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‘ISIS’ ने अफगानिस्तान के गुरुद्वारे पर किया बमों से हमला: Video में सुनाई दे रही गोलियों की आवाज, 20-25 सिख अब भी फँसे

अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में एक गुरुद्वारे पर आतंकी हमले की खबर है। इस हमले में लगभग 2 लोगों के मारे जाने व कइयों के घायल होने की सूचना है। हमलावर ने अचानक ही गुरुद्वारे में मौजूद लोगों पर अंधाधुंध फायरिंग की। उस दौरान गुरुद्वारे में 20-25 लोग थे। हमला तालिबान के विरोधी आतंकी समूह दाएश/ISIS द्वारा किए जाने की संभावना जताई जा रही है। सुरक्षा बल के तौर पर तालिबानी लड़ाके घटनास्थल पर पहुँचे हैं। घटना आज शनिवार (18 जून 2022) की बताई जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक गुरुद्वारे का नाम कार्ते परवान है। घटना के जारी वीडियो में मौके से धुँआ उठता दिखाई दे रहा है। साथ ही बीच-बीच में गोलियों की तड़तड़ाहट भी सुनाई दे रही है। बताया जा रहा है कि अभी भी 2 हमलावर गुरुद्वारे के अंदर मौजूद हैं। वहीं गुरुद्वारे में 20-25 लोगों के फँसे होने की जानकारी मिल रही है। गुरुद्वारे के अंदर ब्लास्ट होने का भी दावा किया गया है। इसके अलावा जो विस्फोट गुरुद्वारे की नजदीक बनी सड़क पर किए जाने की कबर है।

भाजपा नेता मनजिंदर सिंह सिरसा के मुताबिक, “अब तक गुरुद्वारे से 5 लोगों को निकाला गया है। उसमें से 2 घायल हैं जिन्हे अस्पताल ले जाया गया है। हमले में गार्ड की मौत हो गई है। 3 सिखों का अब तक कोई पता नहीं चल पाया है।”

एक रिपोर्ट के मुतबिक गुरुद्वारा अध्यक्ष गुरनाम सिंह ने हमले की पुष्टि की है। उनके मुताबिक, “बंदूकधारियों के अचानक हमले के बाद कुछ लोग जान बचाने के लिए छिपने लगे।” अभी काबुल में लगभग 150 अफगानी सिख मौजूद बताए जा रहे हैं जो भारत आना चाहते हैं।

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी इस हमले की निंदा की है। उन्होंने कहा है, “गुरुद्वारे कार्ते परवान पर कायराना हमला हर तरह से निंदात्मक है। हम हमले की खबर मिलने के बाद से हर प्रकार से छोटे-छोटे डेवलपमेंट को मॉनिटर करते हैं। हमारी सबसे बड़ी चिंता समुदाय की सुरक्षा है।”

कवर कर रहे पत्रकारों से तालिबान की बदसलूकी

अफगानिस्तान में BBC संवाददाता सिकंदर किरमानी के मुताबिक, “जब हम हमले के पीड़ितों से बात कर रहे थे तब 2 तालिबानियों ने हमारे ऊपर गुस्सा दिखाया। उन्होंने हमसे वीडियो डिलीट करने को कहा। इसी के साथ उन्होंने हमसे आगे की कवरेज के लिए स्थानीय पुलिस से अनुमति लाने को कहा।”

अग्निपथ के विरोध के दौरान बिहार में पुलिस पर फायरिंग, कई जगह आगजनी: सरकार ने आयुसीमा सहित कई छूट का किया ऐलान

राजनीतिक दलों का साथ मिलने के बाद अग्निपथ योजना के नाम पर भड़की हिंसा बुझने का नाम नहीं ले रही है। बिहार में आज शनिवार (18 जून 2022) को प्रदर्शनकारियों द्वारा पुलिस पर 20-25 राउंड फायरिंग की खबर है। वहीं, पुलिस को अपने बचाव में लगभग 100 राउंड से अधिक गोलियाँ चलानी पड़ी।

वहीं बिहार के साथ-साथ यूपी में भी प्रदर्शनकारियों ने कई जगह आगजनी की घटना को अंजाम दिया है। इसको देखते हुए हरियाणा भी सतर्क हो गया है। तीनों राज्यों के कई इलाकों में अगले कुछ दिनों तक के लिए इंटरनेट सेवा को बंद कर दिया गया है।

पटना के मसौढ़ी में तारगेना स्‍टेशन के पास प्रदर्शनकारियों ने स्टेशन में तोड़फोड़ की और पार्किंग में खड़ी गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया। पुलिस ने जब उन्हें रोकने की कोशिश की तो उन पर पत्‍थरबाजी और फायरिंग की गई है। जहानाबाद में एक ट्रक में आग लगाने और मुंगेर में BDO की गाड़ी में तोड़फोड़ करने की खबर सामने आई है।

बता दें कि अग्निपथ योजना के विरोध में आज शनिवार को बिहार बंद का ऐलान किया गया है। इस बंद में भाजपा को छोड़कर बिहार के लगभग सभी राजनीतिक दलों ने अपना समर्थन दिया है। प्रदर्शनकारियों को विशेष रूप से RJD का समर्थन हासिल है। इस कारण बिहार में कई ट्रेनों को रद्द कर दिया गया है।

प्रदर्शन के नाम पर हिंसा कर रहे अराजतक तत्वों द्वारा बिहार के लखीसराय में जनसेवा एक्सप्रेस में आगजनी की घटना को अंजाम दिया गया था। इस घटना में एक 25 वर्षीय यात्री की मौत हो गई है। वहीं, प्रदर्शनकारियों ने बिहार के उप मुख्यमंत्री और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के आवास पर पत्थरबाजी की थी।

वहीं, उत्तर प्रदेश में मिर्जापुर में तोड़फोड़, जौनपुर में आगजनी, चंदौली में रेलवे ट्रैक को जाम करने की खबर है। वहीं, स्थिति को देखते हुए हरियाणा के पलवल और फरीदाबाद सहित कई इलाकों में इंटरनेट सेवा को बंद कर दिया गया है। अन्य राज्यों ने भी हिंसा को देखते हुए सतर्कता बढ़ा दी है।

सरकार ने आरक्षण व छूट का किया ऐलान

अग्निपथ भर्ती योजना को लेकर सरकार ने कुछ छूट का ऐलान किया है। हालाँकि, हिंसा को देखते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के आवास पर आयोजित बैठक में सेना के तीनों अंगों के प्रमुख पहुँचे हैं। थलसेना प्रमुख मनोज पांडे, वायुसेना प्रमुख विवेक राम चौधरी और नौसेना प्रमुख आर हरि कुमार बैठक में भर्ती प्रक्रिया पर चर्चा में शामिल हैं।

इधर गृह मंत्रालय ने घोषणा की है कि अग्निवीरों के लिए CAPFs (केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल) और असम राइफल्स में 10% आरक्षण दिया जाएगा। इसके साथ ही इन दोनों बलों की भर्ती प्रक्रिया में अग्निवीरों को ऊपरी आयु सीमा में 3 वर्ष की छूट दी गई। इस तरह यह आयु सीमा बढ़कर 24 वर्ष हो गई है।

इसके अलावा, अग्निपथ के पहले बैच की भर्ती में अधिकतम आयु सीमा में 5 वर्ष की छूट दी गई है। अग्निपथ के लिए आयु सीमा 17.5 से 21 वर्ष निर्धारित की गई है। वहीं, पहले बैच में 5 वर्ष की छूट देने के साथ ही अधिकतम आयु सीमा 26 वर्ष हो गई है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ऐलान किया है कि अग्निवीरों को रिटायर्डमेंट के बाद सस्ता लोन दिया जाएगा और सरकारी नौकरियों में प्राथमिकता दी जाएगी। सरकार ने उन्हें मंत्रालयों, केंद्रीय बलों, सरकारी कंपनियों, राज्यों की पुलिस सेवा में भी वरीयता देने की बात कही है।

YouTube चैनलों ने उड़ाई अफवाह, छात्रों को भड़काने में लगे मीडिया और ‘लालूवादी’ नेता भी: ‘अग्निपथ’ के विरोध में यूँ ही नहीं जल रहा बिहार

युवाओं में देशप्रेम जगाने और उन्हें अनुशासित बनाने के लिए केंद्र की योजना ‘अग्निपथ’ का सबसे अधिक विरोध बिहार में हो रहा है। 100 से अधिक प्रदर्शनकारी गिरफ्तार हो चुके हैं और 11 ट्रेनों में आग लगा दी गई है। बिहार पुलिस ने छात्रों से कानून अपने हाथों में न लेने की अपील की है। इन हिंसक प्रदर्शनों की मुख्य वजह छात्रों को कुछ नेताओं, मीडिया संस्थानों और सोशल मीडिया मैसेज द्वारा गुमराह होना बताया जा रहा है। इसमें कुछ यूट्यूब चैनलों का नाम सामने आ रहा है।

कोचिंग संस्थानों के नाम पर चल रहे यूट्यूब हैंडलों ने दी हवा

PIB फैक्ट चेक ने ‘सच तक’ नाम के यूट्यूब चैनल के अग्निपथ योजना पर बने एक वीडियो का खंडन किया है। वीडियो में आर्मी भर्ती प्राइवेट एजेंसी के द्वारा होना बताया गया था जिसे PIB ने गलत बताया। इस वीडियो को खुद को ‘सन ऑफ़ बिहार’ कहने वाले मनीष कश्यप ने बनाया है। 2 दिनों के अंदर इस वीडियो पर लगभग देश मिलियन व्यूज आ चुके हैं। वीडियो में युवाओं को उकसाते हुए कहा गया, “सरकार ने देखा कि युवा कुछ कर ही नहीं रहे हैं।’

छात्रों को शिक्षा देने के नाम पर SK झा नाम का यूट्यूब चैनल चला रहे एक अन्य यूट्यूबर इंजीनियर SK झा भी इस योजना के खिलाफ भ्रम फैलते दिखे। उन्होंने इस योजना का कोई माई-बाप न होना बताते हुए कई भ्रामक बातें कहीं। 2 दिनों में इस वीडियो को भी लगभग सवा लाख लोग देख चुके हैं। झा ने वीडियो थंबनेल में ‘ये अन्याय है’ का कैप्शन दिया है।

फ्यूचर टाइम कोचिंग नाम के यूट्यूब हैंडल पर भी इसी प्रकार की बातें हुई हैं। इसे ‘काजल मैम’ कहते सुनाया दीं कि ये स्कीम युवाओं के कैरियर के साथ एक मजाक है। इस चैनल के 1 मिलियन से अधिक सब्सक्राइबर्स हैं और वीडियो पर 2 दिनों में लगभग 25 हजार व्यूज आ चुके हैं। इसी वीडियो के कमेंट में खालिद चौधरी को अडानी-अम्बानी का जिक्र करते दिखाई दिए।

चित्र साभार- यूट्यूब

हम लालूवादी हैं

@harshasherni ने 17 जून को एक वीडियो शेयर किया है। इस वीडियो में एक अधेड़ उम्र का प्रदर्शनकारी खुद को लालूवादी बता रहा है। उसने कहा, “हम छात्र के साथ हैं। छात्र का माँग है कि कानून वापस लो।” हालाँकि पत्रकारों ने किस कानून को वापस लिया जाए वाला सवाल पूछा तो वो प्रदर्शनकारी वहाँ से खिसक गया।

हमें नहीं पता कि हम क्यों विरोध कर रहे

बिहार के ही एक अन्य वीडियो में धरने पर बैठे प्रदर्शनकारी से पत्रकार ने अग्निपथ योजना के बारे में सवाल किया। इस पर प्रदर्शनकारी का जवाब था, “हमको मनीष भैया बोले हैं तब हम आए हैं। हमको कुछ नहीं पता इसके बारे में।”

कृषि कानूनों की तरह अग्निपथ योजना को भी वापस लेना ही होगा: हिंसा के बीच राहुल गाँधी का भड़काऊ बयान, प्रियंका की भी एंट्री

केंद्र सरकार की अग्निपथ योजना के विरोध में देश भर में हो रही हिंसा के बीच अब कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गाँधी की बहन और पार्टी महासचिव प्रियंका गाँधी की भी एंट्री हो गई। उन्होंने पीएम मोदी से इस कानून को वापस लेने की माँग की है। वहीं, राहुल गाँधी ने कहा कि अग्निपथ योजना का भी हाल कृषि कानूनों की तरह होगा।

कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी (Rahul Gandhi) ने शनिवार (18 जून 2022) को एक ट्वीट किया। इस ट्वीट में उन्होंने लिखा, “8 सालों से लगातार भाजपा सरकार ने ‘जय जवान, जय किसान’ के मूल्यों का अपमान किया है। मैंने पहले भी कहा था कि प्रधानमंत्री जी को काले कृषि कानून वापस लेने पड़ेंगे। ठीक उसी तरह उन्हें ‘माफ़ीवीर’ बनकर देश के युवाओं की बात माननी पड़ेगी और ‘अग्निपथ’ को वापस लेना ही पड़ेगा।”

इस योजना को लेकर देश भर में जारी हिंसा के बीच राहुल गाँधी ने जंतर-मंतर पर विरोध का फैसला कर इस आग में घी डालने का काम किया है। कॉन्ग्रेस ने घोषणा की है कि अग्निपथ योजना के खिलाफ पार्टी रविवार (19 जून 2022) को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करेगी। इसमें कई बड़े नेताओं और सांसदों के शामिल होने की बात कही जा रही है।

प्रियंका गाँधी ने कहा कि मोदी सरकार को इस योजना को तुरंत वापस लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि विरोध को देखते हुए 24 घंटे भी नहीं बीते और सरकार को इसमें बदलाव करना करना पड़ा। इसको लेकर उन्होंने ट्वीट किया।

बता दें कि इस योजना को लेकर देश भर में प्रदर्शन हो रहे हैं। वहीं, आंदोलन के लिए युवाओं को भड़काने का आरोप राजनीतिक दलों पर भी लग रहे हैं। वहीं, इसमें कोचिंग माफियाओं की बात सामने आ रही है। विरोध प्रदर्शन के नाम पर हो रही हिंसा में देश विरोधी तत्व फायदा उठा रहे हैं।

इस बीच केंद्र सरकार ने ‘अग्निवीरों’ को केंद्रीय सशस्त्र बलों एवं असम राइफल्स में 10% आरक्षण देने का फैसला किया है। इसके साथ ही इस बार अभ्यर्थियों की आयु सीमा में भी छूट दी गई है। 23 वर्ष तक के अभ्यर्थी सेना में आवेदन कर सकेंगे। पहले बैच के लिए आयु में अधिकतम आयु सीमा में 5 वर्ष की छूट होगी। 

ज्ञानवापी हिंदुओं की, वहाँ जबरदस्ती पढ़ी जा रही नमाज: बोले अधिवक्ता जैन- कुव्वत उल इस्लाम मस्जिद का मतलब इस्लाम की ताकत

वाराणसी के ज्ञानवापी विवादित ढाँचे (Gyanvapi Controversial Structure, Varanasi) सहित हिंदुओं के दर्जनों के केस लड़ चुके वकील हरिशंकर जैन ने कहा कि जिस पूजा स्थल कानून के आधार पर मुस्लिम सुनवाई रोकने की माँग कर रहे हैं, वहीं हिंदुओं की जीत का आधार बनेगा।

उन्होंने कहा कि विवादित परिसर में शिवलिंग का मिलना इस बात को स्पष्ट करता है कि वहाँ पहले मंदिर था और उसे तोड़कर मस्जिद बनाई गई है। इसलिए इस मस्जिद को गिराई जानी चाहिए और मंदिर हिंदुओं को सौंप दिया जाना चाहिए।

हरिशंकर जैन ने कहा कि तहखाने के बीचों-बीच आदि विश्वेश्वर का स्थान है और शिवलिंग पहले यहीं स्थापित था। उन्होंने कहा कि मस्जिद अब भी पुराने मंदिर की नींव पर खड़ा है। उन्होंने कहा कि मंदिर को तोड़कर उस पर जबरदस्ती कब्जा किया गया और उसके बाद वहाँ नमाज पढ़ी जाने लगी।

उन्होंने कहा कि विवादित ढाँचा परिसर की वीडियोग्राफी हो चुकी है। इसी बहाने पर शिवलिंग की भी वैज्ञानिक जाँच हो जाएगी और जो लोग इस पर सवाल खड़ा कर रहे हैं, उनकी भी जुबान बंद हो जाएगी।

69 वर्षीय हरिशंकर जैन 1989 से हिंदुओं का केस बिना फीस लिए लड़ रहे हैं। पिछले 33 सालों में वे 110 केस लड़ चुके हैं। इनमें ज्ञानवापी, कुतुब मीनार, ताजमहल, मथुरा, टीले वाली मस्जिद और भोजशाला सहित 7 बड़े केस शामिल हैं। उनका साथ उनके अधिवक्ता बेटे विष्णु जैन देते हैं।

उन्होंने कहा कि देश में जहाँ-जहाँ मंदिर तोड़े गए हैं और जिसके प्रमाण हैं, उनकी वे लड़ाई लड़ेंगे। दैनिक भास्कर से बातचीत में हरिशंकर जैन ने कहा कि जिस मामले में पुख्ता प्रमाण मौजूद नहीं हैं, उसकी लड़ाई वे नहीं लड़ते हैं। 

दिल्ली के कुतुब मीनार मामले में वकील जैन ने कहा कि यहाँ 27 हिंदू-जैन मंदिरों को तोड़कर उनके मलबे से मस्जिद का निर्माण किया गया है। इसे कुव्वत-उल-इस्लाम नाम दिया गया, यानी इस्लाम की ताकत।

उन्होंने कहा कि वह मस्जिद नहीं, इस्लाम की ताकत का प्रतीक है कि देखो हिंदुओं हम तुम्हारे मंदिर तोड़ सकते हैं। इस बात के प्रमाण उपलब्ध हैं कि इस मस्जिद को 27 मंदिरों को तोड़ने के बाद बनवाया गया है।

हरिशंकर जैन ने कहा कि हिंदुओं के लिए सारे केस वे अपने खर्चे पर लड़ते हैं। उनकी कमाई का आधा लिटिगेशन में ही चला जाता है। जैन का कहना है कि उनके पीछे न कोई संगठन है और न ही वे किसी से चंदा लेते हैं। वे अपनी सुरक्षा की भी माँग नहीं करते, क्योंकि यह एक तरह का स्टेटस सिंबल है। उन्हें यह पसंद नहीं है।

‘8 साल की बच्ची का मंदिर में रेप, ब्राह्मण पंडित ने खेलते हुए किया था किडनैप’ – ओसवाल बुक्स ने छापा विवादित पेपर, FIR की माँग

देश की तमाम प्रतिष्ठिति परीक्षाओं की तैयारियों के लिए किताबें छापने वाला आगरा स्थित प्रकाशन ‘ओसवाल बुक्स’ विवादों में घिर गया है। यह विवाद उसके द्वारा CLAT परीक्षा के मॉक टेस्ट के लिए छापे गए पेपर में एक प्रश्न पर खड़ा हुआ है। इस प्रश्न में ओसवाल बुक्स ने ब्राह्मणों को रेपिस्ट के तौर पर दिखाने का प्रयास किया है।

साथ ही इसी CLAT परीक्षा के मॉक टेस्ट पेपर में मंदिरों को दुष्कर्म का स्थान बताया गया है। विवाद बढ़ने के बाद ओसवाल बुक्स ने 16 जून 2022 (गुरुवार) को माफ़ी माँगी है। इस प्रकाशन के खिलाफ हालाँकि कार्रवाई की माँग जोर पकड़ रही है।

सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता शशांक शेखर झा ने इस विवादित पेपर को शेयर किया है। इसमें सवाल संख्या 84 में लिखा गया, “अनीता एक 8 साल की बच्ची है। एक दिन वह सड़क पर खेल रही थी। तभी एक ब्राह्मण पंडित वहाँ आया और उसने बच्ची का अपहरण कर के खाली पड़े मंदिर में जा कर उसका रेप किया। बच्ची 2 दिन बाद अधिक खून बह जाने के चलते बेसुध और गंभीर अवस्था में मिली। अनीता के लिए मुआवजे का दावा कौन करेगा?”

मॉक पेपर- चित्र साभार – शशांक शेखर झा

अधिवक्ता शशांक शेखर झा ने अपनी शिकायत में आगरा पुलिस को टैग किया है। उन्होंने इस पेपर में लिखे शब्दों से ब्राह्मण समुदाय की भावनाओं को आघात पहुँचने का आरोप लगाते हुए इसे तैयार करने वाले के खिलाफ FIR दर्ज करने की माँग की है। वहीं FIR की माँग पर आगरा पुलिस ने पूरी जानकारी के साथ संबंधित थाने पर सम्पर्क करने के लिए कहा है।

विवाद बढ़ा तो माँगी माफ़ी

ओसवाल बुक्स ने हालाँकि विवाद बढ़ने पर इस पेपर पर माफ़ी माँगी है। अपने माफ़ीनामें में ओसवाल बुक्स ने लिखा, “हम बिना शर्त माफ़ी माँगते हैं। हमारे पेपर से संभवतः कुछ लोगों की भावनाएँ आहत हुई हैं। इस भूल के जिम्मेदार व्यक्ति पर हमने तुरंत एक्शन भी लिया है। हम तत्काल प्रकाशित हुई सभी कॉपियों को वापस मँगवा रहे हैं। साथ इस इस पेपर को सभी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से हटवा रहे हैं। हम सबका सम्मान करते हैं। एक बार फिर से अगर किसी की भावनाएँ आहत हुई हों तो हम उनसे क्षमा माँगते हैं।”

माफीनामा (साभार- शशांक शेखर झा)

गौरतलब है कि ओसवाल बुक्स साल 1984 में नरेश जैन नाम के व्यक्ति द्वारा शुरू की गई थी। वही इसके मैनेजिंग डायरेक्टर भी हैं। यहाँ से CBSE, ISC, ICSE और कर्नाटक बोर्ड की पुस्तकों का प्रकाशन होता है। इसी के साथ ओसवाल बुक्स JEE, NEET, RRB-NTPC, CAT और CLAT जैसे राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं की किताबें छापता है।

माँ का आशीर्वाद ले PM मोदी लहराएँगे 500 साल बाद उस मंदिर पर पताका, जिसे मुस्लिम आक्रांता महमूद बेगड़ा ने तोड़ दिया था

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने अपनी माँ हीराबेन के 100वें जन्मदिन पर गुजरात में उनके पैर पखारकर आशीर्वाद लिया। उन्होंने अपनी माँ की पूजा-अर्चना की और शॉल देकर सम्मानित किया। इसके साथ ही पीएम मोदी ने अपनी माँ का मुँह भी मीठा कराया।

पीएम मोदी माँ का चरण पखारते वक्त उनसे बातें करते रहे। चरण पखारने के बाद उस चरणामृत को अपने माथे और आँखों से लगाकर आशीर्वाद लिया। अपनी माँ का आशीर्वाद लेने के बाद पीएम मोदी प्राचीन महाकाली माता मंदिर में आज (शनिवार, 18 जून 2022) पूजा-अर्चना भी करेंगे। इस मंदिर के शिखर पर 500 साल बाद ध्वज को लहराया जाएगा।

माता महाकाली का यह मंदिर पंचमहल जिले के पावागढ़ पर्वत पर स्थित है। इस मंदिर पर पहुँचने के लिए रोप-वे का सहारा लेना पड़ता है। इसके साथ ही 250 सीढ़ियाँ पर चढ़नी पड़ती है। इस मंदिर में नवीनीकरण कर लिफ्ट भी लगाई गई है, ताकि दिव्यांग भी माता का दर्शन कर सकें। यह मंदिर चम्पानेर-पावागढ़ पुरातात्विक पार्क का हिस्सा है, जो यूनेस्को की विश्व विरासत सूची में शामिल है।

इसके साथ ही इस मंदिर में स्थित एक दरगाह को हटा दिया गया है। मंदिर के ऊपर बने इस दरगाह को उसकी देखरेख करने वाले खादिमों की सहमति से स्थानांतरित किया गया है। बता दें कि इस मंदिर का इतिहास बेहद पुराना है। अन्य मंदिरों की भाँति इसे भी मुस्लिम आक्रांताओं की क्रूरता का सामना करना पड़ा था।

मंदिर को मुस्लिम आक्रांता महमूद बेगड़ा ने तोड़ा था

500 साल पहले 1540 ईस्वी में मुस्लिम आक्रांता सुल्तान महमूद बेगड़ा ने गुजरात पर हमला किया था। उसने चम्पानेर पर हमले के दौरान इस मंदिर में भी लूटपाट और तोड़फोड़ की थी। बेगड़ा ने माता काली के इस प्राचीन मंदिर के शिखर को ध्वस्त कर दिया था।

मंदिर के शिखर को ध्वस्त करने के बाद उसके ऊपर पीर सदन शाह (कहीं-कहीं अदान शाह का जिक्र भी है) नाम का एक दरगाह बना दी गई थी। दरगाह होने के कारण मंदिर का शिखर नहीं था। इस कारण इस पर पिछले 500 सालों से पताका नहीं फहराया गया था। अब दरगाह को हटा दिया गया है और शिखर का निर्माण कार्य भी पूरा कर लिया गया है।

कहा जाता है सदन शाह एक हिंदू थे और उनका असली नाम सहदेव जोशी था। महमूद के आक्रमण के दौरान उन्होंने इस्लाम अपना लिया था और अपना नाम सहदेव शाह से बदलकर सदन शाह कर लिया था। बाद उन्हीं दरगाह मंदिर के ऊपर बना दी गई।

मंदिर का इतिहास

माना जाता है कि सप्तर्षियों में से एक और गायत्री मंत्र की रचना करने वाले राजर्षि विश्वामित्र ने पावगढ़ में घोर तपस्या की थी। इस दौरान सिद्धियों के लिए उन्होंने माता काली की प्रतिमा स्थापित कर उसमें प्राण प्रतिष्ठा की थी।

देवी पुराण के अनुसार, प्रजापति दक्ष के यज्ञ कुंड में सती के प्राण त्यागने के बाद भगवान शंकर ने उनके मृत शरीर को लेकर तांडव किया था। भगवान शंकर के क्रोध को कम करने के लिए भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से माता के शरीर को खंडित कर दिया था। कहा जाता है माता सती का यहाँ स्तन गिरा था। इसलिए यह बेहद पवित्र शक्तिपीठ है।

यह मंदिर त्रेता युग का है। जिस दौरान इस मंदिर की स्थापना हुई, उस समय अयोध्या और भारत भूमि पर भगवान राम का राज्य था। यह भी कहा जाता है भगवान राम के दोनों पुत्र लव और कुश ने यहाँ आकर मोक्ष प्राप्त किया था। इसके अलावा, कई जैन और बौद्ध संतों ने भी यहाँ आकर तप-ध्यान के बाद मोक्ष हासिल किया।

इस मंदिर का वर्णन यूनान के प्रसिद्ध भूगोलशास्त्री तोलेमी ने भी किया है। तोलेमी ने साल 140 में भारत और पावागढ़ की यात्रा की थी। उसने इस मंदिर को अति प्राचीन और बेहद पवित्र बताया है। इस मंदिर का शत्रुंजय मंदिर भी कहा जाता है। यहाँ बहने वाली नदी को विश्वामित्री कहा जाता है।

हमले से पूर्व मंदिर की संरचना 11वीं सदी की बताई जाती है। यह भी कहा जाता है कि इस मंदिर का पुनर्निर्माण कनकाकृति महाराज दिगंबर भद्रक ने कराया था। उन्होंने इस मंदिर को कई कलाकृतियों से भी सजाया था।

‘सशस्त्र बल मनरेगा जैसी रोजगार योजना नहीं’: इन 7 कारणों से समझिए अग्निपथ योजना के फायदे, वैज्ञानिक आनंद रंगनाथन ने बताया देश के लिए जरूरी

भारत सरकार की अग्निपथ योजना के खिलाफ हो रहे हिंसक विरोधों के बीच वैज्ञानिक और राजनीतिक टिप्पणीकार आनंद रंगनाथन ने अग्निपथ योजना के फायदे बताए हैं। उन्होंने गुरुवार (16 जून) को टाइम्स नाउ पर एक डिबेट के दौरान सेना भर्ती योजना अग्निपथ का समर्थन करने के 7 कारण गिनाए। इसके साथ ही उन्होंने दावा किया कि अग्निपथ योजना को इंडियन आर्म्ड फोर्सेज के तीनों विंग का स्पष्ट समर्थन हासिल है।

उन्होंने कहा, “दशकों से सरकारों या मैं एक भी ऐसे उदाहरण के बारे में सोच सका, जब हमारे चीफ ने जानबूझकर ऐसा कोई निर्णय लिया हो, जो न केवल सशस्त्र बलों, बल्कि राष्ट्र के हित में हो। अगर वे इस योजना का समर्थन कर रहे हैं तो वे इस पर एक साथ मिलकर सभी संभावित बाधाओं को दूर करेंगे।”

पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत का हवाला देते हुए आनंद रंगनाथन ने जोर देकर कहा कि आर्म्ड फोर्सेज कोई रोजगार योजना नहीं हैं। उन्होंने कहा, “वे मनरेगा नहीं हैं। मुझे अफ़सोस है। असल में उन्हें होना चाहिए। वे सबसे ताकतवर फोर्सेज और स्थान हैं, जहाँ प्रवेश पाना कठिन है।”

आनंद रंगनाथन कहते हैं, “इसमें केवल सर्वश्रेष्ठ को चुना जाना चाहिए और एक बार जब वे सेलेक्ट हो जाते हैं, तो उन्हें नियमित रूप से टेस्ट लिया जाना चाहिए, ताकि वे बेस्ट बने रहें। अगर हमारी सेना को लगता है कि मेरिट आधारित कंपटीशन के कई दौर होने चाहिए तो हर तरह से इस नीति को लागू करने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।”

तीसरा आनंद रंगनाथन ने बताया कि इस तरह की भर्ती प्रक्रिया को अपनाने वाला भारत कोई अपवाद नहीं है, बल्कि इस तरह की भर्ती योजनाएँ चीन, रूस, फ़्रांस और अमेरिका में भी प्रचलित हैं।

अग्निपथ योजना के लाभ

जब भी देश पर कोई बाहरी आक्रमण होता है तो सशस्त्र बल ही होते हैं, जिनपर देश का भाग्य निर्भर करता है। आनंद रंगनाथन ने देश में युवा और फिट सेना की आवश्यकता पर जोर दिया। राजनीतिक टिप्पणीकार ने पूछा, “यूपीएससी और आईआईटी में बहु-स्तरीय चयन प्रक्रिया है। तो सेना में क्यों नहीं।”

अग्निपथ योजना की विशेषताओं का जिक्र करते हुए रंगनाथन कहते हैं, “4 साल की सेवा के बाद आपके पास मेरिट होती है औऱ इसके अंत में आप 10 लाख रुपए से अधिक जमा करते हैं। इसके बाद आपको डिफेंस फोर्सेज में शामिल होने के लिए भी मौका मिलता है।” रंगनाथन के मुताबिक, “जो लोग इस दूसरे चरण में सफल नहीं होते हैं, वे डिग्री, 10 लाख रुपए और इतनी कम उम्र में देश की सेवा करने, अनुशासन और राष्ट्रीय सेवा के मूल्यों के शानदार सर्टिफिकेट के साथ बाहर आते हैं।”

रंगनाथन ने बताया कि किस तरह से कई राज्य अब अग्निवीरों को पुलिस फोर्स, पैरा मिलिट्री फोर्स और दूसरी एजेंसियों में शामिल करने के बारे में सोच रहे हैं। उन्होंने कहा, “मैं 21 साल के बच्चे के सीवी को इससे बेहतर तरीके से लेने के बारे में नहीं सोच सकता।?”

अग्निपथ योजना की निंदा करने वालों के दावों की निकाली हवा

पॉलिटिकल कमेंटेटर ने छठा फायदा गिनाते हुए उन दावों और आशंकाओं को खारिज किया कि अंडरवर्ल्ड और आतंकवादी संगठन रिटायर होने के बाद अग्निवीरों को अपने संगठन में भर्ती करेंगे। उन्होंने जोर देकर कहा, “मुझे खेद है, लेकिन यह हास्यास्पद है। यह कहना उतना ही हास्यास्पद है कि एक बार ओलंपिक बॉक्सिंग या शॉट पुट के लिए राष्ट्रीय टीम के लिए खारिज कर दिए जाने के बाद 10 और 1000 के मुक्केबाजों और शॉट पुटरों को पत्थरबाजों और ठगों के गुट में भर्ती किया जाएगा।”

इसके साथ ही आनंद रंगनाथन ने अपने दर्शकों से आग्रह किया कि वो उन लोगों का आँख बंद अनुसरण न करें, जिनकी भारतीय प्रधानमंत्री के प्रति घृणा ने उन्हें गरीबों के लिए शौचालय का विरोध करने के लिए मजबूर कर दिया था। उन्होंने आगे कहा, “हमने देखा है कि कैसे यह सरकार बार-बार बड़ी योजनाएँ और नीतियाँ लाती है, लेकिन विपक्ष के उकसाने और सड़क पर हिंसा के कारण उसे जल्दी ही पीछे हटना पड़ता है। कृषि कानून इसका ज्वलंत उदाहरण है। कौन जानता है कि यह सरकार इस योजना को भी वापस ले सकती है, जो अफ़सोस की बात होगी।”

विवाहिता की ससुराल में अजलम नदाफ करता था फोन… मना करने पर भीड़ के साथ घर पर किया हमला… मॉब लिंचिंग में धरम कुमार की मौत

बिहार के दरभंगा में एक हिन्दू लड़की को बेवजह फोन और मैसेज करने से मना करने पर एक नाबालिग लड़के की हत्या कर दी गई है। घटना का मुख्य आरोपित अज़लम नदाफ है। हत्या पीट-पीट कर की गई है, जिसमें अज़लम के परिवार की महिलाएँ भी शामिल थीं। घटना के बाद आरोपित के घर में संदिग्ध हालातों में आग लग गई। पुलिस ने दर्जन भर लोगों को गिरफ्तार किया है। घटना बुधवार (15 जून 2022) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना घनश्यामपुर थानाक्षेत्र के गाँव घनश्यामपुर बदिया टोला की है। यहाँ पर अज़लम नदाफ एक विवाहिता के पति और सास ससुर को फोन करता था। इस दौरान वो उल्टी-सीधी बातें किया करता था। इस से परेशान हो कर विवाहिता के पति ने अपने ससुर को इसकी जानकारी दी। अजलम नदाफ विवाहिता के गाँव का ही रहने वाला है। विवाहिता के मायके वालों ने अज़लम से ऐसा न करने को कहा।

इस बात से नाराज होकर अजलम अपने परिवार वालों और अन्य लोगों की भीड़ लेकर आया। उसने अपने साथ आई भीड़ के साथ मिलकर खुद को मना करने वाले विवाहित के परिजनों पर हमला बोल दिया। हमलावरों में अजलम के साथ मुस्लिम नदाफ, नजीर, अली अकबर, मुन्नी खातून, छोटे, सोबारा, शकीला, असलम, जुलेखा और मोहम्मद रहमतुल्लाह आदि शामिल थे। इनके पास बाँस और लाठी-डंडे थे। इस अप्रत्याशित हमले में विवाहिता पक्ष के सूरज, धर्म कुमार और इंदल कुमार घायल हो गए।

बाद में सभी घायलों को अस्पताल ले जाया गया जहाँ धरम कुमार ने दम तोड़ दिया। मृतक विवाहिता का मामा था। वहीं, सूरज और इंदल का अभी इलाज चल रहा है। गुरुवार को मृतक धरम का शव पोस्टमार्टम के बाद गाँव आया। शव देखते ही ग्रामीण भड़क गए और उन्होंने थाने के आगे प्रदर्शन करना शुरू कर दिया। ग्रामीण मृतक के परिजन को सरकारी नौकरी और मुआवजे की माँग कर रहे थे। इसी बीच मुख्य आरोपित के घर में आग लगने की सूचना आई। इस सूचना पर भारी पुलिस बल गाँव में पहुँचा। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया और भीड़ को तितर-बितर किया।

किसी अप्रिय घटना को रोकने के लिए गाँव में पुलिस तैनात कर दी गई है। दरभंगा के एडिशनल SP अवकाश कुमार के मुताबिक, “इस मामले में कुल 25 नामजद और 25 अज्ञात आरोपितों पर केस FIR दर्ज हुई है। एक दर्जन लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है और बाकी आरोपितों की तलाश में पुलिस टीमें भेजी गई हैं। आरोपित अजलम के घर में आग लगने के भी कारणों की जाँच करवाई जा रही है। हालात पूरी तरह से काबू में है।”

विवाहिता के मामा ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “मेरी भगिनी (भाँजी) के साथ अजलम की 2 महीने से बातचीत हो रही थी। 1 महीने पहले हमने अपनी भाँजी को समझाया तो वो मान गई थी। 9 जून को मेरी भाँजी की शादी थी। उसी शादी में अजलम ने मेरी भाँजी की फोटो खींच कर अपने मोबाईल में सेट कर लिया था। लड़की की गलती यही थी कि उसने अपनी ससुराल के फोन से उसको समझाया। इसी के चलते अजलम ने वो नंबर सेव कर लिया। लड़की को धमकी दी गई थी कि अगर वो बात नहीं करेगी तो उसको मार दिया जाएगा। हमने ऐसा करने से मना किया तो उसने कहा कि जो करना हो कर लेना। इस बात पर मैंने उसका फोन लेकर चेक किया तो उसके मोबाईल में मेरे घर के कई नंबर मिले। तब हमने उसकी माँ को बुलाने की बात कही।”

विवाहिता के परिजन ने आगे कहा, “इस आपाधापी में अजलम मेरे भांजे को 2 थप्पड़ मार कर भाग गया। बाद में वो अपने साथ 15-20 लोगों की भीड़ को लेकर आया। उसके साथ उसका पूरा परिवार था। आते ही मेरे भाँजे पर लाठी चलाया। घर में से खींच कर सबको मारा गया। फिर मेरे भाई ने उसको बचाने का प्रयास किया तो उसको पीछे से सिर पर बुरी तरह मारा गया। उसकी गर्दन को तोड़ दिया गया और सिर अंदर से कीमा बन गया।”

CAA-NRC, किसान आंदोलन, हिजाब, पैगंबर… जैसे हिंसक विरोध-प्रदर्शन से देश को हुआ ₹5040469 करोड़ का नुकसान: GPI की रिपोर्ट में खुलासा

देश में लगातार होते प्रदर्शनों और हिंसा (Violence) की घटनाओं के कारण देश को आर्थिक तौर पर कड़ी चोट पहुँची है। इसका खुलासा ग्लोबल पीस इंडेक्स (GPI) की रिपोर्ट में किया है। संस्था ने खुलासा किया है कि हिंसा की घटनाओं के कारण भारत को पिछले साल करीब $646 अरब डॉलर (करीब 50 लाख करोड़ रुपए) का नुकसान हुआ है।

भारत 163 देशों की सूची में 135वें स्थान है, जबकि पाकिस्तान और चीन क्रमश: 54 और 138वें स्थान पर काबिज हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, देश में सीएए-एनआरसी समेत कई अन्य तरह की हिंसक घटनाओं में बड़े पैमाने पर आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। इन पैसों से देश के लिए कई तरह की कल्याणकारी योजनाओं को संचालित किया जा सकता था।

ग्लोबल पीस इंडेक्स के मुताबिक, करीब हिंसा के कारण देश को जो नुकसान झेलना पड़ा है वो भारत के कुल जीडीपी का 6% है। हालाँकि, ये कोई एक साल की रिपोर्ट नहीं है। जीपीआई ने अपनी रिपोर्ट में में दावा किया है कि बीते कुछ सालों में हुए आतंकी और नक्सली हमले भी इसके लिए जिम्मेदार हैं।

वैश्विक शांति सूचकांक में भारत 72वें स्थान पर है। उल्लेखनीय है कि वैश्विक शांति सूचकांक-2022 की रिपोर्ट में आइसलैंड दुनिया का सबसे शांत देश रहा है। वहीं, शांति के मामले में दूसरे स्थान पर न्यूजीलैंड और तीसरे स्थान पर आयरलैंड हैं।

इन देशों की हालत सबसे बुरी

अगर दुनिया के सबसे अशांत देशों की बात की जाए तो जीपीआई के सूचकांक में अफगानिस्तान सबसे टॉप पर है। इसके बाद आतंकवाद ग्रस्त यमन और सीरिया हैं। खास बात है कि दुनिया के हिंसाग्रस्त देशों की संख्या भी अब बढ़कर 29 से 38 हो गई है।

रिपोर्ट के मुताबिक, अफ्रीका महाद्वीप के बाद एशिया दुनिया का सबसे अशांत क्षेत्र है। वहीं, अगर हिंसा के वैश्विक नुकसान को देखें तो इसके कारण दुनिया भर में 16.5 ट्रलियन डॉलर (1,300 लाख करोड़ रुपए) का नुकसान झेलना पड़ा है।