Home Blog Page 2656

महाराष्ट्र में ओवैसी शिवसेना गठबंधन के साथ, हरियाणा में नमक की कसम, आमेर में इंटरनेट बंद: 4 राज्यों में राज्यसभा की 16 सीटों के लिए हो रहा मतदान

महाराष्ट्र, कर्नाटक, हरियाणा और राजस्थान की 16 राज्यसभा सीटों के लिए शुक्रवार (10 जून 2022) को मतदान हो रहा है। महाराष्ट्र (6 सीटें), हरियाणा (2 सीटें), राजस्थान (4 सीटें) और कर्नाटक (4 सीटें) में सीटों से अधिक उम्मीदवारों के मैदान में उतरने से मुकाबला दिलचस्प है। क्रॉस वोटिंग पर चर्चाओं का बाजार गर्म है। राज्यसभा के लिए 15 राज्यों की 57 सीटों में से 41 पर उम्मीदवार पहले ही निर्विरोध निर्वाचित चुके हैं।

राजस्थान में राज्यसभा की 4 सीटें और उम्मीदवार 5

राजस्थान से कॉन्ग्रेस ने रणदीप सिंह सुरजेवाला, मुकुल वासनिक और प्रमोद तिवारी को उम्मीदवार बनाया है। राज्य में राज्यसभा की 4 सीटें हैं और उम्मीदवार 5 हैं। बीजेपी समर्थित उम्मीदवार सुभाष चंद्रा के आने से मुकाबला दिलचस्प हो गया है। आँकड़े की बात करें तो राजस्थान में एक राज्यसभा सीट के लिए 41 विधायकों के समर्थन की जरूरत है। कॉन्ग्रेस के पास 109 विधायक हैं। पार्टी दावा कर रही है कि निर्दलीय विधायकों के समर्थन से 125 वोट कॉन्ग्रेस के पाले में हैं। सुभाष चंद्रा के मैदान में आने के बाद न केवल कॉन्ग्रेस को उदयपुर के होटल में समर्थक विधायकों की बाड़ेबंदी करनी पड़ी, बल्कि जयपुर के आमेर में इंटरनेट सेवा को गुरुवार (9 जून 2022) रात 9 बजे से शुक्रवार 9 बजे तक बंद कर दिया गया था।

MVA के लिए वोट देंगे AIMIM विधायक

महाराष्ट्र में 6 सीटों पर मतदान से पहले असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM ने शिवसेना के नेतृत्व वाले महाविकास अघाड़ी को समर्थन देने का ऐलान किया है। AIMIM के महाराष्ट्र अध्यक्ष इम्तियाज जलील ने शुक्रवार को कहा, “भाजपा को हराने के लिए हमारी पार्टी AIMIM ने महाराष्ट्र में राज्यसभा चुनाव के लिए महाविकास अघाड़ी के लिए वोट देने का फैसला किया है। महाराष्ट्र के हमारे दो AIMIM विधायकों को कॉन्ग्रेस उम्मीदवार इमरान प्रतापगढ़ी के लिए वोट देने को कहा गया है।”

हरियाणा कॉन्ग्रेस के विधायकों की रायपुर से वापसी से पहले लोटे में नमक डालकर कॉन्ग्रेस उम्मीदवार अजय माकन के समर्थन में वोट डालने की कसम दिलाई गई। हरियाणा के कॉन्ग्रेस विधायकों को छत्तीसगढ़ के रिसॉर्ट में रखा गया था। गुरुवार (9 जून 2022) को उन्हें छत्तीसगढ़ से दिल्ली लाया गया। हरियाणा में दो राज्यसभा सीटों के लिए वोटिंग होगी। कॉन्ग्रेस की तरफ से अजय माकन उम्मीदवार हैं। तीन उम्मीदवार मैदान में उतर जाने से मामला काफी करीबी है।

पैगंबर मामले में NSA अजीत डोभाल ने नहीं कहा ‘सबक सिखाएँगे’, ईरान ने वापस लिया बयान: विदेश मंत्रालय ने बताया क्या हुई बात

ईरान ने वह बयान वापस ले लिया है जिसमें दावा किया गया था कि भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने पैंगबर मुहम्मद का अपमान करने वालों को सबक सिखाने का भरोसा दिलाया है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने भी विस्तार से बताया है कि ईरानी विदेश मंत्री डॉ. हुसैन अमीर-अब्दुल्लाहियन (Dr. Hossein Amir Abdollahian) के साथ क्या बातचीत हुई।

ईरानी विदेश मंत्री तीन दिवसीय भारत यात्रा पर हैं। भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा है कि यह यात्रा दोनों देशों के ऐतिहासिक संबंधों और साझेदारी को और मजबूती देगी। साथ ही बताया कि दिल्ली में विदेश मंत्री एस जयशंकर और उनके ईरानी समकक्ष के बीच कई मुद्दों पर चर्चा हुई, लेकिन इस दौरान पैगंबर मुहम्मद के कथित अपमान पर कोई चर्चा नहीं हुई। बागची ने कहा कि कुछ लोगों की टिप्पणियाँ और ट्वीट्स भारत सरकार के विचारों को नहीं दर्शाती है।

बागची ने 9 जून 2022 को मीडिया को बताया, “हमने यह स्पष्ट कर दिया है कि कुछ लोगों के ट्वीट और टिप्पणियाँ सरकार के विचारों को नहीं दर्शाती हैं। यह हमारे वार्ताकारों को भी बता दिया गया है और यह तथ्य भी है कि संबंधित लोगों द्वारा की गई टिप्पणी और ट्वीट करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। इस मुलाकात के दौरान इस मुद्दे को नहीं उठाया गया था।”

ईरानी विदेश मंत्रालय के उस ट्वीट को लेकर भी बागची से सवाल पूछा गया, जिसमें पैगंबर मुहम्मद मामले में एनएसए अजीत डोभाल और डॉ. हुसैन अमीर-अब्दुल्लाहियन के बीच कथित बातचीत का हवाला दिया गया था। जवाब में उन्होंने कहा, “जहाँ तक ​​चर्चा की बात है एनएसए और ईरानी मंत्री के बीच काफी अच्छे संबंध है। मैं उस पर कोई टिप्पणी नहीं करूँगा। लेकिन आप जिस सोशल मीडिया पोस्ट का जिक्र कर रहे हैं, कृपया उसे एक बार फिर से चेक कर लें, पोस्ट को उन्होंने पहले ही हटा लिया है।”

ईरान ने दावा किया था कि एनएसए डोभाल ने ईरानी मंत्री के साथ अपनी बैठक के दौरान कहा था कि वह पैगबंर का अपमान करने वालों को कड़ी से कड़ी सजा देंगे, जिससे अन्य लोग भी सबक लेंगे। ईरान की ओर से डोभाल को कोट करते हुए एक बयान भी जारी किया था। लेकिन ईरानी विदेश मंत्रालय की बेवसाइट पर जारी इस बयान से बाद में इस दावे से जुड़ी लाइनें भी हटा ली गई हैं।

गौरतलब है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने पैगंबर मोहम्मद पर की गई कथित विवादित टिप्पणी के लिए रविवार (5 जून, 2022) को राष्ट्रीय प्रवक्ता नूपुर शर्मा को पार्टी से निलंबित कर दिया था, वहीं दिल्ली इकाई के मीडिया प्रमुख नवीन कुमार जिंदल को पार्टी से निष्कासित कर दिया था।

अपने हाल पर छोड़ दिए गए पाकिस्तान के सोढ़ा राजपूत, 900 ब्लैकलिस्ट: शादी-विवाह से लेकर धार्मिक मान्यताओं के लिए भारत पर हैं आश्रित

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार (Narendra Modi Government) पड़ोसी देशों और दुनिया भर के हिंदुओं के लिए भारत को नैसर्गिक घर बताते रही है और उसके लिए नागरिकता संशोधन कानून (CAA) भी बना चुकी है। हालाँकि, भाजपा सरकार (BJP Government) ने पाकिस्तान के 900 हिंदुओं (Pakistani Hindu) को ब्लैकलिस्ट कर दिया है। ब्लैकलिस्ट का अर्थ है कि उन्हें भारत आने के लिए अब वीसा नहीं दिया जाएगा।

ब्लैकलिस्ट लोगों की सूची में अधिकांश लोग पाकिस्तान के उमरकोट के रहने वाले परमार क्षत्रिय (Parmar Kshatriya) वंश के सोढ़ा राजपूत (Sodha Rajput) हैं। पाकिस्तान में सोढ़ा क्षत्रियों की रियासत है अमरकोट, जिसे पाकिस्तान में उमरकोट कहा जाता है। यहाँ के क्षत्रिय परिवारों की रिश्तेदारियाँ भारत में हैं, खासकर गुजरात और राजस्थान में।

सनातन धर्म (Sanatan Dharma) के नियमों के तहत सोढ़ा क्षत्रियों में भी अपने कुल और गोत्र में शादियाँ नहीं होती हैं। इसलिए वे शादियों के लिए मुख्यत: राजस्थान और गुजरात के अन्य क्षत्रिय कुलों पर निर्भर होते हैं। वे परिवार में शादी योग्य लड़के और कन्याओं का रिश्ता खोजने के लिए भारत आते हैं। पाकिस्तान के सोढ़ा क्षत्रिय परिवार के लगभग हर घर की रिश्तेदारी भारत में है।

सोढ़ा परिवार की कुलदेवी पाकिस्तान स्थित हिंगलाज माता (Hinglaj Mata) हैं, जो हिंदुओं (Hindus) की सिद्ध शक्तिपीठ हैं। शादी के बाद सोढ़ा परिवार का लड़का या लड़की सबसे पहले अपनी कुलदेवी हिंगलाज माता का दर्जन करने पाकिस्तान जाते हैं। वैसे ही पाकिस्तान में विवाहित हिंदू भी राजस्थान में अपनी कुलदेवी के दर्शन के लिए आते हैं।

काली सूची में 900 से अधिक सोढ़ा क्षत्रिय

भारत सरकार द्वारा इन लोगों को वीसा नहीं देने और 900 लोगों को ब्लैकलिस्ट करने के बाद उनकी परेशानियाँ बढ़ गई हैं। पिछले 4-5 वर्षों में सोढ़ा राजपूतों को केंद्र सरकार वीसा नहीं जारी कर रही है। केंद्र सरकार का कहना है कि जब ये पाकिस्तानी हिंदू भारत आते हैं तो तय अवधि से अधिक समय तक रह जाते हैं।

इसको लेकर सोढ़ा राजपूतों का कहना है कि भारत में रिश्ता खोजने और तय करने में समय लग जाता है, इसलिए वे कुछ अधिक समय तक रह जाते हैं। हालाँकि, उनका यह भी कहना है कि वे इसके लिए कानून वीसा बढ़वाते हैं। वे भारत में गैर-कानूनी तरीके से नहीं रहते।

पिछले 5 पाँच वर्षों से सरकार द्वारा अपनाई गई इस वीसा नीति के कारण कई भारत और पाकिस्तान के कई लोग अपने परिवार उत्सव और दुख में शामिल नहीं हो पाए। शक्ति सिंह सोढ़ा पाकिस्तान के उमरकोट में रहते हैं और वे चार बहनों के इकलौते भाई हैं। उनकी चारों बहनों की शादी राजस्थान में हुई है।

शक्ति सिंह सोढ़ा कहते हैं कि पिछले कुछ सालों से वे वीसा के लिए आवेदन कर रहे हैं, लेकिन पाकिस्तान स्थित भारतीय दूतावास उनके आवेदन को खारिज कर दे रहा है। इसलिए वे अपनी बहनों से नहीं मिल पा रहे हैं। वहीं, कुछ ऐसे भी परिवार हैं, जिनके बुजुर्ग स्वर्ग सिधार गए या उनके घर में शादी जैसा उत्सव रहा, फिर भी वे अपने परिवार से नहीं पाए।

पाकिस्तान की इकलौती हिंदू रियासत के राजा ने ऑपइंडिया को बताई समस्या

पाकिस्तान की इकलौती हिंदू रियासत और सिंध के अमरकोट (अब उमरकोट) के क्षत्रिय राजा और पाकिस्तान के प्रसिद्ध हिंदू नेता राणा हम्मीर सिंह सोढ़ा (Rana Hamir Singh Sodha) ने इस विषय पर ऑपइंडिया से विस्तार से बात की।

राणा हमीर सिंह ने कहा, “हमारे लोग सदियों से राजस्थान और गुजरात के विभन्न क्षत्रिय कुल के लोगों में शादी-ब्याह करते हैं। बँटवारे के बाद अब पाकिस्तान स्थित सिंध के राजपूतों को भारत के गुजरात और राजस्थान जाना पड़ता है।”

भारत के राजस्थान के समीवर्ती जिलों से सटे पाकिस्तान के सिंध राज्य के थारपारकर, उमरकोट और संघार जिलों के सोढ़ा राजपूत राजस्थान में सिर्फ रिश्तों के लिए ही नहीं आते, बल्कि वे अपनी जड़ों से जुड़े धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताओं के कारण भी आते हैं।

दरअसल, कॉन्ग्रेस की सरकार ने साल 2007 में सोढ़ा राजपूतों की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए उनकी वीसा की अवधि 40 दिन से बढ़ाकर 6 महीने तक करने का निर्णय लिया था। पाकिस्तान में उच्चायुक्त रह चुके राजस्थान के तत्कालीन राज्यपाल एसके सिंह (SK Singh) ने सोढ़ा राजपूतों को 6 महीने के लिए वीसा विस्तार की इजाजत दी थी।

राणा हमीर सिंह सोढ़ा कहते हैं, “एसके सिंह पाकिस्तान में राजदूत रहे थे और वे मेरे पिताजी राणा चंद्र सिंह जी के बहुत अच्छे मित्र थे। मैंने अपने लोगों की समस्याओं को ध्यान में रखकर उनसे आग्रह किया था कि हमारे लोगों को वीसा की अवधि को बढ़ाने की सुविधा दी जाए। राज्यपाल के रूप में एसके सिंह जी ने इसकी तुरंत स्वीकृति दे दी।”

कॉन्ग्रेस शासन में पाकिस्तान के हिंदुओं को दिया गया यह वीसा विस्तार अगले 10 सालों तक यानी वर्ष 2017 तक के लिए लागू था। इस दौरान वीसा की अवधि बढ़ाने के लिए उन्हें दिल्ली जाने के जरूरत नहीं होती थी और वे विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (FRRO) से ही इसे हासिल कर सकते थे।

पाकिस्तानी सांसद को PM मोदी पर विश्वास

साल 2014 में जब केंद्र में प्रधानमंत्री नरेेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनी और साल 2017 में इसकी अवधि पूरा होने के बाद केंद्र ने इसे विस्तार नहीं दिया। इस दौरान जो भारत में थे और 6 महीने के लिए वीसा विस्तार ले चुके थे, उन्हें ‘ओवर स्टे’ बताकर ब्लैकलिस्ट यानी काली सूची में डाल दिया गया।

पाकिस्तानी सांसद राणा हमीर सिंह सोढ़ा कहते हैं, “भारत की मोदी सरकार ने पाकिस्तानी हिंदुओं के लिए अन्य सरकारों की अपेक्षा बहुत अधिक किया है और आज भी कर रही है। इसलिए इन हिंदुओं का नाम ब्लैकलिस्ट की सूची से हटा देना चाहिए।” वे कहते हैं कि जिन लोगों को ब्लैकलिस्ट किया गया है, उनके पास वीसा विस्तार के कागजात थे। इसलिए ओवरस्टे कैसे हुआ, इस पर भारत सरकार को फिर से विचार करना चाहिए।

राणा हमीर सिंह सोढ़ा कहते हैं, “पाकिस्तान से भारत जाने वाले हिंदुओं को पाँच सालों में नागरिकता आदि देने का काम भाजपा ने किया है, लेकिन इस मुद्दे को भारत में उठाने वाला कोई नेता है ही नहीं। अगर सरकार के ध्यान में यह मुद्दा आ गया तो वह इसे सॉल्व कर देगी।”

किसी पार्टी के लिए नहीं है यह मुद्दा

राणा हमीर सिंह की बातों में दम है कि किसी राजनेता ने इस मुद्दे को प्रमुखता से केंद्र के समक्ष नहीं उठाया। लेखक ने इस मामले को लेकर राजस्थान सरकार के कई स्तर के सचिवों से बात की, लेकिन अधिकांश को इस बारे में बहुत अधिक जानकारी नहीं थी। उन्हें ये भी पता नहीं था कि केंद्र के इस कदम पर राज्य सरकार ने कोई प्रतिक्रिया दी है नहीं।

इस मामले को लेकर लेखक ने विश्व हिंदू परिषद (VHP) के कई शीर्ष अधिकारियों से बात की। हर मुद्दे पर बात रखने वाले VHP के एक प्रवक्ता ने कहा कि इस मामले पर संगठन
के कार्यपालक अध्यक्ष आलोक कुमार (Alok Kumar) ही कुछ कह पाएँगे।

लेखक ने उनको फोन किया तो उनके सहायक ने उठाया और बताया कि वे मीटिंग में हैं और कुछ देर बाद बात करेंगे। लेखक ने मुद्दे से उनके सहायक को अवगत करा दिया। इसके बाद उन्हें कई बार फोन किया गया, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं की।

लेखक ने राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (CM Ashok Gehlot) से भी संपर्क किया। उनके आवास के एक अधिकारी से बात की। अधिकारी ने लेखक का फोन नंबर लेते हुए कहा कि इस मामले में शुक्रवार (10 जून 2022) को वे बयान के लिए उपलब्ध होंगे। अगर CM गहलोत इस मुद्दे पर कोई प्रतिक्रिया देते हैं तो इस लेख को अपडेट जरूर करेंगे।

कॉन्ग्रेस ने भाजपा पर लगाया आरोप

कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता और राजस्थान सरकार में मंत्री परिवहन एवं सैनिक कल्याण मंत्री प्रताप सिंह काचरियावास (Pratap Singh Khachariyawas) ने वीसा संबंधी दिक्कतों के लिए भाजपा की केंद्र सरकार को दोषी ठहराया। उन्होंने कहा कि जो काम कॉन्ग्रेस ने किया था, उसे भाजपा ने विस्तार नहीं दिया। उन्होंने कहा कि इसके लिए वे केंद्र सरकार को पत्र लिखेंगे।

ऑपइंडिया से बात करते हुए कैबिनेट मंत्री प्रताप सिंह खचरियावास ने कहा, “केंद्र सरकार ने गलत किया है। हम राज्य सरकार की ओर से इस मामले पर केंद्र को पत्र लिखेंगे और माँग करेंगे कि उन्हें सबसे पहले ब्लैकलिस्ट से हटाया जाए। इसके साथ ही इन हिंदू लोगों को तुरंत वीसा देने की सुविधा दी जाए।”

कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं सांसद शक्ति सिंह गोहिल (Shakti Singh Gohil) ने ऑपइंडिया को बताया कि पाकिस्तान से सोढ़ा परिवार और जट परिवार से लेकर तमाम हिंदू परिवार सीमावर्ती जिलों में आते रहते हैं। इन परिवारों के लिए कॉन्ग्रेस सरकार (Congress Government) ने बहुत कुछ किया है।

शक्ति सिंह गोहिल आगे बताते हैं, “वे (पाकिस्तानी हिंदू) हमारे लोग हैं। उन्हें ब्लैकलिस्ट कर देना एकदम जायज नहीं है। मैं इस मामले में प्रधानमंत्री जी से अनुरोध करूँगा और कहूँगा कि इन लोगों के एक प्रति मानवीय संवेदना अपनाएँ और उन्हें काली सूची से हटाएँ।”

कॉन्ग्रेस के दिल्ली प्रभारी गोहिल ने कहा कि गुजरात में विपक्ष के नेता रहने के दौरान उन्होंने इस मुद्दे को विधानसभा में भी उठाया था। इतना ही नहीं, उन्होंने राज्यपाल से मुलाकात कर इस समस्या का समाधान निकालने का भी आग्रह किया था। हालाँकि, मामला आज भी वैसा ही है।

सरकार इस पर काम कर रही है- भाजपा

पाकिस्तानी हिंदुओं को लेकर बेहद संवेदनशील और उनके लिए कई काम करने वाले भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता गोपाल कृष्ण अग्रवाल (Gopal Krishna Agrawal) ने इस संबंध में ऑपइंडिया से बात की।

गोपाल कृष्ण अग्रवाल ने कहा कि पाकिस्तान के ब्लैकलिस्ट किए गए 900 हिंदुओं के मामले को वे केंद्र सरकार के संज्ञान में लाएँगे। उन्होंने यह भी कहा कि जिन हिंदुओं को भारत में वीसा मिलने में दिक्कत आ रही है, उनके लिए भी वे बात करेंगे।

गोपाल कृष्ण अग्रवाल आगे कहते हैं, “भाजपा ने ही CAA जैसा कानून बनाकर पड़ोस के देशों में पीड़ित हिंदुओं को राहत देने के लिए कदम उठाया है। इसलिए कॉन्ग्रेस द्वारा कहना कि सरकार पड़ोसी देशों के हिन्दुओं के लिये काम नहीं कर रही, यह बात गलत और राजनीति से प्रेरित है।”

वीसा की समस्या से जुझ रहे पाकिस्तान के हिंदुओं के मामले पर केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत (Gajendra Singh Shekhawat) ने ऑपइंडिया से कहा कि केंद्र सरकार इस मुद्दे को लेकर बेहद संवेदनशील है और इस दिशा में काम कर रही है। जल्दी ही इसको लेकर अच्छे परिणाम सुनने को मिलेंगे।

राष्ट्रपति पद के लिए नेटिजन्स ने आरिफ मोहम्मद खान का नाम किया आगे: बोले- राष्ट्रवादी और बुद्धिमान, इस्लामी कट्टरपंथियों ने बताया ‘काफिर’

देश में राष्ट्रपति पद के चुनाव का ऐलान होने के साथ ही ट्विटर पर अगला राष्ट्रपति कौन होगा, इसको लेकर कयासों का दौरा शुरू हो गया है। इस बीच एक नाम जो सबसे अधिक चर्चा में है, वह है केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान (Arif Mohammad Khan) का। आरिफ मोहम्मद खान को ट्रेंड करा रहे नेटिजन्स का कहना है कि वे ही देश के अगले राष्ट्रपति के लिए सबसे उपयुक्त उम्मीदवार हैं।

साई किरन गुप्ता नाम के एक यूजर ने केरल के गवर्नर आरिफ मोहम्मद खान को अगले राष्ट्रपति बनते देखने कि इच्छा जताते हुए कहा, “भारत के राष्ट्रपति पद के योग्य उम्मीदवार आरिफ मोहम्मद खान हैं। बुद्धिमान, अच्छा वक्ता, अति राष्ट्रवादी, अन्य धर्मों का सम्मान करने वाला होने के साथ ही वो अनुभवी भी हैं।”

सुतार्पण बनर्जी ने भी आरिफ मोहम्मद खान को देश के अगले राष्ट्रपति के रूप में अपनी पसंद बताया। यूजर ने कहा कि केरल के गवर्नर राजनीति और धर्म को अच्छे से समझते हैं और देश को धर्म से उपर रखते हैं।

राहुल झा ने आरिफ मोहम्मद खान के बहाने हिजाब के मुद्दे को उठाया। उन्होंने कहा, “एक बार केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने कहा था कि कुरान में 7 बार हिजाब का उल्लेख किया गया है, लेकिन ड्रेस कोड के संदर्भ में नहीं।”

गौतम गाड़ा नाम के यूजर ने कहा कि वो देश के राष्ट्रपति के तौर पर आरएसएस पृष्ठभूमि वाली पूर्वोत्तर या बंगाल की एक आदिवासी महिला या आरिफ मोहम्मद खान को देखना चाहते हैं।

साभार: गौतम गाड़ा का ट्विटर अकाउंट

हालाँकि, इस्लामिक कट्टरपंथियों को आरिफ मोहम्मद खान का नाम आगे किया जाना बिल्कुल भी नहीं सुहाया। पैगंबर मुहम्मद के फैन्स नाम के यूजर ने कहा, “ये वो नाम है, जिसने चंद सिक्कों की खातिर अपने दीन व ईमान को बेच दिया है। इस शख्स का मजहब-ए-इस्लाम से कोई ताल्लुक नहीं है। ये काफिर और मुर्तद है और इस्लाम में इन जैसे गद्दार और मुनाफीको की कोई जगह नहीं।”

इसी तरह से आम आदमी पार्टी के नेता सोमनाथ भारती ने भी सूत्रों के हवाले से दावा किया कि केरल के गवर्नर आरिफ मोहम्मद खान देश के अगले राष्ट्रपति बनाए जाएँगे। आप नेता ने दावा किया कि पीएम मोदी ये कदम दुनिया भर में भारत विरोधी बयानों को जवाब देने के लिए उठा रहे हैं।

गौरतलब है कि गुरुवार को देश में अगले राष्ट्रपति के चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया गया। इसके लिए 18 जुलाई को वोटिंग होगी और 21 जुलाई को देश को नया राष्ट्रपति मिलेगा। गौरतलब है कि 24 जुलाई 2022 राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का कार्यकाल समाप्त हो रहा है।

गोंडा में 3 फकीर वाले वायरल वीडियो की सच्चाई: गाँव वाले कर रहे थे पूछताछ… क्योंकि साधु वेश में पहले भी आ चुके हैं मुस्लिम

उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा। वायरल वीडियो में कुछ ग्रामीण गाँव में आए 3 कथित फकीरों से सवाल जवाब करते हुए और बाद में उन्हें कान पकड़वा कर मुर्गा बनने के लिए कहते दिखाई दे रहे हैं। इस वीडियो के वायरल होने के बाद गोंडा पुलिस ने संज्ञान लेते हुए 2 लोगों को आरोपित कर के कार्रवाई की है।

उस वीडियो में कुछ बच्चों द्वारा कहते सुना गया, “ये सब साधु के कपड़े पहन लेते हैं और बाद में चिकन बिरयानी खाते हैं।” वहीं एक अन्य व्यक्ति ने कहा, “अभी कुछ दिन पहले ये लोग कानपुर में पत्थरबाजी किए थे।” कथित फ़कीर खुद का नाम महिरुद्दीन बता रहा है। एक लड़के द्वारा आधार कार्ड माँगे जाने पर वो भूल जाना बताता सुनाई दे रहा है। इसी के साथ वो अपना घर दुल्हापुर बता रहा। बाकी लोग भी अपना आधार कार्ड नहीं दिखा पा रहे। गाँव के कुछ लोग उन तीनों कथित फकीरों के साथ अभद्रता न करने के लिए कह रहे हैं जबकि बाकी लोग आधार कार्ड ले कर चलने की सलाह दे रहे हैं।

DSP सदर के मुताबिक, “3 व्यक्ति खरगूपुर के गाँव डींगुर में गए थे। स्थानीय लोगों द्वारा उन तीनों के नाम-पते जानने का प्रयास किया गया तो कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला। इसके बाद एक व्यक्ति द्वारा तीनों के संग अभद्र व्यवहार किया गया। इस व्यवहार पर थाना खरगूपुर में केस दर्ज किया गया। पुलिस इस तथ्य की भी जानकारी जुटा रही कि तीनों लोग कौन थे और किस काम से उस गाँव में गए थे।” वहीं ऑपइंडिया से बात करते हुए SHO खरगूपुर ने 2 आरोपितों पर कार्रवाई करते हुए उन्हें न्यायलय भेजने की बात स्वीकारी। इसी के साथ उन्होंने कथित फकीरों के बारे में भी जाँच जारी होना बताया।

कुछ ने हिन्दू धर्म तो कुछ ने योगी सरकार पर साधा निशाना

इस वीडियो के वायरल होते ही बिना पुलिस जाँच की प्रतीक्षा किए ही इसको कुछ लोगों द्वारा वायरल किया जाने लगे। कुछ ने इसको शेयर करते हुए हिन्दू धर्म के विरुद्ध कैप्शन दिया तो कुछ ने इस वीडियो के बहाने योगी सरकार पर निशाना साधा। खुद को ओवैसी की पार्टी AIMIM का आशिक बताते वाले सैयद खालिद फरीदी ने लिखा, “ये नव भारत के नव युवक का नव सोच है जो नव राजनीति पार्टी नव मुखमंत्री (बाबा) और नव पत्रकार के द्वारा दिया गया ज़हर काम कर रहा है।”

UP में आम आदमी पार्टी के नेता राशिद सिद्दीकी ने भी इसे भारतीय संस्कृति और मानवता पर हमला घोषित कर दिया।

पत्रकार वसीम अकरम त्यागी ने हिन्दू धर्म के हाईजैक होना बता कर ट्वीट किया

उर्स के लिए जबरन चंदा माँगने का आरोप

सुदर्शन न्यूज़ के UP प्रभारी रजत मिश्रा का दावा है कि कथित फकीर उर्स के लिए जबरन चंदा माँग रहे थे इस वजह से गाँव वालों ने उन्हें सबक सिखाया। रजत ने इसे ग्रामीणों की जागरूकता करार दिया है।

सुदर्शन न्यूज़ उत्तर प्रदेश के आधिकारिक हैंडल से भी यही दावा किया गया है।

कानपुर दंगों के बाद गाँव वाले बरत रहे थे सतर्कता

ऑपइंडिया ने वीडियो में कथित फकीरों से उठक-बैठक करवाने वाले आरोपित के भाई किशन तिवारी से बात की। किशन तिवारी ने बताया, “मैं तो फिलहाल घर से बाहर चल रहा हूँ पर वीडियो वायरल होने के बाद मैंने घर से पूरे मामले की जानकारी ली। वीडियो में दिख रहा व्यक्ति मेरा भाई है जिसका नाम अमरेश तिवारी है। वो पढ़ाई करता है। कुछ दिन पहले कानपुर में दंगा हुआ था। तब से लोगों के दिमाग में वही सब चल रहा था। हमारे गाँव के आस-पास मुस्लिम आबादी अच्छी खासी है। इसी के साथ ये रास्ता नेपाल की तरफ भी जाता है। हमारे गाँव में सब सतर्क थे।”

तीनों नहीं दिखा पाए कोई पहचान पत्र

किशन तिवारी ने आगे बताया, “इस दौरान गाँव में 3 लोग आए। वो सभी मुस्लिम थे। उन्हें गाँव में कोई पहचान नहीं रहा था। गाँव वालों ने उनकी पहचान पूछी तो वो कुछ ठीक से बता नहीं पाए। ही अपना कोई परिचय पत्र अदि भी दिखा सके। इसी के बाद आवेश में आ कर मेरे भाई ने उनके साथ अभद्रता कर दी। यद्द्पि उसने कोई मारपीट नहीं की है। पुलिस ने मेरे परिवार से 2 लोगों पर कार्रवाई की है। अमरेश के अलावा दूसरा व्यक्ति कृष्णमोहन है। उसी कृष्णमोहन ने ये वीडियो बनाई थी। वो फ़कीर कौन थे और अभी कहाँ है ये मुझे नहीं पता।”

पहले भी गाँव में हिन्दू साधु के रूप में आ चुके हैं 2 मुस्लिम

किशन तिवारी के मुताबिक, “लगभग डेढ़ महीने पहले हमारे गाँव में हिन्दू साधु के वेश में 2 मुस्लिम आए थे। उनके हाव-भाव से लोगों को शक हुआ तो वो भाग गए थे। हम लोग तब पुलिस को नहीं बुला कर गलती किए। भारत की आबादी में बांग्लादेशी घुसपैठी भरे पड़े हैं। उनमे से कौन किस रूप में किस से मिल जाए पता ही नहीं है। मैं खुद लखनऊ के चारबाग में कुछ माह पहले कुछ संदिग्धों को देख कर पुलिस बुला लिया था लेकिन पुलिस के आने से पहले वो सभी भाग चुके थे।” डेढ़ साल पहले गाँव में साधु वेश में आए 2 मुस्लिमों की पुष्टि उसी गाँव के शिवम शुक्ला ने भी ऑपइंडिया से बात करते हुए की।

हिन्दू प्रत्याशी को हरवा कर मुस्लिम को बनवाया ग्राम प्रधान

किशन तिवारी ने आगे बताया, “हमारे गाँव में पिछली बार प्रधानी की लड़ाई जितेंद्र शुक्ला और फरीद खान में थी। हम लोगों ने जितेंद्र शुक्ला का विरोध किया था और फरीद खान को वोट दिया था। अंततः फरीद जीत गया और जितेंद्र हार गए।” चुनाव में फरीद से हारे प्रत्याशी जितेंद्र शुक्ला ने भी ऑपइंडिया से बात करते हुए इन बातों को सही बताया।

बहरूपियों के चलते बदनाम हो रहे साधु

खरगूपुर के गाँव डींगुर के रहने वाले और पूजा-पाठ का काम करने वाले वीरेंद्र शुक्ला ने भी ऑपइंडिया से बात की। उन्होंने बताया, “गाँव में मुस्लिमों की काफी जनसंख्या है। साधू मुस्लिम वाली घटना हुई है। इसलिए अपने यहाँ साधु बदनाम होते जा रहे हैं। काम एक-दो लोग करते हैं और परेशानी सबको होती है। ऐसा लग रहा है कि जो लोग भी आए थे वो बेवकूफ बनाने वाले हैं।”

‘भाजपा में पद पाने के लिए किया गया ये सब’ : ग्राम प्रधान फरीद

किशन तिवारी ने भले ही अपने परिवार को प्रधान फरीद का वोटर और सपोर्टर बताया लेकिन फरीद ने उनके परिवार के वायरल वीडियो पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। ऑपइंडिया से बात करते हुए ग्राम प्रधान फरीद ने कहा, “हमारे गाँव में लगभग 40% मुस्लिम और 60% हिन्दू हैं। सभी मेल-मिलाप से रहते हैं। ऐसी घटना पहली बार हुई है। पीड़ित कोई अजनबी और अपरिचित नहीं बल्कि यहाँ से कुछ ही दूर के रहने वाले हैं जो बहराइच में सालार गाजी की दरगाह शरीफ के उर्स के लिए चंदा माँग रहे थे। ये सब करने वाले असल में सस्ती लोकप्रियता और भाजपा में पद पाना चाहते थे।” फरीद ने गाँव में साधु वेश में मुस्लिमों के आने की घटना से भी इंकार किया।

‘हमारा मजहब अमनपसंद, हिजाब-बुर्के पर बोला तो गला काट देंगे’: जम्मू की मस्जिद में बोला मौलाना- गाय का मूत पीने वाले हिंदुओं की औकात ही क्या

जम्मू-कश्मीर से एक बेहद खतरनाक इरादों वाला वीडियो सामने आया है, जिसमें भीड़ के सामने एक मुल्ला हिंदुओं को लिए अपशब्द कह रहा है और गला काटने की बात कह रहा है। वह धमकी दे रहा है कि अजान या हिसाब की बात हुई इसके अंजाम बुरे होंगे। इस मामले में जम्मू पुलिस ने IPC की दो धाराओं में मुकदमा दर्ज कर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर ली।

मामला जम्मू क्षेत्र के डोडा जिले बडेरवा का है। यहाँ एक मुल्ला तकरीर कर रहा है, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है। इसमें वह हिंदुओं को गाली दे रहा है और नूपुर शर्मा को गला काटने की धमकी दे रहा है।

मुल्ले के चारों तरफ सैकड़ों लोग मौजूद हैं। वीडियो में सामने मस्जिद दिख रही है और उसकी एवं अगल-बगल के मकानों की छतों पर भी लोग खड़े नजर आ रहे हैं। उसकी भड़काऊ तकरीर के बीच में भीड़ अल्लाह-हू-अकबर और या रसूल के नारे लगा रहे हैं।

इस वीडियो को शेयर करते हुए ट्विटर पर पत्रकार स्वाति गोयल शर्मा ने लिखा, “जम्मू की मस्जिद से सिर्फ नूपुर शर्मा को ही नहीं, बल्कि उनके समर्थन में लिखने वाले शख्स को सिर काटने की धमकी दी जा रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि हिजाब की आलोचना करने वालों का भी सिर कलम कर दिया जाएगा। भीड़ चिल्ला रही है- सर तन से जुदा।”

स्वाति एक अन्य ट्वीट में लिखती हैं, “आज हम इस स्थिति में हैं। यह पाकिस्तान नहीं, कश्मीर भी नहीं, बल्कि जम्मू है। मौलाना ने लाउडस्पीकर से हिंदुओं को बताया ‘गौमूत्र पीने वाला’। जम्मू के जाने-माने पत्रकार के आशीष कोहली के खिलाफ सिर्फ ‘मैं नूपुर शर्मा के साथ खड़ा हूँ’ लिखने के लिए फतवा जारी किया।”

वीडियो में मौलाना कहता है, “गाय का पेशाब पीने वालों का, गोबर के अंदर नहाने वालों की हैसियत ही क्या है दुनिया में? इनको जो रिस्क मिलता है हमारी दहशत से मिलता है। इनको जो हवा मिलती है हमारी बरकत से मिलती है। इनको जो दरिया से पानी मिलता है, हमारी बरकत से मिलता है। वरना इनका वजूद क्या है?”

गला काटकर हत्या करने की धमकी देते हुए मौलाना कहता है, “भाइयों, वक्त हमें सर कलम करना भी सिखाती है। इसलिए बातों को जेहन में बिठा दो कि हम खामोश तब तक हैं, जब तक कि हमारा बर्दाश्त कायम है। बर्दाश्त के बाहर निकल गए तो फिर नूपुर शर्मा क्या, वो आशीष कोहली कुत्ता क्या, वो नूपुर शर्मा ‘गंदी’ क्या, उनके सर कहीं और धड़ कहीं और मिलेंगे।”

मौलाना की इस तकरीर पर मस्जिद की छत और अगल-बगल के मकानों पर बैठे दर्जनों लोग खूब चिल्लाते हैं। भीड़ ‘नारा-ए-तकबीर, अल्लाह-हू-अकबर’ और ‘नारा-ए-इंशाल्लाह, या रसूल’ के नारे लगाती है।

वीडियो में मौलाना आगे कहता है, “नबी का कलमे पढ़ने वाला मुसलमान खुद मैदान में आए। ये भगवे भी हमारे दुश्मन, RSS भी हमारी दुश्मन तो मैं इसलिए अंजुमन इस्लामिया की तरफ से तमाम आवाम का शुक्रिया करता हूँ। मैं इनको (हिंदुओं) को बताना चाहता हूँ कि सबसे कम दर्जे का मुसलमान इतना ईमान रखता है कि दुनिया के किसी भी ताकत गुस्ताख-ए-नबी का सर कलम कर सकता है।”

खुद को शांतिप्रिय बताते हुए मौलाना कहता है, “हम इंसाफ पसंद हैं। हमारा मजहब अमनपसंद मजहब है। प्रशासन को चाहिए कि जो अजान के खिलाफ बोले, उसका गला पकड़े। जो पर्दे के खिलाफ बोले उनका गला पकड़े। ये गला नहीं पकड़ सकते तो हम गला काटने के लिए तैयार हैं।”

इस मामले को लेकर जम्मू पुलिस ने ट्वीट कर बताया कि आरोपित मौलाना के खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की गई है। प्राथमिकी संख्या 92/2022 में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 295-ए, 506 के के तहत भदरवा पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया है।

‘पाकिस्तान में हिन्दुओं के उत्पीड़न का एक और कार्य’: विदेश मंत्रालय ने कराची में हिंदू मंदिर में तोड़फोड़ की निंदा की

पैगंबर मुहम्मद (Prophet Muhammad) पर कथित तौर पर विवादित टिप्पणी के मामले में कई इस्लामिक देशों में मचे घमासान के बीच भारत के विदेश मंत्रालय (External Affaires Ministry) ने गुरुवार (9 जून 2022) को ये स्पष्ट कर दिया कि ऐसी टिप्पणियाँ सरकार के रुख को नहीं दर्शाती हैं। साप्ताहिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने ये बातें कही। उन्होंने कहा कि वार्ताकारों को इसके बारे में बता दिया गया है।

बागची के मुताबिक, इस तरह की टिप्पणियाँ करने वालों के खिलाफ एक्शन लिया जा चुका है और वो इसके बारे में अधिक कुछ नहीं कहेंगे। दरअसल, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता से भारत की यात्रा पर आए ईरान के विदेशमंत्री हुसैन आमिर अब्दुल्लाहियन की एनएसए अजीत डोभाल के साथ बैठक के दौरान पैगंबर मुहम्मद पर टिप्पणी का मुद्दा उठाए जाने को लेकर सवाल किया गया था। बागची का कहना है कि इस मामले में ईरान ने अपने बयान को वापस ले लिया है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने ईरान के विदेश मंत्री और भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर की बीच हुई वार्ता को लेकर स्पष्ट किया है कि बैठक के दौरान पैगंबर मुहम्मद के मुद्दे पर कोई बातचीत नहीं हुई।

वहीं पाकिस्तान में हिंदुओं पर हमले और मंदिरों में तोड़फोड़ के मुद्दे पर बागची ने कहा, “हमनें हाल ही में कराची में एक हिंदू मंदिर में तोड़फोड़ की घटना देखी है। हमारा मानना है कि यह धार्मिक अल्पसंख्यकों के प्रणालीगत उत्पीड़न का एक और कार्य है। हमने पाकिस्तान सरकार को अपने विरोध से अवगत करा दिया है, उनसे अपने अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा, सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करने का आग्रह किया है।”

चीन पर भारत की पैनी नजर

प्रेस कॉन्फ्रेंस में विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि बीते कुछ सालों में भारत सरकार ने बॉर्डर एरिया में बुनियादी ढाँचे के विकास के लिए कई तरह के उपाय किए हैं। सीमावर्ती इलाकों में चीनियों द्वारा किए जा रहे निर्माणों पर पैनी नजर रखी जा रही है। अरिंदम बागची ने कहा कि लद्दाख के पैंगोंग लेक में जिस जगह चीन अपने एक पुल के बगल में नए पुल बना रहा है वो क्षेत्र 1960 के बाद से ही उसके कब्जे में है।

16-17 जून को होगा आसियान सम्मेलन

देश में 16-17 जून को आसियान देशों की बैठक होनी है। इसमें भारत मेजबानी करेगा। इस बैठक की सहअध्यक्षता भारत के विदेशमंत्री डॉ एस जयशंकर और सिंगापुर के विदेशमंत्री विवियन बालकृष्णन करेंगे। साल 2022 को भारत आसियान मैत्री वर्ष के तौर पर नामित किया गया है।

कानपुर हिंसा में कुछ पुलिसकर्मियों से हयात जफर हाशमी की थी मिलीभगत, एसीपी और एसएचओ रैंक के अधिकारी शामिल: SIT करेगी पूछताछ

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के कानपुर में 3 जून को हुई हिंसा (Kanpur Violence) के मामले में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। टाइम्स नाऊ नवभारत की रिपोर्ट के मुताबिक, कानपुर में हुई हिंसा के मास्टरमाइंड हयात जफर हाशमी की कुछ पुलिसकर्मियों के साथ मिलीभगत थी। इन पुलिस अधिकारियों में एसीपी अकमल खान, बेकनगंज थाने के थाना प्रभारी नवाब अहमद और चौकी इंचार्ज शामिल हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, कानपुर हिंसा की जाँच के लिए गठित एसआईटी इन पुलिसकर्मियों से भी पूछताछ कर सकती है। दावा किया गया है कि हिंसा से ठीक पहले तक हयात जफर हाशमी इन पुलिस अधिकारियों के संपर्क में था। कुछ पुलिस अधिकारियों की मिलीभगत से ही इतनी बड़ी हिंसा को अंजाम दिया जा सका। इसमें ये बताया गया है कि जौहर फैंस एसोसिएशन के अध्यक्ष हयात जफर हाशमी ने पुलिसकर्मियों से बातचीत के दौरान कहा था कि वो इस हिंसा को तीन की बजाय 5 जून को करेगा। हालाँकि, आश्वासन देने के बाद भी तीन जून को ही इस हिंसा को अंजाम दिया गया।

क्या है पूरा मामला

गौरतलब है कि शुक्रवार तीन जून को जुमे की नमाज के बाद कानपुर में सड़कों पर उतरी इस्लामिक दंगाइयों की भीड़ ने जमकर पत्थरबाजी की। इसमें कई लोग जख्मी भी हुए। खास बात ये कि उस दिन देश के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कानपुर में थे। इस घटना के बाद एक्शन में आई पुलिस ने हयात जफर हाशमी को गिरफ्तार कर लिया। फिलहाल उसे 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। इतना ही नहीं कानपुर हिंसा में इस्लामिक कट्टरपंथी संगठन पापुलर फ्रंट ऑफ इंडिया का भी नाम सामने आया था।

पुलिस ने इसकी पुष्टि की थी कि हिंसा वाले दिन जफर हाशमी ने पीएफआई को फोन किया था। इस मामले सपा के नेता निजाम कुरैशी का भी नाम सामने आया है। कानपुर पुलिस ने जिन 36 दंगाइयों की 5 जून को लिस्ट जारी की थी उसमें टॉप-5 में निजाम कुरैशी का नाम था। बहरहाल इस मामले में अब तक पुलिस ने 50 आरोपितों को गिरफ्तार किया है और पत्थरबाजी और हिंसा में शामिल रहे दंगाइयों की 147 अवैध संपत्तियों को चिह्नित किया गया है।

मुस्लिम महिला को चेहरे से बुर्का हटाने के लिए कहना पड़ा भारी, 55 वर्षीय डॉक्टर दुर्व्यवहार का दोषी, साल के अंत में मिल सकती है ये सजा

इंग्लैंड के स्टोक-ऑन-ट्रेंट में एक डॉक्टर को मुस्लिम महिला को चेहरे से बुर्का हटाने के लिए कहने और उसके साथ दुर्व्यवहार का दोषी पाया गया है। एक पैनल ने डॉक्टर को दुर्व्यवहार करने का दोषी पाया है, जिसके चलते कीथ वॉल्वर्सन को अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ सकता है। यह घटना 2018 में रॉयल स्टोक यूनिवर्सिटी अस्पताल में एक नियुक्ति के दौरान हुई थी।

इस मामले में डॉक्टर कहना है, “मैंने ऐसा इसलिए कहा था, क्योंकि वह अंग्रेजी समझ नहीं पा रही थीं। मैंने उन्हें अपनी बात ठीक ढंग से समझाने और उनकी बात समझने के लिए बुर्का उतारने को कहा था। ताकि मैं फेस एक्सप्रेशन उनकी बात समझ सकूँ।”

55 वर्षीय डॉक्टर ने दावा किया कि उन्होंने श्रीमती क्यू के रूप में जानी जाने वाली महिला से अपना बुर्का उठाने के लिए इसलिए कहा था, ताकि वह उसके होंठों को पढ़कर यह समझ सकें कि वह क्या कहना चाह रही थी, लेकिन उनके कहने के बावजूद कि वह बुर्का नहीं हटाना चाहती थी।

डेली मेल के मुताबिक, डॉ वॉल्वर्सन ने 25 साल से अधिक समय तक जीपी के रूप में काम किया है। इससे पहले उनका रिकॉर्ड बिल्कुल बेदाग था, लेकिन उसके बाद उन्हें कदाचार के 28 आरोपों का सामना करना पड़ा, जिनमें श्रीमती क्यू के साथ नियुक्ति से संबंधित 16 आरोप भी शामिल थे।

कीथ वॉल्वर्सन को उनके इस व्यवहार के लिए एक मेडिकल ट्रिब्यूनल ने तीखी फटकार लगाई है। ट्रिब्यूनल ने कहा कि उन्हें ऐसा करने की कोई जरूरत नहीं थी, जब वह महिला अपना बुर्का नहीं हटाना चाहती थी।

एक मेडिकल प्रैक्टिशनर्स ट्रिब्यूनल सर्विस (एमटीपीएस) पैनल ने कहा कि ऐसी कौन सी गंभीर ​परिस्थितियाँ थीं, जिसके चलते मुस्लिम महिला को बुर्का हटाने के लिए कहना पड़ा। पैनल ने यह भी कहा कि डॉ वॉल्वर्सन को मरीजों के साथ गलत तरीके से पेश आने का भी दोषी पाया गया है। उन्होंने कहा कि वे अंग्रेजी नहीं आने पर उन्हें हतोत्साहित करते हैं।

पैनल ने फैसला सुनाया है कि डॉक्टर ने मुस्लिम महिला के साथ अनुचित व्यवहार किया। वह दुराचार का दोषी है। इस साल के अंत में तय हो जाएगा कि उसे निलंबित किया जाएगा या फिर मौजूदा मेडिकल रजिस्टार (medical register) से हटाने की सजा दी जाएगी।

सरकारी गाड़ी, VIP आरोपित: हैदराबाद गैंगरेप पर क्यों ‘कठमुल्लों की जुबान’ बोल रहे गृहमंत्री महमूद अली, हाथरस-कठुआ वाला गैंग भी मौन

हैदराबाद में नाबालिग गैंगरेप मामले में लंबी पड़ताल के बाद सारी जानकारी मीडिया में अब साफ है। सबको पता चल चुका है कि कैसे AIMIM विधायक के बेटे और भतीजे के तार इस गैंगरेप से जुड़े हैं और किस तरह पूरी वारदात को एक सरकारी गाड़ी में अंजाम दिया गया। मीडिया चैनलों पर तो इस केस की रोज चर्चा हो ही रही है लेकिन इसी बीच गैंगरेप केस को ‘एडवांस जमाने की गलती’ बताने वाले तेलंगाना के गृहमंत्री महमूद अली भी आखिरकार अपने संवेदनहीन ‘बयान’ की लीपापोती में जुट गए हैं। 

दरअसल कुछ दिन पहले से ही तेलंगाना के गृह मंत्री इस मामले में उन ‘कठमुल्लों’ की तरह ही बात करते दिख रहे हैं जिनको लगता है कि महिलाओं के साथ अपराध उनके छोटे कपड़ों की वजह से होता है। जो लड़कियों के मोबाइल इस्तेमाल नहीं करने को लेकर फतवा जारी करते हैं। महमूद अली ने टीवी 9 मीडिया से बात करते हुए रेप केस को गलती की श्रेणी में रखा था जिसके बाद उनकी गिनती उन लोगों में शुरू हो गई थी जो रेप मामले में लड़कों को बचाने के लिए घृणित अपराध को ‘भूल’ बता कर जस्टिफाई करते हैं। हमने भी उन्हें इस संबंध में खुला पत्र लिखा था… अब एक बार फिर उनका इस मामले में नया बयान आया है। महमूद अली ने अब गैंगरेप का सारा ठीकरा मोबाइल फोन और व्हॉट्सएएप आदि को दिया है और इनके ही सहारे पहले वाले बयान को दबाने की कोशिश की है।

उन्होंने इस बार कहा कि नए जमाने में बच्चे मोबाइल और व्हॉट्सएप के कारण बिगड़ रहे हैं। ये माँ-बाप की जिम्मेदारी है कि वो उनपर नजर बनाए रखें। अपने बयान में महमूद अली ने हर माता-पिता से कहा कि अगर वो लोग अपने बच्चों को इस तरह खुले में घूमने के लिए छोड़ देंगे तो फिर उन्हें संभालना मुश्किल हो जाएगा। इसलिए जरूररी है कि उनके ऊपर ध्यान दिया जाए।

महमूद अली का गैंगरेप मामलों पर ऐसा बचकाना बयान कोई चौंकाने वाला नहीं है। उन्होंने साल 2019 में भी यही किया था और अब 2022 में भी उनकी यही संवेदनहीनता देखने को मिली है। लेकिन, एक गैंगरेप मामले में तथाकथित नारीवादियों की चुप्पी इस बार फिर हैरान करने वाली है। क्या आपने नोटिस किया कि हैदराबाद का पूरा केस इतना हाईप्रोफाइल है। आरोपितों में AIMIM नेता के बेटे का नाम है। बच्चों के साथ माता-पिता पर केस दर्ज करने की बात पुलिस कर रही है। लेकिन बावजूद इतना सब होने केे अब तक उस गैंग की आँख नहीं खुली है…।

कठुआ गैंगरेप मामले में हिंदुस्तान पर शर्मिंदा होने वाली लॉबी और हाथरस रेप केस में सरकार को कोसने वाली नारीवादी…चंद दिनों से शांत हैं। न सरकार से सवाल हुआ। न आरोपित के पिता से इस्तीफे की माँगे गए और न ही इंसानियत के नाते उस लड़की को इंसाफ दिलाने के पोस्ट शेयर हुआ। यदि इस पूरे मामले में कोई काम तेजी से हुआ तो वो उस भाजपा नेता पर कार्रवाई का था जिसने पूरे केस में AIMIM नेता की संलिप्ता को दुनिया के सामने पेश किया। जिसके बाद कुछ दिनों में उन्हें पकड़ लिया गया क्योंकि ये सबूत दिखाते समय पीड़िता की पहचान भी उजागर हो गई थी।

ध्यान दीजिए कि इस केस में भाजपा नेता द्वारा किए गए खुलासे से पहले मीडिया में आई खबरों ने इस बात को बताया था कि पुलिस भी AIMIM विधायक के बेटे की संलिप्ता मना कर रही है लेकिन जब सबूत सबके सामने आया तो उन्हें इस केस में विधायक के बेटे को भी गिरफ्तार करना पड़ा। छानबीन के बाद बताया गया कि रेप केस में विधायक के बेटे का हाथ नहीं है मगर उसने लड़की से दुर्व्यवहार किया है इस बात को नहीं नकारा जा सकता। पुलिस भी बाहरी माहौल देख ये मान गई कि केस AIMIM नेता के बेटे से जुड़ा है। मगर गृहमंत्री महमूद अली एक ओर से इसे एडवांस जमाने में हुई गलती की तरह दिखा रहे है और दूसरी ओर उस महिला गैंग की आँख का पानी मर गया है जिन्हें ये होश नहीं है कि कम से कम खुद को निष्पक्ष दिखाने के लिए वो दो लाइन में इस केस की निंदा कर दें। या शायद ये कह सकते हैं कि हैदराबाद में नाबालिग से हुई ज्यादती पर आँसू बहाना उनके एजेंडे पर फिट नहीं बैठता।