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अलीगढ़ में 9 कोचिंग संचालकों पर FIR, उपद्रवियों ने फूँक दी थी चौकी: 55 नामजद और 500 अज्ञात, अब तक 36 दबोचे गए

अग्निपथ योजना के खिलाफ हिंसा में बिहार के बाद उत्तर प्रदेश प्रभावित रहा। इसमें अलीगढ़ जिला UP के सबसे अधिक हिंसाग्रस्त जिलों में शामिल है। यहाँ पर बीते 17 जून को न सिर्फ यमुना एक्सप्रेस पर तोड़फोड़ करत्ते हुए सड़क को जाम करने का प्रयास किया गया था बल्कि जट्टारी नाम की पुलिस चौकी में भी आग लगा दी गई थी। अब अलीगढ़ पुलिस ने हिंसा के आरोपितों और सूत्रधारों पर नकेल कसनी शुरू कर दी है। खास बात ये है कि यहाँ भी हिंसा को हवा देने वालों में कोचिंग संचालकों की भूमिका सामने आई है।

अलीगढ़ रेंज के DIG दीपक कुमार के मुताबिक, “घटना के दिन पुलिस बल जुमे की नमाज़ को ले कर सक्रिय था। छात्रों के आंदोलन के भी इनपुट थे। उनसे बात चल रही थी। भीड़ में छिपे कुछ अराजक तत्वों ने माहौल को खराब करने का प्रयास किया। सोशल मीडिया पर मामले को हवा देने वालों पर एक्शन लिया जा रहा है। सैनिक कल्याण बोर्ड कोचिंग इंस्टिट्यूट वालों से लगातार सम्पर्क में है। अब तक इस मामले में 4 FIR दर्ज हुई है। छात्रों को भड़का रहे कोचिंग सेंटर वालों को भी हिरासत में ले कर पूछताछ चल रही है। अब तक 36 से ज्यादा आरोपितों की गिरफ्तारी की जा चुकी है। यह संख्या अभी बढ़ेगी क्योंकि पुलिस टीमें दबिश दे रही हैं। FIR पुलिस, रोडवेज और नगर पालिका द्वारा करवाया गया है।”

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अलीगढ़ पुलिस ने जिस कोचिंग सेंटरों पर केस दर्ज किया है उसमें तिरुपति कोचिंग सेंटर संचालक रामकुमार, गुरुकुल कोचिंग सेंटर संचालक जट्टारी अमित चौधरी, कोचिंग सेंटर संचालक मोहन चौधरी, यंग इंडिया कोचिंग सेंटर संचालक सुधीर शर्मा, केडी इंस्टीट्यूट संचालक गौरव चौधरी, समन्वय कोचिंग सेंटर संचालक विजय उर्फ मॉटी, जीएस कोचिंग सेंटर संचालक पुष्पेंद्र सिंह, गुलिया लाइब्रेरी संचालक केशव चौधरी शामिल हैं। हिंसा में किसी भी प्रकार की भूमिका निभाने वाले 55 आरोपितों को नामजद करते हुए 500 को अज्ञात में रखा गया है। इसमें 9 कोचिंग संचालक शामिल हैं।

पुलिस द्वारा गिरफ्तार एक अन्य कोचिंग संचालक नवीन कुमार ने तो छात्रों से हथियार उठा लेने की अपील वाला भड़काऊ पोस्ट डाला था। इनके अतिरिक्त भर्मेंद्र, पुष्पेंद्र पर भी इंटरनेट से उकसाने वाले संदेश भेजे गए थे। इन पर भी पुलिस कार्रवाई की जा रही है। वहीं आज शनिवार (18 जून) को एक बार फिर से अलीगढ़ में उपद्रव की साजिश को पुलिस ने नाकाम कर दिया। खैर कस्बे में छात्रों के नाम पर जमा कुछ लोगों ने माहौल बिगाड़ने की कोशिश की। हालाँकि पुलिस ने समय रहते उन्हें काबू कर लिया।

‘राम पर बोलो, कृष्ण पर बोलो… बस पैगंबर पर नहीं बोल सकते’ : VHP अध्यक्ष ने नुपूर को बताया ‘सही’, बोले- इस्लाम नहीं थोप सकता सेंसरशिप

ज्ञानवापी में शिवलिंग मिलने के बाद शुरू हुआ महादेव का अपमान और नुपूर शर्मा केस में कट्टरपंथियों की धमकियाँ आना अभी रुकी नहीं है। ऐसे में हाल में विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार का बयान आया है। उन्होंने बेबाकी से काशी मथुरा समेत तमाम मुद्दों पर बात करते हुए ध्यान दिलाया कि कैसे हिंदू होकर लोग श्रीराम भगवान, श्रीकृष्ण भगवान के बारे में बात कर लेते हैं, लेकिन कोई पैगंबर मोहम्मद से जुड़ी बातें नहीं कर सकता है।

आर्गेनाइजर को दिए इंटरव्यू में आलोक कुमार ने कहा कि नुपूर शर्मा ने अपने बयान में कुछ गलत नहीं कहा। उन्होंने जो कहा पैगंबर मोहम्मद के जीवन से जुड़े दो किस्सों पर था। उनके बयान में सिर्फ उनकी टोन गलत थी। अभी ये मामला कोर्ट में है और कोर्ट निर्णय लेगा कि क्या सही बोला गया और क्या गलत।

नुपूर शर्मा केस पर बात करते हुए आलोक कुमार ने ध्यान दिलाया कि कैसे नुपूर द्वारा केवल पैगंबर मोहम्मद का जिक्र कर देने से उन्हें ये नफरत झेलनी पड़ी। आलोक आगे बताते हैं कि एक बार पैगंबर मोहम्मद की बेटी पर एक फिल्म बनी तो पूरे विश्व में उसका विरोध हुआ। मगर इंग्लैंड ने उसके लिए लड़ाई लड़ी। फिल्म अब फ्री है। हर कोई उसे देख सकता है। फिल्म नेटफ्लिक्स पर भी उपलब्ध है।

उन्होंने कहा, “इस्लाम हमारे ऊपर एक तरह की सेंसरशिप को नहीं थोप सकता जैसा उसने विश्व के कई कोनों में हुआ।” उन्होंने नाराजगी जाहिर करते हुए आगे कहा, “हम राम के बारे में बोल सकते हैं, श्रीकृष्ण के बारे में बोल सकते हैं। लेकिन पैगंबर मोहम्मद के बारे में अपने मुँह से नहीं बोल सकते। वो इनके लिए बिलकुल अस्वीकार्य हो जाता है।”

उन्होंने कहा कि वो हिंदू होने के नाते रामचरितमानक की चौपाइयों पर आधारित धर्म से जुड़े जवाब देते हैं और इन्हें उसमें कोई अपमान नहीं लगता। वह बोले भारत जैसे देश में जहाँ हर धर्म का सम्मान होता है। लोग अन्य धर्मों की जानकारी से लेते हैं। वाजिब सवाल उठाते हैं। अब जब तक ये सवाल अपमान न करने वाले हों तब तक हर उचित सवाल कानून के दायरे में आता है चाहे वो पैगंबर पर हो या कुरान पर हो।

हिंदू धर्म और उनके त्योहारों पर उड़ते मजाक को लेकर आलोक ने उन्होंने कहा कि विश्वहिंदू परिषद और बजरंग दल सड़कों पर उतरकर इन चीजों को विरोध करने वाली है और मुस्लिमों द्वारा की गई हिंसा और हिंदू देवी-देवताओं के उड़े मजाक पर इस संबंध में सरकार को ज्ञापन भेजा जाएगा। वीएचपी उन लोगों को कोर्ट में लेकर जाएगी और सिविल सोसायटी में उनसे आमना सामना होगा। पूछा जाएगा कि क्या अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सबके लिए है या नहीं?

बता दें कि नुपूर शर्मा केस पर बोलने के अलावा आलोक कुमार मथुरा काशी मुद्दे पर भी स्पष्ट टिप्पणी देने के बाद चर्चा में आए हैं। उन्होंने रायपुर में विश्व हिंदू परिषद की बैठक में मीडिया चर्चा के दौरान कहा कि काशी विश्वनाथ और मथुरा श्रीकृष्ण जन्मस्थल को लेकर किसी प्रकार का विवाद नहीं होना चाहिए। यह स्थान हिंदुओं के हैं और हिंदुओं को वापस मिलने चाहिए। ये माँग विश्व हिंदू परिषद के एजेंडे का भी हिस्सा और इसे लेकर संगठन काम कर कर रहा है।

उन्होंने देश में बिगड़ते माहौल को लेकर भी साफ किया कि वो किसी हिंसक घटना का समर्थन नहीं करते। वीएचपी जो करेगा कानून और संविधान के विरुद्ध जाकर नहीं करेगा। उन्होंने समाज में मुस्लिम समुदाय द्वारा की जा रही हिंसा की निंदा की और आरोपितों के विरुद्धा संवैधानिक कार्रवाई की माँग की। उन्होंने कहा कि इन चीजों से निपटने में पुलिस सक्षम है लेकिन जरूरत पड़े तो संगठन सामने आएगा।

BJP सांसद प्रज्ञा ठाकुर को फिर मिली हत्या की धमकी: खुद को दाऊद के भाई का आदमी बताने वाले को साध्वी ने ललकारा- हिम्मत है तो सामने आ

मध्य प्रदेश के भोपाल से भाजपा सांसद और तेज-तर्रार नेता साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर (Sadhvi Pragya Singh Thakur) को एक बार फिर जान से मारने की धमकी मिली है। सांसद के ह्वाट्सएप कॉल पर फोन कर हत्या की धमकी देने वाला खुद को अंडरवर्ल्ड सरगना इकबाल कासकर का आदमी बताया। वहीं साध्वी ने उसे ललकारा है कि हिम्मत है सामने आ।

घटना शुक्रवार (17 जून 2022) की देर रात करीब 1:30 बजे के आसपास की है। लोकसभा सांसद साध्वी ठाकुर के फोन पर एक अज्ञात नंबर से ह्वाट्सएप कॉल आया। उसने खुद को इस्लामिक आतंकी और अंडरवर्ल्ड सरगना दाऊद इब्राहिम के भाई इकबाल कासकर का आदमी बताया।

फोन करने वाले शख्स ने कहा, “जल्दी ही तुम्हारी हत्या होगी। मुझे तुम्हें इसकी सूचना देनी थी इसलिए दे दी।” इसके बाद साध्वी ने उस व्यक्ति से पूछा कि वह उन्हें क्यों मारना चाहता है। इस पर उसने कहा कि जल्द ही पता चल जाएगा। इस साध्वी बोली, “जब मैं मर जाऊँगी तब पता कैसे चलेगा?”

इस पर धमकी देने वाले शख्स ने कहा, “तुम मुस्लिमों को निशाना बनाती हो, उनसे नफरत करती हो और उनके खिलाफ आग उगलना हो। हम तुम्हें नहीं छोड़ेंगे। तुम्हें सूचना देनी थी तो दे दी। हमारा जो आदमी तुम्हें मारेगा वो बताएगा की तुम्हारी हत्या क्यों की जा रही है।”

इस पर साध्वी ने चुनौती देते हुए कहा कि हिम्मत है तो सामने आकर दिखा। साध्वी प्रज्ञा कहती हैं, “मुसलमान क्या अमृत बरसाते हैं? जिगर है तो सामने आकर ये बोलते। फालतू की बात नहीं करना।” इसके बाद वह फोन काट देती हैं। 

साध्वी को किए गए कॉल का वीडियो सामने आया है और यह खूब वायरल हो रहा है। वहीं, इसकी रिकॉर्डिंग थाने में देते हुए सांसद कार्यालय ने मामले की सूचना भोपाल के टीटीनगर को दी। थाना प्रभारी चैन सिंह रघुवंशी के अनुसार, इस संबंध में मामला दर्ज कर लिया गया है।

शिकायत के आधार पर पुलिस ने अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 506 (आपराधिक धमकी) और 507 बेनामी संचार द्वारा आपराधिक धमकी) के तहत मामला दर्ज किया है। इसके बाद इसकी जाँच शुरू कर दी है।

बता दें कि हाल ही में साध्वी प्रज्ञा ने पैगंबर मुहम्मद विवाद को लेकर भाजपा से निष्कासित की गई पार्टी की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा का समर्थन किया था। उन्होंने कहा था कि अगर सच बोलना बगावत है तो वह भी बागी हैं।

यह पहली बार नहीं है, जब साध्वी प्रज्ञा को इस तरह अनजान नंबर से कॉल कर जान से मारने की धमकी मिली है। सांसद बनने के तुरंत बाद ही उन्हें इसी तरह की धमकी मिली थी। उसके बाद से उन्हें कई बार अनजान नंबरों से जान से मारने की धमकी मिल चुकी है।

कमिश्नर के मॉर्निंग वॉक के लिए ब्लॉक हो जाती थी सड़क, ट्रैफिक भी डायवर्ट: स्कूली बच्चों को परेशानी, ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी

देश की राजधानी दिल्ली में कुत्ते को टहलाने के लिए स्टेडियम को खाली करवाने वाले मामले के बाद अब केरल से एक ट्रैफिक पुलिस अधिकारी के द्वारा मॉर्निंग वॉक के लिए ट्रैफिक रोके जाने की घटना सामने आई है। इस मामले में पुलिस अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

केरल के कोच्चि में एक सड़क के एक हिस्से को प्रशासन ही अवरुद्ध कर रहा था। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जब पुलिसकर्मी मॉर्निंग वॉक पर गए तो क्वीन्स वॉकवे के बगल की सड़क मोटर वाहनों के लिए बंद थी।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, कोच्चि में असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ ट्रैफिक वेस्ट विनोद पिल्लई रोज सुबह क्वीन्स वॉकवे पर जाते हैं। ऐसे में लोगों का आरोप है कि वाकवे के बगल की सड़को गाड़ियों की आवाजाही को रोक दिया जाता है। कहा जा रहा है कि इस सड़क को रविवार को सुबह 6-7 बजे के दौरान बंद कर दिया जाता है, ताकि युवा साइकिल चलाने और स्केटिंग करने की प्रैक्टिस कर सकें। हालाँकि, आरोप यह भी हैं कि ट्रैफिक पुलिस अधिकारी ने अपनी सुबह की सैर करने के लिए पूरे सप्ताह के लिए सड़क को ब्लॉक कर दिया।

बहरहाल मामला सामने आने के बाद इस पर अधिकारियों का कहना है कि कोच्चि में क्वीन्स वॉकवे सुबह-सुबह टहलने वाले और जॉगिंग करने वालों का पसंदीदा मार्ग है और उनकी सुरक्षा को देखते हुए आमतौर पर बैरिकेड्स लगाए जाते हैं। जबकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि ये सड़क बीते तीन दिनों से बंद पड़ी है और इस कारण आवागमन काफी दिक्कतभरा हो गया है।

पुलिस के द्वारा सड़क पर लगाया गया बैरिकेड (फोटो साभार: इंडिया टुडे)

सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरों के मुताबिक, ट्रैफिक को डायवर्ट कर दिया गया है और स्कूली बच्चों को जबरन उल्टी दिशा वाली बसों में चढ़ने के लिए मजबूर किया गया। सड़क के बीचों बीच एक लाल रंग का बैरिकेड्स भी रखा गया है।

बच्चों को उल्टी दिशा में लौटना पड़ा (फोटो साभार: इंडिया टुडे)

दिल्ली में कुत्ते के लिए स्टेडियम को कराया था खाली

इसी तरह की घटना देश की राजधानी दिल्ली में भी सामने आई थी। घटना दिल्ली के त्यागराज स्टेडियम की थी। जिसमें दिल्ली सरकार के राजस्व विभाग के प्रिंसिपल सेक्रेटरी संजीव खिरवार पर ये आरोप लगा था कि स्टेडियम में प्रैक्टिस करने के लिए आने वाले एथिलीटों और कोचों को शाम सात बजे से पहले ही स्टेडियम छोड़ने के लिए मजबूर किया जाता था। ताकि आईएएस अधिकारी अपने कुत्ते को स्टेडियम में टहला सकें। इस घटना के सामने आने के बाद देशभर में इसकी चर्चा हुई थी।

इस घटना के बाद एक्शन लेते हुए गृह मंत्रालय ने आईएएस अधिकारी संजीव खिरवार (Sanjeev Khirwar) का लद्दाख ट्रांसफर कर दिया था। जबकि, उनकी IAS पत्नी रिंकू दुग्गा (Rinku Dugga) का तबादला अरुणाचल प्रदेश किया गया था।

तकिए के नीचे कुरान बना सेक्स वर्कर की मौत का कारण: अबूबकर, मंसूर और युसूफ ने चाकुओं से गोदा, फिर ज़िंदा जला डाला

अफ्रीकी देश नाइजीरिया में एक महिला सेक्स वर्कर (Sex Worker) को कुरान पढ़ना उसकी मौत का कारण बन गया। दरअसल, सेक्स वर्कर अपने कमरे में तकिए के नीचे मुस्लिमों की मजहबी किताब कुरान रखा था। उसके एक ग्राहक ने उसे देख लिया। इसके बाद उस ग्राहक ने महिला को को पीटा, फिर चाकू मारा और अंत में जिंदा आग के हवाले कर मार दिया।

घटना नाइजीरिया के लागोस (Lagos) शहर के अलाबा रागो की है। यहाँ हन्ना सलिउ (Hannah Saliu) नाम की एक महिला सेक्स वर्कर का काम करती थी। वहाँ एक आदमी संबंध बनाने के लिए आया। इसके बदले में उसने हन्ना को 1,000 नाइरा (लगभग 187 रुपया) दिया।

ग्राहक के जाने के बाद हन्ना ने देखा कि उसके पास रखा 5,000 नाइरा गायब है। इसके बाद हन्ना ने अपने ग्राहक का पीछा किया और गायब हुए पैसे के बारे में बताते हुए उस पर चोरी करने का आरोप लगाया। इसको लेकर दोनों के बीच बहस होने लगी।

हालाँकि, ग्राहक ने पैसे चुराने से मना किया और कहा कि वह अपने दोस्तों के साथ उसके कमरे में रखा पैसे खोजेगा। हन्ना के साथ आकर ग्राहक अपने दोस्तों के साथ कमरे में पैसे खोजने लगा। इसी दौरान उसने देखा कि तकिए के नीचे कुरान रखा हुआ है। इसके बाद वे लोग महिला को बुरी तरह पीटने लगे।

ग्राहक और उसके दोस्तों ने सेक्स वर्कर को बुरी तरह पीटने के बाद उसके शरीर पर चाकू से कई वार किए। इसके बाद उसे बाहर लाकर जिंदा ही आग के हवाले कर दिया। इस तरह इन लोगों ने चोरी का आरोप लगाने वाली उस सेक्स वर्कर को मौत के घाट उतार दिया।

pulp.ng की खबर के अनुसार, तकिए के नीचे कुरान मिलने के बाद आरोपित महिला सेक्स वर्कर से पूछने लगे कि एक वेश्या होकर भी उसके लिए कुरान का क्या उपयोग है। आरोपितों के अनुसार, जिस तरह का वह काम कर रही थी उसके हिसाब से उसे अपने पास कुरान नहीं रखना चाहिए था।

महिला सेक्स वर्कर नाइजीरिया के उत्तरी इलाके की रहने वाली थी और आरोपित भी उत्तरी हिस्से से आए थे। जहाँ यह घटना हुई है उस इलाके में मुल्क के इस हिस्से बहुत सारे लोग बसे हैं। पुलिस ने बताया कि आरोपितों की पहचान अबूबकर मूसा, सरौता मंसूर और सुराजो युसूफ के रूप में हुई है।

‘तपस्या में कमी’ वाले पवन खेड़ा को कॉन्ग्रेस ने पकड़ाया ‘झुनझुना’, सौंपी मीडिया और प्रचार की कमान: नेटीजन्स बोले- लॉलीपॉप देकर फुसला दिया

कॉन्ग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा को कॉन्ग्रेस हाईकमान ने बड़ी जिम्मेदारी दी है। ऑल इंडिया कॉन्ग्रेस कमेटी की ओर से जारी की गई प्रेस रिलीज में बताया गया है कि पार्टी अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने पवन खेड़ा को मीडिया एंड पब्लिसिटी का जिम्मा सौंपा है।

रिलीज में कहा गया, “कॉन्ग्रेस अध्यक्ष ने पवन खेड़ा को नए कम्युनिकेशन विभाग के मीडिया एंड पब्लिसिटी सेल का चेयरमैन नियुक्त करने पर मुहर लगाई है।”

बता दें कि बीते दिनों कॉन्ग्रेस द्वारा राज्यसभा भेजे जाने से नाराज पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी को व्यक्त किया था। पवन खेड़ा ने ट्वीट में कहा था, “शायद मेरी तपस्या में ही कमी रह गई।” इस ट्वीट को देख उनके कई समर्थकों ने भी कहा था कि कॉन्ग्रेस ने उन्हें राज्यसभा न भेजकर गलती की।

हालाँकि अब जब पवन खेड़ा को कॉन्ग्रेस हाईकमान ने मीडिया और प्रचार की नई जिम्मेदारी दे दी है, तो दोबारा से नेटीजन्स की प्रतिक्रिया आना शुरू हो गई है। बीते दिनों पवन खेड़ा की नाराजगी और अब मिली नई जिम्मेदारी देखते हुए कुछ लोगों ने कहा कि पवन खेड़ा कि थोड़ी-थोड़ी तपस्या सफल हुई। वहीं कुछ ने कहा, “झुनझुना पकड़ा दिया खेड़ा को। तपस्या में कमी रह गई।”

राजमणि नाम के यूजर ने पवन खेड़ा को मिली इस नई जिम्मेदारी को ‘सांत्वना पुरस्कार’ बताया।

एक यूजर ने कहा, “इतने सालों की तपस्या और बस एक लॉलीपॉप देकर कॉन्ग्रेस परिवार ने फुसला दिया।”

एक यूजर ने तंज कसते हुए कहा, “पवन खेड़ा को एक और झुनझुना दे दिया गया हाथ में। वह चाहते थे रसगुल्ला पर मिली रेवड़ी। चिल्लाते रहो परिवार के लिए मीडिया में बस।”

उल्लेखनीय है कि कॉन्ग्रेस की ओर से पिछले दिनों जारी की गई लिस्ट में 10 नाम थे जिन्हें राज्यसभा भेजा गया था। उनमें हरियाणा से अजय माकन, कर्नाटक से जयराम रमेश, मध्य प्रदेश से विवेक तन्खा, छत्तीसगढ़ से राजीव शुक्ला और रंजीत रंजन, महाराष्ट्र से इमरान प्रतापगढ़ी ,राजस्थान से रणदीप सुरजेवाला, मुकुल वासनिक, प्रमोद तिवारी और तमिलनाडु से पी चिदंबरम थे। इस लिस्ट को देखने के बाद पवन खेड़ा, नगमा मोरारजी समेत कई कॉन्ग्रेसियों में नाराजगी जताई थी।

जेल में ही रहेंगे AAP के मंत्री सत्येंद्र जैन, CBI कोर्ट ने खारिज की याचिका: ED से कहा था – कोरोना के कारण चली गई है याददाश्त

कोलकाता की एक कंपनी से जुड़े मंनी लॉन्ड्रिंग के केस में प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा गिरफ्तार किए गए आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता और दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र कुमार जैन (Satyendra Jain) को जेल ही नसीब हुई है। कोर्ट ने शनिवार (18 जून 2022) को उनकी जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। ये फैसला सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने सुनाया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, जैन ने 9 जून 2022 को एक जमानत याचिका दाखिल की थी, जिस पर मंगलवार (14 जून, 2022) को सुनवाई करने के बाद स्पेशल जस्टिस गीतांजलि गोयल ने अपने फैसले को सुरक्षित रख लिया था। आज उन्होंने इस पर अपना फैसला सुनाया। कोर्ट में सुनवाई के दौरान उनकी पैरवी को वकील एन हरिहरन और भावुक चौहान ने की।

जैन ने हरिहरन के हवाले से सबूतों को नष्ट करने या उनसे छेड़छाड़ के आरोपों पर तर्क दिया, उनके वकील ने कहा कि सबूतों के साथ छेड़छाड़ की कोई संभावना नहीं है, क्योंकि सबूतों को पहले ही इकट्ठा किया जा चुका है। उन्होंने कहा, “गवाह उपलब्ध हैं। मैं ट्रिपल टेस्ट से संतुष्ट हूँ और गवाहों को प्रभावित करने का कोई आरोप भी नहीं है। जब मैं बाहर था ऐसा करने का मौका भी मिला था, लेकिन मुझ पर ऐसा कोई आरोप नहीं लगा। ये जानबूझकर जमानत को खारिज कराने के लिए किया जा रहा है।”

उल्लेखनीय है कि प्रवर्तन निदेशालय की तरफ से विशेष अभियोजक एनके मट्टा और एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू पेश हुए। उन्होंने कोर्ट में बताया कि ये मामला करेंसी को लीगलाइज और मनी लॉन्ड्रिंग का है।

क्या है पूरा मामला

गौरतलब है कि सत्येंद्र जैन को हवाला लेनदेन के मामले में 30 मई 2022 को प्रवर्तन निदेशालय ने गिरफ्तार किया था। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कोलकाता की एक कंपनी से जुड़े हवाला लेनदेन के मामले में जाँच में पाया गया था कि 2015-16 के दौरान सत्येंद्र जैन एक लोकसेवक थे, तो उनके द्वारा लाभकारी स्वामित्व वाली और नियंत्रित कंपनियों को हवाला के जरिए कोलकाता बेस्ड एंट्री ऑपरेटरों को नकद ट्रांसफर के बदले शेल कंपनियों से 4.81 करोड़ रुपए प्राप्त हुए थे। सत्येंद्र जैन फिलहाल ईडी की 14 दिनों की रिमांड पर हैं।

दिल से सटाया पिस्तौल, फिर मार दी गोली: कश्मीर में आतंकियों ने की सब-इंस्पेक्टर की हत्या, खेत में जाते समय किया था अपहरण

जम्मू कश्मीर के पुलवामा में आतंकियों ने एक पुलिस सब इंस्पेक्टर की हत्या कर दी है। बलिदान हुए पुलिसकर्मी का नाम फारूक अहमद मीर है। उनका गोलियों से छलनी शव पम्पोर इलाके के एक खेत में मिला है। सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके को घेर कर तलाशी अभियान शुरू कर दिया है। घटना शुक्रवार (17 जून 2022) की है।

18 जून को कश्मीर पुलिस के मुताबिक सब इंस्पेक्टर फारूक अहमद मीर मूल रूप से सम्बूरा के रहने वाले थे। जम्मू-कश्मीर पुलिस की IPR 23 बटालियन में तैनात थे। आरम्भिक जाँच में निकल कर सामने आया है कि वो शुक्रवार को अपने खेतों की तरफ गए थे जहाँ आतंकियों ने उनकी हत्या कर दी। हत्या के लिए पिस्टल का प्रयोग किया गया है।

सब इंस्पेक्टर फारूक की हत्या की खबर सुन कर उनके परिवार में कोहराम मच गया। बाद में उनके पर्थिव शव को राजकीय सम्मान के साथ तिरंगे के ताबूत में रख कर ले जाय गया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जाँच के दौरान पुलिस ने मौके से 2 कारतूस बरामद किया है। मृतक दारोगा की उम्र लगभग 50 वर्ष थी। उनके परिवार में उनके पिता अब गनी मीर के अलावा पत्नी, 2 बेटियाँ और 1 बेटा शामिल है। हत्या के लिए उनके दिल के पास गोली मारी गई बताया जा रहा है। अंदाजा इस बात का भी लगाया जा रहा है कि अपने धान के खेतों की तरफ जा रहे फारूक का पहले अपहरण हुआ। बाद में किसी सुनसान स्थान पर ले जा कर उनकी हत्या की गई। आतंकी किस समूह या संगठन से जुड़े थे यह जानकारी अभी तक नहीं मिल पाई है।

उपद्रवियों के मोबाइल में कोचिंग सेंटरों के वीडियो, पटना DM ने दिए जाँच के आदेश: व्हाट्सएप्प कॉल से पुलिस को दिया जा रहा चकमा

भारत सरकार की अग्निपथ योजना (Agnipath Scheme) को लेकर बिहार (Bihar) में वबाल पर अब वहाँ के कोचिंग सेंटर सरकार के रडार पर आ गए हैं। पटना जिला प्रशासन को शक है कि हो सकता है अग्निपथ योजना के खिलाफ आग कोचिंग सेंटरों से ही भड़की हो। इसी को देखते हुए पटना के जिलाधिकारी डॉ चंद्रशेखकर ने इनकी भूमिका की जाँच का आदेश जारी किया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, डॉ चंद्रशेखर ने सख्त लहजे में चेतावनी दी है कि अगर कहीं भी कोचिंग चलाने वालों की भूमिका इस हिंसक आंदोलन में नजर आई तो कोचिंग संचालकों के खिलाफ कड़े से कड़ा एक्शन लिया जाएगा। वीडियो फुटेज के जरिए उपद्रवियों की तलाश की जा रही है।

क्यों रडार पर हैं बिहार के कोचिंग सेंटर

‘अग्निपथ’ योजना के विरोध में बिहार सुलग रहा है। दानापुर रेलवे स्टेशन में तोड़फोड़ और आगजनी के मामले में पुलिस ने 170 मामले दर्ज किए हैं और 46 उपद्रवियों को गिरफ्तार भी किया है। पटना के डीएम चंद्रशेखर के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए उपद्रवियों के मोबाइल की जाँच करने पर कुछ कोचिंग सेंटरों के वीडियो फुटेज और मैसेज मिले हैं। इसी कारण से अब इस हिंसा को लेकर कोचिंग सेंटरों पर शक गहरा गया है।

‘दैनिक भास्कर’ की रिपोर्ट के मुताबिक, इस बार युवाओं के विरोध का पैटर्न जरूर बदला है, लेकिन पटना के कोचिंग हब कहे जाने वाले मछुआ टोली, भखनी पहाड़ी समेत कई अन्य जगहों में जहाँ भी कोचिंग सेंटर हैं, वहीं से इसकी हिंसा की आग फैली है। हालाँकि, RRB NTPC के विरोध प्रदर्शनों से सबक लेकर इस बार विरोध के टेंड्र को बदलकर सतर्कता पर फोकस किया गया है। प्रदर्शनकारी सोशल मीडिया, मैसेज आदि से परहेज कर रहे हैं और वो अब व्हाट्सएप कॉल का सहारा ले रहे हैं। ताकि पुलिस को चकमा दे सकें।

गौरतलब है कि शनिवार (18 जून, 2022) को बिहार में बंद का आह्वान किया गया है। जबकि एक दिन पहले शुक्रवार को हुई हिंसा में रेलवे की 8 बोगियों, 27 रेलवे स्टेशनों और 14 ट्रेनों को आग के हवाले कर दिया गया था।

‘गलत के खिलाफ बोलने का अर्थ BJP से जुड़ना होता है तो अपनी IQ चेक कराओ’: वेंकटेश प्रसाद के ‘स्विंग’ से फिर चित हुए वामपंथी, ‘अग्निपथ’ पर दिया जवाब

अग्निपथ योजना के विरोध में हो रहे प्रदर्शन के दौरान पूर्व भारतीय क्रिकेटर वेंकटेश प्रसाद ने ट्रोलर्स को करारा जवाब दिया है। यह जवाब उन्होंने नूपुर शर्मा के बयान के विरोध में उतरे उपद्रवियों और अग्निपथ योजना में हंगामा कर रहे छात्रों से तुलना में उन्हें टैग करने पर दिया है। इसी के साथ वेंकटेश ने एक बड़े ट्रोल हैंडल को भी आईना दिखाया।

खुद को ट्रोल विरोधी बता कर एकतरफा एजेंडा चलाने वाले टीम साथ ऑफिसियल (@TeamSaath) ने 18 जून 2022 को लिखा, “सचिन तेंदुलकर, अक्षय कुमार और साइना नेहवाल की अपार सफलता के बाद भाजपा सरकार ने अब रवीना टंडन और वेंकटेश प्रसाद को नए उद्धारकर्ता के रूप में पेश किया है।” इसके जवाब में वेंकटेश प्रसाद ने लिखा, “तुम्हारा हैंडल ट्रोल और उत्पीड़न के खिलाफ खुद को बताता है न? माफ़ करें, आपके पास कोई चेहरा नहीं है। अगर गलत के खिलाफ आवाज उठाना भाजपा से जुड़ना होता है तो आपके आईक्यू पर गंभीरता से काम करने की जरूरत है।”

टीपू सुल्तान पार्टी के सोशल मीडिया हेड को भी वेंकटेश प्रसाद ने करारा जवाब दिया है। 17 जून, 2022 को साहिल रिज़वी ने लिखा था, “हेलो वेंकटेश प्रसाद। देख तेरे भाईयों ने पूरे देश को आग के हवाले कर दिया। अब बोलना। अब क्यों तेरे मुँह में दही जम गया ? इसी तरह का सवाल विवादित पत्रकार राना अय्यूब ने भी पूछा था। उनका साथ उनकी विचारधारा के अन्य कई लोगों ने दिया था।

इन ट्रॉल्स के उसी दिन दिए गए जवाब में वेंकटेश प्रसाद ने लिखा, “ट्रेनों और बसों को जलाना विरोध करने का कोई भी तरीका नहीं है। अगर आपको कोई दिक्कत है तो शाँतिपूर्वक प्रदर्शन कीजिए। हिंसा कतई न करें। इस तरह के हिंसक कृत्यों में शामिल सभी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो। अब जो नुपुर और दूसरे लोगों को जान से मारने की धमकी मिली है उस पर जो दही जमाए हो उसे पिघला दो।”

गौरतलब है कि वेंकटेश प्रसाद ने कुछ दिनों पूर्व कर्नाटक के बेलगावी में नूपुर शर्मा के पुतले को फाँसी देने की घटना का विरोध 10 जून 2022 को किया था। तब उन्होंने 21वीं सदी में इसे अविश्वसनीय घटना बताया था। इस ट्वीट के बाद न सिर्फ तमाम वामपंथी बल्कि कई चरमपंथी मानसिकता के लोग आए दिन वेंकटेश प्रसाद को सोशल मीडिया पर ट्रोल कर रहे हैं।