले लिया। किसी की भावनाओं को ठेस पहुँचाने का मकसद बिल्कुल नहीं है।” मनोज कुमार सिंह ने इस ट्वीट पर आपत्ति जताते हुए हजरतगंज थाने में तहरीर दी थी। उनका कहना था कि इस तरह की टिप्पणी समाज पर गलत असर डालेगी। ऐसे में फिल्म निर्माता पर कार्रवाई की जानी जरूरी है।

मामले में तेलंगाना के वरिष्ठ भाजपा नेता जी नारायण रेड्डी ने भी राम गोपाल वर्मा के खिलाफ द्रौपदी मुर्मू पर अपमानजनक ट्वीट के लिए पुलिस शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने कहा था कि वर्मा की टिप्पणी एक अनुभवी महिला राजनेता और झारखंड की पूर्व राज्यपाल के लिए बेहद अपमानजनक है। राम गोपाल वर्मा के इस ट्वीट की सोशल मीडिया यूजर्स ने भी निंदा की थी और आपत्ति जताई थी।

‘हनीमून होटल’ को जुबैर ने बताया था ‘हनुमान होटल’: पूछताछ में पुलिस को नहीं कर रहा सहयोग, राहुल गाँधी ने कहा- ऐसी हजारों आवाज उठेंगी

धार्मिक भावनाओं को भड़काने के आरोप में दिल्ली पुलिस द्वारा गिरफ्तार AltNews के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर के लिए स्पेशल सेल ने मजिस्ट्रेट से 4 दिनों का रिमांड माँगा है। दिल्ली पुलिस का कहना है कि जाँच के दौरान जुबैर का आचरण संदिग्ध पाया गया था। इसलिए साजिश को उजागर करने के लिए उसे गिरफ्तार किया गया।

दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ का कहना है कि मोहम्मद जुबैर पुलिस के सवालों से बचता रहा। उसने जाँच के लिए ना ही जरूरी तकनीकी उपकरण मुहैया कराए और न ही जाँच में सहयोग किया। पुलिस का कहना है कि वह पहले भी आपत्तिजनक ट्वीट करके नफरत फैलाने की कोशिश की थी।

पुलिस का कहना है कि पर्याप्त सबूत के आधार पर ही उसे गिरफ्तार किया गया है। दरअसल, मोहम्मद जुबैर पर मामला ट्विटर पर हनुमान भक्त @balajikijaiin हैंडल के एक पोस्ट के आधार पर दर्ज किया गया है। इस हैंडल ने मोहम्मद जुबैर के एक ट्वीट “2014 से पहले: हनीमून होटल और 2014 के बाद: हनुमान होटल” पोस्ट के खिलाफ अपना गुस्सा जाहिर किया था।

पुलिस के अनुसार, ट्वीट की एक तस्वीर में होटल का साइनबोर्ड दिख रहा है। इस पर लिखे ‘हनीमून होटल’ को बदलकर ‘हनुमान होटल’ कर दिया गया है। हनुमान भक्त @balajikijaiin ने ट्वीट किया, “हमारे भगवान हनुमान जी को हनीमून से जोड़ना हिंदुओं का सीधा अपमान है, क्योंकि वे ब्रह्मचारी हैं। कृपया इस आदमी के खिलाफ कार्रवाई करें।”

दिल्ली पुलिस ने कहा कि मोहम्मद जुबैर के उस पोस्ट में एक विशेष धार्मिक समुदाय के खिलाफ प्रयोग तस्वीर और शब्द अत्यधिक उत्तेजक है और लोगों के बीच नफरत को भड़काने के लिए पर्याप्त है। यह सार्वजनिक शांति के लिए हानिकारक सिद्ध हो सकता है।

जुबैर के समर्थन में आए विपक्षी दल

भाजपा विरोध से विपक्षी दल इतने ग्रस्त हो चुके हैं कि उन्हें मोहम्मद जुबैर की गैर-कानूनी गतिविधियाँ दिखाई नहीं दे रही हैं। कॉन्ग्रेस, TMC, वामपंथी दल सहित लगभग सभी दलों ने इस गिरफ्तारी को लेकर जुबैर के समर्थन में खड़े हो गए। कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी ने भी इस गिरफ्तारी का विरोध किया है।

राहुल गाँधी ने ट्वीट कर कहा, “सच्चाई की एक आवाज को बंद करोगे तो ऐसी हजारों आवाजें और उठेंगी। भाजपा की नफरत, कट्टरता और झूठ को बेनकाब करने वाला हर व्यक्ति उसके लिए खतरा है। सच्चाई की निरंकुशता पर हमेशा विजय होती है।”

तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) की सांसद मोईना मित्रा ने जुबैर के कारनामे को भाजपा की पूर्व नेता नूपुर शर्मा से जोड़ने की कोशिश की। उन्होंने ट्वीट किया, “जुबैर को एक मनगढ़ंत केस में गिरफ्तार किया गया है, जबकि मिसेज फ्रिंज शर्मा सुरक्षा के साये में जिंदगी का आनंद उठा रही हैं।”

बता दें कि प्रोपेगेेंडा फैलाने में माहिर मोहम्मद जुबैर की गिरफ्तारी के बाद लिबरल और वामपंथी गिरोह उसके बचाव में उतर आया और अपनी छाती पीट रहा है। इनमें शबनम हाशमी, राना अय्यूब, राजदीप सरदेसाई, शशि थरूर, कविता कृष्णन जैसे लोग शामिल हैं।

 

‘ये इमरजेंसी है’: ‘शांतिदूत’ जुबैर की गिरफ़्तारी पर कॉन्ग्रेस और राजदीप-राना अय्यूब गिरोह ने पीटी छाती, कविता कृष्णन ने हिन्दुओं को सुनाया भला-बुरा

दिल्ली पुलिस ने AltNews के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर को हेट स्पीच और दुश्मनी फैलाने के मामले में गिरफ्तार कर लिया है। उस पर IPC (भारतीय दंड संहिता) की धारा-153 (ऐसे कृत्य जिससे दंगे और उपद्रव होने की आशंका हो) और धारा-295 (किसी समाज द्वारा पवित्र मानी जाने वाली वस्तु का अपमान करना) लगाई गई है। वहीं फेक न्यूज़ फैलाने और हिन्दू विरोधी खबरों के लिए कुख्यात मोहम्मद ज़ुबैर की गिरफ़्तारी के बाद लिबरल और वामपंथी गिरोह उसके बचाव में उतर आया है। ट्विटर पर #FreeZubairNow का हैशटैग भी ट्रेंड करने लगा है।

यहाँ हम आपको ऐसे ही कुछ लोगों के ट्विटर पर निकले भड़ास, समर्थन और लामबंदी से परिचय करा रहे हैं जो अक्सर ज़ुबैर और उसके तथाकथित मीडिया पोर्टल ऑल्ट न्यूज़ द्वारा फैलाये जा रहे झूठ और हेट स्पीच पर मौन रहते आए हैं।

राणा अय्यूब, जो भाजपा की पूर्व प्रवक्ता नुपुर शर्मा के खिलाफ इस्लामी भीड़ को ‘ईशनिंदा’ के नाम पर उनके खिलाफ भड़का रही थी। वहीं उन्हें जब किसी दूसरे के खिलाफ धार्मिक भावनाओं को आहत करने के लिए कार्रवाई की जाती दिखी, तो अचानक से आपातकाल याद आने लगा।

अपने ट्वीट में, अय्यूब ने लिखा, “भारत के प्रधान मंत्री आपातकाल की भयावहता के बारे में बात करते हैं जबकि उन्होंने भारत में लागू कर दिया है।”

“इंडिया टुडे के संपादक राजदीप सरदेसाई ने ANI को रीट्वीट करते हुए मोहम्मद ज़ुबैर के समर्थन में लिखा, “तो मोहम्मद जुबैर, जिसने हेट स्पीच के कई मामलों को उजागर किया था, अब उन्हें खुद हेट स्पीच का आरोप लगा कर गिरफ्तार किया गया है। यहाँ तक ​​कि जिन लोगों का उन्होंने खुलासा किया उनमें से कई खुलेआम घूमते हैं। चिलिंग इफेक्ट!”

कॉन्ग्रेस नेता शशि थरूर ने लिखा, “भारत की कुछ फैक्ट-चेकिंग सेवाएँ, विशेष रूप से ऑल्ट न्यूज़, जिसने दुष्प्रचार से भरे हमारे पोस्ट ट्रुथ राजनीतिक वातावरण में कई खुलासे किए। जो भी कोई अपराध करता है, वे हर झूठ का पर्दाफाश करते हैं। उनकी गिरफ्तारी सच्चाई पर प्रहार है, उन्हें तत्काल रिहा किया जाना चाहिए।”

वहीं वामपंथी कविता कृष्णन ने भी ऑल्ट न्यूज़ के को-फाउंडर प्रतीक सिन्हा का ट्वीट शेयर करते हुए लिखा, “ध्यान दें कि दिल्ली पुलिस, आप हिन्दू-वर्चस्ववादी नेताओं को नहीं छुएँगे जो खुलेआम भाषण देते हैं और अपने समर्थकों को मुसलमानों को गोली मारने के लिए उकसाते हैं। लेकिन आपकी पुलिस ज़ुबैर जैसे लोगों को गिरफ्तार कर लेगी। जो एक पत्रकार (जो मुस्लिम है) जो फर्जी खबरों और हेट स्पीच को धैर्यपूर्वक उजागर करने के लिए समर्पित है।

मीरा संघमित्रा ने कविता कृष्णन का ट्वीट शेयर करते हुए लिखा, “कितनी बड़ी शर्म की बात है कि हफ्तों तक ऑनलाइन नफरत और धमकियों का सामना करने के बाद, ऑल्ट न्यूज़ के पत्रकार ज़ुबैर को अभी दिल्ली पुलिस द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि हिंदू वर्चस्ववादी जो सांप्रदायिक जहर उगलते हैं और हिंसा के घृणित कृत्यों में लिप्त होते हैं, वे ‘कानून के लम्बे हाथों से अछूते रहते हैं!” साथ ही #FreeZubairNow का हैशटैग भी लगाया।

जहाँ वामपंथी और लिबरल ज़ुबैर को लेकर हो-हल्ला मचा रहे हैं वहीं कई लोग ऐसे भी हैं जो ज़ुबैर का काला चिट्ठा सामने रख रहे हैं कि किस तरह से यह फेक न्यूज़ फैलाते सैकड़ों बार पकड़ा गया है। या फिर किसी आपराधिक मामले को वाइट वाश करता हुआ। कह के पहनो नामक ट्विटर यूजर ने ऑल्ट न्यूज़ के फेक न्यूज़ की एक लिस्ट ही जारी कर दी है।

वहीं राजदीप सरदेसाई के ट्वीट के जवाब में पीसफुल नामक किसी ट्विटर यूजर ने ज़ुबैर के पुराने स्क्रीनशॉट शेयर करते पूछा, “ये क्या है रेड फ्लैग?”

गौरतलब है कि मोहम्मद जुबैर को विभिन्न समुदायों के बीच वैमनस्य फैलाने के लिए गिरफ्तार किया गया है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने ये कार्रवाई की है। उस पर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने का आरोप है। खुद को फैक्ट-चेकर बताने वाले मोहम्मद जुबैर के समर्थन में वामपंथी गिरोह भी सामने आ गया है। कविता कृष्णन जैसों ने दिल्ली पुलिस को भला-बुरा कहना शुरू कर दिया है। उसके प्रतीक सिन्हा ने दावा किया है कि जाँच वाला मामला 2020 का था।

प्रतीक सिन्हा ने लिखा, “जुबैर को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने सोमवार (27 जून, 2022) को कॉल किया था। ये 2020 के एक मामले में जाँच को लेकर था। हालाँकि, उसे उच्च न्यायालय द्वारा गिरफ़्तारी से राहत प्रदत्त है। आज शाम के 6:45 बजे उसे किसी अन्य मामले में उठा लिया गया, जिसके लिए पहले से कोई नोटिस नहीं दिया गया। हमारे बार-बार निवेदन के बावजूद हमें FIR की कॉपी नहीं दी जा रही है।” हालाँकि, इसकी बात में कितनी सत्यता है इसे कहा नहीं जा सकता।

गुजरात हिंसा के नाम पर चंदा बटोर खुद खा गई: पूर्व सहयोगी ने ही तीस्ता सीतलवाड़ को लेकर किया खुलासा, गिरफ़्तारी के खिलाफ कॉन्ग्रेस का प्रदर्शन

साबरमती एक्सप्रेस में सवार कारसेवकों को गुजरात में जिंदा जलाकर मारने के बाद उपजे क्रोध के कारण गुजरात में हुई हिंसा को अपने स्वार्थ में भुनाने वाली कथित समाजिक कार्यकर्ता तीस्ता जावेद सीतलवाड़ की कहानी परत दर परत खुलती जा रही है। अब तीस्ता से एक करीबी ने कहा है कि उन्होंने हिंसा पीड़ितों के साथ धोखा किया है। वहीं, तीस्ता की गिरफ्तारी पर कॉन्ग्रेस ने सोमवार (27 मई 2022) को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया।

कभी सीतलवाड़ के करीबी रहे रईस खान कहा है कि तीस्ता की गिरफ्तारी उसी समय हो जानी चाहिए थी, जब उन्होंने उनकी धोखेबाजी की शिकायत की थी। खान ने कहा कि तीस्ता जैसे लोग पीड़ितों के नाम पर पैसा बटोरती हैं और खुद खा जाती हैं। ऐसे लोगों को माफ नहीं किया जाना चाहिए।

रईस खान ने कहा कि हिंसा पीड़ितों के नाम पर तीस्ता ने देश और विदेश से करोड़ों रुपए चंदा इकट्ठा किया और इसका एक प्रतिशत पर पीड़ितों को नहीं दिया। उन्होंने कहा कि इसी बात को लेकर तीस्ता के साथ साल 2008 में उनका झगड़ा हो गया था और वे उनसे अलग हो गए थे।

रईस खान ने बताया कि 1992 में मुंबई दंगों के दौरान तीस्ता न्यूज पेपर में रिपोर्ट में थीं। उसी दौरान वह उनसे मिले थे। इसके बाद तीस्ता ने इस्तीफा देकर कॉम्बैक्ट न्याय मंच नाम से एक NGO बनाया। इसमें उन्होंने तीस्ता की मदद की थी। दंगों के बाद दोनों का संपर्क खत्म हो गया।

रईस खान ने आजतक को बताया कि साल 2002 के गुजरात हिंसा के दौरान तीस्ता ने उनसे संपर्क किया और हिंसा पीड़ितों की मदद के नाम पर मदद माँगी। रईस के अनुसार, उन्होंने तीस्ता को नरोदा पाटिया, सरदारपुर आदि कई गाँवों के हिंसा पीड़ितों से उन्हें मिलवाया।

बकौल रईस, तीस्ता ने पीड़ितों के नाम पर चंदा इकट्ठा किया और उनके नाम पर एफिडेविट बनाकर SIT और नानावटी कमीशन के सामने पेश किया। रईस का दावा है कि इस एफिडेविट में क्या लिखा था, यह पीड़ितों को भी नहीं मालूम था। जब एफिडेविट और बयान में विरोधाभास सामने आया, तब जाकर खुलासा हुआ।

रईस के अनुसार, जब पीड़ितों को फंड देने की बात कही तो तीस्ता ने कहा, “मैंने कहा आप जिनके नाम पर फंड ला रही हैं, उनको तो दे दीजिए। तब तीस्ता ने कहा कि बडी मुश्किल से मुझे फंड मिलता है और उसमें से भी 50 प्रतिशत फंड दिलाने वाले एजेंट ले लेते हैं। ऐसे में जो बचता है, उसमें कहाँ से मैं दूँगी, मेरे भी तो खर्चे हैं।”

रईस खान का कहना है कि चंदे में हेरफेर को लेकर उन्होंने तीस्ता के खिलाफ शिकायत की थी, लेकिन तीस्ता के राजनीतिक रसूख बहुत अधिक थे और पुलिस में भी उनकी बहुत ऊँची पहुँच थी। इसलिए उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई। हालाँकि, गुजरात मामले में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद तीस्ता को गिरफ्तार कर लिया गया।

इधर तीस्ता की जालसाजी और धोखाधड़ी को नजरअंदाज कर 300 से अधिक कथित बुद्धिजीवियों और कार्यकर्ताओं ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने दूसरे एक्टिविस्टों की आवाज को दबाने के लिए इसे गुजरात ATS की सुनियोजित साजिश बताया।

इस प्रदर्शन में कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश और अजय माकन ने भी भाग लिया। इसमें शबनम हाशमी जैसी विवादित कार्यकर्ता और AISA के अध्यक्ष एन साई बालाजी भी शामिल हुए। इन लोगों ने गिरफ्तारी को साजिश बताते हुए तीस्ता, पूर्व IPS आरबी श्रीकुमार और संजीव भट्ट को रिहा करने की माँग की।

‘महफ़िल में तेरी, हम तो क्लियरली नहीं थे’: आलिया भट्ट की प्रेग्नेंसी पर कंडोम कंपनी ने कुछ यूँ दी बधाई, लोग बोले – ग्रेट ब्रांडिंग

बॉलीवुड एक्ट्रेस आलिया भट्ट (Alia Bhatt) और रणबीर कपूर (Ranbir Kapoor) के घर जल्द ही नन्हा मेहमान आने वाला है। आलिया ने सोमवार (27 जून 2022) को इंस्टाग्राम पर अपने माँ बनने की गुडन्यूज देकर फैंस को हैरान कर दिया। यह खबर सुनने के बाद हर कोई सोशल मीडिया पर रणबीर और आलिया को बधाई दे रहा है। इसी बीच कंडोम कंपनी ड्यूरेक्स (Durex) ने भी इंस्टा और ट्विटर पर एक फनी पोस्‍ट के जरिए रणबीर-आलिया को बधाई है।

ड्यूरेक्स ने इंस्‍टाग्राम और ट्विटर पर रणबीर कपूर की फिल्म ‘ऐ दिल है मुश्किल’ फिल्म का गाना शेयर करते हुए लिखा, “महफिल में तेरी, हम तो क्लियरली नहीं थे।”

ड्यूरेक्‍स के ये पोस्‍ट शेयर करते ही लोगों ने फनी कमेंट करना शुरू कर दिया। कई लोगों ने कंडोम कंपनी के बधाई देने के अंदाज की तारीफ की। मनोज बेलनेकर ने इंस्टाग्राम पर ड्यूरेक्स की तारीफ करते हुए लिखा, “ग्रेट ब्रॉडिंग।”

फोटो साभार: ड्यूरेक्‍स का इंस्टाग्राम

सोशल मीडिया पर कई यूजर्स कंडोम कंपनी के मॉर्केटिंग माइंड से इम्प्रेस नजर आए। उन्होंने इसके लिए उसे सराहा और कहा, “एडवरटाइजमेंट लेवल ग्रेट।”

फोटो साभार: ड्यूरेक्‍स का इंस्टाग्राम

इंस्टाग्राम पर एक और यूजर ने ड्यूरेक्स की तारीफ करते हुए लिखा, “आपकी ब्रॉडिंग हमेशा लाजवाब होती है।”

फोटो साभार: ड्यूरेक्‍स का इंस्टाग्राम

इससे पहले ड्यूरेक्स ने 14 अप्रैल, 2022 को दोनों को शादी की बधाई देते हुए पोस्‍ट किया था, “प्रिय रणबीर और आलिया…महफिल में तेरे, हम न रहे जो, फन तो नहीं है।” उस वक्त भी ये पोस्‍ट खूब वायरल हो हुआ था। 

गौरतलब है कि आलिया भट्ट इस समय हॉलीवुड फिल्म ‘हार्ट ऑफ स्टोन’ की शूटिंग के सिलसिले में लंदन में हैं। उन्होंने वहीं से अपने प्रेगनेंट होने की गुड न्यूज शेयर की है। उन्होंने इंस्टाग्राम पर जो तस्वीर शेयर की है, उसमें वह और रणबीर सोनोग्राफी देख रहे हैं। आलिया भट्ट ने अपने इंस्टाग्राम पोस्ट में लिखा, “हमारा बच्चा… जल्द आ रहा है।” दूसरी फोटो में शेर अपने परिवार के साथ दिखाई दे रहा है।बॉलीवुड स्टार रणबीर कपूर और आलिया भट्ट की 14 अप्रैल 2022 को मुंबई में शादी हुई थी।

सोनिया गाँधी के पर्सनल असिस्टेंट पर दलित महिला से बलात्कार की FIR: आरोप – कार में किया रेप, शादी-नौकरी का झाँसा

सोनिया गाँधी के पर्सनल असिस्टेंट पीपी माधवन पर एक दलित महिला से बलात्कार का आरोप लगा है। दिल्ली पुलिस ने इस मामले की FIR दर्ज कर ली है। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो 71 वर्षीय पीपी माधवन के विरुद्ध रेप का केस दर्ज किया गया है। दिल्ली पुलिस ने इस सम्बन्ध में एक बयान जारी किया है, जिसमें कहा गया है कि पीपी माधवन को IPC की धारा-376 (रेप) और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत आरोपित बनाया गया है।

उत्तम नगर पुलिस थाने में शनिवार (25 जून, 2022) को पीड़िता की शिकायत के बाद FIR दर्ज की गई। हालाँकि, पीपी माधवन ने इन आरोपों को नकारते हुए दावा किया है कि ये आधारहीन हैं और एक साजिश का हिस्सा हैं। उन पर आरोप है कि उन्होंने शादी और नौकरी का झाँसा देकर उक्त दलित महिला के साथ बलात्कार किया। पीड़ित 2020 में विधवा हो गई थीं। उसके पति कॉन्ग्रेस के दिल्ली स्थित दफ्तर में मजदूर हुआ करते थे।

FIR कॉपी के अनुसार, काम से जुड़े एक इंटरव्यू के नाम पर सोनिया गाँधी के पर्सनल असिस्टेंट ने पीड़िता को सुन्दर नगर स्थित एक घर में बुलाया। बैठक के दौरान उन्होंने अपनी पत्नी के साथ तलाक होने की बात बताते हुए पीड़िता के साथ शादी की इच्छा जाहिर की। उक्त महिला उस समय वित्तीय संकट से गुजर रही थीं। साथ ही कोरोना के कारण भी माली हालत बुरी थी। ऐसे में उसने इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया। इसके बाद वो अक्सर वीडियो कॉल से संपर्क में रहने लगे।

FIR में आगे आरोप है कि एक दिन पीपी माधवन ने हदें पार की और उत्तम नगर मेट्रो स्टेशन के टर्मिनल पर महिला को मिलने के लिए बुलाया। वहीं पार्किंग में एक गाड़ी के भीतर उन्होंने महिला के साथ बलात्कार किया। FIR में एक अन्य घटना का भी जिक्र है, एक अन्य घर में बुला कर भी महिला के सतह इसी तरह का व्यवहार किया गया। जब उन्होंने धमकियाँ देनी शुरू कर दी, तब महिला ने पुलिस में शिकायत का इरादा बनाया। पीड़िता ने पुलिस से सुरक्षा की माँग भी की है और कहा है कि उसे पीपी माधवन की तरफ से जान से मार डालने की धमकियाँ मिल रही हैं।